September 14, 2026
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    बस्तर

    बस्तर (1127)

    कोंडागांव, छत्तीसगढ़ | 

    छत्तीसगढ़ की पहचान केवल उसकी प्राकृतिक संपदा और हरियाली से नहीं, बल्कि उसकी समृद्ध लोक-संस्कृति, पारम्परिक कला, लोकगीत, लोकनृत्य, स्थानीय बोलियों, साहित्य और कृषि परम्पराओं से भी है। विशेष रूप से बस्तर अंचल की सांस्कृतिक विरासत अपने आप में एक जीवंत इतिहास है, जिसे पीढ़ी-दर-पीढ़ी हमारे लोक कलाकारों, साहित्यकारों, शिल्पकारों और समाज ने अपने जीवन और सृजन के माध्यम से संजोकर रखा है।

    इसी गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित, संवर्धित और आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने के उद्देश्य से कोंडागांव जिले में “बस्तर सांस्कृतिक, साहित्यिक एवं कला परिषद” का गठन किया गया। स्थानीय कलाकारों एवं संस्कृति प्रेमियों की सर्वसम्मत सहमति से श्री गोकुल वैद्य को परिषद का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। परिषद का यह प्रयास बस्तर की लोक परम्पराओं, स्थानीय भाषाओं-बोलियों, साहित्य, कला और कलाकारों को एक सशक्त मंच प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

    इसी सांस्कृतिक संकल्प को आगे बढ़ाते हुए बस्तर सांस्कृतिक, साहित्यिक एवं कला परिषद, कोंडागांव द्वारा दिनांक 16 अगस्त 2026 को छत्तीसगढ़-बस्तर की माटी, संस्कृति, लोककला एवं कृषि परम्परा से जुड़े हमारे गौरवशाली हरेली (अमुस) तिहार के पावन अवसर पर “हरेली महोत्सव 2026” का भव्य आयोजन किया गया।

    हरेली केवल एक पर्व नहीं, बल्कि किसान, खेत, प्रकृति, पशुधन, कृषि औजार और धरती माता के प्रति हमारी कृतज्ञता का लोकपर्व है। इस अवसर पर आयोजित महोत्सव ने बस्तर की माटी में रची-बसी परम्पराओं को मंच पर जीवंत कर दिया।

    ? अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति

    हरेली महोत्सव 2026 में मुख्य अतिथि माननीया सुश्री लता उसेंडी, विधायक कोंडागांव एवं उपाध्यक्ष, बस्तर विकास प्राधिकरण, माननीया सुश्री मोना सेन, अध्यक्ष, राज्य फिल्म विकास निगम, छत्तीसगढ़ शासन तथा माननीया श्रीमती शालिनी राजपूत, अध्यक्ष, हस्तशिल्प विकास बोर्ड, छत्तीसगढ़ शासन की गरिमामयी उपस्थिति रही।

    वहीं विशिष्ट अतिथियों के रूप में छत्तीसगढ़ एवं बस्तर की कला-संस्कृति के गौरव—

    पद्मश्री श्री पंडी राम मंडावी — काष्ठ शिल्पकार एवं जनजातीय वाद्य यंत्र विशेषज्ञ,

    पद्मश्री श्रीमती ऊषा वारले — पंडवानी गायिका,

    पद्मश्री श्री अजय कुमार मंडावी — काष्ठ शिल्पकार,

    माननीय श्री राजेन्द्र बघेल — राष्ट्रपति पुरस्कृत अंतर्राष्ट्रीय बेलमेटल शिल्पकार,

    श्री पंचुराम सागर — राष्ट्रपति पुरस्कृत अंतर्राष्ट्रीय बेलमेटल शिल्पकार,

    श्री तीजु राम विश्वकर्मा — राष्ट्रपति पुरस्कृत अंतर्राष्ट्रीय लौह शिल्पकार,

    श्री अविनाश प्रसाद — फिल्म निर्देशक,

    श्री राकेश यादव — फिल्म अभिनेता,

    श्री नरपती पटेल — अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद, कोंडागांव,

