July 24, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / चार धाम में श्रद्धालुओं के दर्शन का समय बढ़ाया जाएगा। अब मंदिर में दर्शन दोपहर 12 बजे की बजाय तीन बजे तक किए जाने का निर्णय उत्तराखंड चार धाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड लेने जा रहा है।

    चार धाम आने वाले श्रद्धालुओं के लिए रियायतें बढ़ाए जाने और नियमों को सरल किए जाने के बाद अब संख्या बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में सामाजिक दूरी के तय मानक का पालन सुनिश्चित कराने को पूजा का समय बढ़ाने की तैयारी है। उत्तरखंड चार धाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड फिलहाल अभी प्रतिदिन आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ाने पर विचार नहीं कर रहा है। हर धाम के प्रतिदिन आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या का जो मानक है, वो फिलहाल पूर्व की तरह ही रहेगा। श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने पर पूजा का समय बढ़ाने के साथ ही सामाजिक दूरी के गोलों की संख्या बढ़ाई जाएगी। ताकि अधिक से अधिक लोगों को दर्शन का मौका मिल सके।

    श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने पर सामाजिक दूरी का पालन सुनिश्चित कराने को दर्शन का समय 12 बजे से बढ़ा कर तीन बजे किए जाने पर विचार किया जा रहा है। जल्द इस पर फैसला होगा। अभी श्रद्धालुओं की तय संख्या को नहीं बढ़ाया जा रहा है। क्योंकि अभी तय श्रद्धालुओं से भी कम संख्या में लोग आ रहे हैं। रियायतें बढ़ने के बाद अब हेली सेवाओं से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भी इजाफा होगा। - रविनाथ रमन, सीईओ उत्तराखंड चार धाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड

    चार धाम यात्रा मानक

    श्रद्धालुओं को बोर्ड की वेबसाइट www.badrinath-kearnath.gov.in पर पंजीकरण कराना होगा।
    बिना पंजीकरण के आने वालों को धामों में दर्शन की मंजूरी नहीं है।
    पंजीकरण के दौरान फोटो आईडी, एड्रेस प्रूफ का दस्तावेज अपलोड करना होगा।
    पूरी यात्रा के दौरान मूल दस्तावेज के रूप में वही फोटो आईडी, एड्रेस प्रूफ दिखाना होगा, जो वेबसाइट में अपलोड किया गया है।
    श्रद्धालुओं की निर्धारित जांच केंद्रों पर थर्मल स्क्रीनिंग होगी।
    जांच केंद्र में स्क्रीनिंग के दौरान यदि कोविड 19 के लक्षण पाए जाते हैं। तो उन्हें यात्रा की अनुमति नहीं होगी।
    ऐसी स्थिति में कोविड निगेटिव आने के बाद ही यात्रा की अनुमति दी जाएगी।
    हेलीकॉप्टर से आने वाले श्रद्धालुओं को वेबसाइट पर पंजीकरण अनिवार्य नहीं।
    प्रतिदिन आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या
    बदरीनाथ -1200
    केदारनाथ - 800
    गंगोत्री - 600
    यमुनोत्री - 400

