
CONTECT NO. - 8962936808
EMAIL ID - shouryapath12@gmail.com
Address - SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /हर साल भाद्रपद माह की पूर्णिमा तिथि से 15 दिन के लिए पितृपक्ष आरंभ हो जाता हैं. सनातन धर्म में पितृ पक्ष को अपने पितरों के मोक्ष और मुक्ति के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. इस बार पितृपक्ष 29 सितंबर यानी शुक्रवार से शुरू हो रहे हैं. मान्यता है कि श्राद्ध के लिए जो भोजन बनता है, उस भोजन का अंश धरती के पांच जीवों को जरूर दिया जाता है. इन पांच जीवों को सनातन धर्म के पंचतत्व से जोड़कर देखा गया है. इन पांच जीवों को श्राद्ध के भोजन का अंश पहुंचाने से तय होता है कि पितर शांत होते हैं. चलिए आज जानते हैं कि श्राद्ध के भोजन का अंश किन-किन जीवों के लिए निकाला जाता है और हिंदू धर्म में उनकी क्या भूमिका रही है.
पितृपक्ष में 5 जीवों को क्यों निकाला जाता है भोजन
गाय
गाय को सनातन धर्म में मां का दर्जा प्राप्त है. पंचतत्व में गाय को पृथ्वी का तत्व कहा गया है. इसलिए गाय को श्राद्ध भोजन का अंश निकाला जाता है.
कौआ
वहीं, कौए को सनातन धर्म में वायु तत्व का प्रतीक कहा गया है. मान्यता है कि श्राद्ध के भोजन का अंश कौए ने खा लिया तो समझिए पितरों का पेट भर गया है और वो प्रसन्न हैं. इसलिए श्राद्ध भोजन का अंश कौए के लिए जरूर निकाला जाता है. इसके अलावा पितृ पक्ष में कौए को देखना बहुत शुभ माना जाता है.
कुत्ता
सनातन धर्म में कुत्ते को जल तत्व का प्रतीक कहा गया है. कहा जाता है कि श्राद्ध भोजन का एक अंश कुत्ते को खिलाया जाता है. ऐसा करने से पितरों की आत्मा शांत होती है और वो खुश होकर घर परिवार को उन्नति का वरदान देते हैं.
देवता
देवताओं को आकाश तत्व का प्रतीक कहा गया है. देवताओं को हर तरह के भोज का पहला अंश खिलाने की सनातन धर्म की परंपरा रही है. कहा जाता है कि श्राद्ध पक्ष के भोजन का अंश देवताओं के लिए निकालने पर पितर प्रसन्न होकर घर परिवार को खुशहाली का आशीर्वाद देते हैं.
चींटी
चींटी देखने में भले ही छोटी सी हो, लेकिन सनातन धर्म में इसे अग्नि का प्रतीक कहा गया है. श्राद्ध पक्ष में भोजन का अंश चींटी के लिए भी निकाला जाता है. इससे पितर तृप्त होतें है और अपनी आने वाली पीढ़ी के उत्थान के लिए प्रार्थना करते हैं.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ / आजकल स्क्रीन टाइम बढ़ने के कारण कम उम्र में ही आंखों पर मोटा चश्मा चढ़ जा रहा है. जो लोग वर्किंग हैं उनको 8 से 9 घंटे लैपटॉप की स्क्रीन के सामने गुजारना पड़ता है. ऐसे में इससे निकलने वाली ब्लू रेज आंखों की सेहत पर बुरा असर डालती हैं. इसलिए आप कुछ- कुछ देर में सीट से उठकर टहल लीजिए. ऐसा करने से आपकी आंखो को आराम मिलेगा और खतरनाक ब्लू किरणों का भी असर कम होगा. इसके आलावा यहां पर एक योग मुद्रा के बारे में बताने जा रहे हैं जिसको करने से आंख पर चढ़े चश्मे का नंबर कम हो सकता है.
आंख की रोशनी तेज करने के लिए योग मुद्रा |
प्राण मुद्रा |
1-यह मुद्रा अगर आप करते हैं तो आपकी आंखो से पावर वाला चश्मा उतर सकता है. इसको करने से आंख की रोशनी तेज होगी साथ ही आंख से जुड़ा रोग भी दूर रहेगा.
2- इस अभ्यास को करने से नाड़ी से जुड़ा रोग दूर रहता है. यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है. इससे खून भी साफ होता है. यह शरीर की कमजोरी को भी दूर करता है. यह दिमाग को भी शांत रखता है.
3- प्राण मुद्रा शरीर में जल, अग्नि और पृथ्वी को संतुलित रखता है. प्राण मुद्रा का ये अभ्यास भूख और प्यास को भी नियंत्रित करने का काम करता है. इस मुद्रा से एकाग्रता भी बढ़ती है. विद्यार्थी वर्ग को यह मुद्रा रोज करनी चाहिए.
कैसे करें प्राण मुद्रा |
कनिष्ठा, अनामिका और अंगूठे के शीर्ष को मिलाएं. बाकी सभी उंगलियों को सीधी रखें. इसे आप 45 मिनट तक करें हर रोज.
ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ / आज के समय में बालों का सफेद होना एक ऐसी समस्या बन गई है जिससे बढ़े क्या बच्चे भी जूझ रहे हैं. एक समय बालों का सफेद होना बढ़ती उम्र के लक्षणों में होता था, लेकिन आज के समय में लोगों की लाइफस्टाइल और खानपान की वजह से भी लोगों के बाल तेजी से सफेद होने लग जाते हैं. इनको छिपाने के लिए बाजार में वैसे तो कई तरह के हेयर कलर और डाई मिलते हैं. लेकिन इनको लगाने से बालों को नुकसान भी पहुंच सकता है. क्योंकि इसमें इस्तेमाल किए जाने वाले केमिकल कई बार लोगों को सूट नहीं करते हैं और यह बालों को डैमेज भी कर सकते हैं. इस डर से कई लोग बाजार में मिलने वाले हेयर कलर और डाई का इस्तेमाल नहीं करते हैं. अगर आप भी बालों के सफेद होने से परेशान हैं और उनको नेचुरली काला करना चाहते हैं तो हमारे पास इसके लिए एक देसी नुस्खा है.
सरसों का तेल बालों के लिए अच्छा होता है. इसमें पाए जाने वाले तत्व बालों को काला, घना, लंबा और मजबूत बनाने में मदद करते थे. पुराने समय में भी हमारी नानी-दादी बालों पर इसी तेल को लगाती थीं. आज हम आपको इस तेल के साथ कुछ चीजों को मिलाकर बनाने का तरीका बताएंगे. ये तेल इतना असरदायी है कि ये आपके बालों को नेचुरली तौर पर काला करने और बालों को मजबूत बनाने में भी मदद करेगा. तो आइए जानते हैं इस तेल को बनाने का तरीका.
इस तेल को बनाने के लिए आपको चाहिए एक कटोरी सरसों का तेल. एलोवेरा की एक पत्ती, मुट्ठी भर एलोवेरा, 2 प्याज मीडियम साइज की, एक मुट्ठी करी पत्ता, 1 चम्मच कलौंजी चाहिए.
इस तेल को बनाने के लिए एक लोहे की कढ़ाही में सरसों का तेल गर्म करें और उसमें सभी चीजों को मिला कर 10-15 मिनट के लिए गर्म होने दें. फिर उसको लोहे की कढ़ाही में ही ठंडा होने के लिए रख दें. ठंडा होने के बाद तेल को छानकर निकाल लें. अब इस तेल को बालों की जड़ों और स्कैल्प पर लगाकर अच्छे से धीरे-धीरे मसाज करें. बालों की जड़ों से सिरों तक अच्छे से लगाकर छोड़ दें. आप चाहें तो बालों में तेल रातभर के लिए लगा भी रहने दे सकते हैं. या फिर 2 घंटे बाद बालों को धोलें. इस तेल को बनाने में इस्तेमाल की गई चीजें, बालों को काला करने, घना और मजबूत बनाने में मदद करती हैं. बेहतर रिजल्ट के लिए इस तेल को बालों पर हफ्ते में 2 बार लगाएं. आपको कुछ ही दिनो में असर दिखने लगेगा.
पर्यटन/शौर्यपथ /आज देश भर में विश्व पर्यटन दिवस मनाया जा रहा है. हर साल 27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस मनाया जाता है. घमने-फिरने के शौकीन लोगों के लिए ये दिन बेहद ही अहम है. असल में टूरिज्म का हमारी देश की अर्थव्यवस्था पर भी खासा असर देखने को मिलता है. किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए टूरिज्म एक बहुत बड़ा सेक्टर है. टूरिज्म के जरिए लाखों-करोड़ों लोगों को रोजगार मिलता है और उनका पेट पलता है. आपको बता दें कि वर्ल्ड टूरिज्म डे टूरिज्म के प्रति लोगों को जागरुक करने क लिए मनाया जाता है. साल 1980 से ही विश्व पर्यटन दिवस मनाया जा रहा है. 27 सितंबर 1970 वो दिन था, जब यूनाइटेड नेशंस वर्ल्ड टूरिज्म ऑर्गनाइजेशन के कानूनों को अपनाया गया था.
सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और आर्थिक मूल्य को समझने के लिए दुनिया भर में वर्ल्ड टूरिज्म डे मनाया जाता है. इस साल वर्ल्ड टूरिज्म डे का मेजबान देश सऊदी अरब है.
अगर आप भी घूमने का शौक रखते हैं और अपने दोस्तों या फैमिली के साथ ट्रिप पर जाने का प्लान बना रहे हैं तो इन जगहों पर जा सकते हैं.
1. नेपाल
कम पैसों में अगर कहीं जाना चाहते हैं तो नेपाल भारतीय के लिए एक शानदार ऑप्शन हो सकता है. यहां के प्राकृतिक सौन्दर्य, पर्वत, तीर्थ स्थल, फूड और अनुभवों के लिए प्रसिद्ध है. नीचे देखें नेपाल के फेमस व्यंजन.
