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June 01, 2026
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रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य के विद्यार्थियों के लिए एक बड़ा फैसला लेते हुए कहा है कि नवा रायपुर में राष्ट्रीय स्तर के उच्च स्तरीय स्कूल स्थापित हो, इसके लिए 10 एकड़ भूमि निःशुल्क प्रदान की जाएगी। मुख्यमंत्री ने इसके लिए मुख्य सचिव को शिक्षा विभाग और संबंधित विभागों से परामर्श कर जल्द ही प्रस्ताव मंत्रिपरिषद के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा है।
उल्लेखनीय है कि राज्य निर्माण के 20 साल बाद भी प्रदेश में ऐसा कोई भी शासकीय अथवा निजी शाला नहीं है जिसकी गणना देश के प्रतिष्ठित शालाओं में हो। मुख्यमंत्री ने इसे देखते हुए निर्देश दिए हैं कि- राज्य के विद्यार्थियों को उच्च स्तरीय शिक्षा का अवसर प्रदान करने तथा राष्ट्रीय स्तर पर राज्य की उपस्थिति दर्ज कराने के लिए यह अत्यावश्यक है कि राज्य में ऐसी शाला की स्थापना की जाए, जिसमें गुणवत्ता युक्त शिक्षा के साथ ही विद्यार्थियों को सर्वांगीण विकास के अवसर भी उपलब्ध हो सके।
मुख्यमंत्री ने कहा है कि राष्ट्रीय स्तर के शालाओं की स्थापना से छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों को गुणवत्तापरक शिक्षा मिलेगी, वहीं शिक्षा के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ की राष्ट्रीय स्तर पर उपस्थिति दर्ज हो सकेगी। उन्होंने कहा है कि राष्ट्रीय स्तर की शाला की स्थापना हेतु नवा रायपुर में 10 एकड़ भूमि निःशुल्क आबंटित की जाएगी। इसके लिए मुख्य सचिव शिक्षा विभाग तथा संबंधित विभागों के परामर्श से कार्य योजना बनाकर मंत्रिपरिषद की आगामी बैठक में अनुमोदन हेतु प्रस्तुत करेंगे।

सेहत /शौर्यपथ /गलत खानपान, पाचन से जुड़ी समस्या के अलावा गर्भावस्था और कुछ अन्य कारणों के चलते उल्टी आने की समस्या होती है। इसके कारण कई बार अन्य शारीरिक तकलीफें भी हो जाती है और मुंह का स्वाद भी खराब हो जाता है।
आइए जानते हैं, उल्टी होने पर अपनाएं कौन से घरेलू समाधान-
1 नीबू के रस में काला नमक और काली मिर्च डालकर पीने से उल्टी आना बंद हो जाती है।
2 पेट में गर्मी बढ़ने के कारण भी उल्टी की समस्या होती है। ऐसे में छाछ में भुना हुआ जीरा और सेंधा नमक डालकर पीने से बहुत जल्दी फायदा होता है।
3नीबू को काटकर उस पर चीनी डालकर चूसने से इस समस्या में बहुत लाभ होता है। इससे चूसने से पेट के भीतर अन्न विकार खत्म हो जाता है और उल्टी आना रूक जाता है।
4गर्भवती स्त्री को सुबह शाम हल्के गुनगुने पानी में नीबू का रस देने पर उल्टी में लाभ होगा।
5 तुलसी के रस को शहद के साथ मिलाकर पीड़ि‍त को देने पर उल्टियां बंद हो जाती है।
6 इसके अलावा नमक और शक्कर के घोल में नीबू डालकर पीने से भी लाभ होता है।
7 चने को भूनकर सत्तू बनाकर खाने से भी उल्टी आना बंद होता है।
8 इसके अलावा गर्भवती स्त्री के पेट पर पानी की गीली पट्टी रखने से भी उल्टियां आना बंद हो जाता है।

धर्म संसार /शौर्यपथ /परमेश्वर के दो रुप है निराकार और साकार। निराकारर रूप में शिव है और साकार रूप में शंकर है। शिव या शंकर दोनों ही ब्रह्म स्वरूप है। शिव का नाम शंकर के साथ जोड़ा जाता है। लोग कहते हैं– शिव, शंकर, भोलेनाथ। इस तरह अनजाने ही कई लोग शिव और शंकर को एक ही सत्ता के दो नाम बताते हैं। असल में, दोनों की प्रतिमाएं अलग-अलग आकृति की हैं। शंकर को हमेशा तपस्वी रूप में दिखाया जाता है। कई जगह तो शंकर को शिवलिंग का ध्यान करते हुए दिखाया गया है।
शिव ने सृष्टि की स्थापना, पालना और विलय के लिए क्रमश: ब्रह्मा, विष्णु और महेश नामक तीन सूक्ष्म देवताओं की रचना की। इस तरह शिव ब्रह्मांड के रचयिता हुए और शंकर उनकी एक रचना। भगवान शिव को इसीलिए महादेव भी कहा जाता है। इसके अलावा शिव को 108 दूसरे नामों से भी जाना और पूजा जाता है।

शिव यक्ष के रूप को धारण करते हैं और लंबी-लंबी खूबसूरत जिनकी जटाएं हैं, जिनके हाथ में ‘पिनाक’ धनुष है, जो सत् स्वरूप हैं अर्थात् सनातन हैं, ओमवार स्वरूप दिव्यगुणसम्पन्न उज्जवलस्वरूप होते हुए भी जो दिगम्बर हैं। जो शिव नागराज वासुकि का हार पहिने हुए हैं, अर्धनग्न शरीर पर राख या भभूत मले, जटाधारी, गले में रुद्राक्ष और सर्प लपेटे, तांडव नृत्य करते हैं तथा नंदी जिनके साथ रहता है। उनकी भृकुटि के मध्य में तीसरा नेत्र है। वे सदा शांत और ध्यानमग्न रहते हैं।
कुछ विद्वान मानते हैं कि शिव पुराण अनुसार शिव के माता-पिता सदाशिव और दुर्गा है। ब्रह्म (परमेश्वर) से सदाशिव, सदाशिव से दुर्गा। ‍‍सदाशिव-दुर्गा से विष्णु, ब्रह्मा, रुद्र और महेश्वर की उत्पत्ति हुई। रुद्र का सदाशिव रूप होने के कारण वे शिव कहलाए।

शिवपुराण के अनुसार एक बार ब्रह्मा और विष्‍णु दोनों में सर्वोच्चता को लेकर लड़ाई हो गई, तो बीच में कालरूपी एक स्तंभ आकर खड़ा हो गया। तब दोनों ने पूछा- 'प्रभो, सृष्टि आदि 5 कर्तव्यों के लक्षण क्या हैं? यह हम दोनों को बताइए।'
तब ज्योतिर्लिंग रूप काल ने कहा- 'पुत्रो, तुम दोनों ने तपस्या करके मुझसे सृष्टि (जन्म) और स्थिति (पालन) नामक दो कृत्य प्राप्त किए हैं। इसी प्रकार मेरे विभूतिस्वरूप रुद्र और महेश्वर ने दो अन्य उत्तम कृत्य संहार (विनाश) और तिरोभाव (अकृत्य) मुझसे प्राप्त किए हैं, परंतु अनुग्रह (कृपा करना) नामक दूसरा कोई कृत्य पा नहीं सकता। रुद्र और महेश्वर दोनों ही अपने कृत्य को भूले नहीं हैं इसलिए मैंने उनके लिए अपनी समानता प्रदान की है।' सदाशिव कहते हैं- 'ये (रुद्र और महेश) मेरे जैसे ही वाहन रखते हैं, मेरे जैसा ही वेश धरते हैं और मेरे जैसे ही इनके पास हथियार हैं। वे रूप, वेश, वाहन, आसन और कृत्य में मेरे ही समान हैं।'
