July 24, 2026
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    शौर्यपथ / सूर्य सौरमंडल का आधार है। सभी ग्रह सूर्य की परिक्रमा करते हैं। सूर्य के कारण पृथ्वी पर जीवन है और दिन रात होते हैं। सूर्य अग्नि तत्व और क्रूर स्वभाव का ग्रह पुर्लिंग की श्रेणी में आता है। इसकी राशि सिंह है और मेष राशि में उच्च होते हैं। यह कृतिका, उत्तराफाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा नक्षत्रों का स्वामी है। सूर्य की स्वराशि सिंह है, उच्च राशि मेष है और नीच राशि तुला है। सूर्य की महादशा छह वर्ष की होती है। मेष,वृषभ, सिंह, धनु और कुंभ लग्नों में सूर्य कारक और शुभ होता है। सूर्य की मित्र राशियां कर्क, वृश्चिक और मीन है ‌और शत्रु राशियां वृष,तुला और कुंभ है। सूर्य जिस स्थान पर होता है उस भाव से सप्तम भाव को पूर्ण दृष्टि से देखता है। सूर्य सिंह राशि के 20 अंश तक मूल त्रिकोण में रहता है।
    सूर्य की प्रकृति स्वस्थ,वर्ण क्षत्रिय और रस कटु होता है। सूर्य का व्यक्ति के सिर और मुख पर आधिपत्य होता है। काल पुरुष के अनुसार सूर्य आत्म कारक ग्रह होता है। शुक्र,शनि, राहु, सूर्य के शत्रु ग्रह हैं। बुध सम है। चंद्र ,मंगल, गुरु मित्र हैं। सूर्य के देव शिव हैं और उनका गोत्र कश्यप है। सूर्य आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य और अश्लेषा नक्षत्र में बलवान होता है। सूर्य प्रशासनिक सेवाओं का कारक होता है यह व्यक्ति को नेतृत्व क्षमता प्रदान करता है।
    जिनकी कुंडली में सूर्य अशुभ होता या नीच का होता है तो वह व्यक्ति अपने पिता से दूरी बना लेता है क्योंकि कुंडली में सूर्य पिता का कारक होता है। पिता को प्रसन्न करने से सूर्य प्रसन्न हो जाते हैं। सूर्य कन्या की कुंडली में पृथक्कारी ग्रह होता है। यदि सूर्य सप्तम भाव में हो या सप्तम दृष्टि हो और सप्तम भाव पर कोई शुभ प्रभाव न हो तो द्विविवाह योग बनाता है। सूर्य यदि अपनी उच्च राशि मेष को सप्तम दृष्टि से देखें तो उससे भाव की हानि करता है। अष्टम में सूर्य या अष्टमेश होने पर सूर्य को दोष नहीं लगता है। अष्टम में सूर्य या अष्टमेश सूर्य होने से व्यक्ति के अंदर रिसर्च की भावना होती है। वह शोध कार्य में रुचि रखता है। पैतृक सम्पत्ति या अचानक धन लाभ के योग बनते हैं। यदि आपकी कुंडली में सूर्य का अशुभ प्रभाव पड़ रहा है तो आप को नियमित रूप से गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए। तांबे के लोटे से सूर्य को प्रात:काल जल प्रदान करना चाहिए। पिता एवं पिता तुल्य व्यक्तियों की सेवा सम्मान करना चाहिए। माणिक्य सूर्य का रत्न है। कमजोर सूर्य को पुष्ट करने के लिए माणिक्य रत्न को भी धारण किया जा सकता है।

    जीवनशैली / शौर्यपथ / जीवन में स्थिरता लाने के लिए मानसिक शांति और संतुष्टि आवश्यक है। मन अगर अशांत रहता है तो हर कदम पर परेशानियों से सामना हो सकता है। हमारे घर या कार्यक्षेत्र में मौजूद वास्तु दोष भी मानसिक तनाव को बढ़ाते हैं। वास्तु में कुछ आसान से उपाय बताए गए जो मानसिक शांति प्राप्त करने में सहायक हो सकते हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।

