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March 12, 2026
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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

दुर्ग। शौर्यपथ। 

शहर को सुंदर, स्वच्छ और अतिक्रमण-मुक्त बनाने को लेकर दुर्ग नगर निगम और शहरी सरकार की मुखिया महापौर श्रीमती अलका बाघमार द्वारा जारी की जा रही प्रेस विज्ञप्तियाँ देखने-पढ़ने में जितनी प्रशंसनीय लगती हैं, जमीनी हकीकत उससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है। नगर निगम के अतिक्रमण विभाग द्वारा की जा रही कार्रवाई ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या दुर्ग में कानून सभी के लिए समान है या फिर यह अमीर-गरीब देखकर लागू किया जा रहा है?

शहरी सरकार के निर्देश पर हाल ही में गरीब पसरा व्यापारियों और फुटपाथ पर रोजी-रोटी कमाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की गई। उनका सामान जब्त कर लिया गया, वर्षों से चला आ रहा छोटा-सा व्यवसाय छीन लिया गया। दो वक्त की रोटी कमाने वाले इन लोगों को “अतिक्रमण-मुक्त शहर” के नाम पर बेरोजगार कर दिया गया।

परंतु इसी शहर के इंदिरा मार्केट स्थित गणेश मंदिर के सामने एक बिल्कुल अलग तस्वीर देखने को मिलती है। यहां सड़क की जमीन पर बड़े पैमाने पर ‘राम रसोई’ का संचालन खुलेआम किया जा रहा है। जनहित का नाम लिया जा रहा है, लेकिन वास्तविकता यह है कि यहां एक होटलनुमा व्यावसायिक संचालन हो रहा है, जहां बाकायदा ₹20 प्रति थाली की तय कीमत रखी गई है।

जनहित के कार्यों पर किसी को आपत्ति नहीं, बल्कि यह सराहनीय है कि शहर के बड़े व्यापारी समाजसेवा में आगे आए हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या जनहित के नाम पर सड़क की जमीन पर कब्जा जायज हो जाता है?

अगर यही नियम है, तो शहर में दर्जनों संस्थाएं हैं जो जनसेवा करती हैं—क्या सभी को सड़कों पर कब्जा करने की छूट दी जाएगी?

संविधान की नजर में अमीर और गरीब एक समान हैं, फिर दुर्ग में यह भेदभाव क्यों?

क्या नगर निगम की कार्रवाई सिर्फ गरीबों के लिए है और प्रभावशाली लोगों के लिए नियम बदल जाते हैं?

इतना ही नहीं, निगम कर्मचारियों से मिली जानकारी के अनुसार महापौर अलका बाघमार ने नगर निगम के व्यावसायिक परिसरों के बरामदों में व्यापार करने की अनुमति भी दे दी है। बड़ा सवाल यह है कि—

➡️ क्या किसी महापौर को यह संवैधानिक अधिकार है कि वह आम जनता के लिए बने बरामदों को दुकानों में तब्दील करने की अनुमति दे?

➡️ क्या दुर्ग नगर निगम क्षेत्र में संविधान चलेगा या महापौर का निजी आदेश?

दुर्ग। शौर्यपथ। भारतीय जनता पार्टी पर “दागदार नेताओं को सर्फ से धोकर राजनीति में शामिल करने” का आरोप लगाने वाली कांग्रेस अब खुद उसी आरोपों के घेरे में नजर आ रही है। दुर्ग ग्रामीण कांग्रेस की नई कार्यकारिणी समिति के गठन के बाद महामंत्री पद पर लक्ष्मी साहू की नियुक्ति ने संगठन के भीतर और बाहर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है।

हाल ही में घोषित ग्रामीण कांग्रेस की जंबो कार्यकारिणी में पूर्व जिला पंचायत सदस्य लक्ष्मी साहू को महामंत्री बनाया गया। जैसे ही उनका नाम सूची में सामने आया, राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। सवाल उठने लगे—क्या दुर्ग ग्रामीण कांग्रेस में साफ-सुथरी छवि वाले नेताओं की कमी हो गई है? या फिर कांग्रेस भी अब उसी “वाशिंग मशीन” राजनीति की राह पर है, जिसका वह विरोध करती रही है?

