July 25, 2026
Hindi Hindi

Login to your account

Username *
Password *
Remember Me

    मनोरंजन /शौर्यपथ / टीवी शो ‘भाबी जी घर पर हैं’ में नेहा पेंडसे नई अनीता भाभी बनी हैं। जबसे सौम्या टंडन ने शो को अलविदा कहा था, तभी से नई अनीता भाभी को लेकर चर्चा चल रही थी। अब जब नेहा पेंडसे यह किरदार निभा रही हैं तो ऐसे में शो में उनका नया चेहरा भी देखनो को मिलेगा। दरअसल, आने वाले एपिसोड्स में एक ट्विस्ट आने वाला है। इसमें अनीता भाभी नए चेहरे में नजर आएंगी। सबकी चहेती, अनिता भाभी, मॉडर्न कॉलोनी और अपने प्यारे पति विभूति मिश्रा (आसिफ शेख) और उनके पड़ोसी, मनमोहन तिवारी (रोहिताश गौड़) के दिलों में धमाकेदार एंट्री करने वाली हैं।
    अपने इस किरदार को लेकर नेहा पेंडसे काफी एक्साइटेड हैं। वह कहती हैं, “‘भाबीजी घर पर हैं’ की शूटिंग तो मैंने शुरू कर दी है, लेकिन टीवी पर मेरे किरदार के साथ एपिसोड्स 15 फरवरी से टेलिकास्ट होंगे। सीरियल में आप देखेंगे कि कैसे अपनी खूबसूरती, स्टाइल और जादू से लोगों को दीवाना बनाने वह आती हैं, जिससे पूरी कॉलोनी का माहौल बदल जाता है। सीरियल में अनिता भाभी का एक्सीडेंट हो जाता है और उन्हें अपने चेहरे की सर्जरी करवानी पड़ती है, लेकिन सर्जरी के दौरान गलती से असली तस्वीर किसी और से बदल जाती है, जिसकी वजह से उन्हें बिल्कुल नया चेहरा मिलता है। अनीता भाभी के नए चेहरे को देख सभी हैरान रह जाते हैं। बाद में जब सच्चाई पता चलती है तो लोग कहते नजर आते हैं कि सूरत बदल गई पर सीरत वही है।”
    नेहा आगे बताती हैं कि नई अनीता भाभी के स्वागत में खास पार्टी रखी जाती है। शो में विभूति नारायण पहले थोड़े झिझकते हैं, लेकिन नई शुरुआत के लिए तैयार हो जाते हैं। पुरानी यादों को ताजा करते हुए, इस प्यारी-सी जोड़ी का बेहतरीन कैबरे परफॉर्मेंस भी आपको देखने को मिलेगा। दोनों के बीच पहले जैसा रोमांस देखने को मिलेगा। यह ‘वैलेंटाइन डे’ कुछ ज्यादा ही खास होने वाला है, क्योंकि दर्शकों को आखिरकार अपनी अनिता भाभी को परदे पर देखने का मौका मिलेगा। मैं काफी खुश और उत्सुक हूं। सीरियल में ट्विस्ट देखने के लिए तैयार हो जाइए। अनीता भाभी की धमाकेदार एंट्री होने वाली है।”

    टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ /अक्सर त्वचा से जुड़ी कई समस्याओं को दूर करने के लिए डॉक्टर व्यक्ति को कैलामाइन लोशन लगाने की सलाह देते हैं। पर क्या आप आप जानते हैं आखिर क्या है यह कैलामाइन लोशन और इसे लगाने से त्वचा से जुड़ी किस समस्या से निजात पाया जा सकता है। आइए जानते हैं।
    कैलामाइन लोशन ज‍िंक ऑक्‍साइड और आयरन फेर‍िक ऑक्‍साइड का एक म‍िश्रण है। इसमें ग्‍ल‍िसरीन, प्‍यूर‍िफाइंग वॉटर के साथ फ‍िनोल, कैल्‍श‍ियम हाइड्रॉक्‍साइड जैसे पोषक तत्‍व भी पाए जाते हैं। व‍िश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन द्वारा कैलामाइन को जरूरी दवाओं की ल‍िस्‍ट में जगह दी गई है। इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण त्वचा से जुड़ी कई समस्‍याओं को दूर करते हैं।
    कैलामाइन लोशन लगाने से दूर होंगी ये समस्याएं-
    -नहीं होंगे रैश-
    अक्सर गर्मियों में पसीना आने से बॉडी में रैशेज या घमोरी की समस्या हो जाती है। उससे बचने के ल‍िए आपको कैलामाइन लोशन का इस्‍‍तेमाल करना चाहि‍ए।
    - एक्‍ने से बचाव-
    अगर आपकी त्वचा पर सूजन है तो कैलामाइन लोशन सूजन वाली जगह पर लगाकर मसाज करें। कैलामाइन में मौजूद एंटी इंफ्लामेट्री गुण सूजन हटाने के साथ एक्‍ने दूर करने में भी मदद करती है।
    -सनबर्न से बचाव-
    कैलामाइन लोशन में मौजूद आयरन और ज‍िंक सूरज की हान‍िकारक यूवी किरणों से बचाव करते हैं। अगर सूरज की हानिकारक किरणों की वजह से आपकी त्‍वचा जल गई है तो आप तुरंत कैलामाइन लोशन लगाएं। इसमें मौजूद कूल‍िंग इफेक्‍ट धूप से झुलसी त्‍वचा को आराम देता है।
    -प्रेगनेंसी में काम का है कैलामाइन लोशन-
    प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं को लोअर एब्डॉमि‍न में इच‍िंग की समस्‍या होती है। लेकिन कैलामाइन लोशन लगाने से जलन में राहत मिलती है।
    ऑयली स्‍क‍िन के ल‍िए बेस्‍ट-
    कैलामाइन लोशन मैटेफाइंग प्राइमर की तरह काम करता है। इसमें मौजूद ग्‍ल‍िसरीन की वजह से त्वचा ड्राई नहीं होती और मॉइश्‍चराइज रहती है।
    कैसे करें कैलामाइन लोशन को इस्‍तेमाल-
    कैलामाइन लोशन लगाने से पहले बॉटल को अच्‍छी तरह शेक कर लें। अब एक कॉटन पैड लें उसमें लोशन लगाएं। धीरे-धीरे स्‍किन पर कॉटन पैड से लोशन लगाएं। लोशन को स्‍क‍िन में ड्राय होने दें। ध्यान रखें इस लोशन को आंखों के पास या नाक, मुंह में न लगाएं।

    खाना खजाना /शौर्यपथ /आजकल की भागदौड़ भरी लाइफ में खान-पान की अनदेखी करने की वजह से हर तीसरा व्यक्ति आयरन की कमी से जुझ रहा है। ऐसे में डाइट में शामिल रोजाना एक आंवले का लड्डू आपकी यह समस्या दूर कर सकता है। आइए जानते हैं कैसे बनाए जाते हैं यह टेस्टी हेल्दी लड्डू।
    आंवले के लड्डू बनाने के लिए सामग्री-
    -आंवला कद्दूकस -250 ग्राम
    -बेकिंग सोडा-1 चम्मच
    -मीठा सोडा-1 चम्मच
    -चीनी-150 ग्राम
    -इलाइची पाउडर-1 चम्मच
    -घी-2 चम्मच
    आंवले के लड्डू बनाने का तरीका-
    आंवले के लड्डू बनाने के लिए सबसे पहले आप कद्दूकस किए हुए आंवला के साथ सोडा को एक बर्तन में डालकर कुछ देर के लिए रख दें। थोड़ी देर बाद आंवला को अच्छी तरह छानकर हाथ से दबाकर अच्छे से उसका पानी निकाल लें।

    अब आप एक कढ़ाई में घी गर्म करके इसमें आंवला, बेकिंग सोडा और चीनी को डालकर कुछ देर मध्यम आंच पर पकाएं। कुछ देर पकने के बाद इसमें इलायची पाउडर डालकर कुछ देर और पकाकर गैस बंद कर दें। अब इस मिश्रण के ठंडा होने पर हाथों में घी लगाकर गोल आकार के लड्डू बना लें। आपके आंवला लड्डू सर्व करने के लिए बिल्कुल तैयार है।

    खाना खजाना /शौर्यपथ /घर आए मेहमानों को इंप्रेस करना है तो शाम के नाश्ते में बनाएं कटहल के कबाब। नॉनवेज के शौकीन लोग भी हो जाएंगे इस कटहल कबाब रेसिपी के दीवाने। तो देर किस बात की आइए जानते हैं कैसे बनाए जाते हैं यह टेस्टी कबाब।
    कटहल के कबाब बनाने के लिए सामग्री-
    -कटहल-3 कप
    -नमक-स्वादानुसार
    -हरी मिर्च-2 बारीक कटी हुई
    -बेसन-2 चम्मच
    -लहसुन पेस्ट-1/2 चम्मच
    -अदरक पेस्ट-1/2 चम्मच
    -तेल-तलने के लिए
    -जीरा पाउडर-1/2 चम्मच
    -इलाइची पाउडर-1/2 चम्मच

