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June 01, 2026
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धर्म संसार /शौर्यपथ /साल में चार नवरात्रि आते हैं, जिनमें से दो गुप्त नवरात्रि आते हैं। आमतौर पर लोग शारदीय और चैत्र नवरात्रि के बारे में ही जानते हैं। इसके अलावा दो और नवरात्रि भी आते हैं। जिनमें विशेष कामनाओं की सिद्धि की जाती है। गुप्त नवरात्रि में सात्विक और तांत्रिक पूजा की जाती है। गुप्त नवरात्रि में पूजा और मनोकामना को गुप्त रखा जाता है। कहते हैं कि ऐसा करने से मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त होता है और फल दोगुना मिलता है। गुप्त नवरात्रि के दौरान विवाह, नौकरी आदि संबंधित कई उपाय भी किये जाते हैं। इस साल माघ गुप्त नवरात्रि 12 फरवरी से शुरू हो रहे हैं। जानिए इन उपायों के बारे में-
1. संतान प्राप्ति के लिए- गुप्त नवरात्रि के दौरान संतान प्राप्ति के लिए 9 दिन मां दुर्गा को पान का पत्ता अर्पित करना चाहिए। पान का पत्ता कटा-फटा नहीं होना चाहिए। पूजा के दौरान नन्दगोपगृह जाता यशोदागर्भ सम्भवा ततस्तौ नाशयिष्यामि विन्ध्याचलनिवासिनी मंत्र का जाप करना चाहिए। कहते हैं कि ऐसा करने से मनोकामना पूरी होती है।
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2. नौकरी की समस्या के लिए- नौकरी या जॉब में किसी तरह की समस्या आ रही है तो गुप्त नवरात्रि के दौरान 9 दिन तक मां दुर्गा को बताशे पर रखकर लौंग अर्पित करनी चाहिए। इस दौरान सर्वबाधा विनिर्मुक्तो धन धान्य सुतान्वित: मनुष्यो मत्प्रसादेने भविष्यति ना संशय: मंत्र का जाप करना चाहिए।
3. खराब सेहत के लिए- खराब सेहत से छुटकारा पाने के लिए 9 दिन तक देवी मां को लाल पुष्प अर्पित करना चाहिए। इस दौरान ऊं क्रीं कालिकायै नम: मंत्र का जाप करना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से व्यक्ति स्वस्थ होता है।
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4. कर्ज से मुक्ति पाने के लिए- कर्ज या किसी वाद-विवाद से मुक्ति पाना चाहते हैं तो इसके लिए 9 दिन तक देवी मां के सामने गुग्गल की सुगंध वाला धूप जलाएं। ऐसा करने से समस्याओं से मुक्ति मिलती है। इस दौरान ऊं दुं दुर्गाय नम: का जाप करना चाहिए।
5. विवाह के लिए- अगर विवाह में कोई बाधा आ रही है तो पूरे 9 दिन पीले फूलों की माला अर्पित करनी चाहिए। इस दौरान कात्यायनी महामाये, महायोगिनयधीश्वरी नन्दगोपसुतं देवी, पति में कुकू ते नम: मंत्र का जाप करना चाहिए।

धर्म संसार /शौर्यपथ /माघ चतुर्दशी को नरक निवारण चतुर्दशी के नाम से जानते हैं। माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को नरक निवारण चतुर्दशी होती है। इस साल यह तिथि 10 फरवरी (बुधवार) को पड़ी है। इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती और श्रीगणेश की पूजा का विधान है। कहते हैं कि आज के दिन शिव परिवार की पूजा करने वालों को पापों से मुक्ति मिलती है। आयु में वृद्धि होती है और नरक की यातनाओं से मुक्ति मिलती है।
आज ही तय हुआ था माता पार्वती और भगवान शिव का विवाह-
पौराणिक कथाओं के अनुसार, माघ मास की चतुर्दशी को ही शिव-पार्वती का विवाह तय हुआ था। जबकि ठीक एक महीने बाद यानी फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि को शिव-पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था। भगवान शिव और माता पार्वती की विवाह तिथि को महाशिवरात्रि के रूप में मनाते हैं।
नरक निवारण चतुर्दशी के दिन ऐसे करें शिव पूजा-
1. सबसे पहले सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान आदि करें।
2. साफ वस्त्र धारण करने के बाद भगवान शिव का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें।
3. भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करें।
4. पूजा के दौरान भोलेनाथ को बेलपत्र और बेर जरूर अर्पित करने चाहिए।
5. पूजा के बाद शिवजी की आरती उतारें।
6. आरती के बाद मंत्रों का जाप करना चाहिए।
7. शाम के समय बेर खाकर व्रत का पारण करना चाहिए।
नरक निवारण चतुर्दशी आज, भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए क्या करना चाहिए और क्या नहीं
खासकर बिहार में यह व्रत महाशिवरात्रि की तरह मनाया जाता है। कई मंदिरों में रुद्राभिषेक, श्रृंगार और जलाभिषेक किया जाता है। पंडितों के अनुसार नर्क की यातना व गलत कर्मों के प्रभाव से बचने के यह व्रत किया जाता है। श्रद्धालु स्वर्ग में अपने लिए सुख व वैभव की कामना करते हैं।
नरक निवारण चतुर्दशी आज, भगवान शिव की अराधना से मिलती है नरक से मुक्ति
हिन्दू धार्मिक मान्यताओं में माघ महीने को दान-पुण्य और स्नान आदि के लिए बहुत ही शुभ महीना माना गया है। माघ महीने की अमावस्या से एक पहले वाली चतुर्दशी को नरक निवारण चतुर्दशी के नाम से जानते हैं। इस दिन भगवान शिव की अराधना की जाती है। इस बार नरक निवारण चतुर्दशी 10 फरवरी 2021 यानी बुधवार को पड़ रही है।
नरक निवारण चतुर्दशी का महत्व:
नरक निवारण चतुर्दशी के दिन लोग सुबह 4 बजे उठकर स्नान कर शिलिंग पर जल अर्पित करते हैं। ऐसा माना जाता है कि आज के दिन भगवान शिव का अराधना से सभी प्रकार के पाप धुल जाते हैं और नरक जाने से मुक्ति मिलती है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह तय हुआ था। कहा जाता है कि इस व्रत को रखने से नरक की यातनाओं से मुक्ति मिलती है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, हिमालय ने पुत्री पार्वती के विवाह का प्रस्ताव भगवान शिव को भेजा था। इसके बाद फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि महाशिवरात्रि के दिन उनका विवाह हुआ था। चतुर्दशी के अवसर पर विभिन्न मंदिरों में जलाभिषेक और पूजा अर्चना कर लोग उपवास रखते हैं। इस दिन लोग गंगा व अन्य पवित्र नदियों में स्नान करते हैं। इस दिन पूरे दिन निराहार रहा जाता है और शाम को व्रत खोला जाता है।
खासकर बिहार में यह व्रत महाशिवरात्रि की तरह मनाया जाता है। कई मंदिरों में रुद्राभिषेक, श्रृंगार और जलाभिषेक किया जाता है। पंडितों के अनुसार नर्क की यातना व गलत कर्मों के प्रभाव से बचने के यह व्रत किया जाता है। श्रद्धालु स्वर्ग में अपने लिए सुख व वैभव की कामना करते हैं।

