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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
डिजिटल कनेक्टिविटी बनेगी विकसित छत्तीसगढ़ की नई जीवनरेखा- मुख्यमंत्री साय
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ को डिजिटल आधारभूत संरचना के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि प्राप्त हुई है। भारत सरकार के संचार मंत्रालय द्वारा संशोधित भारतनेट प्रोग्राम (Amended BharatNet Program - ABP) के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के लिए ₹3,942 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की गई है।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत छत्तीसगढ़ के 11 682 ग्राम पंचायतों को रिंग टोपोलॉजी के माध्यम से जोड़ा जाएगा। रिंग टोपोलॉजी आधारित यह नेटवर्क संरचना अधिक विश्वसनीय, सुरक्षित और निर्बाध डिजिटल सेवाएँ उपलब्ध कराने में सक्षम होगी।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह परियोजना ग्रामीण डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इससे ई-गवर्नेंस सेवाओं का विस्तार होगा, ऑनलाइन शिक्षा को नई मजबूती मिलेगी, टेलीमेडिसिन के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँच सकेंगी तथा ग्रामीण युवाओं और उद्यमियों के लिए नए अवसर सृजित होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल कनेक्टिविटी केवल इंटरनेट सुविधा नहीं है, बल्कि यह विकसित छत्तीसगढ़ की नई जीवनरेखा है। इससे शासन की पारदर्शिता बढ़ेगी, सेवाओं की उपलब्धता तेज होगी और गांवों को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ा जा सकेगा।
मुख्यमंत्री साय ने इस महत्वपूर्ण स्वीकृति के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग से छत्तीसगढ़ डिजिटल रूप से सशक्त, सुरक्षित और आत्मनिर्भर राज्य के रूप में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
रायपुर / शौर्यपथ / अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग अंतर्गत छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ द्वारा 7 मार्च 2026 को रायपुर के इंडोर स्टेडियम में ‘लखपति दीदी संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस गरिमामय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा करेंगे। कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी भी उपस्थित रहेंगे। इस अवसर पर प्रदेश भर से हजारों लखपति दीदियां कार्यक्रम में भाग लेंगी।
मुख्यमंत्री साय इन महिलाओं से संवाद करते हुए उनकी सफलता की कहानियां सुनेंगे और शासन की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से उनके जीवन में आए सकारात्मक बदलाव की जानकारी प्राप्त करेंगे। यह कार्यक्रम महिलाओं के आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को साझा करने का महत्वपूर्ण मंच बनेगा।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के करकमलों से लखपति दीदी आधारित कॉफी टेबल बुक तथा छत्तीसकला आधारित ब्रांड बुक का विमोचन किया जाएगा। इसके साथ ही ‘लखपति दीदी ग्राम पोर्टल’ का शुभारंभ भी किया जाएगा। इन प्रकाशनों के माध्यम से स्व-सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं की उपलब्धियों और आत्मनिर्भरता की प्रेरक यात्राओं को व्यापक रूप से प्रस्तुत किया जाएगा।
कार्यक्रम में प्रदेश भर से उत्कृष्ट कार्य करने वाली स्व-सहायता समूह की महिलाओं, कैडर्स और लखपति दीदियों को सम्मानित भी किया जाएगा। यह आयोजन महिलाओं की आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार के सतत प्रयासों को रेखांकित करेगा और अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करेगा।
रोहनी ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति जताया आभार
बालोद / शौर्यपथ /
