July 25, 2026
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    खाना खजाना /शौर्यपथ / लिट्टी चोखा बिहार राज्‍य का राष्‍ट्रीय व्यंजन है जिसमें लिट्टी तथा चोखे - दो अलग-अलग व्यंजनों के साथ-साथ खाने को कहते हैं। यह बिहार, झारखंड और उत्तरप्रदेश के विशेषकर ज्‍यादा लोकप्रिय है। हालांकि देश के कई कोने से इसे बड़े प्‍यार और स्‍वाद के साथ खाया जाता है।
    लिट्टी देखने में तो बाटी जैसी लगती है, लेकिन बहुत अंतर है। इसे आटे के अन्दर सत्तू भरकर बनाई जाती है और यह बैंगन, आलू और टमाटर को मिक्‍स कर चोखा तैयार कर किया जाता है और लिट्टी के साथ बड़े प्‍यार से खाई जाती है।
    लिट्टी बनाने की सामग्री :
    2 कप आटा, 1/2 चम्मच तेल, 1/2 चम्मच अजवाइन, 2 बड़े चम्मच घी।
    लिट्टी की विधि :
    आटे को छान कर बर्तन में निकालिए, आटे में घी और हल्‍की नमक डाल कर अच्छी तरह मिला लीजिए। गुनगुने पानी की सहायता से नरम आटा गूंथ लीजिए।
    गूंथे हुए आटे को ढंककर (आधा घंटे के लिए) रख दीजिए। लिट्टी बनाने के लिए आटा तैयार है।
    सत्तू में मिलाने वाली सामग्री :1 कप भूने चने (बिना छिलके वाले) या सत्तू, 4-5 लहसुन (कद्दूकस करे हुए), 1 टुकड़ा अदरक (कद्दूकस करा हुआ), 1 प्याज बारीक कटा (जरूरी नहीं), 2-3 हरी मिर्च (बारीक कटी हुई), 1/2 कप हरा धनिया (बारीक कटा हुआ), 1 चम्मच अजवाइन, 1 बड़ा चम्मच नींबू का रस, 1 चम्‍मच तेल और 2 भरे हुए लाल मिर्च के अचार का मसाला, नमक स्वादानुसार।
    लिट्‍टी में भरी जाने वाली सत्‍तू तैयार कीजिए :
    अदरक को धोकर छिलकर बारीक टुकड़ों में काट लीजिए या फिर कद्दूकस भी कर सकते हैं। हरी मिर्च और हरा धनिया बारीक काट लीजिए। सत्तू को किसी बर्तन में निकालिए। उसमें अदरक, हरी मिर्च, धनिया, नींबू का रस, नमक, काला नमक, जीरा, सरसों का तेल और अचार का मसाला मिला लीजिए, अगर सत्‍तू पूरी तरह से मिक्‍स हो जाएगी इसके बाद 1-2 छोटे चम्मच तेल और पानी डालिए और उसे मिक्स ऐसे किजिए की वो पूरी तरह से भूरभूरा हो जाए। अब सत्‍तू तैयार है।
    लिट्टी कैसे बनाएं :
    गूंथे हुए आटे से मध्यम आकार की लोइयां बना लीजिए। लोई को अंगुलियों की सहायता से 2-3 इंच के व्यास में बड़ा कर लीजिए, अब कटोरी जैसा बना लीजिए, इस पर एक से डेढ़ छोटी चम्मच सत्‍तू रखिए और आटे को चारों ओर से उठा कर बंद करके गोल कर लीजिए। गोले को हथेली से दबा कर थोड़ा चपटा कीजिए, लिट्टी सिकने के लिए तैयार है।
    अब लकड़ी तथा कोयले को जला कर उसे पूरी तरह से आग बना लें और उसे जमीन या किसी बड़े आग के बर्तन में रखकर उस पर भरी हुई लोइयों को रखिए और पलट-पलट कर ब्राउन होने तक सेंक लें।
    चोखा कैसे बनाएं :
    बैंगन, आलू और टमाटर धोइए और भून लीजिए। ठंडा होने पर छिलका उतार लें। अब किसी प्याले में रख कर चम्मच से मैश कीजिए। कतरे हुए प्‍याज, मिर्च, धनिया पत्‍ता, नींबू, अचार, नमक और तेल डाल कर अच्छी तरह मिलाइए। लीजिए बिहार का मशहूर चोखा तैयार है।
    अगर आप लहसुन और अदरक पसंद करते हैं तो 5-6 लहसुन की कली और एक अदरक की छोटी टुकड़ी को बारीक काटकर चोखे में मिला लीजिए।
    अब परोसिए :
    एक प्याले में चोखा डालिए। गरमा-गरम लिट्टी बीच में से तोड़कर घी में डुबाइए। अब बैंगन और आलू के चोखा को हरी धनिए की चटनी के साथ पेश करें।

