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June 08, 2026
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  व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / हिंदू धर्म में मासिक शिवरात्रि का अत्यधिक महत्व होता है. हर महीने पड़ने वाली शिवरात्रि को मासिक शिवरात्रि कहा जाता है. पंचांग के अनुसार मासिक शिवरात्रि का व्रत हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर रखा जाता है. इस दिन देवों के देव महादेव के लिए व्रत रखा जाता है और महादेव की पूरे मनोभाव से पूजा की जाती है. इस दिन पूजा में भोलेनाथ को कुछ चीजों का भोग लगाना बेहद शुभ माना जाता है. जानिए कौनसी हैं ये भोग की चीजें जो भगवान शिव को मासिक शिवरात्रि के दिन अर्पित की जा सकती हैं.
अप्रैल में कब है मासिक शिवरात्रि |
पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 26 अप्रैल की सुबह 8 बजकर 27 मिनट पर शुरू हो रही है और इस तिथि का समापन अगले दिन 27 अप्रैल को सुबह 4 बजकर 49 मिनट पर हो जाएगी. ऐसे में 26 अप्रैल, शनिवार के दिन मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जाएगा और भोलेनाथ की पूजा की जाएगी.
बन रहे हैं शुभ योग
मासिक शिवरात्रि पर कई शुभ योग बनने जा रहे हैं. इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 53 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक रहने वाला है. इस दिन भद्रावास योग भी बन रहा है. भद्रावास योग का समय सुबह 8 बजकर 27 मिनट है.
मासिक शिवरात्रि पर लगाएं इन चीजों का भोग
भगवान शिव की मासिक शिवरात्रि के दिन पूजा की जाती है. पूजा को बिना भोग के संपन्न नहीं माना जाता है. ऐसे में भगवान शिव की प्रिय चीजों को भोग में प्रभु के समक्ष अर्पित किया जाता है. भगवान शिव की पूजा में खीर, मालपुआ, फल, ठंडाई और लस्सी को शामिल किया जा सकता है. भोग की ये चीजें भोलेनाथ की मनपसंद मानी जाती हैं.
करें इन मंत्रों का जाप
ॐ नमः शिवाय
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि
ॐ नमो भगवते रुद्राय
ॐ सांब सदाशिव नमो नमः
ऊं पषुप्ताय नमः

व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि अत्यधिक महत्व रखती है. अमावस्या पर पितरों की पूजा का खास विधान होता है. इस दिन पितरों का तर्पण और पिंडदान करने से माना जाता है कि पितृ दोष हटता है. इसके साथ ही, अमावस्या पर स्नान और दान किया जाता है. माना जाता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि आती है और खुशहाली बनी रहती है. अप्रैल में पड़ने वाली अमावस्या वैशाख अमावस्या होने जा रही है. इसे दर्श अमावस्या  भी कहा जाता है. कहते हैं यदि पितृ नाराज हो जाते हैं तो घर-परिवार पर संकट मंडराने लगते हैं और पितृ दोष  लग जाता है. ऐसे में पितरों की नाराजगी को दूर करने के लिए खासतौर से अमावस्या पर पितरों की पूजा संपन्न की जाती है. जानिए इस माह कब है अमावस्या और अमावस्या पर कौनसे काम करने शुभ माने जाते हैं.
कब है दर्श अमावस्या |
पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 27 अप्रैल की सुबह 4 बजकर 49 मिनट पर शुरू हो रही है और इस तिथि का समापन अगले दिन 28 अप्रैल की मध्यरात्रि 1 बजे हो जाएगा. उदयातिथि के अनुसार अमावस्या 27 अप्रैल, रविवार को मनाई जाएगी.
जरूर करें ये 3 काम
    दर्श अमावस्या पर पवित्र नदी में स्नान करना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. जिन लोगों के घर के आस-पास पवित्र नदी ना हो वे घर में ही बाल्टी में गंगाजल डालकर स्नान कर सकते हैं. इस तरह स्नान करना शुभ होता है.
    वैशाख माह की अमावस्या पर पितरों का तर्पण करना बेहद शुभ होता है. इस दिन पितरों का तर्पण और पिंडदान किया जा सकता है. पिंड निर्माण के लिए गाय का गोबर. तिल, कुशा और जौ के आटे का पिंड बनाया जाता है और इसमें चावल के आटे का भी उपयोग किया जा सकता है.
