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ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ / चमकदार सफेद दांत किसे पसंद नहीं होते हैं. हेल्दी और सफेद दांत आपको खूबसूरत बनाते हैं और आत्मविश्वास भी बढ़ाते हैं. हालांकि दांतों का पीलापन उम्र बढ़ने की प्रक्रिया का हिस्सा है, फिर भी आप इससे लड़ सकते हैं और दांतों पर दाग लगने से बच सकते हैं. दांतों पीले क्यों हो जाते हैं इसके कई कारण हैं. तम्बाकू के उपयोग या आपके द्वारा खाए जाने वाले भोजन के कारण भी दांत पीले हो सकते हैं, लेकिन मसला ये है कि दांतों का पीलापन कैसे दूर करें या दांतों को सफेद बनाने के तरीके क्या है? हम आपके लिए यहां ऐसा एक प्राकृतिक उपचार लेकर आए हैं जिसे घर पर आजमाया जा सकता है और कुछ ही दिनों में चमकदार दांत पाए जा सकते हैं. तो चलिए जानते हैं दांतों को सफेद करने का कारगर नेचुरल उपाय.
दांतों को चमकाने के लिए संतरे का छिलका
संतरे के छिलके के सफेद भाग में विटामिन सी, पेक्टिन, लिमोनेन, ग्लूकेरेट और घुलनशील फाइबर होते हैं जो प्राकृतिक दांतों को सफेद करने का काम करते हैं.
कैसे करें इस्तेमाल?
बस संतरे को छीलें और छिलके के सफेद हिस्से को अपने दांतों पर रगड़ें. ब्रश करने से पहले रस को 3-4 मिनट तक अपने दांतों पर लगा रहने दें, ताकि गूदा और छिलका निकल जाए. लेकिन, ध्यान रखें कि गंदगी हटाने के लिए छीलने से पहले संतरे को अच्छी तरह से धोया जाए.
अन्य फल जिनमें प्राकृतिक ब्लीचिंग एजेंट होते हैं वे हैं नींबू, स्ट्रॉबेरी, सेब और किशमिश.
ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ / बालों का सफेद होना आज कम समय में एक ऐसी समस्या बन गया है जिससे अमूमन लोग परेशान हैं. पुराने समय में बालों के सफेद होने को उम्र दराज लोगों की निशानी माना जाता है, लेकिन अगर आज के समय पर इस बात पर अनल करेंगे तो परेशानी हो जाएगी. दरअसल इसका कारण यह है कि आज के समय में टीएनजर्स से लेकर, बच्चों और बड़े सभी के बाल सफेद हो रहे हैं. जिसकी एक वजह केमिकल युक्त चीजों का ज्यादा इस्तेमाल, जेनेटिक और आज कल की लाइफस्टाइल और खानपान है.
ये तो हुई बालों के सफेद होने की वजह अब बात करें इनसे छुटकारा पाने की तो इनको छुपाने के लिए लोग मेंहदी, हेयर डाई और हेयर कलर जैसी चीजों को इस्तेमाल करना शुरू कर देते हैं. जिससे बाल काले तो होते हैं लेकिन ये बालों को डैमेज भी कर सकते हैं और कई बार ऐसा भी हुआ है कि इसको लगाने के बाद बाल और तेजी से सफेद होते हैं. अगर आप अपने बालों का ऐसा हाल नहीं करना चाहते हैं तो बेहतर होगा कि इसके लिए आप कुछ घरेलु नुस्खों को आजमाएं. आज हम आपको ऐसा घरेलु नुस्खा बताएंगे जो आपके बालों को जड़ों से काला करने में मदद करेगा और साथ ही उनको शाइनी भी बनाएगा.
सफेद बालों को काला करने का घरेलु नुस्खा
बालों को काला करने के लिए आपको जो नुस्खा हम बताने जा रहे हैं इसके लिए आपको सारी चीजें आपके किचन मे ही मिल जाएंगी. आपको कुछ भी बाहर से जाकर नहीं लेना होगा. बालों को काला करने वाले इस नुस्खे को बनाने के लिए आपको चाहिए आमला का पाउडर और हल्दी
इसके लिए आप 2 चम्मच आंवला पाउडर और 1 चम्मच हल्दी लीजिए. अब इन दोनों चीजों के लोहे की कढ़ाही में रोस्ट कर लेना है. इन दोनों चीजों को आपको तब तक रोस्ट करना है जब तक इनका रंग काला ना हो जाए. एक बार काला हो जाने के बाद इसे एक बर्तन में निकालकर ठंडा होने के लिए रख दें. अब आप इस पाउडर में एलोवेरा जेल को डालकर मिक्स कर लें और अपने बालों की जड़ों से लेकर सिरे तक अच्छे से लगा लें. इसको बालों पर आधे से एक घंटे तक लगा रहने के बाद पानी से धोलें. अगर आपके पास एलोवेरा जेल नही है तो आप इसमें सरसों का तेल मिलाकर भी लगा सकते हैं और इसको धुलने के लिए किसी माइल्ड शैंपू का इस्तेमाल करें. हफ्ते में 2 बार इस रेमेडि के इस्तेमाल से आप अपने बालों को काला, घना और लंबा बना सकते हैं. इसके साथ ही आपके बाल शाइनी और मुलायम भी बनेंगे.
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / हिंदू धर्म में धनतेरस का विशेष महत्व है. तेरस के दिन देवी लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा की जाती है ताकि घर में वृद्धि और बरकत होती रहे. इस दिन लोग तरह-तरह के धातुओं को खरीदते हैं जिसे खरीदना शुभ माना जाता है. चांदी के सिक्के से लेकर झाड़ू तक जैसी कई चीजे हैं जो अगर धनतेरस के दिन खरीदा जाए तो मां लक्ष्मी की विशेष कृपा बरसती है. लेकिन अगर इस दिन आप इस एक साधारण चीज को नहीं खरीदेंगे तो मां लक्ष्मी आपसे नाराज होंगी और उनकी कृपा आपके परिवार पर नहीं बनेगी. वह एक चीज है नमक. तो चलिए आपको बताते हैं धनतेरस पर नमक को खरीदना क्यों है जरूरी और क्या है इसका महत्व.
