July 24, 2026
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    लाइफस्टाइल/शौर्यपथ / वो शाख है ना फूल,
    अगर तितलियां ना हों,
    वो घर भी कोई घर है
    जहां बच्चियां ना हों.
    आज घर की रौनक और गर्व का दिन यानी बेटी दिवस है। बदलते परिवेश में भारत में बेटियों के प्रति नजरिए को लेकर बहुत बदलाव आया है लेकिन अभी भी भार त को बेटी के महत्व को समझने के लिए एक लम्बा रास्ता तय करना है।केवल आज के दिन ही नहीं, बल्कि आज से आप बेटियों के महत्व को समझते हुए उनके सपनों को उड़ने के लिए पंख दे सकते हैं।कोशिश करें, कि आप बेटियों के अस्तित्व को तलाशने में उनकी मदद करें। आइए, जानते हैं डॉटर्स डे पर कुछ जरूरी बातें-
    क्यों मनाया जाता है डॉटर्स डे
    बेटियों के लिए खास प्यार जताने के लिए डॉटर्स डे मनाया जाता है। सिर्फ बेटियों के लिए ही नहीं, बेटा , मां , पिता और यहां तक की दादा-दादी के लिए भी साल में एक खास दिन रखा गया है।
    भारत में क्यों मनाया जाता है डॉटर्स डे
    हालांकि, भारत में बेटी दिवस मनाने की एक खास वजह बेटियों के प्रति लोगों को जागरुक करना। इस दिन बेटी को न पढ़ाना, उन्हें जन्म से पहले मारना, घरेलू हिंसा, दहेज और दुष्कर्म से बेटियों को बचाने के लिए भारतीयों को जागरुक करना है। उन्हें यह समझाना कि बेटियां बोझ नहीं होती, बल्कि आपके घर का एक अहम हिस्सा होती हैं।
    बेटी दिवस के संदेश
    खिलती हुई कलियां है बेटियां
    मां बाप का दर्द समझती है बेटियां
    घर को रोशन करती है बेटियां
    लड़के आज हैं तो आने वाला कल है बेटियां
    Happy Daughters Day 2020
    सूरज बनने के बाद भगवान के पास जो रौशनी बची
    उसे बेटी बना कर हमारे घर भेज दिया
    Happy Daughters Day 2020
    बेटियां बाप की आंखों में छिपे ख्वाब को पहचानती हैं,
    और कोई दूसरा इस ख्वाब को पढ़ ले तो बुरा मानती हैं
    Happy Daughters Day 2020
    बेटी की हर ख्वाहिश पूरी नहीं होती,
    फिर भी बेटियां कभी भी अधूरी नहीं होतीं

    राजनांदगांव/शौर्यपथ / ऐसा समय जिसमें व्यक्ति एवं परिवार व्यापार से, सामाजिक व्यवहार से, शारीरिक व्याधियों से ,आर्थिक संसाधनों की कमी से लगातार संघर्षरत है
    ऐसे में शहर राजनांदगांव जिले एवं प्रदेश की निजी स्कूलों द्वारा जो मानवता का उत्कृष्ट उदाहरण दिया गया है उसे राजनांदगांव एवं प्रदेश के पालक कभी नहीं भूलेंगे ।
    शहर की मुख्यतः दो शिक्षण संस्थाएं जिसमें एक व्यक्तिगत नाम से चार स्कूलों का संचालन हो रहा है एवं दूसरी जो धार्मिक संस्था की आड़ में दुर्जनो को प्रबंधन प्रमुख बनाकर पालको को प्रताड़ित करने के अपने असीम ज्ञान एवं क्षमताओं का बेहूदा प्रदर्शन कर रहे हैं ।

    बच्चों ने स्कूलों का दरवाजा तक नहीं देखा किंतु पालकों के दरवाजे तक स्कूलों का नोटिस जरूर आ गया जैसे पालक अनुबंधित है (स्कूल प्रबंधन को बिना सेवा लिए भी भुगतान करना ही होगा)
    निजी स्कूल प्रबंधन टीचर्स के वेतन को आधार बनाकर उनकी वेतन लागत से भी 10 गुना ज्यादा शिक्षण शुल्क की मांग कर रहे हैं ऑनलाइन शिक्षा के मानक शिक्षा विभाग द्वारा तय किए जाएं
    (केवल फोटो और वीडियो अपलोड करके ऑनलाइन शिक्षा कारगर सिद्ध नहीं हो सकती)

