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पर्यटन मंडल मुख्यालय में योजनाओं और परियोजनाओं की व्यापक समीक्षा, आगामी पर्यटन गतिविधियों के रोडमैप पर हुआ मंथन
रायपुर। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के संचालक मंडल की 38 वीं बैठक सोमवार को रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड मुख्यालय में सफलतापूर्वक संपन्न हुई। बैठक में पर्यटन क्षेत्र के समग्र विकास, वर्तमान योजनाओं की प्रगति, नई पर्यटन पहलों तथा आगामी गतिविधियों के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में लिए गए निर्णयों को प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम है।
बैठक की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा ने की। इस अवसर पर पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन (भा.प्र.से.), छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक श्री विवेक आचार्य (भा.व.से.), अवर सचिव श्रीमती रुचि शर्मा, उपमहाप्रबंधक श्रीमती पूनम शर्मा, संस्कृति विभाग के संचालक श्री संजय कन्नौजे विभिन्न विभागों के शासकीय सदस्य तथा पर्यटन मंडल के विभिन्न शाखा प्रमुख अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक की शुरुआत पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए पौधारोपण और हरित पहल के संकल्प के साथ हुई। प्रबंध संचालक श्री विवेक आचार्य ने टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा तथा पर्यटन सचिव डॉ. एस. भारतीदासन को पौधा भेंट कर पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। वहीं, उपमहाप्रबंधक श्रीमती पूनम शर्मा ने विभिन्न विभागों के शासकीय सदस्यों का पौधा भेंट कर स्वागत किया।
बैठक के दौरान पर्यटन मंडल द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं एवं विकास परियोजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। परियोजनाओं के समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन, पर्यटन अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण, पर्यटक सुविधाओं के विस्तार तथा प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों को और अधिक आकर्षक एवं सुविधायुक्त बनाने के संबंध में विचार-विमर्श किया गया। साथ ही आगामी पर्यटन कार्यक्रमों, प्रचार-प्रसार गतिविधियों, निवेश संभावनाओं तथा पर्यटन को रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने के विभिन्न पहलुओं पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में इस बात पर भी सहमति बनी कि प्रदेश की प्राकृतिक, सांस्कृतिक, धार्मिक एवं जनजातीय पर्यटन संपदा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के लिए समन्वित प्रयास किए जाएंगे। पर्यटन स्थलों पर मूलभूत सुविधाओं के विस्तार, पर्यटक अनुभव को बेहतर बनाने तथा स्थानीय समुदाय की सहभागिता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।
बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों के माध्यम से छत्तीसगढ़ के पर्यटन क्षेत्र को नई दिशा देने, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को गति प्रदान करने तथा भविष्य में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने की रणनीति पर सर्वसम्मति बनी। संचालक मंडल ने विश्वास व्यक्त किया कि इन निर्णयों से प्रदेश की पर्यटन पहचान और अधिक सशक्त होगी तथा छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख पर्यटन राज्यों में अपनी विशिष्ट पहचान को और मजबूत करेगा।
रायपुर / छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकास शील ने आज मंत्रालय महानदी भवन में गृह विभाग के अंतर्गत राष्ट्रीय अपराध और अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क एवं सिस्टम (CCTNS) के डैशबोर्ड की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक ली। बैठक में राज्य के कमजोर बिंदुओं को चिन्हित कर उनमें त्वरित सुधार करने के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। इस महत्वपूर्ण बैठक में राज्य के डीजीपी श्री अरुण देव गौतम भी विशेष रूप से मौजूद थे।
*स्टेट स्कोरकार्ड में मिले 64.97 अंक, प्रशासनिक सुधार में पूर्ण अंक*