    कटहल के कबाब बनाने का तरीका-
    कटहल के कबाब बनाने के लिए सबसे पहले आप कटहल को छीलकर साफ करके उसे कुकर में डालकर उबाल लें। इसके बाद सभी मसालों को मिक्सी में डालकर अच्छे से पीसकर एक बर्तन में निकाल लें। अब आप मसाले के मिश्रण में उबाले हुए कटहल और बेसन को डालकर अच्छे से मैश करके उसे कबाब के आकार में बना लें। इधर एक पैन में तेल गर्म करके उसमें कबाब को सुनहरा होने तक फ्राई करें। आपके गर्मा-गर्म कबाब बनकर तैयार है उसे प्लेट में निकालकर अपनी पसंदीदा चटनी से साथ सर्व करें।

    धर्म संसार /शौर्यपथ /साल में चार नवरात्रि आते हैं, जिनमें से दो गुप्त नवरात्रि आते हैं। आमतौर पर लोग शारदीय और चैत्र नवरात्रि के बारे में ही जानते हैं। इसके अलावा दो और नवरात्रि भी आते हैं। जिनमें विशेष कामनाओं की सिद्धि की जाती है। गुप्त नवरात्रि में सात्विक और तांत्रिक पूजा की जाती है। गुप्त नवरात्रि में पूजा और मनोकामना को गुप्त रखा जाता है। कहते हैं कि ऐसा करने से मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त होता है और फल दोगुना मिलता है। गुप्त नवरात्रि के दौरान विवाह, नौकरी आदि संबंधित कई उपाय भी किये जाते हैं। इस साल माघ गुप्त नवरात्रि 12 फरवरी से शुरू हो रहे हैं। जानिए इन उपायों के बारे में-
    1. संतान प्राप्ति के लिए- गुप्त नवरात्रि के दौरान संतान प्राप्ति के लिए 9 दिन मां दुर्गा को पान का पत्ता अर्पित करना चाहिए। पान का पत्ता कटा-फटा नहीं होना चाहिए। पूजा के दौरान नन्दगोपगृह जाता यशोदागर्भ सम्भवा ततस्तौ नाशयिष्यामि विन्ध्याचलनिवासिनी मंत्र का जाप करना चाहिए। कहते हैं कि ऐसा करने से मनोकामना पूरी होती है।
    22 फरवरी को बदलेगी मंगल की चाल, इन राशि वालों को मिलेगा जबरदस्त लाभ
    2. नौकरी की समस्या के लिए- नौकरी या जॉब में किसी तरह की समस्या आ रही है तो गुप्त नवरात्रि के दौरान 9 दिन तक मां दुर्गा को बताशे पर रखकर लौंग अर्पित करनी चाहिए। इस दौरान सर्वबाधा विनिर्मुक्तो धन धान्य सुतान्वित: मनुष्यो मत्प्रसादेने भविष्यति ना संशय: मंत्र का जाप करना चाहिए।
    3. खराब सेहत के लिए- खराब सेहत से छुटकारा पाने के लिए 9 दिन तक देवी मां को लाल पुष्प अर्पित करना चाहिए। इस दौरान ऊं क्रीं कालिकायै नम: मंत्र का जाप करना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से व्यक्ति स्वस्थ होता है।
    गुप्त नवरात्रि के दौरान ऐसे करें दुर्गा सप्तशती का पाठ, जानिए नियम और सावधानियां
    4. कर्ज से मुक्ति पाने के लिए- कर्ज या किसी वाद-विवाद से मुक्ति पाना चाहते हैं तो इसके लिए 9 दिन तक देवी मां के सामने गुग्गल की सुगंध वाला धूप जलाएं। ऐसा करने से समस्याओं से मुक्ति मिलती है। इस दौरान ऊं दुं दुर्गाय नम: का जाप करना चाहिए।
    5. विवाह के लिए- अगर विवाह में कोई बाधा आ रही है तो पूरे 9 दिन पीले फूलों की माला अर्पित करनी चाहिए। इस दौरान कात्यायनी महामाये, महायोगिनयधीश्वरी नन्दगोपसुतं देवी, पति में कुकू ते नम: मंत्र का जाप करना चाहिए।

