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June 01, 2026
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सेहत /शौर्यपथ / पौराणिक लेख और कई अत्याधुनिक शोधों ने इस बात को प्रमाणित किया है कि सफेद मूसली एक चमत्कारी औषधि है जिसका प्रयोग कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं को ठीक करने में किया जाता है। सफेद मूसली के लाभ तो आपने सुने होंगे, लेकिन इसके यह 7 फायदे आप बिल्‍कुल नहीं जानते होंगे, आइए जानें...
* अगर आपको अक्सर बदन दर्द की शि‍कायत बनी रहती है, तो प्रतिदिन सफेद मूसली की जड़ का सेवन फायदेमंद होता है। उच्च रक्तचाप, गठिया रोग में भी यह लाभकारी है।
* पथरी/स्टोन की समस्या में सफेद मूसली को इन्द्रायण की सूखी जड़ के साथ बराबर मात्रा (1-1 ग्राम) में पीसकर, इसे एक गिलास पानी में डालकर खूब मिलाएं और मरीज को प्रतिदिन सुबह पिलाएं। यह उपाय सात दिनों में ही अपना प्रभाव दिखाता है और पथरी गल जाती है।
* शारीरिक शिथिलता को दूर कर ऊर्जा को बढ़ाने में सफेद मूसली बेहद लाभकारी होती है, यही कारण है कि कई तरह की दवाइयों के निर्माण में सफेद मूसली का प्रयोग किया जाता है।
* महिलाओं के लिए मूसली अत्यधिक लाभकारी होती है। यह उम्र के असर को कम कर सुन्दरता बढ़ाने में भी मददगार साबित होती है। इसके अलावा अन्य नारी प्रमुख समस्याओं में भी इसका सेवन फायदेमंद होता है।
* पेशाब में जलन की शिकायत होने पर तो सफेद मूसली की जड़ को पीसकर इलायची के साथ दूध में उबालकर पीना बेहद फायदेमंद होता है। दिन में दो बार इस दूध को पीना लाभदायक होगा।
* सफेद मुसली पुरुषों को शारीरिक तौर पर पुष्ट बनाने के अलावा इनके वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या बढाने में मददगार है।
* कई शोध ये भी बताते हैं कि डायबिटीज के बाद होने वाली नपुंसकता की शिकायतों में भी सफेद मूसली सकारात्मक असर दिखाती है।

खाना खजाना /शौर्यपथ /अगर आप भी व्रत या उपवास रखने की सोच रहे हैं तो आपके लिए राजगिरे के लड्‍डू काफी फायदेमंद साबित हो सकते है। इसको बनाने की विधि एकदम आसान है, बस 4 टिप्स और खस्ता राजगिरे के लड्‍डू तैयार...
सामग्री :
200 ग्राम राजगिरा, 150 ग्राम शकर, 1 कप खोपरे का बूरा, पाव चम्मच इलायची पावडर।
विधि :
* राजगिरे के लड्डू बनाने के लिए सबसे पहले राजगिरे को साफ कर लें।
* अब एक कड़ाही गर्म करके 1-1 मुट्ठी राजगिरा उसमें डालकर कपड़े की छोटी-सी पोटली बनाकर उस राजगिरे को चलाएं।
* अब राजगिरा फूल जाएगा। इस प्रकार सारे राजगिरे की फुली बना लें।
* फिर शकर की दो तार की चाशनी बनाकर राजगिरे की फुली, इलायची व खोपरे का बूरा उसमें मिला दें।
* थोड़ा ठंडा होने पर मध्यम आकार के लड्डू बना लें।
ये बिना घी से तैयार किए गए लड्डू खास कर बुजुर्गों के लिए एक स्वादिष्ट व्यंजन है। उपवास के दिनों में लाभदायी यह लड्‍डू सभी को पसंद होते है।

