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खाना खजाना /शौर्यपथ / आपने ‘एग करी’ को कई बार खाई होगी लेकिन क्या आपने हैदराबादी अंडा सालन डिश ट्राई की है? अगर नहीं की, तो देर किस बात की। यह रही आसान रेसिपी-
सामग्री :
4 अंडे उबले और छिले हुए
2 टमाटर ब्लेंड किए हुए
2 उबले प्याज का पेस्ट
1 छोटा चम्मच अदरक लहसुन का पेस्ट,
1/2 चम्मच गरम मसाला
2 छोटी इलाएची
2 लौंग
1 टुकड़ा दालचीनी
1 तेजपत्ता
एक चम्मच लाल मिर्च पाउडर
1 छोटा चम्मच हल्दी पाउडर, 1 छोटा चम्मच जीरा पाउडर
आवयश्यकता अनुसार नमक और तेल।
विधि :
कड़ाही में तेल गर्म करें। उबले अंडों को फ्राई करके निकाल लें। बचे हुए तेल में तेजपत्ता और उबले प्याज का पेस्ट भून लें। इसमें हल्दी, जीरा, लाल मिर्च और नमक मिलाकर भून लें।
टमाटर को मैश करके मिला लें। इसके बाद इसमें अदरक लहसुन का पेस्ट मिला लें। इसके बाद मसाले को मध्यम आंच पर भूनें, जब तक कि वह तेल ना छोड़ने लगे। ग्रेवी के लिए 1 कप पानी गरम करके डालें।
तले हुए अंडे डालें और कुछ देर मध्यम आंच पर ग्रेवी में अंडे पकने दें। इसके बाद इलाएची, लौंग, दालचीनी को पीसकर पाउडर बना लें और सालन में डाल दें।
शौर्यपथ / प्रसाद में मिश्री का एक खास महत्व होता है, वहीं मीठे पकवानों में भी अधिकतर लोग शकर की जगह मिश्री का इस्तेमाल करना बेहतर समझते हैं। मिश्री जहां मुंह में मिठास को बढ़ाती है, वहीं मिठास से भरपूर मिश्री में कई औषधीय गुण भी होते हैं। क्या आप जानते हैं इसके बेहतरीन सेहतमंद गुणों के बारे में? यदि नहीं तो यह लेख आपके लिए है।
अधिक वजन यदि आपको परेशान कर रहा है, तो मिश्री का उपयोग आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। मिश्री को सौंफ के साथ बराबर मात्रा में पीसकर तैयार पावडर को तैयार कर लें। अब इस पावडर का नियमित इस्तेमाल करें। इससे वजन बढ़ने जैसी समस्या से छुटकारा मिल सकता है।
यदि पाचन प्रक्रिया संबंधी समस्या से परेशान हैं तो मिश्री का उपयोग आपको इस समस्या से निजात दिला सकता है। खाना खाने के बाद मिश्री और सौंफ के सेवन से खाना हजम होने में सहायता मिलती है और पाचन प्रक्रिया सही रहती है।
मिश्री मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद मानी जाती है। यह तनाव को दूर करने का काम करती है, साथ ही याददाश्त को सुधारने में सहायक साबित होती है। इसका सेवन आप गर्म दूध के साथ कर सकते हैं।
मिश्री के नियमित सेवन से आंखों की रोशनी में सुधार होता है। इसका यदि खाने के बाद सेवन किया जाए तो यह आंखों की रोशनी को बेहतर करती है।
गले की खराश से परेशान हैं तो आपको मिश्री का सेवन करना चाहिए। यह गले में होने वाली खराश से राहत दिलाती है।
मुंह से दुर्गंध की समस्या से परेशान हैं, तो रोज खाना खाने के बाद सौंफ और मिश्री का सेवन करें। ऐसा करने से मुंह से आ रही दुर्गंध खत्म हो जाती है।
भगवान श्रीकृष्ण का प्रिय भोग है माखन मिश्री। यह स्वाद में जितना मधुर लगता है, उतने ही मीठे हैं इसके सेहत से जुड़े फायदे भी। आप नहीं जानते होंगे, अवश्य पढ़ें...
* माखन मिश्री का सेवन करना मस्तिष्क के लिए भी बेहद फायदेमंद होता है। बच्चों को नियमित रूप से अगर माखन मिश्री खिलाया जाए, तो यह उनके मस्तिष्क और शरीर के विकास के लिए बेहद फायदेमंद होता है।
* माखन-मिश्री को मिलाकर प्रतिदिन अगर नाश्ते में खाया जाए, तो सिरदर्द और जोड़ों में दर्द की समस्या से छुटकारा मिल सकता है। इससे जोड़ों में खाई हुई नमी और चिकनाई मिल सकेगी और रूखापन धीरे-धीरे कम होगा।
* आंखों की कमजोरी दूर करने के लिए भी यह तरीका बेहद कारगर है।
* इसके अलावा मुंह में छाले हो जाने पर माखन मिश्री का सेवन लाभदायक साबित होता है।
* त्वचा को चिकना और चमकदार बनाना चाहते हैं, तो मिश्री का बूरा और मक्खन मिलाकर त्वचा पर मसाज करें। यह मसाज और स्क्रब दोनों का काम करेगा और त्वचा को प्राकृतिक रूप से चिकना, चमकदार और मुलायम बनाएगा।
* बवासीर जैसी बीमारी से परेशान हैं, तो न घबराएं, माखन मिश्री का नियमित रूप से सेवन करके कुछ ही दिनों में आप बवासीर की समस्या से निजात पा सकेंगे।
टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ /तेजपत्ते का इस्तेमाल केवल खाने में डालने तक ही सीमित नही हैं। कई लोगों को ये जानकर हैरानी हो सकती है कि तेजपत्ते के इस्तेमाल से आप अपनी त्वचा व बालों को भी फायदा पहुंचा सकते हैं। आइए, जानते हैं कि किस तरह से आप तेजपत्ते को अपनी सुंदरता बढ़ाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं -
1. चेहरे पर दाग, धब्बे या मुहांसे होने पर तेजपत्ता काफी लाभदायक होता है। तेजपत्ते का लेप या फिर तेजपत्ता डालकर उबाले गए पानी से चेहरा धोना, चेहरे को साफ और बेदाग बनाए रखने में मदद करता है।
2. तेजपत्ते का पानी सूर्य की किरणों से प्रभावित त्वचा को भी ठीक करने में मदद करता है, और त्वचा की रंगत को समान बनाए रखने में मदद करता है।
3. बालों को नर्म, मुलायम और चमकदार बनाए रखने के लिए तेजपत्ते का उपयोग बेहद असरकारक होता है। आप चाहें तो इसे तेल में डालकर उस तेल को बालों की जड़ों में लगा सकते हैं, या फिर इसके पानी से बालों को धो सकते हैं।
4. तेजपत्ते का लेप बनाकर बालों में लगाने से रूसी की समस्या से निजात मिल सकती है। इसे लेप को दही में मिलाकर भी लगाया जा सकता है, ताकि सिर की त्वचा में नमी बनी रहे और पोषण भी मिले।
5. तेजपत्ते को सुखाकर उसके पाउडर को मंजन की तरह इस्तेमाल करना, दांतों की सफेदी और चमक बरकरार रखने में कारगर है। आप चाहें तो इसे सप्ताह में एक दिन आजमा सकते हैं।
टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ /खूबसूरत लहराते काल बाल किसे नहीं चाहिए, लेकिन ऐसा होता कहां है.. प्रदूषण और पोषण के अभाव में बाल पतले होते जाते हैं, झड़ने लगते हैं और यह समस्या बदलते मौसम में बढ़ जाती है। आइए जानें कुछ खास बातें बालों के लिए...
