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सम्पादकीय / शौर्यपथ / अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में जांच सीबीआई को सौंपने का फैसला न केवल सुखद, बल्कि न्यायपूर्ण भी है। सुप्रीम कोर्ट ने कुछ देर से सही, लेकिन उचित फैसला किया है, इससे न केवल पीड़ित पक्ष, बल्कि सुशांत सिंह राजपूत के समर्थकों का भी मनोबल बढ़ेगा। 14 जून को हुई सुशांत की मौत को पहली नजर में आत्महत्या का मामला माना गया था, लेकिन बाद में जैसे परिस्थिति जन्य तथ्य और विरोधाभास सामने आते गए, उससे यह मामला गंभीर बनता गया। विशेष रूप से सुशांत के पिता द्वारा बिहार में दर्ज कराई गई प्रथम सूचना रिपोर्ट में जिस तरह से आरोप लगाए गए, उससे यह बात लोगों के दिल तक पहुंची कि सुशांत के साथ विगत छह महीने से लगातार नाइंसाफी हो रही थी। यदि कुछ क्षण के लिए यह मान भी लिया जाए कि उन्होंने आत्महत्या की है, तो भी इस संदेह की पर्याप्त गुंजाइश है कि सुशांत को उस ओर दुष्प्रेरित किया गया। सुशांत की मौत से पहले ही उनकी निराशा, अवसाद का सिलसिला शुरू हो चुका था। यह बात भी सामने आ चुकी है कि यह कुशल अभिनेता अपनी सफलता, संपन्नता, ऊर्जा और युवा चुस्ती के बावजूद इतना हतोत्साहित था कि उसे दवाइयों की जरूरत पड़ रही थी। सबसे बड़ी बात कि दवाइयां वही लोग खिला रहे थे, जिन पर आरोप लग रहे हैं। जो लोग उन्हें डॉक्टर के पास ले जा रहे थे, वही लोग सुशांत को उनके परिवार से दूर कर रहे थे। दुखद है कि ये सारे इशारे मुंबई पुलिस को नहीं दिख रहे थे। ऐसे में, सीबीआई जांच को टालना मुश्किल था।
बिहार पुलिस की जांच को जिस तरह से प्रभावित किया गया, जिस तरह से बिहार के जांच दल के साथ अपराधियों या कोरोना संदिग्ध जैसा सुलूक किया गया, उससे भी लोगों को लगने लगा कि मुंबई पुलिस पर सोलह आना भरोसा नहीं किया जा सकता। मुंबई पुलिस की छवि पर जो दाग लग रहे थे, उन पर सीबीआई जांच के आदेश के साथ सुप्रीम कोर्ट की मुहर लग गई। अब मुंबई पुलिस के पास एक ही रास्ता है कि वह सीबीआई की जांच में सहयोग करे और सीबीआई की जांच टीम के साथ कतई वैसा सुलूक न करे, जैसा उसने बिहार पुलिस के साथ किया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बेशक बिहार पुलिस का मनोबल बढ़ेगा। उसकी एफआईआर और जांच की दिशा सही साबित हुई है। बिहार पुलिस को अभी तक जो तथ्य हासिल हुए हैं, उन्हें सीबीआई को सौंपने का समय आ गया है।
अब सीबीआई को इस मामले की तह में जाकर सुशांत की मौत के मूलभूत कारणों को उजागर करना होगा। बॉलीवुड में हुई इस मौत के अनगिनत दुखद पहलू हैं, जो यह संकेत करते हैं कि सिनेमा दुनिया की नैतिक बुनियाद कितनी जर्जर है। किस तरह से सामंतवाद या मठाधीशी का ढर्रा चल पड़ा है। किस तरह से अनेक अयोग्य और आपराधिक किस्म के लोग भी गुट बनाकर अपने-अपने गलत ढंग से यहां गुजारा कर रहे हैं। सीबीआई जांच अगर शक्तिशाली होते बॉलीवुड की आपराधिक बुराइयों तक पहुंच पाई, तो इससे देश का भी भला होगा। छोटे शहरों और सामान्य परिवारों के प्रतिभावानों के साथ वहां कैसा व्यवहार होता है, यह जानने की जरूरत पूरे देश को है। वह दुखद दास्तां भी सामने आनी चाहिए, जिसे सुशांत अपने साथ लिए गए हैं। सीबीआई को ध्यान रखना होगा कि उस पर अब देश की निगाह है।
