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June 01, 2026
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छत्तीसगढ़ सरकार की हाॅफ बिजली योजना से अब तक प्रदेश के 38.68 लाख से अधिक परिवारों को 1645 करोड़ रूपए की मिली सब्सिडी

   रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ सरकार की हाफ बिजली बिल योजना से प्रदेश के लाखों घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को महंगाई के दौर में लाखों उपभोक्ताओं को राहत मिली है। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई इस योजना के तहत अब तक 38 लाख 68 हजार 462 बिजली उपभोक्ताओं को छत्तीसगढ़ शासन द्वारा 1645 करोड़ रुपए की घरेलू सब्सिडी दी गई है, या यह कह सकते है कि सीधे-सीधे लोगों की जेब में 1645 करोड़ रूपए की बचत हुई है।
गौरतलब है कि देश के बिजली हब छत्तीसगढ़ में किसानों, गरीब परिवारों को रियायती दरों पर बिजली आपूर्ति की अनेक योजनाएं संचालित की जाती रही हैं। मार्च 2019 में नई सरकार द्वारा पहली बार घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के लिए भी नई योजना शुरु की गई। हाफ बिजली बिल योजना के नाम से शुरु की गई इस योजना में घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के 400 यूनिट तक के बिल में आधे बिल की राशि में छूट दी गयी है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की विशेष पहल पर छत्तीसगढ़ में 1 मार्च 2019 से प्रारंभ की गई हाफ बिजली बिल योजना में घरेलू उपभोक्ताओं को प्रति माह 400 यूनिट तक की बिजली खपत पर प्रभावशील टैरिफ पर 50 प्रतिशत की छूट की पात्रता है। इस छूट के समतुल्य राशि राज्य शासन द्वारा विद्युत वितरण कंपनी को अनुदान के रूप में दी जाती है। वर्ष 2020-21 में जनवरी 2021 की स्थिति में राज्य शासन द्वारा 658 करोड़ रुपए की राशि इस योजना के लिए जारी की गई है। हाॅफ बिजली बिल योजना में मार्च 2019 से अब तक की स्थिति में कुल 38 लाख 68 हजार 462 उपभोक्ता इस योजना का लाभ ले चुके हैं। मार्च 2019 से अब तक छत्तीसगढ़ शासन द्वारा 1645 करोड़ रुपए की घरेलू सब्सिडी घरेलू उपभोक्ताओं को दी गई है।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में दिसंबर 2018 में गठित नई सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं की समस्याओं को पूरी संवेदनशीलता के साथ महसूस किया और ‘सबका साथ-सबका विकास’ की नीति पर अमल करते हुए राज्य के सभी घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के लिए 01 मार्च 2019 से ‘हाफ बिजली बिल योजना’ लागू की और अपना एक बड़ा वादा पूरा किया। ‘हाफ बिजली बिल योजना’ प्रदेश के लाखों घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के लिए अप्रत्याशित और सुखद बदलाव की योजना साबित हो रही है। प्रदेश के लाखों घरेलू बिजली उपभोक्ताओं ने कभी ऐसी योजना की कल्पना भी नहीं की थी। योजना ने इस वर्ग के लोगों को बड़ी राहत प्रदान की है। उनके घरों का हजार रुपए का बिजली बिल कुछ सैकड़ों में सिमट गया। अब इन उपभोक्ताओं के लिए अपने घर का बिजली बिल पटाने में होने वाला खर्च आधा हो गया है, बचत राशि का उपयोग अब वे अन्य कार्यों में कर सकंेगे।

