January 26, 2026
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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

दुर्ग। शौर्यपथ विशेष रिपोर्ट । पूर्व महापौर पर नियम विरुद्ध आवंटन और अनियमितताओं के आरोप लगाने वाली वर्तमान महापौर श्रीमती अलका बाघमार के सामने अब वही मामला निर्णायक मोड़ पर…

 

राजनांदगांव /शौर्यपथ / कोरोना महामारी की पृष्ठभूमि पर आधारित प्रख्यात साहित्यकार एवं केंद्रीय विद्यालय खैरागढ़ के हिंदी शिक्षक डॉ. योगेंद्र पांडेय के नवीनतम उपन्यास ‘यशस्विनी’ का विमोचन डॉ. प्रकाश खूंटे द्वारा किया गया। यह विमोचन हिंदी साहित्य जगत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

डॉ. योगेंद्र पांडेय निरंतर साहित्य-सृजन में सक्रिय हैं। उनके अनेक उपन्यास, कहानियाँ एवं साहित्यिक रचनाएँ विभिन्न दैनिक समाचार पत्रों तथा प्रतिष्ठित साहित्यिक प्रकाशनों में प्रकाशित हो चुकी हैं। उनकी लेखनी में सामाजिक यथार्थ, मानवीय संवेदना और समकालीन विषयों की प्रभावशाली अभिव्यक्ति देखने को मिलती है। नवीनतम उपन्यास ‘यशस्विनी’ कोरोना काल के कठिन समय में समाज, परिवार और व्यक्ति के संघर्ष, पीड़ा, धैर्य और आशा को संवेदनशील भाषा में प्रस्तुत करता है। यह कृति महामारी के दौर को साहित्य के माध्यम से सहेजने का एक सार्थक प्रयास है। उपन्यास का विमोचन करते हुए डॉ. प्रकाश खूंटे ने इसे समकालीन हिंदी साहित्य की एक महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए आशा व्यक्त की कि यह उपन्यास पाठकों के बीच विशेष स्थान बनाएगा और समाज को आत्ममंथन की दिशा में प्रेरित करेगा।

छत्तीसगढ़ के साहित्यकारों के लिए यह गर्व का विषय है कि वे अपनी भाषा और संस्कृति को शिखा की तरह प्रज्वलित रखते हुए हिंदी साहित्य को नई ऊर्जा, नई दिशा और नई पहचान प्रदान कर रहे हैं। इससे न केवल राज्य की साहित्यिक पहचान सशक्त होती है, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा मिलती है। उपन्यास ‘यशस्विनी’ के प्रकाशन पर डॉ. योगेंद्र पांडेय को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी गईं तथा उनके उज्ज्वल साहित्यिक भविष्य की कामना की गई।

चंद्रमा मकर राशि में, कर्म–अनुशासन से तय होगी सफलता 20 जनवरी 2026, मंगलवार। आज माघ गुप्त नवरात्रि का दूसरा दिन है। चंद्रमा अपनी स्वराशि मकर…

आजीविका डबरियों से मछली पालन, सिंचाई सुविधा, दलहन-तिलहन की खेती तथा उद्यानिकी गतिविधियों को मिलेगा बढ़ावा

