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April 30, 2026
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आज 14 जनवरी 2026, बुधवार को मकर संक्रांति के पावन अवसर पर सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं। इस वर्ष संक्रांति पर सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिसे ज्योतिष में अत्यंत शुभ माना गया है। यह संयोग कई राशियों के लिए उन्नति, लाभ और नई शुरुआत के संकेत दे रहा है।

आज का राशिफल (14 जनवरी 2026)

मेष (Aries):
करियर में उन्नति के योग हैं। सूर्य का गोचर कार्यक्षेत्र में मान-सम्मान और लाभ दिला सकता है।

वृषभ (Taurus):
आर्थिक लाभ संभव है, लेकिन अनावश्यक खर्चों से बचें। व्यापार विस्तार के लिए समय अनुकूल है।

मिथुन (Gemini):
प्रेम जीवन और करियर दोनों के लिए दिन शुभ है। नए अवसर मिल सकते हैं।

कर्क (Cancer):
मानसिक तनाव में कमी आएगी। करियर में सफलता मिलेगी। मित्र की सलाह लाभकारी साबित होगी।

सिंह (Leo):
आर्थिक लेन-देन में सतर्क रहें। स्वास्थ्य पर ध्यान दें। परिवार के साथ समय सुखद रहेगा।

कन्या (Virgo):
आय बढ़ाने के नए स्रोत मिल सकते हैं। पारिवारिक माहौल अच्छा रहेगा। सेहत का ध्यान रखें।

तुला (Libra):
लाभ के अवसर मिलेंगे। सुख-सुविधाओं पर खर्च संभव है। पैतृक मामलों में प्रगति होगी।

वृश्चिक (Scorpio):
वित्तीय स्थिति मजबूत रहेगी। दस्तावेजी कार्यों में सावधानी आवश्यक है। फिटनेस में सुधार होगा।

धनु (Sagittarius):
कार्यस्थल पर सामंजस्य बनाकर चलना होगा। विवादों और यात्राओं में सतर्कता रखें।

मकर (Capricorn):
मेहनत अधिक रहेगी, लेकिन सफलता के योग प्रबल हैं। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा और शुभ समाचार मिल सकता है।

कुंभ (Aquarius):
राजनीतिक या सामाजिक महत्वाकांक्षाएं पूरी हो सकती हैं। धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी। यात्रा टालें।

मीन (Pisces):
कार्यस्थल पर सतर्क रहें। पुराने संपर्कों से लाभ मिलेगा। आर्थिक स्थिति बेहतर हो सकती है।


मकर संक्रांति विशेष दान

आज के दिन तिल, गुड़, खिचड़ी, घी और ऊनी वस्त्र का दान करना विशेष रूप से शुभ और पुण्यदायी माना गया है।

 शौर्यपथ धर्म / मकर संक्रांति 2026 का पर्व आज, 14 जनवरी 2026 को पूरे देश में श्रद्धा, आस्था और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। यह दिन सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश का प्रतीक है, जिसे उत्तरायण की शुरुआत माना जाता है। धार्मिक, वैज्ञानिक और सामाजिक दृष्टि से यह पर्व अत्यंत महत्वपूर्ण है।

शुभ मुहूर्त और विशेष योग

आज दोपहर 03:13 बजे सूर्य मकर राशि में प्रवेश कर चुके हैं। इसी के साथ पुण्यकाल प्रारंभ हो गया है।

  • पुण्य काल: 03:13 PM से 05:45 PM

  • महा पुण्य काल: 03:13 PM से 04:48 PM

  • विशेष संयोग: सर्वार्थ सिद्धि योग एवं अमृत सिद्धि योग

इन शुभ योगों में किया गया स्नान, दान और पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।

पौराणिक और आध्यात्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनि देव के घर प्रवेश करते हैं। यह पर्व पारिवारिक सौहार्द, मतभेदों को समाप्त करने और संबंधों में मधुरता लाने का संदेश देता है।

महाभारत काल में भीष्म पितामह ने उत्तरायण के दिन ही देह त्याग का चयन किया था, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इस काल में शरीर त्यागने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
कुछ कथाओं में यह भी उल्लेख है कि आज के दिन देवी संक्रांति ने असुर मकर का वध कर अधर्म पर धर्म की विजय सुनिश्चित की थी।

