September 27, 2026
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    रायपुर

    रायपुर (6110)

    महाधिवक्ता कार्यालय बिलासपुर में विधि व्याख्यान माला सम्पन्न

        रायपुर /शौर्यपथ/

    छत्तीसगढ़ के महाधिवक्ता कार्यालय बिलासपुर में 27 नवम्बर को महाधिवक्ता  सतीश चंद्र वर्मा के संयोजन से विधि व्याख्यान माला के दितीय चरण का आयोजन किया गया। जिसमें उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता एवं राज्यसभा सांसद  के.टी.एस.तुलसी द्वारा मार्डनाइजेशन ऑफ क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम इन इंडिया विषय पर विस्तृत उदबोधन दिया गया और उनके साथ आये हुए उनके एसोसिएट्स द्वारा प्रेजेंटेशन देेते हुए इस विषय पर विस्तार से कानूनी बारीकियां बताई गई। 

    कार्यशाला में सर्वप्रथम महाधिवक्ता  सतीश चंद्र वर्मा द्वारा कानूनी बारीकियों के बारे में उद्बोधन दिया गया। उन्होंने इससे पहले उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता एवं राज्यसभा सांसद  के.टी.एस.तुलसी का स्वागत किया। तत्पश्चात अतिरिक्त महाधिवक्ता  अमृतो दास द्वारा स्वागत भाषण दिया गया। मंच संचालन में उप महाधिवक्ता हमीदा सिद्धीकी ने भी भूमिका निभाईं। सहायक प्राध्यापक विधि विभाग गुरू घासीदास केंद्रीय विश्वविघालय बिलासपुर डॉ. अजय सिंह द्वारा भी उपरोक्त विषय पर सारगर्भित जानकारी प्रदान की गई। व्याख्यान माला में अतिरिक्त महाधिवक्ता  विवेकरंजन तिवारी द्वारा मुख्य अतिथि एवं सभी आमंत्रितों का आभार प्रदर्शन किया गया। 

    इस अवसर पर अध्यक्ष छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड  अटल श्रीवास्तव, विधायक बिलासपुर  शैलेष पांडे, अध्यक्ष छत्तीसगढ़ राज्य  केंद्रीय सहकारी बैंक मर्यादित  बैजनाथ चंद्राकर, अध्यक्ष जिला केंद्रीय सहकारी बैंक  प्रमोद नायक और  विजय केशरवानी,  विजय पांडेय,  अनिल टाह,  राजेंद्र शुक्ला,  संदीप दुबे, आदि गणमान्य जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। महाधिवक्ता कार्यालय के समस्त शासकीय अधिवक्तागण, कर्मचारीगण के अलावा उच्च न्यायालय एव जिला न्यायालय के कई अधिवक्तागण उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि महाधिवक्ता  सतीश चंद्र वर्मा द्वारा पदभार ग्रहण करने के पश्चात महाधिवक्ता कार्यालय के शासकीय एवं पैनल अधिवक्तागण के ज्ञानवर्धन हेतु प्रारंभ किये गये प्रयासों की कड़ी के अंतर्गत यह दूसरी बार ख्यातिप्राप्त विधिविशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया है

    रायपुर /शौर्यपथ/ 

    छत्तीसगढ़ सरकार की कृषि को प्रोत्साहन देने की नीति एवं आधुनिकतम कृषि तकनीको का इस्तेमाल से कृषकों की आमदनी में इजाफा होने के साथ ही उनके उत्पाद की मांग

    छत्तीसगढ़ सरकार की कृषि को प्रोत्साहन देने की नीति एवं आधुनिकतम कृषि तकनीकांे का इस्तेमाल से कृषकों की आमदनी में इजाफा होने के साथ ही उनके उत्पाद की मांग दूसरे राज्यों में भी खूब होने लगी है। दिल्ली में आयोजित ट्राईबल इंडिया महोत्सव मंे कोरिया जिले के द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी में कृषि से जुड़े उत्पादों को प्रदर्शित किया गया है। यहां पर कृषि उत्पादों की खूब मांग हो रही है। 16 नवंबर से 30 नवंबर तक आयोजित इस महोत्सव मंे अब तक 3 लाख से ज्यादा उत्पादों की बिक्रि हो चुकी है। 