सेहत /शौर्यपथ / स्वस्थ, सेहतमंद रहने के लिए योग का नियमित अभ्यास करने की सलाह दी जाती है। अगर आप तंदुरुस्त रहना चाहते हैं तो अपनी दिनचर्या में एक्सरसाइज के साथ ही अनुलोम-विलोम को भी शामिल करें, यह आपने अधिकतर सुना ही होगा। लेकिन अनुलोम-विलोम होता क्या है, इसे आप घर पर कैसे कर सकते हैं, इसका अभ्यास करने के दौरान किन बातों का ध्यान रखना आवश्यक है, इन तमाम सवालों के बारे में हमने बात की योग प्रशिक्षक संगीता विश्वकर्मा से। आइए जानते हैं एक्सपर्ट एड्वाइस।
शरीर की तंत्रिका प्रणाली में अवरोध उत्पन्न होने से कई प्रकार के शारीरिक एवं मानसिक रोग होते हैं। इन्हीं तंत्रिका प्रणाली की शुद्धिकरण हेतु प्राणायाम का अभ्यास किया जाता है। वैसे तो प्राणायाम की पूरी क्रिया की सफलता का श्रेय आपकी एकाग्रता और सजगता को जाता है। लेकिन अनुलोम-विलोम का अभ्यास सही प्रकार से करने पर अन्य प्राणायामों से भी अधिक लाभ होता है।
प्राणायाम विधि-
सुखासन, अर्द्धपद्मासन, पद्मासन या सिद्धासन जिसमें कुछ देर आराम से बैठ सकें, बैठ जाएं।
कमर, गर्दन एवं सिर को एक सीध में रखें।
बाएं हाथ को बाएं घुटने पर ज्ञान मुद्रा में रखें। दाहिने हाथ की मध्यमा एवं तर्जनी अंगुलियों को दोनों भौंहों के बीच रखें।
अंगूठे से दाहिनी नासिका को बंद करते हए बाईं नासिका से मध्यम गति में श्वास लें।
अब बाईं नासिका को अनामिका एवं कनिष्ठा अंगुलियों से बंद कर लें। इसके पश्चात अंगूठे को दाईं नासिका से हटाते हुए धीमी गति में दोगुने समय में श्वास बाहर निकालें।
पुन: दाईं नासिका को अंगूठे से बंद करते हुए एवं बाईं नासिका को अंगुलियों से मुक्त करते हुए धीमी गति में दोगुने समय में श्वास बाहर निकालें। इस प्रकार कम से कम 10 से 15 चक्र नियमित अभ्यास करें।
सावधानियां-
श्वास क्रिया ध्वनिरहित होनी चाहिए।
श्वास-प्रश्वास लयबद्ध होना चाहिए।
सीने को कम-ज्यादा अत्यधिक न फैलाएं।
थकान महसूस होने पर अभ्यास रोक दें।
जरूरत पड़ने पर कुछ समय के लिए शवासन कर लें।
प्राणायाम के लाभ-
मस्तिष्क को चुस्त, क्रियात्मक और संवेदनशील बनाता है।
शारारिक और मानसिक संतुलन स्थापित करते हुए रोगों को समाप्त करता है।
मन शांत एवं प्रसन्न रहता है।
अस्थमा, हृदयरोग, माइग्रेन एवं साइनस जैसे रोगों में लाभ देता है।
विशेष-
कोरोना जैसी महामारी में इस प्राणायाम का नियमित अभ्यास प्रत्येक आयु वर्ग को करना चाहिए।

धर्म संसार /शौर्यपथ /अधिकतर घरों में तुलसी को पौधा होता है। तुलसी पौथे की देखरेख बहुत ही सावधानी से करना होती है अन्यथा यह पौधा जल्दी ही मुरझाकर खत्म हो जाता है। इसकी देखरेख या सेवा करने के कुछ नियम है उन्हीं में से 5 नियमों को जान लें। इन नियमों का पालन करने से जहां विष्णु, लक्ष्मी प्रसन्न होंगे वहीं सभी देवी और देवता भी प्रसन्न होकर आशीर्वाद देंगे।
