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ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ / स्कैल्प पर जमी रूसी जिद्दी होती है और जल्दी हटने का नाम नहीं लेती है. रूसी सिर पर बर्फ की तरह जमी हुई तो नजर आती ही है, साथ ही कई बार झड़कर कंधों पर भी गिरने लगती है. ऐसे में व्यक्ति को किसी दूसरे के सामने शर्मिंदगी का पात्र भी बनना पड़ जाता है. लेकिन, डैंड्रफ को हटाना बहुत मुश्किल काम भी नहीं है. अगर घर की ही कुछ चीजों का इस्तेमाल किया जाए तो डैंड्रफ कम होना शुरू हो जाता है और सिर पर जमा हुआ भी नजर नहीं आता है. यहां जानिए उन नुस्खों के बारे में जो रूसी कम करने में असरदार होते हैं. इन्हें आजमाना भी आसान है.
डैंड्रफ के घरेलू उपाय |
नारियल तेल और नींबू
सिर पर नारियल तेल और नींबू को साथ मिलाकर लगाया जा सकता है. इस मिश्रण से सिर से डैंड्रफ हट सकता है. इस मिश्रण को एकसाथ मिलाएं और स्कैल्प पर लगाने के बाद उंगलियों से मलें. आधा घंटा इस मिश्रण को लगाए रखने के बाद सिर को शैंपू से धोकर साफ कर लें. डैंड्रफ कम नजर आएगा.
दही और मेथी
डैंड्रफ हटाने के लिए बालों पर दही को सादा भी लगा सकते हैं लेकिन मेथी के साथ मिलाकर लगाने से डैंड्रफ तेजी से हटने लगता है. मेथी में निकोटिनिक एसिड और प्रोटीन होता है जो डैंड्रफ कम करने में असरदार है, तो वहीं दही में पाए जाने वाले एंजाइम इसे डैंड्रफ का रामबाण नुस्खा बनाते हैं. 2 चम्मच मेथी के दानों को भिगोकर रखने के बाद पीस लें. इस पेस्ट को एक कप दही के साथ मिलाकर बालों पर लगाएं. 35 से 45 मिनट लगाए रखने के बाद सिर धोकर साफ कर लें. सिर से डैंड्रफ हट जाएगा.
एलोवेरा और नीम
एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर एलोवेरा और नीम को एकसाथ मिलाकर सिर पर लगाने से डैंड्रफ हट जाता है. इस्तेमाल करने के लिए 10 नीम के पत्ते लें और उसमें 2 चम्मच एलोवेरा जैल मिला लें. इस पेस्ट को सिर पर आधा घंटा लगाकर रखने के बाद धो लें.
इन बातों का ध्यान रखें
डैंड्रफ से छुटकारा पाने के बाद ये सुनिश्चित करना जरूरी है कि डैंड्रफ दोबारा ना निकलने लगे. इसके लिए कुछ बातों को ध्यान में रखना जरूरी है. जरूरत से ज्यादा गर्म पानी से सिर धोने से बचें. इससे स्कैल्प ड्राई होती है और हेयर फॉल बढ़ता है.
स्कैल्प को हाइड्रेटेड रखें. इसके लिए हफ्ते में एक बार मॉइश्चराइजिंग हेयर मास्क लगाएं.
सर्दियों के मौसम में बालों को नुकसान पहुंचाने वाली ठंडी और शुष्क हवाओं से बचाकर रखें.
अपना खानपान भी अच्छे रखें. बैलेंस्ड डाइट लें जिसमें विटामिन और खनिज दोनों अच्छी मात्रा में हों.
ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ /नारियल तेल को इसके कई फायदे देखते हुए स्किन केयर में शामिल किया जाता है. नारियल का तेल नेचुरल ऑयल होता है इसीलिए इसमें किसी तरह के केमिकल, एडेड कलर या एडेडे फ्रेग्रेंस नहीं होती है. नारियल के तेल में सैचुरेटेड फैट्स होते हैं जो इसे खासतौर से त्वचा के लिए अच्छा बनाते हैं. इसके अलावा, इसमें अमीनो एसिड्स होते हैं जो स्किन पर एक स्ट्रोंग बैरियर क्रिएट करते हैं जिससे स्किन लंबे समय तक मॉइश्चराइज्ड और हाइड्रेटेड नजर आती है. लेकिन, नारियल तेल को चेहरे पर सादा लगाने के बजाय आप इसका सिरप बनाकर भी लगा सकते हैं. इस कोकोनट सिरप से स्किन को निखार मिलता है, रूखापन हटता है, त्वचा मुलायम होती है और टैनिंग भी कम होने लगती है. जानिए घर पर किस तरह बनाकर लगाया जा सकता है कोकोनट सिरप.