वैज्ञानिक और स्वास्थ्य दृष्टिकोण

मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की परंपरा केवल सांस्कृतिक नहीं बल्कि वैज्ञानिक भी है। लंबे समय तक धूप में रहने से शरीर को विटामिन D मिलता है, जिससे हड्डियां मजबूत होती हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।

आयुर्वेद के अनुसार, ठंड के मौसम में तिल और गुड़ का सेवन शरीर को गर्म रखता है और आवश्यक ऊर्जा प्रदान करता है।

दान का विशेष महत्व

शास्त्रों में कहा गया है कि मकर संक्रांति के दिन किया गया दान हजार गुना फल देता है।

दान के लिए विशेष वस्तुएं:

  • तिल और गुड़

  • खिचड़ी

  • कंबल एवं ऊनी वस्त्र

  • पितरों के लिए तिल युक्त जल से तर्पण

आज पितृ तर्पण करने से अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य फल की प्राप्ति मानी जाती है।

पूजा विधि

आज ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गंगाजल एवं काले तिल मिले जल से स्नान करें। इसके बाद सूर्य देव को जल अर्पित करते हुए “ॐ सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करें और आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें।

   भोपाल। जनवरी 2026 में भोपाल की एक जिला अदालत ने अभिनेता सैफ अली खान, उनकी मां शर्मिला टैगोर और उनकी बहनों के पक्ष में अहम फैसला सुनाते हुए करीब 16.62 एकड़ पुश्तैनी जमीन पर उनके मालिकाना हक को बरकरार रखा है। यह विवाद भोपाल के नयापुरा क्षेत्र की बेशकीमती जमीन से जुड़ा था, जो लगभग 25–26 वर्षों से न्यायालय में लंबित था।

यह मामला वर्ष 1998 में उस समय सामने आया था, जब अकील अहमद सहित कुछ स्थानीय निवासियों ने दावा किया था कि भोपाल के अंतिम नवाब हमीदुल्लाह खान ने वर्ष 1936 में यह जमीन उनके पूर्वजों को दान में दी थी।

चौदहवें अपर सत्र न्यायाधीश संजय अग्रवाल की अदालत ने विपक्षी पक्ष की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि दान के समर्थन में कोई ठोस दस्तावेजी प्रमाण या वैध रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं किया जा सका।

अदालत में पटौदी परिवार की ओर से पेश किए गए राजस्व अभिलेखों में यह स्पष्ट हुआ कि जमीन लगातार नवाब परिवार के नाम पर दर्ज रही है। इसके अलावा, 1949 के भोपाल मर्जर एग्रीमेंट से जुड़े दस्तावेज भी नवाब परिवार के स्वामित्व की पुष्टि करते हैं।

न्यायालय ने यह भी माना कि याचिकाकर्ताओं द्वारा दावा दायर करने में अत्यधिक और अनुचित देरी हुई, जो उनके पक्ष को कमजोर बनाती है। इसी आधार पर अदालत ने दावा अस्वीकार कर दिया।

शनिवार, 10 जनवरी 2026
आज चंद्रमा का गोचर कन्या राशि में हो रहा है, जिससे कई राशियों के लिए आत्मविश्वास, सफलता और शुभ समाचार के योग बन रहे हैं। ज्योतिषीय गणना के अनुसार आज का दिन कुछ राशियों के लिए विशेष लाभकारी रहेगा, वहीं कुछ को सावधानी बरतने की आवश्यकता है। जानिए आज का विस्तृत राशिफल—

? मेष:
मेहनत रंग लाएगी। अटके हुए सरकारी कार्य पूरे हो सकते हैं। स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहें।

? वृषभ:
व्यापार में लाभ के संकेत हैं। परिवार संग समय आनंददायक रहेगा। नए निवेश से फिलहाल दूरी बनाए रखें।

? मिथुन:
कार्यस्थल पर सराहना मिलेगी। आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी, लेकिन फिजूलखर्ची से बचें।

? कर्क:
मानसिक शांति का अनुभव होगा। जीवनसाथी का पूरा सहयोग मिलेगा। पुराने मित्रों से भेंट संभव है।

