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सेहत /शौर्यपथ / हम सभी अपने 20s में अपनी खूबसूरत त्वचा को फ्लॉन्ट करते हैं। बस एक अच्छा क्लींजर और मॉइस्चराइजर- और चेहरा चमकने लगता है।
लेकिन हमारी आंखें तब खुलती हैं जब चेहरे पर सबसे पहली झुर्रियां नजर आने लगती हैं। चेहरे पर फाइन लाइन्स नजर आने के बाद ही हम अपने स्किन केयर रूटीन को लेकर गंभीर होते हैं। ये लाइन्स संकेत हैं कि आपकी त्वचा की एजिंग शुरू हो गयी है। अब हम एन्टी एजिंग क्रीमों का प्रयोग करते हैं और अपनी स्किन की एजिंग को टालने की कोशिश करते हैं। लेकिन जो झुर्रियां पहले ही हमारे चेहरे पर आ चुकी हैं, वह तो नहीं जाने वाली ना!
यह प्रश्न महिलाओं में बहुत आम है ‘कब हमें एन्टी एजिंग क्रीमों का इस्तेमाल शुरू करना चाहिए?’ और इस सवाल का जवाब पाने के लिए हमने बात की फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट गुरुग्राम की सलाहकार डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ सोनल बंसल से।
“हमें यह जानना जरूरी है कि एजिंग दो प्रकार की होती है- अंदरूनी और बाहरी। पहले आपकी उम्र अंदर से बढ़ती है और फिर चेहरे पर झलकती है। इसलिए आपको बाहरी एजिंग होने से पहले ही एन्टी एजिंग उत्पादों का प्रयोग शुरू कर देना चाहिए।”
क्या हैं उम्र बढ़ने के पहले संकेत?
“एजिंग के सबसे पहले संकेत जो भारतीयों में नजर आते हैं वह है आंखों के नीचे का फैट गलना। सबसे पहले फाइन लाइन्स भी चेहरे पर ही नजर आती हैं। इससे आंखें गड्ढे में नजर आती हैं और काले घेरे बढ़ जाते हैं। इसका कारण यह है कि आंखों के नीचे की त्वचा बाकी त्वचा से ज्यादा नाजुक होती है।”
क्या है एंटी-एजिंग उत्पादों के उपयोग की सही उम्र
“ज्यादातर लोगों को एंटी-एजिंग उत्पादों का उपयोग 30 के दशक की शुरुआत में ही करना शुरू कर देना चाहिए। उम्र बढ़ने के विजिबल लक्षण दिखाई देने से पहले ही आपके पास कुछ साल हैं। यदि आप उन संकेतों के प्रकट होने से पहले प्रभावी उत्पादों का उपयोग करना शुरू करती हैं, तो आपके पास कुछ समय के लिए एजिगं में देरी करने का मौका है।”
कौन से एंटी-एजिंग उत्पाद होते हैं बेहतर?
विभिन्न उत्पाद हैं जो आज बाजार में उपलब्ध हैं। आप हमेशा अपनी त्वचा के प्रकार के अनुरूप कुछ चुन सकतीं हैं। हालांकि, रेटिनॉल के सभी रूप कारगर हैं। आजकल, आपको कई क्रीम के साथ-साथ सीरम भी मिलेंगे जिनमें एंटी-एजिंग के रूप में रेटिनोल कम्पाउन्ड होता है। अगर आप चिकनी, कोमल त्वचा पाना चाहती हैं, तो यह बेहद मददगार हो सकता है।
तो लेडीज, समय बर्बाद न करें, घड़ी टिक टिक आगे बढ़ते समय का संकेत दे रही है। इसलिए यदि आप अपने शुरुआती 30 में हैं तो एंटी-एजिंग उत्पाद को अपने ब्यूटी रूटीन में शामिल करें।
सेहत / शौर्यपथ / हेल्दी डाइट, वर्कआउट और समय पर सोना कुछ ऐसी चीजें हैं जो आपकी इम्युनिटी को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। दिनचर्या के अलावा कुछ ऐसी चीजें भी हैं, जो आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाकर आपको बीमारियों से बचाती है. आज हम आपको ऐसा कारगर उपाय बता रहे हैं, जिससे आप फ्लू को 4-5 दिनों में आसानी से ठीक कर सकते हैं, वहीं इससे आपकी इम्युनिटी भी मजबूत होगी।
गुणों से भरी अजवाइन
