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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ शासन लोक निर्माण विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ के रजत जयंती महोत्सव के विशेष अवसर पर राज्य के विभिन्न जिलों में महत्वपूर्ण सड़क निर्माण के कार्यों को कराने के लिए स्वीकृति जारी की जा रही है। इसके तहत रजत जयंती के विशेष मौके पर बेमेतरा जिले के अंतर्गत हाल ही में दो सड़कों के निर्माण कार्य के 47 करोड़ 5 लाख 44 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। स्वीकृत कार्यों में बेमेतरा जिले के अंतर्गत देवकर साजा खम्हरिया मार्ग लम्बाई 31.60 किलोमीटर के लिए 31 करोड़ 11 लाख 43 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। इसी प्रकार से बेरला से कोदवा देवरबीजा करमू मार्ग लम्बाई 22 किलोमीटर के लेन मजबूतीकरण कार्य के लिए 15 करोड़ 94 लाख एक हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। इन मार्गों के कार्य क्षेत्रीय लोगों के आवागमन के लिए अति महत्वपूर्ण है। इन कार्यों की स्वीकृति मिलने से सड़क निर्माण कार्य शीघ्र होने से लोगो को सुविधा होगी।
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में माघ मेले के दौरान कथित दुर्व्यवहार के बाद ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद धरने पर बैठ गए हैं और लगातार प्रशासन व सरकार पर तीखे आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने ऐलान किया है कि वे 10 मार्च को साधुओं के साथ दिल्ली जाएंगे। शंकराचार्य ने कहा कि गंगा किसी सरकार की नहीं, बल्कि हर सनातनी की मां है, और गंगा में स्नान के लिए किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि संगम में स्नान के लिए जब वे अपने शिविर से निकले तो उन्हें रोका गया और उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने उनके लोगों को उनसे अलग कर दिया, अलग-अलग जगहों पर घुमाया और अंततः जहां उन्हें छोड़ दिया गया, वहीं वे अब धरने पर बैठे हैं। स्नान की अनुमति के सवाल पर उन्होंने कहा कि क्या गंगा किसी कंपनी के नाम पर पंजीकृत है, जो उसे किसी की पैतृक संपत्ति बना दिया गया है। सूचना देने के सवाल पर उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन को तीन दिन पहले ही जानकारी दे दी गई थी।
शंकराचार्य ने आगे कहा कि शंकराचार्य शास्त्रों और धर्म के अनुसार बोलते हैं, इसलिए जब उनकी बातें समाज में प्रभाव डालने लगती हैं तो उनकी उपेक्षा या अपमान किया जाता है। उन्होंने सरकार और राजनीतिक दलों पर आरोप लगाया कि गोहत्या के जरिए पैसा कमाया जा रहा है, और उन्हें डर है कि अगर गोहत्या बंद हो गई तो उनका चंदा बंद हो जाएगा। इसी वजह से, उनके अनुसार, उन पर दबाव बनाया जा रहा है कि वे मेला छोड़ दें, ताकि सच्चाई और गोरक्षा की आवाज दबाई जा सके।
भिलाई। छत्तीसगढ़ के औद्योगिक नगर भिलाई में सोमवार, 19 जनवरी 2026 को जीएसटी विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए हरिओम इन्गोट्स एंड पावर लिमिटेड के परिसरों पर छापा मारा। यह कार्रवाई शाम करीब 4:30 बजे शुरू हुई, जब राज्य जीएसटी विभाग की 7 सदस्यीय टीम दो वाहनों में सवार होकर भिलाई के छावनी क्षेत्र स्थित लाइट इंडस्ट्रियल एरिया (प्लॉट नंबर 59-60) में कंपनी परिसर पहुंची। इसके बाद कंपनी के दफ्तरों और रिकॉर्ड रूम में दस्तावेजों की गहन जांच शुरू की गई, जो देर शाम तक जारी रही।
सूत्रों के अनुसार, जीएसटी अधिकारियों ने कंपनी के बिल, बिक्री चालान, जीएसटी रिटर्न (GSTR-3B और GSTR-1), खरीद-बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय दस्तावेज अपने कब्जे में लेकर उनकी जांच शुरू की है। जांच का मुख्य फोकस इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के दावों की सत्यता, स्टॉक मिलान, बिना बिल के लेनदेन और संभावित टैक्स चोरी पर है। विभाग यह भी पड़ताल कर रहा है कि कहीं फर्जी इनवॉइस के जरिए ITC का गलत लाभ तो नहीं लिया गया।
छापेमारी के दौरान कंपनी का औद्योगिक संचालन सामान्य रूप से जारी रहा। हालांकि जांच के कारण कुछ विभागों में कामकाज धीमा जरूर रहा। कर्मचारियों से पूछताछ की गई और उनसे संबंधित फाइलें व डिजिटल रिकॉर्ड मंगवाए गए। जानकारी के अनुसार, कार्रवाई के समय कंपनी के मालिक अग्रवाल परिवार राज्य से बाहर थे। उनकी अनुपस्थिति में कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी और अकाउंट्स स्टाफ जीएसटी टीम को पूरा सहयोग करते हुए आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध करा रहे हैं, जबकि अधिकारियों द्वारा कर्मचारियों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं।
हरिओम इन्गोट्स एंड पावर लिमिटेड वर्ष 2004 से संचालित एक प्रमुख औद्योगिक इकाई है, जो लोहे के इन्गोट्स और धातु उत्पादों के निर्माण के साथ-साथ पावर सेक्टर से भी जुड़ा कारोबार करती है। कंपनी के प्रबंधन में अनूप अग्रवाल, भगवान दास अग्रवाल और संतोष कुमार अग्रवाल जैसे निदेशक शामिल हैं। भिलाई की प्रमुख औद्योगिक इकाइयों में गिनी जाने वाली इस कंपनी में चल रही जीएसटी जांच से औद्योगिक जगत में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
