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May 31, 2026
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टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ / हम दिनभर कई अनहेल्दी चीजें खाते हैं जिससे हमारे दांतों का रंग पीला पड़ जाता है या मटमैला नजर आने लगता है. जब दांतों पर दाग नजर आने लगते हैं तो ये कई बार हमें असहज महसूस कराता है. किसी के सामने बोलने या हंसने में भी शर्म आती है. कुछ फूड प्रोडक्ट्स दांतों पर दाग बढ़ाने का कारण बनते हैं, जबकि कुछ ऐसे भी हैं जो दांतों की सफेदी और चमक बनाए रखने में मदद करते हैं. ऐसे में अगर आप भी पीले दांतों से परेशान हैं तो यहां जानिए किस तरह दांतों का पीलापन दूर करने में खानपान की ही कुछ चीजें बेहद असरदार साबित होती हैं. इन फूड्स को खाने पर दांतों को चमकदार बनने में मदद मिलती है. साथ ही यहां ऐसे कुछ घरेलू उपाय दिए जा रहे हैं जो आपके काम आएंगे.  
पीले दांत साफ करने वाले फूड्स |
सेब
    सबसे पहले बात करते हैं सेब की. सेब में नेचुरल एसिडिक एलिमेंट होते हैं.
    यह मुंह में लार के प्रोडक्शन को बढ़ाता है.
    यह लार एसिड को न्यूट्रल करने में मदद करता है.
    इससे दांतों की सफाई हो जाती है.
नट्स से ला सकते हैं चमक
    बादाम स्लाइवा प्रोडक्शन को बढ़ाता है.
    इससे शरीर खुद सक्षम हो जाता है जिससे मुंह में हमेशा स्लाइवा भरा रहता है.
अनानास से साफ होंगे दांत
    एक स्टडी के अनुसार अनानास में ब्रोमेलेन एंजाइम पाया जाता है.
    यह दांतों की सतह से दाग को हटाने में मदद करता है.
    इसके आलवा मसूड़ो में सूजन को भी खत्म करता है.
सिट्रस फ्रूट्स
    खट्टे-मीठे फल भी दांतों में चमक लाते हैं.
    संतरा, नींबू, कीवी आदि फलों में स्लाइवा प्रोडक्शन को बढ़ाने की क्षमता होती है.
    इससे दांत साफ होते हैं.
गाजर से बढ़ सकती है चमक
    गाजर  नेचुरल टूथब्रश है.
    यह दांतों में छुपे बैक्टीरिया को हटाता है.
    गाजर दांतों के बीच में घुसे फूड के बचे हिस्से को साफ करता है.
    इसलिए गाजर दांतों को क्लीन करने का बहुत अच्छा स्त्रोत है.
स्ट्रॉबेरी
    स्ट्रॉबेरी एसिडिक नेचर की होती है.
    इसमें मेलिक एसिड होता है.
    यह दांतों में लगे दाग को हटा देता है.
    इससे दांतों में लगे दाग साफ हो जाते हैं.
ये घरेलू उपाय भी आ सकते हैं काम
    बेकिंग सोडा और नींबू: दांतों में चमक लाने के लिए थोड़ा सा बेकिंग सोडा (Baking Soda) और नींबू का रस मिलाकर पेस्ट बनाएं और हल्के हाथों से ब्रश करें. इसे आप सप्ताह में 1 से 2 बार कर सकते हैं. इस उपाय से भी दांतों में चमक आ सकती है.
    स्ट्रॉबेरी और नमक: स्ट्रॉबेरी को मैश करके उसमें थोड़ा नमक मिलाकर दांतों पर रगड़ें. इससे आपके दांतों में चमक आएगी.
    नारियल तेल: 10 से 15 मिनट तक मुंह में नारियल तेल  घुमाएं, फिर कुल्ला करें. इससे भी दांत चमक उठेंगे.
    सही तरीके से ब्रश करें: सुबह और रात को सोने से पहले रोज दो बार ब्रश करें. फ्लोराइड मिला हुआ टूथपेस्ट का इस्तेमाल करें.
    माउथवॉश और फ्लॉसिंग - फ्लॉसिंग करने से दांतों के बीच जमा गंदगी और पीलापन कम होता है. एंटी-बैक्टीरियल माउथवॉश का इस्तेमाल करें. आपको दांतों में फर्क नजर आएगा.
    इन चीजों से बचें - सोया सॉस से दांतों में दाग लग सकते हैं. अधिक मीठा और कोल्ड ड्रिंक्स से दांत जल्दी खराब होते हैं.

  सेहत टिप्स /शौर्यपथ /खानपान में अक्सर ही सूखे मेवे शामिल किए जाते हैं. इन मेवों को स्नैक्स की तरह खा लिया जाता है. लेकिन, कुछ सूखे मेवे ऐसे हैं जिन्हें भिगोकर खाने पर शरीर को फायदे मिलते हैं. किशमिश भी इन्हीं ड्राई फ्रूट्स में शामिल है. किशमिश पोषक तत्वों और एंटी-ऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती है. इसके सेवन से शरीर को एक नहीं बल्कि कई फायदे मिलते हैं. रातभर 4 से 5 किशमिश को पानी में भिगोकर अगली सुबह ये किशमिश के दाने खाए जा सकते हैं. यहां जानिए ऐसे कौनसे लोग हैं जिनके लिए किशमिश का सेवन बेहद फायदेमंद होता है. ये लोग किशमिश खाते हैं तो शरीर पर कमाल का असर दिख सकता है.