    मानसिक शांति पाने के लिए कभी भी अपना घर किसी एकांत जगह पर न बनवाएं। घर हमेशा आबादी में होना चाहिए। घर को हमेशा स्वच्छ रखें। घर में परिजनों से धीमी आवाज में और प्रेमपूर्वक बात करें। घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर ऊं और स्वास्तिक का चिह्न बनाएं। सुबह और शाम घर या कार्यक्षेत्र में अगरबत्ती जलाएं। प्रतिदिन गायत्री मंत्र का जाप करें। सुबह उठकर घर के बुजुर्गों के पैर छुएं। रचनात्मक कार्यों में रुचि बढ़ाएं। भूख से कम खाना खाएं। परिवारिक समस्याओं को लेकर मन अशांत रहता है तो कच्चे दूध को कुल्लड़ में लें और शहद मिलाकर उसे घर, मुख्य द्वार पर छिड़क दें। घर में कभी भी मकड़ी का जाला न बनने दें। इससे मानसिक तनाव बढ़ता है। रसोईघर को हमेशा स्वच्छ रखें। घर के किसी कोने में अंधेरा न रहने दें। सोने से पहले अपने बिस्तर की सफाई करें और स्वच्छ चादर बिछाएं। शयनकक्ष में कभी भी पैर दरवाजे की ओर कर न सोएं। सोते वक्त बेड के नीचे या इसके सिरहाने जूते-चप्पल नहीं होने चाहिए। शयनकक्ष में झाड़ू, अंगीठी, नशीले पदार्थ नहीं रखना चाहिए।

    सेहत / शौर्यपथ / अक्सर हेल्दी फूड का सेवन हम यह सोचकर किसी भी समय कर लेते हैं कि यह तो सेहत के लिए अच्छा ही होगा। लेकिन क्या आप जानते हैं सही खाने का सेवन गलत समय पर करने से आपकी सेहत को फायदा नहीं नुकसान होता है। आइए जानते हैं ऐसे 5 हेल्दी फूड जिनका गलत समय पर सेवन करने से सेहत को होता है भारी नुकसान।
    खाली पेट केला-
    केला आपकी सेहत और खूबसूरती दोनों का ध्यान रखता है। बावजूद इसके खाली पेट केले का सेवन करना आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। खाली पेट केला खाने से शरीर की ऊर्जा खत्म होने के साथ व्यक्ति इंटेस्‍टाइनल सिंड्रोम और दस्त जैसी परेशानी का सामना कर सकता है। अगर आप केले का सेवन ब्रेकफास्ट में करना चाहते हैं तो उसका शेक बनाकर पिएं।
    रात को चावल खाना -
    चावल में कार्बहाइड्रेट की मात्रा अधिक होने की वजह से यह पचने में लंबा समय लेते हैं। इसके अलावा इसमें मौजूद हाई कैलोरी आपके बढ़ाते वजन का कारण भी बन सकती है।
    ज्‍यादा गर्म दूध का सेवन-
    दूध में मौजूद लैक्टोज की अधिक मात्रा उम्र बढ़ने के साथ इसके पचान में दिक्कत पैदा करती है। हल्के गर्म दूध का सेवन शाम को करने से रात को नींद अच्छी आती है।
    खाने से पहले दही का सेवन-
    दही में मौजूद लैक्टिक एसिड खाली पेट आपको नुकसान पहुंचा सकता है। यह आपके पेट की अम्लता को कम कर देता है। दही का सेवन रात के भोजन के बाद और सोने से एक घंटे पहले करने से शरीर में प्रोटीन की मात्रा बढ़ती है और मांसपेशियों का विकास होता है।
    रात के भोजन में डबल चीज फूड-
    टोस्ट हो या पिज्जा चीज के बिना दोनों का ही स्वाद अधूरा है। पर क्या आप जानते हैं गलत समय पर चीज का सेवन आपके पेट को नुकसान पहुंचा सकता है। चीज में फैट की मात्रा अधिक होने की वजह से इसे पचाना आसन नहीं होता। यही वजह है कि चीज का सेवन रात या शाम को करने से बचना चाहिए।

    शौर्यपथ / ऑयली स्किन वाले लोग जानते हैं कि वो हर ब्यूटी प्रॉडक्ट आंख बंद करके इस्तेमाल नहीं कर सकते क्योंकि घरेलू हो या बाजार के ब्यूटी ट्रिक्स उन्हें लगभग सारी ही चीजें फायदे की जगह साइडइफेक्ट्स दे देती हैं। ऐसे में कुछ भी इस्तेमाल करने से पहले वो काफी सोच-विचार करते हैं। आपकी या आपके किसी दोस्त की भी ऑयली यानी तैलीय त्वचा है, तो आप इन घरेलू फैसपैक को उन्हें सजेस्ट कर सकते हैं, जिससे कि उनके चेहरे पर नेचुरल निखार आ सके और वो भी बिना साइड इफेक्ट्स के-
