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June 02, 2026
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शौर्यपथ

शौर्यपथ

मनोरंजन / शौर्यपथ / टीवी एक्ट्रेस सौम्या टंडन इन दिनों पॉप्युलर सीरियल 'भाबीजी घर पर हैं' को छोड़ने के चलते चर्चा में हैं। उन्होंने 21 अगस्त को शो के लिए आखिरी बार काम किया था। सौम्या को शो के सेट सभी ने एकसाथ विदाई भी दी। उनके शो को छोड़ने को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। अब चर्चा है कि उन्होंने रिएलिटी शो बिग बॉस 14 के लिए भाबीजी घर पर हैं को अलविदा कहा है। इस पर सौम्या अपनी प्रतिक्रिया दी है।
एक एंटरटेनमेंट पोर्टल से सौम्या टंडन ने इसबारे में बात की है। सौम्या ने बताया कि उन्होंने 'बिग बॉस 14' के लिए भाबीजी घर पर हैं नहीं छोड़ा था। सौम्या टंडन ने कहा, ''मुझे 'बिग बॉस' के लिए संपर्क किया गया था, लेकिन उन्होंने मुझे पहले भी कई बार शो की पेशकश की है। 'भाबीजी घर पर हैं' छोड़ने के पीछे का कारण निश्चित रूप से बिग बॉस नहीं है। यह बहुत ही पहले लिया गया निर्णय था और इसका 'बिग बॉस' से कोई लेना-देना नहीं है। लेकिन, मैं 'बिग बॉस' नहीं कर रही हूं। मुझे नहीं लगता कि यह मेरे लिए है। मुझे नहीं लगता कि मैं उसके लिए सक्षम हूं।''
तमाम अफवाहों के बीच हाल ही में सौम्या ने शो छोड़ने का कारण खुद जाहिर किया था। टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में सौम्या टंडन ने कहा, 'हां मैंने अपना कॉन्ट्रैक्ट नहीं बढ़वाने का फैसला लिया है। 21 अगस्त 2020 मेरी शूटिंग का आखिरी दिन होगा। मैं शो छोड़ रही या नहीं, आखिरकार अब लोग बातें बनाना बंद कर देंगे।
कोरोना काल में जहां कई एक्ट्रेस अपनी नौकरी से हाथ धो रहे हैं। ऐसे में एक जाने-माने शो को अलविदा कहने के सवाल पर सौम्या ने कहा, 'मुझे लगता है कि नौकरी करना और रेगुलर इनकम अब मेरे लिए एक्साइटिंग नहीं रहा।' सौम्या ने कहा कि उन्हें लगता कि अब एक कलाकार और एंटरटेनर के तौर पर ग्रोथ दिलाने वाले प्रोजेक्ट पर काम करना चाहिए। सौम्या ने कहा कि 'भाबी जी घर पर हैं' शो ने उनकी ग्रोथ में बहुत योगदान दिया है। उनकी एक यादगार जर्नी रही है। लेकिन अब वह आने वाले पांच सालों में खुद को उसी रोल में नहीं देखना चाहती हैं।

 

 

धर्म संसार / शौर्यपथ / श्रीकृष्‍ण और बलराम को गुप्तचर आकर बताता है संभरासुर और उसका पुत्र मयासुर दोनों की सेना द्वारिका पर आक्रमण के लिए निकल चुकी है। यह सुनकर बलराम जी कहते हैं कि उससे पहले में उन दोनों को नष्ट करके हटा दूंगा। यह सुनकर श्रीकृष्‍ण कहते हैं- नहीं दाऊ भैया, यदि वह युद्ध करना चाहते हैं तो हम अवश्य युद्ध करेंगे परंतु पहला वार हमारा नहीं होगा
दैत्यराज संभरासुर और उसका पुत्र तीनों लोकों पर आधिपत्य की इच्छा से सबसे पहले द्वारिका पर आक्रमण कर देते हैं। दोनों ही मायावी युद्ध में कुशल होते हैं। बलराम और श्रीकृष्‍ण उन दोनों से भयंकर युद्ध लड़ते हैं। दोनों ही यादव सेना में हड़कंप मचा देते हैं तब श्रीकृष्ण कहते हैं कि इन दोनों से नीति की अपेक्षा नहीं की जा सकती। अनीति से राज्य करना और अनीति से युद्ध करना यही इन मायावी पिता और पुत्र की नीति है।
संभरासुकर कहता है अब मुझे कोई नहीं रोक सकता ग्वाले। फिर मायासुर कहता है- इसलिए हे कृष्ण! तुम हमारी शरण में आ जाओ, हम तुम्हें क्षमा देंगे। बलरामजी मायासुर को कई तरह से मारने का प्रयास करते हैं परंतु वह अपनी माया से सभी को हैरान कर देता है। श्रीकृष्ण संभरासुर से लड़ते हैं तो वह भी अपनी माया के जाल में श्रीकृष्‍ण को उलझा देता है। तब मायासुर कहता है- कृष्ण अपने दाऊ भैया को समझाओ की असुर सम्राट संभरासुर की शरण में आने मैं ही उसकी भलाई है। यह सुनकर बलरामजी कहते हैं- संभरासुर अपने इस मायावी पुत्र के साथ तुम भी अपनी नगरी लौट जाओ वर्ना तुम भी मेरे क्रोध की आग में जल जाओगे।

फिर चारों में भयंकर मायावी युद्ध होता है कभी श्रीकृष्ण का तो कभी संभरासुर का पलड़ा भारी रहती है। एक समय ऐसा आता है कि संभरासुर के सारे अस्त्र असफल हो जाते हैं तब संभरासुर एक भयंकर अस्त्र का आह्‍वान करता है। यह देखकर श्रीकृष्ण बलराम की ओर देखने लगते हैं बलराम भी श्रीकृष्ण की ओर देखकर फिर संभरासुर की ओर दोनों देखते हैं। संभरासुर का पुत्र मायासुर यह देखकर प्रसन्न होता है।