    राजनांदगांव में स्कूलों की इन मनमानियां के चलते कोरोना पीड़ित पालक मंच बन गया है जिसमें पालकों को हो रही परेशानी की आवाज जिला प्रशासन एवं प्रदेश प्रशासन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है इस कोरोना पीड़ित पालक मंच के संयोजक श्री विकास बाफना ने बताया कि निजी स्कूलों ने इस कोरोना काल में मानवता से परे मनमानियों की सारी हदें पार कर दी हैं ।
    1 सर्वप्रथम पालकों की अनुमति के बिना बिना स्तरहीन ऑनलाइन शिक्षा का दिखावा
    2 उसके बाद माननीय हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन करते हुए शिक्षण शुल्क को बढ़ाकर मांगना
    3 उसके बाद फीस जमा नहीं करने पर ऑनलाइन शिक्षा से वंचित करने की धमकी देना
    4 उसके बाद बच्चों को भी मैसेज कर पालकों पर भावनात्मक दबाव बनवाना
    5 फिर ऑनलाइन शिक्षा से वंचित करना
    6 ड्रॉप करने का विकल्प देना
    7 ड्रॉप करने का विकल्प चुनने के बाद यदि पुनः प्रवेश मांगा जाएगा तो पूरे सत्र की मनमानी फीस देना ही होगा ऐसी शर्त रखना
    8 स्कूलों से टीसी लेने की बात कहना
    9 और तो और दो मुख्य निजी स्कूलों का आपसी सहमति ऐसी भी एक दूसरे की टीसी को एडमिशन भी नहीं देने की योजना बनाई।
    इन्हीं मनमानीयों के विरोध में 21 सितंबर को कोरोना पीड़ित पालक मंच राजनांदगांव द्वारा जयस्तंभ चौक से जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय तक जिला प्रशासन ,माननीय मुख्यमंत्री, एवं माननीय महामहिम राज्यपाल छत्तीसगढ़ को ज्ञापन सौंपने का कार्यक्रम बारिश के कारण स्थगित हो गया था जो आगे प्रस्तावित है । और जल्द ही पालकों का भीषण विरोध शहर की सड़कों पर दिखेगा....

    राजनांदगांव/शौर्यपथ / संचालक लोक शिक्षण संचालनालय इन्द्रावती भवन, नवा रायपुर द्वारा दिनांक 20 सिंतबर 2020 को पत्र लिखकर सभी कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया गया है कि निजी स्कूल छोड़ने वाले विद्यार्थियों को सरकारी स्कूलों में प्रवेश लेने के लिए प्रेरित किया जावे, क्योंकि प्रायवेट स्कूल एसोसियेशन के द्वारा यह लिखित दावा किया जा रहा है कि लगभग 2 लाख बच्चों ने निजी स्कूल छोड़ दिया है।
    छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल का कहना है कि शाला त्यागी बच्चे जो ज्यादातर अंग्रेजी माध्यम से है और सरकार की सरकारी स्कूलें ज्यादातर हिन्दी मिडियम के है। ऐसी परिस्थिति में अंग्रेजी माध्यम से आने वाले बच्चों को जबरदस्ती हिन्दी मिडियम में प्रवेश दिया जाना उचित नहीं होगा, क्योंकि संचालक के पत्र में यह स्पष्ट नहीं है कि इन शालात्यागी बच्चों को सरकारी स्कूलों के किस मिडियम में प्रवेश दिया जाएगा।
    पॉल का कहना है कि सरकार द्वारा विगत दो वर्ष पूर्व हर विकासखंड में अंग्रेजी मिडियम स्कूल आरंभ किया गया था और इस वर्ष सभी जिले में उत्कृष्ट अंग्रेजी मिडियम स्कूल आंरभ किया गया है, लेकिन स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा अब इन सभी शालात्यागी बच्चों को सरकारी हिन्दी मिडियम स्कूलों में प्रवेश दिलाने की योजना बनाई जा रही है।
    पॉल ने बताया कि जिला शिक्षा अधिकारियों के द्वारा निजी इंग्लिश मिडियम स्कूलों से आने वाले बच्चों को भी सरकारी हिन्दी मिडियम स्कूलों में प्रवेश दिया जाना न्यायसंगत नहीं है। सरकार की नियत और नीति दोनों पर सवाल उठाया जाएगा, क्योंकि निजी इंग्लिश मिडियम स्कूल में जो बच्चा बचपन से इंग्लिश मिडियम में पढ़ा हो उसे कैसे हिन्दी मिडियम में प्रवेश दिलाया जा सकता है। शिक्षा विभाग इन बच्चों के जीवन व भविष्य के साथ इस प्रकार जान-बुझकर खिलवाड़ नहीं कर सकती है, इसलिए एसोसियेशन की यह मांग है कि अंग्रेजी माध्यम से आने वाले बच्चों को अंग्रेजी माध्यम में और हिन्दी माध्यम से आने वाले बच्चों को हिन्दी माध्यम में प्रवेश दिलाया जाए। बच्चों के जीवन व भविष्य के खिलवाड़ बर्दास्त नहीं किया जाएगा।
    पॉल का कहना है कि बच्चा जब निजी स्कूल से सरकारी स्कूल में प्रवेश लेगा, तो सबसे पहले उसकी किताबें और कोर्स नई होगी, क्योंकि प्रायवेट स्कूलों में ज्यादातर किताबें प्रायवेट प्रकाशक की पढ़ाई जाती है। उसके पश्चात् सभी स्कूलों में कम से कम 50 प्रतिशत कोर्स पूर्ण किया जा चुका है ऐसे परिस्थिति में जो बच्चे प्रायवेट स्कूल छोड़कर सरकारी स्कूल में जा रहे है उनका क्या होगा?