    केन्द्र सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय एवं ट्राईबल को-ऑपरेटिव मार्केटिंग डेवल्पमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित ट्राईब्स इंडिया महोत्सव के तहत छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले ने कृषि उत्पादों के साथ प्रदर्शनी लगाकर उपस्थिति दर्ज की है। महोत्सव में कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक इंजिनियर  कमलेश कुमार सिंह के साथ जिले के किसान दिल्ली हाट बाजार में शामिल हुए है। प्रदर्शनी में लगाई गई देशी सुगंधित चावल जीराफुल, रानीकाजल, लोहन्दी, लालू, देशी चावल - केतकी, छिन्दमौरी, करहनी, खिरासार, नरपती, देशी दाल - अरहर, चना, कुल्थी, मूंग, मसूर के अलावा प्राकृतिक शहद - करंज, जंगली वन तुलसी, सरसों, संगध तेल- लेमनग्रास, सेट्रोनेला, पामारोजा, लेमनग्रास चायपत्ती, हस्तनिर्मित साबुन - लेमनग्रास एवं सिन्दुर, लेमनग्रास एवं हल्दी, पामारोजा एवं सिन्दुर, पामारोजा एवं हल्दी, अगरबत्ती- लेमनग्रास एवं सेट्रोनेला, शकरकन्द आटा, देशी गाय का ए-टू घी, डिटर्जेन्ट पावडर, मास्किटो रिप्लेन्ट, सूखा मशरूम एवं मशरूम पावडर, इत्यादि उत्पाद की बिक्री अच्छी हो रही है। किसान उत्पादक संगठन के द्वारा लगभग 5 से 6 लाख रुपये के उत्पादों की पूर्ति ट्राईफेड, हस्तशिल्प विकास बोर्ड एवं खादी ग्रामोद्योग को की गई है। इस महोत्सव में लगभग 6 लाख से अधिक रुपये के उत्पादों की बिक्री अनुमानित है। अब तक 3 लाख रुपये से अधिक राशि के उत्पाद विक्रय किये जा चुके हैं। 

    जिला प्रशासन के सहयोग एवं कृषि विज्ञान केन्द्र के तकनीकी मार्गदर्शन में कोरिया जिले के कृषकों को न सिर्फ कच्चे उत्पाद का उचित मूल्य प्राप्त हो रहा है बल्कि उत्पादों को ट्राईफेड, खादी ग्रामोद्योग, हस्तशिल्प विकास बोर्ड आदि के देश भर में स्थित सेल काउन्टर एवं ऑनलाईन भी विक्रय किया जा रहा है।

    रायपुर /शौर्यपथ/

    छत्तीसगढ़ सरकार की उच्च प्राथमिकता वाले कार्यक्रम स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल की प्रगति की राज्य स्तरीय समीक्षा आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ला द्वारा ली गई। बैठक में विभाग के सचिव व कमिश्नर डॉ. कमलप्रीत सिंह, संयुक्त सचिव व एससीईआरटी संचालक राजेश सिंह राणा उपस्थित थे। आज सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को यह निर्देश दिए गए कि सभी शिक्षकीय व गैर शिक्षकीय रिक्त पदों को तत्काल भरा जाए। स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल में निर्माणाधीन भवन को 15 दिसंबर 2021 तक पूर्ण कराया जाए। साथ ही इस सत्र से प्रारंभ होने वाले हिंदी माध्यम के उत्कृष्ट विद्यालय की जानकारी तत्काल भिजवाएं। 

