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सेहत /शौर्यपथ / हम सभी जानते हैं कि शराब पीना सेहत के लिए हानिकारक है लेकिन अल्कोहल का सेवन कुछ चीजों के साथ बेहद घातक है। कुछ चीजें ऐसी हैं, जिनका सेवन अल्कोहल के साथ करने से शरीर में टॉक्सिन बनते हैं जिससे कई बीमारियां होने का रहता है। आज हम आपको ऐसी चीजें बता रहे हैं, जिसका सेवन अल्कोहल के साथ नहीं करना चाहिए-
दूध
अल्कोहल के साथ कभी भी दूध या दूध से बनी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए, इससे न सिर्फ एलर्जी का खतरा होता है। इससे शरीर पर लाल चकत्ते और खुजली की समस्या होती है। साथ ही अल्कोहल पीने के बाद भी दूध पीने से बचना चाहिए।
काजू और मूंगफली
ज्यादातर लोग अल्कोहल ड्रिंक्स के साथ काजू और मूंगफली खाते हैं लेकिन ये दोनों ही सेहत के लि घातक है। इन दोनों ही चीजों में कॉलेस्ट्रॉल होता है, जो भूख को मारता है और शराब पीने के बाद भारी महसूस होता है। वहीं, शराब के साथ सोडा या कोल्ड ड्रिंक मिलाकर पीने से शरीर में पानी की मात्रा कम होती है।
फ्राइड फूड
शराब के साथ फ्राइड फूड लेने से भी एसिडिटी की शिकायत रहती है। इसके अलावा कई लोग शराब के साथ चिप्स खाते हैं। इन्हें खाने से बहुत अधिक प्यास लगती है। इस वजह से लोग ज्यादा शराब पी लेते हैं।
मीठा खाने से बचें
शराब के साथ कभी भी मीठा नहीं खाना चाहिए। ये शराब का नशा को दुगुना कर देता हैं और आप आपे से बाहर हो जाते हैं। इसके अलावा मीठी चीजें शराब के जहर को और ज्यापदा बढ़ाती हैं।
मक्खन और शहद
कुछ लोग अल्कोहल के साथ मक्खन और शहद में रोस्ट किए हुए ड्राई फ्रूड्स खाते हैं, जो सेहत के लिए बहुत खतरनाक है। इससे कब्ज और स्किन प्रॉब्लम्स का खतरा रहता है।
धर्म संसार /शौर्यपथ / साल का आखिरी सूर्य ग्रहण 14 दिसंबर 2020, सोमवार को पड़ने जा रहा है। 14 दिसंबर को अमावस्या भी है। इस दिन रात को लगने वाले इस ग्रहण को भारतीय ज्योतिष में खंडग्रास ग्रहण माना गया है।
खंडग्रास सूर्यग्रहण क्या है?
जब पृथ्वी और सूर्य के बीच चंद्रमा आता है तो इस स्थिति को सूर्य ग्रहण कहते हैं। लेकिन चंद्रमा जब आंशिक रूप से सूर्य को ढके तो इस खंड -ग्रास सूर्य ग्रहण कहते हैं। यानी 14 दिसंबर को होने वाला सूर्य ग्रहण आंशिक ग्रहण (खंडग्रास सूर्य ग्रहण) होगा।
सूर्य ग्रहण का समय -
रिपोर्ट्स के मुताबिक भारतीय समायानुसार 14 दिसंबर को शाम 07:03 से ग्रहण शुय होगा और रात्रि 12:23 बजे समाप्त होगा। यह ग्रहण करीब 5 घंटे से ज्यादा लंबे वक्त तक रहेगा।
खंडग्रास सूर्य ग्रहण का असर और महत्व-
वैसे तो ग्रहण एक आम खगोलीय घटना है जिसका इंसानी जीवन पर खास महत्व नहीं होता लेकिन ज्योतिषीय गणना में इसे काफी महत्वपूर्ण माना गया है। ग्रहण का असर राशियों और लोगों के भविष्य के समय पर पड़ता है। लेकिन इस बार यह भारत में दिखाई नहीं देने के कारण इसका असर नहीं होगा। सूर्यग्रहण रात्रि में होने के कारण इसका यहां सूतक भी नहीं लगेगा और न ही किसी को विशेष सावधानियां अपनानी पड़ेंगे। अगर यह ग्रहण दिखाई देता तो गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी बड़ती लेकिन इस बार इसका असर नहीं होगा।
यहां दिखेगा ग्रहण -
14 दिसंबर 2020 को पड़ने वाले ग्रहण को दक्षिण अमेरिका, दक्षिण अफ्रीकी देशों व प्रशांत महासागर के कुछ इलाकों में देखा जा सकेगा।
2021 में सूर्य ग्रहण -
साल 2021 में दो सूर्य ग्रहण पडेंगे। पहला 10 जून को होगा तो दूसरा 10 दिसंबर 2021 को।