मेलबॉक्स / शौर्यपथ / कोरोना के इस भयावह दौर में बच्चे काफी दिनों से विद्यालय नहीं जा रहे हैं, लेकिन अब वे ऑनलाइन क्लास से पढ़ने को बोरियत भरा समझने लगे हैं। विद्यालयों की भूमिका हमारे जीवन में बहुत अधिक होती है। जीवन को गढ़ने और सार्थक बनाने के जो प्रयास विद्यालयों में किए जाते हैं, वे सचमुच एक अच्छे और जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए जरूरी माने जाते हैं। कोरोना संक्रमण के भय से बंद विद्यालयों के खुलने का इंतजार अब सारे बच्चे कर रहे हैं, ताकि वे बचपन की बुनियाद मजबूत बना सकें। वाकई, घर पर न तो उन्हें कक्षा जैसा वातावरण मिल रहा है और न स्कूल जैसी सुविधा। लंबे समय तक स्क्रीन देखना बच्चों के लिए अब असहज भी होता जा रहा है। ऐसे में, जब तक विद्यालय नहीं खुलते, तब तक यदि हर अध्यापक अपने आस-पास के बच्चों के साथ थोड़ा समय बिताकर उनकी रुचि और उत्साह को बनाए रखने में मदद करे, तो यह एक बेहद सकारात्मक पहल होगी।
हरीश कुमार शर्मा, बख्तावरपुर गांव
मास्क है जरूरी
पूरी दुनिया इस समय कोरोना महामारी से जूझ रही है, जिसमें बचाव के हर उपाय अपनाने की बात सभी विश्लेषक कह रहे हैं। इन उपायों में दैहिक दूरी का पालन, भीड़-भाड़ से परहेज, साबुन से लगातार हाथ धोना और मास्क का इस्तेमाल प्रमुख हैं। मगर हमारे देश में कुछ लोग मास्क से आजादी का अभियान चलाकर दूसरे लोगों को गुमराह कर रहे हैं। मास्क को गुलामी का प्रतीक बताते हुए वे समाज में यह भ्रम फैला रहे हैं कि यह कोरोना वायरस का प्रसार नहीं रोकता, बल्कि कई बीमारियों की सौगात दे जाता है। ऐसे लोगों पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। आपदा की इस मुश्किल घड़ी में यदि इस तरह की अफवाहें फैलाई जाएंगी, तो सार्वजनिक स्वास्थ्य पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
सुरेंद्र जाखड़, सीकर, राजस्थान
माही-दौर याद रहेगा
दुनिया के महान क्रिकेटरों में शुमार महेंद्र सिंह धौनी के संन्यास लेने के साथ ही भारतीय क्रिकेट का एक अध्याय समाप्त हो गया। मैदान पर उनकी कमी खलेगी। उन्होंने विश्व स्तर पर भारत को एक अलग पहचान दिलाई। बतौर कप्तान उनका प्रदर्शन इतना शानदार रहा कि शायद ही कभी भुलाया जा सकेगा। यही कारण है कि वह देश के सबसे सफल कप्तानों की सूची में शीर्ष पर रहेंगे। हालांकि, वनडे और टेस्ट में उनका खेल अब हम नहीं देख पाएंगे, लेकिन आईपीएल में उनके हेलीकॉप्टर शॉट का नजारा देखने को मिल सकता है। क्रिकेट प्रेमी इसका बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
अभिषेक सिंह, जौनपुर
एकजुट लड़ाई जरूरी
देश की सर्वोच्च अदालत ने फैसला सुनाया है कि कोरोना काल में इंजीनियरिंग और मेडिकल की परीक्षा तय समय पर ली जाएगी। देखा जाए, तो जीवन चलने का ही नाम है। मसले, मुश्किलें, संघर्ष मानव जीवन का हिस्सा हैं। कोरोना महामारी भले ही देश को खोखला कर दे, पर हमें एक नई शुरुआत करनी ही होगी, इसीलिए बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं किया जा सकता। परंतु यह भी सत्य है कि हमें हमारी व्यवस्था मजबूत बनानी होगी, क्योंकि सावधानी हटी-दुर्घटना घटी! कोरोना महामारी में सतर्कता बेहद आवश्यक है। जरूरी है कि प्रशासन और जनता, दोनों साथ मिलकर इसके लिए प्रयास करें। इससे अवश्य ही संक्रमण का प्रसार रोका जा सकता है। आवश्यकता है कि हम परिस्थिति की गंभीरता को समझते हुए अपने विवेक का पूर्ण इस्तेमाल करें और सरकार द्वारा जारी सभी दिशा-निर्देशों का पालन करें। हालांकि, प्रशासन का यह भी कर्तव्य है कि दैहिक दूरी का पालन करवाते हुए परीक्षा आयोजित करवाए, ताकि संक्रमण फैलने का कोई खतरा न हो।