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भीगी किशमिश खाने के फायदे |
जिनके शरीर में टॉक्सिंस हों
    शरीर में टॉक्सिंस होने पर स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें होने लगती हैं.
    टॉक्सिंस से शरीर में गंदगी होती है जिसका असर शरीर पर अंदरूनी और बाहरी दोनों रूपों में नजर आता है.
    ऐसे में किशमिश बॉडी को डिटॉक्स करने में मदद करती है.
कमजोर इम्यूनिटी होने पर
    शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी अगर कमजोर हो तो व्यक्ति जल्दी-जल्दी रोगों का शिकार हो सकता है.
    ऐसे में मौसमी दिक्कतें जैसे खांसी और जुकाम भी व्यक्ति को जल्दी जकड़ते हैं.
    भीगी किशमिश खाने पर विटामिन सी और बी कॉम्लेक्स मिलते हैं जिससे इम्यूनिटी मजबूत होती है और शरीर इंफेक्शंस से बेहतर तरह से लड़ पाता है.

व्रत/त्यौहार /शौर्यपथ  देवों के देव कहे जाने वाले भोले भंडारी यानी महादेव शिव सनातन धर्म के सर्वमान्य देव कहे जाते हैं. हर साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को देशभर में महाशिवरात्रि  का त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है. शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन भगवान शिव शंकर और मां पार्वती का विवाह हुआ था. इसलिए इस दिन भक्त पूरी श्रद्धा से भगवान शिव और मां पार्वती के लिए व्रत  करते हैं और पूजा  पाठ करते हैं. इस दिन देश भर में मंदिरो में खूब सजावट होती है और भंडारे कराए जाते हैं. महाशिवरात्रि के दिन अविवाहित लोग भी व्रत करते हैं और मनचाहे वर की कामना करते हुए भगवान शिव की पूजा करते हैं.  महाशिवरात्रि के त्यौहार के दिन भगवान शिव की कृपा पाने के लिए श्रद्धालु पूरे दिन का उपवास करते हैं. कहा जाता है कि महाशिवरात्रि के उपवास के कुछ खास नियम हैं जिनका पालन  करना चाहिए. चलिए जानते हैं कि महाशिवरात्रि के उपवास के नियम क्या हैं. साथ ही जानेंगे कि इस उपवास में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए.
कब है महाशिवरात्रि
हर साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के दिन महाशिवरात्रि का पर्व आता है. इस साल यानी 2025 की बात करें तो चतुर्दशी तिथि 26 फरवरी के दिन सुबह 11 बजकर आठ मिनट पर आरंभ हो रही है और अगले दिन यानी 27 फरवरी को सुबह आठ बजकर 54 मिनट पर इसका समापन होगा. चूंकि भगवान शिव की पूजा प्रदोष काल में की जाती है, इसलिए महाशिवरात्रि का पर्व 26 फरवरी के दिन मनाया जाएगा.
महाशिवरात्रि पूजा का महत्व
कहा जाता है कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव के पूजन और शिवलिंग के अभिषेक से घर परिवार में शांति बनी रहती है. इस दिन शिवलिंग का अभिषेक करने वाले भक्त को मोक्ष की प्राप्ति होती है. इस दिन जल के साथ साथ तिल, शहद, दूध, दही, घी आदि से शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है. इस दिन शिवलिंग पर अक्षत, गेहूं, बेलपत्र, धतूरा आदि अर्पित करके भक्त भोलेनाथ को प्रसन्न करते हैं और मनोकामना मांगते हैं. इस दिन चारों प्रहर में शिवलिंग का अभिषेक किए जाने की परंपरा है. शिवलिंग का अभिषेक करते वक्त भक्त अगर ओम नमः:शिवाय मंत्र का जाप करें, तो महादेव प्रसन्न होकर सुख-शांति और समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं.
महाशिवरात्रि पर करें इन चीजों का सेवन
महाशिवरात्रि की पूजा की तरह उपवास भी काफी खास माना जाता है. महाशिवरात्रि पर निर्जला और फलाहारी व्रत किया जाता है. जो लोग इस दिन निर्जला व्रत करते हैं, वो पूरे दिन अन्न और जल का सेवन नहीं करते हैं. वहीं फलाहारी व्रत की बात करें तो इस व्रत में भक्त कुछ चीजों का सेवन कर सकते हैं. फलाहारी व्रत के दौरान सिंघाड़े के आटे का हलवा और पकोड़े खा सकते हैं. इस दिन कुट्टू के आटे का सेवन किया जा सकता है. इसके अलावा फलों का सेवन भी मान्य है. फलाहारी व्रत के दौरान भक्त सेंधा नमक के साथ आलू खा सकते हैं. सूखे मेवे का सेवन भी किया जा सकता है. इसके अलावा दूध और दूध से बने पदार्थ भी खाए जा सकते हैं.
महाशिवरात्रि के दिन इन चीजों का सेवन है निषिद्ध
महाशिवरात्रि के व्रत के दौरान कुछ खास चीजों को खाने की मनाही की जाती है. इस दिन मांस, मछली और मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए. इस दिन तामसिक कहे जाने वाले खाद्य पदार्थ जैसे प्याज, लहसुन आदि, क्योंकि ये मानसिक एकाग्रता को भंग करते हैं. महाशिवरात्रि के व्रत में अन्न और सामान्य नमक का सेवन नहीं करना चाहिए. इस दिन गेहूं, चावल आदि का भी सेवन नहीं करना चाहिए.

