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बेमेतरा / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि ‘गिधवा-परसदा पक्षी विहार’ को विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। छत्तीसगढ़ के इस पक्षी विहार को अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र में स्थापित करने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे। पक्षी विज्ञानियों, प्रकृति प्रेमियों और यहां आने वाले सैलानियों के लिए विभिन्न सुविधाएं विकसित की जाएंगी। यहां विश्व के विभिन्न प्रवासी पक्षियों का आवागमन होता हैं। विशेषकर साल के माह नवम्बर से मार्च (05 माह) में यहां ये पक्षी रहवास करते हैं। मुख्यमंत्री बेमेतरा जिले के नवागढ़ विकासखण्ड के नगधा गांव में आयोजित ‘गिधवा-परसदा पक्षी विहार महोत्सव’ को सम्बोधित कर रहे थे। इसके पहले मुख्यमंत्री बघेल ने गिधवा-परसदा जलाशय का भ्रमण किया और वहां विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों और जलाशय के मनोरम और विहंगम दृश्यों को कैमरे में कैद किया। इस अवसर पर वन एवं परिवहन मंत्री मोहम्मद अकबर, संसदीय सचिव गुरुदयाल बंजारे, विधायक आशीष छाबड़ा, प्रधान मुख्य वन संरक्षक राकेश चतुर्वेदी, आईजी विवेकानंद सिन्हा, कलेक्टर शिवअनंत तायल सहित अनेक जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री ने पक्षी महोत्सव में जैव विविधता के संरक्षण के संबंध में अनेक महत्वपूर्ण घोषणाएं करते हुए कहा कि गिधवा एवं परसदा ग्रामों के आस-पास जिन क्षेत्रों में प्रवासी पक्षी आते हैं, उसके संरक्षण की योजना बनाकर छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा कार्य किया जाएगा। साथ ही क्षेत्र में एक पक्षी जागरूकता एवं प्रशिक्षण केन्द्र स्थापित किया जाएगा। यहां राज्य के प्रवासी एवं स्थानीय पक्षियों की जैव विविधता संबंधी जानकारी एवं प्रशिक्षण जन सामान्य को दी जाएगी। राज्य के समस्त ऐसे वेटलैंड जिसमें प्रवासी पक्षी आते हैं एवं जैव विविधता के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं, उनके संरक्षण एवं प्रबंधन की जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड को दी जाएगी।
उल्लेखनीय है कि गिधवा-परसदा के जलाशयों को विश्व स्तरीय पक्षी पर्यटन स्थलों में स्थान दिलाने के लिए यहॉं 31 जनवरी से 02 फरवरी 2021 तक पक्षी विहार महोत्सव का आयोजन किया गया। पक्षियों के संरक्षण के साथ-साथ जैव विविधता संरक्षण तथा स्थानीय लोगों को ईको-पर्यटन के माध्यम से होम, विलेज स्टे से रोजगार उपलब्ध होगा।
बेमेतरा जिले के गिधवा-परसदा, नगधा, एरमशाही क्षेत्र जलीय एवं स्थल जैव विविधता से भरपूर है। यह क्षेत्र पारिस्थितिकीय व स्वस्थ्य पर्यावरण के लिये उपयुक्त है। गिधवा-परसदा स्थल मुख्यतः जलीय नमी युक्त क्षेत्र है। इसका भौगोलिक विस्तार लगभग 06 कि.मी. क्षेत्र में है। गिधवा परसदा में मुख्य 02 बड़े तथा 02 मध्यम आकार के जलाशय हैं, नजदीकी ग्राम एरमशाही में 05 जलाशय भी स्थित हैं। गिधवा-परसदा जलीय तंत्र में भरपूर जलीय खाद्य वनस्पति व जीव होने के कारण यहां पक्षियों के लिए अच्छा रहवास है। यहां किए गए अध्ययनों में पक्षियों की कुल 143 प्रजातियां जिसमें कुल 26 स्थानीय प्रवासी प्रजातियां, 11 विदेशी प्रवासी प्रजातियां तथा 106 स्थानीय आवासीय प्रजातियां पक्षी पायी गयी है।
उत्कृष्ट निष्पादन हेतु संयंत्र के डायरेक्टर इंचार्ज अनिर्बान दासगुप्ता ने दी बधाई
दुर्ग ( भिलाई स्टील प्लांट ) / शौर्यपथ
भिलाई इस्पात संयंत्र के विभिन्न विभागों एसएमएस-3, बीआरएम, एसपी-3, आरएमपी-3 ने इस जनवरी माह में मासिक उत्पादन का नया रिकार्ड दर्ज कर अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की है।
एसएमएस तीन ने रचा नया कीर्तिमान
भिलाई इस्पात संयंत्र की मॉडेक्स इकाई, स्टील मेल्टिंग शॉप-3 ने जनवरी, 2021 में 2,30,525 टन स्टील के मासिक उत्पादन का नया कीर्तिमान रचते हुए अक्टूबर, 2020 माह में दर्ज किए सर्वश्रेष्ठ निष्पादन रिकॉर्ड 2,19,332 को ध्वस्त कर दिया है।
बार एवं रॉड मिल ने भी बनाया नया रिकार्ड
भिलाई इस्पात संयंत्र के बार एवं रॉड मिल ने जनवरी, 2021 को अपने ही सर्वश्रेष्ठ मासिक उत्पादन के कीर्तिमान को ध्वस्त करने में सफलता पाई है। इसके पूर्व विगत दिसंबर, 2020 में 40,027 टन सर्वश्रेष्ठ मासिक उत्पादन का कीर्तिमान दर्ज किया था। अपने ही कीर्तिमान को तोड़ते हुए जनवरी, 2021 को विभाग ने इस माह 45,609 टन कुल उत्पादन दर्ज किया। मिल ने जनवरी, 2021 में 43,925 टन के मासिक डिस्पैच का नया कीर्तिमान रचते हुए दिसंबर, 2020 माह में दर्ज किए सर्वश्रेष्ठ डिस्पैच रिकॉर्ड 41,488 टन को ध्वस्त कर दिया है।
