
CONTECT NO. - 8962936808
EMAIL ID - shouryapath12@gmail.com
Address - SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
Google Analytics —— Meta Pixel
सेहत / शौर्यपथ / कोरोना वायरस ने लोगों के जीने का तरीका बदल दिया है। आज लोग इस जानलेवा संक्रमण से बचने के लिए घरों से निकलने से पहले चेहरे पर मास्क लगाना बिल्कुल नहीं भूलते। विशेषज्ञों की मानें तो कोरोनावायरस संक्रमण के जोखिम को रोकने के लिए, मास्क पहनना सबसे सरल और अच्छा बचाव का उपाय बताया गया है। मास्क हवा में मौजूद वायरस को हमारी आंख, नाक और मुंह द्वारा भीतर प्रवेश करके व्यक्ति को संक्रमित होने से रोकता है।
कई अध्ययनों की मानें तो मास्क पहनने से संक्रमित होने के जोखिम को 50 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। यही वजह है कि लोगों को घर से बाहर निकलने से पहले मास्क पहनने की सलाह दी जा रही है। हालांकि, कई लोग घंटो मास्क पहनने से होने वाली असुविधा से भी बेहद परेशान हैं। जिसमें चेहरे पर मुंहासे, तनाव, चश्मे में भाप का आना और अब गले में खराश भी शामिल हो गई है।
लंबे समय तक या गंदे मास्क चेहरे पर पहनने वाले कई लोगों ने गले में खराश की शिकायत की है। आइए जानते हैं क्या है इसका कारण और हल।
गंदा मास्क और गले की खराश -
कोरोना संक्रमण से बचने के लिए जिस तरह समय-समय पर हाथ धोना, कपड़े बदलना और अन्य चीजों को साफ रखने की आवश्यकता होती है। उसी तरह कीटाणुओं और जीवाणुओं के संपर्क के जोखिम को कम करने के लिए मास्क को भी नियमित रूप से धोया जाना चाहिए।
बैक्टीरिया, वायरस, धूल और एलर्जी ये सब मिलकर गले में खराश की समस्या पैदा कर सकते हैं। लंबे समय तक मास्क का इस्तेमाल बिना धोएं करने से इसके ऊपर बैक्टीरिया के कण जमा हो जाते हैं। यही छोटे कण गले में पहुंचकर जलन और खिंचाव पैदा करते हैं। जिन लोगों की इम्युनिटी कमजोर होती है या जिन्हें धूल के कणों से एलर्जी होती है उन्हें इसका खतरा अधिक होता है।
इसके अलावा जब लोग मास्क पहनकर किसी दूसरे व्यक्ति से बात करते हैं तो उन्हें बाकी समय की तुलना में अपनी बात दूसरों तक पहुंचाने के लिए जोर से बोलना पड़ता है। जो गले में अनावश्यक तनाव डाल सकता है, जिसकी वजह से भी गले में जलन या खराश पैदा हो सकती है।
बचाव के लिए क्या करें-
कोरोना संक्रमण से बचने के लिए हाथों को धोना जितना जरूरी है, उतना ही मास्क को धोना भी है। मास्क के हर उपयोग के बाद, उसे गर्म पानी और साबुन से धोएं। मास्क को पहनने से पहले उसे सूर्य की रोशनी में अच्छे से सूखने दें। यही वजह है कि व्यक्ति को दो मास्क रखने की सलाह दी जाती है ताकि आप उन्हें बदल-बदलकर इस्तेमाल कर सकें।
इसके अलावा अपने मास्क को बार-बार छूने से बचें और इसे पहनने से पहले और इसे हटाने के बाद अपने हाथों को अच्छी तरह से धोएं।
खाना खजाना / शौर्यपथ / कचौरी एक लोकप्रिय स्ट्रीट फूड है जिसे खाने के लिए किसी बहाने की जरूरत नहीं है। कचौरी को कई अलग-अलग स्टफिंग के साथ बनाया जाता है। लेकिन ऑयली होने की वजह से अगर आप कचौरी से दूरी बना रहे हैं तो टेंशन छोड़ अब खाएं जी भर कर यह टेस्टी स्नैक। जी हां, कचौरी को आप डिप फ्राई की जगह हेल्दी तरीके से भी बना सकते हैं। आइए जानते हैं कैसे।
बेक्ड कचौरी बनाने के लिए सामग्री-
-50 ग्राम उड़द दाल पाउडर
-3 टी स्पून लाल मिर्च पाउडर
-4 टी स्पून सौंफ का पाउडर
-6 टी स्पून धनिया पाउडर
-1/4 टी स्पून हींग
-1 टी स्पून यीस्ट
-250 ग्राम गेंहू का आटा
-2 टी स्पून चीनी
-पानी
-स्वादानुसार नमक
-1-2 टी स्पून तेल
बेक्ड कचौरी बनाने का तरीका-
फीलिंग के लिए-
बेक्ड कचौरी की फीलिंग तैयार करने के लिए सबसे पहले एक बाउल में उड़द दाल का पाउडर लेकर उसमें जरूरत के अनुसार पानी डालकर अच्छे से मिलाकर 30 मिनट के लिए छोड़ दें। ध्यान दें यह फूला और ड्राई होना चाहिए। अब इसमें लाल मिर्च पाउडर, सौंफ पाउडर, नमक, धनिया पाउडर, हींग मिलाकर गर्म पानी की मदद से इसे नरम कर लें।
कचौरी बनाने के लिए-
कचौरी बनाने के लिए सबसे पहले एक बाउल में गेंहू का आटा, चीनी, पानी और यीस्ट डालकर अच्छे से गूंथकर एक घंटे के लिए रख दें। अब डो पर हल्का सा तेल डालकर इसकी पैटी बनाएं। पैटी के बीच उड़द दाल की पीठी भरकर बेलन से 6 से 7 इंच में बेल लें। अब एक बेकिंग ट्रे में तेल लगाकर 160 डिग्री पर प्रीहिट ओवन में इसे क्रिस्पी और गोल्डन ब्राउन होने तक बेक करें। तैयार हैं आपकी गर्मा-गर्म कचौरी।