ब्रह्मा और इंद्र के काल में देवताओं की दैत्यों से प्रतिस्पर्धा चलती रहती थी। ऐसे में जब भी देवताओं पर घोर संकट आता था तो वे सभी देवाधिदेव महादेव के पास जाते थे। दैत्यों, राक्षसों सहित देवताओं ने भी शिव को कई बार चुनौती दी, लेकिन वे सभी परास्त होकर शिव के समक्ष झुक गए इसीलिए शिव हैं देवों के देव महादेव। वे दैत्यों, दानवों और भूतों के भी प्रिय भगवान हैं। भगावान शिव को पूजने वाले देवों के साथ असुर, दानव, राक्षस, पिशाच, गंधर्व, यक्ष आदि सभी हैं। वे रावण को भी वरदान देते हैं और राम को भी।

सेहत /शौर्यपथ /हम सभी, अक्सर हरी सब्जियों के सेवन पर अधिक जोर देते हुए सुनते हैं। हमारे माताओं से लेकर डॉक्टरों तक, हर कोई बताता है कि हरी सब्जियां स्वास्थ्य के लिए अच्छी होती हैं। लेकिन आपने यह कितनी बार सुना है कि आपको पीले, धूप और खुशी के रंग सहित अन्य रंगीन फूड्स पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है? अपने आहार में पीले खाद्य पदार्थों को शामिल करने से स्वस्थ, उज्‍जव और चमकती त्वचा से लेकर इम्युनिटी को बूस्ट करने तक कई स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं। यह न सिर्फ आपके शारीरिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है, बल्कि आपके मानसिक स्वास्थ्य में भी सुधार कर सकता है।
हम यहां आपको बता रहे हैं कि आपको अपनी डाइट में पीले फूड्स को शामिल करने की आवश्यकता क्यों हैं और यह आपके स्वास्थ्य के लिए कैसे फायदेमंद है।
पीले फूड्स कैसे आपके स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है जानिए कैसे
कैरोटीनॉयड में समृद्ध होते हैं पीले फूड
पीले खाद्य पदार्थ कैरोटिनॉयड और बायोफ्लेवोनोइड्स से भरे होते हैं। जो एंटीऑक्सिडेंट के रूप में काम करते हैं और आपको कई बीमारियों से दूर रखते हैं। एंटीऑक्सिडेंट सूजन को कम करते हैं जो कई बीमारियों से जुड़ी है, साथ ही यह फ्री-रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से भी बचाते हैं।
बायोफ्लेवोनॉइड मौजूद होता है
पीले खाद्य पदार्थों में बायोफ्लेवोनॉइड को कभी-कभी विटामिन-पी के रूप में संदर्भित किया जाता है। यह तत्व शरीर में विटामिन-सी के टूटने को रोकता है और आपकी त्वचा को फिर से भरने के लिए आवश्यक विटामिन-सी प्रदान करता है। यह कोलेजन के उत्पादन को बढ़ावा देने में मदद करता है, जो एक महत्वपूर्ण एंटी-एजिंग घटक है।
यहां हैं पीले फूड्स के शारीरिक लाभ
1. कैंसर के जोखिम को करते हैं
सबसे पहले, वे कैरोटीनॉयड और बायोफ्लेवोनॉइड्स से परिपूर्ण होते हैं, जो एंटीऑक्सिडेंट के रूप में कार्य करते हैं और कैंसर सहित विभिन्न गंभीर रोगों को आपसे दूर रखते हैं। इसके लिए येलो बेल पेपर विशेष रूप से अच्छी होती हैं।
2. पेट के लिए फायदेमंद है
केले जैसे पीले फल पोटेशियम से भरपूर होते हैं, जो एक स्वस्थ आहार के प्रमुख पोषक तत्वों में से एक है। विशेषतौर पर डंडेलियन को पेट के स्वास्थ्य बनाए रखने, पेट फूलने और लिवर कल्याण को बढ़ावा देने के लिए अपने औषधीय लाभों के लिए जाना जाता है।
3. हड्डियों के साथ ही, दिल को भी स्वस्थ रखते हैं
नींबू और आम जैसे फल विटामिन-सी से भरपूर होते हैं, जो एकमात्र ऐसा विटामिन है जिसका शरीर स्वाभाविक रूप से उत्पादन नहीं करता है। इसलिए इसके लिए बाहरी स्रोत की आवश्यकता होती है। इन खाद्य पदार्थों के नियमित सेवन से हड्डियों और संयुक्त स्वास्थ्य को भी बढ़ाया जाता है। साथ ही वे ब्लडप्रेशर और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को भी संतुलित करते हैं। जिससे हृदय संबंधी समस्याओं का जोखिम कम होता है।
पीले फूड्स के अन्य लाभ
पीले खाद्य पदार्थ आपके मानसिक कल्याण के स्तर में तुरंत सुधार सकते हैं, साथ ही यह इंस्टेंट मूड बूस्टर भी बन सकते हैं!
वे त्वचा के स्वास्थ्य, बालों के स्वास्थ्य, हड्डियों के स्वास्थ्य और दंत स्वास्थ्य को भी बढ़ावा दे सकते हैं।
वे शरीर में कोलेजन के उत्पादन को बढ़ावा देते हैं। ये एक महत्वपूर्ण एंटी-एजिंग घटक है, जो कि शरीर के पीएच स्तर को भी संतुलित करता है। इष्टतम सौंदर्य लाभों के लिए, पीले खाद्य पदार्थों का उपयोग त्वचा और बालों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है।
आपको अपने आहार में इन पीले फूड्स को शामिल करना चाहिए
कोशिश करें और हर दिन पीले खाद्य पदार्थों के एक हिस्से को अपने आहार में जरूर शामिल करें। पीले फूड्स के ऐसे कई विकल्प मौजूद हैं जिन्हें आप आसानी से अपनी डाइट में शामिल कर सकती हैं, ये बाजार में आसानी से उपल्ब्ध हैं।
1. केला: खाने में आसान और बेहद किफायती है। यह वजन घटाने में मदद करने के साथ ही, कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है।
2. अनानास: यह पाचन के लिए बहुत अच्छा है और सूजन को कम करता है।
3. येलो बेल पेपर: ये फाइबर, फोलेट, आयरन और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं।
4. नींबू: नींबू में हाइड्रेटिंग और क्षारीय गुण होते हैं जो गुर्दे की पथरी की समस्या को दूर रखने में मदद करते हैं और चयापचय को बढ़ाते हैं।
5. आम: आम खाना भला किसे पसंद नहीं है? आम नेत्र स्वास्थ्य में सुधार करते हैं, मोतियाबिंद और मैक्युलर डिजनेरेशन को रोकते हैं। आमों में ज़ेक्सैन्थिन का उच्च स्तर उन्हें स्वास्थ्यप्रद फलों में से एक बनाता है।
6. डंडेलियन: यह जड़ी बूटी शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करती है और लीवर के लिए बहुत बढ़िया है।

सेहत /शौर्यपथ / शाम को अगर आपको चाय के साथ स्नैक्स का मन करता है या आप दिन के बीच कुछ चटपटी चीजें खाते रहते हैं, तो आपको एक हेल्दी स्नैक्स की जरुरत है। अंकुरित काले चने न सिर्फ आपकी भूख शांत करेंगे बल्कि इससे आपका वजन भी कंट्रोल रहेगा। अंकुरित चने क्लोरोफिल, विटामिन ए, बी, सी, डी और के, फॉस्फोरस, पोटैशियम, मैग्नीशियम और मिनरल्स का अच्छा स्रोत होते हैं। साथ ही इसे खाने के लिए किसी प्रकार की कोई खास तैयारी नहीं करती पड़ती। रातभर भिगोकर सुबह एक-दो मुट्ठी खाकर हेल्थ अच्छी हो सकती है।