बालोद जिले के ग्राम खैरडीह की रोहनी का संघर्ष भरा कदम महतारी वंदन योजना से अब स्वावलंबन की ओर बढ़ चुका है। रोहनी पटेल का जीवन संघर्षपूर्ण रहा है। पति की असमय मृत्यु ने न केवल उन्हें मानसिक रूप से कमजोर कर दिया, बल्कि परिवार पर आर्थिक संकट के बादल भी गहरा दिए। रोहनी के कंधों पर वृद्ध सास की देखभाल और कॉलेज में पढ़ रहे दो बच्चों के भविष्य की महती जिम्मेदारी थी। सीमित संसाधनों और आय का कोई स्थाई जरिया न होने के कारण परिवार का भरण-पोषण एक बड़ी चुनौती बन गया था। विपरीत परिस्थितियों में भी हिम्मत न हारने वाली रोहनी के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सुशासन में ’महतारी वंदन योजना’ एक वरदान बनकर आई। एकीकृत बाल विकास परियोजना देवरी के माध्यम से उन्होंने योजना का लाभ लेना शुरू किया। हर माह मिलने वाली 01 हजार रुपये की सहायता राशि ने उनके भीतर आत्मविश्वास जगाया। रोहनी ने इस राशि को केवल घरेलू खर्चों में व्यय करने के बजाय इसे भविष्य के निवेश के रूप में देखा। उन्होंने 6-7 महीनों तक प्राप्त हुई किस्तों को संकलित किया और उस संचित पूंजी से अपने खेत में सब्जी उत्पादन का कार्य प्रारंभ किया। बीज, खाद और आवश्यक उपकरणों की व्यवस्था कर उन्होंने कड़ी मेहनत की, जिसका परिणाम आज सबके सामने है।
आज श्रीमती रोहनी पटेल न केवल अपने खेत में सब्जियां उगा रही हैं, बल्कि आसपास के ग्रामीण बाजारों में उन्हें बेचकर एक नियमित और सम्मानजनक आय अर्जित कर रही हैं। अब वे सब्जी विक्रय से प्राप्त आय से अपने परिवार की दैनिक जरूरतों को आसानी से पूरा कर रही हैं। कॉलेज जा रहे उनके बच्चों की शिक्षा निर्बाध रूप से जारी है और वे अपनी वृद्ध सास की उचित सेवा कर पा रही हैं। महतारी वंदन योजना ने उन्हें उद्यमी बना दिया है, जिससे वे समाज में आत्मसम्मान के साथ जीवन जी रही हैं। महतारी वंदन योजना आज छत्तीसगढ़ की लाखों महिलाओं के लिए केवल एक वित्तीय योजना नहीं, बल्कि उनके सशक्तिकरण और सफलता का आधार स्तंभ बन चुकी है।
महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार के साथ समय और श्रम की हो रही बचत
मोहला / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन के संकल्प के साथ प्रदेश में जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि प्रत्येक पात्र परिवार तक योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचे और उनके जीवन में वास्तविक परिवर्तन आए। इसी उद्देश्य से संचालित प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के माध्यम से गरीब एवं जरूरतमंद महिलाओं को निःशुल्क गैस कनेक्शन प्रदान किए जा रहे हैं। इस योजना से महिलाओं को रसोई में धुएँ से मुक्ति मिल रही है, वहीं उनका जीवन अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बन रहा है।
मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी जिले के विकासखंड मोहला के ग्राम कुंजामटोला निवासी श्रीमती ललिता जाड़े ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना से गैस सिलेंडर प्राप्त कर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि अब उन्हें पारंपरिक चूल्हे के धुएँ से छुटकारा मिलेगा। पहले रसोई में धुएँ के कारण आँखों में जलन और सांस लेने में परेशानी होती थी, लेकिन अब गैस कनेक्शन मिलने से वे स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण में आसानी से भोजन बना सकेंगी। निःशुल्क गैस कनेक्शन मिलने से अब खाना जल्दी और साफ-सुथरे तरीके से बन सकेगा। उन्होंने कहा कि यह योजना उनके लिए राहत लेकर आई है। उन्होंने योजना का लाभ प्राप्त करने पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी व मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना से न केवल महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है, बल्कि समय और श्रम की भी बचत हो रही है। इससे पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है। राज्य सरकार द्वारा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से जिले की महिलाओं के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहा है।