नुस्खा / शौर्यपथ / करेला स्वाद में भले ही कड़वा होता है, लेकिन सेहत के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। करेला का सेवन करने से सेहत को कई अद्भुत फायदे होते हैं। करेले का नियमित सेवन करने से कब्ज और अपच से राहत मिलने के साथ मधुमेह में रामबाण औषधि का काम करता है। लेकिन इसके कड़वे स्वाद की वजह से कई लोग इसे अपने आहार की हिस्सा बनाने से कतराते हैं। अगर आप भी ऐसा करते हैं तो आइए जानते हैं क्या हैं करेले का कड़वापन दूर करने के उपाय।
करेले का कड़वापन दूर करने के उपाय-
-करेले का कड़वापन खत्म करने के लिए इसे ऊपर से छील लें। करेले के ऊपर जितनी भी खुरदुरी स्किन मौजूद होती है वह सब निकाल दें।
-करेले को पकाने से पहले उसके बड़े बीज निकाल दें। करेले के बीज काफी कड़वे होते हैं जो सब्जी में कड़वापन ला सकते हैं।
-करेले का कड़वापन हटाने के लिए उस पर नमक लगाकर करीब 20 से 30 मिनट के लिए अलग रखें। आप देखेंगे करेला पानी छोड़ देगा जो कि इसका कड़वा रस है।
-नमक लगाने के बाद करेले को निचोड़ें। करेले को पानी से साफ करके दोबारा निचोड़े, ऐसा करने से करेले का कड़वापन निकल जाएगा।
-करेले का कड़वापन निकालने के लिए इसके छोटे-छोटे टुकड़े करके दही में एक घंटे के लिए भिगोकर रख दें।
-करेले की कड़वाहट कम करने के लिए करेले छीलकर उन पर आटा और नमक लगाकर एक छंटे के लिए अलग रखे दें। फिर धोकर इसकी सब्जी बनाएं।
-करेले में चीरा लगाकर चावल के पानी में आधा घंटे भिगाकर रखें और फिर इसकी सब्जी बनाएं। करेले की कड़वाहट का पता नहीं चलेगा।
मनोरंजन/ शौर्यपथ / भारतीय सिनेमा जगत में पिछले सात दशक से लता मंगेश्कर ने अपनी मधुर आवाज से लोगों को अपना दीवाना बनाया हुआ है, लेकिन उनके बारे में कुछ ऐसे दिलचस्प फैक्ट्स हैं जिनसे आप आज तक अंजान हैं। आज लता मंगेशकर अपना 91वां बर्थडे सेलिब्रेट कर रही हैं। मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में जन्मीं लता एक मध्यम वर्गीय मराठी परिवार से हैं।
उन्होंने साल 1942 में 'किटी हसाल' के लिए अपना पहला गाना गाया, लेकिन उनके पिता दीनानाथ मंगेश्कर को लता का फिल्मों के लिए गाना पसंद नहीं आया और उन्होंने उस फिल्म से लता के गाए गीत को हटवा दिया था। हालांकि, इसी साल लता को 'पहली मंगलगौर' में अभिनय करने का मौका मिला। लता की पहली कमाई 25 रुपये थी जो उन्हें एक कार्यक्रम में स्टेज पर गाने के दौरान मिली थी। बचपन में उन्हें काफी संघर्षों का सामना करना पड़ा था। जब वह 13 साल की थीं तभी दिल का दौरा पड़ने से उनके पिता की मौत हो गई थी।
लता मंगेशकर ने 36 भाषाओं में 50 हजार से ज्यादा गीत गाए हैं। लता मानती हैं, “पिता का गायन सुन-सुनकर ही मैंने सीखा था, लेकिन मुझ में कभी इतनी हिम्मत नहीं थी कि उनके साथ गा सकूं।” मास्टर गुलाम हैदर ने लता को फिल्म 'मजबूर' के गीत 'अंग्रेजी छोरा चला गया' में गायक मुकेश के साथ गाने का मौका दिया था। यह लता का पहला बड़ा ब्रेक था। इसके बाद उन्हें काम की कभी कमी नहीं हुई। बाद में लता मंगेशकर ने चांदनी, राम लखन, सनम बेवफा, लेकिन, फरिश्ते, पत्थर के फूल, डर, हम आपके हैं कौन, दिल वाले दुल्हनियां ले जाएंगे, माचिस, दिल तो पागल है, वीर जारा, कभी खुशी कभी गम, रंग दे बसंती और लगान जैसी फिल्मों में गाने गाए।
लता ने क्यों नहीं की शादी
पिता के गुजर जाने के बाद घर की सारी जिम्मेदारियां लता मंगेशकर पर आ गईं थीं। एक इंटरव्यू में लता मंगेशकर ने कहा था कि घर के सभी सदस्यों की जिम्मेदारी मुझ पर थी। ऐसे में कई बार शादी का ख्याल आता भी तो उस पर अमल नहीं कर सकती थी। बेहद कम उम्र में ही मैं काम करने लगी थी। सोचा कि पहले सभी छोटे भाई बहनों को सेटल कर दूं। फिर बहन की शादी हो गई। बच्चे हो गए। तो उन्हें संभालने की जिम्मेदारी आ गई। इस तरह से वक्त निकलता चला गया और मैंने शादी नहीं की।
जब किशोर कुमार से यूं हुई थी मुलाकात
किशोर कुमार के साथ लता की अनबन का वाकया काफी दिलचस्प है। इस घटना के बारे में बताते हुए लता ने बताया था कि 'बॉम्बे टॉकीज' की फिल्म 'जिद्दी' के गाने की रिकॉर्डिंग पर जाने के लिए वह लोकल ट्रेन से सफर कर रही थीं। उस समय उन्होंने देखा कि एक शख्स भी उसी ट्रेन में सफर कर रहा है। स्टूडियो जाने के लिए जब उन्होंने तांगा लिया तो देखा कि वह शख्स भी तांगा लेकर उसी ओर जा रहा है। जब वह बॉम्बे टॉकीज पहुंचीं तो उन्होंने देखा कि वह शख्स भी बॉम्बे टॉकीज पहुंचा हुआ है। बाद में उन्हें पता चला कि वह शख्स किशोर कुमार हैं। बाद में 'जिद्धी' में लता ने किशोर कुमार के साथ 'ये कौन आया रे करके सोलह सिंगार' गाना गाया था।
रफी से बातचीत कर दी थी बंद
लता ने पार्श्वगायक मोहम्मद रफी के साथ सैकड़ों गीत गाए थे, लेकिन एक वक्त ऐसा भी आया था जब उन्होंने रफी से बातचीत तक बंद कर दी थी। लता गानों पर रॉयल्टी की पक्षधर थीं, जबकि मोहम्मद रफी ने कभी भी रॉयल्टी की मांग नहीं की। दोनों का विवाद इतना बढ़ा कि मोहम्मद रफी और लता के बीच बातचीत भी बंद हो गई और दोनों ने एक साथ गीत गाने से इनकार कर दिया। हालांकि, चार साल बाद अभिनेत्री नरगिस के प्रयास से दोनों ने एक साथ एक कार्यक्रम में 'दिल पुकारे' गीत गाया।