रेल मिल ने एसएमएस दो के ब्लूम्स् को इन-हाउस रोलिंग कर बनाया बिलेट्स
भिलाई / शौर्यपथ / भिलाई इस्पात संयंत्र ने बाज़ार में बढ़ती मांगों को देखते हुए मर्चेन्ट मिल में टीएमटी उत्पादन बढ़ान के लिए अभिनव पहल करते हुए बिलेट्स की उपलब्धता में वृद्धि सुनिश्चित करने का निर्णय लिया। इस हेतु संयंत्र के निदेशक प्रभारी अनिर्बान दासगुप्ता के नेतृत्व में रणनीतिक निर्णय लिया गया जिसे कार्यपालक निदेशक वक्र्स राजीव सहगल के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक संपन्न किया गया।
इसके तहत भिलाई इस्पात संयंत्र के रेल एण्ड स्ट्रक्चरल मिल ने पहली बार एसएमएस-2 के कास्टर नम्बर-4 से प्राप्त 320ग340 मिमी के 256 ब्लूम्स् की सफलतापूर्वक रोलिंग कर 125ग125 मिमी वाले बिलेट्स में बदला जिसका वजन 1046 टन है। जिसकी आपूर्ति टीएमटी बार के रोलिंग हेतु मर्चेन्ट मिल को उपलब्ध कराया जायेगा। यह रोलिंग एक चुनौतीपूर्ण कार्य था जिसे रेल मिल बिरादरी ने बखूबी अंजाम दिया।
उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व मर्चेन्ट मिल ने 32 मिमी टीएमटी बार के रोलिंग हेतु दुर्गापुर स्टील प्लान्ट से 125 बाई 125 मिमी वाले बिलेट्स की आपूर्ति की गई थी। इस बिलेट्स की सफलतापूर्वक ट्रायल रोलिंग ने बीएसपी बिरादरी के समक्ष इस प्रकार के बिलेट्स की आपूर्ति सुनिश्चित करने की चुनौती रखी। इस चुनौती को रेल एवं स्ट्रक्चरल मिल ने स्वीकार करते हुए बीएसपी के एसएमएस-2 से प्राप्त ब्लूम्स् को रोल कर 125ग125 मिमी वाले बिलेट्स में बदलने का बीड़ा उठाया।
इस रोलिंग को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए रेल मिल के विभिन्न अनुभागों ने विभिन्न मॉडिफिकेशन्स को अंजाम दिया जैसे आरटीएस एवं आरपीडीबी की टीम ने रोल-पास डिजाइन में परिवर्तन किया। इसी प्रकार रेल एवं स्ट्रक्चरल मिल की टीम ने गाइड्स को मॉडिफाइड करने के साथ ही बिलेट्स को कुलिंग बेड में सीधा रखने हेतु अन्य कई मॉडिफिकेशन्स को अंजाम दिया गया। इसी प्रकार इसके निर्धारित साइज में काटने हेतु प्रबंध किए गए। 125 बाई125 मिमी वाले बिलेट्स के रोलिंग हेतु रेल मिल, आरटीएस एवं आरपीडीबी की संयुक्त टीम ने रोलिंग स्टैण्ड में आवश्यक सुधार किये। इस प्रकार बीएसपी में पहली बार कास्ट स्टील ब्लूम्स् को आरएसएम द्वारा बिलेट्स में कन्वर्ट किया गया। इन समग्र प्रयास से मर्चेन्ट मिल में टीएमटी उत्पादन बढ़ाना संभव हो सकेगा।
विदित हो कि इससे पूर्व 26 जनवरी, 2021 को रेल मिल बिरादरी ने एसएमएस-3 द्वारा उत्पादित 300ग335 मिमी के 24 ब्लूम्स् की सफलतापूर्वक रोलिंग कर 125ग125 मिमी वाले बिलेट्स में बदला। इस महत्वपूर्ण व अभिनव उपलब्धि के लिये कार्यपालक निदेशक (वक्र्स) श्री राजीव सहगल ने रेल एवं स्ट्रक्चरल मिल के सम्पूर्ण रेल मिल, आरटीएस एवं आरपीडीबी टीम को बधाई दी।

टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ /आम के साथ गुठलियों के भी दाम! आपने यह कहावत तो जरूर सुनी होगी। कुछ ऐसी ही कहावत आलू और इसके छिलकों पर भी फीट बैठती है। आलू खाने में स्वादिष्ट लगते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि आलू के छिलके भी गुणों के मामले में कम नहीं होते। आइए, जानते हैं आलू के छिलकों के फायदे-
ब्लड प्रेशर कंट्रोल में कारगर
आलू में अच्छी-खासी मात्रा में पोटेशि‍यम पाया जाता है। पोटेशियम ब्लड प्रेशर को रेग्युलेट करने में मदद करता है।
डार्क सर्कल्स पर करता है वार
आंखों के नीचे अगर काले घेरे बन गए हों या धूप के कारण स्किन टेन हो गई हो, तो आलू के छिलके को पीस कर उसका रस निकाल कर चेहरे पर लगाते रहें। कालापन दूर हो जाएगा।
खून की कमी को दूर करने में मददगार
एनीमिया या आयरन की कमी में बाकी सब्जिरयों के साथ आलू के छिलके खाना बहुत फायदेमंद रहता है। आलू के छिलके में आयरन की अच्छी मात्रा होती है, जिससे एनीमिया होने का खतरा कम हो जाता है।
शरीर को मजबूती देते हैं आलू के छिलके
आलू के छिलके में भरपूर मात्रा में विटामिन बी3 पाया जाता है। विटामिन बी3 ताकत देने का काम करता है। इसके अलावा इसमें मौजूद नैसीन कार्बोज को एनर्जी में बदल देता है।
डाइजेस्टि्व सिस्टम को करता है बूस्ट
फाइबर से भरपूर हमारी डाइट में फाइबर की कुछ मात्रा जरूर होनी चाहिए। एक ओर जहां आलू में भरपूर मात्रा में फाइबर पाया जाता है वहीं इसके छिलके में भी अच्छी मात्रा में फाइबर्स होते हैं। ये डाइजेस्टिटव सिस्टम को भी बूस्ट करने का काम करता है।
हड्डियों की मजबूती के लिए
आलू के छिलके में कैल्शियम और विटामिन कॉप्लेक्स खूब होता है। इससे हड्डियों को मजबूती मिलती हैं और विटामिन बी से शरीर को ताकत मिलता है। कोशिश करें कि आलू केा जब भी बनाए छिलका सहित बनाएं। या इसे स्नैक्स की तरह इस्ते माल करें।
बालों को काला करने में मददगार
आपके बाल सफेद हो रहे हैं, तो आप आलू के एक कटोरी छिलके को आधा लीटर पानी में उबालें। जब पानी एक से दो चम्मच रह जाए, तो आप इससे अपने बालों पर लगाएं। बार-बार ऐसा करने से आपके बाल ब्राउन हो जाएंगे।

टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ /हेयर कलर करने का सबसे बड़ा साइड इफेक्ट होता है कि बहुत ज्यादा केमिकल वाले कर्लस आपके बालों को डैमेज कर सकते हैं। ऐसे में ज्यादातर लोग नेचुरल हेयर कलर को सबसे सेफ मानते हैं। नेचुरल हेयर कलर केमिकल वाले हेयर कलर्स के मुकाबले बहुत कम समय के लिए आपके बालों में टिकते हैं लेकिन इनसे साइड इफेक्ट का खतरा न के बराबर रहता है। आज हम आपको गेंदे के फूलों से नेचुरल हेयर कलर बनाने का तरीका बता रहे हैं।
नेचुरल हेयर कलर बनाने की सामग्री-
गेंदे के फूलों की पंखुड़ियां - 1 कप
गुड़हल के फूलों की पंखुड़ियां -2 बड़े चम्मच
पानी- 2 कप
नेचुरल हेयर कलर बनाने की विधि-
गेंदे के फूलों से हेयर कलर बनाने के लिए सबसे पहले पैन में पानी उबालें।
एक उबाल आने के बाद इसमें गेंदे व गुड़हल फूलों की पंखुड़ियां डालें।
इसे धीमी आंच पर 30 मिनट या फूलों का रंग निकलने तक उबालें।
तैयार पानी को ठंडा होने के लिए अलग रख दें।
आपका नेचुरल हेयर कलर बन कर तैयार है।
इस पानी को छन्नी की मदद से छान कर बोतल में भरकर फ्रिज में रखें।
ऐसे करें इस्तेमाल
नेचुरल हेयर कलर को यूज करने के लिए सबसे पहले बालों को शैंपू करके साफ करें।
फिर हल्के गीले बालों पर इस पानी को लगाकर स्कैल्प से पूरे बालों पर मसाज करें।
इसे पानी से धोने की जगह ऐसे ही लगा रहने दें।
साथ ही बालों को सुखाने के लिए ब्लो ड्रायर का इस्तेमाल करने से बचें।
इसे धूप में नेचुरल तरीके से सुखने दें।
फिर हर बार शैंपू के बाद इस पानी को इस्तेमाल करें।
इससे आपके बालों को हल्का बरगंडी या कॉपर शेड मिलेगा।