    शौर्यपथ लेख / क्रिस्टोफर पाल और नजरुल खान ये दो ऐसे बेवकूफ इंसान है जो शिक्षा के लिए आज लड़ाई जमीनी स्तर पर लड़ रहे है और समझदार पालक सोशल मिडिया पर ज्ञान पेल रहे है . मुझे इनकी शिक्षा और निजी स्कूल की लड़ाई देख कर एक किस्सा याद आया . आज से तीन साल पहले की बात थी मेरे निक्की का स्कूल फीस समय पर नहीं दे पाने के कारण डीएवी स्कूल हुडको से बार बार फोन आ रहे थे जब भी फोन आता मई कॉल पर अपनी मज़बूरी बता कर कुछ दिनों बाद फीस जमा करने की बात बता देता किन्तु मेरे बताये समय का इंतज़ार भी नहीं हो रहा था स्कूल प्रबंधन को रोज रोज के काल और मेरे निक्की द्वारा फीस जमा करने के लिए स्चूओल से मेसेज आना बंद नहीं हुआ तब मैंने स्कूल के प्राचार्य से मुलाकात की और अपनी समस्या राखी तथा ये भी बताया कि मेरे द्वारा समय माँगा गया किन्तु इसके बावजूद भी लगातार मेसेज किया जा रहा है . मुझे मेसेज किया जा रहा है यहाँ तक तो सही है किन्तु मेरे बेटे के द्वारा मेसेज कर मेरे लाल के बाल मन में क्यों जहर घोला जा रहा है उसे क्यों सबके सामने शर्मिंदा किया जा रहा है प्रिंसिपल द्वारा इतनी बड़ी बात होने पर भी नियमो की दुहाई देने और फीस जमा करने की बात कही गयी जबकि शासन के नियमानुसार फीस के लिए बच्चो को परेशां करना मानसिक आघात पहुँचाना अपराध की श्रेणी में आता है किन्तु लालच से भरपूर स्कूल प्रबंधन को किसी से कोई मतलब नहीं मतलब है तो फीस से खैर मैंने जो समय माँगा था उस तय समय पर मेरे द्वारा फीस भर दी गयी पुरे पेनाल्टी सहित . पेनाल्टी सहित फीस भरने के बाद जब प्रिंसिपल से मुलाकात की और कहा की सर मेरे द्वारा देर से फीस भरने के कारण आपने जो पेनाल्टी तय की थी उसे भी भर दिया गया अब आपकी बारी है पेनाल्टी भरने की प्रिंसिपल के शब्द थे कि हम कौन सी पेनल्टी भरे तब मैंने कहा कि इतने दिनों आपने जो बच्चे को मानसिक पीड़ा दी उसकी पेनाल्टी कौन भरेगा मुझे अच्छे से याद है कि प्रिन्सिपल के वो वाक्य देर आपने की हमने हमारा काम किया . अगर आपको अच्छा नहीं लगता तो आप बच्चो को स्कूल से निकाल सकते है हम हर मामले में सही है . हालंकि प्रिंसिपल को समझ में आया की गलती उसकी भी है किन्तु बच्चो के भविष्य के लिए हमने बात खत्म की .
    लेकिन उसके कुछ दिनों बाद ही एक वाकया हुआ तब वार्षिक उत्सव की तैयारी चलने लगी जिसके लिए जो जो प्रतिभागी था उसे समय समय पर स्कूल बुलाया जाता था मेरा लाल भी इस प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और निर्धारित समय पर स्कूल बस से जाने लगा लगातार १० दिनों तक जाने के बाद जिस दिन फाइनल सलेक्शन होना था उस दिन जाने का समय परिवर्तन हुआ जिसकी सुचना स्कूल से मिलनी चाहिए थी किन्तु मुझे समय पर नहीं मिली और मेरा लाल फाइनल सलेक्शन के दिन नहीं जा पाया इस तरह वो आयोजन में प्रतिभागी नहीं बन पाया जिसके कारण काफी उदास हो गया रोया भी मुझे इस बात का पता चलते ही मई अपने बेटे को स्कूल लेकर गया और प्रिंसिपल से मुलाक़ात की सारी बात राखी तब प्रिंसिपल का दो शब् मुझे स्तभ कर गया सॉरी स्टाफ से गलती हो गयी . किन्तु मुझे सार्री मंजूर नहीं था जिस तरह फीस की देरी की सजा मुझे मिली मेरे बच्चे को मिली उसी तरह इस लापरवाही की सज़ा भी जिम्मेदार को मिलनी ही चाहिए मई प्राचार्य के सामने अड़ गया कि जिसकी भी गलती के कारण मेरा बेटा प्रतिभागी नहीं बन पाया उसे सजा मिलनी ही चाहिए क्योकि मेरे द्वारा आपके स्कूल का हर नियम का पालन किया गया अब ये स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी है कि जिसने भी गलती की है उसे सजा मिले काफी