एक दिन में 12 मिर्चे तक खा लेती हैं लता
बहुत कम लोगों को यह पता होगा कि लता का असली नाम हेमा हरिदकर है। बचपन के दिनों से उन्हें रेडियो सुनने का बड़ा ही शौक था। 18 साल की उम्र में उन्होंने अपना पहला रेडियो खरीदा था और रेडियो ऑन करते ही उन्हें के. एल. सहगल की मृत्यु की खबर मिली थी, जिसके बाद उन्होंने वह रेडियो दुकानदार को वापस लौटा दिया था। लता को अपने बचपन के दिनों में साइकल चलाने का काफी शौक था जो पूरा नहीं हो सका। बता दें कि उन्होंने अपनी पहली कार 8000 रुपये में खरीदी थी। स्पाइसी खाने की शौकीन लता एक दिन में तकरीबन 12 मिर्चे तक खा लेती हैं। उनका मानना है कि मिर्च खाने से गले की मिठास बढ़ती है। लता को किक्रेट देखने का भी काफी शौक रहा है। लार्डस में उनकी एक सीट हमेशा रिजर्व रहती है।
सिर्फ एक दिन के लिए गईं स्कूल
बहुत कम लोगों को पता होगा कि लता महज एक दिन के लिए स्कूल गई थीं। इसकी वजह यह रही कि जब वह पहले दिन अपनी छोटी बहन आशा भोंसले को स्कूल लेकर गई तो टीचर ने आशा को यह कहकर स्कूल से निकाल दिया कि उन्हें भी स्कूल की फीस देनी होगी। बाद में लता ने निश्चय किया कि वह कभी स्कूल नहीं जाएंगी। इसके बाद उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा घर में ही रहकर अपने नौकर से प्राप्त की। हालांकि, बाद में उन्हें न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी सहित छह विश्वविधालयों से मानक उपाधि से नवाजा गया।
भारत रत्न से नवाजा गया
लता को अपने सिने करियर में मान-सम्मान बहुत मिला। वह फिल्म इंडस्ट्री की पहली महिला हैं जिन्हें भारत रत्न और दादा साहब फाल्के पुरस्कार प्राप्त हुआ।
धर्म संसार / शौर्यपथ / कोविड-19 के कारण काशी विश्वनाथ को माला-फूल चढ़ाने पर लगी रोक हटा ली गई। मंदिर प्रबंधन के इस निर्णय से न सिर्फ भक्तों, बल्कि माला-फूल विक्रेताओं में भी प्रसन्नता है। उल्लेखनीय है कि विश्वनाथ मंदिर के गर्भगृह में 17 मार्च से ही प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी। इसके बाद 21 मार्च से मंदिर में भक्तों का प्रवेश वर्जित कर दिया गया था। इसी महीने की सात तारीख से भक्तों को गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति पुन: प्रदान की गई थी। माला फूल विक्रेताओं ने मंदिर प्रबंधन के इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि माला-फूल चढ़ाने पर प्रतिबंध से उनकी आर्थिक स्थिति खराब हो गई थी।
वृंदावन में अब जल्द ही भक्तों को होंगे ठा. बांकेबिहारी के दर्शन
विश्वविख्यात ठा. बांकेबिहारी मंदिर में चल रहे जीर्णोद्धार एवं फर्श निर्माण कार्य तेजी पकड़ रहा है। मंदिर के आंगन में फर्श की ढलाई कर सीलिंग कम्पाउंड बिछाया जा रहा है। इसके बाद कर्नाटका से मंगवाए गए संगमरमर पत्थर फर्श में लगाया जाएगा।
बता दें कि ठा. बांकेबिहारी मंदिर के आंगन में करीब चार माह पूर्व फर्श में तीन फुट से अधिक गहरा गड्ढा हो गया था। जिसे गंभीरता से लेते हुए मंदिर प्रबंधन द्वारा भवन निर्माण से जुड़ी सरकारी एवं गैर सरकारी कंपनियों के इंजीनियरों से परिसर की गहनता से जांच कराई गई थी। सभी संस्थाओं की जांच रिपोर्ट के आधार काम की शुरुआत कराई गई। मंदिर के फर्श एवं मंदिर भवन की मजबूती को बनाए रखने के उद्देश्य से फर्श में 65 स्थानों पर पाइलिंग कराई गई। साथ ही नींव को भूकम्प रोधी बनाने के लिए अत्याधुनिक तरीके से सुरक्षित किया गया। अब आंगन के फर्श पर लोहे की सरियाओं का जाल बिछाने जाने के बाद ढलाई कराई गई है। साथ ही सीलन से मुक्ति के लिए सीलिंग कम्पाउंड बिछाया जा रहा है। जल्द दी कर्नाटका से मंगवाए गए संगमरमर पत्थर को फर्श में लगाया जाएगा। मंदिर के प्रबंधक मुनीष कुमार शर्मा ने बताया कि मंदिर के फर्श का निर्माण जल्द ही पूर्ण होने को है। फर्श की ढलाई के बाद अब पत्थर लगाने की तैयारी की जा रही है। ताकि कार्य पूर्ण होते ही पिछले करीब सात माह से अपने आराध्य से दूर भक्तों को उनके दर्शन सुलभ हो सकें।
सेहत / शौर्यपथ / फिनलैंड में कोरोना से संक्रमित मरीजों की पहचान के लिए खोजी कुत्तों की मदद ली जा रही है। हेलिंस्की हवाईअड्डे पर हाल ही में चार प्रशिक्षित खोजी कुत्तों की तैनाती की गई है। शोधकर्ताओं का दावा है कि खोजी कुत्ते संक्रमितों की पहचान के लिए कोविड-19 जांच का सस्ता और प्रभावशाली विकल्प साबित हो सकते हैं।