आस्था /शौर्यपथ / वैदिक ज्योतिष में शनिदेव को कलियुग का न्यायाधीश कहा गया है जो कर्मफल के आधार पर फल देते हैं. शनिदेव जातक को उसके कर्म के लिहाज से फल देते हैं. मान्यता है कि शनिदेव की कृपा हो जाए तो जातक रंक से राजा बन जाता है और अगर शनिदेव  की तीखी दृष्टि पड़ जाए तो राजा को भी रंक बनते देर नहीं लगती है. धीमी गति से चलने वाले शनि समय-समय पर अपनी चाल बदलते रहते हैं. इस साल होली से कुछ समय पहले शनि कुंभ राशि  में अस्त होने वाले हैं. शनि का कुंभ राशि में अस्त होना कुछ राशियों के लिए काफी लाभदायक साबित हो सकता है. इस साल 28 फरवरी, शुक्रवार के दिन शनि अस्त हो जाएंगे. चलिए जानते हैं कि शनि किस दिन कुंभ राशि में अस्त होंगे और इसका किन-किन राशियों पर अच्छा असर पड़ेगा.
शनि अस्त के प्रभाव |
मेष राशि
शनि मेष राशि के ग्यारहवें भाव में अस्त होने जा रहे हैं. इस राशि के जातकों के लिए शनि का अस्त काफी शुभ साबित होने जा रहा है. इस दौरान मेष राशि के जातकों को हर काम में सफलता मिलेगी. लंबे वक्त से रुके हुए कई जरूरी काम पूरे हो सकते हैं. आर्थिक लाभ होगा और जातक बचत करने में भी कामयाब होगा. करियर की बात करें तो इस दौरान नौकरी और व्यवसाय में लाभ होगा. करियर में जातक को भाग्य का जमकर साथ मिलेगा. मेष राशि के जातक इस दौरान खूब यात्राएं करेंगे. हालांकि जीवनसाथी के साथ कुछ अनबन हो सकती है. रिश्तों के मसले पर सोच संभलकर बात करनी होगी.
कर्क राशि  
शनि कर्क राशि के आठवें भाव में अस्त होंगे. ऐसे में शनि  का अस्त होना इस राशि के जातकों के लिए शुभ समाचार लेकर आने वाला है. इन जातकों को जीवन के हर क्षेत्र में सक्सेस मिलेगी. पैतृक संपत्ति का लाभ मिलेगा और कहीं से अचानक धन लाभ भी हो सकता है. इस दौरान दांपत्य और पारिवारिक जीवन में प्रेम और स्नेह बढ़ेगा और अच्छा समय बीतेगा. नौकरी और व्यापार में सब कुछ सामान्य बना रहेगा. इस दौरान व्यापार के क्षेत्र में किए गए काम और बदलाव आगे जाकर आपके लिए कामयाबी का कारण बन सकते हैं. धन की बचत कर पाएंगे और आस-पास सकारात्मक माहौल बना रहेगा.
धनु राशि
शनि धनु राशि के तीसरे भाव में अस्त होने जा रहे हैं और इस लिहाज से ये दिन धनु राशि के जातकों के लिए शुभ साबित होने जा रहे हैं. नौकरी और व्यापार में सफलता मिलेगी. आप जो भी काम करेंगे, उसमें प्रशंसा पाएंगे. परिवार में अच्छा माहौल रहेगा और भाई-बहनों के साथ अच्छा समय बिताने का मौका मिलेगा. नौकरी करने वालों को बोनस या इंसेंटिव का भी तोहफा मिल सकता है. नौकरी में आपके काम की तारीफ की जाएगी और आगे जाकर इसका फायदा मिलेगा. बिजनेस के क्षेत्र में आपके द्वारा किए गए प्रयास फलीभूत होंगे. इस दौरान कामकाज के चलते लंबी दूरी का सफर करना पड़ सकता है. आय में इजाफा होगा और धन की अच्छी खासी बचत करने में भी कामयाब होंगे. इस दौरान सेहत भी चकाचक रहेगी और दिल आत्मविश्वास से भरपूर बना रहेगा.

   व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /महाशिवरात्रि पर पूजा करते समय भगवान शिव को कई तरह की फूल माला, फूल और बेलपत्र अर्पित किए जाते हैं. यह भी माना जाता है कि भोलेनाथ भक्तों के हर तरह के भोग और भेंट को स्वीकार करते हैं. इसलिए भोले बाबा के भक्त भी अक्सर बिना सोचे-समझे भगवान को कई तरह के फूल अर्पित कर देते हैं. परंतु सभी भक्तों को एक और मान्यता के बारे में जान लेना चाहिए. एक ऐसा भी फूल है जिसे शिवलिंग पर चढ़ाना वर्जित माना जाता है. इस फूल का नाम है केतकी का फूल. इस फूल को भगवान शिव पर क्यों अर्पित नहीं किया जाता है इससे जुड़ी एक पौराणिक कथा बहुत प्रचलित है. अगर आप भी महाशिवरात्रि पर शिव पूजन के लिए जाने वाले हैं तो इस कथा को जरूर जान लीजिए ताकि आप भी शिवलिंग पर केतकी के फूल  अर्पित करने की गलती न करें.