शौर्यपथ / लाल किताब के अनुसार प्रत्येक ग्रह का अपना एक प्रतिनिधि वृक्ष होता है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि आपके घर या खेत के आसपास कौनसे वृक्ष हैं। जैसे कुंडली में शनि और चंद्र की युति विष योग बनाती है उसी तरह शनि और चंद्र से संबंधित वृक्ष पास पास लगे हैं तो वैसे ही असर छोड़ेंगे। अत: वृक्ष के शत्रु वृक्ष को जान कर उनका समाधान कर लेना चाहिए ताकि आपको कोई परेशानी ना हो।
1. सूर्य : सूर्य का वृक्ष तेजफल का वृक्ष होता है। इसके अलावा पर्वतों पर उगने वाले पौधे, मिर्च, काली मिर्च, शलज़म, सूर्यमुखी का फूल, सरसों, गेहूं और विल्वमूल की जड़ पर भी सूर्य का अधिकार होता है। शुक्र, राहु और शनि के वृक्ष इसके आसपास नहीं होना चाहिए, क्योंकि यह सूर्य के शत्रु हैं।

2. चंद्र : पोस्त का हरा पौधा, जिसमें दूध हो या सभी दूध वाले वृक्ष या पौधे चंद्र के हैं। इसके अलावा खोपरा, ठंडे पदार्थ, रसीले फल, चावल, खिरनी की जड़ और सब्जियों पर भी चंद्र का अधिकार रहता है। चंद्र के पौधे या वृक्ष के साथ शनि, राहु और केतु के वृक्ष नहीं लगाना चाहिए।

3. मंगल : नीम का पेड़ साक्षात मंगल है। इसके अलावा नुकीले वृक्ष, बरगद, अदरक, अनाज, जिन्सें, तुअर दाल, मूंगफली और अनंतमूल की जड़ पर मंगल का अधिकार रहता है। बुध, शुक्र, शनि, राहु और केतु के वृक्ष इस वृक्ष के आसपास नहीं होना चाहिए। वर्ना मंगल खराब हो जाएगा।

4. बुध : केला, चौड़े पत्ते के पौधे या वृक्ष बुध के कारक है। इसके अलावा आंधीझाड़ा की झाड़ी, विधारा की जड़, नर्म फसल, मूंग दाल, हरे मुंग की दाल और बैंगन पर भी बुध का अधिकार होता है। बुध के वृक्ष या पौधों के साथ चंद्र के पौधे नहीं होना चाहिए।
5. गुरु : गुरु अर्थात बृहस्पति साक्षात रूप में पीपल का वृक्ष है। इसके अलावा केले के वृक्ष, भारंगी/केले की जड़, खड़ी फसल, बंगाली चना और गांठों वाले पादप से जुड़े पौधे पर भी गुरु का अधिकार होता है। पीपल के पास शुक्र, बुध, शनि, केतु और राहु के वृक्ष नहीं होना चाहिए।

6. शुक्र : कपास का पौधा और मनी प्लांट शुक्र का कारक है। कोई भी जमीन पर आगे बढ़ने वाली लेटी हुई बेल शुक्र की कारक है। इसके अलावा फलदार वृक्ष, फूलदार पौधे, गुलर, मटर, बींस, पहाड़ी पादप, मेवे पैदा करने वाले पादप और लताओं पर भी शुक्र का अधिकार होता है। शुक्र के पौधों के पास कभी भी सूर्य, चंद्र, मंगल, गुरु और राहु के पौधे या वृक्ष न लगाएं।
7. शनि : शमी, कीकर, आम और खजूर का वृक्ष शनि का कारक है। इनमें से शमी के वृक्ष को छोड़कर कोई सा भी वृक्ष नहीं लगाना चाहिए। इसके अलावा पादपों में जहरीले और कांटेदार पौधे, खारी सब्जियां, बिच्छोल की जड़ और तम्बाकू पर भी शनि का अधिकार होता है। शनि के वृक्ष के पास सूर्य, चंद्र और मंगल के वृक्ष नहीं होना चाहिए।