हेलिंस्की यूनिवर्सिटी से जुड़ी एना हेल्म-बोर्कमैन ने बताया कि खोजी कुत्ते दस सेकेंड के भीतर सार्स-कोव-2 वायरस की मौजूदगी भांप सकते हैं। हवाईअड्डों से लेकर अस्पतालों, होटल-रेस्तरां, स्टेडियम, थिएटर और सांस्कृति केंद्रों तक में आगंतुकों में संक्रमण की पुष्टि करने के लिए इनकी मदद ली जा सकती है। खोजी कुत्तों से किसी भी व्यक्ति की स्क्रीनिंग की प्रक्रिया औसतन एक मिनट में पूरी हो जाती है।
बोर्कमैन ने बताया कि हेलिंस्की हवाईअड्डे पर उतरने वाले यात्रियों को सामान लेने के बाद एक टिश्यू पेपर दिया जाता है। यात्री टिश्यू पेपर से अपनी त्वचा पोंछकर कांच के एक कंटेनर में डालते हैं। कंटेनर को पास के एक ही बूथ पर रख दिया जाता है, जहां अन्य गंध से लैस टिश्यू पेपर वाले डिब्बे भी रखे होते हैं।
खोजी कुत्ते एक-एक कर सभी डिब्बों में रखे टिश्यू पेपर को सूंघते हैं। अगर कुत्ते जम्हाई लेकर, लेटकर या गुर्राकर वायरस की मौजूदगी का संकेत देते हैं तो संबंधित यात्री की स्वैब जांच की जाती है, ताकि कुत्ते के इशारे पर चिकित्सकीय मुहर लग जाएगा। स्वैब जांच की रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर यात्री को क्वारंटाइन कर दिया जाता है।
सौ फीसदी सटीक नतीजे-
-हेलिंस्की हवाईअड्डे पर उन कुत्तों की तैनाती की गई है, जो मरीज में कैंसर और डायबिटीज जैसी जानलेवा बीमारियों के प्रति अलर्ट करने में सफल रहे हैं। परीक्षण के दौरान ये कुत्ते सार्स-कोव-2 वायरस की मौजूदगी के सौ फीसदी सटीक नतीजे देने में कारगर रहे हैं।
पसीने की दुर्गंध अलग-
-जून में प्रकाशित एक फ्रांसीसी अध्ययन में दावा किया गया था कि सार्स-कोव-2 वायरस से संक्रमित मरीजों के पसीने की दुर्गंध स्वस्थ लोगों से अलग होती है। खोजी कुत्ते महज 10 से 100 अणुओं की मौजूदगी होने पर भी कोरोना संक्रमण की पोल खोलने में सक्षम हैं।
16 कुत्ते तैयार हो रहे-
-कुत्तों को गंध पहचानने की विधा में पारंगत बनाने वाले संगठन ‘वाइज नोज’ ने बताया कि वह कोरोना संक्रमितों की पहचान के लिए 16 खोजी कुत्ते तैयार कर रहा है। इनमें से दस एयरपोर्ट पर तैनात होंगे। चार ने हेलिंस्की हवाईअड्डे पर सेवाएं देनी शुरू भी कर दी हैं।
सेहत /शौर्यपथ / उच्च रक्तचाप की समस्या से परेशान हैं? नमक के सेवन में कटौती से लेकर योग-व्यायाम तक सब आजमा लिया, पर ब्लड प्रेशर काबू में ही नहीं आ रहा है? अगर हां तो हफ्ते में तीन से चार बार गुनगुने पानी से नहाना शुरू कर दें। ‘यूरोपियन एसोसिएशन फॉर द स्टडी ऑफ डायबिटीज एंड हार्ट डिजीजेज’ के हालिया अध्ययन में ‘हॉट बाथ’ को रक्तचाप घटाने में खासा असरदार करार दिया गया है।
शोधकर्ताओं के मुताबिक गुनगुने पानी से नहाने पर शरीर में ‘वैसोडिलेशन’ की प्रक्रिया को बढ़ावा मिलता है। इससे रक्त धमनियां खुलती हैं और खून के बहाव के दौरान हृदय पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ता। नतीजतन ब्लड प्रेशर काबू में रहता है। अध्ययन में गुनगुने पानी के स्नान को हृदय के लिए व्यायाम जितना ही फायदेमंद भी पाया गया। शोधकर्ता एंडी कॉर्बले ने बताया कि ‘हॉट बाथ’ के दौरान दिल 150 बीट प्रति मिनट की दर से धड़कने लगता है। आमतौर पर मध्यमगति की एक्सरसाइज में ऐसा देखने को मिलता है। इससे हृदय की कोशिकाएं मजबूत होती हैं और रक्तचाप नियंत्रण में आता है।
कार्बले और उनके साथियों ने 1500 वयस्कों को तीन समूह में बांटा। पहले समूह में शामिल प्रतिभागियों को लगातार दो महीने तक हफ्ते में एक बार गुनगुने पानी से स्नान करवाया। वहीं, दूसरे समूह को दो से चार मरतबा, जबकि तीसरे समूह को चार से अधिक बार गुनगुने पानी से नहलवाया।
सभी प्रतिभागियों को औसतन 16 मिनट गुनगुने पानी के संपर्क रखा गया। उनके वजन, रक्तचाप और ग्लाइकेटेड हिमोग्लोबीन (ब्लड शुगर का सूचक) की समय-समय पर जांच की गई। इस दौरान हफ्ते में चार से अधिक बार ‘हाथ बाथ’ लेने वाले प्रतिभागियों के डायस्टॉलिक ब्लड प्रेशर में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। उनका वजन और ग्लाइकेटेड हिमोग्लोबीन का स्तर भी औरों की तुलना में ज्यादा घटा।
स्ट्रोक से बचाव में कारगर-
-हार्ट अटैक का खतरा ‘हॉट बाथ’ लेने से 28% घट जाता है
-स्ट्रोक से मौत की आशंका में 26% तक की कमी आती है
-30 हजार वयस्कों पर 20 वर्ष चले जापानी शोध से निकला निष्कर्ष
टाइप-2 डायबिटीज का खतरा भी घटेगा-
-रात में बिस्तर पर जाने से पहले गुनगुने पानी से नहाने की आदत टाइप-2 डायबिटीज से बचाव में खासी मददगार साबित हो सकती है। जापान स्थित कोह्नोदाई यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने हाल ही में 1300 प्रतिभागियों में गुनगुने पानी के स्नान का फायदा आंकने के बाद यह दावा किया था। उन्होंने पाया था कि जो लोग हफ्ते में चार बार गुनगुने पानी से नहाते हैं, उनका न सिर्फ बीएमआई (वजन और कद का अनुपात), बल्कि ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी नियंत्रित रहता है। स्ट्रेस हार्मोन के स्तर में कमी आना और फील गुड हार्मोन का स्त्राव बढ़ना इसकी मुख्य वजह है।