तनवी, ज्योति और अब्दुल संग सैकड़ों बच्चों ने जीती कुपोषण से जंग

रायपुर / शौर्यपथ / नन्हे तनवी, ज्योति और अब्दुल हैं तो छोटे बच्चे लेकिन उन्होंने जंग बड़ी जीती है। उनकी यह जंग कुपोषण से थी। कुपोषण को हराने के लिए लगातार काम कर रहे लोगों में कुपोषण को जड़ से समाप्त करने का हौसला भी बढ़ रहा है। कुपोषण से बाहर आए इन बच्चों के हंसते खिलखिलाते चेहरे उनके परिवार के साथ ही हर उस दिल को सुकून से भर देते हैं जिन्होंने छत्तीसगढ़ को कुपोषण मुक्त करने की ठानी है। इनमें सबसे पहले मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल हैं जिन्होंने कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ के संकल्प के साथ 2 अक्टूबर 2019 से प्रदेश में मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान की शुरूआत की। अभियान शुरू करते समय मुख्यमंत्री श्री बघेल ने जो सपना देखा था वह तेजी से साकार रूप ले रहा है।
प्रदेश में बच्चों और महिलाओं के कदम कुपोषण को हराने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहे हैं। शारीरिक रूप से कमजोर और कुपोषित बच्चों को सामान्य श्रेणी में लाने के लिए किए जा रहे प्रयासों का नतीजा साफ दिख रहा है। समन्वित प्रयासों से दूरस्थ आदिवासी क्षेत्र सुकमा जिले के 3 हजार से अधिक बच्चों को कुपोषण के दुष्चक्र से बाहर निकाला गया है। जिले में ‘संवरता सुकमा‘कार्ययोजना संचालित है जिससे कुपोषण दर में लगातार कमी आ रही है। 4 वर्षीया बालिका तनवी का वजन सितंबर माह में 6.6 किलोग्राम था जो आज जनवरी माह में बढ़कर 8.89 किलोग्राम हो चुका है। इसी प्रकार अब्दुल का वजन भी 9.92 किलोग्राम से बढ़कर 10.5 किलो हो चुका है। बालिका ज्योति ने भी सुपोषित आहार का लाभ लेकर अपना वजन महज तीन माह में ही 7.91 किलो से 9.8 किलो कर कुपोषण को मात दी है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका और मितानिनों के माध्यम से में 06 वर्ष से कम आयु के कुपोषित बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों में सुपोषण आहार प्रदान किया जा रहा है जो बच्चों के वजन बढ़ाने के साथ ही अन्य पोषक तत्व प्राप्त करने में सहायक हैं। इसके साथ ही गंभीर कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कर चिकित्सकों की सतत् निगरानी में आवश्यक उपचार, पौष्टिक आहार के साथ ही दवाईयां दी जाती है ताकि बच्चों के सेहत में जल्दी सुधार हो।
आंगनबाड़ी में सुपोषण आहार ग्रहण करने आए छोटे बच्चों के मुस्कुराते चेहरे मुख्यमंत्री सुपोषण योजना का असर खुद बयां करते हैं। आंगनबाड़ियों में दूध,अण्डा,रागी हलवा जैसे पौष्टिक और रूचि का भोजन मिलने से उनमें खाने के प्रति रूचि बढ़ी है। सुकमा विकासखंड अन्तर्गत आंगनबाड़ी केंद्र गीदम की कार्यकर्ता श्रीमती सरिता पोड़ियामी ने बताया कि उनके केंद्र में 22 बच्चों को सुपोषण आहार दिया जा रहा है। जिसमें अधिकतर बच्चे विगत तीन माह से सामान्य श्रेणी में आ चुके हैं। रोजाना बच्चे सुबह से ही केंद्र में आकर खेलते हैं और फिर भोजन करते। सुबह के समय भी वह बच्चों को रेडी टू ईट से बने लड्डू और बर्फी का नाश्ता देती है। उन्होंने बताया कि बच्चों को शाम को परोसी जाने वाली दाल, मूंगफली, सोया बड़ी आदि सामग्रियों से बनी खिचड़ी बहुत पसंद है। बच्चे बड़े चाव से खिचड़ी खाते हैं।

