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सेहत /शौर्यपथ / ज्योतिष विज्ञान में स्वर शकुन का बहुत ही महत्व है। स्वर दो होते हैं चंद्र स्वर और सूर्य स्वर। नासिका के दाहिने छिद्र से आने वाली सांस को सूर्य स्वर कहते हैं और बांयी ओर के छिद्र से आने वाली श्वांस को चंद्र स्वर कहते हैं। इसे हम स्वर विज्ञान भी कहते हैं। यात्रा करते समय या अन्य किसी महत्वपूर्ण कार्य के समय यदि हमें कहीं जाना होता है तो इस शकुन को आप अपना सकते हैं। शास्त्रों में लिखा है- ’जेहिं स्वर चले, ताहीं पग दीजे। भद्रा या भरणी, कोई न लीजे।’ अर्थात बाहर जाते समय या यात्रा करते समय या किसी महत्वपूर्ण काम के लिए बाहर निकलते समय अपनी नाक पर हथेली रखे और महसूस करें कि नाथ के कौन से छिद्र से अधिक गहरी सांस आ रही है। दाहिने छिद्र से या बांये छिद्र से। जिस तरफ की सांस तेज चल रही हो, उसे स्वर चलना कहते हैं। यदि आपकी नाक के दाहिने छिद्र से सांस तेज चल रही है तो आप घर की देहरी को दाहिने पैर से लांघकर बाहर निकलेंगे। आपकी यात्रा, आपका कार्य होने की बहुत अधिक सफल होने की संभावनाएं बन जाती हैं। इसी प्रकार यदि आपकी नाक का बांया स्वर अधिक तेज चल रहा हो तो आप सबसे पहले बांया पैर ही बाहर निकालें।
इसके अलावा भी स्वर विज्ञान के बहुत से उपयोग हैं। भोजन करते समय आपका सूर्य स्वर नासिका के दाहिने छिद्र से तेज सांस आ रहा हो तो आपको भोजन के संपूर्ण रस मिलेंगे और वह आपकी पाचन क्रियाएं चुस्त-दुरुस्त रहेंगी। भोजन जल्दी हजम होगा। दाहिना स्वर सूर्य स्वर माना जाता है। इसका स्वभाव गर्म होता है और यह पेट की जठराग्नि को तेज कर देता है जिससे खाया हुआ समस्त भोजन ठीक प्रकार से पच जाता है।
चंद्र स्वर अर्थात नाक के बाएं छिद्र से सांस आने के समय भोजन करने से भोजन को पचने में देर लगती है। कभी-कभी तो कब्ज की भी शिकायत हो जाती है। किसी राजनेता, अधिकारी और वरिष्ठजन से मिलते समय ध्यान रखें आपका चंद्र स्वर चलना चाहिए। इससे आपके कार्य विनम्रता पूर्वक पूर्ण हो सकेंगे। जोश, हिम्मत, आवेश एवं शीघ्रता के काम में सूर्य स्वर महत्वपूर्ण है। सूर्य स्वर चलने से खेलकूद,भागदौड़ एवं किसी विरोधी से बात करना, मेहनत और परिश्रम के कार्य आदि ऐसे कार्य सूर्य स्वर के चलने में सफल होते हैं।
यदि हमारे स्वर कार्य के अनुसार नहीं चल रहा है तो स्वर को बदला भी जा सकता है। मान लीजिए हमें किसी अधिकारी के पास जाकर बात करनी है और हमारा दाहिना स्वर यानी कि सूर्य स्वर चल रहा है तो वहां कार्य की संभावना क्षीण हो जाती है। इसलिए स्वर को बदलने के लिए भी एक उपक्रम है। यदि आपका दाहिना स्वर चल रहा है तो आप अंगूठे से अनुलोम-विलोम प्रक्रिया के तरह अपनी नाक का दाहिना छिद्र दबाएंगे और बाएं छिद्र से बार-बार सांस लेंगे। धीरे-धीरे आपका स्वर बदल जाएगा और चंद्र स्वर चलना आरंभ हो जाएगा।
लाइफस्टाइल /शौर्यपथ / कई बार जाने-अनजाने हम ऐसी आदतों को अपना लेते हैं, जो आगे चलकर सफलता से हमें दूर ले जाती हैं। ऐसे में बहुत जरूरी है कि जीवन में सफलता पाने के लिए हम कुछ बातों से किनारा कर लें, वर्ना इसका असर न सिर्फ हमारे व्यक्तित्व पर पड़ेगा बल्कि हम जीवन में कभी सफल नहीं हो पाएंगे। आइए, एक नजर उन बातों पर-
अपनी क्षमताओं पर संदेह न करें
कई बार ऐसा होता है कि हम किसी के कुछ नकारात्मक कहने पर शंकाओं से घिर जाते हैं लेकिन आपको दूसरे लोगों की बातों में आकर खुद पर अविश्वास नहीं करना है। आपसे बेहतर आपको कोई नहीं आंक सकता। मन के भटकाव से बचते हुए अपनी क्षमताओं पर काम करें।
किसी भी बात को दोहराना बंद करें
आपके जीवन में कोई अच्छी बात हुई है या बुरी लेकिन उन बातों को लगातार दोहराना सही नहीं है। ऐसा करने से आपका मन भटकता रहेगा और आप अपने लक्ष्य से दूर होते चले जाएंगे।