    सेहत /शौर्यपथ /अगर आप भी रात में इन 8 चीजों में से कोई एक भी खाते हैं तो जरा संभल जाए। इन चीजों को रात के समय खाना आपकी सेहत को बिगाड़ सकता है। हो सके तो इन 8 चीजों को रात के समय यानी कि डिनर के भोजन में खाने से बचें।
    1 स्नैक्स - रात के वक्त कुछ चीजें खाने से आप तौबा ही करें तो बेहतर होगा। इनमें स्नैक्स या चिप्स जैसी चीजें भी शामिल है। हालांकि इनका सेवन दिन के वक्त भी नुकसानदेह ही होता है। दरअसल इनमें अत्यधिक मात्रा में मोनोसोडियम ग्लूटामेट होता है, जो आपको नींद संबंधी समस्याएं देने के साथ ही, अन्य स्वास्थ्य परेशानियां भी दे सकता है।
    2 एल्‍कोहल - रात को सोने से ठीक पहले किसी भी प्रकार का नशा या अल्कोहल का सेवन आपके लिए बेहद हानिकारक हो सकता है। यह आपकी नींद को भी प्रभावित कर सकता है। खास तौर से वाइन नींद की गुणवत्ता को खराब करती है नींद के समय को कम कर देती है। इसमें कैलोरी भी बहुत अधिक मात्रा में होती है।
    3 पिज्‍जा - अक्सर रात के वक्त पार्टी या बाहर जाकर खाने में लोग पिज्जा पसंद करते हैं। लेकिन इसे पचाने में आपके पाचन तंत्र को काफी मेहनत करनी पड़ती है। इसके अलावा पिज्‍जा में चिकनाई बहुत अधिक होती है और इसमें जो सॉस व अन्य मसाले प्रयोग किए जाते हैं, वे आपके लिए हार्टबर्न का खतरा बढ़ा देते हैं। इसलिए कोशिश करें कि रात के वक्त इसका प्रयोग बिल्कुल न करें।
    4 बर्गर - सोने से पहले बर्गर खाना भी सेहत के लिए हानिकारक होता है। बर्गर में चीज व सॉस का प्रयोग कर हम इसे भले ही इसका स्वाद बढ़ा लेते हैं, लेकिन यही चीजें पेट में प्राकृतिक एसिड के उत्पादन को बढ़ाती हैं, जिससे हार्टबर्न की समस्या हो सकती है। इसलिए कोशिश करें की चीज और सॉस से युक्त बर्गर का सेवन न ही करें।
    5 पास्ता - पास्ता कैलोरी से भरपूर होता है,और इसमें सबसे अधि‍क कैलोरी होती है। इसमें अधि‍क मात्रा में कार्बोहाइड्रेट होता है जो वसा में बदल जाता है। इसके अलावा इसे चीज और अन्य फैटी चीजों के साथ बनाया जाता है जिससे इसका ग्लासिमिक सूचकांक बहुत अधि‍क होता है। रात के समय इसका प्रयोग हृदय और पाचन तंत्र के लिए हानिकारक होता है।
    6 ऐसी सब्जियां - कुछ सब्जियों में अघुलनशील फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जो लंबे समय तक आपका पेट भरा रखती है, और पाचन तंत्र धीमी गति से कार्य करने लगता है। ऐसे में आपको गैस या पाचन संबंधी अन्य समस्याएं हो सकती है। ऐसी सब्जि‍यों को रात के वक्त खाने से बचना चाहिए। प्याज, ब्रोकोली, पत्तागोभी आदि सब्जियां इनमें शामिल है।
    7 रेड मीट - रेड मीट प्रोटीन और आयरन का स्रोत है। लेकिन इसका अधिक सेवन करने से आपको बेचैनी हो सकती है और यह आपकी नींद को भी प्रभावित कर सकता है। तो अगर आप शांति से गहरी नींद लेना चाहते हैं, तो रात में रेड मीड को नजरअंदाज करें।
    8 डॉर्क चॉकलेट - डार्क चॉकलेट में बहुत अधि‍क मात्रा में कैफीन व अन्य उत्तेजक पदार्थ होते हैं, जो हृदय को आराम देने के बजाए कार्यशील रखते हैं तथा मस्तिष्क को केंद्रित रखते हैं। इससे आपकी नींद बुरी तरह से प्रभावित हो सकती है।

    सेहत /शौर्यपथ /शारीरिक स्वास्थ्य जितना अहम है, उतना ही मानसिक रूप से स्वस्थ रहना भी जरुरी है। अगर आप मानसिक रूप से स्वस्थ और सशक्त रहेंगे, तो कोई भी समस्या या तनाव आप पर हावी नहीं हो सकेगा।
    यहां बताए जा रहे 5 हेल्दी फूड आपकी मानसिक सेहत के लिए बेहद फायदेमंद साबित होंगे- खास बात है कि से पांचों फूड आपको बहुत आसानी से अपने घर में ही मिल जाएंगे। जानते हैं कैसे बनाए अपने दिमाग को स्‍वस्‍थ।
    1 दही - दही न केवल आपके पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है बल्कि मस्तिष्क की क्रियाविधि को भी प्रभावित करता है। डाइट में ज्यादा से ज्यादा दही का सेवन, आपकके तनाव और चिंता को कम करने में मदद करता है और अगर आपका स्वभाव चिड़चिड़ा हो चुका है, तो दही आपके मूड को बेहतर बनाने में भी मददगार है।
    2 अंडा - अंडे में मौजूद कुछ पोषक तत्व आपकी मानसिक सेहत को बेहतर बनाने के साथ ही आपको सतर्क रखने में मदद करते हैं। फोलिक एसिड, बायोटीन, कोलाइन आदि आपके म स्तिष्क की कोशिकाओं के विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं।
    3 हरी सब्जियां - हरी सब्जियों को दिन में एक बार अपनी डाइट में शामिल करना डिमेंशिया को कोसों दूर रखता है। जो लोग ज्यादा से ज्यादा हरी सब्जियों को अपनी डाइट में शामिल करते हैं, उनका दिमाग लंबे समय तक सक्रिय रहता है, जो मानसिक सेहत के लिए अच्छा है।
    4 सूखे मेवे - सूखे मेवे, ड्रायफूट्स या नट्स कह लो... सभी में मैंगनीज़, सेलेनियम और तांबा प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जो मस्तिष्क की क्रियाओं को इंप्रूव करने और मानसिक कमजोरी को दूर करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
    5 डार्क चॉकलेट - डार्क चॉकलेट में मौजूद कोकोआ के कारण इसे दिमाग के बेहतरीन रक्तसंचार के लिए लाभप्रद माना जाता है। इसके अलावा इसमें मौजूद फ्लेवेनॉयड दिमाग को युवा रखने के साथ ही रेडिकल डैमेज से भी बचाता है।