ग्लोइंग स्किन के लिए कोकोनट सिरप |
कोकोनट सिरप बनाने के लिए आपको 2 चम्मच नारियल का तेल, आधा कम शहद और एक कप नारियल पानी की जरूरत होगी. सबसे पहले नारियल पानी को आंच पर चढ़ाएं और पका लें. जब यह मिश्रण पककर आधा हो जाए तो आंच बंद करके इसे अलग ठंडा होने के लिए रख दें. अब इसमें शहद इस तरह मिलाएं कि शहद पूरी तरह से पानी में घुल जाए. अब नारियल तेल को इस मिश्रण में मिलाएं. बस तैयार है कोकोनट सिरप.
इस कोकोनट सिरप को चेहरे पर लगाने से पहले किसी टाइट और साफ कंटेनर में रखें. ध्यान रहे कि कंटेनर में डालने से पहले यह मिश्रण पूरी तरह ठंडा हो जाए. चेहरे को साफ करके इस सिरप की कुछ बूंदे हथेली पर लें और पूरे चेहरे पर अच्छी तरह मलकर मास्क की तरह लगा लें. तकरीबन 15 से 20 मिनट इस कोकोनट सिरप को चेहरे पर लगाए रखें और फिर गुनगुने पानी से चेहरे को धोकर साफ करें. त्वचा निखर जाएगी और देखने में बेहद खूबसूरत भी लगेगी.
हफ्ते में 2-3 बार कोकोनट सिरप को चेहरे पर लगा सकते हैं. इससे स्किन को नेचुरल ग्लो मिलता है. यह सिरप स्किन की चमक बरकरार रखती है. नारियल पानी होने के चलते इस सिरप से त्वचा को पूरा हाइड्रेशन मिलता है और शहद के एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण स्किन इरिटेशन को कम करने में असरदार हैं.
ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ /कुछ तेल चेहरे को शीशे जैसा साफ और चमकदार बनाने के लिए चमत्कार कर सकते हैं. चेहरे की मालिश मसल्स को पोषण देती है और चेहरे में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाती है. स्किन की मसाज इसे चमकदार बनाए रखने के सबसे शुरुआती तरीकों में से एक है. कुछ नेचुरल ऑयल चेहरे की चमक को उभारने में कमाल कर सकते हैं. इसके साथ ही ये चेहरे को नेचुरली मॉइश्चराइज करते हैं साथ ही एक प्रोटेक्टिव बैरियर बनाते हैं. स्किन केयर रूटीन में स्किन की मसाज भी बहुत जरूर है, लेकिन सबसे जरूरी बात है कि चेहरे की मसाज के लिए तेज कौन से इस्तेमाल किए जाएं? यहां हम कुछ बेस्ट ऑप्शन लाए हैं जो आपके लिए कमाल कर सकते हैं.
चेहरे की मालिश के लिए प्राकृतिक तेल |
1. नारियल का तेल
ये स्किन से टॉक्सिन्स को साफ करने के लिए जाना जाता है. इसमें एंटी-बैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण भी होते हैं जो पोषक तत्व भी प्रदान कर सकते हैं. नारियल तेल में विटामिन ई और के होते हैं जो स्किन के लिए बहुत हेल्दी होते हैं और आसानी से एब्जॉर्ब भी किए जा सकते हैं.
2. ऑलिव ऑयल
यह स्किन पर किसी भी प्रकार की एलर्जी रिएक्शन को ट्रिगर नहीं करता है और इस प्रकार इसका उपयोग ज्यादातर चेहरे की मालिश के लिए किया जाता है. ऑलिव ऑयल सबसे अच्छे ऑयल में से एक है जो स्किन को पोषण देने में सहायता कर सकता है. इसमें विटामिन ए, डी, ई और के होता है जो बिल्कुल मॉइस्चराइजर की तरह काम करता है. यह स्किन के नेचुरल क्लींजर के रूप में एक बढ़िया विकल्प हो सकता है.
3. सूरजमुखी के बीज का तेल
सूरजमुखी के बीज का तेल चेहरे की मालिश के लिए सबसे अच्छा प्राकृतिक तेल है. इसमें विटामिन ई होता है. इसे कम मात्रा में लगाएं क्योंकि यह चिपचिपा प्रकृति का होता है और थोड़ा असहज महसूस हो सकता है. हालांकि यह स्किन को इंफेक्शन, बैक्टीरिया और वायरस से बचा सकता है.
4. बादाम का तेल
इसमें विटामिन ई, जिंक, प्रोटीन और पोटेशियम होता है जो त्वचा पर चमकदार बनाता है. यह स्किन की बनावट को हल्का करता है और इसलिए चेहरे की मालिश में बहुत प्रभावी हो सकता है. बादाम के तेल के कुछ नकारात्मक पहलू भी हो सकते हैं जैसे कि इससे एलर्जी हो सकती है.