काले चने खाने के फायदे
-चने में मौजूद फाइबर की मात्रा पाचन के लिए बहुत जरूरी होती है। रातभर भिगोए हुए चने से पानी अलग कर उसमें नमक, अदरक और जीरा मिक्स कर खाने से कब्ज जैसी समस्या से राहत मिलती है। साथ ही जिस पानी में चने को भिगोया गया था, उस पानी को पीने से भी राहत मिलती है। लेकिन कब्ज दूर करने के लिए चने को छिलके सहित ही खाएं।
-रोजाना सुबह काला चना खाने से फिट तो रहते ही है साथ ही जल्द एनर्जी देने में भी सहायक होता है। रातभर भिगोए हुए या अंकुरित चने में हल्का सा नमक, नींबू, अदरक के टुकड़े और काली मिर्च डालकर सुबह नाश्ते में खाएं, बहुत फायदेमंद होता है। आप चने का सत्तू भी खा सकते हैं। यह बहुत ही फायदेमंद होता है। -गर्मियों में चने के सत्तू में नींबू और नमक मिलाकर पीने से शरीर को एनर्जी तो मिलती ही है, साथ ही भूख भी शांत होती है।
-दूषित पानी और खाने से आजकल किडनी और गॉल ब्लैडर में पथरी की समस्या आम हो गई है। हर दूसरे-तीसरे आदमी के साथ स्टोन की समस्या हो रही है। इसके लिए रातभर भिगोए हुए काले चने में थोड़ी सी शहद की मात्रा मिलाकर खाएं। रोजाना इसके सेवन से स्टोन के होने की संभावना काफी कम हो जाती है और अगर स्टोन है तो आसानी से निकल जाता है। इसके अलावा चने के सत्तू और आटे से मिलकर बनी रोटी भी इस समस्या से राहत दिलाती है।
-चना ताकतवर होने के साथ ही शरीर में एक्स्ट्रा ग्लूकोज की मात्रा को कम करता है जो डायबिटीज के मरीजों के लिए कारगर होता है। लेकिन इसका सेवन सुबह-सुबह खालीपेट करना चाहिए। चने का सत्तू डायबिटीज से बचाता है। एक से दो मुट्ठी काले चना का सेवन करने से ब्लड शुगर की मात्रा को भी नियंत्रित करता है।
-शरीर में आयरन की कमी से होने वाली एनीमिया की समस्या को रोजाना चने खाकर दूर किया जा सकता है। चने में शहद मिलाकर खाने से जल्द असर करता है।
-आयरन से भरपूर चना एनीमिया की समस्या को काफी हद तक कम कर देता है। चने में 27 फीसदी फॉस्फोरस और 28 फीसदी आयरन होता है जो न केवल नए बल्ड सेल्स को बनाता है, बल्कि हीमोग्लोबिन को भी बढ़ाता है।
-हिचकी की समस्या से ज्यादा परेशान हैं, तो चने के पौधे के सूखे पत्तों का धूम्रपान करने से हिचकी आनी बंद हो जाती है। साथ ही चना आंतों-इंटेस्टाइन की बीमारियों के लिए भी काफी फायदेमंद होता है।

जनता की खुशहाली और राज्य के विकास को लेकर रखा सरकार का विजन
’उपयोगी निर्माण-जन हितैषी अधोसंरचनाएं और आपकी अपेक्षाएं’ विषय पर की चर्चा
राज्य के बहुमूल्य संसाधनों का उपयोग करके छत्तीसगढ़ के लोग भी समृद्ध और खुशहाल बने
सड़क, बिजली और सिंचाई संसाधनों के नेटवर्क को पूरा करने पर जोर
गौठान बन रहे हैं बहुआयामी सांस्कृतिक, आर्थिक गतिविधियों के केन्द्र
स्कूल शिक्षा में गुणात्मक सुधार का रोडमैप तैयार
स्थानीय संसाधनों में वेल्यू एडिशन से संबंधित पाठ्यक्रम उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रारंभ करने की पहल
युवाओं में उद्यमिता के विकास के साथ रोजगार सृजन के प्रयास
छत्तीसगढ़ की नई जल संसाधन विकास नीति तैयार
चंदूलाल चन्द्राकर स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय को अधिग्रहित करने का फैसला
कांकेर, महासमुन्द और कोरबा जिले में खुलेंगे नए मेडिकल कॉलेज

रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज प्रसारित अपनी मासिक रेडियोवार्ता लोकवाणी की 15वीं कड़ी में ’उपयोगी निर्माण-जन हितैषी अधोसंरचनाएं और आपकी अपेक्षाएं’ विषय पर प्रदेश की जनता की खुशहाली और विकास को लेकर राज्य सरकार के विजन पर अपने विचार विस्तार से रखे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के बहुमूल्य संसाधनों का उपयोग करके छत्तीसगढ़ के लोग भी समृद्ध और खुशहाल बने। अधोसंरचना विकास के कार्यों में सड़क, बिजली और सिंचाई संसाधनों के नेटवर्क को पूरा करने पर जोर दिया गया है, ताकि अधोसंरचना विकास के कार्यांे का पूरा लाभ प्रदेश की जनता को मिल सके। गांव-गांव में महिला स्व सहायता समूह तथा प्रतिभावान युवाओं के नवाचार से प्रदेश में समृद्धि और खुशहाली का नए रास्ते बनाने की शुरूआत हो चुकी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गांव-गांव में ऐसी अधोसंरचनाएं तैयार की जा रही हैं। जिनका लाभ बड़े पैमाने पर लोगों को मिलता है। नरवा, गरवा, घुरवा, बारी प्रोजेक्ट की शुरूआत छत्तीसगढ़ की इन चार चिनहारी को बचाने के लिए की गयी। गौठान बहुआयामी सांस्कृतिक, आर्थिक गतिविधियों के केन्द्र बन रहें हैं। गांवों में बाड़ी की पुरानी परम्परा को वापस लाया जा रहा है। राज्य की सिंचाई क्षमता दोगुनी करने के लिए प्रदेश की नई जल संसाधन नीति तैयार करने का काम पूरा हो चुका है। वर्मी कम्पोस्ट से जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा। राज्य सरकार ने स्कूल शिक्षा में गुणात्मक सुधार का रोडमैप बनाया है। इसी तरह उच्च शिक्षा के क्षेत्र में विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, कृषि शिक्षा और इंजीनियरिंग कॉलेजों में ऐसे पाठ्यक्रम प्रारंभ करने पर जोर दिया गया है, जिससे स्थानीय संसाधनों के वेल्यू एडिशन से उत्पादन का रास्ता बने। युवाओं में उद्यमिता का विकास हो और उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर मिलंे। पर्यटन को बढ़ावा देकर स्थानीय विकास को गति देने और रोजगार के नए अवसर सृजित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
लोकवाणी में आम जनता से राज्य सरकार की योजनाओं पर मिलता है फीडबैक
मुख्यमंत्री ने लोकवाणी में श्रोताओं का अभिवादन करते हुए छत्तीसगढ़ी में कहा-सब्बो झन ला मोर जय जोहार, नमस्कार, जय सियाराम। लोकवाणी मं आके मोला अब्बड़ खुसी लागथे, काबर कि हमन सरकार मं बइठके जउन निरनय लेथन, वो बात ल आप सब झन कइसे समझथव, अऊ योजना मन ल कइसे अपनाथव, ऐखर बारे मं मोला सब जानकारी लोकवाणी ले हो जाथे। आप मन ले गोठ-बात करके हमर आत्मविश्वास घलो बाढ़थे, अऊ काम करेके नवा रद्दा घलो मिलथे। तेखर बर जम्मो ‘लोकवाणी’ सुनइया मन ल, गाड़ा-गाड़ा सुभकामना अऊ धन्यवाद।
