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रायपुर ।
छत्तीसगढ़ लघु वेतन शासकीय चतुर्थ वर्ग कर्मचारी संघ, रायपुर के प्रदेश अध्यक्ष पद हेतु नामांकन कार्यक्रम शनिवार को दोपहर 1 बजे कर्मचारी भवन, रायपुर में शांतिपूर्ण एवं संगठनात्मक उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ।
प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए परशुराम धनेंद्र ठाकुर (पदनाम – भृत्य, विकासखंड शिक्षा विभाग, डौंडी) ने विधिवत रूप से अपना नामांकन पत्र प्रस्तुत किया। उनके नामांकन के प्रस्तावक कौशल कुमार अग्रवाल (पत्रवाहक, जल संसाधन विभाग) एवं समर्थक शेर सिंह भुवार्थ (चौकीदार, आदिम जाति विभाग, कुसुमलता) रहे।
नामांकन कार्यक्रम में संघ के कई वरिष्ठ पदाधिकारी एवं सदस्यगण गरिमामयी उपस्थिति में शामिल हुए। प्रमुख रूप से उदय शंकर छविराम यादव (संभागीय अध्यक्ष, रायपुर), देवनाथ यादव, सुरेश ढीढी (अध्यक्ष, इंद्रावती भवन), संगठन सचिव लोकेश वर्मा, डीडी सिंह, नरेंद्र साहू, देवेंद्र साहू, ईश्वर साहू, मोतीलाल खिलाड़ी (जिला अध्यक्ष, दुर्ग), शंभू गुप्ता (जिला अध्यक्ष, बलरामपुर) एवं राजू रवि (जिला मीडिया प्रभारी, बलरामपुर) विशेष रूप से उपस्थित रहे।
निर्वाचन प्रक्रिया का संचालन निर्वाचन अधिकारी घनश्याम शर्मा एवं सहायक निर्वाचन अधिकारी विनोद यादव द्वारा किया गया, जिन्होंने नामांकन पत्र प्रदान कर नियमानुसार प्रक्रिया पूर्ण कराई। पूरा कार्यक्रम अनुशासित, शांतिपूर्ण एवं संगठनात्मक एकता के वातावरण में सम्पन्न हुआ।
उक्त जानकारी लघु वेतन शासकीय चतुर्थ वर्ग कर्मचारी संघ, जिला दुर्ग के अध्यक्ष मोती राम खिलाड़ी द्वारा दी गई।
*263.17 करोड़ के 89 कार्यों के लोकार्पण-शिलान्यास से जिले को मिलेगी विकास की नई रफ्तार*
*होली से पहले किसानों को मिली बड़ी सौगात*
*बिलासपुर के रहंगी से मुख्यमंत्री ने किया प्रदेशभर के किसानों से वर्चुअल संवाद*
*सतनामी एवं आदिवासी समाज के सामुदायिक भवन के लिए 50-50 लाख रुपए की घोषणा*
रायपुर / शौर्यपथ/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज बिल्हा विकासखण्ड के रहंगी में कृषक उन्नति योजना अंतर्गत आयोजित आदान सहायता राशि वितरण समारोह एवं वृहद किसान सम्मेलन में प्रदेश के 25.28 लाख किसानों के खातों में 10 हजार 324 करोड़ रुपए से अधिक की राशि का अंतरण किया। इनमें बिलासपुर जिले के 1 लाख 25 हजार 352 किसान शामिल हैं, जिनके खातों में 494.38 करोड़ रुपए की राशि अंतरित की गई।
मुख्यमंत्री ने जिले के विकास को नई गति देते हुए 15.99 करोड़ रुपए की लागत से पूर्ण हुए 7 विकास कार्यों का लोकार्पण तथा 247.18 करोड़ रुपए की लागत के 82 विकास कार्यों का शिलान्यास किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय सहित अन्य अतिथियों का खुमरी और नांगर भेंटकर सम्मान किया गया। कार्यक्रम में ‘कृषक उन्नति योजना का वरदान, छत्तीसगढ़ का हर किसान धनवान’ थीम पर आधारित वीडियो का विमोचन भी किया गया।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आज का दिन किसान भाइयों के सम्मान का दिन है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के 25 लाख 28 हजार से अधिक किसानों ने धान बेचा है और कृषक उन्नति योजना के माध्यम से आज 10 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि किसानों के खातों में अंतरित की गई है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि किसान भाई होली का त्योहार अच्छे से मनाएं, इसलिए होली के पूर्व यह राशि प्रदान की जा रही है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारी सरकार किसान हितैषी सरकार है और किसानों की चिंता करते हुए उनके लिए प्रगतिशील योजनाएं लाई गई हैं।इस बार किसानों को बारदाने की कोई समस्या नहीं हुई और किसानों के खातों में राशि भी समय पर पहुंची है। उन्होंने कहा कि सरकार ने शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर किसानों को ऋण लेने की सुविधा प्रदान की है और आज लाखों किसान किसान क्रेडिट कार्ड का लाभ उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में किसानों को धान की सर्वाधिक कीमत देने की व्यवस्था की गई है, जो अन्यत्र कहीं नहीं है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि भूमिहीन कृषि मजदूरों के खातों में भी राशि अंतरित की जा रही है। खाद में सब्सिडी, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार सहित किसानों की समृद्धि के लिए हर स्तर पर कार्य किया जा रहा है तथा सहकारिता को लाभकारी बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा किसानों को 6000 रुपए सम्मान निधि की राशि प्रदान की जा रही है। इस वर्ष के बजट में कृषि के लिए 13 हजार करोड़ रुपए से अधिक का प्रावधान किसानों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता को दर्शाता है। किसानों को खेतों में पर्याप्त पानी मिले, इसके लिए सिंचाई सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज नक्सलवाद बस्तर क्षेत्र से समाप्ति की ओर है और इस दिशा में हम सफल हो रहे हैं। निश्चित रूप से मार्च 2026 तक प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी और केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह जी का संकल्प पूरा होगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ खनिज संसाधनों से परिपूर्ण राज्य है और खनिजों का समुचित दोहन कर राज्य को विकास के पथ पर आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। राज्य में पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए एनडीडीबी से समझौता किया गया है और अब छत्तीसगढ़ में भी दुग्ध क्रांति आने वाली है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारी सरकार ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की सभी गारंटियों को पूरा करने के लिए पूरी तत्परता से कार्य किया है और विगत दो वर्षों के कार्यकाल में अधिकांश वादों को पूरा कर लिया गया है। राज्य में सरकार बनते ही पहली कैबिनेट में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 18 लाख गरीब परिवारों को आवास स्वीकृत किए गए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा सुशासन एवं अभिसरण विभाग का गठन किया गया है तथा प्रशासन में पारदर्शिता लाने के लिए ई-ऑफिस प्रणाली लागू की गई है। मुख्यमंत्री ने सभी की सहभागिता से विकसित छत्तीसगढ़ बनाने के संकल्प को दोहराया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम में महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं। उन्होंने चकरभाटा में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उन्नयन करने, मंगला में माध्यमिक शाला को हाई स्कूल में उन्नयन तथा रहंगी के खेल मैदान में बाउंड्रीवॉल एवं स्टेज निर्माण की घोषणा की। इसके साथ ही मुख्यमंत्री श्री साय ने सतनामी समाज के सामुदायिक भवन के लिए 50 लाख रुपए तथा पत्थरखान में आदिवासी समाज के सामुदायिक भवन के लिए 50 लाख रुपए प्रदान करने की घोषणा की।
कृषि मंत्री श्री राम विचार नेताम ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि कृषि उन्नति योजना का लाभ देने के लिए मुख्यमंत्री जी किसानों के बीच आए हैं, यह बहुत ही ऐतिहासिक क्षण है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने आज 10 हजार 300 करोड़ रुपए से अधिक की राशि किसानों के खातों में सीधे अंतरित की है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में हर साल किसानों के खातों में धान की राशि अंतरित की जा रही है। उन्होंने किसानों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि धान से अधिक लाभ दलहन एवं तिलहन फसलों के उत्पादन में है और किसानों को फसल विविधीकरण अपनाना चाहिए।
कृषि मंत्री ने कहा कि खेती-किसानी में नवाचार और परिवर्तन से ही किसानों के जीवन में समृद्धि आएगी। प्रदेश में दुग्ध उत्पादन एवं मत्स्यपालन को बढ़ावा देने के लिए भी कार्ययोजना बनाकर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने किसानों को मिश्रित कृषि तथा जैविक खेती को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया तथा राशि अंतरित करने के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।
बिल्हा विधायक श्री धरमलाल कौशिक ने किसानों का स्वागत करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय किसानों के दर्द और मेहनत को समझते हैं और होली से पहले किसानों की मेहनत और पसीने की सौगात देने के लिए आज उनके बीच उपस्थित हुए हैं। अन्नदाताओं की मेहनत के कारण ही छत्तीसगढ़ खुशहाल है। विगत तीन वर्षों में चार लाख मीट्रिक टन से अधिक धान की खरीदी हुई है तथा 1 लाख 50 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि किसानों के खातों में अंतरित की गई है। मुख्यमंत्री श्री साय के नेतृत्व में सड़क, सिंचाई सहित विकास के सभी आयामों में बेहतर कार्य हुआ है और विकसित छत्तीसगढ़ की संकल्पना के साथ प्रदेश निरंतर आगे बढ़ रहा है।
कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती शाहला निगार ने प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत किसानों को आदान सहायता प्रदान की जाती है, जिसका उद्देश्य उनकी आजीविका को सुदृढ़ करना और आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाना है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 में 25 लाख से अधिक किसानों को 10 हजार करोड़ रुपए से अधिक की सहायता राशि प्रदान की जाएगी। साथ ही फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए किसानों को धान के साथ दलहन एवं तिलहन फसलों की ओर प्रोत्साहित किया गया है।
*मुख्यमंत्री से संवाद कर किसानों ने जताया आभार*
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने वर्चुअली जुड़कर प्रदेश के किसान हितग्राहियों से संवाद किया। जगदलपुर की महिला हितग्राही बसंती कश्यप ने बताया कि उनके खाते में 36 हजार रुपए की राशि आई है, जिससे वे होली का त्योहार अच्छे से मनाएंगे। कोरबा जिले के पहाड़ी कोरवा हितग्राही सुखन साय ने बताया कि उन्होंने 73 क्विंटल धान बेचा था और 53 हजार रुपए की राशि प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा कि इस राशि को वे घर बनाने में खर्च करेंगे। जांजगीर जिले के किसान समर्थ सिंह ने बताया कि उन्हें 1 लाख 41 हजार रुपए अंतर की राशि मिली है, जिसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री श्री साय को धन्यवाद दिया।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण भी किया।
कार्यक्रम में विधायक सर्वश्री श्री अमर अग्रवाल, श्री सुशांत शुक्ला, क्रेडा अध्यक्ष श्री भूपेन्द्र सवन्नी, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री राजेश सूर्यवंशी, पूर्व विधायक डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी, छत्तीसगढ़ राज्य पाठ्य पुस्तक निगम के अध्यक्ष श्री राजा पाण्डेय, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित के अध्यक्ष श्री रजनीश सिंह, महापौर श्रीमती पूजा विधानी सहित अन्य जनप्रतिनिधि, कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती शाहला निगार, मुख्यमंत्री के सचिव श्री पी दयानंद, संचालक कृषि श्री राहुल देव, कमिश्नर श्री सुनील जैन, आईजी श्री रामगोपाल गर्ग, कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल, एसएसपी श्री रजनेश सिंह, कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।
रायपुर । शौर्यपथ। जनसंपर्क विभाग में निरंतर 36 वर्षों तक उल्लेखनीय सेवाएं देने के बाद अपर संचालक श्री जवाहर लाल दरियो के सेवानिवृत्त होने के अवसर पर आज नवा रायपुर स्थित संवाद ऑडिटोरियम में एक गरिमामय विदाई समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में आयुक्त जनसंपर्क डॉ. रवि मित्तल सहित विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे और श्री दरियो को भावभीनी विदाई दी।
इस अवसर पर आयुक्त जनसंपर्क डॉ. रवि मित्तल ने श्री दरियो की कार्यनिष्ठा, कर्तव्यपरायणता और विभाग के प्रति उनके समर्पण की सराहना की। उन्होंने शॉल, श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर श्री दरियो के स्वस्थ, सुदीर्घ एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
अपर संचालक श्री उमेश मिश्रा ने श्री दरियो के साथ कार्यकाल के अनुभव साझा करते हुए बताया कि अविभाजित मध्यप्रदेश के इंदौर से स्थानांतरण के पश्चात उन्होंने ही कार्यभार ग्रहण किया था। वहीं अपर संचालक श्री संजीव तिवारी ने श्री दरियो की सरलता, सहज व्यवहार और दायित्वों के प्रति उनके समर्पण की प्रशंसा की।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए अपर संचालक श्री आलोक देव ने श्री दरियो के सेवा जीवन पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर श्री दरियो ने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से प्राप्त मार्गदर्शन एवं सहकर्मियों के सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सभी के सहयोग से ही वे अपने दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन कर सके।
दुर्ग। दुर्ग शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल ने संगठन को सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ऊर्जावान नेत्री निकिता मिलिंद को दुर्ग शहर कांग्रेस की कार्यकारिणी में महामंत्री की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है।
इस नियुक्ति को संगठन में नई ऊर्जा और महिला नेतृत्व को सशक्त करने के रूप में देखा जा रहा है। निकिता मिलिंद की सक्रियता, संगठनात्मक अनुभव और जमीनी पकड़ को देखते हुए पार्टी नेतृत्व ने उन पर विश्वास जताया है।
