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रायपुर / शौर्यपथ / विगत दिनों जिले में 21 नवंबरसे 4 दिसंबर 2020 तक पुरुष नसबंदी पखवाड़े का आयोजन दो चरणों में किया गया था । प्रथम चरण में मोबिलाइजेशन सप्ताह 21 से 27 नवंबर तक तथा द्वितीय चरण में 28 नवंबर से 4 दिसंबर तक सेवा वितरण सप्ताह मनाया गया। यह अभियान` परिवार नियोजन में पुरुषों की भागीदारी, जीवन में लाए स्वास्थ्य और खुशहाली’ के नारे के साथ चलाया गया था ।पुरुष नसबंदी पखवाड़े के अंतर्गत रायपुर जिले में 137 पुरुषों ने परिवार नियोजन के स्थाई साधन पुरुष नसबंदी की सेवा ली है। ज़िले में पुरुष नसबंदी पखवाड़े का आयोजन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर मीरा बघेल के मार्गदर्शन में किया गया था ।
जिला मीडिया प्रभारी गजेंद्र डोंगरे ने बताया, जिले में 21 नवंबर से 4 दिसंबर 2020 तक पुरुष नसबंदी पखवाड़े का आयोजन किया गया था । कोविड-19 के सक्रमण काल में इसे सफल बनाने के लिए समस्त बीईटीओ (विकासखण्ड विस्तार एवं प्रशिक्षण अधिकारियों ) से समन्वय स्थापित किया गया । पखवाड़े की शुरूआत जागरूकता रथ के साथ-साथ वॉल-पेंटिंग के माध्यम से जागरूकता की गई । लक्ष्य दंपतियों के लिए ‘’मोर मितान मोर संगवारी” कार्यक्रम चलाकर पुरुष नसबंदी के प्रति फैली भ्रांतियों को दूर किया गया। साथ ही पूर्व में नसबंदी करा चुके दंपत्तियों के साथ बैठकर खुली चर्चा की गई । लक्ष्य दंपत्तियों को नसबंदी से होने वाले परिवार नियोजन के फायदे और नसबंदी की भ्रांतियों को दूर कर परामर्श दिया गया । गजेंद्र डोंगरे ने बताया, जिले के दो नसबंदी विशेषज्ञ डॉक्टर अरुण कुमार टोंडर और डॉक्टर संजय नवल ने चारों विकासखंड अभनपुर, आरंग, धरसीवा, तिल्दा और रायपुर अर्बन, बिरगांव एवं आयुर्वेदिक अस्पताल, जिला अस्पताल, में अपनी सेवाएं प्रदान की ।साथ ही मितानिन,एएनएम, आरएचओ, ने लक्ष्य दंपतियों के परामर्श और उत्साहवर्धन का कार्य किया । बिरगांव में 3, रायपुर अर्बन में 14, धरसीवा में 22, आरंग में 52, अभनपुर में 38, तिल्दा में 8 लोगों को मिलाकर कुल 137 पुरूषों ने परिवार नियोजन के स्थाई साधन पुरुष नसबंदी को अपनाया है।
परिवार नियोजन के लिए दी जाने वाली सेवाएं कोविड-19 के दिशा निर्देशों के अनुसार प्रदान की गई । वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सूचनाओं का आदान प्रदान के साथ ही जिला एवं विकासखंड के अधिकारियों का क्षमतावर्धन भी किया गया था । शारीरिक दूरी एवं कोविड-19 के दिशा निर्देशों का पालन करते हुए पखवाड़ा 21 नवंबर से 2 सप्ताह तक चला जिसमें मुख्यता वेसेक्टॉमी पर विशेष ध्यान केंद्रित किया ।
स्वास्थ्य केंद्र पर आयोजित हुई थी गतिविधियां
स्वास्थ्य केन्द्रों पर पुरुष नसबंदी सेवा और इसके फायदे को प्रदर्शित किया गया था। नसबंदी के तीन माह उपरांत जांच में शुक्राणु संख्या शून्य पाए जाने पर ही हितग्राहीको प्रमाण पत्र को प्रदान किया जाएगा ।नसबंदी पखवाड़े के दौरान भारत सरकार द्वारा निर्देशित समस्त मानकों एवं दिशा निर्देशों का पालन समस्त स्तरों पर सुनिश्चित किया गया ।
मोबिलाइजेशन फेस में आयोजित हुई गतिविधियां
इस दौरान प्रचार रथ के माध्यम से अधिक से अधिक प्रचार प्रसार किया गया ।साथ हीव्यक्तिगत चर्चा और पुरुष नसबंदी के फायदे हितग्राहियों को बताये गए। ‘मोर मितान मोर संगवारी’ का आयोजन कर पुरुष नसबंदी से संबंधित मिथकों को दूर करने के लिए परामर्श भी प्रदान किया गया। प्रचार प्रसार के लिए डिजिटल माध्यम के प्रयोग को भी बल दिया गया। प्रचार प्रसार के दौरान कोविड-19 संक्रमण की रोकथाम के लिए पूरी सावधानी रखी गयी कहीं भी अधिक भीड़ एकत्रित ना हो इसका भी ध्यान रखा गया था ।