त्वचा की तरह बालों को भी पोषक तत्वों की ज़रूरत होती है और सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है ऑयल मसाज की। अतः सप्ताह में एक दिन Oil massage के लिए वक़्त निकालें।
ऑयल मसाज़ से बालों को जड़ से मज़बूती मिलती है और बाल तेज़ी से बढ़ते हैं।
नियमित रूप से तेल लगाने से बाल सिल्की सॉफ्ट बनते हैं।
ऑयल मसाज से सुकून का एहसास होता है, साथ ही ये स्ट्रेस भी दूर कर देता है।
बालों की लंबाई को देखते हुए एक कटोरी में कोकोनट ऑयल यानी नारियल का तेल लें। फिर इसमें कुछ कड़ीपत्ता डालकर हल्का गरम करें। अब इसे बालों में लगाएं और धीरे-धीरे स्कैल्प की मालिश करें।
1/2 कप ऑलिव ऑयल में एक संतरे का जूस मिलाएं। मिश्रण को हल्का गरम करें और हल्के हाथों से स्कैल्प का मसाज़ करते हुए बालों में लगाएं। 15-20 मिनट बाद कुनकुने पानी से बाल धो लें।
बालों के लिए बेबी ऑयल भी फ़ायदेमंद है। इसके लिए 1 अंडे के पीले भाग को अच्छी तरह फेंटें। जब झाग बनने लगे तो इसमें 1 टी स्पून बेबी ऑयल डालकर कुछ देर और फेंटें। अब इस मिश्रण में थोड़ा-सा पानी मिलाकर स्कैल्प का मसाज़ करते हुए बालों में लगाएं। 20 मिनट बाद बाल धो लें।
अगर आपके बाल रूखे और बेजान हो गए हैं, तो आल्मंड और जोजोबा ऑयल हेयर पैक लगाएं।
नॉर्मल हेयर के लिए आप सैंडल हेयर पैक लगा सकती हैं।
बाल धोने से 2-3 घंटे पहले बालों में मेहंदी लगाएं। मेहंदी से बाल सॉफ्ट, स्ट्रॉन्ग और घने नज़र आते हैं।
शैम्पू के बाद बालों में मुल्तानी मिट्टी का लेप लगाएं और 1 घंटे बाद बाल धो लें। ये एक बेहतरीन कंडीशनर है।
बालों को शैम्पू करते वक़्त निम्न बातों को ध्यान में रखें:
आपके बाल अगर ऑयली हैं, तो रोज़ाना या एक दिन छोड़कर अगले दिन शैम्पू करें।
नॉर्मल बालों को सप्ताह में कम से कम तीन बार शैम्पू किया जा सकता है।
कर्ली यानी घुंघराले बाल सूखे और सख़्त होते हैं, इनके लिए सप्ताह में एक से दो बार ड्राई हेयर शैम्पू यूज़ करना चाहिए।
बालों में उंगली के पोरों से शैम्पू लगाएं। इससे बालों की गंदगी दूर होती है और स्कैल्प अच्छी तरह साफ़ हो जाता है।
शैम्पू के बाद बालों में कंडीशनर ज़रूर लगाएं, ख़ासकर तब जब आपके बाल ज़्यादा रूखे हों। आपके बाल यदि ऑयली हैं, तो रोज़ाना कंडीशनर के इस्तेमाल से बचें और यदि नॉर्मल हैं, तो रोज़ या एक दिन छोड़कर भी यूज़ कर सकती हैं।
हेयर सिरम
शैम्पू और कंडीशनर के बाद बालों में चमक लाने के लिए हेयर सिरम यूज़ करें। नॉर्मल हेयर की बजाय ये ड्राई और कर्ली हेयर के लिए ज़्यादा उपयुक्त होता है। इससे बाल भी कम टूटते हैं।
धर्म संसार /शौर्यपथ /गंगा नदी की महिमा का वर्णन पुराणों में मिलता है। गंगा नदी को भारत की सबसे पवित्र नदी माना जाता है। इसकी पवित्रता तब और बढ़ जाती है जबकि कुंभ पर्व आता है। पुराणों में गंगा को
तीन स्थानों पर उसे दुर्लभ कहा गया है। दुर्लभ का अर्थ है कि तीन तीर्थों में गंगा बड़े भाग्य से मिलती है। ये तीन स्थान हैं, हरिद्वार, प्रयाग और गंगा सागर।
पुराणों के अनुसार तीर्थराज प्रयाग में सभी तीर्थ निवास करते हैं। खासतौर से माघ महीने में उन्हें अपने राजा के पास आना पड़ता है। गोस्वामी तुलसीदास ने लिखा है-
देव, दनुज, किन्नर नर श्रेनी।
सादर मज्जहिं सकल त्रिवेणी॥
त्रिवेणी के पवित्र जल में स्नान करके देवता भी धन्य हो जाते हैं। अर्धकुंभ और कुंभ योग की पुण्यगरिमा ऐसी है, जिससे प्रभावित होकर सभी देवताओं को तीर्थराज प्रयाग में आना पड़ता है। गोस्वामी तुलसीदास ने लिखा है-
माघ मकरगति जब रवि होई।
तीरथपतिहिं आव सब कोई॥
यह अंतरसम्बन्ध बहुदेववादी हिन्दू तीर्थों का संस्कृति में एकता का परिचायक है। विविधता में एकता का यह अनूठा सांस्कृतिक उदाहरण है।
गौतमी गंगा : इन तीन तीर्थों का अंतरसंबन्ध गंगा की पुण्यगरिमा से प्रमाणित होता है। त्र्यंबकेश्वर तीर्थ (नासिक) कुंभ पर्व का केन्द्र है। यह गोदावरी के तट पर स्थित है। पवित्र गोदावरी का दूसरा नाम गौतमी गंगा है। पुराण के अनुसार, महर्षि गौतम ने सूखे से पीड़ित प्राणियों की जीवन रक्षा के लिए कठोर तप किया था। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने प्रकट होकर उनसे वरदान मांगने को कहा।
सभी प्राणियों के कष्ट दूर करने को आतुर ऋषि ने यह वरदान मांगा कि गंगा, स्वयं उनके तपोवन में आए। वे अपनी धारा से इस क्षेत्र के सभी प्राणियों को धन-धान्य और सुख-सम्पदा का वरदान दें। गौतम ऋषि की तपस्या से प्रसन्न होकर गंगा को उस क्षेत्र में प्रकट होना पड़ा, इसीलिए उन्हें गौतमी गंगा नाम दिया गया।
माघ पूर्णिमा के दिन करें ये 3 कार्य, मिट जाएंगे सभी संकट
माघ माह में हरिद्वार कुंभ मेला चल रहा है। हिन्दू पंचांग के चंद्रमास के अनुसार वर्ष का ग्यारहवां महीना है माघ। पुराणों में माघ मास के महात्म्य का वर्णन मिलता है। पुराणों के अनुसार माघ माह में पूर्णिमा के दिन निम्नलिखित 5 कार्य करने से आपके जीवन के सभी तरह के संकट मिट जाते हैं और हर तरह का सुख मिलता है।
