Google Analytics —— Meta Pixel
June 01, 2026
Hindi Hindi

सेहत /शौर्यपथ /कई लोगों की आदत होती है कि वो खाने के साथ कई चीजें भी अपनी थाली में शामिल कर लेते हैं लेकिन ऐसा करने से पहले आपको जान लेना चाहिए कि आयुर्वेद के अनुसार किन चीजों को साथ खाने की मनाही की गई है। आइए, जानते हैं किन चीजों को एक साथ नहीं खाना चाहिए-
दूध के साथ ये चीजें खाना हानिकारक
उड़द की दाल, पनीर, अंडा, मीट
उड़द की दाल खाने के बाद दूध नहीं पीना चाहिए। हरी सब्जिियां और मूली खाने के बाद भी दूध नहीं पीना चाहिए। अंडा, मीट, और पनीर खाने के बाद दूध पीने से बचना चाहिए। इनको एक साथ खाने से डाइजेशन में दिक्कअत आ सकती है।
दही के साथ न खाएं ये चीजें
खट्टे फल
दही के साथ खासतौर पर खट्टे फल नहीं खाने खहिए। दरअसल, दही और फलों में अलग-अलग एंजाइम होते हैं। इस कारण वे पच नहीं पाते, इसलिए दोनों को साथ लेने की सलाह नहीं दी जाती।
मछली
दही की तासीर ठंडी है। उसे किसी भी गर्म चीज के साथ नहीं लेना चाहिए। मछली की तासीर काफी गर्म होती है, इसलिए उसे दही के साथ नहीं खाना चाहिए।
शहद के साथ क्या न खाएं
शहद को कभी गर्म करके नहीं खाना चाहिए। चढ़ते हुए बुखार में भी शहद का सेवन नहीं करना चाहिए। इससे शरीर में पित्त बढ़ता है। शहद और मक्ख न एक साथ नहीं खाना चाहिए। घी और शहद कभी साथ में नहीं खाना चाहिए। यहां तक कि पानी में मिलाकर भी शहद और घी का सेवन नुकसानदेह हो सकता है।
इन चीजों को भी एक साथ खाने से करें परहेज
- ठंडे पानी के साथ घी, तेल, खरबूज, अमरूद, खीरा, जामुन और मूंगफली नहीं खानी चाहिए।
- खीर के साथ सत्तू, शराब, खटाई और कठहल नहीं खाना चाहिए।
- चावल के साथ सिरका नहीं खाना चाहिए।

सेहत /शौर्यपथ /सर्दियों का मौसम हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद होता है। सर्दियों के मौसम में हमारे चारों तरफ पोषक तत्वों की भरमार होती है। इन दिनों तरह-तरह के फल और सब्जियां बाजार में मौजूद रहते हैं, जो हमारी सेहत के लिहाज से बेहद फायदेमंद हैं। यह न सिर्फ हमें फिट बनाए रखने में मदद करती हैं, बल्कि हमारे शरीर को कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के जोखिम से भी बचाती हैं। हम बना रहे हैं आपके लिए ऐसे 5 फूड्स की लिस्‍ट, जिन्‍हें आपको इस साल और अगले साल भी अपने आहार में शामिल करना है।
1. हरी पत्तेदार सब्जियां
हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन आपकी सेहत के लिए बेहद गुणकारी होता है। ताजा हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करने के लिए सर्दियों का समय सबसे अच्छा है। इनका सर्दियों में कई तरह से सेवन किया जा सकता है। हरी पत्तेदार सब्जियों में विटामिन, मिनरल और वे सभी पोषक तत्व मौजूद होते हैं जिनकी आपके शरीर को आवश्यकता होती है।
यह न सिर्फ आपका वजन प्रबंधन करने में मददगार हैं, बल्कि यह हमारे इम्‍यून सिस्टम को भी मजबूत बनाती हैं। जिससे आपको कई स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों सुरक्षित रखने में मदद मिलती है।
2. मौसमी फल
सर्दियों में शरीर के तापमान की तुलना में, बाहर का तापमान कम हो जाता है। जिससे हमारी इम्युनिटी कमजोर होने लगती है। जिसके चलते हम सर्दियों में सर्दी-खांसी जैसी समस्याओं की चपेट में आसानी से आ जाते हैं। सर्दियों में मौजूद फल और सब्जियां हमारी इम्युनिटी को बूस्ट करने में मदद करते हैं।
ऐसे में मीठा नींबू, संतरा, सेब, स्ट्रॉबेरी, अमरूद, अनार, पपीता का इन दिनों सेवन करना आपके स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद करेगा।
3. गुड़ और मूंगफली की चिक्की
चिक्की क्रंची मूंगफली और गुड़ का एक सेहतमंद संयोजन है। इस स्वादिष्ट स्नैक को खाने के लिए सर्दियों का समय सबसे अच्छा है। मूंगफली का शरीर पर गर्म प्रभाव पड़ता है और जब यह गुड़ के साथ मिलता है, तो आपके शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करती है। यह आपकी भूख को भी लंबे समय तक शांत रखती है। जिससे वजन प्रबंधन में भी आपको मदद मिलती है।
4. नट्स और ड्राय फ्रूट्स
सर्दियों में नट्स और ड्राय फ्रूट्स का सेवन करना बेहद फायदेमंद होता है। क्योंकि काजू, बादाम, किशमिश, मुनक्के, पिस्ता, छुआरे, अखरोट में भरपूर मात्रा में पोषक तत्व मौजूद होते हैं। सर्दियों में नियमित रूप से इनका सेवन करने से आपको इसके स्वास्थ्य संबंधी अनेक लाभ मिलते हैं। नट्स में फाइटोस्टेरॉल, यौगिक होते हैं जो रक्त में कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करते हैं।
साथ ही यह पोटेशियम, फोलेट, विटामिन ई और मैग्नीशियम सहित प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और खनिजों से भरपूर होते हैं। अखरोट विटामिन ई, ओमेगा -3 फैटी एसिड, और एंटीऑक्सिडेंट जैसे फ्लेवोनोइड्स से भरपूर होते हैं। जो अल्‍जाइमर को दूर करने और समग्र मस्तिष्क स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद करते हैं। यह आपको कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से राहत पाने में भी मददगार है।
5. ग्रीन टी
सर्दियों में ग्रीन टी न सिर्फ आपको रोगों से बचाती है, बल्कि यह आपके शरीर को गर्म बनाए रखने में भी मदद करती है। ग्रीन टी पीने से आप अपने शरीर की बीमारियों से लड़ने की क्षमता को बेहतर बना सकते हैं। क्योंकि इसमें मुख्य रूप से एंटी-ऑक्सीडेंट गुण मौजूद होते हैं, जो हमारे सिस्टम को मुक्त कणों से लड़ने में मदद करता है। इसमें थोड़ी मात्रा में कैफीन भी होता है, जो आपको ठंड के मौसम में होने वाली सुस्ती को मात देने में मदद कर सकता है।