    मुल्तानी मिट्टी फैसपैक
    मुल्तानी मिट्टी ऐसी चीज है जिसे आप बस पानी या गुलाब जल के साथ भी घोलकर हर दिन चेहरे पर लगाएं, तो फेस पर तेल आने की समस्या दूर होने लग जाएगी। वैसे इस पैक के असर को और बढ़ाना चाहते हैं तो इसमें नींबू का रस और दही मिलाया जा सकता है। आप इस फैसपैक को गर्मियों में इस्तेमाल करेगी, तो इसका असर ज्यादा होगा।
    खीरे का फैसपैक
    खीरे को कद्दूकस कर लें और उसमें एक टी-स्पून नींबू का रस मिलाएं। इस मिक्स को फ्रिज में रख दें और ठंडा हो जाने पर स्किन पर लगाएं। चाहे तो आप इसे आइस ट्रे में डालकर जमा सकती हैं और फिर क्यूब्ज से चेहरे की मसाज कर सकती हैं। ये दोनों तरीके आपको ऑयली स्किन से छुटकारा दिलाने के साथ ही पोर्स के साइज को भी छोटा करने में मदद करेंगे।
    नीम फैसपैक
    आपको नीम की पत्तियां धोकर पीस लेनी है, इसके बाद इसमें नीबू का रस मिला लें। आप इसे रोजाना न लगाएं बल्कि हफ्ते में तीन से चार बार लगा सकते हैं। इससे आपके चेहरे पर जितने भी दाग-धब्बे हैं, वो दूर हो जाएंगे। साथ ही दिनों-दिन आपका चेहरा निखरता जाएगा।
    मसूर दाल फैसपैक
    दो चम्मच मसूर की दाल का पाउडर लें और उसमें एक चम्मच दही व गुलाब जल मिलाएं। इस पैक को अच्छे से मिक्स करने के बाद चेहरे पर लगाएं। यह न सिर्फ ऑयली स्किन की समस्या को दूर करेगा बल्कि स्किन भी ज्यादा सॉफ्ट बन जाएगी।

    सेहत / शौर्यपथ /कोरोनाकाल में घर से लेकर ऑफिस तक के काम का दबाव बढ़ गया है। ऐसे में रात में बच्चों को सुलाने में मशक्कत करनी पड़े तो मन में खीज पैदा होना लाजिमी है। अगर काफी देर तक घुमाने-टहलाने और लोरी सुनाने के बाद भी आपके लाडले की आंखों में नींद नहीं भरती तो परेशान मत होइए। लंदन के मशहूर मसाज विशेषज्ञ फिलिप डेविस ने मालिश की ऐसी विधि सुझाई है, जिससे आपका बच्चा मिनटों में नींद के आगोश में चला जाएगा।
    मां-बाप की मशक्कत-
    -मां-बाप को बच्चे के जन्म के शुरुआती एक साल में 04 घंटे 44 मिनट की औसत नींद मिलती है
    -50 रातों की नींद गंवाने के बराबर है यह आंकड़ा, स्वस्थ वयस्कों को आठ घंटे रोजाना सोना चाहिए
    -54 मिनट औसतन रोजाना बच्चे को सुलाने में लगते हैं, तीन बार औसतन रात में उठता है बच्चा
    -02 मील रोजाना चलना-फिरना होता है मां-बाप का बच्चे को बहलाने, फुसलाने, सुलाने की प्रक्रिया में
    पूरे शरीर में लगाएं तेल-
    -सरसों, नारियल या जैतून का तेल लें, सिर से लेकर पांव तक हल्के हाथों से हर एक अंग में लगाएं
    -अब ऊपर से नीचे की तरफ धीमी गति से हाथ फिराते हुए 10 से 15 मिनट तक बच्चे की मालिश करें
    बातों में उलझाए रखें-
    -मसाज करते समय चेहरे पर मुस्कराहट जरूर बनाए रखें
    -बच्चे से धीमे स्वर और तुतलाती भाषा में प्यार-भरी बातें करें
    -तेज मालिश करने से बचें, बच्चा रोए तो उस पर चिल्लाएं नहीं
    खास जगहों पर मसाज जरूरी-
    -नाक का ऊपरी हिस्सा : दोनों भौहों के बीच नाक के शुरुआती हिस्से पर अंगूठे और तर्जनी उंगली से हल्की मालिश करें। बच्चे का मन शांत करने में मदद मिलती है।
    -हथेली : दोनों हथेलियों पर धीमे-धीमे से हाथ फिराएं। पांचों उंगलियों के बीच के स्थान पर कम से कम 30 सेकेंड तक हल्की मसाज दें। दांत दर्द की समस्या दूर होगी।