    तथा श्री जशकेतु उसेंडी — उपाध्यक्ष, नगर पालिका परिषद, कोंडागांव

    की उपस्थिति ने समारोह की गरिमा को और अधिक बढ़ाया।

    ? मंच पर साकार हुई बस्तर की आत्मा

    हरेली महोत्सव में छत्तीसगढ़ और बस्तर की लोक-संस्कृति का ऐसा मनोहारी रंग देखने को मिला, जिसमें लोकगीतों की मिठास, लोकनृत्यों की थिरकन, पारम्परिक वाद्य यंत्रों की गूंज और जनजातीय परम्पराओं की जीवंतता एक साथ दिखाई दी।

    मंच पर प्रस्तुत रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों में कलाकारों ने अपनी प्रतिभा के माध्यम से बस्तर की उस सांस्कृतिक आत्मा को अभिव्यक्त किया, जो सदियों से जल, जंगल, जमीन, प्रकृति और सामुदायिक जीवन के साथ जुड़ी हुई है।

    पारम्परिक वेशभूषा में सजे कलाकार, लोकवाद्यों की धुन पर थिरकते कदम, जनजातीय नृत्य की ऊर्जा और लोकगीतों की स्वर-लहरियाँ पूरे वातावरण को बस्तर की माटी की सुगंध से भर रही थीं। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो बस्तर की संस्कृति स्वयं मंच पर उतरकर अपनी कहानी सुना रही हो।

    ? कलाकारों का सम्मान — हमारी संस्कृति का सम्मान

    इस महोत्सव की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक रहा हमारे उन लोक कलाकारों, शिल्पकारों और संस्कृति साधकों का सम्मान, जिन्होंने अपना जीवन छत्तीसगढ़ की पारम्परिक कला एवं सांस्कृतिक विरासत को समर्पित किया है।

    काष्ठ शिल्प, बेलमेटल शिल्प, लौह शिल्प, जनजातीय वाद्य यंत्र, पंडवानी, लोकनृत्य और लोकसंगीत जैसे क्षेत्रों में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले कलाकारों का सम्मान वास्तव में केवल व्यक्ति का सम्मान नहीं, बल्कि उनकी कला, उनकी परम्परा और बस्तर की सांस्कृतिक अस्मिता का सम्मान है।

    समारोह के दौरान सम्मान एवं स्मृति-चिह्न प्रदान किए जाने के अनेक भावुक और गौरवपूर्ण क्षण कैमरे में कैद हुए। ये तस्वीरें आने वाले समय में इस बात की साक्षी रहेंगी कि कोंडागांव ने अपनी सांस्कृतिक विरासत को केवल याद नहीं किया, बल्कि उसे सम्मान के साथ मंच भी दिया।

    ? संस्कृति तभी जीवित रहती है, जब नई पीढ़ी उससे जुड़ती है

    आज आधुनिकता और तेजी से बदलते सामाजिक परिवेश के बीच स्थानीय बोलियों, पारम्परिक कलाओं, लोकगीतों, लोकनृत्यों और मौखिक साहित्य के संरक्षण की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है।

    बस्तर सांस्कृतिक, साहित्यिक एवं कला परिषद का प्रयास इसी दिशा में एक सकारात्मक कदम है। आवश्यकता इस बात की है कि हम अपनी जड़ों से जुड़े रहें, अपने लोक कलाकारों को सम्मान दें, स्थानीय भाषाओं और बोलियों को बचाएँ तथा बच्चों और युवाओं को अपनी संस्कृति से जोड़ें।

    क्योंकि संस्कृति केवल संग्रहालयों में रखी कोई वस्तु नहीं है।

    संस्कृति हमारी पहचान है।

    संस्कृति हमारी स्मृति है।

    संस्कृति हमारी जड़ों की आवाज है।

    और संस्कृति ही आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी सबसे अनमोल विरासत है।

    ? हरेली महोत्सव का संदेश

    हरेली महोत्सव 2026 ने यह संदेश दिया कि कृषि और संस्कृति एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। खेतों में अन्न उगाने वाला किसान हो या अपनी कला से बस्तर की पहचान बनाने वाला कलाकार—दोनों हमारी धरती और हमारी परम्परा के सच्चे संवाहक हैं।

    कोंडागांव की धरती पर आयोजित यह आयोजन निश्चित रूप से केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बस्तर की अस्मिता, गौरवशाली परम्पराओं और लोकजीवन को संरक्षित करने का एक सांस्कृतिक संकल्प था।