श्रोताओं ने कहा ‘नरवा, गरवा, घुरवा और बारी’ प्रोजेक्ट से गांवों में मिली अधोसंरचना को दिशा
लोकवाणी के लिए रिकार्ड कराए गए अपने संदेश में बेमता के भूपेन्द्र कुमार शर्मा ने कहा कि नई सरकार बनने के बाद किसानों को काफी राहत मिली। महासमुंद जिले की बम्हनी ग्राम पंचायत की रूक्मणी पाल ने बताया कि उनके जय मां सरस्वती महिला स्व-सहायता समूह ने गोबर से 200 क्विंटल खाद बनाई, जिससे 1 लाख 77 हजार रुपए आय हुई। आरंग के नंद कुमार ने कहा कि ‘नरवा, गरवा, घुरवा और बारी’ प्रोजेक्ट से अधोसंरचना विकास की एक दिशा दिखी है।
जल संरक्षण और संवर्धन के लिए 30 हजार नरवा चिन्हांकित
मुख्यमंत्री ने श्रोताओं से रू-ब-रू होते हुए कहा कि निश्चित तौर पर ‘नरवा, गरवा, घुरवा, बारी’ हमारा ड्रीम प्रोजेक्ट है और इसकी शुरुआत हमने छत्तीसगढ़ की चार चिन्हारी को बचाने के लिए किया था। नरवा के काम में पंचायत और ग्रामीण विकास, जल संसाधन विकास विभाग, वन विभाग आदि की मदद ली जा रही है। लगभग 30 हजार नरवा चिन्हांकित किए गए हैं और लगभग 5 हजार नरवा विकास का काम काफी आगे बढ़ चुका है। गरवा को लोग सिर्फ गाय, दूध और पशुधन विकास तक ही समझते थे, हमने गरवा के माध्यम से गौठान की योजना बनाई। इस तरह लगभग 10 हजार गौठानों के निर्माण की मंजूरी दे चुके हैं, जिनमें से 5 हजार से ज्यादा गौठानों का निर्माण पूरा हो चुका है। अब गौठान की पहचान एक ऐसी अधोसंरचना के रूप में हो चुकी है, जो सिर्फ गायों को रोकने की जगह ही नहीं है बल्कि गोधन न्याय योजना के माध्यम से गोबर खरीदी केन्द्र, महिला स्व-सहायता समूह के माध्यम से वर्मी कम्पोस्ट बनाने और बेचने का केन्द्र, गोबर से अन्य कलात्मक वस्तुएं बनाने का केन्द्र भी विकसित हुआ है। एक तरह से गौठान बहुआयामी सांस्कृतिक, आर्थिक गतिविधियों के केन्द्र बन रहे हैं। मुझे यह देखकर खुशी होती है कि हमारे गांव-घर की बाड़ियों में उपजाई जाने वाली सब्जी-भाजी- फल कुपोषण मुक्ति का सहारा बन रहे हैं।
आगामी 5 वर्षों में राज्य की सिंचाई क्षमता दोगुनी करने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी नरवा योजना प्रदेश में भू-जल की रिचार्जिंग का बहुत बड़ा साधन बन रही है। हमारे प्रयासों को भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय द्वारा भी सराहा गया है। बिलासपुर और सूरजपुर जिले की परियोजनाओं को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है। हमने पुरानी जल संसाधन परियोजनाओं की कमियों को दूर किया ताकि वास्तविक सिंचाई का रकबा बढे़, इसके अलावा भी बड़ी-बड़ी नई योजनाएं हाथ में ली हैं। बोधघाट के अलावा शेखरपुर बांध, ढांडपानी बांध, रेहर अटेम जैसी 15 परियोजनाओं पर ध्यान दिया जा रहा था। हमारा लक्ष्य है कि आगामी 5 साल में प्रदेश में ऐसी जल अधोसंरचनाओं का विकास हो जाए, जिससे राज्य की सिंचाई क्षमता दोगुनी हो जाए। मैं यह खुशखबरी भी साझा करना चाहता हूं कि छत्तीसगढ़ की नई जल संसाधन विकास नीति तैयार करने का काम पूरा हो चुका है। जल्दी ही प्रदेश को नई जल संसाधन नीति के रूप में अधोसंरचना विकास की नई सौगात मिलेगी।
ग्रामीणों ने धान खरीदी केन्द्रों में चबूतरा निर्माण को बताया उपयोगी
लोकवाणी में ग्राम डबराखुर्द के श्री राजेश कुमार कनौजिया ने बताया कि ग्रामीण सेवा सहकारी समिति झाल खम्हरिया में और ग्राम कोसरंगी के श्री सोम प्रकाश साहू ने बताया कि धान खरीदी केन्द्रों में चबूतरा बनने से हमारा धान खराब नहीं होता है। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया।
गौठानों में 61 हजार वर्मी कम्पोस्ट टंकी और करीब 5 हजार चारागाहों का निर्माण
मुख्यमंत्री ने लोकवाणी में कहा कि आप लोगों ने इस बदलाव को महसूस किया, उसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। हम महात्मा गांधी नरेगा के साथ विभिन्न योजनाओं के अभिसरण से गांव-गांव में ऐसी अधोसंरचनाओं का विकास कर रहे हैं, जिसमें बहुत बड़े पैमाने पर लोगों को लाभ मिलता है। इस तरह एक ओर जहां हमने हजारों गौठानों के निर्माण की व्यवस्था की, वहीं गौठानों में लगभग 61 हजार वर्मी कम्पोस्ट टंकी बनवा चुके हैं। करीब 5 हजार चारागाह बनाए हैं। भवनविहीन आंगनबाड़ियों के लिए भवन बना रहे हैं। नवगठित ग्राम पंचायतों में पंचायत भवन बना रहे हैं। उसी प्रकार धान उपार्जन केन्द्रों में 8 हजार चबूतरे बनवाए गए हैं, जिसका जिक्र आप लोगों ने किया, इससे धान को सुरक्षित रखने में मदद मिल रही है। गांवों में ऐसी अधोसंरचनाओं की बहुत जरूरत है, जिससे हमारे ग्रामीण भाई-बहन और बच्चे गांवों में एक नई तरह की व्यवस्था महसूस कर सकें। वे देख सकें कि सरकार का काम खाली शहरी अधोसंरचना का विकास ही नहीं है, गांव वालों की जरूरतें पूरी करने के लिए भी बहुत से काम करना जरुरी है। मुझे खुशी है कि हमने सही समय में गांव वालों की जरूरतों की पहचान कर ली है और उसके अनुरूप निर्माण के निर्णय ले रहे हैं।
इंग्लिश मीडियम स्कूलों में कमजोर वर्ग के बच्चों को मिलेगी अच्छी शिक्षा
लोकवाणी में कोरबा के श्री कुश शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ‘उपयोगी निर्माण और जनहितैषी अधोसंरचना’ के मामले में ऐसा विकास कर रही है, जो आम लोगों से सीधा जुड़ा है। राज्य सरकार के इंग्लिश मीडियम स्कूल शुरू करने के फैसले से आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए शिक्षा सुलभ हो पाएगी, इसके लिए मुख्यमंत्री जी धन्यवाद के पात्र हैं।
राज्य सरकार ने तैयार किया स्कूल शिक्षा में गुणवत्ता सुधार का रोडमैप