    प्रमुख सचिव डॉ. शुक्ला ने कहां यदि कोई भी कठिनाई हो तो प्रमुख सचिव, सचिव एवं कलेक्टर से सीधे चर्चा करें। स्कूल शिक्षा विभाग के उच्च प्राथमिकता के कार्यों की प्रतिदिन मॉनिटरिंग होगी और जिलों को ग्रेडिंग दी जाएगी। प्रमुख सचिव ने इस बात पर जोर दिया कि जिला शिक्षा अधिकारियों की कार्य क्षमता स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल से आंकी जा रही है। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा निर्मित सॉफ्टवेयर का उपयोग सुनिश्चित किया जाए। सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने जिला शिक्षा अधिकारियों को यह निर्देश दिए कि प्रशासनिक व अकादमिक मॉनिटरिंग दोनों में समान रुप से ध्यान दिया जाए। सॉफ्टवेयर में नियमित एंट्री की जाए। प्रतिनियुक्ति आदेश एक-दो दिन में जारी किए जाएंगे रेमेडियल योजना व रेगुलर एक्टिविटी प्रारंभ किया जाए। सचिव डॉ कमलप्रीत सिंह ने धीमी गति से कार्य करने वाले कोरबा, गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले सहित कुछ जिलों के कलेक्टर से दूरभाष पर चर्चा कर कार्यवाही करने का निर्देश भी दिए। एससीईआरटी संचालक  राजेश सिंह राणा ने सेतु पाठ्यक्रम, अकादमिक मॉनिटरिंग के संबंध से आगामी कार्य योजना से अवगत कराया। बैठक में अतिरिक्त संचालक डॉ योगेश शिवहरे, संयुक्त संचालक  आशुतोष चावरे, उप संचालक  उमेश कुमार साहू,  प्रशांत कुमार पांडे,  ललित कुमार साहू सहित 29 जिलों के जिला शिक्षा अधिकारी व उनके प्रतिनिधि उपस्थित थे।

    रायपुर /शौर्यपथ/

    एससीईआरटी छत्तीसगढ़ रायपुर द्वारा लैंग्वेज एवं लर्निंग फाउंडेशन के सहयोग से प्रारंभिक भाषा शिक्षण एवं बुनियादी साक्षरता और बहुभाषी शिक्षण पर तीन दिवसीय कार्यशाला एससीईआरटी रायपुर में आयोजित की गई। इस कार्यशाला में प्रारंभिक भाषा शिक्षण एवं बहुभाषी शिक्षण के राज्य स्रोत समूह के सदस्यों ने हिस्सा लिया। 

    कार्यशाला के उद्घाटन सत्र के दौरान संचालक एससीईआरटी  राजेश सिंह राणा ने कहा कि इस कार्यशाला की सार्थकता तभी होगी जब स्कूलों में बच्चों की गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण कार्यशाला का गुणात्मक असर बच्चों में दिखाई पड़े। कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों से ब्लॉक स्रोत समूह को प्रशिक्षण दिए जाने पर विस्तार से चर्चा की गई। 

    कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य प्रारंभिक भाषा शिक्षण एवं बुनियादी साक्षरता और बहुभाषी शिक्षण पर ब्लॉक स्रोत समूह के प्रशिक्षण हेतु राज्य स्रोत समूह की तैयारी करना है। इसके अतिरिक्त प्रतिभागियों को बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान (एफ.एल.एन.) मिशन के दस्तावेज के अनुसार राज्य स्तर पर भाषाई सर्वेक्षण के लिए आंकड़ों को एकत्र करने हेतु तैयार करना तथा ऑनलाइन प्रपत्र से परिचित कराना और उन्हें आंकड़े एकत्र करने की जानकारी देना भी इस कार्यशाला का एक उद्देश्य है। इस कार्यशाला में प्रभारी बहुभाषा शिक्षण एस.सी.ई.आर.टी.  डेकेश्वर वर्मा सहित संबंधित अधिकारी कार्यशाला में शामिल हुए।

     

    रायपुर /शौर्यपथ/

    मुख्य सचिव अमिताभ जैन ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समस्त संभागायुक्तों और कलेक्टरों से धान खरीदी के संबंध में चर्चा की। नवम्बर माह के 16 तारीख को मुख्य सचिव ने कलेक्टर एवं पुलिस अधिक्षकों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक लेकर धान खरीदी की सभी तैयारियों को अंतिम रूप देने के निर्देश दिए थे। आज की बैठक में सुव्यवस्थित धान खरीदी की प्रक्रिया सम्पन्न कराए जाने के लिए जिलों में की गई जरूरी तैयारियों की जानकारी प्रत्येक जिला कलेक्टर से ली गई। साथ ही धान खरीदी की प्रक्रिया में हो रही तकनीकी दिक्कतों सहित खरीदी संबंधी अन्य बिन्दुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। 