आरएमपी-3 का मासिक उत्पादन कीर्तिमान
भिलाई इस्पात संयंत्र की मॉडेक्स इकाई, आरएमपी-3 ने जनवरी, 2021 में 28,184 टन मासिक उत्पादन का नया कीर्तिमान रचते हुए अक्टूबर, 2020 माह में दर्ज किए सर्वश्रेष्ठ निष्पादन रिकॉर्ड 27,581 टन को ध्वस्त कर दिया है। आरएमपी-3 बिरादरी संयंर्त के साथ कंधे से कंधा मिलाकर इस्पात निर्माण में अपनी भागीदारी को सुनिश्चित कर रहा है।
एसपी-3 ने भी छुई नई ऊंचाई
भिलाई इस्पात संयंत्र के सिंटर प्लांट-3 ने जनवरी, 2021 में 4,66,368 टन के मासिक उत्पादन का नया कीर्तिमान रचते हुए अक्टूबर, 2020 माह में दर्ज किए सर्वश्रेष्ठ निष्पादन रिकॉर्ड 4,64,467 टन को ध्वस्त कर दिया है।
ओएचपी-बी ने बनाये कई नये रिकॉर्ड
भिलाई इस्पात संयंत्र के ओर हैंडलिंग प्लांट-बी (ओएचपी-बी) ने जनवरी, 2021 को 4661 वैगनों की अनलोडिंग कर मार्च, 2020 को 4449 वैगनों की अनलोडिंग के पिछले रिकॉर्ड को ध्वस्त करने में कामयाब हुआ है। इसी प्रकार जनवरी, 2021 को 305401 टन मटेरियल की अनलोडिंग कर मार्च, 2020 को 293281 टन मटेरियल की अनलोडिंग के पिछले रिकॉर्ड को ध्वस्त कर अब तक का सर्वश्रेष्ठ मासिक अनलोडिंग का नया रिकॉर्ड दर्ज किया।
इसी क्रम में ओर हैंडलिंग प्लांट-बी ने जनवरी, 2021 को 325350 टन मटेरियल का डिस्पैच कर दिसम्बर, 2020 में 292770 टन मटेरियल डिस्पैच के पिछले रिकॉर्ड को ध्वस्त कर अब तक का सर्वश्रेष्ठ मासिक डिस्पैच का कीर्तिमान स्थापित करने में सफल हुआ है। इसी प्रकार जनवरी, 2021 को 630751 टन मटेरियल की हैंडलिंग कर दिसम्बर, 2020 को 559461 टन मटेरियल हैंडलिंग के पिछले रिकॉर्ड को ध्वस्त कर अबतक का सर्वश्रेष्ठ मासिक मटेरियल हैंडलिंग का नया रिकॉर्ड दर्ज किया। ओर हैंडलिंग प्लांट-बी (ओएचपी-बी) ने एसएमएस-3 को जनवरी, 2021 को 7450 टन ओएच ग्रेड आयरन ओर मटेरियल का डिस्पैच कर दिसम्बर, 2020 में 6000 टन मटेरियल डिस्पैच के पिछले रिकॉर्ड को ध्वस्त कर अब तक का सर्वश्रेष्ठ मासिक डिस्पैच का कीर्तिमान स्थापित किया। इसी प्रकार ओएचपी-बी ने जनवरी, 2021 को 10495 टन मटेरियल का औसत दैनिक डिस्पैच कर दिसम्बर, 2020 में 9444 टन मटेरियल के औसत दैनिक डिस्पैच के अपने पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ नया कीर्तिमान रचा।
एमआरडी ने किया श्रेष्ठ प्रदर्शन
भिलाई इस्पात संयंत्र के एमआरडी ने जनवरी, 2021 को 59823 टन स्क्रैप का डिस्पैच कर दिसम्बर, 2020 को 47097 टन स्क्रैप का डिस्पैच के अपने पिछले रिकॉर्ड में 27 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। एमआरडी ने अक्टूबर, नवम्बर, दिसम्बर-2020 माह में भी अपना सर्वश्रेष्ठ निष्पादन दर्ज किया था। इस प्रकार एमआरडी बिरादरी ने संयंत्र के लिए बहुमूल्य मुद्रा का अर्जन किया।
उच्च प्रबंधन ने दी शाबासी
भिलाई इस्पात संयंत्र के विभिन्न विभागों द्वारा जनवरी, 2021 माह में किए गए उत्कृष्ट निष्पादन हेतु संयंत्र के डायरेक्टर इंचार्ज अनिर्बान दासगुप्ता ने इन विभागों के कार्मिकों व अधिकारियों को बधाई दी। इसके साथ ही कार्यपालक निदेशक (वक्र्स) राजीव सहगल ने भी संयंत्र बिरादरी को उनके श्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए अपनी शुभकामनाएँ प्रेषित की।
सेहत /शौर्यपथ / खराब लाइफस्टाइल और पौष्टिक आहार की कमी के कारण आज हर दूसरा व्यक्ति हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से परेशान है। बल्ड प्रेशर को 'साइलंट किलर' भी कहा जाता है। खास बात यह है कि लोगों को यह समस्या सर्दी में मौसम में अधिक परेशान करती है। इस मौसम में व्यक्ति का ब्लड प्रेशर ऊपर-नीचे होता रहता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ठंड की वजह से ब्लड सप्लाई के लिए हार्ट पर ज्यादा दबाव पड़ता है। आर्टरीज और हार्ट पर ज्यादा दबाव पड़ने के कारण ब्लड प्रेशर हाई हो जाता है। जिसकी वजह से व्यक्ति को दिल, किडनी, आंखों पर बुरा असर पड़ने के साथ डिमेंशिया जैसे रोग का भी खतरा बना रहता है।
सर्दियों में यह लक्षण बताएंगे गड़बड़ है आपका ब्लड प्रेशर-
-सिरदर्द
-पसीना आना
-पाचन तंत्र
-घुटन होना
हाई ब्लड प्रेशर से ऐसे करें बचाव-
रोज करें एक्सरसाइज- हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से दूर रहने के लिए रोजाना कम-से-कम आधा घंटा कार्डियो एक्सरसाइज करें ।
-नमक का सेवन कम करें -खाने में नमक की मात्रा का सेवन कम करें। डाइट में अधिकांश सोडियम पैक, संसाधित भोजन से आता है, जिससे बचने की जरूरत है।
-ध्यान लगाएं- रिसर्च के मुताबिक, ध्यान लगाने के अलग-अलग तरीकों से न सिर्फ व्यक्ति का तनाव दूर होता है बल्कि हाई ब्लड प्रेशर भी कंट्रोल रहता है।
-घी-तेल का इस्तेमाल कम-