रायपुर / आदिवासी बहुल एवं कृषि आधारित आजीविका वाले जिले मोहला मानपुर अम्बागढ़ चौकी की ग्राम पंचायत करमरी में सोमवार को वीबी जी राम जी (विकसित भारत गारंटी फ़ॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन- ग्रामीण) के अंतर्गत जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम ग्रामीणों द्वारा मानव श्रृंखला बनाकर 'आत्मनिर्भर गांव - विकसित भारत' का संदेश दिया गया। इस दौरान योजना के प्रति उत्साह और सामुदायिक सहभागिता स्पष्ट रूप से देखने को मिली।
कार्यक्रम के अंतर्गत कन्वर्जेंस आधारित आजीविका डबरी जैसे कृषि, मछली तालाब निर्माण कार्यों का अवलोकन किया गया। ये कार्य कृषि विभाग, उद्यानिकी विभाग, सीआरईडीए एवं वन विभाग के आपसी समन्वय से तैयार कार्ययोजना के अनुसार संचालित किए जा रहे हैं। इन आजीविका डबरियों से मछली पालन, सिंचाई सुविधा, दलहन-तिलहन की खेती तथा उद्यानिकी गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इससे आदिवासी एवं सीमांत किसानों को स्थायी आजीविका, खाद्य सुरक्षा और अतिरिक्त आय के अवसर उपलब्ध होंगे।
इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती नम्रता सिंह ने ग्रामीणों को वीबी-जीराम जी योजना के उद्देश्यों, स्थानीय रोजगार सृजन और कन्वर्जेंस मॉडल की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ग्राम स्तर पर सक्रिय सहभागिता, पारदर्शिता और सामुदायिक स्वामित्व के बिना किसी भी योजना की सफलता संभव नहीं है, वीबी-जी राम जी इन मूल सिद्धांतों पर आधारित है।
कार्यक्रम के दौरान हितग्राही श्री विनोद कुमार एवं श्री दलपत साई मेहरू राम को मछली जाल का वितरण किया गया। इससे मछली पालन गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा और ग्रामीणों में स्वरोजगार के प्रति उत्साह बढ़ेगा। हितग्राहियों ने बताया कि योजना से प्राप्त सहयोग के माध्यम से वे मछली पालन के साथ-साथ दलहन-तिलहन की खेती भी करेंगे, जिससे उनकी आय में निरंतर वृद्धि होगी और परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ बनेगी।ग्रामीणों ने वीबी-जीराम जी योजना को आदिवासी बहुल, कृषि-आधारित जिले के लिए सर्वांगीण विकास और
आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। गांव आत्मनिर्भर होंगे, तभी भारत विकसित बनेगा के संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।
कार्यक्रम में जिल पंचायत सीईओ श्रीमती भारती चंद्राकर,जनप्रतिनिधि श्री दिलीप वर्मा, पंचायत प्रतिनिधिगण, विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने सोशल मीडिया एक्स पर की प्रशंसा
करमरी के इस कार्यक्रम की प्रशंसा केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर पोस्ट द्वारा करते हुए कार्यक्रम के फोटोग्राफ्स और वीडियो को भी शेयर किया गया है।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में उत्कृष्ट क्रियान्वयन पर मिला राष्ट्रीय सम्मान

रायपुर ।
छत्तीसगढ़ ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी सशक्त पहचान स्थापित करते हुए कृषि क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना तथा पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना के उत्कृष्ट और प्रभावी क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य घोषित किया गया है। इस उपलब्धि के लिए उद्यानिकी एवं कृषि विभाग को संयुक्त रूप से प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

यह प्रतिष्ठित सम्मान बेंगलुरु (कर्नाटक) में 18-19 जनवरी 2026 को आयोजित 13वें नेशनल रिव्यू कांफ्रेंस के दौरान प्रदान किया गया। सम्मेलन में देशभर के राज्यों द्वारा फसल बीमा योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की गई, जिसमें छत्तीसगढ़ का प्रदर्शन सर्वश्रेष्ठ पाया गया।

राज्य सरकार की इस उल्लेखनीय सफलता पर मुख्यमंत्री एवं कृषि मंत्री ने उद्यानिकी एवं कृषि विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को हार्दिक बधाई देते हुए इसे राज्य के किसानों के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार छत्तीसगढ़ सरकार की किसान हितैषी नीतियों, पारदर्शी प्रशासन और जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन का प्रमाण है।

सम्मेलन में छत्तीसगढ़ की ओर से उद्यानिकी विभाग के प्रभारी संयुक्त संचालक श्री नीरज शाहा ने यह पुरस्कार ग्रहण किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के मार्गदर्शन और विभागीय टीम के सामूहिक प्रयासों से यह सफलता संभव हो सकी है।

यह राष्ट्रीय सम्मान न केवल राज्य सरकार की कृषि नीतियों की सफलता को दर्शाता है, बल्कि यह भी सिद्ध करता है कि छत्तीसगढ़ किसानों की सुरक्षा, जोखिम प्रबंधन और आय स्थिरता के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो चुका है।

रायपुर, /
बस्तर में इमली की चटनी को काफी पसंद किया जाता है l यह चटनी खाने में बहुत स्वादिष्ठ होती है l सुकमा जिले में स्थानीय संसाधनों के उपयोग और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वन विभाग ने एक महत्वपूर्ण पहल की है।