खाना खजाना / शौर्यपथ / चाइनीज भेल मुंबई की एक लोकप्रिय स्ट्रीट फूड रेसिपी है। जिसे लोग अक्सर शाम के नाश्ते में बनाकर खाना पसंद करते हैं। अगर आप भी घर आए मेहमानों को शाम के नाश्ते में कुछ अलग परोसकर खिलाना चाहते हैं तो ट्राई करें ये क्रंची चाइनीज भेल रेसिपी। यकीन मानिए सेहत के साथ स्वाद भी हो जाएगा दोगुना।
चाइनीज भेल बनाने के लिए सामग्री-
-नूडल्स
-सब्जियां- पत्तागोभी, गाजर, लाल बेल पेपर, शिमला मिर्च, पीली शिमला मिर्च, -प्याज और टमाटर
-1/2 टेबल स्पून मिर्च का पेस्ट
-लेब्जेल्टर गुप्त मसाले
-स्वादानुसार नमक
-1/2 टेबल स्पून सिरका
-5 बूंदें सोया सॉस
चाइनीज भेल बनाने का तरीका-
चाइनीज भेल बनाने के लिए सबसे पहले थोड़ी नूडल्स लें और एक पैन में थोड़ा सा तेल डालकर उन्हें फ्राई कर लें। अब पत्तागोभी, गाजर, लाल शिमला मिर्च, शिमला मिर्च, पीली शिमला मिर्च, प्याज और टमाटर को जूलियन काटकर सभी सब्जियों और नूडल्स को एक साथ मिला लें। इसमें चिली पेस्ट के साथ लेब्जेल्टर मसालों को भी डाल दें। अब इसमें नमक, सिरका और सोया सॉस डालें। अच्छी तरह से मिलाएं और सर्व करें।
सेहत /शौर्यपथ / अगर आप भी उन लोगों में शामिल हैं जिन्हें सुबह उठने में आलस आता है या फिर बिस्तर छोड़ने के बाद भी पूरा दिन सुस्ती बनी रहती है तो आपको अपनी डाइट में कुछ बदलाव करने की जरूरत है। जी हां ब्रेकफास्ट में किए गए कुछ आसान बदलाव आपको पूरा दिन फ्रेश रखने में आपकी मदद कर सकते हैं। आइए जानते हैं कैसे सिर्फ अपने नाश्ते में ये 5 चीजे शामिल करके आप दिनभर रह सकते हैं एकदम फ्रेश।
हनी टोस्ट-
अगर आप एक्सरसाइज करने के बाद भी दिन भर सुस्त बने रहते हैं तो अपनी सुबह की शुरुआत कॉफी से बिल्कुल न करें। हो सकता है कॉफी में मौजूद कैफीन आपको सूट नहीं कर रहा हो। अपने दिन की शुरुआत गर्म पानी में शहद डालकर पीने से करें। इसके अलावा आप शहद को टोस्ट या ओट्स में डालकर भी अपने ब्रेकफास्ट में शामिल कर सकते हैं। ऐसा करने से आपका पेट लंबे समय तक भरा रहेगा और शरीर को काम करने के लिए पर्याप्त एनर्जी भी मिलेगी।
ओट्स
ओट्स आपको दिनभर चुस्त बनाए रखने के लिए काफी होते हैं। आप अपनी सुबह की शुरुआत ओट्स खाकर कर सकते हैं। सुबह किए गए इस नाश्ते से आपका पेट दिनभर भरा रहेगा और शरीर का मैटाबॉलिज्म भी बढ़ने में मदद मिलेगी।
चॉकलेट मिल्क-
अगर आप सुबह की शुरूआत करने के लिए कॉफी का विकल्प तलाश रहे हैं तो आप सुबह दूध में चॉकलेट पाउडर मिला कर पी सकते हैं। चॉकलेट मिल्क में मौजूद प्रोटीन ब्रेन को बूस्ट करके आपको एनर्जेटिक बनाए रखने में मदद करता है। इसके अलावा चॉकलेट में मौजूद कोको पाउडर में प्राकृतिक कैफीन पाया जाता है जो ब्लड शुगर मेंटेन करने में मदद करता है।
अंडे-
अंडों में मौजूद प्रोटीन और कैल्शियम आपकी बॉडी को पूरा दिन चार्ज रखने में मदद कर सकते हैं। इसके लिए आप रोजाना सुबह नाश्ते में दो अंडें और ब्रेड को शामिल कर सकते हैं।
स्पाइसी नाश्ता-
हालांकि कई लोग सुबह नाश्ते में मिर्च-मसाले वाला खाना खाने से परहेज करते हैं। लेकिन ऐसा करने की पूर्ण तौर पर मनाही भी नहीं होती है। आप दिनभर चुस्त बने रहने के लिए ब्रेकफास्ट में कुछ मसालेदार भी शामिल कर सकते हैं। सुबह ब्रेकफास्ट में शामिल किया गया मसालेदार चीज आपका मैटाबॉलिज्म बढ़ाकर आपको दिनभर चुस्त-दुरूस्त बनाने में आपकी मदद करेगा।
सेहत / शौर्यपथ /औषधीय गुणों से भरपूर अजावाइन हर भारतीय रसोई में जरूर पाई जाती है। इसका सेवन करने से सिर्फ बदन और पेट दर्द ही नहीं बल्कि मोटापे से भी मुक्ति मिलती है। मोटापा ना सिर्फ आपकी पर्सनैलिटी खराब करता है बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी बहुत नुकसानदेह होता है। तो ऐसे में आइए जान लेते हैं आखिर कैसे अजवाइन का इस्तेमाल करके आप इस परेशानी से मुक्ति पा सकते हैं।