अति भावुक होने से बचें
इंसान में भावनाएं होना बुरा नहीं है लेकिन उसे नियंत्रित न करना आपके लिए घातक हो सकता है। अत्यंत खुशी या दुख दोनों ही सोचने-समझने की तार्किक बुद्धि को कमजोर करते हैं इसलिए अतिभावुक होने से बचें।
गलतियों से बचें
जीवन में गलतियां सभी से होती है इसलिए जो गलती आप कर चुके हैं उससे आगे बढ़े और आने वाले कल पर ध्यान दें। हमेशा गलतियों पर रोने से कोई नया रास्ता नहीं निकलने वाला।
राजनांदगांव / शौर्यपथ / राज्य माध्यमिक शिक्षा मिशन राजनांदगांव द्वारा जिला स्तरीय कला उत्सव का आयोजन आनलाईन मोड में 25 नवंबर को ठाकुर प्यारेलाल सिंह नगर पालिक निगम उच्चतर माध्यमिक विद्यालय राजनांदगांव में जिला शिक्षा अधिकारी एच.आर. सोम एवं सहायक जिला परियोजना अधिकारी एस.के. पाण्डेय के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। स्कूल शिक्षा साक्षरता विभाग शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार द्वारा माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों की कलात्मक प्रतिभा को पहचानने, उसे पोषित करने और शिक्षा में कला को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष यह कार्यक्रम आयोजित होता है। इस वर्ष कोरोना प्रकोप के चलते यह कार्यक्रम आनलाईन मोड में आयोजित किया जा रहा है।
इसी तारतम्य में राजनांदगांव जिले के विभिन्न विकासखंडों से चयनित प्रतिभागियों ने 9 विभिन्न विधाओं में अपने कला कौशल का विडियो द्वारा प्रदर्शन किया। जिसका अवलोकन कला विशेषज्ञों द्वारा किया गया, जिनके द्वारा राज्य स्तर की प्रतियोगिता के लिए प्रतिभागियों का चयन किया। चयनित प्रतिभागियों में संगीत (वादन) शास्त्रीय संगीत, बालक वर्ग में राहुल यादव शास.प.पु.ब.उ.मा.वि. खैरागढ़ (विकासखंड खैरागढ़), बालिका वर्ग में कु.दामेश्वरी साहू, शासकीय कन्या शिक्षा परिसर चौकी (चौकी), संगीत (वादन) पारंपरिक लोक संगीत बालक वर्ग में महेंद्र कुमार शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सिंगाभेड़ी (चौकी), बालिका वर्ग में कु. नंदिनी सिंधारे शासकीय कन्या शिक्षा परिसर चौकी (चौकी), संगीत (गायन) शास्त्रीय संगीत में कु. भुमिका ठाकुर शासकीय कन्या शिक्षा परिसर चौकी (चौकी), संगीत (गायन) पारंपरिक लोक संगीत में कु. मुलेश्वरी चंद्रवंशी शासकीय कन्या शिक्षा परिसर चौकी (चौकी), लोक नृत्य में बालक वर्ग में जीनूराम वर्मा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रेंगाकठेरा बखत (राजनांदगांव), बालिका वर्ग में कु. ज्योति कुंजाम शासकीय कन्या शिक्षा परिसर चौकी (चौकी), शास्त्रीय नृत्य में कु. निरंजना देवागंन शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बोरी (राजनांदगांव), द्विआयामी दृश्यकला (चित्रकला) बालक वर्ग में आशुतोष शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय डोंगरगढ़ (डोंगरगढ़), बालिका वर्ग में कु. दीपशिखा वर्मा शासकीय महारानी लक्ष्मी बाई उच्चतर माध्यमिक विद्यालय राजनांदगांव (राजनांदगांव), त्रिआयामी दृश्यकला (मूर्तिकला) में लक्ष्मण निषाद शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बागुर (छुईखदान), स्थानीय खेल बालक वर्ग धनेश्वर यादव शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बागुर (छुईखदान), बालिका वर्ग में पूजा वर्मा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बागुर (छुईखदान) शामिल है। चयनित प्रतिभागी राज्य स्तर पर आयोजित होने वाले प्रतियोगिता में भाग लेंगे। निर्णायक दल में राजेंद्र बघेल प्राचार्य कार्यक्रम संयोजक, उमाशंकर भरद्वाज, श्री द्वारका यादव, सुदेश यादव, पुनाराम यादव, श्यामलेन्दु हाजरा, तरूण गढ़पावले, संतोष यादव थे।
पेंड्रीडीह की महिलाओं को गोधन न्याय योजना के तहत मिली 1 लाख 32 हजार 282 रूपए की राशि
