
CONTECT NO. - 8962936808
EMAIL ID - shouryapath12@gmail.com
Address - SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
अम्बिकापुर /शौर्यपथ/
क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी ने कहा है कि राज्य शासन द्वारा आम जनता को तत्काल लर्निंग लायसेंस प्रदान की जा सके इस हेतु परिवहन सुविधा केन्द्र मार्गदर्शिका 2022 जारी किया गया है। क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय अम्बिकापुर में लर्निंग लायसेंस बनाने के लिए 24 परिवहन केन्द्र प्रारंभ करने का अनुमोदन प्राप्त हुआ है। शासन द्वारा निर्धारित शर्तों के तहत इच्छुक आवेदन परिवहन कार्यालय अम्बिकापुर में संपर्क कर 25 मई 2022 तक आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। इसके लिए आवेदकों को निर्धारित शुल्क 200 रुपये जमा करना होगा। उन्हें निर्धारित प्रारूप में आवेदन करना होगा।
अन्य खबर /शौर्यपथ/
आधार कार्ड, पैन कार्ड जैसे ज़रूरी दस्तावेज़ों का होना ज़रूरी है यह तो हम जानते हैं। किंतु इनके अलावा भी कुछ ज़रूरी दस्तावेज़ हैं जिन्हें 18 वर्ष की आयु होने के बाद अवश्य बनवा लेना चाहिए। आप दूसरों की मदद की मंशा से भी इनकी सलाह दे सकते हैं ताकि संबंधित लोगों को आरक्षण व अन्य योजनाओं में लाभ मिल सके। कौन-कौन से दस्तावेज़ हैं, पढ़िए हर पृष्ठ पर...
निवासी प्रमाण पत्र
किसी भी संस्थान में नौकरी पाने के लिए इस दस्तावेज़ का होना बहुत ज़रूरी है। कई नौकरियों की परीक्षा में नागरिकों को उनके राज्य के आधार पर नौकरी में आरक्षण दिया जाता है। अगर किसी प्रदेश में नौकरी के लिए पद हैं और उसमें उस राज्य के नागरिकों को अलग से कुछ प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है, तब यह दस्तावेज़ आपकी बहुत सहायता करेगा। आप जिस जनपद के निवासी हैं, वहां की तहसील से यह प्रमाण पत्र बनवाया जा सकता है।
दिव्यांगता प्रमाण पत्र
अगर कोई शारीरिक रूप से दिव्यांग है या उनका कोई अंग ठीक से काम नहीं करता है तो यह प्रमाण पत्र अवश्य बनवाएं। इसके उपयोग से रेल के किराए में कुछ छूट मिलती है और राज्य परिवहन बस में किराया दिए बिना सफ़र कर सकते हैं। साथ ही शिक्षित दिव्यांग व्यक्तियों को बेरोज़गारी भत्ता भी मिलता है। यह प्रमाण पत्र सरकारी नौकरी में आरक्षण की तरह काम करता है। अगर सरकार दिव्यांगों के लिए कोई योजना लाती है तो वहां भी यह बहुत सहायता करेगा।
आय प्रमाण पत्र
अगर आप सामान्य श्रेणी के अंतर्गत आते हैं लेकिन वित्तीय रूप से कमज़ोर हैं और ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र बनवाना चाहते हैं तो आपके पास आय प्रमाण पत्र होना बहुत आवश्यक है। ईडब्ल्यूएस कोटे के अलावा यह शैक्षणिक संस्थानों में छात्रवृत्ति प्राप्त करने में भी मदद करता है। जारी करने वाला प्राधिकरण ग्राम तहसीलदार, जिला मजिस्ट्रेट, कलेक्टर, राजस्व अंचल अधिकारी, उप-मंडल मजिस्ट्रेट या अन्य संबंधित जिला अधिकारी हो सकते हैं।
जाति प्रमाण पत्र
