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March 12, 2026
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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

   दुर्ग / शौर्यपथ / हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग के शोधार्थी आदित्य नारंग को “दुर्ग संभाग के नगर निगम क्षेत्र में महिला स्वयं सहायता समूहों के विकास में बैंकिंग एवं नॉन-बैंकिंग साख की भूमिका का अध्ययन” विषय पर 2 मार्च 2026 को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई।
यह शोध कार्य डॉ. विजय कुमार वासनिक, सहायक प्राध्यापक, शासकीय कन्या महाविद्यालय दुर्ग के मार्गदर्शन तथा डॉ. एस.एन. झा, प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष (वाणिज्य), शासकीय विश्वनाथ यादव तमस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय दुर्ग के सह-निर्देशन में संपन्न हुआ।
आदित्य नारंग के पिता श्री आलोक कुमार नारंग दुर्ग जिला कलेक्ट्रेट में लंबे समय तक विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत रहे हैं। वे कलेक्टर रीडर तथा जिला नाजिर जैसे पदों से सेवानिवृत्त हुए हैं और वर्तमान में दुर्ग में ही निवासरत हैं।
अपने शोध में आदित्य नारंग ने दुर्ग संभाग के नगरीय क्षेत्रों में कार्यरत महिला स्वयं सहायता समूहों के विकास में एनबीएफसी (नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों) द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली साख की भूमिका का अध्ययन किया है। शोध में यह बताया गया है कि महिला स्वयं सहायता समूहों को एनबीएफसी के माध्यम से अपेक्षाकृत सुलभ ऋण सुविधा प्राप्त होती है, जिसका उनके व्यवसाय और आर्थिक सशक्तिकरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
अध्ययन में परंपरागत बैंकिंग प्रणाली और एनबीएफसी द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली साख व्यवस्था के बीच के अंतर, उससे जुड़ी समस्याओं तथा उनके संभावित समाधानों पर भी प्रकाश डाला गया है। शोध में यह भी उल्लेख किया गया है कि इन व्यवस्थाओं का नगर निगम क्षेत्रों में महिला स्वयं सहायता समूहों के व्यवसायिक विकास पर क्या प्रभाव पड़ता है। यह अध्ययन शहरी क्षेत्रों में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए नई संभावनाएं प्रस्तुत करता है।
शोधार्थी की मौखिक परीक्षा (वाइवा-वोसे) हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग के टैगोर हॉल में आयोजित की गई। इस अवसर पर बाह्य परीक्षक के रूप में प्रो. उमेश होलानी, जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर (मध्यप्रदेश) उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में आंतरिक परीक्षक डॉ. विजय कुमार वासनिक, डॉ. एस.एन. झा, विश्वविद्यालय पीएचडी प्रभारी डॉ. सुनीता मिश्रा, प्राचार्य डॉ. रंजना श्रीवास्तव सहित डॉ. अनिल जैन, डॉ. के.एल. राठी, डॉ. शकील हुसैन, डॉ. एच.पी. सिंह सलूजा, डॉ. आर.पी. अग्रवाल, डॉ. सुमित अग्रवाल, डॉ. प्रदीप कुमार जांगड़े, डॉ. लाली शर्मा, डॉ. प्रीति तन्ना टांक, डॉ. हरीश कश्यप सहित अनेक प्राध्यापक, अतिथि व्याख्याता एवं शोधार्थी उपस्थित रहे।
पीएचडी की उपाधि प्राप्त होने पर आदित्य नारंग ने अपने मार्गदर्शकों, विश्वविद्यालय परिवार, सहयोगियों, शुभचिंतकों और परिवारजनों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उन सभी लोगों के सहयोग और विश्वास का परिणाम है, जिनसे उन्हें समाज के लिए कार्य करने की प्रेरणा मिली।

  रायपुर / शौर्यपथ / बृहस्पति धुर्वे बताती है कि यदि स्वयं की मेहनत, सही मार्गदर्शन और शासन की योजनाओं का सहयोग मिल जाए, तो साधारण परिस्थितियों से निकलकर भी कोई महिला सफलता और आत्मनिर्भरता की ऊँचाइयों तक पहुँच सकता है। कभी दूसरों के खेतों में मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करने वाली पेन्ड्रा-गौरेला-मरवाही जिला के गौरेला विकासखंड के ग्राम पंचायत सधवानी की श्रीमती बृहस्पति धुर्वे आज पूरे क्षेत्र में “लखपति दीदी” के नाम से जानी जाती हैं।
कड़ी मेहनत, आत्मविश्वास और शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के सहयोग से बृहस्पति धुर्वे ने अपने जीवन की दिशा बदल दी और आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सुशासन में संचालित ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) से जुड़कर बृहस्पति धुर्वे ने महिला स्व सहायता समूह के माध्यम से अपने सपनों को साकार करने की शुरुआत की। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें प्रशिक्षण और आर्थिक सहयोग मिला, जिससे उन्होंने ऑयस्टर मशरूम उत्पादन का कार्य शुरू किया। शुरुआत में यह काम छोटे स्तर पर था, लेकिन मेहनत और लगन से धीरे-धीरे उनका उत्पादन बढ़ता गया। मशरूम उत्पादन के साथ-साथ उन्होंने सब्जी-भाजी की खेती भी शुरू की, जिससे उनकी वार्षिक आय लगभग डेढ़ से 2 लाख रुपए तक हो जाती है। आज उनकी मेहनत का परिणाम यह है कि वह आर्थिक रूप से सशक्त बन चुकी हैं और अपने परिवार की जरूरतों को आत्मविश्वास के साथ पूरा कर रही हैं।

