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मनोरंजन /शौर्यपथ /बॉलीवुड एक्ट्रेस शेफाली शाह सोशल मीडिया पर बहुत एक्टिव रहती हैं और अक्सर फैमिली फोटोज शेयर करते हुए देखी जाती हैं. हाल ही में शेफाली ने अपने बेटे आर्यमन शाह की फोटो शेयर कर बताया कि उन्होंने अपना ग्रेजुएशन कंप्लीट कर लिया है. हाल ही में शेफाली बेटे आर्यन की ग्रेजुएशन सेरेमनी में अपने पति और फिल्म प्रोड्यूसर विपुल शाह के साथ पहुंची थीं. शेफाली ने बेटे के लिए एक इमोशनल पोस्ट सोशल मीडिया पर साझा कर बताया कि वे कितना प्राउड फील कर रही हैं.
शेफाली शाह ने अपने इंस्टा पर एक लंबा-चौड़ा भावुक कर देने वाला पोस्ट लिखा. एक्ट्रेस ने आर्यन की ग्रेजुएशन सेरेमनी से कई तस्वीरें शेयर कीं. इन तस्वीरों में शेफाली बड़े ही गर्व के साथ अपने बेटे और पति संग पोज देती नजर आईं. इस दौरान एक्ट्रेस के चेहरे पर खुशी साफ देखी जा सकती है. एक्ट्रेस पोस्ट शेयर करते हुए लिखती हैं, "जब मेरे बच्चे बच्चे थे, तो हर पल एक नई उपलब्धि थी. उनके पेट पर पहली बार पलटी, पहली बार जब वे रेंगते थे, उनके पहले कदम, पहले शब्द. पहली बार उन्होंने अपने जूते के फीते बांधे. कई पहले और हर एक दूसरे के समान स्पेशल. फिर बच्चों के स्कूल का पहला दिन आया, उनके और मेरे लिए आंसुओं के माध्यम से बहने का डर, फिर रंग, अक्षर, कविताएं, दोस्त...उनके साथ मैं बड़ी हुई".
अपनी बात जारी रखते हुए शेफाली आगे लिखती हैं, "लेकिन जैसे-जैसे वे बड़े होते गए, उनमें बहुत अधिक प्रथम स्थान नहीं आए, फिर भी हर ग्रेड, हर गोल, जीता गया हर मेडल, उनका बनाया हुआ खाना, उनके द्वारा किए गए प्रत्येक कपड़े धोने का काम उतना ही जरूरी था. अपने दम पर आगे बढ़ने की दिशा में एक और कदम". इस पोस्ट में शेफाली ने बताया कि उन्हें इस पल का कब से इंतजार था. वहीं फैन्स भी आर्यमन को ग्रेजुएशन पूरा होने पर बधाई दे रहे हैं.
मनोरंजन /शौर्यपथ /भारत के सिनेमाई इतिहास में दर्ज शोले एक ऐसी फिल्म है जिसका एक एक किरदार हिट है. और, हर किरदार के डायलोग भी फेमस हैं. फिल्म के लिए छोटे बड़े कई एक्टर्स को एक अलग किरदार दिया गया. कुल 18 किरदार ऐसे रहे जो दर्शकों के दिल में आज तक बसे हुए हैं. इन किरदारों को लोकप्रियता के शिखर पर पहुंचाने का जिम्मा संभाला दो राइटर्स ने नाम थे सलीम खान और जावेद अख्तर. जिनकी कलम से निकले एक एक डायलॉग ने जमकर धमाल मचाया और जो आज भी दोहराए जाते हैं. लेकिन इस फिल्म के लिए स्टार कास्ट करना इतना आसान नहीं था. हर किरदार के लिए देख परख कर आर्टिस्ट का चयन किया गया.
