August 26, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

    युवाओं को नशे से बचाने मीडिया निभाए प्रभावी भूमिका, आपूर्ति पर रोक के साथ मांग घटाने पर जोर

    राजनांदगांव / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ में नशे के खिलाफ लड़ाई को प्रभावी बनाने के लिए अवैध तस्करी पर सख्त कार्रवाई के साथ जनजागरूकता और मांग में कमी लाना भी जरूरी है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के अधीक्षक श्री अनिल कुमार ने कहा कि युवाओं को नशे से बचाने में परिवार, स्कूल-कॉलेज, सामाजिक संगठनों और मीडिया की सामूहिक भूमिका महत्वपूर्ण है।
    पत्र सूचना कार्यालय रायपुर के ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत—संकल्प अभियान’ के तहत राजनांदगांव में आयोजित संवाद कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि NCB की रणनीति में आपूर्ति नियंत्रण और मांग में कमी, दोनों पर समान रूप से काम किया जा रहा है।
    उन्होंने मीडिया से अपील की कि समाचार पत्र, टीवी, डिजिटल और सोशल मीडिया की व्यापक पहुंच का उपयोग नशे के स्वास्थ्य, परिवार और समाज पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को सरल एवं तथ्यपरक तरीके से लोगों तक पहुंचाने में किया जाए।
    वरिष्ठ पत्रकार श्रीमती प्रियंका कौशल ने कहा कि नशे के खिलाफ अभियान को जनआंदोलन बनाने के लिए पत्रकारिता को सामाजिक सरोकार और जनजागरण से जोड़ना होगा। उन्होंने कहा कि केवल ‘नशा छोड़ो’ का संदेश पर्याप्त नहीं, बल्कि नशे के सामाजिक कारणों, प्रभावित परिवारों और इससे बाहर निकलने वालों की वास्तविक कहानियों को सामने लाकर व्यवहार परिवर्तन का माहौल तैयार करना जरूरी है।
    कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकारों एवं शिक्षाविदों ने भी विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए सरकार के प्रयासों के साथ परिवार, मीडिया, शिक्षण संस्थानों और सामाजिक संगठनों की साझा भागीदारी अनिवार्य है।

    उप मुख्यमंत्री ने महासमुंद में चार विभागों की समीक्षा की, जून 2027 तक हर घर जल का लक्ष्य पूरा करने के निर्देश

    महासमुंद / शौर्यपथ / उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने शुक्रवार शाम महासमुंद कलेक्ट्रेट में लोक निर्माण विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग तथा खेल एवं युवा कल्याण विभाग के कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने जिले में चल रहे विकास कार्यों की प्रगति, निर्माण की गुणवत्ता, योजनाओं के क्रियान्वयन और नागरिक सुविधाओं की स्थिति की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि स्वीकृत कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूरे हों और शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

    सड़कों के निर्माण और मरम्मत में लापरवाही बर्दाश्त नहीं

    लोक निर्माण विभाग की समीक्षा के दौरान उप मुख्यमंत्री ने जिले में निर्माणाधीन सड़कों, पुल-पुलियों तथा अन्य अधोसंरचनात्मक कार्यों की प्रगति जानी। उन्होंने कहा कि सड़कों और अधोसंरचना का सीधा संबंध आम नागरिकों के आवागमन से है, इसलिए निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और समयबद्धता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।

    उन्होंने अधिकारियों को कार्ययोजना बनाकर काम करने तथा आधुनिक तकनीक और उपकरणों का अधिकतम उपयोग करने के निर्देश दिए। सड़कों की मरम्मत के लिए संबंधित अनुविभागीय अधिकारी को सीधे जिम्मेदार बताते हुए उन्होंने नियमित निगरानी पर जोर दिया।

    जून 2027 तक हर घर जल का लक्ष्य

    लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की समीक्षा में उप मुख्यमंत्री ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था तथा जल जीवन मिशन की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि सभी ग्राम पंचायतों में जून 2027 तक ‘हर घर जल’ का लक्ष्य हर हाल में पूरा किया जाए।

    उन्होंने ग्राम पंचायतों को जलापूर्ति योजनाएं हैंडओवर किए जाने के बाद सरपंचों और सचिवों की बैठक आयोजित कर उन्हें योजनाओं के संचालन एवं रखरखाव की जानकारी देने तथा तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के निर्देश दिए। साथ ही बंद पड़े ट्यूबवेलों को तत्काल चालू करने और पेयजल संबंधी शिकायतों का त्वरित निराकरण सुनिश्चित करने को कहा।

    नगरीय निकाय पांच साल की कार्ययोजना बनाकर करें काम

    नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की समीक्षा के दौरान श्री साव ने सड़क, नाली, स्वच्छता, नागरिक सुविधाओं और अन्य विकास कार्यों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि नगरीय निकायों को आगामी पांच वर्षों की स्पष्ट कार्ययोजना तैयार कर चरणबद्ध तरीके से विकास कार्यों को आगे बढ़ाना चाहिए।