बृहस्पति धुर्वे बताती हैं कि शासन की अनेक योजनाओं का लाभ भी उन्हें मिला है। उन्हें महतारी वंदन योजना के तहत आर्थिक सहायता, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत रसोई गैस कनेक्शन, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान तथा पीडीएस योजना से 35 किलो निःशुल्क चावल की सुविधा भी प्राप्त हो रही है। इन योजनाओं ने उनके परिवार को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा प्रदान की है। आज बृहस्पति धुर्वे न केवल स्वयं आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं। वह अपने अनुभव साझा करते हुए आसपास की महिलाओं को मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण देती हैं और उन्हें भी स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करती हैं। समूह के माध्यम से ऋण लेकर उन्होंने अपने उत्पादों के विक्रय के लिए एक दुकान भी बनवाई है, जहाँ भविष्य में मशरूम और अन्य उत्पाद बेचकर अपनी आय को और बढ़ाने की योजना है।

   रायुपर / शौर्यपथ / श्रीमती सगो तेता स्व-सहायता समूह और बिहान से जुड़कर न केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल की है, बल्कि अपने स्वाभिमान और आत्मविश्वास को भी नई पहचान दी है। आज कांकेर जिला के गांव ग्राम गढ़पिछवाड़ी की अन्य महिलाएं भी उनसे प्रेरणा लेकर आजीविका गतिविधियों से जुड़ रही हैं। श्रीमती तेता ने अपनी इस सफलता का श्रेय भारत सरकार की राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन योजना और छत्तीसगढ़ शासन की पहल बिहान को देते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इन योजनाओं ने ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने और ‘लखपति दीदी’ बनने का अवसर प्रदान किया है। बिहान योजना ने श्रीमती सगो तेता के जीवन में नवा बिहान ला दिया।

श्रीमती सगो तेता ‘लखपति दीदी’ के रूप में अपनी पृथक् पहचान बना चुकी
कुछ कर गुजरने का जुनून और उस इच्छाशक्ति को शासन की छोटी सी मदद मिल जाए, तो कामयाबी की बुलंदी को फर्श से अर्श तक पहुंचने में देर नहीं लगती। कांकेर जिले की महिलाएं शासन के सहयोग से प्रशिक्षण तथा सहायता प्राप्त कर अपने हुनर को अंजाम दे रही हैं। ऐसी ही एक मिसाल जिला मुख्यालय से लगभग 7 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम गढ़पिछवाड़ी की आदिवासी महिला श्रीमती सगो तेता आज ‘लखपति दीदी’ के रूप में अपनी पृथक् पहचान स्थापित कर चुकी हैं। उनकी कामयाबी यह साबित करती है कि मेहनत, लगन, आत्मविश्वास और उचित अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी खुद के दम पर अपने समूह, परिवार और समाज के लिए मिसाल कायम कर सकती हैं।

समूह ने बढाया आगे श्रीमती सगो को
एक समय था जब आर्थिक तंगी के कारण श्रीमती सगो को छोटी-छोटी जरूरतों को पूरी करने के लिए भी दूसरों का मुंह ताकना पड़ता था। आजीविका के एकमात्र साधन के रूप में खेती-बाड़ी तो थी, लेकिन सीमित संसाधनों और पारंपरिक तरीकों के कारण आय बहुत कम होती थी। वहीं बच्चों की पढ़ाई और घर के खर्चों की चिंता उन्हें अक्सर परेशान करती थी। इसी दौरान उन्हें राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ की जानकारी मिली। इससे प्रेरित होकर सगो बाई ने गांव की अन्य महिलाओं के साथ मिलकर गायत्री स्व-सहायता समूह बनाया, जिसमें 10 महिलाएं शामिल हैं।