    प्रदोष व्रत कथा एवं प्रदोष व्रत में क्या खाएं और क्या नहीं, जानिए
    धर्म संसार /शौर्यपथ /प्रत्येक माह में जिस तरह दो एकादशी होती है उसी तरह दो प्रदोष भी होते हैं। त्रयोदशी (तेरस) को प्रदोष कहते हैं। हिन्दू धर्म में एकादशी को विष्णु से तो प्रदोष को शिव से जोड़ा गया है। दरअसल, इन दोनों ही व्रतों से चंद्र का दोष दूर होता है। आओ जानते हैं संक्षिप्त में कि इसकी व्रत कथा क्या है और इस दौरान क्या खाना या नहीं खाना चाहिए।
    प्रदोष व्रत कथा : प्रदोष को प्रदोष कहने के पीछे एक कथा जुड़ी हुई है। संक्षेप में यह कि चंद्र को क्षय रोग था, जिसके चलते उन्हें मृत्युतुल्य कष्टों हो रहा था। भगवान शिव ने उस दोष का निवारण कर उन्हें त्रयोदशी के दिन पुन:जीवन प्रदान किया था अत: इसीलिए इस दिन को प्रदोष कहा जाने लगा। हालांकि प्रत्येक प्रदोष की व्रत कथा अलग अलग है। स्कंद पुराण में प्रदोष व्रत के महामात्य का वर्णन मिलता है। इस व्रत को करने से सभी तरह की मनोकामना पूर्ण होती है। इसमें एक विधवा ब्राह्मणी और शांडिल्य ऋषि की कथा के माध्यम से इस व्रत की महिमा का वर्णन मिलेगा।
    पद्म पुराण की एक कथा के अनुसार चंद्रदेव जबअपनी 27 पत्नियों में से सिर्फ एक रोहिणी से ही सबसे ज्यादा प्यार करते थे और बाकी 26 को उपेक्षित रखते थे जिसके चलते उन्हें श्राप दे दिया था जिसके चलते उन्हें कुष्ठ रोग हो गया था। ऐसे में अन्य देवताओं की सलाह पर उन्होंने शिवजी की आराधना की और जहां आराधना की वहीं पर एक शिवलिंग स्थापित किया। शिवजी ने प्रसन्न होकर उन्हें न केवल दर्शन दिए बल्कि उनका कुष्ठ रोग भी ठीक कर दिया। चन्द्रदेव का एक नाम सोम भी है। उन्होंने भगवान शिव को ही अपना नाथ-स्वामी मानकर यहां तपस्या की थी इसीलिए इस स्थान का नाम 'सोमनाथ' हो गया।
    प्रदोष व्रत में क्या खाएं और क्या नहीं :
    1. प्रदोष काल में उपवास में सिर्फ हरे मूंग का सेवन करना चाहिए, क्योंकि हरा मूंग पृथ्‍वी तत्व है और मंदाग्नि को शांत रखता है।
    2. प्रदोष व्रत में लाल मिर्च, अन्न, चावल और सादा नमक नहीं खाना चाहिए। हालांकि आप पूर्ण उपवास या फलाहार भी कर सकते हैं।
    प्रदोष व्रत की विधि: व्रत वाले दिन सूर्योदय से पहले उठें। नित्यकर्म से निपटने के बाद सफेद रंग के कपड़े पहने। पूजाघर को साफ और शुद्ध करें। गाय के गोबर से लीप कर मंडप तैयार करें। इस मंडप के नीचे 5 अलग अलग रंगों का प्रयोग कर के रंगोली बनाएं। फिर उतर-पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठे और शिव जी की पूजा करें। पूरे दिन किसी भी प्रकार का अन्य ग्रहण ना करें।
    शिवलिंग विन्यास के 5 रहस्य
    शिवलिंग का शास्त्रों में अर्थ बताया गया है परम कल्याणकारी शुभ सृजन ज्योति। संपूर्ण ब्रह्मांड और हमारा शरीर इसी प्रकार है। भृकुटी के बीच स्थित हमारी आत्मा या कहें कि हम स्वयं भी इसी तरह हैं... बिंदु रूप। वैसे तो शिवलिंग में कई रहस्य छुपे हैं जैसे सोना बनाने की विधि और ज्ञान प्राप्त करने का जरिया। परंतु हम यहां पर शिवलिंग के विन्यास को संक्षिप्त में जानेंगे।
    शिवलिंग का विन्यास :
    1. शिवलिंग के 3 हिस्से होते हैं। पहला हिस्सा जो नीचे चारों ओर भूमिगत रहता है। मध्य भाग में आठों ओर एक समान पीतल बैठक बनी होती है। अंत में इसका शीर्ष भाग, जो कि अंडाकार होता है जिसकी कि पूजा की जाती है।
    2. इस शिवलिंग की ऊंचाई संपूर्ण मंडल या परिधि की एक तिहाई होती है।
    3. ये 3 भाग ब्रह्मा (नीचे), विष्णु (मध्य) और शिव (शीर्ष) के प्रतीक हैं।
    4. शीर्ष पर जल डाला जाता है, जो नीचे बैठक से बहते हुए बनाए गए एक मार्ग से निकल जाता है।
    5. प्राचीन ऋषि और मुनियों द्वारा ब्रह्मांड के वैज्ञानिक रहस्य को समझकर इस सत्य को प्रकट करने के लिए विविध रूपों में इसका स्पष्टीकरण दिया गया है। संपूर्ण ब्रह्मांड उसी तरह है जिस तरह कि शिवलिंग का रूप है जिसमें जलाधारी और ऊपर से गिरता पानी है। शिवलिंग का आकार-प्रकार ब्रह्मांड में घूम रही हमारी आकाशगंगा और उन पिंडों की तरह है, जहां जीवन होने की संभावना है। वातावरण सहित घूमती धरती या सारे अनंत ब्रह्माण्ड (ब्रह्माण्ड गतिमान है) का अक्स/धुरी ही शिवलिंग है।
    ये 5 समय शिवजी के, सावधानी रखना जरूरी, पूजा का होता है असर
    भगवान शिव और भगवान विष्णु की पूजा के अलग अलग समय नियुक्त हैं। यदि सही समय में सावधानी एवं नियम का पालन करके शिवजी की पूजा या आराधना की जाए तो उसका तुरंत ही असर होता है। यदि आप पूजा नहीं करते हैं तो कम से कम इन दिनों में आपको पवित्र बने रहना आवश्यक है अन्यथा आप मुसीबत में फंस सकते हैं तो आओ जानते हैं कि शिवजी के कौनसे 5 ऐसे समय है जबकि हमें सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि इस समय में शिवजी ही नहीं उनके गण में उनके साथ सक्रिय रहते हैं।
    1.सोमवार : सोमवार शिवजी का खास दिन है इस दिन उनकी पूजा और आराधना होती है। इस दिन का विशेष ध्यान रखना जरूरी है।