अगर आप अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति या ओबीसी श्रेणी में आते हैं तो जाति प्रमाण पत्र अवश्य बनवा लें। यह विभिन्न सरकारी संस्थानों और योजनाओं का लाभ लेने में मदद करेगा। इसे बनवाने के बाद ही आप सरकारी योजनाओं जैसे सब्सिडी का लाभ आदि ले सकते हैं। छात्रवृत्ति और प्रतियोगी परीक्षाओं में आरक्षण प्राप्त किया जा सकता है। प्रमाण पत्र की मदद से नौकरी में भी आरक्षण मिलता है जो कि सबसे बड़ा फ़ायदा है।
रायपुर /शौर्यपथ/
छत्तीसगढ़ में एक प्रसिद्ध कहावत है - ‘बासी के नून नइ हटय’, इसका कहावत का हिन्दी भावार्थ है कि, बासी में मिला हुआ नमक नहीं निकल सकता। इस कहावत का उपयोग सम्मान के परिपेक्ष्य में किया जाता है। सवाल उठ सकता है कि आखिर यहां बात ‘बासी’ की क्यों हो रही है, तो बात जब किसी प्रदेश की होती है तो साथ में बात वहां के खान-पान की भी होती है। छत्तीसगढ़ में खान-पान के साथ जीवनशैली का एक अहम हिस्सा है ‘बासी’। शायद इसलिए भी छत्तीसगढ़ी फिल्मों में छत्तीसगढ़ी परिवेश को दिखाने के लिए फिल्म के पात्रों को ‘बासी’ खाते दिखाया जाता है।
छत्तीसगढ़ियों के जीवन में ‘बासी’ इतना घुला-मिला है कि समय बताने के लिए भी सांकेतिक रूप से इसका उपयोग किया जाता है। जब सुबह कहीं जाने की बात होती है तो बासी खाकर निकलने का जवाब मिलता है, इससे पता चल जाता है कि व्यक्ति सुबह 8 बजे के बाद घर से निकलेगा। वहीं दोपहर के वक्त बासी खाने के समय की बात हो तो मान लिया जाता है कि लगभग 1 बजे का समय है। ‘बासी खाय के बेरा’, से पता चल जाता है कि यह लंच का समय है। छत्तीसगढ़ में बासी को मुख्य आहार माना गया है। बासी का सेवन समाज के हर तबके के लोग करते हैं। रात के बचे भात को पानी में डूबाकर रख देना और उसे नाश्ता के तौर पर या दोपहर के खाने के समय इसका सेवन आसानी से किया जा सकता है। इसलिए इसे सुलभ व्यंजन भी माना गया है। विशेषकर गर्मी के मौसम में बोरे और बासी को बहुतायत लोग खाना पसंद करते हैं।
बोरे और बासी बनाने की विधि :
जहां बाकी व्यंजनों को बनाने के कई झंझट हैं, वहीं बोरे और बासी बनाने की विधि बहुत ही सरल है। न तो इसे सीखने की जरूरत है और न ही विशेष तैयारी की। खास बात यह है कि बासी बनाने के लिए विशेष सामग्री की भी जरूरत नहीं है। बोरे और बासी बनाने के लिए पका हुआ चावल (भात) और सादे पानी की जरूरत है। यहां बोरे और बासी इसलिए लिखा जा रहा है मूल रूप से दोनों की प्रकृति में अंतर है।
बोरे से अर्थ, जहां तत्काल चुरे हुए भात (चावल) को पानी में डूबाकर खाना है। वहीं बासी एक पूरी रात या दिनभर भात (चावल) को पानी में डूबाकर रखा जाना होता है। कई लोग भात के पसिया (माड़) को भी भात और पानी के साथ मिलाने में इस्तेमाल करते हैं। यह पौष्टिक भी होता है और स्वादिष्ट भी। बोरे और बासी को खाने के वक्त उसमें लोग स्वादानुसार नमक का उपयोग करते हैं।
प्याज, अचार और भाजी बढ़ा देते हैं स्वाद :
बासी के साथ आमतौर पर प्याज खाने की परम्परा सी रही है। छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचल में प्याज को गोंदली के नाम से जाना जाता है। वहीं बोरे या बासी के साथ आम के अचार, भाजी जैसी सहायक चीजें बोरे और बासी के स्वाद को बढ़ा देते हैं। दरअसल गर्मी के दिनों में छत्तीसगढ़ में भाजी की बहुतायत होती है। इन भाजियों में प्रमुख रूप से चेंच भाजी, कांदा भाजी, पटवा भाजी, बोहार भाजी, लाखड़ी भाजी बहुतायत में उपजती है। इन भाजियों के साथ बासी का स्वाद दुगुना हो जाता है। इधर बोरे को दही में डूबाकर भी खाया जाता है। गांव-देहातों में मसूर की सब्जी के साथ बासी का सेवन करने की भी परंपरा है। कुछ लोग बोरे-बासी के साथ में बड़ी-बिजौरी भी स्वाद के लिए खाते हैं।
