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सेहत / शौर्यपथ / किसी भी महिला से पूछें कि पीरियड्स के बारे में उन्हें सबसे नापसंद क्या है, और सभी का जवाब होगा पीरियड्स क्रैम्प्स और मूड स्विंग। स्वाभाविक सी बात है, तीन से पांच दिन हर महीने हमें एब्डोमेन में बेहद दर्द सहना ही पड़ता है। और उसे और बदतर बनाते हैं मूड स्विंग। पर इन दोनों से निपटने में ये खास चाय आपकी मदद कर सकती हैं।
हम हमेशा ही पीरियड्स क्रैम्प्स से राहत पाने की नई नई तरकीब खोजा करते हैं। कभी हॉट वॉटर बैग, कभी टाइगर बाम तो कभी कोल्ड कंप्रेस। हर नुस्खा हर महिला के लिए काम करे जरूरी नहीं, लेकिन एक चीज है जो सबके लिए कारगर है- चाय। यहां हम दूध वाली मसाला चाय की बात नहीं कर रहे हैं, बल्कि इन खास हर्बल चाय की बात कर रहे हैं। ये हमारे शरीर पर अंदर से असर करती हैं और यही कारण है ये सभी के लिए कारगर साबित होती हैं।
तो हम आपको बताते हैं 5 हर्बल चाय जो आपको पीरियड्स के क्रैम्प और पीएमएस से राहत देती हैं।
1. अदरक की चाय
अदरक के एन्टी इन्फ्लामेट्री गुण उसे पीरियड्स के दर्द को दूर करने में कारगर बनाते हैं। यही नहीं कई रिसर्च में पाया गया है कि अदरक के सेवन से प्रोस्टाग्लैंडीन में कमी आती है। प्रोस्टाग्लैंडीन ही पीएमएस के लक्षणों जैसे क्रेम्प्स, सिर दर्द और मूड स्विंग के लिए जिम्मेदार है।
2. पेपरमिंट टी
पेपरमिंट अपनी मांसपेशियों को आराम देने वाले प्रभाव के कारण पीरियड्स क्रैम्प के लिए बेहतरीन हर्बल चाय है। पबमेड सेंट्रल में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि पीरियड के दर्द पर पेपरमिंट के सेवन से दर्द की गंभीरता कम होती है और मासिक धर्म से संबंधित लक्षणों को सुधारने में मदद मिलती है।
पेपरमिंट को पीरियड्स के दर्द के इलाज के लिए सलाह दी जाती है क्योंकि इसमें दवाओं की तुलना में कम दुष्प्रभाव होते हैं।
3. मेथी की चाय
मेथी पीरियड्स में होने वाली ऐंठन के लिए एक हर्बल चाय है, जो पीएमएस के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकती है। कई अध्ययन बताते हैं कि मेथी दर्द के साथ-साथ चिड़चिड़ापन कम करने में भी मदद कर सकती है। मेथी के बीज में फाइटोएस्ट्रोजेन होते हैं, जो एस्ट्रोजन को संतुलित करने में मदद करते हैं, जिससे यह महिला हार्मोन को संतुलित करने के लिए एक उत्कृष्ट जड़ी बूटी है।
4. दालचीनी की चाय
दालचीनी पीरियड के दर्द और ऐंठन को कम करने में मदद कर सकती है। पीरियड के दर्द से राहत पाने में दालचीनी की चाय का प्रभाव अद्भुत है। जर्नल ऑफ बायोटेकनिकल रिसर्च में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि दालचीनी पीएमएस के लक्षणों की गंभीरता को कम कर सकती है।
प्रतिभागियों ने अपने मेंस्ट्रुअल सायकिल के पहले तीन दिनों के दौरान लगातार दो सायकिल के लिए 1000 मिलीग्राम दालचीनी का सेवन किया। तीसरे सायकिल तक महिलाओं में लक्षण काफी कम हो गए थे। यह मासिक धर्म की ऐंठन के लिए दालचीनी को एक बेहतरीन हर्बल चाय बनाता है।
5. सौंफ की चाय
सौंफ में भी एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो इसे एक बेहतरीन पेन किलर (Pain killer) बनाते हैं। सौंफ की चाय पीने से आपको पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द को कम करने में मदद मिलती है। बहुत सी महिलाओं को अनियमित पीरियड्स की समस्या होती है और सौंफ की चाय अनियमित पीरियड साइकिल से भी निपटने में सहायक होती है।
तो लेडीज, अब आप जानती हैं अपने पीरियड्स क्रैम्प्स से कैसे बचना है।
डीपीएस रिसाली स्कूल में आयोजित इंडक्शन प्रोग्राम में शिक्षकों को विशेषज्ञों ने साझा किये अपने अनुभव
दुर्गं / शौर्यपथ / हिंदी मीडियम से इंग्लिश मीडियम स्कूलों में आने पर किस तरह से परिवर्तन किये जाने चाहिए ताकि बच्चे नये बदलावों में सहज महसूस कर सकें और इस माध्यम में भी शानदार प्रदर्शन कर सकें। इसके लिए डीपीएस स्कूल रिसाली में स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के शिक्षकों का इंडक्शन प्रोग्राम आरंभ हुआ। इसके पहले सत्र को संबोधित करते हुए कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने कहा कि स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल न केवल अधोसंरचना में उत्कृष्ट होंगे अपितु शैक्षणिक गुणवत्ता के दृष्टिकोण से भी बेहतरीन होंगे। इस इंडक्शन कार्यक्रम के पीछे भी यही मकसद है कि हिंदी माध्यम से इंग्लिश मीडियम में आये छात्र-छात्राओं की चुनौतियों को समझकर इसके अनुरूप शैक्षणिक प्लानिंग की जा सके। कलेक्टर ने कहा कि इंग्लिश मीडियम स्कूलों के माध्यम से बच्चे मातृभाषा के साथ ही इंग्लिश का भी अध्ययन कर सकेंगे। अपनी मातृभाषा के साथ ही अंग्रेजी भाषा का ज्ञान बच्चों का कौशल संवर्धन करेगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए शुरूआती दौर में शिक्षकों को बच्चों पर कड़ी मेहनत करनी होगी। बच्चों के शब्द कोष पर और उन्हें इंग्लिश सीखाने के लिए नवाचार की कोशिशों के माध्यम से भी। कलेक्टर ने कहा कि सत्र में आपस में संवाद भी होगा।
मैं हिंदी मीडियम से था, सीखी छह भाषाएं- जिला पंचायत सीईओ सच्चिदानंद आलोक ने इस अवसर पर कहा कि अगर ठान लिया जाए तो बहुभाषाविद होना कठिन नहीं है। मेरी मातृभाषा हिंदी थी लेकिन मैंने प्रयत्न कर इंग्लिश के साथ ही पांच अन्य भाषाएं भी सीखी। नई भाषा सीखना चुनौतीपूर्ण भी है और आनंददायक भी।
भिलाई / शौर्यपथ / भिलाई नगर विधायक व महापौर देवेंद्र यादव लगातार शहर के विकास कार्य के साथ ही बच्चों को बेहतर शिक्षा मिले। इसके लिए भी लगातार प्रयास कर रहे हैं। गरीब परिवार के बच्चों को भी प्राइवेट स्कूलों की तरह बेहतर शिक्षा और सुविधाएं मिल सके। इसके लिए मेयर देवेंद्र यादव ने पहल की और उनके पहल से भिलाई सहित पूरे प्रदेश में सरकारी इंग्लिश मिडियम स्कूल की शुरूआत की गई। इसी कड़ी में भिलाई के सेक्टर 6 और खुर्सीपार में इंग्लिश मिडियम स्कूल की शुरूआत की गई है। निगमायुक्त ऋतुराज रघुवंशी ने इंग्लिश मीडियम स्कूल के लिए बेहतर प्लान बनाने के निर्देश जोन 5 के अधिकारियों को दिए थे, जिस पर प्लान तैयार कर लिया गया है! पुराने भवन में संचालित इन स्कूलों को भी अब जीर्णोधार किया जाएगा। इन स्कूलों में पढऩे वाले बच्चों को बेहतर से बेहतर शिक्षा और प्राइवेट स्कूल की तरह शिक्षा और सुविधा मिलेगी। इसके लिए मेयर देवेंद्र यादव ने पहल की है। मेयर के पहल से अब सेक्टर 6 इंग्लिश मिडियम स्कूल में 1 करोड़ की लागत से कई विकास कार्य किए जाएंगे। सबसे बड़ा कार्य यह होगा कि बच्चों के पढ़ाई के लिए यहां हाईटेक एयरकंडिशन कम्प्यूटर लैब और ई लायब्रेरी बनाई जाएगी। जहां बच्चे ऑन लाइन अपने विषय से संबंधित सभी जानकारी व पुस्तकें पढ़ सकेंगे। यही नहीं यहां प्रोजेक्टर भी लगाया जाएगा। जहां ऑन लाइन पढ़ाई कराई जा सकेगी। यह प्रदेश का पहला सरकारी इंग्लिश मिडियम स्कूल होगा। जहां इस तरह की बेहतर सुविधाएं होगी!