खेतों में द्विफसली सिंचाई की मिली सुविधा
समूह से जुड़ने के बाद उन्हें बिहान के अंतर्गत 60 हजार रुपये की सामुदायिक निवेश राशि प्राप्त हुई, जिसने उनके जीवन को नई दिशा दे दी। श्रीमती सगो तेता बताती हैं कि पहले उनके खेत में मोटरपंप (बोरवेल) नहीं था, जिसके कारण खेती पूरी तरह बारिश पर निर्भर थी और साल में धान की केवल एक ही फसल ले पाती थीं। फिर उन्होंने स्व-सहायता समूह से ऋण लेकर अपने खेत में बोर करवाया, जिससे अब उन्हें सिंचाई की सुविधा मिल गई है। इसका सकारात्मक परिणाम यह रहा कि अब वे अपने खेतों में साल में दोनों फसलें (खरीफ और रबी) ले रही हैं, जिससे उनकी आय में काफी वृद्धि हुई है।

आजीविकामूलक गतिविधियों ने बनाई लखपति दीदी
इसके साथ ही सगो बाई ने कई आजीविकामूलक गतिविधियां भी शुरू कीं। उन्होंने मशरूम पालन, छेना (कंडा) निर्माण, गोबर से जैविक खाद तैयार करना, रुई से तकिये बनाना, सब्जी उत्पादन, ईंट निर्माण और कपड़ों के विक्रय जैसे कार्य प्रारंभ किए। उनकी सतत् मेहनत रंग लाई और आज वे इन अलग-अलग गतिविधियों से प्रतिमाह लगभग 18 से 20 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। इसी निरंतर आय और बचत के कारण पूरे क्षेत्र में वह आज ‘लखपति दीदी’ के रूप में पहचानी जा रही हैं।

जीवन में आया बड़ा बदलाव, महतारी वंदन योजना का भी मिल रहा लाभ
लखपति दीदी श्रीमती सगो तेता बताती हैं कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया है। इसी आय के सहारे उन्होंने अपने तीनों बच्चों की पढ़ाई करवाई, साथ ही अपने दो बच्चों की शादी भी करवा ली है। इसके बाद अब वे अपनी आजीविका से होने वाली आय से अपनी छोटी बेटी की शादी करने की तैयारी कर रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वह महतारी वंदन योजना का भी लाभ ले रही हैं, जिससे मिली रकम को वह बेटी के विवाह में किसी बड़े खर्च के लिए बचत कर रही हैं।

  
साभार - धनंजय राठौर, सयुक्त संचालक,
ताराशंकर सिन्हा, सहायक संचालक जनसंपर्क

बिहान मिशन ने बदली जिंदगी – किराना से कपड़ा व्यवसाय तक आत्मनिर्भरता की मिसाल

रायपुर / शौर्यपथ।
मेहनत, दृढ़ संकल्प और अटूट लगन से अभावों को अवसरों में बदलकर अपने विकास की कहानी लिखना संभव है। यह प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया है सरगुजा जिले के ग्राम पंचायत मेंड्राकला की रहने वाली श्रीमती हरमानिया देवी राजवाड़े ने, जो कभी आर्थिक तंगी के कारण बच्चों की स्कूल फीस भरने के लिए संघर्ष करती थीं। आज वही हरमानिया देवी एक सफल उद्यमी बनकर ‘लखपति दीदी’ के रूप में पहचान बना चुकी हैं और अपने बच्चों को बड़े शहरों में उच्च शिक्षा दिला रही हैं।

छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी योजना बिहान (छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन) ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आत्मविश्वास और स्वावलंबन का नया सवेरा लेकर आई है। इसी योजना से जुड़कर हरमानिया देवी ने अपने जीवन की दिशा ही बदल दी।


शून्य से लखपति दीदी बनने तक का सफर

हरमानिया देवी बताती हैं कि बिहान मिशन से जुड़ने से पहले उनकी आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी। परिवार का भरण-पोषण करना भी मुश्किल हो रहा था। लेकिन जब वे आकांक्षा स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं और समूह की अध्यक्ष बनीं, तो उनके जीवन में नई उम्मीद जगी।

समूह के माध्यम से उन्होंने पहला ऋण प्राप्त किया और अपने गांव में ही छोटी सी किराना और श्रृंगार दुकान की शुरुआत की।


मेहनत और ऋण से बढ़ता गया कारोबार

लगन और ईमानदारी से किए गए प्रयासों से उनका किराना व्यवसाय सफल हुआ। व्यवसाय में सफलता मिलने के बाद उन्होंने समय पर ऋण चुकता किया और फिर आगे बढ़ते हुए दूसरा ऋण लेकर कपड़ों का व्यवसाय भी शुरू किया।

आज उनका व्यापार लगातार बढ़ रहा है और वे गांव में एक सफल महिला उद्यमी के रूप में पहचानी जा रही हैं। हरमानिया देवी कहती हैं कि “बिहान ने हमें सिखाया कि छोटे-छोटे कदमों से भी बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है।”


बच्चों की शिक्षा बना सबसे बड़ा सपना

आर्थिक मजबूती का सबसे सकारात्मक असर उनके बच्चों के भविष्य पर पड़ा है। हरमानिया देवी गर्व से बताती हैं कि एक समय ऐसा था जब वे बच्चों को सामान्य शिक्षा दिलाने में भी असमर्थ थीं, लेकिन आज उनकी आमदनी इतनी बढ़ चुकी है कि उनके बच्चे बिलासपुर जैसे बड़े शहर में रहकर उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