    उन्होंने अधोसंरचना मद एवं 15वें वित्त आयोग से स्वीकृत कार्यों तथा नालंदा परिसर जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने के निर्देश दिए। प्रधानमंत्री आवास योजना को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के साथ ही राजस्व वसूली बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान देने को कहा।

    उन्होंने अधिकारियों को नागरिकों की समस्याओं का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करने तथा स्वच्छता एवं जनसुविधाओं की नियमित निगरानी के निर्देश दिए।

    “हर गांव में हो मैदान, हर स्कूल से निकलें खिलाड़ी”

    खेल एवं युवा कल्याण विभाग की समीक्षा के दौरान उप मुख्यमंत्री ने जिले में खेल गतिविधियों, उपलब्ध खेल अधोसंरचना और युवाओं को खेलों से जोड़ने के लिए संचालित कार्यक्रमों की जानकारी ली।

    उन्होंने कहा कि हर गांव में खेल का मैदान होना चाहिए और हर स्कूल से खिलाड़ी निकलने चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में खेल प्रतिभाओं को प्राथमिक स्तर से ही पहचानने और उन्हें प्रशिक्षित करने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि प्राथमिक शालाओं से ही बच्चों को खेलों के लिए प्रोत्साहित किया जाए।

    उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चा मैदान तक पहुंचे और किसी न किसी खेल गतिविधि में भाग ले। उपलब्ध खेल संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए स्थानीय प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रभावी प्रयास किए जाएं।

    पारदर्शिता, गुणवत्ता और समयबद्धता सर्वोच्च प्राथमिकता

    उप मुख्यमंत्री श्री साव ने सभी विभागों के अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ शासन की प्राथमिकताओं के अनुरूप कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों का वास्तविक उद्देश्य नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इसलिए योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता, गुणवत्ता और समयबद्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

    समीक्षा बैठक में कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह, जल जीवन मिशन के अतिरिक्त मिशन संचालक श्री ओंकेश चंद्रवंशी, लोक निर्माण विभाग सेतु परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता श्री एस.के. कोरी, रायपुर परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता श्री पी.एम. कश्यप, विद्युत एवं यांत्रिकी के मुख्य अभियंता श्री टी.आर. कुंजाम सहित चारों विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।

    सुरक्षित श्रम, सामाजिक सुरक्षा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य, सम्मानजनक रोजगार और डिजिटल सेवाओं का व्यापक विस्तार

    साभार - छगल लाल लोन्हारे
    संयुक्त संचालक, जनसंपर्क

    रायपुर / शौर्यपथ / राष्ट्र निर्माण में श्रमिकों का योगदान सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। श्रमिकों के सम्मान, सुरक्षा और समग्र विकास के बिना विकसित राज्य की कल्पना संभव नहीं है। इसी सोच को आधार बनाकर छत्तीसगढ़ शासन का श्रम विभाग श्रमिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। श्रम मंत्री श्री लखन लाल देवांगन के निर्देशन में श्रमिकों के हितों की रक्षा, सामाजिक सुरक्षा का विस्तार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता तथा आधुनिक तकनीक के माध्यम से सेवाओं को सरल बनाने के लिए अनेक महत्वपूर्ण पहल की गई हैं। राज्य सरकार के ढाई साल में श्रम विभाग की उपलब्धियाँ राज्य सरकार की श्रमिक हितैषी सोच और संवेदनशील प्रशासन का परिचायक हैं।

    प्रशासनिक ढांचे का विस्तार, सेवाओं की बेहतर पहुंच
    श्रम कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन तथा श्रमिकों को त्वरित और गुणवत्तापूर्ण सेवाएँ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने पाँच नए जिलों में श्रम पदाधिकारी कार्यालय स्थापित किए हैं। मंत्री श्री लखन लाल देवांगन ने बताया कि पाँच श्रम पदाधिकारी कार्यालयों को सहायक श्रमायुक्त कार्यालय के रूप में उन्नत किया गया है। अब प्रदेश में 10 सहायक श्रमायुक्त कार्यालय एवं 23 श्रम पदाधिकारी कार्यालय सहित कुल 33 श्रम कार्यालय संचालित हैं। इससे श्रमिकों की समस्याओं के त्वरित निराकरण और योजनाओं के प्रभावी संचालन को नई गति मिली है।

    समय के अनुरूप श्रम कानूनों में सुधार
    औद्योगिक विकास और श्रमिक हितों के संतुलन को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने श्रम कानूनों में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। छत्तीसगढ़ कारखाना नियम, 1962 में संशोधन कर निर्धारित सुरक्षा प्रावधानों के साथ महिलाओं के रोजगार के अवसरों का विस्तार किया गया है। वहीं छत्तीसगढ़ दुकान एवं स्थापना नियम, 2021 में संशोधन के माध्यम से श्रम पहचान पंजीयन प्रमाण-पत्र अब 24 घंटे के भीतर जारी किए जाने का प्रावधान किया गया है। इससे उद्योगों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को सरल एवं पारदर्शी सेवाएँ उपलब्ध होंगी तथा ष्ईज ऑफ डूइंग बिजनेसष् को भी बढ़ावा मिलेगा।