अयोध्या धाम /शौर्यपथ /उत्तर प्रदेश के अयोध्या में अगले महीने 22 जनवरी 2024 को प्राण-प्रतिष्ठा होने वाला है. इस दिन श्री राम को गर्भगृह में स्थापित किया जाएगा. 50 साल बाद ये खास दिन सनातन धर्म के लोगों के लिए आया है. मंदिर के निर्माण से अयोध्या धाम एक टूरिक्ट प्लेस के रूप में डेवलप होगा. मंदिर का निर्माण पूरी तरह से अभी भी पूरा नहीं हुआ है. इसको कई चरणों में किया जाना है. इसी बीच मंदिर ट्रस्ट की ओर से भगवान श्री राम के सिंहसान से जुड़ी जानकारी सांझा की गई. आइए जानते हैं कि मंदिर कार्य किस चरण में हैं और श्री राम का सिंहासन कैसा है.
अयोध्या राम मंदिर निर्माण अपडेट |
अयोध्या में नवनिर्मित श्री राम मंदिर का प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024 को प्रधानमंत्री मोदी के हाथों से होगा. इसी दिन रामलला को मंदिर के गर्भगृह में स्थापित किया जाएगा. मंदिर निर्माण की बात करें तो ये 3 चरणों में होना है और इसका डेडलाइन दिसंबर 2025 तक है. अभी 22 जनवरी तक निर्माण का पहला चरण पूरा होगा. श्री राम जन्मभूमि क्षेत्र ट्रस्ट ने बताया कि मंदिर के शिखर पर 5 मंडपों का निर्माण पूरा किया जा चुका है.
श्री राम का खास सिंहासन |
मंदिर ट्रस्ट ने श्री राम के सिंहासन को लेकर हाल में ही जानकारी दी है. 22 जनवरी को गर्भगृह में श्री राम इसी सिंहासन पर विराजेएंगे. ये सोने और संगरमरमर से बना है. राजिस्थान के कलाकारों द्वारा बनाए गए इस सिंहासन के लिए बहुत टाइम लगा है. इसकी ऊंचाई 3 फीट है और 8 फीट लंबाई है. 25 दिसंबर 2023 को इस सिंहासन को श्री राम मंदिर ले आया जाएगा.
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /मार्गशीर्ष माह में पड़ने वाली पूर्णिमा को मार्गशीर्ष पूर्णिमा कहा जाता है. यह साल की आखिरी पूर्णिमा होने वाली है. माना जाता है कि मार्गशीर्ष माह से ही सतयुग का आरंभ हुआ था. पंचांग के अनुसार, इस साल मार्गशीर्ष माह की पूर्णिमा 26 दिसंबर, मंगलवार को मनाई जाएगी. इस दिन स्नान, दान और तप का विशेष धार्मिक महत्व होता है. साथ ही, इस दिन पूजा-पाठ करने को बेहद शुभ मानते हैं. मार्गशीर्ष माह की पूर्णिमा तिथि 26 दिसंबर की सुबह 5 बजकर 46 मिनट से शुरू होगी और इस तिथि का समापन अगले दिन 27 दिसंबर सुबह 6 बजकर 2 मिनट पर हो जाएगा. पूर्णिमा के दिन तुलसी पूजा करना भी बेहद शुभ माना जाता है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और इस चलते भगवान विष्णु की प्रिय तुलसी को भी पूजा जाता है. यहां जानिए वो कौन-कौनसी चीजें हैं जिन्हें तुलसी के पौधे के समक्ष अर्पित करना शुभ मानते हैं.
मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर तुलसी के समक्ष अर्पित करें
माता तुलसी की पूजा में पीले कलावा का इस्तेमाल हो सकता है. पीले रंग को भगवान विष्णु का प्रिय माना जाता है. कहते हैं तुलसी के गमले पर पीला कलावा बांधना बेहद शुभ होता है.
पूर्णिमा के दिन तुलसी पर लाल कलावा बांधना बेहद शुभ माना जाता है. कहते हैं लाल कलावा बांधने पर व्यक्ति की आर्थिक दिक्कतें दूर हो सकती हैं.
तुलसी पर लाल चुनरी अर्पित की जा सकती है. लाल चुरी अर्पित करके तुलसी की परिक्रमा की जाती है.
तुलसी पर जल के अलावा कच्चा दूध चढ़ाया जा सकता है. ऐसा करना बेहद शुभ और लाभकारी माना जाता है.
तुलसी पर दीया जलाना भी शुभ होता है. इस तरह दीया जलाने की बेहद मान्यता है.