वे अब बिना किसी कठिनाई के बच्चों की पढ़ाई और फीस की जिम्मेदारी निभा पा रही हैं।


शासन की योजनाओं के लिए जताया आभार

हरमानिया देवी ने अपनी सफलता का श्रेय केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं को देते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।

उनका मानना है कि बिहान योजना ने ग्रामीण महिलाओं को घर की चारदीवारी से बाहर निकलकर आत्मनिर्भर बनने और समाज में सम्मानजनक स्थान हासिल करने का अवसर दिया है।


आज छत्तीसगढ़ में हरमानिया देवी जैसी हजारों महिलाएं बिहान मिशन के माध्यम से न केवल आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रही हैं। उनकी यह सफलता अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बनकर उभर रही है।

बिहान मिशन ने बदली जिंदगी – सिलाई और फैंसी स्टोर से आत्मनिर्भर बनीं अमृता साहू

राजनांदगांव / शौर्यपथ।
“उम्मीदों के जुगनू झिलमिलाते हैं, मन में हौसला हो तो ख्वाब पूरे होते हैं।”
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर राजनांदगांव विकासखंड के ग्राम खुटेरी की लखपति दीदी श्रीमती अमृता साहू की कहानी महिलाओं के आत्मविश्वास, मेहनत और आत्मनिर्भरता की मिसाल बनकर सामने आई है। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने दृढ़ संकल्प और मेहनत के बल पर न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बदली, बल्कि गांव में अपनी एक अलग पहचान भी स्थापित की।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़कर अमृता साहू को आत्मनिर्भर बनने की नई दिशा मिली। वे जय मां शारदा स्व सहायता समूह की सदस्य बनीं और नियमित बचत की शुरुआत की। समूह, ग्राम संगठन और क्लस्टर संगठन के माध्यम से बैंक से ऋण प्राप्त कर उन्होंने सिलाई मशीन खरीदी और फैंसी स्टोर की शुरुआत की।

सिलाई और फैंसी स्टोर बना आत्मनिर्भरता का आधार

अमृता साहू ने बताया कि सिलाई का प्रशिक्षण मिलने के बाद उन्हें गांव और आसपास से कपड़ों की सिलाई के ऑर्डर मिलने लगे। साथ ही अपने फैंसी स्टोर में श्रृंगार सामग्री और अन्य उपयोगी वस्तुएं रखने से उनकी आय में लगातार वृद्धि हुई।

वर्तमान में उनकी मासिक आय लगभग 8 हजार रुपये और वार्षिक आय लगभग 1 लाख 20 हजार रुपये हो गई है। इस आय से वे अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिला रही हैं और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

मजदूरी से आत्मनिर्भरता तक का सफर

अमृता साहू बताती हैं कि स्व सहायता समूह से जुड़ने से पहले वे मजदूरी का कार्य करती थीं, जबकि उनके पति कृषि कार्य पर निर्भर थे। उस समय परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। लेकिन बिहान मिशन से जुड़ने के बाद उन्हें प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और योजनाओं की जानकारी मिली, जिसने उनके जीवन की दिशा बदल दी।

शासन की योजनाओं से मिला सहारा

अमृता साहू वर्तमान में शासन की कई योजनाओं से भी लाभान्वित हो रही हैं, जिनमें

  • राशन कार्ड

  • प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना

  • प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना

  • आयुष्मान कार्ड

  • महतारी वंदन योजना

शामिल हैं। इन योजनाओं ने उनके परिवार को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा प्रदान की है।

भविष्य के सपनों को दे रही नई उड़ान

अमृता साहू का सपना है कि वे अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाएं और अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाते हुए भविष्य में कपड़ों की दुकान का विस्तार करें।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से मिले सहयोग ने उनके जीवन में नई उम्मीद जगाई है। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर अमृता साहू की यह कहानी बताती है कि यदि अवसर, मार्गदर्शन और संकल्प साथ हो, तो गांव की महिलाएं भी आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख सकती हैं।

 कड़ी मेहनत और लगन से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं : सीएम साय

रायपुर / शौर्यपथ / संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा में 35वीं रैंक प्राप्त करने वाली सुश्री वैभवी अग्रवाल ने आज मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में भेंट की। मुख्यमंत्री श्री साय ने सुश्री वैभवी को मिठाई खिलाकर उनकी इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ दीं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सुश्री वैभवी अग्रवाल ने अपनी प्रतिभा, कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में उत्कृष्ट सफलता प्राप्त कर न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वैभवी की यह सफलता प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की उपलब्धियाँ यह संदेश देती हैं कि कड़ी मेहनत और लगन से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। लक्ष्य के प्रति समर्पण,अनुशासन और निरंतर प्रयास से कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि सुश्री वैभवी अग्रवाल भविष्य में प्रशासनिक सेवा में अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करते हुए देश और समाज की सेवा में महत्वपूर्ण योगदान देंगी। उन्होंने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए आगामी दायित्वों के लिए शुभकामनाएँ दीं।