बैठक के दौरान अधिकारियों द्वारा जानकारी दी गई कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) द्वारा जारी नवीनतम स्टेट स्कोरकार्ड में छत्तीसगढ़ को 100 में से 64.97 अंक प्राप्त हुए हैं। हालांकि राज्य ने 'प्रशासनिक सुधार' और 'मेडलीगल रिपोर्ट पोर्टल' के क्रियान्वयन में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए पूर्ण अंक हासिल किए हैं।
*जीरो एफआईआर और ई-चार्जशीट को सुदृढ़ करने पर जोर*
मुख्य सचिव श्री विकास शील ने कानून व्यवस्था और डिजिटल पुलिसिंग को अधिक प्रभावी बनाने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया कि जीरो एफआईआर और ई-चार्जशीट की व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ एवं पारदर्शी बनाया जाए। न्यायालयों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से गवाही प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए 'न्याय श्रुति प्रणाली' को शीघ्र अति शीघ्र प्रारंभ किया जाए। मामलों के त्वरित निपटारे के लिए निर्धारित 60 एवं 90 दिवस के भीतर हर हाल में न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया जाए। डिजिटल साक्ष्यों की महत्ता को देखते हुए ई-साक्ष्य (E-Evidence) के उपयोग को बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाए।
डैशबोर्ड की समीक्षा के दौरान पुलिस और गृह विभाग के समन्वय पर विशेष बल दिया गया। इस उच्च स्तरीय बैठक में गृह विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारिक सिंह, विधि एवं विधायी विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती सुषमा सावंत, गृह विभाग के सचिव श्री हिमशिखर गुप्ता सहित कई अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।
*'मेरा परिवार गौव्रति परिवार' अभियान का शुभारंभ, गौ विज्ञान परीक्षा के मेधावी विद्यार्थियों को किया सम्मानित*
*1.64 लाख से अधिक विद्यार्थियों की सहभागिता को बताया नई पीढ़ी में भारतीय संस्कृति और वैज्ञानिक सोच का सकारात्मक संकेत*
*सुरभि गौधाम योजना, गौशालाओं को बढ़ी सहायता और डेयरी विकास से गौपालन को मिलेगा नया विस्तार*
रायपुर,/गौमाता भारतीय संस्कृति, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, जैविक कृषि और पर्यावरण संरक्षण की आधारशिला है। गौ संरक्षण पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है। जब प्रत्येक परिवार गौसेवा और संरक्षण का संकल्प लेगा, तभी यह अभियान जनआंदोलन का स्वरूप ले सकेगा। मुख्यमंत्री श्री साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषक सभागार में आयोजित गौ सेवा संगम एवं गौ विज्ञान परीक्षा पुरस्कार वितरण समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।
इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशव्यापी 'मेरा परिवार गौव्रति परिवार' अभियान का शुभारंभ किया तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए संचालित किए जाने वाले वृक्षारोपण अभियान के पोस्टर का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने गौ विज्ञान परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित कर पुरस्कार भी प्रदान किए।
*नई पीढ़ी में भारतीय संस्कृति और वैज्ञानिक दृष्टि का सुंदर समन्वय*
मुख्यमंत्री ने कहा कि गौमाता केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं है, बल्कि कृषि, स्वास्थ्य, पर्यावरण और ग्रामीण समृद्धि की महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने कहा कि बच्चों में गाय के वैज्ञानिक, सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व की समझ विकसित करने के उद्देश्य से आयोजित गौ विज्ञान परीक्षा अत्यंत सराहनीय पहल है।
उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इस वर्ष प्रदेश के स्कूलों एवं महाविद्यालयों के 1 लाख 64 हजार से अधिक विद्यार्थियों ने परीक्षा में भाग लिया। इतनी बड़ी संख्या में युवाओं की सहभागिता यह दर्शाती है कि नई पीढ़ी भारतीय संस्कृति, जीवन मूल्यों और प्रकृति संरक्षण के प्रति सजग हो रही है। मुख्यमंत्री ने सभी प्रतिभागियों को बधाई देते हुए कहा कि वे समाज में गौ संरक्षण और संवर्धन के प्रभावी दूत बनेंगे।
*गौ संरक्षण को जनभागीदारी से मिलेगा स्थायी आधार*
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि गौ संरक्षण के उद्देश्य को पूर्ण करने के लिए समाज के प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपने परिवारों और आसपास के लोगों को गौसेवा एवं गौ संरक्षण के प्रति जागरूक करें तथा इस अभियान को घर-घर तक पहुंचाएं।
