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मेलबॉक्स / शौर्यपथ / ‘चिंता रहित खेलना-खाना, वह फिरना निर्भय स्वच्छंद, कैसे भूला जा सकता है, बचपन का अतुलित आनंद...’ सुभद्रा कुमारी चौहान की इन पंक्तियों में बचपन को बेहद खूबसूरती से पिरोया गया है। मगर आधुनिक युग के बच्चे इन सुखमय पलों का पूरी तरह से कहां आनंद ले पाते हैं। प्रतिस्पद्र्धा के इस दौर में साधन तो अधिक हैं, लेकिन बच्चे रेस के घोडे़ की तरह अंधी दौड़ में शामिल हैं। उनका बचपन कहीं खो सा गया है। शुरुआत से ही उनके दिमाग में यह बात डाल दी जाती है कि उन्हें सबसे अधिक नंबर लाना है। यदि ऐसा नहीं हुआ, तो वे जीवन में सफल नहीं हो पाएंगे। बेशक उन्हें पढ़ने के लिए प्रेरित किया जाए, मगर उनकी क्षमता का आकलन किए बिना उन पर अपनी अपेक्षाओं का बोझ डालना बिल्कुल गलत है। बच्चों को अपनी रुचि के मुताबिक ही विषय और क्षेत्र का चुनाव करने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। यही आज की जरूरत है।
आस्था मुकुल, झारखंड
कब सीखेंगे हम
लॉकडाउन के कारण अर्थव्यवस्था के जाम हो चुके चक्कों को गति देने के लिए औद्योगिक गतिविधियों में रियायतें जारी हैं। इसके कारण एक ओर जहां कोरोना संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ रही है, तो वहीं दूसरी ओर सड़कों पर वाहनों की गति अनियंत्रित होती दिख रही है। तीन महीने से अधिक चले लॉकडाउन और अनलॉक किए जाने के दौरान कई लोगों की आदतें नहीं बदलीं और वे बाजार एवं सार्वजनिक जगहों पर बिना मास्क लगाए व शारीरिक दूरी के नियमों का उल्लंघन करते देखे जा सकते हैं। सड़कों पर घटनाएं भी बढ़ने लगी हैं, जबकि लॉकडाउन के दौरान ऐसे हादसे नाममात्र के होते थे। साफ है कि लॉकडाउन के सबक को हम सबने अब भुला दिया है।
शिवम सिंह, बिंदकी, उत्तर प्रदेश
बीमार होते अस्पताल
देश में एक तरफ जहां कोविड-19 से जंग गंभीर होती जा रही है, तो कुछ अस्पतालों द्वारा मरीजों से बेहिसाब फीस वसूलने की खबरें भी आम होने लगी हैं। अच्छी बात है कि कई सरकारों ने अब इसके खिलाफ कदम उठाने की शुरुआत कर दी है। महाराष्ट्र इस अभियान से जुड़ने वाला नया राज्य है। उसने अपने अस्पतालों को साफ-साफ शब्दों में चेता दिया है कि अगर किसी अस्पताल ने कोविड-19 मरीज की मजबूरी का फायदा उठाया, तो उस पर पांच गुना तक का जुर्माना ठोका जा सकता है। यहां तक कि उसका पंजीयन भी रद्द हो सकता है। उम्मीद की जानी चाहिए कि यह कुछ हद तक अस्पतालों पर लगाम लगाएगा। राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (एनएसएसओ) के ताजा सर्वेक्षण के मुताबिक, सरकारी अस्पतालों में आबादी के लिहाज से सुविधाएं और मानव संसाधन नहीं हैं, इसलिए शहरी इलाकों में 80 प्रतिशत से अधिक लोग निजी अस्पतालों पर भरोसा करने लगे हैं। आबादी को देखते हुए निजी अस्पताल जरूरी हैं, पर उनके कामकाज पर निगरानी तंत्र की भी जरूरत है। सरकारों को इस दिशा में जरूर सोचना चाहिए।
अरविंद पाराशर, मकनपुर, उत्तर प्रदेश
जांच अंजाम तक पहुंचे
गुरुवार को प्रकाशित संपादकीय ‘एक जरूरी जांच’ सुशांत सिंह राजपूत मामले की व्यथा उजागर करता लगा। बिहार और महाराष्ट्र की पुलिस में इसको लेकर जो उलझन पैदा हुई, वह वाकई चिंता का विषय है। महाराष्ट्र पुलिस द्वारा बिहार पुलिस के अधिकारियों के साथ किया गया व्यवहार भी कतई शोभनीय नहीं था। दोनों की लड़ाई के बीच कभी-कभी तो मूल मुद्दा ही गायब होता दिखा। निश्चय ही, इस तरह के घटनाक्रम से पुलिस-प्रशासन के व्यवहार पर उंगलियां उठती हैं। इसीलिए, जरूरत दोनों में आपसी सहयोग की थी, जिससे सच्चाई सामने आ पाती। मगर ऐसा नहीं हुआ, और अब सारा दारोमदार सीबीआई पर है।
