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सेहत /शौर्यपथ / अगर आप थक जाते हैं, पैदल चलने से कतराते है और सीढियों की बजाए लिफ्ट में जाना प्रीफर करते हैं तो इसका मतलब है कि आपके शरीर में स्टैमिना की कमी है। इसकी सबसे बड़ी वजह एक जगह बैठे रहना और सक्रिय जीवन शैली
का अभाव हो सकता है।
लॉकडाउन के दिनों में तो यह समस्या घर घर में देखने को मिल रही है। कई बार स्टैमिना बढ़ाने के लिए हम जिम जाना शुरू करते हैं या जॉगिंग का प्लान बनाते हैं, लेकिन एक या दो दिनों के बाद ही आलस की वजह से हम वापिस उसी लाइफ स्टाइल को जीना शुरू कर देते हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि जब तक हम अपने शरीर को एनर्जेटिक फूड नहीं देंगे तब तक हमारा शरीर हमारे दिमाग की बात नहीं मानेगा।
केला
केला सुपर फूड की कैटेगरी में शामिल किया गया है। यह कार्बोहाइड्रेट और पोटैशियम से भरपूर होता है, जिसमें नैचुरल शुगर और स्टार्च मौजूद होता है। इस वजह से यह हमें दिनभर एर्जेटिक बनाए रखता है। आप जिम जाने से पहले भी इसे ले सकते हैं।
दही
कैल्शियम और प्रोटीन से भरपूर दही को हमें ब्रेकफास्ट में जरूर शामिल करना चाहिए। इसे आप फलों और तमाम तरह के नट्स के साथ भी खा सकते हैं। यह ना सिर्फ हमारे बोन को मजबूत बनाता है, हमारे मसल्स को भी एनर्जी देता है।
दलिया
आपको जानकर हैरानी होगी कि यह हमारे शरीर को तुरंत बूस्ट करने की क्षमता रखता है। दलिया को आप खिचड़ी या पुलाव के रूप में भी खा सकते हैं जो टेस्ट के मामले में भी बहुत अच्छा है। सुबह के नाश्ते में यदि आप दलिया का प्रयोग करेंगे तो आपको देर तक भूख नहीं लगेगी और आप दिन भर एनर्जी से भरपूर रहेंगे। आपका स्टैमिना भी बढे़गा।
अंडे
इन्हें न सिर्फ झटपट बनाया जा सकता है, बल्कि यह पोषक तत्वों से भी भरपूर होते हैं। बोन और मसल्स दोनों को मजबूत बनाने में अंडा लोगों की पहली पसंद बना हुआ है। इसमें मौजूद अमीनो एसिड की वजह से थकावट भी दूर रहती है।
पीनट बटर
मूंगफली से तैयार यह पीनट बटर हेल्दी फूड कैटेगरी में आता है। हेल्दी फैट और प्रोटीन होने की वजह से आप इसे मल्टीग्रेन ब्रेड के साथ सुबह सुबह खाएं। इसे खाकर आप लंबे समय तक एनर्जी से भरे रहेंगे।
बादाम
हेल्दी फैट के पावर हाउस इस ड्राइफ्रूट को आप ब्रेकफास्ट में जरूर शामिल करें। यह पोषक तत्वों से भरपूर तो है ही, मेटाबॉलिज्म को बढ़ाने में भी मददगार है। आपके स्टैमिना को बढ़ाने के मामले में यह बहुत ही काम का फूड है। इसे आप रात भर भिगोकर रखें और सुबह खाली पेट खाएं।
ओट्स
फाइबर और कार्बोहाइड्रेड से भरपूर ओट्स आपकी सुस्ती को दूर रखता है। यह लंबे समय तक आपको काम करने के लिए एनर्जी देने में सक्षम है। अगर आप ओट्स का सेवन करते हैं तो सुस्ती और थकान आपसे कोसों दूर रहेंगी।
सेहत /शौर्यपथ /सेहतमंद बने रहने के लिए लोग हेल्दी डाइट लेते है, एक्सरसाइज करते है। लेकिन अच्छी सेहत पाने के लिए हमें अपनी कुछ आदतों में बदलाव करने की भी आवश्यकता हैं। दरअसल सोने से पहले कुछ बातें ध्यान रखनी चाहिए, नहीं तो ये आदतें आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक सिध्द हो सकती हैं। इन आदतों की वजह से आपकी नींद खराब होती है जिसका सीधा असर आपकी सेहत पर पड़ता है। तो आइए जानते हैं, कि वे कौन सी बातें है जिनका आपको ख्याल रखना चाहिए..