नियुक्ति पर उठे सवाल, संगठन में असंतोष की आहट

वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में जब कांग्रेस पहले से ही बैकफुट पर मानी जा रही है, ऐसे समय में यह नियुक्ति पार्टी के भीतर असहजता का कारण बन गई है। सूत्रों के अनुसार, कुछ कांग्रेसी सदस्य ही इस निर्णय पर सवाल उठा रहे हैं। चर्चा का केंद्र दुर्ग ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष राकेश ठाकुर की कार्यशैली भी बन गई है।

लक्ष्मी साहू का नाम हाल ही में एक विवाद के कारण भी सुर्खियों में रहा है। रसमड़ा निवासी संतोष रामटेक ने पुलिस अधीक्षक को शिकायत सौंपकर लक्ष्मी साहू, उनके पति यशवंत साहू और मोनिका साहू पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत में आरोप है कि कांग्रेस पार्टी के नाम पर नौकरी दिलाने का झांसा देकर पैसे लिए गए और कार्य न होने पर रकम वापस मांगने पर कथित रूप से धमकी दी गई। संतोष रामटेक ने यह भी दावा किया है कि उनकी मां के साथ मारपीट की गई, जिसका वीडियो उन्होंने सबूत के तौर पर प्रस्तुत करने की बात कही है।

हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि या पुलिस द्वारा किसी निर्णायक कार्रवाई की जानकारी अभी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है, लेकिन राजनीतिक चर्चा में इन आरोपों का उल्लेख प्रमुखता से हो रहा है।

क्या संगठन को अंधेरे में रखा गया?

लक्ष्मी साहू की नियुक्ति के बाद यह भी चर्चा उठी कि क्या राकेश ठाकुर ने संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को विश्वास में लिया था? क्या यह निर्णय सर्वसम्मति से हुआ या शीर्ष स्तर पर तय कर दिया गया?

राकेश ठाकुर की ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति के समय भी संगठन के भीतर विरोध के स्वर सुनाई दिए थे। ऐसे में अब यह नया विवाद उनके नेतृत्व पर दोबारा सवाल खड़े कर रहा है। यह भी कहा जा रहा है कि हाल ही में लक्ष्मी साहू का रामटेक परिवार से विवाद सामने आया था, जिससे यह मुद्दा और संवेदनशील बन गया है।

‘काबिलियत या सेटिंग’ की बहस

संगठन के भीतर यह भी फुसफुसाहट है कि क्या नियुक्तियां काबिलियत के आधार पर हो रही हैं या “सेटिंग” के जरिए? क्या कांग्रेस में सर्वसम्मति और सामूहिक निर्णय की परंपरा कमजोर पड़ रही है?

पूर्व में भी राकेश ठाकुर पर दुर्ग में कांग्रेसी नेताओं के फोटो पोस्टरों से हटवाने को लेकर विवाद खड़ा हो चुका है। ऐसे में यह नया घटनाक्रम उनकी कार्यप्रणाली को लेकर आलोचनाओं को और बल दे रहा है।

कांग्रेस की छवि पर असर?

राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप और चर्चा होना सामान्य बात है, लेकिन जब हर चर्चा नकारात्मक दिशा में जाए तो उसका असर संगठन की छवि पर पड़ना स्वाभाविक है। दुर्ग ग्रामीण कांग्रेस अब अपनी जंबो टीम के साथ राजनीतिक मुकाबले के लिए मैदान में उतर चुकी है, लेकिन यह देखना दिलचस्प होगा कि यह चयन प्रक्रिया भविष्य में संगठन को मजबूती देती है या आंतरिक असंतोष को और बढ़ाती है।

फिलहाल, लक्ष्मी साहू की नियुक्ति ने दुर्ग की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है। आने वाले समय में पुलिस जांच और संगठनात्मक प्रतिक्रिया किस दिशा में जाती है, यही तय करेगा कि यह विवाद अस्थायी राजनीतिक शोर है या कांग्रेस के लिए दीर्घकालिक चुनौती।

नोटिस का पालन या दिखावा? कई पोलों पर अब भी साफ पढ़ा जा रहा ‘WILD WADI’

By – नरेश देवांगन

जगदलपुर, शौर्यपथ। आड़ावाल से कुरंदी मुख्य मार्ग पर शासकीय विद्युत लाइट खंभों पर पेंट के माध्यम से निजी प्रचार लिखे जाने संबंधी खबर “शौर्यपथ” में प्रकाशित हुए लगभग दो सप्ताह बीत चुके हैं, लेकिन स्थिति पूरी तरह सामान्य होती दिखाई नहीं दे रही है। खबर के प्रकाशन के बाद संबंधित विभाग ने संज्ञान लेने, नोटिस जारी करने और नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया था।

मौके पर अवलोकन करने पर यह सामने आया कि खंभों पर लिखे गए प्रचार पर सफेद रंग पोतकर उसे ढकने का प्रयास किया गया है। हालांकि, कई स्थानों पर “WILD WADI” नाम अब भी स्पष्ट रूप से पढ़ा जा सकता है। प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि मूल पेंट को तकनीकी तरीके से हटाने के बजाय उस पर रंग चढ़ाया गया है।

विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार विभाग ने मामले की आंतरिक गणना कराई है, जिसमें लगभग 130 शासकीय खंभों पर उक्त नाम पेंट से लिखे जाने की जानकारी सामने आई है। यदि यह तथ्यात्मक रूप से सही है, तो यह उल्लंघन सीमित नहीं बल्कि व्यापक स्तर का माना जाएगा। ऐसे में यह प्रश्न स्वाभाविक है कि क्या नोटिस जारी कर आंशिक सफेदी कर देना पर्याप्त अनुपालन की श्रेणी में माना जा सकता है?