*न्योता भोज जैसी पहल सामाजिक सहभागिता का उदाहरण*
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नए शिक्षा सत्र के साथ प्रदेश में शाला प्रवेश उत्सव और न्योता भोज जैसी अभिनव पहल संचालित की जा रही हैं। जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ अथवा माता-पिता की पुण्यतिथि जैसे विशेष अवसरों पर विद्यालयों में बच्चों के साथ भोजन कराने की परंपरा समाज और विद्यालय के बीच आत्मीय संबंध मजबूत कर रही है। इससे बच्चों को अतिरिक्त पोषण भी प्राप्त हो रहा है तथा समाज की भागीदारी भी बढ़ रही है।
*गोबर आधारित उत्पाद बन रहे रोजगार का नया माध्यम*
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि गाय से प्राप्त दूध, दही, गोबर और गोमूत्र सहित प्रत्येक उत्पाद मानव जीवन के लिए उपयोगी है। आज गोबर से अनेक उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं, जो स्वरोजगार और ग्रामीण उद्यमिता के नए अवसर प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार गोबर एवं गोमूत्र आधारित उत्पादों के निर्माण तथा प्रशिक्षण की व्यवस्था भी करेगी, जिससे गौपालन आय का सशक्त माध्यम बन सके।
*गौ संरक्षण के लिए सरकार के प्रभावी कदम*
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार गौ संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। पंजीकृत गौशालाओं में प्रति गाय चारे के लिए दी जाने वाली सहायता राशि 20 रुपये से बढ़ाकर 35 रुपये प्रतिदिन कर दी गई है। साथ ही सुरभि गौधाम योजना के माध्यम से आधुनिक सुविधाओं से युक्त गौधाम विकसित किए जा रहे हैं, जहां पशु चिकित्सक, चरवाहे तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
*बस्तर में डेयरी विकास का नया अध्याय*
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद समाप्त होने के साथ अब विकास का नया दौर प्रारंभ हुआ है। कृषि एवं पशुपालन आधारित आजीविका को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के सहयोग से देसी गाय उपलब्ध कराने की योजना प्रारंभ की गई है।उन्होंने कहा कि इस योजना से प्रदेश में दूध उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अब सरकार इस योजना का लाभ अन्य इच्छुक पशुपालकों, विशेषकर यादव समाज के लोगों तक भी पहुंचाने पर विचार कर रही है, जिससे डेयरी क्षेत्र को और मजबूती मिलेगी।
*गौ सेवा से संस्कृति और मूल्यों से जुड़ रही नई पीढ़ी : स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव*
स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव ने कहा कि गौ विज्ञान परीक्षा के माध्यम से हजारों बच्चों ने गौमाता के महत्व को समझा है। यह पहल नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बनेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार गौ संरक्षण के लिए गौ अभ्यारण्य विकसित कर रही है, जहां गौवंश के लिए पर्याप्त चारा और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। देसी गाय के शुद्ध दूध के उत्पादन को बढ़ावा देकर आर्थिक स्वावलंबन के साथ जनस्वास्थ्य को भी मजबूती मिलेगी।
*भारतीय ज्ञान परंपरा से परिचय करा रही है गौ विज्ञान परीक्षा*
गौ सेवा गतिविधि के अखिल भारतीय संयोजक श्री अजीत महापात्र ने कहा कि गौ विज्ञान परीक्षा विद्यार्थियों को गाय के वैज्ञानिक महत्व तथा भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बन रही है। इससे विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ भारतीय सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान का भाव विकसित हो रहा है।
*गौ विज्ञान परीक्षा के विजेताओं का हुआ सम्मान*
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने गौ विज्ञान परीक्षा के तीनों वर्गों के विजेताओं को सम्मानित किया। प्रथम स्थान प्राप्त प्रतिभागियों को 51 हजार रुपये, द्वितीय स्थान प्राप्त प्रतिभागियों को 31 हजार रुपये तथा तृतीय स्थान प्राप्त प्रतिभागियों को 11 हजार रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की गई। मुख्यमंत्री ने सभी विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि यह परीक्षा विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, भारतीय परंपराओं के प्रति सम्मान तथा समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष श्री राजीव लोचन जी महाराज, छत्तीसगढ़ राज्य शिक्षा आयोग के अध्यक्ष श्री सुधीर गौतम, श्री चंद्रशेखर देवांगन, श्री आत्मबोध अग्रवाल, श्री मनोज पांडेय, श्री गोपाल यादव सहित छत्तीसगढ़ राज्य गौ संरक्षण एवं संवर्धन समिति के पदाधिकारी, प्रदेशभर से आए गौ विज्ञान परीक्षा के प्रतिभागी एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