शौर्यपथ / पशु, पक्षी, पितर, दानव और देवताओं की जीवन चर्या के नियम होते हैं, लेकिन मानव अनियमित जीवन शैली के चलते धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष से अलग हो चला है। रोग और शोक की गिरफ्तर में आकर समय पूर्व ही वह दुनिया को अलविदा कह जाता है या वह दुनिया को खराब करने का जिम्मेदार है।
सनातन धर्म ने हर एक हरकत को नियम में बांधा है और यह नियम ऐसे हैं जिससे आप किसी भी प्रकार का बंधन महसूस नहीं करेंगे, बल्कि यह नियम आपको सफल और निरोगी ही बनाएँगे।
।।कराग्रे वस्ते लक्ष्मी, कर मध्ये सरस्वती।
कर पृष्ठे स्थितो ब्रह्मा, प्रभाते कर दर्शनम्‌॥
प्रात:काल जब निद्रा से जागते हैं तो सर्व प्रथम बिस्तर पर ही हाथों की दोनों हथेलियों को खोलकर उन्हें आपस में जोड़कर उनकी रेखाओं को देखते हुए उक्त का मंत्र एक बार मन ही मन उच्चारण करते हैं और फिर हथेलियों को चेहरे पर फेरते हैं।
पश्चात इसके भूमि को मन ही मन नमन करते हुए पहले दायां पैर उठाकर उसे आगे रखते हैं और फिर शौच आदि से निवृत्त होकर पांच मिनट का ध्यान या संध्यावंदन करते हैं।
संध्यावंदन :
शास्त्र कहते हैं कि संध्यावंदन पश्चात ही किसी कार्य को किया जाता है। संध्या वंदन को संध्योपासना भी कहते हैं। संधि काल में ही संध्या वंदन की जाती है। वैसे मुख्यत: संधि 5 वक्त की होती है, लेकिन प्रात: काल और संध्‍या काल- उक्त दो वक्त की संधि प्रमुख है। अर्थात सूर्य उदय और अस्त के वक्त। इस समय मंदिर या एकांत में शौच, आचमन, प्राणायामादि कर गायत्री छंद से निराकार ईश्वर की प्रार्थना की जाती है।
घर से बाहर जाते वक्त :
घर (गृह) से बाहर जाने से पहले माता पिता के पैर छुए जाते हैं फिर पहले दायां पैर बाहर निकालकर सफल यात्रा और सफल मनोकामना की मन ही मन ईश्वर के समक्ष इच्छा व्यक्त की जाती है।
किसी से मिलते वक्त :
कुछ लोग राम-राम, गुड मॉर्निंग, जय श्रीकृष्ण, जय गुरु, हरि ओम, साँई राम या अन्य तरह से अभिवादन करते हैं। लेकिन संस्कृत शब्द नमस्कार को मिलते वक्त किया जाता है और नमस्ते को जाते वक्त। फिर भी कुछ लोग इसका उल्टा भी करते हैं।
कुछ विद्वानों का मानना है कि नमस्कार सूर्य उदय के पश्चात्य और नमस्ते सूर्यास्त के पश्चात किया जाता है। कश्मीर से कन्याकुमारी तक हिंदुओं ने अभिवादन के अपने-अपने तरीके इजाद कर लिए हैं जो सही है या गलत हम नहीं जानते।
कोरोना काल के बाद अब सब नमस्ते का महत्व समझने लगे हैं...