    दान करने की अमावस्या पर विशेष मान्यता होती है. इस दिन गरीब और जरूरतमंदों को दान दिया जाता है. स्नान और दान तड़के किया जा सकता है. इसके अलावा, पितरों के तर्पण के पश्चात पशु-पक्षियों को भोजन खिलाया जा सकता है. इस दिन कौवों को दाना डालना खासतौर से शुभ माना जाता है.

व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / हिंदू धर्म में मोहिनी एकादशी का बेहद महत्व है. हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोहिनी एकादशी का व्रत रखा जाता है. इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. आइए जानते हैं मोहिनी एकादशी कब है, किन लोगों को इस दिन व्रत रखना चाहिए, साथ ही जानेंगे मोहिनी एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा करने की सही विधि और शुभ मुहूर्त.  
कब है मोहिनी एकादशी?
पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 7 मई को सुबह 10 बजकर 19 मिनट पर होगी. इसका समापन अगले दिन 8 मई को दोपहर 12 बजकर 29 मिनट पर होगा. ऐसे में इस बार मोहिनी एकादशी का व्रत 8 मई को किया जाएगा.
 अप्रैल में किस दिन रखा जाएगा मासिक शिवरात्रि का व्रत, जानिए भोग में क्या पसंद करते हैं भोलेनाथ
मोहिनी एकादशी का धार्मिक महत्व
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, जब समुद्र मंथन के दौरान अमृत और विष निकला था, तब देवताओं और असुरों के बीच युद्ध होने लगा. इस युद्ध को शांत करने और असुरों से अमृत को बचाने के लिए भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया था. इसी कारण इस एकादशी को 'मोहिनी एकादशी' कहा जाता है. यह तिथि मोह, अज्ञान और पाप से मुक्ति दिलाने वाली मानी जाती है.
किन लोगों को रखना चाहिए मोहिनी एकादशी का व्रत?
    मान्यताओं के अनुसार, मोहिनी एकादशी का व्रत रखने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है. ऐसे में जो लोग अपने जीवन में मानसिक शांति की तलाश में हैं, उनके लिए मोहिनी एकादशी का व्रत रखना विशेष फलदायी हो सकता है.
    दांपत्य जीवन में कलह या असंतुलन से जूझ रहे लोगों के लिए यह व्रत विशेष लाभकारी माना गया है.
    इन सब से अलग विद्यार्थी, नौकरीपेशा और व्यापारी वर्ग के लोग भी इस व्रत को रखकर सफलता के मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं.
व्रत और पूजा की विधि
    मोहिनी एकादशी से एक दिन पहले दशमी तिथि को सात्विक भोजन कर ब्रह्मचर्य का पालन करें.
    एकादशी के दिन प्रातः स्नान करके व्रत का संकल्प लें.
    पीले वस्त्र पहनकर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएं और नारायण को चंदन, तुलसी दल, फूल, धूप और भोग अर्पित करें.
    इसके बाद ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें.
    इस दिन विष्णु सहस्त्रनाम, गीता पाठ करना विशेष फलदायक माना जाता है.
    आखिर में भगवान की आरती करें.
पारण का समय और शुभ मुहूर्त
मोहनी एकादशी के दिन दोपहर 02 बजकर 32 मिनट से 03 बजकर 26 मिनट तक विजय मुहूर्त रहेगा. ये समय बेहद शुभ माना जा रहा है. वहीं, व्रत का पारण द्वादशी तिथि के दिन किया जाएगा. आप सुबह 05 बजकर 34 मिनट से लेकर 08 बजकर 16 मिनट तक पारण कर सकते हैं. पारण के समय ब्राह्मणों को भोजन कराकर दान देना शुभ माना गया है.

मुंबई/शौर्यपथ /देशभक्ति वाली फिल्में ,मतलब मनोज कुमार. 15 अगस्त और 26 जनवरी पर बजने वाले देशभक्ति गीतों को याद करेंगे तो ज्यादातर में मनोज कुमार मिलेंगे. बॉलिवुड में वह 'भारत कुमार' के नाम से मशहूर हो गए. चेहरे पर हाथ फेरती उनकी अदा की दीवानी एक पूरी पीढ़ी रही. शुक्रवार सुबह मनोज कुमार हमेशा के लिए खामोश हो गए. बॉलिवुड सदमे हैं और उनके चाहने वाले उनके गीतों को गुनगुना रहे हैं. जानिए मनोज कुमार को किस तरह याद कर रहा है जमाना...     