फिर वह उस अस्त्र को श्रीकृष्ण की ओर छोड़ देता है। वह अस्त्र सीधा श्रीकृष्ण के हृदय में जाकर लगता है और श्रीकृष्ण दर्द से कराहने लगते हैं। यह देखकर बलरामजी चीखते हैं- कन्हैया। दोनों असुर जोर-जोर से हंसने लगते हैं। श्रीकृष्ण कराहते हुए रथ में गिरकर मर जाते हैं। बलरामजी अपने रथ से उतरकर श्रीकृष्ण के रथ पर जाते हैं और उन्हें जगाने का प्रयास करते हैं। बलराम कहते हैं ये कैसे हुआ कन्हैया? तुम तो संसार में सबसे अधिक शक्तिशाली हो भगवान हो, तुमको कैसे इस मायावी राक्षस के आगे मृत्यु आ गई? अब मैं द्वारिका को क्या मुंह दिखाऊंगा? कैसे उन्हें समझाऊंगा? कन्हैया जिस संसार में तुम नहीं, उस संसार में मेरा मर जाना ही बेहतर है। अब मैं भी एक पल भी जीना नहीं चाहता।
ऐसा कहकर बलरामजी अपनी तलवार निकालकर अपनी गर्दन काटने ही वाले रहते हैं कि तभी श्रीकृष्ण उनका हाथ पकड़कर उन्हें रोककर कहते हैं- दाऊ भैया रुको। यह देखकर बलरामजी आश्चर्य करते हैं कि ये कैसी माया! श्रीकृष्ण तो रथ में पड़े हैं और ये दूसरे श्रीकृष्ण उन्हें रोक रहे हैं। दाऊ भैया कहते हैं- कन्हैया...ऐसा कहकर वो दोनों कृष्‍ण को देखकर हैरान रह जाते हैं तब वे श्रीकृष्ण को हाथ लगाकर कहते हैं- कन्हैया तुम जीवित हो? यह सुनकर श्रीकृष्ण कहते हैं- हां दाऊ भैया, ऐसे मायावी असुर के हाथ से मरने के लिए हमने इस पृथ्वीलोक पर जनम नहीं लिया है। यह सुनकर बलरामजी अतिप्रसन्न होकर कृष्‍ण को गले लगा लेते हैं। अरे कन्हैया तुम्हें जीवित देखकर मैं कितना खुश हूं ये तुम नहीं समझ सकते। फिर बलरामजी रथ में मृत पड़े कृष्ण को देखकर कहते हैं- परंतु कन्हैया ये कौन है?
इस पर श्रीकृष्ण कहते हैं- वो! वो मायावी संभरासुर की माया है। अरे, आपको भ्रम में डालने के लिए संभरासुर ने ये माया रचाई थी और आप उसके मायाजाल में फंस गए दाऊ भैया। फिर श्रीकृष्‍ण कहते हैं- ये देखिये और वह मृत श्रीकृष्‍ण गायब हो जाते हैं। फिर श्रीकृष्ण कहते हैं- अब आप जान गए संभरासुर की नीति। मृत्युलोक में माता, पिता, भ्राता, पुत्र, कन्या, पौत्र इस तरह के अटूट नाते बन जाते हैं। उसी का लाभ उठाने का प्रयास ये मायावी संभरासुर करता है। अपनी माया से अपने शत्रु को शोकाकुल कर देता है। फिर ऐसे शत्रु पर उसे विजय प्राप्त करने में किसी भी तरह की कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ता है। दाऊ भैया आप रणभूमि पर हैं। यदि मुझे सचमुच ही मृत्यु आ जाती तो भी आपको शस्त्र नीचे नहीं रखना चाहिए।

फिर बलरामजी कहते हैं- मुझसे भूल हो गई कन्हैया। परंतु अब में इन मायावी पिता और पुत्र को ऐसा दंड दूंगा कि ये द्वारिका की ओर आंख उठाने का साहस भी नहीं करेंगे। ऐसा कहकर बलरामजी अपने रथ पर चले जाते हैं। दोनों असुर जोर-जोर से उनकी हंसी उड़ाते हैं। फिर बलराम क्रोधित होकर अपनी गदा फेंकते हैं जो आसमान में जाकर दो रूप लेकर दोनों असुरों के रथ को तोड़ देती हैं। फिर बलरामजी अपने हल को विशालकाय बनाते हैं और उससे असुरों की सेना का संहार करने लगते हैं। यह देखकर संभरासुर घबरा जाता है और अपने पुत्र से कहता है- मायासुर! बलराम तो साक्षात मृत्यु दाता नजर आने लगा है। अब हमें निकल चलना चाहिए। यह सुनकर मायासुर कहता है- नहीं पिताश्री! मैं तो इस युद्ध में विजय प्राप्त करके ही लौटूंगा। फिर मायासुर शिवजी का आह्‍वान करता है तब उसके पास एक दिव्य धनुष आ जाता है जिसमें बाण के रूप में त्रिशूल होता है।
बलराम और श्रीकृष्ण यह देखकर अचंभित हो जाते हैं। फिर मायासुर कहता है- पिताश्री ये अस्त्र मुझे महादेव शंकर दे दिया था। ये कभी विफल नहीं होगा। बलराम को इस अस्त्र के कारण निश्चत ही मृत्यु आएगी। यह सुनकर श्रीकृष्ण बलराम की ओर देखने लगते हैं। फिर वे आंखें बंद करके भगवान शिव से कहते हैं- हे जगत के पालनहार कैलाशपति निलकंठ महादेव शंकर कृपाकर आप मुझे दर्शन दीजिये।

फिर भगगवान शंकर कहते हैं- हे वासुदेव आंखें खोलिये। कहिये आप हमसे क्या चाहते हैं? भगवान श्रीकृष्‍ण आंखें खोलते हैं तो उन्हें शिवजी दिखाई देते हैं तब वे उन्हें प्रणाम करके कहते हैं- हे महादेव! संभरासुर का पुत्र मायासुर आपका दिया हुआ अस्त्र दाऊ भैया पर छोड़ने वाला है जिसे केवल आप ही विफल कर सकते हैं। आप ही दाऊ भैया की रक्षा कर सकते हैं। यह सुनकर भगवान शंकर कहते हैं- नहीं देवकीनंदन! हमारा दिया हुआ अस्त्र कभी विफल नहीं हो सकता। परंतु हमारे अस्त्र के प्रभाव से बलराम को मृत्यु नहीं आएगी। हां, उन्हें मूर्च्छा अवश्‍य आएगी। यह सुनकर श्रीकृष्‍ण कहते हैं- हे महादेव आपकी कृपा और आशीर्वाद जिस पर हो उसे मृत्यु कैसे आ सकती है। ऐसा कहकर श्रीकृष्ण उन्हें प्रणाम करते हैं और महादेव अदृश्य हो जाते हैं।