बहस और तर्क वितर्क के बाद स्कूल के प्राचार्य ने जिम्मेदार लोगो को जिसमे बस कंडक्टर जिसने फोन पर सूचित नहीं किया , मेसेज भेजने वाले स्टाफ जिसने समय पर मेसेज नहीं भेजा , नहीं आने का कारण नहीं पूछने वाले टीचर पर कार्यवाही की बात स्व्वेकार की तब मैंने कहा की इन सबके जिम्मेदार आप भी है जिनके अंडर में ये सारा कार्य हो रहा है मुखिया होने के नाते गलती आपकी भी है आखिर कार स्कूल के प्राचार्य ने भी माफ़ी मांगी इन सब वाक्य में मैंने अपने बेटे को साथ रखा . जब स्कूल से बाहर निकले तब मैंने बेटे को बताया कि बेटा स्कूल फीस किसी मज़बूरी वश देर से देने के बाद भी सजा के तौर पर पेनाल्टी भरी क्योकि गलती हमारी थी कि हमने स्कूल फीस समय पर जमा नहीं कराई और इस गलती के लिए पेनाल्टी भरने के साथ स्कूल प्रबंधन से देर से फीस जमा करने के लिए माफ़ी भी मांगी उसी तरह इस बार तुम वार्षिक उत्सव में प्रतिभागी नहीं बने इसमें गलती तुम्हारी नहीं स्कूल प्रबंधन की थी और इस लिए स्कूल प्रबंधन से न्याय के लिए लड़ाई लड़ी उनके माफ़ी मांगने से जीत नहीं हुई जीत इस लिए हुई कि तुम कही गलत नहीं थे वो गलत थे इसलिए मन में ये ना सोंचो की वार्षिक उत्सव में भाग नहीं ले पाए अगले साल फिर मेहनत करना और भाग लेना . किन्तु भगवान को शायद मंजूर नहीं था अगले साल मेरा बेटा ही इस दुनिया में नहीं रहा उसे तो इश्वर ने सभी प्रतियोगिता से मुक्त कर दिया स्कूल की भी और जिन्दगी की भी .
    आज उन्ही बच्चो पर अन्याय ना हो और बच्चो का हक उन्हें मिले इस लिए शहर के दो पागल इंसान क्रिस्टोफर पाल और नजरुल खान निजी स्कूल की मनमानी निति के खिलाफ लड़ रहे है और कुछ पालक तो साथ है किन्तु बहुतेरे पालक दुर से सोशल मिडिया से ज्ञान दे रहे है किन्तु साथ नहीं आ रहे है . अरे समझदार पालको नजरुल खान और क्रिस्टोफर पाल जैसे लोग अपने बच्चो के लिए नहीं लड़ रहे है आपके लिए लड़ रहे है उन निजी स्कूल वालो से जो सालो पहले एक छोटे से घर में रहते थे एक छोटी सी किराए की बिल्डिंग में स्कूल चलाते थे आज लाखो की गाडियों में घूम रहे है करोडो की बिल्डिंग के मालिक है लाखो रूपये घुमने फिरने में खर्च करते है लखपति से करोडपति हो गए है किन्तु वैश्विक महामारी के समय भी ऐसे पेश आ रहे है कि अगर फीस नहीं मिली तो बर्बाद हो जायेंगे बस एक बार दिल में हाँथ रखकर ये सोंचो कि जो आज स्कूल के मालिक है वो कुछ साल पहले कैसी जिन्दगी जी रहे थे और कितनी संपत्ति थी और अब कितनी है . नजरुल खान और क्रिस्टोफर पाल जैसे लोग बेवकूफ नहीं है बेवकूफ तो वो है जो अपने बच्चो के साथ हो रहे अन्याय के बाद भी मौन है शिक्षा पर सबका अधिकार है किन्तु शिक्षा को बेचने वाले को ये बात तभी समझ आएगी जब आप लोग संगठित हो जाओगे नहीं तो आज नहीं तो कल आपके बच्चो के कंधो का सहारा लेकर ये निजी स्कूल वाले लालची प्रवित्ति के लोग आपको बेइज्जत करते रहेंगे साथ ही बच्चो के बालमन के साथ खिलवाड़ मै तो बेवकूफ नजरुल खान के साथ हु मै तो बेवकूफ क्रिस्टोफर के साथ हूँ क्योकि मै बेवकूफ हूँ लेकिन एक पिता हूँ जो अपने बच्ची के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकता और लालची लोगो का साथ नहीं दे सकता समझदारी से अच्छा बेवकूफ कहलाना पसंद करूँगा क्योकि अपने बच्ची के साथ अन्याय नहीं होने दूंगा . हाँ मै क्रिस्टोफर और नजरुल जैसे लोगो के साथ हूँ जो शिक्षा के लिए लड़ाई लड़ रहे है . आप किसके साथ है ये आपके ऊपर है क्योकि बच्चे आपके है उनके भविष्य की चिंता आपको ज्यादा है सबसे ज्यादा .... ( शरद पंसारी - सम्पादक , दैनिक शौर्यपथ समाचार पत्र )