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / हिंदू धर्म में मार्गशीर्ष माह की विशेष धार्मिक मान्यता है. इस दिन पूरे विधि-विधान से पूजा-पाठ किया जाता है और साथ ही मान्यतानुसार स्नान और दान करते हैं. पंचांग के अनुसार, हर महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि के अगले दिन पूर्णिमा पड़ती है. इस साल मार्गशीर्ष महीने की पूर्णिमा आज 26 दिसंबर, मंगलवार के दिन मनाई जा रही है. पूर्णिमा तिथि सुबह 5 बजकर 46 मिनट से शुरू होगी और इसका समापन अगले दिन 27 दिसंबर, सुबह 6 बजकर 2 मिनट पर हो जाएगा. यहां जानिए पूर्णिमा के दिन किन बातों का ध्यान रखना है जरूरी, कैसे की जाती है पूजा और भगवान विष्णु को किन चीजों का भोग लगाना माना जाता है बेहद शुभ.
पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु का भोग |
माना जाता है कि पूर्णिमा के दिन पूजा-पाठ करने से घर में सुख-समृद्धि आती है. इस दिन मान्यतानुसार भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है, कहते हैं इस पूजा से भक्तों पर सदा श्रीहरि की कृपा बनी रहती है. भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी को इस दिन खीर का भोग लगाया जा सकता है. भोग में तुलसी दल शामिल करना बेहद शुभ मानते हैं. कहते हैं इससे भगवान विष्णु प्रसन्न हो जाते हैं.
भगवान विष्णु को पीली चीजों का भोग लगाना भी बेहद शुभ होता है. पीले फल, पीले चावल और अन्य पकवान भी भोग में लगाए जा सकते हैं. इसके अतिरिक्त, मां लक्ष्मी को भोग में पानी वाला नारियल अर्पित किया जा सकता है.
पूर्णिमा की पूजा
मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर सुबह-सेवेर उठकर स्नान किया जा सकता है. भक्त इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठ सकते हैं. पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों का स्नान करना शुभ मानते हैं. लेकिन, जिनके आसपास नदियां ना हों वे भक्त पानी में गंगाजल मिलाकर भी नहा सकते हैं. स्वच्छ वस्त्र धारण करने का बाद भगवान का ध्यान किया जाता है. सूर्यास्त के पश्चात सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है.
मार्गशीर्ष माह को भगवान विष्णु का माह माना जाता है इसीलिए भी पूर्णिमा पर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है. चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की प्रतिमा सजाई जाती है. फिर फूल, सिंदूर, फल, रोली और पंचामृत उनके समक्ष अर्पित किए जा सकते हैं. इस दौरान भगवान सत्यनारायण की पूजा कर सकते हैं. आरती और भोग लगाने के बाद पूजा संपन्न होती है.
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / हिन्दू पंचांग और अंग्रेजी कैलेंडर के महीने और त्योहार अलग होते हैं. अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से अब कुछ ही दिनों में साल का अंत होने वाला है. वहीं हिन्दू पंचांग का अभी 9वां महीना ही चल रहा है. पंचांग का 10वां महीना पौष है. इसे पूस का महीना भी कहा जाता है. इस खास महीने में भगवान सूर्य की पूजा करने का खास महत्तव बताया गया है. इस साल पौष का महीना 27 दिसंबर 2023 से शुरू होगा और 25 जनवरी 2024 को खत्म होगा. आइए जानते हैं इस महीने की इतनी ज्यादा महिमा क्यों हैं.
इसलिए खास हैं पूस का महीना |
हिन्दू पंचांग का दसवां महीना पूस का है. इसे भगवान सूर्य की पूजा करने के लिए और पित्रों को दान-पुण्य करने के लिए खास माना जाता है. मान्यताओं के अनुसार इस महीने में सूर्य देव को अर्घ देने से बल-बुद्धि और धन-धान्य में वृद्धि हो सकती हैं. इस पूरे महीने सूर्य देव धनु राशि में विराजते हैं जिसकी वजह से किसी भी शुभ कार्य को करने की मनाही होती है. आइए जानते हैं इस बार पौष में कौन-कौन से व्रत एवं त्योहार पड़ रहे हैं.