    भिलाई। शौर्यपथ । नवीन कॉलेज खुर्सीपार में पढ़ने वाले छात्रों और यहां के स्टाफ को भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव जल्द ही एक बड़ी सौगात देने वाले हैं। 4 करोड़ 27 लाख की लागत से कॉलेज का खुद का भवन बनाया जाएगा। जहां पर्याप्त क्लास रूम, प्राचार्य रूम, एसेंबली हॉल सहित अन्य सभी प्रकार की सुविधाएं बनाई जाएगी। करीब ढाई एकड़ जमीन में कॉलेज का खुद का नया भवन का निर्माण होगा। इससे कॉलेज स्टाफ में काफी हर्ष का माहौल है। गौरतलब है कि बीते करीब 4 साल से नवीन कॉलेज खुर्सीपार बीएसपी के स्कूल भवन में संचालित किया जा रहा है। लंबे समय से कॉलेज के खुद के भवन की मांग की जा रही है। लेकिन पहले जो नेता थे। उन्होंने इस ओर ध्यान नहीं दिया। लेकिन भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव ने खुर्सीपार क्षेत्र के विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने के साथ ही खुर्सीपार के इस नवीन कालेज को बेहतर बनाने के प्रयास में लगातार जुटे रहे और शासन से ढाई एकड़ जमीन स्वीकृत कराई है। साथ ही अब शासन ने 4 करोड़ 27 लाख रुपए भी कॉलेज के भवन निर्माण के लिए स्वीकृति कर दी है। 2 अक्टूबर को सीएम करेंगे भूमिपूजन 2 अक्टूबर को सीएम भूपेश बघेल जी भिलाई निगम आएंगे। जहां करोड़ों के विकास कार्यों का लोकार्पण व भूमिपूजन होगा। इस अवसर पर सीएम और मंत्रियों के हाथों से नवीन कॉलेज खुर्सीपार के नए भवन निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया जाएगा। इसके बाद जल्द ही टेंडर जारी कर भवन निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। दो फ्लोर का होगा कालेज भवन कॉलेज का नया भवन दो फ्लोर का होगा। पहल ग्राउंड फ्लोर में 8 क्लास रूम,1 प्रार्याय रूम, ऑफिस, स्टूडेंट्स सेशन 2 रूम, वाइस प्रिसिपल 1 रूम, स्टाफ रूम 1, स्टोर रूम 1, ग्राउंड और फस्ट फ्लोर दोनों में बालक, बालिका अलग-अलग शौचालय होगा। इसके साथ ही फस्ट फ्लोर में 8 क्लास रूम, बैयलेंस रूम, स्टोर रूम, दो रैम भी बनाएं जाएंगे। यह होगी सुविधा विधायक देवेंद्र यादव की पहल से बेहतर शिक्षा और शोध के लिए काॅलेज के स्टूडेंट्स के लिए कॉलेज में लैब, कम्प्यूटर रूम अलग होगा। फिजिक्स, कैमेस्ट्री का लैब नीचे होगा और फस्ट फ्लोर में लाइब्रेरी, जीओलॉजी लैब, बॉटनी लैब, जूलाजी लैब जैसे कई सुविधाएं होंगी।

    धर्म संसार /शौर्यपथ /ज्योतिष शास्त्र में वैदिक गणित के साथ-साथ फलादेश की कई विधाएं हैं। जैसे शकुन-अपशकुन विज्ञान, छींक और स्वर संचालन आदि। ऐसे ही कुछ संकेत हमारे जीवन में मिलते हैं जिनसे यह पता लगा सकते हैं कि हमारे साथ क्या होने जा रहा है। ज्योतिषाचार्य पं.शिवकुमार शर्मा से जानिए ऐसे संकेतों के बारे में जिनसे पता चल सकता है कि आने वाला समय अच्छा नहीं है।

    -यदि कोई नई वस्तु घर में आते ही टूट जाए, खंडित हो जाए या खराब हो जाए तो समझो कि भाग्य साथ नहीं है।
    -यदि रसोई में बार-बार दूध उफनकर नीचे चल जाए या तेल,घी आदि बिखर जाए तो मानना चाहिए कि अभी भाग्य साथ नहीं दे रहा।
    -पूजा करते समय कुत्तों के भौंकने या तेज लड़ाई की आवाज आए तो यह भी अच्छा संकेत नहीं है।
    - यदि घर में मकड़ियों के जाले लगे हों और मंदिर गंदा रहता हो तो यह शुभ संकेत नहीं है।
    -पूजा करते समय दीपक में घी होने पर तथा तेज हवा न होने पर भी दीपक अचानक बुझ जाए तो यह अच्छा संकेत नहीं है।
    -नया वस्त्र पहनते ही फट जाए या किसी कोने में उलझ जाए यह भी शुभ संकेत नहीं है।
    -यदि घर से निकलते ही पैरों में ठोकर लग जाए,चप्पल टूट जाए, यह जूता फट जाए तो यह शुभ शकुन नहीं है।
    -घर का मुख्य दरवाजा या छत हमेशा गंदी रहती हो या छत पर कबाड़ पड़ा हो इससे राहु अप्रसन्न होकर दुर्भाग्य लाते हैं।
    -नवरात्रों के समय जौ बोए जाते हैं। यदि सारे जौ एकसाथ होकर सुनहरे रंग के निकले तो भाग्य साथ देता है। यदि ज्वारे पूरे ना निकले या चार-पांच दिन बाद निकले तो समझो भाग्य में अवरोध है।
    -रुपयों को थूक लगाकर गिनना लक्ष्मी हानि के संकेत हैं।
    -यदि चारपाई या बेड पर अचानक खटमल हो जाएं समझो कि दुर्भाग्य दस्तक देने जा रहा है।
    -रात्रि के समय रसोई में जूठे बर्तन रखे हो,उनकी साफ-सफाई ना हो। सामान अस्त-व्यस्त हो तो वहां भी दुर्भाग्य को दस्तक देने में देर नहीं लगती।
    -जिस घर में गंदगी रहती हो, किसी कोने में बदबू आती हो, प्लास्टर चटक गया हो या सीलन आ गई हो तो यह भी अच्छे संकेत नहीं होते हैं।