मुख्यमंत्री ने लोकवाणी में कहा कि हमने स्कूल शिक्षा में गुणवत्ता सुधार का एक रोडमैप बनाया है, जिसके अनुसार विभिन्न शालाओं में बहुत से कार्य किए जा रहे हैं, जिनसे बच्चों के व्यक्तित्व का सम्पूर्ण विकास हो, जिससे वे आगे चलकर डॉक्टर, इंजीनियर ही नहीं बल्कि शोधकर्ता, खिलाड़ी, प्रबंधक या अपनी रुचि के अनुसार कोई भी कैरियर अपना सकें। उन्होंने कहा कि महंगे और सजावटी विकास से किसी का भला नहीं होता, वास्तव में यह देखना चाहिए कि निर्माण की गुणवत्ता कैसी है और उससे सेवा की गुणवत्ता में कैसे सुधार होगा। ‘स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय योजना’ का विचार ही इसलिए आया कि सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों के सामने सम्मानपूर्वक खड़ा किया जाए। ताकि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब और मध्यमवर्गीय बच्चे उन सुविधाओं से वंचित न हों, जो उनके भविष्य निर्माण के लिए जरूरी हैं। इसलिए सरकारी क्षेत्र में हम इंग्लिश मीडियम स्कूल के माध्यम से वह सुविधाएं ला रहे हैं।
युवाओं में बढ़ा कृषि शिक्षा की ओर रुझान
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के कुलपति प्रो. एस. के. पाटिल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में कृषि तथा उद्यानिकी को बढ़ावा मिलने से और 31 महाविद्यालयों का वृहद नेटवर्क खड़ा होने से युवाओं में कृषि शिक्षा की ओर रुझान बढ़ा है। उन्होंने मुख्यमंत्री को इसके लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि अपने युवाओं में कौशल विकास हेतु विश्वविद्यालयों में उत्पादन केन्द्र तथा युवाओं की कंपनियां स्थापित करने का अभिनव विचार दिया है। इसके माध्यम से युवा, कृषि को एक व्यवसाय के रूप में लेने आगे आ रहे हैं। रायगढ़ के किरण मौर्य ने कहा कि रायगढ़ जिले में स्वर्गीय नन्दकुमार पटेल यूनिवर्सिटी शुरू होने से हम छात्र-छात्राओं को शिक्षा संबंधी कार्यों के लिये बिलासपुर नहीं जाना पड़ेगा।
विश्वविद्यालयों में उत्पादन केन्द्र तथा युवाओं में उद्यमिता विकास के कार्य की नई शुरूआत
मुख्यमंत्री बघेल ने इस संबंध में कहा कि मैं किसान परिवार से हूं। मैं किसान हूं, इसे गौरव का विषय मानता हूं, लेकिन एक लम्बे दौर में हमारे युवाओं के मन में यह बात बैठ गई है कि खेती-किसानी के बारे में चर्चा करना या उसमें अपना कैरियर ढूंढना कोई बहुत अच्छी बात नहीं है। खेती-किसानी को लेकर युवाओं के मन में सम्मान का भाव नहीं होने की एक बड़ी वजह थी कि खेती और उच्च शिक्षा के बीच की कड़ी ही मिसिंग थी। हार्वर्ड विश्वविद्यालय में भ्रमण के दौरान मेरे मन में यह बात आई थी कि विश्वविद्यालयों में उत्पादन केन्द्र तथा युवाओं में उद्यमिता विकास को लेकर कोई संरचनागत, संस्थागत काम होना चाहिए, जिसमें निरंतरता हो और युवाओं को कृषि से संबंधित रोजगार के नए अवसरों की जानकारी हो, उन्हें मार्गदर्शन व सहयोग मिले। छत्तीसगढ़ में यह शुरुआत एक सुखद संकेत है। इसलिए हमने यह तय किया कि उतने ही इंजीनियरिंग कॉलेजों को महत्व मिले जितने में गुणवत्ता से शिक्षा दी जा सके और उसमें भी ऐसे पाठ्यक्रम होने चाहिए जो स्थानीय संसाधनों के वेल्यू एडीशन से उत्पादन का रास्ता बनाएं। यह तो विडम्बना ही थी कि हमारे कृषि प्रधान राज्य में इंजीनियरिंग कॉलेजों की भरमार हुई लेकिन कृषि शिक्षा के कॉलेज समुचित संख्या में नहीं खोले गए, इसलिए हमने एग्रीकल्चर के साथ उद्यानिकी-वानिकी, डेयरी टेक्नोलॉजी, फूड प्रोसेसिंग, मछली पालन जैसे विषयों के लिए विश्वविद्यालय, महाविद्यालय और पॉलीटेक्निक खोलने पर जोर दिया है।
चंदूलाल चन्द्राकर स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय को अधिग्रहित करने का फैसला
कांकेर, महासमुन्द और कोरबा जिले में खुलेंगे नए मेडिकल कॉलेज
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने लोकवाणी में कहा कि कोविड के दौरान हमने महसूस किया कि प्रदेश में और अधिक मेडिकल कॉलेजों की जरूरत है। दुर्ग जिलेे का चंदूलाल चन्द्राकर स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय निजी क्षेत्र में चलना मुश्किल हो रहा था, उसे हमने अधिग्रहित करने का फैसला लिया ताकि सरकारी चिकित्सा शिक्षा अधोसंरचना को बढ़ाया जा सके। तीन जिलों कांकेर, महासमुन्द और कोरबा में हम नए मेडिकल कॉलेज खोल रहे हैं, इस तरह उच्च शिक्षा की अधोसंरचना में जो अभाव थे, उसे पूरा करने और प्रदेश के युवाओं को बेहतर भविष्य बनाने में मदद करने का हमारा प्रयास है।
राज्य सरकार द्वारा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे कार्यों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए जशपुर के मदन तिर्की ने कहा कि जशपुर के बालाछापर सरना में एथनिक रिसॉर्ट और कवर्धा में सरोधा दादर रिसॉर्ट बनने से आदिवासी पिछड़े अंचल में पर्यटन विकास के अवसर पैदा हो रहे हैं। रायपुर की प्रार्थना तिवारी ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार उपयोगी निर्माण और जनहितैषी अधोसंरचना के मामले में हमारी अपेक्षाओं पर खरे उतर रही है। क्योंकि हमारा भी मानना है कि कोई निर्माण या इंफ्रास्ट्रक्चर ऐसा हो जो लोगों से जुड़ा हो, निर्माण कार्य केवल शो के लिए नहीं होना चाहिए। पिछले 2 सालोें में यह बदलाव देखने को मिल रहा है कि लोगों की भागीदारी एवं उनकी उपयोगिता को ध्यान दिया जा रहा है।
पर्यटन विकास से मिलेगी स्थानीय विकास को गति