(I). नेपाली मोमोज-
नेपाल अपने नेपाली मोमोज़ के लिए काफी फेमस है. नेपाली मोमोज का एक अपना खास स्वाद है. अगर आप यहां जाएं तो नेपाली मोमोज जरूर ट्राई करें.
(II). जुजू धाऊ-
यह एक तरह का दही है जिसे मिट्टी के बर्तन में परोसा जाता है. इसे फुल क्रीम मिल्क यानी से तैयार किया जाता है. इसे आप गली नुक्कड़ पर आसानी से खरीदकर खा सकते हैं.
2. थाईलैंड
हर साल अधिकतर भारतीय टूरिस्ट थाईलैंड की यात्रा पर जाते हैं. थाईलैंड घूमने में अधिक पैसे व्यय नहीं करते पड़ते. विदेश की बजट यात्रा के लिए थाईलैंड एक पॉपुलर प्लेस है, जो टूरिस्ट को अपनी खूबसूरत सौंदर्य, खास खाना, और धार्मिक स्थलों के लिए आकर्षित करता है. नीचे देखें थाईलैंड के पॉपुलर व्यंजन.
(I). थाई क्रंची रोल-
थाइलैंड के पॉपुलर स्नैक्स में से एक है थाई क्रंची रोल. इसे मशरूम, बेबी कॉर्न बीन्स और कई मसालों के साथ बनाया जाता है.
(II). थाई ग्रीन चिकन करी
इस चिकन को नारियल के दूध में प्याज, नीबू की पत्तियों, तुलसी की पत्तियों और सुगंधित थाई हरी करी पेस्ट के साथ पकाया जाता है.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ / काजू एक ऐसा ड्राई फ्रूट्स है जिससे कई तरह की रेसिपीज बनाई जा सकती हैं. काजू को कई डिशेज में गार्निशिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता है. काजू में मौजूद पोषक तत्व शरीर को कई लाभ पहुंचाने में मदद कर सकते हैं. आपको बता दें कि काजू में फाइबर, मैग्नीशियम, मैंगनीज, प्रोटीन, आयरन, फॉस्फोरस, जिंक, कॉपर, विटामिन के, विटामिन बी6 और थायमिन जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं. जो शरीर को कई समस्याओं से बचाने में मदद कर सकते हैं. लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि काजू को दूध में भिगोकर खाने से आपकी सेहत को कई चमत्कारिक लाभ मिल सकते हैं. दूध में भीगे काजू खाने से इम्यूनिटी और हड्डियों को मजबूत बनाया जा सकता है.
दूध में भीगे काजू खाने के फायदे- Cashew Soaked In Milk Overnight Benefits In Hindi:
1. इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए-
दूध में भीगे काजू का रोजाना सेवन करने से इम्यूनिटी को मजबूत बनाने में मदद मिल सकती है. क्योंकि काजू में विटामिन्स, मिनरल्स जैसे गुण पाए जाते हैं, जो कमजोर इम्यूनिटी को बूस्ट करने में मददगार हैं.
2. वजन बढ़ाने के लिए-
अगर आप दुबले-पतले हैं और वजन को बढ़ाना चाहते हैं तो आपके लिए दूध में भीगे काजू का सेवन फायदेमंद हो सकता है. काजू और फुल फैट दूध में कैलोरी और हेल्दी फैट होता है, जो वजन को बढ़ाने में मदद कर सकता है.
3. हेल्दी स्किन के लिए-
हेल्दी और सुंदर स्किन भला किसे पसंद नहीं. लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि डाइट में काजू को शामिल कर स्किन को हेल्दी रखा जा सकता है. काजू में एंटीऑक्सीडेंट्स काफी अधिक मात्रा में पाए जाते हैं. रोजाना दूध में भीगे काजू खाने से फ्री रेडिकल्स को दूर करने और स्किन को हेल्दी रखने में मदद मिल सकती है.
4. कब्ज की समस्या के लिए-
कब्ज आज के समय की एक ऐसी समस्या है जिससे हर दिन दो-चार होना पड़ता है. खान-पान में जरा सी लापरवाही कब्ज की समस्या को बढ़ा सकती है. अगर आप कब्ज की समस्या से परेशान हैं तो रोजाना दूध में भीगे काजू का सेवन करने से इस समस्या से छुटकारा मिल सकता है.
रसोई टिप्स /शौर्यपथ/ इंडियन किचन में मौजूद लहसुन एक ऐसा मसाला है जिसे दाल में तड़का लगाना हो या सब्जी का मसाला तैयार करना, हर चीज में इसे स्वाद और सुंगध के लिए इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन लहसुन का सिर्फ इतना ही इस्तेमाल नहीं है. इसे सेहत के लिए भी बेहद गुणकारी माना जाता है. लहसुन में पाए जाने वाले पोषक तत्व इसे और खास बनाते हैं. लेकिन एक परेशानी लहसुन के साथ जो आती है वो है इसे छिलने में. अगर किचन में समय बिताते हैं तो आपको पता होगा कि इसे छीलना इतना आसान नहीं है. अगर आप भी इस परेशान से जूझ रहे हैं तो हमने आपको कवर किया है. लहसुन छीलने के लिए आप इन ट्रिक्स को अपना कर अपना समय बचा सकते हैं.