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शासकीय संपत्ति पर बिना विधिवत अनुमति किसी भी प्रकार का लेखन या विज्ञापन नियमानुसार प्रतिबंधित है। इसलिए कार्रवाई भी ऐसी होनी चाहिए जो स्पष्ट, पारदर्शी और उदाहरणात्मक हो। कई खंभों पर उभरते अक्षर संकेत देते हैं कि कार्य पूर्णतः संतोषजनक नहीं हुआ है।

दूसरे मार्ग पर नए फ्लेक्स, उठे नए सवाल

इसी बीच हाटगुड़ा से माड़पाल मार्ग पर मुख्य विद्युत खंभों पर “SIDDHARTH COMPUTER ACADEMY” के फ्लेक्स लगाए जाने की जानकारी भी सामने आई है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह हालिया स्थापना है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि एक मामले में सख्त और उदाहरणात्मक कार्रवाई होती, तो संभवतः अन्य स्थानों पर इस प्रकार की पुनरावृत्ति नहीं होती।

यदि संबंधित संस्थान या व्यक्ति के पास विधिवत अनुमति है, तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए। यदि अनुमति नहीं है, तो नियमानुसार समान रूप से कार्रवाई अपेक्षित है। नागरिकों का मत है कि नियमों का अनुपालन सभी पर समान रूप से होना चाहिए, अन्यथा कार्रवाई की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठते हैं।

पारदर्शिता और जवाबदेही की अपेक्षा

प्रशासनिक कार्रवाई का उद्देश्य केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन होना चाहिए। यदि लगभग 130 खंभों पर उल्लंघन दर्ज हुआ है, तो सुधारात्मक और संभावित दंडात्मक कदमों की स्थिति भी स्पष्ट की जानी चाहिए। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि भविष्य में इस प्रकार की पुनरावृत्ति पर भी रोक लगेगी।

यह खबर किसी व्यक्ति या संस्था विशेष के विरुद्ध आरोप स्थापित करने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि शासकीय संपत्ति के संरक्षण और नियमों के समान अनुपालन की अपेक्षा को रेखांकित करने के लिए प्रकाशित की जा रही है।

अब सबकी निगाहें संबंधित विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं—क्या पेंट प्रचार को पूर्णतः तकनीकी तरीके से हटाकर एक स्पष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया जाएगा, या वर्तमान स्थिति को ही पर्याप्त मान लिया जाएगा?

सवाल सीधा है: क्या नियम व्यवहार में भी उतनी ही गंभीरता से लागू होंगे, जितनी कागज़ों में दिखाई देते हैं?

    रायपुर / शौर्यपथ / प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना के लाभार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण सूचना सामने आई है। भारत सरकार ने इस योजना के अंतर्गत सहायता राशि की प्रथम किस्त मार्च महीने के अंत तक जारी करने की तैयारी में है। हालांकि, इस लाभ को प्राप्त करने के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन और संबंधित विभागों ने सदस्यों एवं प्रतिष्ठानों के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं, जिनका पालन न करने पर लाभार्थी राशि से वंचित रह सकते हैं।

योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार, प्रत्येक नए जुडऩे वाले और प्रथम बार सदस्य बनने वाले व्यक्तियों के लिए सार्वभौमिक खाता संख्या (्रहृ) का चेहरा प्रमाणीकरण तकनीक (स्नड्डष्द्ग ्रह्वह्लद्धद्गठ्ठह्लद्बष्ड्डह्लद्बशठ्ठ ञ्जद्गष्द्धठ्ठशद्यशद्द4) के माध्यम से सत्यापन कराना अब अनिवार्य कर दिया गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिना इस डिजिटल सत्यापन के योजना का लाभ प्रदान नहीं किया जाएगा। यदि किसी सदस्य को इस तकनीकी प्रक्रिया में कोई कठिनाई आती है, तो उन्हें तुरंत अपने संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय में उपस्थित होकर सहायता प्राप्त करने की सलाह दी गई है।

योजना की राशि का प्रेषण सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (ष्ठक्चञ्ज) के माध्यम से किया जाएगा। इसके लिए सदस्यों का बैंक खाता इस सुविधा हेतु सक्षम होना अनिवार्य है। जिन कर्मचारियों के खाते वर्तमान में इस प्रणाली से नहीं जुड़े हैं, उन्हें तत्काल अपनी बैंक शाखा में जाकर यह सुविधा सक्रिय कराने के निर्देश दिए गए हैं ताकि भुगतान प्रक्रिया में कोई बाधा न आए।