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मशहूर अभिनेता एवं फिल्म निर्माता मनोज कुमार को शुक्रवार को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें भारतीय सिनेमा का आदर्श बताया. प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर लिखा, ‘‘दिग्गज अभिनेता एवं फिल्म निर्माता मनोज कुमार जी के निधन से बहुत दुखी हूं. वह भारतीय सिनेमा के आदर्श थे जिन्हें देशभक्ति की उनकी भावना के लिए विशेष रूप से याद किया जाता था और यह उनकी फिल्मों में भी झलकता था.'' पीएम मोदी ने कहा कि कुमार की फिल्मों ने राष्ट्रीय गौरव की भावना को जगाया और ये पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी.
दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित कुमार का शुक्रवार तड़के मुंबई के एक अस्पताल में निधन हो गया. वह 87 वर्ष के थे. उन्हें ‘शहीद', ‘उपकार' एवं ‘पूरब और पश्चिम' जैसी देशभक्ति की लोकप्रिय फिल्मों के लिए ‘भारत कुमार' के नाम से भी जाना जाता था.
भारत का रहने वाला हूं... केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल की श्रद्धांजलि
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया. उन्होंने पोस्ट में लिखा, "मनोज कुमार जी एक बहुमुखी अभिनेता थे, जिन्हें हमेशा देशभक्ति से भरपूर फिल्में बनाने के लिए याद किया जाएगा. ‘भारत कुमार' के नाम से मशहूर, ‘उपकार', ‘पूरब और पश्चिम' जैसी फिल्मों में उनके अविस्मरणीय अभिनय ने हमारी संस्कृति को समृद्ध किया है और उन्हें पीढ़ियों से लोगों का प्रिय बनाया है. उनकी सिनेमाई विरासत उनके कामों के जरिए जिंदा रहेगी. उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति संवेदनाएं. ओम शांति."
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया. उन्होंने पोस्ट में लिखा, "चार दशकों के करियर में, प्रखर अभिनेता और निर्देशक मनोज कुमार जी ने देशभक्ति और राष्ट्रीय गौरव पर बनी अपनी फिल्मों से दर्शकों का दिल जीता. पद्मश्री से सम्मानित मनोज कुमार को 'भारत कुमार' के नाम से जाना जाता था और उनकी 'शहीद' और 'उपकार' जैसी फिल्मों ने तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी का ध्यान आकर्षित किया था. हम उनके निधन पर अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं. हमारी संवेदनाएं उनके परिवार, दोस्तों और लाखों प्रशंसकों के साथ हैं.
"हमारे दिलों में हमेशा जिंदा रहेंगे"
पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया. उन्होंने पोस्ट में लिखा, "बॉलीवुड में भारतीयता का दूसरा नाम रहे मनोज कुमार जी के निधन पर मन व्यथित है. अपने अभिनय से उन्होंने दशकों तक हमारा दिल जीता था और आगे भी वो हमारे दिलों में हमेशा जिंदा रहेंगे. मैं प्रभु श्रीराम से उनकी आत्मा की शांति के लिए कामना करता हूं."
"निधन का समाचार अत्यंत दुखद"
दिल्ली सरकार में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया. लिखा, “भारत का रहने वाला हूं, भारत की बात सुनाता हूं. जैसे अमर गीत और देशभक्ति से भरी फ़िल्मों के माध्यम से हर भारतीय के दिल में देश प्रेम जगाने वाले मनोज कुमार जी के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है. देश को ‘भारत' के रूप में जीने वाले इस महान कलाकार को विनम्र श्रद्धांजलि."
पूरी इंडस्ट्री उन्हें याद करेगी: अशोक पंडित
 मनोज कुमार के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए फिल्म निर्माता अशोक पंडित ने कहा, "महान दादा साहब फाल्के पुरस्कार विजेता, हमारे प्रेरणास्रोत और भारतीय फिल्म उद्योग के 'शेर' मनोज कुमार जी अब हमारे बीच नहीं रहे. यह उद्योग के लिए बहुत बड़ी क्षति है और पूरी इंडस्ट्री उन्हें याद करेगी.
1. मनोज कुमार का असली नाम हरिकृष्ण गिरि गोस्वामी था, इनका जन्म 24 जुलाई, 1937 को एबटाबाद में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है.
2.  विभाजन के कारण उनका परिवार दिल्ली आ गया था और इस दौरान उन्हें शरणार्थी शिविर में रहना पड़ा था. तब उनकी उम्र 10 साल थी.
