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सेहत /शौर्यपथ / कई लोग ऐसे होते हैं जिन्हें बादाम नहीं पचते। ऐसे में बादाम में मौजूद पोषक तत्व भी उन्हें नहीं मिल पाते। आपको भी अगर बादाम नहीं पचता, तो आप हरा बादाम खा सकते हैं। हरा बादाम न सिर्फ पोषक तत्वों से भरपूर होता है बल्कि आसानी से पच जाता है। आइए, जानते हैं हरे बादाम खाने के फायदे-
- हरे बादाम स्वास्थ्य के लिए अच्छे होते हैं, क्योंकि ये एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर होते हैं और शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकाल सकते हैं। ये रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं।
- ये बादाम वजन घटाने के लिए अच्छे हैं, क्योंकि इनमें स्वस्थ वसा शामिल है। ये अतिरिक्त वसा को बाहर निकालने में मदद करते हैं।
- हरे बादाम पेट के लिए अच्छे होते हैं क्योंकि इनमें बहुत अधिक फाइबर होता है, जो पाचन प्रक्रिया को सुचारू बनाता है और कब्ज से मुक्ति दिलाता है।
- ये बालों के लिए भी फायदेमंद हैं, क्योंकि इनमें विटामिन, खनिज और कई अन्य पोषक तत्व होते हैं।
- हरा बादाम फोलिक एसिड का अच्छा स्रोत है, जो भ्रूण के मस्तिष्क और न्यूरोलॉजिकल विकास में मदद करता है। इसमें मौजूद विटामिन ई बच्चे को अस्थमा के जोखिम से बचाता है।
इन सावधानियों के साथ खूब खाएं हरे बादाम
- सूखे बादाम के मुकाबले हरे बादाम में पानी की मात्रा अधिक होती है और फाइबर भी ज्यादा होता है। इसलिए गर्मियों के मौसम में सूखे बादाम के मुकाबले हरे बादाम ज्यादा खाए जा सकते हैं।
- हरे बादाम में पानी और फाइबर की मात्रा भरपूर होने के कारण ये गर्मियों के मौसम में पाचन में बहुत मदद करते हैं। वैसे तो हरे बादाम को खाने की मात्रा डाइट पर निर्भर करती है, पर आमतौर पर आठ से दस बादाम एक दिन में खाये जा सकते हैं।
- हरे बादाम में पोटैशियम अधिक होता है। इसलिए किडनी से जुड़ी परेशानी वालों को विशेषज्ञ से परामर्श के बाद ही इनका सेवन करना चाहिए।
- वैसे तो हरे बादाम को छिलकर खाया जा सकता है, पर कोई इस तरह न खाना चाहे, तो इनको ऑलिव ऑयल के साथ भी खा सकते हैं।
धर्म संसार /शौर्यपथ /भगवान श्री राम का नाम और उनका काम अद्भुत है। वे पुरुषों में सबसे उत्तम पुरुषोत्तम हैं। जिनकी आराधना महाबली हनुमान करते हैं उनके जैसा आदर्श चरित्र और सर्वशक्तिमान दूसरा कोई नहीं। उन्होंने जिसे भी छूआ वह स्वर्ण हो गया और जिसे देखा वह इतिहास में प्रसिद्ध हो गया। रामायण के पहले नल और नील को कोई नहीं जानता था। ये दोनों भाई सुग्रीव की सेना में आर्किटेक्ट थे। इन्होंने ही रामसेतु का निर्माण करवाया था। आओ जानते हैं इन दोनों भाइयों के बारें में संक्षिप्त जानकारी।
नल- सुग्रीव की सेना का वानरवीर। सुग्रीव के सेना नायक। सुग्रीव सेना में इंजीनियर। सेतुबंध की रचना की थी।
नील- सुग्रीव का सेनापति जिसके स्पर्श से पत्थर पानी पर तैरते थे, सेतुबंध की रचना में सहयोग दिया था। सुग्रीव सेना में इंजीनियर और सुग्रीव के सेना नायक। नील के साथ 1,00000 से ज्यादा वानर सेना थी।
सेहतु बनाने के स्थान की खोज नल और नील ने ही की थी। कई स्थानों का सर्वेक्षण करने के बाद तीन दिन की खोजबीन के बाद श्रीराम और उनकी टीम ने रामेश्वरम के आगे समुद्र में वह स्थान ढूंढ़ निकाला, जहां से आसानी से श्रीलंका पहुंचा जा सकता हो। उन्होंने विश्वकर्मा के पुत्र नल और नील की मदद से उक्त स्थान से लंका तक का पुनर्निर्माण करवाया। नल और नील ने राम की सेना की मदद से यह निर्माण किया। उस वक्त इस रामसेतु का नाम प्रभु श्रीराम ने नल सेतु रखा था।
नल सेतु :
भगवान राम ने जहां धनुष मारा था उस स्थान को 'धनुषकोटि' कहते हैं। राम ने अपनी सेना के साथ लंका पर चढ़ाई करने के लिए उक्त स्थान से समुद्र में एक ब्रिज बनाया था इसका उल्लेख 'वाल्मिकी रामायण' में मिलता है। : वाल्मीक रामायण में वर्णन मिलता है कि पुल लगभग पांच दिनों में बन गया जिसकी लम्बाई सौ योजन और चौड़ाई दस योजन थी। रामायण में इस पुल को ‘नल सेतु’ की संज्ञा दी गई है। नल के निरीक्षण में वानरों ने बहुत प्रयत्न पूर्वक इस सेतु का निर्माण किया था।- (वाल्मीक रामायण-6/22/76)।