यहां हैं लहसुन छीलने के आसान तरीके
1. लहसुन को आप कम समय में इस तरीके से छील सकते हैं-
सबसे पहले आप लहसुन की एक कली लें. उसे चॉपिंग बोर्ड पर रखें और चाकू से दबा दें.
आप चाहें तो चाकू के अलावा किसी और चीज से भी हल्के से दबा सकते हैं.
जब लहसुन दब जाएगा तो इसके छिलके खुद-ब-खुद निकल जाएंगे. बस आपको उसे उठाकर छिलकों को हटाना है.
2. अगर आप ऐसे लहसुन को नहीं छीलना चाहते हैं तो दूसरा तरीका अपना सकते हैं.
किसी बर्तन में हल्का गुनगुना पानी लेकर उसमें लहसुन की कलियां डाल दें. अब इसमें लहसुन की कलियों को अगले 10 मिनट के लिए छोड़ दें. छिलका थोड़ा साफ हो जाए तो फिर हाथों से रगड़ें, इस तरह बहुत ही आसानी से आप लहसुन का छिलका निकाल पाएंगे.
ये लहसुन छीलने का सबसे आसान और सिंपल तरीका है, जिसमें बहुत कम मेहनत और समय लगता है. आप बेलन से जिस तरह रोटी बेलते हैं उसी तरह से लहसुन को भी बेल लें. इससे छिलके खुद-ब-खुद खुल जाएंगे. इसके बाद आप आसानी से लहसुन की कलियों को निकाल सकते हैं.
3. इसके अलावा आप लहसुन को एक और तरीके से छील सकते हैं-
लहसुन छिलने का सबसे आसान तरीका है कि लहसुन की कली को कुछ सेकंड के लिए माइक्रोवेव में रख दें. और बाहर निकाल कर बड़ी आसानी से आप इन्हें छील सकते हैं.
आस्था /शौर्यपथ /आपने अक्सर लोगों को पैरों में काला धागा पहने देखा होगा, खासकर लड़कियों को. आपने सोचा है कभी आखिर क्यों इसको पहनते हैं इसके पीछे क्या कारण है. असल में काला रंग गर्मी को अवशोषित कर नकारात्मक ऊर्जाओं को दूर रखने में ढाल की तरह काम करता है. इसके अलावा काले धागा पहनने के पीछे की क्या मान्यताआर्टिकल में आपको बताने वाले हैं. तो आइए बिना देर किए जानते हैं.
काला धागा पहनने के फायदे
1- मान्यता है कि पैर में काला धागा पहनने से शनि ग्रह दोष दूर होता है और आंख की रोशनी मजबूत होती है. यह जीवन में आने वाली सभी बांधाओं को दूर करता है.
2- इसके अलावा पेट संबंधी परेशानी भी पैर में धागा पहनने से दूर होती है. इससे कब्ज, लूज मोशन जैसी दिक्कते नहीं होती हैं. यह मेटाबॉलिज्म मजबूत करता है.
3- वहीं, हाथ में या फिर कलाई में काला धागा पहनने से सफलता मिलती है. इसके अलावा पेट में पहनने से स्तन, पेट से जुड़ी दिक्कते नहीं होती हैं. यह मोटापे को भी कंट्रोल करता है.
4- इसके अलावा मान्यता है कि काला धागा वाहन पर बांधने से काली नजर दूर रहती है और किसी तरह की दुर्घटना होने का भी डर नहीं रहता है.
5- वहीं, यह भी मान्यता है कि काला धागा मेन गेट पर बांधते हैं तो फिर निगेटिव एनर्जी दूर रहती हैं. घर में सकारात्मता बनी रहती है.
6- काले धागे को हमेशा 9 गांठ बांधने के बाद ही पहनना चाहिए. इस धागे को बांधने के बाद आप हर दिन गायत्री मंत्र का जाप करें. इससे प्रभाव और बढ़ जाता है.
7-छोटे बच्चे को काला धागा जरूर पहनाना चाहिए. असल में जिन बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम होती है, यह धागा उनके शरीर को बीमारियों से लड़ने की ताकत देता है.
8-काला रंग गर्मी को अवशोषित कर लेता है. इसलिए यह नकारात्मक ऊर्जाओं को दूर रखने में ढाल की तरह काम करता है.
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /हर महीने की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है. प्रदोष व्रत में मान्यतानुसार भगवान शिव की पूजा की जाती है. माना जाता है कि जो भक्त प्रदोष व्रत रखते हैं उनपर भोलेनाथ की कृपादृष्टि पड़ती है और जीवन से कष्ट दूर होकर जीवन सुखमय बनता है. आज 27 सितंबर के दिन बुधवार होने के चलते इस प्रदोष व्रत को बुध प्रदोष व्रत कहा जाता है. बुध प्रदोष व्रत में माना जाता है कि साधक को यश, धन और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है. जानिए इस दिन किस तरह की जा सकती है पूजा.
