July 31, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

    प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना, किसानों और श्रद्धालुओं के लिए की बड़ी घोषणाएं

       कबीरधाम । शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज कबीरधाम जिले के डोंगरिया स्थित प्रसिद्ध जलेश्वर महादेव धाम में विधि-विधान से पूजा-अर्चना एवं जलाभिषेक कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, सांसद लक्ष्मी वर्मा, विधायक भावना बोहरा एवं धर्मजीत सिंह सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत हमारी पहचान है तथा सरकार धार्मिक धरोहरों के संरक्षण और विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
    मुख्यमंत्री की बड़ी घोषणाएं
    50 करोड़ रुपए से क्षीरपानी मध्यम परियोजना की नहर विस्तार योजना
    लगभग 1100 हेक्टेयर क्षेत्र में बढ़ेगी सिंचाई सुविधा
    जलेश्वर महादेव धाम के विकास एवं सौंदर्यीकरण हेतु 50 लाख रुपए स्वीकृत
    खरहट्टा से डोंगरिया तक 2.5 किमी सड़क उन्नयन की घोषणा
    प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा जलेश्वर महादेव धाम श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। मान्यता है कि यहां का शिवलिंग स्वयं प्रकट हुआ है, जिसके दर्शन के लिए सावन और महाशिवरात्रि में हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं।

    TVK प्रमुख सी. जोसेफ विजय ने संभाली तमिलनाडु की कमान, 200 यूनिट मुफ्त बिजली और महिला सुरक्षा दल का ऐलान

    चेन्नई /शौर्यपथ (विशेष रिपोर्ट)

    तमिल सिनेमा के सुपरस्टार और तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के प्रमुख सी. जोसेफ विजय (थलापति विजय) ने 10 मई 2026 को तमिलनाडु के 9वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेकर राज्य की राजनीति में एक नया अध्याय लिख दिया।

    चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू इंडोर स्टेडियम में आयोजित भव्य शपथ ग्रहण समारोह में राजनीतिक, फिल्म और सामाजिक जगत की कई बड़ी हस्तियां मौजूद रहीं। मुख्यमंत्री विजय ने सुबह 10:15 बजे तमिल भाषा में पद और गोपनीयता की शपथ ली।

    शपथ ग्रहण के तुरंत बाद मुख्यमंत्री विजय ने जनता से जुड़े कई बड़े फैसलों पर हस्ताक्षर कर यह संकेत दे दिया कि उनकी सरकार “जनहित और तेज निर्णय” की राजनीति पर काम करेगी।

    शपथ लेते ही विजय के 3 बड़े फैसले

    मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद विजय ने जिन पहली फाइलों पर हस्ताक्षर किए, उनमें आम जनता और युवाओं से जुड़े अहम निर्णय शामिल रहे।

    ⚡ 1. 200 यूनिट मुफ्त बिजली

    तमिलनाडु के घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देते हुए राज्य सरकार ने 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने की घोषणा की। इस फैसले को मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

    ?‍✈️ 2. महिला सुरक्षा दल का गठन

    राज्य में महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए विजय सरकार ने Women Safety Squad के गठन को मंजूरी दी। यह विशेष बल महिला सुरक्षा, छेड़छाड़ और अपराध रोकने पर केंद्रित रहेगा।

    ?? 3. एंटी-ड्रग्स स्क्वॉड का गठन

    युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने और राज्य में ड्रग नेटवर्क पर शिकंजा कसने के लिए Anti-Drugs Squad बनाने का फैसला लिया गया।

    9 मंत्रियों ने भी ली शपथ, 29 वर्षीय कीर्तना बनीं सबसे युवा मंत्री

    मुख्यमंत्री विजय के साथ TVK के 9 अन्य विधायकों ने भी मंत्री पद की शपथ ली।
    इस कैबिनेट की सबसे चर्चित चेहरा रहीं 29 वर्षीय सेल्वी एस. कीर्तना, जो सरकार की सबसे युवा मंत्री और एकमात्र महिला मंत्री बनीं।

