July 24, 2026
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    मनोरंजन /शौर्यपथ / फिल्म इंडस्ट्री में ज्यादा उम्र होने पर एक्ट्रेस के लिए काम के मौके कम होने के सवाल पर अकसर चर्चा होती रहती है। अब इस पर एक्ट्रेस काजोल की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। बीते 29 सालों से फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा काजोल का कहना है कि यह बात कुछ हद तक सही है, लेकिन ऐसे उदाहरण भी देखने को मिलते हैं, जहां कोई भेदभाव नहीं हुआ है। पिछले दिनों यह मसला उठाते हुए एक्ट्रेस दीया मिर्जा ने कहा था कि 50 साल से ज्यादा उम्र के एक्टर्स का अपनी से आधी उम्र की लड़कियों के साथ रोमांस की एक्टिंग करना अजीब लगता है।
    इस मसले पर बात करते हुए काजोल ने कुछ उदाहरण देते हुए कहा, 'सच्चाई यह है कि शर्मिला टैगोर, साधना, नरगिस दत्त जैसी एक्ट्रेस ने शादी के बाद भी लंबे समय तक काम किया है। इन एक्ट्रेस की उम्र 40 के करीब थी और इन्होंने इंडस्ट्री में काम किया था। हां, यह सही है कि आज लोग इस मसले को कुछ अलग नजरिए से देख रहे हैं। आज हम अचानक ही कुछ ऐसी चीजों के बारे में देख रहे हैं, जो पहले कभी नहीं हुई थीं। लेकिन ऐसा पहले भी हुआ था। यहां तक कि मेरी मां तनुजा ने भी काम करना बंद नहीं किया था।' काजोल ने कहा कि ऐसी कई फीमेल एक्टर्स हैं, जो लगातार नौकरी करती रही हैं।
    अपना उदाहरण देते हुए काजोल ने कहा कि मैं यहां हूं और काम कर रही हूं। मुझे इस बात पर बहुत गर्व है। मैं बॉलीवुड में उम्र के मुद्दे को बहुत ज्यादा महत्व नहीं देती हूं। मैंने कभी ऐसा नहीं किया। बात सिर्फ इतनी है कि क्या आप खुद महसूस करती हैं कि आप की उम्र किसी काम को लेकर ज्यादा हो गई है। आखिर आमिर खान क्यों 40 साल की उम्र मे थ्री इडियट फिल्म में एक कॉलेज स्टूडेंट का रोल प्ले कर सकते हैं और मैं क्यों नहीं। वह मानते थे कि वह ऐसा कर सकते हैं और कुछ स्पेशल इफेक्ट्स के साथ उन्होंने ऐसा किया भी।
    काजोल ने कहा कि बात यह है कि लोग आपके बारे में क्या सोचते हैं। यदि लोगों की धारणा है कि आप कोई काम कर सकती हैं तो ऐसा हो सकता है और यदि वे ऐसा नहीं सोचते हैं तो फिर आपको काम नहीं मिलेगा। हाल ही में रिलीज हुई फिल्म त्रिभंगा में काजोल एक ओडिसी डांसर के रोल में नजर आई थीं।

    आस्था /शौर्यपथ /तीर्थराज प्रयाग में पतित पावनी एवं मोक्ष दायिनी गंगा, श्यामल यमुना और अन्त: सलिला स्वरूप में प्रवाहित सरस्वती के त्रिवेणी के तट पर माघ मेले के दौरान कल्पवासियों के संयम, श्रद्धा एवं कायाशोधन का कल्पवास करने वाले कल्पवासियों का स्वागत करने के साइबेरियन पक्षी लिए पहले से ही संगम पहुंच चुके हैं। त्रिवेणी के तट पर कल्पवासियों के हवन, पूजन, साधु-संतों के प्रवचन से जिस प्रकार पूरे मेला क्षेत्र में आध्यात्मिक वातावरण बना रहता है उसी प्रकार दूर देश से प्रयागराज पहुंचे साइबेरियन पक्षियों के कलरव और अठखेलियों से संगम तट गुलजार हो गया है। ऐसा लगता है कल्पवासियों की तरह साइबेरियन पक्षियों का भी कल्पवास होता है संगम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के साथ ही विदेशी पर्यटक भी हजारों मील से उड़कर यहां पहुंचे। संगम के जल पर विदेशी मेहमानों के कलरव और अठखेलियों को देखकर पर्यटक