फास्ट फूड, मैगी, चिप्स, सॉस, चॉकलेट, सैचरेटेड फैट जैसे कि देसी घी, वनस्पति या फिर नारियल तेल का सेवन अधिक करने से बचें।
-म्यूजिक और डांस- हाई ब्लड प्रेशर कंट्रोल रखने के लिए टेंशन, थकान और तनाव से दूर रहने की कोशिश करें। मूड हल्का रखने के लिए म्यूजिक सुनें,डांस करें।
-हेल्दी डाइट- ब्लड प्रेशर कंट्रोल रखने के लिए डाइट में हाई-फाइबर युक्त चीजें जैसे ज्वार, बाजरा, गेंहू, दलिया और स्प्राउट्स आदि को शामिल करें। रोजाना कम से कम 10 गिलास पानी पिएं।
-धूप सेंकना- त्वचा की परत में मौजूद नाइट्रिक ऑक्साइड ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद करता है। त्वचा पर धूप पड़ने पर त्वचा में घुलने वाले नाइट्रिक ऑक्साइड की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे ब्लड प्रेशर कंट्रोल रहता है।
-नारियल पानी- नारियल पानी में पोटेशियम की मात्रा अधिक होने से शरीर में सोडियम का असर कम करने में मदद मिलती हैं, जिससे ब्लड प्रेशर कंट्रोल रखने में मदद मिलती है।
सेहत / शौर्यपथ / लहसुन को अपने औषधीय गुणों के चलते, कई पीढ़ियों से इस्तेमाल किया जाता रहा है। यह प्लांट मूल रूप से मध्य एशिया में उगाया जाता है। यह कच्चे लहसुन, पाउडर, तेल और सप्लीमेंट सहित विभिन्न रूपों में उपलब्ध है।
अधिकांश भारतीय करी और सूप में लहसुन एक महत्वपूर्ण घटक है। इसके स्वास्थ्य लाभों को पुनः प्राप्त करने के लिए, बहुत से लोग खाली पेट गर्म पानी के साथ लहसुन का सेवन करना पसंद करते हैं। यदि आप इस तरह से लहसुन का सेवन करना पसंद नहीं करतीं , तो आप लहसुन की चाय भी ट्राय कर सकती हैं। जिसे शहद, लहसुन, नींबू और पानी का उपयोग करके बनाया जा सकता है।
लहसुन की चाय
हाई ब्लड प्रेशर या हाई ब्लड शुगर के कारण जिन लोगों को सामान्य चाय की अनुमति नहीं होती है, उनके लिए लहसुन की चाय सबसे अच्छी है। लहसुन की चाय में कैफीन नहीं होता। यह उन लोगों के लिए अच्छी है, जो कैफीन से परहेज कर रहे हैं।
लहसुन में जीवाणुरोधी और एंटीवायरल गुण होते हैं। आप चाहें तो लहसुन की चाय में थोड़ी अदरक और दालचीनी भी मिला सकती हैं। ताकि इसके स्वास्थ्य लाभ में सुधार हो सके और इसका स्वाद भी बढ़ सके। सिर्फ इतना ही नहीं, लहसुन आपकी इम्युनिटी को भी बूस्ट करता है, आपकी ऊर्जा के स्तर को बढ़ाता है और आपके चयापचय में सुधार करता है।
डायबिटीज के रोगियों के लिए लहसुन की चाय 8 तरीकों से फायदेमंद है
1. लहसुन की चाय अमीनो एसिड होमोसिस्टीन को कम करती है, जो डायबिटीज के रोगियों के लिए एक बड़ा जोखिम कारक है।
2. यह एक शक्तिशाली एंटीबायोटिक ड्रिंक है, जो आपके संपूर्ण स्वास्थ्य और इम्यून सिस्टम में सुधार करता है।
3. डायबिटीज शरीर में सूजन पैदा कर सकता है, जिसे लहसुन कम करने में मदद कर सकता है।
4. लहसुन के सेवन को टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित लोगों में ब्लड शुगर लेवल को कम करने के लिए दिखाया गया है।
5. यह कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद करता है और डायबिटीज से जुड़े अन्य स्वास्थ्य जोखिमों को कम करता है।
6. लहसुन में विटामिन-सी होता है, जो हमारी इम्युनिटी को बूस्ट करने में मदद करता है और हमारे अंगों को स्वस्थ और उनके कामकाज को बनाए रखता है।
7. यह सामान्य चाय का एक स्वस्थ विकल्प है, जो आपके लिए हानिकारक हो सकता है अगर आप मधुमेह से पीड़ित हैं।
8. यह आपके हृदय स्वास्थ्य में सुधार करता है और आपके ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखता है।
कैसे बनाएं लहसुन की चाय
एक पैन लें और उसमें एक कप पानी उबालें। इसमें थोड़ी अदरक और लहसुन कूटकर डालें, साथ ही 1 चम्मच काली मिर्च मिलाएं।
5 मिनट के लिए चाय को उबलने दें।
पैन को गैस पर से हटा दें, चाय को किसी बर्तन में छान लें और इस गर्म चाय का आनंद लें।
आप इसका स्वाद और पोषण मूल्य बढ़ाने के लिए इसमें थोड़ी दालचीनी, नींबू और थोड़ा शहद भी मिला सकती हैं।
सेहत /शौर्यपथ /आज हर दूसरा व्यक्ति बढ़ते मोटापे की समस्या से परेशान है। लेकिन खानपान और लाइफस्टाइल में बदलाव करके आप बड़ी आसानी से इस समस्या से निजात पा सकते हैं। आइए जानते हैं कैसे सिर्फ रोटी बनाने के तरीके को बदलकर आप बढ़ते वजन की परेशानी से चंद दिनों में ही छुटकारा पा सकते हैं।
सत्तू की रोटी -
शरीर को ठंडक पहुंचाने के साथ सत्तू वजन घटाने में भी काफी फायदेमंद माना जाता है। सत्तू में फाइबर, आयरन, प्रोटीन, मैग्नीशियम और सोडियम सहित कई अन्य पोषक तत्व मौजूद होते हैं। डाइट में सत्तू का रोजाना इस्तेमाल आपका कई किलो वजन तेजी से घटा सकता है ऐसे में आइए जानते हैं वजन घटाने के लिए कैसे बनाई जा सकती है सत्तू की रोटी।