    राहुल गांधी समेत कई दिग्गज रहे मौजूद

    इस ऐतिहासिक राजनीतिक बदलाव के गवाह बनने के लिए कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी विशेष रूप से समारोह में पहुंचे।

    इसके अलावा समारोह में:

    राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर
    विजय के माता-पिता एस.ए. चंद्रशेखर और शोबा चंद्रशेखर
    अभिनेत्री त्रिशा कृष्णन
    CPI, CPI(M), VCK और IUML के नेता
    भी मौजूद रहे।
    गठबंधन के सहारे TVK ने पार किया बहुमत का आंकड़ा

    2026 विधानसभा चुनाव में TVK ने 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरते हुए तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा उलटफेर किया। विजय द्वारा एक सीट छोड़ने के बाद पार्टी के पास 107 विधायक रह गए।

    13 मई तक विधानसभा में विश्वास मत

    राज्यपाल ने नई सरकार को 13 मई 2026 तक विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव पेश करने का निर्देश दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय सरकार आसानी से बहुमत साबित कर सकती है।

    फिल्मी करिश्मे से सत्ता तक: तमिल राजनीति में नया दौर

    राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि विजय की लोकप्रियता, युवा समर्थन और आक्रामक चुनाव अभियान ने तमिलनाडु की पारंपरिक राजनीति को पूरी तरह बदल दिया है।

    सिनेमा के “थलापति” अब तमिलनाडु की सत्ता के “तलैवर” बन चुके हैं और जनता की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या विजय अपने चुनावी वादों और जनकल्याणकारी फैसलों को जमीन पर उतार पाएंगे।

    दुर्ग/भिलाई। शौर्यपथ। भिलाई के चर्चित उद्योगपति परिवार और Simplex Castings Limited की डायरेक्टर Sangeeta Ketan Shah एवं उनके पति Ketan Shah के खिलाफ जमीन धोखाधड़ी के गंभीर आरोपों ने पूरे…

    आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण की मिसाल बना गायत्री महिला स्व-सहायता समूह

    रायपुर, /आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण की जीवंत मिसाल स्वयं सहायता समूहों और सरकारी योजनाओं से जुड़कर अपने भाग्य को बदलने वाली ग्रामीण महिलाएं हैं। महिलाओं की संघर्ष यह दर्शाती है कि आत्मनिर्भरता से न केवल आर्थिक स्थिति सुधरती है, बल्कि उन्हें समाज में सम्मान और निर्णय लेने का अधिकार भी मिलता है। जहाँ महिलाएं घर से निकलकर उद्यमी बन रही हैं, आत्मनिर्भर भारत का आदर्श उदाहरण प्रस्तुत करती हैं।

    छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के सीपत क्षेत्र स्थित ग्राम कर्रा (हि.) की महिलाओं ने साबित कर दिया है कि यदि इरादे फौलादी हों, तो सफलता कदम चूमती है। बिहान योजना से जुड़कर गायत्री महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने सामूहिक प्रयास और दृढ़ आत्मविश्वास के बल पर न केवल आर्थिक स्वावलंबन प्राप्त किया है, बल्कि समाज के सामने सशक्तिकरण का एक जीवंत उदाहरण भी पेश किया है। ये मिसालें साबित करती हैं कि कौशल विकास, आत्मविश्वास, और वित्तीय स्वतंत्रता जैसे मुद्रा ऋण से महिलाएं न केवल अपने परिवार को बल्कि समाज को भी मजबूत कर रही हैं।
    कुशल नेतृत्व और सरकारी योजनाओं का संगम
    श्रीमती गौरी यादव (अध्यक्ष) और श्रीमती पांचो श्रीवास (सचिव) के कुशल नेतृत्व में संचालित इस 12 सदस्यीय समूह को शासन की योजनाओं से संबल मिला । बिहान योजना से 6 लाख रुपये का ऋण और एकीकृत महिला एवं बाल विकास विभाग से 4 लाख रुपये का ऋण। कुल निवेश 10 लाख रुपये की राशि से महिलाओं ने “श्री राम टेंट हाउस” के नाम से अपने उद्यम की शुरुआत की।
    विस्तार और सेवाएँ- एक सफल बिजनेस मॉडल
    वर्ष 2025 में रामनवमी के अवसर पर शुरू हुआ यह व्यवसाय आज एक विशाल रूप ले चुका है। वर्तमान में समूह के पास निम्नलिखित संसाधन उपलब्ध हैं। 30×30 फीट का मंच, 60×120 फीट का विशाल पंडाल, 60 टेबल, 500 कुर्सियां और 10 जम्बो कूलर है। वैवाहिक कार्यक्रम, सामाजिक आयोजन, शोक सभा और शासकीय शिविरों (जैसे- श्सुशासन तिहारश् और जनसमस्या निवारण शिविर) में टेंट व बर्तन आपूर्ति।
    लाभ के साथ सेवा भी और बर्तन बैंक का संचालन
    समूह केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि अपनी सामाजिक जिम्मेदारी भी बखूबी निभा रहा है। गरीब और जरूरतमंद परिवारों को सामाजिक कार्यों हेतु बर्तन निःशुल्क उपलब्ध कराए जाते हैं। ग्रामीणों के लिए बर्तन बैंक का संचालन किया जा रहा है, जहाँ बेहद कम दरों पर सामग्री उपलब्ध है। बिहान योजना से जुड़कर गायत्री महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने सामूहिक प्रयास और दृढ़ आत्मविश्वास के माध्यम से टेंट हाउस की सेवा गाँव.गाँव पहुँचाकर आर्थिक आत्मनिर्भरता का नया अध्याय लिखा है।
    10 लाख रुपये तक पहुंची वार्षिक आय
    बेहतर प्रबंधन और कड़ी मेहनत का परिणाम यह है कि समूह की वार्षिक आय अब 10 लाख रुपये के करीब पहुंच गई है। स्थानीय प्रशासन के कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी ने इनकी आय और प्रतिष्ठा दोनों में वृद्धि की है। समूह की महिलाओं ने आर्थिक सशक्तिकरण की इस राह को सुगम बनाने के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और प्रदेश सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया है। आज गायत्री महिला स्व-सहायता समूह की ये महिलाएं न केवल आत्मनिर्भर हैं, बल्कि जिले में अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनकर उभरी हैं।

     

    ​रायपुर /

    कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मनोज दयाल ने गुरुवार को छत्तीसगढ़ के माननीय उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान कुलपति ने मंत्री जी को पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका अभिनंदन किया। बैठक के दौरान विश्वविद्यालय के भविष्य, शैक्षणिक सुधारों और बुनियादी ढाँचे के विकास को लेकर व्यापक चर्चा हुई।

    ​विकास के लिए मिले महत्वपूर्ण सुझाव

    ​मुलाकात के दौरान उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने विश्वविद्यालय में संख्यात्मक विस्तार के साथ-साथ गुणात्मक विकास शिक्षा के स्तर में सुधार) पर विशेष जोर दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय को और अधिक उन्नत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव और निर्देश साझा किए। इस अवसर पर उपस्थित कुलसचिव श्री सुनील कुमार शर्मा ने विश्वविद्यालय की लंबे समय से लंबित समस्याओं को मंत्री जी के समक्ष रखा, जिस पर सकारात्मक चर्चा हुई।

    ​राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) पर केंद्रित है पाठ्यक्रम

    ​विश्वविद्यालय वर्तमान में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के मूल उद्देश्यों—गुणवत्ता, समानता, पहुँच और वहनीयता—को ध्यान में रखकर अपने पाठ्यक्रमों का संचालन कर रहा है। यहाँ के मीडिया पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों को रटने की पद्धति से दूर कर उनमें-​आलोचनात्मक सोच,​रचनात्मकता ​बहुविषयक शिक्षा और कौशल विकास ​पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, ताकि वे आधुनिक पत्रकारिता की चुनौतियों का सामना कर सकें।