    56 लाख से अधिक श्रमिक सामाजिक सुरक्षा के दायरे में
    श्रम विभाग के अंतर्गत संचालित छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल, भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल तथा असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल के माध्यम से अब तक लगभग 56.83 लाख संगठित, निर्माण एवं असंगठित श्रमिकों का पंजीयन किया जा चुका है।

    3.48 लाख श्रमिकों को बीमा, चिकित्सा, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं कौशल उन्नयन जैसी सुविधाओं का लाभ
    वर्ष 2026 में 30 जून तक विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से लगभग 3.48 लाख श्रमिकों को बीमा, चिकित्सा, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं कौशल उन्नयन जैसी सुविधाओं का लाभ प्रदान किया गया है। इन योजनाओं पर लगभग 173.32 करोड़ रुपये व्यय किए गए हैं, जो श्रमिक कल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

    निर्माण श्रमिकों को बढ़ी आर्थिक सहायता
    मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक आवास सहायता योजना के अंतर्गत आवास निर्माण अथवा घर खरीदने के लिए दी जाने वाली सहायता राशि एक लाख रुपये से बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपये कर दी गई है। यह निर्णय निर्माण श्रमिकों के अपने घर के सपने को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

    महिला श्रमिकों को स्वरोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता के नए अवसर
    इसी प्रकार दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना के अंतर्गत पंजीकृत महिला निर्माण श्रमिकों एवं उनके समूहों को ई-रिक्शा खरीदने के लिए सहायता राशि भी एक लाख रुपये से बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपये कर दी गई है। इससे महिला श्रमिकों को स्वरोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता के नए अवसर मिल रहे हैं।

    शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में नई पहल
    राज्य सरकार ने श्रमिक परिवारों के भविष्य को संवारने के उद्देश्य से अटल कैरियर निर्माण योजना प्रारंभ की है। इसके माध्यम से पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के बच्चों को इंजीनियरिंग एवं मेडिकल जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए गुणवत्तापूर्ण निःशुल्क कोचिंग उपलब्ध कराई जाएगी।

    पंजीकृत निर्माण श्रमिकों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण
    वहीं मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक स्वास्थ्य परीक्षण योजना के माध्यम से पंजीकृत निर्माण श्रमिकों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। इस पहल से बीमारियों की प्रारंभिक पहचान, समय पर उपचार तथा स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।

    उत्कृष्ट शिक्षा से उज्ज्वल भविष्य की ओर
    श्रमिक परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना संचालित की जा रही है। इस योजना के तहत पात्र निर्माण श्रमिकों के प्रथम दो बच्चों को कक्षा 6वीं से 12वीं तक उत्कृष्ट निजी आवासीय विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा प्रदान की जा रही है।मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप वर्ष 2026-27 से इस योजना के अंतर्गत लाभान्वित बच्चों की संख्या 100 से बढ़ाकर 200 कर दी गई है। यह पहल श्रमिक परिवारों के बच्चों के भविष्य को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने का माध्यम बनेगी।

    पाँच रुपये में पौष्टिक भोजन
    शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना के माध्यम से पंजीकृत निर्माण, संगठित एवं असंगठित श्रमिकों को मात्र 5 रुपये में गरम एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश के 18 जिलों में 39 भोजन केन्द्र संचालित हैं, जो हजारों श्रमिकों के लिए राहत का माध्यम बने हुए हैं।

    डिजिटल सेवाओं से बढ़ी पारदर्शिता
    श्रम विभाग द्वारा विकसित 'ई-श्रम साथी मोबाइल एप' श्रमिकों और नियोजकों के लिए एक महत्वपूर्ण डिजिटल प्लेटफॉर्म बनकर उभरा है। इस एप के माध्यम से स्वयं पंजीयन, श्रमिक एवं नियोजक के बीच सीधा संपर्क तथा रोजगार संबंधी जानकारी आसानी से उपलब्ध हो रही है। इससे पारदर्शिता के साथ रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि हो रही है।

    मॉडल लेबर चौक से मिलेगा सम्मानजनक वातावरण
    राज्य सरकार द्वारा मॉडल लेबर चौक फेसिलिटेशन सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। इन केन्द्रों पर श्रमिकों के पंजीयन, विभिन्न योजनाओं के आवेदन, भोजन, पेयजल, विश्राम एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। इससे श्रमिकों को सम्मानजनक एवं सुरक्षित कार्य वातावरण उपलब्ध होगा।

    सामाजिक सुरक्षा को मिला नया विस्तार
    मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता योजना के अंतर्गत सामान्य मृत्यु पर आश्रितों को 1 लाख रुपये, कार्यस्थल दुर्घटना में मृत्यु होने पर 5 लाख रुपये तथा स्थायी दिव्यांगता की स्थिति में 2.50 लाख रुपये की सहायता प्रदान की जाती है। साथ ही अपंजीकृत निर्माण श्रमिकों की कार्यस्थल दुर्घटना में मृत्यु होने पर भी उनके आश्रितों को 1 लाख रुपये की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