धर्म संसार / शौर्यपथ / आज शनि प्रदोष व्रत है। यह व्रत भगवान शिव को समर्पित है। शनिवार के दिन प्रदोष व्रत पड़ने के कारण इसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है। शनि की पीड़ा से मुक्ति पाने के लिए यह व्रत बहुत लाभकारी रहेगा।
पूजा का समय: 12 दिसंबर 2020 शाम 05:25 से 08:09 तक
पंचांग
आज राहुकाल का समय प्रात: 9 बजे से 10.30 बजे तक रहेगा।
सूर्य दक्षिणायन। सूर्य दक्षिण गोल। हेमंत ऋतु।
12 दिसंबर, शनिवार, 2020, 21 मार्गशीर्ष (सौर) शक 1942; 28 मार्गशीर्ष मास प्रविष्टे 2077; 26 रवि उस्सानी सन् हिजरी 1442; मार्गशीर्ष कृष्ण त्रयोदशी सूर्योदय पूर्व 3.53 बजे तक उपरांत चतुर्दशी; विशाखा नक्षत्र सुबह 4.05 बजे तक तदनंतर अनुराधा नक्षत्र, अतिगण्ड योग मध्याह्न 12.06 बजे तक उपरांत सुकर्मा योग, तैतिल करण, चंद्रमा रात 10.41 बजे तक तुला राशि में, तत्पश्चात वृश्चिक राशि में।
इस बार लोकवाणी छतीसगढ़ सरकार दो वर्ष का कार्यकाल विषय पर होगी केन्द्रित
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मासिक रेडियोवार्ता लोकवाणी की 13 वीं कड़ी का प्रसारण 13 दिसंबर, रविवार को होगा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल लोकवाणी में इस बार ‘छत्तीसगढ़ सरकार दो वर्ष का कार्यकाल' विषय पर प्रदेशवासियों से बात करेंगे। लोकवाणी का प्रसारण छत्तीसगढ़ स्थित आकाशवाणी के सभी केन्द्रों, एफ.एम. रेडियो और क्षेत्रीय समाचार चैनलों से सुबह 10.30 से 11 बजे तक होगा।
खाना खजाना /शौर्यपथ / सर्दियों में खुद को हेल्दी रखने के लिए अक्सर भारतीय परिवारों में बड़े-बुर्जुग गोंद के लड्डू का सेवन करने की सलाह देते हैं। गोंद के लड्डू हल्दी होने के साथ-साथ पौष्टिक गुणों से भी भरपूर होते हैं। इन लड्डूओं का सेवन करने से सर्दियों में होने वाले हड्डियों और मसल्स के दर्द को दूर करनेमें मदद मिलती है। तो देर किस बात की आइए जानते हैं कैसे बनाए जाते हैं गोंद के लड्डू।
गोंद के लड्डू बनाने के लिए सामग्री-
-200 ग्राम- आटा
-1 कप- गाय का घी
-1 कप- पिसी चीनी
-1 कप- खाने का गोंद
-50 ग्राम- कटे हुए काजू
-50 ग्राम- कटे हुए बादाम
50 ग्राम- तरबूज के बीज
गोंद के लड्डू बनाने की विधि-
गोंद के लड्डू बनाने के लिए सबसे पहले गैस पर एक कड़ाही गर्म करकें, उसमें घी डालकर गोंद को मध्यम आंच पर फ्राई कर लें। जब गोंद गोल्डन ब्राउन हो जाए तो गैंस बंद कर दें। गोंद को ठंडा करके उसे मिक्सी में पीसकर अलग रख लें। अब कड़ाही पर घी गर्म करके उसमें आटे को हल्का भूरा होने तक धीमी आंच पर भूनें। लेकिन ध्यान रखें की आटा जलना बिल्कुल नहीं चाहिए। इसके बाद आटे में गोंद, काजू, बादाम और तरबूज के बीज डालकर गैस बंद कर दें। फिर इस मिश्रण को कढ़ाई से बाहर निकालकर ठंडा होने के लिए रखें। अब आटा और गोंद के मिश्रण में पिसी चीनी को मिलाकर उसके गोल-गोल लड्डू बना लें।
वास्तु शास्त्र /शौर्यपथ/ घर का पूजा स्थल किस प्रकार होना चाहिए? मूर्तियां कैसी या कितनी होनी चाहिए? अकसर यह सवाल हम सबके मन में उठता है। ईश्वर का चिन्तन करने के लिए सबसे सरल उपाय है कि हम नित्यप्रति श्रद्धा-भक्ति से इष्टदेव का नाम मन ही मन लेते रहें। कहा भी गया है- कलियुग केवल नाम अधारा। लेकिन विधि-विधान से पूजा करने का एक अपना ही आनंद है।
आप जानते ही हैं कि सनातन धर्म में पंचदेव पूजा के अलावा कुलदेवी-कुलदेवता की भी पूजा की जाती है। पंचदेवों में गणेश, दुर्गा, सूर्य, शिव और विष्णु हैं। इनकी पूजा सभी कार्यों में होती है। घर में किसी तरह का वास्तुदोष और नकारात्मकता न पैदा हो, इसके लिए हमें घर में पूजा स्थल जरूर बनाना चाहिए और इन पंच देवों को स्थापित करना चाहिए। लेकिन घर में पूजा स्थल बनाने से पहले सही दिशा का चुनाव करना जरूरी है।