विलेन के लिए पहली पसंद
इस फिल्म में गब्बर का रोल करने वाले अमजद खान घर घर में मशहूर हो गए थे. लेकिन क्या आप जानते हैं कि अमजद खान इस रोल के लिए राइटर जावेद अख्तर की पसंद नहीं थे. आईएमडीबी ट्रिविया के मुताबिक जावेद अख्तर का सोचना था कि गब्बर के रोल के लिए अमजद खान की आवाज बहुत पतली है. इस रोल के लिए डैनी डेनजोंगपा पहली पसंद थे. जिस वक्त उन्हें ये रोल ऑफर हुआ वो अफ्गानिस्तान में फिल्म धर्मात्मा की शूटिंग में व्यस्त थे. जिसकी वजह से ये ऑफर एक्सेप्ट नहीं कर सके. और, अमजद खान को ही ये यादगार रोल निभाने का मौका मिला.
धर्मेंद्र की ख्वाहिश
इस फिल्म में वीरू के लिए धर्मेंद्र ही पहली पसंद थे. लेकिन धर्मेंद्र ठाकुर बलदेव सिंह का किरदार अदा करना चाहते थे. धर्मेंद्र की शौहरत देख मेकर्स उन्हें एकदम इंकार नहीं कर सकते थे. इसलिए एक नई जुगत लगाई गई. धर्मेंद्र को ये जानकारी दी गई कि वीरू का किरदार ही एक्ट्रेस को लेकर जाएगा. जबकि ठाकुर बलदेव सिंह का रोल करने वाले को हीरोइन नहीं मिलेगी. उस वक्त सिचुएशन कुछ ऐसी थी कि संजीव कुमार भी धर्मेंद्र की तरह हेमा मालिनी को चाहते थे और शादी करना चाहते थे. धर्मेंद्र को जैसे ही ये समझ आया कि वो ठाकुर बने तो संजीव कुमार वीरू बनेंगे और हेमा मालिनी उनकी हो जाएंगी. इतना समझ में आते ही धर्मेंद्र वीरू बनने को तैयार हो गए.
मनोरंजन/शौर्यपथ /बॉलीवुड के कई दोस्त कब दुश्मन बन जाते हैं यह किसी को नहीं पता होता है. लेकिन क्या आपको ऐसी फिल्म के बारे में पता है, जिसके बजट और बॉक्स ऑफिस कलेक्शन से हटकर फिल्म से जुड़ी बातें चर्चा में हैं. इतना ही नहीं 1979 में आई 18 एक्टर्स से बनी इस फिल्म को आज भी काफी पसंद किया जाता है. तो क्या आप तस्वीर से फिल्म का नाम बता पाएंगे.
यह कोई और नहीं बल्कि साल 1979 में आई फिल्म काला पत्थर है, जिसने अमिताभ बच्चन के किरदार को फेमस कर दिया. इस फिल्म में उनके अलावा शत्रुघ्न सिन्हा भी नजर आए थे, जो कि महानायक के एक समय में अच्छे दोस्त हुआ करते थे. हालांकि इस फिल्म के दौरान अमिताभ बच्चन उनके इस फिल्म के किए चुने जाने के लिए खिलाफ थे. इतना ही नहीं काला पत्थर की शूटिंग के दौरान, शत्रुघ्न सिन्हा का कहना था कि अमिताभ बच्चन ने उनसे दूरी बनाए रखी, भले ही वे बॉलीवुड में अपने शुरुआती वर्षों के दौरान "अच्छे दोस्त" थे.
गौरतलब है कि काला पत्थर रियल कोयला खदान आपदा से प्रेरित थी, जिसे चासनाला खनन आपदा के नाम से जाना जाता है. दरअसल, 27 दिसंबर 1975 को धनबाद, झारखंड के पास हुई थी, जिसमें 372 माइन में काम करने वाले मारे गए थे. वहीं इस फिल्म में शत्रुघ्न सिन्हा का एक डायलॉग तीसरे बादशाह हम हैं काफी फेमस हुआ था. वहीं 2.50 करोड़ की इस फिल्म ने 6 करोड़ की कमाई की थी, जो आज की डेट में लगभग 135 करोड़ तक होगी.