उधर, मयासुर धनुष पर लगे त्रिशूल से कहता है- जाओ और अपना लक्ष्य साधो। वह त्रिशूल धनुष से निकलकर सीधा बलरामजी के हृदय में जाकर लगता है और बलरामजी कन्हैया कहते हुए मूर्च्छित हो जाते हैं। यह देखकर मायासुर ‍चीखकर कहता है- हे ग्वाले ये मेरी माया नहीं है, ये मेरा पराक्रम है। अपने बड़े भाई की मृत्यु से कुछ बोध लो और हमारी शरण में आ जाओ। हम तुम्हें अभय देंगे। नहीं तो तुम भी इसी प्रकार मृत्यु के आधीन हो जाओगे।

यह सुनकर श्रीकृष्ण अपनी अंगुली ऊपर करते हैं तो तुरंत ही उनके हाथ में सुदर्शन चक्र घर्राने लगता है। यह देखकर संभरासुर और मायासुर घबरा जाते हैं। तब श्रीकृष्ण सुदर्शन चक्र को मायासुर की ओर छोड़ देते हैं। तक्षण ही मायासुर की गर्दन से सिर अलग हो जाता है यह देखकर संभरासुर चीखता है- मायासुर। मायासुर धरती पर गिर पड़ता है और सुदर्शन चक्र पुन: लौटकर श्रीकृष्ण की अंगुली पर विराजमान होकर गायब हो जाता है।

उधर, संभरासुर चीखना हुआ अपने पुत्र के पास जाता है तो इधर श्रीकृष्ण बलराम के पास। फिर श्रीकृष्ण अपने दाऊ भैया को मूर्च्छा से जागते हैं। जागकर बलरामजी कहते हैं- कन्हैया क्या मैं मूर्च्छित हो गया था? तब श्रीकृष्ण कहते हैं- हां दाऊ भैया परंतु अब कोई चिंता करने की आवश्‍यकता नहीं। संभरासुर परास्त हो गया है और मायासुर का मैंने वध कर दिया है। यह सुनकर बलरामजी आश्चर्य करने लगते हैं।

उधर, संभरासुर अपने पुत्र के शव को अपने नगर ले जाता है और वहां मायासुर की माता अपने पुत्र के शव के पास विलाप करती है और अपने पति को कहती है कि धिक्कार है आप पर और आपके बल पर। आपके सामने आपके पुत्र का वध होता है और आप उसकी रक्षा भी नहीं कर सके, कैसे पिता हैं आप? जिस कृष्ण ने मेरे पुत्र का वध किया है आप उसे क्या दंड देंगे? जब आप उसे दंड देंगे तभी मेरा शोकग्रस्त्र मन शांत होगा। यह सुनकर संभरासुर कहता है कि मायावती ये संभरासुर प्रतिज्ञा करता है कि जिस प्रकार कृष्ण ने मेरे पुत्र को मुझसे छीना है उसी प्रकार मैं भी उसके पुत्र को उससे छीन लूंगा। पुत्र के वियोग में जिस तरह मेरी पत्‍नी शोक मना रही है उसी तरह कृष्ण की पत्नी भी शोकाकुल हो जाएगी। ये मेरी प्रतिज्ञा है।

उधर, नारादमुनि कामदेव से कहते हैं- कामदेव देख लिया ना। आपके जन्म लेने के पूर्व ही आपके शत्रु ने जनम ले लिया है जो अब आपकी मृत्यु की तैयारियां कर रहा हैं। यह सुनकर रति कहती हैं कि मुनिवर कम से कम ऐसी घड़ी पर तो अशुभ बातें न किया करें। लाखों वर्षों से मैं इसी शुभ घड़ी की प्रतीक्षा कर रही थी वो शुभ घड़ी जब प्रद्युम्न का जन्म होगा और मेरे सुहाग को शरीर मिल जाएगा। फिर कामदेवजी कहते हैं कि परंतु प्रद्युम्न के रूप में मेरा जन्म कब और कैसे होगा होगा? तब नारदमुनि कहते हैं कि श्रीकृष्‍ण की आज्ञा से ही रुक्मिणी के गर्भ से होगा। इसके लिए आपको उनकी आज्ञा लेने के लिए धरती पर जाना होगा।...
फिर कामदेव और रति श्रीकृष्‍ण के पास जाते हैं और वे देखते हैं कि भगवन तो ध्यानस्थ बैठे हैं और रुक्मिणी माता सो रही है। कामदेव रति से कहते हैं कि तो क्या हुआ मैं उन्हें अभी जगा देता हूं। यह सुनकर रति कहती है- नहीं नहीं, फिर वही भूल करना चाहते हैं क्या, जिस भूल ने आपसे आपका शरीर छीन लिया था। याद रखिये आप यहां अपना शरीर पाने आए हैं खोने नहीं। तब कामदेवजी कहते हैं कि परंतु मेरे पास अब शरीर तो रहा नहीं तो अब मैं क्या खोऊंगा? तब रति कहती हैं कि शरीर न सही पर शरीर की यह निशानी तो है जिसे अब मैं नहीं खोना चाहती।

तभी श्रीकृष्ण की आंखें खुल जाती है। वह उन दोनों को देखकर मुस्कुराते हैं। यह देखकर वे दोनों श्रीकृष्‍ण को प्रणाम करते हैं। तब श्रीकृष्‍ण कहते हैं- सुखीभव:। यह सुनकर रति कहती है कि भगवन! आपने हमें सुखी होने का आशीर्वाद दिया है ना। इस पर श्रीकृष्ण कहते हैं- हां देवी मेरा कहा सत्य है। इस पर रति कहती हैं- तो बताइये जब मैं मेरे पतिदेव के दर्शन नहीं कर सकती। उनका मेरा मिलन लाखों वर्षों से अधूरा है। ऐसे में मैं और मेरे पतिदेव कैसे सुखी हो सकते हैं?

