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February 28, 2026
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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

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मनोरंजन / शौर्यपथ / इन डायलॉग्स की वजह से टाइट है 'मिर्जापुर 2' का भौकाल
वेब सीरीज मिर्जापुर 2 अमेजन प्राइम पर 22 अक्टूबर को रिलीज कर दी गई है। पिछले सीजन की तरह इस सीजन को भी दर्शकों से अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। सीरीज के पहले सीजन में किरदारों के डायलॉग्स काफी पॉप्युलर हुए थे, जो आज भी लोगों को याद हैं। उसी तरह दूसरे सीजन में ऐसे कई डायलॉग्स हैं जो फैन्स को काफी पसंद आ रहे हैं। 'मिर्जापुर 2' के इन डायलॉग्स की वजह से सीरीज का भौकाल टाइट है।
-कुछ लोग बाहूबली पैदा होते हैं और कुछ को बनाना पड़ता है, इनको बाहुबली बनाएंगे।
-औरत चाहे चंबल की हो या पूर्वांचल की, जब गन उठाई है तो इसका मतलब है कि दिक्कत में है।
-जब कुर्बानी देने का टाइम आए तो सिपाही की दी जाती है। राजा और राजकुमार जिंदा रहते हैं गद्दी पर बैठने के लिए।
-शादीशुदा मर्द को अपनी स्त्री से भय न हो तो इसका मतलब है कि शादी में कुछ गड़बड़ है।
-शर्मा से क्या शर्माना, दिस इज ए कॉमन डिजीज।
-दिखाते समय कॉन्फिडेंस हो तो पब्लिक पूछती नहीं कि फाइल में क्या है।
-बातें ज्यादा हुई नहीं, बस आहट लेकर आ गए
तय समय से पहले रिलीज हुई मिर्जापुर 2
वेब सीरीज मिर्जापुर 2 ओटीटी प्लैटफॉर्म अमेजन प्राइम पर तय समय और तारीख से पहले ही रिलीज कर दी गई है। दरअसल, यह 23 अक्टूबर को रिलीज होने वाली थी, लेकिन स्ट्रीमिंग प्लैटफॉर्म ने इसे तीन घंटे पहले ही रिलीज कर दिया। अमेजन प्राइम पर यह सीरीज 22 अक्टूबर को रात 8 बजे रिलीज की गई।
बता दें कि पिछले सीजन की तरह इस सीजन में भी पंकज त्रिपाठी, दिव्येंदु शर्मा, अली फजल, रसीका दुग्गल, श्वेता त्रिपाठी और हर्षिता गौर मुख्य भूमिका में नजर आ रहे हैं लेकिन सीजन में कुछ किरदारों को जोड़ा गया है जिनकी भूमिका विजय वर्मा, ईशा तलवार और प्रियांशु पैनयुली निभा रहे हैं। मिर्जापुर 2 का निर्देशन करण अंशुमन और पुनीत कृष्णा ने किया है।
मिर्जापुर 2 समीक्षा

स्टारकास्ट: पंकज त्रिपाठी, अली फजल, दिव्येंदु शर्मा, श्वेता त्रिपाठी, रसिका दुग्गल, विजय वर्मा