अजवाइन में बहुत से पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो शरीर को हेल्दी और फिट रखने में मदद करता है। अजवाइन में एंटी-इंफ्लेमेट्री, एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण होता है, जो सर्दी-जुकाम के लिए फायदेमंद है।
सामग्री
1/2 चम्मच अजवाइन के बीज
5 तुलसी के पत्ते
1/2 चम्मच काली मिर्च पाउडर
1 बड़ा चम्मच शहद
ऐसे बनाएं : एक गहरा पैन लें और उसमें 1 गिलास पानी, अजवाइन, काली मिर्च और तुलसी के पत्ते डालें। पानी को 5 मिनट तक उबलने दें। गैस को बंद करें। इसमें शहद मिलाने से पहले मिश्रण को थोड़ी देर के लिए ठंडा होने दें। काढ़ा को अच्छी तरह से मिलाएं और इसे पी लें।
इसके फायदे-
अजवाइन गुणों से भरी हुई है। इसमें जब काली मिर्च, तुलसी, शहद डालकर काढ़ा बनाया जाता है, तो इसके गुण और भी बढ़ जाते हैं। फ्लू से छुटकारा दिलाने के साथ अजवाइन का काढ़ा इन परेशानियों से भी मुक्ति दिलाता है।
पेट की बीमारियों से छुटकारा।
सर्दी-जुकाम और खांसी में राहत।
मसूड़ों की सूजन।
पीरियड्स के दर्द से छुटकारा।
मुंहासों से छुटकारा।
इन बातों का रखें ध्यान
एक दिन में बहुत ज्यादा अजवाइन सेहत के लिए हानिकारक हो सकती है, इसलिए इस काढ़े को दिन में सिर्फ एक ही बार पिएं. वहीं, स्तनपान कराने वाली मां और गर्भवती को इस काढ़े का सेवन नहीं करना चाहिए।
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ आधुनिक जीवनशैली में हमनें खाने की तरीके में भी बहुत बदलाव किया है। पहले लोग जमीन पर सुखासन में बैठकर खाना खाया करते थे। खाना खाते वक्त किसी से बात नहीं करते थे। ज्योतिष की दृष्टि से खाना खाने की आदतों का हमारे ग्रहों पर असर पड़ता है। पं.शिवकुमार शर्मा से जानिए रोजमर्रा में प्रयुक्त होने वाली आदतें और उनका असर।
-भोजन कभी भी अपने बेड पर बैठकर ना खाएं। इससे अन्न का अपमान होता है और राहु अप्रसन्न होते हैं।
-खाना खाते समय टीवी देखना, किताब पढ़ना ठीक नहीं होता। इससे हमारी श्वास नली में भोजन के कण फंसने का डर रहता है।
-खाना खाने से पहले हाथ और पैर अवश्य धोएं। इससे हानिकारक बैक्टिरिया भोजन के जरिए हमारे पेट में नहीं पहुंच पाते। भोजन जल्दी-जल्दी ना चबााएं। भोजन के तुरंत बाद पानी ना पिएं। खाना खाने के 40 मिनट बाद पानी पी सकते हैं। भोजन हमेशा बैठकर ही करें।
- भोजन कररने के बाद कुछ लोग थाली में ही अपने हाथ धो देते हैं। इससे अन्नपूर्णा का अपमान होता है। चंद्र और शुक्र अप्रसन्न हो जाते हैं। ऐसे घर से बरकत चली जाती है।
-थाली में जूठन छोड़ना अन्न का अपमान होता है। इससे मां अन्नपूर्णा का शाप लगता है।
-भोजन करते समय हमारा मुंह पूर्व या उत्तर में होना चाहिए।
-भोजन करने से पहले या भोजन करने के बाद लघु शंका करनी चाहिए।
शौर्यपथ/ आज से अधिकमास शुरूहो गया है। अधिकमास में भगवान विष्णु की पूजा अर्चना की जाती है। इस महीने कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है। लेकिन अधिकमास में खरीददारी करने पर कोई रोक नहीं है। लेकिन इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि ग्रह प्रवेश, मुंडन, सगाई, विवाह आदि कार्य करना वर्जित है। इसके अलावा इस महीने को पुरुषोत्तम के नाम से भी जानते हैं। अधिकमास में सर्वार्थसिद्धि योग समेत बन रहे हैं ये 5 ऐसे योग बन रहे हैं जो बहुत ही उत्तम योग हैं।