    आज जब हम इन तस्वीरों को देखते हैं तो इनमें केवल मंच, कलाकार और सम्मान समारोह दिखाई नहीं देते, बल्कि इनके पीछे बस्तर की सदियों पुरानी संस्कृति, लोकजीवन की सरलता, कलाकारों का समर्पण और अपनी पहचान को बचाए रखने का संकल्प दिखाई देता है।

    “हमारी संस्कृति • हमारी पहचान • हमारा अभिमान”

    हरेली महोत्सव 2026 की ये स्मृतियाँ कोंडागांव और बस्तर की उस जीवंत सांस्कृतिक यात्रा की अमिट तस्वीरें हैं, जिसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

    बस्तर की माटी को नमन।

    लोक कलाकारों को नमन।

    हमारी संस्कृति और परम्पराओं को नमन।

    हरेली तिहार की हार्दिक शुभकामनाएँ। ??

    नरेश देवांगन 

    जगदलपुर, शौर्यपथ। सुशासन के दावों के बीच वन मंत्री के गढ़ में ही कुशासन की तस्वीर सामने आई है। साय सरकार सरकारी धन की बर्बादी रोकने और लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई की बात करती है, लेकिन वन मंत्री केदार कश्यप के विभाग से जुड़े वन विद्यालय जगदलपुर में सरकारी निर्माण सामग्री की दुर्दशा विभागीय निगरानी पर सवाल खड़े कर रही है। मंत्री के लगातार बस्तर दौरे के बावजूद जिला मुख्यालय पर ही यदि सरकारी सामग्री खराब होने की स्थिति में पहुंच जाए, तो सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर निगरानी हो कहां रही है और जिम्मेदारी किसकी है?

    वन विद्यालय जगदलपुर में निर्माण कार्य के लिए मंगाया गया बड़ी मात्रा में सीमेंट उचित रखरखाव के अभाव में बोरियों में ही जमकर पत्थर जैसा हो गया है। मौके पर पड़े ढेर को देखकर इसकी मात्रा लगभग 800 बोरी से अधिक होने का अनुमान है। हालांकि वास्तविक मात्रा विभागीय रिकॉर्ड और भौतिक सत्यापन के बाद ही स्पष्ट होगी।

    विभागीय सूत्रों के अनुसार, यहां बाउंड्रीवाल के साथ ऑडिटोरियम निर्माण का कार्य भी प्रस्तावित था। निर्माण अधूरा रहने के बाद सीमेंट को शेड के नीचे रखा गया, लेकिन पर्याप्त सुरक्षित भंडारण नहीं होने के कारण नमी आदि से सीमेंट खराब होने की स्थिति सामने आई है।

    सीमेंट खराब हुआ या सरकारी धन?

    सवाल यह है कि सीमेंट कब और कितनी मात्रा में खरीदा गया, उसकी कीमत कितनी थी, निर्माण कार्य कब से बंद है और सामग्री की सुरक्षा की जिम्मेदारी किस अधिकारी-कर्मचारी की थी? सरकारी पैसा लगाकर खरीदा गया सीमेंट निर्माण में इस्तेमाल होने से पहले ही पत्थर बन जाए, तो इसे महज संयोग मानें या निगरानी की नाकामी—इसका जवाब जांच से मिलना चाहिए।

    प्रशासन को तत्काल मौके का भौतिक सत्यापन कर सीमेंट की वास्तविक मात्रा, खरीद बिल-वाउचर, स्टॉक रजिस्टर, निर्माण कार्य और भंडारण व्यवस्था की जांच करनी चाहिए। यदि जांच में लापरवाही प्रमाणित होती है तो संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

    वही इस मामले पे जनता का कहना है की “सरकारी धन कोई निजी संपत्ति नहीं, जनता की गाढ़ी कमाई है; इसकी बर्बादी पर जवाबदेही तय होना जरूरी है।”

    इस मामले पर वन विद्यालय जगदलपुर के संचालक शमा फारुकी से जब फ़ोन पे जानकारी चाही गई तो उनका कहना है की सीमेंट ठीक है, ओर काम जल्द हि चालू हो जायेगा।

    " लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है की पत्थर बन चुके सीमेंट से जिम्मेदार अधिकारी निर्माण कार्य शुरू कैसे करेंगे? "

    By - नरेश देवांगन 

    जगदलपुर, शौर्यपथ। सुशासन के दावों के बीच वन मंत्री के गढ़ में ही कुशासन की तस्वीर सामने आई है। साय सरकार सरकारी धन की बर्बादी रोकने और लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई की बात करती है, लेकिन वन मंत्री केदार कश्यप के विभाग से जुड़े वन विद्यालय जगदलपुर में सरकारी निर्माण सामग्री की दुर्दशा विभागीय निगरानी पर सवाल खड़े कर रही है। मंत्री के लगातार बस्तर दौरे के बावजूद जिला मुख्यालय पर ही यदि सरकारी सामग्री खराब होने की स्थिति में पहुंच जाए, तो सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर निगरानी हो कहां रही है और जिम्मेदारी किसकी है?

    वन विद्यालय जगदलपुर में निर्माण कार्य के लिए मंगाया गया बड़ी मात्रा में सीमेंट उचित रखरखाव के अभाव में बोरियों में ही जमकर पत्थर जैसा हो गया है। मौके पर पड़े ढेर को देखकर इसकी मात्रा लगभग 800 बोरी से अधिक होने का अनुमान है। हालांकि वास्तविक मात्रा विभागीय रिकॉर्ड और भौतिक सत्यापन के बाद ही स्पष्ट होगी।

    विभागीय सूत्रों के अनुसार, यहां बाउंड्रीवाल के साथ ऑडिटोरियम निर्माण का कार्य भी प्रस्तावित था। निर्माण अधूरा रहने के बाद सीमेंट को शेड के नीचे रखा गया, लेकिन पर्याप्त सुरक्षित भंडारण नहीं होने के कारण नमी आदि से सीमेंट खराब होने की स्थिति सामने आई है।

     

    सीमेंट खराब हुआ या सरकारी धन?

    सवाल यह है कि सीमेंट कब और कितनी मात्रा में खरीदा गया, उसकी कीमत कितनी थी, निर्माण कार्य कब से बंद है और सामग्री की सुरक्षा की जिम्मेदारी किस अधिकारी-कर्मचारी की थी? सरकारी पैसा लगाकर खरीदा गया सीमेंट निर्माण में इस्तेमाल होने से पहले ही पत्थर बन जाए, तो इसे महज संयोग मानें या निगरानी की नाकामी—इसका जवाब जांच से मिलना चाहिए।

    प्रशासन को तत्काल मौके का भौतिक सत्यापन कर सीमेंट की वास्तविक मात्रा, खरीद बिल-वाउचर, स्टॉक रजिस्टर, निर्माण कार्य और भंडारण व्यवस्था की जांच करनी चाहिए। यदि जांच में लापरवाही प्रमाणित होती है तो संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

    वही इस मामले पे जनता का कहना है की “सरकारी धन कोई निजी संपत्ति नहीं, जनता की गाढ़ी कमाई है; इसकी बर्बादी पर जवाबदेही तय होना जरूरी है।”

     

    इस मामले पर वन विद्यालय जगदलपुर के संचालक शमा फारुकी से जब फ़ोन पे जानकारी चाही गई तो उनका कहना है की सीमेंट ठीक है, ओर काम जल्द हि चालू हो जायेगा।

    " लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है की पत्थर बन चुके सीमेंट से जिम्मेदार अधिकारी निर्माण कार्य शुरू कैसे करेंगे? "

    पहले अपना घर तो साफ करिए साहब... मुख्य सड़क पर चालान, गौरव पथ पर महीनों से कचरे का अंबार