बुध प्रदोष व्रत की पूजा |
पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह की त्रयोदशी का प्रदोष व्रत आज 27 सितंबर के दिन रखा जा रहा है. त्रयोदशी तिथि इस बार रात 10 बजकर 18 मिनट से शुरू हो रही है. प्रदोष व्रत की पूजा प्रदोष काल में की जाती है. आज प्रदोष काल में पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 12 मिनट से रात 8 बजकर 36 मिनट तक है.
बुध प्रदोष व्रत की पूजा में सुबह उठकर स्नान पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं और व्रत का संकल्प लिया जाता है. इस दिन पूजा शाम के समय होती है लेकिन सुबह के समय भी भक्त शिव मंदिर दर्शन करने चले जाते हैं. प्रदोष की पूजा में शिवलिंग पर गंगाजल और दूध से अभिषेक किया जाता है. महादेव के समक्ष भांग, धतूरा, शमी के पत्ते, सफेद फूल, शहद और शक्कर आदि अर्पित करते हैं. इसके अलावा, 'ओम नम: शिवाय' मंत्र का उच्चाकण करना अत्यधिक शुभ माना जाता है. भगवान शिव की आरती की जाती है और भक्त अपनी मनोकामनाएं मांगकर पूजा पूर्ण करते हैं.
कुछ बातों का रंखा जाता है ध्यान
बुध प्रदोष व्रत में कुछ बातों पर ध्यान दिया जाता है जिनमें से एक यह है कि बुधवार को भगवान गणपति का दिन भी माना जाता है जिस चलते बप्पा की पूजा भी की जा सकती है.
प्रदोष व्रत रखने वाले भक्त दिनभर निराहार रहते हैं. बहुत से लोग इस दिन निर्जला व्रत भी रखते हैं.
शिव पार्वती युगल की पूजा करना भी इस दिन अत्यधिक शुभ और महत्वपूर्ण मानी जाती है.
ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ /बालों के झड़ने और लगातार पतले होने की दिक्कत को दूर करने के लिए कई तरह के तेल लगाए जाते हैं. लेकिन, क्या आपने कभी घी को सिर पर लगाकर देखा है. असल में घी को बालों में लगाना एक आयुर्वेदिक नुस्खा है जो बालों को बढ़ाने और घना बनाने में असर दिखाता है. घी एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों और एंटी-ऑक्सीडेंट्स का भी अच्छा स्त्रोत है जो बालों की कई दिक्कतें भी दूर करता है. जानिए बालों पर किस तरह घी लगाएं और इसे लगाने के कौन-कौनसे फायदे होते हैं.
बालों पर घी लगाने के फायदे |
बढ़ते हैं बाल
घी को बालों पर लगाने से स्कैल्प का ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है जिससे बाल लंबे, घने और हेल्दी बनते हैं. इससे बालों को बढ़ने में भी मदद मिलती है और झड़ते बालों की दिक्कत कम करने में भी यह नुस्खा मददगार है. बालों में घी लगाने के लिए इसे हल्का गर्म करें और उंगलियों या रूई की मदद से बालों की जड़ों से लेकर सिरों तक घी लगा लें. इसे सिर में रातभर भी लगाकर रखा जा सकता है या फिर सिर धोने से एक घंटे पहले भी बालों में घी लगा सकते हैं.
दूर होगा डैंड्रफ
डैंड्रफ से छुटाकारा दिलाने में भी घी का असर दिखता है. एक कटोरी में 2 चम्मच घी, एक चम्मच नींबू का रस और एक चम्मच बादाम का तेल मिलाएं. इस मिश्रण को स्कैल्प पर अच्छी तरह लगाएं और एक घंटे बाद सिर धो लें. डैंड्रफ का सफाया हो जाएगा.
मुलायम बनेंगे बाल
बालों पर यूं तो सादा घी लगाने पर भी बाल मुलायम होने लगते हैं लेकिन इसे नारियल तेल के साथ मिलाकर लगाने से बाल अत्यधिक मुलायम हो जाते हैं. एक चम्मच नारियल के तेल में बराबर मात्रा में घी मिला लें. इसे सिर पर लगाएं और एक से डेढ़ घंटे बाद रोज की ही तरह शैंपू से सिर धो लें. हफ्ते में एक बार भी इस नुस्खे को आजमाया जाए तो बालों पर कमाल का असर दिखता है.
स्कैल्प को मिलती है नमी
जिन लोगों के बाल जरूरत से ज्यादा रूखे हैं उनके लिए घी कमाल का साबित होता है. घी से सिर की मालिश करने पर ड्राई, खुजली वाली और फ्लेकी स्कैल्प को मॉइश्चर मिलता है. इससे बालों का रूखापन दूर होकर बाल सोफ्ट, सिल्की और शाइनी बनते हैं.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ /अमरूद और अमरूद के पत्ते दोनों ही सेहत के लिए बेहद अच्छे होते हैं. अमरूद के पत्तों को कई स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों को दूर करने के लिए खाया जाता है और इन्हीं में से एक है डायबिटीज. डायबिटीज होने पर ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है. ऐसे में अमरूद के पत्तों का सेवन किया जा सकता है. अमरूद के पत्तों में एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटीमाइक्रोबियल गुण और एंटी-ऑक्सीडेंट्स होते हैं. इसके अलावा, ये पत्ते विटामिन बी और सी के भी अच्छे स्त्रोत हैं. जानिए डायबिटीज में इनका सेवन कैसे किया जा सकता है.