मोटापा कम करने के लिए ऐसे करें अजवाइन का इस्तेमाल-
-पचास ग्राम अजवायन लेकर 1 गिलास पानी में रातभर के लिए भिगोकर छोड़ दें। रातभर भिंगोने के बाद सुबह इस पानी को छान कर पीएं।
मोटापा ही नहीं अजवायन से सेहत को होते हैं ये लाभ-
- अजवायन के छने हुए पानी में आधा चम्मच नींबू निचोड़ कर डाल लीजिए साथ ही इसमें 1 चम्मच शहद भी मिक्स करें त्वचा पर लगाएं। त्वचा संबंधी बीमार दूर होगी।
- खाली पेट अजवाइन का पानी पीने से कब्ज और गैस से राहत मिलती है।
-अजवाइन खाने से भूख भी लगती है तथा पाचन क्रिया ठीक से काम करती है।
-अजवायन का पानी पीने से शरीर का मेटाबॉलिज्म बढ़ता है जिसकी वजह से कार्ब तथा फैट बर्न होने की प्रक्रिया शुरु हो जाती है।
शौर्यपथ /कहते हैं कि सोते समय सिर दक्षिण में और पैर उत्तर दिशा की ओर होने चाहिए क्योंकि साधारण चुंबक शरीर से बांधने पर वह हमारे शरीर के ऊत्तकों पर विपरीत प्रभाव डालता है। इसी सिद्धांत पर यह निष्कर्ष भी निकाला गया कि अगर साधारण चुंबक हमारे शरीर पर विपरीत प्रभाव डाल सकता है तो उत्तरी पोल पर प्राकृतिक चुम्बक भी हमारे मन, मस्तिष्क व संपूर्ण शरीर पर विपरीत असर डालता है लेकिन मृतक का सिर हमेशा उत्तर दिशा की ओर रखा जाता है।
हमारे यहां मृत्यु से जुड़ी अनेक परंपराए हैं। इन्हीं परंपराओं में से एक परंपरा है मौत के बाद मृतक का सिर उत्तर दिशा की ओर रखने की। इस परंपरा को निभाते तो अधिकांश लोग हैं लेकिन बहुत कम लोग ये जानते हैं कि मृतक का सिर उत्तर दिशा की ओर ही क्यों रखना चाहिए? दरअसल आत्मा नश्वर है और शरीर नष्ट होने वाला है। जिस प्रकार हम कपड़े बदलते हैं उसी प्रकार आत्मा शरीर बदलती है।
शरीर का अंत मृत्यु के साथ ही हो जाता है। मृतक का सिर उत्तर की ओर करके इसलिए रखते हैं कि प्राणों का उत्सर्ग दशम द्वार से हो। चुम्बकीय विद्युत प्रवाह की दिशा दक्षिण से उत्तर की ओर होती है। कहते हैं मरने के बाद भी कुछ क्षणों तक प्राण मस्तिष्क में रहते हैं। अत: उत्तर दिशा में सिर करने से ध्रुवाकर्षण के कारण प्राण शीघ्र निकल जाते हैं। जीव के प्राण शीघ्र ही मुक्त हो जाते हैं। इसलिए मृतक को हमेशा उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।
शास्त्रों के अनुसार मरणासन्न व्यक्ति का सिर उत्तर की तरफ रखना चाहिए और मृत्यु के बाद अंत्येष्ठी-संस्कार के समय उसका सिर दक्षिण की तरफ रखना चाहिए। मरणासन्न में यानि कि मृत्यु जब करीब हो, जब यह निश्चित हो जाए कि मृत्यु आने ही वाली है किंतु प्राण निकलने में कष्ट अधिक हो रहा हो तो मृत्यु को प्राप्त करने वाले व्यक्ति का सिर उत्तर दिशा की ओर कर देना चाहिए।
ऐसा माना जाता है कि व्यक्ति के प्राण मस्तिष्क के मार्ग से जल्दी निकल जाते हैं और मरने से ठीक पहले यदि मस्तिष्क को उत्तर दिशा की ओर रख दिया जाए तो ध्रुवाकर्षण के कारण प्राण शीघ्र और कम कष्ट से निकल जाते हैं।
मृत्यु के बाद जब शव का दाह संस्कार किया जाता है उस समय शव के सिर को दक्षिण दिशा की ओर रखना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार दक्षिण की दिशा मृत्यु के देवता यमराज की मानी गई है। इस दिशा में शव का सिर रख हम उसे मृत्यु के देवता को समर्पित कर देते हैं।
सेहत /शौर्यपथ / सर्दियों का मौसम खान-पान के लिहाज से काफी अहम होता है। इस सीजन में कुछ खास फल और सब्जियां ऐसी हैं, जिन्हें खाने से आपकी इम्युनिटी पावर बढ़ने के साथ आप छोटी-मोटी बीमारियों से भी बचे रहते हैं। आज हम आपको ऐसी फल-सब्जियां बता रहे हैं, जिन्हें आयुर्वेद के अनुसार शक्तिवर्धक और रोगनाशक माना जाता है।