    राजनांदगांव / शौर्यपथ / भारत का संविधान की अनुच्छेद 21 (ए) के अनुसार राज्य के द्वारा सभी बच्चों को नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराया जायेगा। नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के अनुच्छेद 8 (व्याख्या) (1) व (2) के अनुसार राज्य सभी बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने और अनिवार्य दाखिले, उपस्थिति और प्राथमिक शिक्षा पूर्ण करने को सुनिश्चित करने के लिए बाध्य है।
    छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल का कहना है कि संविधान या आरटीई कानून सिर्फ कमजोर तबका को नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराया करने की बात नहीं करते है, बल्कि यह सार्वभौमिक है। कोई बच्चा जो भारत का नागरिक है, अमीर या गरीब, लड़का या लड़की, किसी भी जाति का हो, उसे नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा पाने का अधिकार प्राप्त है।
    पॉल का कहना है कि प्रदेश में स्कूली बच्चों के मौलिक अधिकार का हनन हो रहा है। कोरोना महामारी में अब मंदी के कारण लोगों की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो चुका है, जिसके कारण कई पालक अपने बच्चों की ट्यूशन फीस जमा करने की स्थिति में नहीं है। मात्र ऊंची फीस नहीं देने के कारण प्रायवेट स्कूलों के द्वारा बच्चों को शिक्षा से वंचित किया जा रहा है। इस सत्र 2020-21 में लगभग 2 लाख बच्चे प्रायवेट स्कूल छोड़ कर जा चुके है। सरकार शिक्षा को लेकर गंभीर नहीं है, शालात्यागी बच्चों का आकड़ा सरकार के पास नहीं है।
    पॉल का कहना है कि प्रदेश के 8 हजार प्राईवेट स्कूलों में अध्ययनरत् 10 लाख बच्चों की नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा की चिंता करना भी सरकार का दायित्व है। शिक्षा पाना बच्चों का मौलिक अधिकार है और यह सरकार का दायित्व है कि सभी बच्चे नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्राप्त करे। लोक शिक्षण संचालनालय ने प्रायवेट स्कूल छोड़ रहे बच्चों को सरकारी स्कूलों में प्रवेश दिलाने के लिए दिनांक 20 सिंतबर 2020 को पत्र जारी किया है, लेकिन ज्यादातर बच्चे अंग्रेजी मिडियम स्कूलों से बाहर किये जा रहे है और सरकार इन बच्चों को किस सरकारी अंग्रेजी मिडियम स्कूल में प्रवेश दिलाने का प्रयास कर रही है यह समझ से परे है, क्योंकि ज्यादातर सरकारी स्कूल तो हिन्दी मिडियम के है। पॉल ने प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर प्रायवेट स्कूलों में अध्ययनरत् 10 लाख बच्चों की इस सत्र 2020-21 की ट्यूशन फीस वहन करने की मांग की है।