बोरे-बासी खाने से लाभ :
बोरे-बासी के सेवन से नुकसान तो नहीं लाभ कई हैं। इसमें पानी की भरपूर मात्रा होती है, जिसके कारण गर्मी के दिनों में शरीर को शीतलता मिलती है। पानी की ज्यादा मात्रा होने के कारण मूत्र उत्सर्जन क्रिया नियंत्रित रहती है। इससे उच्च रक्तचाप नियंत्रण करने में मदद मिलती है। बासी पाचन क्रिया को सुधारने के साथ पाचन को नियंत्रित भी रखता है। गैस या कब्ज की समस्या वाले लोगों के लिए यह रामबाण खाद्य है। बासी एक प्रकार से डाइयूरेटिक का काम करता है, अर्थ यह है कि बासी में पानी की भरपूर मात्रा होने के कारण पेशाब ज्यादा लगती है, यही कारण है कि नियमित रूप से बासी का सेवन किया जाए तो मूत्र संस्थान में होने वाली बीमारियों से बचा जा सकता है। पथरी की समस्या होने से भी बचा जा सकता है। चेहरे में ताजगी, शरीर में स्फूर्ति रहती है। बासी के साथ माड़ और पानी से मांसपेशियों को पोषण भी मिलता है। बासी खाने से मोटापा भी दूर भागता है। बासी का सेवन अनिद्रा की बीमारी से भी बचाता है। ऐसा माना जाता है कि बासी खाने से होंठ नहीं फटते हैं। मुंह में छाले की समस्या नहीं होती है।
बासी का पोषक मूल्य :
बासी में मुख्य रूप से संपूर्ण पोषक तत्वों का समावेश मिलता है। बासी में कार्बोहाइड्रेट, आयरन, पोटेशियम, कैल्शियम, विटामिन्स, मुख्य रूप से विटामिन बी-12, खनिज लवण और जल की बहुतायत होती है। ताजे बने चावल (भात) की अपेक्षा इसमें करीब 60 फीसदी कैलोरी ज्यादा होती है। बासी को संतुलित आहार कहा जा सकता है। दूसरी ओर बासी के साथ हमेशा भाजी खाया जाता है। पोषक मूल्यों के लिहाज से भाजी में लौह तत्व प्रचुर मात्रा में विद्यमान रहते हैं। इसके अलावा बासी के साथ दही या मही सेवन किया जाता है। दही या मही में भारी मात्रा में कैल्शियम मौजूद रहते हैं। इस तरह से सामान्य रूप से बात की जाए तो बासी किसी व्यक्ति के पेट भरने के साथ उसे संतुलित पोषक मूल्य भी प्रदान करता है।
धमतरी /शौर्यपथ/
धमतरी शहरी क्षेत्र में 13 शहरी स्वास्थ्य केन्द्र संचालित हैं, जिनमें से 06 शहरी स्वास्थ्य सुविधा केंद्रों का चयन ’हमर क्लिनिक’ के रूप में संचालित करने के लिए राज्य शासन से दिशा-निर्देश मिले हैं। इसमें नगरपालिक निगम के नवागांव वार्ड, जोधापुर, सुभाषनगर, कोष्टापारा, गोकुलपुर और बांसपारा वार्ड में संचालित शहरी स्वास्थ्य सुविधा केन्द्र सम्मिलित हैं। कलेक्टर पी.एस.एल्मा ने आज सुबह ’हमर क्लिनिक’ के लिए भवन निर्माण हेतु स्थान चयन करने उक्त छः केन्द्रों का भ्रमण किया। इस मौके पर कलेक्टर ने उपस्थित कार्यपालन अभियंता नगर निगम, तहसीलदार सहित अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे तत्काल चयनित स्थान को स्वास्थ्य विभाग को हस्तांतरित करें।