पालक से दूर रहता है इंफेक्शन
इस सब्जी की खपत से शरीर को बेहद फायदेमंद एंटी-ऑक्सीडेंट विटामिन मिलते हैं। जैसे विटामिन ए और सी। इसमें विटामिन-के की मात्रा भी काफी होती है, जिससे बोन मास को स्ट्रेंथ मिलती है। यह सब्जी मौसम में इन्फेक्शन से दूर रहने में भी मदद करती है।
चुकंदर भी फायदेमंद
चुकंदर पूरे साल मिलता है लेकिन इस मौसम में शरीर का मेटाबॉलिज्म कम हो जाता है, इसलिए ऐसे फूड लेने के लिए कहा जाता है, जो कम कैलरी के हों मगर जिनमें पोषण यानी न्यूट्रिएंट वैल्यू ज्यादा हो, जो चुकंदर यानी बीटरूट में है।
मूली से बढ़ती है इम्युनिटी
ठंड की सबसे लोकप्रिय सब्जियों और सलाद में से एक है मूली। मूली में मैग्निशियम, आयरन, कॉपर, कैल्शियम, मिनरल्स की काफी मात्रा में होती है। आयुर्वेद के अनुसार इसे डाइट में लेने से बॉडी हमेशा हेल्दी बनी रहती है।
गाजर में है विटामिन का भरमार
इसमें कैरोटिन की मात्रा बाकी के फल और सब्जियों से ज्यादा होती है। साथ ही इसमें काफी तरह के विटामिन भी मौजूद होते हैं। जैसे विटामिन बी, सी, डी, ई और के। मूली की तरह इसे सलाद में भी लिया जा सकता है और सब्जी भी बनाई जा सकती है। दोनों ही तरह से गाजर बहुत हेल्दी है.
बैक्टीरिया से लड़ता है संतरा
संतरे को सर्दी में लेने के काफी फायदे हैं। इसमें विटामिन सी की मात्रा काफी होती है, जिससे इस मौसम में बैक्टीरिया से लड़ने में मदद मिलती है। सबसे खास है कि यह लो-कैलरी फ्रूट है यानी इसे लेने से वजन नहीं बढ़ेगा।
खाना खजाना /शौर्यपथ / मीठा खाने के शौकीनों को खीर भी बेहद पसंद होती है। खीर बनाने के कई तरीके होते हैं। आज हम आपको ट्रेडिशनल चावल और दूध की खीर से हटकर मखाने-काजू की खीर बनाने की रेसिपी वता रहे हैं। आइए, जानते हैं आसान रेसिपी-
सामग्री :
1 लीटर दूध
1 कप मखाने
1 छोटा चम्मच घी
1 छोटा चम्मच चिरौंजी
10 काजू
10 बादाम
1 चम्मच इलायची पाउडर
¼ कप चीनी
विधि :
सबसे पहले काजू और बादाम महीन-महीन काटकर अलग रख लें।
मखानों को महीन-महीन काट लें और फिर मिक्सी में दरदरा पीस लें।
अब एक भारी तली के पैन में घी गरम करें और उसमें मखानों को 1 मिनट के लिए भून लें।
अब मखानों में दूध डालकर पहले उबाल के बाद आंच को धीमा कर दें।
दूध को तब तक पकने दें जब तक कि मखाने पूरी तरह से गल जाएं।
5-7 मिनट के गैप में खीर को चलाते रहें ताकि वो तली में लगने ना पाए।
अब कटे हुए मेवे और चीनी को खीर में डालकर अच्छी तरह मिलाएं और 5 मिनट बाद इलायची पाडउर डालकर गैस बंद कर दें।
लाइफस्टाइल /शौर्यपथ / बासी रोटी सुनते ही ज्यादातर लोग मुंह बना लेते हैं लेकिन स्वाद की बजाय सेहत की बात करें, तो बासी रोटियां पोषण से भरपूर होती है। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि गेहूं के आटे से बनी रोटियों को सबसे ज्यादा पौष्टिक और सुपाच्य माना जाता है लेकिन इन रोटियों के गुण तब और भी बढ़ जाते हैं, जब ये बासी हो जाती हैं। आइए, जानते हैं बासी रोटी खाने फायदे-
बासी रोटी के फायदे
बासी रोटी को रोज दूध के साथ खाने से डायबिटिज और बीपी नियंत्रित रहता है। रोटी के बासी हो जाने से उनमें कुछ लाभकारी बैक्टिरिया आ जाते हैं इसके अलावा ग्लूकोज की मात्रा भी कम होती है।
बासी रोटी को दूध के साथ खाने से पेट की बीमारियों से भी राहत मिलती है। इससे एसिडिटी, कब्ज जैसी समस्याएं दूर होती है। बासी रोटी में फाइबर होने से यह पाचन को भी ठीक करता है।