वाल्मीक रामायण में कई प्रमाण हैं कि सेतु बनाने में उच्च तकनीक प्रयोग किया गया था। कुछ वानर बड़े-बड़े पर्वतों को यन्त्रों के द्वारा समुद्रतट पर ले आए ते। कुछ वानर सौ योजन लम्बा सूत पकड़े हुए थे, अर्थात पुल का निर्माण सूत से सीध में हो रहा था।- (वाल्मीक रामायण- 6/22/62)
वाल्मीकि रामायण के अलावा कालिदास ने 'रघुवंश' के तेरहवें सर्ग में राम के आकाश मार्ग से लौटने का वर्णन किया है। इस सर्ग में राम द्वारा सीता को रामसेतु के बारे में बताने का वर्णन है। यह सेतु कालांतर में समुद्री तूफानों आदि की चोटें खाकर टूट गया था।
गीताप्रेस गोरखपुर से छपी पुस्तक श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण-कथा-सुख-सागर में वर्णन है कि राम ने सेतु के नामकरण के अवसर पर उसका नाम ‘नल सेतु’ रखा। इसका कारण था कि लंका तक पहुंचने के लिए निर्मित पुल का निर्माण विश्वकर्मा के पुत्र नल द्वारा बताई गई तकनीक से संपन्न हुआ था। महाभारत में भी राम के नल सेतु का जिक्र आया है।
अंन्य ग्रंथों में कालीदास की रघुवंश में सेतु का वर्णन है। स्कंद पुराण (तृतीय, 1.2.1-114), विष्णु पुराण (चतुर्थ, 4.40-49), अग्नि पुराण (पंचम-एकादश) और ब्रह्म पुराण (138.1-40) में भी श्रीराम के सेतु का जिक्र किया गया है।
भरतजी के वार से पहाड़ सहित गिर पड़े थे रामभक्त हनुमान
धर्म संसार /शौर्यपथ / राम के छोटे भाई भरत राजा दशरथ के दूसरे पुत्र थे। उनकी माता कैकयी थी। उनके अन्य भाई थे लक्ष्मण और शत्रुघ्न। उनकी पत्नी का नाम मांडवी और पुत्रों के नाम तक्ष और पुष्कल थे। परंपरा के अनुसार राम को गद्दी पर विराजमान होना था लेकिन मंथरा के भड़काने पर दशरथ पत्नी कैकेयी ने दशरथ से अपने वरदान मांग लिए। वरदान में राम को 14 वर्ष का वनवास और अपने पुत्र भरत को राजसिंहासन देने का वचन लिया। भरत ने इसका घोर विरोध किया, लेकिन अंतत: भरत को राजभार सौंपा दिया। राजा भरत ने सिंहासन पर राम की चरण पादुका रखकर 14 वर्ष तक राज किया। राम और भरत का मिलाप दो बार होता है जो कि बहुत ही चर्चित है। पहला चित्रकूट में और दूसरा नंदीग्राम में। भरतजी नंदीग्राम में रहकर संपूर्ण राज्य की देखरेख करते थे। उसी दौरान यह घटना घटी।
रामायण में इस बात का उल्लेख किया गया है कि जब भगवान राम के छोटे भाई लक्ष्मण को मेघनाद ने युद्ध के दौरान घायल कर दिया था तो संजीवनी बूटी लेने के लिए हनुमानजी को भेजा गया था। दरअसल, राम-रावण युद्ध के दौरान जब रावण के पुत्र मेघनाद ने शक्तिबाण का प्रयोग किया तो लक्ष्मण सहित कई वानर मूर्छित हो गए थे। जामवंत के कहने पर हनुमानजी संजीवनी बूटी लेने द्रोणाचल पर्वत की ओर गए।
हनुमानजी को जब बूटी की पहचान नहीं हुई, तब उन्होंने पर्वत के एक भाग को उठाया और वापस लौटने लगे। रास्ते में उनको कालनेमि राक्षस ने रोक लिया और युद्ध के लिए ललकारने लगा। कालनेमि राक्षस रावण का अनुचर था। रावण के कहने पर ही कालनेमि हनुमानजी का रास्ता रोकने गया था। लेकिन रामभक्त हनुमान उसके छल को जान गए और उन्होंने तत्काल उसका वध कर दिया।
आकाश में पर्वत को एक हाथ में लेकर उड़ते हुए उनके मन में अयोध्या को देखने की इच्छा जागृत हुई तो लौटते वक्त वे अयोध्या के आकाश से गुजर रहे थे। जब भरतजी ने यह नजारा देखा की कोई विशालकाय वानर हाथ में पहाड़ लेकर अयोध्या के आकाश से गुजर रहा है तो उन्हें लगा कि यह कोई शत्रु है। तब भारतजी ने शत्रु समझकर हनुमानजी पर वार किया था जिसके चलते हनुमानजी नीचे गिर पड़े।
बाद में हनुमानजी के बताने पर कि मैं कौन ही और क्यों यह पहाड़ लेकर जा रहा हूं। जब भरतजी को यह पता चला तो वे बहुत पछताए और रोए तथा हनुमानजी से क्षमा मांगी। फिर हनुमानजी पुन: उस पहाड़ा को उठाकर जाने लगे तब पहाड़ का छोटासा हिस्सा वहीं गिर गया था। अयोध्या में आज उस छोटे से हिस्से को मणि पर्वत कहते हैं। मणि पर्वत की ऊंचाई 65 फीट है। यह पर्वत कई मंदिरों का घर है। अगर आप पहाड़ी की चोटी पर खड़े होते हैं तो यहां से पूरे शहर और आसपास के क्षेत्रों का मनोरम दृश्य देख सकते हैं।