जीएसटी विभाग की ओर से अब तक इस कार्रवाई को लेकर कोई आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी नहीं की गई है। हालांकि विभागीय सूत्रों का कहना है कि दस्तावेजों का सत्यापन अभी जारी है, इसलिए फिलहाल किसी निश्चित टैक्स चोरी की राशि का खुलासा नहीं किया गया है। यह भी संकेत दिए गए हैं कि जांच मंगलवार, 20 जनवरी को भी जारी रह सकती है और जरूरत पड़ने पर कंपनी से जुड़े अन्य ठिकानों की भी पड़ताल की जा सकती है।
उल्लेखनीय है कि हाल के दिनों में जीएसटी विभाग ने कर चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के खिलाफ राज्यभर में अभियान तेज कर दिया है। भिलाई, दुर्ग और रायपुर जैसे बड़े औद्योगिक क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी जा रही है। इस कार्रवाई से यह स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आने वाले दिनों में कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
भिलाई। संत शिरोमणि गुरु रविदास महाराज की जयंती को छत्तीसगढ़ में भव्य और ऐतिहासिक स्वरूप देने की तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ सर्व रविदास समाज की राज्य स्तरीय महत्वपूर्ण बैठक 18 जनवरी 2026 को फेडरेशन भवन, सेक्टर-4, भिलाई में सफलतापूर्वक आयोजित की गई, जिसमें फरवरी 2026 के प्रथम सप्ताह में रायपुर में प्रस्तावित राज्य स्तरीय विशाल जयंती महासम्मेलन की रूपरेखा तय की गई।
बैठक की अध्यक्षता संस्था के प्रदेश अध्यक्ष प्रो. डॉ. के. एल. तांडेकर ने की, जबकि संयोजन श्री बालाराम कोलते ने किया। ऑल PSU एससी/एसटी फेडरेशन के चेयरमैन श्री सुनील रामटेके मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि 1 फरवरी 2026 (माघ पूर्णिमा) को संत शिरोमणि रविदास महाराज की जयंती के अवसर पर रायपुर में आयोजित महासम्मेलन में केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री श्री रामदास आठवले, अन्य केंद्रीय नेता तथा छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय सहित राज्य मंत्रिमंडल को आमंत्रित किया जाएगा।
बैठक में यह भी तय किया गया कि महासम्मेलन के दौरान प्रदेश की महिला एवं युवा इकाई का गठन किया जाएगा, जिससे समाज की महिलाएं और युवा संगठित होकर संत रविदास महाराज के समानता, भक्ति, सामाजिक न्याय और मानवता के संदेश को आगे बढ़ा सकें। कार्यक्रम को सामाजिक समरसता और समाज के सशक्तिकरण का बड़ा मंच बनाने पर विशेष जोर दिया गया।
इस राज्य स्तरीय बैठक में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए, जिनमें आर. पी. लांजकर (कन्नौज सर), आशा मनघटे, आरती मराठे, अशर्फी देवी, चौहान मैडम सहित नारी शक्ति प्रतिनिधि, पारस झाड़े, बलराम कोलते, महेश चौहान, पुरुषोत्तम मालेकर, हरिश्चंद्र टांडेकर, महेश चंद्र कटारे, रोशनी भोंडेकर, देवेंद्र चौहान, गांधी तनय, रामदास मालेकर, राहुल बर्वे, प्रवीण चौहान, राम प्रकाश आनंद हटीले, कवर्धा से रामकुमार व संतुराम लहरी तथा रायपुर जिला अध्यक्ष कुंभारे अपनी टीम के साथ प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
बैठक में सर्वसम्मति से यह संकल्प लिया गया कि प्रस्तावित महासम्मेलन समाज की एकता, भाईचारे और संगठनात्मक मजबूती का ऐतिहासिक उदाहरण बनेगा। उपस्थित सभी प्रतिनिधियों ने समाज के लोगों से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर संत शिरोमणि गुरु रविदास महाराज के जीवन दर्शन, समता और सामाजिक न्याय के विचारों को अपनाने की अपील की।
भिलाई। छत्तीसगढ़ में सामने आए कथित धान घोटाले को लेकर कांग्रेस ने सोमवार को भिलाई में बेहद अनोखे, व्यंग्यात्मक और राजनीतिक रूप से तीखे अंदाज़ में विरोध दर्ज कराया। जिला कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश चंद्राकर और ब्लॉक कांग्रेस कमेटी नर्सिंग नाथ के नेतृत्व में निकाली गई “चूहा सम्मान रैली” ने पूरे शहर का ध्यान खींच लिया। शाम करीब 4:30 बजे शुरू हुई यह रैली सरकार पर निशाना साधने के साथ-साथ भ्रष्टाचार के आरोपों को जनता के सामने प्रतीकात्मक तरीके से रखने का माध्यम बनी।
करीब 2 किलोमीटर लंबी पदयात्रा राजेंद्र प्रसाद चौक से शुरू होकर सुपेला घड़ी चौक तक निकाली गई। रैली में भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव, जिला व ब्लॉक कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, पार्षद और सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल हुए। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार करोड़ों रुपये के धान नुकसान की जिम्मेदारी “चूहों” पर डालकर असली दोषियों को बचाने की कोशिश कर रही है।