बासी रोटी शरीर के तापमान को भी संतुलित बनाए रखने में मददगार है। दूध के साथ बासी रोटी को खाने से शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है। खासकर गर्मियों में इसका सेवन करने से हाई स्ट्रोक जैसी समस्याओं का खतरा नहीं रहता है।
दूध के साथ बासी रोटी खाने से शरीर का दुबलापन भी दूर होता है और शरीर में बल की वृद्धि होती है। शरीर के दुबलेपन को दूर करने का यह सबसे कारगर उपाय भी है। खासकर रात के समय बासी रोटी खाना ज्यादा फायदेमंद होगा।
धर्म संसार /शौर्यपथ / जिस महीने की पूर्णिमा तिथि जिस नक्षत्र से युक्त होती है, उस नक्षत्र के आधार पर ही उस महीने का नामकरण किया जाता है। चूंकि मार्गशीर्ष महीने की पूर्णिमा मृगशिरा नक्षत्र से युक्त होती है, इसलिए इस माह को मार्गशीर्ष कहा जाता है। इसके अलावा इसे मगसर, मंगसिर, अगहन, अग्रहायण आदि नामों से भी जाना जाता है। ये पूरा मास बड़ा ही पवित्र माना गया है। इसकी महिमा स्वयं श्री कृष्ण भगवान ने गीता में बताई है। गीता के 10वें अध्याय के 35वें श्लोक में भगवान श्री कृष्ण ने कहा है -
बृहत्साम तथा साम्नां गायत्री छन्दसामहम्।
मासानां मार्गशीर्ष Sहमृतूनां कुसुमाकरः।।
अर्थात् गायन करने योग्य श्रुतियों में मैं बृहत्साम और छंदों में मैं गायत्री छंद हूं तथा महीनों में मार्गशीर्ष और ऋतुओं में बसंत मैं हूं। अतः इस महीने में भगवान श्री कृष्ण की उपासना की बड़ी ही महिमा है। इस महीने में भगवान श्री कृष्ण की उपासना करने से व्यक्ति को जीवन में हर तरह की सफलता प्राप्त होती है और वो हर तरह के संकट से बाहर निकलने में सक्षम होता है।
सतयुग में देवों ने वर्ष का आरंभ मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से ही किया था। साथ ही ऋषि कश्यप ने भी इसी महीने के दौरान कश्मीर नामक जगह की स्थापना की थी, जो कि इस समय भारत का अभिन्न अंग है। मार्गशीर्ष मास के दौरान स्नान-दान का बड़ा ही महत्व है।
विशेषकर इस महीने के दौरान यमुना नदी में स्नान का महत्व है। मार्गशीर्ष महीने के दौरान यमुना नदी में स्नान करने से भगवान सहज ही प्राप्त होते हैं। अतः जो लोग जीवन में भगवान का आशीर्वाद बनाए रखना चाहते हैं और हर संकट से छुटकारा पाना चाहते हैं, उन्हें मार्गशीर्ष के दौरान कम से कम एक बार यमुना नदी में स्नान करने अवश्य जाना चाहिए, लेकिन जिन लोगों के लिए ऐसा करना संभव नहीं है, वो लोग घर पर ही अपने स्नान के पानी में थोड़ा-सा पवित्र जल मिलाकर स्नान कर लें।
स्नान
मार्गशीर्ष के दौरान सुबह जल्दी उठकर स्नान
से पवित्र होकर भगवान का ध्यान करना चाहिए और उनकी पूजा-अर्चना करनी चाहिए। स्नान से पहले तुलसी की जड़ की मिट्टी से भी स्नान करें, यानी अपने शरीर पर उसका लेप लगाएं और लेप लगाने के कुछ देर बाद पानी से स्नान करें। साथ ही स्नान के समय 'ॐ नमो भगवते नारायणाय' या गायत्री मंत्र का जप करें।
दान
इस मौसम में शीतलहर आरंभ हो जाती है अत: गर्म कपड़े,कंबल,मौसमी फल,शैया,भोजन और अन्नदान का विशेष महत्व है। साथ ही इस माह में पूजा संबंधी सामग्री जैसे आसन, तुलसी माला,चंदन,पूजा की प्रतिमा,मोर पंख,जलकलश,आचमनी,पीतांबर,दीपक आदि का दान शुभ माना गया है।
धर्म संसार /शौर्यपथ / अगहन मास भगवान श्रीकृष्ण का स्वरूप माना गया है, इस माह शंख की पूजा से होता है घर का क्लेश दूर अगहन मास का प्रारंभ हो गया है। हिन्दू पंचांग के अनुसार इसे मार्गशीर्ष मास भी कहा जाता है। यूं तो हर माह की अपनी विशेषताएं है लेकिन अगहन (मार्गशीर्ष) का संपूर्ण मास धार्मिक दृष्टि से पवित्र माना गया है।
गीता में स्वयं भगवान ने कहा है कि -
मासाना मार्गशीर्षोऽयम्।
अत: इस माह में पूजा-पाठ, उपासना का अपना विशेष महत्व है, आइए जानें इस माह खास विशेषताएं...
