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June 01, 2026
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धर्म संसार / शौर्यपथ / भगवान श्रीकृष्ण की आठ पत्नियां और कई प्रेमिकाएं थीं। आठ पत्नियों के नाम इस प्रकार हैं- रुक्मणि, जाम्बवन्ती, सत्यभामा, कालिन्दी, मित्रबिन्दा, सत्या, भद्रा और लक्ष्मणा। रुक्मिणी, जाम्बवन्ती, सत्यभामा, कालिन्दी, मित्रबिन्दा के बारे में तो हम बता चुके हैं भद्रा, सत्या और लक्ष्मणा के बारे में बहुत कम ही लिखा गया है। इन्हीं में से एक जानिए लक्ष्मणा के बारे में 5 खास बातें।
1. मद्र देश की राजकुमारी लक्ष्मणा भी कृष्ण को चाहती थी, लेकिन परिवार कृष्ण से विवाह के लिए राजी नहीं। लक्ष्मणा के पिता का नाम वृहत्सेना था।
2. श्रीमद्भागवत महापुराण के अनुसार श्रीकृष्ण को जब यह पता चला की लक्ष्मणा उनसे प्रेम करती हैं तो वे अकेले ही लक्ष्मणा का हरण करके ले आए थे। जैसे गरुड़ ने स्वर्ग से अमृत का हरण किया था, वैसे ही भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयंवर में अकेले ही उसे हर लिया था।
3. यह भी कहा जाता है कि लक्ष्मणा के पिता ने स्वयंवर प्रतियोगिता का आयोजन किया था जिसमें पानी में मछली की परछाई देखकर मछली पर निशाना लगाएगा था। भगवान कृष्ण ने पानी में मछली की परछाई देखकर निशाना लगाया और स्वयंवर में विजयी हुए तब लक्ष्मणा और कृष्ण का विवाह किया गया।
4. यह भी कहा जाता है कि भगवन कृष्णा ने जरासंध, दुर्योधन और अर्जुन सहित कई सारे योद्धाओं को धनुष प्रतियोगिता में हराकर लक्ष्मण को हासिल किया था। बाद में लक्ष्मणा ने द्रौपदी को बताया था कि मेरे स्वयंवर कितना रोचक हुआ था। क्योंकि द्रौपदी का स्वयंवर भी कुछ इसी तरह से हुआ था।
5. लक्ष्मणा-कृष्ण के पुत्र: प्रघोष, गात्रवान, सिंह, बल, प्रबल, ऊर्ध्वग, महाशक्ति, सह, ओज और अपराजित।

राजनांदगांव / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राजधानी रायपुर में आयोजित समारोह में डोंगरगांव विकासखंड के ग्राम कोनारी की संध्या महिला स्वसहायता समूह की श्रीमती दुलेश्वरी देवांगन को उत्कृष्ट ई-रिक्शा परिचालन कार्य हेतु सम्मानित किया। श्रीमती दुलेश्वरी देवांगन ने मुख्यमंत्री से आईबीसी न्यूज चैनल द्वारा आयोजित कार्यक्रम में ई-रिक्शा परिचालन गतिविधि संबंधी अपने अनुभव साझा किया। श्रीमती दुलेश्वरी देवांगन सितम्बर २०१६ से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) योजना अंतर्गत स्वसहायता समूह से जुड़ी हुई हैं तथा मार्च २०१९ में एनआरएलएम योजना तथा श्रम विभाग के वित्तीय सहयोग से उन्होंने ई-रिक्शा क्रय कर इसे चलाने का कार्य आरंभ किया था। श्रम विभाग से १ लाख की सब्सिडी तथा ५० हजार रूपए का मुद्रा लोन इन्हें प्राप्त हुआ है। श्रीमती दुलेश्वरी देवांगन को प्रतिमाह लगभग १० हजार रूपए की शुध्द आमदनी हो रही है। इनका ड्राईविंग लाईसेंस भी बन चुका है। सम्मान समारोह कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के साथ अन्य केबिनेट मंत्री भी उपस्थित रहे।