    2.प्रदोष काल : यदि आपको किसी अमंगल से बचना हो तो शिवजी के प्रदोष काल को जानना जरूरी है। हर दिन प्रदोष काल होता है। सूर्यास्त से दिनअस्त तक का समय भगवान ‍'शिव' का समय होता है जबकि वे अपने तीसरे नेत्र से त्रिलोक्य (तीनों लोक) को देख रहे होते हैं और वे अपने नंदी गणों के साथ भ्रमण कर रहे होते हैं। इस काल में भूतों के स्वामी भगवान रुद्र का जो अपराधी होता है कठोर दंड पाता है। इस वक्त भोजन, पानी, संभोग, यात्रा, बहस और हर तरह की वार्तालाप करने की मनाही है। इस काल को धरधरी का काल कहते हैं जबकि राक्षसादि प्रेत योनि की आत्माएं सक्रिय रहती है। इस समय जो पिशाचों जैसा आचरण करते हैं, वे नरकगामी होते हैं।
    3.मासिक शिवरात्रि : हर माह एक शिवरात्रि होती है जिसे मासिक शिवरात्रि कहते हैं। हर माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है। मासिक शिवरात्रि के व्रत का बहुत अधिक महत्व होता है. इस दिन व्रत रखने से भगवान शिव का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।

    4. श्रावण माह की शिवरात्रि : जब प्रदोष श्रावण माह में आता है तो वह बड़ी शिवरात्रि मानी जाती है। श्रावण मास की चतुर्दशी की शिवरात्रि भी धूम-धाम से मनाई जाती है।
    5.महाशिवरात्रि : फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी पर पड़ने वाली शिवरात्रि को महाशिवरात्रि कहा जाता है, जिसे बड़े ही हषोर्ल्लास और भक्ति के साथ मनाया जाता है। ईशान संहिता में बताया गया है कि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी की रात आदि देव भगवान श्रीशिव करोड़ों सूर्यों के समान प्रभा वाले लिंगरूप में प्रकट हुए।