बाड़ी की साग-सब्जी बनी आय का जरिया
राजनांदगांव / शौर्यपथ / ग्रामीण संस्कृति, परिवेश एवं संसाधनों के अनुरूप जब ग्रामीण विकास की दिशा तय की जाती है, तब उसकी परिणति सामाजिक परिवर्तन के रूप में होती है। शासन की किसान हितैषी नरवा, घुरवा, गरुआ एवं बाड़ी योजना गावों में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रही है और खुशहाली एवं समृद्धि ला रही है। वहीं सामाजिक चेतना की मशाल भी है, जिसकी रोशनी से ग्रामीण महिलाओं को आगे बढऩे का आत्मविश्वास और संबल मिला है। इसकी एक बानगी छुरिया विकासखंड के ग्राम पेंड्रीडीह में दिखी, जहाँ महिलाओं की जिंदगी बदल रही है। मेहनतकश महिलाओं का कारवां सफलता की राह पर आगे बढ़ा है। पेंड्रीडीह आदर्श गौठान में 5 महिला स्व सहायता समूह कार्यरत है।
गौठान से लगे 6 एकड़ की सामुदायिक बाड़ी में जैविक खाद से साग-सब्जी का उत्पादन किया जा रहा है। कलेक्टर श्री टोपेश्वर वर्मा ने अपने भ्रमण के दौरान समूह की महिलाओं को सब्जी उत्पादन के लिये प्रोत्साहित किया था। बाड़ी में टमाटर, बैंगन, बरबट्टी, मूली, जिमीकंद का उत्पादन हो रहा है। स्वादिष्ट सब्जियां होने के कारण इनकी आस-पास के बाजार में मांग बढ़ी है और समूह की आय में वृद्धि हुई है। गोधन न्याय योजना के तहत गौठान में एकत्रित गोबर से समूह की महिलाओं को 1 लाख 32 हजार 282 रूपए की राशि मिली। राधाकृष्ण आदर्श गौठान समिति में 703.20 क्विंटल गोबर खरीदी गई, जिसमें से 390 क्विंटल गोबर का वर्मी टैंक में भराई किया गया है और वर्मी कम्पोस्ट तैयार किया जा रहा है। माँ भवानी स्वसहायता समूह के सदस्यों द्वारा टैंक में 65 किलो वर्मी डाला गया है और 243 किलो वर्मी खाद तैयार कर लिया गया है, जिसे सैम्पल जांच के लिए भेजा गया है। जनपद सीईओ छुरिया श्री प्रतीक प्रधान ने बताया कि अभी गौठान में 5 समूह जिनमें राधाकृष्ण स्वसहायता समूह, जय माँ दंतेश्वरी स्वसहायता समूह, जय माँ गायत्री स्वसहायता समूह, जय माँ शीतला एवं जय लक्ष्मी स्वसहायता समूह कार्यरत है और बहुत अच्छा कार्य कर रही हैं। एनजीजीबी की टीम इनका सहयोग कर रही है।
लाइफस्टाइल /शौर्यपथ / अगर आपका बच्चा दिखने में मोटा- तगड़ा लगता है, मगर उसे नींद नहीं आती है, चिड़चिड़ा है, खेलने में थक जाता है, रात में थकान की शिकायत करता है। पैरों में मालिश के बाद सोता है तो सतर्क होने की जरूरत है। यह बच्चे के शरीर में विटामिन डी की मात्रा बेहद कम होने के संकेत हैं जो आगे चलकर गंभीर बीमारियां दे सकते हैं।
30 फीसदी बच्चे दिखने में सामान्य मगर विटामिन डी की बेहद कमी वाले मिले हैं। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में हुए एक रिसर्च में यह खुलासा हुआ है। पांच साल से कम उम्र के बच्चों पर हुए रिसर्च में दो तरह के बच्चों को शामिल किया गया है। एक तो ऐसे बच्चे जो दिखने में सामान्य थे।
मानक का 50 फीसदी भी विटामिन डी नहीं मिल रहा है। बच्चा दिखने में स्वस्थ है मगर उसकी हडिडयां भुरभुरी हो रही हैं। विटामिन डी की कमी से बच्चों को कई तरह की बीमारियां घेरती हैं। भर्ती होने वाले या ओपीडी में आने वाले बच्चों की जांच की जाती है तो यह कमी दिख जाती है। यही बच्चे अति गम्भीर होकर भर्ती होते हैं। विटामिन डी की कमी पूरा होते ही बच्चे ठीक हो जाते हैं।रिसर्च में सभी पैरामीटर का इस्तेमाल किया गया है। इसे एकेडमी आफ पीडियाट्रिक्स के वाषिक सम्मेलन में रखा जाएगा।
सैम बच्चों में लक्षण नहीं मिले
सीवियर एक्यूट मेल न्यूट्रीशन यानी सैम बच्चों में विटामिन डी की कमी के लक्षण नहीं पाए गए, मगर उनके विटामिन डी की घोर कमी मिली है। इन बच्चों को सैम से बाहर निकालने और जीवन के खतरे से बचाने में तीन से छह महीने तक मशक्कत करनी पड़ी।
बच्चों में इन बीमारियों का खतरा