राजनांदगांव / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड, राजनांदगांव क्षेत्र द्वारा जिले के ग्रामीण अंचलों में समुचित वोल्टेज पर निर्बाध व गुणावत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विद्यमान उपकेन्द्रों में स्थापित पॉवर ट्रांसफार्मरों की क्षमता में वृद्धि का कार्य सर्वोच्च प्राथमिकता से किया जा रहा है। इस दिशा में छुरिया उपसंभाग के अंतर्गत ग्राम सड़क चिरचारी में विद्यमान उपकेन्द्र में ३.१५ एमव्हीए का अतिरिक्त पॉवर ट्रांसफार्मर को ऊर्जीकृत किया गया। इस प्रकार सड़क चिरचारी उपकेन्द्र की क्षमता ५ एमव्हीए से बढ़कर ८.१५ एव्हीए हो गया है। इस नये पॉवर ट्रांसफार्मर के लग जाने से लगभग ३९ ग्रामों में विद्युत संबंधी समस्याओं का निराकरण हो गया है। विद्युत विकास के लिए स्वीकृत इस कार्य से सड़क चिरचारी उपकेन्द्र के परिधि में आने वाले अनेक गांवों के किसानों तथा उपभोक्ताओं को इसका लाभ मिलेगा।
इस कार्य को सफलतापूर्वक किये जाने पर मुख्य अभियंता टीके मेश्राम एवं अधीक्षण अभियंता तरूण कुमार ठाकुर ने सहायक अभियंता एमके साहू, केके श्रीवास, और उनकी टीम को शुभकामनाएं प्रेषित की है। छुरिया उपसंभाग के सहायक अभियंता कुंजेश कुमार श्रीवास ने बताया कि सड़क चिरचारी उपकेन्द्र में स्थापित नवीन अतरिक्त पॉवर ट्रांसफार्मर के ऊर्जीकरण से लगभग ६५०० उपभोक्ताओं को उच्चगुणवत्ता की विद्युत सेवा का लाभ मिलेगा।

राजनांदगांव / शौर्यपथ / डोंगरगढ़ स्थित सेंट विसेंट पेलोटी इंटरनेशनल स्कूल वर्चुअल वार्षिक समारोह संपन्न हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर एफआर कोसरिया, को-आर्डिनेटर श्री सहारे, विशेष अतिथि आर.एस. जॉन प्रिंसिपल, विक्टर थॉमस, ब्रांच मैनेजर सहारा ग्रुप सहित स्कूल के प्रिंसिपल फादर मुक्ति प्रकाश एवं फादर हबिल झागा उपस्थित थे। कार्यक्रम की शुरूआत स्कूल के शिक्षक एवं बच्चों के द्वारा वेलकम गीत के किया गया। गत वर्ष २०१९-२० के मेरिटोरियस बच्चों के ई-प्रमाण पत्र देकर सम्मान किया गया। एनुअल डे के अवसर पर बच्चों के द्वारा ऑनलाइन के द्वारा मनमोहक डांस एवं गीत प्रस्तुत किया। मुख्य अतिथि ने कहा कि सर्वसुविधायुक्त पलोटी स्कूल शहर का एकमात्र स्कूल है और यहां के विद्यार्थी व्यवहार एवं मेरिट में स्थान पाने वाले विद्यार्थी के नाम से जाने जाते है। मैनेजर और प्रिंसिपल ने कहा कि बेस्ट एजुकेशन देना ही हमारा लक्ष्य है और स्कूल इस कार्य को गति देने मे कोई कसर नहीं छोड़ेगा।