    पंजीकृत श्रमिकों की मृत्यु पर आश्रितों को 1 लाख रुपये की सहायता
    इसी प्रकार असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल के अंतर्गत पंजीकृत श्रमिकों की मृत्यु पर आश्रितों को 1 लाख रुपये तथा दिव्यांगता की स्थिति में 50 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाती है।

    सुरक्षित कार्यस्थल की दिशा में प्रयास
    राज्य के विभिन्न कारखानों में श्रमिकों को उनके कार्य के अनुरूप वरिष्ठ अधिकारियों एवं सुरक्षा अधिकारियों द्वारा नियमित प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। इससे कार्यस्थलों पर सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित होने के साथ-साथ दुर्घटनाओं में कमी और उत्पादकता में वृद्धि हो रही है।

    श्रमिक कल्याण की नई पहचान
    छत्तीसगढ़ में श्रम विभाग द्वारा किए जा रहे व्यापक सुधार यह सिद्ध करता है कि राज्य सरकार श्रमिकों को केवल योजनाओं का लाभार्थी नहीं, बल्कि विकास यात्रा का महत्वपूर्ण सहभागी मानती है। प्रशासनिक ढाँचे का विस्तार, श्रम कानूनों का आधुनिकीकरण, डिजिटल सेवाओं का विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, सामाजिक सुरक्षा एवं सम्मानजनक रोजगार जैसी पहलें श्रमिकों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रही हैं। श्रमिकों के कल्याण और सशक्तिकरण के इन प्रयासों से छत्तीसगढ़ समावेशी और संवेदनशील विकास की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है।

    घायलों को भी मिलेगी ₹50-50 हजार की आर्थिक मदद, मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दिए संवेदनशीलता के साथ सहायता सुनिश्चित करने के निर्देश

    रायपुर / शौर्यपथ / उत्तराखंड के चमोली में निर्माणाधीन सुरंग में पानी भरने की दर्दनाक घटना ने छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले के चार परिवारों को गहरे शोक में डुबो दिया है। हादसे में कोंडागांव जिले के चार श्रमिकों की मृत्यु हो गई, जबकि दो श्रमिक घायल हुए हैं। घटना की जानकारी पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की है।
    मुख्यमंत्री साय ने हादसे में मृत कोंडागांव जिले के प्रत्येक श्रमिक के परिजन को ₹5-5 लाख तथा घायल दोनों श्रमिकों को ₹50-50 हजार की आर्थिक सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को पीड़ित परिवारों को आवश्यक सहायता एवं हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए हैं।
    हादसे में कोंडागांव जिले के ग्राम धनसुली के दो, मदनार के एक और दहीकोंगा के एक श्रमिक की जान चली गई। वहीं जिले के दो श्रमिक घायल हुए हैं। दिवंगत श्रमिकों के पार्थिव शरीर कोंडागांव लाए गए, जहां परिजनों एवं स्वजनों की उपस्थिति में उनका अंतिम संस्कार किया गया।
    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि दुःख की इस घड़ी में राज्य सरकार शोकाकुल परिवारों के साथ पूरी संवेदनशीलता से खड़ी है। सरकार पीड़ित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराएगी। उन्होंने दिवंगत आत्माओं की शांति और शोकाकुल परिजनों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। साथ ही उन्होंने हादसे में घायल दोनों श्रमिकों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।

    वेतन व सेवानिवृत्ति लाभों के भुगतान के साथ ही मरम्मत, संधारण कार्यों तथा अतिवृष्टि जैसी परिस्थितियों से निपटने में मिलेगी सहायता

    रायपुर / शौर्यपथ / नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने प्रदेश के 158 नगरीय निकायों में विभिन्न मदों में कुल 74 करोड़ 88 लाख 17 हजार रुपए आबंटित किए हैं। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद विभाग ने सभी निकायों को राशि आबंटन के आदेश जारी कर दिए हैं।
    नगरीय प्रशासन विभाग ने प्रदेश के 10 नगर निगमों को कुल 45 करोड़ 7 लाख 90 हजार रुपए आबंटित किए हैं। वहीं 48 नगर पालिकाओं को कुल 18 करोड़ 60 लाख 34 हजार रुपए तथा 100 नगर पंचायतों को कुल 11 करोड़ 19 लाख 92 हजार रुपए आबंटित किए गए हैं। विभाग द्वारा निकायों को अनिवार्य निधि, राजस्व वसूली, चुंगी क्षतिपूर्ति, उत्पाद कर, बार लाइसेंस तथा मुद्रांक मद के अंतर्गत यह राशि आबंटित की गई है।
    विभाग द्वारा जारी इस राशि से नगरीय निकायों की वित्तीय स्थिति को मजबूती मिलेगी। इससे स्थानीय स्तर पर वेतन भुगतान तथा सेवानिवृत्ति लाभों के भुगतान के साथ ही मरम्मत, संधारण कार्यों तथा अतिवृष्टि जैसी परिस्थितियों से निपटने में भी सहायता मिलेगी।

    जल-जीवन मिशन के तहत आयोजित हुई कलेक्टर कॉन्फ्रेंस
    पूर्ण योजनाओं को करायें भौतिक सत्यापन