ज्योतिषियों के अनुसार अक्टबूर में अधिकमास में ये सभी योग आपको सफलता दिला सकते हैं। आपको बता दें कि सितंबर की 26 तारीख को छोड़कर अक्टूबर की 1, 4, 6, 7, 9, 11, 17 को सवार्थ सिद्धि योग रहेगा। आपको बता दें कि ज्योतिष शास्त्र में सर्वार्थ सिद्धि योग बेहद शुभ योग माना जाता है। यह नक्षत्र, तिथि और वार के संयोग से बनता है।
कहते हैं कि यह शुभ योग मनचाहा वरदान और तरक्की दिलाता है। इस संयोग में कहा जाता है कि जो भी शुभ कार्य शुरू होता है तो वो दोबारा भी होता है। इसलिए इस योग में आप जो खरीदेंगे और भी लाएंगे। 19 एवं 27 सितंबर को द्विपुष्कर योग है। अक्टूबर में ही अमृतसिद्धि योग पड़ रहा है। इस योग में किए गए कार्य का फल अमृत होता है। अधिक मास में दो दिन पुष्य नक्षत्र भी पड़ रहा है। 10 अक्टूबर को रवि पुष्य और 11 अक्टूबर को सोम पुष्य नक्षत्र रहेगा।
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / हवन-यज्ञ हमारी पुरातन परंपरा है। यह शुद्धिकरण का प्रभावकारी उपाय है। हवन में उत्पन्न औषधीय धुआं हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करने की क्षमता रखता है। यह वातावरण को शुद्ध करता है और हमारे भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। माना जाता है कि हवन के औषधीय धुएं का असर 30 दिन तक बना रहता है।
घर या प्रतिष्ठान में मौजूद वास्तु दोषों को दूर करने में भी हवन यज्ञ बहुत प्रभावकारी उपाय है। अग्नि ही यज्ञ के प्रधान देवता हैं। अग्नि को ईश्वर स्वरूप माना जाता है। अग्नि जहां रहती है वहीं प्रकाश फैलता है। हवन यज्ञ करने से भगवान प्रसन्न होते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार रोजाना घर या प्रतिष्ठान में धूप जलाने से वास्तु दोष दूर हो जाता है। घर में रोजाना सुबह-शाम कर्पूर जलाने से तनाव दूर रहता है। रात्रि में सोने से पहले पीतल के बर्तन में घी में भीगा हुआ कर्पूर जलाएं। एक कंडे में गुड़ की धूप और घी मिलाकर जलाने से गृह कलह नहीं होता है। घर में गुग्गुल की धूप जलाने से शांति बनी रहती है। नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए पीली सरसों के दानों को जलाएं। गुग्गुल की धूप जलाने से रोगों का नाश होता है। घर में कच्चे नीम पत्ती की धूनी जलाएं। इससे हानिकारक जीवाणु नष्ट होते हैं और वास्तु दोष भी दूर होता है। धूप, आरती, दीप, पूजा अग्नि को कभी भी मुख से फूंक मारकर न बुझाएं।
धर्म संसार / शौर्यपथ /वास्तुशिल्प के रचनाकार हैं विश्वकर्मा
वैदिक देवता के रूप में सर्वमान्य देव शिल्पी विश्वकर्मा अपने विशिष्ट ज्ञान-विज्ञान के कारण मानव ही नहीं, देवगणों द्वारा भी पूजित हैं। कहते हैं देव विश्वकर्मा के पूजन के बिना कोई भी तकनीकी कार्य शुभ नहीं होता।
हर साल 17 सितंबर को तकनीकी ज्ञान के रचनाकार भगवान विश्वकर्मा की जयंती मनाई जाती है। इनको देवताओं के वास्तुशिल्प का जनक भी माना जाता है, इसलिए शिल्पकला से जुड़े लोग उनकी जयंती को विधि-विधान से मनाते हैं। मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा के पूजन-अर्चन किए बिना कोई भी तकनीकी कार्य शुभ नहीं माना जाता। इसी कारण विभिन्न कार्यों में प्रयुक्त होने वाले औजारों, कल-कारखानों में लगी मशीनों की पूजा की जाती है। भगवान विश्वकर्मा के जन्म को लेकर शास्त्रों में अलग-अलग कथाएं प्रचलित हैं। वराह पुराण के अनुसार ब्रह्माजी ने विश्वकर्मा को धरती पर उत्पन्न किया। वहीं विश्वकर्मा पुुराण के अनुसार, आदि नारायण ने सर्वप्रथम ब्रह्माजी और फिर विश्वकर्मा जी की रचना की। भगवान विश्वकर्मा के जन्म को देवताओं और राक्षसों के बीच हुए समुद्र मंथन से भी जोड़ा जाता है।