व्यक्तियों के साथ-साथ नियोक्ताओं और संस्थानों पर भी नियमों के पालन की जिम्मेदारी डाली गई है। आधिकारिक सूचना के अनुसार, जो प्रतिष्ठान नियमित रूप से इलेक्ट्रॉनिक चालान-सह-विवरणिका (श्वष्टक्र) प्रस्तुत नहीं कर रहे हैं या अंशदान जमा करने में विलंब कर रहे हैं, उनके कर्मचारियों को योजना के लाभ से रोका जा सकता है। प्रशासन ने सभी संस्थानों से समय पर विवरणिका भरने और अंशदान सुनिश्चित करने का आग्रह किया है ताकि सुचारू रूप से किस्त जारी की जा सके।

   दुर्ग / शौर्यपथ / जिला कार्यालय सभाकक्ष में आयोजित जनदर्शन कार्यक्रम में कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह ने आमजनों की समस्याएं गंभीरता से सुनीं और संबंधित विभागों को शीघ्र निराकरण के निर्देश दिए। इस अवसर पर डिप्टी कलेक्टर श्री हितेश पिस्दा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। जनदर्शन में अवैध कब्जा, आवासीय पट्टा, भूमि सीमांकन, सीसी रोड निर्माण, ऋण पुस्तिका सुधार, आर्थिक सहायता और प्रधानमंत्री आवास योजना सहित कुल 137 आवेदन प्राप्त हुए।
जन्मतिथि सुधार का मामला
नयापारा वार्ड क्रमांक 1 निवासी ने अपनी पुत्री की शालेय जन्मतिथि में त्रुटि सुधार की मांग की। अभिलेख में जन्मतिथि 15 मार्च 2008 दर्ज है, जबकि जन्म प्रमाण पत्र में 15 मार्च 2009 अंकित है। विद्यालय प्रबंधन द्वारा सुधार नहीं किए जाने की शिकायत पर कलेक्टर ने प्राचार्य से सीधे चर्चा कर दस्तावेजों के आधार पर उचित कार्रवाई के निर्देश दिए।
महतारी वंदन योजना की किस्त लंबित
भिलाई निवासी महिला ने तीन माह से महतारी वंदन योजना की राशि नहीं मिलने की शिकायत की। फिंगरप्रिंट मैच नहीं होने के कारण किस्त अटकी होने पर कलेक्टर ने महिला एवं बाल विकास विभाग को त्वरित समाधान के निर्देश दिए।
प्रधानमंत्री आवास योजना की किस्त नहीं मिली
गयानगर वार्ड क्रमांक 4 निवासी ने छह माह बीतने के बाद भी पीएम आवास योजना की एक भी किस्त नहीं मिलने की शिकायत की। कलेक्टर ने नगर निगम दुर्ग आयुक्त को नियमानुसार शीघ्र किस्त जारी करने के निर्देश दिए।
तेज डीजे पर सख्ती
कुरूद के सुंदर विहार व प्रगति नगर क्षेत्र के रहवासियों ने प्रीत पैलेस में देर रात तक तेज डीजे बजने से हो रही परेशानी की शिकायत की। कलेक्टर ने एसडीएम भिलाई को निर्धारित समय सीमा के उल्लंघन पर साउंड सिस्टम जब्त करने की कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
कलेक्टर श्री सिंह ने कहा कि जनदर्शन आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान का प्रभावी मंच है और प्रत्येक आवेदन पर संवेदनशीलता व प्राथमिकता से कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

   रायपुर / शौर्यपथ / होली के पहले निकाय कर्मियों को वेतन भुगतान के लिए मानवीय सरोकार के साथ पहल करते हुए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा प्रदेश के नगरीय निकायों को चुंगी क्षतिपूर्ति मद से कुल 62.85 करोड़ रुपए का आबंटन आज जारी किया गया है। इसमें वेतन भुगतान के लिए कुल 51 करोड़ 71 लाख 21 हजार रुपये आबंटित किए गए हैं। इसके साथ ही सभी नगरीय निकायों को प्रतिमाह नियमित रूप से दी जा रही चुंगी क्षतिपूर्ति के अंतर्गत कुल 11 करोड़ 14 लाख 38 हजार 492 रुपये का भी आबंटन किया गया है।

फरवरी-2026 की स्थिति में नगरीय निकायों में वेतन के लिए लंबित राशि के आधार पर नगरीय निकायों को चुंगी क्षतिपूर्ति मद से आबंटन किया गया है, ताकि नगरीय निकायों में वित्तीय संतुलन बनाए रखा जा सके और लंबित देयकों एवं वेतन का निराकरण हो सके।