अपनी नियुक्ति पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए नवनियुक्त महामंत्री निकिता मिलिंद ने कहा कि वे वरिष्ठ नेतृत्व की हृदय से आभारी हैं, जिन्होंने उन्हें संगठन की सेवा का अवसर प्रदान किया। उन्होंने विशेष रूप से दुर्ग शहर कांग्रेस अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके विश्वास पर खरा उतरना उनकी प्राथमिकता रहेगी।
निकिता मिलिंद ने आगे कहा कि महामंत्री का यह पद उनके लिए सम्मान के साथ-साथ बड़ी जिम्मेदारी भी है। वे पूर्ण निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ संगठन को मजबूत करने तथा कांग्रेस की विचारधारा को जन-जन तक पहुँचाने के लिए सतत कार्य करेंगी।
दीपक वैष्णव की ख़ास रिपोर्ट
कोंडागांव। पंचायतों में वित्तीय अनियमितताओं पर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। कोंडागांव विकासखंड के ग्राम पंचायत सम्बलपुर में पदस्थ सचिव बालकृष्ण पोयाम एवं शंकर वैष्णव पर जांच उपरांत लघु शास्ति अधिरोपित की गई है।
जांच में यह तथ्य सामने आया कि पंचायत निधि से अनियमित तरीके से राशि आहरित की गई। आरोप है कि संबंधित सचिवों द्वारा स्वयं से संबंधित फर्म के माध्यम से भुगतान आहरण किया गया। इस मामले को समाचार पत्र शौर्यपथ ने प्रमुखता से उजागर किया था, जिसके पश्चात शिकायत के आधार पर विधिवत जांच प्रारंभ की गई।
जिला पंचायत सीईओ अविनाश भोई द्वारा प्रारंभिक परीक्षण के पश्चात दोनों सचिवों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। प्राप्त स्पष्टीकरण संतोषजनक न पाए जाने तथा प्रस्तुत कथन तथ्यविहीन पाए जाने पर यह कृत्य छत्तीसगढ़ पंचायत सेवा (आचरण) नियम 1998 के नियम 15 के विपरीत माना गया।
फलस्वरूप सक्षम प्राधिकारी द्वारा छत्तीसगढ़ पंचायत सेवा नियम 1999 के नियम 5(क)(दो) के अंतर्गत लघु शास्ति अधिरोपित करते हुए दोनों की एक वेतन वृद्धि संचयी प्रभाव से रोके जाने का आदेश पारित किया गया। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है
उल्लेखनीय है कि शौर्यपथ द्वारा बम्हनी सहित अन्य पंचायतों में भी वित्तीय अनियमितताओं के मामलों को उजागर किया गया है। सूत्रों के अनुसार कुछ अन्य पंचायतों में भी बड़ी राशि आहरण की जांच प्रचलन में है और आने वाले दिनों में और कार्रवाई संभव है।
जिला पंचायत प्रशासन के इस कदम को पंचायत व्यवस्था में पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दुर्ग। शौर्यपथ
जिला कांग्रेस कमेटी दुर्ग में ऊर्जावान, जमीनी और संघर्षशील युवा नेता राहुल शर्मा को पुनः जिला महामंत्री बनाए जाने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं, युवाओं, वरिष्ठ नेताओं और आमजन में हर्ष और उत्साह की लहर है। उनकी नियुक्ति को संगठन में ऊर्जा, अनुभव और निरंतरता का प्रतीक माना जा रहा है।
राहुल शर्मा का राजनीतिक सफर 2005 में नगर शाला अध्यक्ष के रूप में शुरू हुआ। इसके बाद
2006 में एनएसयूआई दुर्ग विधानसभा के उपाध्यक्ष,
2008–09 में मध्य ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के महामंत्री,
2010–2012 तथा 2012–2018 तक श्री आर.एन. वर्मा के नेतृत्व में सचिव एवं महामंत्री,
2018 में गया पटेल की अध्यक्षता वाली समिति में महामंत्री के रूप में उन्होंने संगठन को मजबूती दी।
अब 2026 में उन्हें एक बार फिर जिला महामंत्री का दायित्व सौंपा गया है, जो उनके संगठनात्मक कौशल और नेतृत्व पर विश्वास को दर्शाता है।
राहुल शर्मा का नाम केवल पदों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वे आंदोलनों और जनसंघर्षों में भी अग्रिम पंक्ति में रहे हैं। 2012 में नगर निगम दुर्ग के खिलाफ जनसमस्याओं को लेकर हुए आंदोलन में उनके विरुद्ध प्रकरण दर्ज हुआ, जिसमें वे विवेक मिश्रा, इलियास चौहान, अय्यूब खान, प्रकाश गीते और रज्जन खान के साथ 6 दिन जेल भी गए। इसे उनके संघर्षशील और निडर राजनीतिक जीवन का अहम अध्याय माना जाता है।
अपनी नियुक्ति पर राहुल शर्मा ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व विधायक अरुण वोरा, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री राजेंद्र साहू, तथा शहर कांग्रेस कमेटी दुर्ग के अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्हें धन्यवाद दिया।