खाना खजाना / शौर्यपथ / गार्लिक नान खाने के शौकीन इसे बार-बार खाना चाहते हैंं लेकिन मार्केट से गार्लिक नान खाने से बेहतर है कि आप मन चाहे जायकों के साथ घर में गार्लिक नान बनाएं। इसे गर्मा-गरम दाल मखनी के साथ पनीर बटर मसाला के साथ सर्व कर सकते हैं। तो आइए जानते हैं इसकी रेसिपी
सामग्री
मैदा - एक कप
आटा - आधा कप
ड्राई यीस्ट - आधा बड़ा चम्मच
चीनी - आधा छोटा चम्मच
दही - 1 बड़ा चम्मच
दूध - एक तिहाई कप
तेल - एक बड़ा चम्मच
नमक - स्वादानुसार
आधा कप गुनगुना पानी
लहसुन - बारीक कटे हुए 3-4 बड़े चम्मच
धनियापत्ती - बारीक कटे हुए 3 बड़े चम्मच
मक्खन
विधि
नान का आटा तैयार करने के लिए सबसे पहले यीस्ट का मिश्रण तैयार कर लें। इसके लिए एक कटोरे में ड्राई यीस्ट और चीनी डालकर 1/2 कप गुनगुना पानी डालें। चम्मच से मिश्रण को हिलाकर 10 से 15 मिनट के लिए ढककर रख दें। अगर 15 मिनट बाद मिश्रण में झाग होता है तो यीस्ट कारगर है। लेकिन झाग नहीं होने पर समझ जाएं यीस्ट निष्क्रीय है या आप बहुत ज्यादा गर्म पानी का इस्तेमाल कर चुके हैं। ऐसे में ये मिश्रण इस्तेंमाल न करें और दूसरा मिश्रण तैयार करें।
अब परात में मैदा और आटा छानें। फिर इसमें दही, तेल और नमक डालकर मिक्स कर लें। फिर इसमें यीस्ट का मिश्रण और एक कप दूध डालकर अच्छी तरह से मिलाएं और नरम आटा गूंथ लें।
अब आटे को तेल से चिकना करें और गीले कपड़े से ढक कर 1 से 2 घंटे के लिए रख दें। आटे को फिर से 2-3 मिनट तक या नरम होने तक गूंथ लें।
इसे 5-6 बराबर भागों में बाट लें और गोले बना लें। इन गोलों को गीले कपड़े से ढककर 30 मिनट के लिए फिर रख दें। 30 मिनट बाद आटे का एक गोला लें और उसे हथेलियों के बीच दबाकर लोई के जैसा आकार दें। सूखे आटे की सहायता से इसे चकले में लंबा बेल लें। अब ऊपर से थोड़ा कटा हुआ लहसुन और कटा हुआ हरा धनिया छिड़कें और हाथ या बेलन से धीरे से दबा दें।
अब नान को पलटें (लहसुन वाली सतह नीचे की तरफ रखें) और सादी वाली सतह में ब्रश या हाथ से पानी लगाकर गीला करें।
फिर लोहे के तवे को मध्यम आंच पर गर्म करें (नान बनाने के लिए नॉन-स्टिक तवे का उपयोग न करें)। जब तवा गर्म हो जाए तो पानी वाले नान की सतह को तवे पर रखें। 1 मिनट में आपको रोटी पर बुलबुले से दिखने लगेंगे।
तवे का हैंडल पकड़ें और उल्टा करके सीधे गैस पर रखें। तवे को इधर-उधर घुमाते हुए नान की सतह पर हल्के भूरे रंग के धब्बे आने तक सेकें। अब नान को आसानी से कड़छी के सहारे निकाल लें। अब आप पाएंगे की निचली सतह भी सुनहरी हो गई है। इसे मक्खन लगाकर सर्व करें।
लाइफस्टाइल /शौर्यपथ / जब भागती-दौड़ती जिंदगी से थक जाओ, तो थमने के लिए घूमने-फिरने के लिए निकल जाओ।पर्यटन के शौकीन इस बात को बखूबी समझते होंगे।घूमने फिरना सेहत के लिहाज से किसी रिफ्रेशिंग टॉनिक से कम नहीं है।इससे आप शारीरिक रूप से फिट तो बनते ही है, साथ ही इससे आप मानसिक रूप से मजबूत भी बनते हैं।आप में सकारात्मकता का संचार होता है।पर्यटन को समर्पित आज ऐसा ही दिन है विश्व पर्यटन दिवस।आइए, जानते हैं इससे जुड़ीं खास बातें।
क्यों मनाया जाता है विश्व पर्यटन दिवस
पर्यटन से रोजगार की संभावनाएं बढ़ती हैं। विश्व पर्यटन दिवस लोगों में पर्यटन के प्रति जागरूकता लाने और अधिक से अधिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है। पर्यटन से किसी भी देश को आर्थिक स्थिति को भी ऊपर ले जाने में मदद करता है। कुछ देशों की आर्थिक स्थिति पर्यटन पर ही निर्भर करती है। पर्यटन दिवस का उद्देश्य देश-विदेश के सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करना भी होता है।
क्या है इस साल की थीम
हर साल पर्यटन दिवस की एक अलग थीम होती है। इस बार की पर्यटन की थीम पर्यटन और ग्रामीण विकास है। इससे ग्रामीण इलाकों को युवाओं और लोगों को रोजगार प्रदान करना है। पर्यटन से कई लोगों को रोजगार प्राप्त होता है। किसी भी देश की सांस्कृतिक विरासत को भी पर्यटन से बढ़ावा मिलता है।
कब हुई विश्व पर्यटन दिवस की शुरुआत
विश्व पर्यटन दिवस उन लोगों के लिए बहुत खास होता है जो लोग पर्यटन से जुड़े हुए हैं। इस दिन देश, राज्य और दूसरे देश पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई कार्य करते हैं। विश्व पर्यटन दिवस की शुरुआत सन् 1970 में विश्व पर्यटन संस्था के द्वारा की गई थी। सन् 1980 में 27 सितंबर को पहली बार विश्व पर्यटन दिवस मनाया गया।
लाइफस्टाइल/शौर्यपथ / वो शाख है ना फूल,
अगर तितलियां ना हों,
वो घर भी कोई घर है
जहां बच्चियां ना हों.