      रिपोर्टर : कृष्णा मंडल / लोकेशन : दंतेवाड़ा
    बचेली। स्वच्छ भारत मिशन और ‘स्वच्छ बचेली’ अभियान के तहत नगर पालिका द्वारा शहर को स्वच्छ रखने और गंदगी फैलाने वालों के खिलाफ लगातार चालानी कार्रवाई किए जाने के दावे किए जा रहे हैं। लेकिन इन दावों के बीच नगर के प्रमुख गौरव पथ पर जगह-जगह लगे कचरे के ढेर नगर पालिका की सफाई व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।
    नगर पालिका द्वारा शहर के विभिन्न वार्डों, गलियों और मोहल्लों में घर-घर सूखा एवं गीला कचरा अलग-अलग रखने के लिए डस्टबिन वितरित किए गए हैं। घरों और दुकानों से नियमित कचरा संग्रहण के लिए कचरा वाहन तथा सफाई कर्मचारियों की व्यवस्था होने की बात भी कही जाती है। इसके बावजूद शहर के महत्वपूर्ण और व्यस्त मार्ग गौरव पथ के कई हिस्सों में कचरे के बड़े-बड़े ढेर दिखाई दे रहे हैं।

    कचरे के ढेर से दुर्गंध, राहगीर परेशान
    गौरव पथ पर लंबे समय से जमा कचरे के कारण आसपास के क्षेत्र में दुर्गंध फैल रही है। सड़क से गुजरने वाले राहगीरों और स्थानीय दुकानदारों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बरसात के मौसम में सड़क किनारे जमा कचरा और गंदगी नालियों में पहुंचकर जल निकासी की समस्या बढ़ा सकती है। साथ ही इससे मच्छरों और अन्य संक्रमण फैलाने वाले कीटों के पनपने का खतरा भी बढ़ सकता है।
    स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नगर पालिका द्वारा नियमित रूप से कचरा उठाने और सफाई की व्यवस्था की जाए तो प्रमुख मार्ग पर इस तरह कचरे का ढेर लगने की स्थिति ही नहीं बनेगी।

    जनता पर चालान, लेकिन नगर पालिका की जवाबदेही कौन तय करेगा?
    इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब नगर पालिका द्वारा सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने वाले नागरिकों पर चालानी कार्रवाई की जा रही है, तो नगर पालिका की अपनी सफाई व्यवस्था की जवाबदेही कौन तय करेगा?
    स्वच्छता व्यवस्था केवल लोगों पर जुर्माना लगाने से प्रभावी नहीं हो सकती। इसके लिए नियमित कचरा संग्रहण, समय पर कचरा उठाव, सार्वजनिक स्थलों की सफाई और निगरानी की भी उतनी ही आवश्यकता है। नियम यदि नागरिकों के लिए हैं तो व्यवस्था की जिम्मेदारी नगर पालिका की भी है।
    स्थानीय नागरिकों का कहना है कि स्वच्छता के नियम सभी के लिए समान होने चाहिए। यदि आम नागरिकों से स्वच्छता बनाए रखने की अपेक्षा की जाती है और गंदगी फैलाने पर जुर्माना लगाया जाता है, तो नगर पालिका को भी अपने सफाई दायित्वों के प्रति जवाबदेह होना चाहिए।

    ‘स्वच्छ बचेली’ के दावों पर उठ रहे सवाल
    गौरव पथ जैसे प्रमुख मार्ग पर कचरे का अंबार नगर पालिका के ‘स्वच्छ बचेली’ अभियान के जमीनी क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर रहा है। नागरिकों का कहना है कि अभियान केवल प्रचार और चालानी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसका असर शहर की सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर भी नजर आना चाहिए।
    अब देखना होगा कि नगर पालिका इस मामले में कचरे के ढेर को हटाने के साथ-साथ नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करती है या नहीं। साथ ही यह भी देखना महत्वपूर्ण होगा कि नगर पालिका अपने सफाई वाहनों और कर्मचारियों की व्यवस्था की प्रभावी निगरानी किस प्रकार करती है।
    फिलहाल गौरव पथ की तस्वीरें ‘स्वच्छ बचेली’ के दावों और जमीनी हकीकत के बीच अंतर की ओर इशारा करती नजर आ रही हैं।

    वन विभाग की सतर्कता से बची संरक्षित वन्यप्राणी की जान

    रायपुर / शौर्यपथ / वन मंत्री केदार कश्यप की मंशानुरूप और उनके संवेदनशील पहल के अनुरूप छत्तीसगढ़ में वन्यजीवों के संरक्षण के लिए लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में मोहला मानपुर अम्बागढ़ चौकी जिले के मोहला तहसील के ग्राम कुंजंटोला में वन विभाग की टीम ने दुर्लभ वन्यप्राणी पैंगोलिन का सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर उसे सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया।