केतकी के फूल से जुड़ी पौराणिक कथा
पं. राहुल दीक्षित के अनुसार, केतकी के फूल और भगवान शिव की यह कथा त्रेतायुग से जुड़ी हुई है जिसका वर्णन शिव पुराण में भी मिलता है. कथा के अनुसार, एक बार भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा के बीच खुद को श्रेष्ठ साबित करने के लिए तर्क होने लगे. बात जब थोड़ी ज्यादा बढ़ गई तब भगवान शिव उनके सामने एक अग्निस्तंभ यानी कि ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए. भगवान शिव ऐसे विशाल दिव्य स्तंभ के रूप में प्रकट हुए थे कि उसका कोई आदि था न ही उसका कोई अंत ही दिखाई दे रहा था. भगवान शिव ने विष्णु और ब्रह्मा से कहा कि जो कोई भी इस ज्योतिर्लिंग का आदि या अंत खोजकर आएगा, वही श्रेष्ठ माना जाएगा.
आदि और अंत की शुरू हुई खोज
उस आदि और अंत को खोजने के लिए भगवान विष्णु  ने वराह रूप धारण किया वो पृथ्वी के गर्भ में जाकर ज्योतिर्लिंग का आदि खोजने लगे, जबकि भगवान ब्रह्मा हंस के रूप में आकाश की ओर उड़ चले ताकि वो उसके अंत तक पहुंच सकें. विष्णु जी ने बहुत प्रयास किया लेकिन उन्हें शिवलिंग का आदि यानी कि स्टार्टिंग प्वाइंट नहीं मिला. उन्होंने शिवजी के सामने सच्चाई बताई और हार मान ली. ब्रह्मा जी आकाश में ऊपर और ऊपर तक उड़ते रहे, लेकिन उन्हें भी शिवलिंग का अंत यानी कि एंड प्वाइंट नहीं मिला. पर विष्णुजी की तरह ब्रह्माजी ने हार नहीं मानी बल्कि उन्होंने केतकी के फूल के साथ मिलकर नई कहानी बनाई.
केतकी के फूल की झूठी गवाही
 पौराणिक कथा के अनुसार बताया कि ब्रह्माजी को ज्योतिर्लिंग का अंत तो नहीं मिला लेकिन एक केतकी का फूल मिल गया. केतकी के फूल से ब्रह्माजी ने ज्योतिर्लिंग के अंत के बारे में पूछा. केतकी के फूल को भी इसकी कोई जानकारी नहीं थी. लेकिन, ब्रह्माजी ने उस फूल को झूठी गवाही देने को कहा. ब्रह्माजी ने कहा कि उन्होंने ज्योतिर्लिंग का अंत ढूंढ लिया है जिसका साक्षी केतकी का फूल भी है. भगवान शिव तो स्वयं सारा सच जानते थे. उन्हें केतकी की इस झूठी गवाही पर गुस्सा आ गया और उन्होंने यह श्राप दिया कि उनके पूजन में कभी केतकी के फूल का उपयोग नहीं होगा. अलग-अलग कथाओं में ये भी कहा जाता है कि भगवान शिव ने ब्रह्माजी को भी क्रोध में आकर श्राप दिया. कुछ कथाओं में कहा जाता है कि भगवान शिव ने क्रोधित होकर ब्रह्माजी का शीष काट दिया जिसके बाद से वो पंच मुख से चार मुख वाले हो गए.

  व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /पौराणिक कथाओं के अनुसार, शबरी माता ने श्रीराम को अपने झूठे बेर खिलाए थे. इस कथा को मां शबरी के प्रेम और ममता के प्रतीक के रूप में सुनाया जाता है. उन्हीं शबरी माता के लिए हर साल शबरी जयंती का व्रत रखा जाता है. मान्यतानुसार शबरी जयंती पर शबरी माता और श्रीराम की पूरे मनोभाव से पूजा की जाए तो भक्तों पर श्रीराम की कृपादृष्टि पड़ती है और जीवन में खुशहाली आती है. मान्यतानुसार, शबरी माता ने जब श्रीराम को बेर खिलाए थे तो उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई थी. ऐसे में यहां जानिए किस दिन मनाई जाएगी शबरी जयंती और किस तरह संपन्न की जा सकती है शबरी माता और श्रीराम की पूजा.
शबरी जयंती कब है |
   पंचांग के अनुसार, शबरी जयंती फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि पर मनाई जाती है. इस तिथि की शुरुआत इस साल 19 फरवरी की सुबह 7 बजकर 32 मिनट पर होगी और इसका समापन अगले दिन यानी 20 फरवरी की सुबह 9 बजकर 58 मिनट पर होगा. ऐसे में उदया तिथि के अनुसार शबरी जयंती 20 फरवरी, गुरुवार के दिन मनाई जाएगी. इसी दिन शबरी जयंती का व्रत  भी रखा जाता है.