एवं श्रद्धालु आनन्द की अनुभूति महसूस करते हैं। इनके पहुंचने से संगम तट के सौंदर्य में और भी निखर आया है। तट पर सुबह से लेकर शाम तक श्रद्धालुओं और पर्यटकों की भीड़ लगी रहती है। शाम ढ़लते यहां का नजारा और भी रमणीय हो जाता है। सात समंदर पार से आने वाले साइबेरियन पक्षियों को घाटों पर देखकर सैलानियों को सुकून मिलता है। माघ मेले से पहले गुलाबी ठण्ड शुरू होते ही साइबेरियन पक्षी यहां क्रीड़ा करते हुए बिताते हैं और गमीर् शुरू होते ही अपने वतन को लौटना शुरू कर देते हैं। ये मेहमान पक्षी स्वीटजरलैंडए साइबेरियाए जापान और रूस समेत विश्व के अन्य ठंडे देशों से सर्दियों में संगम की ओर कूच करते हैं और गमीर् शुरू होने से पहले अपने वतन लौट जाते हैं। झूंसी क्षेत्र में कल्पवास करने वाले सुल्तानपुर निवासी रामेश्वर मध्यप्रदेश के रींवा निवासी श्याम बिहारी श्रीवास्तव और राघवेन्द्र ने बताया कि पिछले कई सालों से कल्पवास कर रहे हैं। जब-जब हम कल्पवास के दौरान संगम स्नान करने आये हैं हमें इन सफेद-काले रंग मिश्रण वाली चिडियां गंग के जल पर अठखेलियां करती मिलती हैं। यह इंसानों से बिल्कुल नहीं डरतीं। ऐसा लगता है जैसे कल्पवासियों के साथ इनका भी एक मास का कल्पवास होता है।
    रामेश्वर ने बताया कि इनको बेसन से बने सेव बहुत पसंद होते हैं। गंगा के जल में गिराने से यह झुण्ड में एक साथ पहुंच जाते हैं। आवाज लगाकर सेव को अपनी हथेली पर रख कर चुगाने का अपना अलग ही आनंद मिलता है। हथेली पर उड़कर चोंच से जब सेव उठाती हें तब इनके पंखों में लगे गंगा का जल चेहरे पर जब पडता है उस एहसास का वर्णन नही किया जा सकता।
    अयोध्या निवासी बुजुर्ग राजेश्वर मिश्र ने बताया कि तुलसी दास ने श्रीरामचारित मानस में माघ मेले का बखान करते बालकाण्ड में लिखा है श्माघ मकरगति रवि जब होईए तीरथपतिहिं आव सब कोईए देवए दनुजए किन्नर नर श्रेणी, सागर मज्जहिं सकल त्रिवेणी। माना जाता है माघ मास में ब्रह़मा, विष्णु, महेश, आदित्य, रूद्रण एवं अन्य सभी देवी देवता माघ मास में संगम स्नान करते हैं। सरयू नदी में ये पक्षी देखने को नहीं मिलते । हम तो यही मानते हैं जिनका सौभाग्य होता है वही माघ मास में त्रिवेणी स्नान का पुण्य पाता है चाहे वह मनुष्य हो या पशु-पक्षी।
    झांसी से संगम क्षेत्र में स्नान करने पहुंचे राधेश्याम और श्याम बिहारी ने बताया कि जिस प्रकार माघ मेले में बिना आमंत्रण और निमंत्रण के श्रद्धालु स्नान और कल्पवास करने कलेंडर के एक निधार्िरत तिथि पर पहुंचते हैं उसी प्रकार ये पक्षी भी अपने समय से पतीर्थराज प्रयाग में पहुंच जाते हैं। माघ मेले के समय इनको संगम के जल पर अठखेलियां करते देख जा सकता है। इनका जल के ऊपर क्रीडा करना और इनकी आवाज मन को बहुत सुकुन प्रदान करने वाला होता है।
    श्याम बिहारी ने बताया कि एक तरफ ये पक्षी आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं तो वहीं दूसरी तरफ अपनी खूबसूरती से संगम की शोभा बढ़ा रहे हैं। लोग घंटों तक घाट पर बैठकर गंगा में अठखेलियां करते इन विदेशी पक्षियों को निहारते रहते हैं। इतना ही नहीं लोग इनकी मेहमान नवाजी में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं। कोई इन्हें बेसन से बनी सेव तो कोई पपड़ी खिलाता है तो वहीं ये पक्षी उनके स्वागत को स्वीकार कर बहुत चाव से खाते हैं।