3. बाद में गोस्वामी परिवार राजधानी के पटेल नगर इलाके में बस गया.
४. अभिनेता मनोज कुनार ने हिंदू कॉलेज से डिग्री हासिल की है.
5. साल 1949 में उन्होंने अपना नाम मनोज कुमार रखा लिया था. दरअसल उनके पसंदीदा अभिनेता दिलीप कुमार ने फिल्म शबनम में इसी नाम का किरदार निभाया था.
६.साल 1960 में आई कांच की गुड़िया उनकी पहली मुख्य भूमिका वाली फिल्म थी.
    मनोज कुमार और उनकी पत्नी शशि के दो बेटे हैं, विशाल और कुणाल.

   दुर्ग / शौर्यपथ / शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय दुर्ग के राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा ग्राम बोड़ेगांव में संचालित सात दिवसीय विशेष शिविर के तीसरे एवं चौथे दिन क्रमशः हार्टफुलनेस शिविर और स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया । तीसरे दिन के बौद्धिक सत्र में आमंत्रित शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय दुर्ग के भूगर्भशास्त्र के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ श्रीनिवास देशमुख , उनकी धर्मपत्नी श्रीमती सुंदरी देशमुख, उनके सुपुत्र श्री  ऋषिकेश देशमुख ट्रेनर के रूप में उपस्थित थे । डॉ देशमुख द्वारा  ध्यान क्या है, कैसे किया जाता है,हमें ध्यान क्यों करना चाहिए? इस बारे में बड़े ही विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई । इनके अतिरिक्त डॉ देशमुख ने आगामी तीन दिवस प्रातः कालीन योग एवं व्यायाम सत्र आयोजित करने की बात भी कही। शिविर के चौथे दिन  स्वास्थ्य विभाग  के सहयोग से ग्राम में निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण एवं खून जांच शिविर का आयोजन किया गया। तत्पश्चात बौद्धिक सत्र में हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के पूर्व कार्यक्रम समन्वयक डॉ आर .पी. अग्रवाल ने स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना के माध्यम से हम सभी अपने व्यक्तित्व के प्रत्यक्ष विकास के  साथ- साथ ही समाज का अप्रत्यक्ष विकास भी करते हैं। यही इस शिविर का उद्देश्य भी है। डॉ अग्रवाल ने राष्ट्रीय सेवा योजना के  अपने 37 वर्षों  के अनुभव को स्वयंसेवकों के सम्मुख साझा किए। साथ ही कार्यक्रम समन्वयक प्रो जनेंद्र दीवान दोनों दिवस उपस्थित रहे। उनके साथ साइंस कॉलेज दुर्ग के अध्यापक डॉ रजनीश उमरे भी शामिल थे। इन सबके साथ स्वयंसेवकों ने अपने परियोजना कार्य के दौरान वृक्षारोपण, चबूतरा निर्माण , गार्डन निर्माण हेतु मुरूम बिछाने का कार्य बड़े ही उत्साह और ऊर्जा के साथ किया, इससे ग्रामवासी काफी प्रसन्न नजर आ रहे थे। प्रत्येक शाम सांस्कृतिक कार्यक्रम होने से ग्रामवासियों में हर्ष का माहौल है। ग्राम प्रमुख श्रीमती पप्पी भूपेंद्र टंडन ने स्वयंसेवकों को प्रोत्साहित किया और उन्हें इसी ऊर्जा के साथ काम करने के लिए प्रेरित भी किया।यह सभी कार्यक्रम कार्यक्रम अधिकारी तरुण कुमार साहू  के नेतृत्व में सहयोगी अधिकारी सुदेश साहू, डॉ कुंदन जांगड़े एवं निखिल देशलहरा के सहयोग से संचालित हो रहे हैं जबकि सभी गतिविधियां वरिष्ठ स्वयंसेवक मोरध्वज, ऋतिक, सतएक , हरीश, द्रविन, मिनेश, पोखराज, दीपांकर आदि के नेतृत्व में आयोजित हो रहे हैं। स्वयंसेवक हरीश ने अपने व्यक्तिव विकास से संबंधित अनुभव साझा किया। वहीं आदिल ने देशभक्ति गीत पर गिटार वादन कर ग्रामवासियों का मनोरंजन किया।

शौर्यपथ / क्या आपको बर्फबारी देखना बहुत पसंद है, तो फिर आप उत्तराखंड जा सकते हैं. फरवरी और मार्च के समय यहां पर अच्छी बर्फबारी होती है. हम यहां पर आपको उन 2 जगहों के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां पर आप वीकेंड पर परिवार और दोस्तों के साथ आसानी से घूमकर आ सकते हैं. यकीन मानिए यह आपके लिए जीवन भर न भुलाने वाला अनुभव होगा. तो बिना देर किए आइए जानते हैं औली और धनोल्टी कैसे पहुंचें और यहां पर घूमने के लिए आपके लिए क्या कुछ खास है.