रैली के दौरान व्यंग्यात्मक अंदाज़ में “सबसे ज्यादा धान खाने वाले चूहों” के नामों की घोषणा कर उन्हें प्रतीकात्मक सम्मान दिया गया। कांग्रेस ने कवर्धा जिले के चूहे को प्रथम, महासमुंद को द्वितीय, गोरिल्ला जिले को तृतीय, जबकि बेमेतरा जिले के चूहे को सांत्वना पुरस्कार देने की घोषणा की। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यह व्यंग्य दरअसल उस सरकारी तर्क पर करारा प्रहार है, जिसमें करोड़ों रुपये के धान के नुकसान को चूहों की करतूत बताया जा रहा है।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश चंद्राकर ने सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि “भ्रष्टाचार छुपाने के लिए चूहों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है।” उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में सरकारी तंत्र भ्रष्टाचार में लिप्त है और जब सवाल उठते हैं, तो जवाबदेही तय करने के बजाय हास्यास्पद बहाने गढ़े जाते हैं। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि चूहों ने धान खाकर “विश्व रिकॉर्ड” बना दिया है, इसलिए कांग्रेस ने उन्हें सम्मानित करने का फैसला किया।
विधायक देवेंद्र यादव ने कहा कि जनता इतनी भोली नहीं है कि एक जिले में 7 करोड़ और दूसरे जिले में 5 करोड़ रुपये का धान चूहों द्वारा खा जाने की कहानी पर विश्वास कर ले। उन्होंने इसे गरीब किसानों के साथ धोखा बताते हुए कहा कि यह रैली सरकार के झूठ और भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए निकाली गई है, ताकि सच्चाई जनता के सामने आ सके।
रैली के समापन पर कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने छावनी एसडीएम हेमंत पिज्जा को ज्ञापन सौंपते हुए पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच, दोषियों के नाम सार्वजनिक करने और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। कांग्रेस ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस मामले में पारदर्शिता नहीं दिखाई, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
इस विरोध प्रदर्शन में अरुण सिंह सिसोदिया, अतुल साहू, गिरवर बंटी साहू, संदीप निरंकारी, ब्लॉक अध्यक्ष जी. राजू, गुड्डू खान, सौरभ दत्ता, दिनेश पटेल, केशव चौबे, लालचंद वर्मा, आदित्य सिंह, अंजू सिन्हा, राजेश साहू, फ़ारूक़ खान, संजीत चक्रवर्ती, मो. रफ़ीक़ खान, आनंद डोंगरे, रज़ा सिद्धकी सहित बड़ी संख्या में जिला, ब्लॉक और मोर्चा संगठनों के पदाधिकारी व कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
कांग्रेस ने साफ किया कि यह आंदोलन सिर्फ एक प्रतीक नहीं, बल्कि किसानों के हक, पारदर्शिता और जवाबदेही की लड़ाई है, जो जरूरत पड़ने पर प्रदेशभर में और व्यापक रूप ले सकती है।
भिलाई। सेल (SAIL) स्थापना दिवस के गौरवशाली अवसर पर भिलाई इस्पात प्रबंधन द्वारा 24 जनवरी 2026 (शनिवार) को एक भव्य संगीतमय संध्या ‘साधना सरगम नाईट’ का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम भिलाई क्लब स्थित क्रिस्टल गार्डन में सायं 7:30 बजे से प्रारंभ होगा। क्रीड़ा, सांस्कृतिक एवं नागरिक सुविधाएँ विभाग के तत्वावधान में आयोजित इस विशेष आयोजन में भारतीय फिल्म संगीत जगत की सुप्रसिद्ध, मधुर स्वर की धनी एवं अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त पार्श्व गायिका सुश्री साधना सरगम अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से श्रोताओं को भावविभोर करेंगी।
इस संगीतमय संध्या में सुश्री साधना सरगम द्वारा 90 के दशक से लेकर वर्तमान तक की सुपरहिट फिल्मों में गाए गए अनेक लोकप्रिय और यादगार गीतों की प्रस्तुति दी जाएगी। उनके स्वर में सजे वे कालजयी गीत, जिन्होंने भारतीय सिनेमा संगीत को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया और करोड़ों संगीतप्रेमियों के दिलों में अपनी अमिट छाप छोड़ी, भिलाई की इस शाम को सुर, लय और उल्लास से भर देंगे।
कार्यक्रम को और अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संगतकार वादक कलाकार भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। सुश्री साधना सरगम अपने चर्चित गीतों को विशेष सुरमयी अंदाज़ में प्रस्तुत करेंगी, जिससे संपूर्ण वातावरण संगीतमय ऊर्जा और भावनात्मक रंगों से सराबोर हो उठेगा।
विगत कई वर्षों से इस्पात नगरी भिलाई के संगीतप्रेमी नागरिकों के बीच सुश्री साधना सरगम की अविस्मरणीय गायकी के प्रति गहरी रुचि और अनुराग को ध्यान में रखते हुए भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन ने इस आयोजन को संगीत सुधिजनों को समर्पित किया है। उल्लेखनीय है कि इस कार्यक्रम में प्रवेश पूर्णतः निःशुल्क रखा गया है, ताकि अधिक से अधिक संगीतप्रेमी इस यादगार संगीतमय संध्या का आनंद ले सकें।
वैशालीनगर विधायक रिकेश सेन का दो टूक—किसी भी कीमत पर नहीं खुलने देंगे बार
भिलाई। शौर्यपथ
जुनवानी मार्ग पर रानी अवंती बाई सरोवर के समीप प्रस्तावित बार (टीडीएस शाखा) को लेकर क्षेत्र में जबरदस्त बवाल मच गया है। स्थानीय नागरिकों की आपत्ति अब सीधे शासन के उच्च स्तर तक पहुंच चुकी है। जनदर्शन में शिकायत लेकर पहुंचे रहवासियों को वैशालीनगर विधायक रिकेश सेन ने स्पष्ट शब्दों में भरोसा दिलाया कि जनभावनाओं के खिलाफ किसी भी हालत में बार नहीं खुलने दिया जाएगा।