राजेंद्र प्रसाद, रांची, झारखंड
ओपिनियन / शौर्यपथ / पिछले दिनों संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने इजरायल के साथ अपने राजनयिक संबंध शुरू करने का फैसला किया, जिसने विश्व समुदाय का खासा ध्यान खींचा है। यह संकेत है कि इस क्षेत्र में सियासी समीकरण नए सिरे से गढे़ जा रहे हैं। पिछले कुछ समय से ऐसी कोशिशें जारी हैं, जिसके तीन प्रमुख कारक हैं। पहला, 1950 के दशक के बाद से इस क्षेत्र के तमाम देशों के नीति-निर्धारण में फलस्तीन का मसला प्रमुखता से शामिल रहा है। दूसरा, अरब और ईरान के रिश्तों में कड़वाहट, जो 1979 की ईरानी-क्रांति से पहले से चल रही है। और तीसरा कारक है, तुर्की साम्राज्य के गौरव को फिर से स्थापित करने की एर्दोगन की महत्वाकांक्षा।
पाकिस्तान कश्मीर मसले पर समर्थन जुटाने के लिए अरब, ईरान और तुर्की, तीनों मुल्कों से अपने रिश्तों का बेजा फायदा उठाता रहा है। ईरान के साथ-साथ उसे अरब देशों से भी आर्थिक मदद मिलती रही है। मगर पहली बार यहां के प्रमुख राष्ट्रों के साथ रिश्तों में संतुलन साधने में उसे काफी मुश्किलें पेश आ रही हैं। पाकिस्तानी विदेश मंत्री महमूद कुरैशी ने तो चेतावनी भी दी थी कि यदि इस्लामिक सहयोग संगठन जम्मू-कश्मीर के मसले पर विदेश मंत्रियों की बैठक नहीं बुलाता, तो वह इस संगठन के बाहर कश्मीर मसले को उठाएगा। इससे पाकिस्तान और खाड़ी देशों की आपसी दरारें जगजाहिर हुई हैं। मगर यह तनाव कोई नया नहीं है।
दरअसल, पाकिस्तान और खाड़ी देशों में तनातनी 2014 में शुरू हुई, जब सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने पाकिस्तान से यह गुजारिश की थी कि वह अपनी सैन्य टुकड़ी यमन की जंग में उनकी मदद के लिए भेजे। पाकिस्तान की हुकूमत ने संसद की मंजूरी के बाद ही ऐसा करने की बात कही। यह एक असामान्य घटना थी, क्योंकि अतीत में पाकिस्तान की हुकूमत विदेश नीति से जुडे़ प्रमुख फैसले बिना संसद की सहमति से लेती रही थी। लिहाजा, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने जल्द ही समझ लिया कि ईरान के साथ विवाद में पाकिस्तान उनका साथ देने के लिए तैयार नहीं है और संसद की अनुमति केवल बहाना है।
यमन मसले पर पाकिस्तान से निराश होने के बावजूद इमरान खान के सत्ता संभालने के बाद सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात उसकी मदद के लिए आगे आए। क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने साल 2019 में पाकिस्तान का दौरा किया। सऊदी अरब ने स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान को तीन अरब अमेरिकी डॉलर देने का भी फैसला किया, क्योंकि तब मुल्क का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग खाली हो गया था। उसने तेल मुहैया कराने में पाकिस्तान को 3.2 अरब डॉलर की रियायत भी दी। मगर बाद के महीनों में, इमरान खान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के लिए अपनी न्यूयॉर्क यात्रा के दौरान तुर्की, मलेशिया और ईरान के राष्ट्राध्यक्षों के साथ बैठकें कीं। इसके बाद वह मलेशिया में इस्लामी देशों के शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए तैयार थे, पर इस यात्रा को स्थगित कर दी। सऊदी अरब की नजर में यह इस्लामी दुनिया में उसके नेतृत्व को चुनौती देने वाला कदम था और उसने इसे इस्लामिक सहयोग संगठन के बरअक्स संगठन खड़ा करने की कोशिश के रूप में देखा।