अब तक 1 लाख 49 हजार से अधिक बच्चों की हो चुकी स्क्रीनिंग
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देशानुसार, जिला प्रशासन रायपुर द्वारा बच्चों के स्वास्थय को प्राथमिकता देते हुए चलाई जा रही योजना “प्रोजेक्ट धड़कन” के अंतर्गत ज़िले भर में विशेष स्वास्थय शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। इस अभिनव पहल का उद्देश्य है - बच्चों में जन्मजात हृदय रोग की समय रहते पहचान कर उन्हें बेहतर और निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराना।
कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन तथा श्री सत्य साई हॉस्पिटल के सहयोग से अभनपुर टीम-बी द्वार शासकीय प्राथमिक शाला कोलार में 92 बच्चों, धरसींवा टीम-बी द्वारा आंगनबाड़ी केंद्र-11 सिलयारी एवं आंगनबाड़ी केंद्र-1 मेहरसाखा में 141 बच्चों, तिल्दा टीम-बी द्वारा प्राथमिक शाला चंगोरी, पहाड़ी एवं खुदमुड़ी में 133 बच्चों, अर्बन टीम-ए द्वारा पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय क्रमांक-1, डब्ल्यूआरएस रायपुर में 140 बच्चों, अर्बन टीम-बी द्वारा माध्यमिक शाला बोरियाखुर्द में 98 बच्चों तथा अर्बन टीम-डी द्वारा प्राथमिक शाला बंजारी रावाभाठा में 86 बच्चों की स्क्रीनिंग की। पूरे जिले में कुल 690 बच्चों की स्क्रीनिंग की गई।
इस प्रोजेक्ट के तहत अब तक जिले में कुल 1 लाख 49 हजार 9 सौ 20 बच्चों की स्क्रीनिंग, 14 बच्चों का मेडिकल उपचार व प्रबंधन एवं 18 बच्चों का निःशुल्क ऑपरेशन किया जा चुका है।
जगदलपुर / शौर्यपथ / बस्तर स्थित शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में शिक्षकों और कर्मचारियों की भारी कमी का मुद्दा विधानसभा में जोर-शोर से उठाया गया। प्रश्न लगाने वाले विधायक लता उसेंडी ने विश्वविद्यालय की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताते हुए सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की।
विधायक ने कहा कि विश्वविद्यालय UGC मानकों से काफी पीछे है। जहां 223 शिक्षकों की जरूरत है, वहां केवल 29 शिक्षक ही कार्यरत हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इतनी बड़ी कमी कब तक दूर की जाएगी और छात्रों की पढ़ाई का नुकसान कौन भरेगा।
उन्होंने यह भी मुद्दा उठाया कि विश्वविद्यालय में सैकड़ों शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक पद लंबे समय से खाली पड़े हैं, लेकिन भर्ती प्रक्रिया में लगातार देरी हो रही है। विधायक ने पूछा कि जब वित्त विभाग से स्वीकृति मिल चुकी है, तो नियुक्तियां अब तक क्यों नहीं की गईं।
सबसे अहम सवाल उन विषयों में भर्ती को लेकर उठाया गया, जिनमें फिलहाल एक भी छात्र पंजीकृत नहीं है। विधायक ने इसे संसाधनों का दुरुपयोग बताते हुए सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की।
इसके साथ ही, उन्होंने विश्वविद्यालय और संबद्ध महाविद्यालयों में बड़ी संख्या में खाली पड़ी सीटों का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि हजारों सीटें खाली होना इस बात का संकेत है कि शिक्षा व्यवस्था में कहीं न कहीं गंभीर खामी है।
बस्तर जैसे आदिवासी और पिछड़े क्षेत्र का जिक्र करते हुए विधायक लता उसेंडी ने कहा कि यहां उच्च शिक्षा की ऐसी स्थिति बेहद चिंताजनक है और यह क्षेत्र के युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय है। उन्होंने नई शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि बिना पर्याप्त शिक्षकों और संसाधनों के इसे लागू करना संभव नहीं है।
निष्कर्ष:विधानसभा में उठे इन सवालों ने प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था, खासकर बस्तर क्षेत्र में, गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है। अब निगाहें सरकार की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।
रायपुर । शौर्यपथ ।