    रायपुर / शौर्यपथ / मुख्य सचिव विकासशील ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये प्रदेश में जल-जीवन मिशन के कार्यों की समीक्षा के लिए कलेक्टर कॉन्फ्रेंस आयोजित की। मुख्य सचिव ने जिलों के कलेक्टरों से उनके जिले के जल-जीवन मिशन के कार्यों की जानकारी ली। मुख्य सचिव ने कलेक्टरों से कहा कि वे जल-जीवन मिशन के तहत हर घर जल पहुचांने के लिए व्यक्तिगत रूचि लेकर काम करें। लोगों के घरों में नलों से पानी मिल इसके लिए चलायी जा रही स्कीमों को तहत पूर्ण करायें। पूर्ण हो चुकी योजनाओं का भौतिक सत्यापन करायें और पंचायतों को हस्तांतरित योजनाओं के लंबित भुगतान शीघ्र करायें। मुख्य सचिव ने साफ कहा है जल जीवन मिशन के कार्यों में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
    कलेक्टर कॉन्फ्रेंस में सोलर आधारित योजनाओं एवं क्रेडा संबंधित नल-जल योजनाओं के कार्यों के संबंध में विचार विमर्श किया गया एवं आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए। कॉन्फ्रेंस के दौरान पूर्ण एवं हस्तांतरित योजनाओं के भुगतान की कार्यवाही शीघ्रता से करने के निर्देश दिए गए है। कलेक्टरों को स्त्रोत समस्यामूलक योजनाओं के कार्यों को स्थानीय निधि से पूर्ण कराने कहा गया है।
    मुख्य सचिव ने कलेक्टरों को निर्देश दिए कि जहां सब इंजीनियरों की कमी है वहां पर दूसरे विभागों के इंजीनियरों से जल-जीवन मिशन के कार्यों को कराने के लिए कार्यवाही करें। कॉन्फ्रेंस में जिला जल एवं स्वच्छता समिति की नियमित मासिक बैठक हो यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बैठक की कार्यवाही का समय पर विभागीय पोर्टल पर अपलोड की जाए तथा जल जीवन मिशन की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी कलेक्टर स्पष्ट आकलन, बेहतर योजना और प्रभावी समन्वय के साथ मिशन मोड में कार्य करें, ताकि राज्य के प्रत्येक परिवार को समयबद्ध रूप से हर घर नल से जल उपलब्ध कराया जा सके।
    बैठक में 55 एलपीसीडी 7 दिवसों से कम जल प्रदाय की जा रही स्कीमों की जानकारी अधिकारियों से ली गई। बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव अब्दुल कैसर हक सहित लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग एवं जल जीवन मिशन के अधिकारी मौजूद थे। वीडियो कॉन्फ्रेंस से सभी जिलों के कलेक्टर एवं जिला स्तरीय विभागीय अधिकारी शामिल हुए।

      दुर्ग / शौर्यपथ / जिले के वीर बलिदानियों की पावन स्मृति को संजोने और उनकी शौर्यगाथा को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के उद्देश्य से दुर्ग जिले के पाटन विकासखंड के ग्राम सोनपुर में शौर्य वाटिका का भूमिपूजन किया गया। उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा के मुख्य आतिथ्य में आयोजित कार्यक्रम में जिले के 37 शहीद परिवारों का सम्मान किया गया। इस अवसर पर लगभग एक एकड़ क्षेत्र में विकसित की जा रही 'शौर्य वाटिका'में शहीदों के नाम पर उनके परिजनों द्वारा स्मृति वृक्ष लगाए गए। उपमुख्यमंत्री शर्मा ने भी शहीदों की स्मृति में पीपल का पौधा रोपित कर शौर्य वाटिका में पौधरोपण की शुरुआत की। कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री शर्मा ने लगभग 78.96 लाख रुपए की लागत के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण किया। इनमें तालाब गहरीकरण, खेल मैदान, पहुंच मार्ग निर्माण, शौचालय, चबूतरा निर्माण, वृक्षारोपण एवं शेड निर्माण सहित विभिन्न कार्य शामिल हैं। इसके अलावा मुख्यमंत्री समग्र ग्रामीण विकास योजना के अंतर्गत 37.95 लाख रुपए की लागत से सीसी रोड निर्माण, आहता निर्माण एवं शेड निर्माण कार्यों का भी लोकार्पण किया गया।
    उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में छत्तीसगढ़ के जवानों और बस्तर के लोगों ने बड़ी कीमते चुकाई है। उन्होंने शहीद जवानों और उनके परिवारों को नमन करते हुए कहा कि आज बस्तर में शांति स्थापित होने के बाद विकास की नई संभावनाएं खुली हैं। जिन क्षेत्रों में कभी नक्सल हिंसा के कारण स्कूल, अस्पताल, आंगनबाड़ी, बिजली, पानी और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं पहुंच पाती थीं, वहां अब विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि बस्तर में नक्सलवाद के खात्मे में शहीद जवानों की बहादुरी और बलिदान की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
    आज नक्सल क्षेत्रों में तिरंगा यात्रा निकाली जा रही है, जहां कभी जाना मुश्किल था, अब वहां शांति और बदलाव का माहौल है। उपमुख्यमंत्री ने सोनपुर गांव के विकास की सराहना करते हुए कहा कि यहां शहीदों की स्मृति में शौर्य वाटिका का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिले के शहीद परिवारों और शहीदों के नाम पर यहां पौधरोपण किया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके त्याग और शौर्य को याद रख सकें। उन्होंने कहा कि सोनपुर गांव में योजना के अनुसार विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में सरकार हरसंभव सहयोग करेगी। उपमुख्यमंत्री ने गांव में निर्मित विभिन्न विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि मनरेगा सहित वीवीजी राम जी के माध्यम से रोजगार के साथ-साथ कौशल विकास और अधोसंरचना निर्माण को गति दी जा रही है। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से योजनाबद्ध तरीके से गांव के विकास कार्यों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
    इस अवसर पर सांसद विजय बघेल ने भी शहीदों को नमन करते हुए उनके परिवारों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। कार्यक्रम में साजा विधायक ईश्वर साहू, जनपद पंचायत अध्यक्ष कीर्ति नायक, सुरेन्द कोशिक, सरपंच संत कुमार कुंभकार, सेवानिवृत शिक्षक रामू राम चक्रधर सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं नागरिक गण उपस्थित थे।