    ​भीषण गर्मी को देखते हुए छात्रों के लिए बड़ी राहत

    लाइब्रेरी में बनेगा एयरकूल्ड रीडिंग रूम

    ​कुलपति प्रो. मनोज दयाल ने आगामी परीक्षाओं और छात्रों की पढ़ाई के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन को महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। भीषण गर्मी के प्रकोप को देखते हुए उन्होंने लाइब्रेरी में 'एयरकूल्ड रीडिंग रूम' की व्यवस्था करने को कहा है, ताकि छात्र-छात्राएं बिना किसी परेशानी के सुचारु रूप से अपना अध्ययन जारी रख सके।

       रायपुर / शौर्यपथ / बस्तर के नैसर्गिक सौंदर्य और समृद्ध संसाधनों के बीच अब एक नई और सुगंधित क्रांति आकार ले रही है, जिसका श्रेय दंतेवाड़ा जिले के बचेली निवासी युवा उद्यमी विशाल हालदार को जाता है। बीकॉम और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट की शिक्षा प्राप्त करने वाले विशाल ने अपनी जड़ों से जुड़े रहने और कुछ नया करने की चाह में छिंद (खजूर की एक स्थानीय प्रजाति) के उन बीजों से हर्बल कॉफी तैयार की है, जिन्हें अब तक बस्तर में पूरी तरह व्यर्थ समझा जाता था। इस अभिनव प्रयोग के पीछे विशाल का उद्देश्य न केवल बेकार पड़े प्राकृतिक संसाधनों का सदुपयोग करना है, बल्कि कॉफी के उन शौकीनों को एक स्वस्थ विकल्प प्रदान करना है जो स्वाद तो चाहते हैं लेकिन कैफीन के दुष्प्रभावों से बचना चाहते हैं। विशाल का यह सफर करीब दो वर्षों के गहन शोध और प्रयोगों का परिणाम है, जिसमें उन्होंने इंटरनेट की मदद और स्थानीय समझ का बखूबी तालमेल बिठाया है। विशाल की इस नवाचार को इनोवेशन महाकुंभ में प्रथम स्थान मिला, जिसके लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के द्वारा सम्मानित किया गया।
    इस हर्बल कॉफी की सबसे प्रभावशाली विशेषता इसका पूरी तरह से कैफीन मुक्त होना है, जबकि इसमें छिंद के प्राकृतिक गुणों के कारण प्रचुर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। विशाल का मानना है कि अधिकांश लोग केवल मानसिक सक्रियता के लिए ही नहीं, बल्कि कॉफी के अनूठे स्वाद और उसकी आदत के कारण इसका सेवन करते हैं, और उनकी यह खोज इसी वर्ग को ध्यान में रखकर की गई है। इस नवाचार को तब बड़ी पहचान मिली जब विशाल ने शहीद महेन्द्र कर्मा विश्वविद्यालय जगदलपुर में आयोजित इनोवेशन महाकुंभ में अपना स्टॉल लगाया। वहाँ प्रदेश के वित्त मंत्री ओपी चैधरी सहित विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों और आम जनता ने इस कॉफी का स्वाद चखा और इसकी खूब सराहना की। विशाल केवल एक उत्पाद बनाने तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि वे दंतेवाड़ा जिला प्रशासन के यूथ अप फाउंडेशन के माध्यम से स्थानीय युवाओं को उद्यमिता के लिए प्रेरित भी कर रहे हैं। वे चाहते हैं कि उनके इस आइडिया से बस्तर के ग्रामीणों को रोजगार मिले और गांवों और जंगल से मिलने वाले छिंद के बीजों से उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त हो सके।
    हालांकि यह प्रोजेक्ट अभी भी टेस्टिंग और विकास के दौर में है और इसका आधिकारिक लॉन्च होना बाकी है, लेकिन विशाल के इस अटूट प्रयास ने यह साबित कर दिया है कि यदि दृष्टि स्पष्ट हो तो स्थानीय वेस्ट को भी वैश्विक स्तर के बेस्ट उत्पाद में बदला जा सकता है। आने वाले समय में यह हर्बल कॉफी न केवल बस्तर की पहचान बन सकती है, बल्कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूक दुनिया के लिए एक अनूठा उपहार भी साबित हो सकती है।