लोग नियमित सुबह के समय ब्रश करते है, लेकिन रात में सोने से पहले दांतों को साफ करना उनके लिए जरूरी नहीं हैं। जबकि रात को सोने से पहले ब्रश करना बहुत जरूरी होता है। वरना खाने के कण आपके दांतों में फंसे रह जाते हैं, जिसकी वजह से आपके दांतों और मसूड़ों को नुकसान पहुंचता है।
कुछ लोगों की रात को सोने से पहले कुछ न कुछ खाने की आदत होती है, जैसे बिस्किट, स्नैक्स आदि लेकिन देर रात खाने की वजह से सेहत पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता हैं। इससे डायबिटीज रोग होने का खतरा बढ़ जाता है।
सोने से पहले इस बात का ख्याल रखें कि हाथ-पैर और फेस वॉश करके ही सोने जाएं। यदि आप ऐसा नहीं करते है तो बैक्टीरिया बिस्तर में चले जाते हैं। इससे हमारे स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचता है।
वहीं फेसवॉश किए बिना सोने से त्वचा संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ता है जैसे मुंहासे, चेहरे पर छोटे-छोटे दाने आदि
धर्म संसार / शौर्यपथ / भगवान शिव को वैसे तो किसी अस्त्र या शस्त्र की आवश्यकता नहीं है क्योंकि उनका तीसरा नेत्र ही एक अस्त्र के समान भी कार्य करता है, परंतु फिर भी वे त्रिशूल रखते हैं। यह तो सभी जानते हैं कि वे त्रिशूल रखते हैं परंतु त्रिशूल के अलावा भी उनके पास कुछ अस्त्र शस्त्र थे जिसमें से 4 के संबंध में जानिए।
पाशुपतास्त्र और फरसा भी शिव का अस्त्र है।
शिव धनुष :
1. शिव ने जिस धनुष को बनाया था उसकी टंकार से ही बादल फट जाते थे और पर्वत हिलने लगते थे। ऐसा लगता था मानो भूकंप आ गया हो। यह धनुष बहुत ही शक्तिशाली था। इसी के एक तीर से त्रिपुरासुर की तीनों नगरियों को ध्वस्त कर दिया गया था। इस धनुष का नाम पिनाक था। देवी और देवताओं के काल की समाप्ति के बाद इस धनुष को देवरात को सौंप दिया गया था।
देवताओं ने राजा जनक के पूर्वज देवरात थे। राजा जनक के पूर्वजों में निमि के ज्येष्ठ पुत्र देवरात थे। शिव-धनुष उन्हीं की धरोहरस्वरूप राजा जनक के पास सुरक्षित था। इस धनुष को भगवान शंकर ने स्वयं अपने हाथों से बनाया था। उनके इस विशालकाय धनुष को कोई भी उठाने की क्षमता नहीं रखता था। लेकिन भगवान राम ने इसे उठाकर इसकी प्रत्यंचा चढ़ाई और इसे एक झटके में तोड़ दिया।
2. शिवजी के पास एक ओर धनुष था। वह धनुष कंस ने मथुरा के राजगुरु से हथिया लिया था। वह धनुष कई पीढ़ियों से मथुरा के राजकुल के पास था। यह धनुष महादेवजी ने नंदी को, नंदी ने परशुराम को और परशुराम ने कंस के पूर्वजों को दिया था। ऐसे दो ही धनुष थे। एक त्रैता में श्रीराम के द्वारा तोड़ा गया था और दूसरा धनुष राजकुल के पास था जिससे त्रिपुरासुर का वध किया गया था। इस धनुष को श्रीकृष्ण ने कंस की रंगशाला में प्रवेश करके तोड़ दिया था और तभी उन्होंने कंस का वध भी कर दिया था।
शिव का चक्र : चक्र को छोटा, लेकिन सबसे अचूक अस्त्र माना जाता था। सभी देवी-देवताओं के पास अपने-अपने अलग-अलग चक्र होते थे। उन सभी के अलग-अलग नाम थे। शंकरजी के चक्र का नाम भवरेंदु, विष्णुजी के चक्र का नाम कांता चक्र और देवी का चक्र मृत्यु मंजरी के नाम से जाना जाता था। सुदर्शन चक्र का नाम भगवान कृष्ण के नाम के साथ अभिन्न रूप से जुड़ा हुआ है।
यह बहुत कम ही लोग जानते हैं कि सुदर्शन चक्र का निर्माण भगवान शंकर ने किया था। प्राचीन और प्रामाणिक शास्त्रों के अनुसार इसका निर्माण भगवान शंकर ने किया था। निर्माण के बाद भगवान शिव ने इसे श्रीविष्णु को सौंप दिया था। जरूरत पड़ने पर श्रीविष्णु ने इसे देवी पार्वती को प्रदान कर दिया। पार्वती ने इसे परशुराम को दे दिया और भगवान कृष्ण को यह सुदर्शन चक्र परशुराम से मिला।
त्रिशूल : इस तरह भगवान शिव के पास कई अस्त्र-शस्त्र थे लेकिन उन्होंने अपने सभी अस्त्र-शस्त्र देवताओं को सौंप दिए। उनके पास सिर्फ एक त्रिशूल ही होता था। यह बहुत ही अचूक और घातक अस्त्र था। त्रिशूल 3 प्रकार के कष्टों दैनिक, दैविक, भौतिक के विनाश का सूचक है। इसमें 3 तरह की शक्तियां हैं- सत, रज और तम। प्रोटॉन, न्यूट्रॉन और इलेक्ट्रॉन। इसके अलावा पाशुपतास्त्र और फरसा भी शिव का अस्त्र है।