वास्तु के अनुसार पूर्व या उत्तर दिशा में पूजा स्थल होना चाहिए। शौचालय से सटा हुआ या शयनकक्ष में पूजा स्थल नुकसानदायक है। साथ ही पूजा स्थल में मूर्तियों को रखते हुए भी कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। जैसे कि घर के मंदिर में एक मूर्ति के बजाय अनेक देवमूर्तियों की पूजा करें। इससे कामना सुगमता से पूर्ण होती है। लेकिन घर में दो शालिग्राम, दो शिवलिंग, तीन गणेश, दो शंख, दो सूर्य, तीन दुर्गा मूर्ति और दो गोमती चक्र नहीं होने चाहिए। इससे परिवार में अशांति फैलती है और पूजा में मन भी नहीं लगता। पत्थर, काष्ठ, सोना या अन्य धातुओं की मूर्तियां ही घर में रखें। मूर्तियों की जगह पर देवी-देवताओं के सुंदर चित्र भी रख सकते हैं।
आपको यह भी जानना चाहिए कि भगवान की मूर्तियां सजावट के लिए नहीं होतीं, इसलिए उनकी नित्य प्रति साफ-सफाई करके श्रद्धा-भक्ति से पूजा करें। संभव हो तो पंचदेवों को मौसमी फल अर्पित करें। गुड़, बताशा, शक्कर आदि का भोग लगाएं। घर में रखी मूर्तियों का जितना आदर-सम्मान करेंगे, उतना ही आप प्रसन्न रहेंगे। गीता में श्रीकृष्ण ने कहा है-यत: प्रवृत्तिर्भूतानां येन सर्वमिदं ततम्। स्वकर्मणा तमभ्यर्च्य सिद्धिं विन्दति मानव:।। अर्थात् जिस परमेश्वर से संपूर्ण प्राणियों की उत्पत्ति हुई है और जिससे यह समस्त जगत् व्याप्त है, उस परमेश्वर की अपने स्वाभाविक कर्मों द्वारा पूजा करके मनुष्य परम सिद्धि को प्राप्त हो जाता है।
धर्म संसार / शौर्यपथ / मार्गशीर्ष माह में कृष्ण पक्ष की एकादशी को उत्पन्ना एकादशी कहा जाता है। इस व्रत को सभी दुखों का अंत करने वाला व्रत माना जाता है। एकादशी देवी का जन्म भगवान विष्णु से हुआ। उत्पन्ना एकादशी के दिन ही एकादशी माता प्रकट हुईं, इसलिए यह दिन उत्पन्ना एकादशी नाम से जाना जाता है। एकादशी व्रत को सिर्फ उत्पन्ना एकादशी से ही शुरू कर सकते हैं। इस व्रत का प्रभाव देवताओं के लिए भी दुर्लभ माना जाता है। इस व्रत में विधि विधान से भगवान श्री हरि विष्णु की उपासना करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
इस व्रत में मन की सात्विकता का विशेष ध्यान रखें। इस व्रत के प्रभाव से मन निर्मल होने के साथ शरीर स्वस्थ होता है। इस व्रत में भगवान श्री हरि को फलों का ही भोग लगाएं। दीपदान करें। द्वादशी के दिन जरूरतमंदों को दान देकर पारण करें। एकादशी माता को खुद भगवान विष्णु ने आशीर्वाद देकर इस व्रत को पूजनीय बनाया। उत्पन्ना एकादशी का व्रत सच्चे मन से करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस व्रत से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। उत्पन्ना एकादशी का व्रत आरोग्य, संतान प्राप्ति और मोक्ष प्राप्ति के लिए किया जाने वाला व्रत है। इस व्रत में सारी रात भजन-कीर्तन में व्यतीत करनी चाहिए। जाने-अनजाने में हुए पाप के लिए क्षमा मांगनी चाहिए। इस व्रत में अन्नदान अवश्य करें। उपवास करने में असमर्थ व्यक्ति को एकादशी के दिन अन्न का परित्याग करना चाहिए।