तब श्रीकृष्‍ण कहते हैं कि कामदेव तुम भाग्यवान हो जो तुम्हें देवी रति जैसी पत्नि मिली है। पति से मिलन की आस में इसने लाखों वर्षों तक किसी जोगन की भांति तपस्या की है। युग-युगों तक प्रतीक्षा की है और अब ये प्रतीक्षा समाप्त होने जा रही है। यह सुनकर कामदेवजी कहते हैं सच भगवन! मुझे नया शरीर मिल जाएगा? तब श्रीकृष्ण कहते हैं- हां कामदेव जिस घटना का समय यहां तक की पल भी लाखों वर्ष पूर्व शिवजी ने स्वयं निश्चय कर दिया था। उस घटना के घटने का वो पल अब आ गया है।

यह सुनकर रति कहती हैं- अर्थात आप मेरे पतिदेव को अपने पुत्र रूप में स्वीकार करते हैं? तब श्रीकृष्‍ण कहते हैं- हां, कामदेव आज से तुम मेरे पुत्र हो। यह सुनकर रति प्रसन्न हो जाती है। कामदेव कहते हैं- धन्यवाद भगवन। रति कहती हैं- भगवन आपके इस उपकार के लिए मैं सदा आपकी आभारी रहूंगी। यह सुनकर श्रीकृष्‍ण कहते हैं कि अपने पुत्र या कुलवधू के लिए कुछ करना उपकार नहीं होता देवी रति। जब कामदेव हमारा पुत्र बनने जा रहा है तो इस नाते तुम हमारी बहू ही तो बनोगी ना? यह सुनकर रति अति प्रसन्न होकर कहती है- आप धन्य हैं प्रभु! आप धन्य हैं।

फिर श्रीकृष्‍ण कहते हैं- कामदेव मेरा पुत्र बनने के लिए तुम्हें अपनी माता लक्ष्मी के शरीर का एक अंग बनकर जन्म लेना है। इसलिए मैं तुम्हें आज्ञा देता हूं कि तुम अपनी होने वाली माता के गर्भ में समा जाओ। यह सुनकर कामदेव कहते हैं- धन्यवाद प्रभु।...फिर कामदेव पास ही की पलंग पर सोई माता रुक्मिणी के गर्भ में प्रवेश कर जाते हैं। यह देखकर देवी रति अति प्रसन्न हो जाती है।
फिर देवी रुक्मिणी की गोद भराई की रस्म बताई जाती है। सत्यभामा, जामवंती आदि सभी उनकी आरती उतारती हैं। अर्जुन, बलराम और श्रीकृष्‍ण आदि सभी सिंहासन पर बैठे हुए ये कार्यक्रम देख कर प्रसन्न होते रहते हैं।

आगे श्रीकृष्‍ण और रुक्मिणी के पुत्र का जन्म होता है। सत्यभामा और जामवंती भी उसको दुलारकर दाई मां को भेंट देती हैं। फिर उस बालक को सभी बारी-बारी अपनी गोद में लेते हैं। फिर बलराम और बाद में श्रीकृष्‍ण उसे गोद में लेकर दुलारते हैं।... उधर रति भी ये समाचार देवर्षि नारद से सुनकर प्रसन्न हो जाती है।

फिर नारदजी संभरासुर और उनकी पत्नी मायावती को भी ये समाचार सुनाते हैं कि श्रीकृष्ण के यहां पुत्र का जन्म हुआ है और वे आनंद उत्सव मना रहे हैं। यह सुनकर संभरासुर कहता है- नि:संदेह मुनिवर शुभ समाचार है ये, इसी दिन की तो प्रतीक्षा थी। फिर नारदजी वहां से चले जाते हैं।

फिर संभरासुर कहता है- इसी दिन की प्रतीक्षा में तो मेरी तलवार को जंग लग गया था परंतु अब मैं इस तलवार को धार लगाऊंगा। परंतु जल छीड़कर नहीं, कृष्‍ण पुत्र का रक्त छीड़कर। आज रात में ही कृष्‍ण पुत्र का वध करूंगा। ये बालवध आज रात ही हो जाना चाहिए। तब उसकी पत्नी मायावती कहती है कि नहीं नाथ, इतनी जल्दी ना करें। इसलिए कि जैसे-जैसे समय बितेगा कृष्‍ण और रुक्मिणी की अपने पुत्र के प्रति स्नेह भावना बढ़ेगी तो उसके वियोग में उनका शोक भी उतना ही कठिन होगा। इसलिए कुछ दिन और धैर्य रखिये नाथ। कृष्‍ण और रुक्मिणी को उनके पुत्र के भविष्य के सपने तो सजा लेने दो। शत्रु पुत्र का नाम तो रख लेने दो उन्हें। जय श्रीकृष्‍णा।