1. प्रथम सेवा : तुलसी की जड़ों में रविवार और एकादशी को छोड़कर प्रतिदिन उचित मात्रा में जल अर्पण करना चाहिए। अर्थात ना कम और ना ज्यादा। यदि ज्यादा मात्रा में जल अर्पण किया तो पौधा समाप्त हो जाएगा और कम मात्रा में भी। कम फिर भी चल जाएगा परंतु ज्यादा नहीं। वैसे यदि एक दिन छोड़कर भी आप पानी अर्पण करेंगे तो चलेगा। बारिश में तो सप्ताह में दो बार ही डालें। रविवार और एकादशी के दिन तुलसी महारानी ठाकुरजी के लिए व्रत रखती है। वह केवल इन्हीं दो दिनों विश्राम करती और निंद्रा लेती हैं।
2.द्वितीय सेवा : समय समय पर तुलसी की मं‍जरियों को तोड़कर तुलसी से अलग करते रहें अन्यथा तुलसी बीमार होकर सूख जाएगी। कहते हैं कि जब तक यह मंजरियां तुलसी माता के शीश पर रहती है तब तक वह घोर कष्ट में रहती है। तुसली पत्ता, दल या मंजरी तोड़ने से पहले तुलसी जी की आज्ञा लेना जरूरी है। रविवार और एकादशी को यह कार्य नहीं करना चाहिए। नाखुनों से तुलसी को नहीं तोड़ना चाहिए।
3. तीसरी सेवा : वह महिलाएं तुलसी माता से दूर रहें जिन्हें पीरियड चल रहे हैं। यदि वे तुलसी के आसपास भी होंगी तो तुलसी मुरझाकर मर जाएगी। अत: इस बात का विशेष ध्यान रखें।
4. चौथी सेवा : तुलसी माता के आसपास वस्त्रों को ना सुखाएं। गिले वस्त्रों के आसपास से साबुन की गंध और सफेद किस्म के कीड़े या बैक्टिरिया रहते हैं जिनके कारण तुलसी को भी कीड़े लग सकते हैं। ऐसा अक्सर देखा गया है कि कपड़ों के कारण तुलसी में कीड़े लगे और वह सड़कर, काली पड़कर खतम हो गई।
5. पांचवां सेवा : तुलसी के पौधे को मौसम की मार से भी बचा कर रखना चाहिए। ज्यादा ठंड या गर्मी से तुलसी समाप्त हो जाती है। इसलिए ठंड में तुलसी माता के आसपास कपड़े या कांच का कवर लगाया जा सकता है। तेज बारिश से भी तुलसी को बचाकर रखें।
नोट : तुलसी के पौधे की देखभाल, तुलसी के पौधे को हरा भरा कैसे बनाएं इस संबंध में इंटरनेट पर सर्च करें या किसी माली से मिलें।

धर्म संसार /शौर्यपथ /वर्ष में 6 ऋतुएं होती हैं- 1. शीत-शरद, 2. बसंत, 3. हेमंत, 4. ग्रीष्म, 5. वर्षा और 6. शिशिर। ऋतुओं ने हमारी परंपराओं को अनेक रूपों में प्रभावित किया है। बसंत, ग्रीष्म और वर्षा देवी ऋतु हैं तो शरद, हेमंत और शिशिर पितरों की ऋतु है। आओ जानते हैं वसंत ऋतु के बारे में 5 खास बातें।
1. अंग्रेज़ी कलेंडर के अनुसार फरवरी, मार्च और अप्रैल माह में वसंत ऋतु रहती है। वसंत ऋतु चैत्र और वैशाख माह अर्थात मार्च-अप्रैल में, ग्रीष्म ऋतु ज्येष्ठ और आषाढ़ माह अर्थात मई जून में, वर्षा ऋतु श्रावण और भाद्रपद अर्थात जुलाई से सितम्बर, शरद ऋतु अश्‍विन और कार्तिक माह अर्थात अक्टूबर से नवम्बर, हेमन्त ऋतु मार्गशीर्ष और पौष माह अर्थात दिसंबर से 15 जनवरी तक और शिशिर ऋतु माघ और फाल्गुन माह अर्थात 16 जनवरी से फरवरी अंत तक रहती है।