करीब 17 हजार करोड़ रूपए पूंजी निवेश के साथ 22 हजार लोगों को मिला रोजगार
मेगा औद्योगिक परियोजनाओं के लिए हुए104 एम.ओ.यू., 42 हजार करोड़ से अधिक का पूंजी निवेश प्रस्तावित
65 हजार और लोगों को मिलेगा रोजगार
146 में से 110 विकासखण्डों में फूडपार्क की स्थापना के लिए भूमि चिन्हांकित
बस्तर में लघु वनोपज आधारित 15 इकाईयों की स्थापना के लिए एम.ओ.यू. के प्रस्ताव तैयार
धान और गन्ने पर आधारित जैव ईंधन एथेनॉल उद्योगों के लिए विशेष प्रोत्साहन पैकेज

    रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा लागू की गई नई औद्योगिक नीति निवेशको को बहुत भा रही है। पिछले दो साल में प्रदेश में जहां 1207 नये उद्योगों की स्थापना हुई है, वहीं राज्य में इन उद्योगों के माध्यम से 16 हजार 897 करोड़ रूपए का पूंजी निवेश हुआ है, जिसमें 22 हजार से अधिक लोगों को सीधा रोजगार मिला है। इसी तरह इस दौरान मेगा औद्योगिक परियोजनाओं हेतु कुल 104 एम.ओ.यू. किए गए हैं। इन इकाइयों का प्रस्तावित कुल पंूजी निवेश 42 हजार 714.48 करोड़ रूपए है, जिसके माध्यम से करीब 65 हजार लोगों को रोजगार प्राप्त होगा।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ राज्य में पिछले दो वर्षाें में तीव्र गति से औद्योगिक विकास हुआ है। इस विकास को हासिल करने राज्य सरकार ने न केवल नई औद्योगिक नीति लागू की बल्कि इस नीति में निवेशकों की आवश्यकता के अनुरूप संशोधनों को शामिल किया। राज्य सरकार ने प्रदेश के विकासखण्डों में फूड पार्को की स्थापना के साथ ही खाद्य प्रसंस्करण नीति लागू की और इसके लिए एम.ओ.यू. निष्पादित भी किए। वनवासियों को वनोपज संग्रहण का वाजिब मूल्य दिलाने के लिए वनांचल पैकेज घोषित किया और उद्यमियों की मांग के अनुसार उन्हें सहायता मुहैया कराया जिससे प्रदेश में औद्योगिक विकास एक नया वातावरण विकसित हुआ है।
राज्य सरकार ने पिछड़े तथा अति पिछड़े क्षेत्रों में वनोपज, हर्बल तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों की स्थापना को बढ़ावा देने के लिए औद्योगिक नीति 2019-24 में वनांचल उद्योग पैकेज घोषित किया गया है। जिसके तहत् इकाईयों को अधिकतम 2.50 करोड़ रूपये का स्थायी पूंजी निवेश अनुदान के साथ-साथ नेट एसजीएसटी सहित औद्योगिक नीति में घोषित सभी अनुदान दिया जा रहा है।
इसी तरह राज्य सरकार द्वारा किसानों की आय को बढ़ाने के लिए खाद्य प्रसंस्करण को विशेष बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके लिये सरकार द्वारा प्रत्येक विकासखण्ड में फूडपार्क की स्थापना का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए 146 विकासखण्डों में से 110 विकासखण्डों में नवीन फूडपार्क की स्थापना भूमि का चिन्हांकन किया जा चुका है। ‘‘छत्तीसगढ़ राज्य खाद्य प्रसंस्करण मिशन‘‘ की अवधि को बढ़ाकर 31 अक्टूबर 2024 तक कर दिया गया है। साथ ही राज्य शासन द्वारा 05 खाद्य प्रसंस्करण इकाईयों से एम.ओ.यू. भी निष्पादित किए गए है, जिसमें दो इकाईयां उत्पादन में आ चुकी है। इनके माध्यम से राज्य में 283 करोड़ रूपये का निवेश तथा 2434 रोजगार प्रस्तावित है। इसके अलावा बस्तर क्षेत्र में लघु वनोपज आधारित 15 इकाईयों की स्थापना के लिए एम.ओ.यू. के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं जिनके माध्यम से 74 करोड़ रूपये का पूंजी निवेश तथा 1049 रोजगार प्रस्तावित है।
किसानों को स्थानीय स्तर पर उनकी उपज का संपूर्ण मूल्य दिलवाने के लिए धान और गन्ने पर आधारित जैर्व इंधन-एथेनॉल उद्योगों के लिए विशेष प्रोत्साहन पैकेज जारी किया गया है। राज्य में अतिरिक्त धान द्वारा उत्पादित एवं शक्कर कारखानों के उत्पाद से बने एथेनॉल हेतु स्थापित इकाईयों को उच्च प्राथमिकता श्रेणी के तहत अनुदान दिया जा रहा है। इसके लिये कच्चे माल की खरीदी समर्थन मूल्य पर करना आवश्यक होगा। राज्य में एथेनॉल प्लांट हेतु 8 इकाइयों द्वारा प्रस्ताव प्राप्त हुए है। जिसमें से 5 निवेशकों द्वारा एम.ओ.यू. निष्पादित कर लिया गया है जिसके माध्यम से 647 करोड़ रूपए का निवेश तथा 683 रोजगार प्रस्तावित है। राज्य सरकार की पहल पर भारत सरकार द्वारा देश में मक्का से एथेनॉल (बायो-फ्यूल) बनाने की अनुमति भी जारी की गई है।
उद्योगों में नवीन विचारधारा को समाहित करने तथा नव रोजगार सृजित करने छत्तीसगढ़ राज्य स्टार्ट-अप पैकेज को नीति में स्थान दिया गया है। इन स्टार्ट-अप्स को अन्य उद्योगों से अधिक सुविधाएं कम औपचारिकता के साथ प्रदान की जायेगी। राज्य में अब तक पंजीकृत स्टार्ट-अप की संख्या 504 है। अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति वर्ग के उद्यमियों को प्रोत्साहन देने हेतु उनके लिये विशेष औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज जारी किये गये हैं।
कोर सेक्टर के मेगा उद्योगों को सहायता देने Be Spoke Policy की नवीन धारणा लायी गई है। जिसमें उद्योगों को उनके उत्पादन से लिंक कर आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। इसमें कुल परियोजना लागत का 60 प्रतिशत से 150 प्रतिशत तक अनुदान प्रदान किये जा रहे हैं।
उद्यमियों द्वारा स्थापित किये जाने वाले पात्र सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को उद्योग विभाग या सीएसआईडीसी के औद्योगिक क्षेत्रों में भू-आबंटन पर भू-प्रीमियम में अधिकतम 60 प्रतिशत तक का छूट प्रदान किया जा रहा है। उद्यमियों द्वारा बहुप्रतीक्षित भूमि हस्तांतरण शुल्क में कमी कर दी गयी है।
राज्य शासन द्वारा एमएसएमई को पृथक रूप से परिभाषित किया गया तथा वृहद सेवा उद्यम की परिभाषा भी जारी की गई। निवेशकों की मांग के अनुसार स्थायी पूंजी निवेश अनुदान को सूक्ष्म तक सीमित न कर लघु व मध्यम श्रेणी के उद्योगों के लिये भी प्रावधानित किया गया है। निजी औद्योगिक पार्क की स्थापना हेतु बस्तर व सरगुजा के पहाड़ी क्षेत्रों में भूमि उपलब्धता की समस्या को देखते हुए वर्तमान नीति में इसे सरगुजा एवं बस्तर संभाग हेतु भूमि की न्यूनतम आवश्यकता को 20 एकड़ कर दिया गया है। इन सभी पहल के कारण दिसंबर 2018 से जनवरी, 2021 तक कुल 1207 उद्योगों की स्थापना हुई। राज्य के इन उद्योगों के माध्यम से कुल 16897 करोड़ रू. का पूंजी निवेश हुआ है तथा 22001 लोगों को रोजगार प्राप्त हुआ है। अब तक मेगा औद्योगिक परियोजनाओं हेतु कुल 104 एम.ओ.यू. निष्पादित किए गए हैं। इन इकाइयों का प्रस्तावित कुल पंूजी निवेश 42714.48 करोड़ रू. है, जिसके माध्यम से कुल 64094 लोगों को रोजगार प्राप्त होगा।