धर्म संसार / शौर्यपथ / मां बगलामुखी की उपासना हर कोई बताता है लेकिन आराधना और उपासना से जो चमत्कारी लाभ मिलते हैं वह कोई नहीं जानता। बगलामुखी उपासना के लिए सवा लाख जाप का विधान है।
बगलामुखी साधना के दौरान हवन में दूधमिश्रित तिल व चावल डालने पर धन, संपत्ति और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
संतान सुख की प्राप्ति के लिए अशोक और कनेर के पत्तों द्वारा हवन करना चाहिए।
सभी रोगों से छुटकारा पाने के लिए कुम्हार के चाक की मिट्टी, एक हाथ लंबाई की अरंड की लकड़ी, शहद या चीनी में भुना हुआ चावल से हवन करना चाहिए। इससे लंबे समय से बने रोग से सदा के लिए मुक्ति मिलती है।
गुग्गुल और तिल से हवन करने पर जेल के बंधन या शत्रु के नकारात्मक प्रभाव से मुक्ति मिलती है।
शहद मिला तिल या सरसों से हवन करने से अभीष्ट व्यक्ति वशीभूत हो जाता है। वशीकरण का यह उपाय बहुत ही अचूक परिणाम देता है।
हरिताल, नमक और हल्दी से हवन करने से शत्रुओं को निष्प्रभावित किया जाता है।
36 अक्षरों वाले इस मां बगलामुखी मंत्र में है गजब की ताकत, साधना में रखें ये सावधानियां, पढ़ें विधि
सतयुग में एक समय भीषण तूफान उठा। इसके परिणामों से चिंतित हो भगवान विष्णु ने तप करने की ठानी। उन्होंने सौराष्ट्र प्रदेश में हरिद्रा नामक सरोवर के किनारे कठोर तप किया। इसी तप के फलस्वरूप सरोवर में से भगवती बगलामुखी का अवतरण हुआ। हरिद्रा यानी हल्दी होता है। अत: मां बगलामुखी के वस्त्र एवं पूजन सामग्री सभी पीले रंग के होते हैं। बगलामुखी मंत्र के जप के लिए भी हल्दी की माला का प्रयोग होता है।
प्राचीन तंत्र ग्रंथों में दस महाविद्याओं का उल्लेख मिलता है। 1. काली 2. तारा 3. षोड़षी 4. भुवनेश्वरी 5. छिन्नमस्ता 6. त्रिपुर भैरवी 7. धूमावती 8. बगलामुखी 9. मातंगी 10. कमला। मां भगवती श्री बगलामुखी का महत्व समस्त देवियों में सबसे विशिष्ट है।
साधनाकाल की सावधानियां :-
- ब्रह्मचर्य का पालन करें।
- पीले वस्त्र धारण करें।
- एक समय भोजन करें।
- बाल नहीं कटवाए।
- मंत्र के जप रात्रि के 10 से प्रात: 4 बजे के बीच करें।
- दीपक की बाती को हल्दी या पीले रंग में लपेट कर सुखा लें।
- साधना में छत्तीस अक्षर वाला मंत्र श्रेष्ठ फलदायी होता है।
- साधना अकेले में, मंदिर में, हिमालय पर या किसी सिद्ध पुरुष के साथ बैठकर की जानी चाहिए।
मंत्र-सिद्ध करने की विधि :-
- साधना में जरूरी श्री बगलामुखी का पूजन यंत्र चने की दाल से बनाया जाता है।
- अगर सक्षम हो तो ताम्रपत्र या चांदी के पत्र पर इसे अंकित करवाए।
- बगलामुखी यंत्र एवं इसकी संपूर्ण साधना यहां देना संभव नहीं है। किंतु आवश्‍यक मंत्र को संक्षिप्त में दिया जा रहा है ताकि जब साधक मंत्र संपन्न करें तब उसे सुविधा रहे।
मां बगलामुखी का प्रभावशाली मंत्र
विनियोग -
अस्य : श्री ब्रह्मास्त्र-विद्या बगलामुख्या नारद ऋषये नम: शिरसि।
त्रिष्टुप् छन्दसे नमो मुखे। श्री बगलामुखी दैवतायै नमो ह्रदये।
ह्रीं बीजाय नमो गुह्ये। स्वाहा शक्तये नम: पाद्यो:।
ॐ नम: सर्वांगं श्री बगलामुखी देवता प्रसाद सिद्धयर्थ न्यासे विनियोग:।
आवाहन
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं बगलामुखी सर्वदृष्टानां मुखं स्तम्भिनि सकल मनोहारिणी अम्बिके इहागच्छ सन्निधि कुरू सर्वार्थ साधय साधय स्वाहा।
ध्यान
सौवर्णामनसंस्थितां त्रिनयनां पीतांशुकोल्लसिनीम्
हेमावांगरूचि शशांक मुकुटां सच्चम्पकस्रग्युताम्
हस्तैर्मुद़गर पाशवज्ररसना सम्बि भ्रति भूषणै
व्याप्तांगी बगलामुखी त्रिजगतां सस्तम्भिनौ चिन्तयेत्।
मंत्र
- ह्रीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय जिह्ववां कीलय बुद्धि विनाशय ह्रीं ॐ स्वाहा।
इन 36 अक्षरों वाले मंत्र में अद्‍भुत प्रभाव है। इसको 1 लाख जाप द्वारा सिद्ध किया जाता है। जप की संपूर्णता के पश्चात् दशांश यज्ञ एवं दशांश तर्पण भी आवश्यक है। अधिक सिद्धि हेतु 5 लाख जप भी किए जा सकते हैं।
मां बगलामुखी यंत्र मुकदमों में सफलता तथा सभी प्रकार की उन्नति के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। कहते हैं इस यंत्र में इतनी क्षमता है कि यह भयंकर तूफान से भी टक्कर लेने में समर्थ है।