सत्तू की रोटी बनाने के लिए सामग्री-
-2 कटोरी आटा
-1 कटोरी सत्तू का आटा
-1 बड़ा प्याज बारीक कटा हुआ
-1 बड़ा चम्मच अदरक-लहसुन बारीक कटा हुआ
-1 बड़ा चम्मच धनिया पत्ती बारीक कटी हुई
-1 छोटा चम्मच सरसों का तेल
-2 हरी मिर्च बारीक कटी हुई
-नमक स्वादानुसार
सत्तू की रोटी बनाने की विधि-
सत्तू की रोटी बनाने के लिए सबसे पहले एक कटोरी में सत्तू का आटा लेकर उसमें प्याज, अदरक, लहसुन, धनिया पत्ती, तेल, हरी मिर्च और नमक मिलाकर उसका मिश्रण तैयार करके उसकी रोटी बनाने के लिए आटा तैयार कर लें। इसके बाद रोटी की लोई में सत्तू का मिश्रण भरें और उसे रोटी की तरह बेलें। आटे की लोई थोड़ी बड़ी लें ताकि बेलने में वह फटे नहीं। इसके बाद इस रोटी को तवे पर सेक लें। यह रोटी बाकी रोटियों की ही तरह फूलती है। आप गर्मा-गरम सत्तू की इन रोटियों पर देसी घी लगाकर सब्जी के साथ सर्व कर सकते हैं।
ओट्स की रोटी-
वजन घटाने के लिए ओट्स भी बेहद फायदेमंद माना जाता है। इसमें मौजूद बिटा-ग्लूकेन नाम का फाइबर भूख को लंबे समय तक शांत रखकर वजन बढ़ने से रोकता है।
ओट्स की रोटी बनाने के लिए सामग्री-
-2 कप ओट्स
-1/2 कप गेहूं का आटा
-1 कप गरम पानी
ओट्स की रोटी बनाने की विधि-
ओट्स की रोटी बनाने के लिए सबसे पहले ओट्स को मिक्सर ग्राइंडर में पीसकर रख लें। इसके बाद एक बाउल में गेहूं का आटा और ओट्स को मिक्स कर दें। आप चाहे तो सिर्फ ओट्स की भी रोटी बना सकते हैं। अब आप पानी गर्म करके इस पानी से ओट्स का आटा गूंथ लें। इसके बाद जैसे आप साधारण आटे की रोटी बनाती हैं, वैसे ही ओट्स की रोटी भी बना लें।
सोया रोटी-
सोया में मौजूद विटामिन, प्रोटीन, आयरन, पोटेशियम और कैल्शियम के साथ लो कैलोरी होने की वजह से यह आपके वजन को कम करने में मदद करता है।
सोया रोटी बनाने के लिए सामग्री-
-1 कप गेहूं का आटा
-3 बड़े चम्मच सोया का आटा
-1 बड़ा चम्मच ऑलिव ऑयल
-नमक स्वादानुसार
सोया रोटी बनाने की विधि-
सबसे पहले सोया और गेहूं का आटा एक बाउल में लेकर उसे गूंथकर उसे 15 मिनट के लिए सेट होने के लिए ढक कर रख दें। अब इस आटे में तेल डालकर दोबारा गूथें। ताकि आटा थोड़ा नरम हो जाएगा। अब इन रोटियों को भी साधारण गेहूं के आटे की रोटी की तरह लोई बना कर तवे पर सेकें।
खाना खजाना /शौर्यपथ /सुबह नाश्ते में क्या बनाना है जो जल्दी बनने के साथ परिवार की सेहत के लिए सेहदमंद भी हो, यह सवाल सुबह उठते ही हर महिला के मन को परेशान करता है। आपके इसी सवाल का जवाब हो सकती है आज की यह रेसिपी, नाम है पनीर कुल्चा। पनीर कुल्चा एक शानदार हेल्दी स्नैक रेसिपी है, जिसे तैयार करना बेहद आसान है। खास बात यह है कि यह रेसिपी बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को बेहद पसंद होती है। तो आइए देर किस बात की जान लेते हैं कैसे बनाएं पनीर कुल्चा।
पनीर कुल्चा बनाने के लिए सामग्री-
पनीर कुल्चा आटे के लिए
-मैदा- 2 कप
-बेकिंग पाउडर- 1/2 चम्मच
-बेकिंग सोडा- 1/4 चम्मच
-दूध- 1/2 कप
-दही- 1 बड़ा चम्मच
-तेल- आवश्यकतानुसार
-नमक- 1/2 चम्मच
-चीनी- 1 चम्मच
पनीर कुल्चा स्टफिंग तैयार करने के लिए-
-धनिया पत्ती- 1 चम्मच
-बारीक कटी हुई शिमला मिर्च- 1/4 कप
-कटी हुई हरी मिर्च- 2
-सरसों के बीज- 1 चम्मच
-चावल की भूसी का तेल- 1 बड़ा चम्मच
-पिसी हुई काली मिर्च- 1/2 चम्मच
-टोमैटो केचप- 2 बड़े चम्मच
-घी- 2 बड़ा चम्मच
-जीरा- 1 चम्मच
-चाट मसाला पाउडर- 1/2 चम्मच
-अमचूर पाउडर- 1/4 बड़ा चम्मच
-नमक- आवश्यकतानुसार
-हरी चटनी- 1 चम्मच
-कद्दूकस हुआ पनीर- 200 ग्राम
-कटा हुआ अदरक- 1 छोटा चम्मच
-कटा हुआ टमाटर- 1/4 कप
-कटा प्याज- 1/2 कप
पनीर कुल्चा बनाने की विधि-
पनीर कुल्चा बनाने के लिए सबसे पहले मैदे को एक बड़े बाउल में निकालकर इसमें बेकिंग पाउडर, बेकिंग सोडा, चीनी, दूध, दही डालकर अच्छी तरह मिला लें। अब आवश्यकतानुसार पानी मिलाकर स्मूथ आटा गूंथ लें। अब एक पैन में तेल गरम करके सभी मसाले डालकर इसे ठंडा होने के लिए रख दें। मिश्रण ठंडा होने पर इसमें कद्दूकस किया हुआ पनीर, मसाला पाउडर और अमचूर पाउडर डालें। अब आटे की बॉल को छोटा-छोटा रोल करके इसमें पनीर का मिश्रण सेंटर में रखकर चारों तरफ से सभी किनारों को अच्छे से बंद करके बेलन की मदद से परांठे की तरह बेलें। अब परांठे पर थोड़ा सा घी लगाकर इसे गैस पर मीडियम आंच पर पकाएं। परांठे को दोनों तरफ से गोल्डन और कुरकुरा होने तक पकाएं। आप इस परांठे को हरी चटनी के साथ गर्मा-गर्म परोस सकते हैं।
धर्म संसार /शौर्यपथ / बृहस्पति ग्रह का वार गुरुवार है। हिन्दू धर्म में नवग्रह में बृहस्पति ग्रह और वारों में गुरुवार को श्रेष्ठ माना है। आखिर बृहस्पति ग्रह को नवग्रों में श्रेष्ठ क्यों माना जाता है। आओ जानते हैं इस संबंध में खास जानकारी।