मुख्यमंत्री ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे कार्यो के संबंध में लोकवाणी में कहा कि प्रदेश में एक दौर ऐसा आया था, जब पर्यटन को कुछ प्रचलित केन्द्रों में ही समेटकर रखने और मॉल कल्चर में ढालने के प्रयास हो रहे थे। दुनिया में अपनी प्राचीन धरोहरों को सहेजने और प्राकृतिक सुन्दरता के स्थानों में अधोसंरचना के विकास के प्रयासों को सराहा जाता है। लेकिन छत्तीसगढ़ में ऐसा नहीं हो रहा था, इसलिए हमने पर्यटन विकास की संभावनाओं को बहुत बड़े फलक में आकार देने का प्रयास किया है। इस क्रम में जशपुर जिले के सरना-बालाछापर तथा कोइनार-कुनकुरी में, बिलासपुर जिले के कुरदर में, कोण्डागांव जिले के धनकुल में, कांकेर जिले के नथिया नवागांव में एथनिक रिसॉर्ट, सरगुजा जिले के महेशपुर में साइट एमेनिटी का विकास किया जा रहा है। सिरपुर को ऐतिहासिक बौद्ध पर्यटन स्थल के रूप में विश्व के मानचित्र में स्थान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। वाटर टूरिज्म तथा एडवंेचर टूरिज्म के लिए कोरबा जिले के सतरेंगा, धमतरी जिले के मेडम सिल्ली डेम जिसका नामकरण हमने बाबू छोटे लाल श्रीवास्तव के नाम पर किया है तथा रविशंकर डेम गंगरेल, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले के मलानिया जलाशय, कांकेर जिले के दुधावा जलाशय, महासमुन्द जिले के कोडार डेम, बिलासपुर जिले में संजय गांधी जलाशय खुंटाघाट-रतनपुर में अधोसंरचना का विकास किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि राम वनगमन पथ में आने वाले 75 स्थानों का चयन अधोसंरचना विकास के लिए किया गया है, जिसके प्रथम चरण में 9 स्थानों जैसे सीतामढ़ी हरचौका, रामगढ़, शिवरीनारायण, तुरतुरिया, चंदखुरी, राजिम, सिहावा सप्तऋषि आश्रम, जगदलपुर तथा रामाराम में समुचित अधोसंरचना के विकास का काम शुरू किया गया है। दामाखेड़ा में कबीर सागर के विकास का काम हाथ में लिया गया है। सूरजपुर की पहाड़ी में स्थित बागेश्वरी मंदिर और कुदरगढ़ में रोप वे सहित समुचित अधोसंरचना का विकास किया जा रहा है। रायपुर का बूढ़ातालाब एक ओर जहां आदिवासी समाज के पूज्य बूढ़ादेव की याद दिलाता है, वहीं स्वामी विवेकानंद के रायपुर प्रवास की स्मृति भी ताजा करता है। इस तरह हमने आम जनता के लिए किफायती और स्वस्थ मनोरंजन स्थलों के विकास को प्राथमिकता दी है, जो हमारे प्रदेश की सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक विशेषताओं से मेल खाते हैं। मुझे विश्वास है कि पर्यटन विकास को लेकर हमारी सोच का लाभ बड़े पैमाने पर मिलेगा, इससे स्थानीय विकास में बहुत गति मिलेगी तथा नए रोजगार के अवसर भी बनेंगे।
राज्य सरकार की अधोसंरचना विकास की नई सोच पर अपने विचार रखते हुए रायपुर के श्री नवीन अग्रवाल ने कहा कि ये सुनकर बहुत अच्छा लगता है कि बस्तर के दंतेवाड़ा जैसे सुदूर इलाके में सरकार के सहयोग से रेडीमेड कपड़ों की इंडस्ट्री खुली है और डेनेक्स ब्रांड लांच हुआ है। उन्होंने सड़क, बिजली और कनेक्टीविटी को लेकर मुख्यमंत्री का विजन जानना चाहा। कोरबा जिले की गेवरा की गीत तिवारी ने कहा कि छत्तीसगढ़ की ‘नवा चिन्हारी सस्ता बिजली जम्मो दुआरी’। आपने हम सबको देश में सबसे सस्ती बिजली, वह भी आधी कीमत पर उपलब्ध कराई है।
मुख्यमंत्री ने इन श्रोताओं जिज्ञासा के संबंध में कहा कि मुझे यह सुनकर अच्छा लगा कि दंतेवाड़ा के ब्रांड डेनेक्स की धमक राजधानी रायपुर में ठीक ढंग से सुनी गई। मैं आपकी बात से सहमत हूं कि छत्तीसगढ़ कंज्यूमर नहीं बल्कि उत्पादक राज्य है। आपको याद होगा कि मैंने बिजली के बारे में कहा था कि हमें सिर्फ उत्पादक राज्य नहीं बने रहना है, बल्कि उपभोक्ता राज्य भी बनना है। मैं नहीं चाहता कि हमारे राज्य के बहुमूल्य संसाधनों का उपयोग करके देश और दुनिया के दूसरे हिस्से के लोग तो समृद्ध और खुशहाल हो जाएं लेकिन छत्तीसगढ़ के लोग हमेशा संघर्ष ही करते रहें।
मेरा मानना है कि बांध बनें तोे नहर-नालियों का निर्माण उसके साथ जुड़ा होना चाहिए। बिजली का उत्पादन ठीक से हो तो उसे कारखानों, अस्पतालों, घरों, दफ्तरों, खेतों में पहुंचाने के लिए पूरा नेटवर्क बनें। सड़कों का नेटवर्क पुल-पुलियों के बिना अधूरा है। लोगों से जुड़े सरकारी काम-काज के लिए भवन बनंे तो वहां पहुंचने के लिए सड़कें भी चाहिए। अगर ऐसा नहीं होता तो निर्माण पर लगी मोटी रकम बरबाद हो जाती है। दुर्भाग्य से पिछले डेढ़-दो दशक में छत्तीसगढ़ को ऐसी ही परिस्थितियों से दो-चार होना पड़ा था। इसलिए हम चंद महंगी और सजावटी सड़कों-भवनों की बात नहीं करना चाहते। बल्कि नेटवर्क कम्पलीट करने के बारे में बात करते हैं। अधोसंरचना विकास को लेकर मेरी यही सीधी और स्पष्ट सोच है।
जवाहर सेतु योजना में बनाए जा रहे है 200 बड़े पुल-पुलिया
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने ‘जवाहर सेतु योजना’ लाई जो सड़कों को पुल-पुलियों से जोड़ने की योजना है। दो साल में हमने लगभग 200 बड़े पुल-पुलिया बनाने का काम हाथ में लिया और उसे पूरा कर रहे हैं।
‘मुख्यमंत्री सुगम सड़क योजना’: सरकारी दफ्तरों को जोड़ने बन रहीं 2200 सड़कें
मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि हमने ‘मुख्यमंत्री सुगम सड़क योजना’ लाई, जिसके तहत लगभग 2200 ऐसी सड़कें बना रहे हैं, जो सरकारी दफ्तरों को जोड़ती हैं। बिजली में भी हमने ऐसा ही किया। जहां किसी प्राकृतिक आपदा या दुर्घटना से ब्लैक आउट हो जाता था, उन अंचलों में बिजली के ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन का नेटवर्क पूरा किया, जिससे वहां दोहरी-तिहरी ओर से आपूर्ति की व्यवस्था हो जाए। बस्तर इसका एक बड़ा उदाहरण है। इसके साथ पूरे राज्य में बिजली उप केन्द्रों, पारेषण व वितरण लाइनों का जाल बिछा रहे हैं, जिसके कारण बसाहटों में विद्युतीकरण का नया कीर्तिमान बना है और बिजली बिल हाफ करने का वादा निभाना भी संभव हुआ है। उन्होंने कहा कि इस तरह हमने राज्य की अधोसंरचना को संतुलित और विस्तृत करने पर जोर दिया ताकि यह विश्वसनीय बने।
नई उद्योग नीति स्थानीय संसाधनों के वेल्यू एडीशन के आधार पर