    लाइफस्टाइल /शौर्यपथ / सोशल मीडिया पर ‘घोस्ट चैलेंज’ तेजी से वायरल हो रहा है। बड़ी संख्या में किशोर भूत की वेशभूषा में रिकॉर्ड किए गए वीडियो ट्विटर, इंस्टाग्राम और टिकटॉक पर साझा कर रहे हैं। हालांकि, दुनियाभर में अश्वेतों को समान अधिकार देने की मांग को लेकर जारी ‘ब्लैक लाइव्स मैटर’ आंदोलन के मद्देनजर आलोचकों ने ‘घोस्ट चैलेंज’ पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।
    उन्होंने कहा है कि सफेद चादर में लिपटे किशोर ‘कू क्लक्स क्लान’ की याद दिलाते हैं। ‘कू क्लक्स क्लान’ एक श्वेत दक्षिणपंथी संगठन था, जिसके लड़ाके सफेद चोगे में घूमते थे। वे अश्वेतों की हत्या और उत्पीड़न के लिए कुख्यात थे। 1800 और 1900 के दशक में उनकी दहशत चरम पर थी। अमेरिका में हैलोवीन पार्टी में सफेद पोशाक पहनने का चलन भी ‘कू क्लक्स क्लान’ से समानता के चलते ही बंद हुआ था।
    सफेद चादर की मदद से भूत का भेष धर रहे किशोर
    -‘#घोस्टफोटोशूट’ के तहत जारी वीडियो में किशोर भूत का भेष धरने के लिए सफेद चादर का सहारा ले रहे हैं। वे आंखों को डरावना लुक देने के लिए या तो चादर में दो छेद कर रहे हैं या फिर उस पर काला चश्मा सनग्लास लगाकर मछली पकड़ने वाला जाल ओढ़ रहे हैं। मध्य सितंबर में शुरू हुए इस चैलेंज में प्रतिभागी जैक स्टॉबर का लोकप्रिय गाना ‘ओह-क्लाहोमा’ भी गुनगुनाते दिखते हैं।
    संगठित नस्लभेद का प्रतीक माना जाता है सफेद चोगा
    -वाशिंगटन यूनिवर्सिटी में समाजशास्त्र विभाग के प्रमुख डॉ. डेविड कनिंघम कहते हैं, सफेद चोगे ‘संगठित नस्लभेद’ का प्रतीक माने जाते हैं। इन्हें सभ्य समाज में हमेशा नकारा गया है। 2016 में फ्लोरिडा के एक हाईस्कूल ने फैंसी-ड्रेस प्रतियोगिता में भूत के भेष में पहुंचे तीन छात्रों को सिर्फ इसलिए निष्काषित कर दिया था क्योंकि उन्होंने सफेद चादर से बना चोगा पहन रखा था।
    ट्विटर और टिकटॉक पर कड़ी प्रतिक्रिया दे रहे यूजर
    -अमेरिका पुलिस हिरासत में अश्वेत जॉर्ज फ्लॉयड और ब्रेओना टेलर की मौत के बाद से नस्लभेद विरोधी आंदोलन की आंच में जल रहा है। ऐसे में आलोचकों का कहना है कि साल 2020 ‘घोस्ट चैलेंज’ के लिए उपयुक्त नहीं है। इसके तहत जारी वीडियो पहली नजर में भूत कम और ‘कू क्लक्स क्लान’ लड़ाकों की याद ज्यादा दिलाते हैं। ऐसे वीडियो पोस्ट करने वाले यूजर नस्लभेद विरोधियों के निशाने पर आ सकते हैं।
    नोट-
    -नस्ली/जातीय हिंसा के इतिहास पर व्यापक चर्चा होना बेहद जरूरी है। इसके अभाव में लोग अनजाने में ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिनका समाज पर बुरा असर पड़ता है। ‘घोस्ट चैलेंज’ ऐसी ही एक गलती है। : डॉ. डेविड कनिंघम, समाजशास्त्री, वाशिंगटन यूनिवर्सिटी
    ‘बेनाड्रिल चैलेंज’ से भी सतर्क रहें-
    -अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्राधिकरण ने हाल ही में टिकटॉक को ‘बेनाड्रिल चैलेंज’ से जुड़े वीडियो हटाने का निर्देश दिया है। इस चैलेंज के तहत किशोर-किशोरी ‘मतिभ्रम’ यानी ‘हैलुसिनेशन’ के साइडइफेक्ट महसूस करने के लिए बेहद अधिक मात्रा में बेनाड्रिल का सेवन कर रहे हैं। अमेरिका के टेक्सास में ‘बेनाड्रिल चैलेंज’ में हिस्सा लेने वाले तीन छात्रों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। ओकलाहामा में इस चैलेंज में शामिल एक छात्रा की मौत की खबर भी सामने आई है।
    सिंगल और कपल चैलेंज घातक-
    -गुजरात पुलिस ने फेसबुक और इंस्टाग्राम यूजर को तेजी से वायरल हो रहे ‘कपल चैलेंज’, ‘सिंगल चैलेंज’ और ‘क्यूट डॉटर चैलेंज’ में शामिल न होने की चेतावनी जारी की है। अधिकारियों के मुताबिक ‘#’ के चिह्न के तहत पोस्ट की जाने तस्वीरें सार्वजनिक मंच पर आ जाती हैं। साइबर अपराधी व्यक्ति के निजी और पारिवारिक जीवन से जुड़ी इन तस्वीरें से छेड़छाड़ कर उनका उत्पीड़न कर सकते हैं। अतीत में तस्वीरों में छेड़खानी के बाद ब्लैकमेलिंग के कई मामले सामने आ चुके हैं।