धमतरी / शौर्यपथ / राज्यपाल एवं इंडियन रेडक्राॅस सोसायटी छत्तीसगढ़ की अध्यक्ष सुश्री अनुसुईया उइके ने राजभवन के दरबार हाॅल में आयोजित इंडियन रेडक्राॅस सोसायटी राज्यपाल सम्मान समारोह में धमतरी जिले को कोविड-19 में उत्कृष्ट कार्य के लिए द्वितीय पुरस्कार से सम्मानित किया। उक्त पुरस्कार कलेक्टर जयप्रकाश मौर्य की ओर से डिप्टी कलेक्टर डीसी बंजारे ने रविवार 20 दिसम्बर को प्राप्त किया। सम्मान के तौर प्रशस्ति पत्र, प्रतीक चिन्ह एवं 37500 रूपये से सम्मानित किया गया। इसके अलावा जिले के छह वालंटियर्स को उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया है। इस अवसर पर राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि रेडक्राॅस सोसायटी ने पूरे विश्व में प्राकृतिक आपदाओं तथा युद्ध जैसी आपातकालीन परिस्थितियों में निस्वार्थ भावना से सेवा कर मानवता का अतुलनीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। स्वास्थ्य सुविधाओं सहित अन्य प्रकार की मानवसेवा से संबंधित कार्यों के लिए रेडक्राॅस सोसायटी हमेशा से प्रतिबद्ध रही है।
उल्लेखनीय है कि विगत कुछ वर्षांे से जिले में रेडक्राॅस सोसायटी उत्कृष्ट कार्य कर रही है। वर्तमान में जिले में 20 काउंसलर एवं सभी शासकीय एवं अशासकीय स्कूलों, महाविद्यालयों में लगभग 14 हजार रेडक्राॅस वालेंटियर्स पंजीकृत हैं जो सदैव ही जिले के लिए सहयोग के लिए तत्पर रहते हैं। इसी तारतम्य में वर्ष 2020 में वैश्विक आपदा कोविड-19 के संक्रमण के दौरान जिला रेडक्राॅस सोसायटी एवं सभी वालेंटियर्स और कांउसलर द्वारा इस विषम परिस्थितियों में निस्वार्थ भाव से जनहित में अनेक कार्य एवं गतिविधियां संचालित की गईं। उक्त सम्मान के लिए कलेक्टर मौर्य ने जिला रेडक्राॅस सोसायटी एवं सम्मानित हुए सभी वालेटियर्स को बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। रेडक्राॅस के जिला संगठक डाॅ. शैलेन्द्र गुप्ता ने बताया कि जिले में जल्द ही कार्यसमिति एवं सभी काउंसलर्स की कार्यशाला आयोजित कर वर्ष भर की रूपरेखा एवं वार्षिक कार्ययोजना कलेक्टर के निर्देशानुसार तैयार की जाएगी।

शौर्यपथ /सर्दियों में हमें अपने खानपान का खास ख्याल रखना जरूरी है। लेकिन कुछ ऐसे फायदेमंद फूड्स हैं जिनका सर्दियों में सेवन नुकसानदेह हो सकता है। ऐसा ही एक फूड है विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट का भंडार आंवला। आंवले के फायदों को तो हम सभी जानते हैं, लेकिन वैज्ञानिकों ने पाया है कि सर्दियों में आंवले का अधिक सेवन हमारे स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
गुणों का भंडार आंवला सीमित मात्रा में ही फायदा करता है
इम्यूनिटी बनाए रखने के लिए जरूरी विटामिन सी का खजाना है आंवला। इसके अलावा इसमें विटामिन ए, विटामिन बी कॉम्लेक्स, कैल्शियम, पोटेशियम, मैग्नीशियम, आयरन, फाइबर और डाययूरेटिक एसिड भी पाया जाता है। जर्नल 'आयु' के अनुसार इसमें मौजूद एंटी ऑक्सीाडेंट फ्री रेडिकल्स को खत्म करने का काम करते हैं। आपके बाल, त्वचा, आंखें और ब्लड शुगर लेवल सभी के लिए आंवले का सेवन बहुत फायदेमंद होता है।
लेकिन अगर आप सर्दी में इसका अधिक सेवन करती हैं तो इसके फायदों से ज्यादा नुकसान हो सकते हैं।
ये हैं सर्दियों में आंवले के अधिक सेवन के नुकसान
1. सर्दी जुखाम बढ़ा सकता है आंवला
अगर आपको सर्दी जुखाम है या अक्सर रहता है, तो सर्दियों में आंवले के सेवन से बचें। आंवले का खट्टापन गले के लिए नुकसानदेह हो सकता है और खांसी, खराश जैसी समस्याओं को बढ़ा सकता है। इसलिये अगर आपको फ्लू की समस्या है, तो आंवले का सेवन न करें।
2. तासीर में ठंडा होता है आंवला
आंवले की तासीर ठंडी होती है यानी ये शरीर को ठंडक पहुंचाता है। यही कारण है कि सर्दियों में इसके अधिक सेवन के लिए मना किया जाता है। अगर आप नियमित कच्चा आंवला खाती हैं या जूस पीती हैं तो इसके साथ काली मिर्च लें। ये ठंडक को खत्म करेगी और गले मे समस्या भी नहीं होगी।
3. डायरिया भी हो सकता है आंवला का एक साइड इफेक्ट
अगर आप अत्यधिक आंवला खाती हैं, तो डायरिया की समस्या भी हो सकती है। जैसा कि आप जानती ही हैं, आंवले में फाइबर भरपूर मात्रा में होता है। ऐसे में अगर आप ज्यादा फाइबर का सेवन कर लेती हैं तो डायरिया और अन्य पेट सम्बंधी समस्याओं की संभावना बढ़ जाती हैं।
4. एसिडिटी के लिए भी है जिम्मेदार
अधिक आंवला खाना आपके पाचन को प्रभावित कर सकता है। आंवला का अधिक सेवन एसिडिटी का कारण बन सकता है क्योंकि आंवला भी एसिडिक होता है। खट्टेपन के कारण आंवला एसिडिटी को ट्रिगर कर सकता है। इसलिए अत्यधिक आंवला खाने से बचें।
तो लेडीज, भले ही आंवला रोज खाना एक अच्छी आदत है, लेकिन सर्दियों में इसके अधिक सेवन से बचें।