    रविवार को ग्राम कुंजंटोला निवासी जयंत कुमार के घर में पैंगोलिन के घुसने की सूचना वन विभाग को मिली। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और पूरी सावधानी के साथ रेस्क्यू अभियान शुरू किया।

    वनमंडलाधिकारी के मार्गदर्शन में परिक्षेत्र अधिकारी पंकज पटेल के नेतृत्व में रेस्क्यू टीम ने पैंगोलिन को सुरक्षित पकड़कर आरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ दिया। इस अभियान में डिप्टी रेंजर श्री महेंद्र बघेल और श्री शोभित राम यादव की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

    यह रेस्क्यू अभियान वन विभाग की त्वरित कार्रवाई, प्रशिक्षित टीम और वन्यजीव संरक्षण के प्रति संवेदनशील कार्यप्रणाली का अच्छा उदाहरण है। समय पर मिली सूचना और समन्वित प्रयासों के कारण एक दुर्लभ एवं संरक्षित वन्यप्राणी को सुरक्षित बचाया जा सका।

    वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि यदि कहीं भी कोई वन्यजीव दिखाई दे, तो उसे नुकसान न पहुंचाएं और तुरंत वन विभाग को सूचना दें। लोगों की जागरूकता और सहयोग से वन्यजीवों का संरक्षण और भी प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।

    उल्लेखनीय है कि पैंगोलिन वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत शेड्यूल-1 में शामिल अत्यंत संरक्षित प्रजाति है। इसके संरक्षण के लिए राज्य सरकार विशेष रूप से प्रतिबद्ध है। वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देश पर वन विभाग वन्यजीव संरक्षण, त्वरित रेस्क्यू और जनजागरूकता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल पर मिली आर्थिक राहत

    रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल और नक्सल प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता के अनुरूप, वन एवं बीजापुर जिले के प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार बीजापुर जिले में नक्सली हिंसा के 13 पीड़ितों को पुनर्वास नीति के तहत कुल 32 लाख रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई है।

    यह सहायता उन नागरिकों के लिए स्वीकृत की गई है, जो नक्सली हिंसा में गंभीर रूप से घायल हुए हैं या स्थायी रूप से दिव्यांग हो गए हैं। राज्य सरकार का उद्देश्य ऐसे पीड़ितों को आर्थिक संबल प्रदान कर उन्हें सम्मानजनक जीवन और पुनर्वास का अवसर उपलब्ध कराना है।

    इन पीड़ितों को मिलेगा लाभ

    स्वीकृत सहायता राशि के अंतर्गत पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ के दौरान क्रॉस फायरिंग में गंभीर रूप से घायल नंदू ओयाम और जिला कुंजाम, माओवादियों की मारपीट में घायल ईस्ता बोर्रा, बारूदी सुरंग विस्फोट में घायल मितराम रावटे, आईईडी विस्फोट में घायल कोरसे संतोष, चिड़ेम कन्हैया और कविता कुड़ियम, माओवादियों की मारपीट से स्थायी रूप से दिव्यांग हुए इच्चामी सुदरू, तथा आईईडी विस्फोट में गंभीर रूप से घायल या स्थायी रूप से दिव्यांग हुए राममूर्ति कारम, बबलू उर्फ मोहन कड़ती, गंगा कलमू, राजेश कुमार यादव और सोढ़ी मुकेश शामिल हैं।

    डीबीटी के माध्यम से शीघ्र होगा भुगतान

    कलेक्टर श्री विश्वदीप ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि स्वीकृत सहायता राशि का भुगतान डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से शीघ्र संबंधित हितग्राहियों के बैंक खातों में किया जाए, ताकि पीड़ितों को समय पर आर्थिक सहायता मिल सके।

    राज्य सरकार की पुनर्वास नीति नक्सली हिंसा से प्रभावित नागरिकों को राहत, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत आधार प्रदान कर रही है। यह पहल पीड़ित परिवारों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता और समर्पण का महत्वपूर्ण उदाहरण है।

    जगदलपुर में एक सप्ताह के भीतर खाद विभाग की दूसरी बड़ी कार्रवाई, अवैध चावल कारोबारियों में मचा हड़कंप