खेल शिक्षा भी मिलेगी
मेयर देवेंद्र यादव ने पहल की है कि इस स्कूल में सिर्फ कोर्स ओर पुस्तकों की पढ़ाई और शिक्षा के अलावा बच्चों को खेल की भी शिक्षा दी जाए। इसके लिए मेयर ने पहल पर सेक्टर 6 इंग्लिश मिडियम स्कूल में 13 लाख की लागत से वॉलीबॉल, बैडमिनटन कोर्ट और बॉस्केट बॉल मैदान बनाया जाएगा। जहां कोच बच्चों को इन विभिन्न खेलों की भी शिक्षा देंगे। ताकि बच्चे पढ़ाई के साथ ही खेल की शिक्षा लेकर खेल में भी अपना भविष्य बना सकें।
यह होंगे विकास कार्य
स्कूल परिसर का पूरा बाउड्रीवाल कराया जाएगा। निकासी के लिए नाली, पुलिया बनाई जाएगी। स्कूल का प्रवेश गेट बनेगा। स्कूल मैदान में पेवर ब्लॉक लगाया जाएगा। इसके अलावा पार्किंग स्टैंड बनाया जाएगा। जहां बच्चे और शिक्षक अपने वाहन रख सकेंगे। इसके अलावा स्कूल में साढ़े 3 लाख की लागत से स्कूल की स्वयं की गार्डन भी होगी। इसके अलावा लाखों रुपए से पूरे स्कूल भवन को पेंटिंग की जाएगी और रेनोवेट किया जाएगा!
ग्रीन बोर्ड लगेगे
स्कूल के सभी कक्षा में हाई क्वालिटि के ग्रीन बोर्ड लगाए जाएंगे। साथ ही स्कूल की दीवारों पर प्रेरणादायी पेंटिंग की जाएगी और श्लोगन भी लिखा जाएगा! कम्प्यूटर टेबल, 1 लाख की लागत से प्रोजेक्टर सिस्टम, डेढ़ लाख की लागत से साउड सिस्टम आदि सुविधाएं भी होगी। स्कूल की सुविधा बढ़ाने के लिए पेड़ लगाए जाएंगे। स्कूल में 1 लाख 76 हजार की लागत से इलेक्ट्रीक वर्क कराया जाएगा। स्कूल के सभी क्लासरूम व बाथरूम में टाइल्स लगाया जाएगा। इस तरह से अनेकों काम इंग्लिश मीडियम स्कूल में किए जाएंगे!
दुर्ग / शौर्यपथ / जिंदगी की यही रीत है, हार के बाद ही जीत है गीत की ये पंक्तियां मतवारी की जागृति साहू पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं। जिन्होंने शिक्षिका बनने की चाहत पूरी न होने के बाद फिर से कोशिश की हारने के बाद फिर उठीं और तय किया नया रास्ता और जीत भी हासिल की। पति का साथ और प्रोत्साहन मिला और 2 साल में जागृति साहू को मिला दुर्ग की ''मशरूम लेडीÓÓ का खिताब। सफर आसान तो नहीं था मगर खुद को साबित करने के जुनून में जागृति ये मंजिल पाई है। सीईओ जिला पंचायत श्री सच्चिदानंद आलोक ने उनके काम को देखकर यह उपमा उन्हें दी है।
पति और बेटी को पसंद था मशरूम खाना,इसलिए शुरू किया उत्पादन- जागृति साहू बीएससी और एमए पास हैं। इसलिए उनकी इच्छा थी कि नौकरी करें। जागृति बताती है कि शिक्षाकर्मी के लिए चयनित होने के बाद भी कुछ तकनीकी कारणों से जागृति का शिक्षिका बनने का सपना अधूरा रह गया था। वह कुछ उदास रहने लगी थी । लेकिन कहते हैं ना जिंदगी ठहरने का नाम नहीं है। जागृति बताती है कि उनके पति और बच्ची को मशरूम खाना बहुत पसंद था। सप्ताह में करीब दो से तीन बार उनके घर मशरूम जरूर आता था। वे 200 रुपए प्रति किलो में मशरूम खरीदा करतीं।
एक दिन उनके पति ने कहा कि घर पर यूं ही खाली बैठने से अच्छा क्यों ना वह मशरूम का उत्पादन शुरू करें। जागृति को ये आइडिया जम गया पति की प्रेरणा के बाद उन्होंने मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण लेने की सोची। जागृति प?ी लिखी तो थी हीं और लगन की पक्की भी। जब उनको पता चला कि जिला पंचायत द्वारा बिहान कार्यक्रम के तहत स्व सहायता समूह की महिलाओं को उनकी इच्छा अनुसार प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि वह स्वरोजगार की स्थापना कर सकें। उन्होंने मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण लेने की इच्छा व्यक्त की 2018 में पहले पीएनबी से 3 दिवसीय और देना बैंक के प्रशिक्षण कार्यक्रम में 10 दिवसीय प्रशिक्षण लिया। इसके बाद पीछे मुड्कर नहीं देखा शुरुआत में 5 हजार रुपए से मशरूम उत्पादन शुरू किया। फिर बिहान योजना के तहत बैंक लिंकेज के माध्यम से 99 हजार रुपए का ऋण मिला। जिसमें से 50 हजार रुपए से उन्होंने अपनी मशरूम उत्पादन की यूनिट को बड़ा रूप दिया। बाकी के रुपए समूह की महिलाओं को कृषि कार्य के रूप में ऋण के रूप में दिया। जागृति न केवल खुद काबिल बनी बल्कि मतवारी गांव की दूसरी महिलाओं को भी उन्होंने अपने काम से जो?ा। आज घर बैठे महिलाएं अच्छी आमदनी अर्जित कर रही हैं।
अपनी मेहनत से गायत्री स्व सहायता समूह ने मशरूम उत्पादन कर 2 साल में 6 लाख रुपए कमाए - जागृति साहू बताती है कि उनके समूह में 12 महिलाएं हैं वर्ष 2018 से लेकर अब तक उन्होंने 6 लाख रुपए की आमदनी अर्जित की है। इस साल उनके इस समूह द्वारा 2 लाख 20 हजार रुपए का मशरूम बेचा गया है। जागृति ने बताया कि बताया कि मशरूम में लागत का दोगुना फायदा होता है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय से 120 रु. प्रति किलो में मशरूम के बीज खरीदती हैं और 1 किलो बीज से 10 किलो मशरूम का उत्पादन होता है। सभी खर्चे निकाल कर भी अच्छी आमदनी हो जाती है।