अमृतलाल मारू, धार, मध्य प्रदेश
ओपिनियन / शौर्यपथ / भारत में कोरोना वायरस से जान गंवाने वालों की संख्या 55 हजार से अधिक हो चुकी है, और यह आंकड़ा लगातार बढ़ता ही जा रहा है, हालांकि मृत्यु-दर में अब गिरावट दिखने लगी है। रिकवरी रेट, यानी कोरोना की जंग जीतने वाले मरीजों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। उम्मीद है कि अगले साल की शुरुआत तक इसका टीका आम लोगों के लिए उपलब्ध हो जाएगा। इन सबसे ऐसा लगता है कि महामारी का बुरा दौर बीत चुका है। जाहिर है, अब वह वक्त आ गया है कि अर्थव्यवस्था को गति दी जाए।
2020-21 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में एक से 15 फीसदी तक की गिरावट का अनुमान लगाया गया है। मेरा मानना है कि इसमें पांच प्रतिशत तक की कमी हो सकती है। दरअसल, अप्रैल-जून की तिमाही कोरोना से सबसे बुरी तरह प्रभावित हुई थी। साल-दर-साल उत्पादन बेशक घट रहा है, पर इसकी गति काफी धीमी है। चौथी तिमाही तक संभवत: यह गति थमने लगेगी, जिससे उत्पादन फिर से लय पकड़ने लगेगा। इस सुधार का दायरा दूसरे क्षेत्रों में भी फैल सकता है। गैर-खाद्य ऋण (खेती व इससे जुड़ी गतिविधियों, उद्योग, सेवा और पर्सनल लोन जैसे कर्ज), ऊर्जा खपत, औद्योगिक उत्पादन, रोजगार और जीएसटी संग्रह जैसे प्रमुख संकेतकों के आंकड़ों का भी यही संकेत है। सिर्फ यह साल और अगला वर्ष सुखद नहीं है। 2021-22 के अंत में हमारा उत्पादन उस स्तर पर आ जाएगा, जिस स्तर पर 2019-20 के अंत में था। इसके बाद भारत की विकास-गाथा उन नीतियों पर निर्भर करेगी, जो अगले डेढ़ साल में अपनाई जाएंगी। तमाम विकल्प इसी बात पर निर्भर करते हैं कि हम आज कहां खडे़ हैं।
इस साल संयुक्त राजकोषीय घाटा जीडीपी का 10.5 प्रतिशत हो सकता है, या फिर इसमें राज्यों को अतिरिक्त उधार की मिली अनुमति को भी शामिल कर लें, तो यह 12.5 फीसदी तक जा सकता है। सार्वजनिक क्षेत्रों की उधार आवश्यकता, जिसमें सार्वजनिक उपक्रम भी शामिल हैं, जीडीपी की करीब 14-15 फीसदी हो सकती है। जीडीपी का करीब नौ प्रतिशत तरलता या नकदी बढ़ाने में लगाया गया है, यह राशि भी बड़े पैमाने पर मांग को प्रोत्साहित करेगी। अब इसका कितना हिस्सा उत्पादन की रिकवरी में मददगार होगा और महंगाई कितनी बढ़ाएगा, यह आपूर्ति की रुकावटें तय करेंगी। अधिकांश विश्लेषक मौजूदा मंदी पर अपना ध्यान लगाए हुए हैं, जबकि कुछ ने कीमतों में सामान्य स्तर से भी अधिक की गिरावट की आशंका जताई है। मगर मैं स्टैगफ्लेशन यानी मुद्रास्फीति जनित मंदी (बढ़ती महंगाई के साथ आने वाली मंदी) के खतरों का जिक्र करता रहा हूं, जो दुर्भाग्य से सही साबित हुआ है। जीडीपी में तेज गिरावट के साथ हमारी मुद्रास्फीति लगभग सात फीसदी तक बढ़ गई है और खाद्य मुद्रास्फीति भी 10 प्रतिशत के करीब है।
इसीलिए 2022-23 तक देश की राजकोषीय और मौद्रिक नीतियों को धीरे-धीरे नियंत्रित तरीके से आगे बढ़ाना होगा। महामारी की वजह से आई वैश्विक मंदी और गहराता भू-राजनीतिक तनाव जब तक शांत नहीं होंगे, यह उम्मीद फिजूल है कि अंतरराष्ट्रीय कारक हमारे विकास में मददगार होंगे। हमारा चालू खाता तात्कालिक रूप से इसलिए बढ़ गया था, क्योंकि तेल की कीमतों में कमी के साथ-साथ जीडीपी में गिरावट से आयात में कमी आई थी। हालांकि, जैसे-जैसे हालात सुधरेंगे, आयात में तेजी आएगी, जिससे व्यापार घाटा बढ़ेगा और कुल मांग पर नकारात्मक असर होगा। इस सूरतेहाल में, अगर हम चाहते हैं कि हमारी विकास दर सात फीसदी या इससे अधिक हो, तो अच्छी रणनीति यही होनी चाहिए कि लंबित संरचनात्मक सुधारों को फिर से आगे बढ़ाते हुए निवेश और उद्योग का भरोसा जीता जाए।