खाना खजाना /शौर्यपथ /सर्दियों के मौसम में अक्सर लोग आलस, कमर दर्द, गठिया, और जोड़ों के दर्द की शिकायत करते हैं। अगर आप भी ऐसी ही किसी समस्या से परेशान हैं तो सर्दियों के मौसम में सुबह नाश्ते में मेथी के लड्डू खान से आपको इन सभी परेशानियों से छुटकारा मिल सकता है। यह लड्डू आपके शरीर में स्फूर्ति बनाए रखने के साथ आपको कमर दर्द, गठिया तथा जोड़ों का दर्द और वात रोग में भी लाभ पहुंचाएगे। आइए जान लेते हैं कैसे बनाए जाते हैं यह टेस्टी हेल्दी लड्डू।
मेथी के लड्डू बनाने के लिए सामग्री-
-500 ग्राम मेथी दाना
-100 ग्राम खाने वाला गोंद
- 500 ग्राम मोटा पिसा गेहूं का आटा
-1 किलो गुड़
- 250 ग्राम शक्कर का बूरा
- 10 ग्राम पिसी छनी बारीक सोंठ
-1 किलो शुद्ध घी
- 100 ग्राम खसखस
- 250 ग्राम बारीक कटा मेवा
-10 ग्राम इलायची पाउडर
मेथी के लड्डू बनाने की विधि-
मेथी के लड्डू बनाने के लिए सबसे पहले मेथी दाने को साफ करके दो दिन पानी बदलकर भिगोएं। इसके बाद मेथी दाने को ताजे पानी से धोकर बारीक पीस लें। मोटे तले के बर्तन में एक बड़ा चम्मच घी डालकर धीमी आंच पर भूनें। घी की जरूरत लगने पर थोड़ा-थोड़ा डालकर चलाते हुए भूनते रहें। ब्राउन होने और खुशबू आने पर उतार लें। आटे को छानकर घी के साथ अलग से इसी तरह भून लें। अब गोंद को घी में फुलाकर हल्का-सा कुचल लें।