इस अवसर पर सुश्री वैभवी अग्रवाल के पिता श्री शीतल अग्रवाल और भाई श्री विनायक अग्रवाल उपस्थित थे।

कोटा-बून्दी एयरपोर्ट का हुआ शिलान्यास, प्रधानमंत्री ने हाड़ौती क्षेत्र को दी बधाई

    कोटा / एजेंसी / बहुप्रतीक्षित नए कोटा एयरपोर्ट का भूमि पूजन शनिवार को शंभुपुरा में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और केन्द्रीय मंत्री किंजारापु राममोहन नायडू ने किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी अपने वर्चुअल सम्बोधन में कोटा-बून्दी सहित हाड़ौतीवासियों को शुभकामनाएं दी।
श्री मोदी ने कहा कि पिछले दिनों वे अजमेर गए थे, जहां हजारों करोड़ रुपये के विकास प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और लोकार्पण किया गया। उसी कार्यक्रम में राजस्थान के लगभग 21 हजार युवाओं को नियुक्ति पत्र भी सौंपे गए थे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि अजमेर यात्रा के कुछ ही दिनों बाद उन्हें कोटा से जुड़े इस महत्वपूर्ण एयरपोर्ट प्रोजेक्ट को शुरू करने का अवसर मिला है। एक ही सप्ताह में राजस्थान के इन दो बड़े कार्यों की शुरुआत इस बात का संकेत है कि आज राजस्थान तेज गति से विकास की ओर बढ़ रहा इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर, किसानों और माताओं-बहनों के लिए योजनाएं, हर क्षेत्र में राजस्थान में तेजी से काम हो रहा है। आज का दिन कोटा, बूंदी, बारां एवं झालावाड़ सहित पूरे हाड़ौती क्षेत्र के लिए नई आशा और उपलब्धि का दिन है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि करीब 1500 करोड़ रुपये की लागत से बनने जा रहा यह एयरपोर्ट आने वाले समय में पूरे क्षेत्र के विकास को नई गति देगा। उन्होंने कहा कि नवंबर 2023 में जब वे कोटा आए थे, तब उन्होंने जनता से वादा किया था कि कोटा का एयरपोर्ट केवल सपना बनकर नहीं रहेगा, बल्कि उसे साकार किया जाएगा। आज वही क्षण आ गया है, जब कोटा एयरपोर्ट का निर्माण कार्य शुरू होने जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब तक कोटा के लोगों को फ्लाइट पकड़ने के लिए जयपुर एवं जोधपुर जाना पड़ता था। एयरपोर्ट शुरू होने के बाद यात्रा का समय कम होगा और व्यापार को भी गति मिलेगी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि कोटा ऊर्जा का भी एक महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां ऊर्जा के लगभग सभी स्रोतों से बिजली का उत्पादन होता है। हाड़ौती की धरती अपनी सांस्कृतिक और आर्थिक धरोहरों के लिए भी प्रसिद्ध है। कोटा की कचौरी, कोटा डोरिया साड़ी, सैंडस्टोन की चमक, यहां का धनिया और बूंदी के बासमती चावल की पहचान विदेशों तक है।
उन्होंने कहा कि कोटा की यह धरती आस्था का भी बड़ा केंद्र है। सदियों से देश-दुनिया के श्रद्धालु यहां श्री मथुराधीश जी पावन पीठ, श्री खड़े गणेश जी महाराज एवं श्री गोदावरी धाम के बालाजी जैसे पवित्र स्थलों के दर्शन के लिए आते रहे हैं। हवाई कनेक्टिविटी मिलने से इन सभी धार्मिक और पर्यटन स्थलों को भी नया लाभ मिलेगा। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि कोटा एयरपोर्ट बनने से हाड़ौती क्षेत्र में पर्यटन, व्यापार, उद्योग और शिक्षा के क्षेत्र में नई संभावनाएं खुलेंगी और यह क्षेत्र विकास की नई ऊंचाइयों को छुएगा।
इस संदर्भ में लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला की सराहना करते हुए श्री मोदी ने कहा कि वे जितने शानदार सांसद हैं, उतने ही बेहतरीन लोकसभा अध्यक्ष भी हैं। वे संविधान को पूरी तरह समर्पित हैं और संसदीय प्रणालियों के प्रति पूरी तरह निष्ठा रखते हैं। बिरला जी ऐसे स्पीकर महोदय हैं, जो सांसदों का सर्वाधिक सम्मान करने का स्वभाव रखते हैं। प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि कभी-कभी कुछ बड़े घरानों के अहंकारी, उत्पाती छात्र आ भी जाते हैं, तो भी वे सदन के मुखिया की तरह सबको संभालते हैं। वे किसी को भी अपमानित नहीं करते, सबके कड़वे बोल भी वो झेल लेते हैं।