शौर्यपथ राजनीति / दुर्ग कांग्रेस की पहचान और केन्द्रीयकरण सालो से वोरा निवास से ही शुरू होती थी और वोरा निवास पर ही खत्म होती थी . कांग्रेस संगठन की बात करे तो दुर्ग में कांग्रेस से सम्बंधित हर फैसला पहले मोतीलाल वोरा और बाद में अरुण वोरा के फैसले पर निर्भर करता था किन्तु कल २३ अगस्त को मुख्यमंत्री बघेल के जन्मदिन पर दुर्ग कांग्रेस दो भागो में नजर आयी . दुर्ग की कांग्रेस की राजनीती में कल का दिन संभवतः ऐसा दिन था जिसमे अनेक स्थानों पर दुर्ग विधायक की अनुपस्थिति चर्चा का विषय रही चाहे वो संगठन द्वारा आयोजित कार्यक्रम की बात हो या मुख्यमंत्री को दिए जाने वाले बधाई सन्देश की बात हो कई स्थानों पर दुर्ग विधायक की अनदेखी शहर में चर्चा का विषय रही .
मुख्यमंत्री बघेल के जन्मदिन को यादगार बनाने के लिए दुर्ग कांग्रेस ने इस बार गौठान से लेकर अस्पताल तक जगह जगह विभन्न आयोजन किये किन्तु किसी भी आयोजन में कांग्रेस के दुर्ग विधायक की उपस्थिति नहीं थी जो राजनितिक हलको में चर्चा का विषय रही . यहाँ तक की दुर्ग कांग्रेस के अध्यक्ष भी इन कार्यक्रमों से नदारद रहे .
बता दे कि मुख्यमंत्री बघेल की सबसे महत्तवपूर्ण योजना नरवा , गरवा , घुरवा , बाड़ी है इस योजना के लिए प्रदेश का हर कांग्रेसी अपने अपने स्तर से प्रयास कर रहा है . कल का दिन इसी योजना को मजबूत करने के लिए जिले सहित प्रदेश के हर मुख्यालय में गौठान में मुख्यमंत्री बघेल का जन्मदिन मनाया गया . दुर्ग में यह कार्यक्रम पुलगांव स्थित गौठान में आयोजित हुआ आयोजन सुबह १० से दोपहर १२.३० बजे तक चला . इस कार्यक्रम में दुर्ग शहर के सभी कांग्रेसी नेता पहुंचे जिसमे से राजेन्द्र साहू , लक्ष्मण चंद्राकर , पूर्व विधायक प्रतिमा चंद्राकर , पूर्व विधायक प्रदीप चौबे , पूर्व महापौर आर.एन. वर्मा , छाया महापौर नीलू ठाकुर , युवा कांग्रेस से पूर्व जिला पंचायत सदस्य जयंत देशमुख , एन एस यु आई के सोनू साहू , निगम के सभापति राजेश यादव सहित दो तीन पार्षदों को छोड़ सभी पार्षद सहित कई कांग्रेसी पहुंचे किन्तु दुर्ग संगठन के मुखिया अध्यक्ष गया पटेल नदारद रहे वही दुर्ग विधायक अरुण वोरा भी नहीं दिखे जबकि गौठान से कुछ दुरी पर वृद्धा आश्रम में इनकी उपस्थिति की बात सुनी जा रही थी . वही पुलगांव चौक पर एनएसयुआई द्वारा निशुल्क मास्क व सेनेटाइसर के वितारह व मुख्यमंत्री के जन्मदिन के अवसर पर मिठाई वितरण के कार्यक्रम में भी विधायक वोरा और अध्यक्ष गया पटेल की अनुपस्थिति चर्चा का विषय रही तो युवा कांग्रेस के द्वारा ३६५ यूनिट रक्तदान का आयोजन युवा कांग्रेस के तत्वाधान में रखा गया था . इस आयोजन में भी दुर्ग के सभी कांग्रेसी युवाओ का हौसलाअफजाई करने उपस्थित हुए किन्तु इस कार्यक्रम में भी दुर्ग विधायक और दुर्ग कांग्रेस के अध्यक्ष की अनुपस्थित चर्चा का विषय रही .
पोस्टर वार की जंग भी मुख्यमंत्री बघेल के जन्मदिन पर असर कर गयी ऐसे कई पोस्टर शहर में लगे जिसमे दुर्ग विधायक और अध्यक्ष के फोटो नदारद थे जो कि शायद दुर्ग के कांग्रेस राजनीती के इतिहास में पहली बार हुआ .जबकि इन पोस्टरों में भिलाई विधायक , गुन्डरदेहि विधायक सही निगम सभापति को जगह मिली किन्तु दुर्ग विधायक वोरा , महापौर बाकलीवाल को जगह नहीं दी गयी .
शहर में यही चर्चा दिन भर चलती रही की क्या दुर्ग के विधायक इन आयोजन से स्वयं को दूर रखे हुए थे या फिर उन्हें इसके लिए आमंत्रित नहीं किया गया था और शहर कांग्रेस के अध्यक्ष की अनुपस्थिति में हुए इन आयोजनों का सूत्रधार कौन है या फिर शहर कांग्रेस अध्यक्ष सिर्फ एक रबर स्टाम्प की तरह है . कारण जो भी रहा हो किन्तु मुख्यमंत्री के जन्मदिन पर दुर्ग कांग्रेस में एक दुसरे केंद्र का भी आगाज हो ही गया . कांग्रेसी चाहे कितना भी बात को सँभालने की कोशिश करे और तरह तरह के बातो से मामले को भूलने की कोशिश करे किन्तु एक तरफ विधायक गुट और दूसरी तरफ अन्य कांग्रेसी नेता है इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता .

दुर्ग / शौर्यपथ / महापौर धीरज बाकलीवाल द्वारा माननीय मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के जन्म दिवस के अवसर पर यह निर्णय लिया कि दुर्ग निगम का दूसरा गौठान उरला वार्ड में जल्द बनाया जाएगा इस संबंध में उन्होंने गौठान निर्माण के लिए स्थल का चयन और अन्य व्यवस्थाओं के लिए निगम अधिकारियों को प्रस्ताव प्रस्तुत करने निर्देश दिए हैं ।
उल्लेखनीय है कि नगर पालिक निगम दुर्ग द्वारा पुलगांव वार्ड में गौठान का निर्माण किया गया है । जहां गोधन न्याय योजना के तहत गोबर खरीदी करने के अलावा गौठान के गायों की सेवा एवं चिकित्सा स्व सहायता समूह के माध्यम से किया जा रहा है । इस कड़ी में महापौर ने कहा माननीय मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशा के अनुरूप गोधन न्याय योजना क्रियान्वयन नगर पालिक निगम दुर्ग द्वारा अक्षर: किया जाएगा । इसकी शुरुआत पुलगांव वार्ड के गौठान से किया गया है ।
इस दिशा में उरला वार्ड में जल्द ही शहर का दूसरा गौठान बनाकर गोधन न्याय योजना का क्रियान्वयन कर पशु पालको को समृद्ध बनायेगें और दूसरी तरफ शहर को मवेशियों से मुक्त रखने का प्रयास करेंगे । उन्होंने बताया महापौर परिषद के द्वारा शहर में 4 स्थानों पर उनका गौठान बनाने का निर्णय लिया गया है ।