1. स्नान : माघ मास या माघ पूर्णिमा को संगम में स्नान का बहुत महत्व है। संगम नहीं तो गंगा, गोदावरी, कावेरी, नर्मदा, कृष्णा, क्षिप्रा, सिंधु, सरस्वती, ब्रह्मपुत्र आदि पवित्र नदियों में स्नान करना चाहिए।
प्रयागे माघमासे तुत्र्यहं स्नानस्य यद्रवेत्।
दशाश्वमेघसहस्त्रेण तत्फलं लभते भुवि।।
प्रयाग में माघ मास के अन्दर तीन बार स्नान करने से जो फल होता है वह फल पृथ्वी में दस हजार अश्वमेघ यज्ञ करने से भी प्राप्त नहीं होता है।
2. दान : माघ मास में दान करने का बहुत महत्व है। वेदों में तीन प्रकार के दान हैं- 1. उक्तम, 2.मध्यम और 3.निकृष्ट। धर्म की उन्नति रूप सत्यविद्या के लिए जो देता है वह उत्तम। कीर्ति या स्वार्थ के लिए जो देता है तो वह मध्यम और जो वेश्यागमनादि, भांड, भाटे, पंडे को देता वह निकृष्ट माना गया है। पुराणों में अनोकों दानों का उल्लेख मिलता है जिसमें अन्नदान, विद्यादान, अभयदान और धनदान को ही श्रेष्ठ माना गया है, यही पुण्य भी है।
दान से इंद्रिय भोगों के प्रति आसक्ति छूटती है। मन की ग्रथियां खुलती है जिससे मृत्युकाल में लाभ मिलता है। मृत्यु आए इससे पूर्व सारी गांठे खोलना जरूरी है, जो जीवन की आपाधापी के चलते बंध गई है। दान सबसे सरल और उत्तम उपाय है। वेद और पुराणों में दान के महत्व का वर्णन किया गया है।
3. सत्संग : माघ माह में मंदिरों, आश्रमों, नदी के तट पर सत्संग, प्रवचन के साथ माघ महात्म्य तथा पुराण कथाओं का आयोजन होता है। आचार्य विद्वानों द्वारा धर्माचरण की शिक्षा देने वाले प्रसंगों को श्रोताओं के समक्ष रखा जा रहा है। कथा प्रसंगों के माध्यम से तन-मन की स्वस्थता बनाए रखने के लिए अनेक प्रसंग सुना जाता हैं। सत्संग से धर्म का ज्ञान प्राप्त होता है। धर्म के ज्ञान से जीवन की बाधओं से मुकाबला करने का समाधान मिलता है।
शौर्यपथ / कहते हैं कि बीमारियां किसी से पूछकर नहीं आती लेकिन बीमारियां अपनी जकड़ में लेने से पहले कुछ बड़े संकेत जरूर देती है। ऐसे में समय रहते संकेतों को पहचानकर बीमारियों से छुटकारा पाया जा सकता है। कैंसर भी ऐसी ही बीमारी है जिसकी शुरुआत में पहचान करके इससे छुटकारा पाया जा सकता है। 4 फरवरी को दुनिया भर में वर्ल्ड कैंसर डे मनाया जाता है। इस वर्ष के अभियान की थीम 'आई एम एंड आई विल' है। यानि मैं हूं और मैं रहूंगा रखी गई है। थीम यह प्रचारित करती है कि किसी व्यक्ति के कार्य कैसे प्रभावी हो सकते हैं। आज हम आपको कैंसर के कुछ ऐसे बड़े लक्षण बताने जा रहे हैं, जिन्हें समय रहते पहचान लेना चाहिए-
अत्यधिक थकान
शरीर में अत्यधिक थकान का बने रहना, ब्लड प्लेटलेट्स या लाल रक्त कोशिकाओं में गड़बड़ी का कारण हो सकता है, जिससे ल्यूकेमिया का खतरा बना रहता है। ऐसा होने पर अनदेखा न करें।
बेवजह वजन घटना
बगैर किसी कारण अचानक वजन कम होने पर, इसे अनदेखा न करें। यह कोलोन कैंसर की चेतावनी हो सकती है। यही नहीं य ह पाचन तंत्र के कैंसर के लिए भी जिम्मेदार हो सकता है। इसके अलावा बेवजह वजन घटना, लीवर कैंसर के लक्षण भी हो सकते हैं, जो आपकी भूख को प्रभावित करने के साथ ही, शरीर की अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने के क्षमता पर भी असर डालता है।
कमजोरी
सामान्य कमजोरी और थकान का बना रहना कई प्रकार के कैंसर के लक्षणों में शामिल है। साथ ही बिना कारण थकान महसूस होने पर यदि भरपूर नींद ओर आराम के बाद भी वह ठीक न हो, तो इसे अनदेखा बिल्कुल न करें। डॉक्टर को जरूर दिखाएं।
फोड़ा या गांठ
शरीर के किसी भाग में कोई फोड़ा, गांठ या फिर कोई त्वचा के कई सारी परतें, जो एक ही जगह पर इकट्ठा हुई हों, यदि इलाज के बावजूद ठीक नहीं हो पा रही हो, तो इसे गंभीरता से लें। यह त्वचा का कैंसर भी हो सकता है। जो कई तरह का हो सकता है।
कफ और सीने में दर्द
लंबे समय तक कफ का बना रहना और सीने में दर्द होना, ल्यूकेमिया के साथ ही कई प्रकार के कैंसर का खतरा पैदा करता है।यह लंग ट्यूमर या ब्रांकाईटिस के लक्षण भी हो सकते हैं। लंग कैंसर के कारण सीने में होने वाला दर्द कंधे और बांहों में भी बना रहता है।
कूल्हे या पेट में दर्द
कूल्हे या पेट के निचले भाग में होने वाला दर्द भी किसी प्रकार से सामान्य नहीं है। पेट में दर्द होने पर कुछ ही देर में सूजन आ जाना, ऐंठन होना, गर्भाशय का कैंसर हो सकता है। इसके अलावा ल्यूकेमिया में भी प्लीहा के बढ़ जाने के कारण पेट में दर्द हो सकता है।
निप्पल में बदलाव
निप्पल के आकार में अचानक बदलाव आना ब्रेस्ट कैंसर का कारण हो सकता है। जिसमें निप्पल का सपाट होना या नीचे की तरफ या बगल में मुड़ जाना शामिल हैं। ऐसा होने की स्थिाति में तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
पीरियड्स में तकलीफ
माहवारी में अत्यधिक दर्द होना, और असमय खून का स्त्राव होना, वैजाइनल कैंसर का लक्षण हो सकता है। ऐसे में डॉक्टर की सलाह से ट्रांसवैजाइनल अल्ट्रासाउंड अवश्य करवाएं।