उनकी नियुक्ति पर बधाई देने वालों में युवा साथियों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं की लंबी सूची शामिल है, जिनमें प्रमुख रूप से सुरेश गुप्ता, पिंकी गुप्ता, आशुतोष सिंह, विवेक मिश्रा, नासिर खोखर, विकास पुरोहित, सुरेश देवांगन, प्रकाश शर्मा, गुरदीप भाटिया, विकास राठी, सरोज यादव, प्रवीण चन्द्राकर, छोटे लाला यादव, राकेश सिन्हा, मनीष सोनवानी, लक्ष्मण शर्मा, विक्रांत शर्मा, राजू यादव, योगेश शर्मा, अनूप सिन्हा, विक्की यादव, प्रवीण सिंह, आशीष मेश्राम, सूर्यमणि मिश्रा, बाला पीढ़ियार, सौरभ पांडे, रिंकू शुक्ला, मोनू शर्मा, अजित शुक्ला सहित अनेक कार्यकर्ता शामिल हैं।
कुल मिलाकर, राहुल शर्मा की पुनर्नियुक्ति को दुर्ग कांग्रेस संगठन के लिए मजबूती, युवा नेतृत्व और संघर्ष की नई ऊर्जा के रूप में देखा जा रहा है।
दुर्ग कांग्रेस में नेतृत्व संकट, संगठन सवालों के घेरे में
दुर्ग। शौर्यपथ राजनीति
दुर्गनगर निगम के पूर्व महापौर के रूप में धीरज बाकलीवाल की पहचान एक शालीन, सौम्य और मिलनसार जनप्रतिनिधि की रही है। आम जनता के बीच उनका व्यवहारिक व्यक्तित्व स्वीकार्य रहा, लेकिन सक्रिय संगठनात्मक राजनीति में कदम रखते ही उनकी भूमिका पर अब गंभीर प्रश्न उठने लगे हैं। शहर कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद जिस ऊर्जा, आक्रामकता और जमीनी सक्रियता की अपेक्षा कार्यकर्ताओं को थी, वह अब तक दिखाई नहीं दे सकी है।
अध्यक्ष नियुक्ति के साथ ही सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक मीम—जिसमें पैसे देकर अध्यक्ष बनने का तंज कसा गया—को शुरुआत में लोगों ने हल्के-फुल्के व्यंग्य के तौर पर लिया। लेकिन बीते कुछ महीनों की संगठनात्मक कार्यप्रणाली ने उस मज़ाक को अब एक राजनीतिक बहस में बदल दिया है। कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा आम हो चुकी है कि क्या दुर्ग कांग्रेस वास्तव में मजबूत हो रही है या सिर्फ चेहरों का बदलाव हुआ है?
वरिष्ठ नेताओं से दूरी, कमजोर पकड़ का संकेत
धीरज बाकलीवाल के अध्यक्षीय कार्यकाल में सबसे बड़ा सवाल उनकी वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं से बढ़ती दूरी को लेकर खड़ा हो रहा है। दीपक दुबे, आर.एन. वर्मा, अरुण वोरा जैसे अनुभवी नेताओं का मंच से धीरे-धीरे गायब होना केवल संयोग नहीं माना जा रहा। इसके विपरीत, जनसमर्थन खो चुके और सीमित प्रभाव वाले चेहरों के साथ नज़दीकियां संगठन की दिशा पर सवाल खड़े करती हैं।
यह तुलना स्वाभाविक रूप से भाजपा संगठन से की जा रही है, जहां आज भी चंद्रिका चंद्राकर, उषा टावरी, रमशिला साहू, लाभचंद बाफना जैसे वरिष्ठ नेताओं को सम्मान, मंच और संगठनात्मक स्थान प्राप्त है। भाजपा में वरिष्ठ-कनिष्ठ संतुलन को संगठनात्मक मजबूती की रीढ़ माना जाता है, जबकि दुर्ग कांग्रेस में यही संतुलन टूटता नजर आ रहा है।
कार्यकारिणी बनी, लेकिन नाराज़गी भी
जिला व शहर कार्यकारिणी की घोषणा के बाद असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। अनुभवी और संघर्षशील नेताओं को दरकिनार कर अपेक्षाकृत नए और अनुभवहीन लोगों को बड़ी जिम्मेदारियां देना अब चर्चा का विषय बन चुका है। यह नाराज़गी केवल बंद कमरों तक सीमित नहीं रही—कई कार्यकर्ता सोशल मीडिया के माध्यम से प्रदेश नेतृत्व तक अपनी पीड़ा पहुंचाने लगे हैं।
हाल ही में कांग्रेस कार्यालय से जारी एक तस्वीर, जिसमें अध्यक्ष सभी पदाधिकारियों से मुलाकात करते दिखाई देने थे, उल्टा असर डाल गई। तस्वीर में चंद लोगों की मौजूदगी ने यह सवाल खड़ा कर दिया कि क्या संगठन के भीतर ही संवाद टूट रहा है?
भूपेश बघेल की पसंद पर भी सवाल
धीरज बाकलीवाल का चयन छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुके भूपेश बघेल की पसंद के रूप में हुआ। ऐसे में अब जब संगठनात्मक निष्क्रियता और असंतोष की खबरें सामने आ रही हैं, तो आलोचना की आंच भूपेश बघेल तक भी पहुंचने लगी है। हालांकि यह स्पष्ट है कि चयन के बाद संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी शहर अध्यक्ष की होती है।
नेता प्रतिपक्ष की निष्क्रियता ने बढ़ाई मुश्किलें
दुर्ग नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष के रूप में संजय कोहले की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। बदहाल निगम व्यवस्था, जनसमस्याएं और प्रशासनिक विफलताओं के बावजूद विपक्ष की आवाज़ कमजोर रही है। इसे भी धीरज बाकलीवाल के निर्णयों और नेतृत्व क्षमता से जोड़कर देखा जा रहा है।
अस्तित्व की लड़ाई या नई शुरुआत?
आज दुर्ग कांग्रेस एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। सवाल साफ है—
क्या धीरज बाकलीवाल मजबूत इच्छाशक्ति, स्पष्ट निर्णय और समावेशी नेतृत्व के साथ मैदान में उतरेंगे?