शिक्षा /शौर्यपथ / धन मिलना, बढ़ना और बचना बहुत जरूरी है। कई लोगों को यह शिकायत रहती है कि पैसे इस हाथ आता है और उस हाथ चला भी जाता है। कुछ को शिकायत रहती है कि पैसा आता ही नहीं तो बढ़ेगा कैसे। सांसारिक जीवन में अर्थ बिना सब व्यर्थ है। इसीलिए हम जानते हैं वे चार तरीके जिनसे धन सुरक्षित भी रहेगा।
हिन्दू धर्मग्रंथ महाभारत की विदुर नीति में लक्ष्मी का अधिकारी बनने के लिए विचार और कर्म से जुड़े 4 अहम सूत्र बताए गए हैं। जानिए, ये चार तरीके जिनको अपनाकर ज्ञानी हो या अल्प ज्ञानी दोनों ही धनवान बन सकते हैं।
श्लोक:-
श्रीर्मङ्गलात् प्रभवति प्रागल्भात् सम्प्रवर्धते।
दाक्ष्यात्तु कुरुते मूलं संयमात् प्रतितिष्ठत्ति।।
इस श्लोक का अर्थ विस्तार:-
1.पहला तरीका
अच्छे या मंगल कर्म से स्थाई रूप से लक्ष्मी आती है। इसका मतलब यह कि परिश्रम और ईमानदारी से किए गए कार्यों से धन की प्राति होती है।
2.दूसरा तरीका
प्रगल्भता अर्थात धन का सही प्रबंधन और निवेश एवं बचत से वह लगातार बढ़ता है। यदि हम धन को उचित आय बढ़ने वाले सही कार्यों में लगाएंगे तो निश्चित ही लाभ मिलेगा।
3.तीसरा तरीका
चातुर्य या चतुराई अर्थात अगर धन का सोच-समझकर उपयोग किया जाए और आय-व्यय का विशेष रूप से ध्यान रखा जाए तो धन की बचत भी होगी और वह बढ़ता भी रहेगा। इससे धन का संतुलन बना रहेगा।
4.चौथा तरीका
चौथा और अंतिम सूत्र संयम अर्थात मानसिक, शारीरिक और वैचारिक संयम रखने से धन की रक्षा होती है। इसका मतलब यह कि सुख पाने और शौक पूरा करने की चाहत में धन का दुरुपयोग न करें। धन को घर और परिवार की आवश्यक जरूरतों पर ही खर्च करें।
तो यह था विदुर नीति अनुसार धन को प्राप्त करने, बढ़ाने और बचाने के चार तरीके। दरअसल, हमें धन को बचाने से ज्यादा उसे बढ़ाने की दिशा में ज्यादा सोचना चाहिए। आप यहां यह भी जान लें कि धन उस परिवार में ही टिकता हैं जहां प्रसन्नता, प्रेम, भाईचारा और स्वच्छता विद्यमान है। यह भी जरूरी है कि घर होना चाहिए वास्तु अनुसार।

नारायणपुर / शौर्यपथ / अबुझमाड़ के नाम से प्रसिद्ध नारायणपुर जिला जंहा मुख्यतः अबुझमाड़िया जनजातियों की बाहुल्यता है। यहां के आदिवासी वनों एवं वनों पर आधारित उद्योगों पर आश्रित थे, जो अब राज्य शासन की योजनाओं का लाभ लेकर फसल एवं सब्जी का भी उत्पादन करने लग गए हैं। अब ये निवासी कृषि और वनोपज संग्रहण के माध्यम से आमदनी प्राप्त करने लग गये हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का वन क्षेत्रों में निवास करने वाले लोगों को वनभूमि का अधिकार प्रदान करना सर्वाेच्च प्राथमिकता में है। जिससे वनग्राम के रहवासी लाभान्वित हो रहे है। नारायणपुर जिला मुख्यालय से लगे ग्राम पालकी के रामू कुमेटी अपने काबिज वनभूमि का अधिकार पाकर बहुत खुश है। रामू कुमेटी को 3 एकड़ जमीन का वनाधिकार पत्र प्रदान किया गया है। वनभूमि का मालिकाना हक मिलने के बाद अब उनका जीवन खुशहाल है। रामू ने बताया की अब वह खेत में द्विफसलीय धान की खेती कर रहा है। वहीं सब्जी की फसल लगाकर अतिरिक्त आमदनी भी प्राप्त कर रहा है। वन अधिकार पत्र मिलने से वह निश्चिंत होकर खेती कर रहे हैं। उनके खेत मे नलकूप खनन भी कराया गया है, जिससे उन्हें फसलों की सिंचाई में बहुत सहूलियत होती है।
रामू ने बताया कि मनरेगा के अंतर्गत उनके खेत में डबरी का निर्माण किया गया है, जिससे फसलों को पानी देने में अब दिक्कत नहीं होती है और फसल का अच्छा उत्पादन भी हो रहा है। सरकार ने हम भूमिहीनों की चिंता करते हुए इस दिशा में प्रयास कर जो लक्ष्य निर्धारित किये थे, वे अब साकार होते दिख रहे हैं। रामू ने बताया कि आवास योजना के तहत उनके परिवार के लिए पक्का मकान बनाया गया है, जिसमें वह अपने परिवार के साथ रहते हैं। वे बताते हैं कि पहले कच्चे मकान में बारिश के मौसम में असुविधा होती थी एवं मरम्मत कार्य में भी बहुत खर्च होता था, अब पक्का आवास होने के कारण बारिश के दौरान ज्यादा मरम्मत करने की आवश्यकता नही पड़ती।

