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बालोद (डौंडीलोहारा )गजईडीह, - बस्तर पुलिस के वीर सपूत शहीद आरक्षक स्व. खिलावन सिंह कोकिला की 19वीं पुण्यतिथि आज गुरुवार को उनके गृह ग्राम गजईडीह में पूरे राजकीय सम्मान के साथ मनाई जाएगी।
12 अप्रैल 1976 को जन्मे खिलावन सिंह कोकिला ने 28 मई 2007 को कर्तव्य पथ पर अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। शहीद की स्मृति में * सुबह 11 बजे ग्राम गजईडीह* में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया है।
चौंकी प्रभारी अरविंद साहू हुए शामिल
कार्यक्रम में चौंकी प्रभारी अरविंद साहू पुलिस बल के साथ शहीद को श्रद्धासुमन अर्पित किए,उन्होंने कहा कि "शहीद खिलावन सिंह कोकिला का बलिदान बस्तर पुलिस के लिए गर्व का विषय है। उनका शौर्य नई पीढ़ी के पुलिस जवानों को हमेशा कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा देता रहेगा। हम सब उनके परिवार के साथ खड़े हैं।"
परिवार का आग्रह
शहीद की माता ढेलु बाई कोकिला, पत्नी शशिकला कोकिला और पुत्र विनय कोकिला ने क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, गणमान्य नागरिकों और युवाओं ने कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की है।
बस्तर पुलिस के इस वीर सपूत का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। "शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पर मिटने वालों का यही बाकी निशां होगा"
*मुख्यमंत्री श्री साय ने दी बधाई और शुभकामनायें*
रायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से भारतीय वन सेवा (IFS) के लिए चयनित रायगढ़ जिले के संबलपुरी गांव निवासी श्री अजय गुप्ता ने सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री श्री साय ने अजय को भारतीय वन सेवा में चयनित होने पर बधाई देते हुए इसे पूरे छत्तीसगढ़, विशेषकर वनांचल क्षेत्र के लिए गौरव और प्रेरणा का क्षण बताया।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि अजय गुप्ता ने केवल अपने माता-पिता का ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश का मान बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत प्रेरणादायी है कि एक ऐसा युवा, जिसने बचपन में जंगलों में तेंदूपत्ता और महुआ संग्रह कर परिवार का हाथ बंटाया, आज उन्हीं जंगलों के संरक्षण और संवर्धन की जिम्मेदारी निभाने जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि बताती है कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती, बल्कि अवसर और संकल्प मिल जाए तो दूरस्थ अंचलों के युवा भी देश की सर्वोच्च सेवाओं में अपनी जगह बना सकते हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार की ‘लघु वनोपज संघ छात्रवृत्ति’ तथा ‘पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति’ जैसी योजनाओं ने अजय जैसे प्रतिभाशाली युवाओं की राह आसान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि अजय की सफलता वनांचल समाज के सपनों, संघर्ष और आत्मविश्वास की जीत है तथा यह हजारों युवाओं को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस देगी।
उल्लेखनीय है कि रायगढ़ जिले के संबलपुरी गांव में साधारण परिवेश में पले-बढ़े अजय गुप्ता का बचपन जंगलों, वनोपज संग्रहण और खेती-किसानी के बीच बीता। छुट्टियों के दौरान वे अपने माता-पिता के साथ जंगलों में जाकर तेंदूपत्ता और महुआ एकत्रित करते थे। आर्थिक अभावों के बावजूद उन्होंने शिक्षा को अपनी प्राथमिकता बनाया और 10वीं में 92.66 प्रतिशत तथा 12वीं में 91.40 प्रतिशत अंक प्राप्त कर अपनी मेधा का परिचय दिया।
उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन के आधार पर अजय को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) रायपुर में प्रवेश मिला, जहां अध्ययन के दौरान उन्हें तीन वर्षों तक छात्रवृत्ति का लाभ मिला। अजय ने कठिन परिस्थितियों के बीच अध्ययन जारी रखते हुए भारतीय वन सेवा परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर 91वीं रैंक प्राप्त की और अपने सपनों को साकार किया।
अजय गुप्ता ने बताया कि प्रारंभिक जीवन में उनके सपने सीमित थे और लगता था कि दुनिया गांव तक ही सीमित है, लेकिन उच्च शिक्षा और नए अनुभवों ने उनके सोचने का दायरा विस्तृत किया। उन्होंने कहा कि जंगल उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा रहा है और बचपन से प्रकृति के साथ बने इसी जुड़ाव ने उन्हें वन सेवा में जाने की प्रेरणा दी। उनका मानना है कि जंगल ने उन्हें केवल आजीविका ही नहीं, बल्कि जीवन की दिशा भी दी है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि अजय की सफलता प्रदेश के उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं। उन्होंने कहा कि सही अवसर, मार्गदर्शन, मेहनत और शासन के सहयोग से गांवों और वनांचल क्षेत्रों के युवा भी देश के सर्वोच्च पदों तक पहुंच सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि अजय गुप्ता जैसे युवा आने वाली पीढ़ियों को संघर्ष, आत्मविश्वास और संकल्प की शक्ति का संदेश देंगे तथा छत्तीसगढ़ के युवाओं को नई दिशा और नई प्रेरणा प्रदान करेंगे।
दीपक बैज और टी.एस. बाबा के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने दिखाई एकजुटता
छत्तीसगढ़ राजनीतिक।Deepak Baij और T. S. Singh Deo के नेतृत्व में विश्रामपुर में भाजपा सरकार के खिलाफ कांग्रेस का संघर्ष लगातार तेज होता जा रहा है। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भाजपा पर दमनकारी राजनीति करने तथा कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ अन्यायपूर्ण व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए बड़ा आंदोलन छेड़ने का संकेत दिया है।
विश्रामपुर में आयोजित बैठक एवं प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं पर हो रहे अन्याय को अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सभा में मौजूद कांग्रेस पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर भाजपा सरकार के खिलाफ संघर्ष को और मजबूत करने का संकल्प लिया।
सभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास दुर्भाग्यपूर्ण है। भाजपा सरकार प्रशासनिक दबाव और राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से काम कर रही है, लेकिन कांग्रेस कार्यकर्ता डरने वाले नहीं हैं। पार्टी पूरी ताकत और मजबूती के साथ जनता की आवाज उठाती रहेगी।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता, पदाधिकारी और समर्थक मौजूद रहे। सभी नेताओं ने एक स्वर में कहा कि यह लड़ाई केवल कांग्रेस की नहीं बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और जन अधिकारों की रक्षा की लड़ाई है।
कांग्रेस नेताओं ने कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि पार्टी का हर वरिष्ठ नेता संघर्ष की इस घड़ी में उनके साथ मजबूती से खड़ा है और अन्याय के खिलाफ यह आंदोलन आगे भी लगातार जारी रहेगा।
नई दिल्ली। C. Joseph Vijay सरकार ने एक बेहद संवेदनशील मामले में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई कोयंबटूर के सुलूर क्षेत्र में 10 वर्षीय मासूम बच्ची के अपहरण, यौन उत्पीड़न और हत्या के मामले में अधिकारियों के कथित असंवेदनशील व्यवहार को लेकर की गई।
क्या है पूरा मामला?