  दुर्ग / शौर्यपथ / प्रयागराज से पधारे मेला के प्रधानवक्ता के रूप में डॉ. जस्टीन मसीह के सार्वगर्भित आत्मिक सन्देशों एवं मधुर गायकी से, हज़ारों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालुगण लाभान्वित हुए। पूरे मेला अवधि में छत्तीसगढ़ डायोसिस सी.एन. आई.रायपुर की प्रथम महिला बिशप सुषमा कुमार जी एवं एक दिन मेनोनाइट चर्च इन इण्डिया धमतरी के मॉडरेटर,बिशप एन. आशावान की गरिमामयी उपस्थिति मेले में बनी रही।
    प्रतिदिन प्रातः 5 बजे प्रभातफेरी से कार्यक्रम प्रारम्भ होकर रात्रि 10 बजे प्रधानवक्ता के आत्मिक सन्देश पश्चात समाप्त होता था। प्रतिदिन विभिन्न चर्चेस की क्वायर ईश्वर की महिमा में मधुर मसीही गीतों को प्रस्तुत करते थे। मेला में विभिन्न प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया। रविवार को आराधना पश्चात प्रभु भोज की संगति के साथ मेला शांति पूर्वक समाप्त हुआ।
    मेला के संचालन में  *अध्यक्ष रेव्ह.अर्पण तरुण,उपाध्यक्ष एलेक्जेंडर पॉल, सचिव ए. ए. लूका, कोषाध्यक्ष रेव्ह.राकेश प्रकाश,मेला प्रबंधक वीरेन्द्र सारथी,सहा. प्रबन्धक बरनार्ड अरविंद प्रताप,अभिषेक शावल,रेव्ह.समीर फ्रेंकलिन,कार्यकारिणी सदस्यगण रेव्ह.अनुराग नथानिएल, आर.के.सामुएल, प्रणोब बंशीयर, आशीष यूसुफ, नलिन सामुएल,सुश्री अल्का लाल, रेव्ह.निखिल पॉल,रेव्ह.रॉड्रिक जॉन,रिट्रीट अध्यक्ष पास्टर सी.के.हार्वे,सचिव रेव्ह.शरद लाल,कोषाध्यक्ष श्रीमती यमिमा प्रकाश,सदस्यगण श्रीमती स्मिता बक्श,पास्टर आदित्य रॉय,श्री मनोज मसीह* का कुशल नेतृत्व एवं सहयोग रहा।प्रशासन का भी सहयोग  हमें प्राप्त हुआ।
 वाद-विवाद प्रतियोगिता का संचालन  स्मिता बक्श ने किया।प्रथम स्थान  प्रीति मसीह डिसाईपल्स चर्च बिलासपुर(रेव्ह.बर्डे),द्वितीय स्थान  प्रमिला राम सी.सी.चर्च भिलाई, तृतीय स्थान पास्टर आशीष जलाल विश्वासी मण्डली बिलासपुर, सांत्वना-पास्टर बी.आर.भोसले ने अर्जित किये। काव्य पठन प्रतियोगिता का संचालन ए.ए. लूका ने किया।प्रथम स्थान डॉ. अल्पना राम मेनोनाईट चर्च भिलाई, द्वितीय स्थान श्रीमती सुलेखा लूका डिसाईपल्स चर्च सी.एन. आई.बिलासपुर, तृतीय स्थान श्रीमती आरती करोसिया विश्वासी मण्डली बिलासपुर, सांत्वना-रेव्ह.डी. बी.नन्द सी.सी.चर्च भिलाई ने प्राप्त किये।
   गीत-संगीत प्रतियोगिता का संचालन दीपक हेम्रोन् ने किया। एकल गान मे प्रथम स्थान एलिन मलाकी सी.सी.चर्च भिलाई, द्वितीय स्थान कु.शिफा मसीह डिसाईपल्स चर्च सी.एन. आई.बिलासपुर, तृतीय स्थान प्रांजल प्रेयर मिनिस्ट्री कोरबा,सांत्वना- डेसमन डगलस डिसाईपल्स चर्च ज्योतिपुर पेंड्रारोड प्राप्त किये। समूह गान में प्रथम सी.सी.चर्च भिलाई, द्वितीय मेनोनाईट चर्च कोरबा, तृतीय डिसाईपल्स चर्च (रेव्ह.बर्डे समूह)बिलासपुर, सांत्वना- डिसाईपल्स चर्च सी.एन. आई.बिलासपुर रहे।प्रतियोगिता पुरुस्कार हेतु ट्राफियां अपने प्रिय लोगों की मधुर स्मृति में रेव्ह.अर्पण तरुण,श्रीमती अभिलाषा अनन्त मसीह,पी.आर.साधु द्वारा प्रदान की गई,एवं भाई अनिल राम ने स्पीच स्टैंड(पोडियम)दान किया।
      मेला संचालन हेतु काउंसिल द्वारा नई मेला कार्यकारिणी समिति का चुनाव किया गया,जिसमे रेव्ह.अनुराग नथानिएल अध्यक्ष, रेव्ह.अर्पण तरुण उपाध्यक्ष, रेव्ह.शरद लाल सचिव, ए. ए. लूका कोषाध्यक्ष, मेला प्रबन्धक बरनार्ड अरविंद प्रताप,सहायक प्रबन्धक वीरेन्द्र सारथी,श्री अभिषेक शॉवल, रेव्ह.समीर फ्रेंकलिन, कार्यकारिणी सदस्यगण आर.के.सामुएल, प्रणोब बंशीयर, आशीष यूसुफ,रेव्ह.हेमन्त महानंदा,रेव्ह.स्वप्निल नवगिरे, जॉन राजेश पॉल,आमंत्रित सदस्यगण रेव्ह.रॉड्रिक जॉन, एलेक्जेंडर पॉल,लेखा परीक्षक के रूप में सुश्री अल्का लाल चयनित किये गए।