या फिर कांग्रेस दुर्ग में केवल दस्तावेजों और पुरानी स्मृतियों तक सिमट कर रह जाएगी?
आने वाले चुनाव सिर्फ सत्ता की नहीं, बल्कि कांग्रेस के संगठनात्मक अस्तित्व की परीक्षा होंगे। अब देखना यह है कि अध्यक्ष पद की कुर्सी धीरज बाकलीवाल के लिए अवसर बनती है या उनकी राजनीतिक उलटी गिनती की शुरुआत।
मुख्यमंत्री साय के ‘सुशासन’ पर भारी पड़ता मुरम माफिया का खुला खेल!
दुर्ग (ग्रामीण)।
दुर्ग जिले के ग्रामीण अंचलों में अवैध मुरम मिट्टी उत्खनन और परिवहन अब छुपा हुआ नहीं, बल्कि खुलेआम संचालित हो रहा है। हैरानी की बात यह है कि लगातार शिकायतों, फोटो, लोकेशन और जमीनी साक्ष्यों के बावजूद जिला खनिज विभाग के जिम्मेदार अधिकारी खनिज इंस्पेक्टर दीपक तिवारी की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। इससे न केवल किसानों की जमीन तबाह हो रही है, बल्कि शासन को लाखों-करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान की आशंका भी गहराती जा रही है।
नदी मुहाने से 35 एकड़ तक मुरम की ‘लूट’
चंगोरी क्षेत्र में नदी के मुहाने के पास स्थित लगभग 35 एकड़ खेत में मुरम मिट्टी की पटिंग का कार्य लगभग पूरा कर लिया गया, जबकि इस पूरे कार्य से संबंधित कोई वैधानिक अनुमति, रॉयल्टी रसीद या खनिज पास सामने नहीं आया है।
स्थानीय ग्रामीणों का दावा है कि इस स्थल से हजारों गाड़ियों में मुरम मिट्टी का परिवहन किया गया, जो सीधे तौर पर अवैध खनन और परिवहन की श्रेणी में आता है।
बिरेझर में खेत नहीं, खदान तैयार
बिरेझर क्षेत्र के किसानों ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि राजा स्टील के संचालक मनोज द्वारा खेत बनाने के नाम पर 8 से 10 फीट तक गहरी खुदाई कर मुरम मिट्टी निकाल ली गई।
परिणामस्वरूप खेत उपज योग्य रहने के बजाय गड्ढों में तब्दील हो गए। अब किसान अपने ही खेतों को फिर से उपयोगी बनाने के लिए अतिरिक्त खर्च और भारी संघर्ष झेलने को मजबूर हैं।
शिकायतें पहुँचीं, कार्रवाई शून्य
इन सभी मामलों की जानकारी खनिज विभाग को दी गई, इसके बावजूद न तो मौके का निरीक्षण हुआ और न ही अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए कोई सख्त कदम उठाया गया।
खनिज इंस्पेक्टर दीपक तिवारी की यह निष्क्रियता अब केवल लापरवाही नहीं, बल्कि संरक्षण और मिलीभगत के संदेह को जन्म दे रही है।
सवालों से बचते दिखे जिम्मेदार अधिकारी
जब इस पूरे मामले में हमारी टीम ने खनिज इंस्पेक्टर दीपक तिवारी से उनका पक्ष जानना चाहा, तो वे पहले कार्यालय में अनुपस्थित बताए गए।
लगातार प्रयासों के बाद जब उनकी उपस्थिति मिली, तब भी घंटों तक इंतजार कराया गया। इस दौरान वे ठेकेदारों के साथ चाय-नाश्ता और लंबी बातचीत में व्यस्त नजर आए, लेकिन मीडिया / शिकायतकर्ताओं के सवालों का जवाब देने से बचते रहे।यह रवैया अपने आप में गंभीर संदेह को और गहरा करता है।
उतई–मोरिद में भी अवैध खनन, फिर भी जांच नदारद
हाल ही में एक और गंभीर मामला सामने आया है।उतई क्षेत्र के ग्राम मोरिद, तहसील भिलाई-3 अंतर्गत दुर्गा फार्म के पास खुलेआम मुरम मिट्टी का अवैध उत्खनन और परिवहन जारी है।
इस संबंध में लोकेशन फोटो और शिकायत खनिज विभाग को भेजे जाने के बावजूद तीन दिन बीत जाने के बाद भी खनिज इंस्पेक्टर दीपक तिवारी मौके पर जांच के लिए नहीं पहुंचे।
नाकाबंदी बंद, विभाग मुख्यालय में जमे अधिकारी
विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिले के सभी खनिज नाके बंद कर दिए गए हैं, और अधिकांश कर्मचारी व अधिकारी जिला मुख्यालय में ही जमे हुए हैं।
ऐसे में सवाल उठता है कि जब अवैध खनन की शिकायतें बढ़ रही हैं, तब जमीनी निगरानी क्यों खत्म कर दी गई?