आज घर की रौनक और गर्व का दिन यानी बेटी दिवस है। बदलते परिवेश में भारत में बेटियों के प्रति नजरिए को लेकर बहुत बदलाव आया है लेकिन अभी भी भार त को बेटी के महत्व को समझने के लिए एक लम्बा रास्ता तय करना है।केवल आज के दिन ही नहीं, बल्कि आज से आप बेटियों के महत्व को समझते हुए उनके सपनों को उड़ने के लिए पंख दे सकते हैं।कोशिश करें, कि आप बेटियों के अस्तित्व को तलाशने में उनकी मदद करें। आइए, जानते हैं डॉटर्स डे पर कुछ जरूरी बातें-
क्यों मनाया जाता है डॉटर्स डे
बेटियों के लिए खास प्यार जताने के लिए डॉटर्स डे मनाया जाता है। सिर्फ बेटियों के लिए ही नहीं, बेटा , मां , पिता और यहां तक की दादा-दादी के लिए भी साल में एक खास दिन रखा गया है।
भारत में क्यों मनाया जाता है डॉटर्स डे
हालांकि, भारत में बेटी दिवस मनाने की एक खास वजह बेटियों के प्रति लोगों को जागरुक करना। इस दिन बेटी को न पढ़ाना, उन्हें जन्म से पहले मारना, घरेलू हिंसा, दहेज और दुष्कर्म से बेटियों को बचाने के लिए भारतीयों को जागरुक करना है। उन्हें यह समझाना कि बेटियां बोझ नहीं होती, बल्कि आपके घर का एक अहम हिस्सा होती हैं।
बेटी दिवस के संदेश
खिलती हुई कलियां है बेटियां
मां बाप का दर्द समझती है बेटियां
घर को रोशन करती है बेटियां
लड़के आज हैं तो आने वाला कल है बेटियां
Happy Daughters Day 2020
सूरज बनने के बाद भगवान के पास जो रौशनी बची
उसे बेटी बना कर हमारे घर भेज दिया
Happy Daughters Day 2020
बेटियां बाप की आंखों में छिपे ख्वाब को पहचानती हैं,
और कोई दूसरा इस ख्वाब को पढ़ ले तो बुरा मानती हैं
Happy Daughters Day 2020
बेटी की हर ख्वाहिश पूरी नहीं होती,
फिर भी बेटियां कभी भी अधूरी नहीं होतीं
राजनांदगांव/शौर्यपथ / ऐसा समय जिसमें व्यक्ति एवं परिवार व्यापार से, सामाजिक व्यवहार से, शारीरिक व्याधियों से ,आर्थिक संसाधनों की कमी से लगातार संघर्षरत है
ऐसे में शहर राजनांदगांव जिले एवं प्रदेश की निजी स्कूलों द्वारा जो मानवता का उत्कृष्ट उदाहरण दिया गया है उसे राजनांदगांव एवं प्रदेश के पालक कभी नहीं भूलेंगे ।
शहर की मुख्यतः दो शिक्षण संस्थाएं जिसमें एक व्यक्तिगत नाम से चार स्कूलों का संचालन हो रहा है एवं दूसरी जो धार्मिक संस्था की आड़ में दुर्जनो को प्रबंधन प्रमुख बनाकर पालको को प्रताड़ित करने के अपने असीम ज्ञान एवं क्षमताओं का बेहूदा प्रदर्शन कर रहे हैं ।
बच्चों ने स्कूलों का दरवाजा तक नहीं देखा किंतु पालकों के दरवाजे तक स्कूलों का नोटिस जरूर आ गया जैसे पालक अनुबंधित है (स्कूल प्रबंधन को बिना सेवा लिए भी भुगतान करना ही होगा)
निजी स्कूल प्रबंधन टीचर्स के वेतन को आधार बनाकर उनकी वेतन लागत से भी 10 गुना ज्यादा शिक्षण शुल्क की मांग कर रहे हैं ऑनलाइन शिक्षा के मानक शिक्षा विभाग द्वारा तय किए जाएं
(केवल फोटो और वीडियो अपलोड करके ऑनलाइन शिक्षा कारगर सिद्ध नहीं हो सकती)
राजनांदगांव में स्कूलों की इन मनमानियां के चलते कोरोना पीड़ित पालक मंच बन गया है जिसमें पालकों को हो रही परेशानी की आवाज जिला प्रशासन एवं प्रदेश प्रशासन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है इस कोरोना पीड़ित पालक मंच के संयोजक श्री विकास बाफना ने बताया कि निजी स्कूलों ने इस कोरोना काल में मानवता से परे मनमानियों की सारी हदें पार कर दी हैं ।
1 सर्वप्रथम पालकों की अनुमति के बिना बिना स्तरहीन ऑनलाइन शिक्षा का दिखावा
2 उसके बाद माननीय हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन करते हुए शिक्षण शुल्क को बढ़ाकर मांगना
3 उसके बाद फीस जमा नहीं करने पर ऑनलाइन शिक्षा से वंचित करने की धमकी देना
4 उसके बाद बच्चों को भी मैसेज कर पालकों पर भावनात्मक दबाव बनवाना
5 फिर ऑनलाइन शिक्षा से वंचित करना
6 ड्रॉप करने का विकल्प देना
7 ड्रॉप करने का विकल्प चुनने के बाद यदि पुनः प्रवेश मांगा जाएगा तो पूरे सत्र की मनमानी फीस देना ही होगा ऐसी शर्त रखना
8 स्कूलों से टीसी लेने की बात कहना
9 और तो और दो मुख्य निजी स्कूलों का आपसी सहमति ऐसी भी एक दूसरे की टीसी को एडमिशन भी नहीं देने की योजना बनाई।
इन्हीं मनमानीयों के विरोध में 21 सितंबर को कोरोना पीड़ित पालक मंच राजनांदगांव द्वारा जयस्तंभ चौक से जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय तक जिला प्रशासन ,माननीय मुख्यमंत्री, एवं माननीय महामहिम राज्यपाल छत्तीसगढ़ को ज्ञापन सौंपने का कार्यक्रम बारिश के कारण स्थगित हो गया था जो आगे प्रस्तावित है । और जल्द ही पालकों का भीषण विरोध शहर की सड़कों पर दिखेगा....
राजनांदगांव/शौर्यपथ / संचालक लोक शिक्षण संचालनालय इन्द्रावती भवन, नवा रायपुर द्वारा दिनांक 20 सिंतबर 2020 को पत्र लिखकर सभी कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया गया है कि निजी स्कूल छोड़ने वाले विद्यार्थियों को सरकारी स्कूलों में प्रवेश लेने के लिए प्रेरित किया जावे, क्योंकि प्रायवेट स्कूल एसोसियेशन के द्वारा यह लिखित दावा किया जा रहा है कि लगभग 2 लाख बच्चों ने निजी स्कूल छोड़ दिया है।
छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल का कहना है कि शाला त्यागी बच्चे जो ज्यादातर अंग्रेजी माध्यम से है और सरकार की सरकारी स्कूलें ज्यादातर हिन्दी मिडियम के है। ऐसी परिस्थिति में अंग्रेजी माध्यम से आने वाले बच्चों को जबरदस्ती हिन्दी मिडियम में प्रवेश दिया जाना उचित नहीं होगा, क्योंकि संचालक के पत्र में यह स्पष्ट नहीं है कि इन शालात्यागी बच्चों को सरकारी स्कूलों के किस मिडियम में प्रवेश दिया जाएगा।
पॉल का कहना है कि सरकार द्वारा विगत दो वर्ष पूर्व हर विकासखंड में अंग्रेजी मिडियम स्कूल आरंभ किया गया था और इस वर्ष सभी जिले में उत्कृष्ट अंग्रेजी मिडियम स्कूल आंरभ किया गया है, लेकिन स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा अब इन सभी शालात्यागी बच्चों को सरकारी हिन्दी मिडियम स्कूलों में प्रवेश दिलाने की योजना बनाई जा रही है।
पॉल ने बताया कि जिला शिक्षा अधिकारियों के द्वारा निजी इंग्लिश मिडियम स्कूलों से आने वाले बच्चों को भी सरकारी हिन्दी मिडियम स्कूलों में प्रवेश दिया जाना न्यायसंगत नहीं है। सरकार की नियत और नीति दोनों पर सवाल उठाया जाएगा, क्योंकि निजी इंग्लिश मिडियम स्कूल में जो बच्चा बचपन से इंग्लिश मिडियम में पढ़ा हो उसे कैसे हिन्दी मिडियम में प्रवेश दिलाया जा सकता है। शिक्षा विभाग इन बच्चों के जीवन व भविष्य के साथ इस प्रकार जान-बुझकर खिलवाड़ नहीं कर सकती है, इसलिए एसोसियेशन की यह मांग है कि अंग्रेजी माध्यम से आने वाले बच्चों को अंग्रेजी माध्यम में और हिन्दी माध्यम से आने वाले बच्चों को हिन्दी माध्यम में प्रवेश दिलाया जाए। बच्चों के जीवन व भविष्य के खिलवाड़ बर्दास्त नहीं किया जाएगा।
पॉल का कहना है कि बच्चा जब निजी स्कूल से सरकारी स्कूल में प्रवेश लेगा, तो सबसे पहले उसकी किताबें और कोर्स नई होगी, क्योंकि प्रायवेट स्कूलों में ज्यादातर किताबें प्रायवेट प्रकाशक की पढ़ाई जाती है। उसके पश्चात् सभी स्कूलों में कम से कम 50 प्रतिशत कोर्स पूर्ण किया जा चुका है ऐसे परिस्थिति में जो बच्चे प्रायवेट स्कूल छोड़कर सरकारी स्कूल में जा रहे है उनका क्या होगा?