बनीं मास्टर ट्रेनर, अब तक प्रदेश की 850 महिलाओं को दिया प्रशिक्षण 750 महिलाएं कर रहीं उत्पादन- जागृति ने मशरूम उत्पादन करना सीखा लेकिन उनकी यात्रा यही समाप्त नहीं हुई उनके कौशल को देखते हुए पीएनबी द्वारा राजधानी रायपुर में संचालित एकमात्र कृषक प्रशिक्षण केंद्र में मास्टर ट्रेनर के रूप में चयनित कर लिया गया। आज वह प्रदेश भर की महिलाओं को प्रशिक्षण दे रही हैं। जागृति बताती है कि अब तक उन्होंने 850 महिलाओं को प्रशिक्षण दिया है जिसमें से 750 महिलाएं मशरूम उत्पादन कर आमदनी अर्जित कर रही हैं। जागृति दुर्ग जिले के तीनों जनपद पंचायतों एवं आसपास की सभी जिलों की महिलाओं को प्रशिक्षण दे चुकी हैं। जागृति कृषि विभाग की आत्मा योजना और बिहान योजना में भी प्रशिक्षण दे रही हैं।
नेशनल लेवल के प्रशिक्षक के रूप में हुई चयनित- जागृति अब केवल प्रदेश में ही नहीं बल्कि प्रदेश के बाहर भी अपने गांव मतवारी और दुर्ग जिले का नाम रोशन करने वाली हैं रूरल सेल्फ एम्प्लॉयमेंट ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट में प्रशिक्षण देने के लिए उनका चयन नेशनल लेवल ट्रेनिंग के लिए भी हुआ है।
मशरूम की डिमांड इतनी है कि लोग इंतजार करते हैं, सोशल मीडिया के माध्यम से करती हैं प्रचार- गायत्री स्व सहायता समूह द्वारा उत्पादित मशरूम की इतनी डिमांड है कि लोग कई दिन तक इंतजार करते हैं। समूह द्वारा ओयस्टर मशरूम का उत्पादन किया जाता है जुलाई 2020 से प्रोटीन रिच पिंक ओयस्टर मशरूम का उत्पादन शुरू किया है। जिसकी और भी डिमांड है। हर दिन कम से कम 4 से 5 किलो मशरूम का उत्पादन होता है इस लिहाज से यदि 200 प्रति किलो का हिसाब लगाएं तो 800 से 1000 रुपए की आमदनी ली जा सकती हैं।
मशरूम उत्पादन के साथ-साथ हर्बल फिनाइल हर्बल सोप डिटर्जेंट इत्यादि का उत्पादन भी करता है इनका समूह- जागृति बताती हैं कि उन्होंने केवल एक काम तक खुद को सीमित नहीं रखा है मशरूम उत्पादन के अलावा उनका समूह हर्बल फिनायल ,डिटर्जेंट इत्यादि का उत्पादन भी कर रहा है। जिसकी अच्छी खासी डिमांड है। इनको अच्छे ऑर्डर भी मिल रहे हैं। जिला प्रशासन द्वारा आयोजित बिहान बाजार में भी गायत्री स्व सहायता समूह ने काफी अच्छी बिक्री की थी।
सेहत / शौर्यपथ / कोरोना वायरस के खतरे ने कहीं न कहीं हर किसी की सेहत पर असर डाला है। ऐसे में सभी की यही कोशिश रहती है कि बाहर नहीं निकलना पड़े। कुछ लोग तो ऐसे भी हैं, जो मॉर्निंग वॉक भी छोड़ रहे हैं, जिससे उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है। जिम खुलने के बाद भी कई लोग बाहर जाने से परहेज कर रहे हैं। अगर आप भी महामारी के डर की वजह से अपना वर्कआउट छोड़ बैठे हैं, तो ऐसी गलती बिल्कुल न करें। हम आपको कुछ ऐसे इनडोर वर्कआउट बताने जा रहे हैं, जिन्हें आप बिना बाहर गए भी कर सकते हैं-
डांस करें
पॉल्यूशन में घर से बाहर निकलना खतरे से खाली नहीं तो आप इनडोर वर्कआउट्स जैसे योगा और जुंबा ट्राई कर सकते हैं। जुंबा के अलावा आप कोई भी डांस कर सकती हैं। इससे आप फ्रेश और एनर्जेटिक महसूस करेंगे।
योग और सूर्य नमस्कार
अगर आपको योग नहीं आता, तो बेसिक योगासन जैसे सूर्य नमस्कार से शुरुआत कर सकते हैं। सूर्य नमस्कार से बॉडी की मसल्स स्ट्रेच होती हैं और आप पूरे दिन फ्रेश फील करेंगे। आप इंटरनेट पर ये आसन देख सकते हैं।
प्राणायाम करें
इसके अलावा प्राणायाम करना भी अच्छा ऑप्शन है। इसमें डीप ब्रीदिंग करनी होती हैजो कि आपके रिस्पिरेटरी सिस्टम को दुरुस्त रखता है।
ऐक्रोयोगा
घर के अंदर आप ऐक्रोयोगा भी ट्राई कर सकते हैं। यह ऐक्रोबेटिक्स और योग का मिलाजुला रूप है। मसल स्ट्रेंथ के लिए आप अपना बॉडी वेट, किताबें वगैरह यूज कर सकते हैं।
वॉल पुशअप्स
वॉल पुशअप्स, स्क्वैट्स, क्रंचेज वगैरह कुछ ऐसी एक्सर्साइज हैं जो 15-20 मिनट में हो जाती हैं।
शौर्यपथ / खगोलीय घटनाओं के दीवाने लोगों को बीत रहा साल अद्भुत नजारे का तोहफा देने जा रहा है। नासा के अनुसार, 1623 के बाद यानी करीब 400 साल बाद 21 दिसंबर 2020, दिन सोमवार को आसामन में दो ग्रहों वृहस्पति और शनि का संयोजन दिखेगा। भारतीय ज्योतिष में इस अद्भुत घटना को गुरु और शिन का महा मिलन कहा गया है तो नासा (NASA) ने इस 'क्रिसमस स्टार' नाम दिया है।
नासा के अनुसार, गुरु और शनि का यह महामिलन अगले एक-दो सप्ताह तक आसमान में दृश्य रहेगा। लेकिन भारतीय समयानुसार लोग अपनी आंख से ही 21 दिसंबर की शाम को सूरज ढलते ही पश्चिम दिशा में देख सकेंगे। इस महामिलन दोनों ग्रह एक-दूसरे के पार करते दिखेंगे।
वृहस्पति जहां सौर मंडल का सबसे बड़ा ग्रह है वहीं शनि नीले रंग की वलय वाला ग्रह है। सोमवार की शाम को दोनों ग्रह एक दूसरे से मिलते दिखाई देंगे। रिपोर्ट्स के अनुसार, सूर्य की परिक्रमा करते हुए दोनों ग्रह 20 साल में एक दूसरे के करीब आते हैं लेकिन करीब 400 साल बाद ऐसा होगा जब दोनों ग्रह एक-दूसरे के बेहद समीप दिखाई देंगे।
वैज्ञानिकों के अनुसार, गुरु और शनि के ग्रेट कंजक्शन की इस घटना के समय वृहस्पति की पृथ्वी से दूरी लगभग 5.924 एस्ट्रेनॉमिकल यूनिट होगी, जबकि शनि की दूरी 10.825 एस्ट्रेनॉमिकल यूनिट होगी।