    धर्म संसार /शौर्यपथ /माघ चतुर्दशी को नरक निवारण चतुर्दशी के नाम से जानते हैं। माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को नरक निवारण चतुर्दशी होती है। इस साल यह तिथि 10 फरवरी (बुधवार) को पड़ी है। इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती और श्रीगणेश की पूजा का विधान है। कहते हैं कि आज के दिन शिव परिवार की पूजा करने वालों को पापों से मुक्ति मिलती है। आयु में वृद्धि होती है और नरक की यातनाओं से मुक्ति मिलती है।
    आज ही तय हुआ था माता पार्वती और भगवान शिव का विवाह-
    पौराणिक कथाओं के अनुसार, माघ मास की चतुर्दशी को ही शिव-पार्वती का विवाह तय हुआ था। जबकि ठीक एक महीने बाद यानी फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि को शिव-पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था। भगवान शिव और माता पार्वती की विवाह तिथि को महाशिवरात्रि के रूप में मनाते हैं।
    नरक निवारण चतुर्दशी के दिन ऐसे करें शिव पूजा-
    1. सबसे पहले सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान आदि करें।
    2. साफ वस्त्र धारण करने के बाद भगवान शिव का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें।
    3. भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करें।
    4. पूजा के दौरान भोलेनाथ को बेलपत्र और बेर जरूर अर्पित करने चाहिए।
    5. पूजा के बाद शिवजी की आरती उतारें।
    6. आरती के बाद मंत्रों का जाप करना चाहिए।
    7. शाम के समय बेर खाकर व्रत का पारण करना चाहिए।
    नरक निवारण चतुर्दशी आज, भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए क्या करना चाहिए और क्या नहीं
    खासकर बिहार में यह व्रत महाशिवरात्रि की तरह मनाया जाता है। कई मंदिरों में रुद्राभिषेक, श्रृंगार और जलाभिषेक किया जाता है। पंडितों के अनुसार नर्क की यातना व गलत कर्मों के प्रभाव से बचने के यह व्रत किया जाता है। श्रद्धालु स्वर्ग में अपने लिए सुख व वैभव की कामना करते हैं।
    नरक निवारण चतुर्दशी आज, भगवान शिव की अराधना से मिलती है नरक से मुक्ति
    हिन्दू धार्मिक मान्यताओं में माघ महीने को दान-पुण्य और स्नान आदि के लिए बहुत ही शुभ महीना माना गया है। माघ महीने की अमावस्या से एक पहले वाली चतुर्दशी को नरक निवारण चतुर्दशी के नाम से जानते हैं। इस दिन भगवान शिव की अराधना की जाती है। इस बार नरक निवारण चतुर्दशी 10 फरवरी 2021 यानी बुधवार को पड़ रही है।
    नरक निवारण चतुर्दशी का महत्व:
    नरक निवारण चतुर्दशी के दिन लोग सुबह 4 बजे उठकर स्नान कर शिलिंग पर जल अर्पित करते हैं। ऐसा माना जाता है कि आज के दिन भगवान शिव का अराधना से सभी प्रकार के पाप धुल जाते हैं और नरक जाने से मुक्ति मिलती है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह तय हुआ था। कहा जाता है कि इस व्रत को रखने से नरक की यातनाओं से मुक्ति मिलती है।

    पौराणिक कथाओं के अनुसार, हिमालय ने पुत्री पार्वती के विवाह का प्रस्ताव भगवान शिव को भेजा था। इसके बाद फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि महाशिवरात्रि के दिन उनका विवाह हुआ था। चतुर्दशी के अवसर पर विभिन्न मंदिरों में जलाभिषेक और पूजा अर्चना कर लोग उपवास रखते हैं। इस दिन लोग गंगा व अन्य पवित्र नदियों में स्नान करते हैं। इस दिन पूरे दिन निराहार रहा जाता है और शाम को व्रत खोला जाता है।
    खासकर बिहार में यह व्रत महाशिवरात्रि की तरह मनाया जाता है। कई मंदिरों में रुद्राभिषेक, श्रृंगार और जलाभिषेक किया जाता है। पंडितों के अनुसार नर्क की यातना व गलत कर्मों के प्रभाव से बचने के यह व्रत किया जाता है। श्रद्धालु स्वर्ग में अपने लिए सुख व वैभव की कामना करते हैं।