बेमेतरा (नवागढ़)/ शौर्यपथ / रविवार को भारतीय जनता पार्टी छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष विष्णु देव साय एवं प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय ने तीन जिलों बेमेतरा, बालोद एवं बलोदा बाजार के नवनियुक्त कार्यकारिणी पदाधिकारियों एवं प्रदेश पदाधिकारियों की ऑनलाइन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक ली। जिसमें उन्होंने आगामी कार्यों से जुड़े 11 महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की। बैठक में बेमेतरा से जिला अध्यक्ष ओम प्रकाश जोशी, पूर्व जिला अध्यक्ष राजेंद्र शर्मा एवं जिला महामंत्री विकास धर दीवान सहित कार्यकारिणी के सभी पदाधिकारी ऑनलाइन जुड़े।
बैठक में प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने जिले के सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों को बधाई देते हुए आगामी 2023 के विधानसभा की तैयारियों में जुटने के दिशा निर्देश दिए ।उन्होंने कहा कि अब प्रदेश से लेकर जिला एवं मंडल में टीम तैयार हो चुकी है,लेकिन अब जरूरत है शक्ति केंद्र एवं बूथ को मजबूत करने की । जनता आज कॉन्ग्रेस की सरकार से पूरी तरह निराश है एवं उन्हें नकार रही है,आवश्यकता है कि उनकी नाकामियों को हम जनता तक लेकर जाएं। विपक्ष की भूमिका निभाते हुए हमेशा जनता की हक की लड़ाई लड़े।
प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय ने कहा कि कोरोना काल में भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए राहत कार्यों को लेकर प्रत्येक जिला स्तर में ई बुक लगभग तैयार हो चुका है। अब हमें मंडल स्तर पर भी ई बुक तैयार करना है। उन्होंने कहा कि इसके साथ साथ हमें भाजपा के पुराने संस्थापक सदस्यों की भी सूची तैयार करनी है एवं उन्हें साथ जोड़ते हुए सम्मान भी देना है। उन्होंने कहा कि भाजपा की नीव संगठन है इसलिए हमें पद की लालसा त्याग कर मिलजुल कर आगामी विधानसभा चुनाव के लिए जुट जाना है।
बैठक का संचालन पूर्व विधायक नवीन मार्कंडेय ने किया एवं आभार प्रदर्शन बेमेतरा जिला अध्यक्ष ओमप्रकाश जोशी तथा बलोदा बाजार जिला अध्यक्ष सनम जांगड़े ने किया। इस दौरान पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल,पूर्व संसदीय सचिव लाभचंद बाफना, बेमेतरा जिला महामंत्री नरेंद्र वर्मा जिला उपाध्यक्ष फिर तू राम साहू अजय तिवारी राजा पांडे लोकनाथ पटेल,दयावन्त धर बांन्धे,संध्या परगनिहा,रघुनंदन तिवारी,सतीश कसार,टार्जन साहू,सन्तोषी साहू,सुरेंद्र ठाकुर,पुष्पा साहू,रीना साहू,विजय सुखवानी,भुनेश्वरी वर्मा,नन्दकुमारी कांठले,सुरेश सिंघानिया आदि शामिल हुए।

भिलाई नगर / शौर्यपथ / सेक्टर 5 स्थित गणेश मंदिर रोड के दोनों किनारे लगभग 1 किलोमीटर तक सौंदर्यीकरण कार्य का लोकार्पण आज प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने किया! उन्होंने ऑनलाइन के माध्यम से ई लोकार्पण किया! लोकार्पण अवसर पर सेक्टर 5 के सौंदर्यीकरण से संबंधित चलचित्र को मुख्यमंत्री जी के समक्ष प्रदर्शित किया गया! इस दौरान महापौर एवं भिलाई नगर विधायक श्री देवेंद्र यादव, अंत्यावसायी सहकारी समिति एवं वित्त विकास निगम की उपाध्यक्ष नीता लोधी, महापौर परिषद के सदस्य एवं लोक कर्म प्रभारी नीरज पाल, आयुक्त ऋतुराज रघुवंशी, उपायुक्त तरुण पाल लहरें उपस्थित रहे!
महापौर यादव ने माननीय मुख्यमंत्री जी को जन्म दिवस की बधाई देते हुए गणेश मंदिर रोड के सौंदर्यीकरण कार्य के बारे में जानकारी प्रदाय की, वही महापौर के नेतृत्व में केक काटकर उपस्थित सभी ने मुख्यमंत्री जी को जन्मदिन की बधाई दी! वार्ड क्रमांक 54 सेंट्रल एवेन्यू रोड से फॉरेस्ट एवेन्यू रोड, गणेश मंदिर जाने वाले सड़कों के दोनों ओर ब्यूटीफिकेशन के साथ ही ऐसे अनेकों कार्य किए गए हैं जो इस रास्ते को अपनी एक नई पहचान देगा! 7रू चौक के एंट्री पर ही एक अद्भुत नजारा दिखाई दे रहा है इस चौक के समीप लगे हुए उद्यान के पास वर्टिकल गार्डन तैयार किया गया है! जैसे ही गणेश मंदिर रोड में प्रवेश करेंगे वैसे ही दोनों ओर मनमोहक लैंडस्केप का नजारा मिलेगा! यह सौंदर्यीकरण भिलाई को अपनी एक नई पहचान दे रहा है, खेलकूद ग्राउंड से लेकर यहां पर अनेकों कार्य किए गए हैं! इस सड़क के दोनों तरफ महापौर निधि के 43 लाख 94 हजार की लागत से विभिन्न कार्य किए गए हैं! यहां से गुजरने वाले लोगों को एक अलग ही नजारा देखने को मिलेगा!
एंट्री पर ही वर्टिकल गार्डन अपनी ओर कर रहा है आकर्षित शहर के व्यस्तम प्रमुख चौक 7रू के पास स्थित उद्यान के सामने आई लव भिलाई लिखा हुआ वर्टिकल गार्डन तैयार किया गया है, यह गणेश मंदिर जाने वाले रोड के प्रवेश पर ही बनाया गया है, इससे होकर गणेश मंदिर रोड की ओर प्रवेश होता है! यहां से गुजरने वाले लोगों को यह अपनी ओर आकर्षित कर रहा है!
सड़क के दोनों किनारे लैंडस्कैपिंग का खूबसूरत नजारा वर्टिकल गार्डन से आगे बढ़ते ही गणेश मंदिर रोड की ओर प्रवेश होते ही दोनों तरफ सेंट्रल एवेन्यू रोड से फॉरेस्ट एवेन्यू रोड तक लैंडस्कैपिंग का कार्य किया गया है, अलग-अलग रंग के पौधों से सड़क किनारे को सुसज्जित किया गया है!
हरियाली एवं सौंदर्यीकरण के लिए शोभायमान पौधे रोपित किए गए है! पेवर ब्लॉक भी लगाया गया है!
सीसीटीवी कैमरा से लैस है सड़कें सड़कों के दोनों किनारे सीसीटीवी कैमरा लगाए गए हैं, विभिन्न आयोजनों के लिए साउंड सिस्टम लगाया गया है, दिन ही नहीं अपितु रात्रि में भी आकर्षक बनाने के लिए एलइडी रोप लाइट से पूरे रोड को सजाया गया है, सड़क को आकर्षक बनाने के लिए फाउंटेन स्थापित किया गया है!
क्रिकेट प्रैक्टिस ग्राउंड सहित अन्य खेल मैदान तैयार इसी सड़क पर खिलाडिय़ों के लिए क्रिकेट की प्रैक्टिस करने बॉलिंग मशीन युक्त क्रिकेट मैदान तैयार किया गया जहां बाल, मशीन द्वारा फेंका जाएगा, यहां पर आसानी से क्रिकेट खिलाड़ी अपना अभ्यास कर सकते हैं! इसके अतिरिक्त दो बैडमिंटन कोर्ट जोकि एस्ट्रोटर्फ ग्रास युक्त है तैयार किया जा चुका है, पिकल बाल ग्राउंड भी तैयार किया गया है! लोकार्पण के दौरान महापौर परिषद के सदस्य लक्ष्मीपति राजू, दिवाकर भारती, जोहन सिन्हा, दुर्गा प्रसाद साहू, जी राजू, एल्डरमैन शमशेर बहादुर सिंह, नरसिंह नाथ, जिला प्रशासन से वीरेंद्र बहादुर पंचभाई, निगम के जोन 5 के जोन आयुक्त महेंद्र पाठक, सहायक अभियंता कुलदीप गुप्ता सहित अन्य उपस्थित रहे!