कम गर्म घी में सोंठ और खसखस को डालकर निकाल लें। गुड़ को कूटकर या बारीक करके घी के साथ चलाएं। जब गुड़ घी में अच्छी तरह से मिल जाए तो उसे उतारकर इसमें तैयार की हुई सारी सामग्री, कटे मेवे, इलायची पाउडर और आधा बूरा भी मिला दें। घी कम लगे तो इसमें आवश्यकतानुसार गर्म घी मिला लें। अब थोड़ा गर्म रहते ही बूरे को हथेलियों से रगड़ें और एक साइज के लड्डू बना लें। आपके सेहत और स्वाद से भरपूर मेथी के लड्डू बनकर तैयार हैं।

सेहत /शौर्यपथ /अगर लॉकडाउन के दौरान अपने घर से काम कर रहे हैं और काम के घंटे भी इस वक्त बढ़ गए हैं। यह न केवल आपके पूरे स्वास्थ्य पर असर डालता है बल्कि इसका असर आपकी नाजुक आंखों पर भी पड़ता है।
वर्क फ्रॉम होम के दौरान लैपटाप का ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा है, वहीं इसी के साथ ही मोबाइल के संपर्क में भी हम ज्यादा रह रहे हैं जिससे आंखों में जलन, धुंधला दिखना व खुजली जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
इसलिए जरूरी है कि हम अपनी आंखों की देखभाल करें और जब भी आंखों पर दबाव महसूस करें तो स्क्रीन से दूर हो जाएं और बीच-बीच में आंखों को ठंडे पानी से भी धोते रहें। आंखों की जलन की परेशानी ज्यादा बढ़ जाती है। भले ही इस वक्त आप घर पर हैं लेकिन आंखों में जलन आप महसूस करते होंगे। इसलिए इन समस्याओं से निजात पाने के लिए आपको अपनी आंखों की सही देखभाल की जरूरत है, वहीं गुलाब जल का इस्तेमाल आपको आंखों की समस्या से निजात दिला सकता है।
गुलाब जल के इस्तेमाल से आंखों को ठंडक मिलती है, साथ ही ताजगी महसूस होती है। ओवरटाइम काम करने के दौरान आंखों में तनाव महसूस होता है इसके लिए खुद को रिलेक्स करना बहुत जरूरी है। इसके लिए आप कॉटन में गुलाब जल डालें और इसे अपनी आंखों पर रखकर कुछ देर के लिए आंखों को आराम दें। गुलाब जल को आंखों में डालने से भी तुरंत राहत मिलती है, साथ ही फ्रेश महसूस होता है। अत: अपने आंखों का ध्यान रखें और समय-समय पर अपनी पलकों को झपकाते रहें।

टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ /1. जिस तेल से मालिश करें, उस तेल को शीशी में भरकर 6-7 घंटे तक नित्य धूप में रखना चाहिए।
2. तेल की बोतल को जमीन पर नहीं, बल्कि धूप में एक पटिया रखकर इस पटिए पर बोतल रखें और घर में अंदर लाएं, तब भी अंदर पटिए पर ही रखें।
3. खुले, हवादार और साफ स्थान पर जमीन पर दरी या चटाई बिछाकर बैठ जाएँ और बैठकर मालिश करें।
4. मालिश करने के लिए हाथ को नीचे से ऊपर को चलाएं, लेकिन ऐसी सावधानी से हाथ चलाएं कि त्वचा के बाल यानी रोम टूटें या उखड़ें नहीं। नीचे से ऊपर को हाथ चलाने का तत्पर्य है रक्त का प्रवाह हृदय की तरफ होने में सहयोग करना।
5. मालिश की शुरुआत पैरों से करें।
6. मालिश धीरे-धीरे, हल्के दबाव के साथ करें।
7. कम से कम 20-25 मिनट और ज्यादा से ज्यादा 45 मिनट तक मालिश की जानी चाहिए।
8. इसके बाद थोड़ा विश्राम कर स्नान कर लेना चाहिए।
9. मालिश करवाते वक्त बातें न करें और ध्यान को कहीं भी जाने न दें, एकाग्र चित्त रहकर मालिश करें।
10. चलते-फिरते या अन्य काम करते-करते हुए मालिश नहीं करनी चाहिए।

टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ / उषा पान का आयुर्वेदिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है। हमारे ऋषि-मुनि और प्राचीनकाल के लोग उषा पान करके सेहतमंद बने रहते थे। परंतु आधुनिक युग में व्यक्ति यह सबकुछ भूल गया है। क्या आपको पता है कि उषा पान क्या होता और क्या आपको यह भी पता है कि उषापान करने के क्या फायदे हैं। यदि नहीं तो जानिए कि यह क्या होता है।
उषा पान क्या होता है?
हिन्दू धर्मानुसार दिन-रात मिलाकर 24 घंटे में आठ प्रहर होते हैं। औसतन एक प्रहर तीन घंटे या साढ़े सात घटी का होता है जिसमें दो मुहूर्त होते हैं। एक प्रहर एक घटी 24 मिनट की होती है। दिन के चार और रात के चार मिलाकर कुल आठ प्रहर।...आठ प्रहर के नाम : दिन के चार प्रहर- 1.पूर्वान्ह, 2.मध्यान्ह, 3.अपरान्ह और 4.सायंकाल। रात के चार प्रहर- 5. प्रदोष, 6.निशिथ, 7.त्रियामा एवं 8.उषा।