श्रीराम की वानर सेना के 2 युथपति मैन्द- द्विविद ने महाभारत के पांडव पुत्र को किया था परास्त
प्रभु श्रीराम जब सीता माता की खोज करते हुए कर्नाटक के हम्पी जिला बेल्लारी स्थित ऋष्यमूक पर्वत पर्वत पहुंचे तो वहां उनकी भेंट हनुमानजी और सुग्रीवजी से हुई। उस काल में इस क्षेत्र को किष्किंधा कहा जाता था। यहीं पर हनुमानजी के गुरु मतंग ऋषि का आश्रम था। श्रीराम ने लंका पर चढ़ाई करने के पहले अपनी सेना का गठन किया था जिसमें एक वानर सेना भी थी। वानर सेना का कामकाज सुग्रीव के जिम्मे था। आओ जानते हैं कि वानर सेना में कौन कौन था और कौन थे वानर सेना के दो खास भाई।
वानर सेना : वानर सेना में सुग्रीव, अंगद, हनुमानजी, दधिमुख (सुग्रीव का मामा), नल, नील, क्राथ, केसरी (हनुमानजी के पिता) आदि कई महान योद्धा थे जिसमें से मैन्द- द्विविद नामक दो भाई भी यूथ पति थे। हर झूंड का एक सेनापति होता था जिसे यूथपति कहा जाता था।
मैन्द- द्विविद : द्विविद सुग्रीव के मन्त्री और मैन्द के भाई थे। ये बहुत ही बलवान और शक्तिशाली थे, इनमें दस हजार हाथियों का बल था। महाभारत सभा पर्व के अनुसार किष्किन्धा को पर्वत-गुहा कहा गया है और वहां वानरराज मैन्द और द्विविद का निवास स्थान बताया गया है। द्विविद को भौमासुर का मित्र भी कहा गया है। ये दोनों भाई दीर्घजीवी थे। रामायण के बाद भी ये जिंदा रहे और महाभारत काल में भी इनकी उपस्थिति मानी गई थी।
यह भी कहा जाता है कि एक बार महाभारत के सहदेव किष्किन्धा नामक गुफा में जा पहुंचे। वहां वानरराज मैन्द और द्विविद के साथ उन्होंने सात दिनों तक युद्ध किया था। परंतु वे उन दोनों महान योद्धाओं का कुछ बिगाड़ नहीं सके। तब दोनों वानर भाई प्रसन्न होकर सहदेव से बोले- 'पाण्डवप्रवर! तुम सब प्रकार के रत्नों की भेंट लेकर जाओ। परम बुद्धिमान धर्मराज के कार्य में कोई विघ्न नही पड़ना चाहिये।'
व्यापार नहीं चल रहा है तो आजमाएं बजरंगबली के 3 उपाय
नौकरी-रोजगार की तलाश में हैं और हर तरफ से निराश हो गए हैं तो इस मंगलवार के दिन आजमाएं यह 2 उपाय।
पहला उपाय -
आप बेरोजगार है या आपका व्यापार नहीं चल रहा है तो आप मंदिर में बैठकर 11 मंगलवार तक सुंदरकांड का पाठ करें। यह पाठ शुरू करने के लिए हनुमान जयंती के दिन चुनेंगे तो अतिउत्तम रहेगा।
दूसरा उपाय-
यदि आप नौकरी पाना चाहते हैं तो नौकरी के लिए इंटरव्यू देने जाएं, तो जेब में लाल रूमाल या कोई लाल कपड़ा रखें लेकिन यह कपड़ा या रूमाल बजरंगबली के चरणों में रखा हुआ होना चाहिए।
तीसरा उपाय-
प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करें और प्रति मंगलवार को हनुमान जी के मंदिर जाएं। हो सके तो पांच शनिवार या मंगलवार को हनुमान जी को चोला चढ़ाएं। हनुमान जी को पान विशेष पसंद है। अत: 11 मंगलवार उन्हें पान और पूरी सुपारी अलग से चढ़ाएं।
-राज्य शासन के नरवा के प्रिंसिपल टेक्निकल एडवाइजर श्री हरीश हिंगोरानी ने वेबिनार के माध्यम से युगांडा के अधिकारियों को दी तकनीकी जानकारी
-इसके बाद अन्य अफ्रीकन देश भी ले रहे रुचि, नाइजीरिया की सरकार ने भी जताई इच्छा, इनका भी वेबिनार के माध्यम से होगा प्रेजेंटेशन
दुर्ग / शौर्यपथ / भूमिगत जलस्तर में वृद्धि के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा आरंभ की गई नवाचारी नरवा योजना का यश सात समंदर पार के देशों में भी फैल गया है। नरवा योजना पाटन ब्लाक के गजरा वाटरशेड प्रोजेक्ट के शानदार नतीजों के आधार पर और इसी माडल पर मुख्यमंत्री ने आरंभ की थी। इसका वीडियो इंटरनेट में भी अपलोड था। युगांडा में जलशक्ति, कृषि एवं पीएचई का विभाग एक ही है। वहाँ भूमिगत जलस्तर बढ़ाकर खेती की संभावनाओं की वृद्धि के लिए दुनिया भर में अपनाये गए तरीके वहाँ का मंत्रालय खंगाल रहा था। इस बीच गजरा वाटरशेड का वीडियो उन्हें मिला। उनकी मिनिस्ट्री ने तत्काल नरवा योजना के सलाहकार हरीश हिंगोरानी को मेल किया और पूरे तकनीकी डिटेल उपलब्ध कराने का अनुरोध किया ताकि इस देश में भी यह माडल अपनाया जा सके।