    फाल्गुनकृष्णचतुर्दश्यामादिदेवो महानिशि।
    शिवलिंगतयोद्भूत: कोटिसूर्यसमप्रभ:॥
    ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि में चंदमा सूर्य के नजदीक होता है। उसी समय जीवनरूपी चंद्रमा का शिवरूपी सूर्य के साथ योग-मिलन होता है। इसलिए इस चतुर्दशी को शिवपूजा करने का विधान है। प्रलय की बेला में इसी दिन प्रदोष के समय भगवान शिव तांडव करते हुए ब्रह्मांड को तीसरे नेत्र की ज्वाला से भस्म कर देते हैं। इसलिए इसे महाशिवरात्रि या जलरात्रि भी कहा गया है। इस दिन भगवान शंकर की शादी भी हुई थी। इसलिए रात में शंकर की बारात निकाली जाती है। रात में पूजा कर फलाहार किया जाता है। अगले दिन सवेरे जौ, तिल, खीर और बेल पत्र का हवन करके व्रत समाप्त किया जाता है।

    छत्तीसगढ़ सरकार की हाॅफ बिजली योजना से अब तक प्रदेश के 38.68 लाख से अधिक परिवारों को 1645 करोड़ रूपए की मिली सब्सिडी

       रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ सरकार की हाफ बिजली बिल योजना से प्रदेश के लाखों घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को महंगाई के दौर में लाखों उपभोक्ताओं को राहत मिली है। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई इस योजना के तहत अब तक 38 लाख 68 हजार 462 बिजली उपभोक्ताओं को छत्तीसगढ़ शासन द्वारा 1645 करोड़ रुपए की घरेलू सब्सिडी दी गई है, या यह कह सकते है कि सीधे-सीधे लोगों की जेब में 1645 करोड़ रूपए की बचत हुई है।
    गौरतलब है कि देश के बिजली हब छत्तीसगढ़ में किसानों, गरीब परिवारों को रियायती दरों पर बिजली आपूर्ति की अनेक योजनाएं संचालित की जाती रही हैं। मार्च 2019 में नई सरकार द्वारा पहली बार घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के लिए भी नई योजना शुरु की गई। हाफ बिजली बिल योजना के नाम से शुरु की गई इस योजना में घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के 400 यूनिट तक के बिल में आधे बिल की राशि में छूट दी गयी है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की विशेष पहल पर छत्तीसगढ़ में 1 मार्च 2019 से प्रारंभ की गई हाफ बिजली बिल योजना में घरेलू उपभोक्ताओं को प्रति माह 400 यूनिट तक की बिजली खपत पर प्रभावशील टैरिफ पर 50 प्रतिशत की छूट की पात्रता है। इस छूट के समतुल्य राशि राज्य शासन द्वारा विद्युत वितरण कंपनी को अनुदान के रूप में दी जाती है। वर्ष 2020-21 में जनवरी 2021 की स्थिति में राज्य शासन द्वारा 658 करोड़ रुपए की राशि इस योजना के लिए जारी की गई है। हाॅफ बिजली बिल योजना में मार्च 2019 से अब तक की स्थिति में कुल 38 लाख 68 हजार 462 उपभोक्ता इस योजना का लाभ ले चुके हैं। मार्च 2019 से अब तक छत्तीसगढ़ शासन द्वारा 1645 करोड़ रुपए की घरेलू सब्सिडी घरेलू उपभोक्ताओं को दी गई है।
    मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में दिसंबर 2018 में गठित नई सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं की समस्याओं को पूरी संवेदनशीलता के साथ महसूस किया और ‘सबका साथ-सबका विकास’ की नीति पर अमल करते हुए राज्य के सभी घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के लिए 01 मार्च 2019 से ‘हाफ बिजली बिल योजना’ लागू की और अपना एक बड़ा वादा पूरा किया। ‘हाफ बिजली बिल योजना’ प्रदेश के लाखों घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के लिए अप्रत्याशित और सुखद बदलाव की योजना साबित हो रही है। प्रदेश के लाखों घरेलू बिजली उपभोक्ताओं ने कभी ऐसी योजना की कल्पना भी नहीं की थी। योजना ने इस वर्ग के लोगों को बड़ी राहत प्रदान की है। उनके घरों का हजार रुपए का बिजली बिल कुछ सैकड़ों में सिमट गया। अब इन उपभोक्ताओं के लिए अपने घर का बिजली बिल पटाने में होने वाला खर्च आधा हो गया है, बचत राशि का उपयोग अब वे अन्य कार्यों में कर सकंेगे।