    सेहत /शौर्यपथ /आयरन की कमी और एनीमिया आजकल हर दूसरे व्यक्ति के लिए परेशानी का सबब बन गया है। यह समस्या अधिकतर महिलाओं में ज्यादा देखी जाती है। अगर आपके शरीर में भी हीमोग्लोबिन की कमी है तो रोजाना शाम को डाइट में शामिल करें काले चने की चाट। यह खाने में तो टेस्टी है ही साथ ही पोषण तत्वों से भी भरपूर है। चने में आयरन की मात्रा काफी होती है जो शरीर में खून की कमी को दूर करती है। इतना ही नहीं इसका सेवन करने से कब्ज जैसी समस्या भी छूमंतर हो जाती है। तो देर किस बात की आइए जानते हैं कैसे बनाई जाती है ये हेल्दी चाट रेसिपी।
    काले चने की चाट बनाने की सामग्री-
    - 4-5 घंटे भिगोया हुआ 1 कप काला चना
    -1/4 कप धनिया कटा हुआ
    -हरी मिर्च कटी हुई
    -1 कप प्याज कटी हुई
    -1 कप उबला हुआ आलू कटा हुआ
    -स्वादानुसार नमक
    -2 टी स्पून चाट मसाला
    -1 टी स्पून पिसा जीरा
    -स्वाद के लिए नींबू का रस
    काले चने की चाट बनाने का तरीका-
    काले चने की चाट बनाने के लिए सबसे पहले काले चनों को धोकर ताजे पानी में उबाल लें। अब चनों में से पानी निकालकर उन्हें ठंडा कर लें। बताई गए सभी मसालों को स्वादानुसार मिलाकर चना चाट सर्व करें।

    सेहत / शौर्यपथ / कोरोना वायरस ने लोगों के जीने का तरीका बदल दिया है। आज लोग इस जानलेवा संक्रमण से बचने के लिए घरों से निकलने से पहले चेहरे पर मास्क लगाना बिल्कुल नहीं भूलते। विशेषज्ञों की मानें तो कोरोनावायरस संक्रमण के जोखिम को रोकने के लिए, मास्क पहनना सबसे सरल और अच्छा बचाव का उपाय बताया गया है। मास्क हवा में मौजूद वायरस को हमारी आंख, नाक और मुंह द्वारा भीतर प्रवेश करके व्यक्ति को संक्रमित होने से रोकता है।

    कई अध्ययनों की मानें तो मास्क पहनने से संक्रमित होने के जोखिम को 50 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। यही वजह है कि लोगों को घर से बाहर निकलने से पहले मास्क पहनने की सलाह दी जा रही है। हालांकि, कई लोग घंटो मास्क पहनने से होने वाली असुविधा से भी बेहद परेशान हैं। जिसमें चेहरे पर मुंहासे, तनाव, चश्मे में भाप का आना और अब गले में खराश भी शामिल हो गई है।