धनतेरस के दिन बाजारों में एक चमक देखने को मिलती है. लोग तरह-तरह की धातुओं को खरीदने के लिए बाजार जाते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि उन चीजों को खरीदना शुभ माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि उन्हें खरीदने से लक्ष्मी मां की विशेष कृपा बनी रहती है
लेकिन क्या आप जानते हैं कि खरीदे जाने वाले सामानों में सबसे जरूरी सामान क्या है. अगर नहीं तो हम आपको बताते है. वो सामान है नमक. जी हां, धनतेरस के दिन नमक को खरीदना बेहद जरूरी माना जाता है. अगर दीपावली के दिन नमक वाले पानी से पूरे घर में पोछा लगाया जाए तो दुख, गरीबी , दरिद्रता और नकारात्मकता दूर होती है. इससे व्यक्ति के ध्यान में वृद्धि होती है और धन में बरकत होती है. अगर एक कांच की कटोरी में थोड़ा सा नमक रखा जाए तो घर की दरिद्रता दूर होती है.
टिप्स ट्रिक्स/शौर्यपथ /कई बार जब आप बीमार होते हैं, लंबे समय से आपका कोई काम रुक होता है या अचानक से तरक्की के बाद आपका बहुत बड़ा नुकसान हो जाता है या आपके हंसते-खेलते परिवार में निराशा छा जाती है तो अक्सर लोग कहते हैं कि लगता है इन्हें किसी की नजर लग गई है. इससे बचने के लिए लोग घर के आगे नींबू- मिर्ची टांगने जैसे तरीकों को अपनाते हैं. यहां आप इविल आई कॉन्सेप्ट के बारे में जानेंगे जिसका देश के साथ-साथ विदेश में भी खूब इस्तेमाल किया जा रहा है.
क्या है नजर दोष
जब नजर लगने की बात आती है तो इविल आई कॉन्सेप्ट के बारे में आपने जरूर सुना होगा. भारत में इसे नजर दोष भी कहा जाता है.
ये घर की के दरवाजों पर टांगा जाता है. कई लोग इसे ब्रेसलेट और लॉकेट बनाकर गले और हाथों में भी पहनते हैं.
ये एक मानक होता है जो कई रंगों में आता है, जैसे साइंस के लिए लाल, इंटेलिजेंस के लिए नीला, सेहत के लिए फिरोजी, सफलता के लिए हल्का हरा, और ताकत के लिए काला.
कैसे करें प्रयोग |
वास्तु शास्त्र के अनुसार अगर घर के दरवाजे पर नजर दोष को टांगा जाए तो घर की सुख समृद्धि पर लोगों की नजर का असर नहीं होता.
नजर दोष बुरी नजर को सकारात्मक ऊर्जा में बदलने का काम करता है.
आप ट्रेंडिंग नजर दोष वाले नेकलेस और ब्रेसलेट का इस्तेमाल कर सकते हैं. वो ना सिर्फ आपको बुरी नजर से बचाएगा बल्कि आपको मानसिक शांति भी देगा.
गाड़ी और दफ्तर में भी नजर दोष अक्सर नजर दोष देखा जाता है लोग बुरी नजर से बचने के लिए इसका प्रयोग करते हैं.
खाना खजाना /शौर्यपथ /मम्मी रात के खाने में क्या है अक्सर ये सवाल बच्चे पूछते हैं. असल में ये एक ऐसा सवाल है जिसे सिर्फ बच्चे ही नहीं बल्कि, घर के बड़े भी अक्सर पूछते हैं. और कई बार इस सवाल का जवाब देना थोड़ा मुश्किल हो जाता है. अगर आप भी जवाब में हर बार कुछ अलग बताना चाहते हैं, तो आज हम आपके लिए डिनर में बनने वाली 4 भारतीय रेसिपी लेकर आए हैं. जिन्हें बना कर आप अपनी फैमिली का दिल जीत सकते हैं. भारतीय खाने की जब भी बात आती है तो दिमाग में सबसे पहला ख्याल पनीर से बनी डिशेज का आता है. लेकिन आज हम आपको पनीर नहीं बल्कि सिंपल और स्वादिष्ट वेजिटेरियन रेसिपीज बता रहे हैं. जिन्हें आप डिनर के अलावा लंच में भी बना सकते हैं.
रात के खाने में बनाएं ये स्वादिष्ट रेसिपीज-
1. लौकी के कोफ्ते-
लौकी के कोफ्ते एक स्वादिष्ट डिश है जिसे डिनर में बना सकते हैं. इसे बनाने के लिए लौकी को कद्दूकस करें. फिर लौकी का एक्स्ट्रा पानी निकाल दें. इसके बाद लौकी में, बेसन और हरी मिर्च मिलाकर उसे गूथ ले और कोफ्ते बना लें. अब पैन में तेल गरम कर कोफ्ते को तलकर निकाल लें. अब इसी तेल में जीरा डालें फिर प्याज़ का पेस्ट डालकर उसे गुलाबी होने तक भून लें. फिर इसमें सारे मसाले और टमाटर की प्यूरी डाल कर भूनें. अब इसमें पानी डालकर तेज आंच में उबाल आने दें. आखिर में कोफ्ते डालकर ऊपर से हरी धनिया डालकर गैस बंद कर दें.
2. बैंगन का भरता-
बैंगन का भरता बनाने के लिए सबसे पहले बैंगन को धो कर साफ कर लें फिर बैंगन में चीरे लगाएं और उसमें लहसुन और मिर्च भर दें. बैंगन की ऊपरी परत पर तेल लगाकर उसे गैस पर पलट पलट कर भूनें. बैंगन के ठंडा हो जाने के बाद उसकी ऊपरी परत को छील लें. अब बैंगन को मसल लें, एक पैन में तेल डालकर जीरा, लाल मिर्च, अदरक लहसुन और प्याज डालकर भूनें. लहसुन और लाल मिर्च ,धनिया पाउडर और टमाटर डालकर पकाएं. फिर हरी धनिया पत्ती डालकर सर्व करें.
