July 24, 2026
Hindi Hindi

Login to your account

Username *
Password *
Remember Me

    दुर्ग / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित राज्यसेवा मुख्य परीक्षा 2019 की घोषित तिथि में परिवर्तन कर आगे बढ़ाने की घोषणा किया गया था छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित किया गया था जिसमें पूरे प्रदेश के अभ्यर्थियों के साथ हर जिले से भी अभ्यर्थी शामिल होंगे जिसे देखते हुए एनएसयुआई जिला कार्यकारिणी अध्यक्ष सोनू साहू ने बताया कि पूरे छत्तीसगढ़ प्रदेश में कोविड-19 कोरोना संक्रमण भयावह रूप में फैल रहा है ऐसी स्थिति में कोरोना संक्रमण परेशानियों का कारण बन सकता है अगर इन गंभीर परिस्थितियों में भी यह परीक्षा आयोजित होती है तो संभावित भीड़ के कारण कोरोना संक्रमण का खतरा और बढ़ जाएगा।
    जिसे देखते हुए आज एनएसयुआई के प्रतिनधिमंडल ने प्रदेश उपाध्यक्ष दुर्ग जिला कांग्रेस प्रभारी एवम् खनिज न्यास विकाश विभाग के अध्यक्ष गिरीश देवांगन को ज्ञापन सौंपा कर तिथि में परिवर्तन कर आगे बढ़ाने का के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी को इस परेशानी से अवगत कराने के लिए संगठन प्रभारी गिरीश देवांगन जी से आग्रह किया आज दुर्ग जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा उत्तरप्रदेश में हाथरस में बच्ची के साथ हुए अनाचार के मामले को लेकर आयोजित एक दिवसीय मौन धरना प्रदर्शन में का कार्यक्रम रखा गया है जिसमें सामिल होने दुर्ग देवांगन जी दुर्ग आए हुए थे इस दौरान हितेश सिन्हा,जय सेन,हरीश देवांगन,विनिश साहू,अमोल जैन,विकाश साहू,अंकुश सोनी,गोल्डी कोसरे,दीपक मेश्राम, यश बाकलीवाल सहित अन्य लोग मौजूद थे

    शौर्यपथ / कोविड-19 के कारण करीब छह महीने ठप रहे हिमाचल प्रदेश के पर्यटन कारोबार से लॉकडाऊन के बादल हटते ही कारोबारियों के चेहरे पर रौनक की धूप खिलने लगी है क्योंकि पर्यटकों का रेला लौटने लगा है। एक अरसे बाद आज शहर के रिज मैदान, मालरोड सहित ऊपरी शिमला के प्रमुख पर्यटक स्थलों पर सैलानियों की चहल-पहल दिखी। शहर में दिनभर जगह-जगह जाम भी लगता रहा पर संभवत: इसका बुरा किसीने नहीं माना।आधिकारिक सूत्रों के अनुसार सप्ताहंत का लुत्फ उठाने प्रदेश के मुख्य पर्यटक स्थलों पर हजारों की तादाद में बाहरी राज्यों से पर्यटक पहुंचे हैं।
    पिछले 24 घंटों में राजधानी में 13400 गाड़ियां पहुंची हैं। एक होटल संचालक ने बताया कि शिमला के होटलों की ऑक्यूपेंसी 8० से 9० फीसदी तक चल रही है। उन्होंने बताया कि अनलॉक प्रक्रिया के तहत सीमा खोेले एक पखवाड़ा ही हुआ है और पर्यटकों की बुकिंग आनी शुरू हो गई है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा रहा है कि इस बार सर्दियों के दौरान पिछले साल से ज्यादा पर्यटक आने की उम्मीद है।
    होटल एसोसिएशन के उपाध्यक्ष अश्वनी सूद ने कहा कि जो लोग छह महीनों से घरों में कैद थे। अब वह पहाड़ों का रुख कर रहे हैं। इससे होटल कारोबार में सुधार आना शुरू हो गया है। इस सप्ताहंत पर्यटकों की अच्छी खासी भीड़ का कारण शिमला का खुशनुमा मौसम भी है। इन दिनों शिमला में अधिकतम तापमान 25 डिग्री और न्यूनतम तापमान 15 डिग्री सेल्सियस के करीब चल रहा है।