1. अगहन मास को मार्गशीर्ष कहने के पीछे भी कई तर्क हैं। भगवान श्रीकृष्ण की पूजा अनेक स्वरूपों में व अनेक नामों से की जाती है। इन्हीं स्वरूपों में से एक मार्गशीर्ष भी श्रीकृष्ण का रूप है।
2. सत युग में देवों ने मार्गशीर्ष मास की प्रथम तिथि को ही वर्ष प्रारंभ किया।
3. मार्गशीर्ष शुक्ल 12 को उपवास प्रारंभ कर प्रति मास की द्वादशी को उपवास करते हुए कार्तिक की द्वादशी को पूरा करना चाहिए। प्रति द्वादशी को भगवान विष्णु के केशव से दामोदर तक 12 नामों में से एक-एक मास तक उनका पूजन करना चाहिए। इससे पूजक 'जातिस्मर' पूर्व जन्म की घटनाओं को स्मरण रखने वाला हो जाता है तथा उस लोक को पहुंच जाता है, जहां फिर से संसार में लौटने की आवश्यकता नहीं पड़ती है।
4. मार्गशीर्ष की पूर्णिमा को चंद्रमा की अवश्य ही पूजा की जानी चाहिए, क्योंकि इसी दिन चंद्रमा को सुधा से सिंचित किया गया था। इस दिन माता, बहन, पुत्री और परिवार की अन्य स्त्रियों को एक-एक जोड़ा वस्त्र प्रदान कर सम्मानित करना चाहिए। इस मास में नृत्य-गीतादि का आयोजन कर उत्सव भी किया जाना चाहिए।
5. मार्गशीर्ष की पूर्णिमा को ही 'दत्तात्रेय जयंती' मनाई जाती है।
6. मार्गशीर्ष मास में इन 3 पावन पाठ की बहुत महिमा है। 1. विष्णु सहस्त्रनाम, 2. भगवद्गीता और 3. गजेन्द्र मोक्ष। इन्हें दिन में 2-3 बार अवश्य पढ़ना चाहिए।
7. इस मास में 'श्रीमद्भागवत' ग्रंथ को देखने भर की विशेष महिमा है। स्कंद पुराण में लिखा है- घर में अगर भागवत हो तो अगहन मास में दिन में एक बार उसको प्रणाम करना चाहिए।
8. इस मास में अपने गुरु को, इष्ट को ॐ दामोदराय नमः कहते हुए प्रणाम करने से जीवन के अवरोध समाप्त होते हैं।
9. इस माह में शंख में तीर्थ का पानी भरें और घर में जो पूजा का स्थान है उसमें भगवान के ऊपर से शंख मंत्र बोलते हुए घुमाएं, बाद में यह जल घर की दीवारों पर छीटें। इससे घर में शुद्धि बढ़ती है, शांति आती है, क्लेश दूर होते हैं।
10. इसी मास में कश्यप ऋषि ने सुंदर कश्मीर प्रदेश की रचना की। इसी मास में महोत्सवों का आयोजन होना चाहिए। यह अत्यंत शुभ होता है।
समाज कल्याण मंत्री श्रीमती अनिला भेड़िया और कृषि मंत्री रविन्द्र चैबे के हाथों
माना कैम्प रायपुर में आयोजित दिव्यांगजन राज्य स्तरीय पुरस्कार समारोह 2020 में
धमतरी / शौर्यपथ / दिव्यांगजन राज्य स्तरीय पुरस्कार 2020 समारोह का आयोजनआज रायपुर स्थित फिजिकल रिफरल रिहैबिलिटेशन सेन्टर माना कैम्प में किया जाएगा। समारोह में प्रदेश की महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती अनिला भेड़िया और कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे द्वारा दिव्यांगजनों के लिए उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्ति/संस्था तथा जिले को पुरस्कृत किया गया। उप संचालक समाज कल्याण ने बताया कि धमतरी जिले से दिव्यांगजनों के लिए उत्कृष्ट कार्य करने वाले शासकीय प्राथमिक शाला टेंगना के प्रधान अध्यापक संतोष कुमार बांधव को समारोह में राज्य स्तरीय पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया। उन्हें 5001 रूपए के चेक, प्रशस्ति पत्र और शील्ड देकर सम्मानित किया गया।
इसी तरह निःशक्तजन वित्त विकास निगम द्वारा स्वरोजगार ऋण के तहत प्राप्त ऐसे ऋणी, जिन्होंने पूरी तरह से ऋण जमा कर चुके हैं, ऐसे हितग्राहियों को उत्थान सब्सिडी योजना के तहत छूट की राशि भी प्रदाय की गई, जो कि सीधे हितग्राहियों के खाते में हस्तांतरित कर दी गई। इनमें ग्राम बिरझुली के टीकाराम, दर्रा के थलेन्द्र कुमार साहू, मड़ेली के कमलेश साहू, सेहराडबरी के केशव साहू, भठेली की श्रीमती डामेश्वरी साहू, भेण्डरवानी के शत्रुघन साहू और ग्राम मुड़केरा के कृपाराम ध्रुव शामिल हैं। इस मौके पर संचालक समाज कल्याण पी.दयानंद और संचालक महिला एवं बाल विकास विभाग सुश्री दिव्या मिश्रा उपस्थित रहे।