वन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में बस्तर की प्रसिद्ध इमली से तैयार “इमली चटनी” को वन धन विकास केंद्र सुकमा के माध्यम से आधिकारिक रूप से लॉन्च किया जा रहा है। यह उत्पाद स्थानीय वनोपज का मूल्य संवर्धन करने के साथ-साथ बस्तर की पारंपरिक पहचान को राष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने का प्रयास है।

छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा किए गए अनुसंधान और गुणवत्ता मानकों के आधार पर यह चटनी तैयार की जा रही है। वन धन विकास केंद्र से जुड़ी नवा बिहान महिला स्व सहायता समूह की महिलाएँ इस चटनी के उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। महिलाओं को निर्माण प्रक्रिया, स्वच्छता मानक, वैज्ञानिक विधि तथा आधुनिक पैकेजिंग संबंधी विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया है।

प्रशिक्षण के परिणामस्वरूप उत्पाद की गुणवत्ता में सुधार हुआ है और समूह की महिलाओं में आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। बस्तर संभाग में इमली की अधिकता को देखते हुए यह पहल स्थानीय संसाधनों के प्रभावी उपयोग का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है।
इमली चटनी के उत्पादन से वनोपज संग्राहकों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सकेगा, जिससे बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ मिलेगा। वन विभाग की यह पहल महिला सशक्तिकरण, रोजगार सृजन और आजीविका संवर्धन की दिशा में एक सराहनीय कदम है।

आने वाले समय में यह उत्पाद न केवल छत्तीसगढ़ के घरों का स्वाद बढ़ाएगा, बल्कि सुकमा की महिलाओं की मेहनत और सफलता को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

  दुर्ग, / महिला एवं बाल विकास विभाग के तत्वावधान में महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम-2013 एवं शी-बॉक्स पोर्टल के संबंध में प्रशिक्षण सह कार्यशाला एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन 19 जनवरी 2026 को शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर महाविद्यालय दुर्ग एवं छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय में किया गया।
कार्यशाला में प्रतिभागियों को प्रत्येक कार्यालय में आंतरिक शिकायत समिति एवं जिला स्तर पर स्थानीय शिकायत समिति के गठन की अनिवार्यता की जानकारी दी गई। बताया गया कि किसी भी महिला के साथ कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न की स्थिति में वह संबंधित कार्यालय की आंतरिक शिकायत समिति के समक्ष या शी-बॉक्स पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकती है। साथ ही समिति के अध्यक्ष एवं सदस्यों को अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार शिकायत प्राप्त होने पर की जाने वाली कार्रवाई की प्रक्रिया भी समझाई गई।
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि 10 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले सभी शासकीय एवं निजी संस्थानों में आंतरिक शिकायत समिति का गठन अनिवार्य है। समिति का गठन नहीं करने पर 50,000 रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। साथ ही सभी कार्यालयों को अपनी आंतरिक शिकायत समिति को शी-बॉक्स पोर्टल पर ऑनबोर्ड करने के निर्देश दिए गए।
इसके अतिरिक्त महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, बाल विवाह प्रतिषेध, सखी वन स्टॉप सेंटर एवं महिला सशक्तिकरण केंद्र की योजनाओं की भी जानकारी दी गई। कार्यशाला में महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय के अधिकारी-कर्मचारी, आंतरिक शिकायत समिति के अध्यक्ष एवं सदस्य तथा छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