दुर्ग / शौर्यपथ /कोरोना से जंग में पूरा देश एक साथ खड़ा है और हर कोई दुसरो की मदद के लिए सदैव तत्पर रहा इसी भावना के साथ भिलाई के साहू समाज द्वारा एक पहल की गयी . साहू मित्र सभा भिलाई नगर के पदाधिकारियों ने कोरोना को हराने में मदद करने के लिए 61000 रूपये का चेक महापौर एवं भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव तथा महापौर परिषद के सदस्य एवं लोक कर्म प्रभारी नीरज पाल को सौंपा इस दौरान आयुक्त ऋतुराज रघुवंशी मौजूद रहे!
साहू मित्र सभा भिलाई नगर के अध्यक्ष द्वारिका साहू ने बताया कि कोरोना से निपटने के लिए साहू समाज ने पहल करते हुए जरूरतमंद लोगों कि मदद के लिए तथा प्रदेश में कोरोनावायरस के रोकथाम के और भी बेहतर उपाय किए जा सकें इसलिए मुख्यमंत्री राहत कोष में राशि देकर अपना योगदान दिया है! महापौर देवेंद्र यादव ने कहा कि ऐसे ही मदद और सोच से कोरोना को हराने में सफलता मिलेगी! कोरोनावायरस से निपटने में शासन-प्रशासन मुस्तैदी से कार्य कर रहा है। कोरोना वायरस की जंग हम सब को मिलकर लड़ना हाेगा। इसके लिए हम सब को अपने घर में ही रहना होगा, बहुत अत्यावश्यक कार्य के लिए ही बाहर निकले, मास्क एवं सोशल डिस्टेंस का पालन बेहद आवश्यक है। कोविड-19 के लिए दिए गए शासन-प्रशासन के निर्देशों का पालन कर हम कोरोना से जंग जीत सकते हैं! कोरोना काल में लॉकडाउन के दौरान कई मददगार लोगों ने मुख्यमंत्री राहत कोष में सहायता प्रदान करने का काम किया है, इन सभी लोगों का मैं आभार व्यक्त करता हूं।
मुख्यमंत्री राहत कोष में सहायता प्रदान करने के लिए चेक देने के दौरान साहू मित्र सभा, भिलाई नगर के उपाध्यक्ष मुन्ना लाल साहू, मंजूषा साहू, महासचिव अमोल दास साहू, कोषा अध्यक्ष खेद राम साहू, कार्यालय सचिव जीवन लाल साहू, सदस्य बाबूलाल साहू, सेक्टर 5 क्षेत्रीय साहू मित्र सभा के अध्यक्ष मिथिलेश साहू, सचिव हरि राम साहू, महिला प्रकोष्ठ की संयोजिका शांति साहू, प्रभात साहू, शैलबाला साहू एवं मनहरण साहू सहित समाज के अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।

दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग शहर के लिए रहत भरी खबर है . दुर्ग निगम के महापौर बाकलीवाल की कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आयी है . इसी के साथ अब महापौर बाकलीवाल एक बार फिर दुर्ग की जनता के समक्ष होंगे . बता दे कि महापौर ने 11 अगस्त को कोरोना टेस्ट कराया था जिसमें उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। इसके बाद धीरज बाकलीवाल घर पर ही होम आइसोलेशन पर ट्रीटमेंट ले रहे थे। आज उनकी टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आई है।
महापौर धीरज बाकलीवाल ने खबर की पुष्टि करते हुए बताया कि उनके लिए आज दोहरी खुशी का दिन है। यशस्वी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को जन्मदिन की बधाई प्रेषित करते हुए धीरज ने कहा कि नवा छत्तीसगढ़ राज्य गढ़ने की दिशा में मुख्यमंत्री की नीतियों और कार्यक्रमों से प्रदेशवासियों में हर्ष है। बीते डेढ़ साल में मुख्यमंत्री ने अद्भुत प्रशासनिक दक्षता के साथ राज्य को प्रगति के पथ पर आगे बढ़ाया है। यह मुख्यमंत्री के नेतृत्व कौशल का ही कमाल है कि न सिर्फ देश बल्कि पूरी दुनिया में छत्तीसगढ़ की योजनाओं की चर्चा हो रही है।
महापौर ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा है कि कोरोना संक्रमण के बढ़ते केस को देखते हुए किसी भी तरह की लापरवाही न करें। आवश्यक कार्य होने पर ही पूरी सावधानी के साथ घर से बाहर निकलें। बाकलीवाल ने कहा कि वे क्वारंटीन अवधि पूरी होते ही विधायक अरुण वोरा के मार्गदर्शन में दुर्ग शहर की जनता को नगर निगम की अधिकाधिक नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराने और दुर्ग को मेट्रो शहर की तर्ज पर विकसित करने जनसेवा के मिशन में फिर जुटेंगे।
बाकलीवाल ने बताया कि मेडिकल टीम ने आज रैपिड टेस्ट किया जिसमें उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई है। डॉक्टरों की सलाह पर वे 28 अगस्त तक होम क्वारंटीन पर रहेंगे। इसके बाद डॉक्टरों की सलाह लेकर नगर निगम के दायित्वों का निर्वहन करेंगे। धीरज ने अपील करते हुए कहा है कि लोग अपने घरों पर ही रहें और कोरोना संक्रमण से बचने के लिए जरूरी सावधानियां बरतें।