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय संसाधनों के वेल्यू एडीशन के आधार पर ही हमने नई उद्योग नीति बनाई। प्रदेश में राजस्व प्रशासन को सरल बनाया। हमारी इस कार्यप्रणाली और विश्वसनीयता के कारण खनिज, कृषि- उपज, वनोपज जैसे अन्य संसाधनों के बारे में निवेशकों की समझ बढ़ी। यही वजह है कि जब दुनिया में आर्थिक तंगी का शोर था तब हमारे छत्तीसगढ़ के बाजारों में जोर था। हमारी जमीनी सोच और वास्तविकता के धरातल पर रहकर, सही कदम उठाने की नीतियों से ही छत्तीसगढ़ दुनिया का पसंदीदा निवेश स्थल बन रहा है। मुझे विश्वास है कि इसी रास्ते पर चलते हुए अनेक नए ब्रांड छत्तीसगढ़ की धरती से ही उपजेंगे। गांव-गांव में महिला स्व-सहायता समूह तथा प्रतिभावान युवाओं के नवाचार से एक नया रास्ता बनना शुरू हो चुका है।
लोकवाणी में बस्तर जिले के मनीष मूलचन्दानी ने बस्तर जैसे दूरस्थ अंचल में राज्य सरकार की पहल से वायुयान सेवा प्रारंभ होने को सुखद बताया। इसी तरह बस्तर के श्री रेणुकांत जोशी ने जगलदपुर के महारानी अस्पताल को सर्वसुविधायुक्त और निजी अस्पताल के जैसा बनाने के लिए मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया।
बस्तर से देश की सर्वाधिक वनोपज खरीदी
मुख्यमंत्री ने इस संबंध में कहा कि बस्तर से ऐसी खबरें सुनने के लिए बरसों से हमारे कान तरस रहे थे। मेरा मानना है कि नीति आयोग देश के 115 आकांक्षी जिलों की डेल्टा रैंकिंग में बीजापुर को पहला स्थान देता है। अलग-अलग मापदण्डों में जब कोण्डागांव, नारायणपुर, सुकमा जैसे जिले, देश में अव्वल आते हैं तो इसके पीछे किसी अधोसंरचना का योगदान होता है। जब लॉकडाउन के दौरान बस्तर से देश की सर्वाधिक वनोपज खरीदी होती है या पूरे प्रदेश में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का नया कीर्तिमान बनता है तो भी एक अधोसंरचना ही काम करती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने मानव विकास की जिस अधोसंरचना के निर्माण का सपना देखा है, उसकी हमारे प्रदेश के ग्रामीणों, अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति और पिछड़े वर्ग, कमजोर और मध्यम वर्ग, माताओं, बहनों, बच्चों, जवानों की आंखों में दिखने लगी है और इसी चमक के रास्ते से पूरा प्रदेश, एक नई तरह की जगमगाहट पैदा कर रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को भविष्य में उत्पादक राज्य भी बनना है और उपभोक्ता राज्य भी यही है हमारा ‘गढ़बो नवा छत्तीसगढ़।’

सेहत /शौर्यपथ /सर्दी के मौसम में मटर आसानी से और सस्ते मिलते हैं। इसके खाने के कई फायदे हैं। कई तरह की बीमारियों से बचाव के लिए मटर का सेवन करना बहुत आवश्यक है। इसमें पाया जाने वाला प्रोटीन उच्च गुणवत्ता का होता है। इनमें विटामिन K , विटामिन A , विटामिन C , तथा फोलेट प्रचुर मात्रा में होते हैं। खनिज के रूप में मटर में मैंगनीज ,फास्फोरस ,पोटेशियम ,आयरन , मैग्नीशियम , कॉपर , जिंक आदि पोषक तत्व भी होते हैं।

मटर के फायदे
-मटर में विटामिन के भरपूर मात्रा में होता है जिससे हड्डियां मजबूत होती है। यह ऑस्टियोपोरोसिस के खिलाफ प्रभावी ढंग से काम करती है।
-कुछ दिनों तक चेहरे पर मटर के आटे का उबटन मलते रहने से झांई और धब्बे समाप्त हो जाते हैं।
-मटर में मौजूद गुण वजन को नियंत्रित करते हैं। मटर में लो कैलोरी और लो फैट होता है। मटर में हाई फाइबर होता है जो वजन को बढ़ने से रोकता है।
-मटर शरीर में मौजूद आयरन, जिंक, मैगनीज और तांबा शरीर को बीमारियों से बचाता है। मटर में एंटीऑक्सीडेंट होता है। जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है ताकि शरीर बीमारियों से मुक्त रह सके।
-ताजा हरे मटर के दानों को पीसकर जले हुए स्थान पर लगाने से जलन बंद हो जाती है।
-मटर में ऐसे स्वादस्य् ज वर्धक गुण होते है जो शरीर में कोलेस्ट्रॉ ल बढ़ने नहीं देते। मटर में शरीर से ट्राइग्लिसराइड्स के स्त्र को कम करने का गुण होता है और इसके सेवन से ब्लड में कोलेस्ट्रॉ ल संतुलित होता है। शरीर से कई बीमारियां भी इसके खाने से कम होती है।
-पेट के कैंसर में मटर एक कारगर औषधि है। मटर में मौजूद कोलेस्ट्रोल कैंसर से लड़ने में मददगार होता है। साथ ही हरे मटर का प्रतिदिन सेवन करने से पेट के कैंसर का खतरा कम हो सकता है।
-मटर में एंटी-ऑक्सीडेंट, फ्लैवानॉइड्स, फाइटोन्यूटिंस, कैरोटिन पाए जाते हैं, जो शरीर को यंग और एनर्जी से भरपूर रखते हैं।
-मटर में मौजूद फॉलिक एसिड जो पेट में भ्रूण की समस्याओं को दूर करता है साथ ही गर्भवती महिला को पर्याप्त पोषण देता है। गर्भवती महिलाओं को अपने खाने में मटर को जरूर शामिल करना चाहिए।
-मटर के गुणों में एक गुण यह भी है कि इसके सेवन से हार्ट की बीमरियां कम होती है। इसमें एंटीइनफ्लैमेट्टरी कम्पाउंड होते है और एंटीऑक्सी डेंट भी भरपूर मात्रा में होता है। इन दोनों ही कम्पाटउंड के कॉम्बीैनेशन से दिल की बीमारियां होने का खतरा कम हो जाता है।

खाना खजाना /शौर्यपथ /आपने कई बार लोगों को यह कहते सुना होगा कि पुरुषों के दिल का रास्ता उनके पेट से होकर गुजरता है। अगर वैलेंटाइन के इस खास मौके पर आप भी अपने पार्टनर को स्नैक में कुछ टेस्टी खिलाने का मन बना बैठीं हैं तो ट्राई करें धनिया पुदीना चिकन टिक्का रेसिपी। यह एक स्वादिष्ट स्नैक रेसिपी है, जिसे आप हर वीकेंड ट्राई कर सकते हैं।
धनिया पुदीना चिकन टिक्का-
सामग्री
-चिकन- 250 ग्राम
-नींबू का रस- 2 चम्मच
-चाट मसाला- स्वादानुसार
-तेल- आवश्यकतानुसार
मैरीनेट करने के लिए-
-धनिया पत्ती- 5 टहनी
-पुदीना- 3 टहनी
-गाढ़ा दही- 2 चम्मच
-बारीक कटी मिर्च- 2
-कद्दूकस किया अदरक- 1/2 चम्मच
-लहसुन- 4 कली
-नमक- स्वादानुसार
विधि-
चिकन को अच्छी तरह से साफ करके धो लें। उसे छोटे टुकड़ों में काटकर कांटे की मदद से उसमें छेद करके रख लें। मैरीनेट करने के लिए मसाला बनाने के लिए ग्राइंडर में धनिया, पुदीना, दही, हरी मिर्च, अदरक, लहसुन और नमक डालकर बारीक पेस्ट तैयार कर लें। इसमें चिकन के टुकड़ों को डालकर मिलाएं और एक घंटे के लिए फ्रिज में रख दें।
