September 28, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

    धमतरी / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल रायपुर द्वारा आयोजित हाईस्कूल/हायर सेकेण्डरी/हायर सेकेण्डरी व्यावसायिक परीक्षा सत्र 2020-21 के नियमित परीक्षार्थियों के लिए परीक्षा आवेदन…
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    राजशेखर नायर/ नगरी/
    शौर्य पथ समाचार


    वर्तमान में कृषि उपज मंडी समितियों के माध्यम से किसानों का धान टोकन सिस्टम से खरीदा व बेचा जा रहा है। धान खरीदी का कार्य आदिम जाति सहकारी समितियों द्बारा किया जा रहा है। विगत 1 दिसंबर से धान बिकना एवं टोकन कटना चालू हो चुका है। इसमें फरसिया सहकारी समिति से एक भयंकर त्रुटि युक्त जानकारी मिली है जिसमें ग्राम गोरेगांव निवासी 67 वर्षीय ललिता देवी साहू के नाम से 2 एकड़ कृषि भूमि है जो कि उनके पिता जी के जमाने से उस जमीन पर कृषि कार्य होते आ रहा है। इन्हें 2 दिसंबर को धान बिक्री हेतु टोकन मिला, टोकन देख कर वह वृद्धा हैरान रह गयी कि उनके नाम से एक ही पर्चा में एक ही पृष्ट पर अंकित 2 एकड़ कृषि भूमि को मात्र 1 एकड़ दर्शाया गया है। वह वृद्धा बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने की स्थिति में नहीं होने की वजह से अपने भाई-बंधु से फरसिया समिति में पता लगवाया गया। कार्यालय में ज्ञात हुआ कि पटवारी ने जो लिखकर दिया है उसी के आधार पर ही टोकन काटा गया है। गलती पटवारी का होना बतलाया गया। अब पटवारी से संपर्क किया गया तो ज्ञात हुआ है कि पटवारी ने 2 एकड़ कृषि भूमि होने की सही जानकारी सहकारी समिति फरसिया को प्रेषित किया है। तब जाकर सही जानकारी ज्ञात हुआ कि यह गलती सीधे-सीधे सहकारी समिति की है। उन्होने ही टोकन काटने व रिकार्ड बनाने में गलती की है। इस प्रकार उस असहाय वृद्धा की कृषि भूमि 2 एकड़ रहते हुए मात्र 1 एकड़ की धान बिक्री हुई तथा एक एकड़ का धान पड़ा हुआ है जबकि उस वृद्धा की आय का कोई और अन्य साधन नहीं है।
    अब पटवारी के पास शिकायत करने पर, पटवारी के द्वारा सहकारी समिति के संज्ञान में शिकायत को लाया गया तब कम्पूटर में सुधार हो जाने की जानकारी मिली है परंतु अब भी शेष 1 एकड़ जमीन का टोकन नहीं कट रहा है। फरसिया समिति प्रभारी श्री गौर द्वारा अब बतलाया जा रहा है कि तहसीलदार के द्वारा अनुमोदन पश्चात ही टोकन कटने की बात बतलायी गयी है।
    अब प्रश्न यह उठता है कि उस वृद्धा के आय का एकमात्र साधन कृषि उपज धान है, उसमें भी आधा धान बिका व आधा शेष है! तो उस वृद्धा के आजीविका का प्रबंधन क्या धान खरीदने वाली समिति करेगी? क्योंकि उन्हीं के गलती से ही पूरा धान नहीं बिका और धड़ल्ले से बोल दिया गया था कि ये पटवारी की गलती है।अ
    अब शासन द्वारा आदेश भी जारी हो चुका है कि जिनके भी रकबे में त्रुटि है उसे तत्काल सुधार कर कार्यवाही करें परंतु अब धान बिक्री का समय 1माह निकलने वाला है फिर भी कार्यवाही पूर्ण नहीं हुआ है। इससे लगता है कि शासन का आदेश भी किसानों को धान बेचने की सुविधा से वंचित कर रखा है। और सुनने वाला कोई नहीं है।

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