3. खट्टी मीठी दाल-
इस दाल को बनाने के लिए सबसे पहले आप रेगुलर दाल बनाने वाले प्रोसेस को दोहराएं और गुड़, कोकम पाउडर से इस दाल का स्वाद बढ़ाएं.
4. भिंडी मसाला रेसिपी-
भिंडी एक ऐसी सब्जी है जिसे खाना हर कोई पसंद करता है. इसे झटपट आसानी से घर पर बनाया जा सकता है. इसे बनाने के लिए सबसे पहले भिंडी को धो कर लंबे आकार में काट लें. अब इस पर धनिया, हल्दी, अमचूर पाउडर, गरम मसाला, नमक और लाल मिर्च डाल दें. भिंडी को मसालों में अच्छी तरह मिलाएं. अब एक पैन में तेल गरम कर उसमें जीरा, हींग,लहसुन और प्याज डाल कर भूनें. अब पैन में मसाले में लिपटी भिंडी डालकर भूनें. भिंडी बनकर तैयार है.
खाना खजाना /शौर्यपथ /कबाब का नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है. कबाब एक ऐसी डिश है जिसे खाने से कोई भी मना नहीं कर सकता है. ऐसा माना जाता है कि इस व्यंजन की उत्पत्ति फ़ारसी साम्राज्य में हुई थी, जहां यह लोकप्रिय स्ट्रीट फूड था. "कबाब" शब्द फ़ारस से निकला है, जिसका अर्थ है "तलना" या "भूनना." आज देश भर में कबाब की अनगिनत वैराइटी आपको मिल जाएंगी. भारत का लखनऊ शहर कबाब के मामले में सबसे ज्यादा फेमस है. अगर आप ये सोचते हैं कि कबाब सिर्फ नॉनवेजिटेरियन डिश है तो आप गलत हैं. वेजिटेरियन लोग भी इस डिश के मजे ले सकते हैं. अगर आप कबाब खाने के शौकीन हैं तो हम आपके लिए लेकर आए हैं, कबाब की एक स्वादिष्ट रेसिपी. तो चलिए बिना किसी देरी के वेज शामी कबाब बनाने की आसान रेसिपी जानते हैं.
कैसे बनाएं वेज शामी कबाब-
सामग्री
1/2 कप उबला चना
1/2 कप उबले हुए आलू
1 टी स्पून अदरक लहसुन पेस्ट
स्वादानुसार नमक
1/4 टी स्पून काली मिर्च
1/2 टी स्पून लाल मिर्च पाउडर
1 टी स्पून धनिया पाउडर
विधि
सबसे पहले एक बाउल में उबले मैश किए चने को डालें.
फिर इसमें उबला हुआ मैश किया हुआ आलू डालें.
अब इसमें लहसुन अदरक पेस्ट, और नमक, काली मिर्च, धनिया, लाल मिर्च पाउडर डालकर मिला लें.
नरम आटा गूंथ कर तैयार कर लें.
अब आटे से गोल लोई बना लें.
कबाब बन जाने के बाद आप इन्हें पैन में फ्राई कर करें.
गणपति विसर्जन के साथ ही श्राद्ध पक्ष की शुरुआत हो जाती है और उसके बाद शारदीय नवरात्रि का त्योहार आता है,. इस साल 15 अक्टूबर से नवरात्रि शुरू हो रही है और 23 अक्टूबर को इसका समापन होगा. ऐसे में नवरात्रि के 9 दिन मां दुर्गा की पूजा अर्चना की जाती है और लोग 9 दिनों का व्रत भी रखते हैं. साथ ही, घर की सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं. लेकिन, नवरात्रि के दौरान कुछ ऐसे भी काम हैं जिन्हें करने से माता रानी रुष्ट हो सकती हैं. इस चलते मान्यतानुसार इन कामों को करने से परहेज करना चाहिए.
नवरात्रि के दौरान कौनसे काम नहीं करने चाहिए
लहसुन-प्याज का सेवन ना करना
नवरात्रि के नौ दिनों में सात्विक भोजन किया जाना चाहिए, कहते हैं कि घर में प्याज-लहसुन का इस्तेमाल करने से माता रानी नाराज हो सकती हैं.
घर को खाली ना छोड़ें
अगर आप अपने घर में कलश स्थापना कर रहे हैं या 9 दिन तक अखंड ज्योत जला रहे हैं, तो इस बात का ध्यान रखें कि आप घर को कभी भी खाली ना छोड़ें क्योंकि ऐसा करने से माता नाराज हो सकती हैं.
ज्योत को बुझने ना दें
नौ दिनों तक माता रानी के सामने अगर आप अखंड ज्योत जलाते हैं तो इस बात का ध्यान रखें कि इसमें तेल या घी बिल्कुल भी कम ना हो या अखंड ज्योत किसी भी कारण से ना बुझे, क्योंकि ऐसा होना अशुभ माना जाता है.
बाल कटवाने से बचें
नवरात्रि के नौ दिनों में बालों में कैंची नहीं लगवानी चाहिए. इतना ही नहीं आदमियों को शेविंग करने से भी बचना चाहिए. वहीं, महिलाओं को आइब्रो, थ्रेडिंग या वैक्स भी नहीं करनी चाहिए.
बच्चियों के दिल को ना दुखाएं
हिंदू धर्म में छोटी-छोटी कन्याओं को माता रानी का स्वरूप माना जाता है. ऐसे में न सिर्फ उन्हें कन्या भोज (Kanya Bhoj) कराना चाहिए, बल्कि इन नौ दिनों में किसी भी बच्चे के दिल को दुखाने की कोशिश ना करें, क्योंकि ऐसा करने से माता रानी रुष्ट हो सकती हैं.
हिंसा से बचें
नवरात्रि के नौ दिनों में किसी से भी लड़ाई, झगड़ा या किसी प्रकार की कोई शारीरिक हिंसा करने से बचें क्योंकि ऐसा करने से माता रानी नाराज होती हैं.
काले कपड़े पहनने से बचें
नवरात्रि के नौ दिनों में रंगों का भी विशेष महत्व होता है, हर दिन के लिए एक खास रंग होता है लेकिन इन नौ दिनों में काला रंग कभी भी नहीं पहनना चाहिए.