इस तरह भगवान विश्वकर्मा के जन्म को लेकर शास्त्रों में जो कथाएं मिलती हैं, उससे ज्ञात होता है कि विश्वकर्मा एक नहीं कई हुए हैं और समय-समय पर अपने कार्यों और ज्ञान से वो सृष्टि के विकास में सहायक हुए हैं। शास्त्रों में भगवान विश्वकर्मा के इस वर्णन से यह संकेत मिलता है कि विश्वकर्मा एक प्रकार का पद और उपाधि है, जो शिल्पशास्त्र का श्रेष्ठ ज्ञान रखने वाले को कहा जाता था। सबसे पहले हुए विराट विश्वकर्मा, उसके बाद धर्मवंशी विश्वकर्मा, अंगिरावंशी, तब सुधान्वा विश्वकर्मा हुए। फिर शुक्राचार्य के पौत्र भृगुवंशी विश्वकर्मा हुए। मान्यता है कि देवताओं की विनती पर विश्वकर्मा ने महर्षि दधीची की हड्डियों से स्वर्गाधिपति इंद्र के लिए एक शक्तिशाली वज्र बनाया था।
प्राचीन काल में जितने भी सुप्रसिद्ध नगर और राजधानियां थीं, उनका सृजन भी विश्वकर्मा ने ही किया था, जैसे सतयुग का स्वर्ग लोक, त्रेतायुग की लंका, द्वापर की द्वारिका और कलियुग के हस्तिनापुर। महादेव का त्रिशूल, श्रीहरि का सुदर्शन चक्र, हनुमान जी की गदा, यमराज का कालदंड, कर्ण के कुंडल और कुबेर के पुष्पक विमान का निर्माण भी विश्वकर्मा ने ही किया था। वो शिल्पकला के इतने बड़े मर्मज्ञ थे कि जल पर चल सकने योग्य खड़ाऊ बनाने की सामथ्र्य रखते थे।
विश्वकर्मा के यथाविधि पूजन करने से घर और दुकान में सुख-समृद्धि आती है। इस दिन अपने कामकाज में उपयोग में आने वाली मशीनों को साफ करें। फिर स्नान करके भगवान विष्णु के साथ विश्वकर्माजी की प्रतिमा की विधिवत पूजा करनी चाहिए। ऋतुफल, मिष्ठान्न, पंचमेवा, पंचामृत का भोग लगाएं। दीप-धूप आदि जलाकर दोनों देवताओं की आरती उतारें।
व्रत त्यौहार / शौर्यपथ / हर साल पितृ विसर्जनी अमावस्या के बाद नवरात्रि की तैयारी शुरू हो जाती थी, लेकिन इस बार नवरात्रि एक महीने बाद शुरू होगी। अधिकमास लगने के कारण नवरात्रि एक महीने आगे खिसक गए हैं। इस बार शारदीय नवरात्र 17 अक्टूबर से शुरू होंगे। इससे पहले 18 सितंबर से 16 अक्टूबर तक अधिकमास रहेगा। इस मास में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता। इस साल165 साल के बाद ऐसा संयोग बन रहा है। अधिकमास को मलमास और पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। इसमास में भगवान विष्णु की पूजा की जाती है।
17 अक्टूबर 2020: प्रतिपदा घटस्थापना
18 अक्टूबर 2020: द्वितीया मां ब्रह्मचारिणी पूजा
19 अक्टूबर 2020: तृतीय मां चंद्रघंटा पूजा
20 अक्टूबर 2020 : चतुर्थी मां कुष्मांडा पूजा
21 अक्टूबर 2020: पंचमी मां स्कंदमाता पूजा
22 अक्टूबर 2020: षष्ठी मां कात्यायनी पूजा
23 अक्टूबर 2020: सप्तमी मां कालरात्रि पूजा
24 अक्टूबर 2020 :अष्टमी मां महागौरी दुर्गा महा नवमी पूजा दुर्गा महा अष्टमी पूजा
25 अक्टूबर 2020 : नवमी मां सिद्धिदात्री नवरात्रि पारण विजय दशमी