इस तरह के सुधारों में वित्तीय क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। सरकारी बैंकों को रिजर्व बैंक की विशेष निगरानी में लाया जाना चाहिए और उस पर सरकार का स्वामित्व 50 फीसदी से कम किया जाना चाहिए। हालांकि, यह सुधार अपने-आप में पर्याप्त नहीं है, क्योंकि यस बैंक, आईएल ऐंड एफएस जैसे निजी बैंकों में फर्जीवाड़े हुए हैं। ऐसे में, बैंकों और गैर-बैंकों, दोनों तरह के वित्तीय संस्थानों पर कड़ी निगरानी जरूरी है, ताकि गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां यानी डूबत कर्ज की समस्या पर काबू पाया जा सके।
दूसरा, राजकोषीय सुधार किए जाएं, जिसके तहत कर रियायतों और छूट में भारी कमी जरूरी है। इसके साथ-साथ भोजन, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में दी जा रही सब्सिडी को छोड़कर बाकी सभी रियायतों को बंद करना भी जरूरी है। इसके अलावा, केंद्र व राज्य सरकारों को शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचों के विकास पर अतिरिक्त खर्च करना चाहिए।
तीसरा सुधार ऊर्जा क्षेत्र में होना चाहिए। इसमें वितरण का काम निजी कंपनियों के हवाले कर देना चाहिए। दिल्ली जैसे राज्य उदाहरण हैं। चौथा, हमें उन नियमों को खत्म कर देना चाहिए, जो लघु व मध्यम उद्योगों के विकास में रोडे़ अटकाते हैं। फैक्टरी ऐक्ट इसका एक उदाहरण है। ऐसा किया जाना इसलिए जरूरी है, ताकि उद्योग व सेवाओं में रोजगार-सृजन हो।
पांचवां, सार्वजनिक उपक्रमों में सुधार जरूरी है। यह काम अब तक कठिन साबित हुआ है। सरकार-संचालित कंपनियों को या तो निजी उद्यमों से उचित स्पद्र्धा करनी चाहिए या फिर उनसे जीतना चाहिए, क्योंकि इनमें करदाताओं का पैसा लगाया जाता है। छठा सुधार कृषि क्षेत्र में होना चाहिए। इसमें मार्केटिंग सिस्टम को ठीक करना जरूरी है, क्योंकि उपभोक्ताओं के भुगतान का उचित हिस्सा किसानों को आज भी नहीं मिल पाता।
ध्यान रखें, हमारे सरकारी संस्थानों, विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका की गुणवत्ता भी देश के आर्थिक प्रदर्शन को प्रभावित करती है। इसलिए आर्थिक सुधारों के अलावा उच्च विकास के लिए इन संस्थानों को मजबूत करना भी आवश्यक है। हमें सुधारों को एक प्रक्रिया के रूप में देखना चाहिए, किसी घटना के रूप में नहीं। और इस प्रक्रिया के प्रभावी होने में एक दशक तक का वक्त भी लग सकता है। चीन, भारत और अन्य देशों का इतिहास यही बताता है।
(ये लेखक के अपने विचार हैं) सुदीप्तो मंडल, फेलो, नेशनल कौंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च
नई दिल्ली / शौर्यपथ / एक तरफ सरकार लॉक डाउन को हटा रही है वही दूसरी तरफ देश में कोरोना के मरीज लगातार बढ़ रहे है ऐसे में संक्रमित क्षेत्र को भी कन्टेनमेंट क्षेत्र घोषित किया जा रहा है . कहने को तो जिन्दगी डर और बल के साए में लौट रही है किन्तु अभी भी व्यापार अधुरा ही है जिन्दगी पूरी तरह पत्री में नहीं लौटी ऐसे में ३१ अगस्त के बाद केसीसी का लोन नहीं जमा करने वालो को ४ की जगह ७ प्रतिशत ब्याज सहित कर्जा चुकाना पड़ेगा .