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /हिन्दू धर्म में मासिक शिवरात्रि का विशेष धार्मिक महत्व है. यह व्रत हर महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को रखा जाता है. ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने वाले की सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में आने वाली सारी बाधाओं को भोलेनाथ दूर कर देते हैं. इस व्रत को करने वालों पर सदैव भगवान शिव का हाथ होता है. ऐसे में इस बार अक्टूबर के महीने की शिवरात्रि कब है और व्रत विधि क्या है इस लेख में आपको बताने वाले हैं.
कब है अक्टूबर की मासिक शिवरात्रि
इस साल अक्टूबर की 12 तारीख को मासिक शिवरात्रि का उपवास रखा जाएगा. आपको बता दें कि हिन्दू पंचांग के अनुसार मासिक शिवरात्रि हर महीने कृष्ण पक्ष के 14वें दिन मनाई जाती है.
क्यों मनाते हैं मासिक शिवरात्रि
यह व्रत ना केवल इंद्रियों को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है, बल्कि क्रोध, इर्ष्या, अभिमान और लालच जैसी भावनाओं को रोकने में भी मदद करता है. मासिक शिवरात्रि हर महीने मनाई जाती है. शास्त्रों के अनुसार साप्ताहिक त्योहारों में सोमवार का दिन भगवान भोले नाथ को समर्पित है.
मासिक शिवरात्रि व्रत विधि
- मासिक शिवरात्रि वाले दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान कर लीजिए.
- अब आप घर पर या किसी शिव मंदिर में भगवान शिव और उनके परिवार की पूजा करिए.
- सबसे पहले आप शिवलिंग का रुद्राभिषेक जल, घी, दूध,चीनी, शहद, दही आदि से करें.
- अब आप शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा और श्रीफल चढ़ाएं.
- अब आप भगवान शिव की धूप, दीप, फल और फूल से पूजा करिए.
-शिव पुराण, शिव स्तुति, शिव अष्टक, शिव चालीसा और शिव श्लोक का पाठ करिए.
-शाम के समय आप फलहार कर सकते हैं.
-अगले दिन भगवान शिव की पूजा करें और दान आदि करने के बाद अपना उपवास खोलें.
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /हर महीने में 2 प्रदोष व्रत रखे जाते हैं. यह व्रत हर महीने की त्रयोदशी तिथि पर पड़ता है. प्रदोष व्रत में मान्यतानुसार भगवान शिव की पूजा की जाती है और माना जाता है कि जो भक्त पूरे श्रद्धाभाव से व्रत रखते हैं और शिव पूजा करते हैं उनपर भोलेनाथ अपनी कृपादृष्टि बनाए रखते हैं. प्रदोष व्रत की पूजा प्रदोष काल में की जाती है. जीवन से कष्टों की मुक्ति पाने की इच्छा रखने वाले भक्त इस व्रत को रखते हैं.
अक्टूबर में प्रदोष व्रत |
पंचांग के अनुसार, अक्टूबर महीने का पहला प्रदोष व्रत कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर 11 अक्टूबर, बुधवार के दिन रखा जाएगा. बुधवार के दिन पड़ने के चलते इसे बुध प्रदोष व्रत भी कहते हैं. मान्यताओं के अनुसार, बुधवार के दिन को भगवान गणेश का दिन भी कहा जा सकता है जिस चलते इस दिन भगवान गणेश की पूजा भी की जा सकती है. वहीं, प्रदोष व्रत में भोलेनाथ के साथ-साथ माता पार्वती की भी पूजा होती है.
शिव पूजा के लिए प्रदोष व्रत के दिन प्रदोष काल को अति उत्तम माना जाता है. आश्विन कृष्ण त्रयोदशी तिथि 11 अक्टूबर शाम 5 बजकर 37 मिनट से अगले दिन 12 अक्टूबर शाम 7 बजकर 53 मिनट तक रहेगी.
प्रदोष काल 11 अक्टूबर की शाम 5 बजकर 56 मिनट से 8 बजकर 25 मिनट तक रहने वाला है. इस चलते इस मुहूर्त में पूजा-पाठ किया जा सकता है.
प्रदोष व्रत की पूजा
प्रदोष व्रत के दिन मान्यतानुसार पूजा की जाए तो भगवान भोलेनाथ प्रसन्न हो सकते हैं. प्रदोष व्रत के दिन सुबह उठकर स्नान पश्चात व्रत का संकल्प लिया जाता है. भक्त शाम के समय प्रदोष व्रत की पूजा करते हैं लेकिन सुबह शिव मंदिर के दर्शन कर आते हैं. शाम को पूजा करने के लिए बेलपत्र, अक्षत, दीपक, गंगाजल और धूप आदि पूजा सामग्री के रूप में सम्मिलित किए जाते हैं. इसके अलावा, शिवलिंग पर जलाभिषेक कर शिव मंत्रों का जाप होता है.
मनोरंजन /शौर्यपथ /सोशल मीडिया पर इन दिनों एक बॉलीवुड एक्ट्रेस के बचपन की तस्वीर वायरल हो रही है. इस ब्लैक एंड व्हाइट फोटो को देखने के बाद शायद ही आप पहचान पाएं कि इसमें दिख रही छोटी सी क्यूट बच्ची कौन है. इस फोटो में वह अपनी मां की गोद में नजर आ रही है. अब तक नहीं पहचान पाएं तो चलिए आपको हिंट दे देते हैं. ये बच्ची 90s की हिट हिरोइन हैं. अपने समय में यह सुपरस्टार शाहरुख खान और आमिर खान जैसे स्टार्स के साथ कई ब्लॉकबस्टर फिल्में दे चुकी हैं. तो क्या अब आप बता सकते हैं कि फोटो में नजर आ रही प्यारी सी छोटी बच्ची कौन हैं.