    लंबे समय तक या गंदे मास्क चेहरे पर पहनने वाले कई लोगों ने गले में खराश की शिकायत की है। आइए जानते हैं क्या है इसका कारण और हल।

    गंदा मास्क और गले की खराश -
    कोरोना संक्रमण से बचने के लिए जिस तरह समय-समय पर हाथ धोना, कपड़े बदलना और अन्य चीजों को साफ रखने की आवश्यकता होती है। उसी तरह कीटाणुओं और जीवाणुओं के संपर्क के जोखिम को कम करने के लिए मास्क को भी नियमित रूप से धोया जाना चाहिए।

    बैक्टीरिया, वायरस, धूल और एलर्जी ये सब मिलकर गले में खराश की समस्या पैदा कर सकते हैं। लंबे समय तक मास्क का इस्तेमाल बिना धोएं करने से इसके ऊपर बैक्टीरिया के कण जमा हो जाते हैं। यही छोटे कण गले में पहुंचकर जलन और खिंचाव पैदा करते हैं। जिन लोगों की इम्युनिटी कमजोर होती है या जिन्हें धूल के कणों से एलर्जी होती है उन्हें इसका खतरा अधिक होता है।

    इसके अलावा जब लोग मास्क पहनकर किसी दूसरे व्यक्ति से बात करते हैं तो उन्हें बाकी समय की तुलना में अपनी बात दूसरों तक पहुंचाने के लिए जोर से बोलना पड़ता है। जो गले में अनावश्यक तनाव डाल सकता है, जिसकी वजह से भी गले में जलन या खराश पैदा हो सकती है।

    बचाव के लिए क्या करें-
    कोरोना संक्रमण से बचने के लिए हाथों को धोना जितना जरूरी है, उतना ही मास्क को धोना भी है। मास्क के हर उपयोग के बाद, उसे गर्म पानी और साबुन से धोएं। मास्क को पहनने से पहले उसे सूर्य की रोशनी में अच्छे से सूखने दें। यही वजह है कि व्यक्ति को दो मास्क रखने की सलाह दी जाती है ताकि आप उन्हें बदल-बदलकर इस्तेमाल कर सकें।

    इसके अलावा अपने मास्क को बार-बार छूने से बचें और इसे पहनने से पहले और इसे हटाने के बाद अपने हाथों को अच्छी तरह से धोएं।

     

    खाना खजाना / शौर्यपथ / कचौरी एक लोकप्रिय स्ट्रीट फूड है जिसे खाने के लिए किसी बहाने की जरूरत नहीं है। कचौरी को ​कई अलग-अलग स्टफिंग के साथ बनाया जाता है। लेकिन ऑयली होने की वजह से अगर आप कचौरी से दूरी बना रहे हैं तो टेंशन छोड़ अब खाएं जी भर कर यह टेस्टी स्नैक। जी हां, कचौरी को आप डिप फ्राई की जगह हेल्दी तरीके से भी बना सकते हैं। आइए जानते हैं कैसे।
    बेक्ड कचौरी बनाने के लिए सामग्री-
    -50 ग्राम उड़द दाल पाउडर
    -3 टी स्पून लाल मिर्च पाउडर
    -4 टी स्पून सौंफ का पाउडर
    -6 टी स्पून धनिया पाउडर
    -1/4 टी स्पून हींग
    -1 टी स्पून यीस्ट
    -250 ग्राम गेंहू का आटा
    -2 टी स्पून चीनी
    -पानी
    -स्वादानुसार नमक
    -1-2 टी स्पून तेल
    बेक्ड कचौरी बनाने का तरीका-
    फीलिंग के लिए-
    बेक्ड कचौरी की फीलिंग तैयार करने के लिए सबसे पहले एक बाउल में उड़द दाल का पाउडर लेकर उसमें जरूरत के अनुसार पानी ​डालकर अच्छे से मिलाकर 30 मिनट के लिए छोड़ दें। ध्यान दें यह फूला और ड्राई होना चाहिए। अब इसमें लाल मिर्च पाउडर, सौंफ पाउडर, नमक, धनिया पाउडर, हींग मिलाकर गर्म पानी की मदद से इसे नरम कर लें।
    कचौरी बनाने के लिए-
    कचौरी बनाने के लिए सबसे पहले एक बाउल में गेंहू का आटा, चीनी, पानी और यीस्ट डालकर अच्छे से गूंथकर एक घंटे के लिए रख दें। अब डो पर हल्का सा तेल डालकर इसकी पैटी बनाएं। पैटी के बीच उड़द दाल की पीठी भरकर बेलन से 6 से 7 इंच में बेल लें। अब एक बेकिंग ट्रे में तेल लगाकर 160 डिग्री पर प्रीहिट ओवन में इसे ​क्रिस्पी और गोल्डन ब्राउन होने तक बेक करें। तैयार हैं आपकी गर्मा-गर्म कचौरी।