1. सौरमंडल में सूर्य के आकार के बाद बृहस्पति का ही नम्बर आता है। इस ग्रह का व्यास लगभग डेढ़ लाख किलोमीटर और सूर्य से इसकी दूरी लगभग 778000000 किलोमीटर मानी गई है। यह 13 कि.मी. प्रति सेकंड की रफ्तार से सूर्य के गिर्द 11 वर्ष में एक चक्कर लगा लेता है। यह अपनी धूरी पर 10 घंटे में ही घूम जाता है। लगभग 1300 धरतियों को इस पर रखा जा सकता है।
2. जिस तरह सूर्य उदय और अस्त होता है, उसी तरह बृहस्पति जब भी अस्त होता है तो 30 दिन बाद पुन: उदित होता है। उदित होने के बाद 128 दिनों तक सीधे अपने पथ पर चलता है। सही रास्ते पर अर्थात मार्गी होने के बाद यह पुन: 128 दिनों तक परिक्रमा करता रहता है एवं इसके पश्चात्य पुन: अस्त हो जाता है। गुरुत्व शक्ति पृथ्वी से 318 गुना ज्यादा। इसकी गुरुत्व शक्ति के कारण ही यह धरती को सौर तूफान, बड़ी उल्कापिंड और अन्य अंतरिक्ष की आपदा से यह ग्रह बचा लेता है।>
3. धनु और मीन राशि के स्वामी गुरु के सूर्य, मंगल, चंद्र मित्र ग्रह हैं, शुक्र और बुध शत्रु ग्रह और शनि और राहु सम ग्रह हैं। नवग्रहों में बृहस्पति को गुरु की उपाधि प्राप्त है। इनके शुत्र बुध, शुक्र और राहु है। कर्क में उच्च का और मकर में नीच का होता है गुरु। लाल किताब के अनुसार चंद्रमा का साथ मिलने पर बृहस्पति की शक्ति बढ़ जाती है। वहीं मंगल का साथ मिलने पर बृहस्पति की शक्ति दोगुना बढ़ जाती है। सूर्य ग्रह के साथ से बृहस्पति की मान-प्रतिष्ठा बढ़ती है।>
4. मानव जीवन पर बृहस्पति का महत्वपूर्ण स्थान है। यह हर तरह की आपदा-विपदाओं से धरती और मानव की रक्षा करने वाला ग्रह है। बृहस्पति का साथ छोड़ना अर्थात आत्मा का शरीर छोड़ जाना है। गुरु ग्रह के कारण ही धरती का अस्तित्व बचा हुआ है। सूर्य, चंद्र, शुक्र, मंगल के बाद धरती पर इसका प्रभाव सबसे अधिक माना गया है। गुरु ग्रह के अस्त होने के साथ ही मांगलित कार्य भी बंद कर दिए जाते हैं क्योंकि गुरु से ही मंगल होता है।
5. गुरुवार की प्रकृति क्षिप्र है। यह दिन ब्रह्मा और बृहस्पति का दिन माना गया है। ज्योतिष के अनुसार गुरुवार या गुरु ग्रह का संबंध महर्षि बृहस्पति और भगवान दत्तात्रेय से है परंतु लाल किताब के अनुसार भगवान ब्रह्मा इसके देवता हैं और ब्राह्मण, दादा, परदादा को इससे संबंधित माना जाता है। पीपल, पीला रंग, सोना, हल्दी, चने की दाल, पीले फूल, केसर, गुरु, पिता, वृद्ध पुरोहित, विद्या और पूजा-पाठ यह सब बृहस्पति के प्रतीक माने गए हैं।
धर्म संसार /शौर्यपथ /ज्योतिष के अनुसार हर ग्रह की परिभाषा अलग है। भारतीय ज्योतिष और पौराणिक कथाओं में नौ ग्रह गिने जाते हैं, सूर्य, चन्द्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु। यहां पाठकों के लिए प्रस्तुत है सूर्य के बारे में रोचक जानकारी...
जानिए भगवान सूर्य के बारे में 14 खास बातें
* सूर्य सभी ग्रहों का मुखिया है।
* वैदिक काल से ही भारत में सूर्योपासना का प्रचलन रहा है
* सूर्य के बाल और हाथ सोने के हैं।
* सूर्यदेव के रथ को 7 घोड़े खींचते हैं, जो 7 चक्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
* सौर देवता, आदित्यों में से एक, कश्यप और उनकी पत्नियों में से एक अदिति के पुत्र।
* पौराणिक कथाओं के अनुसार, सूर्य की अधिक प्रसिद्ध संततियों में हैं शनि (सैटर्न), यम (मृत्यु के देवता) और कर्ण (महाभारत वाले) है।
* सूर्य 'रविÓ के रूप में 'रविवारÓ या 'इतवारÓ के स्वामी हैं।
* वेदों में सूर्य को जगत की आत्मा कहा गया है।
* सूर्य से ही इस पृथ्वी पर जीवन है।
* ज्योतिष शास्त्र में नव ग्रहों में सूर्य को राजा का पद प्राप्त है।
* सूर्य देव की प्रसन्नता के लिए इन्हें नित्य अघ्र्य देना चाहिए।
* मंत्र '? घृणि सूर्याय नम:Ó है।
* प्रतिदिन एक निश्चित संख्या में सूर्य मंत्र का जप करना चाहिए।
* सृष्टि में सबसे पहले सूर्यस्वरूप प्रकट हुआ इसलिए इनका नाम आदित्य पड़ा। सूर्य का एक अन्य नाम सविता भी है।
सेहत /शौर्यपथ / हम सभी जानते हैं कि हाइट बढ़ने एक निश्चित उम्र तक बढ़ती है। वहीं, आनुवांशिक कारणों के साथ कई ऐसी बातें हैं जिससे किसी व्यक्ति की लंबाई कितनी बढ़ेगी, इसका पता चलता है। कई पहलुओं के साथ डाइट भी एक खास वजह है जिससे किसी बच्चे की लंबाई प्रभावित होती है। आज हम आपको ऐसी चीजें बता रहे जिन्हें खाने से लंबाई बढ़ती है।
बैरीज
ब्लूबैरी, स्ट्रॉबेरी, ब्लैकबेरी या रास्पबैरी भी कई प्रकार के न्यूट्रिशन से लैस होती हैं। इसमें मौजूद विटामिन-सी कोशिकाओं को बेहतर करता है और टिशू रिपेयर करने का काम करता है। विटामिन-सी कॉलेजन के सिंथेसिस को भी बढ़ाता है, एक ऐसा प्रोटीन जिसकी मात्रा आपके शरीर में सबसे ज्यादा होती है।