कोटा विकास की नई इबारत लिखेगा: लोक सभा अध्यक्ष

लोकसभा स्पीकर एवं कोटा-बूंदी सांसद ओम बिरला ने अपने संबोधन में कहा कि कोटा की जनता का बहुप्रतीक्षित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का सपना साकार होने जा रहा है। कोटा एयरपोर्ट के निर्माण में कई बाधाएं आई लेकिन प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में आज हाड़ौती को बड़ी सौगात मिली है। उन्होनें कहा कि कोटा में इंडस्ट्रीज लाने के लिए मैं कई बार उद्यमियों से मिलता था लेकिन एयरपोर्ट नहीं होने से वे पीछे हट जाते हैं। वर्ष 2027 में एयरपोर्ट बनने के बाद कोटा विकास की नई इबारत लिखेगा। इडस्ट्रीज के आने के साथ ही आईटी सेक्टर भी कोटा में विकसित होगा, पर्यटन क्षेत्र में नए आयाम विकसित होंगे।

बड़ा औद्योगिक केन्द्र बनेगा कोटा - सीएम, राजस्थान

सीएम भजनलाल शर्मा ने कहा कि कोटा रेल व सड़क के साथ अब एयर से भी जुड़ने जा रहा है। यहां पानी प्रचुर मात्रा में है और आने वाले समय में कोटा शिक्षा के साथ-साथ उद्यम के क्षेत्र में भी अग्रणी रहने वाला है। कनेक्टिविटी बढ़ने से औद्योगिक क्षेत्र भी विकसित होगा। देश के कोने-कोने से लोग कोटा पहुंचेंगे। राजस्थान में सरकार के आने के साथ ही हमने रोड मैप बनाया था। प्रधानमंत्री मोदी के निर्देशन में सरकार लगातार काम कर रही है। राइजिंग राजस्थान के तहत 35 लाख करोड़ के एमओयू किए। जिसमें से 8 लाख करोड़ रूपए के एमओयू हमने धरातल पर उतार दिए। इससे 3 लाख युवाओं को रोजगार मिला है।

कोटा पूरे देश से कह रहा - पधारो सा

शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नागरिक उड्डयन मंत्री किंजारापु राममोहन नायडू ने कहा कि एयरपोर्ट के बाद कोटा की रेल व सड़क के साथ-साथ एयर कनेक्टिविटी भी पूरे देश से हो जाएगा। ऐसा लग रहा है कि मानो कोटा पूरे देश से कह रहा हो कि पधारो सा। प्रधानमंत्री श्री मोदी के विजन में देश में हर 45 दिन में एक नया एयरपोर्ट खुल रहा है। उन्होनें कहा कि करीब 440 हैक्टर क्षेत्रफल में 3 हजार 200 मीटर लंबे रनवे के साथ 1507 करोड़ रुपए की लागत से नए कोटा-बूंदी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का निर्माण किया जा रहा है। श्री नायडू ने कहा कि एयरपोर्ट के खुलने से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। कोटा में पर्यटन, शिक्षा सहित सभी सेक्टर्स में वृद्धि होगी।

*3143 मीटर पाइपलाइन और 341 नल कनेक्शन से हर घर पहुंच रहा स्वच्छ और सुरक्षित जल*

 

रायपुर ।  महासमुंद जिले के ग्राम पाली में कुछ समय पहले तक स्वच्छ पेयजल के लिए काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। गांव में पानी के लिए केवल कुछ हैंडपंप और पॉवर पंप ही उपलब्ध थे, जिन पर पूरा गांव निर्भर रहता था। गर्मी के मौसम में पानी की समस्या और भी गंभीर हो जाती थी। महिलाओं को दूर-दूर तक जाकर पानी लाना पड़ता था, जिसमें काफी समय और श्रम लगता था।

केंद्र सरकार और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन ने ग्रामीणों की इस समस्या का समाधान कर दिया है। मिशन के अंतर्गत पाली में 69 लाख 19 हजार रुपए की लागत से पानी टंकी का निर्माण कराया गया है। गांव में 3143 मीटर लंबी पाइपलाइन बिछाकर 341 घरों में नल कनेक्शन दिए गए हैं। गांव में पहले से उपलब्ध 9 हैंडपंप और 10 पावर पंप भी जल स्रोत के रूप में उपयोग किए जा रहे हैं। इस साल 21 जनवरी को पाली हर घर जल प्रमाणित गांव भी बन गया है। 

जल जीवन मिशन से अब हर घर के आंगन में पानी पहुंचने से पाली की महिलाएं बेहद खुश हैं। यहां रहने वाली श्रीमती खिलेश्वरी बताती हैं कि पहले उसे रोजाना पानी लाने काफी दूर जाना पड़ता था। कई बार पानी के लिए लंबा इंतजार भी करना पड़ता था। अब घर में ही नल के माध्यम से स्वच्छ पानी उपलब्ध हो रहा है, जिससे उनकी मेहनत और समय दोनों बच रहे हैं। अब वह अपने परिवार और अन्य कामों पर ज्यादा ध्यान दे पा रही हैं।