रोग प्रतिरोधक क्षमता शून्य तक पहुंच सकती है। विकास रुक सकता है। निमोनिया, डायरिया, कार्डियोमायोपैथी, बार बार फ्रैक्चर, अनिद्रा, स्किन बीमारी, साइनस इंसफेक्शन, मेनेनजाइटिस और ब्लड डिसआर्डर सम्बंधी बीमारी।
डाइट बेहतर करें, धूप में रहने दें
रिसर्च में यह बात सामने आई है कि बच्चों को पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी नहीं मिली। विटामिन डी की कमी पूरा करने के लिए इमरजेंसी में सप्लीमेंट दे सकते हैं मगर उससे अच्छा है कि बच्चों की डाइट बेहतर करें। सबसे अधिक जरूरी धूप है। कम से कम 45 मिनट उसे रोजाना सुबह की धूप दें। धूप में ही सुबह होम वर्क कराएं और उसे खेलने दें।
इस तरह हुआ रिसर्च
-120 बच्चे शामिल किए
-0-5 साल के बच्चे रिसर्च में लिए गए
-03 साल तक बच्चों की मॉनीटरिंग
-60 बच्चे दिखने में सामान्य स्वस्थ थे
-60 बच्चे कुपोषित और अति कुपोषित थे
यह रहा रिजल्ट
-30 फीसदी सामान्य दिखने वाले बच्चों में विटामिन डी की मात्रा बेहद कम
-विटामिन डी की मात्रा 70 फीसदी कुपोषित बच्चों में सामान्य से बेहद न्यूनतम स्तर पर मिली
-90 फीसदी अति कुपोषित यानी सीवियर एक्यूट मेलन्यूट्रीशन यानी सैम बच्चों में कम थी विटामिन डी
सेहत / शौर्यपथ / विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सभी उम्र के लोगों के लिए फिजिकल एक्सरसाइज को लेकर सिफारिशें लागू की हैं। डब्लूएचओ ने कहा है कि कोरोना महामारी के दौर में सभी को व्यायाम और शारीरिक गतिविधियों पर ध्यान देना चाहिए। इसके साथ महिलाओं को कहा है कि प्रेग्नेंसी के दौरान और उससे पहले वह शारीरिक तौर पर एक्टिव रहें और कुछ-न-कुछ गतिविधि करती रहें, इससे वह स्वस्थ रहेंगी।
डब्लूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस ऐडनॉम ने कहा कि शारीरिक रूप से सक्रिय होना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है, हमारे जीवन में कुछ साल और जोड़ देता है। हर कदम मायने रखता है, हमें हर दिन बेहद सुरक्षित और रचनात्मक ढंग से आगे बढ़ना है और कोरोना वायरस से लड़ना है।
डब्लूएचओ ने नए दिशानिर्देश जारी कर सभी को कोरोना वायरस से लड़ने के लिए प्रोत्साहित किया है। इसके साथ उन्होंने कहा कि व्यायाम, शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है और अगर हम ऐसा नहीं करते हैं तो इसके दुष्परिणाम हमें झेलने पड़ सकते हैं।
डब्लूएचओ के अनुसार, अगर लोग शारीरिक तौर पर अधिक सक्रिय होते तो साल में चार से पांच मिलियन लोगों को मरने से बचाया जा सकता था।
WHO की नई गाइडलाइन्स
1. बच्चों के लिए
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार बच्चों को प्रति दिन कम से कम 60 मिनट और सप्ताह में कम से कम तीन दिन जोरदार एरोबिक एक्सरसाइज करनी चाहिए। इन एक्सरसाइज से बच्चों की मांसपेशियां और हड्डियां मजबूत होंगी।
2. 18 से 64 वाले लोग
18 से 64 वर्ष वाले लोगों के लिए डब्लूएचओ ने कहा है कि इन्हे हर हफ्ते कम से कम 130 से 300 मिनट तक मॉडरेट इंटेंसिटी वाली एरोबिक एक्सरसाइज करनी चाहिए। इससे वह स्वस्थ रहेंगे। इसके सेहत ही 75-150 मिनट वाली अधिक-तीव्रता वाली एरोबिक एक्सरसाइज करनी चाहिए। हर हस्ते.2 दिन माशपेशियों वाली एक्सरसाइज करना भी बेहद जरूरी है।
3. 65 वर्ष से अधिक
स्वस्थ लोग जो 65 वर्ष से अधिक होते हैं, उन्हें उतना ही एक्सरसाइज और शारीरिक गतिविधियों में ध्यान देना चाहिए जितना कि 18 से 64 वर्ष तक के लोग देते हैं। उन्हें सप्ताह में कम से कम तीन दिन फिजिकल एक्सरसाइज करनी चाहिए। यह उन्हें स्वस्थ रहने में मदद करेगी।
4. गर्भवती महिलाएं
डब्लूएचओ ने गर्भवती महिलाओं को विशेष सलाह देते हुए कहा है कि प्रेग्नेंसी के दौरान भी महिलाओं को 1 हफ्ते में कम-से-कम 150 मिनट मध्यम-तीव्रता वाली एरोबिक एक्सरसाइज करनी चाहिए।