? सिंह:
यात्रा के योग बन रहे हैं। वाणी पर संयम रखें, विवाद की आशंका है। नए प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए दिन शुभ है।

? कन्या:
चंद्रमा आपकी राशि में होने से आत्मविश्वास बढ़ेगा। सामाजिक कार्यों में सक्रियता रहेगी। धन लाभ की संभावना है।

⚖️ तुला:
दिन भागदौड़ भरा रह सकता है। लेन-देन में सावधानी जरूरी है। संतान पक्ष से शुभ समाचार मिल सकता है।

? वृश्चिक:
रुका हुआ धन वापस मिलने के योग हैं। प्रेम संबंधों में मधुरता आएगी। करियर में उन्नति के अवसर मिलेंगे।

? धनु:
कार्यक्षेत्र में अधिकारियों का सहयोग मिलेगा। घर में मांगलिक कार्य की योजना बन सकती है। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा।

? मकर:
भाग्य का पूरा साथ मिलेगा। धार्मिक गतिविधियों में मन लगेगा। लंबी दूरी की यात्रा सुखद रहेगी।

? कुंभ:
सावधानी बरतने का दिन है। वाहन चलाते समय सतर्क रहें। अचानक खर्च बढ़ सकते हैं।

? मीन:
दांपत्य जीवन सुखमय रहेगा। साझेदारी के व्यवसाय में लाभ होगा। विद्यार्थियों के लिए दिन सफलतादायक है।

? नोट: राशिफल सामान्य ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। व्यक्तिगत परिणाम आपकी कुंडली पर निर्भर करते हैं।

? पढ़ते रहिए—हर दिन का सटीक राशिफल, एक नज़र में!

आवास और बिजली एक साथ, देश में पहली बार योजनाओं का अभिसरण

रायपुर ।
छत्तीसगढ़ सरकार और छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रिब्यूशन कंपनी ने अत्यंत पिछड़ी जनजाति के परिवारों के लिए रूफटॉप सोलर प्लांट लगाने की पहल की है। कोरबा जिले के पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के ग्राम गुडरूमुड़ा में आठ पहाड़ी कोरवा परिवार अब घर बैठे निःशुल्क बिजली का लाभ उठा रहे हैं।

यह पहल प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना, प्रधानमंत्री जनमन योजना और प्रधानमंत्री आवास योजना के अभिसरण से संभव हुई है। इससे न केवल ग्रामीण परिवारों को स्थायी बिजली सुविधा मिली, बल्कि घरेलू बिजली के खर्च से पूरी तरह मुक्ति भी मिली है।

कैसे हुआ यह नवाचार संभव

एक किलोवाट के सोलर प्लांट पर लगभग 60 हजार रुपये का खर्च आता है। इसमें केन्द्र और राज्य सरकार की सब्सिडी लगभग 45 हजार रूपए और शेष 15 हजार रुपये डीएमएफ से वहन किए गए। इस समन्वित प्रयास में केन्द्र सरकार, राज्य सरकार, छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर कंपनी और जिला प्रशासन का योगदान शामिल है।

हितग्राहियों की खुशी

मंगलू राम और उनके परिवार ने कहा,

"हमारा जीवन संवर जाएगा। अब हमें निरंतर बिजली मिलेगी और बिल का झंझट नहीं रहेगा। विद्युत कंपनी के लोग हर कदम में मदद कर रहे हैं।"

अधिकारियों की सोच और योजना

छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रिब्यूशन कंपनी के अध्यक्ष डॉ. रोहित यादव ने कहा,

"मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शिता में योजनाओं के अभिसरण का मार्ग प्रशस्त हुआ। यह पहल पहाड़ी कोरवा परिवारों के लिए स्थायी लाभ लेकर आई है।"

मैनेजिंग डायरेक्टर भीम सिंह ने कहा,

"प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना और डीएमएफ के समन्वय से हमने देश में एक नई मिसाल कायम की है। यह पायलट प्रोजेक्ट भविष्य में कई अन्य परिवारों के लिए मार्गदर्शक बनेगा।"

राह में एक उदाहरण

गुडरूमुड़ा का यह प्रोजेक्ट अब न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए सोलर ऊर्जा और ग्रामीण सशक्तिकरण का मॉडल बन गया है। भविष्य में इसे कई अन्य पिछड़ी और जरूरतमंद जनजाति परिवारों तक विस्तार देने की योजना है।