सेहत /शौर्यपथ / रक्तचाप बढ़ने के डर से एकदम फीका खाना खाते हैं? अगर हां तो संभल जाइए। नमक के सेवन में जरूरत से ज्यादा कटौती संक्रामक रोगों का सबब बन सकती है। लंदन स्थित रॉयल फ्री हॉस्पिटल का हालिया अध्ययन तो कुछ यही बयां करता है।
शोधकर्ताओं के मुताबिक नमक की अति की तरह ही, इसकी कमी भी बुरी है। दरअसल, लंबे समय तक कम मात्रा में नमक खाने से शरीर में ‘इंटरल्यूकिन-17’ का उत्पादन ठप पड़ जाता है।
‘इंटरल्यूकिन-17’ एक तरह की श्वेत रक्त कोशिका है, जो विषाणुओं को पहचानने और उन्हें नष्ट करने में प्रतिरोधक तंत्र की मदद करती है। इसकी कमी से इनसान संक्रामक रोगों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाता है।
किडनी रोगियों के लिए घातक-
-अध्ययन दल में शामिल प्रोफेसर जैक पमबेरटॉन-व्हिटली की मानें तो किडनी रोगियों को चिकित्सकीय सलाह के बगैर खाने में नमक की मात्रा नहीं घटानी चाहिए। खासकर ‘जिटेलमैन सिंड्रोम’ और ‘बार्टर सिंड्रोम’ से जूझ रहे मरीजों को। दरअसल, इन दोनों ही बीमारियों में किडनी से सोडियम छनने की प्रक्रिया तेज हो जाती है। यही वजह है कि इनकी जद में आए मरीजों को बार-बार फंगल और मूत्र संक्रमण से जूझना पड़ता है।
डायबिटीज के मरीज भी रहें सतर्क-
व्हिटली ने बताया कि डायबिटीज रोगी या फिर थायरॉयड और डिप्रेशन के इलाज में कारगर दवाएं खाने वाले मरीजों को बार-बार पेशाब लगने की शिकायत सता सकती है। इससे उनके शरीर में सोडियम का स्तर घटने का जोखिम रहता है। सोडियम की कमी चक्कर, कमजोरी, सुस्ती, थकान और भ्रम की शिकायत को जन्म दे सकती है। अध्ययन के नतीजे ‘जर्नल नेचर कम्युनिकेशन्स’ के हालिया अंक में प्रकाशित किए गए हैं।
शरीर को कितनी जरूरत-
-स्वस्थ वयस्कों को रोजाना 2300 मिलीग्राम अधिकतम सोडियम का सेवन करना चाहिए
-अमेरिकी सीडीसी के मुताबिक 3400 मिलीग्राम से ज्यादा सोडियम खा रहे औसत वयस्क
ये तीन खतरे भी मौजूद-
1.सोडियम की मात्रा में अत्यधिक कमी इंसुलिन के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित होने का सबब बन सकती है, जिससे ब्लड शुगर बढ़ने लगता है।
2.शरीर के विभिन्न अंगों में खून की आपूर्ति करने के लिए हृदय को सोडियम की जरूरत पड़ती है, इसकी कमी से हार्ट फेल होने का खतरा रहता है।
3.विभिन्न अध्ययनों में देखा गया है कि सोडियम का स्तर घटने से बैड कोलेस्ट्रॉल और ट्राईग्लिसराइड का स्तर बढ़ता है, जो दिल के लिए घातक है।
शौर्यपथ / विटामिन बी 12 की कमी सबसे आम पोषण संबंधी कमियों में से एक है। इस स्थिति के दो मुख्य कारण हैं वे प्रथाएं जिन्हें अक्सर स्वास्थ्य में सुधार के लिए अपनाया जाता है, एक स्ट्रिक्ट वेजिटेरियन डाइट और दूसरा वेट लॉस सर्जरी
रक्त में विटामिन बी 12 की कमी के लक्षणों की एक विस्तृत विविधता है। जबकि विटामिन बी 12 कई शारीरिक कार्यों के लिए एक शक्तिशाली औषधि है। निराशा की बात यह है कि विटामिन बी 12 की कमी के चलते लोग तनाव, या बहुत व्यस्त होने के लक्षणों को महसूस करते हैं।
हमने आपके लिए विटामिन बी 12 की कमी के लिए 5 मुख्य लक्षणों की एक लिस्ट बनाई है। जिससे कि आप अपने रक्त में विटामिन बी 12 की कमी के बारे में जान सकें, और यह तय कर सकें कि क्या आपको अधिक विटामिन की जरूरत है।
जानें क्या है विटामिन बी 12 की कमी के संकेत और लक्षण
कमजोरी, प्रकाशहीनता, थकान
क्लीवलैंड क्लिनिक वेलनेस इंस्टीट्यूट में वेलनेस के निदेशक, माइकल रोइज़ेन के अनुसार कमजोरी और थकावट लो लेवल पर विटामिन बी 12 के स्तर के सबसे सामान्य लक्षणों में से एक है।
जब आपकी विटामिन की आपूर्ति कम हो जाती है, तो आपका शरीर कम लाल रक्त कोशिकाओं का उत्पादन करता है, जो ऑक्सीजन के प्रसार के लिए आवश्यक होते हैं। विटामिन की कमी के परिणाम स्वरूप आप नींद, थका हुआ और यहां तक कि चक्कर महसूस करती हैं।
सांस लेने में तकलीफ