औली
अगर आप स्कीइंग के शौकीन हैं, तो फिर आप औली जा सकते हैं. यह जगह उत्तराखंड की ऐसी है जहां सबसे कम भीड़-भाड़ होती है. अगर आप सुकून और शांति चाहते हैं, तो आप यहां का प्लान दोस्तों और परिवार वालों के साथ बना सकते हैं.
कैसे पहुंचें

सड़क मार्ग के जरिए औली पहुंच सकते हैं. दिल्ली के कश्मीरी गेट से नियमित अंतराल पर बसें औली के लिए चलती हैं.  इसके अलावा आप हवाई मार्ग से भी पहुंच सकते हैं. यहां के लिए नजदीकी हवाई अड्डा देहरादून है. यहां से लगभग औली 220 किलो मीटर है. वहीं, आप रेल यात्रा करके भी पहुंच सकते हैं. यहां के लिए नजदीकी रेलवे स्टेशन ऋषिकेश है.
औली में क्या घूमें
    आप यहां पर औली झील घूम सकते हैं. यह औली की बेहतरीन जगहों में से एक है.
    छत्रकुंड जोशीमठ में एक खूबसूरत झील है. यहां पहुंचने के लिए आपको औली से लगभग 4 किमी की दूरी तय करनी होगी.
    गुरसों बुग्याल औली के पास मनमोहक पर्यटन स्थल है. आप यहां से नंदा देवी, त्रिशूल और द्रोण पर्वत श्रृंखलाओं को भी देख सकते हैं.
धनौल्टी
इसके अलावा, धनोल्टी भी मार्च में घूमने के लिए बेस्ट प्लेस है. यह दिल्ली से महज 222 किलो मीटर पर है. आप यहां पर 7 से 8 घंटे की दूरी तय करके पहुंच सकते हैं. यह हिल स्टेशन उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में स्थित है.यहां की शांति, बर्फबारी, धार्मिक स्थल और एडवेंचर एक्टिविटीज आपको एक अद्भुत अनुभव कराएंगी.
कैसे पहुंचे धनोल्टी
सड़क मार्ग से आप दिल्ली से धनौल्टी आसानी से पहुंच सकते हैं. यहां तक पहुंचने में आपको 7 से 8 घंटे लगेंगे.
धनोल्टी के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन देहरादून है, जो औली से लगभग 45 किलोमीटर की दूरी पर है.आप यहां से टैक्सी या बस के द्वारा पहुंच सकते हैं.
आप हवाई यात्रा से पहुंचना चाहते हैं, तो देहरादून का जॉली ग्रांट एयरपोर्ट सबसे नजदीकी है.आप यहां से टैक्सी के माध्यम से धनोल्टी पहुंच सकते हैं.
धनोल्टी में क्या घूमें
    यहां का सुरकंडा देवी मंदिर बहुत प्रसिद्ध है. यह एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित है. हिमालय की बर्फ से ढकी चोटियों से आपको अद्भुत दृश्य देखने को मिलेगा. यह आपको एक आध्यात्मिक अनुभव कराएगा.
    धनोल्टी में आप एडवेंचर पार्क भी देख सकते हैं. जहां आप जिपलाइनिंग, रॉक क्लाइम्बिंग और अन्य रोमांचक गतिविधियों का आनंद उठा सकते हैं.
    प्राकृतिक प्रेमियों के लिए यहां पर एक इको पार्क भी है. यहां आप ट्रैकिंग, बर्डवॉचिंग और पिकनिक का आनंद ले सकते हैं.
    इसके अलावा आप दशावतार मंदिर, घाटों का भ्रमण, कैंपिंग और ट्रेकिंग का आनंद उठा सकते हैं.