8. राहु : नारियल का पेड़, चंदन का पेड़, कुत्ता घास, कैक्टस और कांटे वाले सभी वृक्ष या पौधे राहु के कारक हैं। चंदन एवं नारियल के पेड़ को छोड़कर बाकी को घर में या आसपास कभी भी नहीं लगाना चाहिए। इसके अलावा लहसुन, काले चने, काबुली चने और मसले पैदा करने वाले पौधों पर राहु और केतु का अधिकार होता है। नारियल का पेड़ लगा है तो सूर्य, मंगल और चंद्र के पौधे या वृक्ष उसके आसपास नहीं होना चाहिए।
9. केतु : इमली का दरख्त, तिल के पौधे और केला केतु के कारक है। इसके अलावा अश्वगंधा, लहसुन, काले चने, काबुली चने और मसले पैदा करने वाले पौधों पर राहु और केतु का अधिकार होता है। केले का वृक्ष लगा है तो उसके पास मंगल और चंद्र के वृक्ष नहीं लगे होना चाहिए।

शौर्यपथ / अक्सर किचन के सिंक के नीचे मौजूद खाली जगह को लोग घर के बेकार समान को स्टोर करने के लिए इस्तेमाल करते हैं। लेकिन किचन को ऑर्गेनाइज रखने और अनावश्यक नुकसान को रोकने के लिए कुछ खास चीजों को किचन सिंक के नीचे स्टोर करने से बचना चाहिए। आइए जानते हैं आखिर कौन सी हैं वो खास चीजें।
केमिकल प्रोडक्ट्स-
किचन सिंक के नीचे लोग डस्टबीन के साथ अक्सर कैमिकल प्रोडक्ट्स जैसे ब्लीच, ड्रेन क्लीनर को भी स्टोर कर देते हैं। लेकिन ऐसा बिल्कुल न करें, इन कैमिकल प्रोडक्ट्स के गिरने से यह पूरे घर में फैलकर बच्चों, पेट्स या घर के बाकी सदस्यों को भी नुकसान पहुंच सकता है।
टूल्स-
किचन सिंक के नीचे ड्रिल्स, रिंचेस या फिर अन्य टूल्स को स्टोर करने की आदत आपकी चीजें खराब कर सकती हैं। कई बार सिंक से पानी लीक होने पर नीचे रखे इन टूल्स में जंग लग सकता है, जिससे यह जल्दी खराब हो सकते हैं।
बैकअप आइटम-
बैकअप आइटम रखने के लिए किचन सिंक के नीचे की ही जगह ज्यादातर इस्तेमाल की जाती है। लेकिन ऐसा करते समय लंबे समय तक लोग इस जगह की साफ-सफाई करना भूल जाते हैं। जिसकी वजह से यहां जर्म्स औऱ बैक्टीरिया पनपने लगते हैं।
ऑयल रैग्स-
आग लगने वाले आइटम जैसे थिनर, पॉलिश, पेंट या फर्नीचर पॉलिश आदि किचन सिंक के नीचे स्टोर न करें। ऐसा करने से कई बार आग लगने का खतरा बना रहता है। ऐसे में इन चीजों को ऐसी जगह पर रखें जहां इनके गिरने और फैलने का खतरा कम रहे।
बेकार वस्तुएं-
किचन सिंक के नीचे स्क्रबर, कचरे की थैलियां, और डिश सोप आदि चीजों को न रखें। वहीं किचन सिंक के नीचे उन्हीं चीजों को स्टोर करें, जिसका इस्तेमाल बार-बार किया जाता है। ऐसा करने से आप हर तरह के नुकसान की संभावना से बच जाएंगे।

खाना खजाना /शौर्यपथ / भोजन के साथ परोसी गई चटपटी हरी चटनी बेस्‍वाद खाने को भी जायकेदार बना देती है। लेकिन बिजी लाइफस्टाइल के चलते रोज-रोज खाने के साथ हरी चटनी बनाना हर किसी के लिए आसान काम नहीं है। ऐसे में अगर आप चटनी को सही तरीके से स्टोर कर लें तो बिना उसका स्वाद खराब किए आप उसे महीने तक स्‍टोर कर सकती हैं। आइए जानते हैं कैसे।
चटनी में तेल डालकर करें स्टोर-
हरी चटनी को लंबे समय तक स्टोर करने और उसका स्वाद बढ़ाने के लिए उसे बनाते समय एक कटोरी चटनी में एक छोटा चम्‍मच ऑलिव ऑयल डाल दें। ऐसा करने से चटनी का स्‍वाद बढ़ जाएगा और स्‍टोर करते समय उसके रंग में भी कोई बदलाव नहीं आएगा।
इस चटनी को आप बर्फ की ट्रे में जमाकर या कांच की शीशी में बंद करके फ्रिज में रख सकती हैं। ध्‍यान रखें कि इस तरह स्‍टोर की हुई चटनी तब ही लंबे समय तक इस्तेमाल की जा सकती है जब तक उसे फ्रिज में ऐसे स्‍थान पर रखा जाए जहां उसे सबसे ज्‍यादा ठंडक मिले। इस तरह से चटनी को स्‍टोर करने पर आप उसे 15-20 दिन तक यूज कर सकती हैं।