सेहत /शौर्यपथ /‘शाकाहार खाने में मांसाहार की तरह प्रोटीन नहीं होता इसलिए आपको नॉनवेज खाना शुरू कर देना चाहिए’ आपने अपने दोस्तों या फिर किसी ओर को ऐसा ही कुछ कहते हुए सुना होगा कि प्रोटीन की पूर्ति के लिए नॉनवेज खाना बहुत जरूरी है लेकिन फिर भी आपका दिल नॉनवेज खाने को नहीं करता, अगर आपके या आपके किसी दोस्त के साथ कुछ ऐसा ही है, तो आपको जानकर खुशी होगी कि शाकाहार यानी वेज खाने की कुछ चीजों में भरपूर मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है। आइए, जानते हैं प्रोटीन से भरे शाकाहार स्रोत-
हल्की आंच में भुने आलू
आपको जानकर हैरानी होगी कि मीडियम साइज में कटे और हल्की आंच में भुने हुए आलू में प्रोटीन, पोटेशियम, विटामिन सी और फाइबर भरपूर मात्रा में होता है।
ब्रोकली
अगर अभी तक आप ब्रोकली खाने से परहेज कर रहे थे, तो आपको ब्रोकली खानी शुरू कर देनी चाहिए। आपको ब्रोकली में प्रोटीन की मात्रा और आयरन मिलेगा।
फूलगोभी
ज्यादातर लोगों को फूलगोभी पसंद होती है। इस सब्जी में प्रोटीन, कैलोरीज, पोटेशियम, मैग्नीशियम, फाइबर और आयरन के गुण होते हैं।
मशरूम
आप अगर बार-बार बीमार पड़ते हैं, तो आपको मशरूम खाना शुरू कर देना चाहिए। इसमें भरपूर मात्रा में प्रोटीन होता है।
पालक
पालक में प्रोटीन के अलावा आयरन, फाइबर और विटामिन बी पाया जाता है।
मक्का
सर्दियों में मक्का खाना सेहत के लिए बहुत अच्छा है। इसमें प्रोटीन और फाइबर काफी मात्रा में पाया जाता है।
मटर
आलू हो या पनीर, मटर किसे अच्छा नहीं लगता। मटर प्रोटीन का एक अच्छा स्रोत है।
वास्तु शास्त्र /शौर्यपथ / देशी फेंगशुई कहें या फिर हमारे शास्त्रों में पहले से ही दर्ज की कई व्यवस्थाओं की, वे आज के फेंगशुई से ज्यादा बेहतर और प्रभावकारी हैं। इनमें से कुछ हैं दर्पण, काले घोड़े की नाल और घंटी। हमारे जीवन में ये कुछ ऐसी अनोखी वस्तुएं हैं जिनका हम नित्य प्रयोग करते हैं। किंतु उनके उपयोगी उपायों को कम लोग ही जानते हैं। ज्योतिषाचार्य पं.शिवकुमार शर्मा से जानिए दर्पण, घंटी और घोड़े की नाल का महत्व।
दर्पण:चेहरा देखने वाला दर्पण वास्तु शास्त्र में बहुत ही उपयोगी माना गया है। दिशाओं को बढ़ाने का भ्रम करने वाला यह दर्पण कई बार तो चौकाने वाले प्रभाव दिखाता है। यदि घर का उत्तर पूर्व का कोना कटा हुआ है तो उस दिशा में एक बड़ा लुकिंग मिरर लगा देने से दिशा भ्रम हो जाता है। वह दिशा बढ़ती हुई प्रतीत होती है। इससे उसका वास्तु दोष समाप्त हो जाता है। यदि घर के सामने कोई खंबा, पेड़, किसी मकान का कोना, कूड़, खंडहर हो तो घर के मुख्य द्वार की चौखट के ऊपर एक गोल शीशा लगा देने से घर में आने वाली नकारात्मक शीशे से टकराकर बाहर चली जाती है। डाइनिंग रूम में उत्तर-पूरब की दीवार पर ओवल शेप का एक बड़ा शीशा लगा देना चाहिए, इससे भोजन करने वालों का और भोजन का प्रतिबिंब उसमें दिखाइए इससे घर में समृद्धि बढ़ती है। ड्रेसिंग रूम में शीशा सदैव उत्तर अथवा पूर्व की दीवार पर ही लगाना शुभ होता है। भूलकर भी शीशे को दक्षिणी दीवार पर न लगाएं। कभी भी शयन कक्ष में शीशा न लगाएं उस कक्ष में सोने वाले व्यक्तियों के संबंधों पर बुरा असर पड़ता है।
घंटी: घंटा अथवा घंटी ऐसी वस्तु है जो प्राय मंदिरों में और अपने घरों के मंदिर में आसानी से मिल जाती है। इसका प्रयोग हम आरती के समय या मंदिर में प्रवेश के समय,भगवान जी को भोग लगाने के समय करते हैं। इसके अलावा भी घंटी के कई उपयोग हैं। घंटी वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा भर देती है। जहां पर घंटी या घंटे की ध्वनि होती है वहां से नकारात्मक शक्तियां दूर चली जाती हैं। इसलिए हमें प्रात:काल उठकर स्नान करने के बाद अपने घर की घंटी को घर के मुख्य द्वार और मंदिर में अवश्य बजाएं। घर के मुख्य द्वार में के सामने दो अथवा तीन द्वार एक सीध में हो तो एक पीतल की छोटी घंटी बीच के द्वार पर टांग दें। यदि आपके छोटे बच्चे पढ़ाई में कमजोर हैं तो एक उपाय करें। जब वह अपनी पढ़ने को बैठें तो कम से कम एक मिनट पीतल की घंटी उसकी स्टडी टेबल के पास बजाएं। वहां का वातावरण हो उर्जित हो जाएगा और बच्चों का मन एकाग्र होकर पढ़ाई में लगेगा।