बताया गया है कि जिस काम्प्लेक्स में बार खोलने की चर्चा है, उसी के ग्राउंड फ्लोर पर बैंक संचालित है और आसपास स्कूल, कॉलेज, मंदिर एवं घनी आबादी मौजूद है। जुनवानी मार्ग पर प्रतिदिन हजारों लोगों की आवाजाही रहती है, ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में बार खोले जाने की सूचना से नागरिकों में आक्रोश है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बार खुलने से देर रात तक असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगेगा, जिससे क्षेत्र की शांति, सुरक्षा और सामाजिक माहौल पर गंभीर असर पड़ेगा। अपराध बढ़ने की भी आशंका जताई गई है।
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए विधायक रिकेश सेन ने तत्काल आबकारी विभाग के सचिव से चर्चा की और उन्हें पत्र लिखकर जुनवानी मार्ग स्थित रानी अवंती बाई सरोवर के पास बार (टीडीएस ब्रांच) का लाइसेंस न देने की स्पष्ट मांग की। विधायक सेन ने कहा कि यह इलाका धार्मिक, शैक्षणिक और आवासीय दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है और यहां इस प्रकार की गतिविधि जनहित के खिलाफ है।
उन्होंने दो टूक कहा—“जनता की सुरक्षा, शांति और सामाजिक मर्यादा से कोई समझौता नहीं होगा। जुनवानी में बार खोलने की इजाजत किसी भी सूरत में नहीं दी जाएगी।” अब पूरे मामले पर आबकारी विभाग की अंतिम कार्रवाई का इंतजार है, लेकिन विधायक के कड़े रुख के बाद क्षेत्रवासियों को राहत की उम्मीद बंधी है।
आचार्य विद्यासागर जी महाराज की कृति के नाम पर ट्रेन का हुआ नामकरण, जैन समाज में हर्ष
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा द्वारा आज ‘मूकमाटी एक्सप्रेस’ को रायपुर रेलवे स्टेशन से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। जैन समाज के महान संत आचार्य विद्यासागर जी महाराज की कालजयी कृति मूकमाटी के नाम पर केंद्र सरकार द्वारा रायपुर - जबलपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस का नामकरण ‘मूकमाटी एक्सप्रेस’ के रूप में किया गया है।
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि आचार्य विद्यासागर जी महाराज ने अपने तप, त्याग और विचारों से समाज को नई दिशा दी। गुरुदेव के देह त्याग का सौभाग्य छत्तीसगढ़ की पावन भूमि मां बमलेश्वरी की धरती डोंगरगढ़ को प्राप्त हुआ, जो पूरे प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि मूकमाटी एक्सप्रेस का शुभारंभ छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना को राष्ट्रीय पटल पर सशक्त रूप से स्थापित करता है।
उपमुख्यमंत्री शर्मा ने इस अवसर पर यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह तथा रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव भी निरंतर गुरुदेव विद्यासागर जी के विचारों से प्रेरणा लेते रहे हैं। छत्तीसगढ़ से इस ट्रेन का शुभारंभ होना प्रदेशवासियों के लिए आत्मगौरव का क्षण है।
ट्रेन के परिचालन से पूर्व अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठाचार्य ज्योतिषाचार्य पंडित अजीत शास्त्री द्वारा मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना की गई। कार्यक्रम में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के एडवाइजरी पैनल सदस्य प्रकाश मोदी, रायपुर वाणिज्य रेल प्रबंधक अवधेश त्रिपाठी, एसईसीआर के वरिष्ठ अधिकारी राकेश सिंह, सकल दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष विनोद जैन, नरेंद्र गुरुकृपा, डीआरयूसीसी सदस्य लोकेश चंद्रकांत जैन सहित बड़ी संख्या में जैन समाज के प्रबुद्धजन एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
वादा 2022 का, अब 2027 में रफ्तार—भारत-जापान बुलेट ट्रेन 12 साल बाद पटरी पर दौड़ने की तैयारी
नई दिल्ली/अहमदाबाद।
भारत की पहली बुलेट ट्रेन—मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर (MAHSR)—एक बार फिर समयरेखा के कारण चर्चा में है। जिस परियोजना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज़ादी की 75वीं वर्षगांठ यानी 15 अगस्त 2022 तक शुरू करने का लक्ष्य रखा था, वह अब संशोधित कार्यक्रम के अनुसार 15 अगस्त 2027 को आंशिक रूप से शुरू होने की ओर बढ़ रही है। यानी, वादे और वास्तविक शुरुआत के बीच करीब पाँच साल का अंतर।
समझौता और शिलान्यास
भारत और जापान के बीच इस महत्वाकांक्षी परियोजना का आधिकारिक समझौता 12 दिसंबर 2015 को नई दिल्ली में हुआ था। इस ऐतिहासिक डील पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने हस्ताक्षर किए।
इसके बाद 14 सितंबर 2017 को अहमदाबाद में दोनों प्रधानमंत्रियों ने परियोजना की आधारशिला रखी।
परियोजना का स्वरूप
लंबाई: 508 किलोमीटर (मुंबई–अहमदाबाद)
तकनीक: जापान की विश्वप्रसिद्ध शिंकानसेन (Shinkansen)
लागत (अनुमानित): ₹98,000 करोड़
वित्तपोषण: जापान की JICA द्वारा 81% राशि (करीब ₹79,000 करोड़) 0.1% की बेहद कम ब्याज दर पर ऋण
नोडल एजेंसी: नेशनल हाई-स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL)
समयसीमा में देरी क्यों?