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खेलबो-जीतबो-गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ का नारा अब धरातल पर तेजी से मूर्त रूप ले रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य मंे खिलाड़ियों और खेलप्रेमियों के लिए सर्वसुविधा युक्त अत्याधुनिक खेल सुविधाएं तेजी से विकसित हो रही है। इससे खेल के नक्शे पर छत्तीसगढ़ राज्य की एक अलग पहचान होगी साथ ही यहां के खिलाड़ियों को राज्य में ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खेल प्रशिक्षण की सुविधा मिलेगी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में राज्य सरकार ने विगत दो वर्षों में खेल अधोसंरचनाओं के विकास में बड़ी उपलब्धि भी हासिल की है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व और खेल मंत्री उमेश पटेल के मार्गनिर्देशन में प्रदेश में आधुनिक खेलों के साथ ही साथ प्रदेश के ग्रामीण और पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने और खिलाड़ियों की प्रतिभा को निखारने के लिए अनेक अहम कदम उठाएं है।
प्रदेश में नई सरकार के गठन के बाद खेलों और खेल सुविधाओं में बढ़ोत्तरी के लिए एक अहम निर्णय लेते हुए राज्य में खेल विकास प्राधिकरण का गठन किया गया है। राज्य में खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए नई और आधुनिक खेल आकादमियां शुरू की जा रही हैे। इन अकादमियों का संचालन छत्तीसगढ़ खेल विकास प्राधिकरण के माध्यम से किया जाएगा। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद से अब तक कई ऐसे खेल मैदान व खेल अधोसंरचनाएं थीं, जिनका सही उपयोग नहीं किया जा रहा था, भूपेश सरकार ने खेल विकास प्राधिकरण के माध्यम इन अनुपयोगी खेल मैदानों का उन्नयन कर उन्हें उपयोगी बनाकर खिलाड़ियों के लिए उपलब्ध कराने जा रही है।
अभी हाल ही में 19 नवंबर को मुख्यमंत्री बघेल ने रायपुर के कृषि विश्वविद्यालय सांस्कृतिक भवन से लगी 4 एकड़ भूमि में टेनिस स्पोर्ट अकादमी के निर्माण के लिए आधारशिला रखी है। इस आकादमी के निर्माण के लिए राज्य शासन के खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा 17 करोड़ 75 लाख रूपए की स्वीकृति प्रदान की है। टेनिस स्पोर्ट अकादमी के अंतर्गत एडमिन बिल्ंिडग, हॉस्टल बिल्ंिडग और टेनिस कोर्ट का निर्माण किया जाएगा। टेनिस कोर्ट में 3 हजार 500 दर्शक क्षमता की होगी।
इसके साथ ही राजधानी रायपुर में बालक एवं बालिकाओं के लिए आवासीय हॉकी अकादमी एवं न्यायधानी बिलासपुर में तैराकी, कुश्ती और एथलेटिक के ‘एक्सिलेंस सेंटर’ प्रारंभ होने से अब खिलाड़ियों को प्रशिक्षण लेने बाहर नहीं जाना पड़ेगा, बल्कि छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियो को ये सुविधाएं अपने ही राज्य में मिल सकेंगी। राज्य सरकार के प्रयास से इन दोनो ही संस्थाओं को सांई से मान्यता मिल गई है। इससे अब राज्य के कोने कोने से खेल प्रतिभाओें का चयन किया जाएगा। साथ ही आवासीय खेल अकादमी में खिलाड़ियों को छात्रावास, छात्रवृत्ति, शिक्षा और प्रशिक्षण की बेहतर सुविधा मुहैया कराई जाएगी।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के विशेष प्रयासों से भारत सरकार ने अम्बिकापुर में मल्टीपरपज इंडोर हॉल के निर्माण के लिए 4 करोड़ 50 लाख रूपए तथा महासमुन्द में सिंथेटिक एथलेटिक ट्रेक के निर्माण के लिए 6 करोड़ 60 लाख रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति जारी कर दी है। मुख्यमंत्री राज्य के खिलाड़ियों को बेहतर से बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार बड़े कदम उठा रहे हैं। राज्य में विश्वस्तरीय खेल अधोसंरचनाओं के निर्माण के लिए भी कदम दर कदम राज्य सरकार आगे बढ़ रही है। बिलासपुर में नव निर्मित सिंथेटिक टर्फ के हॉकी स्टेडियम का नामकरण स्वर्गीय बी.आर.यादव हॉकी स्टेडियम करते हुए इस स्टेडियम को खिलाड़ियों के लिए खोल दिया गया है।
छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार खिलाड़ियों के प्रशिक्षण पर सर्वाधिक जोर दे रही है। इसके लिए राज्य में शीघ्र ही विभिन्न खेलों के प्रशिक्षकों की भर्ती की भी तैयारी चल रही है। खेल एवं युवा कल्याण संचालनालय द्वारा इसके लिए कार्यवाही की जा रही है। आवश्यकता पड़ने पर राज्य के बाहर से भी प्रशिक्षकों की सेवाएं ली जाएंगी ताकि राज्य के खिलाड़ियों का स्तर और उंचा हो सके और वे बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
राजधानी रायपुर में गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ की परिकल्पना की थीम पर विगत वर्ष राज्य युवा महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया था, जिसमें राज्य गठन के बाद पहली बार राज्य के युवाओं ने बढ़ चढ़कर भाग लिये थे। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने इस आयोजन को प्रतिवर्ष करने के निर्देश दिए हैं, इसके लिए खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा पृथक से बजट प्रावधान भी रखा है। युवा महोत्सव के सभी प्रतिभागियों को 5-5 सौ रूपए की प्रोत्साहन राशि भी दी गई है।
इसके साथ ही भारत सरकार द्वारा ‘वन स्टेट-वन गेम‘ के तहत ओलंम्पिक-2024 में तीरंदाजी में देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए प्रतिभाशाली तीरंदाज खिलाड़ियों को प्रशिक्षित कर उन्हें तैयार करने की जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ राज्य को सौंपी गई है। इसके लिए प्रदेश सरकार द्वारा नैसर्गिक प्रतिभा वाले युवाओं का चयन कर उन्हें प्रशिक्षण देने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। राज्य के जशपुर में हॉकी के खेल को बढ़ावा देने के लिए एस्ट्रोटर्फ का काम चालू किया गया है। पाटन-मर्रा में स्टेेडियम का निर्माण किया जा रहा है। दुर्ग में जूडो एकेडमी की स्थापना की गई है। राज्य सरकार नारायणपुर में मलखम्भ को प्रोत्साहित करने के लिए वहां बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करा रही है।
प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों में खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए राजीव युवा मितान क्लबों का गठन किया जा रहा है। खेल एवं युवा कल्याण विभाग के द्वारा प्रदेश के 146 विकासखण्डों की 11 हजार 664 ग्राम पंचायतों में राजीव युवा मितन क्लब योजना लागू की जाएगी। इन क्लबों को अपनी गतिविधियों के संचालन के लिए प्रतिमाह 10 हजार रूपए दिए जाएंगे। क्लब के युवाओं को विभिन्न सामाजिक गतिविधियों जैसे-स्वच्छता, वृक्षारोपण कार्यक्रमों सहित अन्य योजनाओं के प्रचार के लिए जोड़ा जाएगा।
( लेख - छेदीलाल तिवारी, जनसंपर्क )
रायपुर/ शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ कबीर सैनिक के सचिव शेखू हिरवानी ,राकेश साहू, इंदल हिरवानी ललित हिरवानी ने संयुक्त जानकारी दी कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी छत्तीसगढ़ कबीर पंथी साहू समाज का युवक-युवती परिचय सम्मलेन विधानसभा से 2 किमी की दूरी पर ग्राम सेमरिया छात्रावास भवन में 10 जनवरी 2020 रविवार को आयोजित की गई है। इस परिचय सम्मेलन में कबीर पंथी साहू समाज के समस्त पदाधिकारी, सदस्यगण एवं कबीर सेनिक पदाधिकारी शामिल होगे। कबीर सेनिक के अध्यक्ष जितेंद्र साहू, उपाध्यक्ष वेद्कुमार ने प्रदेश के समस्त कबीर सैनिक युवा साथियो एंव कबीरपंथी साहू सामाज के सदस्यो को इस कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर इस परिचय कार्यक्रम को सफल बनायें।