  दुर्ग, / भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भिलाई के लिबरल आर्ट्स विभाग ने 15-16 जनवरी 2026 को नालंदा लेक्चर हॉल, आईआईटी भिलाई में "जेंडर मोडालिटीस ऑफ़ रेमेम्बेरिंग इन साउथ एशिएन लिटरेचर" शीर्षक पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया। यह भारत के विश्वविद्यालयों के संकाय सदस्यों और शोध विद्वानों को दक्षिण एशियाई सांस्कृतिक और साहित्यिक संदर्भों में लिंग और सन्निहित अभ्यास के रूप में स्मृति की खोज पर अपने शोध को साझा करने के लिए एक साथ लाया।
सम्मेलन की शुरुआत जामिया मिलिया इस्लामिया की प्रोफेसर सिमी मल्होत्रा के एक मुख्य व्याख्यान के साथ हुई, जिसका शीर्षक था "भारत में महिला आंदोलनों की दो शताब्दियों को याद करना: स्मृति और नारीवादी इतिहासलेखन की पुनर्विचार"। व्याख्यान में स्मृति के लेंस के माध्यम से नारीवादी इतिहासलेखन की जांच की गई, दो शताब्दियों में महिलाओं के आंदोलनों की खोज की गई और दक्षिण एशिया में लैंगिक इतिहास को सुनाने में एक महत्वपूर्ण अभ्यास के रूप में याद किया गया। सम्मेलन के दूसरे दिन की शुरुआत सेंट मीरा कॉलेज फॉर गर्ल्स, पुणे के वाइस प्रिंसिपल डॉ. स्नोबर सतारावाला के मुख्य भाषण के साथ हुई, जिसका शीर्षक था "रिमेम्बरिंग द मार्जिन: जेंडर, माइनॉरिटी मेमोरी, एंड द पॉलिटिक्स ऑफ रिप्रेजेंटेशन इन साउथ एशियन लिटरेचर"। उन्होंने यह पता लगाने के लिए व्यापक सिनेमाई, पाठ्य और मौखिक आख्यानों को आकर्षित किया कि अल्पसंख्यक समुदायों को कैसे याद किया जाता है या मिटाया जाता है, हाशिए के इतिहास और याद रखने के विभिन्न तरीकों को पुनर्प्राप्त करने में साहित्य की भूमिका को रेखांकित करता है।
पूरे सम्मेलन में पांच विषयगत पैनलों में अकादमिक चर्चा हुई। उद्घाटन पैनल ने लैंगिक आवाज और स्वदेशी सौंदर्यशास्त्र पर ध्यान केंद्रित किया, लोक और आदिवासी कला प्रथाओं को स्मृति के सन्निहित और जीवित अभिलेखागार के रूप में जांचा। इसके बाद हिंसा के लैंगिक प्रति-आख्यानों पर एक पैनल का आयोजन किया गया, जिसने जांच की कि साहित्यिक और सांस्कृतिक ग्रंथ आधिकारिक इतिहासलेखन से परे जाने वाले तरीकों से अस्तित्व, प्रतिरोध और भावात्मक स्मृति को कैसे व्यक्त करते हैं। बाद की चर्चाएं भेद्यता, जाति और पहचान के सवालों पर केंद्रित हो गईं, तीसरे पैनल ने साहित्यिक साक्ष्यों और कथात्मक स्मृति में जाति और लिंग के प्रतिच्छेदन पर प्रकाश डाला। चौथे पैनल ने रिश्तेदारी, घरेलूता और राष्ट्रीय स्मृति को ध्यान में लाया, मातृ विरासत, रोजमर्रा के स्थानों और कर्तव्य की लैंगिक धारणाओं का विश्लेषण किया। सम्मेलन स्मृति की डायजेटिक और स्थानीय भाषा की अभिव्यक्तियों पर एक पैनल के साथ संपन्न हुआ, जिसने वैकल्पिक निमोनिक रिपॉजिटरी की खोज की जो याद रखने के प्रमुख, पाठ-केंद्रित रूपों को चुनौती देते हैं।
सामूहिक रूप से, इन पैनलों ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे लैंगिक स्मृति अवतार, प्रभाव, सामाजिक-सांस्कृतिक पदानुक्रम और कथा रूप जैसे कारकों द्वारा आकार दिए गए एक सक्रिय अभ्यास के रूप में कार्य करती है। सम्मेलन में हाशिए पर रहने वाली आवाज़ों को बढ़ाने और दक्षिण एशिया में स्मरण के प्रमुख तरीकों को चुनौती देने वाले प्रति-आख्यान बनाने में साहित्य और सांस्कृतिक ग्रंथों की भूमिका पर प्रकाश डाला गया।