पत्तेदार सब्जियां
पालक, केल, अरुगुला, बंदगोभी जैसी पत्तेदार सब्जियों में भी कई तरह के पोषक तत्व होते हैं। इन सब्जियों में विटामिन-सी, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम और पोटैशियम के अलावा विटामिन-के भी पाया जाता है जो हड्डियों के घनत्व को बढ़ाकर लंबाई बढ़ाने का काम करता है।
अंडा
अंडा न्यूट्रिशन का पावरहाउस है। इसमें प्रोटीन की भरपूर मात्रा पाई जाती है। इसमें हड्डियों की सेहत के लिए जरूरी कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं। 874 बच्चों पर हुए एक अध्ययन में पाया गया है कि नियमित रूप से अंडा खाने वाले बच्चों की हाइट बढ़ती है। अंडे के पीले भाग (यॉक) में मौजूद हेल्दी फैट भी शरीर को फायदा दे सकता है।
बादाम
बादाम में मौजूद कई प्रकार के विटामिन और मिनरल भी लंबाई के लिए बेहद जरूरी हैं। इसमें हेल्दी फैट के अलावा, फाइबर, मैग्नीज और मैग्नीशियम भी पाया जाता है। इसके अलावा, इसमें विटामिन-ई भी होता है, जो एंटीऑक्सिडेंट के रूप में दोगुना हो जाता है। एक स्टडी के मुताबिक, बादाम हमारी हड्डियों के लिए भी फायदेमंद चीज है।
साल्मन फिश
ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर साल्मन फिश भी सेहत के लिए बड़ी फायदेमंद है। ओमेगा-3 फैटी एसिड दिल की सेहत को फायदा पहुंचाने वाला एक फैट है, जो शरीर की ग्रोथ और डेवलपमेंट के लिए भी अच्छा माना जाता है। कुछ शोधकर्ताओं का कहना है कि ओमेगा फैटी-3 एसिड हड्डियों की ग्रोथ को भी बढ़ावा दे सकता है। ये बच्चों में नींद की समस्या को भी दूर कर सकता है, जो कि उनकी ग्रोथ पर बुरा असर डालती है।
शकरकंद
विटामिन-ए से युक्त शकरकंद हड्डियों की सेहत को सुधारकर लंबाई बढ़ाने में मदद करती है। इसमें सॉल्यूबल और इनसॉल्यूबल दोनों प्रकार के तत्व होते हैं, जो आपकी डायजेस्टिव हेल्थ को प्रमोट करते औंर आंतों के लिए अच्छे बैक्टीरिया के विकास को बढ़ावा देते हैं। यह विटामिन-सी के अलावा मैग्नीज, विटामिन बी6 और पोटेशियम का भी अच्छा स्रोत है।
सेहत /शौर्यपथ /कश्मीर के कहवा से लेकर मध्य भारत की मसाला चाय तक, देशभर में अलग-अलग चाय के फ्लेवर के लोग दीवाने हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं खाने-पीने की बाकी चीजों की ही तरह चाय पीने के भी कुछ खास नियम होते हैं। अगर आप भी चाय पीना पसंद करते हैं तो चाय का शौक रखने से पहले जान लें ये जरूरी नियम वरना हो सकते हैं कई गंभीर रोगों के शिकार।
भूलकर भी नजरअंदाज न करें चाय से जुड़े ये नियम-
खाली पेट न पिएं चाय-
कभी भी खाली पेट चाय पीने की गलती न करें। ऐसा करने से आप गंभीर रोगों की चपेट में आ सकते हैं। ऐसा करने से व्यक्ति को गैस और एसिडिटी की शिकायत हो सकती है।
चाय से पहले पिएं गुनगुना पानी-
खाली पेट चाय पीने से आंतों को नुकसान होता है। चाय पीने से पहले कुछ हल्का खाकर एक ग्लास गुनगुना पानी जरूर पी लें। ऐसा करने से व्यक्ति को गैस की शिकायत नहीं होती।
खाने के तुरंत बाद न पिएं चाय-
अक्सर लोगों को खाना खाने के तुरंत बाद चाय पीने की आदत होती है। ऐसा करने से आपका शरीर खाने में मौजूद पोषक तत्वों को ठीक से अवशोषित नहीं कर पाता है और शरीर को कई तरह के रोग घेरने लगते हैं। ध्यान रखें हमेशा भोजन और चाय के बीच में 1 घंटे का अंतर जरूर रखें।
सोते समय न करें चाय का सेवन-
रात को सोने से पहले जो लोग चाय पीते हैं, उन्हें नींद न आने की समस्या हो सकती है। ऐसा इसलिए चाय में मौजूद कैफीन नींद विरोधक होता है।
दिन में दो कप चाय पीना ही फायदेमंद-
पूरे दिन में दो कप चाय का सेवन सेहत को नुकसान नहीं पहुंचाता है। लेकिन इससे ज्यादा चाय का सेवन करने पर व्यक्ति की भूख मर जाती है और उसे नींद न आने की भी समस्या परेशान करने लगती है।
खाना खजाना /शौर्यपथ / मिस्सी रोटी खाने में काफी स्वाष्टिक होती है। मिस्सी रोटी लन्च या डिनर में कभी भी बनाई जा सकती है। इसे बनाना काफी आसान है। तो आइए जानते है कैसे बनाते है मिस्सी रोटी:
सामग्री :
गेहूं का आटा - 1 कप
बेसन - 1 कप
अजवायन - 1/4 छोटी चम्मच
हींग - 1-2 पिंच
हल्दी - 1/4 छोटी चम्मच
कसूरी मेथी - 1 टेबल स्पून
तेल - 2 छोटी चम्मच
नमक - स्वादानुसार
विधि:
आटे और बेसन को किसी बर्तन में निकाल लीजिए। अब इसमें नमक, अजवायन, हींग, हल्दी, कसूरी मेथी और तेल डालकर मिला लीजिए। पानी की सहायता से नरम आटा गूंथिए। इसे ढककर 15-20 मिनिट के लिये रख दीजिए। अब हाथ पर थोड़ा तेल लगाकर आटे को मल कर चिकना कीजिए।
आटे की लोई बना लें। अब इसे बेलकर रोटी बना लें। बेली गई रोटी को सेक लीजिए। सारी रोटी को इसी तरह बना कर तैयार कर लीजिए। मिस्सी रोटी तैयार हैं, गरमा गरम मिस्सी रोटी अपनी मन पसन्द सब्जी के साथ खाएं।