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) द्वारा वर्ष 2019 से 2023 के बीच की गई भर्तियों में अनियमितताओं का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस मुद्दे को विधायक सुश्री लता उसेंडी ने विधानसभा में प्रमुखता से उठाया, जिसके बाद सरकार ने जांच की स्थिति स्पष्ट की।
विधायक लता उसेंडी ने अपने प्रश्न में पूछा कि इस अवधि में राज्य सेवा परीक्षा, वन सेवा, सहायक प्राध्यापक सहित विभिन्न भर्तियों में कितने पदों पर चयन हुआ और क्या इन भर्तियों में किसी प्रकार की गड़बड़ी, पेपर लीक, मूल्यांकन में त्रुटि, इंटरव्यू अंक में हेरफेर या अन्य अनियमितताओं की शिकायतें सरकार को मिली हैं।
उन्होंने यह भी जानना चाहा कि क्या इन शिकायतों की उच्च स्तरीय जांच कराई गई है और यदि हां, तो जांच किस एजेंसी—EOW, CBI या अन्य—द्वारा की जा रही है। साथ ही, उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि चयनित अभ्यर्थियों में से कितने उम्मीदवार आयोग के पदाधिकारियों या अधिकारियों के रिश्तेदार हैं और क्या इस संबंध में कोई जांच हुई है।
इस पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जवाब में बताया कि CGPSC भर्तियों को लेकर शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इन शिकायतों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा की जा रही है। विशेष रूप से राज्य सेवा परीक्षा 2021 की जांच CBI को सौंपी गई है और फिलहाल यह प्रक्रिया जारी है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच पूरी होने की कोई निश्चित समय सीमा अभी तय नहीं है और आगे की कार्रवाई CBI की रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी। यदि अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
विधानसभा में उठे इस मुद्दे ने CGPSC की भर्तियों की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजरें CBI जांच की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस पूरे मामले की सच्चाई सामने लाएगी।
63.81 लाख रुपये की लागत से बने सर्वसुविधायुक्त भवन में 10 कक्ष, पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का भी दिया संदेश
रायपुर / शौर्यपथ / उप मुख्यमंत्री तथा कांकेर जिले के प्रभारी मंत्री अरुण साव ने अपने कांकेर प्रवास के दौरान सरोना में नवनिर्मित तहसील कार्यालय भवन का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने भवन के विभिन्न कक्षों का निरीक्षण किया तथा परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
लोक निर्माण विभाग द्वारा 63 लाख 81 हजार रुपये की लागत से निर्मित इस आधुनिक तहसील कार्यालय भवन में 10 सर्वसुविधायुक्त कक्ष बनाए गए हैं, जहां विभिन्न प्रशासनिक शाखाओं का संचालन किया जाएगा। नए भवन के शुरू होने से क्षेत्र के नागरिकों को राजस्व एवं प्रशासनिक सेवाएं अधिक सुगमता और व्यवस्थित तरीके से उपलब्ध हो सकेंगी।
लोकार्पण समारोह में कांकेर सांसद श्री भोजराज नाग, विधायक श्री आशाराम नेताम, छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प बोर्ड की अध्यक्ष श्रीमती शालिनी राजपूत, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्रीमती तारा ठाकुर, नगर पालिका अध्यक्ष श्री अरुण कौशिक, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री हरेश मण्डावी सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। समारोह में नए भवन को क्षेत्र के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया गया।
रायपुर, । यूनाइटेड ह्यूमन राइट्स एंड सोशल जस्टिस काउंसिल (UHRSJC) द्वारा आयोजित प्रदेश स्तरीय मानव अधिकार एवं सामाजिक न्याय सम्मेलन एवं विधि प्रशिक्षण कार्यक्रम रायपुर में संपन्न हुआ। सम्मेलन में प्रदेशभर से अधिवक्ता, सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद, चिकित्सक, पत्रकार, युवा प्रतिनिधि तथा विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य नागरिक शामिल हुए।
कार्यक्रम में मानव अधिकार संरक्षण, सामाजिक न्याय, महिला एवं बाल सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, विधिक साक्षरता, जनहित, सुशासन एवं नागरिक उत्तरदायित्व जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण और मार्गदर्शन दिया। वक्ताओं ने कहा कि न्यायपूर्ण समाज के निर्माण के लिए नागरिकों का अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक होना आवश्यक है।