मृतकों के परिजनों को 5 लाख एवं घायलों को 50 हजार की सहायता

रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बलरामपुर के समीप हुई बस दुर्घटना पर गहरा दु:ख व्यक्त किया है। उन्होंने इस हृदयविदारक हादसे में अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों के प्रति गहरी संवेदनाएँ व्यक्त करते हुए कहा कि शोक की इस घड़ी में छत्तीसगढ़ शासन पीडि़त परिवारों के साथ पूरी मजबूती से खड़ा है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा इस दुर्घटना में मृत 10 व्यक्तियों के परिजनों को ?5 लाख तथा घायल व्यक्तियों को ?50 हजार की आर्थिक सहायता प्रदान करने का निर्णय लिया गया है। यह सहायता राशि प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई जा रही तत्काल राहत एवं बीमा आदि से मिलने वाली राशि के अतिरिक्त होगी।
मुख्यमंत्री साय ने प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि दुर्घटना में घायल सभी व्यक्तियों के उपचार में किसी भी प्रकार की कमी न हो तथा उन्हें बेहतर से बेहतर चिकित्सकीय सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँ। साथ ही सड़क सुरक्षा के प्रति अतिरिक्त सतर्कता बरतते हुए भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए हरसंभव और प्रभावी उपाय सुनिश्चित किए जाएँ।
मुख्यमंत्री साय ने दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की है।

गाँव-गाँव जाकर अधिकारियों ने सुनी समस्याएँ, मौके पर हुआ समाधान

    रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अंत्योदय और सुशासन की सोच को साकार करने के लिए सुकमा जिले में 'मिशन कनेक्टÓ की शुरुआत की गई है। संभागायुक्त बस्तर श्री डोमन सिंह के निर्देशन और कलेक्टर के मार्गदर्शन में शुरू हुए इस अभियान का उद्देश्य प्रशासन और जनता के बीच की दूरी को खत्म कर सरकारी सेवाओं को लोगों के घर-घर तक पहुँचाना है।

गाँव-गाँव पहुँचे अधिकारी, मौके पर हुआ समाधान
विगत दिनों मिशन कनेक्ट के तहत छिंदगढ़ विकासखंड की लगभग 60 पंचायतों में जिला स्तरीय अधिकारी पहुँचे। यह केवल निरीक्षण नहीं था, बल्कि ग्रामीणों की समस्याओं को समझकर मौके पर उनका समाधान करने की एक नई पहल थी। सुबह 10 बजे से ही अधिकारी स्कूलों, आंगनबाडिय़ों, आश्रम-छात्रावासों, ग्राम पंचायतों और स्वास्थ्य केंद्रों में सक्रिय दिखाई दिए।

गुणवत्ता और पारदर्शिता पर विशेष ध्यान
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने मध्यान्ह भोजन और पूरक पोषण आहार की गुणवत्ता की स्वयं जांच की। स्वास्थ्य केंद्रों में दवाइयों की उपलब्धता, स्वच्छता और अन्य व्यवस्थाओं की गंभीरता से जाँच की गई। ग्राम पंचायतों में चल रहे निर्माण कार्यों की प्रगति और गुणवत्ता की भी समीक्षा की गई, ताकि सरकारी राशि का सही उपयोग सुनिश्चित हो सके।
अधिकारियों ने ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी समस्याएँ और सुझाव सुने, जिससे शासन और जनता के बीच विश्वास और मजबूत हुआ।

कलेक्टर और सीईओ ने की विस्तृत समीक्षा
निरीक्षण के बाद जनपद पंचायत छिंदगढ़ में उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। कलेक्टर अमित कुमार और जिला पंचायत सीईओ ने सभी पंचायतों की रिपोर्ट का गहन विश्लेषण किया। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि जिला स्तर की समस्याओं का समाधान तुरंत किया जाए, जबकि राज्य स्तर के विषयों को संबंधित विभागों को तत्काल भेजा जाए।
कलेक्टर अमित कुमार ने बताया कि मिशन कनेक्ट का उद्देश्य केवल निरीक्षण करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि शासन की सभी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे। प्रशासन को अधिक पारदर्शी और जिम्मेदार बनाना हमारी प्राथमिकता है।
सुशासन की ओर मजबूत कदम 'मिशन कनेक्टÓ ने यह संदेश स्पष्ट कर दिया है कि अब योजनाएँ सिर्फ कागजों पर नहीं रहेंगी, बल्कि वास्तव में ग्रामीणों के जीवन में बदलाव लाएँगी। अधिकारियों की सक्रियता से क्षेत्र में लोगों में उत्साह और भरोसा बढ़ा है।

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