यह वेबिनार शानदार रहा और इसके बाद अन्य अफ्रीकन देशों ने भी इसमें रुचि दिखाई। नाइजीरिया के जलशक्ति मंत्रालय ने भी इसमें रुचि दिखाई और इनके लिए भी ऐसा ही वेबिनार किया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि गजरा नाला वाटरशेड का निर्माण तत्कालीन पीएचई मंत्री भूपेश बघेल ने कराया था और मुख्यमंत्री के रूप में इस कार्यकाल में उन्होंने इसी तर्ज पर अन्य नालों को विकसित करने की योजना बनाई। मुख्यमंत्री के नरवा योजना के सलाहकार हिंगोरानी ने बताया कि गजरा नाला वाटरशेड में छोटे-छोटे स्ट्रक्चर तैयार किये गए। इसका बड़ा असर हुआ और यह आज तक प्रभावी है। खुशी की बात है कि इसे अब पूरी दुनिया अमल करने रुचि ले रही है।
इस तरह हुआ गजरा नाला वाटरशेड से बदलाव- वर्ष 2003 में जब इसका निर्माण हुआ। उस समय हैंडपंप में जलस्तर 17 से 31 मीटर तक गिर गया था। निर्माण पूरा होने के बाद से अब तक जलस्तर 4 से 12 मीटर तक बना हुआ है। उस दौरान हैंडपंपों की संख्या 436 थी जो बाद में बढ़कर 2079 हो गई। वर्ष 2003 में सिंचाई नलकूप 690 थे जो वर्ष 2019 तक बढ़ कर 5500 हो गए। इतने के बावजूद जलस्तर में किसी तरह की कमी नहीं आई अपितु 4 से 12 मीटर के लेवल में बना रहा। वर्ष 2003 में सिंचाई ट्यूबवेल के साथ कवरेज क्षेत्र 7 वर्ग किमी था जो बाद में 15-20 वर्ग किमी तक हो गया। वर्ष 2003 में औसत पंपिंग घंटे 3 से 5 घंटे थे जो बाद में बढ़कर 6 से 10 घंटे हो गये। पहले नाले की सतह में पानी केवल दिसंबर तक ठहरता था। अब पानी फरवरी-मार्च तक ठहरता है। इससे धान के उत्पादन में भी जबर्दस्त इजाफा हुआ।
सेहत /शौर्यपथ /वजन घटाने के लिए हम कितनी ही कोशिशें करते हैं लेकिन कभी-कभी ऐसा होता है कि कुछ आदतें हमारी कोशिशों पर पानी फेर देती हैं। खासतौर पर रात में हम जो भी खाते हैं, उसका असर हमारे खाने पर पड़ता है। ऐसे में रात के समय हमेशा हेल्दी डाइट ही लेनी चाहिए जिससे कि आपको पोषण तो मिले लेकिन आपके शरीर पर फैट न चढ़े। आज हम आपको ऐसी चीजें बता रहे हैं, जिन्हें रात के समय खाने से आपका वजन कंट्रोल रहने के साथ आपका बॉडी फैट भी घटता है।
ग्रीन टी
खाना खाने एक बाद एक कप ग्रीन टी न सिर्फ आपके खाने को पचाएगी बल्कि इसे पीने से आपका पेट भी साफ होगा। ग्रीन टी पीने के बाद 5-10 मिनट टहलना न भूलें, वरना आपको गैस भी बन सकती है।
ब्रोकली
अपने डाइट प्लान में ब्रॉकली को जरूर शामिल करें। ब्रॉकली को स्टीम करके खाना चाहिए। इससे आपका वजन कंट्रोल होने के साथ स्किन प्रॉब्लम्स भी ठीक हो जाती हैं।
चेरी
रात को डिनर के बाद चेरी खाने से जहां आपको अच्छी नींद आएगी। इसके साथ ही इसे खाने से वजन भी कम होता है। चेरी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट से पेट की सूजन भी कम होती है।
बादाम
वजन कम करने के लिए अपने डाइट प्लान में बादाम को शामिल करें। बादाम में जहां एक ओर ढेर सारे पोषक तत्व होते हैं। साथ ही इसमें मौजूद प्रोटीन आपकी मसल्स को भी रिपेयर करता है। इसके अलावा ये फैट करने में भी बेहतरीन असर दिखाता है।
उबले अंडे
प्रोटीन की पूर्ति के लिए उबले अंडे जरूर खाने चाहिए। शरीर में प्रोटीन की कमी दूर करने के साथ इससे फैट भी बर्न करने में मदद मिलती है। बिना कमजोरी वजन कम करना चाहते हैं, तो डाइट में उबले अंडे जरूर शामिल करें।
शौर्यपथ /राजस्थान के अजमेर में स्थित सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरागह में ख्वाजा के 8०9वें उर्स के अवसर पर गुरुवार को बसंत के फूलों का गुलदस्ता पेश किया जाएगा। उर्स के दौरान दरगाह में कोरोना गाइडलाइन की पालना के साथ यह गुलदस्ता बहुत ही सादगी के साथ पेश किया जाएगा। ख्वाजा साहब की दरगाह शाही चौकी के कव्वाल असरार हुसैन परंपरागत तरीके से बसंत पेश करेंगे। बसंत पेश करने से पहले दरगाह के निजाम गेट पर गरीब नवाज की शान में बसंती कलाम भी पेश किए जाएंगे। बसंत के फूल पेश करने के दौरान किसी की सदारत नहीं होगी।