25 मई 2026 को इस जघन्य अपराध मामले को लेकर पुलिस द्वारा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई थी। प्रेस वार्ता शुरू होने से ठीक पहले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो में पुलिस महानिरीक्षक (IGP) R. V. Ramya Bharati सहित तीन वरिष्ठ अधिकारी हल्के-फुल्के अंदाज में हंसते और मुस्कुराते दिखाई दिए।
यह दृश्य ऐसे समय सामने आया जब पूरा राज्य एक मासूम बच्ची के साथ हुई दरिंदगी और हत्या से आक्रोशित एवं दुखी था। वीडियो वायरल होते ही जनता, सामाजिक संगठनों और विपक्षी दलों ने इसे प्रशासन की “संवेदनहीनता” करार देते हुए कड़ी आलोचना शुरू कर दी।
मुख्यमंत्री का सख्त रुख
जनता के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए मुख्यमंत्री विजय ने तत्काल प्रभाव से तीनों अधिकारियों के निलंबन के आदेश जारी कर दिए। साथ ही इनके खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक जांच भी प्रारंभ कर दी गई है।
मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवार से सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए कहा कि ऐसे गंभीर और मानवीय संवेदनाओं से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही, असंवेदनशीलता या गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार को सरकार बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगी।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। बड़ी संख्या में लोगों ने सरकार की त्वरित कार्रवाई की सराहना की, वहीं कई लोगों ने यह सवाल भी उठाया कि संवेदनशील मामलों में अधिकारियों के आचरण को लेकर प्रशासनिक प्रशिक्षण और जवाबदेही को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
यह मामला केवल एक आपराधिक घटना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रशासनिक संवेदनशीलता, सार्वजनिक जवाबदेही और पुलिस व्यवस्था की कार्यशैली पर भी गंभीर प्रश्न खड़े कर गया है।
CMRL मनी लॉन्ड्रिंग केस में बड़ा एक्शन, बेटी वीणा विजयन भी जांच के घेरे में
नई दिल्ली। केरल की राजनीति में बुधवार सुबह उस समय हलचल मच गई, जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के तिरुवनंतपुरम स्थित आवास समेत राज्यभर के 12 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी शुरू कर दी। यह कार्रवाई कथित मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े बहुचर्चित CMRL (Cochin Minerals and Rutile Limited) मामले में की गई है।
सूत्रों के अनुसार, ईडी की टीम ने तड़के ही तिरुवनंतपुरम, कोच्चि और कन्नूर में एकसाथ सर्च ऑपरेशन शुरू किया। जांच एजेंसी का फोकस विशेष रूप से पूर्व मुख्यमंत्री की बेटी वीणा विजयन से जुड़े वित्तीय लेन-देन पर है। बताया जा रहा है कि CMRL से कथित फर्जी खर्चों और संदिग्ध सेवाओं के नाम पर कई संस्थाओं और व्यक्तियों को रकम ट्रांसफर की गई थी, जिनमें वीणा विजयन की कंपनी का नाम भी सामने आया है।
क्या है पूरा मामला?
ईडी की जांच उस कथित भुगतान श्रृंखला को लेकर है, जिसमें बिना स्पष्ट सेवा या कार्य के बड़ी रकम ट्रांसफर किए जाने के आरोप हैं। एजेंसी को शक है कि यह लेन-देन मनी लॉन्ड्रिंग के दायरे में आ सकता है। इसी आधार पर विभिन्न दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन से जुड़े साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
राजनीतिक गलियारों में बढ़ी हलचल
पूर्व मुख्यमंत्री के घर पर ईडी की कार्रवाई के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। विपक्ष ने इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई बताया है, जबकि वामपंथी खेमे की ओर से इसे राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई करार दिए जाने की संभावना जताई जा रही है।
ED की नजर किन बिंदुओं पर?