कुपोषण मिटाने, रोजगार, शिक्षा और स्वच्छता सुनिश्चित करने में मिली सफलताएं
गरीबों को घर देने के लिए 01 जनवरी 2021 को प्रधानमंत्री के हाथों मिलेगा पुरस्कार

रायपुर / शौर्यपथ / 

छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ के विकास के लिए पिछले दो वर्षों में की गई कोशिशों को राष्ट्रीयस्तर पर लगातार सराहा जा रहा है। इस दौरान प्रदेश सरकार ने गरीबों को घर उपलब्ध कराने,  वर्षा और भूजल को सहेजने, पंचायतों का सशक्तिकरण करने, शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार करने, स्वच्छता सुनिश्चित करने, कुपोषण दूर करने, पिछड़े हुए क्षेत्रों का तीव्र विकास करने, सर्वाधिक खाद्यान्न उत्पादित करने, मनरेगा और आजीविका मिशन के तहत रोजगार उपलब्ध कराने, बच्चों से जुड़ी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन करने, ग्राम स्वराज अभियान का क्रियान्वयन करने, बेटियों को शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने समेत अनेक क्षेत्रों में उपलब्धियां हासिल की हैं।

इन उपलब्धियों के लिए प्रदेश को पुरस्कृत किया गया है। हाल ही में भारत सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत छत्तीसगढ़ में संचालित किए जा रहे 'मोर जमीन मोर मकान' मॉडल की सराहना करते हुए, पुरस्कृत करने की घोषणा की है। यह पुरस्कार 01 जनवरी 2021 को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के हाथों छत्तीसगढ़ को एक वर्चुअल समारोह में प्रदान किया जाएगा। इस तरह इन दो वर्षो की अवधि में राज्य को केंद्र सरकार तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों की ओर से दो दर्जन से अधिक पुरस्कारों से नवाजा गया है। 

 भारत सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत छत्तीसगढ़ के समावेशी मॉडल मोर जमीन मोर मकान के बेहतर क्रियान्वयन पर बधाई देते हुए इसकी सराहना की है। साथ ही डोंगरगढ़ को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली नगरपालिकाओं की श्रेणी में पुरस्कृत करने की भी घोषणा की गई है। इससे पूर्व नदी-नालों के पुनरुद्धार के लिए किए गए कार्यों के लिए बिलासपुर और जल-संरक्षण कार्यों के लिए  सूरजपूर जिले को नेशनल वाटर अवार्ड 2019 के लिए किया चयनित किया गया था।

भारत सरकार आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा आयोजित स्वच्छ सर्वेक्षण 2020 के तहत छत्तीसगढ़ ने देश के बड़े राज्यों को पछाड़ते हुए देश के स्वच्छतम् राज्य होने का दर्जा प्राप्त कर पुरस्कार हासिल किया था। इसी तरह सर्वाधिक ओडीएफ प्लस गांव के लिए छत्तीसगढ़ को केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के गंदगीमुक्त भारत अभियान के तहत दूसरा पुरस्कार प्राप्त हुआ था।


 

 छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी सुराजी गांव योजना और अन्य फ्लैगशिप योजनाओं की मॉनिटरिंग के लिए तैयार की गई- मुख्यमंत्री दर्पण वेबसाइट एवं मोबाइल एप को  राष्ट्रीय स्तर पर “एलिट्स एक्सीलेंस अवार्डस-2020 से नवाजा जा चुका है। छत्तीसगढ़ को यह सम्मान देश के प्रतिष्ठित आईटी संस्थान एलिट्स टेक्नोमीडिया, नई दिल्ली ने ‘डिजिटल इंडिया पहल’ के अंतर्गत प्रदान किया। पंचायतों के सशक्तिकरण और विभागीय योजनाओं को लागू करने में सूचना व संचार तकनीक (ICT - Information & Communication Technology) के प्रभावी उपयोग के लिए छत्तीसगढ़ का चयन भारत सरकार के पंचायतीराज मंत्रालय ने ई-पंचायत पुरस्कार के लिए किया था। पंचायतों के कार्यों में पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही लाने आईसीटी के उपयोग में छत्तीसगढ़ को पूरे देश में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ।

भारत सरकार के पंचायतीराज मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ की तीन ग्राम पंचायतों को अलग-अलग क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्यों के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चुना।  बच्चों से जुड़ी योजनाओं और कार्यक्रमों के बेहतरीन क्रियान्वयन के लिए कबीरधाम जिले के कवर्धा विकासखंड के कान्हाभैरा ग्राम पंचायत का चयन बाल मित्र पंचायत पुरस्कार के लिए किया गया। ग्रामसभा के प्रभावी आयोजन और इसके सशक्तिकरण के लिए रायपुर जिले के आरंग विकासखंड के बनचरोदा पंचायत को नानाजी देशमुख राष्ट्रीय गौरव ग्रामसभा पुरस्कार से नवाजा गया, वहीं कांकेर जिले के चारामा विकासखंड के भिलाई पंचायत को केन्द्रीय पंचायतीराज मंत्रालय द्वारा ग्राम पंचायत विकास योजना पुरस्कार के लिए चुना गया।