    सेहत / शौर्यपथ / क्या आप टाइप-2 डायबिटीज से जूझ रहे हैं? अगर हां तो मुमकिन है कि आपका अग्नाशय 25 फीसदी तक सिकुड़ गया हो। इससे न सिर्फ आपको ब्लड शुगर नियंत्रित रखने में परेशानी होती है, बल्कि हाजमा भी बिगड़ जाता है। हालांकि, ब्रिटेन स्थित न्यूकैसल यूनिवर्सिटी के हालिया अध्ययन की मानें तो डायबिटीज रोगी वजन घटाकर सिकुड़े अग्नाशय को दोबारा सामान्य आकार में ला सकते हैं। इसके लिए उनका न सिर्फ डाइटिंग और एक्सरसाइज करना, बल्कि नींद पर भी ध्यान देना बेहद जरूरी है।

    शोधकर्ताओं के मुताबिक अग्नाशय में सिकुड़न टाइप-2 डायबिटीज की बड़ी वजह है। शरीर में अत्यधिक चर्बी जमने के कारण टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित मरीजों के अग्नाशय के आकार में स्वस्थ लोगों के मुकाबले 25 फीसदी तक की कमी दर्ज की गई है। इससे उनमें इंसुलिन के उत्पादन में तो कमी आती ही है, साथ ही पाचन क्रिया को बढ़ावा देने वाले एनजाइम का स्त्राव भी घट जाता है।

    खास बात यह है कि डायबिटीज रोगी अगर वजन में 10 से 15 किलो तक की कटौती करें तो उनका अग्नाशय सामान्य आकार में लौट जाता है। मोटापे पर काबू पाने के लिए उनका स्वस्थ खानपान और व्यायाम अपनाना ही काफी नहीं है। आठ घंटे की मीठी नींद लेना भी बेहद अहम है।

    मुख्य शोधकर्ता प्रोफेसर रॉय टेलर कहते हैं, 2018 में हमारी टीम ने पाया था कि जो प्रतिभागी सूप और जूस से लैस डाइट लेकर दिनभर में 850 से ज्यादा कैलोरी का सेवन न करने का लक्ष्य तय करते हैं, उनके वजन में दो से तीन महीने में ही 10 से 15 किलो की कमी आती है। इससे वे धीरे-धीरे डायबिटीज को मात देने की दिशा में भी आगे बढ़ने लगते हैं।

    ताजा अध्ययन में हमने देखा कि इन प्रतिभागियों के अग्नाशय में दो साल में 20 से 25 फीसदी तक की वृद्धि होती है। यानी वह सामान्य आकार में लौट आता है। इससे शरीर में इंसुलिन का उत्पादन बढ़ना और ब्लड शुगर नियंत्रित होना लाजिमी है। अध्ययन के नतीजे ‘द लांसेट डायबिटीज एंड एंडोक्राइन जर्नल’ के हालिया अंक में प्रकाशित किए गए हैं।

    हफ्ते में चार बार गुनगुने पानी से नहाएं-
    रात में बिस्तर पर जाने से पहले गुनगुने पानी से नहाते हैं? अगर हां तो आपकी यह आदत टाइप-2 डायबिटीज और हृदयरोगों से बचाव में खासी मददगार साबित हो सकती है। जापान स्थित कोह्नोदाई यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने 1300 प्रतिभागियों में गुनगुने पानी के स्नान का फायदा आंकने के बाद यह दावा किया है। उन्होंने पाया कि जो लोग हफ्ते में चार बार गुनगुने पानी से नहाते हैं, उनका न सिर्फ बीएमआई (वजन और कद का अनुपात), बल्कि ब्लड शुगर का स्तर और रक्तचाप भी नियंत्रित रहता है। स्ट्रेस हार्मोन के स्तर में कमी आना और फील गुड हार्मोन का स्त्राव बढ़ना इसकी मुख्य वजह है।