    बर्ल्डफ्लू इन पक्षियों का कुछ नहीं बिगाड़ सकता क्योंकि ये गंगा के उस जल पर रहकर क्रीड़ा करती है जिसमें अनकों औषधियां विराजमान है। उन्होने बताया कि किसी भी नदी का घर में संचित जल कुछ दिनों के बाद खराब हो जाता है लेकिन गंगा का जल लंबे समय तक श्रद्धालु अपने घरों में संचित कर रखते

    शौर्यपथ / तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा। बिना जोश के आज तक कभी भी महान कार्य नहीं हुए। ये हमारा कर्तव्य है कि हम अपनी स्वतंत्रता का मोल अपने खून से चुकाएं। आज हमारे अंदर बस एक ही इच्छा होनी चाहिए, मरने की इच्छा ताकि भारत जी सके। इन विचारों से पूरे देश को नई ऊर्जा देने वाले नेताजी सुभाष चंद्र बोस भारत के उन महान स्वतंत्रता सेनानियों में शुमार होते हैं जिनसे आज के दौर का युवा वर्ग प्रेरणा लेता है। उनके द्वारा दिया गया जय हिन्द का नारा पूरे देश का राष्ट्रीय नारा बन गया। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने अपने विचारों से लाखों लोगों को प्रेरित किया।

    उन्होंने भारत के लिए पूर्ण स्वराज का सपना देखा। जलियांवाला बाग हत्याकांड के बाद वह भारत की आजादी की लड़ाई में कूद पड़े। नेताजी का मानना था कि अंग्रेजों को भारत से खदेड़ने के लिए सशक्त क्रांति की आवश्यकता है। आजाद हिंद फौज का गठन कर उन्होंने अंग्रेजी सेना को खुली चुनौती दी। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उन्होंने जापान के सहयोग से आजाद हिन्द फौज का गठन किया। उन्होंने आजाद हिंद फौज को संबोधित करते हुए दिल्ली चलो का नारा दिया। गांधीजी को राष्ट्रपिता कहकर सुभाष चंद्र बोस ने ही संबोधित किया था। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने सिंगापुर में एक रेडियो संदेश प्रसारित करते हुए महात्मा गांधी को पहली बार 'राष्ट्रपिता' कहकर संबोधित किया था। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने पोर्ट ब्लेयर की सेल्युलर जेल में पहली बार तिरंगा फहराया था। नेताजी बचपन से ही विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने आजादी की जंग में शामिल होने के लिए भारतीय सिविल सेवा की नौकरी ठुकरा दी।

    शौर्यपथ / शनिदेव को कर्म फलदाता माना जाता है। कहते हैं कि शनि देव सभी को कर्मों के हिसाब से फल देते हैं। शनि ग्रह 7 जनवरी से 14 फरवरी 2021 अस्त रहेगा। शनि अभी मकर राशि में हैं। सूर्य देव के करीब आने पर शनि या कोई दूसरा ग्रह भी अस्त हो जाता है। सूर्य के प्रभाव से अस्त हुए शनि का सभी राशियों पर कुछ न कुछ प्रभाव पड़ेगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, जिन लोगों पर शनि की साढ़े साती या शनि की ढैय्या चल रही है, उन्हें सावधान रहने की जरुरत है। जानिए आपके जीवन पर क्या पड़ेगा असर-
    1. मेष- आपको उधार देने से बचना चाहिए। मेहनत से किए गए कार्यों में सफलता हासिल होगी। नतीजों में थोड़ी देरी संभव है। सूर्य मंत्र (ओम सूर्य ग्रहण सूर्याय नम:) के जाप से लाभ मिलेगा।
    2. वृष- शनि के अस्त होने से आपको थोड़ी घबराहट महसूस हो सकती है। आत्म विश्वास में कमी आएगी। बड़े फैसले लेने में अनुभवी लोगों की सलाह लें। मानसिक तनाव को कम करने के लिए भगवान शिव को जल अर्पित करते रहें।