    -पेट : दर्द, गैस, कब्ज की समस्या से राहत दिलाने और पाचन तंत्र को मजबूत बनाने के लिए पेट पर बाईं से दाईं ओर गोलाई में हल्के हाथ से पांच मिनट तक मसाज करें।
    -पंजे : अंत में बच्चे के दोनों पैरों के पंजे अपने हाथों में लें। अब पंजे के बीच के हिस्से को अंगुठे से 10 से 15 सेकेंड के लिए दबाएं। उसका मस्तिष्क पूरी तरह से शांत हो जाएगा।
    मन शांत करने में मददगार-
    -हल्के हाथों की मालिश लव हार्मोन ‘ऑक्सिटोसिन’ का स्तर बढ़ाने के साथ ही स्ट्रेस हार्मोन ‘कॉर्टिसोल’ का उत्पादन घटाने में कारगर
    -इससे बच्चे के मस्तिष्क में मौजूद अतिरिक्त ऊर्जा के शांत पड़ने से तन-मन को सुकून महसूस होता है, शरीर में सुस्ती भी छाती है
    गुनगुना दूध पिलाना भी फायदेमंद-
    -सोने-जगने का समय तय करें, उसे रोज अमल में भी लाएं
    -रात में बिस्तर पर आने के बाद बच्चे को गुनगुना दूध पिलाएं
    -कमरा हल्का ठंडा रखें, मुलायम गद्दे पर सुलाएं, लोरी सुनाएं

    सेहत / शौर्यपथ / रक्तचाप बढ़ने के डर से एकदम फीका खाना खाते हैं? अगर हां तो संभल जाइए। नमक के सेवन में जरूरत से ज्यादा कटौती संक्रामक रोगों का सबब बन सकती है। लंदन स्थित रॉयल फ्री हॉस्पिटल का हालिया अध्ययन तो कुछ यही बयां करता है।
    शोधकर्ताओं के मुताबिक नमक की अति की तरह ही, इसकी कमी भी बुरी है। दरअसल, लंबे समय तक कम मात्रा में नमक खाने से शरीर में ‘इंटरल्यूकिन-17’ का उत्पादन ठप पड़ जाता है। ‘इंटरल्यूकिन-17’ एक तरह की श्वेत रक्त कोशिका है, जो विषाणुओं को पहचानने और उन्हें नष्ट करने में प्रतिरोधक तंत्र की मदद करती है। इसकी कमी से इनसान संक्रामक रोगों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाता है।
    किडनी रोगियों के लिए घातक-
    -अध्ययन दल में शामिल प्रोफेसर जैक पमबेरटॉन-व्हिटली की मानें तो किडनी रोगियों को चिकित्सकीय सलाह के बगैर खाने में नमक की मात्रा नहीं घटानी चाहिए। खासकर ‘जिटेलमैन सिंड्रोम’ और ‘बार्टर सिंड्रोम’ से जूझ रहे मरीजों को। दरअसल, इन दोनों ही बीमारियों में किडनी से सोडियम छनने की प्रक्रिया तेज हो जाती है। यही वजह है कि इनकी जद में आए मरीजों को बार-बार फंगल और मूत्र संक्रमण से जूझना पड़ता है।
    डायबिटीज के मरीज भी रहें सतर्क-
    व्हिटली ने बताया कि डायबिटीज रोगी या फिर थायरॉयड और डिप्रेशन के इलाज में कारगर दवाएं खाने वाले मरीजों को बार-बार पेशाब लगने की शिकायत सता सकती है। इससे उनके शरीर में सोडियम का स्तर घटने का जोखिम रहता है। सोडियम की कमी चक्कर, कमजोरी, सुस्ती, थकान और भ्रम की शिकायत को जन्म दे सकती है। अध्ययन के नतीजे ‘जर्नल नेचर कम्युनिकेशन्स’ के हालिया अंक में प्रकाशित किए गए हैं।
    शरीर को कितनी जरूरत-
    -स्वस्थ वयस्कों को रोजाना 2300 मिलीग्राम अधिकतम सोडियम का सेवन करना चाहिए
    -अमेरिकी सीडीसी के मुताबिक 3400 मिलीग्राम से ज्यादा सोडियम खा रहे औसत वयस्क
    ये तीन खतरे भी मौजूद-
    1.सोडियम की मात्रा में अत्यधिक कमी इंसुलिन के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित होने का सबब बन सकती है, जिससे ब्लड शुगर बढ़ने लगता है।
    2.शरीर के विभिन्न अंगों में खून की आपूर्ति करने के लिए हृदय को सोडियम की जरूरत पड़ती है, इसकी कमी से हार्ट फेल होने का खतरा रहता है।