ड्रोन निगरानी, फ्लैग मार्च और लगातार पेट्रोलिंग से कानून व्यवस्था रही पूरी तरह नियंत्रण में
धमतरी / शौर्यपथ।
होली पर्व के अवसर पर धमतरी जिले में पुलिस प्रशासन द्वारा किए गए कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच त्योहार पूरी तरह शांतिपूर्ण, सौहार्दपूर्ण और हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। पुलिस अधीक्षक धमतरी के निर्देशन में जिले के सभी थाना क्षेत्रों में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई थी, जिसके अंतर्गत लगातार पेट्रोलिंग, संवेदनशील स्थानों पर फिक्स पिकेट की स्थापना तथा पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित की गई।
त्योहार के दौरान पुलिस अधिकारी एवं जवान पूरी मुस्तैदी और सतर्कता के साथ ड्यूटी पर तैनात रहे। प्रमुख चौक-चौराहों, बाजार क्षेत्रों तथा भीड़भाड़ वाले स्थानों पर पुलिस बल की सक्रिय उपस्थिति रही, जिससे पूरे जिले में कानून व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में बनी रही।
ड्रोन कैमरों से रखी गई शहर के चप्पे-चप्पे पर नजर
होली के दौरान आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए ड्रोन कैमरों के माध्यम से शहर के प्रमुख क्षेत्रों और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर लगातार निगरानी रखी गई। इससे पुलिस को स्थिति पर त्वरित नियंत्रण बनाए रखने में सहायता मिली। वहीं पुलिस अधीक्षक धमतरी द्वारा कंट्रोल रूम के माध्यम से लगातार जिले की स्थिति की मॉनिटरिंग की जाती रही तथा सभी थाना प्रभारियों और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जाते रहे।
होली पूर्व गुंडा-बदमाशों पर कसी नकेल
होली पर्व से पूर्व धमतरी पुलिस द्वारा असामाजिक तत्वों के विरुद्ध विशेष अभियान चलाया गया। इस दौरान जिले के लगभग 35 गुंडा बदमाशों, निगरानी बदमाशों एवं उभरते अपराधियों की परेड कराई गई तथा उन्हें अच्छे आचरण बनाए रखने की शपथ दिलाई गई। इसके अतिरिक्त 60 से अधिक गुंडा बदमाशों, निगरानी बदमाशों एवं चाकूबाजों के विरुद्ध प्रतिबंधक कार्यवाही की गई।
फ्लैग मार्च से बढ़ा पुलिस पर भरोसा
जिले के सभी अनुभागों में पुलिस द्वारा फ्लैग मार्च भी निकाला गया, जिसका उद्देश्य असामाजिक तत्वों में कानून का भय उत्पन्न करना तथा आम नागरिकों में सुरक्षा की भावना को मजबूत करना था। त्योहार के दौरान लगातार पेट्रोलिंग करते हुए संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी गई और फिक्स पिकेट में तैनात जवानों द्वारा क्षेत्र में सतत निगरानी रखी गई।
इन प्रभावी व्यवस्थाओं के चलते जिले में कहीं भी किसी प्रकार की अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली और होली का पर्व शांतिपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ।
त्योहारों के लिए पूर्व से तैयार रहती है पुलिस
उल्लेखनीय है कि धमतरी पुलिस द्वारा त्योहारों के मद्देनजर पूर्व से ही प्रभावी सुरक्षा रणनीति बनाकर कार्य किया जाता है। इसी का परिणाम है कि जिले में पिछले एक वर्ष में मनाए गए सभी प्रमुख त्योहार पूर्णतः शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुए हैं।
धमतरी पुलिस आम नागरिकों की सुरक्षा, शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।
— धमतरी ब्यूरो : रोमेश्वर दास सिन्हा
रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने टी-20 विश्वकप के सेमीफाइनल मुकाबले में इंग्लैंड को पराजित कर फाइनल में पहुँचने पर भारतीय क्रिकेट टीम को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ दी हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने ट्वीट में कहा है कि टी-20 विश्वकप के सेमीफाइनल मुकाबले में शानदार और जुझारू प्रदर्शन करते हुए भारतीय क्रिकेट टीम ने इंग्लैंड को हराकर भव्य अंदाज़ में फाइनल में प्रवेश किया है। यह पूरे देश के लिए गर्व और उत्साह का क्षण है।
उन्होंने कहा कि भारतीय टीम के सभी खिलाड़ियों ने अद्भुत टीमवर्क, साहस और उत्कृष्ट खेल कौशल का परिचय देते हुए पूरे देश को गर्व से भर दिया है। यह जीत केवल एक मैच की जीत नहीं, बल्कि हर भारतीय के आत्मविश्वास और तिरंगे की शान का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने भारतीय क्रिकेट टीम को फाइनल मुकाबले के लिए अपनी हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि उन्हें विश्वास है कि भारतीय टीम इसी जज़्बे और प्रदर्शन के साथ आगे बढ़ते हुए विश्व मंच पर एक नया इतिहास रचेगी।
रायपुर /शौर्यपथ /मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने जशपुर के वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता और लोकतंत्र सेनानी श्री महावीर प्रसाद जैन के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि श्री महावीर प्रसाद जैन ने अपने जीवन को समाजसेवा, राष्ट्रहित और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए समर्पित किया।आपातकाल के कठिन दौर में उन्होंने लोकतंत्र की रक्षा के लिए साहसपूर्वक संघर्ष किया और अपने सिद्धांतों पर अडिग रहे। उस समय उनके द्वारा किया गया त्याग और समर्पण लोकतांत्रिक चेतना के प्रति उनकी अटूट निष्ठा का परिचायक है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि श्री जैन का जीवन समाज के लिए प्रेरणादायी रहा है। उनका योगदान सदैव स्मरण किया जाएगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने ईश्वर से प्रार्थना की है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोक संतप्त परिवार को इस दुःख की घड़ी में संबल प्रदान करें।
राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष के रूप में गणेश शंकर मिश्रा ने संभाला पदभार, मुख्यमंत्री ने दी शुभकामनाएँ
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज नवा रायपुर स्थित नीति भवन में छत्तीसगढ़ राज्य नीति आयोग के नवनियुक्त उपाध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा के पदभार ग्रहण समारोह में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने उन्हें इस महत्वपूर्ण दायित्व के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य नीति आयोग प्रदेश के दीर्घकालिक विकास विज़न, साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण और विभिन्न विभागों के बेहतर समन्वय के माध्यम से छत्तीसगढ़ के विकास को नई दिशा और गति देने वाला एक महत्वपूर्ण संस्थान है। उन्होंने कहा कि भविष्य की जरूरतों और चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए विकास की योजनाएँ और रणनीतियाँ तैयार करने में आयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज देश माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसी दृष्टि को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ में भी छत्तीसगढ़ विज़न डॉक्युमेंट 2047 तैयार किया गया है, जिससे प्रदेश के समग्र और दीर्घकालिक विकास की रूपरेखा तय की जा रही है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा योजना आयोग के स्थान पर नीति आयोग के गठन का निर्णय दूरदर्शी सोच का परिणाम था। आज नीति आयोग द्वारा संचालित आकांक्षी जिलों का कार्यक्रम देश के पिछड़े क्षेत्रों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, जिसका सकारात्मक प्रभाव छत्तीसगढ़ के आकांक्षी जिलों में भी देखने को मिला है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नीति