      मेला रीट्रीट कार्यकारिणी समिति हेतु अध्यक्ष रेव्ह.राकेश प्रकाश,सचिव पास्टर सी.के.हार्वे,कोषाध्यक्ष श्रीमती स्मिता बक्श,कार्यकारिणी सदस्य रेव्ह.डी. बी.नन्द,मनोज मसीह,आमंत्रित सदस्य रेव्ह.निखिल पॉल चुने गए। मेला हेतु निरन्तर प्रार्थना  करते रहिएगा। आगामी वर्ष 2026 मेला की संभावित तिथि 02 से 08 फरवरी 2026 होगी।

 विजय मिश्रा 'अमित'         ​
    ​विशेष आलेख /शौर्यपथ / खनिज संपदा से परिपूर्ण राज्य छत्तीसगढ़ अति प्राचीन काल से मेला- मड़ाई का भी गढ़ रहा है।यहां माघ माह की पूर्णिमा पर लगभग सभी प्रतिष्ठित शिवालयों में,नदी, तालाबों के तट पर मनमोहक मेले लगते हैं।जहां ग्रामीण जनों का रेला,जमावड़ाऔर उत्साह देखते ही बनता है।
                 ​छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध माघी पुन्नी मेलों में सर्वाधिक बड़ा- जनप्रिय मेला राजिम कुंभ कल्प  है,जिसका प्राचीन नाम माघी पुन्नी मेला है।छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लगभग पचास किलोमीटर की दूरी पर पक्के सड़क से संबद्ध राजिम 'धर्म नगरी' और 'छत्तीसगढ़ का प्रयाग' तथा 'शिव-वैष्णव धर्म का संगम' तीर्थ के नाम से भी ख्याति प्राप्त है।दरअसल प्रयागराज इलाहाबाद की भांति यहां पैरी,सोंढ़ूर और महानदी का त्रिवेणी संगम है। प्रयाग के संगम की भांति यहां प्रदेशवासी अस्थि विसर्जन ,पिण्ड दान, कर्मकांड करते हैं।यह बंया करता है राजिम मेला महज़ मनोरंजनगाह नहीं है।
      ​इस त्रिवेणी के तट पर ही प्रति वर्ष माघ पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक विशाल कुम्भ कल्प मेला भरता है।इस वर्ष 12 फरवरी से आरंभ होकर 26 फरवरी अर्थात महाशिवरात्रि तक यह आयोजित है। मेले में आए संतजन और श्रद्धालुगण राजिम त्रिवेणी संगम में स्नान करेंगे।पुण्य स्नान उपरांत अनेक श्रद्धालुजन महानदी की रेत से शिवलिंग तैयार करके बेलपत्र,धतूरा,कनेर के फूल,नारियल से पूजा अर्चना करते है।पवित्र भावनाओं से प्रज्ज्वलित अगरबत्ती और धूप की खुशबू से वातावरण सुगंधित हो उठता है।
*वनवास काल में सीता जी ने किया शिवलिंग निर्माण*
       ​ऐसी धार्मिक मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने अपने वनवास के दौरान छत्तीसगढ़ में दस वर्ष बिताए थे।इसी वनवास काल में माता सीता ने राजिम में महानदी की रेत से शिवलिंग निर्मित कर आराधना की थी।उसी स्थल पर वर्षों पूर्व निर्मित कुलेश्वर महादेव का प्राचीन मंदिर जनाकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
              ​इसी तट पर प्रभु श्री राजीव लोचन का पुरातन भव्य मंदिर भी है।जिनका जन्मोत्सव माघ माह की पूर्णिमा को ही मनाया जाता है।धार्मिक मान्यता है इस दिन भगवान जगन्नाथ उड़ीसा से राजीव लोचन जन्मोत्सव मनाने राजिम आते हैं,जिसके कारण उड़ीसा स्थित जगन्नाथ मंदिर का पट बंद रहता है।मेला स्थल से कुछ दूरी पर स्थित चम्पारण में श्री महाप्रभु वल्लभाचार्य जी प्रकाट्य स्थल,लोमश ऋषि आश्रम,भक्त माता कर्मा,और अन्य देवालयों का दर्शन लाभ मेला भ्रमणार्थियों को सहज मिल जाता है।
                ​छत्तीसगढ़ की जीवनदायिनी पुण्य सलिला महानदी के तट पर स्थित राजीव लोचन मंदिर से लगा स्थल सीताबाड़ी है।जिसमें मौर्यकालीन,14 वीं शताब्दी तथा सम्राट अशोक काल के मंदिर,सिक्के,मूर्तियां अनेक कलाकृतियां प्राप्त हुई हैं,जो कि वैभवशाली इतिहास की साक्षी हैं।
*पंचकोशी परिक्रमा*
      ​माघी पुन्नी मेला स्थल से अनेक श्रद्धालुगण पंचकोशी परिक्रमा की शुरुआत करते हैं।यहां कुलेश्वर महादेव के दर्शनोंपरांत धर्मालुओं का जत्था हर-हर महादेव जपते पटेश्वर महादेव पटेवा, चम्पेश्वर महादेव चंपारण, फिगेंश्वर महादेव फिंगेश्वर और कोपेश्वर महादेव कोपरा के स्वयंभू शिवलिंग का दर्शन कर परिक्रमा पूरी करते हैं। ग्रामीण संस्कृति का संरक्षण और नवपीढ़ी तक परम्पराओं का संचार की द्रष्टि से यह बहुपयोगी है।
*मेले की रंगीन शाम कलाकारों के नाम*