    सेहत / शौर्यपथ / कई लोगों की आदत होती है कि वो खाने के साथ कई चीजें भी अपनी थाली में शामिल कर लेते हैं लेकिन ऐसा करने से पहले आपको जान लेना चाहिए कि आयुर्वेद के अनुसार किन चीजों को साथ खाने की मनाही की गई है। आइए, जानते हैं किन चीजों को एक साथ नहीं खाना चाहिए-
    दूध के साथ ये चीजें खाना हानिकारक
    उड़द की दाल, पनीर, अंडा, मीट
    उड़द की दाल खाने के बाद दूध नहीं पीना चाहिए। हरी सब्जिियां और मूली खाने के बाद भी दूध नहीं पीना चाहिए। अंडा, मीट, और पनीर खाने के बाद दूध पीने से बचना चाहिए। इनको एक साथ खाने से डाइजेशन में दिक्कअत आ सकती है।
    दही के साथ न खाएं ये चीजें
    खट्टे फल
    दही के साथ खासतौर पर खट्टे फल नहीं खाने खहिए। दरअसल, दही और फलों में अलग-अलग एंजाइम होते हैं। इस कारण वे पच नहीं पाते, इसलिए दोनों को साथ लेने की सलाह नहीं दी जाती।
    मछली
    दही की तासीर ठंडी है। उसे किसी भी गर्म चीज के साथ नहीं लेना चाहिए। मछली की तासीर काफी गर्म होती है, इसलिए उसे दही के साथ नहीं खाना चाहिए।
    शहद के साथ क्या न खाएं
    शहद को कभी गर्म करके नहीं खाना चाहिए। चढ़ते हुए बुखार में भी शहद का सेवन नहीं करना चाहिए। इससे शरीर में पित्त बढ़ता है। शहद और मक्ख न एक साथ नहीं खाना चाहिए। घी और शहद कभी साथ में नहीं खाना चाहिए। यहां तक कि पानी में मिलाकर भी शहद और घी का सेवन नुकसानदेह हो सकता है।
    इन चीजों को भी एक साथ खाने से करें परहेज
    - ठंडे पानी के साथ घी, तेल, खरबूज, अमरूद, खीरा, जामुन और मूंगफली नहीं खानी चाहिए।
    - खीर के साथ सत्तू, शराब, खटाई और कठहल नहीं खाना चाहिए।
    - चावल के साथ सिरका नहीं खाना चाहिए।