11 नगर निगमों को वेतन के लिए 25.05 करोड़

प्रदेश के 11 नगर निगमों को कुल 25 करोड़ 5 लाख 34 हजार रुपये की राशि वेतन एवं चुंगी क्षतिपूर्ति मद में प्रदान की गई है। नगर पालिक निगम भिलाई को 4 करोड़, बिलासपुर को 5 करोड़, दुर्ग को 1 करोड़ 65 लाख 92 हजार, राजनांदगाँव को 3 करोड़, जगदलपुर को 1 करोड़ 50 लाख, अंबिकापुर को 3 करोड़, चिरमिरी को 2 करोड़, रिसाली को 2 करोड़, बीरगांव को 54 लाख 55 हजार, धमतरी को 1 करोड़ 7 लाख एवं भिलाई-चरोदा को 1 करोड़ 27 लाख 87 हजार रुपये जारी किए गए हैं। नगर निगमों में यह राशि मुख्य रूप से नियमित कर्मचारियों, स्वच्छता कर्मियों एवं संविदा कर्मचारियों के वेतन भुगतान तथा चुंगी समाप्त होने से उत्पन्न राजस्व अंतर की भरपाई हेतु उपयोग की जाएगी। इसके अलावा प्रदेश के सभी 14 नगर निगमों को चुंगी क्षतिपूर्ति के अंतर्गत 7 करोड़ 51 लाख 55 हज़ार 420 रुपये भी आबंटित किए गए हैं।

वेतन के लिए नगर पालिकाओं को 16.48 करोड़ व नगर पंचायतों को 10.17 करोड़

नगरीय प्रशासन विभाग ने प्रदेश के 38 नगर पालिका परिषदों में 16 करोड़ 48 लाख की राशि तथा 85 नगर पंचायतों को कुल 10 करोड़ 17 लाख रुपये से अधिक की राशि होली के पूर्व निकाय कर्मियों को वेतन भुगतान के लिए आबंटित की है। छोटे एवं मध्यम नगरीय निकायों के लिए यह वित्तीय सहायता अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। प्रदेश के सभी 54 नगर पालिकाओं को भी चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि दी गई है। इसके लिए 2 करोड़ 8 लाख 52 हजार 17 रुपए का आबंटन जारी किया गया है। इसके अलावा सभी 124 नगर पंचायतों को एक करोड़ 54 लाख 31 हजार 55 रुपए की मासिक चुंगी क्षतिपूर्ति राशि दी गई है।

ज्ञातव्य हो कि राज्य में चुंगी समाप्त होने के बाद नगरीय निकायों को राजस्व में कमी का सामना करना पड़ा था। इस स्थिति में राज्य सरकार द्वारा चुंगी क्षतिपूर्ति मद के माध्यम से निकायों को नियमित अंतराल पर राशि प्रदान की जाती है, ताकि वे अपने प्रशासनिक एवं सेवा संबंधी दायित्वों का निर्वहन सुचारू रूप से कर सकें। यह मद विशेष रूप से वेतन भुगतान, स्वच्छता व्यवस्था, जलप्रदाय सेवाओं एवं दैनिक संचालन व्यय को संतुलित करने में सहायक होती है।

विभाग द्वारा आज आबंटित राशि से नगरीय निकायों में कार्यरत हजारों कर्मचारियों को होली के पूर्व वेतन प्राप्त होगा। इससे निकायों में स्वच्छता, पेयजल आपूर्ति, प्रकाश व्यवस्था एवं अन्य शहरी सेवाओं में निरंतरता बनी रहेगी। नगरीय प्रशासन विभाग ने स्पष्ट किया है कि आबंटित राशि का उपयोग निर्धारित मदों में ही किया जाएगा। सभी निकायों को वित्तीय नियमों का पालन करते हुए व्यय विवरण प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। चुंगी क्षतिपूर्ति मद से वेतन के लिए 51.71 करोड़ एवं नियमित चुंगी क्षतिपूर्ति के रूप में 11.14 करोड़, इस प्रकार कुल 62.85 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का होली के पहले आबंटन नगरीय निकायों के लिए बड़ी राहत है।

दुर्ग | शौर्यपथ।

छत्तीसगढ़ में किसानों के हित को सर्वोपरि रखते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार ने एक और ऐतिहासिक निर्णय लिया है। राज्य शासन द्वारा “कृषक उन्नति योजना” के अंतर्गत पंजीकृत धान एवं धान बीज उत्पादक किसानों को धान के अंतर की राशि सीधे उनके खातों में हस्तांतरित की जा रही है। इस संबंध में कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग, मंत्रालय महानदी भवन द्वारा सभी जिलों को स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

जारी पत्र के अनुसार, 25 लाख 28 हजार से अधिक पंजीकृत किसानों को ₹10,324 करोड़ से अधिक की आदान सहायता राशि का वितरण दिनांक 28 फरवरी 2026 को किया जाएगा। यह राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से अंतरित की जाएगी, जिससे पारदर्शिता और त्वरित लाभ सुनिश्चित होगा।