डायबिटीज में अमरूद के पत्ते |
डायबिटीज में अमरूद के पत्तों की चाय बनाकर पी जा सकती है. इसके लिए एक कप पानी में कुछ अमरूद के पत्ते उबालें और इसे कप में छानकर पिएं. इससे बल्ड शुगर लेवल्स रेग्यूलेट होते हैं. इस चाय को पीने का सही समय खाना खाने के बाद है. अमरूद के पत्तों को धोकर और साफ करके सुबह खाली पेट भी खाया जा सकता है.
ये भी हैं फायदे
अमरूद के पत्ते डायबिटीज में तो फायदेमंद है हीं, इनसे शरीर को और भी कई फायदे मिलते हैं. अमरूद के पत्तों के सेवन से पेट का दर्द दूर होता है.
कॉलेस्ट्रोल कम करने में भी अमरूद के पत्ते असर दिखाते हैं. इनसे नसों में जमा कॉलेस्ट्रोल पिघलकर निकल जाता है.
वजन घटाने में भी अमरूद के पत्तों का असर दिखता है. इन पत्तों से बैली फैट भी कम होने लगता है. वजन घटाने के लिए भी अमरूद के पत्तों की चाय पी सकते हैं.
अमरूद के पत्ते चबाने और इन पत्तों की चाय पीने पर बालों को भी लाभ मिलता है. ये पत्ते स्कैल्प पर ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाते हैं और हेयर फॉलिकल्स को बेहतर करते हैं.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ /अलसी के बीजों की गिनती सुपरफूड्स में की जाती है. इसकी एक वजह इन बीजों का पोषक तत्वों से भरपूर होना है. अलसी के बीजों में फाइबर की भरपूर मात्रा पाई जाती है. इसके अलावा इनमें हाई क्वालिटी अमीनो एसिड्स होते हैं, ओमेगा-3 फैटी एसिड्स होते हैं और कॉपर, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस और थियामिन की अच्छी मात्रा होती है. इन बीजों के सेवन से शरीर को कई फायदे मिलते हैं जिनके बारे में यहां दिया जा रहा है. साथ ही, जानिए इन बीजों को किस तरह खानपान का हिस्सा बनाया जा सकता है.
अलसी के बीज खाने के फायदे |
वजन कम करने के लिए अलसी के बीज खाए जा सकते हैं. इनमें फाइबर भरपूर मात्रा में होता है जो पेट को लंबे समय तक भरा हुआ रखता है जिससे बार-बार भूख नहीं लगती और एक्सेस फूड इंटेक कम होता है.
दिल की सेहतभी अलसी के बीजों को खाने पर अच्छी रहती है. अलसी के बीजों में ओमेगा-3 फैटी एसिड्स होते हैं जो हार्ट हेल्थ को अच्छा रखते हैं. इन बीजों से इंफ्लेमेशन भी कम होती है.
ब्लड कॉलेस्ट्रोल कम करने में भी अलसी के बीजों के फायदे नजर आते हैं. इन बीजों से एलडीएल यानी गंदा कॉलेस्ट्रोल कम होता है. ये बीज शरीर से टॉक्सिंस कम करने में भी असर दिखाते हैं.
पाचन को बेहतर बनाए रखने में भी अलसी के बीज काम आते हैं. फाइबर पेट की दिक्कतों को दूर रखता है. इससे कब्ज की दिक्कत भी नहीं होती है और खाना बेहतर तरीके से पचता है.
डाइट में अलसी के बीज शामिल करना
अलसी के बीजों को भूनकर स्नैक्स की तरह खाया जा सकता है. ये बीज टेस्टी होते हैं जिससे इन्हें खाना अच्छा भी लगता है.
सुबह एक चम्मच अलसी के बीज खाकर एक गिलास गर्म पानी पीने पर पेट की चर्बी पिघलने लगती है.
अलसी के बीजों को फलों या सलाद में डालकर भी खाया जा सकता है.
ओट्स में अलसी के बीज डाले जा सकते हैं, दलिया में इन्हें डाला जा सकता है और ब्रेकफास्ट सीरियल में भी ये बीज स्वादिष्ट लगते हैं.
अलसी के बीजों का देसी तरह से इस्तेमाल करने के लिए आप 1-2 चम्मच अलसी के बीजों को पीसकर आटे में मिलाकर रोटियां बना सकते हैं या फिर परांठे की फिलिंग में इसे भर सकते हैं.
ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ /जब भी खुद को संवारने की बात आती है तो, हम में से ज्यादातर लोग केवल चेहरे को निखारने तक ही सीमित रह जाते हैं. हाथ और पैर की तरफ ध्यान नहीं देते हैं. जिसके कारण इन हिस्सों की त्वचा चेहरे से बिल्कुल अलग दिखने लगती है. ऐसे में आज हम कैसे हाथ और पैर की डेड स्किन को बाहर निकाल सकते हैं एक बेहद ही घरेलू नुस्खा बताने वाले हैं. इस रेमेडी को तैयार करने में किन चीजों की जरूरत पड़ेगी आगे आर्टिकल में बताने वाले हैं.