    नुस्खा / शौर्यपथ / करेला स्वाद में भले ही कड़वा होता है, लेकिन सेहत के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। करेला का सेवन करने से सेहत को कई अद्भुत फायदे होते हैं। करेले का नियमित सेवन करने से कब्ज और अपच से राहत मिलने के साथ मधुमेह में रामबाण औषधि का काम करता है। लेकिन इसके कड़वे स्वाद की वजह से कई लोग इसे अपने आहार की हिस्सा बनाने से कतराते हैं। अगर आप भी ऐसा करते हैं तो आइए जानते हैं क्या हैं करेले का कड़वापन दूर करने के उपाय।

    करेले का कड़वापन दूर करने के उपाय-
    -करेले का कड़वापन खत्म करने के लिए इसे ऊपर से छील लें। करेले के ऊपर जितनी भी खुरदुरी स्किन मौजूद होती है वह सब निकाल दें।
    -करेले को पकाने से पहले उसके बड़े बीज निकाल दें। करेले के बीज काफी कड़वे होते हैं जो सब्जी में कड़वापन ला सकते हैं।
    -करेले का कड़वापन हटाने के लिए उस पर नमक लगाकर करीब 20 से 30 मिनट के लिए अलग रखें। आप देखेंगे करेला पानी छोड़ देगा जो कि इसका कड़वा रस है।
    -नमक लगाने के बाद करेले को निचोड़ें। करेले को पानी से साफ करके दोबारा निचोड़े, ऐसा करने से करेले का कड़वापन निकल जाएगा।
    -करेले का कड़वापन निकालने के लिए इसके छोटे-छोटे टुकड़े करके दही में एक घंटे के लिए भिगोकर रख दें।
    -करेले की कड़वाहट कम करने के लिए करेले छीलकर उन पर आटा और नमक लगाकर एक छंटे के लिए अलग रखे दें। फिर धोकर इसकी सब्जी बनाएं।
    -करेले में चीरा लगाकर चावल के पानी में आधा घंटे भिगाकर रखें और फिर इसकी सब्जी बनाएं। करेले की कड़वाहट का पता नहीं चलेगा।

    मनोरंजन/ शौर्यपथ / भारतीय सिनेमा जगत में पिछले सात दशक से लता मंगेश्कर ने अपनी मधुर आवाज से लोगों को अपना दीवाना बनाया हुआ है, लेकिन उनके बारे में कुछ ऐसे दिलचस्प फैक्ट्स हैं जिनसे आप आज तक अंजान हैं। आज लता मंगेशकर अपना 91वां बर्थडे सेलिब्रेट कर रही हैं। मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में जन्मीं लता एक मध्यम वर्गीय मराठी परिवार से हैं।

    उन्होंने साल 1942 में 'किटी हसाल' के लिए अपना पहला गाना गाया, लेकिन उनके पिता दीनानाथ मंगेश्कर को लता का फिल्मों के लिए गाना पसंद नहीं आया और उन्होंने उस फिल्म से लता के गाए गीत को हटवा दिया था। हालांकि, इसी साल लता को 'पहली मंगलगौर' में अभिनय करने का मौका मिला। लता की पहली कमाई 25 रुपये थी जो उन्हें एक कार्यक्रम में स्टेज पर गाने के दौरान मिली थी। बचपन में उन्हें काफी संघर्षों का सामना करना पड़ा था। जब वह 13 साल की थीं तभी दिल का दौरा पड़ने से उनके पिता की मौत हो गई थी।