    मुख्य सचिव ने संभागायुक्तों को निर्देशित किया है कि अपने-अपने प्रभार के जिलों में धान खरीदी की प्रक्रिया में हो रही दिक्कतों और राज्य स्तर से जिलों की तैयारियों के संबंध में बताए गए जरूरी व्यवस्थाओं और कमियों के निराकरण के लिए कार्यवाही करेंगे।  जैन ने किसानों की सहूलियत का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए है। धान खरीदी में गडबड़ी करने वालों पर कानूनी कार्यवाही के निर्देश दिए गए। धान खरीदी की प्रक्रिया शुरू होते ही दो दिनों के भीतर खरीदी केन्द्र से धान का उठाव प्रारंभ कराने के विशेष निर्देश  जैन ने दिए है। जिला कलेक्टरों द्वारा बताए गए विभिन्न समस्याओं और कमियों का त्वरित निराकरण करने के निर्देश राज्य स्तरीय अधिकारियों को दिए गए है।

    मुख्य सचिव अमिताभ जैन ने 16 नवम्बर को आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान धान विक्रय हेतु किसानों एवं रकबे के पंजीयन, भू-अभिलेखों की शुद्धता के जांच, समिति स्तर पर भौतिक व्यवस्था, बारदानों की पर्याप्त व्यवस्था, संवेदनशील खरीदी केन्द्रों के चिन्हांकन और निगरानी, प्रारंभ से ही धान परिवहन, प्रचार-प्रसार, समिति स्तर पर निगरानी समिति का गठन एवं बैठक, धान के अवैध परिवहन पर निगरानी एवं नियंत्रण, शिकायत निवारण प्रकोष्ठ का गठन, कंट्रोल रूम की स्थापना जैसे महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर आवश्यक तैयारी करने के निर्देश दिए थे। बैठक में खाद्य विभाग के सचिव टोपेश्वर वर्मा, राजस्व विभाग के सचिव एन.एन.एक्का, विशेष सचिव एवं पंजीयक सहकारी संस्थाएं हिमशिखर गुप्ता, प्रबंध संचालक मार्कफेड किरण कौशल सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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    भारत शासन के सामान्य परिषद सदस्य  मितुल कोठारी ने 26 नवम्बर को उद्यानिकी संचालनालय में विभागीय अधिकारियों की राज्य स्तरीय बैठक लेकर राष्ट्रीय एकीकृत बागवानी मिशन की सभी योजनाओं की जिलेवार प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को शासन की सभी योजनाओं एवं कार्यक्रमों का लाभ किसानों को दिलाने हेतु नियमित रूप से फिल्ड भ्रमण करने तथा किसानों से सम्पर्क कर उनकी समस्याओं का निदान करने की बात कही।  कोठारी ने कहा कि उद्यानिकी को बढ़ावा देकर इस कृषकों की आय में वृद्धि की जा सकती है।
    बैठक में संचालक उद्यानिकी  माथेश्वरन वी. ने राज्य में उद्यानिकी को बढ़ावा दिए जाने के संबंध में किए जा रहे प्रयासों की विस्तार से जानकरी दी। उन्होंने बताया कि राज्य शासन उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय की स्थापना तथा आवश्यकतानुसार जिलों में नए उद्यानिकी महाविद्यालय प्रारंभ किए गए हैं, ताकि युवा शिक्षित एवं प्रशिक्षित होकर उद्यानिकी को बढ़ावा देने में अपना योगदान दे सके।  माथेश्वरन ने इस अवसर पर राज्य में बाड़ी विकास कार्यक्रम तथा राज्य के गौठानों में सामूहिक सब्जी उत्पादन, फलोत्पादन के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राज्य में विभागीय योजनाओं का प्रचार-प्रसार तथा उद्यानिकी फसलों की खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने डायरेक्ट बेनिफिशरी स्कीम से कृषकों को हो रहे लाभ की भी जानकारी दी।

    रायपुर /शौर्यपथ/

    बहुउपयोगी लैंटाना लकड़ी से फर्नीचर निर्माण सहित कुर्सी-टेबल तथा टी ट्रे आदि कलात्मक वस्तुओं के निर्माण से अब जशपुर के युवा कारीगरों के बहुरेंगे दिन। इसके निर्माण के लिए वन विभाग जशपुर द्वारा स्थानीय लोगों को अधिक से अधिक प्रोत्साहित किया जा रहा है। जिससे उन्हें रोजगार के साथ आमदनी भी मिले और क्षेत्र में बहुतायत रूप से पाए जाने वाले लैंटाना लकड़ी का भरपूर उपयोग हो सके।