डायरेक्टर: गुरमीत सिंह और मिहिर देसाई

रेटिंग: 3 स्टार

अमेजन प्राइम वीडियो की पॉप्युलर वेब सीरीज मिर्जापुर का दूसरा सीजन 22 अक्टूबर को रिलीज हो चुका है। सीरीज में पंकज त्रिपाठी, दिव्येंदु शर्मा, श्वेता त्रिपाठी, अली फजल जैसे सितारों ने काम किया है। हालांकि, कहानी को दिलचस्प बनाने के लिए इस बार कुछ नए सितारों को भी सीजन 2 से जोड़ा गया है। पिछले सीजन की तरह इस बार भी कालीन भैया (पंकज त्रिपाठी) का भौकाल बरकरार नजर आया।
मिर्जापुर 2 में पहले सीजन के आगे की कहानी को दिखाया गया है। पहले सीजन के लास्ट एपिसोड में मुन्ना त्रिपाठी (दिव्येंदु शर्मा), बबलू पंडित (विक्रांत मैसी) और स्वीटी (श्रिया पिलगांवकर) का मार देता है। लेकिन गुड्डू पंडित (अली फजल) और गोलू (श्वेता त्रिपाठी) बच जाते हैं। इसके बाद अब बदला लेने और मिर्जापुर पर राज करने की कहानी शुरू होती है। गुड्डू पंडित भाई और अपनी पत्नी की मौत का बदला, मुन्ना व उसके पिता कालीन भैया से लेना चाहता है। और इस काम में साथ देती है गोलू।

इस सीजन में शुरू के दो एपिसोड गुड्डू पंडित और गोलू के सर्वाइवल पर हैं। दूसरे सीजन की शुरुआत से लेकर अंत तक कहानी परेशान नहीं करती है। बीच-बीच में कॉमेडी, शानदार डायलॉग और सस्पेंस ने जबरदस्त तड़का लगाया गया है। सीरीज में जो बड़े बदलाव होते हैं वह है गोलू का बंदूक उठा लेना और गुड्डू भइया का लंगड़ा हो जाना। कालीन भैया की पत्नी (रसिका दुग्गल) का किरदार आगे-आगे निखर कर आता है।

इस बार कहानी मिर्जापुर से निकलकर लखनऊ तक जा पहुंचती है। गुड्डू पंडित के बदलने की आग और मुन्ना भइया का गद्दी से जुड़ा लालच पूरी सीरीज में स्वाद जमाए रहता है। गुड्डू पंडित अपनी पूरी ताकत के साथ वापसी करता है। लखनऊ में इन्वेस्टमेंट का बिजनेस चलाने वाला रॉबिन (विजय वर्मा) और जौनपुर का बाहुबली रति शंकर शुक्ला का बेटा शरद (अंजुम शर्मा) ने सीरीज को और रोचक बना दिया है। कहानी बढ़ने के साथ-साथ इन किरदारों की अहमियत समझ आती। अब मिर्जापुर की गद्दी पर कौन बैठता है, यह जानने के लिए आपको वेब सीरीज देखनी पडे़गी।
मिर्जापुर के पहले सीजन के बाद सीरीज के डायरेक्टर गुरमीत सिंह और मिहिर देसाई के लिए इस बार पहले से ज्यादा बड़ी चुनौती थी। इस बार भी वह दर्शकों को बांधे रखने में कामयाब हुए हैं। सीरीज का पहला एक एपिसोड खत्म होने के बाद आपको इसका दूसरा एपिसोड देखने पर मजबूर कर देगा।

 