2. वसंत को ऋतुओं का राजा अर्थात सर्वश्रेष्ठ ऋतु माना गया है। वसंत से नववर्ष की शुरुआत होती है। जिस तरह इन मौसम में प्रकृति में परिवर्तन होता है उसी तरह हमारे शरीर और मन-मस्तिष्क में भी परिवर्तन होता है। और, जिस तरह प्रकृति के तत्व जैसे वृक्ष-पहाड़, पशु-पक्षी आदि सभी उस दौरान प्रकृति के नियमों का पालन करते हुए उससे होने वाली हानि से बचने का प्रयास करते हैं उसी तरह मानव को भी ऐसा करने की ऋषियों ने सलाह दी। उस दौरान ऋषियों ने ऐसे त्योहार और नियम बनाए जिनका कि पालन करने से व्यक्ति सुखमय जीवन व्यतीत कर सके।
3. हिन्दू धर्म के पहले माह की शुरुआत चैत्र माह से होती है। प्राचीन समय से ही यह माह सभी सभ्यताओं में नववर्ष की शुरुआत का माह माना जाता है। चैत और बैसाख में बसंत ऋतु अपनी शोभा का परिचय देती है। यह ऋतु अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार मार्च और अप्रैल में रहती है।
4. इस ऋतु में होली, धुलेंडी, रंगपंचमी, बसंत पंचमी, नवरात्रि, रामनवमी, नव-संवत्सर, हनुमान जयंती और गुरु पूर्णिमा उत्सव मनाए जाते हैं। इनमें से रंगपंचमी और बसंत पंचमी जहां मौसम परिवर्तन की सूचना देते हैं वहीं नव-संवत्सर से नए वर्ष की शुरुआत होती है।
5. इसके अलावा होली-धुलेंडी जहां भक्त प्रहलाद की याद में मनाई जाती हैं वहीं नवरात्रि मां दुर्गा का उत्सव है तो दूसरी ओर रामनवमी, हनुमान जयंती और बुद्ध पूर्णिमा के दिन दोनों ही महापुरुषों का जन्म हुआ था।

सेहत /शौर्यपथ /हींग की भारतीय भोजन में खास जगह है। अनेक व्यंजनों, अचार, चटनी आदि में तो इसका इस्तेमाल होता ही है, इसमें मौजूद कई पोषक तत्वों, एंटीऑक्सीडेंट्स और एंटीबायोटिक गुणों की वजह से यह संक्रामक बीमारियों की रोकथाम में भी उपयोगी है। आइए जानते हैं हींग के फायदे-
हींग के पोषक तत्व
-हींग में कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन, केरोटीन, राइबोफ्लेविन और अच्छी मात्रा में प्रोटीन, फाइबर व कार्बोहाइड्रेट जैसे पोषक तत्त्व पाए जाते हैं जो हमें स्वस्थ रखते हैं।
-गैस की समस्या में खाने के बाद आधा कप गुनगुने पानी या लस्सी में एक चुटकी हींग मिला कर पीना लाभकारी है। एक ग्राम भुनी हींग में अजवाइन और काला नमक मिला कर गर्म पानी के साथ लेने से गैस बननी बंद हो जाती है।
-एक कप गर्म पानी में एक-चौथाई चम्मच सूखा अदरक पाउडर, एक-एक चुटकी काला नमक और हींग मिला कर पीने से पेट फूलने की समस्या पर काबू पाया जा सकता है।
-अपच से परेशान हैं तो एक-एक चम्मच सोंठ, काली मिर्च, करी पत्ता, अजवायन और जीरा मिला कर पीस लें। एक चम्मच तिल के तेल में चुटकी भर हींग भून कर इसमें मिलाएं। आखिर में थोड़ा-सा सेंधा नमक मिलाएं। इसे चावल के साथ खाने से आराम मिलेगा।
-केले के गूदे या जरा-से गुड़ में हींग रख कर खाने से उल्टी, डकार और हिचकी बंद हो जाती है।
-एक कप गर्म पानी में थोड़ी-सी हींग डाल कर उबालें। इस पानी में कपड़ा भिगो कर पेट की सिंकाई करें। पेट दर्द या अफरने पर अजवायन और नमक के साथ चुटकी भर हींग मिला कर खाएं।
-मसूड़ों से खून बहने और दंत क्षय की स्थिति में एक कप पानी में हींग का छोटा टुकड़ा और एक लौंग उबालें। गुनगुना होने पर इस पानी से कुल्ला करने पर आराम मिलेगा।