धर्म संसार / शौर्यपथ / गीता केवल एक धर्म ग्रंथ ही नहीं, बल्कि यह एक जीवन ग्रंथ भी है, जो हमें पुरुषार्थ की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा देती है। शायद इसी कारण से हजारों साल बाद आज भी यह हमारे बीच प्रासंगिक है। मान्यता है कि द्वापर युग में त्रियोग के प्रवर्तक श्रीकृष्ण ने मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष एकादशी के दिन कुरुक्षेत्र में अर्जुन को गीता ज्ञान दिया था, जो मोक्षदायक है। इसी कारण इस एकादशी का एक प्रचलित नाम मोक्षदा एकादशी भी है।
यह दिन ‘गीता जयंती’ के रूप में भी प्रचलित है। धर्मज्ञों की राय में धार्मिक व आध्यात्मिक सिद्धांतों का प्रतिपादन ही गीता का मूल उद्देश्य है।
कर्म और धर्म के महाकोष गीता में कुल 18 अध्याय और 700 श्लोक हैं। गीता त्रियोग, रजोगुण संपन्न ब्रह्मा से भक्ति योग, सतोगुण संपन्न विष्णु से कर्म योग और तमोगुण संपन्न शंकर से ज्ञान योग का ऐसा प्रकाश है, जिसकी आभा हर एक जीवात्मा को प्रकाशमान करती है। महाभारत अर्थात् ‘जय संहिता’ के 18 पर्व में भीष्म पर्व का अभिन्न अंग गीता है, जिसमें त्रियोग का सुंदर समन्वय
मिलता है।
गीता की गणना उपनिषदों में की जाती है। इस कारण इसे ‘गीतोपनिषद्’ भी कहा गया है, जो जीने की कला का महान ग्रंथ है। कहा जाता है कि सनातन धर्म की स्थापना और अधर्म के विनाश से संबद्ध गीता का प्रथम ज्ञान जगत के अलौकिक तेज से सूर्य देव को प्राप्त हुआ। उन्होंने पहले वैवस्वत मनु को, और उसके उपरांत मनु ने राजा इक्ष्वाकु को यह ज्ञान प्रदान किया, जिसे श्रीकृष्ण ने अर्जुन को सविस्तार बताया। इसके साथ ही धृतराष्ट्र और उनके प्रिय संजय ने भी इसका प्रत्यक्ष श्रवण किया।
धर्म के विभिन्न मार्गों का समन्वय और निष्काम कर्म- ये गीता की दो प्रमुख विशेषताएं हैं। महाभारत में वेदव्यास जी गीता के बारे में कहते हैं कि गीता सुगीता करने योग्य है, जो स्वयं पद्मनाभ भगवान विष्णु के मुखार्रंवद से निकली हुई है। भारतीय नदियों में गंगा, पशुधन में गऊ, तीर्थों में गया, देवियों में गायत्री और धार्मिक ग्रंथों में गीता का अति विशेष मान है और ये पांचों ‘ग’कार हैं, जो मोक्षदायक और परम पवित्र भी है। कई अर्थों में गीता भारत और भारतीयता का जीवंत प्रकाश स्तम्भ है, जिसमें भूत, भविष्य और वर्तमान तीनों सन्निहित हैं। गीता का पठन-पाठन, मननर्-ंचतन व श्रवण हमें ज्ञानवान बनाता है। इसके हर एक श्लोक में जीवन पथ से संबंधित कोई-न-कोई तार अवश्य जुड़े हैं। जीवनशैली के मर्म का जैसा वर्णन इसमें हुआ है, वैसा कहीं और नहीं मिलता।

धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।

क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

सेहत / शौर्यपथ / लोग वजन कम करने के लिए क्या कुछ नहीं करते। कभी जिम जाते हैं तो कभी डाइटिंग फॉलो करने लगते हैं। ऐसा करने से सभी का वजन कम हो जाता हो, यह जरूरी नहीं है लेकिन फिर भी कुछ चीजें ऐसी हैं, जिनके नियमित रूप से सेवन करने से आपका वजन कम हो जाता है। मूंग दाल वजन कम करने के लिए एक ऐसा ही खाद्य पदार्थ माना जाता है। मूंग दाल में काफी मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है। साथ ही इसमें फैट नहीं होता इसलिए यह काफी असरदायक है।
इन तरीको से डाइट में शामिल करें मूंग दाल
दिन की शुरुआत गुनगुने पानी से करें। कम से कम दो गिलास पानी को धीरे धीरे घूंट लेकर पिएं। इससे बॉडी का टॉक्सिन निकलता है और शरीर हाइड्रेटेड बना रहता है। फिर एक घंटे के बाद योग, वॉक या प्राणायाम करें। मूंग दाल का सूप बनाएं। इसे दिन में 6 बार पिएं। इसको बनाने के लिये मूंग दाल में लहसुन, अदरक, नमक, हींग, जीरा, सौंफ, धनिया, हरी र्मिच को उबालें। इस सूप में किसी भी चीज का तड़का न लगाएं। इस डाइट प्रोग्राम को अलगे तीन दिन तक फॉलो करें।
इन चीजों से करें परहेज
मूंग दाल डाइट पर हैं, तो उस दौरान खट्‌टी चीजें जैसे टमाटर, नींबू, दही आदि का प्रयोग न करें। यहां तक कि तेल या घी भी न मिलाएं, वरना आपको फायदा नहीं पहुंचेगा।
मूंग दाल के साथ सब्जियां लेना न भूलें
मूंग के सूप के साथ सब्जिसयों का भी सेवन करें। सब्जिनयों को उबालकर या फिर भाप में पका कर सलाद के रूप में लिया जा सकता है। सलाद के लिए गाजर, खीरा, चुकंदर, मूली, शलगम, लौकी, तोरई, ककड़ी, गोभी, प्याज, कद्दू ले सकते हैं।
आमतौर पर इन तरीकों से मूंग की दाल खाने से 20 दिनों में 5 किलो तक वजन कम किया जा सकता है।