    बहुउपयोगी लैंटाना लकड़ी से फर्नीचर निर्माण सहित कुर्सी-टेबल तथा टी ट्रे आदि कलात्मक वस्तुओं के निर्माण से अब जशपुर के युवा कारीगरों के बहुरेंगे दिन। इसके निर्माण के लिए वन विभाग जशपुर द्वारा स्थानीय लोगों को अधिक से अधिक प्रोत्साहित किया जा रहा है। जिससे उन्हें रोजगार के साथ आमदनी भी मिले और क्षेत्र में बहुतायत रूप से पाए जाने वाले लैंटाना लकड़ी का भरपूर उपयोग हो सके। 

    इस तारतम्य में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख  राकेश चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में वन मंडल जशपुर द्वारा वन परिक्षेत्र तबकरा अंतर्गत 16 से 25 नवम्बर तक ‘‘लैंटाना से फर्नीचर निर्माण’’ का प्रशिक्षण दिया गया। इसमें क्षेत्र के अलग-अलग गांवों के 15 महिला और पुरूष लोगों ने उत्साह के साथ भाग लिया। उल्लेखनीय है कि लैंटाना एक विदेशी प्रजाति का पौधा है, जिसका उपयोग मुख्यतः साज-सज्जा के लिए अंग्रेजो के द्वारा भारत लाया गया था। लैंटाना के वैसे तो बहुत सी उपयोगिता है, जिसमें औषधि, फर्नीचर, विद्युत उत्पादन, ब्रिकेट्स आदि प्रमुख हैं, किन्तु इसके सिल्विकल्चर ऑपरेशन (लैंटाना उन्मूलन) को उपयोगी बनाने और जंगलो से लैंटाना की समस्या को दूर करने के प्रयास हेतु फर्नीचर निर्माण को महत्व दिया जा रहा है। 

    इस संबंध में वन मण्डलाधिकारी जशपुर  कृष्ण कुमार जाधव ने बताया कि लैंटाना से फर्नीचर निर्माण के क्षेत्र में लोगों की अधिक रुचि बन रही है और लोगो नई वस्तुओं को बनाने के लिए प्रेरित दिखे रहें हैं। प्रशिक्षण में लैंटाना से मोबाइल स्टैंड, फ्लावर पॉट, पेन स्टैंड, टोकरी, टी ट्रे, मंदिर, छोटा स्टूल, कुर्सी ,टेबल, सोफा सेट, मिरर हेंगर, चाबी हेंगर आदि सामग्री लोगों को बनाने के लिए प्रशिक्षण दिया गया है। लोगो ने भी प्रशिक्षण में बहुत रूचि लेते हुए नई-नई वस्तुओं को बनाने में दिलचस्पी दिखाई।

     

    रायपुर /शौर्यपथ/

    वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  मोहम्मद अकबर के निर्देशानुसार विभाग द्वारा राज्य में वन अपराधों की रोकथाम के लिए अभियान लगातार जारी है। इस तारतम्य में आज 27 नवम्बर को वन मंडल महासमुंद के अंतर्गत ग्राम पोड़ापाली तथा बिजातीपाली में विभागीय टीम की छापामार कार्रवाई में लगभग 2 लाख 25 हजार रूपए की कीमत के सागौन चिरान तथा लट्ठा जब्त की गई है। इनमें 161 नग चिरान तथा 55 नग सागौन लट्ठा शामिल है। 

    मुख्य वन संरक्षक  जे.आर. नायक के दिशा-निर्देशन तथा वन मण्डलाधिकारी महासमुंद  पंकज राजपूत के मार्गदर्शन में उप-वनमंडलाधिकारी सरायपाली  ए.के. विन्ध्यराज के कुशल नेतृत्व में टीम द्वारा दोनों ग्राम पोड़ापाली तथा बिजातीपाली के 4 अलग-अलग घरों में तलाशी ली गई। आरोपियों के विरूद्ध कार्रवाई जारी है। उक्त कार्रवाई में वन परिक्षेत्र सरायपाली के सहायक परिक्षेत्र अधिकारी  संतोष कुमार पैंकरा,  अनिल प्रधान,  सतीश कुमार पटेल, योगेश्वर कर तथा वन परिक्षेत्र बसना के अंतर्गत सहायक परिक्षेत्र अधिकारी  विरेन्द्र कुमार पाठक तथा  नैन्सी प्रतिमा तिग्गा आदि विभागीय अमले का सराहनीय योगदान रहा।