    3. मिथुन- आपको इस दौरान अपनी वाणी पर कंट्रोल रखना होगा। ईमानदारी से किए गए कार्यों में सफलता हासिल होगी। सुख-शांति बनाए रखने के लिए हर शनिवार को गरीबों को फल दान करें।
    4. कर्क- आप अपने खर्चों पर कंट्रोल रखें। शनि अस्त से आपको कोई खास समस्या नहीं होगी। इस दौरान आपको शुभ परिणामों की प्राप्ति हो सकती है।
    5. सिंह- सिंह राशि वालों के लिए यह समय आत्मविश्वास और पारिवारिक रिश्तों को मजबूत करने का है। यात्रा पर जाने के लिए यह समय अनुकूल है। परिश्रम के परिणामों में देरी होगा। सूर्य देव को हर दिन जल अर्पित करें।
    6. कन्या- आपको कार्यों में सफलता मिलेगी। आमदनी बढ़ने के योग बन सकते हैं। बिजनेस से जुड़े मामलों में सावधानी बरतें। आपको शनि अस्त के दौरान शुभ परिणाम मिल सकते हैं।
    7. तुला- तुला राशि के जातक पूरी ईमानदारी के साथ मेहनत करते रहें। शनि देव आपके कर्म के हिसाब से फल देंगे। लंबे समय से रुके हुए कार्य पूरे हो सकते हैं। 5-10 फरवरी के बीच का समय शुभ साबित होगा।
    8. वृश्चिक- वृश्चिक राशि वालों को शनि अस्त के दौरान शुभ परिणाम प्राप्त होंगे। मेहनत का फल मिलेगा। प्रमोशन के योग बन सकते हैं। क्रोध पर कंट्रोल रखें।
    9. धनु- धनु राशि में शनि की साढ़ेसाती चल रही हैं। इस दौरान आप कुछ बातों को ध्यान में रखकर अपनी मुश्किलें कम कर सकते हैं। आलस्य से बचें। ईमानदारी से मेहनत करें। शनि देव आपको नुकसान नहीं पहुचाएंगे। हर शनिवार को सुंदर कांड का पाठ करने से लाभ मिल सकता है।
    10. मकर- आपके काम की गति धीमी पड़ सकती है। इस राशि में भी शनि की साढ़ेसाती चल रही है। ईमानदारी से काम करने वाले लोगों को अच्छे परिणाम हासिल होंगे। हर शनिवार को हनुमान मंदिर जाकर हनुमान चालीसा का पाठ करें।
    11. कुंभ- इस राशि में भी शनि की साढ़ेसाती है। आवेश में आकर फैसला लेने से बचें। किसी भी तरह के निवेश से बचें। लंबी यात्राओं पर जाने से बचें। परिवार में खुशहाली और सुख-शांति आएगी।
    12. मीन- किसी से मनमुटाव हो सकता है। वाणी पर कंट्रोल रखें। परिवार के काम में सहयोग से धन लाभ हो सकता है। शनि अस्त के दौरान मीन राशि के जातक धैर्य खोने से बचें।

    नरवा, गरूवा, घुरूवा, बाड़ी योजना एवं शासन की अन्य विभागीय गतिविधियों की भी ली जानकारी

    दुर्ग / शौर्यपथ / जिले की विकास उपलब्धियों को देखने के लिए मीडिया की टीम बुधवार को एक दिवसीय प्रवास पर दुर्ग एवं पाटन ब्लाक के विभिन्न क्षेत्रों के भ्रमण पर रही। यहाँ मीडिया की टीम ने जिले के विकास कार्यों के लिए शासन द्वारा की जा रही पहल को देखा। इनमें से मीडिया टीम के लिए सबसे आकर्षक जगह रही बेलौदी। यह मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का गाँव है और यहाँ की झील में प्रवासी पक्षी आते हैं। इनमें से सबसे खास पक्षी हैं राजहंस जो मानसरोवर में नेस्टिंग करते हैं और तिब्बत से होते हुए माउंट एवरेस्ट को पार करते हुए हिंदुस्तान पहुंचते हैं और यहाँ बेलौदी भी इनके फ्लाई हाईवे में शामिल होता है जहाँ ये सुस्साते हैं ऊर्जा से भरकर आगे का सफर तय करते हैं। मीडिया टीम को इसके बारे में जानकारी तहसीलदार पाटन एवं बर्ड वाचिंग एक्सपर्ट श्री अनुभव शर्मा ने दी। उन्होंने बताया कि यहाँ कुछ दिनों पहले राजहंस स्पाट किये गए। संस्कृत साहित्य में खंजन पक्षियों की काफी चर्चा है और सुंदर आँखों वाली की तुलना खंजन से करते हैं। यह पक्षी भी यहाँ तालाब में हैं। सुरखाब के जोड़े भी यहाँ पर मौजूद हैं जो काफी दुर्लभ पक्षी है।