आयोग की विशेषता यह है कि यह क्षेत्र की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नीति और योजना निर्माण को बढ़ावा देता है। इसी सोच के साथ राज्यों में भी राज्य नीति आयोग का गठन किया गया है, जो विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सुशासन, पारदर्शिता और जनभागीदारी के साथ प्रदेश में विकास को नई गति देने के लिए लगातार कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि श्री गणेश शंकर मिश्रा के प्रशासनिक अनुभव से राज्य नीति आयोग को नई दिशा और गति मिलेगी। आयोग की ओर से प्राप्त अच्छे सुझावों को राज्य सरकार गंभीरता से लेकर प्रभावी ढंग से लागू करने का प्रयास करेगी।
राज्य नीति आयोग के नवनियुक्त उपाध्यक्ष श्री गणेश शंकर मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री साय के नेतृत्व में प्रदेश निरंतर विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि बेहतर और भविष्योन्मुखी नीतियों के माध्यम से छत्तीसगढ़ को अधिक समृद्ध और विकसित बनाने की दिशा में सभी के साथ मिलकर कार्य किया जाएगा।
इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, वन मंत्री श्री केदार कश्यप, विधायक सुश्री लता उसेंडी, विधायक श्री अमर अग्रवाल, महापौर धमतरी श्री रामू रोहरा, राज्य नीति आयोग के सदस्य डॉ. के. सुब्रह्मण्यम, सदस्य सचिव श्री आशीष भट्ट, सचिव श्री भुवनेश यादव सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
पटना। बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। लगभग दो दशकों तक राज्य की सत्ता संभालने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 5 मार्च 2026 को राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल कर दिया, जिसके बाद राज्य की राजनीति में नए समीकरण बनने की चर्चा तेज हो गई है। उनके इस निर्णय को जहां वे अपनी व्यक्तिगत संसदीय यात्रा की अधूरी इच्छा से जोड़ रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक रणनीति और जनादेश के साथ विश्वासघात बता रहा है।
नीतीश कुमार ने अपने इस फैसले को लेकर सोशल मीडिया के माध्यम से स्पष्ट किया कि उनकी लंबे समय से इच्छा थी कि वे बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों (विधानसभा और विधान परिषद) और संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के सदस्य रहें।
वे पहले ही तीन सदनों के सदस्य रह चुके हैं, इसलिए राज्यसभा जाना उनकी इस राजनीतिक यात्रा को पूर्ण करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने से बिहार की सत्ता संरचना में बड़ा बदलाव संभव है। करीब 20 वर्षों तक मुख्यमंत्री रहने के बाद उनके पद छोड़ने से भाजपा को बिहार में अपना मुख्यमंत्री बनाने का अवसर मिल सकता है।
सूत्रों के अनुसार यह कदम भाजपा और जदयू के बीच हुए बड़े राजनीतिक समझौते का हिस्सा भी माना जा रहा है।
इस घटनाक्रम के बीच यह भी चर्चा तेज है कि नीतीश कुमार अपने बेटे निशांत कुमार को सक्रिय राजनीति में उतारने की तैयारी कर रहे हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि उन्हें जदयू में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है और नई सरकार में उपमुख्यमंत्री पद भी मिल सकता है।
नीतीश कुमार ने कहा है कि मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद भी वे नई सरकार को अपना सहयोग और मार्गदर्शन देते रहेंगे और गठबंधन की मजबूती के लिए काम करेंगे।
नीतीश कुमार के इस फैसले पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने इसे बिहार में “महाराष्ट्र जैसा खेल” बताते हुए आरोप लगाया कि भाजपा ने सत्ता परिवर्तन की रणनीति के तहत यह कदम उठाया है।
वहीं आरजेडी के राज्यसभा सांसद मनोज कुमार झा ने इसे “Kidnapping with consent” यानी “सहमति से अपहरण” की संज्ञा दी।