शौर्यपथ /हिमालय में कुछ ऐसी जगहें हैं जहां पर शून्य से 45 डीग्री से भी नीचे तापमान रहता है फिर भी वहां पर निर्वस्त्र रूप से रहकर साधुओं को तप करते देखे जाने की घटना से भारतीय सैकिन वाकिफ है। एक ओर जहां पर भारतीय सैनिक खून को जमा देवे और हाड़ कपा देने वाली ठंड में विशेष वस्त्र पहनकर देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं वहीं ये नागा साधु शिव के ध्यान में लीन रहते हैं। इन्हें निर्वस्त्र और भूखे पासे घूमते हुए देखना किसी आश्चर्य से कम नहीं है। अब मन में सवाल उठता है कि यह कैसे संभव हो सकता है? तो जानिए इसका उत्तर।
कॉपीराइट कंटेंट
1. हाड़ी विद्या : कंठ के कूप में संयम करने पर भूख और प्यास की निवृत्ति हो जाती है अर्थात भूख और प्यास नहीं लगती। इसे कुछ क्षेत्रों में हाड़ी विद्या भी कहते हैं। यह विद्या पौराणिक पुस्तकों में मिलती है। इस विद्या को प्राप्त करने पर व्यक्ति को भूख और प्यास की अनुभूति नहीं होती है और वह बिना खाए- पिए बहुत दिनों तक रह सकता है।
कंठ की कूर्मनाड़ी में संयम करने पर स्थिरता व अनाहार सिद्धि होती है। कंठ कूप में कच्छप आकृति की एक नाड़ी है। उसको कूर्मनाड़ी कहते हैं। कंठ के छिद्र, जिसके माध्यम से पेट में वायु और आहार आदि जाते हैं, को कंठकूप कहते हैं। कंठ के इस कूप और नाड़ी के कारण ही भूख और प्यास का अहसास होता है।
कैसे प्राप्त करें यह विद्या : इस कंठ के कूप में संयम प्राप्त करने के लिए शुरुआत में प्रतिदिन प्राणायाम और भौतिक उपवास का अभ्यास करना जरूरी है।
2. काड़ी विद्या : इस विद्या को प्राप्त करने पर कोई व्यक्ति ऋतुओं (बरसात, सर्दी, गर्मी आदि) के बदलाव से प्रभावित नहीं होता है। इस विद्या की प्राप्ति के बाद चाहे वह व्यक्ति बर्फीले पहाड़ों पर बैठ जाए, पर उसको ठंड नहीं लगेगी और यदि वह अग्नि में भी बैठ जाए तो उसे गर्माहट की अनुभूति नहीं होगी।
कैसे प्राप्त करें : हठयोग की क्रियाओं और प्राणायाम को साधने से यह विद्या सहज ही प्राप्त हो जाती है।
धर्म संसार /शौर्यपथ /उत्तररांचल प्रदेश में हरिद्वार अर्थात हरि का द्वार है। इसे गंगा द्वार और पुराणों में इसे मायापुरी क्षेत्र कहा जाता है। यहां पर पौराणिक काल के कई प्रसिद्ध और चमत्कारिक स्थान है। यहां पर माता के 3 चमत्कारिक स्थान है। पहला मायादेवी शक्तिपीठ, दूसरा चंडी देवी मंदिर और तीसरा मनसा देवी मंदिर। आओ जानते हैं मायादेवी शक्तिपीठ मंदिर के बारे में।
हरिद्वार शहर में शक्ति त्रिकोण है। इसके एक कोने पर नीलपर्वत पर स्थित भगवती देवी चंडी का प्रसिद्ध स्थान है। दूसरे पर दक्षेश्वर स्थान वाली पार्वती। कहते हैं कि यहीं पर सती योग अग्नि में भस्म हुई थीं और तीसरे पर बिल्वपर्वतवासिनी मनसादेवी विराजमान हैं। यह भी कहा जाता है कि यहां पर माता सती का मन गिरा था इसलिए यह स्थान मनसा नाम से प्रसिद्ध हुआ।
मायादेवी शक्तिपीठ :
1. हरिद्वार में भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में एक माया देवी का मंदिर है।
2. यहां माता सती का हृदय और नाभि गिरे थे। नाभि गिरने के कारण इसे ब्रह्मांड का केंद्र भी माना जाता है।
3. माया देवी को हरिद्वार की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है, जिसका इतिहास 11 शताब्दी से उपलब्ध है।
4. मंदिर के बगल में 'आनंद भैरव का मंदिर' भी है।
5. इस मंदिर में धार्मिक अनुष्ठान के साथ ही तंत्र साधना भी की जाती है।
6. मायादेवी शक्तिपीठ होने के कारण ही हरिद्वार का नाम मायापुरी भी है।
7. प्राचीनकाल से इस मंदिर में देवी की पिंडी विराजमान है। 18वीं शताब्दी में इस मंदिर में देवी की मूर्तियों की प्राणप्रतिष्ठा की गई।
8. हरिद्वार की रक्षा के लिए एक शक्ति त्रिकोण है। इस त्रिकोण के दो बिंदु पर्वतों पर मां मनसा और मां चंडी देवी रक्षा कवच के रूप में विद्यमान है तो वहीं त्रिकोण का शिखर धरती की ओर है और उसी अधोमुख शिखर पर भगवती माया विराजमान हैं।
9. मां के इस दरबार में मां माया के अलावा मां काली और देवी कामाख्या के भी दर्शन भी किए जा सकते हैं।
10. माया देवी शक्तिपीठ हरिद्वार रेलवे स्टेशन से महज दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां आसानी से किसी भी साधन से पहुंचा जा सकता है।
सजगः राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर हुआ प्रेरक प्रयास, सरपंच ने सराहा
राजनांदगांव / शौर्यपथ / ‘सजग’ आडियो कार्यक्रम की कड़ियां कोरोना महामारी के दौर में हिम्मत हारने के बजाय समझदारी के साथ हौसला बनाए रखकर जीने की सीख दे रहीं हैं, जो विशेषकर बच्चों के दिमाग में सकारात्मक प्रभाव डालने के दृष्टिकोण से लाभदायक हो सकता है। इस आडियो संदेश को गांव-गांव में न सिर्फ सुना जा रहा है, बल्कि लोग इससे प्रेरित भी हो रहे हैं। इन दिनों सजग के संक्षिप्त आडियो संदेशों की श्रृंखला की 29वीं कड़ी का प्रसारण किया जा रहा है, जो ‘अपनापन’ विषय पर केंद्रित है।