कम्प्यूटर सोसायटी ऑफ इंडिया द्वारा छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग को ई-गर्वनेंस अवार्ड से नवाजा गया।  वर्ष 2020 की शुरुआत में बेमेतरा जिले को स्वच्छता दर्पण अवार्ड प्राप्त हुआ। यह अवार्ड भारत सरकार, जल शक्ति मंत्रालय, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) नई दिल्ली द्वारा प्रदान किया गया। माह जनवरी 2020 में ही देश के 115 आकांक्षी जिलों में से दन्तेवाड़ा को सुपोषण अभियान में उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए सिल्वर स्कॉच अवार्ड से नवाजा गया। छत्तीसगढ़ को सर्वाधिक खाद्यान्न उत्पादन के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कृषि कर्मण पुरस्कार से सम्मानित किया। 

मनरेगा, आजीविका मिशन, आवास योजना और पीएमजीएसवाई में उत्कृष्ट कार्यों के लिए छत्तीसगढ़ को 22 पुरस्कारों से नवाजा गया। प्रदेश को प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की विभिन्न श्रेणियों में नौ, मनेरगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) में सात, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) में पांच और प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए एक पुरस्कार से नवाजा गया। इनमें राज्य स्तर पर दिए जाने वाले 13, जिला स्तर पर दिए जाने वाले तीन, विकासखंड को एक और ग्राम पंचायतों को मिले चार पुरस्कार शामिल हैं। धान की दुर्लभ किस्मों के संरक्षण के लिए छत्तीसगढ़ के आदर्श महिला समूह को पादप जीनोम सेवियर पुरस्कार से नवाजा गया। भारत सरकार के कृषि मंत्रालय के पौधा किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण द्वारा यह राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया जाता है।  

भारत सरकार के पंचायती राज मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार 2019 के तहत दीनदयाल उपाध्याय पंचायत सशक्तिकरण के सामान्य श्रेणी में छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के जनपद पंचायत नगरी और कबीरधाम जिले के जनपद पंचायत सहसपुर लोहारा को उक्त सम्मान से नवाजा गया। पंचायत सशक्तिकरण के लिए बेहतरीन कार्य करने पर कांकेर जिले को छत्तीसगढ़ राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर सम्मानित किया गया।
राष्ट्रीय पंचायत अवार्ड 2019 के तहत प्रदेश के 11 जिला,  जनपद और ग्राम पंचायतों  को राष्ट्रीय पुरस्कार दिया गया।  योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और ग्रामसभाओं के सार्थक आयोजन और उत्कृष्ट कार्यों के लिए पंचायतों को ये पुरस्कार दिया गया। भारत सरकार के पंचायतीराज मंत्रालय द्वारा बीजापुर जिले के भैरमगढ़ विकासखंड के कुटरु ग्राम पंचायत को वर्ष 2019 के बाल मित्र ग्राम पंचायत पुरस्कार के लिए चुना गया।  स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अन्तर्गत कांकेर जिले को स्वच्छता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने व महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए सम्मानित किया गया। लिंगानुपात में निरंतर वृद्धि के लिए रायगढ़ जिला राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित हुआ। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल को बी.पी. मण्डल सामाजिक न्याय रत्न से सम्मानित करते हुए उनका अभिनंदन किया गया। श्री बघेल को छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण बढ़ाने के फैसले के लिए उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया। पोषण अभियान में उल्लेखनीय कार्य के लिए पांच राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुए।छत्तीसगढ़ ने दो श्रेणियों के तहत उत्कृष्टता पुरस्कारों में दूसरा स्थान हासिल किया। राज्य को आईसीडीएस-सीएएस कार्यान्वयन और क्षमता निर्माण, अभिसरण,व्यवहार परिवर्तन और सामुदायिक जुटाव श्रेणियों में दूसरा स्थान प्राप्त करने पर पुरस्कार से सम्मानित किया गया। छत्तीसगढ़ को जिला, ब्लॉक और पर्यवेक्षक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन, एएनएम स्तर पर तीन पुरस्कार और नेतृत्व एवं अभिसरण के लिए एलएस स्तर भी मिला।


 

राष्ट्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण 2019 की रैकिंग में पहला स्थान पाने पर छत्तीसगढ़ को देश का सबसे स्वच्छ राज्य होने का सम्मान मिला । अम्बिकापुर शहर को देशभर में दूसरा और भिलाई नगर को 11 वां स्थान मिला। स्वास्थ्य और पोषण के  क्षेत्र में बेहतर सुधार के फलस्वरुप  कोण्डागांव जिले ने देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया।  ओवरऑल रैंकिंग में देश भर के महत्वाकांक्षी जिलों  में मिला दूसरे स्थान पर रहा। समूचे भारत में छत्तीसगढ़ ही इकलौता ऐसा राज्य है, जिसे राष्ट्रीय मतदाता दिवस ( 25 जनवरी ) के अवसर पर पुरस्कारों की विभिन्न श्रेणियों में देश में पहली बार सर्वाधिक चार राष्ट्रीय पुरस्कार मिले। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान में उत्कृष्ट प्रदर्शन पर रायगढ़ जिले को मिला राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुआ। छत्तीसगढ़ की तीन आंगनबाडी़ कार्यकर्ताओं को आंगनबाडी़ सेवाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिये राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