    लता मंगेशकर ने 36 भाषाओं में 50 हजार से ज्यादा गीत गाए हैं। लता मानती हैं, “पिता का गायन सुन-सुनकर ही मैंने सीखा था, लेकिन मुझ में कभी इतनी हिम्मत नहीं थी कि उनके साथ गा सकूं।” मास्टर गुलाम हैदर ने लता को फिल्म 'मजबूर' के गीत 'अंग्रेजी छोरा चला गया' में गायक मुकेश के साथ गाने का मौका दिया था। यह लता का पहला बड़ा ब्रेक था। इसके बाद उन्हें काम की कभी कमी नहीं हुई। बाद में लता मंगेशकर ने चांदनी, राम लखन, सनम बेवफा, लेकिन, फरिश्ते, पत्थर के फूल, डर, हम आपके हैं कौन, दिल वाले दुल्हनियां ले जाएंगे, माचिस, दिल तो पागल है, वीर जारा, कभी खुशी कभी गम, रंग दे बसंती और लगान जैसी फिल्मों में गाने गाए।

    लता ने क्यों नहीं की शादी
    पिता के गुजर जाने के बाद घर की सारी जिम्मेदारियां लता मंगेशकर पर आ गईं थीं। एक इंटरव्यू में लता मंगेशकर ने कहा था कि घर के सभी सदस्यों की जिम्मेदारी मुझ पर थी। ऐसे में कई बार शादी का ख्याल आता भी तो उस पर अमल नहीं कर सकती थी। बेहद कम उम्र में ही मैं काम करने लगी थी। सोचा कि पहले सभी छोटे भाई बहनों को सेटल कर दूं। फिर बहन की शादी हो गई। बच्चे हो गए। तो उन्हें संभालने की जिम्मेदारी आ गई। इस तरह से वक्त निकलता चला गया और मैंने शादी नहीं की।

    जब किशोर कुमार से यूं हुई थी मुलाकात
    किशोर कुमार के साथ लता की अनबन का वाकया काफी दिलचस्प है। इस घटना के बारे में बताते हुए लता ने बताया था कि 'बॉम्बे टॉकीज' की फिल्म 'जिद्दी' के गाने की रिकॉर्डिंग पर जाने के लिए वह लोकल ट्रेन से सफर कर रही थीं। उस समय उन्होंने देखा कि एक शख्स भी उसी ट्रेन में सफर कर रहा है। स्टूडियो जाने के लिए जब उन्होंने तांगा लिया तो देखा कि वह शख्स भी तांगा लेकर उसी ओर जा रहा है। जब वह बॉम्बे टॉकीज पहुंचीं तो उन्होंने देखा कि वह शख्स भी बॉम्बे टॉकीज पहुंचा हुआ है। बाद में उन्हें पता चला कि वह शख्स किशोर कुमार हैं। बाद में 'जिद्धी' में लता ने किशोर कुमार के साथ 'ये कौन आया रे करके सोलह सिंगार' गाना गाया था।

    रफी से बातचीत कर दी थी बंद
    लता ने पार्श्वगायक मोहम्मद रफी के साथ सैकड़ों गीत गाए थे, लेकिन एक वक्त ऐसा भी आया था जब उन्होंने रफी से बातचीत तक बंद कर दी थी। लता गानों पर रॉयल्टी की पक्षधर थीं, जबकि मोहम्मद रफी ने कभी भी रॉयल्टी की मांग नहीं की। दोनों का विवाद इतना बढ़ा कि मोहम्मद रफी और लता के बीच बातचीत भी बंद हो गई और दोनों ने एक साथ गीत गाने से इनकार कर दिया। हालांकि, चार साल बाद अभिनेत्री नरगिस के प्रयास से दोनों ने एक साथ एक कार्यक्रम में 'दिल पुकारे' गीत गाया।

    एक दिन में 12 मिर्चे तक खा लेती हैं लता
    बहुत कम लोगों को यह पता होगा कि लता का असली नाम हेमा हरिदकर है। बचपन के दिनों से उन्हें रेडियो सुनने का बड़ा ही शौक था। 18 साल की उम्र में उन्होंने अपना पहला रेडियो खरीदा था और रेडियो ऑन करते ही उन्हें के. एल. सहगल की मृत्यु की खबर मिली थी, जिसके बाद उन्होंने वह रेडियो दुकानदार को वापस लौटा दिया था। लता को अपने बचपन के दिनों में साइकल चलाने का काफी शौक था जो पूरा नहीं हो सका। बता दें कि उन्होंने अपनी पहली कार 8000 रुपये में खरीदी थी। स्पाइसी खाने की शौकीन लता एक दिन में तकरीबन 12 मिर्चे तक खा लेती हैं। उनका मानना है कि मिर्च खाने से गले की मिठास बढ़ती है। लता को किक्रेट देखने का भी काफी शौक रहा है। लार्डस में उनकी एक सीट हमेशा रिजर्व रहती है।