         ​पखवाड़े भर मेला में आए दर्शनार्थियों को रंगीन रोशनी के साथ प्रतिष्ठित लोक मंचो की प्रस्तुति का आंनद मिलता है।जहां वे पंथी,पण्डवानी,करमा,सुवा, नाचा आदि लोकनृत्यों का लुत्फ उठाते हैं।मेला स्थल पर महानदी की पसरी रेत की चमक मेला के दौरान दमक उठती है। यहां सरकारी विभागों की प्रदर्शनी,खेल तमाशे,एवं साज श्रृंगार, पारम्परिक गहनों, खान-पान, के स्टाल ,विविध किस्म के झूलों का मजा लाखों दर्शकों के भीतर नवऊर्जा का संचार करता है।
*लक्ष्मण झूले का आकर्षण*
        ​राजिम मेला स्थल पर लक्ष्मण झूला का निर्माण किया गया है।नदी तट से नदी के मध्य बने कुलेश्वर महादेव मंदिर तक खींचे गए झूले में चलते हुए श्रद्धालुओं को अलौकिक आनंद की अनुभूति होती है। साथ  ही रंग-बिरंगे चिताकर्षक लाइटों से सुसज्जित लक्ष्मण झूला, लेज़र शो आगंतुकों को मंत्रमुग्ध करते हैं। राज्य सरकार द्वारा प्रदेश की गौरवशाली सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षित रखने की दिशा में किया जा रहे प्रयासों के ए साक्षी भी है।

*विजय मिश्रा 'अमित'*
शौर्यपथ /  बसंत पंचमी के एक दिन पहले कॉपी- किताब और अलमारी की सफाई कर रहा था। किताबों में लगे फटे चिथड़े जिल्द को बदलते भी जा रहा था। तभी अलमारी के कोने से किसी के सिसकने रोने की आवाज आई।अलमारी के पीछे झांककर देखा तो भौंचक्का रह गया, दरअसल वहां पड़ी सरस्वती माई की फोटो रो रही थी।

  फोटो को जब मैंने उठाया तो धूल की पर्त फोटो के ऊपर जमी हुई दिखाई दी। मैंने पूछा क्या हो गया माई? क्यों कलप कलप  कर रो रही हो? तब फ्रेम के भीतर जड़ी हुई माई बोली- मेरा दुःख दर्द पूछने वाले तुम कौन  परोपकारी हो बाबू?ठीक से दिखाई नहीं दे रहे हो। कांच के ऊपर जमी धूल की पर्त को साफ करोगे तभी तो देख पाऊंगी।
     सरस्वती माई की फोटो के ऊपर जमी धूल की पर्त को मैंने जैसे ही टॉवल से साफ किया।माई मुझे झट से पहचान गईं।वे बोली-अच्छा अच्छा ...।याद आया।तुम्हीं तो मुझे पिछले वर्ष मुझे बसंत पंचमी के दिन बाजार से खरीद कर लाए थे। उनकी बातें सुनकर मैं बछड़े की तरह कूलकते हुए बोला- हां माई, मैं ही तुम्हें बाजार से लाया था। विधि-विधान से पूजा करके खुबसूरत फूलमाला अर्पित भी किया था।आपने मुझे पहचान लिया यह मेरे लिए बड़ी खुशी की बात है।
      तुम्हें कैसे नहीं पहचानूंगी बाबू।कहते हुए माई ने तल्ख़ लहज़े में कहा-देख रहे हो न। पिछले वर्ष जिस माला को मुझे पहनाए थे, वह आज तक  मेरे गले में फांसी के फंदे की तरह लटका हुआ है। वह भी तुम्हारी प्रतीक्षा में पड़ा हुआ है कि कब उसे तुम किसी नदी तालाब में ठंडा करोगे।खैर, वर्ष में एक बार मेरी सफाई करने की याद तो तुम्हें आ ही गई।
    हां माई कल बसंत पंचमी है। मैंने तय किया कि कल मैं  'रेजोल्यूशन' लूंगा कि हर दिन सुबह तुम्हारी पूजा किया करूंगा। मेरी बात सुनकर माई आंखें फाड़ते हुए बोली- ए 'रेजोल्यूशन' क्या होता है बाबू? किसी नए फल या मिठाई का नाम है क्या? ऐसे शब्द तो मैने गढ़े नहीं है।
     माई की यह बात सुनकर मुझे बरबस हंसी आ गई। हंसते-हंसते मैंने कहा-माई हिंदी में जिसे 'संकल्प' कहते हैं। उसे ही विदेशी अंग्रेजी भाषा में 'रेजोल्यूशन' कहते हैं। इतना सुनते ही सरस्वती माई माथा ठोकते हुए बोली- तुम्हारे बढ़ते हुए ज्ञान को देखकर मुझे खुशी तो हो रही है पर मुझे ऐसा आभार हो रहा है कि तुम लोग विदेशी भाषा को बोलते समय गर्व महसूस करते हो और अपनी बोली भाषा से परहेज करते हो।
   अपनी बात को आगे बढ़ाने के पहले माई लंबी सांस छोड़ते हुए बोली- बेटा,मेरी बात कान खोल कर सुन लो। तुम्हारे जैसे ना जाने कितने लोग कर्म- धर्म को निभाने की कसम खाते हैं। संकल्प लेते हैं पर वह केवल चार दिन की चांदनी फिर अंधेरी रात की तरह ही होती है। देख लेना  दो-चार दिन के बाद तुम भी  मेरी पूजा पाठ करना भूल जाओगे और मैं फिर से धूल धूसरित हो जाऊंगी।तुम लोग......।