शाही कव्वाल हुसैन ने बताया कि यह उनका निजी एवं कौमी एकता से जुड़ा कार्यक्रम है जो बसंत पंचमी के अवसर पर दरगाह में पेश किया जाता है। उन्होंने बताया कि ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती को पीले केसरिया बसंती फूलों से बेहद लगाव था और यही कारण है कि हुसैनी रंग में रंगा बसंत पेश किए जाने का काम विभाजन के पहले से ही दरगाह शरीफ में होता आ रहा है। उनके दादा एवं पिता यह रस्म निभाते आए हैं और वर्तमान में वह स्वयं हर साल ख्वाजा गरीब नवाज के यहां हाजिरी लगाकर बड़ी शानौ शौकत के साथ शाही कव्वाली के बीच बसंत पेश करते हैं।
टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ /अगर रातभर नींद लेने के बाद भी सुबह उठते ही आप थका हुआ या गर्दन में दर्द महसूस करते हैं तो इसकी वजह आपका फेवरेट तकिया भी हो सकता है। आजकल घर को सजाने के लिए अलग-अलग आकार और रंगों के तकियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। लेकिन तकिए का असल काम गर्दन को सपोर्ट देने और शरीर के पॉश्चर को सही बनाए रखना होता है। खराब गुणवत्ता या बहुत पुराना तकिया इस्तेमाल करने से व्यक्ति की मांसपेशियों में दर्द पैदा हो सकता है। तो ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि आपका तकिया आखिर कब एक्सपायर हो रहा है या उसे कब तुरंत बदल देना चाहिए। आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब।
शेप जांचें-
अगर आपके तकिए में गांठें पड़ गई हों या उसके अंदर भरी गई रूई या फॉम एक ओर हो जाता हो, तो समझ जाएं कि उसे बदलने का अब सही समय आ गया है।
-तकिए को इस्तेमाल करने से पहले अगर आपको उसे हाथों से शेप देने की जरूरत पड़ती हो, तो जान लें कि आपका तकिया खराब हो चुका है। ध्यान रखें, तकिए की शेप जैसे ही बिगड़ने लगे, उसे तुरंत बदल डालें।
तकिए की उम्र-
तकिेए की औसतन उम्र 18 से 24 महीने होती है। हर दो साल में अपना तकिया जरूर बदलें।
तकिया टेस्ट-
आपका तकिया इस्तेमाल करने योग्य है या नहीं, इसका पता आप एक साधारण टेस्ट करके भी लगा सकते हैं। इसके लिए आप अपने तकिए को बीचोंबीच मोड़ें और 30 सेकेंड्स तक दबाकर छोड़ दें। यदि तकिया दोबारा अपनी शेप नहीं लेता, तो समझ जाएं कि आपको अपना तकिया बदलने की जरूरत है।
कैसा हो आपका तकिया-
आपका तकिया ऐसा होना चाहिए जो सोते समय आपकी पीठ और गर्दन दोनों को सहारा दे। ऐसा तकिया जो बहुत कठोर, बहुत लंबा या बहुत नरम होता है वह आपकी गर्दन को विषम स्थिति में डालकर आपकी पीठ और गर्दन में दर्द का कारण बन सकता है। ऐसे में तकिया ऐसा चुनें जो आपके सिर को थोड़ा ऊंचा रखते हुए आपकी गर्दन, पीठ, सिर और कंधों को सपोर्ट करे।
खाना खजाना /शौर्यपथ / सुबह के नाश्ते में या फिर शाम की चाय के साथ गर्मा-गर्म पकौड़े खाने को मिल जाए तो दिन बन जाता है। लेकिन अगर आप भी आलू-प्याज के पकौड़े खाते-खाते बोर हो चुके हैं तो अब ट्राई करें ये इंडो चायनीज नूडल्स पकौड़ा रेसिपी। यह किड्स फेवरेट स्नैक्स रेसिपी बेहद कम समय में बनकर तैयार हो जाती है। तो आइए जानते हैं कैसे बनाए जाते हैं ये खास पकौड़े।
नूडल्स पकौड़ा बनाने के लिए सामग्री-
-2 पैकेट इंस्टेंट नूडल्स 140 ग्राम
-50 ग्राम प्याज कटा हुआ
-10 ग्राम हरी मिर्च कटी हुई
-10 ग्राम धनिया पत्ती कटी हुई
-100 ग्राम उबला आलू मसला हुआ
-150 ग्राम ब्रेड क्रम्ब्स
-50 ग्राम मैदा
-नमक स्वादानुसार
-काली मिर्च स्वादानुसार
-पानी आवश्यकतानुसार
-300 मिली तेल तलने के लिए
नूडल्स पकौड़ा बनाने की आसान विधि-
नूडल्स पकौड़ा बनाने के लिए सबसे पहले इंस्टेंट नूडल्स को टेस्टमेकर में लगभग 300 मिली पानी डालकर पका लें। पकाते समय ध्यान रखें कि पैन में पानी ना बचे। इसके बाद आंच से पैन को उतारकर उसे ठंडा होने दें।
एक बार जब नूडल्स रूम टैम्प्रेचर पर आ जाए, तो उसमें प्याज, हरी मिर्च, धनिया पत्ती, आलू और 50 ग्राम ब्रेडक्रम्ब्स डालकर अच्छी तरह से मिलाकर 10 मिनट के लिए सेट होने के लिए अलग रख दें। तैयार मिश्रण से लगभग 20 ग्राम के छोटे-छोटे बॉल्स बना लें। मैदा, नमक और काली मिर्च को एक साथ मिलाकर थोड़ा पानी डालकर उसका बैटर तैयार करें।