    जनसंपर्क अधिकारी सौरभ शर्मा ने बताया कि शासन ने इसे बर्ड वाचिंग परिक्षेत्र बनाने का निर्णय लिया है। इससे इनके संवर्धन में काफी मदद मिलेगी और पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि थोड़ी दलदली भूमि होने के कारण पक्षियों को यहाँ काफी खुराक मिल जाता है। पहले यहाँ पेंटेंड स्टार्क कभी कभी आते थे, अब इन्होंने यहाँ स्थायी बसेरा बना लिया है। अभी स्नेक बर्ड ने प्रजनन किया है। साँपों की तरह का गला होने के कारण इन्हें स्नेक बर्ड कहते हैं।
    गोधन के हितग्राहियों से मिले चंदखुरी गौठान में- मीडिया टीम ने दुर्ग ब्लाक के ग्राम चंदखुरी में गौठान देखा। यहाँ उन्होंने वर्मी कंपोस्ट का उत्पादन होते देखा। वे गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों से भी मिले। सिंधुजा स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष श्रीमती संतोषी देवांगन ने बताया कि हमारे गाँव ने गोधन न्याय योजना का बहुत अच्छा क्रियान्वयन हुआ है। गोबर विक्रेताओं को काफी आर्थिक लाभ हुआ है। स्व-सहायता समूहों के लिए भी यह योजना बहुत अच्छी है। इस अवसर पर पौधे का रोपण भी मीडियाकर्मियों ने किया। उन्होंने बताया कि हितग्राहियों को ट्रैक्टर और क्रशर के किश्त चुकाने में गोधन न्याय योजना की राशि काम आ रही है और वे सब बहुत खुश हैं।
    66 एमएलडी प्लांट देखा- मीडियाकर्मियों ने 66 एमएलडी प्लांट भी देखा। यहाँ फिल्टर प्लांट से किस तरह से शुद्ध जल पूरे शहर में भेजा जाता है यह प्रक्रिया जानी। उल्लेखनीय है कि हाल ही में मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने इस प्लांट का लोकार्पण किया था।
    देखी केसरा की बाड़ी- मीडिया टीम ने केसरा की बाड़ी भी देखी। यहाँ 11 समूहों की 65 महिलाएं सब्जी उगा रही हैं। यहाँ 30 एकड़ में सामुदायिक सब्जी लगाई गई है। एक सीजन में समूहों को लगभग 50 से 60 जार रुपए की आय हो रही है।
    मोहल्ला क्लास का निरीक्षण भी किया- मीडिया टीम ने मोहल्ला क्लास का निरीक्षण भी किया। यहाँ उन्होंने पढ़ई तुंहर द्वार के अंतर्गत चल रही कक्षाओं का निरीक्षण किया। साथ ही बच्चों से चर्चा भी की।

    ओवेरियन सिस्ट रिमूवल, हिस्टरएक्टोमी एवं एक एमरजेंसी सिजेरियन ऑपरेशन

               दुर्ग / शौर्यपथ / प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सुविधाएँ पहुंचाने के लिए किए जा रहे प्रयास रंग लाने लगे हैं। अब ग्रामीण अंचलों के शासकीय अस्पतालों में भी मुश्किल सर्जरियाँ होने लगीं हैं, जिनके लिए कल तक बड़े अस्पतालों पर निर्भरता थी। कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. गंभीर सिंह ठाकुर के मार्गदर्शन में दुर्ग जिले के विभिन्न सामुदायिक स्वास्थ्य के केंद्रों में भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पाटन में दिनांक 19 जनवरी को 3 मेजर ऑपरेशन किए गए, मिनिमली इनवेसिव सर्जरी विधि से ओवेरियन सिस्ट रिमूवल, हिस्टरएक्टोमी एवं एक एमरजेंसी सिजेरियन ऑपरेशन सफलतापूर्वक हुआ।