धमतरी / शौर्यपथ / वैसे तो राह चलते, सड़क किनारे हमने अनेक बार नीम के पेड़ देखे हैं। उसकी औषधीय गुणों के बारे में भी अक्सर दादी-नानी से सुनते आ रहे हैं। मगर व्यवसायिक तौर पर इसका फायदा कैसे हो ? यह शायद अमूमन लोग नहीं जानते। बात चाहे नीम के पत्ते, छाल या फिर बीज की हो, यह पूरा पेड़ औषधीय गुणों से लबरेज है। गर्मी के दिनों में तपिश के बीच चलती हवा के साथ नीम के बीज पेड़ों से पककर गिरते देखे जा सकते हैं। यह निंबोली अक्सर पत्ते और धूल के बीच पड़े रहकर कचरे में तब्दील हो जाती है।
ऐसे में धमतरी जिले में एक अनूठी पहल जिला प्रशासन ने कलेक्टर श्री जय प्रकाश मौर्य के मार्गदर्शन और मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्रीमती नम्रता गांधी के निरीक्षण में की। यह था जिले की ग्रीन आर्मी की महिलाओं को नीम बीज संग्रहण का जिम्मा सौंपने का। जिले में लगभग 16 हजार नीम के पेड़ हैं। स्वच्छ भारत मिशन के तहत 623 गांव में ग्रीन आर्मी गठित है। इसमें 08-10 महिलाएं बतौर ग्रीन आर्मी साफ-सफाई के काम से जुड़ी हैं। जून महीने में जब नीम के बीज पककर गिरने लगे तो इन महिलाओं को साफ-सफाई के साथ बीज एकत्र करने का काम दिया गया। ग्रीन आर्मी की महिलाओं ने सात टन नीम बीज जिले में एकत्र किए। इसे सुखाकर छाती स्थित मल्टी युटिलिटी सेंटर प्रोसेसिंग के लिए भेजा गया। यहां कार्यरत महिला समूह ने छिलके से बीज (चिरोंजी) निकाली, जो लगभग दो टन एक सौ किलो था। इसी बीज से 630 लीटर तेल और एक टन दो सौ किलो खली निकला। नीम बीज का तेल और खली दोनों ही काफी उपयोगी होते हैं। कुदरती गुणों से भरे नीम बीज के तेल को जानकार लोग हाथों-हाथ खरीदने छाती पहुंचने लगे। यहां प्रति लीटर नीम तेल चिल्हर में ढाई सौ रूपए और 50 लीटर से अधिक क्रय करने पर 230 रूपए प्रति लीटर में बिक्री के लिए रखा गया।
धमतरी के हाउसिंग बोर्ड काॅलोनी के आयुर्वेद चिकित्सक डाॅ.दिनेश नाग, जो कि निजी क्लीनिक संचालित करते हैं, उन्होंने जब इसके बारे में सुना तो वे खुद को रोक ना पाए और छाती से नीम तेल खरीद लिए। उनका कहना है कि आज कल चर्म रोग जैसे दाद-खाज, सोरासिस काफी लोगों को होता रहता है। ऐसे में नीम तेल को आयुर्वेदिक और औषधीय गुणों की वजह से उपचार हेतु उपयोग में लाया जाता है। उनका कहना है कि चूंकि उन्होंने ’ओज’ के द्वारा तैयार किए गए इस नीम तेल की गुणवत्ता को परखा, तो उन्हें यह काफी शुद्ध लगा। इस वजह से ढाई सौ रूपए लीटर की दर से उन्होंने दस लीटर तेल खरीद लिया। मार्केट में इसकी कीमत काफी ज्यादा है। आगे भी जरूरत के हिसाब से वे नीम तेल यहां से खरीदेंगे, जिससे कि स्थानीय स्तर पर महिला समूह द्वारा संग्रहित, प्रोसेस्ड और पैक्ड नीम का शुद्ध तेल उपचार के लिए उपयोग कर सकें। पंचकर्म थेरेपी के दौरान उनके मरीजों को भी यह तेल काफी प्रभावित कर रही, ऐसा डाॅ.नाग का कहना है।
नगरी के ग्राम पंचायत बांधा की ग्रीन आर्मी स्वच्छाग्राही श्रीमती नर्मदा मण्डावी का कहना है कि गांव की साफ-सफाई करते हुए नीम बीज संग्रहण के दौरान यह एहसास हुआ कि नीम के पत्ते, शाख के अलावा इसके निंबोली भी बड़े काम के हैं।इसी तरह छाती मल्टीयुटिलिटी सेन्टर से जुड़ी महिला समूह की सदस्य श्रीमती मधु चन्द्राकर का कहना है कि नीम बीज प्रोसेसिंग के समय समूह की महिलाओं को बीज की उपयोगिता की जानकारी मिली। पहले हमें नीम बीज के इतने सारे औषधीय गुणों के बारे में जानकारी नहीं थी, यह हम सबके लिए एक नया अनुभव रहा।
ध्यान देने वाली बात है कि नीम तेल के औषधीय गुणों के जानकार तो इसे छाती पहुंच कर खरीद ही रहे हैं, वहीं मण्डला के वन विभाग ने भी छाती मल्टी युटिलिटी सेंटर से 20 लीटर नीम तेल खरीदा है। इसके अलावा नीम बीज की खली जो लगभग एक टन दो सौ किलो निकली है, उसे कृषि, उद्यानिकी विभाग और किसानों द्वारा जैविक खाद के रूप में उपयोग करने 20 रूपए प्रति किलो में खरीदा जा रहा है। नीम बीज के औषधीय गुणों को ध्यान में रख आयुर्वेदिक और एलोपेथिक दवाइयां बनाने वाली फर्मों से टाई-अप करने की जिले में योजना है। ताकि भविष्य में नीम बीज का तेल निकालने का कार्य और बड़े पैमाने पर कर, इसके संग्रहण, प्रोसेसिंग और पैकेजिंग में लगी समूह की महिलाओं को ज्यादा लाभ पहुंचाया जा सके।