अगर आप चाहें तो मैं इसे और “ब्रेकिंग न्यूज़ / सोशल मीडिया फ्रेंडली” संस्करण भी बना दूँ, जिसमें छोटे पैराग्राफ, इमोजी और बुलेट के साथ मोबाइल पढ़ने वालों के लिए आकर्षक बन जाएगा।

अदम्य साहस, धैर्य और त्याग की प्रतिमूर्ति थीं सावित्रीबाई फूले

दुर्ग, शंकर नगर।
अखिल भारतीय एससी-एसटी-ओबीसी संयुक्त मोर्चा, छत्तीसगढ़ द्वारा भारत की प्रथम शिक्षिका माता सावित्रीबाई फूले की 195वीं जयंती मनवा कुर्मी भवन, शंकर नगर दुर्ग में हर्षोल्लास एवं गरिमामय वातावरण में मनाई गई। कार्यक्रम में अनिल मेश्राम (राष्ट्रीय सचिव) मुख्य अतिथि तथा कौशल वर्मा (प्रदेश अध्यक्ष) की अध्यक्षता रही।

कार्यक्रम की शुरुआत माता सावित्रीबाई फूले के तैलचित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ की गई।

महिला शिक्षा की अग्रदूत थीं सावित्रीबाई फूले

संयुक्त मोर्चा महिला प्रकोष्ठ की दुर्ग जिला अध्यक्ष सविता वर्मा ने कहा कि माता सावित्रीबाई फूले अदम्य साहस, असीम धैर्य और त्याग की प्रतिमूर्ति थीं। उन्होंने महिलाओं के शैक्षणिक उत्थान के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया।

उपाध्यक्ष नलिनी बंछोर ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में अलख जगाकर सावित्रीबाई फूले ने महिलाओं को शिक्षित कर उन्हें सशक्त बनाया और समाज में नई चेतना का संचार किया।

सच बोले बिना सामाजिक बदलाव संभव नहीं

लक्ष्मीनारायण कुंभकार ने कहा कि यदि महापुरुषों के इतिहास का सच नहीं बोला जाएगा, तो झूठ और पाखंड का बोलबाला बढ़ता जाएगा।
डी.एल. वर्मा ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्होंने प्रशासनिक पद पर रहते हुए भी जातिवाद और छुआछूत का दंश झेला, जबकि माता सावित्रीबाई फूले ने 1845 से 1890 तक विषम परिस्थितियों में महिला होकर शिक्षा का जो संघर्ष किया, वह अतुलनीय है।

पिछड़े वर्ग की महिलाओं को आगे आना होगा

प्रदेश अध्यक्ष कौशल वर्मा ने कहा कि ज्योतिबा फूले और माता सावित्रीबाई फूले को आदर्श बनाकर दलित समाज आगे बढ़ा, लेकिन जागरूकता के अभाव में पिछड़ा वर्ग पीछे रह गया। अपने संतों और महापुरुषों के इतिहास को पढ़कर आत्ममंथन की आवश्यकता है।

मुख्य अतिथि अनिल मेश्राम ने कहा कि पिछड़े वर्ग की महिलाओं को माता सावित्रीबाई फूले के त्याग, साहस और धैर्य को आत्मसात कर आगे बढ़ना होगा। तभी एससी-एसटी-ओबीसी की एकजुटता और डॉ. भीमराव अंबेडकर का सपना साकार हो सकेगा।

महिला कल्याण की दिशा में प्रेरणास्रोत

वक्ताओं ने कहा कि माता सावित्रीबाई फूले का जन्म 3 जनवरी 1831 (सातारा, महाराष्ट्र) तथा निधन 10 मार्च 1897 (पुणे, महाराष्ट्र) में हुआ। उनका पूरा जीवन वंचित, दलित और पिछड़े वर्गों को शिक्षित करने में समर्पित रहा। उनका जीवन दर्शन हमें शिक्षित होकर संवैधानिक मार्ग पर संगठित होकर चलने की प्रेरणा देता है।