    तनवी, ज्योति और अब्दुल संग सैकड़ों बच्चों ने जीती कुपोषण से जंग

    रायपुर / शौर्यपथ / नन्हे तनवी, ज्योति और अब्दुल हैं तो छोटे बच्चे लेकिन उन्होंने जंग बड़ी जीती है। उनकी यह जंग कुपोषण से थी। कुपोषण को हराने के लिए लगातार काम कर रहे लोगों में कुपोषण को जड़ से समाप्त करने का हौसला भी बढ़ रहा है। कुपोषण से बाहर आए इन बच्चों के हंसते खिलखिलाते चेहरे उनके परिवार के साथ ही हर उस दिल को सुकून से भर देते हैं जिन्होंने छत्तीसगढ़ को कुपोषण मुक्त करने की ठानी है। इनमें सबसे पहले मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल हैं जिन्होंने कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ के संकल्प के साथ 2 अक्टूबर 2019 से प्रदेश में मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान की शुरूआत की। अभियान शुरू करते समय मुख्यमंत्री श्री बघेल ने जो सपना देखा था वह तेजी से साकार रूप ले रहा है।
    प्रदेश में बच्चों और महिलाओं के कदम कुपोषण को हराने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहे हैं। शारीरिक रूप से कमजोर और कुपोषित बच्चों को सामान्य श्रेणी में लाने के लिए किए जा रहे प्रयासों का नतीजा साफ दिख रहा है। समन्वित प्रयासों से दूरस्थ आदिवासी क्षेत्र सुकमा जिले के 3 हजार से अधिक बच्चों को कुपोषण के दुष्चक्र से बाहर निकाला गया है। जिले में ‘संवरता सुकमा‘कार्ययोजना संचालित है जिससे कुपोषण दर में लगातार कमी आ रही है। 4 वर्षीया बालिका तनवी का वजन सितंबर माह में 6.6 किलोग्राम था जो आज जनवरी माह में बढ़कर 8.89 किलोग्राम हो चुका है। इसी प्रकार अब्दुल का वजन भी 9.92 किलोग्राम से बढ़कर 10.5 किलो हो चुका है। बालिका ज्योति ने भी सुपोषित आहार का लाभ लेकर अपना वजन महज तीन माह में ही 7.91 किलो से 9.8 किलो कर कुपोषण को मात दी है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका और मितानिनों के माध्यम से में 06 वर्ष से कम आयु के कुपोषित बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों में सुपोषण आहार प्रदान किया जा रहा है जो बच्चों के वजन बढ़ाने के साथ ही अन्य पोषक तत्व प्राप्त करने में सहायक हैं। इसके साथ ही गंभीर कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कर चिकित्सकों की सतत् निगरानी में आवश्यक उपचार, पौष्टिक आहार के साथ ही दवाईयां दी जाती है ताकि बच्चों के सेहत में जल्दी सुधार हो।
    आंगनबाड़ी में सुपोषण आहार ग्रहण करने आए छोटे बच्चों के मुस्कुराते चेहरे मुख्यमंत्री सुपोषण योजना का असर खुद बयां करते हैं। आंगनबाड़ियों में दूध,अण्डा,रागी हलवा जैसे पौष्टिक और रूचि का भोजन मिलने से उनमें खाने के प्रति रूचि बढ़ी है। सुकमा विकासखंड अन्तर्गत आंगनबाड़ी केंद्र गीदम की कार्यकर्ता श्रीमती सरिता पोड़ियामी ने बताया कि उनके केंद्र में 22 बच्चों को सुपोषण आहार दिया जा रहा है। जिसमें अधिकतर बच्चे विगत तीन माह से सामान्य श्रेणी में आ चुके हैं। रोजाना बच्चे सुबह से ही केंद्र में आकर खेलते हैं और फिर भोजन करते। सुबह के समय भी वह बच्चों को रेडी टू ईट से बने लड्डू और बर्फी का नाश्ता देती है। उन्होंने बताया कि बच्चों को शाम को परोसी जाने वाली दाल, मूंगफली, सोया बड़ी आदि सामग्रियों से बनी खिचड़ी बहुत पसंद है। बच्चे बड़े चाव से खिचड़ी खाते हैं।