    माई की बात को बीच में ही काटते हुए मैंने बलपूर्वक कहा -नहीं नहीं माई ।अब दुबारा ऐसी गलती नहीं करूंगा। करबद्ध विनती कर रहा हूं। अपनी कृपा दृष्टि मुझ पर बनाए रखना। सावन की झड़ी की तरह आशीर्वाद की वर्षा करना ताकि मेरी कलम की धार अनवरत बनी रहे। कलम से निकली कहानी-कविताओं से मुझे पद्मश्री जैसे पुरस्कार की प्राप्ति हो।अगर आपकी ऐसी महान अनुकंपा हुई तो मैं पाव भर पेड़ा आपके चरणों में अर्पित करूंगा।
    वाह बेटा वाह। कहते हुए माई खिल खिलाकर हंस पड़ीं और बोली -यही है आजकल के सपूतों का रंग ढंग। जो मां तुम्हें जन्म देती है। खुद भूखी रहकर अपना खून जलाकर तुम्हें दूध पिलाती है।पालती पोसती है। उसकी कीमत तुम लोग पाव भर पेड़ा के बराबर समझते हो। इतना कहते कहते माई का गला भर आया था। वह रूंधे गले से बोली- बेटा मेरी इस बात को हृदय में आजीवन बसाकर रखना कि मइयां का प्यार उधार में नहीं मिलता और मइयां का दूध भी बाज़ार में खरीदने पर  नहीं मिलता।
    माई इतना कह कर क्षण भर रूक गई।अपनी आंखों से छलकते हुए आंसुओं को पोंछने के बाद  बोलीं-यह बात तो तुम जानते हुई हो कि बसंत पंचमी के दिन ही मेरी वीणा के झंकार से ध्वनि की उत्पत्ति हुई थी। जीव- जंतुओं सहित प्रकृति में सूर- लय- ताल- शब्दों की संरचना हुई थी। ऐसे गुणों से युक्त जो माई तुम्हें जन्म देकर बोलना सिखाती है।बड़े होकर उसी माई को तुम लोग चुप रहना सिखा देते हो।यह बस देखकर तो लगता है कि माई की भलाई तो इसी में है कि वह कपूतों  को जन्म देने के बजाय बांझ ही बनी रहे।
    सरस्वती माई के एक-एक शब्द मेरे भीतर नोकदार आरी की तरह चल रहे थे। अब रोने सिसकने की बारी मेरी आ गई थी।माई की फोटो को छाती से लिपटाते हुए मैंने कहा- क्षमा करना माई। मेरी आंखों में स्वार्थ का जाला पड़ गया था। आज वह पूरी तरह से धूल गया है।आज के बाद किसी भी माई को मान सम्मान देने में कमी नहीं करूंगा। मेरा दृढ़ संकल्प है।
   मेरी बात सुनकर सरस्वती माई के चेहरे पर मुस्कान आ गई। वह मेरे सिर पर हाथ रखते हुए बोली- बेटा जब जागे तभी सबेरा। मेरा आशीर्वाद है तुम्हारी कलम की धार सदा सही दिशा में बहती रहे।

सेहत टिप्स /शौर्यपथ / अगर आप  बुढ़ापे में भी यंग और एक्टिव रहना चाहते हैं, तो आपको कुछ अच्छी आदतों को अपनी दिनचर्या में शामिल करना होगा. सुबह की शुरूआत जैसे आप गुनगुने पानी के साथ करते हैं, वैसे ही रात में सोने से पहले अजवाइन और जीरा पाउडर  का सेवन गुनगुने पानी के साथ करते हैं, तो आपके शरीर को 1 नहीं बल्कि 4 बड़े फायदे मिल सकते हैं. वो कौन-कौन से हैं, आइए जानते हैं...
अजवाइन और जीरा पानी पीने के फायदे -
मेटाबॉलिज्म बूस्ट और इम्यून सिस्स्टम होगा मजबूत -
पहला, रात में सोने से पहले नियमित जीरा और अजवाइन पाउडर का सेवन करना शुरू कर देते हैं, तो इससे आपकी पाचन क्रिया अच्छी होगी, मेटाबॉलिज्म बूस्ट और इम्यून सिस्स्टम मजबूत होगा.
मोटापा होगा कम -
दूसरा, आधे से ज्यादा आबादी की समस्या मोटापा, से छुटकारा मिल सकता है. इन दोनों चीजों के मिश्रण से शरीर में जमी अतिरिक्त चर्बी धीरे-धीरे गलने लगती है और बॉडी दोबारा से आकार में आ सकती है.
नींद की गुणवत्ता होगी बेहतर -
तीसार, जीरा और अजवाइन को गुनगुने पानी के साथ सेवन करने से आपकी नींद की गुणवत्ता में भी सुधार हो सकता है. इससे आपको मानसिक शांति और नींद को बेहतर होने में मदद मिल सकती है.
पीरियड से जुड़ी दिक्कत होगी दूर -
चौथा, यह औषधिय पाउडर हॉर्मोनल असंतुलन और पीरियड से जुड़ी दिक्कतों को दूर करने में भी मददगार साबित हो सकता है. महिलाओं के लिए तो यह चूर्ण किसी रामबाण से कम नहीं है. इसके अलावा जीरा और अजवाइन मांसपेशियों में  होने वाली ऐंठन और दर्द को भी कम करने में सहायक है.

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