उपस्थित रहे ये गणमान्य

कार्यक्रम में अनिल मेश्राम, कौशल वर्मा, मुकुंद बंसोड, सविता वर्मा, डी. रजनी, हेमलता साहू, नलिनी बंछोर, उषा ठाकुर, पूर्णिमा टंडन, ऊषा मंडावी, डी.एल. वर्मा, अरुण बघेल, राकेश बोबांरडे, लक्ष्मीनारायण कुंभकार, अशोक मडामे, पवन दिल्लीवार, सुनीत यादव, तेजबहादुर बंछोर, रोशन वर्मा, अशोक साहू, धरमपाल वर्मा, भरत सेलारे, एस.आर. मंडावी सहित बड़ी संख्या में संगठन के सदस्य उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का संचालन पवन दिल्लीवार (संगठन सचिव) ने किया तथा आभार प्रदर्शन अरुण बघेल (कोषाध्यक्ष) द्वारा किया गया।

यादव छात्रावास पचरीपारा में होगा सामाजिक समरसता और गीता जयंती का आयोजन

दुर्ग।
दुर्ग नगर यादव महासभा द्वारा 11 जनवरी 2026, रविवार को दोपहर 1.00 बजे से यादव छात्रावास, पचरीपारा, वार्ड क्रमांक-28, दुर्ग में यादव मिलन समारोह, युवक-युवती परिचय सम्मेलन एवं गीता जयंती का भव्य आयोजन किया जाएगा।

उद्घाटन समारोह में ये रहेंगे प्रमुख अतिथि

उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री गजेंद्र यादव होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विजय बघेल (सांसद, दुर्ग लोकसभा) करेंगे।
विशेष अतिथियों में ललित चंद्राकर (विधायक, दुर्ग ग्रामीण), अल्का बाघमार (महापौर, दुर्ग), दीपक ताराचंद साहू, शिवराज राउत, राजेश ताम्रकार, अजय यादव (प्रदेश अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ कोसरिया यादव समाज), ममता ओमप्रकाश (पार्षद) एवं बबीता यादव (पार्षद) शामिल रहेंगे।

समापन समारोह सायं 4 बजे

कार्यक्रम का समापन समारोह सायं 4.00 बजे आयोजित होगा, जिसके मुख्य अतिथि देवेंद्र यादव (विधायक, भिलाई नगर) होंगे।
समारोह की अध्यक्षता बोधन यादव (अध्यक्ष, जिला कोसरिया समाज) करेंगे।
विशेष अतिथियों में अरुण बोरा (पूर्व विधायक, दुर्ग), राजेंद्र साहू, धीरज बाकलीवाल, मेघनाथ यादव (प्रांताध्यक्ष, छत्तीसगढ़ सर्व समाज संगठन), मन्ना यादव एवं दुलौरिन बाई यादव उपस्थित रहेंगे।

तैयारियों को लेकर बैठक, जिम्मेदारियां सौंपी गईं

कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु समाज प्रमुखों की बैठक आयोजित कर आयोजन की रूपरेखा तैयार की गई तथा सभी को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गईं। बैठक में अमर सिंह यादव (अध्यक्ष), छोटेलाल यादव (संरक्षक), रणछोर यादव (उपाध्यक्ष), दिनेश यादव (सचिव), द्वारिका प्रसाद यादव (कोषाध्यक्ष), मेघनाथ यादव, भानु प्रताप यादव (जिलाध्यक्ष, छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ – दुर्ग) सहित बड़ी संख्या में समाज के पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।
महिला प्रकोष्ठ से गीता यादव (महिला अध्यक्ष) सहित अन्य सदस्य भी बैठक में शामिल हुए।

समाजजनों से सहभागिता की अपील

दुर्ग नगर यादव महासभा ने समाज के सभी सदस्यों से कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर आयोजन को सफल बनाने की अपील की है।

उक्त जानकारी भानु प्रताप यादव, प्रांताध्यक्ष छत्तीसगढ़ सर्व समाज संगठन (अधिकारी-कर्मचारी प्रकोष्ठ) एवं मीडिया प्रभारी द्वारा दी गई।