इसमें से जो उषा काल है उस दौरान उठकर पानी पीने को ही उषा पान कहते हैं। परंतु आजकल लोग ऐसा नहीं करते क्योंकि लोगों की दिनचर्या बदल गई है और वे सुबह जल्दी नहीं उठ पाते हैं। ऐसे में जब वे देर रात को खाना खाते हैं तो उस दौरान पानी पी लेते हैं और फिर उन्हें उषा काल में पानी की प्यास नहीं लगती है। यदि लगती भी है तो वे नींद के आलस के मारे उठकर पानी नहीं पीते हैं।

उषा पान के 10 फायदे :
1. रात के चौथे प्रहर को उषा काल कहते हैं। रात के 3 बजे से सुबह के 6 बजे के बीच के समय को रात का अंतिम प्रहर भी कहते हैं। यह प्रहर शुद्ध रूप से सात्विक होता है। इस प्रहर में जल की गुणवत्ता बिल्कुल बदल जाती है। इसीलिए यह जल शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद होगा है।

2. शरीर की जैविक घड़ी के अनुसार इस समय में फेफड़े क्रियाशील रहते हैं। यदि हम इस काल में उठकर गुनगुना पानी पीकर थोड़ा खुली हवा में घूमते या प्राणायाम करते हैं तो फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है, क्योंकि इस दौरान उन्हें शुद्ध और ताजी वायु मिलती है।

3. यदि ऐसा करते हैं तो जब प्रात: 5 से 7 बजे के बीच हमारी बड़ी आंत क्रियाशील रहती है तब इस बीच मल त्यागने में किसी भी प्रकार की कोई परेशानी नहीं होती है। जो व्यक्ति इस वक्त सोते रहते हैं और मल त्याग नहीं करते हैं उनकी आंतें मल में से त्याज्य द्रवांश का शोषण कर मल को सुखा देती हैं। इससे कब्ज तथा कई अन्य रोग उत्पन्न होते हैं।

4. 'काकचण्डीश्वर कल्पतन्त्र' नामक आयुर्वेदीय ग्रन्थ के अनुसार रात के पहले प्रहर में पानी पीना विषतुल्य, मध्य रात्रि में पिया गया पानी दूध सामान और प्रात: काल (सूर्योदय से पहले उषा काल में) पिया गया जल मां के दूध के समान लाभप्रद कहा गया हैं।
5. आयुर्वेदीय ग्रन्थ 'योग रत्नाकर' के अनुसार जो मनुष्य सूर्य उदय होने के निकट समय में आठ प्रसर (प्रसृत) मात्रा में जल पीता हैं, वह रोग और बुढ़ापे से मुक्त होकर 100 वर्ष से भी अधिक जीवित रहता हैं।

6. उषापान करने से कब्ज, अत्यधिक एसिडिटी और डाइस्पेसिया जैसे रोगों को खत्म करने में लाभ मिलता है।

7. उषापान करने वाले की त्वचा भी साफ और सुंदर बनी रहती है।

8. प्रतिदिन उषापान करने से किडनी स्वस्थ बनी रहती है।
9. प्रतिदिन उषापान करने से आपको वजन कम करने में भी लाभ मिलता है।

10. उषापान करने से पाचन तंत्र दुरुस्त होता है।

खास बातें :
1. तांबे के लोटे में पीए पानी। रात में तांबे के बरतन में रखा पानी सुबह पीएं तो अधिक लाभ होता है।
2. वात, पित्त, कफ, हिचकी संबंधी कोई गंभीर रोग हो तो पानी ना पीएं।
3. अल्सर जैसे कोई रोग हो तो भी पानी ना पीएं।

धर्म संसार /शौर्यपथ /महाभारत काल अर्थात द्वापर युग में हनुमानजी की उपस्थित और उनके पराक्रम का वर्णन मिलता है। हनुमानजी ने रामायण काल में भी कई बड़े बड़े महाबलियों का घमंड तोड़ दिया था। फिर चाहे वह रावण हो, मेघनाद हो या बाली। यहां तक की खुद लक्ष्मणजी भी महाबली हनुमानजी के पराक्रम को मान गए थे। लक्ष्मणजी को शेषावतार माना जाता है। उन्होंने ही बाद में महाभारत काल में बलरामजी के रूप में जन्म लिया था। तब भी उन्हें अपने बलशाली होने का घमंड हो चला था।
द्वारिका में बलरामजी ने कई दानवों और असुरों का वध किया था। उन्हें अपनी भुजाओं, गदा और हल पर बहुत घमंड था। एक बार उन्होंने पौंड्रक द्वारा भेजे विशालकाय वानर द्वीत से मुकाबला करके उसे परास्त कर दिया था और उसे अपने एक ही मुक्के से मार दिया था। उसे मारने के बाद तो बलरामजी का अहंकार सातवें आसमान पर चढ़ गया था।


बलरामजी ने जब विशालकाय वानर द्वीत को अपनी एक ही मुक्के से मार दिया था तो उन्हें अपने बल पर घमंड हो चला था। तब श्रीकृष्‍ण के आदेश पर हनुमानजी गंधमादन पर्वत से उड़ते हुए आए और द्वारिका की वाटिका में घुस गए। द्वारिका की वह वाटिका सबसे सुंदर थी। उस वाटिका को उन्होंने उसी तरह उजाड़ना प्रारंभ कर दिया जिस तरह की उन्होंने रावण की वाटिका को उजाड़ दिया था।