भिलाई / शौर्यपथ / भिलाई इस्पात संयंत्र के कार्मिक अपने क्रिएटिव प्रयासों के लिए जाने जाते हैं। प्रत्येक विभागों में ऐसे सृजनशील व्यक्ति हैं जो चुनौतियों को स्वीकार कर अपने हूनर से कुछ बेहतर कर जाते हैं। एक ऐसे ही इनोवेटिव प्रयास की कहानी है, बीएसपी के हाइड्रॉलिक विभाग की।
भिलाई इस्पात संयंत्र के हाइड्रॉलिक विभाग में यूनिफ्लेक्स मेक-200 मशीन एक बहुत ही महत्वपूर्ण व उपयोगी मशीन है। इसका इस्तेमाल विभाग में हाइड्रॉलिक होज के क्रिम्पिंग के लिए किया जाता है। यह मशीन यूनिफ्लेक्स जर्मनी द्वारा निर्मित है। पिछले ढाई वर्षों से यह मशीन याँत्रिक ग?बडी, क्षति एवं सील किट की अनुपलब्धता के कारण प्रचालन में नहीं लाई जा रही थी। इसके अलावा प्रचालन में न होने के कारण यूनिफ्लेक्स पूर्जों की आपूर्ति करने में असमर्थ था। इन चुनौतियों पर विजय पाने हेतु हाइड्रॉलिक्स टीम ने विचार-मंथन प्रारंभ किया और इसके इन-हाउस रिपेयर का बीड़ा उठाया।
सृजनशील टीम के प्रयास
उल्लेखनीय है कि संयंत्र के हाइड्रॉलिक्स विभाग के महाप्रबंधक आर सी दोहरे के मार्गदर्शन व सहायक प्रबंधक श्री महेश गुहा के नेतृत्व में टीम के सदस्यों श्री जे पुन्ना राव (वरिष्ठ तकनीशियन) एवं श्री अभिषेक कुमार सिंह (ओसीटी) व उनकी टीम ने इस मशीन को रिपेयर करने की चुनौती को स्वीकार किया। इस रिपेयर कार्य के लिए टीम के समर्पित सदस्यों ने स्थानीय बाजार से सील किट की व्यवस्था की और इसके रिपेयर कार्य को बखूबी संपादित किया। संयंत्र के मार्स-2 में इसके सिलेंडर्स की मशीनिंग की गई। अब यह मशीन सफलतापूर्वक कार्य संपादित कर रहा है। परिणाम स्वरूप पूरे संयंत्र में हाइड्रॉलिक्स हो? की आपूर्ति को सुनिश्चित करने में मदद मिली।
उत्कृष्ट कार्य हेतु मिली प्रशंसा
संयंत्र के मुख्य महाप्रबंधक (मेकेनिकल) एस के कटारिया ने इस विशिष्ट कार्य के संपादित होने पर कहा कि अप्रत्याशित चुनौतियों को स्वीकार कर टीम के सदस्यों ने बेहतर तालमेल, प्रभावी सहयोग तथा उत्कृष्ट कार्यकुशलता का परिचय देते हुए इस कार्य को बखूबी अंजाम दिया, यह कम्पनी के प्रति उनकी समर्पण की भावना को प्रदर्शित करता है। टीम की यह उपलब्धि निश्चित ही सराहनीय है। मुख्य महाप्रबंधक (मेकेनिकल) एस के कटारिया ने इस महत्वपूर्ण कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए टीम को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।

धमतरी / शौर्यपथ / माध्यमिक स्तर के कक्षा नवमीं से बारहवीं तक के विद्यार्थियों की कलात्मक प्रतिभा को पहचानने, उसे पोषित करने और शिक्षण कला को बढ़ा देने के उद्देश्य से स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग द्वारा कला उत्सव 2020 का आयोजन किया गया। इसके तहत जिले में विकासखण्ड स्तर पर 23 नवम्बर और जिला स्तर का कार्यक्रम 27 नवम्बर को आयोजित किया गया था। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक विकासखण्ड स्तर पर लगभग 70 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था, जिसमें से 24 प्रतिभागी जिला स्तरीय कला उत्सव प्रतियोगिता के लिए चयनित हुए थे। बताया गया है कि राज्य परियोजना कार्यालय समग्र शिक्षा छत्तीसगढ़ रायपुर द्वारा 20 दिसम्बर को राज्य स्तरीय प्रतियोगिता का परिणाम जारी किया गया, जिसमें से धमतरी जिले के तीन विद्यार्थियों का चयन राष्ट्रीय स्तर पर हुआ है। इनमें कक्षा ग्यारहवीं के विद्यार्थी प्रेम निषाद, कुमारी वारूणी यदु और कक्षा नवमीं की विद्यार्थी कुमारी सृष्टि साहू शामिल है। 

हमारा शौर्य

हमारे बारे मे

whatsapp-image-2020-06-03-at-11.08.16-pm.jpeg
 
CHIEF EDITOR -  SHARAD PANSARI
CONTECT NO.  -  8962936808
EMAIL ID         -  shouryapath12@gmail.com
Address           -  SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)