    रेल मिल ने एसएमएस दो के ब्लूम्स् को इन-हाउस रोलिंग कर बनाया बिलेट्स
    भिलाई / शौर्यपथ / भिलाई इस्पात संयंत्र ने बाज़ार में बढ़ती मांगों को देखते हुए मर्चेन्ट मिल में टीएमटी उत्पादन बढ़ान के लिए अभिनव पहल करते हुए बिलेट्स की उपलब्धता में वृद्धि सुनिश्चित करने का निर्णय लिया। इस हेतु संयंत्र के निदेशक प्रभारी अनिर्बान दासगुप्ता के नेतृत्व में रणनीतिक निर्णय लिया गया जिसे कार्यपालक निदेशक वक्र्स राजीव सहगल के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक संपन्न किया गया।
    इसके तहत भिलाई इस्पात संयंत्र के रेल एण्ड स्ट्रक्चरल मिल ने पहली बार एसएमएस-2 के कास्टर नम्बर-4 से प्राप्त 320ग340 मिमी के 256 ब्लूम्स् की सफलतापूर्वक रोलिंग कर 125ग125 मिमी वाले बिलेट्स में बदला जिसका वजन 1046 टन है। जिसकी आपूर्ति टीएमटी बार के रोलिंग हेतु मर्चेन्ट मिल को उपलब्ध कराया जायेगा। यह रोलिंग एक चुनौतीपूर्ण कार्य था जिसे रेल मिल बिरादरी ने बखूबी अंजाम दिया।
    उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व मर्चेन्ट मिल ने 32 मिमी टीएमटी बार के रोलिंग हेतु दुर्गापुर स्टील प्लान्ट से 125 बाई 125 मिमी वाले बिलेट्स की आपूर्ति की गई थी। इस बिलेट्स की सफलतापूर्वक ट्रायल रोलिंग ने बीएसपी बिरादरी के समक्ष इस प्रकार के बिलेट्स की आपूर्ति सुनिश्चित करने की चुनौती रखी। इस चुनौती को रेल एवं स्ट्रक्चरल मिल ने स्वीकार करते हुए बीएसपी के एसएमएस-2 से प्राप्त ब्लूम्स् को रोल कर 125ग125 मिमी वाले बिलेट्स में बदलने का बीड़ा उठाया।
    इस रोलिंग को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए रेल मिल के विभिन्न अनुभागों ने विभिन्न मॉडिफिकेशन्स को अंजाम दिया जैसे आरटीएस एवं आरपीडीबी की टीम ने रोल-पास डिजाइन में परिवर्तन किया। इसी प्रकार रेल एवं स्ट्रक्चरल मिल की टीम ने गाइड्स को मॉडिफाइड करने के साथ ही बिलेट्स को कुलिंग बेड में सीधा रखने हेतु अन्य कई मॉडिफिकेशन्स को अंजाम दिया गया। इसी प्रकार इसके निर्धारित साइज में काटने हेतु प्रबंध किए गए। 125 बाई125 मिमी वाले बिलेट्स के रोलिंग हेतु रेल मिल, आरटीएस एवं आरपीडीबी की संयुक्त टीम ने रोलिंग स्टैण्ड में आवश्यक सुधार किये। इस प्रकार बीएसपी में पहली बार कास्ट स्टील ब्लूम्स् को आरएसएम द्वारा बिलेट्स में कन्वर्ट किया गया। इन समग्र प्रयास से मर्चेन्ट मिल में टीएमटी उत्पादन बढ़ाना संभव हो सकेगा।
    विदित हो कि इससे पूर्व 26 जनवरी, 2021 को रेल मिल बिरादरी ने एसएमएस-3 द्वारा उत्पादित 300ग335 मिमी के 24 ब्लूम्स् की सफलतापूर्वक रोलिंग कर 125ग125 मिमी वाले बिलेट्स में बदला। इस महत्वपूर्ण व अभिनव उपलब्धि के लिये कार्यपालक निदेशक (वक्र्स) श्री राजीव सहगल ने रेल एवं स्ट्रक्चरल मिल के सम्पूर्ण रेल मिल, आरटीएस एवं आरपीडीबी टीम को बधाई दी।

    टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ /आम के साथ गुठलियों के भी दाम! आपने यह कहावत तो जरूर सुनी होगी। कुछ ऐसी ही कहावत आलू और इसके छिलकों पर भी फीट बैठती है। आलू खाने में स्वादिष्ट लगते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि आलू के छिलके भी गुणों के मामले में कम नहीं होते। आइए, जानते हैं आलू के छिलकों के फायदे-
    ब्लड प्रेशर कंट्रोल में कारगर
    आलू में अच्छी-खासी मात्रा में पोटेशि‍यम पाया जाता है। पोटेशियम ब्लड प्रेशर को रेग्युलेट करने में मदद करता है।
    डार्क सर्कल्स पर करता है वार
    आंखों के नीचे अगर काले घेरे बन गए हों या धूप के कारण स्किन टेन हो गई हो, तो आलू के छिलके को पीस कर उसका रस निकाल कर चेहरे पर लगाते रहें। कालापन दूर हो जाएगा।
    खून की कमी को दूर करने में मददगार
    एनीमिया या आयरन की कमी में बाकी सब्जिरयों के साथ आलू के छिलके खाना बहुत फायदेमंद रहता है। आलू के छिलके में आयरन की अच्छी मात्रा होती है, जिससे एनीमिया होने का खतरा कम हो जाता है।
    शरीर को मजबूती देते हैं आलू के छिलके
    आलू के छिलके में भरपूर मात्रा में विटामिन बी3 पाया जाता है। विटामिन बी3 ताकत देने का काम करता है। इसके अलावा इसमें मौजूद नैसीन कार्बोज को एनर्जी में बदल देता है।
    डाइजेस्टि्व सिस्टम को करता है बूस्ट
    फाइबर से भरपूर हमारी डाइट में फाइबर की कुछ मात्रा जरूर होनी चाहिए। एक ओर जहां आलू में भरपूर मात्रा में फाइबर पाया जाता है वहीं इसके छिलके में भी अच्छी मात्रा में फाइबर्स होते हैं। ये डाइजेस्टिटव सिस्टम को भी बूस्ट करने का काम करता है।
    हड्डियों की मजबूती के लिए
    आलू के छिलके में कैल्शियम और विटामिन कॉप्लेक्स खूब होता है। इससे हड्डियों को मजबूती मिलती हैं और विटामिन बी से शरीर को ताकत मिलता है। कोशिश करें कि आलू केा जब भी बनाए छिलका सहित बनाएं। या इसे स्नैक्स की तरह इस्ते माल करें।
    बालों को काला करने में मददगार
    आपके बाल सफेद हो रहे हैं, तो आप आलू के एक कटोरी छिलके को आधा लीटर पानी में उबालें। जब पानी एक से दो चम्मच रह जाए, तो आप इससे अपने बालों पर लगाएं। बार-बार ऐसा करने से आपके बाल ब्राउन हो जाएंगे।

    टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ /हेयर कलर करने का सबसे बड़ा साइड इफेक्ट होता है कि बहुत ज्यादा केमिकल वाले कर्लस आपके बालों को डैमेज कर सकते हैं। ऐसे में ज्यादातर लोग नेचुरल हेयर कलर को सबसे सेफ मानते हैं। नेचुरल हेयर कलर केमिकल वाले हेयर कलर्स के मुकाबले बहुत कम समय के लिए आपके बालों में टिकते हैं लेकिन इनसे साइड इफेक्ट का खतरा न के बराबर रहता है। आज हम आपको गेंदे के फूलों से नेचुरल हेयर कलर बनाने का तरीका बता रहे हैं।
    नेचुरल हेयर कलर बनाने की सामग्री-
    गेंदे के फूलों की पंखुड़ियां - 1 कप
    गुड़हल के फूलों की पंखुड़ियां -2 बड़े चम्मच
    पानी- 2 कप
    नेचुरल हेयर कलर बनाने की विधि-
    गेंदे के फूलों से हेयर कलर बनाने के लिए सबसे पहले पैन में पानी उबालें।
    एक उबाल आने के बाद इसमें गेंदे व गुड़हल फूलों की पंखुड़ियां डालें।
    इसे धीमी आंच पर 30 मिनट या फूलों का रंग निकलने तक उबालें।
    तैयार पानी को ठंडा होने के लिए अलग रख दें।
    आपका नेचुरल हेयर कलर बन कर तैयार है।
    इस पानी को छन्नी की मदद से छान कर बोतल में भरकर फ्रिज में रखें।
    ऐसे करें इस्तेमाल
    नेचुरल हेयर कलर को यूज करने के लिए सबसे पहले बालों को शैंपू करके साफ करें।
    फिर हल्के गीले बालों पर इस पानी को लगाकर स्कैल्प से पूरे बालों पर मसाज करें।
    इसे पानी से धोने की जगह ऐसे ही लगा रहने दें।
    साथ ही बालों को सुखाने के लिए ब्लो ड्रायर का इस्तेमाल करने से बचें।
    इसे धूप में नेचुरल तरीके से सुखने दें।
    फिर हर बार शैंपू के बाद इस पानी को इस्तेमाल करें।
    इससे आपके बालों को हल्का बरगंडी या कॉपर शेड मिलेगा।

    शौर्यपथ / लाल किताब के अनुसार प्रत्येक ग्रह का अपना एक प्रतिनिधि वृक्ष होता है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि आपके घर या खेत के आसपास कौनसे वृक्ष हैं। जैसे कुंडली में शनि और चंद्र की युति विष योग बनाती है उसी तरह शनि और चंद्र से संबंधित वृक्ष पास पास लगे हैं तो वैसे ही असर छोड़ेंगे। अत: वृक्ष के शत्रु वृक्ष को जान कर उनका समाधान कर लेना चाहिए ताकि आपको कोई परेशानी ना हो।
    1. सूर्य : सूर्य का वृक्ष तेजफल का वृक्ष होता है। इसके अलावा पर्वतों पर उगने वाले पौधे, मिर्च, काली मिर्च, शलज़म, सूर्यमुखी का फूल, सरसों, गेहूं और विल्वमूल की जड़ पर भी सूर्य का अधिकार होता है। शुक्र, राहु और शनि के वृक्ष इसके आसपास नहीं होना चाहिए, क्योंकि यह सूर्य के शत्रु हैं।

    2. चंद्र : पोस्त का हरा पौधा, जिसमें दूध हो या सभी दूध वाले वृक्ष या पौधे चंद्र के हैं। इसके अलावा खोपरा, ठंडे पदार्थ, रसीले फल, चावल, खिरनी की जड़ और सब्जियों पर भी चंद्र का अधिकार रहता है। चंद्र के पौधे या वृक्ष के साथ शनि, राहु और केतु के वृक्ष नहीं लगाना चाहिए।

    3. मंगल : नीम का पेड़ साक्षात मंगल है। इसके अलावा नुकीले वृक्ष, बरगद, अदरक, अनाज, जिन्सें, तुअर दाल, मूंगफली और अनंतमूल की जड़ पर मंगल का अधिकार रहता है। बुध, शुक्र, शनि, राहु और केतु के वृक्ष इस वृक्ष के आसपास नहीं होना चाहिए। वर्ना मंगल खराब हो जाएगा।