    15 साल बाद बदली सत्ता की तस्वीर, ममता युग का अंत — 9 मई को ब्रिगेड परेड ग्राउंड में होगा भव्य शपथ ग्रहण

    कोलकाता/शौर्यपथ।

    पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। भारतीय जनता पार्टी ने 8 मई 2026 को वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी को पश्चिम बंगाल का अगला मुख्यमंत्री घोषित कर दिया है। 2026 विधानसभा चुनाव में भाजपा ने प्रचंड बहुमत हासिल करते हुए 294 में से 207 सीटों पर जीत दर्ज की, जिसके साथ ही राज्य में तृणमूल कांग्रेस का 15 वर्षों से चला आ रहा शासन समाप्त हो गया।

    भाजपा विधायक दल की बैठक कोलकाता में केंद्रीय पर्यवेक्षकों और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में आयोजित की गई, जहां शुभेंदु अधिकारी को सर्वसम्मति से विधायक दल का नेता चुना गया। पार्टी ने इसे “बंगाल में परिवर्तन का निर्णायक जनादेश” बताया है।

    ब्रिगेड परेड ग्राउंड बनेगा सत्ता परिवर्तन का साक्षी

    शुभेंदु अधिकारी का शपथ ग्रहण समारोह शनिवार, 9 मई 2026 को सुबह 11 बजे कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित होगा। भाजपा इस समारोह को बंगाल की राजनीति के सबसे बड़े शक्ति प्रदर्शन के रूप में देख रही है। समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष सहित एनडीए शासित राज्यों के कई मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय स्तर के नेता शामिल होंगे।

    पार्टी सूत्रों के अनुसार फिलहाल राज्य में किसी उपमुख्यमंत्री की नियुक्ति नहीं की जाएगी और सरकार का नेतृत्व पूरी तरह शुभेंदु अधिकारी के हाथों में रहेगा।

    ‘जायंट किलर’ बने शुभेंदु अधिकारी

    इस चुनाव का सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश भवानीपुर सीट से आया, जहां शुभेंदु अधिकारी ने निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को 15,105 मतों के अंतर से पराजित किया। इसके साथ ही उन्होंने अपनी पारंपरिक नंदीग्राम सीट भी बरकरार रखी।

    राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह जीत केवल चुनावी परिणाम नहीं, बल्कि बंगाल की बदलती राजनीतिक मानसिकता का संकेत मानी जा रही है।

    ममता के करीबी से भाजपा का चेहरा बनने तक

    शुभेंदु अधिकारी कभी तृणमूल कांग्रेस के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते थे और ममता बनर्जी के बेहद करीबी माने जाते थे। दिसंबर 2020 में भाजपा में शामिल होने के बाद उन्होंने बंगाल में पार्टी के सबसे आक्रामक और जनाधार वाले नेता के रूप में अपनी पहचान बनाई।

    2021 से 2026 तक पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में उनकी भूमिका लगातार चर्चा में रही। विधानसभा से लेकर सड़क तक तृणमूल सरकार के खिलाफ उनके तेवर भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए ऊर्जा का केंद्र बने रहे।

    भाजपा के लिए पूर्वी भारत में सबसे बड़ी जीत

    भाजपा की यह जीत केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे पूर्वी भारत की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। पार्टी कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह है और कोलकाता सहित कई जिलों में विजय जुलूस निकाले जा रहे हैं।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बंगाल में भाजपा की यह ऐतिहासिक सफलता आने वाले वर्षों में राष्ट्रीय राजनीति की दिशा और रणनीति दोनों को प्रभावित कर सकती है।

    By- नरेश देवांगन 

    जगदलपुर, शौर्यपथ। सरकार आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए भरसक प्रयास कर रही है, योजनाएं बन रही हैं, बजट खर्च हो रहा है—लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ गैर-जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों की कार्यशैली इन प्रयासों पर सवाल खड़े करती दिख रही है। हालात ऐसे बनते दिख रहे हैं मानो जनता का पैसा और सरकारी मंशा, दोनों ही कागज़ों में बेहतर और जमीन पर कमजोर पड़ रहे हों। सबसे चिंताजनक यह है कि जिन अधिकारियों को जिले में निरीक्षण और निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है, उन्हें भी यह सब या तो दिखाई नहीं दे रहा, या फिर प्राथमिकता में नहीं है।