राज्य शासन ने इस अवसर को किसानों के सम्मान और सहभागिता का पर्व बनाने के उद्देश्य से राज्य स्तरीय तथा विकासखंड स्तरीय कार्यक्रमों के आयोजन का निर्णय लिया है। राज्य स्तरीय मुख्य कार्यक्रम मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मुख्य आतिथ्य में विकासखंड बिल्हा, जिला-बिलासपुर में दोपहर 12.30 बजे आयोजित किया जाएगा। इसी समय सभी विकासखंडों में भी कार्यक्रम आयोजित होंगे।

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि—

राज्य स्तरीय कार्यक्रम में न्यूनतम 20 हजार किसानों तथा

विकासखंड स्तरीय कार्यक्रमों में न्यूनतम 2 हजार किसानों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी।

इसके लिए स्थान चयन, पेयजल, धूप से बचाव, बैठक व्यवस्था एवं आवागमन की सुविधाओं पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं।

कार्यक्रमों में विधायकगण, जिला पंचायत अध्यक्ष, जनपद पंचायत अध्यक्ष एवं अन्य जनप्रतिनिधियों को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाएगा। साथ ही मुख्यमंत्री श्री साय राज्य स्तरीय कार्यक्रम के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चयनित जिलों के किसानों से सीधा संवाद भी करेंगे, जिसके लिए आवश्यक तकनीकी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

राज्य शासन ने स्पष्ट किया है कि कार्यक्रम स्थल का चयन इस प्रकार किया जाए जिससे किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो और आम जनता के दैनिक आवागमन व यातायात पर कोई प्रभाव न पड़े।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में यह निर्णय एक बार फिर यह साबित करता है कि छत्तीसगढ़ में सरकार किसानों के साथ खड़ी है, न कि केवल घोषणाओं तक सीमित है। धान उत्पादक किसानों को समय पर अंतर राशि देकर सरकार ने यह संदेश दिया है कि यह वास्तव में “किसानों की सरकार” है, जो खेत से लेकर खाते तक किसान के हितों की रक्षा कर रही है।

धीरज बाकलीवाल की मर्जी के आगे बौनी साबित हुई प्रदेश संगठन की लिस्ट

दुर्ग। शौर्यपथ।

शौर्यपथ समाचार पत्र द्वारा पूर्व में यह समाचार प्रकाशित किया गया था कि दुर्ग शहर कांग्रेस संगठन रिमोट कंट्रोल से संचालित नजर आ रहा है। उस समाचार के बाद दुर्ग कांग्रेस में हलचल जरूर मची, वर्षों से शांत पड़े गुटों में संवाद की कोशिशें भी दिखीं और मीडिया से दूरी बनाए रखने वाला संगठन अचानक सक्रिय भी हुआ।

लेकिन समय बीतते ही एक बार फिर यह सवाल खड़ा हो गया है कि शौर्यपथ की उस रिपोर्ट में उठाया गया संदेह कहीं न कहीं सच तो नहीं था?

प्रदेश कांग्रेस संगठन द्वारा हाल ही में दुर्ग शहर कांग्रेस की अधिकृत सूची जारी की गई, लेकिन जैसे ही दुर्ग शहर कांग्रेस अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल ने स्थानीय स्तर पर पदाधिकारियों की घोषणा की, एक बड़ा संगठनात्मक विरोधाभास सामने आ गया।

? शहर अध्यक्ष द्वारा जिन चार नामों को “कांग्रेस प्रवक्ता” के रूप में घोषित किया गया, वे नाम प्रदेश कांग्रेस संगठन की सूची में कहीं भी दर्ज नहीं हैं।

यहीं से सवाल खड़े होते हैं—

क्या दुर्ग शहर कांग्रेस अध्यक्ष को यह अधिकार है कि वह प्रदेश संगठन की सूची में स्वयं संशोधन करें?

क्या यह निर्णय प्रदेश कांग्रेस की अनुमति से लिया गया है या फिर यह व्यक्तिगत मर्जी का विस्तार है?

और सबसे अहम—क्या इससे संगठन की मर्यादा और अनुशासन को ठेस नहीं पहुंची है?