मनोरंजन /शौर्यपथ /19 जुलाई साल 2021 में राज कुंद्रा को पॉर्न कंटेंट के प्रोडक्शन और डिस्ट्रिब्यूशन मामले में हिरासत में लिया गया था. उन पर आरोप थे कि वो हॉटशॉट नाम की एक ऐप पर कंटेंट सप्लाई करने वालों के साथ मिले हुए हैं. इस घटना को दो साल हो चुके हैं और अब इस पर फिल्म बनने जा रही है. इस फिल्म में उन काले दिनों की हकीकत दिखाई जाएगी तो राज कुंद्रा ने जेल में बिताए. राज करीब 63 दिन जेल में रहे थे. इस बात को लेकर सोशल मीडिया पर उनकी जमकर ट्रोलिंग हुई थी लेकिन राज कभी भी इससे निराश नहीं हुए.
साल 2022 में 21 सितंबर को उन्होंने वो दिन याद किया जब उन्हें जेल से रिहा किया गया था. उन्होंने एक तस्वीर भी शेयर की थी. इस पर लिखा था, अगर आपको पूरा सच नहीं पता तो चुप हो जाइए. उन्होंने लिखा, आर्थर जेल से रिहा हुए आज एक साल हो गया. कुछ समय की बात है. इंसाफ होगा. सच बाहर आएगा. मेरे सभी शुभ चिंतकों का शुक्रिया और ट्रोलर्स को भी बहुत शुक्रिया जिन्होंने मुझे स्ट्रॉन्ग बनाया.
पिकविला में छपी रिपोर्ट के मुताबिक राज कुंद्रा के अरेस्ट और जेल में बिताए समय पर फिल्म बनने जा रही है. फिलहाल इस पर काम चल रहा है और जल्द ही अनाउंसमेंट की जाएगी. केवल इतना ही नहीं राज कुंद्रा इस फिल्म में लीड रोल में होंगे. मतलब ये कि अपनी कहानी वो खुद सुनाने वाले हैं. इस फिल्म में राज कुंद्रा के जेल में बिताए समय के बारे बताया जाएगा कि किस तरह राज ने कैपैसिटी से ज्यादा कैदियों वाली उस जेल में समय बिताया. राज ने बताया कि इस फिल्म में पूरा सफर दिखाया जाएगा. किस तरह आरोप लगे, मीडिया इन्वॉल्व हुआ, जेल में बिताया हुआ समय और फिर रिहाई. यह फिल्म कुंद्र परिवार का पॉइंट ऑफ व्यू पेश करेगी.
मनोरंजन /शौर्यपथ /शाहरुख खान और प्रीति जिंटा पर फिल्माई गई फिल्म वीर जारा की कहानी ने लोगों को जितना छुआ, फिल्म के गाने भी उतने ही ज्यादा पसंद किए गए. एक नहीं बल्कि वीर जारा के सभी गाने सुपरहिट साबित हुए. पर क्या आप जानते हैं कि फिल्म बनने से 30 साल पहले ही इस फिल्म के गानों का म्यूजिक बन गया था. यकीनन सुनकर आपको भी ताज्जुब हो रहा होगा, तो आपको बता दें कि ये कमाल किसी और का नहीं बल्कि जाने-माने संगीतकार मदन मोहन का है, जिन्होंने उस जमाने में ऐसी धुनें तैयार कीं जो आज की जनरेशन की पसंदीदा बन गईं.
यूं तो मदन मोहन ने बॉलीवुड के नाम कई अनमोल नगमे किए हैं लेकिन उनकी कुछ ऐसी भी कॉम्पोजिशन थीं जिन्हें उन्होंने संजोया जरूर था लेकिन इस्तेमाल नहीं हुई थीं. तो चलिए आपको बताते हैं मदन मोहन की अनटच्ड कंपोजिशन कैसे बनीं वीर जारा के सुपर हिट गानों की धुन.