-दाग-धब्बों, पिंपल्स जैसी त्वचा की समस्याओं में हींग का उपयोग काफी मददगार साबित होता है। एक चुटकी हींग पाउडर में पानी मिला कर बने पेस्ट को मास्क की तरह नियमित रूप से पिंपल्स पर लगाएं।
-शरीर के किसी हिस्से में कांटा चुभने पर वहां हींग का घोल भर दें। कुछ समय में कांटा अपने आप बाहर निकल आएगा और दर्द से भी तुरंत आराम मिलेगा।

सेहत /शौर्यपथ /दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं, एक जिन्हें कटहल बिल्कुल पसंद नहीं होता और दूसरे वे लोग जिन्हें कटहल बेहद पसंद होता है। आपको कटहल पसंद है या नहीं लेकिन इसके अनगिनत फायदों को पाने के लिए आपको इसे जरूर खाना चाहिए। खासतौर पर अगर आप वेट लॉस करना चाहते हैं या फिर आपको शुगर की समस्या है। आइए, जानते हैं कटहल के फायदे-
अल्सर के लिए रामबाण
कटहल की पत्तियों की राख अल्सर के इलाज के लिए बहुत उपयोगी होती है। इसकी ताजा हरी पत्तियों को साफ धोकर सुखा लें और उसका चूर्ण तैयार कर लें। पेट के अल्सर में इस चूर्ण को खाने से काफी आराम मिलता है।
चेहरे के निखार के लिए कटहल
कटहल के बीज का चूरन बना कर उसमें थोड़ा शहद मिलाकर चेहरे पर लगाने से चेहरे के दाग-धब्बे मिट जाते हैं। जिन लोगों की चेहरा रुखा और बेजान होता है उन लोगों को कटहल का रस अपने चेहरे पर लगाना चाहिए। इसकी मसाज तब तक करे जब तक यह सूख न जाए फिर थोड़ी देर के बाद अपना चेहरा पानी के साथ धो लें। झुर्रियों से निजात पाने के लिए कटहल का पेस्ट बना कर और उसमें एक चम्मच दूध मिलाकर धीरे-धीरे चेहरे पर लगाना चाहिए। फिर गुलाब जल या ठंडे पानी से चेहरा साफ कर लें। नियमित रूप से ऐसा करने से चेहरे की झुर्रियों सेे छुटकारा मिल जाता है।
मुंह के छालों से राहत
मुंह में छाले होने पर कटहल की कच्ची पत्तियों को चबाकर थूक देना चाहिए। यह छालों को ठीक कर देता है।
एसिडिटी से राहत
पके हुए कटहल के गूदे को अच्छी तरह से मैश करके पानी में उबाल लें। इस मिश्रण को ठंडा कर एक गिलास पीने से जबरदस्त स्फूर्ति आती है। यही मिश्रण यदि अपच के शिकार रोगी को दिया जाए तो उसे फायदा मिलता है।
डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद
डायबिटीज में कटहल की पत्तियों के रस का सेवन काफी फायदेमंद रहता है। यह रस हाई ब्लडप्रेशर के रोगियों के लिए भी उत्तम है।
अस्थमा को रखता है कंट्रोल
कटहल की जड़ अस्थमा के रोगियों के लिए लाभदायक मानी जाती है। इसे पानी के साथ उबाल कर बचा हुआ पानी छान कर पीने से अस्थमा को कंट्रोल किया जा सकता है।
थायराइड में फायदेमंद कटहल
थायराइड के लिए भी कटहल फायदेमंद है। इसमें मौजूद सूक्ष्म खनिज और कॉपर थायराइड चयापचय के लिए प्रभावशाली होता है। यहां तक कि यह बैक्टेयरियल और वाइरल इंफेक्शन से भी बचाता है।
आंखों की रोशनी बढ़ाता है
पके हुए कटहल के पल्प को अच्छी तरह से मैश करके पानी में उबालकर पीने से ताजगी आती है। कटहल में विटामिन ए पाया जाता है जिससे आंखों की रोशनी बढ़ती है और त्वचा निखरती है।