सेहत /शौर्यपथ /सहजन बेशक आपकी टॉप सब्जियों की लिस्ट में जगह नहीं बना पाए लेकिन गुणों के मामले में सहजन किसी से कम नहीं है. सहजन यानी ड्रमस्टिक का इस्तेमाल सांबर में सबसे ज्यादा किया जाता है. 2008 में इसे 'प्लांट ऑफ दी ईयरÓ भी कहा गया था। कुछ जगहों पर इसे मुगना, , सुजना या सेंजन भी कहते हैं। आपको किसी न किसी रूप में सहजन का सेवन जरूर करना चाहिए. आइए, जानते हैं सहजन के फायदे-
सहजन के फायदे
हमारे शरीर के लिए अच्छी है बल्कि इसका पेड़ पर्यावरण के लिए भी बहुत अच्छा होता है।
ये हमारे शरीर के पोषण की कई जरुरतों को पूरा करता है और कई बीमारियों के इलाज में भी कारगर है।
इसके एक नहीं अनेक फायदे हैं जैसे ये कैंसर, डायबिटीज, एनीमिया, गठिया, एलर्जी, अस्थमा, पेट दर्द या पेट की दूसरी परेशानियां, कब्ज, सिरदर्द, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, पथरी, थाइरॉयड, किसी अन्य तरह का इंफेक्शन या शरीर के किसी हिस्से में आई सूजन को दूर करने में ये बहुत कारगर है।
इसके साथ ही अगर आप बढ़ते वजन से परेशान है, तो अपने आहार में ड्रमस्टिक्स को शामिल करें, मोटापे की परेशानी दूर होगी।
इसमें केले से कई गुना ज्यादा पोटेशियम, गाजर से कई गुना ज्यादा विटामिन ए, दूध से ज्यादा कैल्शियम और दही से दोगुना प्रोटीन होता है।
विटामिन ए, बी, सी और बी-कॉम्प्लेक्स के साथ ही एंटी-ऑक्सीडेंट, प्रोटीन और कैल्शियम प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
दांतों के कीड़े, पथरी की समस्या, ब्लड प्रेशर, मुंहासे, मोटापा आदि समस्याओं के समाधान के लिए सहजन का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए ।
शौर्यपथ / बहुत कम लोगों को पता होगा कि तेजपत्ता केवल एक मसाला या खुशबू बढ़ाने वाला पत्ता ही नहीं, ये औषधीय गुणों का भंडार है। जैतूनी रंग के इस पत्ते में भरपूर मात्रा में एंटी ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। यही वजह है कि इसका तेल कई सौंदर्य उत्पादों और औषधियों में भी इस्तेमाल किया जाता है।
आपकी मम्मी की मसालेदानी में कुछ ऐसे मसाले भी हैं, जिनका आपने सिर्फ नाम सुना है। ऐसा ही एक मसाला है तेज पत्ता। संवभवत: पुलाव की प्लेट में से आप सबसे पहले तेज पत्ता ही अलग करती होंगी। पर इसके गुण जानने के बाद आप भी इसे अपने स्पाइस बॉक्स में जगह देंगी।
क्या है तेज पत्ता
यह जैतूनी रंग का सूखा हुआ पत्ता होता है। इसकी गंध लौंग और दालचीनी का सम्मिलित रूप लिये होती है। यह पाचन में सहायक, मस्तिष्क को तेज करने वाला अमाशय के लिए स्वास्थ्यवर्धक होता है।
यहां जानिए तेज पत्ता के औषधीय लाभ
नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी के मुताबिक तेज पत्ते में कई औषधीय गुण पाए जाते हैं। तेज पत्ता एंटीऑक्सिडेंट और कुछ खनिज यौगिकों से भरपूर होता हैं। यह भोजन के स्वाद को बढ़ाता है और इसकी चाय का उपयोग पेट के दर्द, फेफड़ों, बलगम और गले में खराश को दूर करने के लिए किया जाता है।
तेज पत्तियों का उपयोग गठिया और तंत्रिकाशूल के उपचार के लिए किया जाता है। सिरदर्द का इलाज करने के लिए, इस दर्द से राहत पाने के लिए इसकी पत्तियों को नथुने में या सिर के नीचे लगाया जा सकता है।
परंपरागत रूप से, यह गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं जैसे बिगड़ा पाचन, पेट फूलना, पेट की सूजन के लिए उपयोग किया जाता है और मूत्रवर्धक के रूप में भी इसका उपयोग किया जाता है।
यहां जानिए तेज पत्ता के कुछ और फायदे
1. मुंह की बदबू को दूर करता है
तेज पत्ता मुंह के बैक्टीरिया को ख़त्म करता है। जिससे श्वास में बदबू की समस्या नहीं होती। रोज़ सुबह इस पत्ते को पानी में उबालकर पीने से ऐसी समस्याएं दूर हो जाती हैं। तेज पत्ते में मौजूद मिनरल्स मसूड़ों को मज़बूत बनाते हैं। यह दांतों के लिए भी फायदेमंद होता है।
2. फंगल इन्फेक्शन से बचाता है
तेज पत्ता एंटीफंगल गुणों से समृद्ध होता है। यह विशेष रूप से यीस्ट संक्रमण को रोकने का काम कर सकता है। इसलिए त्वचा संबंधी फंगल संक्रमण के लिए तेज पत्ते से बना एसेंशियल ऑयल इस्तेमाल किया जा सकता है।
3. किडनी की समस्याओं से लड़ता है
पेशाब की नली और किडनी में मौजूद पथरी के इलाज में तेज पत्ते के अर्क का इस्तेमाल किया जाता है। तेज पत्ते को कुछ देर पानी में उबाल लें और फिर इसे ठंडा करके रोज़ सुबह खाली पेट पीने से किडनी सुचारू रूप से काम करती है।
4. वज़न कम करता है तेज़ पत्ता
तेज पत्ता उन जड़ी-बूटियों में से एक है जो भूख को नियंत्रित कर सकता हैं और इसका सेवन करने से पाचन तंत्र दुरुस्त रहता है। इसका सेवन करने से आपका कैलोरी काउंट कम हो जाता है, जिससे आप जल्दी वज़न घटा पाती हैं।
5. पेट की समस्याओं से निजात दिलाता है