    राज्यपाल हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में वर्चुअल रूप से हुई शामिल

    रायपुर /शौर्यपथ/

    आदिवासी तभी सशक्त होंगे जब उनकी वास्तविक आवश्यकताओं पर ध्यान देकर उन्हें दूर करने का प्रयास किया जाएगा। संविधान में आदिवासियों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं परन्तु उन्हें उनके अधिकारों के प्रति उन्हें जागरूक करना होगा। यह बात राज्यपाल सुश्री राज्यपाल अनुसुईया उइके ने हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय रायपुर द्वारा ‘‘ट्राइबल ट्रांजिशन इन इंडिया: इशूस, चैलेंजेस एंड द रीड अहेड’’ विषय पर वर्चुअल रूप से आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही। राज्यपाल ने हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के कुलपति को इस वेबीनार के लिए शुभकामनाएं दी और भविष्य में ऐसे कार्यक्रम निरंतर आयोजित करने को कहा। 

    राज्यपाल ने कहा कि आमतौर पर यह कहा जाता है कि भारत की आत्मा ग्रामीण इलाकों में बसती है। ठीक इसी प्रकार छत्तीसगढ़ प्रदेश की आत्मा भी जनजातियों में ही बसती है और जिस प्रकार जीव के उत्थान के लिए आत्मा का उत्थान आवश्यक है उसी प्रकार आदिवासी जन समुदायों के उत्थान से ही हमारे प्रदेश सहित भारत की उन्नति संभव है।
    उन्होंने कहा कि देश की आजादी के आंदोलन में शहीद वीर नारायण सिंह, शहीद गुंडाधुर, शहीद गैंदसिंह जैसे कई नायकों ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसके अलावा भी कई ऐसी जनजातीय हस्तियाँ हैं, जो इतिहास के पन्नों में गुम हैं। हमें इनका नाम सामने लाने के प्रयास करना चाहिए। 

    राज्यपाल ने कहा कि हमें इस बात का विशेष ख्याल रखना चाहिए कि उन्नति का अर्थ जनजातियों के रुख को आधुनिकता और भौतिकतावाद की तरफ मोड़ देना नहीं होता, बल्कि उन्नति का असली अर्थ, उनकी सांस्कृतिक विरासत को सहेजकर, संभालकर और उसे आगे बढ़ाकर जनजातियों को मुख्यधारा से जोड़ना होता है। 

    राज्यपाल ने कहा कि हमारे आदिवासी जनजातियों में जागरूकता के अभाव में कुछ अराजक तत्व उन्हें दिग्भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं। आदिवासी समाज को उनसे सावधान रहने की आवश्यकता है। उनके दुष्प्रयत्नों का प्रत्युत्तर केवल एक जागरूक और शिक्षित आदिवासी समाज ही दे सकता है। अतः आदिवासी समाज में अधिक से अधिक शिक्षा का प्रसार करना होगा।
    उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज में अथाह ज्ञान का भंडार है। इस ज्ञान का आधुनिक विज्ञान से मेल कराकर उत्कृष्ट सक्षम मानव संसाधन का निर्माण कर सकते हैं। राज्यपाल ने कहा कि आज आवश्यकता है कि जनजातियों की कला को प्रोत्साहन दें और उसे विश्व पटल पर उभारने का प्रयास करें। साथ ही उनके ज्ञान से हम भी कुछ ग्रहण करें और सब मिलकर जनजातियों की उन्नति के लिए प्रयास करें। 

    इस अवसर पर हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर व्ही.सी. विवेकानंदन, बस्तर जिले के कलेक्टर  रजत बंसल एवं रजिस्ट्रार प्रोफेसर उदय शंकर वर्चुअल उपस्थित थे।

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