मलमास खत्म होने के बाद नवरात्रि में मुंडन आदि शुभ कार्यों का शुरू हो सकेंगे। वहीं विवाह आदि देवउठनी एकादशी के बाद से ही शुरू होंगे। मलमाल के कारण आगे आने वाले सभी त्योहार विधि के अनुसार अपने नियत समय पर किए जाएंगे। नवरात्र में देरी के कारण इस बार दीपावली 14 नवंबर को होगी, जबकि यह पिछले साल 27 अक्टूबर में थी। ज्योतिषियों के अनुसार तीज-त्योहारों की गणना हिन्दी पंचांगों के हिसाब से की जाती है। इसके लिए हिन्दी का माह और तिथि निर्धारित है।
क्या होता है मलमास
अधिकमास या मलमास हर दो से तीन साल के बीच में आता है। मलमास को आप इस तरह समझ सकते हैं। अंग्रेजी के कैलेंडर के अनुसार जिस तरह लीप इयर होता है उसी तरह हिन्दू पंचांग में अधिकमास, मलमास होते हैं। चंद्र वर्ष, सौर वर्ष से 11 दिन 3 घटी और 48 पल छोटा होता है।
सेहत / शौर्यपथ / अक्सर नए कपड़े बाजार से खरीदने के बाद लोग उन्हें तुरंत बिना धोएं ही पहन लेते हैं। पर क्या आप जानते हैं आपकी यह आदत आपकी सेहत को कितना बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है? जी हां कपड़ों को शॉपिंग बैग से सीधे निकालकर पहन लेने से आपकी सेहत बिगड़ सकती है। आइए जानते हैं नए कपड़ों को पहनने से पहले हमें क्यों उन्हें धोकर पहनना चाहिए।
नए कपड़े लाते हैं कीटाणुओं को साथ-
विशेषज्ञों की मानें तो जो कपड़े आप बड़े शौक से शॉपिंग करके अपने घर लाते हैं, उनके साथ ढेरों कीटाणु भी कपड़े में चिपककर आपके घर तक पहुंच जाते हैं। शॉपिंग के समय कपड़ों को ट्रायल के दौरान हजारों बार पहना जाता है, जिससे लोगों के पसीने के साथ कीटाणु भी उन कपड़ों के साथ चिपक जाते हैं।
कपड़े पर लगे रसायन से दाद-खाज खुजली-
कपड़ों को पैक करते समय रसायन से कवर करके रखा जाता है, जो आपकी त्वचा के संपर्क में आकर बुरा असर डाल सकते हैं। कपड़ों की प्रोसेसिंग करते समय कई तरह के रसायनों का प्रयोग किया जाता है, जिसे बिना धोए पहनने पर व्यक्ति को दाद, खाज और खुजली जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
डाई कलर्स से एलर्जी -
प्राकृतिक धागों का अपना कोई रंग नहीं होता, इसलिए उन्हें सुंदर रंगों में रंगा जाता है। कपड़ों की रंगाई, छपाई और डाई जैसी प्रक्रियाओं में उसपर विभिन्न प्रकार के केमिकल्स लगाए जाते हैं। ज़्यादातर रंगीन कपड़ों में ऐजो डाईस का इस्तेमाल किया जाता है। कपड़ा जितना रंगीन और चटक होगा उसमें उतनी अधिक डाई का इस्तेमाल किया जाएगा। ऐजो डाई के सीधे त्वचा के संपर्क में आने से त्वचा में बहुत अधिक जलन और परेशानी होती है, जिसकी वजह से एलर्जी हो सकती है।
त्वचा रोग को न्योता-
बाजार से कोई भी कपड़ा सीधा घर लाकर पहनने से पहले उस कपड़े को कई लोग पहले ही ट्राई करते समय पहन चुके होते हैं। ऐसे में उनके शरीर का पसीना, धूल-मिट्टी या कोई स्किन इंफेक्शन आपके लिए भी परेशानी का सबब बन सकता है।
खाना खजाना / शौर्यपथ / शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाने से लेकर डायबिटीज जैसे रोग में आंवला का सेवन बेहद फायदेमंद माना जाता है। आंवला अपने औषधीय गुणों की वजह से ही प्राचीन समय से पारंपरिक चिकित्सा पद्धति का एक हिस्सा रहा है। आंवले में विटामिन और आयरन भरपूर मात्रा में पाया जाता है। रोजाना आंवला का सेवन आपके कई रोगों को जड़ से खत्म करने में मदद करता है। ऐसे में आंवला को डाइट का हिस्सा बनाने के लिए आइए जानते हैं कैसे बनाई जाती है गुड़-आंवला की चटनी।