ऐसे देखें वृहस्पति और शनि का महा मिलन:
गुरु और शिन के संयोजन को आप बिना किसी टेलीस्कोप की मदद से भी देख सकेंगे। इसके लिए आपको बिल्डिंगों और पेड़ो से दूसर खुले आसमान के नीचे या पास की सबसे ऊची छत पर जाना होगा। यहां से आप पश्चिम दिशा में सूर्यास्त के साथ ही दो ग्रहों का मिलन देख सकेंगे। इन ग्रहों को और भी करीब से देखना चाहें तो आप अच्छी क्वालिटी की टेलीस्कोप के जरिए इसे देख पाएंगे।
धर्म संसार / शौर्यपथ / हिंदू मान्यता के अनुसार चार धाम की यात्रा का बहुत महत्व है, इन्हें तीर्थ भी कहा जाता है। आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा परिभाषित चार वैष्णव तीर्थ हैं। जहां हर हिंदू को अपने जीवन काल मे अवश्य जाना चाहिए, जो हिंदुओं को मोक्ष प्राप्त करने में मदद करेंगे। इसमें उत्तर दिशा मे बद्रीनाथ, पश्चिम की ओर द्वारका, पूर्व दिशा मे जगन्नाथ पुरी और दक्षिण मे रामेश्वरम धाम है। ये चारों ही धाम चार दिशाओं में स्थित है। उत्तर में बद्रीनाथ, दक्षिण रामेश्वर, पूर्व में पुरी और पश्चिम में द्वारिका। प्राचीन समय से ही चारधाम तीर्थ के रूप मे मान्य थे, लेकिन इनकी महिमा का प्रचार आद्यशंकराचार्यजी ने किया था। माना जाता है, उन्होंने चार धाम व बारह ज्योर्तिलिंग को सुचीबद्ध किया था।
चारों धाम चार दिशा में स्थित करने के पीछे जो सांस्कृतिक लक्ष्य था, वह यह कि इनके दर्शन के बहाने भारत के लोग कम से कम पूरे भारत का दर्शन कर सकें। वे विविधता और अनेक रंगों से भरी भारतीय संस्कृति से परिचित हों, वे अपने देश की सभ्यता और परंपराओं को जानें।
किस धाम की क्या विशेषता
बद्रीनाथ धाम : बद्रीनाथ उत्तर दिशा मेंओं का मुख्य यात्राधाम माना जाता है। मन्दिर में नर-नारायण की पूजा होती है और अखण्ड दीप जलता है, जो कि अचल ज्ञानज्योति का प्रतीक है। यह भारत के चार धामों में प्रमुख तीर्थ-स्थल है। प्रत्येक हिन्दू की यह कामना होती है कि वह बद्रीनाथ का दर्शन एक बार अवश्य ही करे। यहां पर यात्री तप्तकुण्ड में स्नान करते हैं। यहां वनतुलसी की माला, चने की कच्ची दाल, गिरी का गोला और मिश्री आदि का प्रसाद चढ़ाया जाता है।
कहां है : उत्तर दिशा में हिमालय पर अलकनंदा नदी के पास
मूर्ति: विष्णु की शालिग्राम शिला से बनी चतुर्भुज मूर्ति। इसके आसपास बाईं ओर उद्धवजी तथा दाईं ओर कुबेर की प्रतिमा।
रामेश्वर धाम: रामेश्वर में भगवान शिव की पूजा लिंग रूप में की जाती है। यह शिवलिंग बारह द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। भारत के उत्तर मे काशी की जो मान्यता है, वही दक्षिण में रामेश्वरम् की है। रामेश्वरम चेन्नई से लगभग सवा चार सौ मील दक्षिण-पूर्व में है। यह हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी से चारों ओर से घिरा हुआ एक सुंदर शंख आकार द्वीप है।
कहां है: दक्षिण दिशा में तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले में समुद्र के बीच रामेश्वर द्वीप।
मूर्ति: शिवलिंग
पुरी धाम: पुरी का श्री जगन्नाथ मंदिर भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है। यह भारत के ओडिशा राज्य के तटवर्ती शहर पुरी में स्थित है। जगन्नाथ शब्द का अर्थ जगत के स्वामी होता है। इनकी नगरी ही जगन्नाथपुरी या पुरी कहलाती है। इस मंदिर को हिन्दुओं के चार धाम में से एक गिना जाता है। इस मंदिर का वार्षिक रथ यात्रा उत्सव प्रसिद्ध है। यहां मुख्य रूप से भात का प्रसाद चढ़ाया जाता है।
कहां है: पूर्व दिशा में उड़ीसा राज्य के पुरी में।
मूर्ति: विष्णु की नीलमाधव प्रतिमा जो जगन्नाथ कहलाती है। सुभद्रा और बलभद्र की मूर्ति भी हैं।
द्वारिका धाम : द्वारका भारत के पश्चिम में समुद्र के किनारे पर बसी है। आज से हजारों वर्ष पूर्व भगवान कृष्ण ने इसे बसाया था। कृष्ण मथुरा में उत्पन्न हुए, गोकुल में पले, पर राज उन्होने द्वारका में ही किया। यहीं बैठकर उन्होने सारे देश की बागडोर अपने हाथ में संभाली। पांडवों को सहारा दिया। कहते हैं असली द्वारका तो पानी में समा गई, लेकिन कृष्ण की इस भूमि को आज भी पूज्य माना जाता है। इसलिए द्वारका धाम में श्रीकृष्ण स्वरूप का पूजन किया जाता है।
कहां है : पश्चिम दिशा में गुजरात के जामनगर के पास समुद्र तट पर।
मूर्ति: भगवान श्रीकृष्ण।
सेहत / शौर्यपथ / महिलाओं में प्रजनन क्षमता का कम होना और गर्भधारण न कर पाने की समस्या काफी तेजी से बढ़ रही है। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में अपनी खराब जीवन शैली के चलते हम अपने खानपान पर खास ध्यान नहीं दे पाते हैं। जिसके चलते हमारे शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। जिससे हम कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के शिकार होने लगते हैं। प्रजनन क्षमता कम होने की समस्या महिला व पुरुष दोनों को हो सकती है।