    सेहत /शौर्यपथ / कोरोना से ठीक होने के तुरंत बाद अगर आप सामान्य दिनचर्या में लौटना चाहते हैं तो व्यायाम जैसे मेहनत वाले काम करने से पहले दिल की जांच करा लें। अमेरिकी वैज्ञानिकों ने एक शोध में पाया कि बीमारी से ठीक होने पर भी मरीजों का हृदय क्षतिग्रस्त हो जाता है, ऐसे लोग अगर जिम जाकर व्यायाम करने लगेंगे तो उनकी जान भी जा सकती है।
    अरिजोना राज्य की बैनर यूनिवर्सिटी स्पोर्ट्स मेडिसिन के निदेशक डॉ. स्टीवन एरिकसन के शोधदल ने यह पता लगाया है। उनका कहना है कि बीमारी से ठीक हुए लोगों को वर्कआउट करने या किसी खेल आयोजन में भाग लेने से पहले कार्डियक स्क्रीनिंग जरूर करा लेनी चाहिए। उनका कहना है कि मरीज याद रखें कि कोरोना वायरस महज श्वसन तंत्र से जुड़ा रोग नहीं है बल्कि यह शरीर के हर अहम हिस्से को लंबे वक्त तक क्षति पहुंचाता है। इसके कारण हृदय पर चकत्ते और सूजन आ सकती है।
    निगेटिव होने के 14 दिन बाद ही ट्रेनिंग करें-
    शोध दल की सलाह है कि कोई भी जिम करने वाला व्यक्ति या खिलाड़ी संक्रमित होने के बाद ठीक हो जाता है तो उसे निगेटिव रिपोर्ट आने के 14 दिन बाद ही अपनी ट्रेनिंग शुरू करनी चाहिए। साथ ही वह अपने हृदय की जांच कराए और शरीर में हो रहे बदलावों पर निगाह रखे। शोधकर्ता एरिकसन कहते हैं कि अगर किसी ऐसे खिलाड़ी को जल्द ही किसी खेल आयोजन में भाग लेना है तो वह पहले किसी हृदयरोग विशेषज्ञ से अपनी जांच करा ले।
    इसलिए वायरस से खराब होते दूसरे अंग-
    शोधकर्ता व अरिजोना कॉलेज ऑफ मेडिसिन के प्रो. क्रिस ग्लेमबोटस्की का कहना है कि शरीर में वायरस के घुसने पर वह कई दूसरे अंगों और ऊतकों में भी प्रवेश करता है, जिससे इंफ्लेमेशन प्रतिक्रिया होने लगती है। यानी उस अंग को काम करने के लिए अपनी क्षमता से अधिक शक्ति लगानी पड़ती है जिससे उस पर बुरा असर पड़ता है।
    बिना लक्षण वालों को कम खतरा-
    शोधदल ने पाया कि बिना लक्षण वाले कोरोना मरीजों में हृदय क्षति की संभावना कम है। वे मरीज इस बात को लेकर ज्यादा सतर्क रहें जिनके शरीर में कोरोना के लक्षण दिख रहे थे और उन्हें वायरस ने कम से कम तीन दिन तक चपेट में लिया। ऐसे लोगों विशेषकर जिम जाने वालों और खिलाड़ियों को अपनी ट्रेनिंग शुरू करने से पहले दिन की जांच करा लेनी चाहिए।
    ये जांच कराएं-
    वैज्ञानिकों ने ऐसे लोगों को इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम और खून की जांच कराने की सलाह दी है। पहली जांच के जरिए हृदय में इलेक्ट्रिकल सिग्नल मापते हैं। वहीं, रक्त जांच से ट्रॉपोनिन प्रोटीन की मात्रा पता की जाती है जो कि सामान्यत: हृदय की मांसपेशियों में रहता है पर हृदय में क्षति होने पर इसका रिसाव खून में होने लगता है।
    संक्रमित खिलाड़ियों को हुई दिल की बीमारी -
    प्रतिष्ठित जामा जर्नल में छपे शोध में दावा किया गया कि संक्रमण से ठीक होकर खेल प्रतिस्पर्धा में भाग लेने वाले 15% एथलीटों में मायकार्डिटिस के लक्षण दिखाई दिए। यह हृदय की मांसपेशियों से जुड़ा रोग है, जिसमें अचानक हार्टफेल के कारण मौत हो सकती है। ओहियो राज्य विश्वविद्यालय ने शोध में पाया कि 26 महिला व पुरुष एथलीटों में से चार के शरीर में इस बीमारी के लक्षण दिखे।

    शौर्यपथ / अखरोट का नाम सबसे पसंदीदा ड्राई फ्रूट्स में लिया जाता है। सेहत से जुड़े फायदों के साथ स्किन केयर के लिए भी अखरोट बेहद फायदेमंद है। आप अगर चेहरे पर नेचुरल ग्लो पाने के लिए महंगे प्रॉडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं, तो आप इन्हें छोड़कर अखरोट को स्किन केयर रूटीन में शामिल कर सकते हैं।आइए, जानते हैं अखरोट के फायदे-
    फेसपैक बनाकर करें इस्तेमाल
    एक चम्मच अखरोट का पाउडर, एक चम्मच ओलिव ऑयल, दो चम्मच गुलाब जल व आधा चम्मच शहद मिलाकर पेस्ट बना लें।
    इस पैक को अपने चेहरे पर 15 मिनट के लिए लगाकर छोड़ दें।
    फिर सूखने पर पानी से मुंह धो लें।
    बेहतर परिणाम के लिए आप यह फेसपैक सप्ताह में दो से तीन बार लगा सकते हैं।
    डार्क सर्कल के लिए
    अखरोट का तेल आपकी आंखों के नीचे आई सूजन को दूर करता है और डार्क सर्कल कम करने में मदद करता है।
    आप थोड़ा-सा अखरोट का तेल लें। तेल को गुनगुना करके इसे आंखों के नीचे काले घेरे वाले भाग पर लगाकर सो जाएं। फिर सुबह सामान्य तरीके से चेहरा धो लें। आप इस प्रक्रिया को रोज रात को तब तक दोहराएं, जब तक असर दिखना न शुरू हो जाए।
    आंखों ने नीचे की सिलवटों को दूर करें
    आप नींबू का रस, शहद, ओटमील और अखरोट का पाउडर एक साथ मिलाकर पेस्ट बना लें।
    इस पेस्ट को आंखों के नीचे लगाएं और 15-20 मिनट के लिए छोड़ दें।
    फिर पानी से धो लें।
    इस प्रक्रिया को आप सप्ताह में तीन से चार बार दोहरा सकते हैं।