आंवला गुड़ चटनी बनाने के लिए सामग्री-
-1 कप आंवला
-1 कप गुड़
-1 चम्मच तेल
-आधा चम्मच पंच फोर्न
-1 साबुत लाल मिर्च
-काला नमक स्वादानुसार
-1.5 चम्मच भुना जीरा पाउडर
आंवला-गुड़ चटनी बनाने का तरीका-
आंवला-गुड़ चटनी बनाने के लिए सबसे पहले आंवलों को तब तक उबाले जब तक वह नरम ना हो जाएं। अब मैश किए हुए आंवलों को उबलने के बाद ठंडा होने के लिए अलग रख दें। अब एक कड़ाही में तेल गर्म करके उसमें लाल मिर्च और पंच फर्न डालकर मसालों को अच्छे से मिलाएं। काला नमक के साथ आंवला डालकर उन्हें एक मिनट के लिए पकने दें।
अब गुड़ को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़कर आंवले में मिलाकर गुड़ के गलने तक धीमी आंच पर पकाएं। अब इसमें भुना हुआ जीरा, काला नमक मिलाकर तब तक लगातार हिलाते रहें जब तक आपको गाढ़ापन ना दिखने लगें। अब इसमें लाल मिर्च और काली मिर्च पाउडर डाल दें। आपकी आंवला-गुड़ चटनी बनकर तैयार है।
खाना खजाना / शौर्यपथ पनीर पसंद करने वाले लोगों को पनीर खाने का बहाना चाहिए होता है। अगर आप रेगुलर पनीर की डिश बनाकर खाते-खाते-बोर हो चुके हैं तो इस बार ट्राई करें पनीर की ये स्नैक्स रेसिपी पनीर अनारदाना कबाब। आइए जानते हैं कैसे बनाई जाती है ये टेस्टी रेसिपी।
पनीर अनारदाना कबाब के लिए सामग्री-
-500 ग्राम पनीर
-2 मीडियम हरी शिमला मिर्च चकोर टुकड़ों में कटी हुई
-2 मीडियम टमाटर चकोर टुकड़ों में कटी हुई
-3 टेबल स्पून तेल
-1 टी स्पून चाट मसाला
पनीर अनारदाना कबाब को मेरिनेट करने के लिए-
-हंग कर्ड
-1 टी स्पून अदरक का पेस्ट
-1 टी स्पून लहसुन का पेस्ट
-1/2 टी स्पून कशमिरी लाल मिर्च पाउडर
-एक चुटकी हल्दी पाउडर
-1/2 टी स्पून गरम मसाला पाउडर
-2 टी स्पून अनारदाना पाउडर
-2-3 टेबल स्पून फ्रेश क्रीम
-1 टी स्पून नींबू का रस
-नमक
पनीर अनारदाना कबाब बनाने का तरीका-
पनीर अनारदाना कबाब बनाने के लिए सबसे पहले पनीर को टुकड़ों को एक इंच लम्बाई और मोटाई में काट लें। अब मेरिनेट करने वाली सारी सामग्री को मिलाकर पनीर के टुकड़ों को इसमें 15 मिनट के लिए मेरिनेट करने के लिए रख दें।
अब तवे पर तेल गर्म करके उसमें पनीर के टुकड़ों को डालकर गोल्डन ब्राउन क्रिस्पी होने तक फ्राई करें। फ्राई होने पर पनीर के इन टुकड़ों को एक पेपर टॉवल पर निकाल लें। अब शिमला मिर्च और टमाटर के टुकड़ों को बाकी बचे मेरिनेट के पेस्ट में लपेटकर तवे पर बचे हुए तेल में 2 से 3 मिनट के लिए भून लें।
अब शिमला मिर्च और टमाटर के टुकड़ों के साथ पनीर के टुकड़ों को टूथपिक में लगाकर ऊपर से उसमें चाट मसाला छिड़ककर गर्मागर्म सर्व करें।
सेहत / शौर्यपथ / अक्सर आपने सुना होगा कि स्ट्रेस लेने से व्यक्ति चिड़चिड़ा हो जाता है, उसका किसी से बात करने का मन नहीं करता, यहां तक कि वो अपने परिवार और दोस्तों से भी ढंग से बात नहीं करना चाहता। बावजूद इसके अगर हम कहें कि लाइफ में थोड़ा स्ट्रेस बेहद जरूरी है तो? सुनकर आप भी सोच में पड़ गए होंगे कि भला ये क्या बात हुई, पर ये सच हैं। आइए जानते हैं कैसे कुछ चीजों के लिए स्ट्रेस लेने से लाइफ बन सकती है कूल।
सुबह जल्दी उठना-
आमतौर पर लोगों को सुबह जल्दी उठना बेहद तनावपूर्ण लगता है। अगर आप भी इस लिस्ट में शामिल हैं तो ये तनाव लेने की आदत डाल लें। जरा सोचिए, सुबह जल्दी उठने से आप अपने पूरे दिन को अच्छे से व्यवस्थित कर सकते हैं। ऐसा करने से आपके सभी जरूरी काम टाइम से पूरे होंगे और आप बिना बात का तनाव लेने से बच जाएंगे।