सेहत /शौर्यपथ /आपको अगर कोई स्नैक्स खाने का मन करता है, तो आप किशमिश खा सकते हैं। स्वाद के साथ सेहत के लिए भी किशमिश एक हेक्दी स्नैक्स माना जाता है।
किशमिश में फॉस्फोरस, कैल्शियम और पोटैशियम पाया जाता है जो बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में मदद करता है। बच्चों को किशमिश खिलाने से मस्तिष्क को पोषण मिलता है और यादाश्त मजबूत होती है। किशमिश में उच्च मात्रा में फाइबर होता है
कब्ज दूर करती है किशमिश
किशमिश खाने से कब्ज में बहुत फायदा मिलता है। इसे पानी में भिगाकर खाने से कब्ज दूर होती है। अगर आपको कब्ज, एसिडिटी और थकान की समस्या है, तो यह काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। इसका नियमित रूप से सेवन करने से जल्द आपको फायदा नजर आएगा।
खून की कमी दूर करने के लिए
किशमिश में पर्याप्त मात्रा में विटामिन बी कॉम्प्लेक्स पाया जाता है जिससे खून की कमी नहीं होती। आप में अगर खून की कमी है तो आप 7-10 किशमिश का सेवन रोजाना कर सकते हैं।
ब्लड प्रेशर
यदि आपके घर में किसी को उच्च रक्तचाप की समस्या है तो रात को आधे गिलास पानी में 8-10 किशमिश भिगो दें। सुबह उठकर बिना कुछ खाएं किशमिश के पानी को पी लें। आप चाहें तो भीगी हुई किशमिश को खा भी सकते हैं। इससे कुछ दिन में उच्च रक्तचाप की समस्या में आराम मिलेगा।
लिवर को सेहतमंद रखता है
प्रतिदि‍न किशमिश के पानी का सेवन करना आपके लिवर को सेहतमंद बनाए रखने और उसे सुचारू रूप से कार्य करने के लिए प्रेरित करने का काम भी करता है। साथ ही आपके मेटाबॉलिज्म के स्तर को नियंत्रित करने में भी सहायक है।
वजन बढ़ाने में मददगार
अगर आप अंडरवेट हैं और अपने वजन को बढ़ाना चाहते हैं, तो किशमिश आपकी मदद कर सकती है। किशमिश फ्रुक्टोज से भरपूर होती है, जो शरीर का वजन बढ़ाने में मदद कर सकती है।
किशमिश खाने का सही तरीका
ज्यादातर लोग किशमिश को ऐसे ही खाते हैं लेकिन भीगे हुए किशमिश खाना सेहत के लिए ज्यादा फायदेमंद होता है। हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि किशमिश को भिगोकर खाना चाहिए क्योंकि इससे उसमें एंटीऑक्सीडेंट्स और न्यूट्रिएंट्स की मात्रा बढ़ जाती है। किशमिश को रातभर पानी में भिगोकर सुबह खाली पेट खाएं। इससे आप बीमारियों से भी बचे रहेंगे और यह आपको दिनभर एनर्जेटिक भी रखेगा।