आपको बता दें कि शाहरुख खान औऱ प्रीति जिंटा पर बनी सुपरहिट फिल्म वीर जारा के साउंडट्रेक के लगभग सभी गाने में स्वर्गीय मदन मोहन की पुरानी और अनछुई कॉम्पोजिशन पर बनाए गए हैं. ये सुरमई गाने कानों में रस घोल देते हैं, आंखें नम कर देते हैं सीधा दिल में उतर जाते हैं. दरअसल मदन मोहन की कुछ म्यूज़िक कॉम्पोजिशन पर उस वक्त गाने नहीं बनाए गए तो उन्होंने उसे आर्काइव कर लिया. उनके निधन के बाद उनके बेटे संजीव कोहली को ये धुनें जब मिली तो वो खुद को इन्हें दुनिया के सामने लाने से रोक नहीं पाए.
फेमस सिंगर सोनू निगम ने इस बात का खुलासा खुद एक इंटरव्यू में किया था. उन्होंने बताया कि कैसे यश चोपड़ा और मदन मोहन के बेटे ने मिलकर उनकी अनछुई दोनों को फिल्म वीर जारा के खूबसूरत गानों में तब्दील कर दिया.
मदन मोहन के निधन के तीस साल बाद 1975 में संजीव कोहली को ये धुनें मिली और इसके बाद इनको एडिट करके वीर जारा के साउंडट्रेक को तैयार किया गया. है ना अनोखा संयोग. वीर जारा के साउंडट्रेक के गानों में इन्हीं कॉम्पजिशन्स को इस्तेमाल किया गया है और गाने के बोल फिल्म के हिसाब से रखे गए हैं. तेरे लिए...मैं यहां हूं, दो पल का..जैसे गाने स्वर्गीय मदन मोहन के वो शानदार नगमे हैं, जिन्हें सुनकर सुनने वाला खो जाता है.
मनोरंजन /शौर्यपथ /हल्की-हल्की मूंछों वाला ये टीनएजर बॉलीवुड के एक सुपरस्टार का बेटा है और खुद भी आज बॉलीवुड का बहुत बड़ा सितारा है. हाल ही में इनके बेटे की भी शादी हुई है. फिल्मी दुनिया में दमदार एक्शन हीरो की पहचान बना चुके इस बच्चे ने फिल्मी बैकग्राउंड से आने के बावजूद अपने दम पर अपनी पहचान बनाई. इनके ढाई किलो के हाथ की चर्चा पूरे बॉलीवुड में होती है, अब तो आप इन्हें पहचान ही गए होंगे. जी, हां ये सनी देओल के टीनएज की तस्वीर है.
साल 1982 में अमृता सिंह के साथ आई अपनी पहली फिल्म से ही बॉलीवुड में सनी देओल को पहचान मिल गई. 1980 और 1990 के दशक में सनी ने कई सफल फिल्में दी. इन सफल फिल्मों के बावजूद 1990 में आई सनी देओल की फिल्म ‘घायल' को कोई प्रोड्यूसर नहीं मिल रहा था. इस फिल्म का डायरेक्शन राजकुमार संतोषी ने किया था. फिल्म के लिए कई प्रोड्यूसर्स को अप्रोच किया गया था, लेकिन किसी ने सनी की इस फिल्म में पैसे लगाने के लिए रजामंदी नहीं जताई.
जब फिल्म घायल के लिए कोई प्रोड्यूसर नहीं मिला तब पिता धर्मेंद्र और खुद सनी देओल ने मिलकर फिल्म प्रोड्यूस किया और फिल्म सुपरहिट रही. सनी देओल की इस फिल्म ने जमकर कमाई की और कई सारे अवार्ड्स भी जीते. सनी देओल ने घायल के अलावा घातक, गदर, त्रिदेव, अजय, हिम्मत, जोर और अंगरक्षक जैसी कई सारी एक्शन फिल्में की, जिसकी वजह से बॉलीवुड में उनकी पहचान एक एक्शन हीरो की बन गई, जो आज भी कायम है. जल्द ही उनकी फिल्म गदर 2 रिलीज होने वाली है. ये भी एक एक्शन फिल्म ही है.