    साभार : धनंजय राठौर
    संयुक्त संचालक, जनसंपर्क

                   शिशु जीवन का वह नाजुक चरण है, जहाँ सही पोषण और स्वास्थ्य देखभाल उनके भविष्य की दिशा तय करती है। भारत जैसे विकासशील देश में 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों में कुपोषण, एनीमिया और विभिन्न संक्रामक बीमारियों की दर को कम करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य एवं महिला-बाल विकास विभाग द्वारा 'शिशु संरक्षण माह' का आयोजन किया जाता है। यह एक विशेष स्वास्थ्य अभियान है, जो नवजात और छोटे बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए एक मजबूत कवच का कार्य करता है। बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण स्तर को सुधारने के लिए चलाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण अभियान है। छत्तीसगढ़ राज्य में इस अभियान का नया चरण 18 अगस्त 2026 से शुरू हो गया है, जिसके तहत 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों की विशेष देखभाल की जा रही है।
    अभियान का मुख्य उद्देश्य
    इस विशेष माह को मनाने का प्राथमिक लक्ष्य बाल मृत्यु दर और 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में कमी लाना है। इसके साथ ही, बच्चों में समय पर बीमारियों की पहचान करना, उन्हें आवश्यक विटामिन और खनिज प्रदान करना, तथा माताओं को सही पोषण और स्वच्छता के प्रति जागरूक करना इस अभियान के प्रमुख उद्देश्य हैं।
    प्रमुख स्वास्थ्य सेवाएं और गतिविधियाँ
    शिशु संरक्षण माह के दौरान गांव-गांव और शहरों में स्वास्थ्य केंद्रों व आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से सेवाएं प्रदान की जाती हैं:
    • विटामिन 'ए' का अनुपूरण: 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को रतौंधी (Night Blindness) जैसी आंखों की बीमारियों से बचाने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए विटामिन 'ए' की खुराक दी जाती है।
    • एनीमिया से बचाव 6 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को खून की कमी (एनीमिया) से सुरक्षित रखने हेतु आयरन एवं फॉलिक एसिड (IFA) सिरप का वितरण किया जाता है।
    • पूर्ण टीकाकरण: जिन बच्चों के नियमित टीके छूट गए हैं, उन्हें खसरा, रुबेला, पोलिया, काली खांसी और टिटनेस जैसी घातक बीमारियों से बचाने के लिए टीकाकृत किया जाता है।
    • कुपोषण की पहचान व उपचार: आंगनवाड़ी स्तर पर सभी बच्चों का वजन और लंबाई नापकर गंभीर रूप से कुपोषित और मध्यम कुपोषित बच्चों को चिह्नित किया जाता है। आवश्यकता पड़ने पर गंभीर बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र भेजा जाता है।
    • दस्त नियंत्रण और ओआरएस वितरण: बच्चों में डिहाइड्रेशन रोकने के लिए माताओं को ओआरएस पैकेट और जिंक की गोलियां दी जाती हैं।
    जागरूकता एवं परामर्श सत्र
    केवल दवाएं देना ही इस अभियान का हिस्सा नहीं है, बल्कि माताओं और परिवारों का व्यवहार परिवर्तन भी इसका महत्वपूर्ण अंग है:
    • स्तनपान का महत्व: जन्म के तुरंत बाद (1 घंटे के अंदर) मां का पहला गाढ़ा पीला दूध (कोलस्ट्रम) और शुरुआती 6 माह तक केवल स्तनपान कराने के लिए माताओं को प्रेरित किया जाता है।
    • ऊपरी आहार की शुरुआत: 6 माह की आयु पूरी होने के बाद बच्चे को स्तनपान के साथ-साथ सही मात्रा और गुणवत्ता वाला पूरक आहार (ऊपरी आहार) देने की सलाह दी जाती है। 6 से 12 महीने की उम्र के बीच, आपका शिशु पौष्टिक ठोस आहार खाना शुरू कर देगा, लेकिन माँ का दूध फिर भी पोषण का एक महत्वपूर्ण स्रोत बना रहेगा। जब आपका शिशु माँ का दूध या फार्मूला दूध पीना छोड़ दे, तो उसे धीरे-धीरे और धैर्य से खिलाएँ। उसे नए स्वाद चखने दें, लेकिन ज़बरदस्ती न करें। जब आपका बच्चा ठोस आहार खाना शुरू करे, तो उसे भोजन को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर खाने से रोकें ताकि वह गले में न अटके।
    • अपने शिशु के मस्तिष्क के विकास में मदद करने के लिए उसे पढ़ें, उससे बातें करें और उसके लिए गाएं।
    • अपने शिशु को सोने के पर्याप्त अवसर प्रदान करें - 4 से 12 महीने के शिशुओं के लिए अनुशंसित नींद की मात्रा प्रतिदिन 12 से 16 घंटे (24 घंटे की अवधि में, झपकी सहित) है।
    • शिशु को सक्रिय रखना उसके विकास के लिए महत्वपूर्ण है। दिन भर उसके हाथ-पैर हिलाते रहने के लिए उसके साथ शारीरिक गतिविधियाँ करें। ज़मीन पर बैठकर हिलने-डुलने से शिशु मजबूत बनता है और साथ ही वह दुनिया को समझने और जानने की कला सीखता है।
    • स्वच्छता व सैनिटेशन: हाथ धोने की सही आदत और बच्चे की देखभाल में साफ-सफाई के महत्व पर चर्चा की जाती है, जिससे संक्रमण से बचाव संभव हो सके।
    • शिशु को सक्रिय रखना उसके विकास के लिए महत्वपूर्ण है। दिन भर उसके हाथ-पैर हिलाते रहने के लिए उसके साथ शारीरिक गतिविधियाँ करें। ज़मीन पर बैठकर हिलने-डुलने से शिशु मजबूत बनता है और साथ ही वह दुनिया को समझने और जानने की कला सीखता है।
    • शिशु को बांधकर रखने वाले उपकरण उसके विकास में बाधा डाल सकते हैं। शिशु को झूले, स्ट्रोलर, बाउंसिंग सीट, एक्सरसाइज़ सॉसर या अन्य किसी भी बांधकर रखने वाले उपकरण में लंबे समय तक न रखें। उन्हें बाहर निकालें और घूमने-फिरने दें।
    शिशु संरक्षण माह केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह हर परिवार और समाज के लिए अपने बच्चों के प्रति जिम्मेदारी का अहसास कराने वाला समय है। जब समाज का हर वर्ग—स्वास्थ्य कार्यकर्ता, मितानिन/आशा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और अभिभावक—एक साथ मिलकर प्रयास करेंगे, तभी हम एक स्वस्थ, कुपोषण-मुक्त और सशक्त पीढ़ी का निर्माण कर सकेंगे।