निर्माण के दौरान ही फील्ड में जाकर निरीक्षण के निर्देश • टेंडर से अवॉर्ड तक तय होगी समय-सीमा • आधुनिक डिजाइन से बनेंगे शासकीय भवन

रायपुर ।

प्रदेश में सड़क निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सड़क निर्माण में किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि निर्माण कार्य में लापरवाही या गुणवत्ताहीन कार्य पाया गया तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई के साथ ही दोषी ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने यह निर्देश मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित लोक निर्माण विभाग (PWD) की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में दिए। बैठक में उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री श्री अरुण साव भी उपस्थित थे।

निर्माण के दौरान ही हो गुणवत्ता की निगरानी

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि सड़क बनने के बाद निरीक्षण करने के बजाय निर्माण के दौरान ही नियमित रूप से फील्ड में जाकर गुणवत्ता की निगरानी की जाए। उन्होंने कहा कि सड़कें केवल तकनीकी परियोजना नहीं बल्कि आम जनता की सुविधा और सरकार की विश्वसनीयता से जुड़ा महत्वपूर्ण अधोसंरचनात्मक कार्य हैं। यदि सड़क कुछ वर्षों में ही खराब हो जाए तो इससे सरकार की छवि प्रभावित होती है।

बागबहार–कोतबा सड़क की स्थिति पर जताई नाराजगी

समीक्षा के दौरान बागबहार–कोतबा सड़क की खराब स्थिति पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कुछ वर्ष पहले बनी सड़क का जल्दी खराब होना गंभीर विषय है। उन्होंने इस मामले की गहन जांच कराने और भविष्य में ऐसी स्थिति न बने इसके लिए सख्त निगरानी व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए।

टेंडर प्रक्रिया में तय होगी समय-सीमा

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि टेंडर जारी होने से लेकर कार्य आवंटन (अवॉर्ड) तक की पूरी प्रक्रिया के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय की जाए। उन्होंने कहा कि कई बार ठेकेदार बहुत कम दर (बिलो रेट) पर टेंडर प्राप्त कर लेते हैं, जिससे कार्य समय पर और गुणवत्ता के साथ पूरा नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति में संबंधित ठेकेदार की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

नियमावली और तकनीकी इकाई बनाने पर जोर

मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट नियमावली तैयार करने और अन्य राज्यों की बेहतर व्यवस्थाओं का अध्ययन कर उन्हें छत्तीसगढ़ में लागू करने के निर्देश दिए। साथ ही टेंडर और डीपीआर जैसे तकनीकी कार्यों के लिए अलग इकाई बनाने पर भी विचार करने को कहा।

300 गांवों को सड़क से जोड़ने को प्राथमिकता

बैठक में बताया गया कि प्रदेश में लगभग 300 ऐसे गांव चिन्हित किए गए हैं जहां बरसात में संपर्क पूरी तरह टूट जाता है। मुख्यमंत्री ने इन गांवों को सड़क और पुल-पुलियों के माध्यम से जोड़ने का कार्य प्राथमिकता से करने के निर्देश दिए।

महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं की समीक्षा

समीक्षा बैठक में कई प्रमुख सड़क परियोजनाओं की प्रगति पर भी चर्चा की गई, जिनमें

मनेंद्रगढ़–सूरजपुर–अंबिकापुर–पत्थलगांव–कुनकुरी–जशपुर–झारखंड सीमा राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-43 (लगभग 353 किमी)

अंबिकापुर–सेमरसोत–रामानुजगंज–गढ़वा मार्ग

गीदम–दंतेवाड़ा मार्ग

चांपा–सक्ती–रायगढ़–ओडिशा सीमा मार्ग

रायपुर–दुर्ग मार्ग

चिल्फी क्षेत्र की सड़कें

सहित कई अन्य परियोजनाओं की स्थिति की समीक्षा की गई। इसके अलावा बस्तर क्षेत्र में पुल-पुलिया निर्माण और 17 सड़कों के निर्माण एवं उन्नयन पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

लैलूंगा–कुंजारा–तोलगेपहाड़ मार्ग पर विशेष जोर

मुख्यमंत्री ने लैलूंगा–कुंजारा–तोलगेपहाड़–मिलूपारा–तमनार मार्ग के निर्माण को भी अत्यंत आवश्यक बताते हुए कहा कि क्षेत्र की बड़ी आबादी इससे लाभान्वित होगी। उन्होंने निर्देश दिए कि जहां वन स्वीकृति की आवश्यकता नहीं है वहां निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ किया जाए।