एक्सरसाइज करना न भूलें-
अगर आप सुबह जल्दी उठकर एक्सरससाइज या मेडिटेशन करते हैं तो आपका शरीरिक स्वास्थ्य तो ठीक रहता ही है बल्कि आप मानसिक रूप से भी अच्छा महसूस करते हैं। खुद को पॉजिटिव बनाए रखने के लिए रोजाना एक्सरसाइज करें।
सफाई करना-
खुद के साथ अपने आस-पास की जगह को भी साफ रखें। गंदा घर या अव्यवस्थित पड़ी चीजें व्यक्ति को डिप्रेशन में डाल सकती हैं। भले ही शुरूआत में आपको ये काम थोड़ा तनावपूर्ण लग सकता है लेकिन स्वच्छ वातावरण सकारात्मक सोच को जन्म देता है और आप तनाव से दूर रहते हैं।
पढ़ाई करना-
कहावत है कि किताबें आपकी सबसे अच्छी दोस्त होती हैं। खुद को तनाव से दूर रखने के लिए अच्छी किताबें पढ़ने के लिए थोड़ा समय निकालें। भले ही आपको यह काम थोड़ा तनावपूर्ण लगे लेकिन यकीन मानिए किताबें पढ़ने का शौक हर किसी के लिए बेहद फायदेमंद होता है। इस स्ट्रेस को लेने से न सिर्फ आपकी विभिन्न विषयों के प्रति आपकी जानकारी बढ़ती है बल्कि आपकी सोच का दायरा भी व्यापक होता है।
खाना बनाना-
एक अच्छा पौष्टिक भोजन न सिर्फ आपके स्वास्थ्य का ध्यान रखता है बल्कि आपके स्ट्रेस को भी दूर रखने में मदद करता है। इसलिए खाना बनाने के इस स्ट्रेस को रोजमर्रा के जीवन में शामिल करके इसे अपनी हॉबी बनाएं और खुद को स्ट्रेस और बीमारियों से दूर रखें ।
धर्म/ शौर्यपथ / न्याय के देवता शनि कर्म के ग्रह माने जाते हैं। इन की बुरी दृष्टि से बचने के लिए लोग क्या-क्या उपाय नहीं करते। शनि हमेशा मेहनती लोगों का साथ देते हैं। इनकी कृपा लोगों पर रहे तो ये रंक को राजा और राजा को रंक भी बना सकते हैं। गरीबों की सेवा करने वाले और कर्मठ लोगों पर इनकी हमेशा अच्छी दृष्टि रहती है। आपको बता दें कि शनि की कुछ राशियों पर हमेशा मेहरबान रहते हैं। कहा जाता है कि ये राशियां शनिदेव की पसंदीदा राशियां है। आइए जानें इन राशियों के बारे में:
तुला राशि के लोगों पर हमेशा शनि की अच्छी दृष्टि रहती है। तुला राशि के लोग विनम्र स्वभाव के होते हैं। ये लोग विवाद से दूर रहते हैं। तुला राशि के लोग मेहनत और ईमानदारी से जीवन निर्वाह करना पसंद करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि अगर इस राशि के लोग मेहनती हों और गरीबों की सहायता करने वाले हों तो उनकों सफलता निश्चित ही मिलती है।
कुंभ राशि के लोगों पर भी शनि मेहरबान रहते हैं। शनि देव कुंभ राशि के स्वामी है। इस राशि के लोगों को शनि हमेशा मेहनत का फल देते हैं। इनके थोड़े से प्रयत्न से शनि देव प्रसन्न होते हैं। ऐसा कहा जाता है कि कुंभ राशि के जातक बहुत सीधे और शांत होते हैं। ये किसी से धोखा आदि नहीं करते हैं। न्याय प्रिय देवता शनि इसी वजह से इस राशि के लोगों पर अपनी अच्छी दृष्टि रखते हैं।
कुंभ राशि के लोग मानवीय और परोपकारी होते हैं। ये लोग समाज की भलाई के लिए कुछ भी कर सकते हैं। यही वजह है कि शनिदेव को यह राशि पसंद है।
मकर राशि के लोगों पर भी शनिदेव की अच्छी नजर रहती है। शनिदेव इस राशि के लोगों को हमेशा उनके अच्छे कार्यों का फल समय पर देते हैं। इनके जीवन में खुशियां ही खुशियां रहती है। मकर राशि के लोग गंभीर और सहनशील होते है। ये लोग मन के विपरीत कभी कुछ नहीं करते। शनि अगर इनकी राशि में अच्छा होते तो वारे न्यारे कर सकता है।