व्यायाम करते समय सांस की तकलीफ होना, विटामिन बी 12 की कमी के शारीरिक संकेतों में से एक है। विटामिन बी 12 हीमोग्लोबिन के उत्पादन में योगदान देता है। साथ ही प्रोटीन रक्तप्रवाह में ऑक्सीजन का परिवहन करता है। विटामिन की कमी से ऊतकों (tissues) में ऑक्सीजन का प्रवाह कम हो सकता है, जो एनीमिया, सांस की तकलीफ और कमजोरी जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है।
पेट में कब्ज, गैस होना
ऐसे कई कारण हैं जो पाचन संबंधी समस्याओं का कारण बन सकते हैं, जैसे कि कब्ज या गैस, और उनमें से एक विटामिन बी 12 की कमी भी है। अगर इसे नजरअंदाज कर दिया जाए, तो विटामिन बी 12 की कमी से पुरानी कब्ज, पेट खराब, गैस, दस्त और भूख में कमी जैसी समस्याएं हो सकती है।
कम विटामिन का स्तर जठरांत्र संबंधी मार्ग के सामान्य कार्य को प्रभावित करता है। विटामिन बी 12 के सामान्य स्तर को बहाल करने और कब्ज को राहत देने के लिए, आप विटामिन बी 12 के पूरक ले सकती हैं। साथ ही आप विटामिन बी 12 इंजेक्शन भी ले सकते हैं।
पीलिया की समस्या
विटामिन बी 12 की कमी का एक और शारीरिक संकेत है पीलिया , जिससे कि आपकी त्वचा और आंखों का रंग पीला या सफेद हो जाता है। लाल रक्त कोशिका का उत्पादन विटामिन बी 12 पर निर्भर करता है। साथ ही लाल रक्त कोशिका का उत्पादन पर्याप्त मात्रा में न होने से एनीमिया की समस्या हो सकती है। जिसके चलते आपकी स्किन रूखी और बेजान पीली सी दिखने लगती है।
जीभ का सूजना या लाल होना
यदि आप शाकाहारी हैं, तो पाचन तंत्र के कुछ रोग और अल्कोहल के सेवन से आपको विटामिन बी 12 की कमी होने का अधिक जोखिम है। रक्त में विटामिन बी12 की कमी होने पर आपकी जीभ चिकनी और लाल हो जाती है। क्योंकि आपके शरीर में पर्याप्त मात्रा में विटामिन भी न होने के कारण डीएनए संश्लेषण बिगड़ जाता है।
इसके परिणामस्वरूप मुंह में उपकला कोशिकाएं तेजी से विभाजित होने लगती हैं, जिससे ग्लोसाइटिस , एंगुलर चेइलिटिस , रिकरंट ओरल अल्सर और ओरल कैंडीडायसिस जैसी समस्याएं होती हैं।
यदि आप इन लक्षणों में से किसी को भी नोटिस करती हैं, तो अपने खाने की आदतों को बदलने की कोशिश करें। अपनी डाइट में अधिक पशु उत्पाद, जैसे मांस, चिकन, क्लेम , ओयस्टर , अंडे, या बी 12 से भरपूर अनाज को शामिल करें।
सेहत /शौर्यपथ / सर्दी में धूप सेंकने का अलग ही मजा है। धूप सेंकने से शरीर को आराम ही नहीं मिलता बल्कि इससे शरीर के अंग मजबूत भी बनते हैं। आप चाहे कितनी भी विटामिन डी की गोलियां खा लें या फिर खुद को गर्म रखने के लिए हीटर का इस्तेमाल कर लें लेकिन धूप सेंकने के गजब फायदे हैं। आइए, जानते हैं धूप सेंकने के फायदों के बारे में-
हड्डी होती है मजबूत
विटामिन डी शरीर में हड्डी की मजबूती के लिए अहम है। इस विटामिन का जरूरी नेचरल सोर्स सूर्य की रोशनी ही है। शरीर में उचित मात्रा में विटामिन डी मौजूद होने पर ही शरीर कैल्शियम का अवशोषण कर पाता है।
सनबाथ करने शरीर रहता है गर्म
अग्नि (ऊष्मा) का मुख्य सोर्स होने के कारण सूर्य की रोशनी ठंड से सिकुड़े शरीर को गर्माहट देती है, जिससे शरीर के भीतर की ठंडक और पित्त की कमी दूर होती है। आयुर्वेद में सनबाथ को 'आतप सेवन' नाम से जाना जाता है।
इम्यूनिटी बढ़ती है
सूरज की रोशनी में ऐसे चमत्कारी गुण होते हैं, जिनके कारण शरीर पर विभिन्न प्रकार के इन्फेक्शंस के असर की आशंका कम हो जाती है। इससे शरीर की इम्यूनिटी मजबूत होती है।
कैंसर से बचाव
सूरज की किरणों से शरीर को कैंसर से लड़ने वाले तत्व मिलते हैं। इससे कैंसर का खतरा टलता है, तो जिन्हें कैंसर है उन्हें भी लाभ होता है।
पॉजिटिव हॉर्मोन बनते हैं
आपको अच्छा महसूस कराने वाले हॉर्मोन सेरेटॉनिन और एंडोर्फिन का धूप के असर से शरीर में पर्याप्त स्राव होता है, जो डिप्रेशन, सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर, साइकॉलजिकल-इमोशनल हेल्थ और बॉडी क्लॉक-रिद्म के संतुलन में फायदेमंद है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