इम्युनिटी बढ़ाए कटहल
इसमें विटामिन C, A और एंटीऑक्सिडेंट भी काफी मात्रा में पाए जाते हैं। यही वजह है कि शरीर की इम्युनिटी बढ़ाने में कारगर रोल निभाता है। मजबूत इम्युनिटी बीमारियों और इनफेक्शन को शरीर से दूर रखने में अहम रोल निभाती है।
वेट लॉस के लिए कटहल
यह उन लोगों के अच्छा विकल्प हो सकता है, जो अपना वजन घटाना चाहते हैं। इसमें फैट नहीं होता और कैलोरी भी काफी कम होती है। इसके साथ ही इसमें काफी मात्रा में पौष्टिक तत्व भी होते हैं। कटहल में प्रोटीन भी अच्छी मात्रा में होता है, जिससे पेट काफी देर तक भरा-भरा महसूस होता है।

खाना खजाना /शौर्यपथ / आम का अचार तो बहुत ही कॉमन चीज है लेकिन ज्यादातर लोगों को कटहल का अचार बनाने को लेकर काफी कंफ्यूजन रहती है। ऐसे में हम आपके लिए लाए हैं कटहल के अचार की देसी रेसिपी लाए हैं।
सामग्री :
3 kg कटहल , टुकड़ों में कटा हुआ
1 1/4 कप नमक
1 कप हल्दी
2 1/2 कप पिसी हुई राई
1 कप कुटी लाल मिर्च
2 टेबल स्पून कलौंजी
2 टेबल स्पून हींग
2 kg सरसों का तेल
विधि :
इसमें 1/4 कप नमक के साथ कटहल को उबालें।
पानी निकालें और कटहल को सूखने के लिए छोड़ दें। आपको इसे सूखा होगा।
जब कटहल ठंडा होकर सूख जाए तो नमक, राई, लाल मिर्च, कलोंजी और हींग में मिलाएं।
अच्छी तरह मिक्स करें।
इसे ढककर 4 दिन मैरीनेट होने के लिए रख दें, एक दिन में एक बार जरूर चलाएं।
कांच की बरनी में इसे अच्छी तरह टाइट बंद करके रखें।
सरसों के तेल को अच्छी तरह से गर्म करें।
इसे ठंडा होने दें और कटहल की बरनी में डालें।
अचार तेल में पूरी तरह डूब जाना चाहिए।
अचार को पकने में 2 से 3 दिन का समय लगेगा, इसके बाद अचार खाने के लिए पूरी तरह तैयार हो जाएगा।
इस बात का ध्यान रहे अचार में तेल अच्छी मात्रा में हो फिर यह अचार भी बाकी अचार की तरह ठीक रहेगा।

धर्म संसार / शौर्यपथ/ इस वर्ष यानी वसंत पंचमी 16 फरवरी 2021 दिन मंगलवार को मनाई जाएगी। मंगलवार को रेवती नक्षत्र होने से शुभ योग बनता है। शुभ योग में महा सरस्वती के लिए किए जाने वाला पूजन और यज्ञ आदि कर्म पूरे वर्ष के लिए शुभ होते हैं। विद्यालयों, शिक्षण संस्थानों में हर वर्ष सरस्वती पूजन और यज्ञ किए जाते हैं और सरस्वती मां के आशीर्वाद के साथ विद्या, विवेक और बुद्धि का आशीर्वाद भी प्राप्त करते हैं।

यह हैं सरस्वती पूजन के शुभ मुहूर्त
प्रातः काल 6:59 से 8:27 तक कुंभ लग्न (स्थिर लग्न)। उसके पश्चात 11:27 बजे से 13:23 बजे तक वृष लग्न ( स्थिर लग्न ) है। दोनों लग्न सरस्वती पूजन के लिए बहुत ही शुभ हैं। स्थिर लग्न में पूजा अपने साधक को पूर्ण लाभ देती है।

विद्यार्थी ऐसे करें पूजा
विद्यार्थी इस दिन प्रात:काल उठकर स्नान के पश्चात श्वेत अथवा पीत वस्त्र धारण करें। मां सरस्वती के चित्र के समक्ष सफेद पुष्प और पीला मिष्ठान चढ़ाएं और मां सरस्वती से विद्या और बुद्धि का आशीर्वाद लें।