परियोजना की रफ्तार पर सबसे बड़ा असर भूमि अधिग्रहण में देरी, विशेषकर महाराष्ट्र खंड, और कोविड-19 महामारी का पड़ा। इन्हीं कारणों से पहले दिसंबर 2023 की आधिकारिक डेडलाइन भी आगे बढ़ानी पड़ी।
वर्तमान स्थिति (जनवरी 2026)
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, देशवासी 15 अगस्त 2027 को भारत की पहली बुलेट ट्रेन का टिकट खरीद सकेंगे।
अब तक की प्रगति इस प्रकार है:
भौतिक प्रगति: 55.63%
वित्तीय प्रगति: करीब 70% (लगभग ₹85,801 करोड़ खर्च)
वायडक्ट (एलिवेटेड पुल): 332 किमी से अधिक तैयार
पिलर निर्माण: 415 किमी से अधिक पूरा
ट्रैक बेड: 292 ट्रैक किमी (146 रूट किमी) तैयार
स्टेशन: गुजरात के सभी 8 स्टेशन एडवांस स्टेज में
महाराष्ट्र सुरंग: 21 किमी लंबी भूमिगत सुरंग पर काम जारी; 5 किमी खुदाई पूरी, पालघर में पहले पहाड़ी सुरंग का ‘ब्रेकथ्रू’
चरणबद्ध संचालन का प्लान
अगस्त 2027: सूरत–बिलिमोरा (या वापी) के बीच लगभग 100 किमी खंड शुरू
दिसंबर 2029: पूरा 508 किमी कॉरिडोर चालू करने का लक्ष्य
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन भारत-जापान रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक है, लेकिन समयसीमा के मोर्चे पर यह परियोजना लगातार सवालों में रही है। 2017 में किया गया 2022 का वादा अब 2027 में पूरा होने जा रहा है। सरकार का दावा है कि इस बार तय तारीख बदलेगी नहीं—अब देखना यह है कि क्या बुलेट ट्रेन वाकई 15 अगस्त 2027 को भारत की पटरी पर अपनी रफ्तार दिखा पाती है या नहीं।
लेखक - श्री पीयूष गोयल (केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री- भारत सरकार )
स्टार्टअप इंडिया पहल पूरे देश में एक समग्र और नई सोच वाले इकोसिस्टम के रूप में विकसित हुई है। यह युवाओं की उद्यमशील ऊर्जा को रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को तेज करने की दिशा में लगाकर, माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के मिशन को साकार करने का मार्ग तैयार कर रही है।
भारत में आज दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम में से एक मौजूद है। आज उद्यमिता एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन बन चुकी है, जो भारत के आर्थिक परिदृश्य को नया आकार दे रही है और विकास व रोजगार सृजन का नया इंजन बन रही है।
यह परिवर्तन रातोंरात नहीं हुआ। जब प्रधानमंत्री ने 2015 में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से स्टार्टअप इंडिया की घोषणा की, तब उन्होंने एक स्पष्ट और महत्वाकांक्षी दृष्टि रखी कि उद्यमिता देश के हर जिले और हर ब्लॉक तक पहुंचे।
16 जनवरी 2016 को उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) की ओर से शुरू किए जाने के बाद से स्टार्टअप इंडिया ने लंबा सफर तय किया है। स्टार्टअप देश की अर्थव्यवस्था के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नई ऊर्जा भर रहे हैं। आईटी सेवाएं, स्वास्थ्य और जीवन विज्ञान, शिक्षा, कृषि और निर्माण जैसे क्षेत्रों में सबसे अधिक स्टार्टअप सक्रिय हैं। इसके अलावा, जलवायु तकनीक और अवसंरचना सहित 50 से अधिक अन्य उद्योगों में भी नए उद्यम सामने आए हैं। यह व्यापकता विभिन्न क्षेत्रों में नवाचार और मजबूती को दर्शाती है, खासकर उन क्षेत्रों में जो राष्ट्रीय विकास की प्राथमिकताओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
नवाचार और एआई: पिछले एक दशक में एक बड़ा बदलाव नवाचार और गहन तकनीक पर बढ़ते ध्यान के रूप में देखा गया है। वैश्विक नवाचार सूचकांक में भारत की रैंक 2015 में 81वें स्थान से बढ़कर पिछले वर्ष 38वें स्थान पर पहुँच गई है, और गहन तकनीक से जुड़े स्टार्टअप्स को सरकार का समर्थन इसे आगे और बेहतर करेगा। प्रधानमंत्री की डिजिटल इंडिया पहल के आधार पर एआई स्टार्टअप्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
गहन तकनीक वाला राष्ट्र बनाने के प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण के तहत अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन की स्थापना की गई है, तथा इंडिया एआई मिशन और रिसर्च डेवलपमेंट एंड इनोवेशन योजना की शुरुआत की गई है। भारत के स्टार्टअप एयरोनॉटिक्स, एयरोस्पेस और रक्षा, रोबोटिक्स, हरित तकनीक, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में भी नवाचार कर रहे हैं। बौद्धिक संपदा के निर्माण में तेज़ वृद्धि इस प्रवृत्ति को और मजबूत करती है। भारतीय स्टार्टअप्स ने 16,400 से अधिक नए पेटेंट आवेदन दाखिल किए हैं, जो मौलिक नवाचार, दीर्घकालिक मूल्य सृजन और वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर बढ़ते फोकस को दर्शाता है।