    3.विभिन्न अध्ययनों में देखा गया है कि सोडियम का स्तर घटने से बैड कोलेस्ट्रॉल और ट्राईग्लिसराइड का स्तर बढ़ता है, जो दिल के लिए घातक है।

    सेहत / शौर्यपथ घर में अकेले रहने और नकरात्मक सोच के चलते मस्तिष्क पर अधिक जोर देने पर अल्जाइमर बीमारी होने की संभावना रहती है। यह बीमारी बुजुर्गों में अधिक मिलती है। इससे दूर रहने के लिए व्यक्ति को सभी माहौल में रहने की आदत होनी चाहिए। साथ ही लोगों से संपर्क रखना चाहिए।
    उम्र बढ़ने के साथ ही तमाम तरह की बीमारियां हमारे शरीर को निशाना बनाना शुरू कर देती हैं। वहीं अल्जाइमर भी इसमें प्रमुख बीमारी है, यह बुजुर्ग लोगों में देखने को मिलती है। उम्र बढ़ने के साथ-साथ याद करने की क्षमता कम होती रहती है और बातों को भूल जाते हैं। इस बीमारी को कम करने के लिए हर साल 21 सितंबर को विश्व अल्जाइमर्स-डिमेंशिया दिवस मनाया जाता है ।
    इसी के तहत 21 से 27 सितंबर तक चलने वाले राष्ट्रीय डिमेंशिया जागरूकता सप्ताह के तहत प्रदेश के हर जिले में विभिन्न कार्यक्रमों के जरिये इस बीमारी की सही पहचान और उससे बचाव के उपायों के बारे में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
    कोलंबिया अस्पताल के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. नीरज अग्रवाल ने बताया कि अल्जाइमर की बीमारी में याददाश्त और सोचने की क्षमता खत्म हो जाती है। महामारी के समय में जो लोग अल्जाइमर से पीड़ित हैं उन्हें ज्यादा देखभाल की होती है। उन्हे हाथ की सफाई, मास्क पहनने, सामाजिक दूरी को बनाए रखने के लिए याद दिलाना जरूरी है।
    महामारी ने लोगों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित किया है। वे इस वजह से पोस्ट ट्रॉमाटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (पीएसटीडी) से पीड़ित हो गए हैं। इसकी वजह से अल्जाइमर से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ सकती है। अर्टफिसियल इंटेलिजेंस जैसी कई तकनीक हैं, जिससे अल्जाइमर की बीमारी का इलाज बहुत ही प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। इस बीमारी के में परिवार और समाज के लोगों का सहयोग बेहद जरूरी है।

    सेहत / शौर्यपथ / गुस्सा, चिड़चिड़ापन और धीरे-धीरे रोजमर्या की छोटी-छोटी चीजें भूलने लगना, ये सभी अल्जाइमर के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं। अल्जाइमर एक तरह का मानसिक विकार है। इस बीमारी में दीमाग की कोशिकाओं पर असर पड़ता है।
    चिकित्सकों के मुताबिक शराब और धूम्रपान करने वालों में इसके होने का खतरा ज्यादा रहता है। यही कारण है कि अब युवा वर्ग में भी ये बीमारी पाई जाने लगी है। जीवन शैली में बदलाव के कारण केवल पुरुष ही नहीं बल्कि महिलाएं भी इससे ग्रस्त पाई जाती हैं।
    पारस अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभाग के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. रजनीश कुमार का कहना है कि लोगों को खुलकर इस बीमारी के बारे में जागरूक करना जरूरी हो गया है। तनाव, श्रवण दोष, मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता, डायबिटीज और सामजिक रूप से अलग रहना इसके मुख्य कारणों में शामिल है। इसके अलावा धूम्रपान और शराब का अधिक सेवन भी इस बीमारी का खतरा बढ़ाता है।