कौन है ये क्यूट बच्ची
इस बच्ची का बचपन से ही फिल्मी दुनिया से नाता रहा है. पूरा परिवार ही फिल्म जगत से जुड़ा है. जब इस बच्ची की उम्र 17 साल थी, तब एक्टिंग में कदम रखा था. दो साल बाद यानी 19 की उम्र में ही वह फिल्म इंडस्ट्री की स्टार एक्ट्रेस बन गई थी. कई ब्लॉकबस्टर फिल्में देने के बाद 24 साल की उम्र में अचानक से एक्टिंग से दूरी बना ली. ये बच्ची कोई और नहीं बल्कि बॉलीवुड एक्ट्रेस पूजा भट्ट हैं. बिग बॉस सीजन 2 में कंटेस्टेंट बन आने वाली पूजा भट्ट पिछले दिनों एक बार फिर चर्चा में आईं.
पूजा भट्ट का बॉलीवुड डेब्यू
बिग बॉस के शो में आने के बाद पूजा से जुड़ी कंट्रोवर्सी चर्चा में दोबारा से आ गईं. शो से बाहर आने के बाद पूजा ने अपने करियर पर खुलकर बात की. सिद्धार्थ कनन से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि सफलता की ऊंचाईयों पर रहने के दौरान उन्होंने एक्टिंग क्यों छोड़ दी थी. दरअसल, पूजा भट्ट ने अपने पापा महेश भट्ट की फिल्म 'डैडी' से बॉलीवुड में एंट्री ली. पहली ही फिल्म हिट रही. इसके बाद 'दिल है कि मानता नहीं' और 'सड़क' जैसी कई सुपरहिट फिल्में पूजा भट्ट ने दी.
नहीं बनीं मां
पूजा भट्ट ने साल 2003 में मनीष माखीजा से शादी की थी. मनीष माखीजा उस वक्त एक वीडियो जॉकी थे. दोनों ने शादी के 11 साल बाद अपनी राहें जुदा कर ली थीं. इस शादी पर भी पूजा भट्ट ने बिग बॉस के घर में अपना दिल खोलकर रख दिया. अपने पति के लिए उन्होंने कहा कि वो एक अच्छे इंसान थे. बेबिका धुर्वे को अपने दिल का दर्द बताते हुए पूजा भट्ट ने कहा कि हमारे बीच सब कुछ ठीक था फिर भी कुछ कमी सी महसूस होती थी, जिसके बाद दोनों ने मिलकर तय किया कि कुछ तो है जो सही नहीं है. खुद से झूठ बोलकर कैसे जिएं. पूजा भट्ट ने आगे ये भी कहा कि ये कोई ड्रेस रिहर्सल नहीं थी.पूजा भट्ट ने बताया कि वो खुद इस बात के लिए तैयार नहीं थीं. उन्होंने कहा कि वो बच्चा चाहती थीं लेकिन बच्चे पैदा नहीं करना चाहती थीं. पूजा भट्ट ने कहा कि वो इस बारे में झूठ नहीं बोलना चाहतीं.
24 साल की उम्र में क्यों छोड़ी एक्टिंग
19 साल की उम्र में टॉप एक्ट्रेस में शुमार पूजा भट्ट ने जब 24 की उम्र में एक्टिंग छोटी तो हर कोई हैरान था. 25 साल की उम्र में पूजा ने अपना प्रोडक्शन हाउस शुरू किया. इंटरव्यू के दौरान उन्होंने बताया कि एक्टिंग छोड़कर वह डायरेक्टर बनना चाहती थी. पूजा ने बिग बॉस ओटीटी सीजन 2 में अपने अल्कोहल की लत का शिकार होने का भी जिक्र किया था, जिसे अब वह पूरी तरह छुड़ा चुकी हैं.
रसोई टिप्स /शौर्यपथ / बात जब शाकाहारियों का आती है तो सबसे पहला ख्याल पनीर का आता है. लेकिन हालही के कुछ सालों में पनीर के अलावा भी एक चीज है जिसने लोगों का ध्यान अपनी तरफ किया है. हम बात कर रहे हैं टोफू या सोया पनीरकी. पनीर फ्रेश चीज है जो गाय, भैंस या बकरी के दूध से बनाया जाता है और कई इंडियन डिशेज में अक्सर उपयोग किया जाता है. दूसरी ओर, टोफू सोयाबीन के दूध से प्राप्त होता है. दोनों प्रोटीन, कैल्शियम और आयरन जैसे पोषक तत्वों का रिच सोर्स हैं जो शरीर को हेल्दी रखने में मदद कर सकते हैं. टोफू एक वीगन प्रोडक्ट है क्योंकि यह किसी भी एनीमल बेस्ड प्रोडक्ट से प्राप्त नहीं होता है. हालांकि कुकिंग में दोनों एक-दूसरे की जगह ले सकते हैं, लेकिन पोषण के मामले में क्या एक दूसरे से बेहतर है? अगर आप भी इसी सवाल का जवाब पाना चाहते हैं तो हमने आपको कवर किया है.
आपको बता दें कि टोफू पनीर का हेल्दी ऑप्शन है, क्योंकि इसमें कम कैलोरी होती है और पनीर की तुलना में इसमें आयरन की मात्रा अधिक होती है. लेकिन क्योंकि टोफू का टेस्ट यूनिक होता है, ज्यादातर लोग इसे अपने डेली डाइट में शामिल करना पसंद नहीं करते हैं, यही कारण है कि पनीर अधिक पसंद किया जाता है.
पनीर टोफू से किस प्रकार अगल है?
पनीर एक मिल्क पोड्क्ट है, जबकि टोफू एक सोया प्रोड्क्ट है. पनीर आसानी से घर पर तैयार किया जा सकता है, जबकि टोफू बनाना थोड़ा कठिन काम है क्योंकि यह सोया दूध को जमाकर और बनाया जाता है. टोफू का उपयोग मुख्य रूप से शाकाहारी लोगों द्वारा किया जाता है या जो लोग अपना वजन कम करना चाहते हैं. पनीर जब फुल फैट डेयरी से बनाया जाता है, तो हाई फैट के कारण बहुत सॉफ्ट होता है, जबकि टोफू सॉफ्ट से लेकर डाइट तक हो सकता है और इसमें स्मूद, 'सिल्की' टेक्सचर होता है. सॉफ्ट टोफू में फैट की मात्रा सबसे कम हो सकती है, इसलिए इसे पचाना आसान होता है और इसमें अधिक पोषक तत्व होते हैं.