रायपुर / शौर्यपथ / विगत दिनों जिले में 21 नवंबरसे 4 दिसंबर 2020 तक पुरुष नसबंदी पखवाड़े का आयोजन दो चरणों में किया गया था । प्रथम चरण में मोबिलाइजेशन सप्ताह 21 से 27 नवंबर तक तथा द्वितीय चरण में 28 नवंबर से 4 दिसंबर तक सेवा वितरण सप्ताह मनाया गया। यह अभियान` परिवार नियोजन में पुरुषों की भागीदारी, जीवन में लाए स्वास्थ्य और खुशहाली’ के नारे के साथ चलाया गया था ।पुरुष नसबंदी पखवाड़े के अंतर्गत रायपुर जिले में 137 पुरुषों ने परिवार नियोजन के स्थाई साधन पुरुष नसबंदी की सेवा ली है। ज़िले में पुरुष नसबंदी पखवाड़े का आयोजन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर मीरा बघेल के मार्गदर्शन में किया गया था ।
जिला मीडिया प्रभारी गजेंद्र डोंगरे ने बताया, जिले में 21 नवंबर से 4 दिसंबर 2020 तक पुरुष नसबंदी पखवाड़े का आयोजन किया गया था । कोविड-19 के सक्रमण काल में इसे सफल बनाने के लिए समस्त बीईटीओ (विकासखण्ड विस्तार एवं प्रशिक्षण अधिकारियों ) से समन्वय स्थापित किया गया । पखवाड़े की शुरूआत जागरूकता रथ के साथ-साथ वॉल-पेंटिंग के माध्यम से जागरूकता की गई । लक्ष्य दंपतियों के लिए ‘’मोर मितान मोर संगवारी” कार्यक्रम चलाकर पुरुष नसबंदी के प्रति फैली भ्रांतियों को दूर किया गया। साथ ही पूर्व में नसबंदी करा चुके दंपत्तियों के साथ बैठकर खुली चर्चा की गई । लक्ष्य दंपत्तियों को नसबंदी से होने वाले परिवार नियोजन के फायदे और नसबंदी की भ्रांतियों को दूर कर परामर्श दिया गया । गजेंद्र डोंगरे ने बताया, जिले के दो नसबंदी विशेषज्ञ डॉक्टर अरुण कुमार टोंडर और डॉक्टर संजय नवल ने चारों विकासखंड अभनपुर, आरंग, धरसीवा, तिल्दा और रायपुर अर्बन, बिरगांव एवं आयुर्वेदिक अस्पताल, जिला अस्पताल, में अपनी सेवाएं प्रदान की ।साथ ही मितानिन,एएनएम, आरएचओ, ने लक्ष्य दंपतियों के परामर्श और उत्साहवर्धन का कार्य किया । बिरगांव में 3, रायपुर अर्बन में 14, धरसीवा में 22, आरंग में 52, अभनपुर में 38, तिल्दा में 8 लोगों को मिलाकर कुल 137 पुरूषों ने परिवार नियोजन के स्थाई साधन पुरुष नसबंदी को अपनाया है।
परिवार नियोजन के लिए दी जाने वाली सेवाएं कोविड-19 के दिशा निर्देशों के अनुसार प्रदान की गई । वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सूचनाओं का आदान प्रदान के साथ ही जिला एवं विकासखंड के अधिकारियों का क्षमतावर्धन भी किया गया था । शारीरिक दूरी एवं कोविड-19 के दिशा निर्देशों का पालन करते हुए पखवाड़ा 21 नवंबर से 2 सप्ताह तक चला जिसमें मुख्यता वेसेक्टॉमी पर विशेष ध्यान केंद्रित किया ।
स्वास्थ्य केंद्र पर आयोजित हुई थी गतिविधियां
स्वास्थ्य केन्द्रों पर पुरुष नसबंदी सेवा और इसके फायदे को प्रदर्शित किया गया था। नसबंदी के तीन माह उपरांत जांच में शुक्राणु संख्या शून्य पाए जाने पर ही हितग्राहीको प्रमाण पत्र को प्रदान किया जाएगा ।नसबंदी पखवाड़े के दौरान भारत सरकार द्वारा निर्देशित समस्त मानकों एवं दिशा निर्देशों का पालन समस्त स्तरों पर सुनिश्चित किया गया ।
मोबिलाइजेशन फेस में आयोजित हुई गतिविधियां
इस दौरान प्रचार रथ के माध्यम से अधिक से अधिक प्रचार प्रसार किया गया ।साथ हीव्यक्तिगत चर्चा और पुरुष नसबंदी के फायदे हितग्राहियों को बताये गए। ‘मोर मितान मोर संगवारी’ का आयोजन कर पुरुष नसबंदी से संबंधित मिथकों को दूर करने के लिए परामर्श भी प्रदान किया गया। प्रचार प्रसार के लिए डिजिटल माध्यम के प्रयोग को भी बल दिया गया। प्रचार प्रसार के दौरान कोविड-19 संक्रमण की रोकथाम के लिए पूरी सावधानी रखी गयी कहीं भी अधिक भीड़ एकत्रित ना हो इसका भी ध्यान रखा गया था ।