पाकिस्तान और सऊदी अरब के मतभेद लगातार सुलगते रहे हैं। सऊदी अरब का साथ देने को तो पाकिस्तान तैयार नहीं है, लेकिन वह चाहता है कि सऊदी उसके एजेंडे को आगे बढ़ाने में मदद करे। वह भारत के खिलाफ इस्लामी देशों के संगठन का भी इस्तेमाल करना चाहता है। नतीजतन, सऊदी अरब ने 3.2 अरब अमेरिकी डॉलर की रियायती तेल सुविधा का नवीनीकरण नहीं किया, जिसकी अवधि पिछले मई माह में समाप्त हो चुकी है। इसके अलावा, उसने स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान को दिए गए एक अरब डॉलर को वापस करने की मांग भी कर दी है। जाहिर है, कोरोना महामारी के इस संकट काल में जब पाकिस्तान गंभीर आर्थिक दुश्वारियों का सामना कर रहा है, तब सऊदी अरब के साथ बिगड़ते रिश्ते उसकी मुश्किलें और बढ़ाएंगे।
बहरहाल, मिस्र द्वारा कैंप डेविड समझौते के बाद इजरायल से कूटनीतिक रिश्ते बनाने के करीब चार दशकों के बाद संयुक्त अरब अमीरात ने इजरायल की तरफ अपना हाथ बढ़ाया है। उधर, तुर्की ने अमीरात के साथ अपने राजनयिक संबंध तोड़ने की धमकी दी है। यह संकेत है कि तुर्की अरब देशों को किनारे करके अब तमाम इस्लामी मुल्कों को अपने झंडे के नीचे लाने की नीति पर आगे बढ़ रहा है।
तेल की मांग में आई गिरावट की वजह से सऊदी अरब सहित खाड़ी के राजतंत्र मुश्किल माली हालत का सामना कर रहे हैं। इससे चीन और भारत का महत्व बढ़ गया है, जो सऊदी तेल के प्रमुख खरीदार हैं। सऊदी अरब को अपने बजट को संतुलित रखने के लिए प्रति बैरल न्यूनतम 80-84 अमेरिकी डॉलर की कीमत की जरूरत है, जबकि अभी तेल की कीमत 45 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के आसपास है। इस बीच तुर्की एक आक्रामक विदेश नीति पर आगे बढ़ रहा है। अप्रैल महीने में लीबिया में हस्तक्षेप करने के बाद यूनान और साइप्रस के साथ उसका तनाव बढ़ रहा है। इसमें उसे यूरोपीय संघ का भी विरोध झेलना पड़ रहा है। यह मामला पूर्वी भूमध्य सागर में तेल और गैस की खोज से जुड़ा है।
एर्दोगन की एकेपी पार्टी ने संसद में अपना पूर्ण बहुमत खो दिया है। पिछले साल तो यह पार्टी इस्तांबुल मेयर के प्रतिष्ठित चुनाव में भी हार गई थी। दरअसल, एर्दोगन आक्रामक विदेश नीति के सहारे अपनी गिरती लोकप्रियता को संभालने की कोशिश कर रहे हैं, और मुस्लिम दुनिया के सऊदी नेतृत्व को चुनौती दे रहे हैं। यह ऐसे समय में हो रहा है, जब उनका देश एक बडे़ आर्थिक संकट का सामना कर रहा है।
इधर, पाकिस्तान बदतर आर्थिक स्थिति का सामना कर रहा है, लेकिन जम्मू-कश्मीर पर अपनी सोच को बदलने के लिए तैयार नहीं है। तुर्की के वोल्कान बोजकिर, जो संयुक्त राष्ट्र महासभा के अगले सम्मेलन के अध्यक्ष होंगे, अभी-अभी पाकिस्तान-यात्रा से लौटे हैं। प्रधानमंत्री इमरान खान और विदेश मंत्री कुरैशी ने उनके साथ बातचीत में जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया है। यह संकेत है कि सितंबर में शुरू हो रहे संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र में क्या हो सकता है। तुर्की से मेल-मिलाप बढ़ाने से सऊदी अरब सहित अन्य अरब देशों के साथ भी उसके रिश्ते पर असर पडे़गा, जो पहले से ही तनावपूर्ण है।
(ये लेखक के अपने विचार हैं) दिनकर प्रकाश श्रीवास्तव, ईरान में भारत के पूर्व राजदूत