चाय में तेज पत्ता डालकर पीने से कब्ज़ और एसिडिटी की समस्या दूर हो जाती है। इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट चयापचय क्रियाओं को सुधारते हैं। यह गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं से भी लड़ने में मददगार है।
6. त्वचा के लिए लाभदायक
तेज पत्ता त्वचा के लिए बहुत फायदेमंद है। इसलिए, इसके एसेंशियल ऑयल को क्रीम, इत्र और साबुन बनाने में इस्तेमाल किया जाता है। यह त्वचा को गहराई से साफ करता है, क्योंकि इसमें एस्ट्रीजेंट मौजूद होते हैं। तेज पत्ते का इस्तेमाल स्किन रैशेज को दूर करने में भी किया जाता है।
धर्म संसार /शौर्यपथ / सभी हिन्दू शास्त्रों में लिखा है कि मंत्रों का मंत्र महामंत्र है गायत्री मंत्र। यह प्रथम इसलिए कि विश्व की प्रथम पुस्तक ऋग्वेद की शुरुआत ही इस मंत्र से होती है। कहते हैं कि ब्रह्मा ने चार वेदों की रचना के पूर्व 24 अक्षरों के गायत्री मंत्र की रचना की थी। आओ जानते हैं इस मंत्र के तीन अर्थ।
यह मंत्र इस प्रकार है:- ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।
पहला अर्थ :- पृथ्वीलोक, भुवर्लोक और स्वर्लोक में व्याप्त उस सृष्टिकर्ता प्रकाशमान परमात्मा के तेज का हम ध्यान करते हैं, वह परमात्मा का तेज हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर चलने के लिए प्रेरित करे।
दूसरा अर्थ :- उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा को हम अंत:करण में धारण करें। वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग में प्रेरित करे।
तीसरा अर्थ :- ॐ : सर्वरक्षक परमात्मा, भू : प्राणों से प्यारा, भुव : दुख विनाशक, स्व : सुखस्वरूप है, तत् : उस, सवितु : उत्पादक, प्रकाशक, प्रेरक, वरेण्य : वरने योग्य, भर्गो : शुद्ध विज्ञान स्वरूप का, देवस्य : देव के, धीमहि : हम ध्यान करें, धियो : बुद्धि को, यो : जो, न : हमारी, प्रचोदयात् : शुभ कार्यों में प्रेरित करें।
शक्ति का राज : इस मंत्र को निरंतर जपने से मस्तिष्क का तंत्र बदल जाता है। मानसिक शक्तियां बढ़ जाती हैं और सभी तरह की नकारात्मक शक्तियां जपकर्ता से दूर हो जाती है। इस मंत्र के बल पर ही ऋषि विश्वामित्र ने एक नई सृष्टि की रचना कर दी थी। इसी से अनुमान लगाया जा सकता है कि यह मंत्र कितना शक्तिशाली है। इस मंत्र में 24 अक्षर है।
प्रत्येक अक्षर के उच्चारण से एक देवता का आह्वान हो जाता है। गायत्री मंत्र के चौबीस अक्षरों के चौबीस देवता हैं। उनकी चौबीस चैतन्य शक्तियां हैं। गायत्री मंत्र के चौबीस अक्षर 24 शक्ति बीज हैं। गायत्री मंत्र की उपासना करने से उन मंत्र शक्तियों का लाभ और सिद्धियां मिलती हैं।
सप्त कोटि महामंत्रा, गायत्री नायिका स्मृता।आदि देवा ह्मुपासन्ते गायत्री वेद मातरम्।। -कूर्म पुराण
अर्थ : गायत्री सर्वोपरि सेनानायक के समान है। देवता इसी की उपासना करते हैं। यही चारों वेदों की माता है।
कामान्दुग्धे विप्रकर्षत्वलक्ष्मी, पुण्यं सुते दुष्कृतं च हिनस्ति।शुद्धां शान्तां मातरं मंगलाना, धेनुं धीरां गायत्रीमंत्रमाहु:।। -वशिष्ठ
अर्थ : गायत्री कामधेनु के समान मनोकामनाओं को पूर्ण करती है, दुर्भाग्य, दरिद्रता आदि कष्टों को दूर करती है, पुण्य को बढ़ाती है, पाप का नाश करती है। ऐसी परम शुद्ध शांतिदायिनी, कल्याणकारिणी महाशक्ति को ऋषि लोग गायत्री कहते हैं।
प्राचीनकाल में महर्षियों ने बड़ी-बड़ी तपस्याएं और योग-साधनाएं करके अणिमा-महिमा आदि ऋद्धि-सिद्धियां प्राप्त की थीं। इनकी चमत्कारी शक्तियों के वर्णन से इतिहास-पुराण भरे पड़े हैं। वह तपस्या थी इसलिए महर्षियों ने प्रत्येक भारतीय के लिए गायत्री की नित्य उपासना करने का निर्देश दिया था।
धर्म संसार /शौर्यपथ / उत्तररांचल प्रदेश में हरिद्वार नगरी को भगवान श्रीहरि (बद्रीनाथ) का द्वार माना जाता है, जो गंगा के तट पर स्थित है। इसे गंगा द्वार और पुराणों में इसे मायापुरी क्षेत्र कहा जाता है। यह भारतवर्ष के सात पवित्र स्थानों में से एक है। हरिद्वार में हर की पौड़ी को ब्रह्मकुंड कहा जाता है। इसी विश्वप्रसिद्ध घाट पर कुंभ का मेला लगता है। आओ जानते हैं हरिद्वार में स्थित भारत माता मंदिर के बारे में संक्षिप्त जानकारी।
1. हरिद्वार में भारत माता का एकमात्र मंदिर है जिसे देखने के लिए लोग दूर दूर से आते हैं।
2. इस मंदिर की स्थापना स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि ने की थी।
3. 1983 में इस मंदिर का उद्घाटन तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने किया था।
4. इस मंदिर को मदर इंडिया टेम्पल के नाम से भी जाना जाता है।
4. यह मंदिर सप्त सरोवर क्षेत्र अर्थात सप्त ऋषि आश्रम के पास स्थित है।
5. भारत माता मंदिर 180 फीट ऊंचा और आठ मंजिला है।
6. इस मंदिर का प्रत्येक तल देवी-देवताओं की पौराणिक कथाओं को समर्पित है।
7. भारत माता मंदिर उन सभी देशभक्त स्वतंत्रता सेनानियों को भी समर्पित है, जिन्होंने देश की स्वतंत्रता में योगदान दिया।