राइस डेड स्किन रिमूवल पैक
सामग्री- इसके लिए आपको 01 चम्मच चावल का आटा, 1/3 बेकिंग सोडा, आधे कटे नींबू का रस, 02 चम्मच दही चाहिए.
बनाने की विधि
इन चारों सामग्रियों को अच्छे से मिक्स कर लीजिए, फिर आप अपने हाथ और पैर में अच्छे से अप्लाई कर लीजिए और 10 मिनट तक सूखने के लिए छोड़ दीजिए. इसके बाद आप वाइप से साफ कर लीजिए अच्छे से. फिर पानी से धोकर हाथ पैर को सुखा लीजिए और एक लाइट मॉइश्चराइजर अप्लाई कर लीजिए.
टैनिंग से कैसे बचें
अगर आप चाहती हैं कि आपके हाथ पैर साफ-सुथरे और चमकदार बने रहें उस पर टैनिंग की पतर ना चढ़े तो कुछ खास बातों का ध्यान रखें. सबसे पहली चीज तो बाहर निकलने से पहले चेहरे के अलावा सन स्क्रीन लोशन जरूर अप्लाई करें हाध और पैर में. दूसरी जब बाहर से घर में आएं तो हाथ पैर को अच्छे क्लीन करके मॉइश्चराइज करें. इससे आपके पैर हाथ मुलायम और चमकदार बने रहेंगे और टैनिंग भी नहीं होगी.
ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ / आजकल युवाओं में कोरियन ब्यूटी हैक्स का खूब क्रेज है. उनके हैक्स लोग खूब फॉलो कर रहे हैं, खासकर स्किन केयर. असल में कोरियन लड़कियों और लड़कों की स्किन शीशे की तरह चमकदार और बेदाग होती है, यही कारण है हर कोई उनकी जैसी ग्लासी स्किन पाना चाहता है. कोरियन स्किन के बढ़ते क्रेज को देखते हुए आज हम आपको उनका सबसे पॉपुलर नुस्खा बताने जा रहे हैं. आपको बता दें कि यहां के लोग बाल हो या फिर चेहरा इसको निखारने के लिए चावल का इस्तेमाल अलग-अलग तरीके से करते हैं. इस आर्टिकल में पके चावल का फेस पैक बनाने के बारे में बताने वाले हैं. तो आइए जानते हैं बिना देर किए.
पके चावल का फेस पैक
- आपको एक कटोरी में 02 चम्मच पके चावल लेना है, फिर उसमें 02 चम्मच कच्चा दूध और 01 चम्मच शहद मिलाकर अच्छे से पेस्ट बना लीजिए. फिर इसको फेस पैक ब्रश की मदद से चेहरे से लेकर गर्दन तक में अच्छे से अप्लाई कर लीजिए. इस पैक को आपको 10 मिनट के लिए लगाकर रखना है. इसके बाद साफ पानी से चेहरे को अच्छे से क्लीन कर लीजिए. इसके बाद कॉटन टॉवल से फेस को हल्के हाथ से सुखाकर मॉइश्चराइजर लगा लीजिए.
- आप इस रेमेडी को हफ्ते में एकबार अप्लाई करेंगी तो आपके फेस पर कसाव बना रहेगा. झुर्री, दाग धब्बे और फाइन लाइन की समस्या नहीं होगी. वहीं, अगर आपको सनबर्न की वजह से टैनिंग हो गई है तो फिर यह पैक आपकी स्किन के लिए तो रामबाण है. जिन लोगों की उम्र 30 के पार उन्हें तो इस नुस्खे को जरूर अपनाना चाहिए.
- असल में चावल स्किन के लिए इसलिए लाभदायक है क्योंकि इसमें पाए जाने वाले अमीनो एसिड्स,एंटी-ऑक्सीडेंट्स और खनिज जैसे पोषक तत्व एजिंग की प्रक्रिया को धीमा करने में सहायक होते हैं. वहीं, कच्चे दूध में क्लींजिंग गुण होता है जो स्किन से डेड सेल्स को निकालकर चेहरे को चमकदार बनाते हैं साथ ही स्किन पर नमी भी बनाए रखते हैं.
खाना खजाना/शौर्यपथ /बाजरा भारत में कई राज्यों में उगाई जाती है. यह प्राकृतिक रूप से ग्लूटेन फ्री और पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं. भारत में उगाई जाने वाली बाजरा फसलों में ज्वार, कोदो बाजरा, सामा बाजरा, बार्नयार्ड बाजरा, फॉक्सटेल बाजरा, रागी मुख्य हैं. सेहत के लिए बेहद फायदेमंद बाजरा को डाइट में शामिल करने की हर किसी को सलाह दी जाती है. आइए जानते हैं मिलेट्स सेहत को किस तरह लाभ पहुंचाते हैं और आप इन्हें किस तरह अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं.
बाजरा से सेहत को लाभ |
बाजरा पोषण से भरपूर होते हैं और चावल के बदले खाने के लिए बेहतरीन ऑप्शन साबित हो सकते हैं.