हालांकि, इसके लिए कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। लेकिन हमारे पास कुछ ऐसा है जो इस समस्या से राहत पाने में आपकी कुछ मदद कर सकता है। वह है काली किशमिश या मुनक्?का क्या आप जानती हैं कि काली किशमिश या मुनक्का आपकी बांझपन की समस्या को दूर करने में मदद कर सकता है, और गर्भधारण में मददगार हो सकता है। चलिए बिना देर किए हम आपको बताते हैं कि कैसे काली किशमिश या इसका पानी गर्भधारण में आपकी मदद कर सकता है।
क्या है बांझपन का कारण
महिलाओं में गर्भधारण न कर पाने की समस्या का एक मुख्य कारण प्रजनन क्षमता का कम होना या बांझपन है। जिसके लिए कई कारक जिम्मेदार हो सकते हैं। जिसमें आपका खानपान और कुछ अन्य कारक शामिल हैं।
महिलाओं के शरीर में हार्मोनल संतुलन प्रजनन क्षमता के कम होने का एक महत्वपूर्ण कारण है। कई महिलाओं में अंडे समय पर नहीं बनते हैं। साथ ही उनका ओवुलेशन भी समय पर नहीं हो पाता है। कुछ का ओवुलेशन समय पर होता तो है, लेकिन ठीक से नहीं हो पाता। कई महिलाओं में अंडाशय में अंडे बनते तो हैं, लेकिन उनकी गुणवत्ता सही नहीं होती है।
इसके अलावा इन दिनों महिलाओं में पीरियड्स की समस्या बहुत आम है। उन्हें समय पर पीरियड्स नहीं होते हैं, साथ ही अगर पीरियड्स होते भी हैं तो ठीक से नहीं होते हैं। इसके अलावा कई ऐसी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी हैं जिनके कारण महिलाओं की प्रजनन क्षमता में कमी आती है। और वह गर्भधारण नहीं कर पाती।
गर्भधारण के लिए कैसे फायदेमंद है काली किशमिश का पानी
काली किशमिश का पानी आपकी प्रजनन क्षमता को बढ़ाने और गर्भधारण की समस्या से राहत पाने में आपके लिए मददगार साबित हो सकता है। क्योंकि काली किशमिश के पानी में सोडियम, पोटेशियम, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, प्रोटीन, विटामिन-ई, सी, कैल्शियम, आयरन, विटामिन-डी, मैग्नीशियम, जिंक, एंटिऑक्सीडेंट्स समेत कई तरह के पोषक तत्व मौजूद होते हैं।
काली किशमिश आपकी शारीरिक कमियों को दूर करने के लिए बेहद फायदेमंद हैं। यह य़ह आपके प्रजनन की क्षमता को बेहतर बनाने में भी मदद करता है, और इसके नियमित सेवन से आप गर्भधारण कर पाने में भी सक्षम हो सकती हैं।
कैसै कर सकते हैं इस्तेमाल
रात में सोते समय 5-7 काली किशिमिश को एक कप पानी में भिगो दें।
इसे रात भर के लिए छोड़े दें।
सुबह उठकर खाली पेट किशमिश के पानी का सेवन करें।
जो मुनक्के आपने भिगोए थे आप उन्हें दिन में किसी भी समय खा सकती हैं।
ऐसा रोजाना नियमित रूप से करने से आपकी प्रजनन की क्षमता में सुधार होगा और आप जल्दी गर्भधारण करने में मदद मिलेगी।
यह भी ध्?यान रहे
गर्भधारण के लिए किशमिश के पानी का सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है। क्योंकि वह आपको आपकी समस्या के अनुसार इसका सेवन करने की सलाह बेहतर दे सकते हैं। क्योंकि कई बार इसका सेवन अधिक करने से आपको स्वास्थ्य संबंधी परेशानी भी हो सकती है। इसलिए पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।
खाना खजाना / शौर्यपथ / आज हम आपके लिए सर्दियों की फेवरेट डिश सरसों का साग और मक्के की रोटी लेकर आए हैं। मक्के की रोटी और सरसों का साग का कॉम्?बिनेशन जबरदस्?त होता है। सरसों का साग स्?वास्?थ्?य के नजरिए से भी बेहद फायदेमंद होता है। तो लीजिए आप भी सरसों साग बनाने की विधि आज ही ट्राई करें।
सामग्री :
सरसों का साग- 500 ग्राम,
पालक– 150 ग्राम,
बथुआ– 100 ग्राम,
टमाटर– 250 ग्राम,
प्याज– 01 (बारीक कटी हुई),
लहसुन– 05 कलियां (बारीक कटी हुई),
हरी मिर्च– 02 नग,
अदरक– 01 बड़ा टुकड़ा,
सरसों का तेल– 02 बड़े चम्मच,
बटर/घी– 02 बड़े चम्मच,
हींग– 02 चुटकी,
जीरा– 1/2 छोटा चम्मच,
हल्दी पाउडर – 1/4 छोटा चम्मच,
मक्के का आटा– 1/4 कप,
लाल मिर्च पाउडर– 1/4 छोटा चम्मच,
नमक– स्वादानुसार।
विधि :
सरसों का साग बनाने के लिए सबसे पहले सरसों, पालक और बथुआ को अच्छी तरह से साफ करके धो लें। इन्हें छलनी में रख दें, जिससे पानी निथर जाए। इसके बाद इन्हें मोटा-मोटा काट लें और कुकर में एक कप पानी के साथ डालें और मध्यम आंच पर एक सीटी आने तक उबाल लें। इसके बाद कुकर को उतार कर रख दें और उसकी सीटी निकलने तक प्रतीक्षा करें। अब टमाटर और अदरक के छोटे-छोटे टुकड़े कर लें और फिर उसे हरी मिर्च के साथ मिक्सी में डाल कर बारीक पीस लें। कढ़ाई में एक चम्मच तेल डालें और गरम करें। तेल गरम होने पर उसमें मक्के का आटा डालें और हल्का ब्राउन होने तक भून लें। आटे को एक प्याली में निकालने के बाद कढ़ाई में बचा हुआ तेल डालें और उसे गरम करके उसमें हींग और जीरा डाल दें और दस सेकेंड तक भून लें। उसके बाद प्याज और लहसुन डालें और हल्का गुलाबी होने तक भून लें। उसके बाद हल्दी पाउडर, टमाटर का पेस्ट और लाल मिर्च डालें और मसाले को तब तक भूनें, जब तक कि वह तेल न छोडऩे लगे। मसाले के भुनने के दौरान कुकर से साग निकाल लें और उन्हें ठंडा करके मिक्सी में दरदरा पीस लें। अब भुने हुए मसाले में पिसा साग डाल दें। साथ ही आवश्यकतानुसार पानी, मक्के का आटा और नमक भी डालें और अच्छी तरह से चला दें। इसके बाद इसे मध्यम आंच पर पकाएं और उबाल आने के 5-6 मिनट बाद तक पकाने के बाद गैस बंद कर दें।