सेहत / शौर्यपथ / किसी भी महिला से पूछें कि पीरियड्स के बारे में उन्हें सबसे नापसंद क्या है, और सभी का जवाब होगा पीरियड्स क्रैम्प्स और मूड स्विंग। स्वाभाविक सी बात है, तीन से पांच दिन हर महीने हमें एब्डोमेन में बेहद दर्द सहना ही पड़ता है। और उसे और बदतर बनाते हैं मूड स्विंग। पर इन दोनों से निपटने में ये खास चाय आपकी मदद कर सकती हैं।
हम हमेशा ही पीरियड्स क्रैम्प्स से राहत पाने की नई नई तरकीब खोजा करते हैं। कभी हॉट वॉटर बैग, कभी टाइगर बाम तो कभी कोल्ड कंप्रेस। हर नुस्खा हर महिला के लिए काम करे जरूरी नहीं, लेकिन एक चीज है जो सबके लिए कारगर है- चाय। यहां हम दूध वाली मसाला चाय की बात नहीं कर रहे हैं, बल्कि इन खास हर्बल चाय की बात कर रहे हैं। ये हमारे शरीर पर अंदर से असर करती हैं और यही कारण है ये सभी के लिए कारगर साबित होती हैं।
तो हम आपको बताते हैं 5 हर्बल चाय जो आपको पीरियड्स के क्रैम्प और पीएमएस से राहत देती हैं।
1. अदरक की चाय
अदरक के एन्टी इन्फ्लामेट्री गुण उसे पीरियड्स के दर्द को दूर करने में कारगर बनाते हैं। यही नहीं कई रिसर्च में पाया गया है कि अदरक के सेवन से प्रोस्टाग्लैंडीन में कमी आती है। प्रोस्टाग्लैंडीन ही पीएमएस के लक्षणों जैसे क्रेम्प्स, सिर दर्द और मूड स्विंग के लिए जिम्मेदार है।
2. पेपरमिंट टी
पेपरमिंट अपनी मांसपेशियों को आराम देने वाले प्रभाव के कारण पीरियड्स क्रैम्प के लिए बेहतरीन हर्बल चाय है। पबमेड सेंट्रल में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि पीरियड के दर्द पर पेपरमिंट के सेवन से दर्द की गंभीरता कम होती है और मासिक धर्म से संबंधित लक्षणों को सुधारने में मदद मिलती है।
पेपरमिंट को पीरियड्स के दर्द के इलाज के लिए सलाह दी जाती है क्योंकि इसमें दवाओं की तुलना में कम दुष्प्रभाव होते हैं।
3. मेथी की चाय
मेथी पीरियड्स में होने वाली ऐंठन के लिए एक हर्बल चाय है, जो पीएमएस के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकती है। कई अध्ययन बताते हैं कि मेथी दर्द के साथ-साथ चिड़चिड़ापन कम करने में भी मदद कर सकती है। मेथी के बीज में फाइटोएस्ट्रोजेन होते हैं, जो एस्ट्रोजन को संतुलित करने में मदद करते हैं, जिससे यह महिला हार्मोन को संतुलित करने के लिए एक उत्कृष्ट जड़ी बूटी है।
4. दालचीनी की चाय
दालचीनी पीरियड के दर्द और ऐंठन को कम करने में मदद कर सकती है। पीरियड के दर्द से राहत पाने में दालचीनी की चाय का प्रभाव अद्भुत है। जर्नल ऑफ बायोटेकनिकल रिसर्च में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि दालचीनी पीएमएस के लक्षणों की गंभीरता को कम कर सकती है।
प्रतिभागियों ने अपने मेंस्ट्रुअल सायकिल के पहले तीन दिनों के दौरान लगातार दो सायकिल के लिए 1000 मिलीग्राम दालचीनी का सेवन किया। तीसरे सायकिल तक महिलाओं में लक्षण काफी कम हो गए थे। यह मासिक धर्म की ऐंठन के लिए दालचीनी को एक बेहतरीन हर्बल चाय बनाता है।
5. सौंफ की चाय
सौंफ में भी एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो इसे एक बेहतरीन पेन किलर (Pain killer) बनाते हैं। सौंफ की चाय पीने से आपको पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द को कम करने में मदद मिलती है। बहुत सी महिलाओं को अनियमित पीरियड्स की समस्या होती है और सौंफ की चाय अनियमित पीरियड साइकिल से भी निपटने में सहायक होती है।
तो लेडीज, अब आप जानती हैं अपने पीरियड्स क्रैम्प्स से कैसे बचना है।

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