खाना खजाना /शौर्यपथ /1 कप चावल का आटा , 1/2 कप मैदा, 2 टी स्पून देशी घी, चुटकी भर नमक।
भरावन सामग्री :
2 कप किसा ताजा नारियल, पाव कप काजू दरदरा पिसा हुआ, पाव कप पिस्ता कतरन, 1 टी स्पून इलायची पावडर, 1/2 कप दूध, केसर 4-5 लच्छा, 1 कप शकर।
विधि :
एक कड़ाही में, नारियल, काजू, पिस्ता व शकर डालें तथा दूध डाल कर पकाते रहें। मावा जैसा गाढ़ा होने लगे तो आंच से उतारें व इलायची मिला लें। अब चावल के आटे में मैदा, घी व नमक मिलाकर गूंथ लें व पतली-पतली छोटी-छोटी पूरियां बेल लें।
भरावन सामग्री थोड़ी-थोड़ी भरकर मोदक तैयार कर लें। एक कड़ाही में घी गर्म करें व धीमी आंच पर मोदक सुनहरे होने तक लें। अब केसर को दूध में घोटें व मोदक पर बिंदी लगाकर सजाएं और पेश करें।
धर्म संसार /शौर्यपथ /वसंत (बसंत) पंचमी का त्योहार माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। इस दिन मां सरस्वती की पूजा का विधान है। इस बार वसंत (बसंत) पंचमी का त्योहार 16 फरवरी 2021 को है।
वाणी, लेखनी, प्रेम, सौभाग्य, विद्या, कला, सृजन, संगीत और समस्त ऐश्वर्य को प्रदान करने वाली देवी मां सरस्वती से शुभ आशीष प्राप्त करने का दिन है वसंत (बसंत) पंचमी। परिणय सूत्र में बंधने के लिए भी यह दिन श्रेष्ठ है।
सरलतम विधि
प्रात: काल सभी दैनिक कार्यों से निवृत्त होने के उपरांत मां भगवती सरस्वती की आराधना का प्रण या कहें कि संकल्प लेना चाहिए।
स्नान के बाद भगवान गणेश जी का ध्यान करना चाहिए।
स्कंद पुराण के अनुसार सफेद पुष्प, चन्दन, श्वेत वस्त्रादि से देवी सरस्वती जी की पूजा करना चाहिए।
सरस्वती जी का पूजन करते समय सबसे पहले उनका स्नान कराना चाहिए इसके पश्चात माता को सिन्दूर व अन्य श्रृंगार की सामग्री चढ़ाएं।
इसके बाद फूल माला चढ़ाएं।
संगीत के क्षेत्र में हैं तो वाद्य यंत्रों की पूजन करें और अध्ययन से नाता है तो समस्त विद्या सामग्री कलम, किताब, नोटबुक आदि का पूजन करें।
संभव हो सके तो मोर का पंख मां सरस्वती को चढ़ाएं।
आंगन में रंगोली सजाएं।
आम्र मंजरी भी देवी को अर्पित करें।
वासंती खीर या केशरिया भात का भोग लगाएं।
स्वयं भी केशरिया, पीले, वासंती या श्वेत परिधान पहनें।
फूलों से मां सरस्वती पूजन स्थल का श्रृंगार करें।
मां शारदा की आरती, सरस्वती मंत्र आदि से आराधना करें।
पीले चावल से ॐ लिखें और उसका भी पूजन करें।
देवी सरस्वती का मंत्र : श्रीं ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा
सरल प्रार्थना :
शारदा माता ईश्वरी, मैं नित सुमरि तोहे, हाथ जोड़ अरजी करूं विद्या वर दे मोहे
मिठाई से भोग लगाकर सरस्वती कवच का पाठ करें. मां सरस्वती जी के पूजा के वक्त इस मंत्र का जाप करने से असीम पुण्य मिलता है...
मां सरस्वती का श्लोक
मां सरस्वती की आराधना करते वक्त इस श्लोक का उच्चारण करना चाहिए:-
ॐ श्री सरस्वती शुक्लवर्णां सस्मितां सुमनोहराम्।।
कोटिचंद्रप्रभामुष्टपुष्टश्रीयुक्तविग्रहाम्।
वह्निशुद्धां शुकाधानां वीणापुस्तकमधारिणीम्।।
रत्नसारेन्द्रनिर्माणनवभूषणभूषिताम्।
सुपूजितां सुरगणैब्रह्मविष्णुशिवादिभि:।। वन्दे भक्तया वन्दिता च...
वसंत पंचमी 16 फरवरी को, जानिए 12 राशियों के सरस्वती मंत्र
वसंत-पंचमी यानी मां सरस्वती के जन्मदिन पर देवी को प्रसन्न करने के लिए राशि अनुसार वंदना करें। राशि के अनुसार मंत्र जपने से मां शारदा सुख, संपत्ति, विद्या, बुद्धि, यश, कीर्ति, पराक्रम, प्रतिभा और विलक्षण वाणी का आशीष प्रदान करती है। प्रस्तुत है आपकी राशि के अनुसार सरस्वती मंत्र-
मेष- ॐ वाग्देवी वागीश्वरी नम:
वृषभ- ॐ कौमुदी ज्ञानदायनी नम:
मिथुन- ॐ मां भुवनेश्वरी सरस्वत्यै नम:
कर्क- ॐ मां चन्द्रिका दैव्यै नम:
सिंह- ॐ मां कमलहास विकासिनी नम:
कन्या- ॐ मां प्रणवनाद विकासिनी नम:
तुला- ॐ मां हंससुवाहिनी नम:
वृश्चिक- ॐ शारदै दैव्यै चंद्रकांति नम:
धनु- ॐ जगती वीणावादिनी नम:
मकर- ॐ बुद्धिदात्री सुधामूर्ति नम:
कुंभ- ॐ ज्ञानप्रकाशिनी ब्रह्मचारिणी नम:
मीन- ॐ वरदायिनी मां भारती नम:
धर्म संसार /शौर्यपथ / 31 जनवरी और 1 फरवरी को संकट चौथ का शुभ व्रत है। इस दिन विशेष रूप से 7 धान को तिल के साथ मिलाकर सवा किलो का लड्डू बनाया जाता है और उसे बलि की तरह काटा जाता है...कुछ जगहों पर थाली में तिल और गुड का कोई पशु बनाकर काटा जाता है...
इसके पीछे मान्यता है कि संकट चतुर्थी की कथा में जिस प्रकार ब्राहमणी का बालक बलि देने के बाद भी श्री गणेश जीकी अनुकम्पा से सुरक्षित बचा रहा वैसे ही हमारी संतान भी हर तरह के संकट से बची रहे...और उस कथा की स्मृति में बलि की परम्परा भी बनी रहे...
इसदिन तिल के दान से 7 शुभ फल मिलते हैं...