8. इस मंदिर की पहली मंजिल पर भारत माता की मूर्ति है। दूसरी पर शूर मंदिर है जो भारत के शूर वीरों को समर्पित है। तीसरी मंजिल पर मातृ मंदिर है जो स्त्री शक्ति को समर्पित है। चौथी मंजिल महान भारतीय संतों को समर्पित है। पांचवीं मंजिल भारत के विभिन्न धर्मों और भागों को समर्पित छठवीं एवं सातवीं मंजिल पर देवी शक्ति एवं भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों को समर्पित हैं। आठवीं मंजिल प्रकृति प्रेम और आध्यात्मिक व्यक्ति के लिए समर्पित है। यहां शिव का मंदिर भी है।
9. इस मंदिर से हिमालय, हरिद्वार और सप्त सरोवर की सुंदरता को देखा जा सकता है।
धर्म संसार /शौर्यपथ /भारत में कई महान ऋषि मुनि हुए हैं। प्राचीन काल में इन ऋषि मुनियों ने कई अविष्कार किए और भौतिक के सिद्धांत गढ़े थे। उन्हीं के सिद्धांतों को पढ़कर ही पश्चिमी जगत के नए सिद्धांत गढ़कर प्रसिद्ध पाई और ये ऋषि मुनि इतिहास के गर्त में खो गए। क्योंकि हर युग की भाषा और शासन अलग रहा है। उदाहरणार्थ तुलसीदासजी की रामायण इसलिए ज्यादा प्रचलित है क्योंकि उनकी भाषा आम लोगों की भाषा है। उसी तरह आज यह माना जाता है कि विज्ञान तो अंग्रेजी में ही होता है। आओ जानते हैं कि भारत के महान वैज्ञानिन ऋषि कणाद के बारे में 6 खास बातें।
कणाद गुजरात के प्रभास क्षेत्र (द्वारका के निकट कृष्ण के निर्वाण स्थल पर) में जन्मे थे। महर्षि कणाद ईसा से 600 वर्ष पूर्व हुए थे अर्थात बुद्ध और महावीर स्वामी के काल में। महर्षि कणाद वैशेषिक सूत्र के निर्माता, परंपरा से प्रचलित वैशेषिक सिद्धांतों के क्रमबद्ध संग्रहकर्ता एवं वैशेषिक दर्शन के उद्धारकर्ता माने जाते हैं। वे उलूक, काश्यप, पैलुक आदि नामों से भी प्रख्यात थे। महर्षि कणाद का जन्म चरक और पतंजलि से पूर्व हुआ था।
1.परामाणु सिद्धांत के जनक कणाद : महर्षि कणाद ने परमाणु के संबंध में विस्तार से लिखा है। यहां उस विस्तार से नहीं समझाया जा सकता। भौतिक जगत की उत्पत्ति सूक्ष्मातिसूक्ष्म कण परमाणुओं के संघनन से होती है- इस सिद्धांत के जनक महर्षि कणाद थे। यह बात बाद में आधुनिक युग के अणु विज्ञानी जॉन डाल्टन (6 सितंबर 1766 -27 जुलाई 1844) ने भी मानी।
2. गति के नियम : महर्षि कणाद ने ही न्यूटन से पूर्व गति के तीन नियम बताए थे। सर आइजक न्यूटन ने 5 जुलाई 1687 को अपने कार्य 'फिलोसोफी नेचुरेलिस प्रिन्सिपिया मेथेमेटिका' में गति के इन तीन नियमों को प्रकाशित किया।
।।वेगः निमित्तविशेषात कर्मणो जायते। वेगः निमित्तापेक्षात कर्मणो जायते नियतदिक क्रियाप्रबन्धहेतु। वेगः संयोगविशेषविरोधी।।- वैशेषिक दर्शन
अर्थात् : वेग या मोशन (motion) पांचों द्रव्यों पर निमित्त व विशेष कर्म के कारण उत्पन्न होता है तथा नियमित दिशा में क्रिया होने के कारण संयोग विशेष से नष्ट होता है या उत्पन्न होता है।
3.गुरुद्वाकर्षण सिद्धांत के जनक कणाद : पश्चिम जगत मानता है कि 1687 से पहले कभी सेब जमीन पर गिरा ही नहीं था। जब सेब गिरा तभी दुनिया को समझ में आया की धरती में गुरुत्वाकर्षण की शक्ति होती है। हालांकि इस शक्ति को विस्तार से सबसे पहले भास्कराचार्य ने समझाया था। उपरोक्त संस्कृत सूत्र न्यूटन के 913 वर्ष पूर्व अर्थात ईसा से 600 वर्ष पूर्व लिखा गया था। न्यूटन के गति के नियमों की खोज से पहले भारतीय वैज्ञानिक और दार्शनिक महर्षि कणाद ने यह सूत्र 'वैशेषिक सूत्र' में लिखा था, जो शक्ति और गति के बीच संबंध का वर्णन करता है। निश्चित ही न्यूटन साहब ने वैशेषिक सूत्र में ही इसे खोज लिया होगा। पश्चिमी जगत के वैज्ञानिक दुनियाभर में खोज करते रहे थे। इस खोज में सबसे अहम चीज जो उन्हें प्राप्त हुई वह थी 'भारतीय दर्शन शास्त्र।'
4. परमाणु बम : परमाणु बम के बारे में आज सभी जानते हैं। यह कितना खतरनाक है यह भी सभी जानते हैं। आधुनिक काल में इस बम के आविष्कार हैं- जे. रॉबर्ट ओपनहाइमर। रॉबर्ट के नेतृत्व में 1939 से 1945 कई वैज्ञानिकों ने काम किया और 16 जुलाई 1945 को इसका पहला परीक्षण किया गया। हालांकि परमाणु सिद्धांत और अस्त्र के जनक जॉन डाल्टन (6 सितंबर 1766 -27 जुलाई 1844) को माना जाता है, लेकिन उनसे भी लगभग 913 वर्ष पूर्व ऋषि कणाद ने वेदों में लिखे सूत्रों के आधार पर परमाणु सिद्धांत का प्रतिपादन किया था। विख्यात इतिहासज्ञ टीएन कोलेबुरक ने लिखा है कि अणुशास्त्र में आचार्य कणाद तथा अन्य भारतीय शास्त्रज्ञ यूरोपीय वैज्ञानिकों की तुलना में विश्वविख्यात थे। ऋषि कणाद को परमाणुशास्त्र का जनक माना जाता है। आचार्य कणाद ने बताया कि द्रव्य के परमाणु होते हैं।
महर्षि कणाद ने परमाणु को ही अंतिम तत्व माना। कहते हैं कि जीवन के अंत में उनके शिष्यों ने उनकी अंतिम अवस्था में प्रार्थना की कि कम से कम इस समय तो परमात्मा का नाम लें, तो कणाद ऋषि के मुख से निकला पीलव:, पीलव:, पीलव: अर्थात परमाणु, परमाणु, परमाणु। आज से 2600 वर्ष पूर्व ब्रह्माण्ड का विश्लेषण परमाणु विज्ञान की दृष्टि से सर्वप्रथम एक शास्त्र के रूप में सूत्रबद्ध ढंग से महर्षि कणाद ने अपने वैशेषिक दर्शन में प्रतिपादित किया था। कुछ मामलों में महर्षि कणाद का प्रतिपादन आज के विज्ञान से भी आगे है।