‘अपनापन’ की यह रोचक कहानी राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर राजनांदगांव ग्रामीण क्रमांक-1 परियोजना, बोरी सेक्टर के जोरातराई गांव में आंगनबाड़ी क्रमाक-3 में सुनाई गई। लोगों को सकारात्मक वातावरण देने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता लीलेश्वरी साहू ने गांव की सरपंच ज्योति स्वामी को भी यह आडियो सुनने के लिए आमंत्रित किया। सरपंच के साथ ग्राम पंचायत के सभी पंच भी आंगनबाड़ी केंद्र पहुंचे और ‘अपनापन’ का संदेश सुना। जिसमें बताया गया है कि, चांदनी (काल्पनिक पात्र) को अमरूद बहुत अच्छे लगते हैं, सामने हों तो खाती ही रहे। मां कल बाजार से किलोभर लाईं तो 2 उठाकर बोली, इन्हें रिंकू (काल्पनिक पात्र) को दे आती हूं। मां ने बड़े प्यार से सर पर हाथ फेरकर हामी भर दी, जानती हैं आजकल रिंकू के यहां कठिन दिन चल रहे हैं, उसके पिता का काम छूट गया है, अब कभी काम होता है, कभी नहीं। गुजारा मुश्किल से होता है। खाना तक पूरा नहीं पड़ता। चांदनी जब से आई है, वो और रिंकू साथ खेले हैं। कई बार रिंकू ने बताया, कि रात को घर के सब लोग बिना खाना खाए ही सो गए थे। चांदनी पास बैठकर सुनती है, रिंकू को गले लगा लेती है। खाने को कुछ देती भी है पर रिंकू को उसका पास बैठना-चुपचाप बात सुनना ही ज्यादा शांति देता है। उसे ऐसा लगता है, वह अकेला नहीं है। इस मुश्किल समय में यह बड़ी बात लगती है। आडियो संदेश सुनकर सरपंच ज्योति स्वामी ने कहा यह वास्तव में रोचक है और ऐसा संदेश बच्चों को भी जरूर सुनाया जाना चाहिए।
दरअसल, समाजसेवी संस्था सेंटर फार लर्निंग रिसोर्सेस (सीएलआर) ने सजग नाम से पालकों को सुनाने के लिए संक्षिप्त आडियो संदेशों की श्रृंखला तैयार की है, इन आडियो संदेशों में माता-पिता के लिए सरल सुझाव दिए गए हैं, ताकि वह अपने बच्चों के लिए प्यार से अच्छी सेहत के लिए बेहतर वातावरण तैयार कर सकें। यह आडियो संदेश पालकों को सकारात्मक ऊर्जा तो प्रदान करते ही हैं, साथ ही उन्हें यह ज्ञान भी मिलता है कि बच्चों के समग्र विकास हेतु कठिन परिस्थितियों में भी वह क्या बेहतर कर सकते हैं। सजग आडियो कार्यक्रम का क्रियान्वयन महिला एवं बाल विकास विभाग तथा सीएलआर के द्वारा किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में यूनिसेफ और एचसीएल फाउंडेशन भी सहयोग कर रहे हैं। इस तरह यह प्रेरक आडियो संदेश सुदूर अंचल में रह रहे पालकों तक भी अब सहजता से पहुंचाए जा रहे हैं।
इस संबंध में महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी रेणु प्रकाश ने बताया, सजग नाम का यह आडियो क्लिप डायरेक्ट्रेट से प्रत्येक सोमवार की सुबह व्हाट्सएप के जरिए जिला अधिकारियों को भेजा जाता है। जिला अधिकारियों से परियोजना अधिकारी, परियोजना अधिकारी से सुपरवाइजर और सुपरवाइजर से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं तक पहुंचता है। इसके बाद आंगनबाड़ी कार्यकर्ता इन संदेशों को पालकों को सुनाती हैं। उन्होंने बताया, जिन पालकों के पास व्हाट्सएप या स्मार्ट फोन जैसी सुविधाएं नहीं हैं, उनके घर तक जाकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताएं पालकों को संदेश सुनाकर उनसे चर्चा भी करती हैं। इन दिनों आडियो संदेशों की 29वीं कड़ी का प्रसारण किया जा रहा है, जिससे गांव-गांव में यह प्रेरक आडियो संदेश सुना जा रहा है। वहीं सीएलआर की दुर्ग संभाग कार्यक्रम अधिकारी अमृता भोईर ने बताया, कोरोना संक्रमण जैसे कठिन समय में भी सजग कार्यक्रम पूरे छत्तीसगढ़ में क्रियान्वित किया जा रहा है। सजग के आडियो संदेशों की श्रृंखला पूरे 35,000 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के प्रयासों से लगभग 5 लाख परिवारों तक पहुंचाए जा रहे हैं। यह आडियो कार्यक्रम छोटे बच्चों की बेहतरी के लिए किए जा रहे विभिन्न प्रयासों का एक हिस्सा है। छत्तीसगढ़ के साथ ही बिहार, उत्तरप्रदेश व महाराष्ट्र जैसे राज्यों में भी क्षेत्रीय बोली-भाषा में तैयार किए गए इस एप को वाट्सएप के जरिए प्रसारित किया जा रहा है।