द्वारिका की वाटिका में में वह फलों को वृक्ष सहित उखाड़कर खाने लगे और वृक्ष को दूसरी ओर फेंकने लगे। कई सैनिकों ने उन्हें ऐसा करने के रोका परंतु वे सैनिकों से कहां संभलने वाले थे। आखिकर कार सैनिकों ने जाकर बलरामजी को बताया कि एक वानर हमारी वाटिका में घुस आया है और उत्पात मचा रहा है। यह सुनकर बलरामजी क्रोधित हुए और सैनिकों पर भड़कर गए और कहने लगे कि तुम एक तुच्‍छ वानर को नहीं भगा सकते? तब सैनिकों ने बताया कि वह बड़ा ही बलशाली है, सैनिकों के बस का नहीं है।

यह सुनकर बलरामजी खुद उन्हें एक साधारण वानर समझकर अपनी गदा लेकर वाटिका से भगाने के लिए पहुंच गए। वहां कई चेतावनी देने के बाद भी जब हनुमानजी नहीं माने तो फिर बलरामजी ने अपनी गदा निकाल ली और फिर वहां उनका हनुमानजी से गदा युद्ध हुआ। युद्ध करते करते बलरामजी थक हारकर हांफने लगे और उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि किस तरह इस वानर को काबू में करूं।


थक-हारकर तब उन्होंने कहा कि सच कहो वानर तुम कौन हो वर्ना में अपना हल निकाल लूंगा। हनुमानजी ऐसे में श्रीकृष्ण का ध्यान कर कहते हैं कि प्रभु ये तो हल निकालने की बात कर रहे हैं। बताओं अब क्या करूं?

यह मानसिक संदेश सुनकर तब वहां पर श्रीकृष्ण और रुक्मिणी दोनों ही प्रकट होकर बलरामजी को बताते हैं कि ये पवनपुत्र हनुमानजी हैं। यह सुनकर बलरामजी चौंक जाते हैं और वे तब हनुमानजी से क्षमा मांगते हैं और स्वीकार कर लेते हैं कि हां मुझे अपनी गदा पर घमंड था। जय हनुमान। जय श्रीराम।
बाली और हनुमान का युद्ध
सुग्रीव का भाई, अंगद का पिता, अप्सरा तारा का पति और वानरश्रेष्ठ ऋक्ष का पुत्र बाली बहुत ही शक्तिशाली था। देवराज इंद्र का धर्मपुत्र और किष्किंधा का राजा बाली जिससे भी लड़ता था लड़ने वाला कितना ही शक्तिशाली हो उसकी आधी शक्ति बाली में समा जाती थी और लड़ने वाला कमजोर होकर मारा जाता था। लेकिन ऐसी क्या बात थी कि वह हुमानजी से भीड़ गया, आओ जानते हैं।

हनुमानजी बचपन में ही अपने महाबली बाली काका का मान मर्दन कर देते हैं। बाली को अपनी उड़ने की तेज शक्ति पर बहुत अभिमान था लेकिन हनुमाजी उसे भी तेज उड़कर उसका अहंकार तोड़ने का प्रयास करते हैं, लेकिन बाली का फिर भी अभिमान नहीं टूटता है तब होता है महायुद्ध।
हनुमान और सुग्रीव के भाई महाबली बाली के युद्ध की हमें एक कथा मिलती है। बाली को इस बात का घमंड था कि उसे विश्व में कोई हरा नहीं सकता या कोई भी उसका सामना नहीं कर सकता। एक दिन की बात है रामभक्त हनुमान वन में तपस्या कर रहे थे। उस दौरान अपनी ताकत के नशे में चूर बाली लोगों को धमकाता हुआ वन में पहुंचा और चिल्लाने लगा कि कौन है जो मुझे हरा सकता है, किसी ने मां का दूध पिया है जो मुझसे मुकाबला करे।
हनुमानजी उसी वन में राम नाम जप से तपस्या कर रहे थे। बाली के चिल्लाने से उनकी तपस्या में विघ्न हो रहा था। उन्होंने बाली से कहा, वानर राज आप अति-बलशाली हैं, आपको कोई नहीं हरा सकता, लेकिन आप इस तरह चिल्ला क्यों रहे हैं?

यह सुनकर बाली भड़क गया। उसने हनुमान जी को चुनौती थी और यहां तक कहां की रे वानर तू जिसकी भक्ति करता है मैं उसे भी हारा सकता हूं। राम का मजाक उड़ता देख हनुमान को क्रोध आ गया है और उन्होंने बाली की चुनौती स्वीकार कर ली। तय हुआ कि अगले दिन सूर्योदय होते ही दोनों के बीच दंगल होगा।
अगले दिन हनुमान तैयार होकर दंगल के लिए निकले ही थे कि ब्रह्माजी उनके समक्ष प्रकट हुए। उन्होंने हनुमान को समझाने की कोशिश की कि वे बाली की चुनौती स्वीकार न करे। लेकिन हनुमानजी ने कहा कि उसने मेरे प्रभु श्रीराम को चुनौती दी है। ऐसे में अब यदि मैं उसकी चुतौती को अस्वीकार कर दूंगा तो दुनिया क्या समझेगी। इसलिए उसे तो सबक सिखाना ही होगा।