अब एक ग्रिल पैन को गर्म करें। उसके ऊपर मैरीनेट किए हुए चिकन के टुकड़ों को डालें। चिकन को मुलायम व सुनहरा होने तक मध्यम आंच पर पकाएं। सर्विंग प्लेट में इस चिकन टिक्का को निकालें। चाट मसाला और नीबू का रस ऊपर से डालें और सर्व करें।

सेहत /शौर्यपथ /अनार असल में सुपरफूड है। इसमें मौजूद खास पोषक तत्‍व आपकी इम्‍युनिटी बूस्‍ट कर बदलते मौसम में आपको स्‍वस्‍थ बनाए रखते हैं। खासतौर से इस मौसम में आपको हर रोज अपनी डाइट में अनार को शामिल करना चाहिए। इसके रसीले दानों को आप जूस से लेकर फ्रूट चाट तक में बहुत आराम से इस्‍तेमाल कर सकती हैं। विभिन्‍न शोध भी इस बात का समर्थन करते हैं, बदलते मौसम में होने वाली कई समस्‍याओं का मुकाबला करने में अनार आपकी मदद कर सकता है।
आइए जानते हैं कि इस मौसम में आपको अपनी डाइट में क्‍यों शामिल करना चाहिए अनार
1. यह वायरस और मौसमी फ्लू को दूर रख सकता है
अनार के रस, बीज और यहां तक कि उनके छिलके भी आपके शरीर को रोगजनकों से बचा सकते हैं। अनार का रस विशेष रूप से संक्रमित खाद्य पदार्थों से वायरस के आकर्षण के खिलाफ आपकी रक्षा करता है। साथ ही यह ओरल कैविटी से भी आपका बचाव करता है।
अनार का अर्क विटामिन-सी का एक बड़ा स्रोत है, जो कि आम फ्लू के खिलाफ बेहतरीन सुरक्षा प्रदान करता है।
2. हाई बीपी को कम कर सकता है
अनार के एंटीऑक्सीडेंट गुण हाई ब्लड प्रेशर को सफलतापूर्वक कम करने के लिए पाए गए हैं। एक अध्ययन से पता चला है कि जो लोग इस समस्या से पीड़ित हैं उन्हें परिणाम देखने के लिए प्रति दिन कम से कम 240 मिलीलीटर अनार के रस का उपभोग करना होगा। इसके अलावा, उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि अनार का रस 100% प्राकृतिक है, जिसमें किसी भी प्रकार की शुगर नहीं है।
एक और तरीका है कि अनार पोटैशियम के माध्याम से ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मदद करता है। 100 ग्राम अनार में 236 ग्राम पोटैशियम होता है, जो हमारी हड्डियों के स्वास्थ्य और हमारे दिल के कामकाज को बनाए रखने में मदद करता है।
3. यह पाचन में सुधार कर सकता है
जो लोग क्रोहन की बीमारी से जूझते हैं, वे पेट की समस्याओं से अच्छी तरह परिचित हैं। यह अन्‍य कई समस्‍याओं के साथ ही भूख में कमी और वजन में कमी के लिए भी जिम्‍मेदार हो सकती है।
इसका कारण पेट के भीतर बैक्टीरिया का जमाव है, जो गंभीर सूजन का कारण बनते हैं। एक उपाय जो कई अध्ययनों से उपयोगी पाया गया है वह है अनार का सेवन। अनार का अर्क उन बैक्टीरिया के खिलाफ एक अच्छे रक्षक और हमलावर के रूप में कार्य करता है जो कि सभी दर्द का कारण बनते हैं।
4. याददाश्त मजबूत कर सकता है
यह डॉ. हार्टमैन के अध्ययन का निष्कर्ष था, जिसमें उन्होंने उन रोगियों को अनार की गोलियां दी थीं, जो हृदय की सर्जरी से गुजरने वाले थे। जिसमें पहली गोली सर्जरी से एक सप्ताह पहले और दूसरी 6 सप्ताह बाद दी गई थी। रोगियों ने कहा कि उनकी याददाश्त 100% बरकरार थी और पहले से बेहतर भी थी। वहीं दूसरी ओर, जिन रोगियों को गोलियां नहीं मिलीं, उन्हें सर्जरी के बाद अपेक्षित स्मृति हानि हुई।
डॉ. हार्टमैन और भी आगे बढ़ गए, उन्होंने कहा कि उनके पास कुछ सबूत हैं कि अनार की गोलियां मस्तिष्क में अधिक न्यूरॉन्स बनाने में मदद करती हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि आपको अल्जाइमर का इलाज मिल गया है। इसका सीधा सा मतलब है कि कम उम्र में अनार का सेवन करने से आश्चर्यजनक फायदे हो सकते हैं।
5. डायबिटीज के प्रभाव को संतुलित कर सकता है
डायबिटीज से संबंधित हाई ब्लड शुगर लेवल को, दिन में सिर्फ एक अनार खाने से नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। ये फल ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम कर सकता है, जो डायबिटीज का मुख्य कारण है।
वे कई प्रकार के खराब कोलेस्ट्रॉल को भी कम करते हैं, जो आपके ब्लड शुगर लेवल को अपेक्षाकृत कम रखने में मदद करता है। हालांकि, मधुमेह के रोगियों को अनार के अपने दैनिक सेवन को लेकर बहुत सावधान रहना चाहिए। चूंकि इसमें चीनी होती है, ऐसी चीज़ों का सेवन बहुत कम मात्रा में करना चाहिए।

शिक्षा /शौर्यपथ /आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र में जीवन से जुड़े कई पहलुओं का जिक्र किया है। जिसमें धन, तरक्की, बिजनेस, नौकरी और वैवाहिक जीवन आदि शामिल हैं। चाणक्य कहते हैं कि व्यक्ति को सफलता हासिल करने के लिए कुछ चीजों से दूर रहना चाहिए। आचार्य का मानना है कि जो व्यक्ति दूसरों की मदद और समय पर काम को पूरा करता है। वह हमेशा समाज में मान-सम्मान पाता है।
चाणक्य कहते हैं कि धोखा देने वाले व्यक्ति को सम्मान हासिल नहीं होता है। ऐसे व्यक्ति से लोग दूरी बनाकर रखते हैं। इसलिए जीवन में सफलता हासिल करने के लिए धोखा देने की प्रवृत्ति रखने वाले व्यक्ति से हमेशा दूर रहना चाहिए। जानिए किन कामों को करने से नहीं मिलता है सम्मान-
1. धोखा देने वाला व्यक्ति नहीं होता है किसी का मित्र- चाणक्य कहते हैं कि धोखा देने वाला व्यक्ति किसी का प्रिय या मित्र नहीं होता है। अपने स्वार्थ के लिए दूसरों को धोखा देने वाले व्यक्ति को समाज में सम्मान नहीं मिलता है। एक समय आने पर इनका कोई भी मित्र नहीं रह जाता है।
2. धोखा देने वाले व्यक्ति का भरोसा नहीं होता- चाणक्य कहते हैं कि जो व्यक्ति दूसरों को धोखा देते हैं, उनका कोई विश्वास नहीं करता है। धोखा देकर सफलता हासिल करने वालों की सफलता अस्थाई होती है। इस स्थिति में व्यक्ति को शर्मिंदा भी होना पड़ता है।
3. लालच के लिए किसी को धोखा- चाणक्य कहते हैं कि व्यक्ति को लालच के लिए किसी को धोखा नहीं देना चाहिए। लोभ के लिए धोखा देने वाले व्यक्ति समाज में सम्मान नहीं पाते हैं। ऐसे लोगों का आत्मविश्वास कम होता है।

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