मनोरंजन /शौर्यपथ /बॉलीवुड इंडस्ट्री में नाम, शोहरत और पैसा कमाने वालों की फेहरिस्त तो वैसे बहुत लंबी है लेकिन आज हम आपको मिलवाने जा रहे हैं बॉलीवुड की सबसे पहली गायिका और अभिनेत्री से. अगर आप उस दौर के हैं तो बखूबी इनका नाम जानते होंगे लेकिन अगर आज की जनरेशन के हैं तो यकीनन आप इन्हें देखकर पहचान नहीं पाए होंगे. अगर दिमाग पर जोर डालने के बाद भी आप इन्हें पहचान नहीं पा रहे हैं तो हम आपको बता दें कि तस्वीर में नजर आ रही है खूबसूरत सी लड़की कोई और नहीं बल्कि हिंदी सिनेमा की पहली गायिका और एक्ट्रेस रहीं कानन देवी हैं. जिन्हें गुजरे हुए आज 31 साल बीत चुके हैं.
फिल्म का बजट 15 हज़ार, फीस लेती थीं 5 लाख
कानन देवी उन शख्सियतों में से एक थी जो 30 के दशक में एक फिल्म में काम करने के लिए 5 लाख चार्ज करती थीं और एक गाना गाने के लिए 1 लाख रुपये लिया करती थीं. अब आप सोच रहे होंगे कि 5 लाख या फिर एक गाने का 1 लाख रुपये इतना ज्यादा तो नहीं है... तो आपको बता दें कि ये कीमत महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि उन दिनों पूरी फिल्म का पूरा बजट ही 15 से 20 हज़ार. के आसपास हुआ करता था. उनके रुतबे और लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें हाई सिक्योरिटी के बीच रखा जाता था.
बंगाल में हुआ था जन्म
कानन देवी का जन्म 22 अप्रैल, 1916 को पश्चिम बंगाल के हावड़ा में एक गरीब परिवार में हुआ था. कानन देवी के असली माता-पिता के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है. उनकी जीवनी के अनुसार, कानन देवी का पालन-पोषण रतन चंद्र दास और राजोबाला नाम के दंपति के साथ हुआ था, इसलिए वो उन्हें अपने माता-पिता के रूप में मानने लगीं. रतन चंद्र ने कानन देवी को अपनी बेटी की तरह माना और उन्हें संगीत की शिक्षा दी, लेकिन कुछ वर्षों के बाद उनकी मृत्यु हो गई.
ऐसे शुरू हुआ फ़िल्मी करियर
कानन देवी की आवाज जितनी खूबसूरत थी वो देखने में भी उतनी ही बला की खूबसूरत थीं. मदन मूवी स्टूडियो ने कानन की खूबसूरती से इंप्रेस होकर उन्हें 5 रुपये महीने की पगार में जयदेव फिल्म के लिए साइन कर लिया था. इस फिल्म में उन्हें छोटा सा रोल मिला था. दरअसल कॉन्ट्रैक्ट 25 रुपये का था लेकिन थिएटर वाले उन्हें सिर्फ 5 रुपये दिया करते थे. फिर 1928 से 1931 के बीच कानन चंद फिल्मों में अपना हुनर दिखाया. इस दौरान कानन देवी ने कुछ गाने भी रिकॉर्ड किए.
कानन देवी ने कुल 57 फिल्मों में काम किया और उन्होंने लगभग 40 गाने गाए. वो फिल्म जगत की पहली महिला थीं, जिन्हें पुरुष प्रधान इंडस्ट्री में 'मैडम' कहा जाता था. हिंदी सिनेमा में कानन देवी ने दिग्गज अभिनेताओं केएल सहगल, पंकज मलिक, प्रथमेश बरुआ, पहाड़ी सान्याल, छवि बिस्वास और अशोक कुमार के साथ भी काम किया. दिसंबर 1940 में कानन देवी की शादी अशोक मैत्रा से हुई.