अखिल भारतीय विकास: उद्यमिता को देशभर में मिल रहा समर्थन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। वर्ष 2016 में केवल चार राज्यों में स्टार्टअप नीतियां थीं, जबकि आज भारत के 30 से अधिक राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में विशेष स्टार्टअप ढांचे मौजूद हैं। अब हर राज्य और केंद्रशासित प्रदेश में डीपीआईआईटी से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप हैं, जो संस्थागत समर्थन की मजबूती और जमीनी स्तर की भागीदारी को दर्शाता है।
अब तक 2 लाख से अधिक स्टार्टअप्स को मान्यता दी जा चुकी है, जो नीति-आधारित पारिस्थितिकी तंत्र के एक दशक के सतत विकास को दर्शाता है। केवल 2025 में ही 49,400 से अधिक स्टार्टअप्स को मान्यता मिली, जो स्टार्टअप इंडिया की शुरुआत के बाद सबसे अधिक वार्षिक वृद्धि है।
समावेशन इस पूरी यात्रा की एक मजबूत आधारशिला रहा है। महिला नेतृत्व वाले उद्यम एक बड़ी ताकत बनकर उभरे हैं, जहां 45 प्रतिशत से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स में कम से कम एक महिला निदेशक है। इसके अलावा, लगभग आधे स्टार्टअप गैर-मेट्रो शहरों में स्थित हैं, जो नवाचार और रोजगार के नए केंद्र के रूप में टियर-2 और टियर-3 शहरों की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
लोकल से ग्लोबल: जैसे-जैसे भारतीय स्टार्टअप्स का विस्तार हो रहा है, पूरी दुनिया उनके लिए बाज़ार बनती जा रही है। वैश्विक महत्वाकांक्षाओं को समर्थन देने के लिए स्टार्टअप इंडिया ने मजबूत अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां बनाई हैं। अब 21 अंतरराष्ट्रीय ब्रिज और 2 रणनीतिक गठबंधन मौजूद हैं, जो यूके, जापान, दक्षिण कोरिया, स्वीडन और इज़राइल सहित प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बाज़ार तक पहुंच, सहयोग और विस्तार को आसान बनाते हैं। इन पहलों से अब तक 850 से अधिक स्टार्टअप्स लाभान्वित हो चुके हैं।
स्वीडन, स्विट्ज़रलैंड, न्यूज़ीलैंड और इज़राइल की मेरी हालिया यात्राओं में स्टार्टअप्स भारत के व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों का अहम हिस्सा रहे। इन प्रयासों ने वैश्विक मंच पर भारतीय नवाचार को प्रदर्शित करने का अवसर दिया, साथ ही हमारे उद्यमियों को विकसित अर्थव्यवस्थाओं की नवाचार और व्यापारिक कार्यप्रणालियों से परिचित कराया।
सुधार और बाज़ार तक पहुंच: इस विकास को संभव बनाने में कारोबार करने में आसानी सुधारना एक मुख्य आधार रहा है। पात्र स्टार्टअप अपने पहले दस वर्षों में से किसी भी तीन लगातार वर्षों के लिए कर अवकाश का लाभ ले सकते हैं। अब तक 4,100 से अधिक स्टार्टअप्स को इसके लिए पात्रता प्रमाणपत्र मिल चुके हैं।
60 से अधिक नियामकीय सुधारों के माध्यम से अनुपालन का बोझ कम किया गया है, पूंजी जुटाने को आसान बनाया गया है और घरेलू संस्थागत निवेश को मजबूत किया गया है। एंजेल टैक्स को समाप्त करने और वैकल्पिक निवेश कोषों (एटीएफ) के लिए दीर्घकालिक पूंजी के रास्ते खोलने से स्टार्टअप फंडिंग का पारिस्थितिकी तंत्र और सशक्त हुआ है। बाज़ार तक पहुंच को प्राथमिकता दी गई है। सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जैम) के माध्यम से 35,700 से अधिक स्टार्टअप्स को जोड़ा गया है, जिन्हें 51,200 करोड़ से अधिक मूल्य के पांच लाख से ज्यादा ऑर्डर मिले हैं। इन प्रयासों के साथ मजबूत वित्तीय सहयोग भी दिया गया है। स्टार्टअप्स के लिए फंड ऑफ फंड्स योजना के तहत वैकल्पिक निवेश कोषों के जरिए 25,500 करोड़ से अधिक का निवेश किया गया है, जिससे 1,300 से अधिक उद्यमों को लाभ मिला है। इसके अलावा, स्टार्टअप्स के लिए क्रेडिट गारंटी योजना के अंतर्गत 800 करोड़ से अधिक के बिना जमानत ऋण की गारंटी दी गई है।
945 करोड़ के परिव्यय वाली स्टार्टअप इंडिया सीड फंड योजना के तहत स्टार्टअप्स को कॉन्सेप्ट की जाँच, प्रोटोटाइप विकास, उत्पाद परीक्षण, बाज़ार में प्रवेश और व्यवसायीकरण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