काउंसिल के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष अधिवक्ता घासीदास भारद्वाज ने कहा कि राष्ट्र की वास्तविक शक्ति जागरूक और जिम्मेदार नागरिकों में निहित होती है। उन्होंने कहा कि समाज में सकारात्मक बदलाव तभी संभव है, जब लोग विधिक रूप से सशक्त हों और न्याय, समानता तथा मानवता के मूल्यों का पालन करें। उन्होंने बताया कि काउंसिल प्रदेशभर में मानव अधिकार, विधिक जागरूकता, महिला एवं बाल सुरक्षा, साइबर सुरक्षा तथा जनसशक्तिकरण से जुड़े अभियान लगातार चला रही है।
सम्मेलन में संविधान के प्रति सम्मान, विधि के शासन, महिला सुरक्षा, युवा सशक्तिकरण और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे विषयों पर भी विचार रखे गए। इस दौरान विभिन्न जनप्रतिनिधियों एवं गणमान्य नागरिकों के शुभकामना संदेशों का वाचन किया गया, जिनमें काउंसिल के जनहित कार्यों की सराहना की गई।
कार्यक्रम के अंत में काउंसिल ने अधिवक्ताओं, शिक्षकों, चिकित्सकों, पत्रकारों, युवाओं और आम नागरिकों से मानव अधिकार संरक्षण, सामाजिक न्याय और विधिक जागरूकता के अभियान से जुड़कर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
काउंसिल का संकल्प:
"सशक्त नागरिक • सुरक्षित समाज • न्यायपूर्ण सुशासन • जागरूक एवं सशक्त राष्ट्र"
जन्मजात होंठ की विकृति का हुआ सफल उपचार, अब सामान्य जीवन जी रही हैं 22 वर्षीय युवती
रायपुर, / होंठ की जन्मजात विकृति (क्लेफ्ट लिप) एक आम समस्या है, जिसमें बच्चे के ऊपरी होंठ या तालू के ऊतक गर्भावस्था के शुरुआती हफ्तों में पूरी तरह जुड़ नहीं पाते हैं। यह दरार केवल होंठ पर हो सकती है या नाक तक जा सकती है। सर्जरी द्वारा इसे 90ः से 100ः तक ठीक किया जा सकता है।
बीजापुर जिले के दूरस्थ बासागुड़ा गांव की रहने वाली 22 वर्षीय भीमे हेमला जन्म से होंठ की जन्मजात विकृति (क्लेफ्ट लिप) से पीड़ित थीं। इस कारण उन्हें भोजन करने, निगलने और स्पष्ट रूप से बोलने में काफी परेशानी होती थी। यह समस्या उनके आत्मविश्वास और दैनिक जीवन को भी प्रभावित करती थी।
उपचार के लिए भीमे हेमला ने जिला अस्पताल बीजापुर में संपर्क किया। यहां कान, नाक एवं गला (ईएनटी) विशेषज्ञ डॉ. विभू तिवारी के नेतृत्व में स्थानीय एनेस्थीसिया के तहत उनकी सफल सर्जरी की गई। ऑपरेशन थिएटर के चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और स्वास्थ्य कर्मियों के समन्वित प्रयास से यह जटिल शल्य चिकित्सा सफलतापूर्वक पूरी हुई।
सर्जरी के बाद भीमे हेमला के स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार हुआ। अब उन्हें बोलने, निगलने और सामान्य रूप से भोजन करने में किसी प्रकार की कठिनाई नहीं होती। सफल उपचार से उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है और वे अब सामान्य एवं सम्मानजनक जीवन जीने की ओर आगे बढ़ रही हैं।
जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए कलेक्टर श्री विश्वदीप के मार्गदर्शन तथा जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुश्री नम्रता चौबे के सहयोग से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बी.आर. पुजारी और सिविल सर्जन डॉ. रत्ना ठाकुर के नेतृत्व में जिला अस्पताल बीजापुर में विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया गया है। इसका लाभ अब दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों के मरीजों को अपने ही जिले में मिल रहा है।
जिला अस्पताल बीजापुर में इस तरह की जटिल सर्जरी का सफल होना जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती क्षमता और विशेषज्ञ चिकित्सकीय सुविधाओं का प्रमाण है। इससे मरीजों को बड़े शहरों में जाने की आवश्यकता कम हो रही है और उन्हें स्थानीय स्तर पर ही गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध हो रहा है।
हितग्राही की प्रतिक्रिया
भीमे हेमला, बासागुड़ा निवासी ने बताया कि वो जन्म से इस समस्या से परेशान थी। जिला अस्पताल बीजापुर में मेरा सफल इलाज हुआ। अब मैं आसानी से बोल सकता हूं और खाना खा सकती हूं। मेरे चेहरे पर फिर से मुस्कान लौट आई है। इसके लिए मैं छत्तीसगढ सरकार एवं डॉ. विभू तिवारी, जिला अस्पताल के सभी डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और स्वास्थ्य कर्मियों का हृदय से आभार व्यक्त करती हूं।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