5. वैशेषिक दर्शन के रचनाकार : वैशेषिक दर्शन वास्तव में एक स्वतंत्र भौतिक विज्ञानवादी दर्शन है। यह आत्मा को भी पदार्थ ही मानता है। वैशेषिक दर्शन अनुसार व्यावहारिक तत्वों का विचार करने में संलग्न रहने पर भी स्थूल दृष्टि से सर्वथा व्यवहारत: समान रहने पर भी प्रत्येक वस्तु दूसरे से भिन्न है। वैशेषिक ने इसके परिचायक एकमात्र पदार्थ 'विशेष' पर बल दिया है इसलिए प्राचीन भारतीय दर्शन की इस धारा को 'वैशेषिक' दर्शन कहते हैं।
दूसरा यह कि प्रत्येक नित्य द्रव्य को परस्पर पृथक करने के लिए तथा प्रत्येक तत्व के वास्तविक स्वरूप को पृथक-पृथक जानने के लिए कणाद ने एक 'विशेष' नाम का पदार्थ माना है। 'द्वित्व', 'पाकजोत्पत्ति' एवं 'विभागज विभाग' इन 3 बातों में इनका अपना विशेष मत है जिसमें ये दृढ़ हैं। विशेष पदार्थ होने से 'विशेष' पर बल दिया गया इसलिए वैशेषिक कहलाए। चीनी विद्वान डॉ. एच. ऊई ने वैशेषिक दर्शन के काल को प्रारंभिक बौद्ध दर्शन का काल या उसके पूर्ववर्ती या सममालीन काल होने का अनुमान लगाया है। उनके अनुसार यह समकालीन या बौद्ध दर्शन के पूर्व गढ़ा गया दर्शन है।
6.कणाद का ग्रंथ : कणादकृत वैशेषिक सूत्र- इसमें 10 अध्याय हैं। वैशेषिक सूत्र के 2 भाष्य ग्रंथ हैं- रावण भाष्य तथा भारद्वाज वृत्ति। वर्तमान में दोनों अप्राप्य हैं। पदार्थ धर्म संग्रह (प्रशस्तपाद, 4थी सदी के पूर्व) वैशेषिक का प्रसिद्ध ग्रंथ है। यद्यपि इसे वैशेषिक सूत्र का भाष्य कहा जाता है, किंतु यह एक स्वतंत्र ग्रंथ है। पदार्थ धर्म संग्रह की टीका 'व्योमवती' (व्योमशिवाचार्य, 8 वीं सदी), पदार्थ धर्म संग्रह की अन्य टीकाएं हैं- 'न्यायकंदली' (श्रीधराचार्य, 10 वीं सदी), 'किरणावली (उदयनाचार्य 10वीं सदी), लीलावती (श्रीवत्स, 11वीं सदी)। पदार्थ धर्म संग्रह पर आधारित चन्द्र के 'दशपदार्थशास्त्र' का अब केवल चीनी अनुवाद प्राप्य है। 11वीं सदी के आसपास रचित शिवादित्य की 'सप्तपदार्थी' में न्याय तथा वैशेषिक का सम्मिश्रण है।
अन्य : कटंदी, वृत्ति-उपस्कर (शंकर मिश्र 15वीं सदी), वृत्ति, भाष्य (चंद्रकांत 20वीं सदी), विवृत्ति (जयनारायण 20वीं सदी), कणाद-रहस्य, तार्किक-रक्षा आदि अनेक मौलिक तथा टीका ग्रंथ हैं।
रायपुर / शौर्यपथ / स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ला ने आज माध्यमिक शिक्षा मण्डल कार्यालय के सभा गृह में रायपुर जिले के सक्रिय विज्ञान के प्रोफेशनल लर्निंग कम्यूनिटी (पीएलसी) की बैठक ली। उन्होंने कहा कि पीएलसी के माध्यम से राज्य में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में सहयोग मिलेगा। उन्होंने कहा कि हर शिक्षक में कुछ न कुछ मजबूत पक्ष होता है। ऐसे ही सभी शिक्षक अपने मजबूत पक्ष को एक दूसरे से साझा करेंगें तो पीएलसी को संबल मिलेगा। उन्होंने सुझाव दिया कि एक ऐसा प्लेटफार्म तैयार करे जिसमे शिक्षक आपस में मिलजुल कर अपने आईडिया साझा कर सके। उन्होंने कहा कि एक अच्छे शिक्षक को न केवल विज्ञान का ज्ञान होना चाहिए बल्कि उस ज्ञान को बच्चों तक कैसे पहंुचाया जाएं इसकी भी जानकारी होना चाहिए।
प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा ने कहा कि प्रोफेशनल लर्निंग कम्यूनिटी के माध्यम से विषय की कठिन अवधारणाओं को बहुत सरल तरीके से बच्चों को सीखाया जा सकता है। उन्होंने बहुत से उदाहरण देकर बताया कि विज्ञान की कठिन अवधारणाओं को किस प्रकार से प्राचीन व्याख्यान या लेक्चर विधि को हटाकर नये तरीके से कैसे सीखाया जा सकता है। इस बारे में शिक्षकों से चर्चा की। शिक्षकों ने कहा कि माध्यमिक शिक्षा मंडल की परीक्षा में प्रायोगिक शिक्षा की स्वरूप को बदल कर नई अवधारणाओं को सामने लाने का प्रयास किया जाए।
डॉ. आलोक शुक्ला ने माध्यमिक शिक्षा मण्डल को ग्रीष्म अवकाश के दौरान व्याख्याताओं को विषयवार प्रशिक्षण के लिए प्रोफेशनल लर्निंग कम्यूनिटी की जिम्मेदारी देने और उनके माध्यम से शिक्षकों के लिए रोचक प्रशिक्षण संदर्शिका बनाने के निर्देश दिए।
जिला शिक्षा अधिकारी श्री ए.एन. बंजारा ने कहा कि पीएलसी समूह को लगातार मोटिवेट करें। सीनियर अपने अनुभव को साझा करेंगे तो दूसरे बहुत से शिक्षकों को प्रेरणा मिलेगी। समग्र शिक्षा के सहायक संचालक डॉ. एम.सुधीश ने बताया कि राज्य में प्रारंभिक स्तर पर विभिन्न विषयों और मुद्दों पर बहुत सी पीएलसी का गठन किया गया है, जिसमें शिक्षकों को एकेडमिक और क्वालिटी कार्यों के लिए सक्रिय रखा गया है। स्कूल शिक्षा विभाग पीएलसी की अवधारणा को हाईस्कूल, हायर सेकण्डरी स्तर तक ले जाना चाहता है। इस संबंध में कुछ दिन पूर्व राज्य में गणित विषय की पीएलसी का गठन किया गया। माध्यमिक शिक्षा मण्डल में विज्ञान विषय के पीएलसी के साथ चर्चा में लगभग 75 व्याख्याता स्वेच्छा से शामिल हुए। स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारी ने बताया कि 4 फरवरी को माध्यमिक शिक्षा मण्डल में पुनः अंग्रेजी के व्याख्याताओं के साथ प्रोफेशनल लर्निंग कम्यूनिटी पर चर्चा की जाएगी। बैठक में परियोजना समन्वयक श्री पटेल के साथ-साथ राज्य परियोजना कार्यालय के अधिकारी भी उपस्थित थे।