पौष 2024 व्रत एवं त्योहार लिस्ट |
30 दिसंबर 2023 - संकष्टी गणेश चतुर्थी
1 जनवरी 2024 - अंग्रेजी नए साल की शुरुआत
3 जनवरी 2024 - मासिक कृष्ण जन्माष्टमी
4 जनवरी 2024 - कालाष्टमी
7 जनवरी 2024 - सफला एकादशी
9 जनवरी 2024 - प्रदोष व्रत एवं मासिक शिवरात्रि
11 जनवरी 2024 - पौष अमावस्या
14 जनवरी 2024 - विनायक चतुर्थी एवं लोहड़ी
15 जनवरी 2024 - मकर संक्रांति
16 जनवरी 2024 - बिहू एवं स्कंद षष्ठी
17 जनवरी 2024 - गुरु गोविंद सिंह जयन्ती
18 जनवरी 2024 - मासिक दुर्गाष्टमी
20 जनवरी 2024 - मासिक कार्तिगाई
21 जनवरी 2024 - पुत्रदा एकादशी
22 जनवरी 2024 - कुर्म द्वादशी
23 जनवरी 2024 - सुभाष चंद्र बोस जयंती
23 जनवरी 2024 - प्रदोष व्रत
25 जनवरी 2024 - पौष पूर्णिमा
भिलाई / शौर्यपथ / भिलाई इस्पात संयंत्र के ओएचपी-बी में बहुप्रतीक्षित लम्प आयरन अयस्क क्रशिंग यूनिट का उद्घाटन, सिंटर संयंत्रों को आपूर्ति किए जाने वाले लौह अयस्क फाइन की गुणवत्ता में सुधार हेतु संयंत्र के लिए कई मायनों में एक गेम चेंजर साबित होगा। संयंत्र के खदानों से सिंटर संयंत्रों को आपूर्ति किए जाने वाले लौह अयस्क के बारीक़ टुकड़ों (फाइन्स) की गुणवत्ता बनाए रखना संयंत्र के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। संयंत्र के अयस्क खदानों से आपूर्ति किए जा रहे लौह अयस्क के फाइन्स की गुणवत्ता, उच्च गैंग घटक, कम स्नद्ग सामग्री और अधिकतम मात्रा में माइनस (-) 1 मिमी फ्रैक्शन के कारण खराब हो गई है। इस प्रकार निम्न गुणवत्ता वाले लौह अयस्क के फाइन्स से उत्पादित सिंटर को जब ब्लास्ट भट्टियों में चार्ज किया जाता है, तो स्लैग दर, कोक दर और फ्लक्स संरचना में वृद्धि के साथ ईंधन दर में भी वृद्धि होती है। परिणामस्वरूप ऊर्जा दर में वृद्धि होगी और उत्पादित हॉट मेटल के प्रति टन कार्बन उत्सर्जन में भी वृद्धि होगी।
नई क्रशिंग यूनिट लौह अयस्क के लम्प को क्रश करके उन्हें फाइन्स में बदल देगी, जिसका उपयोग सिंटर प्लांट द्वारा सिंटर बनाने के लिए किया जाएगा। इस प्रकार क्रश्ड हुए लौह अयस्क के फाइन्स से तैयार सिंटर को लोहा बनाने के लिए ब्लास्ट भट्टियों में चार्ज किया जाता है। उच्च स्नद्ग सामग्री और कम गैंग घटक के कारण क्रशिंग यूनिट से उत्पन्न लौह अयस्क फाइन्स की गुणवत्ता, हमारी घटती कैप्टिव खदानों से आपूर्ति किए गए फाइन की तुलना में बेहतर है। इस प्रकार, ऐसे उच्च गुणवत्ता वाले क्रश्ड लौह अयस्क के फाइन्स से उत्पादित सिंटर में स्नद्ग की मात्रा अधिक होगी, जो स्लैग दर व कोक दर को पूरी तरह से कम करने के साथ-साथ धमन भट्टियों की उत्पादकता बढ़ाने में भी मददगार साबित होगी। क्रशर यूनिट में क्रश्ड हुए लौह अयस्क के फाइन्स से उत्पादित सिंटर हाई स्ट्रेंथ और बेहतर गुणवत्ता की है, जिसके परिणामस्वरूप हॉट मेटल उत्पादन की तकनीकी-आर्थिक मूल्यांकन या तकनीकी-आर्थिक विश्लेषण में महत्वपूर्ण सुधार होता है। साथ ही यह ऊर्जा की खपत और कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद करेगा, जिससे पर्यावरण पर किसी भी प्रतिकूल प्रभाव को कम किया जा सकेगा। इसके परिणाम उत्साहजनक रहे हैं, जिसमें औसत गैंग घटक की मात्रा पहले की तुलना में बहुत कम है। क्रश्ड अयस्क फाइन्स की पहली खेप दो दिन पहले सिंटर प्लांट-3 के लिए एमजीआर को भेजी गई थी। सेल की अन्य इकाइयों द्वारा अब जल्द ही अपनी संबंधित इकाइयों में अयस्क क्रशिंग का कार्य शुरू करने की उम्मीद है।
इस परियोजना को प्लानिंग और अनुमोदन चरण से लेकर कमीशनिंग और उत्पादन तक तीन महीने की रिकॉर्ड समय अवधि में पूरा किया गया। ओएचपी-बी में भंडारित लौह अयस्क ल्म्प्स से पूर्ति किये जाने वाले क्रशिंग यूनिट की उत्पादन क्षमता, प्रति माह 50,000 टन लौह अयस्क उत्पादन की है। सिंटर बनाने में अत्याधुनिक क्रशिंग यूनिट वजन मापने और भेजे गए उत्पाद के रिकॉर्ड के लिए, पूरी तरह से स्वचालित, मानव रहित वे ब्रिज के साथ सीसीटीवी कैमरा व आरएफआईडी तकनीक से युक्त है।