मक्के की रोटी के बिना अधूरा है मजा
मक्?की की रोटी और सरसों का साग वैसे तो लोकप्रिय पंजाबी जायका है। मगर अब असका स्वाद हर किसी की जुबान पर चढ़ गया है। मक्का या भुट्टा में कार्बोहाइड्रेट, फोलिक एसिड, कैरोटीन, मिनरल्स, विटामिन और आयरन प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जिससे यह कई रोगों से लडऩे में सहायक होता है और शरीर को हष्ट-पुष्ट बनाता है। इसीलिए ठंड के मौसम में मक्?के की रोटी और सरसों का साग खाया जाता है। तो चलिए बनाते हैं मक्के की रोटी
सामग्री :
मक्की का आटा– 400 ग्राम,
मक्खन– 02 बड़े चम्मच,
गरम पानी– आवश्यकतानुसार,
नमक– स्वादानुसार।
विधि :
मक्?का रोटी बनाने के लिए सबसे पहले मक्के/मक्की के आटा को एक बर्तन में निकाल कर छान लें। इसके बाद आटा में स्वादानुसार नमक मिला लें और फिर गुनगुने पानी की सहायता से आटा को गूंथ लें। इसके बाद आटे को ढक कर 15-20 मिनट के लिए रख दें। इससे आटा फूल कर सेट हो जायेगा और रोटियां बेहद स्वादिष्ट बनेंगीं।मक्के की रोटियां बनाने के पहले इसे एक बार हथेलियों की सहायता से खूब अच्छी तरह से मसल लें, जिससे यह बेहद मुलायम हो जाए। जब आटा अच्छी तरह से मुलायम हो जाए, तब उसमें से लोई बनाने भर का आटा लें और उसे हथेली से दबा कर बड़ा कर लें। इसके बाद हाथों में थोड़ा पानी लगाएं और लोई को उंगलियों की सहायता से दबा कर 5-6 इंच व्यास की रोटी बना लें।अब रोटी को गरम तवा पर डालें। जब एक तरफ की रोटी सिक जाए, तो उसे पलट दें और दूसरी तरफ से भी सेक लें। इसके बाद रोटी को गैस की आंच पर साधारण रोटी की तरह घुमा-घुमाकर सेंंक लें। आपकी मक्?का की रोटी तैयार है। इसपर मक्खन या देशी घी लगाएं और गर्मा-गरम सरसों के साग के साथ आनंद लें।
रायपुर / शौर्यपथ / राज्य सरकार की महत्वकांक्षी योजना नरवा, गरवा, घुरवा और बाड़ी के तहत गौठान प्रारंभ किए गए हैं। सुव्यवस्थित संचालन के लिए गौठान समितियों को जिम्मेदारी दी गयी है। अब गौठान आजीविका केंद्र के रूप में विकसित किए जा रहे है। स्थानीय स्व सहायता समूह को रोजगार मिलने से वे आर्थिक समृद्धि की ओर अग्रसर हो रहे हैं। स्थानीय महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने भी गौठान से जुड़कर आर्थिक समृद्धि की ओर कदम बढ़ाया है। ऐसा ही एक गौठान जांजगीर-चांपा जिले के बलौदा ब्लॉक के औराईकला गौठान में गांव के ही चार स्व-सहायता समूहो को काम मिल रहा है। अब उन्हें काम के लिए बाहर जाने की आवश्यकता नही है। गौठान से जुड़े समूहों को मिनी राईस मिल, मशरूम उत्पादन, सब्जी-भाजी और जैविक खाद के माध्यम से रोजगार का अवसर उपलब्ध हो रहे हैं।
औराईकला की जय मां वैष्णो देवी महिला स्व सहायता समूह की अध्यक्ष श्रीमती पार्वती साहू ने बताया कि जैविक पद्धति से खाद तैयार कर सोसायटी को अब तक गौठान के माध्यम से 48 क्विंटल जैविक खाद 8 रूपए प्रति किलो की दर से दे चुके हैं। इससे स्व सहायता समूह के सदस्यों को लाभ मिला है। उन्होंने बताया कि प्रथम बार उन्होंने 40 क्विंटल जैविक खाद उद्यानिकी विभाग को सहकारी सोसायटी के माध्यम से बेचा था। आज कृषि विभाग के माध्यम से 8 क्विंटल जैविक खाद बेचा है। बेचे गए जैविक खाद की राशि सोसायटी के द्वारा समिति के बैंक अकाउंट में भुगतान की जाती है। श्रीमती साहू ने बताया कि उनकी समिति 8 वर्ष पुरानी है। गौठान प्रारंभ होने से अब उन्हें काम के लिए बाहर जाने की आवश्यकता नहीं है। उन्हें जैविक खाद तैयार करने के लिए गौठान से ही गोबर मिल जाता है। शासन की योजना के तहत केंचुआ भी उपलब्ध कराया गया है एवं समूह के सदस्यों को प्रशिक्षण भी दिया गया है। गौठान परिसर में ही वर्मी टांका व वर्मी बेड तैयार किया गया है। समूह के सदस्यों में लाभ मिलने से उत्साह का माहौल है।
इसी गौठान से जुड़े मिनीमाता महिला स्व सहायता समूह के सदस्यों ने चरागाह परिसर पर सब्जी-भाजी लगाया है। इससे उन्हें आर्थिक लाभ मिलना शुरू हो गया है। समूह की अध्यक्ष बहोरीन बाई ने बताया कि वे अभी लाल भाजी, पालक भाजी, गोभी, मूली आदि लगाए हैं। इसके बाद बाद वे धनिया, भिंडी, लौकी, मेथी, खीरा भी लगाएंगे। वे स्थानीय बाजार एवं समीप के शहरों से को सब्जी भाजी की सप्लाई कर रहे हैं। पिछले फसल में सब्जी भाजी का मूल्य कम होने के कारण केवल लागत और समूह के सदस्यों को मजदूरी मिल गई थी। इस मौसम में सब्जी भाजी की कीमत अच्छी मिलने से और अधिक लाभ मिल रहा है।
जय मां संतोषी महिला स्व सहायता समूह के सदस्य उमा पटेल ने बताया कि मशरूम उत्पादन के लिए गौठान परिसर में ही स्थान दिया गया है। निःशुल्क प्रशिक्षण भी प्राप्त कर चुके हैं। वह अब मशरूम उत्पादन की तैयारी में लगे हुए हैं। इसी प्रकार गौठान से जुड़े एक अन्य समूह को सरकार की योजना के तहत मिनी राइस मिल अभी कुछ दिन पहले ही उपलब्ध कराया गया है। जिससे अति शीघ्र प्रारंभ किया जाएगा।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में पिछले दो सालों में 103 एमओयू हुए हैं। इनके माध्यम से प्रदेश में 42 हजार 155 करोड़ रूपए का पूंजी निवेश प्रस्तावित है। इससे प्रदेश के युवाओं के लिए 62 हजार से अधिक रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