प्रदेश कांग्रेस द्वारा जारी सूची में कांग्रेस प्रवक्ता पद का कोई उल्लेख ही नहीं है, जबकि स्थानीय स्तर पर अचानक चार प्रवक्ता घोषित कर दिए गए। इससे न केवल संगठनात्मक भ्रम की स्थिति बनी है, बल्कि कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष और अविश्वास भी गहराता जा रहा है।

सूची जारी होते ही दुर्ग शहर कांग्रेस के भीतर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। पार्टी के अंदरूनी हलकों में अब खुलकर यह कहा जा रहा है कि

धीरज बाकलीवाल का कार्यकाल संगठन को आगे ले जाने की बजाय पीछे खींचता नजर आ रहा है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विपक्ष की भूमिका निभाने के लिए जिस मुखर, आक्रामक और स्पष्ट नेतृत्व की आवश्यकता होती है, वह दुर्ग शहर कांग्रेस में फिलहाल दिखाई नहीं दे रहा। कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर शहर अध्यक्ष का बैकफुट पर जाना, विपक्षी राजनीति को कमजोर कर रहा है।

प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जहां लगातार एक मुखर विपक्ष की भूमिका निभा रहे हैं, वहीं दुर्ग शहर कांग्रेस अध्यक्ष के चयन को लेकर अब पार्टी के भीतर ही सवाल उठने लगे हैं। चर्चा यहां तक है कि

प्रदेश संगठन को जिन उम्मीदों के साथ धीरज बाकलीवाल को जिम्मेदारी सौंपी गई थी, वे अपेक्षाएं अब संदेह के घेरे में हैं।

राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों का साफ कहना है कि

? प्रदेश कांग्रेस संगठन की सूची में बिना अनुमति नाम जोड़ना, संगठनात्मक मर्यादाओं का उल्लंघन है।

? यह कदम “सृजन संगठन अभियान” और अनुशासन की भावना के विपरीत है।

अब निगाहें प्रदेश कांग्रेस संगठन पर टिकी हैं—

क्या प्रदेश संगठन दुर्ग शहर कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा जारी की गई इस सूची पर अपनी मोहर लगाएगा?

या फिर यह स्पष्ट करेगा कि संगठन में अंतिम अधिकार किसका है—प्रदेश का या शहर अध्यक्ष की व्यक्तिगत मर्जी का?

दुर्ग शहर कांग्रेस के भविष्य, उसकी विश्वसनीयता और विपक्ष की भूमिका पर यह मामला अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है।

प्रदेश संगठन इस पर क्या कदम उठाता है, यही तय करेगा कि दुर्ग कांग्रेस संगठन मजबूत होगा या फिर चंद लोगों की खींचतान में उलझकर रह जाएगा।

मृणेन्द्र चौबे राजनांदगांव /शौर्यपथ /छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने मंगलवार को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 1.72 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया। उन्होंने कहा कि यह बजट समावेशी विकास, आधारभूत संरचना की मजबूती और निवेश को बढ़ावा देने पर केंद्रित है, जिससे प्रदेश के विकास को नई गति मिलेगी।

इस बजट को हर वर्ग के लिए उपयोगी बताते हुए जिला भाजपा महामंत्री अनुसूचित जाति मोर्चा दीपेश शेंडे ने कहा कि सरकार ने समाज के सभी तबकों के हितों का ध्यान रखा है। बजट में बालिकाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से रानी दुर्गावती योजना की घोषणा की गई है, जिसके तहत 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने पर पात्र लड़कियों को 1.5 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाएगी। किसानों के लिए भी सरकार ने खजाना खोलते हुए कृषक उन्नति योजना हेतु 10,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। बिजली पंपों की सब्सिडी के लिए 5,500 करोड़ रुपये, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए 820 करोड़ रुपये, दीनदयाल भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण के लिए 600 करोड़ रुपये तथा गन्ना किसानों के बोनस के लिए 60 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वहीं डेयरी समग्र विकास योजना के अंतर्गत 90 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।

शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता सुधार के लिए स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट शाला योजना की शुरुआत की गई है, जिसके लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में आवासहीन परिवारों को पक्के मकान उपलब्ध कराने के लिए 4,000 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। इसके साथ ही महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा निर्णय लेते हुए महिलाओं के नाम पर जमीन, भवन या अचल संपत्ति की खरीद पर रजिस्ट्री शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट देने का ऐलान किया गया है। दीपेश शेंडे ने कहा कि यह बजट किसानों, महिलाओं, मजदूरों, विद्यार्थियों और गरीब परिवारों के लिए लाभकारी सिद्ध होगा तथा प्रदेश को आत्मनिर्भर और विकसित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

विशेष रिपोर्ट | उत्तर प्रदेश

सनातन धर्म, जो त्याग, तप, सत्य और चरित्र की शुचिता का प्रतीक माना जाता है, आज एक गंभीर विमर्श के केंद्र में है। कारण है—स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर आरोप लगाने वाले आशुतोष पांडे उर्फ आशुतोष ब्रह्मचारी, जिनका नाम दीक्षा, ब्रह्मचर्य और धार्मिक संगठनों से जुड़ने के साथ-साथ एक लंबे और विवादास्पद आपराधिक इतिहास से भी जुड़ा रहा है।