खाना खजाना / शौर्यपथ / चाइनीज भेल मुंबई की एक लोकप्रिय स्ट्रीट फूड रेसिपी है। जिसे लोग अक्सर शाम के नाश्ते में बनाकर खाना पसंद करते हैं। अगर आप भी घर आए मेहमानों को शाम के नाश्ते में कुछ अलग परोसकर खिलाना चाहते हैं तो ट्राई करें ये क्रंची चाइनीज भेल रेसिपी। यकीन मानिए सेहत के साथ स्वाद भी हो जाएगा दोगुना।
चाइनीज भेल बनाने के लिए सामग्री-
-नूडल्स
-सब्जियां- पत्तागोभी, गाजर, लाल बेल पेपर, शिमला मिर्च, पीली शिमला मिर्च, -प्याज और टमाटर
-1/2 टेबल स्पून मिर्च का पेस्ट
-लेब्जेल्टर गुप्त मसाले
-स्वादानुसार नमक
-1/2 टेबल स्पून सिरका
-5 बूंदें सोया सॉस
चाइनीज भेल बनाने का तरीका-
चाइनीज भेल बनाने के लिए सबसे पहले थोड़ी नूडल्स लें और एक पैन में थोड़ा सा तेल डालकर उन्हें फ्राई कर लें। अब पत्तागोभी, गाजर, लाल शिमला मिर्च, शिमला मिर्च, पीली शिमला मिर्च, प्याज और टमाटर को जूलियन काटकर सभी सब्जियों और नूडल्स को एक साथ मिला लें। इसमें चिली पेस्ट के साथ लेब्जेल्टर मसालों को भी डाल दें। अब इसमें नमक, सिरका और सोया सॉस डालें। अच्छी तरह से मिलाएं और सर्व करें।
सेहत /शौर्यपथ / अगर आप भी उन लोगों में शामिल हैं जिन्हें सुबह उठने में आलस आता है या फिर बिस्तर छोड़ने के बाद भी पूरा दिन सुस्ती बनी रहती है तो आपको अपनी डाइट में कुछ बदलाव करने की जरूरत है। जी हां ब्रेकफास्ट में किए गए कुछ आसान बदलाव आपको पूरा दिन फ्रेश रखने में आपकी मदद कर सकते हैं। आइए जानते हैं कैसे सिर्फ अपने नाश्ते में ये 5 चीजे शामिल करके आप दिनभर रह सकते हैं एकदम फ्रेश।
हनी टोस्ट-
अगर आप एक्सरसाइज करने के बाद भी दिन भर सुस्त बने रहते हैं तो अपनी सुबह की शुरुआत कॉफी से बिल्कुल न करें। हो सकता है कॉफी में मौजूद कैफीन आपको सूट नहीं कर रहा हो। अपने दिन की शुरुआत गर्म पानी में शहद डालकर पीने से करें। इसके अलावा आप शहद को टोस्ट या ओट्स में डालकर भी अपने ब्रेकफास्ट में शामिल कर सकते हैं। ऐसा करने से आपका पेट लंबे समय तक भरा रहेगा और शरीर को काम करने के लिए पर्याप्त एनर्जी भी मिलेगी।
ओट्स
ओट्स आपको दिनभर चुस्त बनाए रखने के लिए काफी होते हैं। आप अपनी सुबह की शुरुआत ओट्स खाकर कर सकते हैं। सुबह किए गए इस नाश्ते से आपका पेट दिनभर भरा रहेगा और शरीर का मैटाबॉलिज्म भी बढ़ने में मदद मिलेगी।
चॉकलेट मिल्क-
अगर आप सुबह की शुरूआत करने के लिए कॉफी का विकल्प तलाश रहे हैं तो आप सुबह दूध में चॉकलेट पाउडर मिला कर पी सकते हैं। चॉकलेट मिल्क में मौजूद प्रोटीन ब्रेन को बूस्ट करके आपको एनर्जेटिक बनाए रखने में मदद करता है। इसके अलावा चॉकलेट में मौजूद कोको पाउडर में प्राकृतिक कैफीन पाया जाता है जो ब्लड शुगर मेंटेन करने में मदद करता है।
अंडे-
अंडों में मौजूद प्रोटीन और कैल्शियम आपकी बॉडी को पूरा दिन चार्ज रखने में मदद कर सकते हैं। इसके लिए आप रोजाना सुबह नाश्ते में दो अंडें और ब्रेड को शामिल कर सकते हैं।
स्पाइसी नाश्ता-
हालांकि कई लोग सुबह नाश्ते में मिर्च-मसाले वाला खाना खाने से परहेज करते हैं। लेकिन ऐसा करने की पूर्ण तौर पर मनाही भी नहीं होती है। आप दिनभर चुस्त बने रहने के लिए ब्रेकफास्ट में कुछ मसालेदार भी शामिल कर सकते हैं। सुबह ब्रेकफास्ट में शामिल किया गया मसालेदार चीज आपका मैटाबॉलिज्म बढ़ाकर आपको दिनभर चुस्त-दुरूस्त बनाने में आपकी मदद करेगा।