20 वर्षों से अवैध उत्खनन का आरोप
भिलाई-3 क्षेत्र अंतर्गत पवन यदु द्वारा पिछले लगभग 20 वर्षों से अवैध उत्खनन किए जाने के आरोप भी सामने आए हैं।
यदि यह तथ्य सही है, तो यह केवल एक-दो मामलों की बात नहीं, बल्कि खनिज विभाग की वर्षों पुरानी विफलता या मौन सहमति की ओर इशारा करता है।
राजस्व नुकसान या खुला संरक्षण?
खनिज संपदा से प्राप्त राजस्व जिला प्रशासन की सबसे बड़ी आय का स्रोत माना जाता है।
खेत निर्माण, भारतमाला परियोजना और निजी संस्थाओं की आड़ में हो रहा यह अवैध खनन न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि सीधे-सीधे सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने वाला कृत्य है।
अब बड़ा सवाल यह है कि—
क्या यह सब लापरवाही है या फिर सुनियोजित संरक्षण?
क्या कलेक्टर को भी गुमराह किया जा रहा है?
खनिज विभाग सीधे तौर पर जिला कलेक्टर के अधीन कार्य करता है। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि
क्या खनिज इंस्पेक्टर दीपक तिवारी वास्तविक स्थिति से कलेक्टर को अवगत नहीं करा रहे, या फिर जानबूझकर जानकारी छिपाई जा रही है?
सुशासन बनाम जमीनी हकीकत
एक ओर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय प्रदेश में सुशासन की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर दुर्ग जिले में खनिज विभाग की यह कार्यप्रणाली सरकारी दावों पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर रही है।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि—
क्या उच्च स्तर पर निष्पक्ष जांच होगी?
क्या दोषियों पर कार्रवाई कर राजस्व की भरपाई की जाएगी?
या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों के नीचे दबा दिया जाएगा?
दुर्ग की जनता और किसान जवाब का इंतजार कर रहे हैं।
दुर्ग। शौर्यपथ।
शहर को सुंदर, स्वच्छ और अतिक्रमण-मुक्त बनाने को लेकर दुर्ग नगर निगम और शहरी सरकार की मुखिया महापौर श्रीमती अलका बाघमार द्वारा जारी की जा रही प्रेस विज्ञप्तियाँ देखने-पढ़ने में जितनी प्रशंसनीय लगती हैं, जमीनी हकीकत उससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है। नगर निगम के अतिक्रमण विभाग द्वारा की जा रही कार्रवाई ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या दुर्ग में कानून सभी के लिए समान है या फिर यह अमीर-गरीब देखकर लागू किया जा रहा है?
शहरी सरकार के निर्देश पर हाल ही में गरीब पसरा व्यापारियों और फुटपाथ पर रोजी-रोटी कमाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की गई। उनका सामान जब्त कर लिया गया, वर्षों से चला आ रहा छोटा-सा व्यवसाय छीन लिया गया। दो वक्त की रोटी कमाने वाले इन लोगों को “अतिक्रमण-मुक्त शहर” के नाम पर बेरोजगार कर दिया गया।
परंतु इसी शहर के इंदिरा मार्केट स्थित गणेश मंदिर के सामने एक बिल्कुल अलग तस्वीर देखने को मिलती है। यहां सड़क की जमीन पर बड़े पैमाने पर ‘राम रसोई’ का संचालन खुलेआम किया जा रहा है। जनहित का नाम लिया जा रहा है, लेकिन वास्तविकता यह है कि यहां एक होटलनुमा व्यावसायिक संचालन हो रहा है, जहां बाकायदा ₹20 प्रति थाली की तय कीमत रखी गई है।
जनहित के कार्यों पर किसी को आपत्ति नहीं, बल्कि यह सराहनीय है कि शहर के बड़े व्यापारी समाजसेवा में आगे आए हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या जनहित के नाम पर सड़क की जमीन पर कब्जा जायज हो जाता है?
अगर यही नियम है, तो शहर में दर्जनों संस्थाएं हैं जो जनसेवा करती हैं—क्या सभी को सड़कों पर कब्जा करने की छूट दी जाएगी?
संविधान की नजर में अमीर और गरीब एक समान हैं, फिर दुर्ग में यह भेदभाव क्यों?
क्या नगर निगम की कार्रवाई सिर्फ गरीबों के लिए है और प्रभावशाली लोगों के लिए नियम बदल जाते हैं?
इतना ही नहीं, निगम कर्मचारियों से मिली जानकारी के अनुसार महापौर अलका बाघमार ने नगर निगम के व्यावसायिक परिसरों के बरामदों में व्यापार करने की अनुमति भी दे दी है। बड़ा सवाल यह है कि—
➡️ क्या किसी महापौर को यह संवैधानिक अधिकार है कि वह आम जनता के लिए बने बरामदों को दुकानों में तब्दील करने की अनुमति दे?
➡️ क्या दुर्ग नगर निगम क्षेत्र में संविधान चलेगा या महापौर का निजी आदेश?