छत्तीसगढ़ की नयी उद्योग नीति और कोरोना-काल में उद्योगों के हित में शासन द्वारा उठाए गए कदमों से राज्य में बेहतर औद्योगिक वातावरण का निर्माण हुआ है। कोरोना-संकट काल में पूरा देश आर्थिक मंदी से प्रभावित था, वहीं छत्तीसगढ़ में उद्योग जगत मंदी से अछूता रहा। लॉकडाउन के दौरान देश में सबसे पहले माह अप्रैल में छत्तीसगढ़ के उद्योगों में काम प्रारंभ हुआ। उद्योगों की कठिनाइयों को देखते हुए ही कई तरह की रियायतें और सुविधाएं दी गईं। कोर सेक्टर के उद्योगों को विद्युत शुल्क में छूट दी गई। कच्चे माल की आवक बनी रहे, और तैयार माल बाजार तक पहुंचता रहे, इसके लिए सभी जरूरी इंतजाम किए गए। दूसरे राज्यों से कच्चा माल आसानी से छत्तीसगढ़ आ सके, इसके लिए भी दिशा-निर्देश जारी किए गए। स्टील और सीमेंट उद्योग की गतिविधियां चलती रहें, इसके लिए सड़क और भवन निर्माण का काम जारी रखा गया। बिजली की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया। नियम शर्तों में भी कोई बदलाव नहीं किया गया। राइस मिलों को ऊर्जा प्रभार में पांच प्रतिशत की छूट दी गई। उद्योगों को बिजली बिलों के भुगतान की अवधि में भी छूट दी गई। लॉकडाउन की अवधि में छत्तीसगढ़ में 27 लाख टन इस्पात का उत्पादन हुआ, जो दूसरे राज्यों की तुलना में सबसे ज्यादा था। प्रदेश में नयी औद्योगिक नीति का निर्माण किया गया है। यह नयी नीति यहां के उद्योग धंधों के लिए संभावनाओं के नये दरवाजे तो खोल रही है साथ ही एग्रीकल्चर सेक्टर को भी मजबूत प्रदान कर रही है।
राज्य सरकार की नयी उद्योग नीति में कृषि और वनोपज आधारित उद्योगों को प्राथमिकता दी गई है। खनिज आधारित उद्योगों को हर तरह का प्रोत्साहन दिया जा रहा है। नई औद्योगिक नीति के तहत अब इस्पात (स्पंज आयरन एण्ड स्टील) क्षेत्र के मेगा अल्ट्रा मेगा प्रोजेक्ट में निवेश हेतु विशेष निवेश प्रोत्साहन पैकेज की व्यवस्था की गई है। मेगा निवेशकों के लिए इस पैकेज में अधिकतम 500 करोड़ रुपए तक निवेश प्रोत्साहन दिया जा रहा है। बस्तर संभाग के लिए 1000 करोड़ का निवेश प्रोत्साहन दिया जा रहा है। निवेशकों को सिर्फ छूट और सुविधा ही नहीं दी जा रही, बल्कि इस बात का भी खयाल रखा गया है कि वे प्रदेश में आसानी के साथ उद्योग स्थापित कर सकें। इसके लिए प्रक्रियाओं का सरलीकरण किया गया है। औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि आबंटन के लिए भू-प्रब्याजी में 30 प्रतिशत की कमी की गई है। भू-भाटक में एक प्रतिशत की कमी की गई है। औद्योगिक क्षेत्रों में 10 एकड़ तक आवंटित भूमि को लीज होल्ड से फ्री होल्ड करने के लिए नियम बनाए गए हैं। औद्योगिक भूमि और भवन प्रबंधन नियमों का सरलीकरण किया गया है।
असामान्य परिस्थितियों के बावजूद छत्तीसगढ़ में 464 स्टार्टअप शुरु करने में सफलता पाई है। 01 जनवरी 2019 से लेकर अब तक 103 एमओयू किए जा चुके हैं, जिनमें 42 हजार 154 करोड़ रुपए से अधिक का पूंजी निवेश होगा। स्टील सेक्टर में 80 एमओयू हुए हैं, जिसमें 37022.22 करोड़ रुपए का पूंजी निवेश प्रस्तावित है। सीमेंट सेक्टर में एक एमओयू हुआ, जिसमें 2000 करोड़ रुपए का पूंजी निवेश प्रस्तावित है। एथेनॉल सेक्टर में 7 एमओयू हुए, जिनमें 1082.82 करोड़ का पूंजी निवेश होगा। फूड सेक्टर में 5 एमओयू के माध्यम से 283.61 करोड़, फार्मास्युटिकल सेक्टर में 3 एमओयू के माध्यम से 56.41 करोड़ रुपए, डिफेंस सेक्टर में 3 एमओयू के माध्यम से 529.50 करोड़ रुपए तथा अन्य सेक्टरों में 4 एमओयू के माध्यम से 1179.99 करोड़ रुपए का पूंजी निवेश प्रस्तावित है। इससे स्टील सेक्टर में 52,206, सीमेंट सेक्टर में 450, एथेनॉल सेक्टर में 986, फूड सेक्टर में 2,434, फार्मास्युटिकल सेक्टर में 393, डिफेंस सेक्टर में 4494 तथा अन्य सेक्टरों में 1,105 रोजगार के अवसर निर्मित होंगे।
क्रेडा विभाग के प्रयासों से ग्रामवासियों को मिली बिजली की रोशनी, सोलर ड्यूल पंप से शुद्ध पेयजल
पंखा एवं मोबाईल चार्जर की सुविधा पहुंची
राजनांदगांव / शौर्यपथ / राजनांदगांव जिले का नक्सल प्रभावित मानपुर विकासखंड के पहाड़ में स्थित सुदूर वनांचल ग्राम जलवाही सोलर लाईट के प्रकाश से जगमगा रहा है। एक वक्त था जब बिजली नहीं होने से ग्रामवासियों को कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा था। पहाड़ में ग्राम स्थित होने के कारण रात में जंगली जीवों का खतरा बना रहता था। रात में बच्चों को पढ़ाई के लिए बिजली की सुविधा प्राप्त नहीं थी। आधुनिक दैनिक संसाधनों का उपयोग भी ग्रामवासी बिजली की सुविधा नहीं होने कारण नहीं कर पा रहे थे। अब शासन की पहल पर क्रेडा विभाग द्वारा ग्राम में निवासरत 53 परिवारों के यहां सोलर होम लाईट के माध्यम विद्युतीकृत किया गया।