 

  टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ /कान की गंदगी कैसे निकालें? हमारे शरीर के सभी अंगों की सफाई बहुत जरूरी होती है और कान भी इसमें शामिल हैं. कान में मैल का जमाव एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन जब यह ज्यादा मात्रा में इकट्ठा हो जाता है, तो यह सुनने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है और संक्रमण का कारण बन सकता है. कई लोग कान साफ करने के लिए कॉटन बड्स या किसी नुकीली चीज का इस्तेमाल करते हैं, जो कान के लिए हानिकारक हो सकता है. इसलिए घरेलू उपाय अपनाकर कान को सुरक्षित और प्राकृतिक रूप से साफ किया जा सकता है. अगर आप भी कान साफ करन का कारगर तरीका तलाश रहे हैं, तो यहां हम आपके लिए कान की गंदगी निकालना एक आसान तरीका बता रहे हैं.
कान में मैल जमने के कारण
स्वाभाविक प्रक्रिया: शरीर खुद कान में मोम (ईयरवैक्स) पैदा करता है, जो धूल-मिट्टी और बैक्टीरिया को रोकने में मदद करता है.
बहुत ज्यादा सफाई करने की आदत: बार-बार कान साफ करने से प्राकृतिक ईयरवैक्स में वृद्धि हो सकती है.
धूल-मिट्टी वाले वातावरण में रहना: ज्यादा गंदगी और धूल वाले स्थानों पर रहने से मैल जल्दी जमता है.
इयरफोन या हेडफोन का ज्यादा उपयोग: लंबे समय तक हेडफोन या इयरफोन लगाने से ईयरवैक्स बाहर नहीं निकल पाता और कान में जमा हो जाता है.
त्वचा से जुड़ी समस्याएं: कुछ लोगों की ड्राई स्किन होती है, जिससे उनके कानों में ज्यादा मैल बनने की संभावना रहती है.
कान साफ करने के लिए असरदार घरेलू उपाय
1. नारियल तेल या ऑलिव ऑयल
    कुछ बूंदें गुनगुना नारियल या जैतून का तेल कान में डालें.
    10-15 मिनट तक सिर झुकाकर रखें ताकि तेल अंदर तक पहुंच सके.
    इसके बाद हल्के गर्म पानी से कान धो लें.
    यह तरीका कान के मैल को मुलायम कर बाहर निकालने में मदद करता है.
2. हाइड्रोजन पेरॉक्साइड
    2-3 बूंदें हाइड्रोजन पेरॉक्साइड को कान में डालें.
    कुछ समय बाद बुलबुले बनने लगेंगे, जो मैल को बाहर निकालने में मदद करेंगे.
    सिर झुकाकर गंदगी को बाहर आने दें और हल्के गीले कपड़े से साफ करें.
3. गुनगुना पानी और नमक
    एक कप गुनगुने पानी में आधा चम्मच नमक मिलाएं.
    रूई को इस मिश्रण में भिगोकर कान में 2-3 बूंदें डालें.
    कुछ समय बाद सिर झुकाकर मैल को बाहर आने दें.
4. सरसों का तेल
    हल्का गुनगुना सरसों का तेल कान में 2-3 बूंद डालें.
    10 मिनट तक सिर को झुकाकर रखें और फिर कपड़े से साफ करें.
    यह कान के मैल को नर्म कर बाहर निकालने में मदद करता है.
5. एलोवेरा जेल
    ताजा एलोवेरा जेल निकालकर उसमें कुछ पानी मिलाएं.
    इस मिश्रण की 2-3 बूंदें कान में डालें और 5-10 मिनट बाद साफ करें.
    एलोवेरा कान के अंदरूनी हिस्से को भी मॉइश्चराइज करता है.
6. लहसुन और सरसों का तेल
    2-3 लहसुन की कलियों को सरसों के तेल में गर्म करें.
    तेल गुनगुना होने पर 2 बूंद कान में डालें.
    यह संक्रमण को दूर करने और कान के मैल को निकालने में कारगर उपाय है.
कान साफ करते समय ध्यान देने वाली बातें
    कान को कभी भी नुकीली चीजों से साफ न करें, इससे कान के पर्दे को नुकसान हो सकता है.
    बहुत ज्यादा कान साफ करने से प्राकृतिक सुरक्षा तंत्र नष्ट हो सकता है.
    कान में पानी जाने पर तुरंत सुखा लें, ताकि संक्रमण न हो.
    अगर कान में दर्द, खुजली या सुनने में दिक्कत हो रही है, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें.