काले घोड़े की नाल: प्राचीन काल से ही घोड़े की नाल अथवा नाव की कील को बहुत ही मान्यता प्राप्त हुई है। घोड़े की नाल घोड़े के पैर में रहती है और घिस-घिसकर ऊर्जावान हो जाती है। इसी प्रकार नाव की कील लगातार पानी के थपेड़े खाकर के ऊर्जित हो जाती है। यदि काले घोड़े की नाल मिल जाए तो बहुत अच्छी होती है। घर के द्वार के वास्तु दोष को समाप्त करने के लिए घर के द्वार पर टांग देते हैं। U शेप की घोड़े के नाल घरों में नीचे की ओर करके लगाते हैं। फैक्ट्री अथवा कार्यालय में ऊपर की ओर करके लगाते हैं। ऐसा माना जाता है घोड़े की नाल से घर हमारा बुरी ऊर्जाओं से संरक्षित हो जाता है। शनि की महादशा अथवा साढ़ेसाती के समय घोड़े की नाल की अंगूठी या छल्ला बनाकर भी लोग पहनते हैं।
टिप्स ट्रिक्स / शौर्यपथ / फेंगशुई के बारे में आपने सुना तो जरूर होगा। कुछ लोग फेंगशुई में विश्वास रखते हैं, कुछ इसका बिलकुल विश्वास नहीं करते जबकि कुछ लोगों को पता ही नहीं है कि फेंगशुई क्या होता है। फेंगशुई डिजाइन और वास्तुशास्त्र का एक अभिन्न हिस्सा है। यह दो शब्दों से मिलकर बना है। फेंग यानि वायु, शुई यानि जल। यह एक ऐसा कान्सेप्ट है जो प्रकृति और वातावरण के महत्व को स्थापित करता है। साथ ही यह आपको अपने आस पास के वातावरण से अवगत कराता है और संवेदनशील भी बनाता है।
फेंगशुई चीजों और आस पास के वातावरण में संतुलन बनाने का प्रयास करता है। चीजों की बनावट, उनका रंग, आकार,रखने की जगह आदि के बारे में फेंगशुई विस्तार से बताता है। फेंगशुई में पौधों का भी बहुत महत्व है। इसके अनुसार बहुत से पेड़-पौधे आपके मूड को बदलने की क्षमता रखते हैं। साथ ही यह आपकी ऊर्जा को भी बढ़ाते हैं और मानसिक रूप से आप ज्यादा बेहतर महसूस करते हैं। आज हम आपको ऐसे ही पांच फेंगशुई पौधों के बारे में बताएंगे जिन्हें लगाकर आप भी अपने आस पास के माहौल को बेहतर बना सकते हैं।
1. बैम्बू प्लांट
हरे रंग के बैम्बू प्लांट को लाल रंग के धागे से बांधकर धर में रखें। घर के सदस्यों की आयु में वृद्धि के साथ ही यह आर्थिक समृद्धि भी लाता है। यह बिजनेस के उद्देश्य से भी शुभ होता है। यह निगेटिविटी को दूर करता है। इसे पानी में लगाएं और पॉट में रंगीन पत्थर डालें।
2. स्नेक प्लांट
इसे बड़ी खिड़की या एंट्रेंस के पास लगाएं। यह एक रक्षक के रूप में काम करता है। घर में काम करने की जगह या ऑफिस में इसे लगाने से आप ज्यादा फोकस होकर काम कर पाएंगे। इसे बेडरूम या बच्चों के कमरे में ना लगाएं।
3. रबर प्लांट
घर के भीतर की निगेटिव ऊर्जा को कम करता है। इसे घर के वेल्थ एरिया में लगाएं। जहां धन आदि रखते हैं। साथ ही यह शांति और समृद्धि भी लाता है।
4. मनी प्लांट
इस पौधे से सकारात्मक ऊर्जा निकलती है जो आपके मूड को अच्छा बनाती है। यह ऊर्जा सौभाग्य और सफलता को अपनी ओर आकर्षित करती है। इसे घर की दक्षिण पूर्व दिशा में लगाएं। इस दिशा को कुबेर दिशा भी कहते हैं।
5. जेड प्लांट
गोल पत्तों वाला ये प्लांट दिखने में जितना खूबसूरत है इसके फायदे उससे भी कहीं ज्यादा हैं। घर और ऑफिस में इस पौधे को लगाएं। आपकी कार्यक्षमता भी बढ़ेगी क्योंकि ये आपको पॉजिटिव एनर्जी देगा। इसे एंट्रेंस के पास लगाएं।
नोट: इस आलेख में दी गई जानकारी का हम दावा नहीं करते कि ये पूर्णत्या सत्य या सटीक हैं और इन्हें अपनाने से अपेक्षित परिणाम मिलेगा। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र विशेषज्ञ की राय जरूर ले लें।