सेहत के लिए कौन ज्यादा हेल्दी है?
विशेषज्ञों के अनुसार "टोफू पनीर की तुलना में अधिक हेल्दी ऑप्शन माना जाता है. 100 ग्राम टोफू में लगभग 60-65 कैलोरी होती है, जबकि 100 ग्राम पनीर में लगभग 260 कैलोरी हो सकती है. टोफू में आयरन की मात्रा पनीर की तुलना में अधिक होती है. दोनों में पर्याप्त मात्रा प्रोटीन होता है.
कैसे करें पनीर और टोफू को डाइट में शामिल-
अगर आप वजन को कम करना चाहते हैं तो आपके लिए टोफू बेस्ट ऑप्शन बन सकता है. आप टोफू और पनीर दोनों को रोस्ट कर सकते हैं और उन्हें सलाद, सॉस और डेसर्ट में एड कर सकते हैं. पनीर भुर्जी या टोफू भुर्जी भी बनाकर रोटी रोल के साथ सर्व कर सकते हैं.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ / किचन में मौजूद लौंग अपनी महक से जहां खाने का स्वाद बढ़ाने का काम करती है, वहीं सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद मानी जाती है. लौंग के फायदों के बारे में हम सभी अक्सर अपने घर के बड़ों से सुनते हैं. रोजमर्रा में होने वाली आम समस्याओं के लिए लौंग का इस्तेमाल किया जा सकता है. लौंग सेहत के लिए कई तरह से फायदेमंद मानी जाती है. लौंग के औषधीय गुण जानकर आपको हैरानी हो सकती है. आमतौर पर लौंग को मसाले और पूजा पाठ के काम में इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन इसके अन्य फायदे भी हैं. आपको बता दें कि लौंग में प्रोटीन, आयरन, कार्बोहाइड्रेट्स, कैल्शियम और सोडियम एसिड भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. लौंग के इस्तेमाल से दांतो का दर्द , सांसों की दुर्गंध, गले में खराश जैसी समस्याओं को दूर करने में मदद मिल सकती है. तो चलिए बिना देर किए जानते हैं लौंग के फायदे.
क्या हैं लौंग के फायदे-
1. सर्दी-जुकाम-
मौसम में बदलाव होते ही सर्दी-जुकाम की समस्या परेशान करने लगती है. ऐसे में लौंग आपकी इस समस्या से राहत दिला सकती है. सर्दी-जुकाम या गले में खराश होने पर मुंह में एक लौंग रख लें. इससे सर्दी-जुकाम में राहत मिल सकती है.
2. दाग-धब्बे-
लौंग सिर्फ स्वाद ही नहीं सुंदरता को निखारने का भी काम कर सकती है. जिन लोगों के चहरे पर दाग-धब्बे या डार्क सर्कल हैं उनके लिए लौंग बहुत फायदेमंद साबित हो सकती है. लौंग के पाउडर को किसी भी फेसपैक या फिर बेसन के साथ मिलाकर लगाएं. एक बात का खास ख्याल रखें कि लौंग पाउडर को आप चहरे पर डायरेक्ट अप्लाई न करें. लौंग की तासीर गर्म होती है जिससे जलन हो सकती है.
3. बालों-
मौसम में बदलाव होते ही कई लोगों में बाल झड़ने और बालों के रुखेपन की शिकायत देखने को मिलती है. लौंग को उबाल लें और फिर उस पानी से अपने बाल धोएं. इससे आपके बालों में चमक आएगी और बाल मजबूत भी बन सकते हैं.
4. मुंह की बदबू-
पायरिया से ग्रसित लोग हों या काफी देर मत भूखे पेट बैठे रहने से भी मुंह से बदबू आ सकती है. लौंग से आप मुंह की बदबू और दांतो के दर्द को हमेशा के लिए दूर कर सकते हैं. इसके लिए आपको 40 से 45 दिनों तक लगातार रोज सुबह मुंह में साबुत लौंग का सेवन करना है.
5. वजन घटाने-
अगर आप वजन को कम करना चाहते है तो लौंग के पानी का सेवन कर सकते हैं. वजन घटाने के लिए लौंग काफी असरदार मानी जाती है. लौंग में एंटी-ओबेसिटी प्रभाव होता है, जो वजन को कम करने में मदद कर सकता है.
6. तनाव-
आज की इस भोगदौड़ भरी जिंदगी में लोग तनाव की समस्या के शिकार हो रहे हैं. तनाव को कम करने के लिए आप लौंग का इसतेमाल कर सकते हैं. लौंग को एंटी-स्ट्रेस भी कहा जाता है. क्योंकि लौंग में एंटीऑक्सीडेंट्स के गुण पाए जाते हैं, जो तनाव से बचाने में मदद कर सकता है.
खाना खजाना /शौर्यपथ /शरीर को सेहतमंद रखने में हमारा नाश्ता बेहद मायने रखता है. असल में आज की इस भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अपने काम में इतने व्यस्त हो गए हैं कि उन्हें चैन से नाश्ता या खाना खाने का समय ही नहीं मिलता है. और शायद यही कारण है कि लोग सुबह जल्दी में होने की वजह से नाश्ता करना छोड़ देते हैं या फिर रेडी टू ईट ऑप्शन को चुनते हैं. अगर आप भी समय की कमी के चलते हेल्दी ब्रेकफास्ट नहीं बना पाते हैं तो आज हम आपको कुछ ऐसे ही आसान नाश्ते के बारे में बता रहे हैं जिन्हें आप नाश्ते के अलावा लंच और डिनर में भी खा सकते हैं. तो चलिए बिना देर किए रेसिपी पर चलते हैं.