    इसी क्रम में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र काकलूर से सामने आई जानकारियों ने व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय स्तर पर यह बात सामने आई है कि केंद्र में पदस्थ आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी द्वारा नियमित रूप से ड्यूटी का निर्वहन नहीं किया जा रहा है, जिससे मरीजों को निरंतर सेवाएं मिल पाना प्रभावित हो रहा है।

    मामले को और गंभीर बनाते हुए विभागीय सूत्रों का दावा है कि संबंधित महिला चिकित्सा अधिकारी महीने में एक बार आ जाएं तो ही “बहुत” माना जाता है, जबकि कभी-कभार तो वे लंबे समय तक अनुपस्थित रहती हैं। सूत्र यह भी बताते हैं कि उनके पति—जो स्वयं अन्य स्थान पर पदस्थ बताए जाते हैं—सप्ताह में एक बार आकर उपस्थिति रजिस्टर, ओपीडी रजिस्टर सहित अन्य आवश्यक प्रविष्टियां भरते नजर आते हैं। यदि यह तथ्यात्मक रूप से सही है, तो यह व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

    सूत्रों के अनुसार, यह सब संभव होने के पीछे स्थानीय स्तर पर “संरक्षण” की चर्चा भी है, जिसमें विकासखंड चिकित्सा अधिकारी की भूमिका को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, यह पहलू जांच का विषय है और आधिकारिक पुष्टि के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

    ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकारी स्वास्थ्य संस्थान अब जिम्मेदारी से अधिक “व्यवस्था के भरोसे” चल रहे हैं? और क्या निगरानी तंत्र केवल कागज़ों तक सीमित रह गया है? यदि आरोपों में सच्चाई पाई जाती है, तो यह न केवल सेवा नियमों का उल्लंघन है, बल्कि आमजन के विश्वास के साथ भी गंभीर समझौता है।

    अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं—क्या पारदर्शी जांच और कार्रवाई होगी, या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में ही सिमट कर रह जाएगा।

    चेन्नई: तमिलनाडु की सियासत में इस वक्त जबरदस्त हलचल मची हुई है। राज्य में सरकार गठन को लेकर जारी रस्साकशी के बीच डीएमके (DMK) प्रमुख एमके स्टालिन ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है। बहुमत के जादुई आंकड़े को छूने की कोशिशों के बीच स्टालिन ने घोषणा की है कि उनकी पार्टी, टीवीके (TVK) प्रमुख विजय की संभावित सरकार में अगले छह महीने तक कोई दखल नहीं देगी।

    संवैधानिक संकट टालने की कोशिश

    स्टालिन ने स्पष्ट किया कि डीएमके राज्य में किसी भी तरह के संवैधानिक संकट या समय से पहले चुनाव के पक्ष में नहीं है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी केवल स्थिति पर नजर रखेगी और नई सरकार को कामकाज का मौका देगी। राजनीतिक विश्लेषक इसे स्टालिन का एक सोची-समझी रणनीति के तहत चला गया 'मास्टरस्ट्रोक' मान रहे हैं।

    कल्याणकारी योजनाओं पर टिकी नजर

    पूर्व मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि नई सरकार डीएमके शासनकाल की प्रमुख योजनाओं को बंद नहीं करेगी। उन्होंने विशेष रूप से दो योजनाओं का जिक्र किया:

    स्कूली बच्चों के लिए मुफ्त नाश्ता योजना

    महिलाओं के लिए ₹1000 मासिक सहायता योजना

    स्टालिन ने कहा, "हमने 2021 के घोषणापत्र के 90 प्रतिशत वादे पूरे किए हैं। जो अधूरे रहे, वे केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में होने के कारण रुके। जनता के हित की योजनाओं का भविष्य अब नई सरकार के हाथों में है।"