       रायपुर / शौर्यपथ / धुन के पक्के लोग जब ठान लेते हैं, तो परिस्थितियां भी रास्ता दे देती हैं। राजनांदगांव के वैशाली नगर निवासी श्री प्रदीप कुमार रामराव देशपांडे ने अपने दृढ़ संकल्प और परिश्रम से यह साबित कर दिया है कि सही योजना और निरंतर मेहनत से आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव रखी जा सकती है। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) उनके लिए न केवल आर्थिक संबल बनी, बल्कि एक नई पहचान और स्थायी आजीविका का माध्यम भी बनी।
प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना भारत सरकार की एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका उद्देश्य खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में सूक्ष्म उद्यमों को सशक्त बनाना, उन्हें औपचारिक स्वरूप देना और प्रतिस्पर्धी बनाना है। इस योजना के अंतर्गत नए एवं मौजूदा उद्यमों को 35 प्रतिशत तक ऋण आधारित सब्सिडी (अधिकतम 10 लाख रुपये), ब्रांडिंग, मार्केटिंग सहायता, प्रशिक्षण एवं बुनियादी ढांचे का सहयोग प्रदान किया जाता है, जिससे वे आत्मनिर्भर भारत और वोकल फॉर लोकल की भावना के अनुरूप आगे बढ़ सकें।
इसी योजना के अंतर्गत श्री प्रदीप देशपांडे ने स्वरोजगार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अपना लघुवनोपज आधारित प्रोसेसिंग उद्योग प्रारंभ किया। उन्होंने प्रदेश में उपलब्ध चिरौंजी, हर्रा एवं बहेरा जैसे लघुवनोपज की संभावनाओं को पहचानते हुए इन पर आधारित प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना की। इस उद्योग के लिए मशीन एवं शेड निर्माण हेतु कुल 5 लाख 50 हजार रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ, जिसमें से 2 लाख 13 हजार 500 रुपये का अनुदान प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के अंतर्गत प्राप्त हुआ।
उद्योग की स्थापना के साथ ही श्री देशपांडे ने कौरिनभाठा स्थित संस्कारधानी महिला कृषक अभिरुचि स्वसहायता समूह की महिलाओं को रोजगार से जोड़ा। इससे महिलाओं को स्थायी आय का साधन मिला और वे आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हुईं, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति पर भी पड़ा।
योजना से प्राप्त सहायता राशि से उन्होंने आईटीआई मुंबई निर्मित चिरौंजी डिकॉल्डीकेटर मशीन क्रय की। इस आधुनिक मशीन के माध्यम से चिरौंजी का छिलका अलग कर गिरी निकाली जाती है, जबकि छिलकों से चारकोल का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा चिरौंजी, हर्रा एवं बहेरा की गिरी से तेल निष्कर्षण तथा हर्रा-बहेरा डिकॉल्डीकेटर मशीन द्वारा छाल पृथक्करण का कार्य भी किया जा रहा है, जिससे मूल्य संवर्धन और उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
ग्रामीण और वनीय क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति की चुनौतियों को देखते हुए श्री देशपांडे ने अपनी प्रोसेसिंग यूनिट को सोलर ऊर्जा से संचालित किया है। सोलर प्लांट के उपयोग से उनका बिजली खर्च शून्य हो गया है और उत्पादन कार्य बिना रुकावट जारी है, जिससे लागत में भी भारी कमी आई है।
चिरौंजी, हर्रा और बहेरा उत्पादों की लगातार बढ़ती मांग के चलते उनका व्यवसाय अब छत्तीसगढ़ तक सीमित न रहकर महाराष्ट्र, झारखंड और ओडिशा तक विस्तारित हो चुका है। इस उद्योग से उन्हें प्रतिवर्ष लगभग 4 लाख रुपये की आय हो रही है, जिससे उनका जीवनस्तर बेहतर हुआ है।
यह पहल न केवल आर्थिक सशक्तिकरण की मिसाल बनी है, बल्कि वनों के संरक्षण, लघुवनोपज के सतत संग्रहण और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन में भी सहायक सिद्ध हो रही है। स्वसहायता समूह से जुड़ी महिलाएं आज आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही हैं।
श्री प्रदीप कुमार रामराव देशपांडे ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना को स्वरोजगार को बढ़ावा देने वाली अत्यंत प्रभावी योजना बताते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शासन की इस पहल ने उनके सपनों को नई उड़ान दी है और आत्मनिर्भर बनने का रास्ता प्रशस्त किया है।