    करीब 17 हजार करोड़ रूपए पूंजी निवेश के साथ 22 हजार लोगों को मिला रोजगार
    मेगा औद्योगिक परियोजनाओं के लिए हुए104 एम.ओ.यू., 42 हजार करोड़ से अधिक का पूंजी निवेश प्रस्तावित
    65 हजार और लोगों को मिलेगा रोजगार
    146 में से 110 विकासखण्डों में फूडपार्क की स्थापना के लिए भूमि चिन्हांकित
    बस्तर में लघु वनोपज आधारित 15 इकाईयों की स्थापना के लिए एम.ओ.यू. के प्रस्ताव तैयार
    धान और गन्ने पर आधारित जैव ईंधन एथेनॉल उद्योगों के लिए विशेष प्रोत्साहन पैकेज

        रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा लागू की गई नई औद्योगिक नीति निवेशको को बहुत भा रही है। पिछले दो साल में प्रदेश में जहां 1207 नये उद्योगों की स्थापना हुई है, वहीं राज्य में इन उद्योगों के माध्यम से 16 हजार 897 करोड़ रूपए का पूंजी निवेश हुआ है, जिसमें 22 हजार से अधिक लोगों को सीधा रोजगार मिला है। इसी तरह इस दौरान मेगा औद्योगिक परियोजनाओं हेतु कुल 104 एम.ओ.यू. किए गए हैं। इन इकाइयों का प्रस्तावित कुल पंूजी निवेश 42 हजार 714.48 करोड़ रूपए है, जिसके माध्यम से करीब 65 हजार लोगों को रोजगार प्राप्त होगा।
    गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ राज्य में पिछले दो वर्षाें में तीव्र गति से औद्योगिक विकास हुआ है। इस विकास को हासिल करने राज्य सरकार ने न केवल नई औद्योगिक नीति लागू की बल्कि इस नीति में निवेशकों की आवश्यकता के अनुरूप संशोधनों को शामिल किया। राज्य सरकार ने प्रदेश के विकासखण्डों में फूड पार्को की स्थापना के साथ ही खाद्य प्रसंस्करण नीति लागू की और इसके लिए एम.ओ.यू. निष्पादित भी किए। वनवासियों को वनोपज संग्रहण का वाजिब मूल्य दिलाने के लिए वनांचल पैकेज घोषित किया और उद्यमियों की मांग के अनुसार उन्हें सहायता मुहैया कराया जिससे प्रदेश में औद्योगिक विकास एक नया वातावरण विकसित हुआ है।
    राज्य सरकार ने पिछड़े तथा अति पिछड़े क्षेत्रों में वनोपज, हर्बल तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों की स्थापना को बढ़ावा देने के लिए औद्योगिक नीति 2019-24 में वनांचल उद्योग पैकेज घोषित किया गया है। जिसके तहत् इकाईयों को अधिकतम 2.50 करोड़ रूपये का स्थायी पूंजी निवेश अनुदान के साथ-साथ नेट एसजीएसटी सहित औद्योगिक नीति में घोषित सभी अनुदान दिया जा रहा है।
    इसी तरह राज्य सरकार द्वारा किसानों की आय को बढ़ाने के लिए खाद्य प्रसंस्करण को विशेष बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके लिये सरकार द्वारा प्रत्येक विकासखण्ड में फूडपार्क की स्थापना का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए 146 विकासखण्डों में से 110 विकासखण्डों में नवीन फूडपार्क की स्थापना भूमि का चिन्हांकन किया जा चुका है। ‘‘छत्तीसगढ़ राज्य खाद्य प्रसंस्करण मिशन‘‘ की अवधि को बढ़ाकर 31 अक्टूबर 2024 तक कर दिया गया है। साथ ही राज्य शासन द्वारा 05 खाद्य प्रसंस्करण इकाईयों से एम.ओ.यू. भी निष्पादित किए गए है, जिसमें दो इकाईयां उत्पादन में आ चुकी है। इनके माध्यम से राज्य में 283 करोड़ रूपये का निवेश तथा 2434 रोजगार प्रस्तावित है। इसके अलावा बस्तर क्षेत्र में लघु वनोपज आधारित 15 इकाईयों की स्थापना के लिए एम.ओ.यू. के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं जिनके माध्यम से 74 करोड़ रूपये का पूंजी निवेश तथा 1049 रोजगार प्रस्तावित है।
    किसानों को स्थानीय स्तर पर उनकी उपज का संपूर्ण मूल्य दिलवाने के लिए धान और गन्ने पर आधारित जैर्व इंधन-एथेनॉल उद्योगों के लिए विशेष प्रोत्साहन पैकेज जारी किया गया है। राज्य में अतिरिक्त धान द्वारा उत्पादित एवं शक्कर कारखानों के उत्पाद से बने एथेनॉल हेतु स्थापित इकाईयों को उच्च प्राथमिकता श्रेणी के तहत अनुदान दिया जा रहा है। इसके लिये कच्चे माल की खरीदी समर्थन मूल्य पर करना आवश्यक होगा। राज्य में एथेनॉल प्लांट हेतु 8 इकाइयों द्वारा प्रस्ताव प्राप्त हुए है। जिसमें से 5 निवेशकों द्वारा एम.ओ.यू. निष्पादित कर लिया गया है जिसके माध्यम से 647 करोड़ रूपए का निवेश तथा 683 रोजगार प्रस्तावित है। राज्य सरकार की पहल पर भारत सरकार द्वारा देश में मक्का से एथेनॉल (बायो-फ्यूल) बनाने की अनुमति भी जारी की गई है।
    उद्योगों में नवीन विचारधारा को समाहित करने तथा नव रोजगार सृजित करने छत्तीसगढ़ राज्य स्टार्ट-अप पैकेज को नीति में स्थान दिया गया है। इन स्टार्ट-अप्स को अन्य उद्योगों से अधिक सुविधाएं कम औपचारिकता के साथ प्रदान की जायेगी। राज्य में अब तक पंजीकृत स्टार्ट-अप की संख्या 504 है। अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति वर्ग के उद्यमियों को प्रोत्साहन देने हेतु उनके लिये विशेष औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज जारी किये गये हैं।
    कोर सेक्टर के मेगा उद्योगों को सहायता देने Be Spoke Policy की नवीन धारणा लायी गई है। जिसमें उद्योगों को उनके उत्पादन से लिंक कर आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। इसमें कुल परियोजना लागत का 60 प्रतिशत से 150 प्रतिशत तक अनुदान प्रदान किये जा रहे हैं।
    उद्यमियों द्वारा स्थापित किये जाने वाले पात्र सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को उद्योग विभाग या सीएसआईडीसी के औद्योगिक क्षेत्रों में भू-आबंटन पर भू-प्रीमियम में अधिकतम 60 प्रतिशत तक का छूट प्रदान किया जा रहा है। उद्यमियों द्वारा बहुप्रतीक्षित भूमि हस्तांतरण शुल्क में कमी कर दी गयी है।
    राज्य शासन द्वारा एमएसएमई को पृथक रूप से परिभाषित किया गया तथा वृहद सेवा उद्यम की परिभाषा भी जारी की गई। निवेशकों की मांग के अनुसार स्थायी पूंजी निवेश अनुदान को सूक्ष्म तक सीमित न कर लघु व मध्यम श्रेणी के उद्योगों के लिये भी प्रावधानित किया गया है। निजी औद्योगिक पार्क की स्थापना हेतु बस्तर व सरगुजा के पहाड़ी क्षेत्रों में भूमि उपलब्धता की समस्या को देखते हुए वर्तमान नीति में इसे सरगुजा एवं बस्तर संभाग हेतु भूमि की न्यूनतम आवश्यकता को 20 एकड़ कर दिया गया है। इन सभी पहल के कारण दिसंबर 2018 से जनवरी, 2021 तक कुल 1207 उद्योगों की स्थापना हुई। राज्य के इन उद्योगों के माध्यम से कुल 16897 करोड़ रू. का पूंजी निवेश हुआ है तथा 22001 लोगों को रोजगार प्राप्त हुआ है। अब तक मेगा औद्योगिक परियोजनाओं हेतु कुल 104 एम.ओ.यू. निष्पादित किए गए हैं। इन इकाइयों का प्रस्तावित कुल पंूजी निवेश 42714.48 करोड़ रू. है, जिसके माध्यम से कुल 64094 लोगों को रोजगार प्राप्त होगा।