यह खबर उन किसानों के लिए है जिन्होंने खेती-किसानी के लिए बैंकों से लोन ले रखा है. अगर वो अगले 7 दिन के अंदर किसान क्रेडिट कार्ड पर लिया गया पैसा बैंक को वापस नहीं करते हैं तो उन्हें 4 की जगह 7 फीसदी ब्याज देना पड़ेगा. खेती-किसानी के लोन पर सरकार ने 31 अगस्त तक पैसा जमा करने की मोहलत दी है.
आमतौर पर केसीसी पर लिए गए लोन को 31 मार्च तक वापस करना होता है. उसके बाद किसान (Farmer) फिर अगले साल के लिए पैसा ले सकता है. जो किसान समझदार हैं वो समय पर पैसा जमा करके ब्याज में छूट का लाभ उठा लेते हैं. दो-चार दिन बाद फिर से पैसा निकाल लेते हैं. इस तरह बैंक में उनका रिकॉर्ड भी ठीक रहता है और खेती के लिए पैसे की कमी भी नहीं पड़ती. अब और छूट मिलने की संभावना कम ही है, क्योंकि लॉकडाउन खत्म हो गया है. कृषि गतिविधियां भी पटरी पर आ गई हैं. मोदी सरकार ने लॉकडाउन को देखते हुए इसे 31 मार्च से बढ़ाकर पहले 31 मई किया था. बाद में इसे और बढ़ाकर 31 अगस्त तक कर दिया गया. इसका मतलब यह है कि किसान केसीसी कार्ड के ब्याज को सिर्फ 4 प्रतिशत प्रति वर्ष के पुराने रेट पर 31 अगस्त तक भुगतान कर सकते हैं. बाद में यह महंगा पड़ेगा.
केसीसी पर कैसे कम लगता है ब्याज?
खेती-किसानी के लिए केसीसी पर लिए गए तीन लाख रुपये तक के लोन की ब्याज दर वैसे तो 9 फीसदी है. लेकिन सरकार इसमें 2 परसेंट की सब्सिडी देती है. इस तरह यह 7 फीसदी पड़ता है. लेकिन समय पर लौटा देने पर 3 फीसदी और छूट मिल जाती है. इस तरह इसकी दर जागरूक किसानों के लिए मात्र 4 फीसदी रह जाती है. आमतौर पर बैंक किसानों को सूचित कर 31 मार्च तक कर्ज चुकाने के लिए कहते हैं. अगर उस समय तक कर्ज का बैंक को भुगतान नहीं करते हैं तो उन्हें 7 फीसदी ब्याज देना होता है.