    लाइफस्टाइल / शौर्यपथ /‘वर्क फ्रॉम होम’ ने घर और दफ्तर के बीच की दीवार को धुंधला कर दिया है। कभी कुकर की सीटी तो कभी टीवी का शोरगुल, कभी फल-सब्जी वाले की आवाज तो कभी बच्चों की उछल-कूद, घर में बैठकर ऑफिस का काम निपटाना कतई आसान नहीं। ऐसे में मशहूर अमेरिकी आर्किटेक्ट फर्म ‘लॉरेल एंड वोल्फ’ के विशेषज्ञों ने कुछ ऐसे उपाय सुझाए हैं, जो ‘वर्क फ्रॉम होम’ में होने वाली मुश्किलों को दूर करने के साथ ही उत्पादकता बढ़ाने में भी कारगर साबित हो सकते हैं।
    घर का पसंदीदा कोना चुनें:
    घर में ऑफिस का सेटअप स्थापित करते समय यह मत भूलिए कि आपको वहां कम से कम आठ घंटे तो गुजारने ही हैं। ऑफिस टेबल को घर के किसी खाली कोने के बजाय खिड़की के पास लगाने की कोशिश करें, ताकि हर 15 से 20 मिनट पर स्क्रीन से ब्रेक लेकर हरियाली का दीदार कर सकें। अगर ऑफिस टेबल को खिड़की के पास स्थापित करने का विकल्प नहीं मौजूद है तो सामने की दीवार पर रंग-बिरंगी पेंटिंग लगाएं, जिससे न सिर्फ आपको ‘फील गुड’ हो, बल्कि ताजगी का एहसास भी बना रहे।
    रोशनी का खास ख्याल रखें:
    ‘वर्क फ्रॉम होम’ में घंटों कंप्यूटर या लैपटॉप की स्क्रीन से चिपके रहने से आंखों की रोशनी प्रभावित होना लाजिमी है। ऐसे में घर में पर्याप्त मात्रा में धूप न आती हो तो उसकी भरपाई कृत्रिम लाइट से करें। कमरे की छत पर बल्ब लगाने के साथ ही डेस्क पर लैंप की व्यवस्था करें, ताकि स्क्रीन पर नजर टिकाए रहने के दौरान आंखों पर ज्यादा जोर न पड़े। ऑफिस सेटअप में एलईडी या व्हाइट लाइट का ही इस्तेमाल सुनिश्चित करें, क्योंकि ये आंखों को सुकून पहुंचाती हैं।
    नीली, पीली दीवारें फायदेमंद:
    ‘लॉरेल एंड वोल्फ’ के मुताबिक पीला-नारंगी रंग जहां ‘फील गुड’ हार्मोन का स्त्राव बढ़ाता है, वहीं नीला-हरा रंग स्ट्रेस हार्मोन ‘कॉर्टिसोल’ के उत्पादन में कमी लाता है। इसलिए ऑफिस सेटअप में दीवारों को इन रंगों में रंगवाना खासा फायदेमंद साबित हो सकता है। यही नहीं, ऑफिस जैसी ऊर्जा महसूस करने के लिए सामने की दीवार पर एक व्हाइट बोर्ड भी जरूर लगाएं। उस पर रोजाना के लिए निर्धारित काम के साथ ही प्रमुख फोन नंबर और मन में आने वाले विचार लिखते रहें।
    फर्नीचर आरामदायक होना जरूरी:
    -अगर आप सोचते हैं कि ‘वर्क फ्रॉम होम’ बस चंद दिनों की बात है। ऐसे में टेबल या कुर्सी पर पैसे खर्च करने की क्या जरूरत है तो आप गलत हैं। जरूरत से ज्यादा ऊंची या नीची टेबल-कुर्सी पर बैठकर काम करने से आपको न सिर्फ पीठ, कमर, कंधे और गर्दन में दर्द की शिकायत सता सकती है, बल्कि चक्कर व सर्वाइकल स्पॉन्डलाइटिस की समस्या भी पनप सकती है। ‘वर्क फ्रॉम होम’ में बिस्तर पर लेटकर या बैठकर काम करने से भी बचें। इससे रीढ़ की हड्डी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
    डेस्क पर छोटे-छोटे पौधे लगाएं:
    -पेड़-पौधे न सिर्फ आंखों को सुकून पहुंचाते हैं, बल्कि तनाव का एहसास घटाने और उत्पादकता बढ़ाने में भी खासे असरदार पाए गए हैं। इसलिए ऑफिस डेस्क के आसपास बोनसाई या कैक्टस का पौधा लगाएं, जिनका रखरखाव बेहद आसान है। टेबल और फर्श पर सफेद या क्रीम चादर व रग बिछाएं, ताकि मन हमेशा शांत व तरोताजा बना रहे। पेन स्टैंड या फाइल बॉक्स खरीदने की जरूरत नहीं। घर में मौजूद पुराने डिब्बों या गत्ते को सजाकर पेन-फाइलें रखने के लिए इस्तेमाल करें। यह भी सुनिश्चित करें कि ऑफिस जोन टीवी से दूर हो।
    काम के बोझ तले दबे कर्मचारी:
    -59% कर्मचारियों ने ‘वर्क फ्रॉम होम’ में ऑफिस से कहीं ज्यादा काम करने की बात कही
    -91% ने अतिरिक्त काम के बदले कोई भत्ता या छुट्टी न दिए जाने पर नाखुशी जाहिर की
    -87% का मानना है कि नियोक्ताओं को ‘वर्क फ्रॉम होम’ के लिए पारदर्शी नीति बनानी चाहिए
    शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य पर असर:
    -56% में पीठ-कमर-कंधे में दर्द, 52% में अनिद्रा और 38% में सिरदर्द की समस्या पनपी
    -54% घर में रहते हुए भी बीवी-बच्चों, अभिभावकों के साथ अच्छे पल बिताने को तरसे
    -33% को लॉकडाउन के शुरुआती महीनों में छुट्टी न मिलने से बेचैनी की शिकायत हुई

    धर्म संसार / शौर्यपथ / हमने अक्सर मंदिरों में आटे के दीये जलते हुए देखे हैं, लेकिन हम नहीं जानते कि ऐसा क्यों किया जाता है? आइए जानते हैं शास्त्रसम्मत कुछ बातें...
    1. वास्तव में आटे के दीपक का प्रयोग किसी बहुत बड़ी कामना की पूर्ति के लिए किया जाता है।
    2. अक्सर मन्नत के दिए आटे के बने होते हैं।
    3. अन्य दीपक की तुलना में आटे के दीप को शुभ और पवित्र माना गया है। मां अन्नपूर्णा का आशीष इस दीप को स्वत: ही मिल जाता है।
    4. मां दुर्गा, भगवान हनुमान, श्री गणेश, भोलेनाथ शंकर, भगवान विष्णु, भगवान विष्णु के अवतार श्रीराम और श्री कृष्ण सभी के मंदिरों में आटे का दीप कामना पूर्ति के लिए जलाया जाता है।
    5. मुख्य रूप से तांत्रिक क्रियाओं में आटे का दीप जलाते हैं।
    6. कर्ज से मुक्ति, शीघ्र विवाह, नौकरी, बीमारी, संतान प्राप्ति, खुद का घर, गृह कलह, पति-पत्नी में विवाद, जमीन जायदाद, कोर्ट कचहरी में विजय, झूठे मुकदमे तथा घोर आर्थिक संकट के निवारण हेतु आटे के दीप संकल्प के अनुसार जलाए जाते हैं।
    7. ये दीप घटती और बढ़ती संख्या में लगाए जाते हैं। एक दीप से शुरुआत कर उसे 11 तक ले जाया जाता है। जैसे संकल्प के पहले दिन 1 फिर 2, 3, ,4 , 5 और 11 तक दीप जलाने के बाद 10, 9, 8, 7 ऐसे फिर घटते क्रम में दीप लगाए जाते हैं।
    8. आटे में हल्दी मिला कर गुंथा जाता है और हाथों से उसे दीप का आकार दिया जाता है। फिर उसमें घी या तेल डाल कर बत्ती सुलगाई जाती है।
    9. मन्नत पूरी होने के बाद एक साथ आटे के सारे संकल्पित दीये मंदिर में जाकर लगाए जाते हैं।
    10. अगर दीप की संख्या पूरी होने से पहले ही कामना पूरी हो जाए तो क्रम को खंडित न करें। संकल्प में माने गए दीप पूरे जलाएं। किसी भी अच्छे दिन, अच्छे वार के शुभ मुहूर्त और चौघड़िया में दीप जलाने का प्रण लिया जा सकता है। हर दीप के साथ कामना अवश्य बोलें।

    लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / बांसुरी प्रकृ‍‍ति का एक अनुपम वरदान है। भगवान श्री कृष्ण को बांसुरी अतिप्रिय है। वे इसे हमेशा अपने साथ रखते हैं। घर में जहां देवता बैठे हो वहां एक सुंदर सी बांसुरी लाकर रखना चाहिए।
    आइए जानें बांसुरी के बारे में >
    1. बांसुरी को बहुत ही पवित्र और पूजनीय माना जाता है।
    2. बांसुरी की अभिव्यक्त शक्ति अत्यंत विविधतापूर्ण है, उससे मधुर संगीत बजाया जाता है।
    3. बांसुरी प्राकृतिक आवाजों की नकल करने में निपुण है, उससे कई तरह के पक्षियों के आवाज की हू-ब-हू नकल की जा सकती है।
    4. बांसुरी घर के वातावरण में मौजूद समस्त नकारात्मक शक्तियों को समाप्त करके सकारात्मक ऊर्जा सक्रिय करने का कार्य करती है।
    5. बांसुरी बांस से बनी होती है तथा इसके पौधे को दिव्य माना जाता है। अत: घर में बांसुरी का प्रयोग करके कई तरह से लाभ उठाया जा सकता है।
    6. ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति अपनी नौकरी से परेशान रहता हैं, वह अपने घर में बांसुरी रखें , बांसुरी उसकी सारी मुश्किलें आसान कर सकती है।
    7. अगर कोई काफी मेहनत के बाद भी अपने बिजनेस में सफलता हासिल नहीं कर पा रहा है तो उसे बांस की बनी बांसुरी अपने दुकान में रखनी चाहिए इससे व्यापार में उन्नति होती है।
    8. नए व्यवसाय का आरंभ और ईश्वर का पूजन करते समय अपने दुकान की छत पर दो बांसुरी चिपकानी चाहिए या टांग देनी चाहिए। यह बांसुरी अच्छी सफलता दिलाने में मददगार साबित होता है।
    9. बांसुरी से निकलने वाला स्वर प्रेम की बरखा करता है। जिस घर में बांसुरी रखी होती है वहां प्रेम और धन की कोई कमी नहीं रहती है।
    10. बांसुरी के संबंध में एक धार्मिक मान्यता है कि जब बांसुरी को हाथ में लेकर हिलाया जाता है तो बुरी आत्माएं दूर हो जाती हैं और जब इसे बजाया जाता है तो घरों में शुभ चुंबकीय प्रवाह का प्रवेश होता है।