विपक्ष का कहना है कि 2025 के विधानसभा चुनाव में जनता से नीतीश कुमार के चेहरे पर वोट मांगे गए थे, ऐसे में बीच कार्यकाल में उनका पद छोड़ना जनता के जनादेश के साथ विश्वासघात है।
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि बिहार विधानसभा में अब भाजपा के विधायक जदयू से अधिक (भाजपा 85, जदयू 77) हैं। ऐसे में भाजपा लंबे समय से राज्य में अपना मुख्यमंत्री बनाने की इच्छुक थी और यह घटनाक्रम उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा जा रहा है कि स्वास्थ्य संबंधी कारणों से भी नीतीश कुमार सक्रिय प्रशासनिक जिम्मेदारी से पीछे हटना चाहते थे।
वहीं उनके इस अचानक फैसले से जदयू कार्यकर्ताओं में भी असंतोष देखने को मिला और पटना में पार्टी कार्यालय के बाहर कुछ कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन भी किया।
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की स्थिति में बिहार के अगले मुख्यमंत्री को लेकर भाजपा खेमे में कई नाम चर्चा में हैं।
मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदारों में शामिल हैं —
1. सम्राट चौधरी – वर्तमान उपमुख्यमंत्री और भाजपा के मजबूत ओबीसी चेहरा, जिन्हें सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा है।
2. नित्यानंद राय – केंद्रीय गृह राज्य मंत्री और अमित शाह के करीबी नेता, यादव समुदाय से आने के कारण सामाजिक समीकरण में महत्वपूर्ण।
3. विजय कुमार सिन्हा – वर्तमान उपमुख्यमंत्री और विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष, संगठन व प्रशासनिक अनुभव के कारण मजबूत विकल्प।
4. दिलीप कुमार जायसवाल – बिहार सरकार में मंत्री और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष।
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री पद भाजपा के पास रह सकता है, जबकि जदयू को दो उपमुख्यमंत्री पद दिए जाने की संभावना भी जताई जा रही है।
बिहार में राज्यसभा की 5 सीटों के लिए चुनाव 16 मार्च 2026 को होना तय है।
नामांकन की अंतिम तिथि 5 मार्च थी और कुल 6 उम्मीदवारों ने पर्चा दाखिल किया है, जिससे चुनाव रोचक होने की संभावना बढ़ गई है।
एनडीए ने अपनी ओर से 5 उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं —
नीतीश कुमार (JD-U)
नितिन नबीन (BJP)
शिवेश कुमार राम (BJP)
रामनाथ ठाकुर (JD-U)
उपेन्द्र कुशवाहा (RLM)
वहीं आरजेडी ने पांचवीं सीट के लिए अपना उम्मीदवार उतारकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है, हालांकि संख्या बल के लिहाज से एनडीए की स्थिति मजबूत मानी जा रही है।
ये सीटें हरिवंश नारायण सिंह, रामनाथ ठाकुर, प्रेमचंद गुप्ता, अमरेंद्र धारी सिंह और उपेंद्र कुशवाहा का कार्यकाल पूरा होने के कारण रिक्त हो रही हैं।
राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए कम से कम 41 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता है।
एनडीए के पास चार सीटें जीतने का स्पष्ट गणित मौजूद है, जबकि पांचवीं सीट को लेकर मुकाबला दिलचस्प हो सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार का राज्यसभा की ओर यह कदम केवल व्यक्तिगत संसदीय यात्रा का विस्तार नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत भी साबित हो सकता है। अब सबकी नजर भाजपा नेतृत्व के अंतिम निर्णय और बिहार के अगले मुख्यमंत्री के नाम पर टिकी हुई है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आज 5 मार्च 2026 (गुरुवार) को राजधानी रायपुर में विभिन्न बैठकों और कार्यक्रमों में व्यस्त कार्यक्रम निर्धारित है। जारी आधिकारिक दौरा कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री सुबह से दोपहर तक भाजपा प्रदेश कार्यालय, विधानसभा और राज्य नीति आयोग में महत्वपूर्ण बैठकों में भाग लेंगे।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री सुबह 9:40 बजे मुख्यमंत्री निवास, सिविल लाइन रायपुर से कार द्वारा प्रस्थान करेंगे। इसके बाद वे सुबह 9:55 बजे भाजपा प्रदेश कार्यालय, कुशाभाऊ ठाकरे परिसर, बोरियाकला रायपुर पहुंचेंगे, जहां उनका आगमन एवं संक्षिप्त प्रवास निर्धारित है।