मनोरंजन /शौर्यपथ /अगर आप हॉलीवुड फिल्में देखने के शौकीन हैं तो यकीनन आपने क्रिस्टोफर नोलन का नाम जरूर सुना होगा. ये हॉलीवुड के लीजेंडरी डायरेक्टर्स से एक हैं. उनकी फिल्म ओपन हाइमर का फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. फिल्म को लेकर फैंस में खासा एक्साइटमेंट है और कई बार से लेकर अपडेट्स भी सामने आ चुके हैं. ओपन हाइमर दुनिया भर के सिनेमाघरों में 21 जुलाई को रिलीज होने जा रही है. फिल्म के रिलीज से पहले ही एडवांस टिकट बुकिंग शुरू हो गई है, जिसके आंकड़ें फैंस को बेकरार करने वाले हैं, क्योंकि 2000 रुपए से भी ज्यादा की महंगी होने के बावजूद 90 हजार फिल्म की टिकट बिक चुकी हैं.
कौन थे फॉदर ऑफ़ एटम बम
आपको बता दें कि ये फिल्म अमेरिका के फेमस साइंटिस्ट जूलियस रॉबर्ट ओपेनहाइमर की लाइफ और उनके परमाणु बम का आविष्कार बेस्ड है. उन्हें फॉदर ऑफ एटम बम के नाम से भी जाना जाता है. तो आखिर कौन थे ओपन हाइमर और उनकी लाइफ में ऐसी क्या खास बात थी जिसे सुनाया जाना जरूरी है आपको बताते हैं.
कौन थे जे रॉबर्ट ओपेनहाइमर
अमेरिका के थ्योरेटिकल फिजिक्स के स्कॉलर थे रॉबर्ट ओपेनहाइमर. सेकंड वर्ल्ड वॉर के दौरान न्यू मैक्सिको में लॉस अलामोस लैबोरेट्री के डायरेक्टर के तौर पर ओपन हाइमर 'मैनहटट्न प्रोजेक्ट' को लीड किया था. नाजी जर्मनी से पहले परमाणु बम बनाना ही इस प्रोजेक्ट का मकसद था.
भगवत गीता का जाना सार
न्यूयॉर्क में साल 1904 में जन्मे ओपेनहाइमर अपने यहूदी माता पिता की संतान थे. बचपन से ही उन्हें पढ़ाई और नई चीजों को जानने और समझने की क्यूरियोसिटी थी. महज़ 9 साल की उम्र में वो लैटिन और ग्रीक चिंतन साहित्य पढ़ा करते थे. उनकी यही दिलचस्पी उन्हें भगवत गीता तक लेकर गई जिसे समझने के लिए उन्होंने संस्कृत भाषा का ज्ञान हासिल किया.
जापान के इन दो शहरों में मची थी तबाही
16 जुलाई 1945 को परमाणु युग की शुरुआत हुई थी. इस दिन लॉस अलामोस से लगभग 340 किलोमीटर दक्षिण में पहले परमाणु बम का परीक्षण किया गया था. जिसे ट्रिनिटी टेस्ट के नाम से भी जाना जाता है. इस परमाणु बम परीक्षण के 1 महीने से भी कम समय के बाद अमेरिका ने जापान के दो शहरों नागासाकी और हिरोशिमा पर 6 अगस्त 9 अगस्त को दो परमाणु बम गिराए थे. इस तबाही में 2 लाख से ज्यादा लोग लोगों की मौत हुई थी. परमाणु बम का असर आज भी इन शहरों पर नजर आता है. इसी बमबारी के बाद सेकंड वर्ल्ड वॉर खत्म हुआ था.
इस घटना से परेशान हो गए थे ओपेनहाइमर
पूरी दुनिया में इस घटना के बाद परमाणु हथियारों की जैसे होड़ शुरू कर दी थी. यह वो वक्त था जब अपने ही बनाए गए परमाणु बम की क्षमता देखने के बाद खुद ओपेनहाइमर परेशान हो गए थे. रॉबर्ट ओपेनहाइमर परमाणु हथियारों की रेस के खिलाफ सबसे बुलंद आवाज बन गए थे.