नई क्रशिंग यूनिट का उद्घाटन निदेशक प्रभारी अनिर्बान दासगुप्ता द्वारा संयंत्र के कार्यपालक निदेशक परियोजनाएं, एस मुखोपाध्याय, कार्यपालक निदेशक सामग्री प्रबंधन ए के चक्रवर्ती, कार्यपालक निदेशक रावघाट समीर स्वरूप, कार्यपालक निदेशक कार्मिक एवं प्रशासन पवन कुमार, कार्यपालक निदेशक माइंस बी के गिरी तथा मुख्य चिकित्सा अधिकारी प्रभारी चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएँ डॉ एम रविन्द्रनाथ, मुख्य महाप्रबंधक प्रभारी आयरन तापस दासगुप्ता और मुख्य महाप्रबंधक ओएचपी एच के पाठक सहित संयंत्र के मुख्य महाप्रबंधक प्रभारीगण, मुख्य महाप्रबंधक, महाप्रबंधक तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी व कर्मचारिगण की उपस्थिति में किया गया था।
टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ /पहले जमाने में लोग कहते थे कि अगर साल भर ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पढ़ाई की जाए तो जीवनभर के लिए पाठ दिमाग में बस जाता है. यह बात विभिन्न शोधों में भी साबित हो चुकी है. अगर आप सुबह जल्दी उठें और पढ़ाई करें तो इस समय ब्रेन सबसे तेजी से काम करता है और आप बेहतर तरीके से किसी विषय पर कॉन्सन्ट्रेट कर पाते हैं. इस वजह से आपकी एकाग्रता और याद रखने की क्षमता काफी अधिक बढ़ जाती है और आप लंबे समय तक उसे याद रख पाते हैं..
सुबह उठने के फायदे
सुबह उठने के कई फायदे होते हैं. दरअसल, इस वक्त चारों तरफ शांति रहती है और इस वजह से मन और दिमाग दोनों शांत रहता है. शांति भरे माहौल में जब आप किसी विषय पर सोचते हैं तो आप बेहतर तरीके से ध्यान लगा पाते हैं. यही नहीं, इस समय अगर आप पढ़ाई करें तो दिमाग रिलैक्स होकर काम करता है जिस वजह से कॉन्सन्ट्रेशन अच्छा रहता है और मन भटकता नहीं. ऐसे में कम समय में ही आप ज्यादा पढ़ाई कर पाते हैं.
सुबह उठने का सही समय
अगर पढ़ाई के लिए आप सुबह उठना चाहते हैं तो ब्रह्म मुहुर्त यानी कि 4 से साढ़े 4 बजे के बीच उठना सबसे फायदेमंद माना जाता है. पहले जमाने में भी इस समय को पढ़ाई के लिए बेस्ट माना जाता था. सुबह उठकर पढ़ने से से मेमोरी लॉस की समस्या नहीं होती और चीजें लंबे वक्त तक याद रहती है.
सूरज की पहली रोशनी
दरअसल यह भी माना जाता है कि जब आप सूरज की रोशनी के साथ अपने दिमाग को एक्टिव करते हैं तो यह अधिक बेहतर और सतर्क तरीके से काम करता है. हालांकि यह आपके सोने के समय पर भी निर्भर करता है. क्योंकि कई लोग रात के वक्त अधिक प्रोडक्टिव काम कर पाते हैं.
क्या हो सोने जागने का सही समय
हालांकि कुछ शोधों में यह पाया गया है कि लोगों को सूरज के साथ ही दिन की शुरुआत करनी चाहिए और सूरज के अस्त होने के साथ ही अपने दिन को खत्म करना चाहिए. ऐसा करने से ‘सेंस ऑफ वेलबींग' बना रहता है, जो शरीर का एक नेचुरल प्रोसेस है.
ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ / ठंडियों में स्किन में ड्राईनेस बहुत ज्यादा होती है. इससे बचने के लिए लोग मॉइश्चराइजर लगाकर रखते हैं चेहरे पर ताकि नमी बनी रहे. वहीं, आप सर्दियों में स्किन को नैचुरल तरीके से मॉइश्चराइज करना चाहते हैं तो फिर हम यहां आपको 4 तरीके बताने जा रहे हैं जिससे आप अपने फेस पर नैचुरल नमी बरकरार रख सकती हैं.
सर्दियों में फेस को मॉइश्चराइज करने का तरीका
- नहाने के बाद फेस पर एलोवेरा जैल लगाएं. यह ठंडी गर्मी दोनों ही मौसम में स्किन के लिए रामबाण साबित होता है. एलोवेरा में पाए जाने वाले पोषक तत्वों और एंटीऑक्सीडेंट्स से स्किन हेल्दी होती है. जिन लोगों की स्किन सर्दियों में ज्यादा फटती है, उन्हें एलोवेरा जेल से मसाज जरूर करनी चाहिए.