दुर्ग। शौर्यपथ। भारतीय जनता पार्टी पर “दागदार नेताओं को सर्फ से धोकर राजनीति में शामिल करने” का आरोप लगाने वाली कांग्रेस अब खुद उसी आरोपों के घेरे में नजर आ रही है। दुर्ग ग्रामीण कांग्रेस की नई कार्यकारिणी समिति के गठन के बाद महामंत्री पद पर लक्ष्मी साहू की नियुक्ति ने संगठन के भीतर और बाहर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है।
हाल ही में घोषित ग्रामीण कांग्रेस की जंबो कार्यकारिणी में पूर्व जिला पंचायत सदस्य लक्ष्मी साहू को महामंत्री बनाया गया। जैसे ही उनका नाम सूची में सामने आया, राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। सवाल उठने लगे—क्या दुर्ग ग्रामीण कांग्रेस में साफ-सुथरी छवि वाले नेताओं की कमी हो गई है? या फिर कांग्रेस भी अब उसी “वाशिंग मशीन” राजनीति की राह पर है, जिसका वह विरोध करती रही है?
नियुक्ति पर उठे सवाल, संगठन में असंतोष की आहट
वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में जब कांग्रेस पहले से ही बैकफुट पर मानी जा रही है, ऐसे समय में यह नियुक्ति पार्टी के भीतर असहजता का कारण बन गई है। सूत्रों के अनुसार, कुछ कांग्रेसी सदस्य ही इस निर्णय पर सवाल उठा रहे हैं। चर्चा का केंद्र दुर्ग ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष राकेश ठाकुर की कार्यशैली भी बन गई है।
लक्ष्मी साहू का नाम हाल ही में एक विवाद के कारण भी सुर्खियों में रहा है। रसमड़ा निवासी संतोष रामटेक ने पुलिस अधीक्षक को शिकायत सौंपकर लक्ष्मी साहू, उनके पति यशवंत साहू और मोनिका साहू पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत में आरोप है कि कांग्रेस पार्टी के नाम पर नौकरी दिलाने का झांसा देकर पैसे लिए गए और कार्य न होने पर रकम वापस मांगने पर कथित रूप से धमकी दी गई। संतोष रामटेक ने यह भी दावा किया है कि उनकी मां के साथ मारपीट की गई, जिसका वीडियो उन्होंने सबूत के तौर पर प्रस्तुत करने की बात कही है।
हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि या पुलिस द्वारा किसी निर्णायक कार्रवाई की जानकारी अभी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है, लेकिन राजनीतिक चर्चा में इन आरोपों का उल्लेख प्रमुखता से हो रहा है।
क्या संगठन को अंधेरे में रखा गया?
लक्ष्मी साहू की नियुक्ति के बाद यह भी चर्चा उठी कि क्या राकेश ठाकुर ने संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को विश्वास में लिया था? क्या यह निर्णय सर्वसम्मति से हुआ या शीर्ष स्तर पर तय कर दिया गया?
राकेश ठाकुर की ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति के समय भी संगठन के भीतर विरोध के स्वर सुनाई दिए थे। ऐसे में अब यह नया विवाद उनके नेतृत्व पर दोबारा सवाल खड़े कर रहा है। यह भी कहा जा रहा है कि हाल ही में लक्ष्मी साहू का रामटेक परिवार से विवाद सामने आया था, जिससे यह मुद्दा और संवेदनशील बन गया है।
‘काबिलियत या सेटिंग’ की बहस
संगठन के भीतर यह भी फुसफुसाहट है कि क्या नियुक्तियां काबिलियत के आधार पर हो रही हैं या “सेटिंग” के जरिए? क्या कांग्रेस में सर्वसम्मति और सामूहिक निर्णय की परंपरा कमजोर पड़ रही है?
पूर्व में भी राकेश ठाकुर पर दुर्ग में कांग्रेसी नेताओं के फोटो पोस्टरों से हटवाने को लेकर विवाद खड़ा हो चुका है। ऐसे में यह नया घटनाक्रम उनकी कार्यप्रणाली को लेकर आलोचनाओं को और बल दे रहा है।
कांग्रेस की छवि पर असर?
राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप और चर्चा होना सामान्य बात है, लेकिन जब हर चर्चा नकारात्मक दिशा में जाए तो उसका असर संगठन की छवि पर पड़ना स्वाभाविक है। दुर्ग ग्रामीण कांग्रेस अब अपनी जंबो टीम के साथ राजनीतिक मुकाबले के लिए मैदान में उतर चुकी है, लेकिन यह देखना दिलचस्प होगा कि यह चयन प्रक्रिया भविष्य में संगठन को मजबूती देती है या आंतरिक असंतोष को और बढ़ाती है।
फिलहाल, लक्ष्मी साहू की नियुक्ति ने दुर्ग की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है। आने वाले समय में पुलिस जांच और संगठनात्मक प्रतिक्रिया किस दिशा में जाती है, यही तय करेगा कि यह विवाद अस्थायी राजनीतिक शोर है या कांग्रेस के लिए दीर्घकालिक चुनौती।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