दुर्ग / शौर्यपथ / महापौर धीरज बाकलीवाल एवं निगम आयुक्त इंद्रजीत बर्मन के निर्देश पर निगम स्वास्थ्य विभाग का अमला प्रतिदिन नियमित सफाई कार्य के बाद शहर के अनेक हिस्से से गैंग लगाकर गाजर घांस निकाला जा रहा है। गाजर घांस से एक ओर शहर में स्वच्छता का वातावरण निर्मित होगा वहीं आम जनता के स्वास्थ्य को भी लाभ मिलेगा।
उल्लेखनीय है कि बारिश के दौरान शहर के मुख्य मार्गो के किनारे, वार्डो में स्थित खाली रिक्त भूमि में अधिक मात्रा और तेजी से गाजर घांस उग आता है। जिसका समय रहते सफाई करना आवश्यक हैं। इस संबंध में महापौर बाकलीवाल एवं आयुक्त बर्मन ने बताया कि पिछली बार की अपेक्षा इस बार गाजर घांस कम मात्रा में दिखायी दे रहा है। पिछली बार अभियान चलाकर तथा जनसहयोग से शहर के अनेक वार्ड क्षेत्रों से गाजर घांस को जड़ से निकालकर शहर की सफाई की गई थी। इस बार भी निगम स्वास्थ्य विभाग का अमला अभियान के रुप में गाजर घांस निकालने का कार्य प्रारंभ किया है।
उन्होनें बताया अभियान के तहत् अब तक 11 वीं बटालियन के पास से होते हुये रायपुर नाका तक, मालवीय नगर चैक से जिला जेल के पीछे तक, जेल तिराहा से सुआ चैक होते हुये पुलगांव मिनीमाता चैक तक गाजर घांस निकालने का कार्य निरंतर किया जा रहा है। महापौर एवं आयुक्त बर्मन ने समस्त शहर वासियों, वार्ड निवासियों से अपील कर कहा कि गाजर घांस बारिश होते ही तेजी से फैलता है, इस घांस को मवेशी भी नहीं खाते, एवं व्यक्तियों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है और जल्दी प्रभाव डालता है। साथ ही शहर की स्वच्छता पर भी असर करता है। इसलिए गाजर घांस निकालने का कार्य प्रारंभ किया गया है।
निगम स्वास्थ्य विभाग के सुपरवाईजर परमेेश्वर के नेतृत्व में 40 कर्मचारी गाजर घांस निकालने का कार्य निरंतर कर रहे हैं । नया सिविल लाईन के अंदर भाग में अधिक मात्रा में गाजर घांस उग आया था जिसे निकाला गया। महापौर एवं आयुक्त ने समसत वार्ड नागरिकों से अपील कर कहा कि जहॉ भी गाजर घांस उग आया है उसे निकालने के लिए निगम स्वास्थ्य विभाग या परमेश्वर मो0 नं.-9340335450 में संपर्क कर सूचित कर शहर को गाजर घांस से मुक्त करने में सहयोग प्रदान कर सकते हैं।
दुर्ग / शौर्यपथ / महापौर धीरज बाकलीवाल कोरोना पोजिटिव होने के बाद होम आइसोलेशन में है . होम आइसोलेशन में रहते हुए महापौर बाकलीवाल ने शहर में मौसमी बिमारी और डेंगू का प्रोक्प ना फैले इसके लिए निगम के स्वास्थ्य अमला को शहर के क्षेत्रो में आवश्यक छिडकाव करने के निर्देश दिए है जिसके तहत स्वास्थ्य विभाग द्वारा शहर में डेंगू मच्छर से बचाव के लिए आज से अभियान प्रारंभ किया गया । इसके तहत् पूरे 60 वार्डो के प्रत्येक वार्डो में स्वच्छता निरीक्षक, सफाई सुपरवाईजरों के निगरानी में नालियों और गडढों में रुके पानी में जला आईल का छिड़काव कर मच्छर उन्मूलन का कार्य किया जावेगा ।
उल्लेखनीय है कि महापौर धीरज बाकलीवाल द्वारा शहर में मच्छर उन्मूल अभियान प्रारंभ करने अधिकारियों को निर्देशित किया इस अभियान के अंतर्गत आज सभापति राजेश यादव ने बैगापारा में शीतला मंदिर के सामने, पीछे भाग व स्टेडियम के आस-पास जहॉ-जहॉ रुका हुआ पानी था डेंगू का लार्वा पैदा हो सकता है ऐसे जगहों पर स्वयं खडेे होकर जला आईल का छिड़काव करायें। स्वास्थ्य प्रभारी हमीद खोखर के निर्देश पर राजेन्द्र पार्क के आस-पास जला आईल रुके हुये पानी में डाला गया। निगम आयुक्त श्री बर्मन ने सभी स्वच्छता निरीक्षक एवं सुपरवाईजरों को निर्देशित करते हुये कहा है कि मच्छर उन्मूलन कार्यक्रम के तहत् प्रतिदिन सभी अपने-अपने वार्ड क्षेत्र के नालियों, गड्ढों में रुके पानी में जला आईल डलवायें। रुके पानी में ही डेंगू मच्छर लार्वा से पैदा होता है। यह कार्य निरंतर जारी रखें। जला आईल छिड़काव के दौरान सभापति, स्वास्थ्य प्रभारी के अलावा स्वास्थ्य अधिकारी दुर्गेश गुप्ता, स्वच्छता निरीक्षण और सुपरवाईजर तथा कर्मचारी मौजूद थे।