सभी बॉल्स को बैटर में हल्का डुबाएं और बचे हुए ब्रेडक्रम्ब्स से लपेट दें। तेज आंच पर तेल गर्म करके सभी पकौड़ों को उसमें डालकर डीप फ्राई कर लें। पकौड़ों को पैन से निकालें और बटर पेपर पर रख दें, ताकि अतिरिक्त तेल निकल जाए। आपके इंस्टेंट नूडल्स पकौड़ा बनकर तैयार हो गए हैं, इन्हें गर्मागर्म चटनी या सॉस के साथ सर्व करें।
टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ /आज सफेद बालों की समस्या सिर्फ बुजुर्गों में ही नहीं बल्कि युवा भी इस समस्या से खासा परेशान हैं। विशेषज्ञों की मानें तो बाल विटामिन बी 12, ओयोडीन और जिंक जैसे तत्वों की कमी की वजह से सफेद होते हैं। ऐसे में जो लोग सफेद बालों की समस्या से जुझ रहे हैं उन्हें तुरंत अपनी डाइट में विटामिन बी, विटामिन बी 6 और विटामिन 12 बी को लेकर गंभीर हो जाना चाहिए। दरअसल बालों में मेलनिन नाम का पिग्मेंट पाया जाता है। उम्र बढ़ने के साथ-साथ इसका बनना कम हो जाता है और बाल सफेद होने लगते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं वो कौन सी 5 जादुई चीजें हैं जो आपकी इस समस्या को दूर करने में आपकी मदद कर सकती हैं। इसी के साथ आंवले से जुड़ा एक आयुर्वेद नुस्खा भी आपकी बालों की सेहत को बनाए रखने में आपकी मदद कर सकता है।
हरी पत्तेदार सब्जी-
हरी सब्जियों में प्रचूर मात्रा में फोलिक एसिड मौजूद है, जो बालों को सफेद होने से रोकने में मदद करता है। इसके लिए अपनी डाइट में पालक, धनिया पत्ता जैसी सब्जी शामिल करें।
ब्लूबेरी-
बालों को सफेद करने वाले विटामिन बी 12, ओयोडीन और जिंक जैसे पोषक तत्वों की कमी को ब्लू बेरी का सेवन दूर करता है।
आयरन और कॉपर युक्त भोजन-
बालों की सफेद होने की वजह कॉपर और आयरन की कमी भी हो सकती है। इसके लिए आप अपनी डाइट में आलू, मशरूम, अखरोट जैसे ड्राई फ्रूट, किशमिश, बीन्स जैसी चीजें शामिल करें।
ब्रोकली-
ब्रोकली में मौजूद फोलिक एसिड बालों को समय से पहले सफेद होने से रोकने में मदद करता है।
कढ़ी पत्ता-
कढ़ी पत्ते में आयरन और फॉलिक एसिड की पर्याप्त मात्रा होती है। रेग्युलर डाइट में कढ़ी पत्तों की मात्रा बढ़ाने से जल्द ही सफेद बाल काले होने लगेंगे।
आयुर्वेद की भी लें सकते हैं मदद-
बालों को काला बनाने के लिए आंवले के पाउडर का यह नुस्खा बेहद लाभदायक है।
नींबू के रस में 2 चम्मच पानी और 4 चम्मच आवला पाउडर मिलाकर पेस्ट बनाएं। इसे एक घंटे के लिए रख दें और फिर प्रयोग करें। पेस्ट को 20-25 मिनट बालों की जड़ों में लगाएं और फिर धो लें। इस दौरान शैंपू का प्रयोग न करें।
धर्म संसार /शौर्यपथ /भगवान श्रीदेवनारायण की जयंती उन्नीस फरवरी को जयपुर में धूमधाम एवं उल्लास के साथ मनाई जायेगी। भगवान श्री देवनारायण एवं भैरव बाबा मंदिर समिति के अध्यक्ष जयपुर के वरिष्ठ समाज सेवी रवि शंकर धाभाई के अनुसार देवनारायण जयंती का महोत्सव 19 फरवरी को सायं चार बजे विद्याधर नगर के सेक्टर चार में स्थित गुर्जर की ढ़ाणी में भगवान श्रीदेवनारायण एवं भैरव बाबा मंदिर राष्ट्रीय एकता, कौमी एकता एवं साम्प्रदायिक सदभाव दिवस के रूप में मनाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इस मौके धर्म गुरुओं, साधुओं, संतों का मेला लगेगा। उन्होंने बताया कि इस मौके सभी श्रदालु एवं भक्तजनों द्वारा भगवान की वंदना कर भगवान से वैश्विक महामारी कोरोना संकट समय को सम्पूर्ण रूप से खत्म करने की आराधना की जायेगी। इस दौरान देश में अमन चैन, भाईचारा, शांति एवं खुशियां कायम होने और देश प्रगति की राह पर आगे बढने की मंगलकामना की जाएगी।
मंदिर समिति एवं अखिल भारतीय गुर्जर महासंघ की महिला (युवा प्रकोष्ठ) की महासचिव वैष्णवी धाभाई ने बताया कि इस बार भगवान श्री देवनारायण के जन्मदिन को बड़े धूमधाम एवं उल्लास से मनाया जाएगा। इस दौरान गुर्जर समाज के समाज का नाम रोशन करने वाले गणमान्य लोगों का एवं सर्व समाज के विशिष्ट व्यक्तियों का उनकी सहरानीय एवम उल्लेखनीय सेवाओं के लिए इस भव्य आयोजन के दौरान सम्मान किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे।