तमिलनाडु / शौर्यपथ / सनसनीखेज सेक्स स्कैंडल कांड में आरोपी महिला कॉलेज की प्रोफेसर को मद्रास हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी के 11 महीने बाद सशर्त जमानत दी है. मदुरैई बेंच के जस्टिस एन किरूबाकरण और एसएस सुंदर ने निलंबित असिस्टेंट प्रोफेसर निर्मला देवी को जमानत दी है. प्रोफेसर पर आरोप है कि वह महिला छात्राओं को मदुरैई कामराज यूनिवर्सिटी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए अच्छे नंबर और पैसों का लालच देती थी. सरकारी वकील ने कोर्ट में कहा कि उन्हें जमानत देने पर कोई एतराज नहीं है. कोर्ट ने प्रोफेसर को पुलिस के साथ जांच में पूरा सहयोग करने के निर्देश दिए हैं और मीडिया में किसी तरह का इंटरव्यू देने से मना किया, जिससे जांच प्रभावित हो.
इससे पहले निचली कोर्ट और हाईकोर्ट ने जमानत याचिका खारिज कर दी थी. प्राइवेट कॉलेज देवंगा आर्ट्स कॉलेज की प्रोफेसर देवी को पिछले साल 16 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था. प्रोफेसर का छात्राओं के साथ बातचीत का एक ऑडियो वायरल होने के बाद कॉलेज और एक महिला फोरम की शिकायत पर उसके खिलाफ कार्रवाई हुई थी. ऑडियो क्लिप में प्रोफेसर कथित रूप से कुछ अधिकारियों के साथ छात्राओं को 'एडस्ट' करने की सलाह दे रही थीं.
गिरफ्तारी से पहले कॉलेज की अंदरूनी जांच के बाद प्रोफेसर को निलंबित कर दिया था. ऑडियो सामने आने के बाद विवाद बढ़ने पर मामले को राज्य की सीआईडी को सौंप दिया गया था. देवी से पूछताछ के आधार पर पुलिस ने असिस्टेंट प्रोफेसर वी मुरुगन और रिसर्च छात्र करुप्पासामी को भी इस मामले में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था. हाईकोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद इन दोनों को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी थी. पिछले साल सितंबर महीने में सीबी-सीआईडी ने 200 पेज की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी. इससे पहले जुलाई महीने में 1600 पेज की प्री चार्जशीट दाखिल की गई थी.
http://shouryapathnews.in/index.php/cg/durg/item/2056-2020-08-22-12-41-07

दुर्ग / शौर्यपथ / २३ अगस्त को प्रदेश के मुख्यमंत्री का जन्मदिन है . मुख्यमंत्री के जन्मदिन को यादगार बनाने के लिए दुर्ग एनएसयुआई अध्यक्ष आकाश शर्मा के निर्देशानुसार पारंपरिक रूप से मनाएंगी, जन्मदिन के अवसर पर सभी एनएसयुआई कार्यकर्त्ता “मोर गौठान, मोर ज़िम्मेदारी” अभियान की पूरे राज्य में शुरुवात करेगी।
एनएसयुआई दुर्ग कल पुलगांव के गौठान में रहने वाले पशुओं के लिए पूरे साल चारे का इंतजाम भी करेंगे साथ ही पुलगांव चौक में सोनू साहू 12 के नेतृत्व मे मास्क सेनिटाइजर वितरण कर आम राहगीरों को मुँह मिठा भी कराया जाएगा. इस अवसर पर प्रदेश के वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रदीप चौबे, प्रदेश कांग्रेस महामंत्री राजेंद्र साहू, पूर्व विधायक प्रतिमा चंद्राकर, पूर्व साडा अध्यक्ष लक्ष्मण चंद्राकर, नगर निगम के सभापति राजेश यादव, दीपक दुबे, जयंत देशमुख सहित कांग्रेसजन भी मौजूद रहेंगे।
बताया कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गौवंश के संरक्षण और हाल ही में गोधन न्याय योजना शुरू की गई है। मुख्यमंत्री ने इन योजनाओं के माध्यम से देश दुनिया की सबसे बड़ी गौसेवा शुरू की है। इसी गौसेवा के भाव के साथ रविवार को गौठान में प्रदेश के मुखिया का जन्मदिन मन जिले के गौठान में जाकर हर्षोल्लास के साथ पर्व के रूप में मान. मुख्यमंत्री जी के जन्मदिन को मनाना है, साथ ही सबको गोधन न्याय योजना, राजीव गांधी न्याय योजना, राम गमन पथ संयोजन एवं गौठान योजना के लाभ बताना हैं।
कार्यक्रम इस अनुसार रहेगा-
● गौ सेवक
● गौठान समिति एवं ग्वालों का सम्मान।
● किसानों से राजीव गांधी न्याय योजना के लाभ पर चर्चा कर वीडियो बनाना हैं।
● गौधन न्याय योजना से लाभान्वित हुए आमजनों से चर्चा।
इस दौरान जिले के समस्त प्रदेश पदाधिकारी, जिला/विधानसभा/ब्लॉक पदाधिकारी, सोशल मीडिया समन्वयक, छात्रसंघ पदाधिकारी, विश्विद्यालय/महाविद्यालय पदाधिकारी, स्कूल यूनिट सहित समस्त कार्यर्ताओं की उपस्तिथि रहेंगे हैं।
कार्यक्रम की जानकारी एनएसयुआई के जिला कार्यकारिणी अध्यक्ष सोनू साहू ने दी .
दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग जिले के कांग्रेस नेता प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का जन्मदिन अनूठे अंदाज में मनाएंगे। 23 अगस्त को सुबह 10.30 बजे सभी कांग्रेस नेता पुलगांव के गोकुल नगर स्थित गौठान में गायों को गुड़ खिलाकर प्रदेश के मुखिया का जन्मदिन मनाएंगे। गायों का मुंह मीठा करने के साथ ही हरा चारा खिलाया जाएगा। पुलगांव के गौठान में जरूरी सुविधाएं मुहैया कराने के लिए भी कांग्रेस नेता आवश्यक पहल करेंगे। कांग्रेस नेता गौठान में रहने वाले पशुओं के लिए पूरे साल चारे का इंतजाम भी करेंगे।
इस अवसर पर प्रदेश के वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रदीप चौबे, प्रदेश कांग्रेस महामंत्री राजेंद्र साहू, पूर्व विधायक प्रतिमा चंद्राकर, पूर्व साडा अध्यक्ष लक्ष्मण चंद्राकर, नगर निगम के सभापति राजेश यादव, दीपक दुबे, जयंत देशमुख सहित सभी कांग्रेसजन मौजूद रहेंगे। राजेंद्र ने बताया कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गौवंश के संरक्षण और संवर्धन के लिए नरवा, गरूवा, घुरवा अऊ बारी योजना शुरू की। हाल ही में गोधन न्याय योजना शुरू की गई है। मुख्यमंत्री ने इन योजनाओं के माध्यम से देश दुनिया की सबसे बड़ी गौसेवा शुरू की है। इसी गौसेवा के भाव के साथ रविवार को गौठान में प्रदेश के मुखिया का जन्मदिन मनाया जाएगा।
युवा कांग्रेसी 365 ब्लड यूनिट डोनेट करने की शुरुआत करेंगे
मुख्यमंत्री के जन्मदिन के अवसर पर युवा कांग्रेस ने 365 यूनिट ब्लड डोनेट करने की घोषणा की है। कल दोपहर 12 बजे जिला अस्पताल में 30 यूनिट ब्लड डोनेट कर इसकी शुरुआत की जाएगी। युवा कांग्रेस के प्रदेश सचिव जयंत देशमुख सहित अन्य युवा कांग्रेसियों की मौजूदगी में ब्लड डोनेट किया जाएगा।
वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से बधाई स्वीकार करेंगे सीएम
कोविड 19 के संक्रमण से बचाव और रोकथाम के मद्देनजर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जनप्रतिनिधियों, कांग्रेस नेताओं, कार्यकर्ताओं, नागरिकों से सीएम कार्यालय में न आने की अपील की है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सभी से बधाई व शुभकामनाएं स्वीकार करेंगे। 23 अगस्त को दोपहर 12.45 बजे से 1 बजे के बीच दुर्ग कलेक्टोरेट सहित दुर्ग जनपद, पाटन जनपद और धमधा जनपद कार्यालय में वीडियो कांफ्रेंसिंग की व्यवस्था की गई है। यहीं से मुख्यमंत्री को कांफ्रेंसिंग के माध्यम से बधाई और शुभकामनाएं दी जाएगी।
ऽ पन्द्रह साल सरकार में रहने के दौरान तो रमन सिंह और भारतीय जनता पार्टी ने छत्तीसगढ़ी तीज त्योहार और संस्कृति की लगातार उपेक्षा की ऽ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के द्वारा छत्तीसगढ़ी तीज त्योहारों और संस्कृति की पहचान और सम्मान किया जा रहा रायपुर / शौर्यपथ / 15 वर्ष तक मुख्यमंत्री रहे रमन सिंह द्वारा तिजहारिन मन ला चिट्ठी पतरी पर प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग प्रमुख शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि यह कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की बड़ी सफलता है कि जो लोग पन्द्रह सालों तक छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़ी अस्मिता को भूल गये थे वे लोग भी बढ़ चढ़ कर राज्य के तीज त्योहारों को मनाने का प्रदर्शन करने को मजबूर हो गये है। यही तो है गढ़बों नवा छत्तीसगढ़ का साकार रूप। यही है पुरखों के सपनों का छत्तीसगढ़। इसीलिये पुरखों ने पृथक छत्तीसगढ़ राज्य के लिये लड़ाई लड़ी। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग प्रमुख शैलेश नितिन त्रिवेदी ने पूछा है कि 15 साल तक रमन सिंह को तीजा की छुट्ठी देने की समझ क्यों नहीं आई? मुख्यमंत्री पद पर रहते हुये कभी तीजा की चिट्ठी लिखी नहीं लिखी। 15 साल तक छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा, संस्कृति रीति रिवाजों, तीज-त्योहारों की अवहेलना करने के बाद अब सत्ता से हटने के बाद रमन सिंह जी को चिट्ठी लिखने की सुध आई है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग प्रमुख शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि सत्ता से हटने के बाद रमन सिंह को छत्तीसगढ़ के तीज त्योहार की सुध राजनैतिक जरूरतों से ही सही, कम से कम आई तो। पन्द्रह साल सरकार में रहने के दौरान तो रमन सिंह और भारतीय जनता पार्टी ने छत्तीसगढ़ी तीज त्योहार और संस्कृति की लगातार उपेक्षा की। राज्य में कांग्रेस सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के द्वारा छत्तीसगढ़ी तीज त्योहारों और संस्कृति की पहचान और सम्मान किया जा रहा है। कांग्रेस सरकार ने छत्तीसगढ़ के प्रमुख त्योहारों हरेली, तीजा, माता कर्मा जयंती, छठ पूजा, आदिवासी दिवस पर सार्वजनिक अवकाश घोषित किया। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री निवास में उत्साहपूर्वक छत्तीसगढ़ के लोक पर्व मना कर यह स्पष्ट संदेश दे दिया कि छत्तीसगढ़ राज्य बनने की वास्तविक सार्थकता राज्य के मिट्टी की खुशबु को सहेजने में ही है। छत्तीसगढ़ के पारंपरिक त्योहारों को गौरव के साथ मनाने की जो शुरुआत राज्य बनने के बाद हो जानी चाहिए थी वह भूपेश बघेल के मुख्यमंत्री बनने के बाद शुरू हुआ। यह साबित हो गया है कि कांग्रेस सरकार की प्राथमिकता राज्य की आर्थिक सामाजिक उन्नति के साथ राज्य की संस्कृति को बढ़ावा देना है।
दुर्ग / शौर्यपथ/ निगम आयुक्त इंद्रजीत बर्मन द्वारा आज सरस्वती नगर में 522 गरीब परिवारों के लिए बनाए जा रहे प्रधानमंत्री आवास निर्माण कार्य का निगम अधिकारियों और एजेंसी के लोगों के साथ निरीक्षण किया गया । उन्होंने प्रधानमंत्री आवास के तहत निर्माण हो रहे आवास के कार्य पर संतोष व्यक्त करते हुए संभावना व्यक्त किए की सरस्वती नगर में प्रधानमंत्री आवास निर्धारित समय से पहले होने की संभावना है । उन्होंने बताया सरस्वती नगर में 522 परिवार गरीब परिवारों के लिए आवास का निर्माण किया जा रहा है जिसमें अब तक डोंगिया तालाब बाबू तलाब टप्पा तालाब बांधा तालाब वाटर बॉडी के किनारे बसे 400 गरीब परिवारों का आवेदन निगम को प्राप्त हो गया है । उन्होंने कहा बहुत जल्द गरीब परिवारों को सरस्वती नगर में पक्का आवास का लाभ मिलेगा । उन्होंने कहा सरस्वती नगर में प्रधानमंत्री आवास का निर्माण संतोषप्रद है और समय से पहले होने की संभावना है । उल्लेखनीय है कि नदी नाला और तालाब किनारे ब से गरीब परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना प्रारंभ किया गया है। सरस्वती नगर के पास बांदा तालाब टप्पा तालाब बाबू तलाब चंडी तालाब किनारे गरीब परिवार कच्चे मिट्टी का मकान बनाकर निवास करते हैं । प्रधानमंत्री आवास में उन गरीब परिवारों को सर्व सुविधा युक्त पक्का मकान का लाभ जल्द मिलेगा ।