    4. बुध : केला, चौड़े पत्ते के पौधे या वृक्ष बुध के कारक है। इसके अलावा आंधीझाड़ा की झाड़ी, विधारा की जड़, नर्म फसल, मूंग दाल, हरे मुंग की दाल और बैंगन पर भी बुध का अधिकार होता है। बुध के वृक्ष या पौधों के साथ चंद्र के पौधे नहीं होना चाहिए।
    5. गुरु : गुरु अर्थात बृहस्पति साक्षात रूप में पीपल का वृक्ष है। इसके अलावा केले के वृक्ष, भारंगी/केले की जड़, खड़ी फसल, बंगाली चना और गांठों वाले पादप से जुड़े पौधे पर भी गुरु का अधिकार होता है। पीपल के पास शुक्र, बुध, शनि, केतु और राहु के वृक्ष नहीं होना चाहिए।

    6. शुक्र : कपास का पौधा और मनी प्लांट शुक्र का कारक है। कोई भी जमीन पर आगे बढ़ने वाली लेटी हुई बेल शुक्र की कारक है। इसके अलावा फलदार वृक्ष, फूलदार पौधे, गुलर, मटर, बींस, पहाड़ी पादप, मेवे पैदा करने वाले पादप और लताओं पर भी शुक्र का अधिकार होता है। शुक्र के पौधों के पास कभी भी सूर्य, चंद्र, मंगल, गुरु और राहु के पौधे या वृक्ष न लगाएं।
    7. शनि : शमी, कीकर, आम और खजूर का वृक्ष शनि का कारक है। इनमें से शमी के वृक्ष को छोड़कर कोई सा भी वृक्ष नहीं लगाना चाहिए। इसके अलावा पादपों में जहरीले और कांटेदार पौधे, खारी सब्जियां, बिच्छोल की जड़ और तम्बाकू पर भी शनि का अधिकार होता है। शनि के वृक्ष के पास सूर्य, चंद्र और मंगल के वृक्ष नहीं होना चाहिए।

    8. राहु : नारियल का पेड़, चंदन का पेड़, कुत्ता घास, कैक्टस और कांटे वाले सभी वृक्ष या पौधे राहु के कारक हैं। चंदन एवं नारियल के पेड़ को छोड़कर बाकी को घर में या आसपास कभी भी नहीं लगाना चाहिए। इसके अलावा लहसुन, काले चने, काबुली चने और मसले पैदा करने वाले पौधों पर राहु और केतु का अधिकार होता है। नारियल का पेड़ लगा है तो सूर्य, मंगल और चंद्र के पौधे या वृक्ष उसके आसपास नहीं होना चाहिए।
    9. केतु : इमली का दरख्त, तिल के पौधे और केला केतु के कारक है। इसके अलावा अश्वगंधा, लहसुन, काले चने, काबुली चने और मसले पैदा करने वाले पौधों पर राहु और केतु का अधिकार होता है। केले का वृक्ष लगा है तो उसके पास मंगल और चंद्र के वृक्ष नहीं लगे होना चाहिए।

    शौर्यपथ / अक्सर किचन के सिंक के नीचे मौजूद खाली जगह को लोग घर के बेकार समान को स्टोर करने के लिए इस्तेमाल करते हैं। लेकिन किचन को ऑर्गेनाइज रखने और अनावश्यक नुकसान को रोकने के लिए कुछ खास चीजों को किचन सिंक के नीचे स्टोर करने से बचना चाहिए। आइए जानते हैं आखिर कौन सी हैं वो खास चीजें।
    केमिकल प्रोडक्ट्स-
    किचन सिंक के नीचे लोग डस्टबीन के साथ अक्सर कैमिकल प्रोडक्ट्स जैसे ब्लीच, ड्रेन क्लीनर को भी स्टोर कर देते हैं। लेकिन ऐसा बिल्कुल न करें, इन कैमिकल प्रोडक्ट्स के गिरने से यह पूरे घर में फैलकर बच्चों, पेट्स या घर के बाकी सदस्यों को भी नुकसान पहुंच सकता है।
    टूल्स-
    किचन सिंक के नीचे ड्रिल्स, रिंचेस या फिर अन्य टूल्स को स्टोर करने की आदत आपकी चीजें खराब कर सकती हैं। कई बार सिंक से पानी लीक होने पर नीचे रखे इन टूल्स में जंग लग सकता है, जिससे यह जल्दी खराब हो सकते हैं।
    बैकअप आइटम-
    बैकअप आइटम रखने के लिए किचन सिंक के नीचे की ही जगह ज्यादातर इस्तेमाल की जाती है। लेकिन ऐसा करते समय लंबे समय तक लोग इस जगह की साफ-सफाई करना भूल जाते हैं। जिसकी वजह से यहां जर्म्स औऱ बैक्टीरिया पनपने लगते हैं।
    ऑयल रैग्स-
    आग लगने वाले आइटम जैसे थिनर, पॉलिश, पेंट या फर्नीचर पॉलिश आदि किचन सिंक के नीचे स्टोर न करें। ऐसा करने से कई बार आग लगने का खतरा बना रहता है। ऐसे में इन चीजों को ऐसी जगह पर रखें जहां इनके गिरने और फैलने का खतरा कम रहे।
    बेकार वस्तुएं-
    किचन सिंक के नीचे स्क्रबर, कचरे की थैलियां, और डिश सोप आदि चीजों को न रखें। वहीं किचन सिंक के नीचे उन्हीं चीजों को स्टोर करें, जिसका इस्तेमाल बार-बार किया जाता है। ऐसा करने से आप हर तरह के नुकसान की संभावना से बच जाएंगे।

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