CMRL से हुए संदिग्ध भुगतान
कथित फर्जी कंसल्टेंसी और सेवा समझौते
लाभार्थियों के बैंक ट्रांजेक्शन
कंपनियों और संबंधित व्यक्तियों के वित्तीय दस्तावेज
फिलहाल ईडी की कार्रवाई जारी है और एजेंसी ने आधिकारिक रूप से विस्तृत बयान जारी नहीं किया है। मामले में आगे और बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है।
रायपुर, / राज्य शासन ने सूरजपुर जिले के विकासखंड ओड़गी स्थित सूपाझरिया जलाशय योजना के मरम्मत एवं जीर्णाेद्धार कार्य के लिए 3 करोड़ 15 लाख 95 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की है। मरम्मत कार्य पूर्ण होने पर जलाशय की रूपांकित सिंचाई क्षमता 82 हेक्टेयर पूरी तरह बहाल हो जाएगी। इस नहर जीर्णाेद्धार कार्य से ओड़गी क्षेत्र के किसानों को सिंचाई की स्थायी सुविधा मिलेगी और कृषि उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी।
82 हेक्टेयर में सिंचाई का लक्ष्य
सूपाझरिया जलाशय के जीर्णाेद्धार कार्य पूर्ण होने पर जलाशय की रूपांकित सिंचाई क्षमता 82 हेक्टेयर पूरी तरह बहाल हो जाएगी। इससे क्षेत्र के किसानों को खरीफ और रबी दोनों फसलों के लिए पर्याप्त सिंचाई सुविधा मिलेगी।
शर्तों के साथ कार्य के निर्देश
शासन ने कार्य को स्वीकृत राशि और निर्धारित समयसीमा में पूरा करने के निर्देश दिए हैं। कार्य शुरू करने से पहले सक्षम अधिकारी से ड्रॉइंग-डिजाइन का अनुमोदन और तकनीकी स्वीकृति लेना अनिवार्य होगा। साथ ही कम से कम 75 प्रतिशत बाधा रहित भूमि उपलब्ध होने पर ही निविदा जारी की जाएगी। निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि भू-अर्जन स्वीकृत राशि की सीमा में ही किया जाए और किसी अन्य मद की बचत राशि का उपयोग बिना पूर्व स्वीकृति के न हो। यदि भू-अर्जन प्रस्तावित नहीं है, तो निर्माण शासकीय भूमि पर ही कराया जाए। निविदा प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।
रायपुर, ।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार बस्तर संभाग के नक्सल प्रभावित और अब तेजी से विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहे जिलों में बच्चों एवं माताओं के लिए आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। राज्य सरकार ने भवनविहीन आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए बस्तर संभाग के शेष 506 भवनविहीन आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए भवन स्वीकृति प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि नक्सल मुक्त घोषित जिलों में कोई भी आंगनबाड़ी भवनविहीन न रहे और प्रत्येक बच्चे तथा माता को बेहतर, सुरक्षित एवं सुविधायुक्त वातावरण उपलब्ध हो।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र केवल पोषण वितरण का माध्यम नहीं, बल्कि बच्चों के समग्र विकास, मातृ स्वास्थ्य, प्रारंभिक शिक्षा और सामाजिक सशक्तिकरण की मजबूत नींव हैं।
उन्होंने कहा कि दूरस्थ एवं आदिवासी क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण आंगनबाड़ी व्यवस्था बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण, पूर्व-प्राथमिक शिक्षा तथा गर्भवती एवं धात्री माताओं की देखभाल को नई मजबूती प्रदान करेगी।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, समयबद्धता और स्थानीय आवश्यकताओं का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए हैं।
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा बस्तर, बीजापुर, दंतेवाड़ा, कांकेर, नारायणपुर और सुकमा जिलों में भवनविहीन आंगनबाड़ी केंद्रों की पहचान कर प्राथमिकता के आधार पर निर्माण सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य सचिव स्तर पर 16 मई 2026 को आयोजित समीक्षा बैठक में बस्तर संभाग की प्रत्येक ग्राम पंचायत में आंगनबाड़ी भवन निर्माण को शासन की प्राथमिकता बताया गया था। इसी क्रम में संबंधित जिलों के कलेक्टरों को संयुक्त निर्देश जारी किए गए हैं।
सरकार ने आंगनबाड़ी भवन निर्माण में “BaLA (Building as Learning Aid)” कॉन्सेप्ट को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं।