    धर्म संसार / शौर्यपथ / नवरात्रि में कैसे करें पूजन - आइए जानें नवरात्रि में पूजन कैसे करना चाहिए और इसके क्या नियम हैं?
    * आश्विन शुक्ल प्रतिपदा को ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें।
    * घर के ही किसी पवित्र स्थान पर स्वच्छ मिट्टी से वेदी बनाएं।
    * वेदी में जौ और गेहूं दोनों को मिलाकर बोएं।
    * वेदी पर या समीप के ही पवित्र स्थान पर पृथ्वी का पूजन कर वहां सोने, चांदी, तांबे या मिट्टी का कलश स्थापित करें।
    * इसके बाद कलश में आम के हरे पत्ते, दूर्वा, पंचामृत डालकर उसके मुंह पर सूत्र बाधें।
    * कलश स्थापना के बाद गणेश पूजन करें।
    * इसके बाद वेदी के किनारे पर देवी की किसी धातु, पाषाण, मिट्टी व चित्रमय मूर्ति विधि-विधान से विराजमान करें।
    * तत्पश्चात मूर्तिका आसन, पाद्य, अर्ध, आचमन, स्नान, वस्त्र, गंध, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, आचमन, पुष्पांजलि, नमस्कार, प्रार्थना आदि से पूजन करें।
    * इसके पश्चात दुर्गा सप्तशती का पाठ, दुर्गा स्तुति करें।
    * पाठ स्तुति करने के बाद दुर्गाजी की आरती करके प्रसाद वितरित करें।
    * इसके बाद कन्या भोजन कराएं। फिर स्वयं फलाहार ग्रहण करें।
    प्रतिपदा के दिन घर में ही जवारे बोने का भी विधान है। नवमी के दिन इन्ही जवारों को सिर पर रखकर किसी नदी या तालाब में विसर्जन करना चाहिए। अष्टमी तथा नवमी महातिथि मानी जाती हैं।
    इन दोनों दिनों में पारायण के बाद हवन करें फिर यथा शक्ति कन्याओं को भोजन कराना चाहिए।
    नवरात्रि में क्या करें, क्या न करें
    * इन दिनों व्रत रखने वाले को जमीन पर सोना चाहिए।
    * ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
    * व्रत करने वाले को फलाहार ही करना चाहिए।
    * नारियल, नींबू, अनार, केला, मौसमी और कटहल आदि फल तथा अन्न का भोग लगाना चाहिए।
    * व्रती को संकल्प लेना चाहिए कि हमेशा क्षमा, दया, उदारता का भाव रखेगा।
    * इन दिनों व्रती को क्रोध, मोह, लोभ आदि दुष्प्रवृत्तियों का त्याग करना चाहिए।
    * देवी का आह्वान, पूजन, विसर्जन, पाठ आदि सब प्रातःकाल में शुभ होते हैं, अतः इन्हें इसी दौरान पूरा करना चाहिए।
    * यदि घटस्थापना करने के बाद सूतक हो जाएं, तो कोई दोष नहीं होता, लेकिन अगर पहले हो जाएं, तो पूजा आदि न करें।
    दस महाविद्याओं के उत्पत्ति की पौराणिक कथा
    पुराणों में दस महाविद्याओं के उत्पत्ति की अलग अलग कथाएं मिलती हैं। कई जगहों पर उन्हें माता सती या माता पार्वती की बहनें बताई गई हैं तो कुछ जगहों पर उन्हें माता सती का ही रूप बताया गया है। यह भी कहा जाता है कि उनमें से कुछ माता की बहनें हैं तो कुछ उनका ही रूप हैं। उनकी उत्पत्ति कथाओं में से एक कथा पढ़ें।
    पुराणों अनुसार जब भगवान शिव की पत्नी सती ने दक्ष के यज्ञ में जाना चाहा तब शिवजी ने वहां जाने से मना किया। इस इनकार पर माता ने क्रोधवश पहले काली शक्ति प्रकट की फिर दसों दिशाओं में दस शक्तियां प्रकट कर अपनी शक्ति की झलक दिखला दी। इस अति भयंकरकारी दृश्य को देखकर शिवजी घबरा गए। क्रोध में सती ने शिव को अपना फैसला सुना दिया, 'मैं दक्ष यज्ञ में जाऊंगी ही। या तो उसमें अपना हिस्सा लूंगी या उसका विध्वंस कर दूंगी।'
    हारकर शिवजी सती के सामने आ खड़े हुए। उन्होंने सती से पूछा- 'कौन हैं ये?' सती ने बताया,‘ये मेरे दस रूप हैं। आपके सामने खड़ी कृष्ण रंग की काली हैं, आपके ऊपर नीले रंग की तारा हैं। पश्चिम में छिन्नमस्ता, बाएं भुवनेश्वरी, पीठ के पीछे बगलामुखी, पूर्व-दक्षिण में धूमावती, दक्षिण-पश्चिम में त्रिपुर सुंदरी, पश्चिम-उत्तर में मातंगी तथा उत्तर-पूर्व में षोड़शी हैं और मैं खुद भैरवी रूप में अभयदान देने के लिए आपके सामने खड़ी हूं।' यही दस महाविद्या अर्थात् दस शक्ति है। बाद में मां ने अपनी इन्हीं शक्तियां का उपयोग दैत्यों और राक्षसों का वध करने के लिए किया था।
    दस महा विद्या : 1.काली, 2.तारा, 3.त्रिपुरसुंदरी, 4.भुवनेश्वरी, 5.छिन्नमस्ता, 6.त्रिपुरभैरवी, 7.धूमावती, 8.बगलामुखी, 9.मातंगी और 10.कमला।
    प्रवृति के अनुसार दस महाविद्या के तीन समूह हैं। पहला:- सौम्य कोटि (त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, मातंगी, कमला), दूसरा:- उग्र कोटि (काली, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी), तीसरा:- सौम्य-उग्र कोटि (तारा और त्रिपुर भैरवी)।
    जानिए राशिनुसार किस शुभ ग्रंथ से घर में आएगी समृद्धि
    मेष-मेष राशि वाले प्रात:काल रुद्राष्टक के 11 पाठ करें।
    वृषभ- वृषभ राशि वाले प्रात:काल देवी-कवच का पाठ करें।
    मिथुन- मिथुन राशि वाले प्रात:काल गणपति-अथर्वशीर्ष का पाठ करें।
    कर्क- कर्क राशि वाले गौरी-जी की आराधना करें।
    सिंह- सिंह राशि वाले आदित्य-ह्रदय-स्तोत्र के 11 पाठ करें।
    कन्या- कन्या राशि वाले गायत्री-मंत्र जाप करें।
    तुला- तुला राशि वाले श्री-सूक्तम का पाठ करें।
    वृश्चिक- वृश्चिक राशि वाले मंगला-स्तोत्र का पाठ करें।
    धनु- धनु राशि वाले साई-चरित्र का पाठ करें।
    मकर- मकर राशि वाले हनुमान चालीसा के 11 पाठ नौ दिन करें।
    कुंभ- कुंभ राशि वाले सुंदरकांड का पाठ करें।
    मीन- मीन राशि वाले राम-रक्षास्तो‍त्र का पाठ करें।
    विशेष- उपरोक्त आराधना नवरात्रि में प्रात:काल करने से विशेष लाभ मिलेगा।