      नई दिल्ली। देश में चीनी की बढ़ती कीमतों ने आगामी त्योहारी सीजन में आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। पिछले कुछ महीनों में चीनी के दामों में करीब 40 प्रतिशत तक का उछाल आने की खबरों के बीच अलग-अलग बाजारों में खुदरा कीमतें बढ़कर 58 से 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई हैं। वहीं, कुछ रिपोर्टों के अनुसार पिछले एक-दो महीनों में चीनी के दाम में औसतन 10 से 20 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई है।

    रक्षाबंधन सहित आगामी त्योहारी सीजन में मिठाइयों की मांग बढ़ने वाली है। ऐसे में चीनी की महंगाई का सीधा असर मिठाई कारोबार पर पड़ने की संभावना है। चीनी महंगी होने के साथ-साथ मिठाई बनाने में इस्तेमाल होने वाली अन्य सामग्री और उत्पादन लागत बढ़ने पर त्योहारी सीजन में मिठाइयों के दाम करीब 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। यानी इस बार त्योहारों पर मिठाई खरीदना आम परिवारों की जेब पर पहले की तुलना में अधिक भारी पड़ सकता है।

    कम होता स्टॉक बढ़ा रहा चिंता

    चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजह घरेलू बाजार में उपलब्ध स्टॉक को माना जा रहा है। सितंबर के अंत तक देश में चीनी का घरेलू स्टॉक घटकर 30 से 35 लाख टन रहने की आशंका है। यदि स्टॉक इस स्तर तक पहुंचता है तो आगामी सीजन के शुरुआती महीनों में घरेलू मांग पूरी करने को लेकर दबाव बढ़ सकता है।

    एथेनॉल उत्पादन की ओर गन्ने का डायवर्जन भी असरदार

    चीनी की उपलब्धता पर एथेनॉल उत्पादन का भी असर पड़ा है। गन्ने के रस और सीरप का एक हिस्सा चीनी बनाने के बजाय एथेनॉल उत्पादन की ओर डायवर्ट किए जाने से बाजार में चीनी की उपलब्धता प्रभावित हुई है। मांग और उपलब्धता के बीच अंतर बढ़ने पर कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है।