सेहत / शौर्यपथ /औषधीय गुणों से भरपूर अजावाइन हर भारतीय रसोई में जरूर पाई जाती है। इसका सेवन करने से सिर्फ बदन और पेट दर्द ही नहीं बल्कि मोटापे से भी मुक्ति मिलती है। मोटापा ना सिर्फ आपकी पर्सनैलिटी खराब करता है बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी बहुत नुकसानदेह होता है। तो ऐसे में आइए जान लेते हैं आखिर कैसे अजवाइन का इस्तेमाल करके आप इस परेशानी से मुक्ति पा सकते हैं।
मोटापा कम करने के लिए ऐसे करें अजवाइन का इस्तेमाल-
-पचास ग्राम अजवायन लेकर 1 गिलास पानी में रातभर के लिए भिगोकर छोड़ दें। रातभर भिंगोने के बाद सुबह इस पानी को छान कर पीएं।
मोटापा ही नहीं अजवायन से सेहत को होते हैं ये लाभ-
- अजवायन के छने हुए पानी में आधा चम्मच नींबू निचोड़ कर डाल लीजिए साथ ही इसमें 1 चम्मच शहद भी मिक्स करें त्वचा पर लगाएं। त्वचा संबंधी बीमार दूर होगी।
- खाली पेट अजवाइन का पानी पीने से कब्ज और गैस से राहत मिलती है।
-अजवाइन खाने से भूख भी लगती है तथा पाचन क्रिया ठीक से काम करती है।
-अजवायन का पानी पीने से शरीर का मेटाबॉलिज्म बढ़ता है जिसकी वजह से कार्ब तथा फैट बर्न होने की प्रक्रिया शुरु हो जाती है।
शौर्यपथ /कहते हैं कि सोते समय सिर दक्षिण में और पैर उत्तर दिशा की ओर होने चाहिए क्योंकि साधारण चुंबक शरीर से बांधने पर वह हमारे शरीर के ऊत्तकों पर विपरीत प्रभाव डालता है। इसी सिद्धांत पर यह निष्कर्ष भी निकाला गया कि अगर साधारण चुंबक हमारे शरीर पर विपरीत प्रभाव डाल सकता है तो उत्तरी पोल पर प्राकृतिक चुम्बक भी हमारे मन, मस्तिष्क व संपूर्ण शरीर पर विपरीत असर डालता है लेकिन मृतक का सिर हमेशा उत्तर दिशा की ओर रखा जाता है।
हमारे यहां मृत्यु से जुड़ी अनेक परंपराए हैं। इन्हीं परंपराओं में से एक परंपरा है मौत के बाद मृतक का सिर उत्तर दिशा की ओर रखने की। इस परंपरा को निभाते तो अधिकांश लोग हैं लेकिन बहुत कम लोग ये जानते हैं कि मृतक का सिर उत्तर दिशा की ओर ही क्यों रखना चाहिए? दरअसल आत्मा नश्वर है और शरीर नष्ट होने वाला है। जिस प्रकार हम कपड़े बदलते हैं उसी प्रकार आत्मा शरीर बदलती है।
शरीर का अंत मृत्यु के साथ ही हो जाता है। मृतक का सिर उत्तर की ओर करके इसलिए रखते हैं कि प्राणों का उत्सर्ग दशम द्वार से हो। चुम्बकीय विद्युत प्रवाह की दिशा दक्षिण से उत्तर की ओर होती है। कहते हैं मरने के बाद भी कुछ क्षणों तक प्राण मस्तिष्क में रहते हैं। अत: उत्तर दिशा में सिर करने से ध्रुवाकर्षण के कारण प्राण शीघ्र निकल जाते हैं। जीव के प्राण शीघ्र ही मुक्त हो जाते हैं। इसलिए मृतक को हमेशा उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।
शास्त्रों के अनुसार मरणासन्न व्यक्ति का सिर उत्तर की तरफ रखना चाहिए और मृत्यु के बाद अंत्येष्ठी-संस्कार के समय उसका सिर दक्षिण की तरफ रखना चाहिए। मरणासन्न में यानि कि मृत्यु जब करीब हो, जब यह निश्चित हो जाए कि मृत्यु आने ही वाली है किंतु प्राण निकलने में कष्ट अधिक हो रहा हो तो मृत्यु को प्राप्त करने वाले व्यक्ति का सिर उत्तर दिशा की ओर कर देना चाहिए।
ऐसा माना जाता है कि व्यक्ति के प्राण मस्तिष्क के मार्ग से जल्दी निकल जाते हैं और मरने से ठीक पहले यदि मस्तिष्क को उत्तर दिशा की ओर रख दिया जाए तो ध्रुवाकर्षण के कारण प्राण शीघ्र और कम कष्ट से निकल जाते हैं।
मृत्यु के बाद जब शव का दाह संस्कार किया जाता है उस समय शव के सिर को दक्षिण दिशा की ओर रखना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार दक्षिण की दिशा मृत्यु के देवता यमराज की मानी गई है। इस दिशा में शव का सिर रख हम उसे मृत्यु के देवता को समर्पित कर देते हैं।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