सेहत /शौर्यपथ /सर्दियों के मौसम में अक्सर ज्यादा और तला-भुना खाने की वजह से लोग वजन बढ़ने की शिकायत करने लगते हैं। अगर आपकी भी यही शिकायत है तो आप बड़ी आसानी से इस मौसम में अपने शरीर को डिटॉक्स करके सभी हानिकारक विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालकर बढ़ते वजन से छुटकारा पा सकते हैं। इसमें तुलसी-अजवाइन का ड्रिंक आपकी मदद कर सकता है। आइए जानते हैं कैसे।
तुलसी और अजवाइन का डिटॉक्स पानी डाइजेशन, मेटाबॉलिज्म और डिटॉक्सिफिकेशन को अच्छा करके शरीर को सभी जरूरी पोषक प्रदान करता है। इसकी वजह से व्यक्ति बहुत जल्द अपना वजन कम कर सकता है।
अजवाइन के फायदे-
अजवाइन गैस्ट्रिक रस को स्रावित करके डाइजेशन बढ़ाता है। अजवाइन में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट विषाक्त पदार्थों को शरीर से बाहर निकालकर वजन कम करने में मदद करते हैं।
तुलसी के फायदे-
तुलसी शरीर के लिए प्राकृतिक डिटॉक्स की तरह काम करती है। तुलसी शरीर से सभी हानिकारक विषाक्त पदार्थों को साफ करके वजन घटाने में मदद करती है। यह पाचन तंत्र के लिए भी बेहद फायदेमंद है।
तुलसी-अजवाइन का पानी बनाने का सही तरीका-
तुलसी-अजवाइन का पानी बनाने के लिए रात-भर एक चम्मच सूखी अजवाइन को एक गिलास पानी में भिगोकर रख दें। अगले दिन सुबह 4 से 5 तुलसी के पत्तों को अजवाइन के पानी के साथ उबालें। अब इस पानी को एक गिलास में छानकर गर्म या ठंडा करके पी लें। जल्दी फर्क के लिए आप रोजाना इस पानी को सुबह पिएं। लेकिन ध्यान रखें इस पानी का बहुत ज्यादा सेवन न करें।
खाना खजाना /शौर्यपथ / राष्ट्रीय पर्व के रूप में हर साल जनवरी महीने की 26 तारीख को मनाया जाता है। अगर आप भी इस दिन देशभक्ति के रंग में खुद को रंगना चाहते हैं तो उसकी शुरूआत अपनी किचन से कर सकते हैं। आइए जानें इस दिन को खास बनाने के लिए कैसे बना सकते है तिरंगा पनीर टिक्का।
तिरंगा पनीर टिक्का बनाने के लिए सामग्री-
-400 ग्राम पनीर (बड़े टुकड़ों में कटा हुआ)
- 2 टीस्पून लाल मिर्च पाउडर
- 1 टेबलस्पून बेसन
- 1-1 टीस्पून अदरक
- हरी मिर्च और लहसुन का पेस्ट
- थोड़ा-सा हरा धनिया (कटा हुआ)
- नींबू का रस
- गरम मसाला पाउडर
- जीरा पाउडर
- यलो पैपर पाउडर,
- कसूरी मेथी
- धनिया पाउडर और नमक स्वादानुसार
- 2-2 टेबलस्पून काजू पेस्ट
- फ्रेश क्रीम
- हरी चटनी और पालक प्यूरी
- 1 कप दही (पानी निथारा हुआ)
- थोड़ा-सा खोआ (मैश किया हुआ)
- थोड़ी-सी गुलाब की पंखुड़ियां
- थोड़े-से केसर फ्लेक्स (क्रश किए हुए)
- 1 टेबलस्पून तेल
तिरंगा पनीर टिक्का बनाने का तरीका-
सैफरन कलर के लिए मेरिनेशन: बाउल में थोड़ा-सा तेल, लाल मिर्च पाउडर, गुलाब की पंखुड़ियां, क्रश्ड किया हुआ केसर फ्लेक्स, धनिया पाउडर, गरम मसाला पाउडर, नमक, 1 टेबलस्पून दही, बेसन, थोड़ा-सा अदरक-लहसुन-हरी मिर्च का पेस्ट मिक्स करें। इस पेस्ट में 5-7 पनीर क्यूब्स को मेरिनेट करके 30 मिनट तक रखें।
व्हाइट कलर के लिए मेरिनेशन: बाउल में थोड़ा-सा तेल, फ्रेश क्रीम, काजू पेस्ट और खोआ मिलाएं। स्वादानुसार थोड़ा-सा गरम मसाला पाउडर, धनिया पाउडर, नमक, 1 टेबलस्पून दही, बेसन, थोड़ा-सा अदरक-हरीमिर्च-लहसुन का पेस्ट मिलाएं। 5-7 पनीर क्यूब्स को मेरिनेट करके 30 मिनट तक रखें।
ग्रीन कलर के लिए मेरिनेशन: बाउल में थोड़ा-सा तेल, पालक प्यूरी, थोड़ा-सा गरम मसाला पाउडर, धनिया पाउडर, नमक, कसूरी मेथी, 1 टेबलस्पून दही, बेसन, थोड़ा-सा अदरक-हरीमिर्च-लहसुन का पेस्ट मिलाएं। इस पेस्ट में 5-7 पनीर क्यूब्स को मेरिनेट करके 30 मिनट तक रखें।
टिक्का बनाने के लिए: सींक पर एक-एक सैफरन पनीर क्यूब्स, व्हाइट पनीर क्यूब्स और ग्रीन पनीर क्यबूस लगाकर तंदूर में सुनहरा होने तक रोस्ट करें। बीच-बीच में पलटते रहें। हरी चटनी के साथ सर्व करें।
धर्म संसार /शौर्यपथ / पौष मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत है। यह प्रदोष व्रत 26 जनवरी 2021 (मंगलवार) को है। मंगलवार को होने के कारण इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है। प्रदोष व्रत हर महीने एक बार शुक्ल पक्ष और एक बार कृष्ण पक्ष में आते हैं। इस दिन भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा की जाती है। मान्यता है कि प्रदोष व्रत रखने से कलह, आर्थिक संकट और विवाह संबंधी परेशानियां दूर हो जाती हैं।
प्रदोष 2021 शुभ मुहूर्त-
त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ- 25 जनवरी दिन सोमवार को देर रात 12 बजकर 24 मिनट पर।