इस मॉडल के तहत भवन स्वयं बच्चों के लिए सीखने और समझने का माध्यम बनेगा। आंगनबाड़ी केंद्रों को आकर्षक, बाल-अनुकूल और पूर्व-प्राथमिक शिक्षा के अनुकूल वातावरण के रूप में विकसित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार केवल भवन निर्माण नहीं, बल्कि ऐसा वातावरण तैयार करना चाहती है जहां बच्चे सीखें, खेलें और मानसिक रूप से विकसित हों।
आंगनबाड़ी भवन निर्माण हेतु प्रति भवन 11 लाख 69 हजार रुपए की राशि निर्धारित की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विभिन्न योजनाओं और स्थानीय संसाधनों के प्रभावी अभिसरण के माध्यम से विकास कार्यों को गति देना राज्य सरकार की कार्यशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मांग आधारित प्रक्रिया के अंतर्गत भवनविहीन आंगनबाड़ी केंद्रों को प्राथमिकता के साथ स्वीकृति दी जाए और मार्च 2027 तक निर्माण कार्य पूर्ण कराया जाए।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी तथा नियमित मॉनिटरिंग के माध्यम से प्रगति की समीक्षा की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर संभाग में शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
प्रदेश सरकार सड़क, स्वास्थ्य, बिजली, पेयजल और जनसुविधाओं के विस्तार के साथ अब बच्चों और महिलाओं के भविष्य को सुरक्षित करने वाले सामाजिक ढांचे को भी मजबूत कर रही है।
उन्होंने कहा कि मजबूत आंगनबाड़ी अवसंरचना गांवों में सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन का आधार बनेगी और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास, विश्वास और सुशासन के नए अध्याय को मजबूती देगी।
प्रधान सेवक के रूप में प्रधानमंत्री मोदी ने अंत्योदय को धरातल पर उतारने का ऐतिहासिक कार्य किया - मुख्यमंत्री श्री साय
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ के समग्र विकास को मिली नई गति – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
रायपुर 26 मई 2026/मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के ‘प्रधान सेवक’ के रूप में राष्ट्रसेवा, सुशासन और जनकल्याण को समर्पित सफल 12 वर्ष पूर्ण होने पर हार्दिक बधाई एवं अभिनंदन व्यक्त किया है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी, निर्णायक और जनकेंद्रित नेतृत्व में भारत ने सेवा, सुरक्षा, आत्मविश्वास और विकास के नए युग में प्रवेश किया है।
raipur / मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि बीते 12 वर्षों में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने शासन की सोच और कार्यशैली को बदलते हुए सेवा, सुशासन और अंत्योदय की भावना को केंद्र में रखा तथा यह सुनिश्चित किया कि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि गरीब, किसान, महिला, युवा, वंचित और जनजातीय समाज के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का जो संकल्प प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने लिया, वह आज देश के कोने-कोने में दिखाई देता है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में आज भारत आत्मविश्वास, सुरक्षा और वैश्विक प्रतिष्ठा के नए आयाम स्थापित कर रहा है। मजबूत अर्थव्यवस्था, आधुनिक अधोसंरचना, डिजिटल क्रांति, आत्मनिर्भरता, राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक समावेशन की दिशा में देश ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। विकसित भारत @2047 का संकल्प आज जनभागीदारी और विश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के संदर्भ में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का नेतृत्व विशेष रूप से प्रेरणादायी रहा है। दशकों तक नक्सल हिंसा से प्रभावित रहे बस्तर और वनांचल क्षेत्रों में आज विकास, विश्वास और जनकल्याण की नई धारा दिखाई दे रही है। सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, मोबाइल कनेक्टिविटी, बैंकिंग सुविधाओं और शासकीय योजनाओं की पहुँच दूरस्थ जनजातीय अंचलों तक सुनिश्चित हुई है, जिससे लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत, उज्ज्वला योजना, हर घर जल, जन-धन योजना और डिजिटल इंडिया जैसी योजनाओं ने गरीबों, किसानों, मातृशक्ति, युवाओं तथा जनजातीय समाज के जीवन में आशा, सम्मान और आत्मविश्वास का नया संचार किया है। उन्होंने कहा कि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की सोच