    सेहत / शौर्यपथ / आयुर्वेदिक और होम्योपैथी की दवा खाकर कोरोना संक्रमित डॉक्टर स्वस्थ हो गए। उन्हें कोरोना संक्रमण के बाद सांस लेने में दिक्कत और बुखार भी था। उनकी पत्नी भी इस बीमारी से पीडि़त थीं। उन्होंने भी इलाज के लिए इन्हीं दवाओं का उपयोग किया। दोनों अब स्वस्थ हैं।
    सुपर स्पेश्यलिटी शिशु अस्पताल के कोरोना वार्ड में एक महीने मरीजों का इलाज करने वाले डॉ. प्रमोद कश्यप खुद होम्योपैथी के डॉक्टर हैं। 20 दिन पहले वह कोरोना संक्रमित हो गए। दो दिन बाद उनकी पत्नी दिव्या भी कोरोना से पीडि़त मिली। दोनों को शुरू में एलोपैथी दवाएं नहीं मिलीं, ऐसे में उन्होंने आयुर्वेदिक और होम्योपैथी की दवाओं का सेवन किया। करीब 10 दिन के बाद उनकी जांच रिपोर्ट निगेटिव आई। अब दोनों स्वस्थ हैं और होम क्वारंटाइन हैं।
    कश्यप ने बताया कि मुझे होम्योपैथी और आयुर्वेदिक दवाओं पर पूरा विश्वास था। इसकी जानकारी भी थी। ऐसे में मैंने आयुर्वेदिक और होम्योपैथी दवाएं लेनी शुरू कर दी। दो-तीन दिन मुझे बुखार भी था, लेकिन इससे घबराया नहीं। पॉजिटिव होने के बाद बुखार आया। एक दिन बाद सांस लेने भी थोड़ी परेशानी आई थी। दोनों चिकित्सा पद्धति की दवाओं का सेवन जारी रखा। धीरे-धीरे तबीयत सुधरती गई। अब पूरी तरह से स्वस्थ हूं।
    पत्नी को भी यहीं दवाएं दी। एलोपैथी की दवा के नाम पर सिर्फ विटामिन बी काम्पलेक्स दवा ली। हालांकि लोगों को मेरी सलाह है कि कोरोना संक्रमण होने की स्थिति में डॉक्टरों के परामर्श के आधार पर ही दवाओं का सेवन करें। मैं खुद डॉक्टर था, इसलिए ये दवाएं लीं।
    प्रतिदिन एक घंटे छत पर टहले-
    कि कोरोना संक्रमण होने के बाद भी नियमित रूप से एक घंटे छत पर टहलने जरुर जाया करता था। जो प्रतिरोधक क्षमता को ठीक रखने के लिए जरुरी था। सुबह आधा घंटा और शाम को आधा घंटा टहला। जिसका फायदा भी मिला। पहले भी मैं प्रतिदिन टहला करता था। इसके लिए पार्क या सड़क के किनारे चलता था, लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण बाहर नहीं जा सकता था। इसलिए छत को ही पार्क बना लिया।
    आयुर्वेदिक और होम्यापैथी में इन दवाओं का सेवन किया-
    कोरोना संक्रमण से स्वस्थ हुए कि आयुर्वेदिक दवाओं में गिलोय, हल्दी, तुलसी, आंवला, अश्वगंधा, ब्राह्मणी, आदि से बनी आयुर्वेदिक तरल का उपयोग किया। यह दिन में दो-तीन बार लिया करता था। वहीं होम्योपैथी में आर्सेनिक 200, सहित अन्य दवाएं ली। ताकि बुखार नियंत्रित रहे।
    आजकल इन दवाओं की मांग भी बढ़ी है-
    प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए वर्तमान में आयुर्वेदिक दवाओं की मांग बाजार में काफी बढ़ गई है। गिलोय, अश्वगंधा सहित अन्य औषधीय पौधों से बनी दवाओं की मांग पांच गुना से अधिक बढ़ गई हैं। कई आयुर्वेदिक दवाओं की बाजार में कमी हो गई है। वहीं होम्योपैथी में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए आर्सेनिक 30 भी उपयोग में है।