इस संबंध में शहरी स्वास्थ्य कार्यक्रम प्रबंधक ने बताया कि ’हमर क्लिनिक’ का प्राथमिक उद्देश्य शहरवासियों, कामकाजी आबादी, स्कूल जाने वाले बच्चों की जरूरतों को पूरा करने के लिए सुबह 09 से दोपहर 01 बजे तक और शाम 05 से रात 08 बजे के लिए सामान्य सेवाएं प्रदाय करना है। इसके अलावा विशेष रूप से झुग्गी झोपड़ियों मेें रहने वालों को मुफ्त परामर्श, काउंसिलिंग, निःशुल्क स्वास्थ्य जांच एवं परीक्षण और मुफ्त दवाएं उपलब्ध कराना है। साथ ही निवासियों का पंजीकरण और स्वास्थ्य पहचान पत्र जारी करना, स्वास्थ्य शिक्षा और जागरूकता को बढ़ावा देना, गर्भवती महिलाओं के लिए मुफ्त एएनसी और पीएनसी देखभाल सहायता, संचारी और गैर संचारी रोगों की समय पर जांच उपचार और लगातार देखभाल सुनिश्चित करना भी इसका उद्देश्य है। इसके अलावा एक सुसंगत रेफरल तंत्र विकसित करना और स्वास्थ्य परिवहन पर ओओपीई को कम करना तथा इलाके में स्वास्थ्य के सामाजिक निर्धारकों को संबोधित करना भी ’हमर क्लिनिक’ का प्रमुख उद्देश्य है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.डी.के.तुरे ने बताया कि ’हमर क्लिनिक’ निर्माण के लिए प्रति क्लिनिक 25 लाख रूपए की राशि प्रदाय की गई है। वर्तमान में संचालित शहरी स्वास्थ्य सुविधा केन्द्र में हमर क्लिनिक के अनुरूप दी जाने वाली स्वास्थ्य सुविधा के अनुसार पर्याप्त स्थान एवं कई स्थान पर वाहन (एम्बूलेंस) आवागमन के लिए अनुकूल रास्ता का अभाव है। इसके मद्देनजर आज कलेक्टर भवन निर्माण हेतु स्थान चयन करने भ्रमण किया। ज्ञात हो कि इसमें मेडिकल ऑफिसर, स्टॉफ नर्स, एमपीडब्ल्यू (पुरूष), जूनियर सैकेट्रियल असिस्टेंट, चतुर्थ श्रेणी और ए.एन.एम. अपनी सेवाएं देंगे। फिलहाल स्टॉफ चयन प्रक्रियाधीन है। इस दौरान कलेक्टर ने इसे प्राथमिकता से पूरा करने के निर्देश दिए।
रायपुर /शौर्यपथ/
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के भेंट-मुलाक़ात अभियान को लेकर बच्चों में भी उत्सुकता नज़र आ रही है। सामरी विधानसभा के शंकरगढ़ में जब बच्चों को प्रदेश के मुख्यमंत्री के आने की जानकारी मिली तो उनके साथ फ़ोटो खिंचाने की चाहत में वे सुबह से ही इकट्ठे होकर इंतज़ार करते रहे। यहाँ साक्षी बेग नाम की बच्ची सुबह से ही मुख्यमंत्री संग फ़ोटो खिंचाने के लिए बैठी हुई थी। मुख्यमंत्री बघेल को शंकरगढ़ पहुँचने पर जब इस बात की खबर मिली तो वे बच्चों के पास गए और उनके साथ तस्वीरें खिंचवाई। स्नेही मुख्यमंत्री बघेल ने बच्चों को दुलार करते हुए बातचीत भी की।
बस्तर /शौर्यपथ/
विकासखण्ड कोयलीबेड़ा के प्राथमिक शाला कसादण्ड में पदस्थ सहायक शिक्षक (एल.बी.) मुकेश उसेण्डी को कलेक्टर चन्दन कुमार द्वारा तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय खण्ड शिक्षा अधिकारी कार्यालय भानुप्रतापपुर नियत किया गया है। इस अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता की पात्रता होगी।
:
रायपुर /शौर्यपथ/
राज्यपाल अनुसुईया उइके से आज राजभवन में नवनियुक्त विधिक सलाहकार राजेश श्रीवास्तव ने सौजन्य भेंट की।
रायपुर /शौर्यपथ/
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के भेंट-मुलाकात अभियान के पहले दिन सामरी विधानसभा क्षेत्र के कुसमी के बाद दूसरे पड़ाव शंकरगढ़ रहा। जहां उन्होंने शंकरगढ़ के जनपद कार्यालय और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के पोषण पुनर्वास केन्द्र का निरीक्षण किया।