इसके पश्चात मुख्यमंत्री सुबह 10:00 बजे भाजपा प्रदेश कार्यालय से प्रस्थान कर सुबह 10:20 बजे छत्तीसगढ़ विधानसभा, सेक्टर-19, नवा रायपुर अटल नगर पहुंचेंगे। यहां वे दोपहर 12:30 बजे तक विधानसभा में निर्धारित कार्यक्रमों में शामिल रहेंगे।
विधानसभा में कार्यक्रम समाप्त होने के बाद मुख्यमंत्री दोपहर 12:30 बजे नवा रायपुर से प्रस्थान कर 12:35 बजे छत्तीसगढ़ राज्य नीति आयोग, नॉर्थ ब्लॉक, सेक्टर-19, नवा रायपुर अटल नगर पहुंचेंगे, जहां वे आयोग से जुड़े कार्यों और बैठकों में भाग लेंगे।
इसके बाद मुख्यमंत्री दोपहर 1:05 बजे राज्य नीति आयोग से प्रस्थान करेंगे और दोपहर 1:35 बजे मुख्यमंत्री निवास, सिविल लाइन रायपुर पहुंचेंगे।
मुख्यमंत्री के इस दौरे को शासन और संगठन दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण बैठकों और समन्वय के रूप में देखा जा रहा है। राजधानी रायपुर में आज होने वाली इन बैठकों में विधानसभा संबंधी कार्यों, नीतिगत मुद्दों और संगठनात्मक गतिविधियों पर चर्चा होने की संभावना है।
रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ पूरे उत्साह और उमंग के साथ होली का पर्व मनाया। पारंपरिक फाग गीतों और हर्षोल्लास के वातावरण में रंग और उल्लास से सराबोर इस अवसर पर सभी ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएँ दीं। अधिकारियों और कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री श्री साय को गुलाल लगाकर उन्हें बधाई दी, वहीं मुख्यमंत्री श्री साय ने भी आत्मीयता के साथ सभी को गुलाल लगाकर रंगोत्सव की शुभकामनाएँ दीं और स्नेह, विश्वास तथा आपसी भाईचारे का संदेश दिया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि आपसी प्रेम, सद्भाव और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। यह पर्व समाज में एकता, भाईचारे और सकारात्मकता की भावना को सुदृढ़ करता है तथा जीवन में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के पर्व हमें आपसी मतभेद भुलाकर मिल-जुलकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज मुख्यमंत्री निवास में आयोजित होली मिलन समारोह में सभी से आत्मीय भेंट कर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हुई। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों, साथियों और प्रदेशवासियों के साथ स्नेह, विश्वास और अपनत्व के रंग साझा करना इस पर्व की सबसे बड़ी विशेषता है। उन्होंने कहा कि प्रदेशवासियों का स्नेह और आशीर्वाद ही जनसेवा के उनके संकल्प को और अधिक सशक्त बनाता है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हुए सभी को होली की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि रंगों का यह पावन पर्व सभी के जीवन में सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और नई ऊर्जा का संचार करे तथा हमारा छत्तीसगढ़ निरंतर विकास और खुशहाली के नए आयाम स्थापित करता रहे।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, पुलिस महानिदेशक श्री अरुण देव गौतम, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्री अमित कुमार, रायपुर के पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला सहित मुख्यमंत्री सचिवालय एवं निवास कार्यालय के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।
राज्यसभा चुनाव: छत्तीसगढ़ से भाजपा ने लक्ष्मी वर्मा तो कांग्रेस ने फूलो देवी नेताम पर जताया भरोसा, 9 अप्रैल को होगा मतदान