सांस्कृतिक बदलाव: भारतीय स्टार्टअप्स ने देश में एक बड़ा सांस्कृतिक परिवर्तन लाया है। पहले बच्चों को मुख्य रूप से सरकारी नौकरी, इंजीनियरिंग या चिकित्सा जैसे कुछ ही क्षेत्रों में जाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता था। आज कई युवा नौकरी तलाशने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बनने का सपना देख रहे हैं, और उनके परिवार भी उद्यमशील आकांक्षाओं का सम्मान करते हैं और उन्हें बढ़ावा देते हैं।
अंततः भारत की स्टार्टअप यात्रा: हमारे युवा उद्यमियों पर विश्वास, नीति-आधारित विकास और दुनिया के लिए नवाचार करने की भारत की क्षमता की कहानी है। 2047 तक एक विकसित देश बनने के अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए, स्टार्टअप्स समृद्ध, समावेशी और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी भारत के निर्माण में केंद्रीय भूमिका निभाते रहेंगे।
(लेखक केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री हैं)
बिलासपुर / शौर्यपथ।
देश की ऊर्जा सुरक्षा, संस्थागत सुधार और दीर्घकालिक रणनीतिक दिशा को मजबूती देने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए कोल इंडिया लिमिटेड की प्रमुख सहायक कंपनी साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) ने बिलासपुर स्थित अपने मुख्यालय में पहली बार ‘चिंतन शिविर’ का आयोजन किया। यह शिविर आत्मनिर्भर भारत के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप एसईसीएल के भविष्य को आकार देने के लिए एक संरचित, सहभागी और नेतृत्व-केंद्रित मंथन मंच के रूप में सामने आया।
यह चिंतन शिविर हाल ही में नई दिल्ली में कोयला मंत्रालय द्वारा आयोजित चिंतन शिविर की पृष्ठभूमि में परिकल्पित किया गया था, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय ऊर्जा प्राथमिकताओं के अनुरूप एसईसीएल की रणनीतिक दिशा को और अधिक सुदृढ़ करना रहा। इस प्रक्रिया की शुरुआत एसईसीएल के परिचालन क्षेत्रों में आंतरिक चिंतन शिविरों से हुई, जिन्हें समेकित करते हुए मुख्यालय स्तर पर व्यापक मंथन किया गया, ताकि संगठन के हर स्तर की सहभागिता और समग्र समीक्षा सुनिश्चित की जा सके।
एसईसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक श्री हरिश दुहन के नेतृत्व में आयोजित इस शिविर में कार्यात्मक निदेशक, मुख्य सतर्कता अधिकारी सहित मुख्यालय एवं सभी परिचालन क्षेत्रों के लगभग 200 अधिकारी शामिल हुए। इनमें क्षेत्रीय महाप्रबंधक, विभागाध्यक्ष तथा कार्यकारी ग्रेड–5 (ई-5) स्तर तक के बड़ी संख्या में युवा अधिकारी सम्मिलित रहे, जो संगठन की भावी नेतृत्व क्षमता पर विशेष फोकस को दर्शाता है।
अपने संबोधन में अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक श्री दुहन ने कहा कि एसईसीएल को एक बार फिर देश की अग्रणी कोयला कंपनी के रूप में स्थापित करने के लिए संगठित और परिणामोन्मुख प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सुधार केवल नीतिगत घोषणाओं तक सीमित न रहें, बल्कि दैनिक कार्य संस्कृति और निर्णय प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा बनें। दीर्घकालिक दृष्टि को रेखांकित करते हुए उन्होंने विविधीकरण, औद्योगिक सहभागिता और नेट-जीरो रोडमैप में अग्रणी भूमिका निभाने की आवश्यकता बताई तथा विज़न 2030 और विज़न 2047 को संगठन के मार्गदर्शक ढांचे के रूप में अपनाने का आह्वान किया। युवा अधिकारियों को संगठन की भविष्य की रीढ़ बताते हुए उन्होंने एसईसीएल को भविष्य के लिए तैयार संस्था में रूपांतरित करने में उनकी अग्रणी भूमिका पर विश्वास व्यक्त किया।
चिंतन शिविर का मुख्य उद्देश्य संगठनात्मक प्रदर्शन की समीक्षा, कमियों की पहचान तथा कोयला उत्पादन, डिस्पैच व्यवस्था, खान सुरक्षा, लागत दक्षता, सतत विकास और डिजिटलीकरण को सुदृढ़ करने के लिए स्पष्ट एवं समयबद्ध कार्य योजनाओं पर मंथन करना रहा। इसके साथ ही विविधीकरण, उद्योग से जुड़ाव और नेट-जीरो लक्ष्य जैसे दीर्घकालिक विषयों पर भी गहन चर्चा की गई।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विभागों द्वारा 15 विस्तृत प्रस्तुतियाँ दी गईं, जिनमें भूमिगत उत्पादन योजना, गुणवत्ता नियंत्रण, फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी संचालन, भूमि अधिग्रहण एवं पुनर्वास, पर्यावरण एवं वन स्वीकृतियां, सौर एवं नवीन ऊर्जा, डिजिटलीकरण एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग, मानव संसाधन विकास, वित्त और संविदा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे।