   मुंगेली / शौर्यपथ / शासन द्वारा प्रत्येक घरों में छत पर सोलर रूफटॉप सिस्टम लगाकर ऊर्जा के लिए आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का संचालन किया जा रहा है। जिले में ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम साबित हो रही है। यह योजना न केवल आम लोगों को बिजली बिल के बोझ से राहत दिला रही है, बल्कि स्वच्छ और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देकर पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभा रही है।
इसी कड़ी में दाउपारा मुंगेली निवासी श्री बसंत कुमार ने योजना के तहत अपने घर की छत पर 03 किलोवाट का सोलर पैनल स्थापित कराया है। अब वह हर महीने बिजली बिल के बोझ से मुक्त होकर, अपनी ही सौर ऊर्जा से अपने घर की बिजली जरूरतें पूरी कर रहे हैं। श्री बसंत कुमार ने बताया कि पहले उनके घर में बिजली की आपूर्ति अनियमित रहती थी और बिजली बिल भी अधिक आता था, लेकिन जब उन्हें पीएम सूर्य घर योजना की जानकारी मिली, तो उन्होंने तुरंत आवेदन किया। योजना के तहत उन्हें सब्सिडी पर सोलर पैनल मिले और कुछ ही दिनों में उनके घर की छत पर सिस्टम इंस्टॉल कर दिया गया। अब उनके घर में नियमित रूप से बिजली रहती है।
पीएम सूर्य घर योजना के तहत उपभोक्ताओं को रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने पर केन्द्र और राज्य शासन द्वारा 30 हजार रूपए से 78 हजार रुपये तक की सब्सिडी प्रदान की जा रही है। 01 किलोवाट का रूफटॉप लगवाने पर 45 हजार रूपए, 02 किलोवाट में 90 हजार रूपए और 03 किलोवाट का रूफटॉप लगवाने पर 01 लाख 08 हजार रूपए की सब्सिडी प्रदान की जाती है।

शौर्यपथ धर्म विशेष
क्या आपने कभी सोचा है कि दुनिया की सबसे मंहगी ज़मीन मात्र 4 वर्ग मीटर की हो सकती है? यह कोई साधारण जगह नहीं, बल्कि पंजाब के फतेहगढ़ साहिब जिले के सरहिंद में स्थित वह पावन भूमि है, जहां श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज के छोटे साहिबजादों—साहिबजादा जोरावर सिंह जी और साहिबजादा फतेह सिंह जी का अंतिम संस्कार हुआ था। यह ज़मीन न केवल सोने की मोहरों से सजी, बल्कि सिख इतिहास की अमर गाथा का प्रतीक है।
आइए, इस रहस्यमयी घटना को वाहेगुरु की कृपा से समझें, जो हर भक्त के मन में श्रद्धा जगाएगी।

सेठ टोडर मल जी की अपार भक्ति: सोने की वर्षा से खरीदी पावन भूमि  -जब मुगल क्रूरता के चरम पर थी, तब सेठ दीवान टोडर मल जी, जो मुगल दरबार के प्रभावशाली व्यक्ति थे, ने इस छोटी सी ज़मीन को खरीदने का संकल्प लिया। सरहिंद के तत्कालीन मुस्लिम शासक वज़ीर खान ने इसकी कीमत मांगी—78,000 सोने की मोहरें! सेठ जी ने न केवल मोहरे चढ़ाए, बल्कि पूरी ज़मीन पर सोने की चादर बिछा दी। आज की कीमत से आंका जाए तो यह लगभग 25 अरब रुपये (या उससे अधिक, मुद्रास्फीति अनुसार) के बराबर है! यह दुनिया का सबसे महंगा ज़मीन अधिग्रहण है, जो सिख धर्म के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है।
वाहेगुरु की महिमा देखिए—यह ज़मीन आज गुरुद्वारा फतेहगढ़ साहिब के रूप में भक्तों का तीर्थस्थल है, जहां हर अरदास में छोटे साहिबजादों की शहादत की याद ताज़ा होती है। सेठ टोडर मल जी की यह भक्ति हमें सिखाती है कि सच्चा वैभव धन में नहीं, गुरु महाराज के चरणों में समर्पण में है।