    खाना खजाना /शौर्यपथ /सर्दियों के मौसम में अक्सर लोग आलस, कमर दर्द, गठिया, और जोड़ों के दर्द की शिकायत करते हैं। अगर आप भी ऐसी ही किसी समस्या से परेशान हैं तो सर्दियों के मौसम में सुबह नाश्ते में मेथी के लड्डू खान से आपको इन सभी परेशानियों से छुटकारा मिल सकता है। यह लड्डू आपके शरीर में स्फूर्ति बनाए रखने के साथ आपको कमर दर्द, गठिया तथा जोड़ों का दर्द और वात रोग में भी लाभ पहुंचाएगे। आइए जान लेते हैं कैसे बनाए जाते हैं यह टेस्टी हेल्दी लड्डू।
    मेथी के लड्डू बनाने के लिए सामग्री-
    -500 ग्राम मेथी दाना
    -100 ग्राम खाने वाला गोंद
    - 500 ग्राम मोटा पिसा गेहूं का आटा
    -1 किलो गुड़
    - 250 ग्राम शक्कर का बूरा
    - 10 ग्राम पिसी छनी बारीक सोंठ
    -1 किलो शुद्ध घी
    - 100 ग्राम खसखस
    - 250 ग्राम बारीक कटा मेवा
    -10 ग्राम इलायची पाउडर
    मेथी के लड्डू बनाने की विधि-
    मेथी के लड्डू बनाने के लिए सबसे पहले मेथी दाने को साफ करके दो दिन पानी बदलकर भिगोएं। इसके बाद मेथी दाने को ताजे पानी से धोकर बारीक पीस लें। मोटे तले के बर्तन में एक बड़ा चम्मच घी डालकर धीमी आंच पर भूनें। घी की जरूरत लगने पर थोड़ा-थोड़ा डालकर चलाते हुए भूनते रहें। ब्राउन होने और खुशबू आने पर उतार लें। आटे को छानकर घी के साथ अलग से इसी तरह भून लें। अब गोंद को घी में फुलाकर हल्का-सा कुचल लें।