कृषि कालेज का एक साल हुआ पूरा, पहले बैच ने पूरी की पहले साल की पढ़ाई
साल भर की गई कड़ी मेहनत से निखरने लगा भूमि अनुदेशक प्रक्षेत्र का रूप
इस बार शतप्रतिशत रिजल्ट, अब 48 छात्रों को मिलेगा प्रवेश
दुर्ग / शौर्यपथ / जिले के पहले सरकारी कृषि कालेज की सौगात मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पिछले साल इसी दिन दी थी। पाटन की समृद्ध धरा में प्रगतिशील किसानों की नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने, कृषि के क्षेत्र में हुनरमंद युवाओं को अवसर देने मुख्यमंत्री ने मर्रा में महाविद्यालय आरंभ करने का निर्णय लिया था। एक साल के भीतर महाविद्यालय की छोटी सी टीम ने इसका स्वरूप निखारने में कड़ी मेहनत की है। राज्य शासन ने यहां आधुनिक कृषि महाविद्यालय के लिए 87 एकड़ भूमि हस्तांतरित की। इसमें 72 एकड़ में भूमि अनुदेशक प्रक्षेत्र बनाने का निर्णय लिया गया। कृषि की पढ़ाई कमरों से अधिक फील्ड में होती है। इसके लिए फील्ड के आकार का चयन, फिर इसे तकनीकी जरूरतों के अनुरूप विकसित करने का जतन इस साल भर में हुआ। प्रोफेसर छात्रों के साथ अध्यापन कक्षों में रहे, फिर मर्रा के किसानों की भूमि में उन्हें ले गए। यहां उन्होंने फील्ड में पढ़ाई कराई। फिर बचे समय में वे भूमि अनुदेशक प्रक्षेत्र में आए, जिसे विकसित करना था। यहां मनरेगा मजदूरों के माध्यम से प्रक्षेत्र विकसित कराया गया। साढ़े सात सौ मजदूरों को जो मर्रा, आमालोरी और गुढिय़ारी के थे, उन्हें लाकडाउन के दौरान भी रोजगार मिला। महाविद्यालय के बुनियाद खड़ी करने में डीन डॉ. अजय वर्मा का बड़ा योगदान रहा। उन्होंने अपनी टीम के साथ अनुदेशक प्रक्षेत्र में साल भर कड़ी मेहनत की। प्रोफेसर धूप में पूरा दिन खड़े रहकर काम का निरीक्षण करते रहे और अनुदेशक क्षेत्र की जमीन निखरती रही। जब कृषि महाविद्यालय बनता है तो अकादमिक आयोजन भी होते हैं जिसमें विशेषज्ञ हिस्सा लेते हैं। डॉ. अजय वर्मा ने बताया कि यहां राज्य स्तरीय कृषि मेले का आयोजन किया गया। इसमें लगभग 500 किसानों ने हिस्सेदारी की। इसके संचालन और रखरखाव में भी रोजगार की संभावनाएं बढ़ी हैं। इसके लिए राज्य शासन ने 29 लाख रुपए महाविद्यालय को प्रदान किये। मशरूम उत्पादन के लिए 35 लाख रुपए प्रदान किये। भारत रत्न संत विनोबा भावे कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, मर्रा की स्थापना कर मुख्यमंत्री ने बड़ी पहल की है। इस साल यहाँ 48 छात्रों को एडमिशन मिल सकेगा। मुख्यमंत्री के मर्रा में शिक्षक रहे श्री हीरा सिंह ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने यहां पढ़ाई की, अब यहां उन्होंने कृषि के लिए महाविद्यालय शुरू कर दिया। यह उनकी गुरु दक्षिणा है।