त्रयोदशी तिथि समाप्त- 26 जनवरी को देर रात 01 बजकर 11 मिनट पर।
ऐसे में प्रदोष व्रत 26 जनवरी को रखा जाएगा।
पूजा का समय- शाम 05:56 से रात्रि 08:35 तक रहेगा
भौम प्रदोष व्रत के दिन चंद्रमा मिथुन राशि में गोचर कर रहा है। त्रयोदशी तिथि पर वैधृति योग का निर्माण हो रहा है। अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12:12:22 से 12:55:12 तक रहेगा। राहुकाल का समय- 15:14:27 से 16:34:47। शास्त्रों के अनुसार, राहुकाल के दौरान शुभ कार्य वर्जित होते हैं।
प्रदोष व्रत का महत्व-
मान्यता है कि प्रदोष व्रत रखने और भगवान शिव की पूजा करने से कष्टों से मुक्ति मिलती है। कहते हैं कि जिन कन्याओं के विवाह में दिक्कत आ रही है, इससे यह भी दूर होती है। साथ ही अशुभ ग्रहों की अशुभता भी दूर होती है।
प्रदोष व्रत पूजा विधि-
इस दिन ब्रह्म मूहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ कपड़े पहनें।
पूजा स्थल को साफ करें। इसके बाद गंगाजल छिड़कर जगह को पवित्र करें।
अब सफेद रंग का कपड़ा बिछाकर चौकी के चारों ओर कलावा बांधें।
अब भगवान शिव की प्रतिमा को विराजित करें।
शिवजी के चरणों पर गंगाजल अर्पित करें और भगवान को फूल-माला अर्पित करें।
भगवान शिव को चंदन लगाएं।
शिव प्रदोष व्रत के दिन शिवलिंग का अभिषेक करें। शिवलिंग पर धतूरा और भांग चढ़ाएं। भांग-धतूरा न मिलने मौसमी फल भी चढ़ा सकते हैं।
भगवान शिव को धूप, दीप और अगरबत्ती जलाएं।
इसके बाद शिवजी की आरती करें।
अब भगवान शिव को भोग लगाएं।
प्रदोष व्रत कथा-
एक नगर में तीन मित्र राजकुमार, ब्राह्मण कुमार और तीसरा धनिक पुत्र रहते थे। राजकुमार और ब्राह्मण कुमार विवाहित थे, धनिक पुत्र का भी विवाह हो गया था, लेकिन गौना होना बाकी था। एक दिन तीनों मित्र स्त्रियों की चर्चा कर रहे थे। ब्राह्मण कुमार ने स्त्रियों की प्रशंसा करते हुए कहा- ‘नारीहीन घर भूतों का डेरा होता है।’ धनिक पुत्र ने यह सुना तो तुरन्त ही अपनी पत्नी को लाने का फैसला ले लिया। तब धनिक पुत्र के माता-पिता ने समझाया कि अभी शुक्र देवता डूबे हुए हैं, ऐसे में बहू-बेटियों को उनके घर से विदा करवा लाना शुभ नहीं माना जाता, लेकिन धनिक पुत्र ने एक नहीं सुनी और ससुराल पहुंच गया।
ससुराल में भी उसे मनाने की कोशिश की गई लेकिन वो नहीं माना। कन्या के माता-पिता को अपनी बेटी की विदाई करनी पड़ी। विदाई के बाद पति-पत्नी शहर से निकले ही थे कि बैलगाड़ी का पहिया निकल गया और बैल की टांग टूट गई। दोनों को चोट लगी लेकिन फिर भी वो चलते रहे। कुछ दूर जाने पर डाकू उनका धन लूटकर ले गए। दोनों घर पहुंचे. वहां धनिक पुत्र को सांप ने डस लिया। उसके पिता ने वैद्य को बुलाया तो वैद्य ने बताया कि वो तीन दिन में मर जाएगा। जब ब्राह्मण कुमार को यह खबर मिली तो वो धनिक पुत्र के घर पहुंचा और उसके माता-पिता को शुक्र प्रदोष व्रत करने की सलाह दी। और कहा कि इसे पत्नी सहित वापस ससुराल भेज दें। धनिक ने ब्राह्मण कुमार की बात मानी और ससुराल पहुंच गया। धीरे-धीरे उसकी हालात ठीक हो गई और धन-सपंदा में कोई कमी नहीं रही।
धर्म संसार /शौर्यपथ / इस साल महाशिवरात्रि 11 मार्च 2021 (गुरुवार) को है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस दिन महादेव और माता पार्वती की शुभ मुहूर्त में पूजा करना उत्तम माना जाता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन महादेव की पूजा करते समय बिल्वपत्र, शहद, दूध, दही, शक्कर और गंगाजल से अभिषेक करना चाहिए। कहते हैं कि ऐसा करने से भगवान शिव की कृपा हमेशा बनी रहती है। जानिए महाशिवरात्रि के दिन क्या करना चाहिए और क्या नहीं-
महाशिवरात्रि व्रत शुभ मुहूर्त-
निशीथ काल पूजा मुहूर्त :24:06:41 से 24:55:14 तक।
अवधि :0 घंटे 48 मिनट।
महाशिवरात्रि पारणा मुहूर्त :06:36:06 से 15:04:32 तक।
महाशिवरात्रि के दिन करें ये काम-
1. महाशिवरात्रि के दिन व्रत या उपवास करना चाहिए।
2. सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद स्वच्छ कपड़ों को धारण करना चाहिए।
3. शुभ मुहूर्त में मंदिर जाकर महादेव को जल और दूध अर्पित करना चाहिए।
4. महाशिवरात्रि के दिन ओम नम: शिवाय का जाप करना चाहिए।
5. इस दिन व्रती को अनाज का सेवन नहीं करना चाहिए।
महाशिवरात्रि के दिन क्या न करें-
1. महाशिवरात्रि के दिन मांस-मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए।