धर्म संसार /शौर्यपथ /हिंदू धर्म में शीतला अष्टमी का विशेष महत्व होता है। यह हर साल होली के आठवें दिन मनाई जाती है। इस साल शीतला अष्टमी 4 अप्रैल है। कृष्ण पक्ष की इस शीतला अष्टमी को बासौड़ा और शीतलाष्टमी के नाम से भी पहचाना जाता है। शीतला अष्टमी के दिन घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता है। शीतला अष्टमी में बासी भोजन ही माता को चढ़ाया जाता है और प्रसाद के रुप में ग्रहण किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन के बाद बासी भोजन नहीं ग्रहण करना चाहिए वो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शीतला माता का स्वरूप अत्यंत शीतल है, जो रोग-दोषों को हरण करने वाली हैं। माता के हाथों में कलश, सूप, झाड़ू और नीम के पत्ते हैं और वे गधे की सवारी करती हैं।
शीतला अष्टमी शुभ मुहूर्त-
शीतला अष्टमी पूजा मुहूर्त - 06:08 AM से 06:41 PM
अवधि - 12 घण्टे 33 मिनट।
अष्टमी तिथि प्रारम्भ - अप्रैल 04, 2021 को 04:12 AM बजे
अष्टमी तिथि समाप्त - अप्रैल 05, 2021 को 02:59 AM बजे ।
शीतला अष्टमी व्रत का महत्व-
माना जाता है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति को कई तरह के रोगों से मुक्ति मिलती है। शीतला अष्टमी के दिन शीतला मां का पूजन करने से चेचक, खसरा, बड़ी माता, छोटी माता जैसी बीमारियां नहीं होती हैं। अष्टमी ऋतु परिवर्तन का संकेत देती है। यही वजह है कि इस बदलाव से बचने के लिए साफ-सफाई का पूर्ण ध्यान रखना होता है।माना जाता है कि इस अष्टमी के बाद बासी खाना नहीं खाया जाता है।
शीतला अष्टमी की पूजा विधि-
-सबसे पहले शीतला अष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर नहा लें।
-पूजा की थाली में दही, पुआ, रोटी, बाजरा, सप्तमी को बने मीठे चावल, नमक पारे और मठरी रखें।
-दूसरी थाली में आटे से बना दीपक, रोली, वस्त्र, अक्षत, हल्दी, मोली, होली वाली बड़कुले की माला, सिक्के और मेहंदी रखें।
-दोनों थालियों के साथ में ठंडे पानी का लोटा भी रख दें।
-अब शीतला माता की पूजा करें।
-माता को सभी चीज़े चढ़ाने के बाद खुद और घर से सभी सदस्यों को हल्दी का टीका लगाएं।
-मंदिर में पहले माता को जल चढ़ाकर रोली और हल्दी का टीका करें।
-माता को मेहंदी, मोली और वस्त्र अर्पित करें।
-आटे के दीपक को बिना जलाए माता को अर्पित करें।
-अंत में वापस जल चढ़ाएं और थोड़ा जल बचाकर उसे घर के सभी सदस्यों को आंखों पर लगाने को दें। बाकी बचा हुआ जल घर के हर हिस्से में छिड़क दें।
-इसके बाद होलिका दहन वाली जगह पर भी जाकर पूजा करें। वहां थोड़ा जल और पूजन सामग्री चढ़ाएं।
-घर आने के बाद पानी रखने की जगह पर पूजा करें।
-अगर पूजन सामग्री बच जाए तो गाय या ब्राह्मण को दे दें।
योजनाओं का लाभ मिलने एवं आमदनी बढ़ने से मछुआरों में उत्साह, सामुदायिक बीज उत्पादन एवं मछली पालन मे मिली सफलता,
जांजगीर-चांपा / शौर्यपथ / राज्य सरकार ने सामुदायिक मत्स्य पालन को बढ़ावा देने एवं मछुआ सहकारी समितियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मत्स्य पालन विभाग के माध्यम से विभिन्न योजनाए संचालित की जा रही है। शासकीय योजनाओं का लाभ मिलने एवं आमदनी में वृद्धि होने से मछुआ समिति के सदस्यों में अभूतपूर्व उत्साह का माहौल है। जांजगीर-चांपा जिले के जैजैपुर विकासखण्ड के ग्राम भोथिया में मछली पालन करने वाले छोटे व्यवसायी ने नव जागृति मछुआ सहकारी समिति का गठन कर शासन की योजनाओं का लाभ लिया और अपनी आमदनी बढ़ायी। शासकीय तालाबों को 10 वर्षीय पट्टे पर लेकर मत्स्य बीज उत्पादन और मछली पालन कर आत्मनिर्भता की ओर अनवरत आगे बढ़े । आमदनी बढ़ने से समिति के सदस्यों का आत्मविश्वास बढ़ा है। वे अपने व्यवसाय विस्तार के लिए प्रोत्साहित हुए है।