सेहत टिप्स /शौर्यपथ /आज की तेज-तर्रार जीवनशैली, अनियमित खान-पान और तनाव के कारण, एसिडिटी एक आम समस्या बन गई है. बहुत से लोग इस समस्या से तुरंत राहत पाने के लिए दवाओं का सहारा लेते हैं, लेकिन लंबे समय तक दवाओं का सेवन करने से दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं. अच्छी खबर यह है कि ऐसे कई प्राकृतिक और घरेलू उपचार हैं जो एसिडिटी से तुरंत राहत प्रदान कर सकते हैं. ये उपचार न केवल सुरक्षित और प्रभावी हैं, बल्कि आसानी से उपलब्ध भी हैं. इस लेख में हम कुछ सबसे प्रभावी घरेलू नुस्खों के बारे में बात करेंगे जो आपको एसिडिटी से तुरंत राहत दिला सकते हैं.
एसिडिटी के सामान्य कारण
    गलत खान-पान
    बहुत ज्यादा ऑयली और मसालेदार भोजन का सेवन
    फास्ट फूड और जंक फूड का ज्यादा सेवन
    समय पर भोजन न करना
    लाइफस्टाइल
    तनाव और चिंता
    धूम्रपान और शराब का सेवन
    अपर्याप्त नींद
एसिडिटी के अन्य कारण:
    कुछ दवाएं
    गर्भावस्था
    कुछ मेडिकल कंडिशन
एसिडिटी के लक्षण
    सीने में जलन
    खट्टी डकारें
    पेट में दर्द और बेचैनी
    उल्टी या मतली
    मुंह में खट्टा स्वाद
एसिडिटी से तुरंत राहत के लिए घरेलू नुस्खे (
ठंडा दूध: ठंडा दूध पेट में एसिड को बेअसर करने में मदद करता है. यह एसिडिटी से तुरंत राहत प्रदान कर सकता है.
अजवाइन: अजवाइन में थाइमोल नामक एक यौगिक होता है, जो पाचन में मदद करता है और एसिडिटी को कम करता है. आप अजवाइन को चबा सकते हैं या इसे पानी में उबालकर पी सकते हैं.
तुलसी: तुलसी में शांत करने वाले गुण होते हैं जो पेट की जलन को कम करते हैं. आप तुलसी के कुछ पत्तों को चबा सकते हैं या तुलसी की चाय पी सकते हैं.
सौंफ: सौंफ में पाचन को बढ़ावा देने वाले गुण होते हैं. आप सौंफ को चबा सकते हैं या इसे पानी में उबालकर पी सकते हैं.
जीरा: जीरा पेट में एसिड को बेअसर करने में मदद करता है. आप जीरा को चबा सकते हैं या इसे पानी में उबालकर पी सकते हैं.
अदरक: अदरक में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो पेट की जलन को कम करते हैं. आप अदरक को चबा सकते हैं या अदरक की चाय पी सकते हैं.
नारियल पानी: नारियल पानी में इलेक्ट्रोलाइट्स होते हैं जो पेट में एसिड को बेअसर करने में मदद करते हैं.
केला: केला एक प्राकृतिक एंटासिड है. यह पेट में एसिड को बेअसर करने में मदद करता है.
दही: दही में प्रोबायोटिक्स होते हैं जो पाचन को बेहतर बनाने में मदद करते हैं.
एसिडिटी से बचने के लिए सुझाव:
    नियमित रूप से छोटे भोजन करें.
    तेल और मसालेदार भोजन से बचें.
    फास्ट फूड और जंक फूड से बचें.
    तनाव कम करें.
    धूम्रपान और शराब से बचें.
    पर्याप्त नींद लें.
घरेलू नुस्खों का उपयोग करके आप इन लक्षणों से तुरंत राहत पा सकते हैं और अपने पाचन तंत्र को हेल्दी रख सकते हैं.

  सेहत टिप्स /शौर्यपथ /मखाने जिन्हें फॉक्स नट्स या कमल के बीज के रूप में भी जाना जाता है. ये एक लोकप्रिय स्नैक है जो अपने स्वास्थ्य लाभों के लिए जाना जाता है. ये प्रोटीन, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं और इन्हें अक्सर हेल्दी डाइट के हिस्से के रूप में खाया जाता है. हालांकि, मखाने सभी के लिए सही नहीं हैं. कुछ लोगों को मखाने खाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे उन्हें स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं. सुपरफूड कहा जाना वाला मखाना भी सभी के लिए अच्छा नहीं हो सकता है. कई ऐसे लोग हैं जिन्हें इससे परहेज करने की भी सलाह दी जाती है. क्या आप जानते हैं मखाना किसे नहीं खाना चाहिए?