पोटेशियम और मैग्नीशियम की अच्छी मात्रा के कारण तनाव कम करने में मदद करते हैं.
फाइबर से भरपूर होने के कारण लंबे समय तक पेट को भरा रखते हैं और डाइजेशन सिस्टम को बेहतर करते हैं.
महिलाओं में हार्मोनल संतुलन बनाए रखने में मददगार होते हैं.
बाजरा नियासिन का अच्छा सोर्स है, यह स्किन को हेल्दी रखते हैं.
डार्क बाजरा बीटा-कैरोटीन का एक अच्छा सोर्स है जो आंखों को हेल्दी रखने वाला एंटीऑक्सीडेंट है.
बाजरे में मौजूद घुलनशील और अघुलनशील फाइबर के कारण यह गट हेल्थ के लिए फायदेमंद है और कोलन कैंसर के खतरे को कम करता है.
बाजरा में कैल्शियम, आयरन और प्रोटीन भरपूर मात्रा में होती है. यह गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए कंप्लीट फूड है.
इसमें मौजूद राइबोफ्लेविन, थायमिन, नियासिन और फोलिक एसिड जैसे विटामिन सेल ग्रोथ, नर्वस सिस्टम और स्पाइन के विकास में मदद करते हैं.
इसमें मौजूद आयरन, फास्फोरस और पोटेशियम जैसे खनिज ब्लड बनाने में मदद करते हैं.
बाजरा डायबिटीज और हार्ट डिजीज के मरीजों के लिए फायदेमंद होता है.
ऐसे कर सकते हैं बाजरा को डाइट में शामिल |
बाजरा को पिसवा कर आटे की तरह यूज किया जा सकता है. इसके अलावा इसे उबालकर चावल की जगह खाया जा सकता है. ये हैं बाजरा की कुछ रेसिपीज. जानें से बाजरे से क्या-क्या बन सकता है?
बाजरा-गेहूं पालक रोटी
सामग्री
200 ग्राम बाजरा
100 ग्राम साबुत अनाज गेहूं का आटा
1 गुच्छा पालक के पत्ते
लहसुन की 2 कलियां
एक कप दही
2 कटी हुई हरी मिर्च
धनिया पत्ती
चुटकी भर हल्दी
नमक स्वाद अनुसार
विधि
बाजरे और गेहूं के आटे में पालक, हरी मिर्च, लहसुन, धनिया पत्ती, हल्दी और नमक डालकर दही की मदद से गूंथ लें.
अब इसकी रोटी बनाकर कड़ाही में घी या तेल लगाकर पकाएं.
दही या पसंद की चटनी के साथ गरमागरम परोसें.
रागी जेलो
सामग्री-
1 कप रात भर भिगोई हुई रागी
1/2 कप गुड़ पाउडर
नमक की एक चुटकी
2 बड़े चम्मच कटे हुए मेवे
1 बड़ा चम्मच घी
विधि
भीगी हुई रागी को अच्छी तरह पीस लें.
वह गाढ़े दूध में बदल जाएगा.
एक पैन में रागी का दूध लें और उसमें गुड़ और नमक डालकर अच्छी तरह मिला लें.
मिश्रण को धीमी आंच पर कुछ देर उबलने दें.
लगातार चलाते रहें और चलाते समय थोड़ा-थोड़ा कर घी डालें.
मिश्रण जम जाए तो इसमें कटे हुए मेवे डालें और इसे घी लगी प्लेट में निकाल लें और ठंडा होने दें. मनचाहे आकार में काटकर और परोसें.
पर्ल मिलेट डोसा |
सामग्री-
1 कप बाजरा
1/4 कप उड़द दाल
2 बड़े चम्मच चावल
नमक
विधि
बाजरा, चावल और उड़द दाल को अलग-अलग 4 घंटे के लिए पानी में भिगो कर रखें.
उन्हें अलग-अलग दरदरा पीस लें. आवश्यकतानुसार नमक मिलाएं.
फर्मेंट होने के लिए रात भर रखें.
सुबह गर्म गर्म डोसा तैयार करें और टमाटर या धनिये की चटनी और सांभर के साथ गरमागरम परोसें
मिक्स मिलेट लड्डू |
सामग्री
150 ग्राम रागी का आटा
150 ग्राम बाजरे का आटा
150 ग्राम ज्वार का आटा
75 ग्राम आटा
30 ग्राम सूखे मेवे कटे हुए
1 बड़ा चम्मच भुने हुए अलसी या तिल के बीज
3 बड़े चम्मच घी
2 पीसी हुई इलायची
विधि
एक पैन में घी गर्म करें और सभी आटे को मध्यम आंच पर खुशबू आने तक भून लें.
दूसरे पैन में गुड़ को पानी के साथ पिघला लें.
एक बार जब यह पिघल जाए तो सभी भुने हुए आटे को धीरे-धीरे डालें.
मेवे डालकर आंच से उतार लें.
हाथों पर घी लगाकर लड्डू बनाएं.
इसे एयरटाइट जार में स्टोर करके रख सकते हैं.
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