    चिकित्सकीय टीम में डॉ. कृष्ण कुमार डेहरिया स्त्री रोग विशेषज्ञ सर्जन, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. अजय सिंह ठाकुर, डॉ. सीडी दीवान सर्जन, स्टाफ नर्स शिव कुमारी दुबे, एकता सैमुअल, रीना बंछोर, जितेंद्र निर्मलकर रेखा कन्नौजे आदि ऑपरेशन दल के सदस्यों के सहयोग से सफलतापूर्वक संपन्न हुआ । विकास खंड चिकित्सा अधिकारी एवं स्वामी आत्मानंद शासकीय चिकित्सालय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. आशीष शर्मा ने बताया की क्षेत्र की जनता को चिकित्सा सुविधा एवं सेवाएं देने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे उन्हें कम दूरी में ही गुणवत्तापूर्ण सुविधा एवं सेवाएं दे सकें। इस उद्देश्य से शासन द्वारा अस्थि रोग विशेषज्ञ की पदस्थापना की गई है, डॉ. अरुण कटारे अस्थि रोग विशेषज्ञ की सेवाएं भी मिल रही हैं। विगत दिनों अस्थि रोग से संबंधित इलाज प्रारंभ किया गया है, इसमें फ्रैक्चर माइनर, अस्थि रोग सर्जरी एवं स्किन ग्राफ्टिंग भी की गई है, आगामी समय में विकासखंड पाटन में गुणवत्तापूर्ण सेवाओं के विस्तार की प्लानिंग की जा रही है।
    क्षेत्र की जनता को डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना एवं आयुष्मान भारत योजना से लाभान्वित किया जा रहा है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डॉ. गंभीर सिंह ठाकुर एवं जिला कार्यक्रम प्रबंधक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन सुश्री प्यूली मजूमदार ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पाटन पहुंचकर चिकित्सक की टीम की सराहना की एवं ऑपरेशन से लाभान्वित हुए हितग्राहियों से मुलाकात उनका कुशल क्षेम पूछा एवं जल्द स्वास्थ्य लाभ की शुभकामनाएं दी।

    सेहत /शौर्यपथ /आजकल समय से पहले लोगों के आखों की रोशनी कमजोर होने लगी है, क्योंकि बदलती लाइफ स्टाइल के साथ ही हम सभी को कुछ घंटे मोबाइल या कम्यूटर स्क्रीन के सामने रहना होता है। लेकिन यदि हम अपने खान-पान में थोड़ी ध्यान दें तो शायद इस समस्या को बढ़ने से रोका जा सकता है। जानें उन 4 चीजों के बारे में जिनके रोज खाने से आखों की रोशनी दुरुस्त रहती है-
    हरी सब्जियां
    अपनी डाइट में हरी पत्तेदार सब्ज‍ियों को शामिल करें। हरी पत्तेदार सब्ज‍ियों में आयरन की भरपूर मात्रा पायी जाती है, जो आंखों के लिए बहुत ही जरूरी है।
    गाजर
    गाजर का जूस पीना सेहत के लिए तो अच्छा है ही साथ ही आंखों के लिए भी बहुत फायदेमंद है। रोजाना एक गिलास गाजर का जूस पीने से आंखों पर चढ़ा चश्मा तक उतर सकता है।
    बादाम का दूध
    सप्ताह में कम से कम तीन बार बादाम का दूध पिएं। इसमें विटामिन ई होता है जो कि आंखों में किसी भी बीमारी से लड़ने के लिए फायदेमंद है।
    अंडे
    अंडे में अमीनो एसिड, प्रोटीन, सल्‍फर, लैक्‍टिन, ल्‍युटिन, सिस्‍टीन और विटामिन बी2 होता है। विटामिन बी सेल के कार्य करने में महत्‍वपूण होता है।
    मछली
    मछली में हाई प्रोटीन होता है। मछली आंखों के अलावा बालों के लिए भी बहुत अच्छी होती है।
    सोयाबीन
    आप अगर नॉन वेज नहीं खाते, तो आप सोयाबीन खा सकते हैं, यह आपकी आंखों के लिए बहुत फायदेंमंद है।