चमकौर का चमत्कार: 42 शूरवीरों ने हिला दी 10 लाख की विशाल फ़ौज!
अब सुनिए वह युद्ध, जो मानव इतिहास की सबसे प्रेरणादायी गाथा है—चमकौर का युद्ध (6 दिसंबर 1704)! मुगल सेनापति वज़ीर खान की 10 लाख सैनिकों वाली विशाल फ़ौज का मुकाबला किया महज 42 सिख शूरवीरों ने, जिनकी अगुवाई श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज ने की। क्या आप विश्वास कर सकते हैं? वाहेगुरु के बल से उन 42 वीरों ने मुगलों को धूल चटा दी!यह युद्ध मुगल साम्राज्य की नींव हिला गया।
गुरु महाराज ने स्वयं कहा:
"ਰਚੁ ਪਾਖੁਰਾਂ ਜੋ ਬਜ ਰਚੁ ਖਗਾਂ ਤੀਰ ਭਵਾਨੀ ਰਚੁ ਖੰਡਾ ਮੇਰੈ ਨਾਮੁ ਖਿਲਾਵਣਿ ਰਚੁ ਬੇੜ ਜਲ੍ਹੀ ਬੇੜ ਬੇੜ ਬੇੜ ਜਲਾਵਣਿ।"
(हिंदी अनुवाद: चीलों के पंख तैयार करो, बाज़ों के लिए तीर बनाओ, मेरे नाम की खंजर तैयार करो, नौकाओं को जलाने के लिए आग तैयार करो।)और वह अमर उद्घोषणा:
"ਚਿੜੀਆਂ ਤੋਂ ਬਾਜ਼ ਲੜਾਵਾਂ ਗੀਦੜਾਂ ਕਰੂੰ ਸ਼ੇਰ ਬਨਾਵਾਂ, ਸਵਾ ਲੱਖ ਸੇ ਏਕ ਲੜਾਵਾਂ ਤਬ ਗੋਬਿੰਦ ਸਿੰਘ ਨਾਮ ਕਹਾਵਾਂ!"
(हिंदी अनुवाद: चिड़ियों से बाज़ लड़ाऊंगा, गीदड़ों को शेर बनाऊंगा, सवा लाख से एक लड़ाऊंगा तब गोबिंद सिंह नाम कहाऊंगा!)
इस चमत्कार ने औरंगज़ेब को भी गुरु महाराज के समक्ष सिर झुकाने पर मजबूर कर दिया। मुगल हुकूमत का अंत यहीं से प्रारंभ हुआ, और भारत को स्वतंत्रता की प्रेरणा मिली। वाहेगुरु की कृपा से साधारण मनुष्य शेर बन जाते हैं!


एक सिख परिवार की त्याग गाथा: वंश का लोप, गुरु के चरणों में समर्पण - कुछ समय बाद, यह पावन ज़मीन एक सिख परिवार ने खरीदी। जब उन्हें इसका महात्म्य पता चला—कि यहीं छोटे साहिबजादों की शहादत हुई—तो उन्होंने इसे गुरुद्वारा साहिब के लिए दान करने का निश्चय किया। अरदास के समय जब पूछा गया कि गुरु जी से क्या विनती करें, तो उस भक्त ने कहा: "हे गुरु जी, मेरे घर कोई औलाद न हो, ताकि कोई न कहे कि यह ज़मीन मेरे बाप-दादा ने दी।"वाहेगुरु ने उनकी अरदास स्वीकार की—उस परिवार में कोई संतान नहीं हुई। आज हम 50-100 रुपये दान कर स्वार्थी कामनाएं करते हैं, लेकिन यह भक्त ने वंश त्याग कर दिया! वाहेगुरु... वाहेगुरु!
यह是我们 भारतीय विरासत का अनमोल रत्न है।सत्य जानने को गूगल करें: 'Battle of Chamkaur' या 'Fatehgarh Sahib History'।
यदि यह गाथा आपके हृदय को छू गई, तो भारतीय गौरव से भरा यह संदेश शेयर करें। हर शेयर से इतिहास जागेगा, भक्ति बढ़ेगी। वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतेह!

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