    जगदलपुर, शौर्यपथ। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत गरीब एवं पात्र राशन कार्डधारकों को निःशुल्क वितरित किए जाने वाले चावल की अवैध खरीदी-बिक्री के खिलाफ खाद विभाग ने शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए शहर के भवानी चाट भंडार के पीछे स्थित दीप्ती बाड़ा के एक गोदाम से लगभग 378 बोरा (करीब 186 क्विंटल) पीडीएस चावल, लगभग 3 क्विंटल चना, 100 पीडीएस बारदाना तथा लोडिंग में लगे 12 चक्का ट्रक (CG 04 LC 9409) को जब्त किया है। बताया जा रहा है कि ट्रक रायपुर का है और कार्रवाई के समय उसमें चावल लोड किया जा रहा था।

    जानकारी के अनुसार खाद विभाग को गुप्त सूचना मिली थी कि गोदाम से बड़ी मात्रा में पीडीएस चावल बाहर भेजने की तैयारी चल रही है। सूचना मिलते ही विभाग की टीम ने मौके पर दबिश दी और कार्रवाई को अंजाम दिया। जब्त चावल को सुरक्षित रखने के लिए निकटस्थ शासकीय उचित मूल्य दुकान में रखवाया गया, जबकि ट्रक को आगे की वैधानिक कार्रवाई के लिए कोतवाली थाना पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया है। पूरे मामले की रिपोर्ट जिला कलेक्टर को भेजी गई है।

    विभाग के अनुसार, इस मामले का संबंध मोहम्मद जिलानी नामक व्यक्ति से बताया जा रहा है। मामले की जांच जारी है और जांच के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

    खाद विभाग की एक सप्ताह के भीतर यह दूसरी बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। लगातार हो रही छापेमार कार्रवाई से शहर में पीडीएस चावल की अवैध खरीदी-बिक्री से जुड़े लोगों में हड़कंप मच गया है। विभाग के सख्त रुख से ऐसे कारोबार में संलिप्त लोगों के बीच भय का माहौल देखा जा रहा है।

    सूत्रों के हवाले से यह भी जानकारी सामने आई है कि संबंधित व्यक्ति के परिवार के एक सदस्य द्वारा शासकीय उचित मूल्य (राशन) दुकान का संचालन किए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में जांच के दौरान यह भी स्पष्ट किया जाना महत्वपूर्ण होगा कि कहीं कथित अवैध चावल खरीदी-बिक्री के साथ-साथ पात्र हितग्राहियों के लिए आवंटित पीडीएस राशन के वितरण में किसी प्रकार की अनियमितता या हेराफेरी तो नहीं हुई। इस संबंध में वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

    पीडीएस का चावल शासन द्वारा गरीब और जरूरतमंद परिवारों को खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से निःशुल्क उपलब्ध कराया जाता है। ऐसे चावल का अवैध भंडारण, परिवहन अथवा व्यापार न केवल शासन की जनकल्याणकारी योजना को प्रभावित करता है, बल्कि पात्र हितग्राहियों के अधिकारों पर भी सीधा असर डालता है। अब इस मामले में जांच पूरी होने और दोषियों पर होने वाली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

    बारिश में भवन से टपक रहा पानी, जीवनरक्षक दवाओं की सुरक्षा पर सवाल; DMF और CSR फंड के बावजूद नहीं हुआ स्थायी समाधान

    रिपोर्टर: कृष्णा मंडल

    लोकेशन: दंतेवाड़ा

    दंतेवाड़ा। प्रदेश के सबसे अधिक डीएमएफ (DMF) और सीएसआर (CSR) फंड प्राप्त करने वाले जिलों में शामिल दंतेवाड़ा में स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जिले के एकमात्र जिला अस्पताल में करोड़ों रुपये मूल्य की जीवनरक्षक दवाओं का स्टोर रूम जर्जर हालत में पहुंच चुका है। बारिश के दौरान भवन से पानी रिसने के कारण दवाओं के खराब होने का खतरा बना हुआ है।