स्वाद और सेहत से भरपूर हैं ये रेसिपीज- Here Are 4 Amazing Tasty And Healthy Recipes:
1. ओट्स इडली-
पोषण का खजाना है ओट्स. इडली एक साउथ इंडियन डिश है. इडली को ब्रेकफास्ट में सबसे हेल्दी मील में से एक माना जाता है. ओट्स में विटामिन और मिनरल भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो सेहत के लिए अच्छे माने जाते हैं. इस रेसिपीज को डाइट में शामिल कर इम्मयूनिटी को मजबूत और शरीर को स्वस्थ रख सकते हैं.
लो कैलोरी ओट्स इडली रेसिपी : वैसे तो इडली दक्षिण भारत का लोकप्रिय व्यंजन है लेकिन ये अन्य जगहों पर भी काफी पसंद किया जाता है। ये खाने में काफी हल्की होती है और सुबह से नाश्ते के अलावा इडली को लंच या डिनर में भी खाया जाता है। आजकल इडली को अलग-अलग ट्विस्ट देकर भी बनाया जाने लगा है।
लो कैलोरी ओट्स इडली बनाने के लिए सामग्री: हेल्दी और कम कैलोरी वाली यह इडली ओट्स और कद्दूकस की हुई गाजर से बनती है। यह खासतौर से उन लोगों के लिए है जो कैलोरी को लेकर ज्यादा सचेत हैं। ओट्स, दही, उड़द दाल और चना दाल से तैयार होने वाली यह इडली खाने में बहुत ही स्वादिष्ट लगती है।
लो कैलोरी ओट्स इडली को कैसे सर्व करें : इडली को आप चाहे तो सांभर या फिर नारियल की चटनी के साथ भी खा सकते हैं।
कुल समय 40 मिनट
तैयारी का समय 15 मिनट
पकने का समय 25 मिनट
कितने लोगों के लिए2
मीडियम
लो कैलोरी ओट्स इडली की सामग्री
2 कप ओट्स
1/2 (हल्का खट्टा) लीटर दही
1 टी स्पून सरसों के दाने
1 टी स्पून उड़द की दाल
1/2 टी स्पून चने की दाल
1/2 टी स्पून तेल
2 टी स्पून हरी मिर्च, बारीक कटा हुआ
1 कप गाजर, कद्दूकस
2 टी स्पून धनिया, बारीक कटा हुआ
1/2 हल्दी पाउडर
2 टी स्पून नमक
एक चुटकी ईनो (फ्रूट फ्लेवर)
लो कैलोरी ओट्स इडली बनाने की विधि
1.एक तवे पर ओट्स को हल्का भूरा होने तक भूनें। इसके बाद मिक्सर में डालकर ओट्स का पाउडर बना लें।
2.एक पैन में तेल, सरसों के दाने (तड़कने दें), उड़द की दाल और चना दाल को भूरा होने तक भूनें।
3.अब इसमें कटा हुआ हरा धनिया, हरी मिर्च, कद्दूकस की हुई गाजर और हल्दी डालकर एक मिनट तलें।
4.यह बनाया हुआ मिश्रण ओट्स पाउडर में दही के साथ मिलाएं। मिश्रण बनाने के लिए पानी का इस्तेमाल न करें।
5.अब आपके इडली का मिश्रण तैयार है।
6.इडली के सांचे पर हल्का सा तेल लगा कर चिकना कर लें, और हर एक सांचे में इडली का मिश्रण डालें।
7.15 मिनट तक इडली को भाप देने के बाद उन्हें प्लेट में निकाल लें और प्याज की चटनी के साथ सर्व करें।
2. अंडा पराठा-
प्रोटीन से भरपूर कुछ स्वादिष्ट मील की तलाश कर रहे हैं तो आप अंडा पराठा को ट्राई कर सकते हैं. असल में पराठा भारतीयों की पहली ब्रेकफास्ट पसंद में से एक है. तो अगर, ब्रेकफास्ट में हेल्दी पराठा बनाना चाहते हैं, जो सिर्फ स्वाद ही नहीं सेहत से भी भरपूर हो. तो, आप प्रोटीन रिच अंडा पराठा रेसिपी को ट्राई कर सकते हैं.
एग पराठा की सामग्री
2 कप गेहूं का आटा
एक चुटकी नमक
1 टेबल स्पून तेल
2 अंडे
1/4 कप प्याज, टुकड़ों में कटा हुआ
1 हरी मिर्च, टुकड़ों में कटा हुआ
2 टेबल स्पून हरा धनिया, टुकड़ों में कटा हुआ
1/2 टी स्पून गरम मसाला
एग पराठा बनाने की विधि
1.एक बाउल में मैदा, नमक और तेल डालकर 1 कप पानी का प्रयोग कर नरम आटा गूंथ लें. अगर आटा सूखा लगता है तो आप थोड़ा और पानी डाल सकते हैं. अच्छी तरह से गूंध लें.
2.आटे को चार बॉल्स में बांट लें.
3.लोई को बेलन की मदद से समान रूप से बेल लें, फिर इसे दो बार मोड़कर एक त्रिकोण बना लें. त्रिकोणीय शीट बनाने के लिए इसे फिर से बेल लें. बाकी आटे के साथ भी यही प्रक्रिया को दोहराएं.
4.एक बाउल में, अंडे को प्याज, मिर्च, हरा धनिया, गरम मसाला और नमक के साथ अच्छी तरह से फेंट लें. एक तरफ रख दें.
5.बेले हुए पराठे को गरम तवे पर रखिये, और 1-2 मिनट तक दोनों तरफ से पकने दीजिये. सतह पर थोड़ा सा तेल डालें और इसे एक और मिनट के लिए पकने दें.
6.जैसे ही किनारे कुरकुरे होने लगें, सिलवटों के साथ एक तेज चाकू का उपयोग करके जल्दी से एक कट लगाएं और अंडे की आधी मात्रा डालें. पराठे को थोड़ा सा झुकाएं ताकि अंडे का मिश्रण अंदर आ जाए. फिर इसे पलट दें और दूसरी तरफ भी यही प्रक्रिया दोहराएं.
7.पराठे पर थोड़ा और तेल छिड़कें और अपने चम्मच के पिछले हिस्से का उपयोग करके सतह को धीरे से दबाएं. आंच को तेज कर दें और पराठे को तब तक पकाते रहें जब तक कि वह फूल कर क्रिस्पी ब्राउन न हो जाए.