    सिर्फ एक दिन के लिए गईं स्कूल
    बहुत कम लोगों को पता होगा कि लता महज एक दिन के लिए स्कूल गई थीं। इसकी वजह यह रही कि जब वह पहले दिन अपनी छोटी बहन आशा भोंसले को स्कूल लेकर गई तो टीचर ने आशा को यह कहकर स्कूल से निकाल दिया कि उन्हें भी स्कूल की फीस देनी होगी। बाद में लता ने निश्चय किया कि वह कभी स्कूल नहीं जाएंगी। इसके बाद उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा घर में ही रहकर अपने नौकर से प्राप्त की। हालांकि, बाद में उन्हें न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी सहित छह विश्वविधालयों से मानक उपाधि से नवाजा गया।

    भारत रत्न से नवाजा गया
    लता को अपने सिने करियर में मान-सम्मान बहुत मिला। वह फिल्म इंडस्ट्री की पहली महिला हैं जिन्हें भारत रत्न और दादा साहब फाल्के पुरस्कार प्राप्त हुआ।

     

    धर्म संसार / शौर्यपथ / कोविड-19 के कारण काशी विश्वनाथ को माला-फूल चढ़ाने पर लगी रोक हटा ली गई। मंदिर प्रबंधन के इस निर्णय से न सिर्फ भक्तों, बल्कि माला-फूल विक्रेताओं में भी प्रसन्नता है। उल्लेखनीय है कि विश्वनाथ मंदिर के गर्भगृह में 17 मार्च से ही प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी। इसके बाद 21 मार्च से मंदिर में भक्तों का प्रवेश वर्जित कर दिया गया था। इसी महीने की सात तारीख से भक्तों को गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति पुन: प्रदान की गई थी। माला फूल विक्रेताओं ने मंदिर प्रबंधन के इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि माला-फूल चढ़ाने पर प्रतिबंध से उनकी आर्थिक स्थिति खराब हो गई थी।

    वृंदावन में अब जल्द ही भक्तों को होंगे ठा. बांकेबिहारी के दर्शन
    विश्वविख्यात ठा. बांकेबिहारी मंदिर में चल रहे जीर्णोद्धार एवं फर्श निर्माण कार्य तेजी पकड़ रहा है। मंदिर के आंगन में फर्श की ढलाई कर सीलिंग कम्पाउंड बिछाया जा रहा है। इसके बाद कर्नाटका से मंगवाए गए संगमरमर पत्थर फर्श में लगाया जाएगा।

    बता दें कि ठा. बांकेबिहारी मंदिर के आंगन में करीब चार माह पूर्व फर्श में तीन फुट से अधिक गहरा गड्ढा हो गया था। जिसे गंभीरता से लेते हुए मंदिर प्रबंधन द्वारा भवन निर्माण से जुड़ी सरकारी एवं गैर सरकारी कंपनियों के इंजीनियरों से परिसर की गहनता से जांच कराई गई थी। सभी संस्थाओं की जांच रिपोर्ट के आधार काम की शुरुआत कराई गई। मंदिर के फर्श एवं मंदिर भवन की मजबूती को बनाए रखने के उद्देश्य से फर्श में 65 स्थानों पर पाइलिंग कराई गई। साथ ही नींव को भूकम्प रोधी बनाने के लिए अत्याधुनिक तरीके से सुरक्षित किया गया। अब आंगन के फर्श पर लोहे की सरियाओं का जाल बिछाने जाने के बाद ढलाई कराई गई है। साथ ही सीलन से मुक्ति के लिए सीलिंग कम्पाउंड बिछाया जा रहा है। जल्द दी कर्नाटका से मंगवाए गए संगमरमर पत्थर को फर्श में लगाया जाएगा। मंदिर के प्रबंधक मुनीष कुमार शर्मा ने बताया कि मंदिर के फर्श का निर्माण जल्द ही पूर्ण होने को है। फर्श की ढलाई के बाद अब पत्थर लगाने की तैयारी की जा रही है। ताकि कार्य पूर्ण होते ही पिछले करीब सात माह से अपने आराध्य से दूर भक्तों को उनके दर्शन सुलभ हो सकें।

     

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