या कुंदेंदुतुषारहारधवला, या शुभ्रवस्त्रावृता। या वीणा वर दण्डमण्डित करा, या श्वेत पद्मासना। या ब्रहमाऽच्युत शंकर: प्रभृतिर्भि: देवै: सदा वन्दिता। सा मां पातु सरस्वती भगवती, नि:शेषजाड्यापहा।।

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मां सरस्वती के इस श्लोक से मां का ध्यान करें। इसके पश्चात ’ओम् ऐं सरस्वत्यै नम:’ का जाप करें और इसी लघु मंत्र को नियमित रूप से आप अर्थात विद्यार्थी वर्ग प्रतिदिन कुछ समय निकाल कर इस मंत्र से मां सरस्वती का ध्यान करें। इस मंत्र के जाप से विद्या, बुद्धि, विवेक बढ़ता है।
वसंतोत्सव नवीन ऊर्जा देने वाला उत्सव है। शिशिर ऋतु के असहनीय सर्दी से मुक्ति मिलने का मौसम आरंभ हो जाता है। प्रकृति में परिवर्तन आता है और जो पेड़-पौधे शिशिर ऋतु में अपने पत्ते खो चुके थे वे पुनः नव-नव पल्लव और कलियों से युक्त हो जाते हैं। वसंतोत्सव माघ शुक्ल पंचमी से आरंभ होकर के होलिका दहन तक चलता है। कहा जाता है कि वसंत पंचमी के दिन जैसा मौसम होता है वैसा पूरे होली तक ऐसा ही मौसम रहता है।

सेहत /शौर्यपथ / स्क्रबिंग के बिना आपकी दैनिक स्किनकेयर रूटीन अधूरी है। क्लींजिंग, टोनिंग और मॉइस्चराइजिंग आवश्यक है, लेकिन स्क्रबिंग आपकी त्वचा को नया जीवन प्रदान करता है। ऐसे में अपने स्किनकेयर रुटीन में सुपर एक्सफ़ोलिएटिंग एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर ब्राउन शुगर स्क्रब को शामिल करने से बेहतर कुछ नहीं है।
अगर ब्राउन शुगर अभी तक आपकी दैनिक स्किनकेयर रुटीन का हिस्सा नहीं है, तो हम बता रहे हैं कि आप कितना कुछ मिस कर रहीं हैं:
यहां हैं स्किन केयर के लिए ब्राउन शुगर स्क्रब के फायदे
एंटीऑक्सिडेंट में समृद्ध है
एक अध्ययन का दावा है कि ब्राउन शुगर हानिकारक फ्री रेडिकल्स को नष्ट कर सकती हैं। इसमें मौजूद फेनोलिक और वाष्पशील यौगिक इसे एंटीऑक्सीडेंट गुण प्रदान करते हैं।
इसमें एएचए शामिल है
ब्राउन शुगर अल्फा हाइड्रॉक्सी एसिड से भरपूर होती है। यह यौगिक आपकी त्वचा में प्रवेश कर सकता है और त्वचा की कोशिकाओं को बांधने वाले यौगिक को तोड़ सकता है। यह सेल पुनर्जन्म और कायाकल्प को बढ़ावा देता है।
यह आपकी त्वचा को बिना नुकसान पहुंचाए एक्सफोलिएट करता है
ब्राउन शुगर सफेद दानेदार चीनी की तुलना में बहुत नरम है। तो, यह धीरे से आपकी त्वचा को नुकसान पहुंचाए बिना एक्सफोलिएट करता है।
इसके अलावा, यह आपकी त्वचा को हाइड्रेटेड रखता है और नमी को लॉक करता है। इसलिए, आपकी त्वचा बिल्कुल भी ड्राय नहीं लगती।

अब जब आप जानते हैं कि ब्राउन शुगर आपकी त्वचा के लिए क्या कर सकता है, तो यहां कुछ ष्ठढ्ढङ्घ ब्राउन शुगर स्क्रब की रेसिपी बताई गई हैं जिन्हें आप घर पर बना सकती हैं।
यहां है ग्लोइंग स्किन के लिए 5 होममेड ब्राउन शुगर स्क्रब और उनकी रेसिपी
मुंहासों के लिए ब्राउन शुगर और नारियल तेल स्क्रब
इसके लिए आपको चाहिए...