सेहत / शौर्यपथ / पतझड़ में जन्मे बच्चों में अस्थमा, हे फीवर और खानपान से संबंधित एलर्जी होने का खतरा ज्यादा होता है। एक हालिया शोध में यह खुलासा हुआ है। ब्रिटेन में दुनिया में सबसे अधिक एलर्जी की दर है, यहां की 20 प्रतिशत से अधिक आबादी कम से कम एक एलर्जी विकार से पीडि़त है।
कोलोराडो की नेशनल ज्यूइश हेल्थ की शोधकर्ता डॉक्टर जेसिका हुई ने कहा, हमने अपने क्लिनिक में इलाज किए गए प्रत्येक बच्चे को देखा और पाया कि जो बच्चे पतझड़ में पैदा हुए थे, उनमें एलर्जी से जुड़ी सभी स्थितियों का अनुभव करने की अधिक संभावना थी। अब हम इस बारे में अधिक अध्ययन कर रहे हैं कि ऐसा क्यों है और हम दृढ़ता से मानते हैं कि यह त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया के कारण होता है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि ज्यादातर एलर्जी बचपन में ही शुरू होती है जब एलर्जी फैलाने वाले रोगाणु सूखी हुई त्वचा से अंदर प्रवेश करते हैं। इससे एलर्जी की एक श्रृखंला की शुरुआत हो जाती है जिसे एटॉपिक मार्च कहते हैं।
ब्रिटेन में पांच में से एक बच्चे को एक्जीमा की शिकायत है। जिन्हें एक्जीमा की शिकायत होती है उनके शरीर में हानिकारक बैक्टीरिया का स्तर ज्यादा होता है। इससे एलर्जी पैदा करने वाले रोगाणुओं को नष्ट करने की उनकी क्षमता कम हो जाती है। शोधकर्ताओं का मानना है कि पतझड़ में पैदा होने वाले बच्चों की त्वचा बेहद कमजोर होती है और इसलिए ये बार-बार एलर्जी का शिकार हो जाते हैं।
शिक्षा / शौर्यपथ / जीवन में हर कोई जीतना चाहता है लेकिन कभी-कभी काफी प्रयासों के बाद भी हम हार जाते हैं। जीवन के किसी पड़ाव पर हारना बुरा नहीं है लेकिन हारकर वापस न उठना या हारे हुए मन से जीते जाना बहुत बुरा है लेकिन कभी न कभी ऐसा होता है जब किसी हार से हम बुरी तरह प्रभावित हो जाते हैं और हमारी हिम्मत जवाब दे जाती है। ऐसे में खुद को फिर से खड़ा करने के लिए कुछ बातों पर ध्यान देना चाहिए-
अपनी जीत को याद करें
आपको जब भी लगे कि अब आप हारने के बाद फिर से खड़े नहीं हो सकते, तो आपको जरुरत है कि आप जीत को याद करते हुए सोचें कि एक दिन वो भी था, जब आपको जीत हासिल हुई थी। ऐसे में आप महसूस करेंगे कि आपके मन से नकारात्मकता जाने लगेगी।
जानवरों से सीखें
इंसान किताबों से सीखता है लेकिन जानवरों की प्रकृति से बहुत कुछ सीखा जा सकता है। सभी जानवर भोजन की तलाश में इधर-उधर घूमते हुए मेहनत करते हैं। वो रोजाना यही काम करते हैं लेकिन फिर भी कभी हार नहीं मानते और मेहनत करते रहते हैं।
अपने लक्ष्य को फिर से याद करें
आपकी हार ने अगर हौंसला तोड़ दिया है, तो अपने लक्ष्य को दुबारा याद करें। आप यह सोचें कि आपको अगर अपना लक्ष्य मिल जाता है, तो आपके जीवन में क्या बदलाव आता है। इससे आपका हौंसला बढ़ जाएगा।
अपने करीबियों को याद करें
आप दुबारा कोशिश करते हैं और लक्ष्य को पा लेते हैं, तो आपके करीबियों पर इसका क्या असर पड़ेगा, यह सोचिए कि आप लक्ष्य को पाकर उनके जीवन में क्या बदलाव ला सकते हैं। ऐसा करने से आप निराशा को भूलकर आगे बढऩे का निर्णय लें पाएंगे।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