मुख्यमंत्री ने आमजनता से भेंट-मुलाकात के दौरान शंकरगढ़ में कृषि महाविद्यालय खोलने की घोषणा की। उन्होंने जगिमा, पटना होकर कोदोडीपा एनएच-343 के बीच वनभूमि में करीब 7 किमी. सड़क के डामरीकरण, गलफुल्ला नदी में बने पुल की ऊंचाई बढ़ाने, धारानगर से हरिलेटा पहुंच मार्ग पर बिछरी नदी पर पुल निर्माण, ग्राम पोंड़ी खुर्द से जिला जशपुर के ग्राम सुलेशा के बीच दनगरी घाट तक करीब 12 किमी सड़क निर्माण की घोषणा की। इस मौके पर उन्होंने कहा, जोगापाठ की पांच ग्राम पंचायतों में जहां बिजली नहीं पहुंची है, वहां बिजली प्रदाय की व्यवस्था की जायेगी। मुख्यमंत्री ने महुआडीह से भरतपुर के बीच सड़क निर्माण की भी स्वीकृति दी।
मुख्यमंत्री ने सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के निरीक्षण के दौरान एनआरसी में भर्ती बच्चों के स्वास्थ्य के बारे में चिकित्सकों और अभिभावकों से जानकारी ली और बच्चों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर चिकित्सकों को हिदायत दी की सभी आवश्यक दवाईयां अस्पताल में उपलब्ध रहे। सभी चिकित्सक जेरेरिक दवाईयां ही लिखे। अस्पताल में आने वाले सभी मरीजों को उपचार की सुविधा मिले। इसका विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने कहा कि डॉक्टर ओपीडी में उपस्थित रहकर मरीजों का उपचार करें। उन्होंने अस्पताल में सभी जरूरी उपकरणों को चालू हालत में रखने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने जनपद पंचायत कार्यालय का भी आकस्मिक निरीक्षण किया और जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने शंकरगढ़ में जनपद पंचायत कार्यालय के निरीक्षण के दौरान वहां के अधिकारियों से पेंशन भुगतान के बारे में पूछा। उन्होंने जनपद पंचायत क्षेत्र के अंतर्गत कितने लोगों को कौन-कौन से पेंशन मिल रहा है, इसकी जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से मुख्यमंत्री पेंशन कैसे स्वीकृत करते हैं इसके बारे में भी पूछा। अधिकारियों ने बताया कि जनपद पंचायत क्षेत्र में मार्च 2022 तक के पेंशन का भुगतान हो चुका है।
मुख्यमंत्री ने पेंशन भुगतान के तरीकों के बारे में भी जानकारी ली। अधिकारियों ने बताया कि बैंक खातों के माध्यम से, बैंक सखियों के माध्यम से और पात्र हितग्राहियों को पेंशन का भुगतान नगद भी किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आमजनता से प्राप्त आवेदनों का समय पर निराकरण किया जाए। हितग्राहियों को अपनी समस्याओं के निराकरण के लिए बार-बार शासकीय कार्यालयों में आना न पड़े, इसका विशेष ध्यान रखा जाए।
रायपुर /शौर्यपथ/
की संस्कृति में वहां की भौगोलिक परिस्थितियां काफी असर
किसी भी राज्य की संस्कृति में वहां की भौगोलिक परिस्थितियां काफी असर डालती है। छत्तीसगढ़ में देश के अन्य हिस्सों की तुलना में ज्यादा बारिश होती है, इसलिए यहां धान की फसल ली जाती है। धान की विपुल फसल होने के कारण छत्तीसगढ़ देशभर में धान के कटोरे के रूप में प्रसिद्ध है। यहां के किसानों की आय के मुख्य जरिया भी धान की फसल है। यहां तीज त्यौहारों से लेकर दैनिक जीवन में चावल का बहुतायत से उपयोग होता है।