शौर्यपथ लेख / क्रिस्टोफर पाल और नजरुल खान ये दो ऐसे बेवकूफ इंसान है जो शिक्षा के लिए आज लड़ाई जमीनी स्तर पर लड़ रहे है और समझदार पालक सोशल मिडिया पर ज्ञान पेल रहे है . मुझे इनकी शिक्षा और निजी स्कूल की लड़ाई देख कर एक किस्सा याद आया . आज से तीन साल पहले की बात थी मेरे निक्की का स्कूल फीस समय पर नहीं दे पाने के कारण डीएवी स्कूल हुडको से बार बार फोन आ रहे थे जब भी फोन आता मई कॉल पर अपनी मज़बूरी बता कर कुछ दिनों बाद फीस जमा करने की बात बता देता किन्तु मेरे बताये समय का इंतज़ार भी नहीं हो रहा था स्कूल प्रबंधन को रोज रोज के काल और मेरे निक्की द्वारा फीस जमा करने के लिए स्चूओल से मेसेज आना बंद नहीं हुआ तब मैंने स्कूल के प्राचार्य से मुलाकात की और अपनी समस्या राखी तथा ये भी बताया कि मेरे द्वारा समय माँगा गया किन्तु इसके बावजूद भी लगातार मेसेज किया जा रहा है . मुझे मेसेज किया जा रहा है यहाँ तक तो सही है किन्तु मेरे बेटे के द्वारा मेसेज कर मेरे लाल के बाल मन में क्यों जहर घोला जा रहा है उसे क्यों सबके सामने शर्मिंदा किया जा रहा है प्रिंसिपल द्वारा इतनी बड़ी बात होने पर भी नियमो की दुहाई देने और फीस जमा करने की बात कही गयी जबकि शासन के नियमानुसार फीस के लिए बच्चो को परेशां करना मानसिक आघात पहुँचाना अपराध की श्रेणी में आता है किन्तु लालच से भरपूर स्कूल प्रबंधन को किसी से कोई मतलब नहीं मतलब है तो फीस से खैर मैंने जो समय माँगा था उस तय समय पर मेरे द्वारा फीस भर दी गयी पुरे पेनाल्टी सहित . पेनाल्टी सहित फीस भरने के बाद जब प्रिंसिपल से मुलाकात की और कहा की सर मेरे द्वारा देर से फीस भरने के कारण आपने जो पेनाल्टी तय की थी उसे भी भर दिया गया अब आपकी बारी है पेनाल्टी भरने की प्रिंसिपल के शब्द थे कि हम कौन सी पेनल्टी भरे तब मैंने कहा कि इतने दिनों आपने जो बच्चे को मानसिक पीड़ा दी उसकी पेनाल्टी कौन भरेगा मुझे अच्छे से याद है कि प्रिन्सिपल के वो वाक्य देर आपने की हमने हमारा काम किया . अगर आपको अच्छा नहीं लगता तो आप बच्चो को स्कूल से निकाल सकते है हम हर मामले में सही है . हालंकि प्रिंसिपल को समझ में आया की गलती उसकी भी है किन्तु बच्चो के भविष्य के लिए हमने बात खत्म की .
लेकिन उसके कुछ दिनों बाद ही एक वाकया हुआ तब वार्षिक उत्सव की तैयारी चलने लगी जिसके लिए जो जो प्रतिभागी था उसे समय समय पर स्कूल बुलाया जाता था मेरा लाल भी इस प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और निर्धारित समय पर स्कूल बस से जाने लगा लगातार १० दिनों तक जाने के बाद जिस दिन फाइनल सलेक्शन होना था उस दिन जाने का समय परिवर्तन हुआ जिसकी सुचना स्कूल से मिलनी चाहिए थी किन्तु मुझे समय पर नहीं मिली और मेरा लाल फाइनल सलेक्शन के दिन नहीं जा पाया इस तरह वो आयोजन में प्रतिभागी नहीं बन पाया जिसके कारण काफी उदास हो गया रोया भी मुझे इस बात का पता चलते ही मई अपने बेटे को स्कूल लेकर गया और प्रिंसिपल से मुलाक़ात की सारी बात राखी तब प्रिंसिपल का दो शब् मुझे स्तभ कर गया सॉरी स्टाफ से गलती हो गयी . किन्तु मुझे सार्री मंजूर नहीं था जिस तरह फीस की देरी की सजा मुझे मिली मेरे बच्चे को मिली उसी तरह इस लापरवाही की सज़ा भी जिम्मेदार को मिलनी ही चाहिए मई प्राचार्य के सामने अड़ गया कि जिसकी भी गलती के कारण मेरा बेटा प्रतिभागी नहीं बन पाया उसे सजा मिलनी ही चाहिए क्योकि मेरे द्वारा आपके स्कूल का हर नियम का पालन किया गया अब ये स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी है कि जिसने भी गलती की है उसे सजा मिले काफी बहस और तर्क वितर्क के बाद स्कूल के प्राचार्य ने जिम्मेदार लोगो को जिसमे बस कंडक्टर जिसने फोन पर सूचित नहीं किया , मेसेज भेजने वाले स्टाफ जिसने समय पर मेसेज नहीं भेजा , नहीं आने का कारण नहीं पूछने वाले टीचर पर कार्यवाही की बात स्व्वेकार की तब मैंने कहा की इन सबके जिम्मेदार आप भी है जिनके अंडर में ये सारा कार्य हो रहा है मुखिया होने के नाते गलती आपकी भी है आखिर कार स्कूल के प्राचार्य ने भी माफ़ी मांगी इन सब वाक्य में मैंने अपने बेटे को साथ रखा . जब स्कूल से बाहर निकले तब मैंने बेटे को बताया कि बेटा स्कूल फीस किसी मज़बूरी वश देर से देने के बाद भी सजा के तौर पर पेनाल्टी भरी क्योकि गलती हमारी थी कि हमने स्कूल फीस समय पर जमा नहीं कराई और इस गलती के लिए पेनाल्टी भरने के साथ स्कूल प्रबंधन से देर से फीस जमा करने के लिए माफ़ी भी मांगी उसी तरह इस बार तुम वार्षिक उत्सव में प्रतिभागी नहीं बने इसमें गलती तुम्हारी नहीं स्कूल प्रबंधन की थी और इस लिए स्कूल प्रबंधन से न्याय के लिए लड़ाई लड़ी उनके माफ़ी मांगने से जीत नहीं हुई जीत इस लिए हुई कि तुम कही गलत नहीं थे वो गलत थे इसलिए मन में ये ना सोंचो की वार्षिक उत्सव में भाग नहीं ले पाए अगले साल फिर मेहनत करना और भाग लेना . किन्तु भगवान को शायद मंजूर नहीं था अगले साल मेरा बेटा ही इस दुनिया में नहीं रहा उसे तो इश्वर ने सभी प्रतियोगिता से मुक्त कर दिया स्कूल की भी और जिन्दगी की भी .