2. महाशिवरात्रि के दिन देर रात तक नहीं सोना चाहिए।
3. महाशिवरात्रि के दिन दाल, चावल या गेहूं से बना अन्न नहीं ग्रहण करना चाहिए।
4. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन काले वस्त्र धारण नहीं करने चाहिए।
5. कहा जाता है कि इस दिन भगवान शिव को अर्पित प्रसाद नहीं खाना चाहिए।
लाइफस्टाइल /शौर्यपथ /दिनभर की भागदौड़ के बाद जब आप अपने सपनों के घर में कदम रखते हैं तो आपकी थकान और टेंशन झट से गायब हो जाती है। लेकिन अगर घर अव्यवस्थित और छोटा दिखता हो तो यह टेंशन को कम नहीं बल्कि बड़ा देता है। घर का आकार उसकी सजावट पर बहुत ज्यादा निर्भर करता है। कमरे की दीवारों और सजावट के लिए चुने गए रंग और पैटर्न की मदद से आप छोटे से रूम को भी बड़ा दिखा सकते हैं। आइए जानते हैं कैसे।
ब्राइट लाइट्स का प्रयोग-
घर में ब्राइट लाइट्स का इस्तेमाल करने से कमरे का हर कोना हाईलाइट होता है, जिससे यह महसूस होता है कि कमरे में स्पेस ज्यादा है। वहीं छोटे घर में कम लाइट लगाने से घर का हर कमरा और भी छोटा दिखाई देता है।
लाइट शेड पेंट-
घर को लाइट शेड से पेंट करवाने से वो ज्यादा रौशनीदार और लंबा-चौड़ा दिखता है। इसके लिए बेडरूम की दीवारों को हल्के रंग जैसे कि सफेद, क्रीम, हल्का हरा, बेबी पिंक, हल्के नीले रंग से पेंट करवाएं।
फर्नीचर-
छोटे घर को बड़ा दिखाने के लिए कोशिश करें कि घर में कम से कम फर्नीचर रखा हुआ हो। इसके लिए घर में लो हाइट वाले फर्नीचर का इस्तेमाल करें।
मिरर का इस्तेमाल-
कमरे में मिरर का प्रयोग घर के उस कॉर्नर एरिया में करें जहां से धूप या रोशनी अन्य कमरों में जा सकती है। दरवाजों के ऑपोजिट में भी बड़े मिरर का प्रयोग किया जा सकता है। इससे घर का आकार बड़ा दिखेगा।
वॉलपेपर से सजाएं कमरा-
अगर आपके बेडरूम का आकार थोड़ा छोटा है तो कमरे की एक दीवार में वॉलपेपर का इस्तेमाल कर सकते हैं।आप चाहें तो स्काई वॉलपेपर जिसमें स्टार और मून हों वो आप कमरे की सीलिंग पर लगा सकते हैं।
सेहत /शौर्यपथ /अक्सर ऐसा होता है कि खाने बनाते समय जिन चीजों का इस्तेमाल स्वाद बढ़ाने के लिए किया जाता है, उनके गुणों के बारे में जानकारी नहीं होती। जैसे जीरा, धनिया, हींग, कस्तूरी मेथी का इस्तेमाल खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए किया जाता है लेकिन इन छोटी-छोटी चीजों के गुण बड़े होते हैं। साथ ही इनका रोजाना सेवन करने से इम्युनिटी पावर भी मजबूत होती है। मेथी के पत्तों को सुखाकर कसूरी मेथी बनाई जाती है। आज हम आपको कस्तूरी मेथी के फायदे बता रहे हैं-
पेट के लिए फायदेमंद
पीरियड्स से लेकर मेनोपॉज तक, महिला के शरीर को कई बदलावों का सामना करना पड़ता है। चूंकि, इनमें से अधिकांश पेट से संबंधित हैं, इसलिए यह पाचन स्वास्थ्य को गड़बड़ा देता है। अपने भोजन में मेथी के सूखे पत्तों को शामिल करना एक अच्छा विकल्प है। कब्ज से राहत पाने के लिए कसूरी मेथी को पांच मिनट के लिए उबाल लें। इसे बिना छाने ठंडा होने दें और फिर थोड़ा शहद मिला दें। कब्ज से छुटकारा पाना है तो मिश्रण का सेवन दिन में दो बार करें।
संक्रमणों से लड़ता है
जिन लोगों के पेट में इंफेक्शन रहता है, उन्हें हर दिन कसूरी मेथी का सेवन करना चाहिए। इसके अलावा, कसूरी मेथी का रोजाना सेवन करने से दिल, गैस्ट्रिक और आंतों की समस्या नहीं होती है। अगर पेट की समस्या है, तो पत्तियों को सुखाकर पीस लें और इसमें कुछ बूंदें नींबू की मिलाएं। इसके बाद इसे उबले पानी के साथ लें।
एनीमिया का इलाज
भारत में हर 4 में से 3 महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं। ऐसी स्थिति में महिलाओं के लिए मेथी का सेवन करना फायदेमंद होता है, क्योंकि इसमें बहुत अधिक मात्रा में आयरन होता है, जो शरीर में हीमोग्लोबिन के स्तर को बढ़ाता है। इसलिए, यदि एनीमिया से जूझ रहे हैं, तो आहार में मेथी के पत्तों को जरूर शामिल करना चाहिए।
वजन घटाने में मददगार
कसूरी मेथी के पत्तों को चबाकर बहुत ही कम समय के अंदर वजन को कम कर सकते हैं। इसका खाली पेट सेवन करें। इसमें मौजूद घुलनशील फाइबर से पेट जल्दी भर जाता है और बार-बार भूख नहीं लगती है।
ब्लड शुगर को नियंत्रित करती है