धर्म संसार /शौर्यपथ / माघ माह को मोक्ष दिलाने वाला माना जाता है। माघ माह में हर दिन पवित्र माना जाता है लेकिन एकादशी का विशेष महत्व है। माघ माह में कृष्ण पक्ष की एकादशी षटतिला एकादशी कहलाती है। इस दिन तिल का छह प्रकार से उपयोग किया जाता है। इस कारण इसे षटतिला एकादशी कहा जाता है। षटतिला एकादशी बताती है कि अन्नदान सबसे बड़ा दान है। इस व्रत में मन को शुद्ध रखें।
माघ मास में शरद ऋतु चरम पर होती है और इस मौसम में तिलों का महत्व बढ़ जाता है। इस व्रत में स्नान, दान, तर्पण, आहार में तिल का विशेष महत्व है। दशमी के दिन एक समय भोजन करना चाहिए और प्रभु का स्मरण करना चाहिए। एकादशी के दिन भगवान विष्णु की उपासना करें। रात्रि में भगवान का भजन-कीर्तन करें। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें। इस व्रत में स्नान, दान से लेकर आहार तक में तिलों का प्रयोग करना चाहिए। इस दिन उपवास कर दान, तर्पण और विधि-विधान से पूजा करने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस व्रत में छह प्रकार से तिलों का उपयोग किया जाता है। इनमें तिल से स्नान, तिल का उबटन लगाना, तिल से हवन, तिल से तर्पण, तिल का भोजन और तिलों का दान किया जाता है, इसलिए इसे षटतिला एकादशी व्रत कहा जाता है। इस व्रत में क्रोध, अहंकार, काम, लोभ का त्याग करें। षटतिला एकादशी पर तिल से भरा बर्तन दान करना शुभ माना जाता है। द्वादशी पर सुबह स्नान कर भगवान विष्णु को भोग लगाएं और फिर ब्राह्मणों को भोजन कराएं। षटतिला एकादशी की रात को भगवान का भजन-कीर्तन अवश्य करना चाहिए। इस दिन काली गाय की पूजा करना भी शुभ माना गया है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल पर खिलाड़ियों के लिए शुरू हुई अकादमी
कुशल प्रशिक्षकों के माध्यम से खिलाड़ियों को दिया जाएगा प्रशिक्षण
आवासीय खिलाड़ियों को निःशुल्क आवास, भोजन, शैक्षणिक व्यय, खेल परिधान, प्लेईंग किट, दुर्घटना बीमा आदि सुविधाएं उपलब्ध करायी जाएंगी
सभी जिलों में जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित चयन समिति द्वारा चयन प्रक्रिया प्रारंभ
प्रत्येक खेल विधावार खिलाड़ियों का चयन रायपुर एवं बिलासपुर अकादमी के लिए अलग-अलग

रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की विशेष पहल पर रायपुर एवं बिलासपुर में राज्य स्तरीय हॉकी, एथलेटिक एवं तीरंदाजी की आवासीय खेल अकादमी शुरू की जा रही है। खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा नए वित्तीय वर्ष से भारत सरकार की खेलो इंडिया योजनांतर्गत खेलो इंडिया स्टेट सेन्टर आफ एक्सिलेंस में हॉकी, एथलेटिक एवं तीरंदाजी के आवासीय अकादमी हॉकी में 54, एथलेटिक में 60 एवं तीरंदाजी में लगभग 36 खिलाड़ियों का चयन किया जाएगा। राज्य स्तर पर अंतिम रूप से 300 खिलाड़ियों का चयन रायपुर एवं बिलासपुर अकादमियों के लिए किया जाएगा। खेल अकादमी संचालन नियम अंतर्गत अंतिम रूप से चयनित खिलाड़ियों को निःशुल्क आवास, भोजन, शैक्षणिक व्यय, खेल परिधान, प्लेईंग किट, दुर्घटना बीमा आदि सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी।
खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा राज्य स्तरीय चयन समिति एवं जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला स्तरीय चयन समिति का गठन किया गया है। आवासीय अकादमी में 9 से 17 वर्ष आयु वर्ग के बालक एवं बालिकाओं को प्रवेश दिया जायेगा। ऐसे सभी बालक-बालिका जो इन खेलों में रूचि रखते है, वे चयन प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं। राज्य के समस्त जिलों में जिला स्तरीय चयन ट्रायल फरवरी माह में सम्पन्न कर लिया जाएगा। जिला स्तर से प्रतिभागियों का चयन कर राज्य स्तरीय चयन ट्रायल हेतु भेजा जाएगा। खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा खेल अकादमी संचालन नियम के अनुरूप तय मानक अनुसार बालक एवं बालिका प्रतिभागियों का खेल विधावार वर्गवार बैटरी टेस्ट एवं कौशल टेस्ट लिया जाएगा।

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