21 से 27 मुकदमों का साया

विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आशुतोष पांडे पर 21 से 27 तक आपराधिक मुकदमे दर्ज बताए जाते हैं। इन मामलों में गैंगरेप (धारा 376), धोखाधड़ी (420), जबरन वसूली, गैंगस्टर एक्ट, गोवध अधिनियम, आईटी एक्ट और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने जैसी गंभीर धाराएं शामिल हैं।
शामली जिले के कांधला थाना क्षेत्र में वे एक घोषित हिस्ट्रीशीटर हैं, जिनकी हिस्ट्रीशीट संख्या 76A है। पुलिस रिकॉर्ड में उनके नाम आशु शर्मा और अश्वनी सिंह के रूप में भी दर्ज होने की बात सामने आई है।

जिलों में फैला आपराधिक नेटवर्क

आशुतोष पांडे के खिलाफ मुकदमे केवल एक जिले तक सीमित नहीं हैं।

  • शामली (कांधला): 2019 में उन पर ₹25,000 का इनाम घोषित किया गया था।

  • मथुरा: कृष्ण जन्मभूमि से जुड़े मामलों में पक्षकार होने के साथ धोखाधड़ी और धमकी के आरोप।

  • गोंडा, लखनऊ, मुजफ्फरनगर: यहां भी उनके खिलाफ आपराधिक प्रकरण लंबित बताए जाते हैं।

फर्जी दस्तावेज और गौ-तस्करी के आरोप

उन पर फर्जी दस्तावेजों के सहारे चुनाव लड़ने, फर्जी पहचान पत्रों के इस्तेमाल और गौ-तस्करी में संलिप्तता के आरोप भी लगे हैं। कुछ मामलों में पुलिस को रिश्वत देने की कोशिश और जेल यात्रा की पुष्टि भी रिपोर्ट्स में की गई है।

हालिया पुलिस कार्रवाई

  • शामली: अक्टूबर 2025 में कांधला थाने में एक महिला की शिकायत पर घर में घुसकर मारपीट, चोट पहुंचाने और धमकी देने का मामला दर्ज हुआ।

  • मथुरा: मई 2024 में गोविंद नगर थाने में धोखाधड़ी और धमकी (धारा 406, 504, 506 IPC) का केस। इस एफआईआर को रद्द कराने की याचिका इलाहाबाद हाई कोर्ट ने खारिज कर दी, केवल प्रक्रियागत राहत दी गई।

दीक्षा और विवाद का संगम

वर्ष 2022 में जगद्गुरु रामभद्राचार्य से दीक्षा लेने के बाद आशुतोष पांडे ने स्वयं को आशुतोष ब्रह्मचारी घोषित किया और सन्यासी जीवन अपनाने का दावा किया। इसके बाद वे मथुरा में बस गए और “श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट” के अध्यक्ष बने।
यहीं से एक बड़ा सवाल खड़ा होता है—क्या दीक्षा मात्र से अतीत के आपराधिक आरोप धुल जाते हैं, या फिर यह धार्मिक आवरण का दुरुपयोग है?

फरवरी 2026 का नया मोड़

फरवरी 2026 में एक पत्रकार द्वारा सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार करना कि उसे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को झूठे यौन शोषण के मामले में फंसाने के लिए उकसाया गया, इस पूरे प्रकरण को और गंभीर बना देता है। हालांकि आशुतोष की शिकायत पर प्रयागराज की पॉक्सो कोर्ट के आदेश से एफआईआर दर्ज हुई है, लेकिन अब पुलिस आरोपकर्ता के आपराधिक इतिहास और शिकायत की सत्यता की गहन जांच कर रही है।

सनातन धर्म की गरिमा पर प्रश्न

धर्माचार्य, संत और समाज के प्रबुद्ध वर्ग मानते हैं कि सनातन धर्म का वस्त्र केवल बाहरी आवरण नहीं, बल्कि आचरण और चरित्र की कसौटी है। यदि आपराधिक प्रवृत्ति के लोग धार्मिक पदों, ब्रह्मचारी या पीठाधीश्वर जैसे शब्दों का सहारा लेकर समाज को भ्रमित करते हैं, तो यह न केवल कानून बल्कि धर्म की आत्मा के साथ भी अन्याय है।

निष्कर्ष

आशुतोष पांडे उर्फ आशुतोष ब्रह्मचारी का मामला केवल एक व्यक्ति या एक आरोप तक सीमित नहीं है। यह उस बड़ी चुनौती की ओर संकेत करता है, जहां धर्म की आड़ में आपराधिक अतीत को छिपाने की कोशिश समाज को दिग्भ्रमित कर सकती है।
अब यह जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था, न्यायपालिका और धर्मगुरुओं—तीनों की है कि सनातन धर्म की गरिमा को बचाया जाए और यह स्पष्ट संदेश जाए कि धर्म का चोला अपराधों पर पर्दा नहीं बन सकता

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