दुर्ग / शौर्यपथ /भारत में प्रत्येक वर्ष 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है . शिक्षक दिवस के अवसर पर भारत सरकार द्वारा सम्पूर्ण देश से चयनित शिक्षको को पुरस्कृत कर उनका सम्मान किया जाता है . प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी ५ सितम्बर को चयनित शिक्षको का भारत सरकार सम्मान करेगी और भारत के प्रथम नागरिक राष्ट्रपति के हांथो ये सम्मान उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षको को मिलेगा इस वर्ष सम्मान प्राप्त शिक्षकों की घोषणा कर दी गयी गई है। जिसमें पूरे देश से 47 शिक्षकों को चयनित किया गया है। जिसमें छत्तीसगढ़ से एकमात्र शिक्षिका सपना सोनी, व्याख्याता (भौतिक शास्त्र) जो कि शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला जेवरा सिरसा में पदस्थ हैं का चयन किया गया है। पूरे देश से विभिन्न राज्यों केन्द्र शासित प्रदेश एवं स्वतंत्र एजेंसियों से 153 शिक्षकों का राष्ट्रीय ज्यूरी द्वारा साक्षात्कार लिया गया। जिसमें से सपना सोनी का चयन किया गया है।
सपना सोनी ने अपनी समर्पित शिक्षण नवीन व आधुनिक शिक्षण विधियों के द्वारा अथक प्रयास से विद्यार्थियों के शिक्षा व जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। जिसमें जनसहयोग से वह 2014 में जिले के शासकीय स्कूलों में पहला स्मार्ट क्लास, वर्ष 2014 से ही आईसीटी के माध्यम से नवीन शिक्षण प्रविधियों द्वारा अध्यापन, हिंदी माध्यम में ई कंटेन्ट विकसित कर विद्यार्थियों के अधिगम को सरल, रुचिकर व प्रभावशाली बनाया, एजुकेशनल वीडियोज के माध्यम से बच्चों की पढ़ाई को आसान बनाना, संस्था में अंतरिक्ष विज्ञान क्लब के स्थापना व क्रियान्वयन द्वारा विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृृष्टिकोण उत्पन्न करना, संस्था में विज्ञान कार्नर के माध्यम से वैज्ञानिक अभिवृत्ति उत्पन्न किया।
विगत 12 वर्षों से संस्था के विद्यार्थीगण इनके उत्कृष्ट मार्गदर्शन में विभिन्न प्रतियोगिता में राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृृत हो रहे हैं आदि प्रमुख उपलब्धियों के आधार पर इनका चयन राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए किया गया है।

दुर्ग / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ में आज कांग्रेसियों द्वारा छत्तीसगढ़ के मुखिया का जन्मदिन जिले में स्थित गौठानो में मनाया गया जहा सभी कांग्रेसियों ने अपनी अपनी सामर्थ्य के अनुसार गौठान की रखरखाव , चारा , शेड निर्माण आदि का सहयोग दिया . दुर्ग जिला मुख्यालय में भी आज कांग्रेस के नेताओ द्वारा मुख्यमंत्री बघेल का जन्म दिन पुलगांव स्थित गोठान में मनाया गया जहा गोधन के लिए चारा की व्यवस्था आदि की गयी . दुर्ग के वरिष्ठ कांग्रेसी सहित काफी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता सुबह से ही पुलगांव स्थित गौठान में पहुँचाने लगे . दुर्ग कांग्रेस के नेता पूर्व विधायक प्रदीप चौबे , लक्ष्मण चंद्राकर , पूर्व विधायक प्रतिमा चंद्राकर , राजेन्द्र साहू , मुकेश चंद्राकर , सभापति राजेश यादव सहित युवा कांग्रेस , महिला कांग्रेस सहित निगम के पार्षद भी उपस्थित रहे .
मिडिया से चर्चा करते हुए कांग्रेस नेता राजेन्द्र साहू ने बताया कि इस बार जिले सहित पुरे प्रदेश में कांग्रेस कार्यकर्ताओ ने मुख्यमंत्री का जन्मदिन को यादगार बनाने के लिए क्षेत्र के गौठान का चयन किया और गौठान में यथाशक्ति सभी ने दान किया . वही एनएसयुआई ने जहाँ २००० रूपये का चेक सहित ८ क्विंटल सुखा चारा दिया तो युवा कांग्रेस द्वारा रक्तदान किया गया . मिडिया से चर्चा के दौरान पूछे गए सवाल जिसमे भाजपा की राष्ट्रिय महासचिव डॉ. सरोज पाण्डेय द्वारा छत्तीसगढ़ में यूपी के किसानो का पोस्टर लगाने की बात पर राजेन्द्र साहू ने कहा कि अगर सरोज पाण्डेय जी ऐसा सोंचती है तो ये दुर्भाग्यपूर्ण है क्योकि किसी भी भाजपा शासित प्रदेश में किसानो को २५ सौ रूपये के समर्थन मूल्य पर चावल का क्रय नहीं किया जा रहा है . क्योकि छत्तीसगढ़ के किसान खुशहाल है ,समृद्ध छत्तीसगढ़ , सुघड़ छत्तीसगढ़ है इसलिए छत्तीसगढ़ के किसानो का फोटो यूपी वाले लगायेंगे .

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