    सेहत / शौर्यपथ / कमजोर हड्डियां सिर्फ शरीर को ही कमजोर नहीं बनाती बल्कि हृदय के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर डालती हैं। अगर आप अपने हृदय को स्वस्थ रखना चाहते हैं तो अपने हड्डियों को मजबूत बनाना बेहद जरूरी है।
    लंदन की क्वीन मेरी यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ हैंपटन के मेडिकल रिसर्च काउंसिल लाइफकोर्स इपिडेमियोलॉजी यूनिट के एक हालिया शोध में हड्डियों में मिनरल की कम मात्रा और खराब हृदय स्वास्थ्य के बीच संबंध पाया गया है। शोध में पाया गया है कि महिलाओं और पुरुषों दोनों में ही हड्डियों के कमजोर होने से हृदयरोग पनपते हैं।

    जर्नल ऑफ बोन में प्रकाशित इस शोध में यूके बायोबैंक के डाटा का इस्तेमाल किया गया है। शोधकर्ताओं ने इमेजिंग और रक्त बायोमार्कर डाटा के कई प्रारूपों का संयुक्त तरीके से इस्तेमाल कर हड्डियों और हृदय के स्वास्थ्य के बीच संबंधों का आकलन किया।

    इन कारणों से कमजोर हो सकती है हड्डी-
    इनदिनों गठिया और हृदय की बीमारियों सबसे बड़े स्वास्थ्य समस्याओं के रूप में उभर रहे हैं। दोनों तरह की बीमारियों की वजह बढ़ती उम्र, धूम्रपान और असक्रिय जीवनशैली है। शोध से पता चलता है कि जोखिम कारकों के समान होने के अलावा भी दोनों के बीच संबंध हो सकते हैं। इस शोध से यह भी पता चलता है कि दोनों तरह की समस्याओं का जैविक पाथवे भी समान हो सकता है। इस शोध से दोनों बीमारियों के लिए दवा की खोज आसान हो सकेगी।

    सख्त हो जाती हैं धमनियां-
    शोधकर्ताओं ने पाया कि हड्डी का घनत्व कम होने का संबंध धमनियों के सख्त होने से था। जिन महिलाओं और पुरुषों की हड्डी कमजोर थीं उनके हृदय की धमनियां ज्यादा सख्त थीं। शोध में पाया गया कि हड्डी में कमजोरी से जूझ रहे मरीजों में हृदयघात से मौत होने का खतरा ज्यादा था। शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि हड्डी और हृदय के स्वास्थ्य की प्रणालियां पुरुषों और महिलाओं में अलग थी।