मनोरंजन/शौर्यपथ /आरएक्स 100 जैसी सुपरहिट फिल्म बनाने वाले डायरेक्टर अजय भूपति एक बार फिर से बड़े पर्दे पर धमाल मचाने वाले हैं. उनकी फिल्म मंगलवार का टीजर रिलीज हो चुका है. अजय भूपति की यह फिल्म लंबे समय से सुर्खियों में बनी हुई है. इस फिल्म का फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. टीजर में एक गांव नजर आता है. जिसमें गांव से भी लोग हैरान भरी नजरों से देख रहे होते हैं. फिल्म मंगलवार का निर्देशन अजय भूपति ने किया है तो वहीं फिल्म 'कंतारा' फेम अजनीश लोकनाथ ने बैकग्राउंड स्कोर दिया है. कंतारा में इनके बैकग्राउंड स्कोर की काफी चर्चा हुई थी.
मंगलवार के टीजर में एक्ट्रेस पायल राजपूत दिखाई दे रही हैं. इनके अलावा टीजर में श्रवण रेड्डी, चैतन्य कृष्णा, नंदिता स्वेता, अजय घोष, लक्ष्मण और कई अन्य लोगों की भी झलक देखने को मिली रही है. गौरतलब है कि फिल्म मंगलवार का पोस्ट प्रोडक्शन का चल रहा है. फिलहाल इस फिल्म की रिलीज डेट की घोषणा नहीं हुई है. मंगलवार का टीजर रिलीज होने के बाद फिल्म के निर्माता स्वाति रेड्डी गुनुपति और सुरेश वर्मा एम ने कहा, “हमारे निर्देशक अजय भूपति ने खुद को एक बार फिर एक अभूतपूर्व फिल्म निर्माता के रूप में साबित किया है. उन्होंने बेहतरीन विषयवस्तु वाली एक व्यावसायिक फिल्म बनाई. यह भारतीय सिनेमा की एक अगले स्तर की फिल्म होने जा रही है और तत्काल ट्रेंडिंग टीज़र इसकी झलक देता है. हम टीज़र को मिली प्रतिक्रिया से बेहद खुश हैं. गुणवत्ता और सामग्री मानकों से समझौता किए बिना मंगलावर का निर्माण करते हुए, हमने 99 दिनों का शूट शेड्यूल पूरा किया. जबकि पोस्ट प्रोडक्शन का काम पूरी गति से शुरू हो रहा है, हम पैन इंडियन रिलीज का लक्ष्य बना रहे हैं. 'कंतारा' फेम अजनीश लोकनाथ का संगीत इस प्रोजेक्ट में प्रमुख योगदान देने वाला है."
निर्देशक अजय भूपति ने कहा, “हमारा मंगलावर 90 के दशक की पृष्ठभूमि पर आधारित एक दुर्लभ एक्शन-थ्रिलर है. यह कच्चे, देहाती दृश्यों और भावनाओं के साथ हमारे जन्म से जुड़ा रहता है. कहानी में 30 पात्र हैं और प्रत्येक पात्र को फिल्म की बड़ी योजना में एक निश्चित स्थान मिला है. 'कंतारा' फेम अजनीश लोकनाथ इस फिल्म के लिए संगीत दे रहे हैं और इस तरह बैकग्राउंड स्कोर फिल्म का एक प्रमुख आकर्षण होगा.' स्वाति रेड्डी गुनुपति और सुरेश वर्मा एम मुद्रा मीडिया वर्क्स और ए क्रिएटिव वर्क्स के तहत इस परियोजना का समर्थन कर रहे हैं. सामग्री की क्षमता पर विश्वास करते हुए, निर्माताओं ने जल्द ही तेलुगु, हिंदी, तमिल, कन्नड़ और मलयालम भाषाओं में एक अखिल भारतीय भव्य रिलीज का लक्ष्य रखा.
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