1/2 कप ब्राउन शुगर
1/2 कप नारियल का तेल
अपनी पसंद के एसेंशियल ऑयल की 2-3 बूंदें
कैसे इस्तेमाल करे
एक कटोरे में सभी सामग्रियों को मिलाएं।
इसे अपने चेहरे पर लगाएं और 10 मिनट तक सर्कुलर मोशन में स्क्रब करें।
इसके बाद इसे धो लें।
इसे हफ्ते में एक बार त्वचा पर अप्लाई करें।
ब्राउन शुगर और हनी स्क्रब
इसके लिए आपको चाहिए...
1 बड़ा चम्मच ब्राउन शुगर
1 बड़ा चम्मच कच्चा शहद
1 बड़ा चम्मच जैतून या नारियल तेल
अपने पसंदीदा एसेंशियल ऑयल की 2-3 बूंदें
कैसे इस्तेमाल करें
एक कटोरे में सभी सामग्रियों को मिलाएं।
अपने चेहरे पर स्क्रब अप्लाई करें और 10 मिनट के लिए धीरे-धीरे मसाज करें।
इसे 5-10 मिनट के लिए त्वचा पर रहने दें और फिर धो लें।
इसे आप हफ्ते में दो बार कर सकती हैं।
ब्राउन शुगर और वेनिला स्क्रब
इसके लिए आपको चाहिए....
1 कप ब्राउन शुगर
1 चम्मच वेनिला एक्सट्रैक्ट
1/2 कप जैतून / नारियल / बादाम का तेल
1/2 चम्मच विटामिन ई तेल (एक कैप्सूल को निचोड़ें)
कैसे इस्तेमाल करें
एक कटोरा लें और सभी सामग्रियों को मिलाएं।
आप अपनी पसंद के अनुसार तेल की मात्रा को समायोजित कर सकती हैं।
स्क्रब को अपनी त्वचा पर अप्लाई करें (आप अपने चेहरे और शरीर पर भी इसका उपयोग कर सकती हैं)।
10 मिनट के लिए स्क्रब करें और इसे 10 मिनट के लिए छोड़ दें।
फिर इसे गर्म पानी से धो लें।
आप इसे हफ्ते में दो बार कर सकती हैं।
ब्राउन शुगर और ऑलिव ऑयल स्क्रब
इसके लिए आपको चाहिए....
1/2 कप ब्राउन शुगर
2 चम्मच एक्सट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल (आप अपनी जरूरत के अनुसार तेल की मात्रा को समायोजित कर सकती हैं)
कैसे इस्तेमाल करें
एक कटोरे में सभी सामग्रियों को मिलाएं और यह उपयोग के लिए तैयार है।
इसे अपने चेहरे और गर्दन पर अप्लाई करें और धीरे-धीर अपनी उंगलियों से मसाज करें।
10 मिनट तक मसाज करें और फिर धो लें।
आप हफ्ते में एक से दो बार इसका इस्तेमाल कर सकती हैं
ब्राउन शुगर और कॉफी ग्राउंड स्क्रब
इसके लिए आपको चाहिए....
1/4 कप ब्राउन शुगर
3/4 कप कॉफी ग्राउंड्स
1 चम्मच वेनिला एक्सट्रैक्ट
1/3 कप नारियल तेल
कैसे इस्तेमाल करें
तेल को छोड़कर एक कटोरी में सभी सामग्रियों को मिलाएं।
अंत में इसमें तेल डालें। इसका एक गाढ़ा पेस्ट बनाने के लिए आप तेल की मात्रा को समायोजित कर सकती हैं।
इसे अपनी त्वचा (चेहरे और शरीर दोनों) पर अप्लाई करें और सर्कुलर मोशन में धीरे-धीरे स्क्रब करें।
10 से 15 मिनट तक मसाज करें
फिर गुनगुने पानी से इसे धो लें
हफ्ते में 1 बार इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

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