    सेहत /शौर्यपथ / क्या आप चाइनीज फूड के शौकीन हैं? तो आपने अक्सर चाइनीज फूड्स में हरी प्याज का सेवन किया होगा। यह कई चाईनीज फूड का एक अनिवार्य हिस्सा है। लेकिन क्या आप जानती हैं कि हरी प्याज का सेवन सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है।
    हरी प्याज को स्प्रिंग अनियन के नाम से भी जाना जा है। इसमें ऐसे कई पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद माने जाते हैं। इसकी सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें कैलोरी की मात्रा कम होती है और इसे कच्चा या पकाकर दोनों ही तरह से खाया जा सकता है। हम यहां आपको हरी प्याज के स्वास्थ्य संबंधी 5 लाभ बता रहे हैं।
    पोषक तत्वों भरपूर है हरी प्‍याज
    हरी प्याज विटामिन-सी और कैल्शियम का एक बेहतरीन स्रोत है। यह विटामिन ए,बी,सी, बी2 या थाइमिन, कॉपर, आयरन, फास्फोरस, मैग्नीशियम और पोटेशियम, जैसे आवश्यक विटामिन और मिनरल से भरपूर होती है। जो कि हमारे शरीर को न सिर्फ जरूरी पोषण प्रदान करती है, बल्कि यह कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं को दूर रखने में भी मदद करती है।
    शोध बताते हैं कि हरी प्याज कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम कर सकती है। साथ ही हार्ट अटैक और स्ट्रोक के जोखिम को कम कर सकती है। इसमें जीवाणुरोधी और एंटीफंगल गुण होते हैं।
    यहां हैं हरी प्याज के 5 स्वास्थ्य लाभ
    1. हृदय के लिए फायदेमंद है
    हरी प्याज में एंटीऑक्सिडेंट की उपस्थिति फ्री-रेडिकल्स की कार्रवाई को रोक कर डीएनए और सेलुलर ऊतक की क्षति को रोकने में मदद करती है। विटामिन-सी शरीर में उच्च कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर के स्तर को कम करने में मदद करता है, जो बदले में आपके हृदय रोग के जोखिम को कम करता है। हरी प्याज में मौजूद सल्फर यौगिक कोरोनरी हृदय रोगों के जोखिम को कम करने में भी मदद करते हैं।
    2. हड्डियों के लिए फायदेमंद है
    हरी प्याज में विटामिन-C और K की उच्च मात्रा होती है, दोनों हड्डियों के सामान्य कामकाज के लिए आवश्यक हैं। विटामिन सी कोलेजन के संश्लेषण में मदद करता है, जो आपकी हड्डियों को मजबूत बनाता है। जबकि विटामिन K हड्डियों के घनत्व को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
    3. कैंसर के जोखिम को कम करती है हरी प्‍याज
    हरी प्याज शक्तिशाली सल्फर युक्त यौगिक में समृद्ध होती हैं, जिन्हें एलिल सल्फाइड कहा जाता है। ये कोलन कैंसर के विकास के जोखिम को कम करने में मदद करता है। फ्लेवोनोइड्स एक्सथिन ऑक्सीडेज एंजाइम के उत्पादन को रोक कर कैंसर को रोकने में भी मदद करते हैं। जो फ्री-रेडिकल्स के उत्पादन से डीएनए और सेलुलर ऊतक को नुकसान पहुंचाते हैं।
    कैंसर से लड़ने वाले खाद्य पदार्थ खाने के अलावा, अपने भोजन की आदतों को बदलने से भी आपको कैंसर के जोखिम को कम करने में मदद मिलती है।
    4. ब्लड शुगर को नियंत्रित करती है
    अध्ययनों से पता चला है कि हरी प्याज में मौजूद सल्फर यौगिक ब्लड शुगर के उच्च स्तर को कम करने में मदद करते हैं। यह इंसुलिन के स्तर को बढ़ाकर प्राप्त किया जाता है, एक हार्मोन, जो शरीर की कोशिकाओं को रक्त में शर्करा के परिवहन के लिए आवश्यक है। ऐसे में अगर आपको डायबिटीज है तो इस सब्जी को अपनी स्वस्थ सब्जियों की सूची में शामिल करें।
    5. पेट की जटिलताओं से बचाती है