दुर्ग/रायपुर। आगामी 9 अप्रैल को होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए छत्तीसगढ़ की राजनीति में सरगर्मी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी ओर से लक्ष्मी वर्मा को उम्मीदवार बनाया है, वहीं अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (कांग्रेस) ने अपनी वर्तमान सांसद फूलो देवी नेताम को एक बार फिर मैदान में उतारते हुए उन पर भरोसा जताया है। दोनों दलों की ओर से घोषित इन नामों के साथ राज्यसभा चुनाव का राजनीतिक समीकरण लगभग स्पष्ट माना जा रहा है।
भाजपा की उम्मीदवार लक्ष्मी वर्मा: संगठन और सामाजिक समीकरण का संतुलन
भाजपा ने छत्तीसगढ़ से खाली हो रही दो राज्यसभा सीटों में से एक के लिए लक्ष्मी वर्मा के नाम की घोषणा की है। लक्ष्मी वर्मा वर्तमान में छत्तीसगढ़ भाजपा की प्रदेश उपाध्यक्ष हैं और पूर्व में छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य भी रह चुकी हैं।
राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से उनका चयन भाजपा की रणनीतिक सोच को भी दर्शाता है। लक्ष्मी वर्मा कुर्मी समाज (ओबीसी वर्ग) से आती हैं, जिसे प्रदेश में एक प्रभावशाली सामाजिक वर्ग माना जाता है। पार्टी के इस निर्णय को ओबीसी वर्ग और महिला मतदाताओं यानी “मातृ शक्ति” को संदेश देने के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक अनुभव की बात करें तो लक्ष्मी वर्मा रायपुर जिला पंचायत की पूर्व अध्यक्ष रह चुकी हैं और लंबे समय से संगठन में सक्रिय भूमिका निभाते हुए भाजपा के विभिन्न कार्यक्रमों और अभियानों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाती रही हैं।
कांग्रेस ने फूलो देवी नेताम पर दोबारा जताया भरोसा
वहीं कांग्रेस ने अपनी मौजूदा राज्यसभा सांसद फूलो देवी नेताम को दूसरी बार उम्मीदवार बनाकर उन पर भरोसा दोहराया है। फूलो देवी नेताम का वर्तमान राज्यसभा कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 को समाप्त हो रहा है।
फूलो देवी नेताम छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र से आती हैं और कांग्रेस की ओर से एक प्रमुख आदिवासी महिला चेहरा मानी जाती हैं। उन्होंने वर्ष 1994 में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी और इसके बाद उन्होंने संगठन व जनप्रतिनिधि के रूप में कई जिम्मेदारियां निभाईं।
वह छत्तीसगढ़ महिला कांग्रेस की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं और पूर्व में विधायक के रूप में भी अपनी भूमिका निभा चुकी हैं। आदिवासी समाज और महिला नेतृत्व के प्रतिनिधित्व के लिहाज से कांग्रेस का यह निर्णय महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राज्यसभा चुनाव का गणित लगभग स्पष्ट
छत्तीसगढ़ से राज्यसभा की दो सीटें खाली हो रही हैं, जिनमें के.टी.एस. तुलसी और फूलो देवी नेताम का कार्यकाल समाप्त हो रहा है।
90 सदस्यीय छत्तीसगढ़ विधानसभा में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए कम से कम 31 प्रथम वरीयता मतों की आवश्यकता होती है। वर्तमान में विधानसभा में भाजपा के 54 विधायक और कांग्रेस के 35 विधायक हैं। इस संख्या बल को देखते हुए राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दोनों प्रमुख दलों का एक-एक सीट जीतना लगभग तय माना जा रहा है।
राजनीतिक संदेश भी अहम
राजनीतिक जानकारों के अनुसार इस बार के उम्मीदवार चयन में दोनों दलों ने सामाजिक प्रतिनिधित्व और क्षेत्रीय संतुलन को प्राथमिकता दी है। भाजपा ने ओबीसी महिला नेतृत्व को आगे बढ़ाने का संकेत दिया है, वहीं कांग्रेस ने आदिवासी महिला नेतृत्व को पुनः राज्यसभा में भेजने का निर्णय लिया है।
ऐसे में 9 अप्रैल को होने वाला राज्यसभा चुनाव भले ही गणितीय रूप से लगभग तय दिखाई दे रहा हो, लेकिन सामाजिक और राजनीतिक संदेश के लिहाज से यह चुनाव प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