गांव में पेयजल सुविधा हेतु क्रेडा विभाग द्वारा सोलर ड्यूल पंप की स्थापना किया गया है। जिससे ग्रामवासी निर्बाध शुद्ध पेयजल प्राप्त करते हैं। जिसमें प्रत्येक परिवार को 200 वॉट क्षमता का सोलर पैनल बैटरी के साथ 5 नग एलईडी लाईट व 15 वॉट का डीसी पंखा, मोबाईल यूएसबी चार्जर व टीवी शॉकेट नि:शुल्क प्रदाय किया गया है। आज ग्राम में सभी घर सौर ऊर्जा से रोशन हो रहे हैं।
गांव में 53 आदिवासी परिवार निवासरत हैं। जिनकी आजीविका का प्रमुख साधन धान एवं मक्का की खेती है। साथ ही जंगल से प्राप्त होने वाले वनोपज पर आधारित है। कोविड-19 संक्रमण काल में ग्रामवासियों के यहां सोलर होम लाईट स्थापना कार्य किया गया है। होम लाईट का संचालन एवं संधारण का कार्य क्रेडा विभाग द्वारा किया जाएगा। गांव के ईतवारी बाई ने बताया कि हमारे गांव में बिजली नहीं होने की वजह से समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। रात में हम कोई भी कार्य नहीं कर पाते थे और बच्चे भी रात में नहीं पढ़ पा रहे थे। अब हमारे घर में सौर ऊर्जा से चलने वाले सोलर होम लाईट की स्थापना के बाद दिन एवं रात में बिजली की सुविधा उपलब्ध हो गई है। डीसी पंखे मिलने से अब हमें सुविधा हो रही है और जीवन आसान बना है। लाईट लग जाने से हमारे जीवन में नई रोशनी आ गई है। ग्रामवासियों ने शासन के प्रति आभार व्यक्त किया।
खाना खजाना / शौर्यपथ / सर्दी का मौसम हो या बरसात का, भुट्टा दोनों ही मौसम में सबका पसंदीदा होता है। सर्दियों के मौसम में आग तापते हुए, भुट्टे का आनंद लेना भला कौन नहीं चाहता। लेकिन इस साल सर्दियों में कुछ अलग ट्राई करें, हाथों में भुना हुआ भुट्टा नहीं बल्कि भुट्टे के कबाब को जगह दीजिए। आइए जानते हैं आपकी सर्द शाम को खूबसूरत बनाने के लिए कैसे बनाए जाते हैं भुट्टे के कबाब।
भुट्टे के कबाब बनाने के लिए सामग्री-
-भुट्टे- 2
-उबले हुए आलू- 2
-ब्रेड- 4
-बारीक कटा हुआ प्याज- 1
-बारीक कटे हुए पुदीना पत्ते
-मक्खन- 1 चम्मच
-गरम मसाला- 1 चम्मच
-काली मिर्च पाउडर- 1/2 चम्मच
-हरी मिर्ची- 2 बारीक कटी हुई
-नमक- स्वादानुसार
-तेल- 2 चम्मच
भुट्टे के कबाब बनाने का तरीका-
भुट्टे के कबाब बनाने के लिए सबसे पहले दरदरे पीसे हुए भुट्टे और उबले हुए आलू को छीलकर एक बाउल में डालकर उसे अच्छे से मिला दें। अब ब्रेड को भी बारीक तोड़कर बाउल के मिश्रण में मिला दें। अब इसमें बारीक कटा प्याज, हरी मिर्ची, पुदीना पत्ते, नमक और बताई गई सभी सामग्री डालकर अच्छे से मिला लें। अब ओवन को 180 डिग्री पर preheat कर लें। कबाब के मिश्रण को आप सीख पर अच्छी तरह से लगाने के बाद ब्रश से इस पर मक्खन भी लगाएं।
अब पहले से preheat ओवन में 15-20 मिनट के लिए इन कबाब को रख दें। जब ये गोल्डन रंग में bake होने लगे तो आप इसे पलट दें। कबाब को हर 5-6 मिनट बाद पलटती रहें इससे हर तरफ से कबाब अच्छी तरह से bake होने के साथ क्रिस्पी भी बनेंगें। भुट्टे के कबाब बनकर तैयार हैं, गर्मागर्म सर्व करें।
शिक्षा /शौर्यपथ /आचार्य चाणक्य एक कुशल अर्थशास्त्री और राजनीतिक के साथ एक महान शिक्षाविद भी थे। चाणक्य ने नीति शास्त्र में जीवन से जुड़ी कई समस्याओं का हल बताया है। चाणक्य कहते हैं कि व्यक्ति को दोस्ती के समय भी सावधानी बरतनी चाहिए। बिना सोचे-समझे व्यक्ति से दोस्ती करने वाले व्यक्ति को जीवन में धोखा मिलता है। चाणक्य ने नीति शास्त्र में सच्चे मित्र की पहचान के गुण बताए हैं। जानिए कैसे करते हैं सच्चे मित्र की पहचान-
1.सही मार्ग दिखाएं- चाणक्य कहते हैं कि आज के समय में कई मित्र मिलते हैं। लेकिन सच्चा मित्र बहुत मुश्किल से मिलता है। चाणक्य के अनुसार, सच्चा मित्र वही होता है जो सही मार्ग दिखाता है। हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। चाणक्य का मानना है कि गलत कामों पर नहीं टोकने वाला मित्र दुश्मन के समान होता है।
2. दूसरों की पीड़ा में दुखी होने वाला- चाणक्य कहते हैं कि दूसरों का दुख समझने वाले व्यक्ति को समाज में हमेशा सम्मान मिलता है। नीति शास्त्र के अनुसार, दूसरों के दुख में साथ देने वाला व्यक्ति अपने मुश्किल समय में कभी अकेला नहीं होता है। व्यक्ति को हमेशा विनम्र स्वभाव के साथ दूसरों से मिलना चाहिए।
3. घमंड नहीं करने वाला- चाणक्य कहते हैं कि जो व्यक्ति अपने पद और धन पर घमंड करता है, वह कभी सुखी नहीं हो पाता है। ऐसे व्यक्ति को समाज में कभी सम्मान नहीं मिलता है। पद और पैसा अस्थाई होते हैं। ऐसे में जब व्यक्ति से पद और पैसा छिन जाता है तो, वह अकेला रह जाता है। चाणक्य कहते हैं कि सच्चा मित्र भी कभी किसी बात पर घमंड नहीं करता है।
4. सीखने के लिए तत्पर- चाणक्य कहते हैं कि व्यक्ति को हमेशा कुछ न कुछ नया सीखते रहना चाहिए। नीति शास्त्र के अनुसार, जो व्यक्ति हर किसी से कुछ न कुछ सीखने के लिए तैयार रहते हैं, ऐसे व्यक्ति कुशल होते हैं। इसी तरह सच्चा मित्र भी अपने मित्र से कोई भी नई चीज सीखने में कतराता नहीं है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