समिति के अध्यक्ष श्री रामकुमार यादव ने बताया कि वे समिति के माध्यम से मछली बीज उत्पादन और मछली पालन का कार्य कर रहें है। समिति में 22 सदस्य है। पंचायत के शासकीय तालाबों को 10 वर्षीय पट्टे पर लेकर मछली पालन का कार्य किया जा रहा है। वर्तमान मे उनके पास कुल 11.460 हेक्टेयर जलक्षेत्र के 05 तालाब है। विभागीय योजनाओं से वर्ष 2019 मे स्पान संवर्धन योजना के तहत 25 लाख मत्स्य बीज स्पान संवर्धन किया गया। समिति के सदस्यों के आपसी सामंजस्य, काम के प्रति समर्पण एवं मेहनत से लगभग 10 लाख मत्स्य बीज स्टे.फ्राई का उत्पादन किया गया। जिसमे से 2.20 लाख मत्स्य बीज को पट्टे के तालाब मे संचयन किया। शेष 7.80 लाख मत्स्य बीज को निजी मत्स्य पालको को बिक्री की गई। मत्स्य बीज बेचने से उन्हें एक लाख रूपये की आय प्राप्त हुई। पट्टे के तालाब मे सवंर्धित मत्स्य बीज से 40 क्विंटल मछली का उत्पादन हुआ। जिसे बेचने से 4 लाख रूपये प्राप्त हुआ है। इस प्रकार समिति को बहुत कम समय मे ही 05 लाख रूपयें से अधिक की आमदनी हुई ।
समिति के सदस्यों की आमदनी बढ़ने से वे उत्साहित है। वे मछली पालन व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए सरकार के प्रति अभार व्यक्त किया है। उन्होने कहा कि छोटे मछली व्यवसायिओं को समिति के माध्यम से बडे़ स्तर पर व्यवसाय करने के लिए सरकार की योजना के तहत प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे मछली पालन के लिए इच्छुक युवाओं को प्रोत्साहन मिल रहा है। राज्य सरकार द्वारा किसानी को बढ़ावा देने के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं से प्रेरित होकर कुषि के प्रति आकर्षित हो रहें है।
सेहत /शौर्यपथ / अगर आपको लगता है कि सिर्फ अंडा खाने से ही आपके शरीर में प्रोटीन व अन्य पोषक तत्वों की पूर्ति होती है, तो यह जानकारी सिर्फ आपके लिए है।
दरअसल अंडा खाने से आप जिस पोषण को प्राप्त करते हैं, अगर आप शाकाहारी है तो वह आपको दूध व विशेष हरी सब्जियों से भी प्राप्त हो सकता है। इतना ही नहीं भारत में उत्पादित सब्जियां, दालें एवं अनाज भी पोषण के हर स्तर पर आपके लिए बेहद फायदेमंद होते हैं।
ऐसा नहीं है कि सिर्फ अंडा खाने पर ही आपको विशेष प्रोटीन और विटामिन की पूर्ति हो सकती है, अन्य खाद्य पदार्थों से नहीं। परंतु अन्य विकल्पों पर अधिक जोर नहीं दिया जाता।
हरी सब्जियां, भाजी, अनाज, जड़ें, कंद-मूल आदि खाद्य पदार्थों का सेवन कर अंडे से भी अधिक जरूरी आवश्यक पोषक तत्वों की पूर्ति की जा सकती है।
अंडे को कई लोग मांसाहारी मानते हैं तो कुछ लोग ऐसा नहीं मानते। लेकिन अंडे को लेकर आम धारणा यह है कि इससे प्राप्त होने वाले पोषक तत्व आम तौर पर अन्य खाद्य पदार्थों से प्राप्त नहीं किए जा सकते। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है।
सवाल यह उठता है कि यह धारणा आई कैसे, और कब शुरू हुआ पोषक तत्व के रूप में अंडे का सेवन।
शौर्यपथ /कर्णफूल यानी ईयररिंग्स-झुमके, कुंडल, गोल, लंबे आदि आकार व डिज़ाइन में पाए जाते हैं। आमतौर पर महिलाएं सोने, चांदी, कुंदन आदि धातु से बने ईयररिंग्स पहनती हैं।
मान्यताओं के अनुसार, कर्णफूल यानी ईयररिंग्स महिला के स्वास्थ्य से सीधा संबंध रखते हैं। ये महिला के चेहरे की ख़ूबसूरती को निखारते हैं। इसके बिना महिला का श्रृंगार अधूरा रहता है।
वैज्ञानिक मान्यताओं के अनुसार हमारे कर्णपाली (ईयरलोब) पर बहुत से एक्यूपंक्चर व एक्यूप्रेशर पॉइंट्स होते हैं, जिन पर सही दबाव दिया जाए, तो माहवारी के दिनों में होनेवाले दर्द से राहत मिलती है।
ईयररिंग्स उन्हीं प्रेशर पॉइंट्स पर दबाव डालते हैं। साथ ही ये किडनी और मूत्राशय (ब्लैडर) को भी स्वस्थ बनाए रखते हैं।इनसे एक्यूप्रेशर होता है।
कान की नसें स्त्री की नाभि से लेकर पैर के तलवों के बीच के सभी अंगों को प्रभावित करती हैं। इसलिए कान में छेद कराके उसमें धातु (विशेषकर सोना) धारण करने से स्त्रियों को पीरियड्स से संबंधित समस्याएं नहीं होती हैं। सोने के ईयर रिंग्स से शारीरिक उर्जा और बल का विकास होता है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