यह सुनकर ब्रह्माजी ने कहा- ठीक है, आप दंगल के लिए जाओ, लेकिन अपनी शक्ति का 10वां हिस्सा ही लेकर जाओ, शेष अपने आराध्य के चरण में समर्पित कर दो। दंगल से लौटकर यह शक्ति फिर हासिल कर लेना। यह सुनकर हनुमानजी मान गए और अपनी कुल शक्ति का 10वां हिस्सा लेकर बाली से दंगल करने के लिए चल पड़े।
दंगल के मैदान में हनुमानजी ने जैसे ही बाली के सामने अपना कदम रखा, ब्रह्माजी के वरदान के अनुसार, हनुमानजी की शक्ति का आधा हिस्सा बाली के शरीर में समाने लगा। इससे बाली के शरीर में उसे अपार शक्ति का अहसास होने लगा। उसे लगा जैसे ताकत का कोई समंदर शरीर में हिलोरे ले रहा हो। चंद पलों के बाद बाली को लगने लगा मानो उसके शरीर की नसें फटने वाली है और रक्त बाहर निकलने ही वाला है।

तभी अचानक ही वहां ब्रह्माजी प्रकट हुए और उन्होंने बाली से कहा कि खुद को जिंदा रखना चाहते हो तो तुरंत ही हनुमान से कोसों दूर भाग जाओ, अन्यथा तुम्हारा शरीर फट जाएगा। बाली को कुछ समझ में नहीं आया, लेकिन वह ब्रह्माजी को यूं प्रकट देखकर समझ गया कि कुछ गड़बड़ है और वह वहां से तुरंत ही भाग खड़ा हुआ।
बहुत दूर जाने के बाद उसे राहत मिली। शरीर में हल्कापन लगने लगा। तब उसने देखा की ब्रह्माजी उसके समक्ष खड़े हैं। तब ब्रह्माजी ने कहा कि तुम खुद को दुनिया में सबसे शक्तिशाली समझते हो, लेकिन तुम्हारा शरीर हनुमान की शक्ति का छोटा-सा हिस्सा भी नहीं संभाल पा रहा है। तुम्हें में बताना चाहता हूं कि हनुमान अपनी शक्ति का 10वां भाग ही लेकर तुमसे लड़ने आये थे। सोचो यदि संपूर्ण भाग लेकर आते तो क्या होता?
बाली यह जानकर समझ गया कि मैंने बहुत बड़ी भूल की थी। बाद में बाली ने हनुमानजी को दंडवत प्रणाम किया और बोला- अथाह बल होते हुए भी हनुमानजी शांत रहते हैं और रामभजन गाते रहते हैं और एक मैं हूं जो उनके एक बाल के बराबर भी नही हूं और उनको ललकार रहा था। मुझे क्षमा करें हनुमान।

शौर्यपथ /क्या आप जानते हैं, कि चॉकलेट में स्वाद के अलावा और भी फायदे हैं।
हम बता रहे हैं चॉकलेट के ऐसे ही कुछ फायदे, जिन्हें जानकर आप भी खुद को चॉकलेट खाने से रोक नहीं पाएंगे- बाजार में उपलब्ध कई तरह की चॉकलेट्स में से, सबसे बेहतर है डार्क चॉकलेट। इसमें शुगर की मात्रा बेहद कम या नहीं के बराबर होती है और यह चॉकलेट आपके स्वास्थ्य के लिए सबसे ज्यादा लाभदायक है।
1 तनाव हो या डिप्रेशन- जी हां, यदि आप किसी प्रकार के तनाव में हैं, तो चॉकलेट आपका वह साथी है, जो बिन कुछ कहे और सुने ही आपका तनाव कम कर सकता है। आप जब भी तनाव या डिप्रेशन में हों, चॉकलेट खाना न भूलें। इससे आप रिलेक्स महसूस करेंगे।
2 त्वचा को रखे जवां- चॉकलेट एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती है, जो आपकी त्वचा पर दिखने वाले बढ़ती उम्र के लक्षणों और झुर्रियों को कम करती है। इससे आपकी त्वचा जवां नजर आती है। इसके गुणों के कारण आजकल चॉकलेट बाथ, फेशि‍यल, पैक और वैक्स का इस्तेमाल भी होने लगा है।
3 जब कम हो ब्लड प्रेशर- जिन लोगों को लो-ब्लडप्रेशर की समस्या है, उनके लिए चॉकलेट बेहद लाभदायक है। ब्लडप्रेशर कम होने की स्थि‍ति में चॉकलेट तुरंत राहत देती है। इसीलिए हमेशा अपने पास चॉकलेट जरूर रखें।
4 कोलेस्ट्रॉल- शरीर में मौजूद एलडीएल कोलेस्ट्रॉल यानी बुरे कोलेस्ट्रॉल को कम करने में चॉकलेट बहुत फायदेमंद है। यह एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को कम कर मोटापे व इसकी वजह से होने वाली अन्य बीमारियों को भी नियंत्रित करने में सहायक है।
5 दिमाग रहे स्वस्थ- एक शोध के मुताबिक रोजाना दो कप हॉट चॉकलेट ड्रिंक पीने से दिमाग स्वस्थ रहता है और याददाश्त कमजोर नहीं होती। चॉकलेट से दिमाग में रक्त संचार बेहतर होता है।
6 हृदय-रोग- एक रिसर्च के अनुसार चॉकलेट या चॉकलेट ड्रिंक का सेवन ह्दय-रोग की संभावना को एक तिहाई कर देता है और ह्दय को स्वस्थ रखने में मदद करता है।
7 एथिरोस्क्लेरोसिस- एथिरोस्क्लेरोसिस एक प्रकार कर बीमारी है, जिसमें धमनियां अवरूद्ध हो जाती हैं। ऐसी स्थिति में चॉकलेट बेहद लाभदायक है।

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