    त्योहारी मांग बढ़ने से और बढ़ सकती है कीमत

    रक्षाबंधन से त्योहारी सीजन की शुरुआत होने के साथ मिठाई, बेकरी और अन्य खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ने की संभावना है। ऐसे में चीनी की कीमतों में मौजूदा तेजी का असर उपभोक्ताओं तक पहुंचना लगभग तय माना जा रहा है। विशेष रूप से मिठाई कारोबारियों की लागत बढ़ने पर इसका भार ग्राहकों पर पड़ सकता है।

    सरकार ने आपूर्ति सुधारने के लिए उठाए कदम

    बढ़ती कीमतों और घरेलू उपलब्धता को देखते हुए केंद्र सरकार ने बाजार में आपूर्ति सुधारने के लिए 10 लाख मीट्रिक टन चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। इसके अलावा सरकार ने व्यापारियों और थोक उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक सीमा को और सख्त किया है, ताकि बाजार में अनावश्यक जमाखोरी पर नियंत्रण रखा जा सके और उपलब्ध स्टॉक का संतुलित वितरण सुनिश्चित हो।

    त्योहार की मिठास बचाने की जरूरत

    त्योहार भारतीय समाज में आपसी प्रेम, भाईचारे और खुशियों का प्रतीक हैं। रक्षाबंधन पर भाई-बहन के रिश्ते की मिठास से लेकर दीपावली की मिठाइयों तक, चीनी की बढ़ती कीमतों का असर सीधे आम परिवारों की जेब पर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार की ओर से आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों पर नियंत्रण के प्रयासों के साथ-साथ व्यापारियों से भी उचित लाभ के साथ उपभोक्ताओं के हितों का ध्यान रखने की अपेक्षा है।

    आम उपभोक्ताओं के लिए भी यह समय अनावश्यक खरीदारी और बर्बादी से बचते हुए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध विकल्पों और उचित कीमतों की तुलना कर खरीदारी करने का संदेश देता है। त्योहार की असली मिठास महंगे दामों में नहीं, बल्कि आपसी प्रेम और खुशियां बांटने में है। सरकार, कारोबारियों और उपभोक्ताओं के सामूहिक प्रयास से उम्मीद है कि महंगाई के बावजूद त्योहारों की मिठास फीकी नहीं पड़ेगी।

       रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है कि रायपुर निवासी सौम्या राठौर का चयन भारत के सर्वोच्च न्यायालय, दिल्ली में माननीय जस्टिस श्री चन्द्रशेखर के कोर्ट में लीगल असिस्टेंट कम रिसर्च एसोसिएट के पद पर हुआ है। सौम्या राठौर धनंजय राठौर, संयुक्त संचालक, जनसंपर्क संचालनालय, रायपुर एवं श्रीमती रोशनी राठौर, कम्पीयर, आकाशवाणी, रायपुर की बेटी हैं।

    सौम्या राठौर ने MHCET परीक्षा में ऑल इंडिया 23वां स्थान प्राप्त कर एशिया के सबसे पुराने लॉ कॉलेज Government Law College, Mumbai से Legal Science and LL.B. की शिक्षा पूर्ण की है। अपनी उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रतिभा के बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में आयोजित लीगल असिस्टेंट परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया।

    परीक्षा में प्रथम स्थान हासिल करने के बाद सौम्या राठौर की मार्च 2026 में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के माननीय न्यायाधीश श्री एन. के. चंद्रवंशी के कोर्ट में लीगल असिस्टेंट के पद पर नियुक्ति हुई, जहां वे वर्तमान में कार्यरत थीं। अब उनकी प्रतिभा और मेहनत ने उन्हें देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था भारत के सर्वोच्च न्यायालय, दिल्ली तक पहुंचाया है।

    सौम्या राठौर की बहन शौर्या राठौर भी शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल कर रही हैं। शौर्या राठौर Government Medical College, Jagdalpur से MBBS की पढ़ाई कर रही हैं। सौम्या राठौर और शौर्या राठौर दोनों बहनें प्रारंभ से ही मेधावी छात्राएं रही हैं और अपनी मेहनत एवं प्रतिभा के बल पर लगातार सफलता की नई ऊंचाइयां हासिल कर रही हैं।

    सौम्या राठौर के पिता धनंजय राठौर मूलतः जांजगीर के निवासी हैं और वर्तमान में रायपुर में निवासरत हैं। बेटी की इस महत्वपूर्ण उपलब्धि से राठौर परिवार के साथ-साथ जांजगीर और रायपुर के लोगों में भी हर्ष और गर्व का माहौल है।

    सुप्रीम कोर्ट में लीगल असिस्टेंट कम रिसर्च एसोसिएट के रूप में सौम्या राठौर का चयन उनकी मेहनत, मेधा, निरंतर अध्ययन और विधि के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन का परिणाम है। उनकी यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ के युवाओं, विशेषकर विधि की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायी है।

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