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शौर्यपथ विशेष / बिहार में विधान सभा चुनाव की तारीख नजदीक आते ही नौकरियों का अम्बार लग गया तो कही शराबबंदी हटाने के वादे किये जा रहे तो कही दल बदलुओ को सबक सिखाने की बात हो रही है जिस के मन में जो आये वादे पर वादे किये जा रहा है . खैर चुनावी वादों का पिटारा कितना भरा होता है और कितना खाली अब आम जनता भी समझने लगी है और सोंचने पर विवश भी हो रही है . बिहार के चुनाव में तेजस्वनी यादव 10 लाख की नौकरी देने का वादा कर रहे है किन्तु इन नौकरी के वादे में करोडो का भुगतान कैसे होगा इसका कोई जवाब नहीं दे पा रहे है वही भाजपा के राष्ट्रिय अध्यक्ष देश में लगभग 300 आतंकी के प्रवेश की आशंका जता कर भाजपा को जिताने की अपील कर रहे है अब अचानक ये आतंकी कहा से आगये इसका जवाब भाजपा राष्ट्रिय अध्यक्ष ही दे सकते है .
बिहार विधानसभा चुनाव में हो रही रैली को देख कर ऐसा नहीं लगता कि ये वही भारत है जहां अभी कोरोना के मरीज सबसे ज्यादा पाए जा रहे है और लगातार संख्या में बढ़ोतरी हो रही है . सोशल डिस्टेंस का ज्ञान देने वाले नेता सिर्फ टीवी में ही ज्ञान दे रहे है उन्हें पुरे देश में इसका पालन करवाने की अपील की जा रही है किन्तु बिहार और मध्यप्रदेश के उपचुनाव में ये सोशल डिस्टेंस सिर्फ किवदंती बनकर रह गयी है . खैर ये चुनावी वादे है राजनैतिक पार्टी कितना सिद्धांत पर चलती है और कितने वादे पुरे करती है ये भविष्य की गर्त में है क्योकि यहाँ यह भी देखा गया है कि सत्ता के लिए सारे सिद्धांत ताक पर रख दिए जाते है एक दुसरे पर आरोप की छड़ी लगाने वाले नेता सत्ता के लालच में देशभक्त और देशद्रोही की श्रेणी में एक दुसरे को तौलने और पाला बदलने से भी नहीं चुकते ये चलता रहा है और भविष्य में भी चलता रहेगा .
किन्तु इन वादों के बीच देश की वित्त मंत्री ने जो ब्यान दिया उससे देश की जनता को काफी आहात हुई है . बिहार चुनाव के देश की वित्त मंत्री ने अपने चुनावी वादे में कोरोना आपदा की तकलीफ को भी भुनाने में देर नहीं की कुछ समय पहले यही वित्त मंत्री जी ने प्याज की बढ़ती कीमत पर कहा था कि प्याज की कीमत बढऩे पर मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योकि हम प्याज नहीं खाते तब भी उनके इस तरह के ब्यान की काफी आलोचना हुई थी अब एक बार फिर वित्त मंत्री ने भारत के आम जनता के जिन्दगी में तूफ़ान मचने वाले कोरोना बिमारी पर एक ब्यान दे दिया वित्त मंत्री ने कहा कि अगर बिहार में भाजपा की जीत होगी तो बिहार की जनता को मुफ्त में कोरोना वेक्सिन दी जाएगी . वित्त मंत्री जी क्या भारत के सभी नागरिक और बिहार के नागरिक एक ही देश के निवासी नहीं है फिर ये कैसा सत्ता का नशा और कैसी सत्ता की ताकत आप वित्त मंत्री है जनता के द्वारा चुनी जनप्रतिनिधि है देश के लोकतंत्र में एक बड़े पद में विराजमान है आपने पद ग्रहण करते समय कसम खाई थी कि बिना भेदभाव के देश की सेवा करुँगी कहा गयी अब वो कसम .क्या आम जनो की जान की कीमत लगाना सही है . सिर्फ भारत ही नहीं पूरा विश्व कोरोना वेक्सिन का इंतज़ार कर रहा है और आप है कि सत्ता में जीत के बदले वेक्सिन की कीमत भी तय कर दी कि मुफ्त लगेगा या पैसे से लगाया जायेगा खैर आपकी गलती भी नहीं है भारत की विशाल जनसँख्या में अभी भी ऐसे कई लोग है जो आपके इस फैसले को देशभक्ति के रूप में प्रचारित करेंगे चलिए आपकी बात सही हो और बिहार में आपकी सत्ता आ जाये फिर कम से कम एक प्रदेश में तो मुफ्त में वेक्सिन लगवा दीजियेगा बस ये बता दीजिये कि वेक्सिन कब आएगी , क्या अच्छे दिन जैसे इंतज़ार करना पड़ेगा , क्या जिस तरह सालाना 2 करोड़ नौकरी के वादा पूरा होने का इंतज़ार कर रहे उस तरह इन्तजार करना पड़ेगा या सिर्फ जुमलेबाजी है जो भी हो एक बार तो सच बोल दीजिये कि हमारी जिन्दगी बचेगी कि नहीं हम भी उस देश के निवासी है जिस देश में आप वित्त मन्त्री है ...( शरद पंसारी की कलम से )

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