    कम गर्म घी में सोंठ और खसखस को डालकर निकाल लें। गुड़ को कूटकर या बारीक करके घी के साथ चलाएं। जब गुड़ घी में अच्छी तरह से मिल जाए तो उसे उतारकर इसमें तैयार की हुई सारी सामग्री, कटे मेवे, इलायची पाउडर और आधा बूरा भी मिला दें। घी कम लगे तो इसमें आवश्यकतानुसार गर्म घी मिला लें। अब थोड़ा गर्म रहते ही बूरे को हथेलियों से रगड़ें और एक साइज के लड्डू बना लें। आपके सेहत और स्वाद से भरपूर मेथी के लड्डू बनकर तैयार हैं।

    सेहत /शौर्यपथ /अगर लॉकडाउन के दौरान अपने घर से काम कर रहे हैं और काम के घंटे भी इस वक्त बढ़ गए हैं। यह न केवल आपके पूरे स्वास्थ्य पर असर डालता है बल्कि इसका असर आपकी नाजुक आंखों पर भी पड़ता है।
    वर्क फ्रॉम होम के दौरान लैपटाप का ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा है, वहीं इसी के साथ ही मोबाइल के संपर्क में भी हम ज्यादा रह रहे हैं जिससे आंखों में जलन, धुंधला दिखना व खुजली जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
    इसलिए जरूरी है कि हम अपनी आंखों की देखभाल करें और जब भी आंखों पर दबाव महसूस करें तो स्क्रीन से दूर हो जाएं और बीच-बीच में आंखों को ठंडे पानी से भी धोते रहें। आंखों की जलन की परेशानी ज्यादा बढ़ जाती है। भले ही इस वक्त आप घर पर हैं लेकिन आंखों में जलन आप महसूस करते होंगे। इसलिए इन समस्याओं से निजात पाने के लिए आपको अपनी आंखों की सही देखभाल की जरूरत है, वहीं गुलाब जल का इस्तेमाल आपको आंखों की समस्या से निजात दिला सकता है।
    गुलाब जल के इस्तेमाल से आंखों को ठंडक मिलती है, साथ ही ताजगी महसूस होती है। ओवरटाइम काम करने के दौरान आंखों में तनाव महसूस होता है इसके लिए खुद को रिलेक्स करना बहुत जरूरी है। इसके लिए आप कॉटन में गुलाब जल डालें और इसे अपनी आंखों पर रखकर कुछ देर के लिए आंखों को आराम दें। गुलाब जल को आंखों में डालने से भी तुरंत राहत मिलती है, साथ ही फ्रेश महसूस होता है। अत: अपने आंखों का ध्यान रखें और समय-समय पर अपनी पलकों को झपकाते रहें।

    हमारा शौर्य

    हमारे बारे मे

    whatsapp-image-2020-06-03-at-11.08.16-pm.jpeg
     
    CHIEF EDITOR -  SHARAD PANSARI
    CONTECT NO.  -  8962936808
    EMAIL ID         -  shouryapath12@gmail.com
    Address           -  SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
    LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
    © 2015 Shouryapath. All Rights Reserved. Designed By Global Vision