    टीवीके के वादों पर उठाए सवाल

    जहाँ एक ओर स्टालिन ने नरम रुख दिखाया, वहीं टीवीके के चुनावी वादों पर चुटकी लेने से भी नहीं चूके। उन्होंने कहा कि चुनाव में बड़े-बड़े वादे करना आसान है, लेकिन उन्हें धरातल पर लागू करना एक बड़ी चुनौती होगी।

    सियासी गलियारों में चर्चा:

    अब सवाल यह है कि क्या विजय की पार्टी इस 'छह महीने की मोहलत' का फायदा उठाकर अपनी स्थिति मजबूत कर पाएगी? या फिर तमिलनाडु की राजनीति में किसी नए गठबंधन का उदय होगा? फिलहाल, सबकी नजरें राजभवन की गतिविधियों और अगले कुछ घंटों में होने वाले राजनीतिक घटनाक्रमों पर टिकी हैं।

    बर्खास्तगी के खिलाफ टीएमसी का बड़ा दांव, अगले कुछ दिनों में सुप्रीम कोर्ट में हो सकती है सुनवाई

    कोलकाता/नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में अभूतपूर्व संवैधानिक संकट के बीच पूर्व मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने अपनी सरकार की बर्खास्तगी और चुनाव परिणामों को चुनौती देने का फैसला किया है। 7 मई 2026 को राज्यपाल द्वारा मंत्रिमंडल को बर्खास्त किए जाने के तुरंत बाद तृणमूल कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी शुरू कर दी है।

    सूत्रों के अनुसार, यह याचिका मई 2026 के दूसरे सप्ताह में सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष आ सकती है। मामले की गंभीरता और संवैधानिक प्रभाव को देखते हुए टीएमसी की कानूनी टीम “अर्जेंट मेंशनिंग” के जरिए जल्द सुनवाई की मांग करेगी।

    ममता और चंद्रिमा खुद लड़ेंगी कानूनी लड़ाई

    जानकारी के मुताबिक, Mamata Banerjee और पूर्व मंत्री Chandrima Bhattacharya स्वयं वकील के रूप में इस संवैधानिक लड़ाई में पक्ष रख सकती हैं। पार्टी का दावा है कि राज्य में लोकतांत्रिक प्रक्रिया और जनादेश को नजरअंदाज किया गया है।

    हालांकि फिलहाल सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक कॉज लिस्ट में इस मामले की सुनवाई की कोई तारीख तय नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक घटनाक्रमों को देखते हुए अगले 2-3 कार्य दिवसों के भीतर इस पर सुनवाई होने की संभावना जताई जा रही है।

    पहले भी मिल चुके हैं कानूनी झटके

    चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मामलों में टीएमसी को हाल ही में अदालत से राहत नहीं मिल सकी थी।

    2 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने मतगणना के लिए केंद्रीय कर्मचारियों की नियुक्ति को वैध ठहराते हुए टीएमसी की याचिका खारिज कर दी थी।

    वहीं अप्रैल 2026 में चुनाव आयोग द्वारा अधिकारियों के तबादलों को लेकर दायर याचिका पर भी अदालत ने हस्तक्षेप से इनकार कर दिया था।

    बीजेपी सरकार के शपथ ग्रहण की तैयारी तेज

    पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 207 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। नई सरकार का शपथ ग्रहण 9 मई 2026 को Brigade Parade Ground में प्रस्तावित है।

    राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, ममता बनर्जी की याचिका का मुख्य उद्देश्य नई सरकार के गठन की प्रक्रिया पर रोक लगाना या चुनाव परिणामों को चुनौती देकर चुनाव निरस्त कराने की मांग करना हो सकता है।

    राजनीतिक गलियारों में बढ़ी हलचल

    राज्य में तेजी से बदलते राजनीतिक हालात के बीच अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट पर टिक गई है। यदि अदालत इस मामले में त्वरित सुनवाई स्वीकार करती है, तो पश्चिम बंगाल की राजनीति में आने वाले दिन बेहद निर्णायक साबित हो सकते हैं।

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