डायबिटीज से पीड़ित लोगों को अतिरिक्त देखभाल की आवश्यकता होती है। दिन के दौरान कुछ भी खाने से अक्सर शरीर में ब्लड शुगर का स्तर बढ़ जाता है। मेथी में एंटी-डायबिटीज गुण होते हैं जो कि ब्लड शुगर को नियंत्रित कर सकते हैं। यह टाइप-2 डायबिटीज होने की आशंका को भी कम करती है। यदि डायबिटीज के रोगी इसे नियमित रूप से खाते हैं, तो उनका ब्लड शुगर कंट्रोल में रहेगा।
शिक्षा /शौर्यपथ / भगवान शिव को देवों के देव महादेव कहा जाता है। कहते है कि भोलेनाथ अपने भक्तों में किसी तरह का कोई भेदभाव नहीं करते हैं। शास्त्रों के अनुसार, भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए किसी रत्न की जरूरत नहीं होती है। भोलेनाथ अपने भक्त को गुणों से प्रसन्न होकर उसपर अपनी कृपा दृष्टि बरसाते हैं। महात्मा विदुर ने आचार्य चाणक्य की भांति ही विदुर नीति में बताया है कि किन गुणों वाले व्यक्ति पर हमेशा भोले नाथ की कृपा बनी रहती है।
विदुर जी कहते हैं कि भगवान शिव की कृपा प्राप्त व्यक्ति साधारण जीवन जीना पसंद करता है। ऐसे व्यक्ति में दिखाना नहीं होता है। जिस व्यक्ति के ऊपर भगवान शिव की कृपा होती है, वह दूसरों को नीचा दिखाने का प्रयास नहीं करता है। न ही वह कटु वचनों को बोलता है। ऐसा व्यक्ति जानबूझकर किसी का भी अपमान नहीं करता है। विदुर जी के अनुसार, महादेव की कृपा प्राप्त व्यक्ति पशु प्रेमी होता है। ऐसा व्यक्ति किसी भी जानवर पर अत्याचार नहीं करता है।
अर्थम् महान्तमासाद्य विद्यामैश्र्वर्यमेव वा।
विचरत्यसमुन्नद्धों य: स पंडित उच्यते।।
इस श्लोक में विदुर जी कहते हैं, जो व्यक्ति धन-संपत्ति, ज्ञान, ऐश्वर्य और लक्ष्मी होने पर दिखावा या अहंकार नहीं करता है। दूसरों से विनम्रता से पेश आता है। ऐसे व्यक्ति पर भगवान शिव की कृपा बरसती है।
पिबन्ति नद्य: स्वयमेव नाम्भ: स्वयं न खादन्ति फलानि वृक्षा:।
नादन्ति सस्यं खलु वारिवाहा: परोपकाराय सतां विभृतय:।।
विदुर जी आगे कहते हैं कि जिस तरह से नदियां स्वयं जल नहीं पीतीं, पेड़ खुद फल नहीं खाते हैं। बादल खुद उगाया अनाज नहीं ग्रहण करते हैं। ठीक उसी तरह से महादेव की कृपा प्राप्त व्यक्ति परोपकार में जीवन बिताता है। ऐसा व्यक्ति हमेशा दूसरों की मदद के लिए तैयार रहता है।
धर्म संसार / शौर्यपथ / हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व होता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, पौष माह में शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को पौष पूर्णिमा कहते हैं। इस साल पौष पूर्णिमा तिथि 28 जनवरी 2021 (गुरुवार) को है। पूर्णिमा के दिन शास्त्रों में दान, तप और स्नान का महत्व बताया गया है। पूर्णिमा की तिथि चंद्रमा को प्रिय होती है और इस दिन चंद्रमा अपने पूर्ण आकार में होता है। पौष पूर्णिमा के दिन काशी, प्रयागराज और हरिद्वार में गंगा स्नान का महत्व होता है।
पौष पूर्णिमा तिथि व मुहूर्त-
पूर्णिमा तिथि आरंभ- 28 जनवरी 2021 गुरुवार को 01 बजकर 18 मिनट से
पूर्णिमा तिथि समाप्त- 29 जनवरी 2021 शुक्रवार की रात 12 बजकर 47 मिनट तक।
पूर्णिमा के दिन क्या करना चाहिए और क्या नहीं-
1. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पूर्णिमा के दिन चावल का दान करना शुभ होता है। चावल का संबंध चंद्रमा से होता है और पूर्णिमा के दिन चावल का दान करने से चंद्रमा की स्थिति कुंडली में मजबूत होती है।
2. पूर्णिमा के दिन पानी में गंगाजल मिलाकर कुश हाथ में लेकर स्नान करना चाहिए।
3. पूर्णिमा के दिन सत्यनारायण की कथा सुननी चाहिए। घर के मेनगेट पर आम के पत्तों की तोरण बांधनी चाहिए। कहते हैं कि ऐसा करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।
4. पूर्णिमा के दिन भगवान शिव की पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है।
5. पूर्णिमा के दिन महालक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए पीपल के पेड़ की पूजा करनी चाहिए। कहते हैं कि पीपल में मां लक्ष्मी का वास होता है।
पूर्णिमा के दिन इन बातों का रखना चाहिए ध्यान-
1. पुराणों में पूर्णिमा का दिन बेहद पवित्र माना गया है। कहते हैं कि इस दिन लहसुन, प्याज, मांस-मदिरा आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।
2. पूर्णिमा के दिन ब्रह्यचर्य का पालन करना चाहिए।
3. पूर्णिमा के दिन परिवार में सुख-शांति बनाकर रखनी चाहिए। किसी को इस दिन कटु वचन नहीं बोलने चाहिए।
4. इस दिन दरवाजे पर आने वाले गरीब या जरुरतमंद को अपनी सामर्थ्य के हिसाब से दान देना चाहिए।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