इन लोगों को मखाने खाने से बचना चाहिए
एलर्जी वाले लोग: मखाने से कुछ लोगों को एलर्जी हो सकती है. एलर्जी के लक्षणों में खुजली, सूजन और सांस लेने में कठिनाई शामिल हो सकती है.
किडनी की पथरी वाले लोग: मखाने में कैल्शियम की मात्रा ज्यादा होती है, जो किडनी की पथरी वाले लोगों के लिए समस्या पैदा कर सकती है.
दस्त से पीड़ित लोग: मखाने में फाइबर की मात्रा ज्यादा होती है, जो दस्त को और खराब कर सकती है.
लो ब्लड प्रेशर वाले लोग: मखाने ब्लड प्रेशर को कम कर सकते हैं, जो लो बीपी वाले लोगों के लिए खतरनाक हो सकता है.
डायबिटीज वाले लोग: मखाने ब्लड शुगर लेवल को बढ़ा सकते हैं, इसलिए डायबिटीज वाले लोगों को इनका सेवन सीमित करना चाहिए.
गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं: गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को मखाने खाने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.
पाचन संबंधी समस्या वाले लोग: मखाने में फाइबर की मात्रा ज्यादा होती है, जो कुछ लोगों में गैस और सूजन पैदा कर सकती है.

व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि को देश भर में होली का त्योहार मनाया जाता है. देश के अलग-अलग प्रांत में इस पर्व के कई रंग देखने को मिलते हैं.  होली के दिन लोग भी तरह के भेदभाव और गिले शिकवे भूल कर एक दूसरे को गुलाल लगाते हैं. इस साल की होली की तिथि काफी खास हो गई है. भारत में ग्रहण का काफी धार्मिक महत्व है और होली के दिन साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने वाला है. भारत में ग्रहण के समय शुभ कार्यों की मनाही होती है. ऐसे में लोगों के मन में चंद्र ग्रहण और होली के त्योहार को लेकर सवाल उठ रहे हैं. आइए जानते हैं होली के दिन लग रहे साल के पहले चंद्र ग्रहण का क्या प्रभाव होगा और भारत में चंद्र ग्रहण का समय.
कब लगेगा साल का पहला चंद्र ग्रहण
इस बार फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि 14 मार्च को है और उसी दिन होली मनाई जाएगी. 14 मार्च को ही साल का पहला चंद्र ग्रहण भी लगने वाला है. यह खग्रास चंद्र ग्रहण होगा.  
ज्योतिष के विद्वानों का मत
फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि 14 मार्च को होली मनाई जाएगी और इसी दिन खास खगोलीय घटना भी होने वाली है. होली के दिन आंश‍िक चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है.
होली पर चंद्र ग्रहण का प्रभाव
भारत में 13 मार्च को होलिका दहन और 14 मार्च को होली का त्योहार मनाया जाने वाला है. 14 मार्च को इस साल का पहला चंद्र ग्रहण भी लगने वाला है. चूंकि ग्रहण के समय भारत में दिन का समय होगा इसलिए यह भारत में नजर नहीं आएगा. चंद्र ग्रहण के नजर नहीं आने के कारण इसका धार्मिक रूप से प्रभाव नहीं पड़ेगा और होली के त्योहार पर चंद्र ग्रहण का कोई असर नहीं पड़ेगा.
भारत में चंद्र ग्रहण का समय
इस वर्ष होली के दिन 14 मार्च को आश‍िक चंद्र ग्रहण लगने जा रही है. भारतीय समय अनुसार सुबह 9:27 मिनट पर उपछाया ग्रहण शुरू होगा और 10 बजकर 39 मिनट पर आंशिक और 11 बजकर 56 मिनट पर पूर्ण चंद्रग्रहण समाप्त हो जाएगा. ग्रहण का समय दिन का होने के कारण यह भारत में नजर नहीं आएगा और इसी कारण इसका असर भी भारत पर नहीं होगा. ग्रहण का प्रभाव मुख्य रूप से ऑस्ट्रेलिया, अंटार्कटिका, यूरोप के कई हिस्सों, उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका, अफ्रीका के बड़े हिस्से सहित अन्य जगहों पर पड़ने वाला है.

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