    स्थिति यह है कि अस्पताल प्रबंधन और कर्मचारी स्टोर रूम में रखी दवाओं को बचाने के लिए तिरपाल का सहारा लेने को मजबूर हैं। जिस भवन की मरम्मत या नए निर्माण की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है, वहां फिलहाल अस्थायी इंतजामों के भरोसे दवाओं को सुरक्षित रखने का प्रयास किया जा रहा है।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग में हर वर्ष भवन निर्माण और अन्य विकास कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन अस्पताल के सबसे महत्वपूर्ण हिस्सों में से एक मेडिसिन स्टोर की हालत बेहद खराब बनी हुई है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जब दंतेवाड़ा को DMF और CSR के माध्यम से पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध हैं, तब भी इस भवन के सुधार को प्राथमिकता क्यों नहीं दी गई।

    बारिश के मौसम में भवन के भीतर पानी रिसने से जीवनरक्षक दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों के अनुसार कई दवाओं के सुरक्षित भंडारण के लिए नियंत्रित वातावरण आवश्यक होता है, ऐसे में नमी और रिसाव उनकी गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं।

    अब सवाल यह है कि क्या करोड़ों रुपये की दवाओं की सुरक्षा केवल तिरपाल के भरोसे की जा सकती है? इस मामले में स्वास्थ्य विभाग और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है कि समस्या का स्थायी समाधान शीघ्र किया जाना चाहिए, ताकि मरीजों के उपचार के लिए रखी गई दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

    महिलाओं के सशक्तिकरण, स्वरोजगार और ग्रामीण विकास को मिलेगी नई रफ्तार; 'लखपति दीदी' और 'ड्रोन दीदी' योजनाओं पर दिया जोर

    रायपुर / शौर्यपथ / कोण्डागांव जिले के मर्दापाल में ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण को नई दिशा देने के उद्देश्य से वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने शनिवार को नवनिर्मित ग्राम पंचायत भवन एवं महतारी सदन का लोकार्पण किया। लगभग 12 लाख रुपये की लागत से बने पंचायत भवन तथा 25 लाख रुपये की लागत से निर्मित महतारी सदन को उन्होंने ग्रामीणों को समर्पित करते हुए इसे गांव के समग्र विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

    महतारी सदन बनेगा महिला सशक्तिकरण का केंद्र

    लोकार्पण के बाद मंत्री श्री कश्यप ने बिहान स्व-सहायता समूह की महिलाओं से संवाद कर उनकी आजीविका गतिविधियों और आय में आए बदलाव की जानकारी ली। महिलाओं ने बताया कि समूह से जुड़ने के बाद उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के बेहतर अवसर मिलने लगे हैं, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।

    इस अवसर पर श्री कश्यप ने कहा कि महतारी सदन ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। राज्य सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। 'लखपति दीदी' और 'ड्रोन दीदी' जैसी योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को रोजगार, स्वरोजगार और आय बढ़ाने के नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

    फलदार पौधों और पशुपालन को अपनाने की अपील

    वन मंत्री ने महिलाओं से फलदार पौधों का रोपण, पशुपालन और अन्य आयवर्धक गतिविधियों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बेहतर योजना और मेहनत के साथ इन गतिविधियों को अपनाकर ग्रामीण परिवार अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।

    उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि महतारी सदन महिला स्व-सहायता समूहों की गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ-साथ ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।

    जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की रही मौजूदगी

    कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती रीता शोरी, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती अनीता कोर्राम, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती यशोदा कश्यप, जनपद पंचायत उपाध्यक्ष श्री टोमेंद्र ठाकुर, जनपद सदस्य श्रीमती कौशल्या कोर्राम, श्रीमती जयमती कश्यप, श्री रामूराम कोर्राम, श्री रामचन्द्र कश्यप, श्री रामकुमार कोर्राम, श्री रमेश सेठिया, श्री आसमन कोर्राम, श्री लक्ष्मीकांत बेलसरिया, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला प्रबंधक श्री विनय सिंह सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

    शौर्यपथ की नजर

    ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत भवन और महतारी सदन जैसी आधारभूत सुविधाएं केवल भवन नहीं, बल्कि स्थानीय प्रशासन को मजबूत करने और महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम हैं। यदि इन केंद्रों का प्रभावी संचालन सुनिश्चित किया जाए तो स्व-सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने के साथ महिलाओं की भागीदारी और आत्मनिर्भरता भी सशक्त होगी।

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