सेहत /शौर्यपथ /किसी भी डिश की महक और स्वाद को बढ़ाने के लिए हरे धनिए का खूब इस्तेमाल किया जाता है। हरा धनिया डालने से आपकी हर डिश बहुत ही टेम्पटिंग लगती हैं। खाने का स्वाद बढ़ाने वाली ये मैजिक पत्तियां फायदों से भी भरपूर हैं। आइए, जान लेते हैं इसके फायदे-
इन पोषक तत्वों से भरा है धनिया
प्रोटीन, वसा, फाइबर, कार्बोहाइड्रेट, मिनरल होते हैं। इसके अलावा हरे धनिया में कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन, कैरोटीन, थियामीन, पोटोशियम और विटामिन सी भी पाया जाता हैं।
डायबिटीज में फायदेमंद
हरा धनिया ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने के लिए रामबाण माना जाता है। डाइबिटीज रोगियों के लिए हरा धनिया किसी जड़ी-बूटी से कम नहीं है। इसके नियमित सेवन से ब्लड में इंसुलिन की मात्रा को कंट्रोल किया जा सकता है।
पाचन शक्ति बढ़ाने में कारगर
हरा धनिया न सिर्फ पेट की समस्याओं को दूर करने में फायदा देता है बल्कि यह आपकी पाचन शक्ति को बढ़ाने में भी लाभकारी हो सकता है। पेट की समस्याओं जैसे पेट में दर्द होने पर आधा गिलास पानी में दो चम्मच धनिया डालकर पीने से पेट दर्द से राहत मिल सकती है।
एनीमिया से दिलाए राहत
धनिया आपके शरीर में खून को बढ़ाने में तो फायदेमंद होता ही है, साथ ही यह आयरन से भरपूर होता है। इसलिए यह एनीमिया को दूर करने में फायदेमंद हो सकता है। साथ ही एंटीऑक्सीएडेंट, मिनरल, विटामिन ए और सी से भरपूर होने के कारण धनिया कैंसर से भी बचाव करता है।
आंखों की रोशनी बढ़ाता है
हरे धनिया विटामिन ए भरपूर मात्रा में होता है जो आंखों के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है। रोजाना हरे धनिए का सेवन करने से आंखों की रोशनी बढ़ती है।
कोलेस्ट्रॉल को करता है कम
हरा धनिया न सिर्फ खाने को महक देता है बल्कि यह आपके कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करने में फायदेमंद हो सकता है। हरे धनिए में ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जो कोलेस्ट्रॉल को कम कर सकते हैं। इसके लिए कोलेस्ट्रॉल से पीड़ित व्यक्ति को धनिया के बीजों को उबालकर इसके पानी को पीना फायदेमंद हो सकता है।
शौर्यपथ / कई लोग हरी-साग सब्जियां तभी खाते हैं, जब वो किसी बीमारी से गुजर रहे होते हैं या फिर उन्हें वजन कम करना होता है लेकिन साग का सेवन हमेशा आपके लिए अच्छा होता है। आज हम आपको अलग-अलग तरह के साग खाने के फायदे बता रहे हैं-
सरसों का साग
सरसों का साग खाने में तो बहुत स्वादिष्ट होता ही है इसके साथ ही सर्दियों में इसका सेवन करने से हमारी सेहत भी अच्छी रहती है। सरसों के साग में कैलोरी, फैट, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, शुगर, पोटेशियम, विटामिन ए, सी, डी, बी 12, मैग्नीशियम, आयरन और कैल्शियम की भरपूर मात्रा होती है।
यह एंटीऑक्सीडेंट्स की मौजूदगी के कारण न सिर्फ शरीर से विषैले पदार्थो को दूर करते हैं बल्कि रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाते हैं।
चने का साग
चने का साग खाने में पौष्टिक और स्वादिष्ट होता है। चने के साग में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम, आयरन व विटामिन पाये जाते हैं। यह कब्ज, डायबिटिज, पीलिया आदि रोगों में बहुत फायदेमंद होता है। चने का साग हमारे शरीर में प्रोटीन की आपूर्ति करता है।
बथुए का साग
बथुआ कई औषधीय गुणों से भरपूर होता है। इसमें बहुत से विटामिन, कैल्शियम, फॉस्फोरस और पोटैशियम पाए जाते है। बथुआ नियमित खाने से गुर्दे में पथरी होने का खतरा काफी कम हो जाता है। गैस, पेट में दर्द और कब्ज की समस्या भी दूर हो जाती है।
चौलाई का साग
चौलाई में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन-ए, मिनिरल और आयरन प्रचुर मात्रा में पाए जाते है। चौलाई रोजाना खाने से शरीर में होने वाले विटामिन की कमी को काफी हद तक पूरा किया जा सकता है। यह कफ और पित्त का नाश करती है जिससे रक्त विकार दूर होते हैं।
मेथी का साग
सर्दी का मौसम आते ही सब्जी बाजार में मेथी खूब दिखने लगती है। मेथी में प्रोटीन, फाइबर, विटामिन सी, नियासिन, पोटेशियम, आयरन मौजूद होता हैं। इसमें फोलिक एसिड, मैग्नीशियम, सोडियम, जिंक, कॉपर आदि भी मिलते हैं जो शरीर के लिए बेहद जरूरी हैं। मेथी पेट के लिए काफी अच्छी होती है। साथ ही यह हाई बीपी, डायबिटीज, अपच आदि बीमारियों में मेथी का उपयोग लाभकारी होता है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