दुर्ग / शौर्यपथ / तहसील ऑफिस में बुधवार को छत से लगा छज्जा भरभरा कर गिर गया। इससे वहां दहशत का माहौल व व्याप्त हो गया। इसकी जानकारी मिलने पर तहसीलदार आये और मौका मुआयना कर कार्यवाही की बात कहते हुए चले गये। ज्ञातव्य हो कि इससे पहले भी यहां पर छज्जा गिरने की घटना हो चुकी है, क्योंकि तहसील कार्यालय पूरी तरह जर्जर हो चुका है। छज्जा गिरने की घटना को लेकर तथा तहसील कार्यालय के जर्जर होने की यहां के वकीलों ने पहले भी शासन प्रशासन से शिकायतकर चुके है, इसके बावजूद भी इस ओर ध्यान नही दिया जा रहा है, ऐसा लग रहा है क शासन प्रशासन किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रही है।
धमतरी / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश अनुसार राज्य शासन द्वारा धमतरी के तेलीनसत्ती निवासी हरदेव सिन्हा के ईलाज के लिए पूरा व्यय 13 लाख 14 हजार 466 रूपए वहन किया गया है। मुख्यमंत्री सहायता कोष से उनके ईलाज में हुए व्यय को स्वीकृत किया गया है।
कलेक्टर जय प्रकाश मौर्य ने बताया कि धमतरी जिला प्रशासन द्वारा मुख्यमंत्री के निर्देश अनुसार रायपुर के निजी अस्पताल में श्री सिन्हा के ईलाज के समय उनके परिवार को हरसंभव मदद की गई। ज्ञात हो कि गत 29 जून को तेलीनसत्ती के हरदेव सिन्हा ने रायपुर स्थित सिविल लाइंस में आत्मदाह का प्रयास किया, जिन्हें तत्काल इलाज के लिए रायपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती किया गया। जुलाई के 22 तारीख को श्री सिन्हा की ईलाज के दौरान मृत्यु हो गई। उनकी धर्मपत्नी श्रीमती बसंती सिन्हा को दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी के रूप में नियुक्त करने तथा महिला एवं बाल विकास विभाग में संचालित योजनाओं के तहत उनकी इच्छा अनुरूप व्यवसाय करने ऋण दिलाने का सुझाव भी दिया गया है। श्रीमती सिन्हा ने श्रेष्ठ विकल्प पर विचार करने की बात कही है।
दुर्ग / शौर्यपथ / कलेक्टर डाॅ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने कलेक्ट्रेट सभागार में कोरोना संक्रमण की रोकथाम तथा अन्य विविध विषयों पर महत्वपूर्ण बैठक कलेक्ट्रेट में ली। उन्होंने कहा कि कोरोना पाजिटिव के चिन्हांकन होने पर कान्टैक्ट ट्रेसिंग का कार्य बेहद महत्वपूर्ण है। इस संबंध में जो टीम काम कर रही हैं वो सभी पहलुओं पर पूरा समय लेकर ध्यान दें ताकि कोई भी प्राइमरी कान्टैक्ट मिस न हो पाये। उन्होंने कहा कि सर्वे का कार्य भी बेहद महत्वपूर्ण है। सर्वे जितना अच्छे तरीके से होगा, संक्रमित मरीजों की पहचान में उतनी ही आसानी होगी। सर्वे कार्य में लगी टीमों को मास्क, सैनेटाइजर ग्ल्व्स वगैरह की सुविधा स्वास्थ्य विभाग सुनिश्चित कर लें। उन्होंने कहा कि प्राइवेट हास्पिटल में जो सांस की दिक्कत वाले मरीज आते हैं उनकी सूचना स्वास्थ्य विभाग तक अनिवार्यतः दी जाए। इसके साथ ही उन्होंने निगम अमले को कहा कि समय सीमा के बाद यदि दुकानें खुली पाई जाती हैं तो उन पर नियमतः कार्रवाई करें, इस संबंध में किसी भी तरह से ढिलाई नहीं दिखनी चाहिए। कंटेनमेंट एरिया में निगरानी सख्त हो, यहां किसी भी तरह से व्यावसायिक गतिविधियों का संचालन न हो, यह सुनिश्चित करें। डाटाबेस से फोन कर लोगों के स्वास्थ्य की जांच करते रहें। हास्पिटल में सारी व्यवस्थाओं पर निगाह रहें तथा किसी भी तरह से फीडबैक आने पर त्वरित कार्रवाई करें। बैठक में जिला पंचायत सीईओ श्री सच्चिदानंद आलोक, अपर कलेक्टर श्री प्रकाश सर्वे, श्री बीबी पंचभाई, सहायक कलेक्टर श्री जितेंद्र यादव सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