    शराब पीने से एमिलॉयड प्लेक को खत्म करने की दिमाग की कोशिकाओं की क्षमता प्रभावित होती है और ऐसे लोगों में अल्जाइमर विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है। तनावपूर्ण जीवन और कई कामों के बोझ की वजह से यह बीमारी होने पर याददाश्त की कमी होने लगी है।
    लॉकडाउन ने मरीजों की परेशानी बढ़ाई-
    कोलंबिया अस्ताल के सहालकार चिकित्सक डॉ. अपूर्वा शर्मा का कहना है कि अल्जाइमर की बीमारी एक प्रोग्रेसिव कंडीशन होती है, जिसमे मस्तिष्क की कोशिकाओं को याददाश्त, रास्ते, भाषा, ध्यान और योजना बनाने की क्षमता में कमी करता है। देखभाल करने वालों को अल्जाइमर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को क्वालिटी लाइफ प्रदान करने में मुश्किल आती है और यह तनावपूर्ण भी होता है।
    उन्होंने बताया कि इस बीमारी से ग्रस्त मरीजों को विशेष देखभाल की जरूरत होती है। लॉकडाउन ने अल्जाइमर के मरीजों के लिए थोड़ी मुश्किल बढ़ा दी है। ऐसे मरीज कहीं जा नहीं सकते, किसी से मिल नहीं सकते, इस तरह से उन पर साइकोलॉजिकल दबाव बढ़ गया है।
    हमें जरुरत है की हम इन मरीजों को ज्यादा से ज्यादा समय दें ताकि वो अच्छे से रिकवरी कर सकें। उन्होंने बताया कि कोविड-19 का समय खासकर वृद्ध मरीजों के लिए बहुत ही मुश्किल भरा रहा है और उनको डायगनोसिस करने में बहुत ही कमी आई है।
    65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में ये दिक्कत ज्यादा-
    आर्टेमिस अस्पताल के6 न्यूरोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. सुमित सिंह का कहना है कि जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, याददाश्त प्रभावित होती जाती है, लेकिन विस्मृति किसी भी उम्र में हो सकती है। अधिकांश लोगों में भूलने की समस्या उम्र के साथ-साथ बढ़ती जाती है।
    65 वर्ष से अधिक उम्र के कम से कम आधे से अधिक लोगों का कहना है कि अपनी युवावस्था की तुलना में अब वे चीजें ज्यादा भूलने लगे हैं। उन्हें वृद्धावस्था का अनुभव होने लगता है, भूलने की यह समस्या उम्र बढऩे के कारण हो रही हो, यह जरूरी नहीं, क्योंकि वृद्धावस्था के दौरान पर्याप्त दिमागी कसरत नहीं होती है। इसलिए, दिमाग और शरीर दोनों को सक्रिय बनाए रखने वाली गतिविधियों में हिस्सा लेने से विस्मृति को कम किया जा सकता है।
    उनके अनुसार यदि आपको या किसी और को याददाश्त से जुड़ी कोई गंभीर समस्या महसूस होती है तो अपने डॉक्टर से बात करें। जो लोग इससे पीड़ित हैं उन्हें समस्या को आगे बढऩे से रोकने के लिए पहले से ही कदम उठाने चाहिए। रक्तचाप को नियंत्रित करना, कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज के उच्च स्तर को नियंत्रित करना और उसका इलाज करना और धूम्रपान से परहेज करने जैसे उपाय करके इससे बचा जा सकता है।
    अल्जाइमर के लक्षण-
    -चिड़चिड़ापन
    -सोचने की क्षमता कम होना
    -याददाश्त कम हो जाना
    -उदासीनता
    -भटकाव
    -व्यवहार में परिवर्तन

    धर्म संसार / शौर्यपथ / हिंदू कैलेंडर में अनुसार हर तीसरे साल में अतिरिक्त मास यानी अधिक मास जुड़ता है। इसका कारण सूर्य और चंद्रमा की वार्षिक चाल में 11 दिनों का अंतर होता है, जिसे पाटने के लिए हर तीसरे वर्ष अधिक को जोड़ दिया जता है। इससे वर्ष में संतुलन हो जाता है जबकि उसे वर्ष चंद्रमास 13 माह का हो जाता है। इस बार अधिकमास 18 सितंबर से प्रारंभ होकर 16 अक्टूबर 2020 तक रहेगा।