ने शासन को अधिक संवेदनशील और जवाबदेह बनाया है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मंत्र को केवल नारा नहीं रहने दिया, बल्कि उसे व्यवहार और नीति का आधार बनाया। इसी का परिणाम है कि आज देश विकास और सामाजिक समावेशन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी का नेतृत्व देश को केवल आर्थिक रूप से सशक्त नहीं बना रहा, बल्कि सांस्कृतिक आत्मगौरव, राष्ट्रीय एकता और जनभागीदारी की भावना को भी नई ऊर्जा प्रदान कर रहा है। प्रधानमंत्री ने भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाते हुए देशवासियों में नए आत्मविश्वास का संचार किया है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में जनकल्याण, सुशासन और अंत्योदय के संकल्प को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी रूप से पहुंचे और विकास का लाभ समाज के हर वर्ग को मिले।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने समस्त छत्तीसगढ़वासियों की ओर से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को पुनः बधाई देते हुए उनके स्वस्थ, यशस्वी और दीर्घायु जीवन की कामना की तथा विश्वास व्यक्त किया कि उनके नेतृत्व में भारत विकसित राष्ट्र बनने के संकल्प को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा।
काम में बेवजह देरी करने वाली एजेंसियों पर होगी सख्त कार्रवाई
बिलासपुर में वर्किंग वुमेन हॉस्टल और मोबाइल कनेक्टिविटी परियोजनाओं में तेजी लाने के निर्देश
रायपुर, / छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव श्री विकासशील ने आज मंत्रालय (महानदी भवन) में ई-प्रगति पोर्टल में दर्ज राज्य की अत्यंत महत्वपूर्ण परियोजनाओं की प्रगति की व्यापक समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि सभी परियोजनाओं के कार्यों में तेजी लाई जाए और आ रही बाधाओं को तत्काल दूर कर नियमित रूप से प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों में बेवजह की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और लापरवाही बरतने वाली निर्माण एजेंसियों पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
ई-प्रगति पोर्टल की 5 प्रमुख परियोजनाएं
समीक्षा बैठक में विशेष रूप से पोर्टल पर दर्ज राज्य की 5 अति-महत्वपूर्ण परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति पर चर्चा की गई। वर्किंग वुमेन हॉस्टल, उसलापुर (बिलासपुर), वर्किंग वुमेन हॉस्टल, कोनी (बिलासपुर), 4G स्टेशन DVN मोबाइल टॉवर स्थापना (बिलासपुर), मोबाइल टॉवर हेतु विद्युत अधोसंरचना परियोजना (बिलासपुर) और सिकारसर कोडार रिसीवर लिंक कैनाल (गरियाबंद जिला)
साप्ताहिक मॉनिटरिंग और कड़े प्रशासनिक निर्देश
मुख्य सचिव ने सभी संबंधित विभागों को निर्देशित किया है कि वे प्रत्येक परियोजना की साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट ई-पोर्टल पर फोटो जियोटैग (Photo Geo-tag) के साथ अनिवार्य रूप से अपलोड करें, ताकि कार्यों की वास्तविक स्थिति की पारदर्शी मॉनिटरिंग हो सके। उन्होंने जिलों में मोबाइल टॉवर स्थापना के मार्ग में आ रही भूमि आवंटन या अन्य तकनीकी दिक्कतों को संबंधित कलेक्टरों से समन्वय कर शीघ्र दूर करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने संबंधित जिलों के कलेक्टरों को व्यक्तिगत रूप से रुचि लेकर ई-प्रगति पोर्टल की परियोजनाओं की दैनिक समीक्षा करने और उनमें तेजी लाने को कहा है।
इस समीक्षा बैठक में मंत्रालय से सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, जल संसाधन विभाग तथा उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित थे। इसके अतिरिक्त, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से राज्य के 21 जिलों के कलेक्टर शामिल हुए, जिनमें बीजापुर, कांकेर, कोरबा, मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी, नारायणपुर, रायगढ़, सुकमा, बलौदाबाजार-भाटापारा, बलरामपुर, धमतरी, गरियाबंद, जशपुर, कबीरधाम, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, कोरिया, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, मुंगेली, सरगुजा, सूरजपुर, दंतेवाड़ा एवं कोण्डागांव शामिल हैं।
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