    शोधकर्ता डॉक्टर जहरा राइशी ने कहा, हमारे शोध में कमजोर हड्डियो और दिल की बीमारियों के बीच सीधा संबंध पाया गया है। प्रोफेसर निक हार्वे ने कहा यूके बायोबैंक में मौजूद डाटा का बड़े पैमाने पर विश्लेषण करने पर पाया कि मस्क्यूलोस्केलेटल और कार्डियोवस्कुलर स्वास्थ्य का जैविक पाथवे एक जैसा है और इस खोज से इन दोनों के लिए दवा बनाने में मदद मिल सकती है। प्रोफेसर स्टीफन पीटरसन ने कहा, हृदयरोगों के जोखिम कारकों के बारे में जानकारी बढ़ने से उससे बचाव और उसके इलाज के बेहतर तरीकों के बारे में जाना जा सकेगा।
    इन चीजों के सेवन से मजबूत होंगी हड्डियां-
    कैल्शियम के स्रोत :
    कैल्शियम के लिए आप दूध और दूध से बनी चीजों का सेवन कर सकते हैं। इसके साथ ही हरी पत्तेदार सब्जियां आपको कैल्शियम और आयरन दोनों ही देने में मदद करती है। मछली भी अच्छा विकल्प है। साबुत अनाज, केले, सार्डिनेस, सालमन, बादाम, ब्रेड, टोफू और पनीर कैल्शियम के अच्छे स्रोत हैं।
    विटामिन डी के स्रोत :
    आप विटामिन डी के लिए फैटी फिश जैसे टूना, मेकरेल, सेलमॉन, अंडे का सफेद भाग, सोया मिल्क, डेयरी प्रोडक्ट जैसे दूध, दही वगैरह मशरूम, अनाज, चीज, संतरे का जूस, कोका को आहार में शामिल कर सकते हैं।
    पोटैशियम के स्रोत : पोटैशियम के लिए आप अपने आहार में जड़ यानी कंद-मूल शामिल करें। इनमें शकरकंद, आलू छिलके के साथ सहित अच्छा विकल्प है। इसके अलावा दूध या दूध से बनी चीजें भी आप आहार में शामिल कर सकते हैं।
    मैग्नीशियम के स्रोत :
    मैग्नीशियम के लिए आप हरी पत्तेदार सब्जियों को शामिल कर सकते हैं। पालक मैग्नीशियम का अच्छा स्रोत होता है। इसे अलावा टमाटर, आलू, शकरकंद भी ले सकते हैं।
    नंबर गेम-
    -हड्डियों का एक सामान्य वयस्क में +1 से -1 एसडी घनत्व होना चाहिए
    -हड्डियों का घनत्व गठिया की बीमारी होने पर -2.5 एसडी हो जाता है

    लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / कोरोना वायरस ने पूरे विश्व को चपेट में ले रखा है। दुनियाभर के वैज्ञानिक आए दिन इसे लेकर नए-नए शोध कर रहे हैं। इसी बीच अमेरिका के जॉर्जिया विश्वविद्यालय ने संक्रमण को लेकर एक नया अध्ययन किया है, जो बंद जगहों पर कोविड-19 के हवा में संचरण के बढ़ते सबूतों का समर्थन करता है।

    शोधकर्ताओं ने कोरोना से संक्रमित एक चीनी रोगी पर अध्ययन किया, जिसके चलते बस के एयर कंडिशनिंग सिस्टम के जरिए बस में सवार दूसरे लोग भी संक्रमण की चपेट में आ गए। हालांकि बस में शारीरिक दूरी का पालन किया जा रहा था। इसका कारण यह था कि बस की खिड़कियां बंद थीं। वेंटिलेशन की समस्या के चलते दूसरे यात्री भी कोरोना का शिकार हो गए।

    जामा इंटरनल मेडिसिन में प्रकाशित किए गए यह अध्ययन इस सवाल पर विचार करता है कि कोविड-19 हवा के जरिए कैसे फैल सकता है। यूजीए कॉलेज ऑफ पब्लिक हेल्थ की सहयोगी प्रोफेसर और रिसर्च की लेखक ये शेन ने कहा कि हवा के जरिए कोरोना संक्रमण के प्रसार की संभावना कई वैज्ञानिकों ने जताई है पर सीमित साक्ष्यों के साथ। हमारे शोध से ऐसे प्रमाण सामने आए हैं, जिसने इस संदेह को हकीकत में बदल दिया है।

    शेन ने कहा कि काफी हद तक यही माना जाता रहा था कि खांसने और छींकने से निकलीं बूंदों के माध्यम से यह वायरस फैल रहा है। इसके बाद विश्व स्तर पर शारीरिक दूरी और हाथ धोने जैसे उपायों को अपनाया गया ताकि इसके प्रसारण पर लगाम लग सके। बावजूद इसके कोरोना का कहर बढ़ता ही जा रहा है।

    भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जोखिम ज्यादा-
    शेन ने कहा कि हमारे इस शोध के निष्कर्ष उन परिदृश्यों को उजागर करते हैं, जहां कोविड-19 एरोसोल कणों के माध्यम से एक बंद स्थान में हवा के जरिए फैल सकता है। भीड़-भाड़ वाली बंद जगहों पर ज्यादा खतरा है, क्योंकि वहां वेंटिलेशन नहीं हो पाता और संक्रमण का जोखिम दोगुना जाता है। शोधकर्ताओं ने कहा कि चाहे आप अपने दफ्तर में हों या दुकान में या किसी पब्लिक ट्रांसपोर्ट में सफर कर रहे हों, आपके लिए मास्क पहनना अनिवार्य है।

    हमारा शौर्य

    हमारे बारे मे

    whatsapp-image-2020-06-03-at-11.08.16-pm.jpeg
     
    CHIEF EDITOR -  SHARAD PANSARI
    CONTECT NO.  -  8962936808
    EMAIL ID         -  shouryapath12@gmail.com
    Address           -  SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
    LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
    © 2015 Shouryapath. All Rights Reserved. Designed By Global Vision