दुर्ग । शौर्यपथ । राष्ट्रीय युवा कांग्रेस के आह्वान पर प्रदेश युवा कांग्रेस के आदेशानुसार भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी जी की 76 वी जयंती को सद्भावना दिवस के रूप में मनाकर दुर्ग युवा कांग्रेस द्वारा वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम के तहत युवा कांग्रेस के प्रदेश सचिव जयंत देशमुख व अहमद चौहान सदस्य युवा कांग्रेस दुर्ग के नेतृत्व में, और युवा कांग्रेस की संभागीय प्रभारी रेणु मिश्रा जी, प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री राजेन्द्र साहू जी, युवा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष अंकुश पिल्ले जी की उपस्थिति में महाराजा चौंक दुर्ग में लगभग 500 पौधों का वितरण किया गया, इस वृहद वृक्षारोपण (पौधा वितरण) के कार्यक्रम में विशेष रूप से युवा कांग्रेस के जिला महासचिव सिराज अली, निखिल खिचरिया, विक्रांत ताम्रकार, हेमंत साहू, लोकेश चंद्राकर, राहुल शर्मा, रियाज़ सुलड़ा, विकाश गुप्ता व अन्य युवा कांग्रेस के साथीगण ने उपस्थित होकर कार्यक्रम को सफल बनाया..
दुर्ग / शौर्यपथ / अखंड सौभाग्य का प्रतीक तीज पर्व शुक्रवार को पारम्परिक रूप से मनाया जाएगा। इसके लिए छत्तीसगढ़ की परंपरा के अनुसार तीजहारिन बहन बेटियों का ससुराल से मायके पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है। इस बार कोरोना संक्रमण के चलते सार्वजनिक परिवहन बंद रहने से तीजहारिनों ने निजी वाहनों से मायके का रूख किया।
छत्तीसगढ में तीजा के नाम से प्रसिद्ध हरितालिका तीज को लेकर विवाहिताओं में खासा उत्साह नजर आ रहा है। यह पर्व कल शुक्रवार को मनाया जाएगा। स्थानीय परंपरा के अनुसार पति के दीर्घायु की कामना के साथ महिलाएं मायके पहुंंचकर व्रत रखती है।
इस परंपरा के निर्वहन हेतु पिता व भाई बुधवार को पोला मनाने के बाद आज बहन-बेटियों को लेने उनके ससुराल पहुंच गए। मायके में आज शाम को करेले की सब्जी के साथ भोजन लेकर तीजहारिनें कड़ू भात की रस्म निभाएंगी। इसके बाद शनिवार की सुबह तक के लिए निर्जला व्रत शुरू हो जाएगा। इस व्रत में भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती की पूजा अर्चना कर व्रती महिलाएं अखंड सौभाग्य का वरदान मांगेगी।
गौरतलब रहे कि इस वक्त कोरोना महामारी के संक्रमण का खतरा बना हुआ है। लिहाजा सार्वजनिक यात्री परिवहन व्यवस्था पर रोक लगी हुई है। शहरी क्षेत्र में प्रमुख रुट पर आटो जैसे सवारी वाहन दौड़ रहे हैं। लेकिन ट्रेन व बस का परिचालन ठप्प रहने से तीजहारिनों को मायके पहुंचने में खासी दिक्कत उठानी पड़ी। अनेक लोग निजी चार पहिया वाहन लेकर बहन बेटियों को लेने गए। वहीं भिलाई-दुर्ग से भी बड़ी संख्या में महिलाओ ने अपनी-अपनी व्यवस्था के अनुसार पिता अथवा भाई के साथ मायके का रूख किया। अनेक लोग अपनी दुपहिया वाहन में ही छोटे छोटे बच्चों के साथ बहन बेटियों को तीजा के लिए ले जाते देखे गए।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