मान-सम्मान में वृद्धि होती है।
धन का आगमन होता है।
विकट समस्याओं का समाधान प्राप्त होता है।
सुख शांति का वातावरण होता है।
यश एवं बल की शक्ति प्राप्त होती है।
संकट में रक्षा होती है।
प्रगति के अवसर मिलते हैं।
संकष्टी चतुर्थी के दिन कैसे करें पूजन, पढ़ें आसान विधि एवं मुहूर्त
संकष्टी चतुर्थी, सकट चौथ, संकट चौथ, वक्रतुंडी चतुर्थी, माही और तिलकुटा चौथ के नाम से जाने जाने वाली इस चतुर्थी पर श्री गणेश का पूजन किया जाता है। आइए पढ़ें पूजन विधि-
गणेश चतुर्थी की पूजन विधि :-
* श्री चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठकर प्रतिदिन के कर्मों से निवृ होकर स्नान करें।
* फिर एक पटिए पर लाल कपड़ा बिछाकर गणपति की स्थापना के बाद इस तरह पूजन करें-
* सबसे पहले घी का दीपक जलाएं। इसके बाद पूजा का संकल्प लें।
* फिर गणेश जी का ध्यान करने के बाद उनका आह्वान करें।
* इसके बाद गणेश को स्नान कराएं। सबसे पहले जल से, फिर पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और चीनी का मिश्रण) और पुन: शुद्ध जल से स्नान कराएं।
* गणेश के मंत्र व चालीसा और स्तोत्र आदि का वाचन करें।
* अब गणेश जी को वस्त्र चढ़ाएं। अगर वस्त्र नहीं हैं तो आप उन्हें एक नाड़ा भी अर्पित कर सकते हैं।
* इसके बाद गणपति की प्रतिमा पर सिंदूर, चंदन, फूल और फूलों की माला अर्पित करें।
* अब बप्पा को मनमोहक सुगंध वाली धूप दिखाएं।
* अब एक दूसरा दीपक जलाकर गणपति की प्रतिमा को दिखाकर हाथ धो लें।
* हाथ पोंछने के लिए नए कपड़े का इस्तेमाल करें।
* अब नैवेद्य चढ़ाएं। नैवेद्य में मोदक, मिठाई, गुड़ और फल शामिल करें।
* इसके बाद गणपति को नारियल और दक्षिण प्रदान करें।
* सकंष्टी/ सकट चतुर्थी की कथा श्रवण करें अथवा पढ़ें।
* अब अपने परिवार के साथ गणपति की आरती करें। गणेश जी की आरती कपूर के साथ घी में डूबी हुई एक या तीन या इससे अधिक बत्तियां बनाकर की जाती है।
* इसके बाद हाथों में फूल लेकर गणपति के चरणों में पुष्पांजलि अर्पित करें।
* अब गणपति की परिक्रमा करें। ध्यान रहे कि गणपति की परिक्रमा एक बार ही की जाती है।
* इसके बाद गणपति से किसी भी तरह की भूल-चूक के लिए माफी मांगें।
* पूजा के अंत में साष्टांग प्रणाम करें।
* रात को चंद्रमा की पूजा और दर्शन करने के बाद व्रत खोलना चाहिए। {इस चतुर्थी पर चंद्रोदय रात्रि 08 बजकर 27 मिनट पर होगा।}
भविष्य पुराण के अनुसार संकष्टी चतुर्थी की पूजा और व्रत करने से हर तरह के कष्ट दूर हो जाते हैं। गणेश पुराण के अनुसार इस व्रत के प्रभाव से सौभाग्य, समृद्धि और संतान सुख मिलता है। शाम को चंद्रमा निकलने से पहले गणपति जी की एक बार और पूजा करें और संकष्टी व्रत कथा का फिर से पाठ करें। अब व्रत का पारण करें।
संकष्टी चतुर्थी पर चंद्रोदय का समय और पूजन का मुहूर्त :-
चतुर्थी तिथि 31 जनवरी 2021 को रात्रि 08.24 मिनट से आरंभ होगी और इस तिथि का समापन 1 फरवरी 2021 को शाम 06.24 मिनट पर होगा।
इस दिन चंद्रोदय का समय रात्रि 08.27 मिनट है।
आज इस मंत्र के जाप से प्रसन्न होंगे श्री गणेश, चढ़ाएं यह प्रसाद
प्रतिमाह कृष्ण पक्ष में श्री गणेश संकष्टी चतुर्थी व्रत किया जाता है। इस दिन भगवान श्री गणेश को अपनी राशिनुसार प्रसाद चढ़ाने से समस्त कष्ट दूर होकर जीवन अपार खुशियों से भर जाता है। आइए जानें संकष्टी चतुर्थी के दिन कौन-सा मंत्र जपें और क्या चढ़ाएं प्रसाद...
मेष : ॐ वक्रतुण्डाय हुं।
प्रसाद : छुआरा और गु़ड़ के लड्डू।
वृष- ॐ ह्रीं ग्रीं ह्रीं।
प्रसाद : मिश्री, शक्कर, नारियल से बने लड्डू।
मिथुन-ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं गं गणपतेय वर वरद् सर्वजनं मे वशमानाय स्वाहा।
प्रसाद : मूंग के लड्डू, हरे फल।
कर्क- ॐ वक्रतुण्डाय हुं॥
प्रसाद : मोदक के लड्डू, मक्खन, खीर।
सिंह-ॐ श्रीं गं सौभाग्य गणपतेय वरवरदं सर्वजनं में वशमानयं स्वाहा।
प्रसाद : गुड़ से बने मोदक के लड्डू व लाल फल।
कन्या- ॐ गं गणपतयै नमः या ॐ श्रीं श्रियैः नमः॥
प्रसाद : हरे फल, मूंग की दाल के लड्डू व किशमिश।
तुला- ॐ ह्रीं, ग्रीं, ह्रीं गजाननाय नम:।
प्रसाद : मिश्री, लड्डू और केला।
वृश्चिक- ॐ वक्रतुण्डाय हुं॥
प्रसाद : छुआरा और गु़ड़ के लड्डू।
धनु- हुं गं ग्लौं हरिद्रागणपतयै वरवरद दुष्ट जनहृदयं स्तम्भय स्तम्भय स्वाहा॥
प्रसाद : मोदक व केला।
मकर- ॐ लंबोदराय नमः
प्रसाद : मोदक के लड्डू, किशमिश, लड्डू।
कुंभ- ॐ सर्वेश्वराय नमः
प्रसाद : गुड़ लड्डू व मौसमी फल।
मीन- ॐ सिद्धि विनायकाय नमः
प्रसाद : बेसन के लड्डू, केला, बादाम।
उपरोक्त मंत्र जाप के द्वारा और श्री गणेश को अपनी राशिनुसार भोग लगाने से आप जीवन में संपन्नता पा सकते हैं।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