8.ऊपर से देसी घी डालकर गरमागरम परोसें।
3. पनीर चीला-
पनीर का नाम लेते ही मुंह में पानी आ जाता है. पनीर से कई तरह की रेसिपीज बनाई जा सकती हैं. आपको बता दें कि पनीर को कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन डी जैसे पोषक तत्वों से भरपूर माना जाता है. इम्यूनिटी को मजबूत बनाने के लिए आप ब्रेकफास्ट में पनीर चीला को शामिल कर सकते हैं. ये एक हेल्दी और टेस्टी ब्रेकफास्ट रेसिपी है. पूरी रेसिपी के लिए यहां क्लिक करें.
पनीर बेसन चीला की सामग्री
1 कप बेसन
1/2 टी स्पून नमक
1 टी स्पून काली मिर्च
1 प्याज , टुकड़ों में कटा हुआ
1/2 कप पनीर , कद्दूकस
1 टमाटर
1/2 टी स्पून अजवाइन
2 हरी मिर्च
1/2 कप हरा धनिया
1 कप पानी
पनीर बेसन चीला बनाने की विधि
1.एक बाउल में बेसन लें, इसमें, काली मिर्च, प्याज, कद्दूकस पनीर, टमाटर, हरी मिर्च, अजवाइन, और हरा धनिया डालें।
2.अब इन सभी सामग्री को पानी की मदद से अच्छे से मिलाएं।
3.अगर आपको बेसन का यह घोल गाढ़ा लगे तो आप इसमें पानी मिलाकर पतला कर सकते हैं।
4.एक पैन लें और थोड़ा सा बेसन का घोल लेकर पैन में फैलाएं।
5.अब इस चीले को क्रिस्पी और गोल्डन ब्राउन होने तक फ्राई करें।
6.इस पर अब कद्दूकस किया हुआ पनीर, प्याज, काली मिर्च और हरा धनिया डालें।
7.इसे फोल्ड करें और लाल चटनी के साथ सर्व करें।
4. मिक्स वेजिटेबल सैलेड- पोषण से भरपूर सैलेड को आप ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर में शामिल कर सकते हैं. इस सैलेड को बनाने के लिए टमाटर, पत्तागोभी, शिमला मिर्च, गाजर, शहद और सिरके की जरूरत होती है.
मिक्स वेजिटेबल सैलेड की सामग्री
2 मीडियम टमाटर
2 कप पत्तागोभी, बारीक कटा हुआ
1(पतली लंबी कटी हुई) शिमला मिर्च
2 (पतली लंबी कटी हुई) गाजर
2 टी स्पून सिरका
1 टी स्पून शहद
2 टी स्पून नमक
काली मिर्च
2 टी स्पून दही
मिक्स वेजिटेबल सैलेड बनाने की विधि
1.सबसे पहले टमाटर को आठ हिस्सों में पतला लंबा करके काट लें।
2.फिर इसमें काली मिर्च, नमक, शहद, दही और सिरका डालकर ब्लैंडर में पीस लें।
3.इसके बाद गाजर, पत्तागोभी और शिमला मिर्च को काटकर फ्रिज में ठंडा होने के लिए रखकर छोड़ दें।
4.सर्व करने से पहले सभी सब्जियां और बनाए गए पेस्ट को एक साथ मिक्स करके मेहमानों के सामने पेश करें।
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /हिंदू धर्म में संतान के लिए कई तरह के व्रत रखे जाते हैं जिनमें से एक है जितिया व्रत. इस व्रत को जीवितपुत्रिका व्रत और जिउतिया पर्व के नाम से भी जाना जाता है. जितिया व्रत नहाय खाय से शुरू होकर सप्तमी, आष्टमी और नवमी तक चलता है. जितिया व्रत मान्यतानुसार मां पुत्र प्राप्ति या पुत्र की लंबी आयु के लिए रखती हैं. यह निर्जला व्रत होता है जिसमें जल भी नहीं पिया जाता है. जितिया व्रत इस साल अक्टूबर के पहले हफ्ते में किस दिन रखा जाएगा और इस व्रत की पूजा कैसे करते हैं जानिए यहां.
जितिया व्रत की तारीख और शुभ मूहूर्त |
इस साल 5 अक्टूबर के दिन नहाय खाय है जिस चलते अगले दिन यानी 6 अक्टूबर, शुक्रवार के दिन जितिया व्रत रखा जाएगा. इस व्रत का पारण अगले दिन 7 अक्टूबर, सुबह 10 बजकर 23 मिनट पर किया जाना है. वहीं, कुछ ज्योतिषियों का मानना है कि इस साल 6 अक्टूबर के दिन जितिया व्रत रखना शुभ नहीं होगा, इसीलिए इस व्रत को 7 अक्टूबर के दिन रखा जाना सही रहेगा.
व्रत की विधि
जितिया व्रत के दिन स्नान पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं. इस दिन भगवान जीमूतवाहन की पूजा की जाती है. कुशा से बनी जीमूतवाहन भगवान की प्रतिमा के समक्ष धूप-दीप, चावल और पुष्ण अर्पित किए जाते हैं. इसके अतिरिक्त, व्रत में गाय के गोबर और मिट्टी से चील और सियारिन की मूर्ति बनाई जाती है. पूजा करते हुए इनके माथे पर सिंदूर से टीका लगाते हैं और पूजा समाप्त होने के बाद जितिया व्रत की कथा (Jitiya Vrat Katha) सुनी जाती है.
जितिया व्रत की कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार जितिया व्रत की कथा महाभारत काल से जुड़ी है. इस कथा के अनुसार जब महाभारत के युद्ध के दौरान अश्वत्थामा ने अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ में पल रही संतान को मार दिया था तो श्रीकृष्ण ने अपनी शक्तियों से एकबार फिर उस संतान को जीवित कर दिया. जन्म के बाद इसी पुत्र का नाम जीवित्पुत्रिका रखा गया था. माना जाता है कि इसके बाद से ही जितिया या जीवित्पुत्रिका व्रत को रखने की परंपरा शुरू हुई थी.
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