प्रत्येक प्रस्तुति के पश्चात संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किए गए, जिनमें अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक, कार्यात्मक निदेशक और मुख्य सतर्कता अधिकारी की सक्रिय भागीदारी रही। इस खुले और सहभागी मंच ने नवाचारी विचारों, रचनात्मक सुझावों और जमीनी फीडबैक को प्रोत्साहित किया, जिससे शीर्ष-स्तरीय मार्गदर्शन और क्षेत्रीय अनुभवों के बीच प्रभावी संतुलन स्थापित हुआ।
एसईसीएल का यह पहला ‘चिंतन शिविर’ नीति निर्माण और निर्णय प्रक्रिया को मजबूती देने की दिशा में एक ठोस आधार प्रदान करेगा। साथ ही यह संगठन की परिचालन उत्कृष्टता, सतत विकास और राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को और अधिक सशक्त करने में मील का पत्थर साबित होगा।
रायपुर / शौर्यपथ।
छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव श्री विकास शील ने राज्य के 5 जिलों में ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थानों (Rural Self Employment Training Institutes–RSETIs) की स्थापना की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इससे ग्रामीण युवाओं को कौशल-आधारित, रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण प्राप्त होगा और वे स्वरोजगार के माध्यम से विकास की मुख्यधारा से प्रभावी रूप से जुड़ सकेंगे। इसके साथ ही उन्होंने बैंकों से प्राथमिकता क्षेत्र ऋण एवं शासकीय प्रायोजित योजनाओं के अंतर्गत ऋण प्रवाह बढ़ाने का आह्वान किया, ताकि पात्र हितग्राहियों को समय पर एवं पर्याप्त वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
मुख्य सचिव नवा रायपुर स्थित महानदी भवन में आयोजित राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (State-Level Bankers’ Committee–SLBC) की त्रैमासिक बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में राज्य में बैंकों के कार्य निष्पादन की विस्तृत समीक्षा की गई तथा वित्तीय समावेशन को मजबूत करने, ऋण वितरण प्रणाली में सुधार और ग्रामीण क्षेत्रों तक बैंकिंग सेवाओं की पहुँच बढ़ाने को लेकर विभिन्न बिंदुओं पर गहन चर्चा की गई।
बैठक में श्री मनोज कुमार (महाप्रबंधक, भारतीय स्टेट बैंक), श्रीमती निहारिका बारीक सिंह (प्रमुख सचिव), श्रीमती रीनी अजीथ (क्षेत्रीय निदेशक, भारतीय रिजर्व बैंक), श्री शीतांशु शेखर (महाप्रबंधक, नाबार्ड), श्री अंकित आनंद (सचिव), श्री रजत कुमार (सचिव), श्री प्रभात मल्लिक (सचिव), श्रीमती शीतल शाश्वत वर्मा (निदेशक, संस्थागत वित्त), श्री चंदन कुमार (विशेष सचिव), श्री राकेश कुमार सिन्हा (उपमहाप्रबंधक, एसबीआई) सहित छत्तीसगढ़ शासन के अन्य वरिष्ठ सचिव, विभागाध्यक्ष, विभिन्न बैंकों के शीर्ष अधिकारी तथा राज्य के 33 जिलों के अग्रणी बैंक प्रबंधक उपस्थित रहे।
मुख्य सचिव ने कहा कि बैंक देश के आर्थिक विकास की रीढ़ हैं और भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेज़ी से अग्रसर है। ऐसे में बैंकों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे समग्र वित्तीय समावेशन के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए विशेष रूप से सुदूर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं का विस्तार करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि बैंकिंग पहुंच, ऋण वितरण और वित्तीय अवसंरचना को सुदृढ़ करने के लिए राज्य शासन की ओर से हरसंभव सहयोग प्रदान किया जाएगा।
मुख्य सचिव ने राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति, भारतीय स्टेट बैंक एवं अन्य बैंकों द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि शासकीय प्रायोजित ऋण योजनाओं का परिणामोन्मुख और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ताकि योजनाओं का वास्तविक लाभ ज़मीनी स्तर तक पहुँचे।
बैठक का समापन निदेशक (संस्थागत वित्त) श्रीमती शीतल शाश्वत वर्मा द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने मुख्य सचिव सहित सभी उपस्थित अधिकारियों, बैंकों के प्रतिनिधियों तथा बैठक के सफल आयोजन के लिए राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति एवं इसके संयोजक भारतीय स्टेट बैंक के प्रति आभार व्यक्त किया।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