छत्तीसगढ़ की कला-संस्कृति-खान-पान, बोली-भाषा और वेश-भूषा पर गर्व की अनुभूति दिलाने के लिए मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की पहल पर एक मई को अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर को प्रदेश मंे बोरे बासी दिवस के रूप में मनाने, सामूहिक रूप से बोरे बासी खाने का आह्वान किया गया। सामाजिक समरसता के साथ-साथ किसानों और श्रमवीरों का मान बढाने की दिशा में एक प्रशंसनीय कदम है। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ी संस्कृति और लोक परंपराओं, तीज-त्यौहारों को प्रोत्साहन देने के लिए कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ के लोकगायन में भी बोरे बासी का विवरण मिलता है। यह हमारी संस्कृति में रची-बसी है। यहां अमीर-गरीब सभी के घरों में इसे चाव से खाया जाता है। मेहमानों को भी इसे परोसा जाता है। लोक गायक शेख हुस्सैन जी ने बासी खाने वाले किसानों, श्रमवीरों के सम्मान के लिए ‘बटकी म बासी अउ चुटकी म नून, मै हा गांवथव ददरिया तैहां कान दे के सुन’ जैसा लोकगीत गाया।
गर्मी के मौसम में जब तापमान अधिक होता है तब छत्तीसगढ़ में बोरे बासी विशेष तौर पर खाई जाती है। यह लू से बचाने का काम करती है। वही दूसरी ओर इससे शरीर को कई प्रकार के पोषक तत्व भी मिलते हैं। उल्टी, दस्त जैसी बीमारियों में यह शरीर में पानी की कमी को दूर करती है। इन्ही खूबियों के कारण बोरे बासी छत्तीसगढ़ में लोकप्रिय है। आमतौर पर घरों में पके हुए अतिरिक्त चावल के सदुपयोग के लिए बोरे बासी तैयार की जाती है। इसके गुणकारी महत्व को देखते हुए इसे घरो घर खाने का प्रचलन है।
की संस्कृति में वहां की भौगोलिक परिस्थितियां काफी असर
छत्तीसगढ़ की संस्कृति है कि विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में यदि अचानक कोई मेहमान आ जाये अथवा कोई व्यक्ति आ जाए तो वह भूखा न जाए। सुबह जब लोग काम पर जाए तो उसके लिए तात्कालिक तौर पर भोजन की व्यवस्था हो जाए शायद इसी उद्देश्य से उपलब्ध सदस्य से अधिक खाना बनाने का रिवाज प्रचलित है। रात के बचे हुए चावल को पानी में डुबाकर रख देते है और सुबह नास्ते या भोजन के तौर पर विशेष कर सबेरे से ही काम पर जाने वाले किसान और श्रमिक खाते है इसे ही ‘बोरे बासी’ कहा जाता है।
बोरे बासी जहां गर्मी के मौसम में ठंडकता प्रदान करता है, वहीं पेट विकार को दूर करने के साथ ही पाचन के लिए रामबाण डिश है। बोरे बासी पर्याप्त पौष्टिक आहार के रूप में उभर कर सामने आया है। बोरे बासी को लोग प्याज, टमाटर-हरी मिर्च की चटनी, आम का आचार, करमता बाजी, चेच भाजी, अमारी भाजी, बिजौरी व पापड़ आदि के साथ चाव से खाया जाता है। यह धीरे-धीरे हमारी रोज की चलन में आ गया और छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध डिश बन गया
रायपुर /शौर्यपथ/
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से आज कुसमी में यूक्रेन से लौटे छात्र शुभ आशीष मिश्रा ने मुलाकात कर उन्हें धन्यवाद दिया। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री की पहल पर यूक्रेन से लौटे छात्र-छात्राओं के लिए नई दिल्ली में नि:शुल्क रहने, खाने और घर वापस भेजने की व्यवस्था की गई थी
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