गिरदावरी पर भी करें फोकस- कलेक्टर ने गिरदावरी पर विशेष ध्यान देने के निर्देश अधिकारियों को दिए। उन्होंने कहा कि गिरदावरी जितनी बेहतर होगी, उतनी ही राजस्व विभाग को कार्य संचालन में सुविधा मिल सकेगी। इस संबंध में मुख्य सचिव महोदय एवं संभागायुक्त महोदय ने भी निर्देशित किया है। उन्होंने खाद की स्थिति पर नजर रखने को कहा। कृषि विभाग ने कहा कि बारिश की स्थिति अच्छी है इससे फसल को काफी मदद मिलेगी।
वर्मी कंपोस्ट टैंक की संरचना पर विशेष ध्यान दें- कलेक्टर ने कहा कि अब वर्मी कंपोस्ट पर फोकस करना है। जितने भी वर्मी टैंक बनाने के बारे में कहा है। उनका निर्माण कार्य समय पर पूरा कर लें। इसके किनारे नाली जरूर बनायें। ऐसी संरचना बनाएं कि चींटी नहीं आए। सभी गौठानों में वर्मी कंपोस्ट का उत्पादन सुनिश्चित कर लें। जिला पंचायत सीईओ ने बताया कि अभी 800 नये वर्मी टैंक बन चुके हैं और 12 सौ पर कार्य प्रगति पर है।
सड़कों पर गड्ढे नहीं दिखने चाहिएं- कलेक्टर ने कहा कि सड़कों पर जहां गड्ढे दिख रहे हैं वहां अस्थायी व्यवस्था के रूप में फिलिंग कराएं। इस संबंध में थोड़ा भी विलंब नहीं होनी चाहिए। सीएमओ इस कार्य की नियमित मानिटरिंग करें। इसके साथ ही वे गौठान की व्यवस्था की उचित मानिटरिंग भी करते रहें।
दसवीं, बारहवीं के मोहल्ला कक्षाएं आरंभ हों- कलेक्टर ने कहा कि दसवीं और बारहवीं के विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त सोशल डिस्टेंसिंग के साथ मोहल्ला कक्षाएं लगाई जाएं। यह ध्यान रखें कि सैनिटाइजेशन और सोशल डिस्टेंसिंग की पर्याप्त व्यवस्था हो। हर पखवाड़े में इनकी परीक्षाएं भी सुनिश्चित की जाएं। ऐसी कंपनियों को चिन्हांकित करें जो सीएसआर नहीं दे रही- उद्योग अधिकारी से उन्होंने कहा कि ऐसे उद्योगों को चिन्हांकित करें जिनसे सीएसआर का सहयोग नहीं आ रहा है। इस संबंध में शासन की गाइडलाइन के अनुरूप कार्रवाई करें।
दुर्ग / शौर्यपथ / कोरोना संकट को देखते हुए इंजीनियरिंग कालेज प्रबंधन छात्रों को इंस्टालमेंट में फीस देने की सुविधा उपलब्ध कराएं ताकि एक साथ वित्तीय भार अभिभावकों पर न पड़े। कलेक्टर डाॅ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने यह बात जिले के इंजीनियरिंग कालेज के प्रबंधकों की बैठक में कही। उन्होंने कहा कि इंस्टालमेंट से फीस देने की सुविधा देने से अभिभावकों को भी राहत मिलेगी और प्रबंधन को भी महाविद्यालय चलाने के लिए आवश्यक फीस मिल सकेगी। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में संतुलन के रास्ते से काम करना होगा। हमें देखना होगा कि अभिभावकों को किसी तरह की दिक्कत न हो, साथ ही कालेज प्रबंधन को भी समय-समय पर इंस्टालमेंट के रूप में फीस की राशि मिलती रहे ताकि उन्हें अपने महाविद्यालय के सुचारू रूप में संचालन में सहायता मिलती रहे। कलेक्टर ने कहा कि फीस शासन की निर्धारित गाइडलाइन के अनुरूप ही लें। इस संबंध में शासन द्वारा दिये गए निर्देशों के अनुरूप पालन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिले में तकनीकी शिक्षा की बेहतरी के लिए आपके सुझाव हमेशा आमंत्रित हैं। आपको किसी भी तरह से फीडबैक देना है आप प्रशासन से संपर्क कर सकते हैं। विद्यार्थियों को बेहतरीन तकनीकी शिक्षा मिल सके, इसी लक्ष्य को लेकर हम सब कार्य कर रहे हैं। बैठक में अपर कलेक्टर बीबी पंचभाई एवं डिप्टी कलेक्टर सुश्री दिव्या वैष्णव भी उपस्थित थीं।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