आज उन्ही बच्चो पर अन्याय ना हो और बच्चो का हक उन्हें मिले इस लिए शहर के दो पागल इंसान क्रिस्टोफर पाल और नजरुल खान निजी स्कूल की मनमानी निति के खिलाफ लड़ रहे है और कुछ पालक तो साथ है किन्तु बहुतेरे पालक दुर से सोशल मिडिया से ज्ञान दे रहे है किन्तु साथ नहीं आ रहे है . अरे समझदार पालको नजरुल खान और क्रिस्टोफर पाल जैसे लोग अपने बच्चो के लिए नहीं लड़ रहे है आपके लिए लड़ रहे है उन निजी स्कूल वालो से जो सालो पहले एक छोटे से घर में रहते थे एक छोटी सी किराए की बिल्डिंग में स्कूल चलाते थे आज लाखो की गाडियों में घूम रहे है करोडो की बिल्डिंग के मालिक है लाखो रूपये घुमने फिरने में खर्च करते है लखपति से करोडपति हो गए है किन्तु वैश्विक महामारी के समय भी ऐसे पेश आ रहे है कि अगर फीस नहीं मिली तो बर्बाद हो जायेंगे बस एक बार दिल में हाँथ रखकर ये सोंचो कि जो आज स्कूल के मालिक है वो कुछ साल पहले कैसी जिन्दगी जी रहे थे और कितनी संपत्ति थी और अब कितनी है . नजरुल खान और क्रिस्टोफर पाल जैसे लोग बेवकूफ नहीं है बेवकूफ तो वो है जो अपने बच्चो के साथ हो रहे अन्याय के बाद भी मौन है शिक्षा पर सबका अधिकार है किन्तु शिक्षा को बेचने वाले को ये बात तभी समझ आएगी जब आप लोग संगठित हो जाओगे नहीं तो आज नहीं तो कल आपके बच्चो के कंधो का सहारा लेकर ये निजी स्कूल वाले लालची प्रवित्ति के लोग आपको बेइज्जत करते रहेंगे साथ ही बच्चो के बालमन के साथ खिलवाड़ मै तो बेवकूफ नजरुल खान के साथ हु मै तो बेवकूफ क्रिस्टोफर के साथ हूँ क्योकि मै बेवकूफ हूँ लेकिन एक पिता हूँ जो अपने बच्ची के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकता और लालची लोगो का साथ नहीं दे सकता समझदारी से अच्छा बेवकूफ कहलाना पसंद करूँगा क्योकि अपने बच्ची के साथ अन्याय नहीं होने दूंगा . हाँ मै क्रिस्टोफर और नजरुल जैसे लोगो के साथ हूँ जो शिक्षा के लिए लड़ाई लड़ रहे है . आप किसके साथ है ये आपके ऊपर है क्योकि बच्चे आपके है उनके भविष्य की चिंता आपको ज्यादा है सबसे ज्यादा .... ( शरद पंसारी - सम्पादक , दैनिक शौर्यपथ समाचार पत्र )
राजनांदगांव / शौर्यपथ / भारत का संविधान की अनुच्छेद 21 (ए) के अनुसार राज्य के द्वारा सभी बच्चों को नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराया जायेगा। नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के अनुच्छेद 8 (व्याख्या) (1) व (2) के अनुसार राज्य सभी बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने और अनिवार्य दाखिले, उपस्थिति और प्राथमिक शिक्षा पूर्ण करने को सुनिश्चित करने के लिए बाध्य है।
छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल का कहना है कि संविधान या आरटीई कानून सिर्फ कमजोर तबका को नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराया करने की बात नहीं करते है, बल्कि यह सार्वभौमिक है। कोई बच्चा जो भारत का नागरिक है, अमीर या गरीब, लड़का या लड़की, किसी भी जाति का हो, उसे नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा पाने का अधिकार प्राप्त है।
पॉल का कहना है कि प्रदेश में स्कूली बच्चों के मौलिक अधिकार का हनन हो रहा है। कोरोना महामारी में अब मंदी के कारण लोगों की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो चुका है, जिसके कारण कई पालक अपने बच्चों की ट्यूशन फीस जमा करने की स्थिति में नहीं है। मात्र ऊंची फीस नहीं देने के कारण प्रायवेट स्कूलों के द्वारा बच्चों को शिक्षा से वंचित किया जा रहा है। इस सत्र 2020-21 में लगभग 2 लाख बच्चे प्रायवेट स्कूल छोड़ कर जा चुके है। सरकार शिक्षा को लेकर गंभीर नहीं है, शालात्यागी बच्चों का आकड़ा सरकार के पास नहीं है।
पॉल का कहना है कि प्रदेश के 8 हजार प्राईवेट स्कूलों में अध्ययनरत् 10 लाख बच्चों की नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा की चिंता करना भी सरकार का दायित्व है। शिक्षा पाना बच्चों का मौलिक अधिकार है और यह सरकार का दायित्व है कि सभी बच्चे नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्राप्त करे। लोक शिक्षण संचालनालय ने प्रायवेट स्कूल छोड़ रहे बच्चों को सरकारी स्कूलों में प्रवेश दिलाने के लिए दिनांक 20 सिंतबर 2020 को पत्र जारी किया है, लेकिन ज्यादातर बच्चे अंग्रेजी मिडियम स्कूलों से बाहर किये जा रहे है और सरकार इन बच्चों को किस सरकारी अंग्रेजी मिडियम स्कूल में प्रवेश दिलाने का प्रयास कर रही है यह समझ से परे है, क्योंकि ज्यादातर सरकारी स्कूल तो हिन्दी मिडियम के है। पॉल ने प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर प्रायवेट स्कूलों में अध्ययनरत् 10 लाख बच्चों की इस सत्र 2020-21 की ट्यूशन फीस वहन करने की मांग की है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