    धर्म संसार / शौर्यपथ वैदिक धर्म ग्रन्थों के अनुसार वासुदेव द्वादशी व्रत पर्व द्वारकाधीश भगवान श्री कृष्?ण के नाम से प्रसिद्ध है। यह वासुदेव द्वादशी व्रत पर्व चतुर मास के शुरुआत आषाढ़ के महीने में देवसयानी एकादशी के एक दिन बाद बड़े ही धूम-धाम से मनाई जाती है। इस दिन श्रीकृष्?ण के साथ भगवान विष्?णु और माता लक्ष्?मी की पूजा की जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार जो भी भक्त इस अदभुत वासुदेव द्वादशी पर्व को अषाढ़, श्रावण, भाद्रपद और अश्विन मास में वासुदेव द्वादशी की विधि विधान से पूजा करता है उसे मोक्ष की प्राप्?ति होती है। यह व्रत आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वादशी पर मनाना विशेष फलदायी माना जाता है। इसमें देवता वासुदेव की पूजा, और वासुदेव के विभिन्न नामों एवं उनके व्यूहों के साथ पाद से सिर तक के सभी अंगों का पूजन होता है।
    नारद मुनि द्वारा कथा का वृतांत :- धर्म ग्रन्थों व वैदिक ब्राह्मणों के आधार पर वासुदेव द्वादशी के दिन वासुदेव की पूजन का विधान इस तरह से है की उस दिन किसी जलपात्र वासुदेव भगवान की प्रतिमा रखकर रक्त व पीत वस्त्रों से ढककर वासुदेव की स्वर्णिम प्रतिमा का पूजन किया जाता है तथा साथ ही उस दिन दान करने का विशेष विधान है । इस व्रत का विधान नारद मुनि द्वारा वसुदेव एवं देवकी को बताया गया था कि जो भक्त इस व्रत को विधि विधान से रखता है तो उनके सारे पाप कट जाते हैं। उसे पुत्र की प्राप्ति होती है या नष्ट हुआ राज्य पुन: मिल जाता है।
    इस प्रकार से इस व्रत का पालन वसुदेव और देवकी ने रखा और उनको हर प्रकर से मुक्ति व खोया हुआ राज्य प्राप्त हुआ इस व्रत का नियम सुबह सबसे पहले नहाने के बाद साफ कपड़े पहनने चाहिये। और पूरे दिन निराहार व्रत रहना होता। भगवान को आप हाथ के पंखे, लैंप के साथ फल फूल चढ़ाने चाहिये। भगवान विष्?णू की पंचामृत से पूजा करनी चाहिये। उन्?हें भोग लगाना चाहिये। इस दिन विष्?णु सहस्?त्रनाम का जाप करने से आप की हर समस्?या का समाधान होगा। और भक्त सदैव सुख पूर्वक सम्पन्न व अपनी सभी मनोकामनां को सुख पूर्वक जीता है

    धर्म संसार / शौर्यपथ / हिंदू पंचांग में हर माह आने वाली आठवीं तिथि को अष्टमी कहा जाता है। यह तिथि मास में दो बार आती है। एक बार पूर्णिमा के बाद और दूसरी बार अमावस्या के बाद यह तिथि आती है। पूर्णिमा के बाद आने वाली अष्टमी को कृष्ण पक्ष की अष्टमी और अमावस्या के बाद आने वाली अष्टमी को शुक्ल पक्ष की अष्टमी कहा जाता है। इस तिथि पर मां दुर्गा की उपासना की जाती है। इस दिन मां दुर्गा का व्रत, पूजन करने से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। सुख, समृद्धि, संपन्‍नता की प्राप्ति होती है। अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन दुर्गा चालीसा का पाठ अवश्य करें।

    हिंदू पंचांग की आठवीं तिथि अष्टमी का विशेष नाम कलावती है। इस तिथि में कई तरह की कलाएं और विधाएं सीखना लाभकारी होता है। मान्यता है कि इस तिथि में अभिनय, नृत्य, गायन आदि कला सीखने के लिए प्रवेश लेना शुभ होता है। यह तिथि चंद्रमा की आठवीं कला है। अष्टमी तिथि के स्वामी भगवान शिव माने गए हैं लेकिन अष्टमी तिथि मां दुर्गा की शक्ति के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। शुक्ल पक्ष की अष्टमी में भगवान शिव का पूजन करना वर्जित है, लेकिन कृष्ण पक्ष की अष्टमी में भगवान शिव का पूजन करना उत्तम माना गया है। किसी भी पक्ष की अष्टमी तिथि में नारियल का सेवन नहीं करना चाहिए। इस पावन तिथि पर लाल फूल, लाल चंदन, दीया, धूप आदि से विधि-विधान से मां की उपासना करें। इस दिन तामसिक भोजन का सेवन न करें। भोग विलासिता से दूर रहें। रात्रि में जमीन पर शयन करें।

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