    हरी प्याज जठरांत्र संबंधी समस्याओं से राहत में फायदेमंद है। यह दस्त और पेट की अन्य जटिलताओं को रोकने के लिए एक शक्तिशाली प्राकृतिक उपचार के रूप में कार्य करती है। इसके अतिरिक्त, वे आपकी भूख में भी सुधार करती है। उच्च मात्रा में फाइबर से भरी होने के कारण, यह हरी सब्जी आपके पाचन तंत्र की सुचारू रूप से काम करने में मदद करती है।

    सेहत /शौर्यपथ /मेडिटेशन को ही ध्यान लगाना कहते है, इसे दिनचर्या का हिस्सा बनाकर रोजाना करने से कई फायदे होते हैं। अगर अभी तक आपने मेडिटेशन को अपने रूटीन में शामिल नहीं किया है तो, ये 13 फायदे जानने के बाद आप कल से ही इसे अपनी दिनचर्या में शामिल कर लेंगे -
    1 मेडिटेशन, मन अशांत रहने पर उसके निष्क्रिय पड़े हुए भागों को उपयोग में लाने योग्य बनाता है।
    2 अनुभव की क्षमता को सूक्ष्म करने की एक प्रक्रिया है ध्यान।
    3 यदि आपको भूलने की आदत है तो ध्यान आपके लिए बहुत उपयोगी है।
    4 गुस्सैल प्रवृत्ति के लोगों का मन शांत करने में कारगर है भावातीत ध्यान।
    5 निर्णय न ले पाने वाले भी इसे अपनी जिंदगी में शामिल कर सकते हैं।
    6 हृदयरोग की रोकथाम के लिए उत्तम औषधि के समान है।
    7 मन की चंचलता को नियंत्रित करता है।
    8 दीर्घायु बनाने में इसकी अहम उपयोगिता है।
    9 शांति, सामर्थ्य, संतोष, शांति, विद्वत्ता और सभी आवश्यकताओं को पूरा करता है भावातीत ध्यान।
    10 चाहें तो ध्यान के समय कुछ फूल आस-पास रखें, कोई सुगंधित वस्तु का छिड़काव कर दें, अगरबत्ती जला दें।
    11 रात्रि के भोजन से पहले ही ध्यान के लिए बैठें। प्रातःकाल सूर्योदय से पहले ध्यान करें।
    12 ढीले वस्त्र पहनकर ध्यान करें।
    13 महिलाएं यदि चाहें तो भावातीत ध्यान किसी शिक्षक के द्वारा भी सीख सकती हैं। चाहें तो मेडिटेशन सेंटर में भी आप इसे सीख सकती हैं।

    नुस्खा /शौर्यपथ /वैसे तो प्याज का सेवन करने से कई सेहत लाभ मिलते हैं, लेकिन कटे प्याज को केवल अपने शरीर के किसी हिस्से पर घंटों तक रखने से भी कई सेहत समस्याएं दूर हो सकती है। आइए, जानते हैं कटे प्याज के एक टूकडे को मोजे में डालकर रात भर पहनने से कौन से सेहत लाभ मिलते हैं -
    1 मोजे और प्याज का यह उपाय बुखार में सबसे अधिक प्रभावकारी है। अगर आप बुखार महसूस कर रहे हैं तो रात को सोते वक्त यह उपाय आजमाएं और आराम से सो जाएं। यह प्याज आपके शरीर की सारी गर्मी सोख लेगा और आप राहत महसूस करेंगे।
    2 प्याज एंटी बैक्टीरियल और एंटी वायरल गुणों से भरपूर होता है। शरीर के किसी भी हिस्से में रखने या रगड़ने पर यह बैक्टीरिया का नाश करता है और बढ़े हुए तापमान को कम करता है।
    3 प्याज को पैर में रखकर सोना पैरों से आने वाली गंध को भी दूर करने में मदद करता है, क्योंकि प्याज की तेज गंध अपने आसपास की वायु को शुद्ध करने में सहायक होती है।
    4 ऐसा भी माना जाता है कि प्याज को इस तरह पैरों के बीच रखने से पेट के संक्रमण से भी निजात मिलती है और किडनी से संबंधित समस्याएं भी दूर होती है। यह रक्त को भी शुद्ध करने में मददगार है।
    5 यह उपाय छोटी आंत और मूत्राशय की समस्याओं में भी फायदेमंद है। इसके अलावा सर्दी, जुकाम और संक्रमण के लिए भी आप यह तरीका आजमा सकते हैं।

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