आधुनिक तकनीक से बनेंगे शासकीय भवन

मुख्यमंत्री ने भवन निर्माण कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि प्रदेश में शासकीय भवनों के डिजाइन पुराने और एक जैसे दिखाई देते हैं। अब आधुनिक डिजाइन और तकनीक के आधार पर शासकीय भवनों का निर्माण किया जाना चाहिए। भूमि के बेहतर उपयोग के लिए हॉरिजॉन्टल की बजाय वर्टिकल संरचना को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। साथ ही राजभवन में बन रहे गेस्ट हाउस को आधुनिक और गरिमामय स्वरूप में तैयार करने के निर्देश दिए गए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़कें आमजन के जीवन से सीधे जुड़ी होती हैं और सरकार की छवि भी काफी हद तक सड़कों की गुणवत्ता से बनती है। इसलिए लोक निर्माण विभाग की जिम्मेदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है और सभी कार्य समयबद्धता व गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाने चाहिए।

बैठक में मुख्य सचिव श्री विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव श्री मुकेश बंसल, सचिव श्री राहुल भगत तथा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने तैयारियों की समीक्षा कर दिए निर्देश — 30 राज्यों के 2500 खिलाड़ी होंगे शामिल, जनजातीय युवाओं को मिलेगा राष्ट्रीय मंच

रायपुर, 6 मार्च 2026।

छत्तीसगढ़ में जनजातीय अंचलों की खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए राज्य में ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स छत्तीसगढ़–2026’ का आयोजन 25 मार्च से 6 अप्रैल 2026 तक किया जाएगा। यह प्रतिष्ठित प्रतियोगिता रायपुर, सरगुजा और बस्तर के विभिन्न खेल मैदानों में आयोजित होगी, जिसमें देशभर के जनजातीय खिलाड़ियों की प्रतिभा का प्रदर्शन देखने को मिलेगा।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने शुक्रवार को मंत्रालय महानदी भवन में खेल एवं युवा कल्याण विभाग की समीक्षा बैठक लेकर इस महत्वपूर्ण आयोजन की तैयारियों का विस्तृत जायजा लिया और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि युवा ही देश और प्रदेश का भविष्य हैं और राज्य सरकार शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास के साथ-साथ खेलों को भी बढ़ावा देने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 वनांचल के खिलाड़ियों की प्रतिभाओं को पहचान देने के साथ उन्हें राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का सशक्त मंच साबित होगा।

तीन संभागों में होंगे प्रमुख मुकाबले

इस ऐतिहासिक प्रतियोगिता में 7 प्रतिस्पर्धात्मक और 2 प्रदर्शनात्मक खेल आयोजित किए जाएंगे।

रायपुर: तीरंदाजी, फुटबॉल, हॉकी, वेटलिफ्टिंग, स्वीमिंग और कबड्डी (डेमो)

सरगुजा: कुश्ती एवं मलखम्ब (डेमो)

बस्तर: एथलेटिक्स प्रतियोगिताएं

प्रतियोगिता में देश के लगभग 30 राज्यों से करीब 2500 खिलाड़ी और अधिकारी हिस्सा लेंगे, जिससे प्रदेश में खेलों का माहौल और भी उत्साहपूर्ण होगा।

खेल अधोसंरचना और योजनाओं की भी हुई समीक्षा

बैठक में मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ क्रीड़ा प्रोत्साहन योजना, खेल अधोसंरचना के निर्माण, खेलो इंडिया की केंद्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन, खेल अकादमियों की गतिविधियों, खेल अलंकरण और युवा महोत्सव सहित विभाग की आगामी कार्ययोजना की भी समीक्षा की।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि स्वीकृत खेल परियोजनाओं का निर्माण निर्धारित समय-सीमा में और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए।

उत्कृष्ट खिलाड़ियों को मिलेगा प्रोत्साहन

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी।

इसके साथ ही मलखम्ब खिलाड़ियों को एक लाख रुपये की विशेष प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।

उन्होंने यह भी घोषणा की कि अमेरिका गॉट टैलेंट में चयनित मलखम्ब खिलाड़ी अनतई पोटाई के अमेरिका आने-जाने का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी।

बस्तर ओलंपिक बना बदलाव का प्रतीक

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर ओलंपिक में एक लाख 65 हजार से अधिक युवाओं की सहभागिता इस बात का प्रमाण है कि छत्तीसगढ़ नक्सलवाद से निकलकर शांति, विकास और सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि जनजातीय अंचलों में खेल प्रतिभाओं की अपार संभावनाएं हैं और सरकार इन प्रतिभाओं को आगे लाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।

राष्ट्रीय पहचान को मिलेगी मजबूती

बैठक में उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि आने वाले समय में बस्तर और सरगुजा अंचल में भी ओलंपिक स्तर के खेल आयोजनों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक मजबूत होगी।

समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव श्री विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, सचिव श्री राहुल भगत, लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव श्री यशवंत कुमार और संचालक श्रीमती तनूजा सलाम सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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