    अधिकमास के अधिपति देवता भगवान विष्णु है। इस मास की कथा भगवान विष्णु के अवतार नृःसिंह भगवान और श्रीकृष्ण से जुड़ी हुई है। इस मास में श्रीकृष्ण, श्रीमद्भगवतगीता, श्रीराम कथा वाचन और श्रीविष्णु भगवान के श्री नृःसिंह स्वरूप की उपासना विशेष रूप से की जाती है। इस माह उपासना करने का अपना अलग ही महत्व है।
    इस माह में अधिक मास के 33 देवताओं की पूजा का महत्व है- विष्णु, जिष्णु, महाविष्णु, हरि, कृष्ण, भधोक्षज, केशव, माधव, राम, अच्युत, पुरुषोत्तम, गोविंद, वामन, श्रीश, श्रीकांत, नारायण, मधुरिपु, अनिरुद्ध, त्रीविक्रम, वासुदेव, यगत्योनि, अनन्त, विश्वाक्षिभूणम्, शेषशायिन, संकर्षण, प्रद्युम्न, दैत्यारि, विश्वतोमुख, जनार्दन, धरावास, दामोदर, मघार्दन एवं श्रीपति जी की पूजा से बड़ा लाभ होता है।
    धर्म ग्रंथों के अनुसार श्री नृःसिंह भगवान ने इस मास को अपना नाम देकर कहा है कि अब मैं इस मास का स्वामी हो गया हूं और इसके नाम से सारा जगत पवित्र होगा। इस महीने में जो भी मुझे प्रसन्न करेगा, वह कभी गरीब नहीं होगा और उसकी हर मनोकामना पूरी होगी। इसलिए इस मास के दौरान जप, तप, दान से अनंत पुण्यों की प्राप्ति होती है।

    लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / अपने लक्ष्य के अनुसार ही आपको अपनी प्राथमिकताएं चुननी होती है। ऐसे में कई बार ऐसा होता है कि हम अस्थायी चीजों को अपनी प्राथमिकता समझकर उनपर अपना पूरा ध्यान देने लगते हैं, जबकि ऐसा करने से हमारे हाथ अंत में निराशा ही लगती है। आज हम आपको ऐसे टिप्स के बारे में बताएंगे, जिन्हेंं अपनी प्राथमिकताओं में शामिल करने से आप कभी भी निराश नहीं होंगे और आपको सफलता जरूर मिलेगी-
    टाइम टेबल बनाना
    आप कॉलेज, कोचिंग या ऑफिस कहीं भी जाते हैं, अगर आपने कोई लक्ष्य रखा है, तो सबसे पहले अपना टाइम टेबल बनाएं। आप अपने 24 घंटे को किस हिसाब से मैनेज करते हैं, यह बेहद जरुरी है। आप पेपर या मोबाइल चेक लिस्ट में टाइम टेबल सेव कर सकते हैं।
    नींद पूरी करें
    आप अपनी प्राथमिकताओं में नींद को भी जोड़ लें। आपके पास काम निपटाने के अलावा जितना भी टाइम बचता है, उसमें अपनी नींद पूरी कर लें। नींद न लेने की वजह से आपका दिमाग सही से काम नहीं कर पाएगा।
    आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति
    जीवन में कई बार ऐसे मौके आएंगे, जब आपका विश्वास डगमगाने लग जाएगा और आपको लगेगा कि आपका लक्ष्य व्यर्थ है, लेकिन उस वक्त आपको इन नकरात्मकताओं से दूर रहकर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना है।
    पेपर पर अपने लक्ष्य को लिखें
    इसके लिए आपको थोड़ी दिमागी कसरत भी करनी पड़ेगी। बेहतर होगा कि आप अपना लक्ष्य पेपर पर लिखकर उससे जुड़ी चुनौतियां भी लिख लें, इससे आपको उन चुनौतियों से कैसे लड़ना है, यह भी अंदाजा हो जाएगा।
    समय व्यर्थ करने वाले और नकरात्मक लोगों से दूरी
    आपको समय व्यर्थ करने वाले लोगों और नकरात्मक स्वभाव वाले लोगों से दूरी बनाकर रखनी है। इससे आप अपने लक्ष्य पर ध्यान दे पाएंगे।

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