-मलाई का भी आप इस्तेमाल कर सकती हैं, स्किन को हाइड्रेट रखने के लिए. आप नहाने के बाद दूध से मलाई निकालकर चेहरे पर लगा लीजिए. फिर कुछ देर बाद चेहरा पानी से साफ कर लीजिए. इससे स्किन मुलायम और ग्लोइंग बनी रहती है.
- जैतून के तेल से भी आप स्किन को मॉइश्चराइज कर सकती हैं. यह तेल एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है, जो स्किन को फ्री रेडिकल्स से बचाता है. नहाने के बाद जैतून तेल से चेहरे की मसाज करने पर स्किन जवां और फ्रेश नजर आती है.
- बादाम के तेल में विटामिन ई भरपूर होती है. यह अमीनो एसिड से भरपूर होता है, जो स्किन के लिए अच्छा है. आप 2 से 3 बूंद बादाम का तेल चेहरे पर लगाकर हल्के हाथों से मसाज करिए. फिर 15 मिनट चेहरे पर तेल लगा हुआ छोड़ दीजिए. इसके बाद गुनगुने पानी से फेस साफ कर लीजिए.
आस्था /शौर्यपथ /परंपरागत रूप से, नाक छिदवाना हिंदू धर्म में एक रिवाज है. लेकिन समय के साथ यह परंपरा एक बेहद पसंदीदा फैशन के रूप में सामने आई है. अब दुनिया भर में विभिन्न समुदायों की महिलाओं में नाक छिदवाने का क्रेज बढ़ गया है. हालांकि, हममें से ज्यादातर लोग अभी भी नोज पियरसिंग के लाभों के बारे में नहीं जानते हैं. शोध और अध्ययनों से भी यह साबित हो चुका है कि नाक छिदवाने का एक खास वैज्ञानिक कारण होता है. तो चलिए जानते हैं नोज पियरसिंग के फायदे क्या हैं. नहाने के बाद इन 4 चीजों से करिए चेहरे का मसाज, फेस पर बनी रहेगी नमी और झुर्रियां भी नहीं आएंगी नजर
नाक छिदवाने के फायदे
- इससे आपका रिसपाइरेटरी सिस्टम अच्छा होता है. आप सोने की कील नाक में पहनती हैं तो फिर यह आपके लिए ज्यादा लाभकारी होगा.छोटे साइज की नोज पिन आपके लिए ज्यादा लाभकारी है.
- नाक छिदवाने से आपका दिमाग शांत रहता है. इससे मेंटल हेल्थ अच्छी बनी रहती है. इससे एकाग्रता बढ़ती है और आत्मविश्वास भी. नोज पिन हमारे इम्यून सिस्टम के लिए बहुत अच्छा है.
धार्मिक मान्यता नाक छिदवाने का
ऐसी मान्यता है कि नाक छिदवाना देवी पार्वती की पूजा करने का एक तरीका है और यही एक कारण है कि हिंदू दुल्हनें अपनी शादियों के दौरान नाक में स्टड पहने हुए देखी जाती हैं. देवी पार्वती, के बारे में कहा जाता है कि वे उन महिलाओं को आशीर्वाद देती हैं जो अपने जिनकी नाक शादी में छिदी होती है.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ / सर्दियों के मौसम में लोग चुकंदर सलाद या जूस के रूप में सेवन करते हैं. इसके पोषक तत्व स्किन और हेयर के लिए रामबाण साबित होते हैं, इसलिए विंटर डाइट में इसको जरूर शामिल किया जाता है. लेकिन इस फल के कुछ नुकसान भी हैं जिसके बारे में इस आर्टिकल में आपको बताने वाले हैं. तो आइए जानते हैं
चुकंदर के नुकसान |
- अध्ययनों के अनुसार, चुकंदर ऑक्सालेट होता है जो पथरी का कारण बन सकता है. इसलिए, चुकंदर का जूस कम मात्रा में पीने की सलाह दी जाती है. इसके अलावा, अगर आपको किडनी में पथरी है तो आपको चुकंदर के जूस और सलाद से पूरी तरह बचना चाहिए.
- कई मामलों में, चुकंदर के ज्यादा सेवन से लोगों को एलर्जी हो जाती है. इसके कारण गले में जकड़न और ब्रोंकोस्पजम हो सकता है. तो आप अगर एलर्जिक हैं तो फिर इसके सेवन से बचें.
- चुकंदर के ज्यादा सेवन से पेट से जुड़ी परेशानी हो सकती है. गर्भवती महिला को कम मात्रा में सेवन करना चाहिए. लिवर का भी खतरो होता है. इसमें कॉपर, आयरन, फॉस्फोरस और मैग्नीसियम मिनरल होते हैं, जो लिवर में जम जाते हैं.
ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ / हर कोई ताउम्र जवां और खूबसूरत बने रहना चाहता है. लेकिन ये संभव नहीं है क्योंकि शरीर की अपनी बायोलॉजिकल क्लॉक होती है जिसके अनुसार एक उम्र के बाद चेहरे पर उम्र के बदलाव दिखने लगते हैं और शरीर कमजोर होने के साथ साथ उम्र जनित बीमारियों की चपेट में आने लगता है. ऐसे में लोग बाजार में तरह तरह के प्रोडक्ट और तरह तरह की थेरेपी की शरण में जाते हैं. इसी के मद्देनजर चीन के वैज्ञानिकों ने हाइड्रोजन थेरेपी नाम का नायाब नुस्खा ईजाद किया है जिसकी मदद से एंटी एजिंग की ख्वाहिश पूरी करने में मदद मिल सकेगी. इस थेरेपी को चूहों पर अमल करके देखा गया और पाया गया कि ये थेरेपी ना केवल एंटी एजिंग बल्कि ऐसी बीमारियों से बचने में भी मदद करेगी जो उम्र बढ़ने के साथ आती हैं. चलिए जानते हैं कि हाइड्रोजन थेरेपी क्या है और ये कैसे काम करती है.
क्या है हाइड्रोजन थेरेपी
हाइड्रोजन थेरेपी दरअसल ऐसी थेरेपी है, जिसमें मॉलिक्युलर हाइड्रोजन गैस या हाइड्रोजन-डिसोल्वड पानी का उपयोग किया जाता है. इस गैस से कई सारे चिकित्सीय इलाज किए जा सकते हैं. इसकी मदद से एंटी एजिंग के प्रभाव दिखते हैं, इस थेरेपी की मदद से ऑक्सीडेटिव तनाव को भी दूर करने में मदद मिलती है. इसकी मदद से जीन एक्सप्रेशन भी रेगुलर होते हैं. हाइड्रोजन गैस में सूजन कम करने के गुणों के साथ साथ न्यूरोडीजेनेरेटिव डिसऑर्डर, हार्ट डिजीज, डायबिटीज और कैंसर जैसी बीमारियों में भी मदद करने की क्षमता है.
कैसे काम करती है हाइड्रोजन थेरेपी
आपको बता दें कि चीनी वैज्ञानिकों ने काफी समय पहले ही हाइड्रोजन गैस पर काफी सारी रिसर्च की है. इस रिसर्च में हाइड्रोजन रिलीजिंग मैथड के जरिए बढ़ती उम्र के कारण कमजोर होती हड्डियों की मरम्मत भी हो सकती है और अल्जाइमर जैसी बीमारी से भी बचा जा सकता है. नैनो टेक्नोलॉजी की मदद से चीनी वैज्ञानिकों ने एक स्काफॉल्ड इंप्लांट बनाया है जिसमें हाइड्रोजन गैस के साथ साथ मेटा सिलिकेट, आयरन और कैल्शियम को यूज किया गया है. इसी इंप्लांट से थेरेपी के दौरान हाइड्रोजन डिलीवरी की जा सकती है.
सेहत /शौर्यपथ / सब्जी में दालचीनी डाल देने से स्वाद दोगुना हो जाता है. यह मसाला एक आयुर्वेदिक हर्ब्स है जिसे आप सेहत को बेहतर बनाने में भी इस्तेमाल में ला सकते हैं. सर्दियों में तो इस मसाले के खास फायदे होते हैं. तो चलिए आज आपको बताते हैं दालचीनी काढ़ा पीने के कितने फायदे हो सकते हैं.
दालचीनी काढ़ा पीने के फायदे क्या हैं
1- दालचीनी में एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल, मैग्नीशियम, आयरन, फॉस्फोरस, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्शियम, मैंगनीज, कॉपर, जिंक, विटामिन, नियासिन, थियामिन, लाइकोपीन और एंटीऑक्सीडेंट्स, जैसे तत्व मौजूद होते हैं.
2- सर्दी के मौसम में रोज इसका काढ़ा पीते हैं, तो फिर आपको कोल्ड कफ से छुटकारा मिल जाएगा. साथ ही आप और मौसमी बीमारियों से भी बचे रहेंगे. इसके एंटी वायरल गुण इम्यूनिटी को मजबूत बनाता है. कोलेस्ट्रोल को कंट्रोल करने में दालचीनी भी बहुत लाभकारी होता है.
3- दाल चीनी हार्ट अटैक के रिस्क को भी कम करता है. यह कब्ज की भी समस्या को दूर करता है. इससे पाचन तंत्र मजबूत होता है. हड्डियों के लिए भी यह काढ़ा अच्छा है.
4- अगर आप गठिया के दर्द से जूझ रहे हैं तो फिर हल्के गरम पानी में दालचीनी और शहद मिलाकर पी सकते हैं. इससे ज्वाइंट पेन दूर होता है. तो अब से आप इस काढ़े को सर्दियों के ड्रिंक में शामिल कर लीजिए.
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