वास्तु शाश्त्र /शौर्यपथ / हिन्दू धर्म में गाय को माता का दर्जा दिया जाता है। गाय की पूजा की जाती है और मान्यता है कि गाय में सभी देवी-देवताओं का वास होता है। वास्तु शास्त्र में बताया गया है कि गाय हर प्रकार के वास्तु दोष को दूर करने में सक्षम है।
वास्तु के अनुसार घर में गाय का होना बहुत शुभ माना जाता है। माना जाता है कि गाय की पूजा करने और सेवा करने से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। हिंदू धर्म में गाय को मां के समान दर्जा दिया जाता है। गोमाता के गोबर से बने उपलों से रोजाना घर या प्रतिष्ठान में धूप करने से वातावरण शुद्ध होता है और सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है। घर के दरवाजे पर अगर कभी गोमाता आए तो भोजन अवश्य कराएं। गाय की सेवा से संतान प्राप्ति में आ रही बाधा दूर हो जाती है। सुबह गोसेवा करने से अत्यंत लाभ होता है। भोजन से पूर्व गाय के लिए रोटी निकालकर खिलाना चाहिए। घर में बंधी गाय का रंभाना शुभ माना जाता है। गाय के घर में होने से गृह क्लेश दूर हो जाते हैं। गाय की पूजा से कुंडली में मौजूद दोष समाप्त हो जाते हैं। गाय को अमावस्या को रोटी, गुड़, चारा खिलाने से पितृदोष समाप्त हो जाते हैं। यदि बुरे स्वप्न दिखाई दें तो गोमाता का नाम लें। यदि यात्रा आरंभ कर रहे हैं और गाय सामने आ जाए अथवा अपने बछड़े को दूध पिलाती हुई सामने दिखाई दे तो आपकी यात्रा सफल होती है।
धर्म संसार / शौर्यपथ / कार्तिक पूर्णिमा 30 नवंबर सोमवार को है। कार्तिक महीने का यह सबसे आखिरी दिन है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान आदि किया जाता है। इस दिन स्ना के साथ दान का भी बहुत महत्व है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इस बार कार्तिक पूर्णिमा पर सर्वार्थसिद्धि योग व वर्धमान योग बन रहे हैं। इस योग के कारण कार्तिक पूर्णिमा का महत्व और भी बढ़ जाता है। ऐसी मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा में या तुलसी के पास दीप जलाने से महालक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।
क्यों मनाई जाती है कार्तिक पूर्णिमा पर देव दीपावली
इस दिन महादेव ने त्रिपुरासूर नामक राक्षस का संहार किया था। यही नहीं यह भी कहा जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु का प्रथम मत्स्यावतार हुआ था। ऐसा माना जाता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन सोनपुर में गंगा गंडकी के संगम पर गज और ग्राह का युद्ध हुआ था। गज की करुणामई पुकार सुनकर भगवान विष्णु ने ग्राह का संहार कर भक्त की रक्षा की थी। इस वजह से देवताओं ने स्वर्ग में दीपक जलाए थे। तभी से इस दिन देव दिवाली मनाई जाती है। इस भगवान सत्यनारायण की पूजा, कथा और व्रत रखा जाता है।
भिलाई / शौर्यपथ / भिलाई इस्पात संयंत्र के शिरोमणि पुरस्कार योजना के तहत उत्कृष्ट एवं अनुकरणीय कार्य निष्पादन करने वाले आरसीएल विभाग में कार्यरत् 08 कार्मिकों को पाली/कर्म शिरोमणि पुरस्कार से स मानित किया गया। विदित हो कि 23 नवंबर, 2020 को कार्मिक-याँत्रिकी द्वारा इस पुरस्कार वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
शिरोमणि पुरस्कार योजना का मुख्य उद्देश्य संयंत्र में कार्मिकों का कार्यस्थल में नवीनता, संसाधनों का बेहतर उपयोग, संगठनात्मक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए उच्चतम स्तर के सुरक्षा मानकों को बनाए रखते हुए तकनीकी/प्रक्रियात्मक अनुशासन का पालन करने मेें असाधारण प्रतिभा का प्रदर्शन करते हैं, ऐसे कर्मठ कार्मिकों को पहचान देते हुए उन्हें स मानित करना है। जिसके तहत कर्म शिरोमणि पुरस्कार प्रत्येक माह में एवं पाली शिरोमणि पुरस्कार प्रत्येक तिमाही में उत्कृष्ट कार्मिकों का चुनाव कर प्रदान किया जाता है। ताकि कार्मिक संयंत्र में सदैव स्व-प्रेरित होकर अपना कार्य सुरक्षित एवं बेहतर तरीके से करते रहें।
मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना के तहत रायपुर शहरी क्षेत्र में दाई-दीदी क्लीनिक का संचालन शुरू
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना के तहत प्रदेश के पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में रायपुर शहरी क्षेत्र में दाई-दीदी क्लीनिक का संचालन शुरू हो गया है। पहले दिन यह मोबाइल क्लिनिक रायपुर के गोंदवारा क्षेत्र और आज हीरापुर सेक्टर के गोगांव आंगनबाड़ी क्षेत्र पहुंची।
दाई-दीदी क्लीनिक की मोबाइल टीम पहुंचने पर महिलाओं ने उसका स्वागत किया। गोंदवारा में कल जहां इस क्लिनिक के माध्यम से लगभग पचास महिलाओं ने अपना इलाज कराया था, वहीं आज सौ से अधिक महिलाओं ने अपना इलाज कराया। कई गर्भवती एवं प्रसूता महिलाओं ने जहां महिला चिकित्सक को अपने बीच पाकर उन्हें अपनी व्यक्तिगत स्वास्थ्य संबंधित समस्यायें बतायी वहीं जांच करवाकर अपना इलाज भी करवाया।
मुख्यमंत्री ने स्वर्गीय श्रीमती इंदिरा गांधी के जन्म दिवस पर किया था शुभारंभ
उल्लेखनीय हैं कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दो दिन पूर्व 19 नवम्बर को देश की पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्रीमती इंदिरा गांधी के जन्म दिवस पर महिलाओं के लिए क्लीनिक दाई-दीदी क्लीनिक का शुभारंभ किया था। उन्होंने पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में रायपुर, दुर्ग-भिलाई और बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र के लिए 3 स्पेशल मोबाइल दाई-दीदी क्लीनिक को अपने निवास से हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया था। इस क्लीनिक में डॉक्टर सहित सभी चिकित्सकीय स्टाफ महिलाएं होंगी और केवल महिलाओं का ही निःशुल्क इलाज किया जाएगा।
क्लिनिक में आने वाली महिलाओं ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के द्वारा महिलाओं के प्रति दिखाई गई संवेदनशीलता के लिए उन्हें धन्यवाद दिया और उनके प्रति आभार व्यक्त किया। उल्लेखनीय हैं कि दाई-दीदी क्लीनिक देश में अपनी तरह का पहला क्लीनिक है, जो केवल महिलाओं का इलाज करेगा। यह भी उल्लेखनीय हैं कि कई बार संकोच के कारण महिलाएं अपनी बीमारी को खुलकर नहीं बता पाती हैं। इस कारण उनकी बीमारी का सही उपचार नहीं हो पाता। अब दाई-दीदी क्लीनिक में महिला चिकित्सक और महिला स्टाफ होने से वे निःसंकोच अपना समुचित इलाज करा रही है। रायपुर शहर में इस मोबाइल क्लिनिक के माध्यम से महिलाओं को निःशुल्क इलाज की सुविधा उनके घर के पास मिल रही है और महिलाएं भी इसका पूरा लाभ लेते हुए बड़ी संख्या में आकर अपना इलाज करा रही है।
स्तन कैंसर के अलावा गर्भवती महिलाओं की विशेष जांच की सुविधा
दाई-दीदी क्लीनिक में महिलाओं के प्राथमिक उपचार के साथ-साथ महिला चिकित्सक द्वारा स्तन कैंसर की जांच, हितग्राहियों को स्व स्तन जांच का प्रशिक्षण, गर्भवती महिलाओं की नियमित एवं विशेष जांच आदि की अतिरिक्त सुविधा हैं।
महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से शहरों में स्थित आंगनबाड़ी के निकट पूर्व निर्धारित दिवसों में यह क्लीनिक स्लम क्षेत्र में लगाया जा रहा है। इस क्लीनिक के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं, बच्चों आदि के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग की विभिन्न हितग्राहीमूलक परियोजना का लाभ भी प्रदान किया जा रहा है।
यह भी उल्लेखनीय हैं कि जनरल क्लीनिक में महिलाओं के लिए पृथक जांच कक्ष और काउंसलर नहीं होने से महिलाएं परिवार नियोजन के साधन, कॉपर-टी निवेशन, आपातकालीन पिल्स की उपलब्धता, गर्भनिरोधक गोलियां, साप्ताहिक गर्भनिरोधक गोली, गर्भनिरोधक इंजेक्शन, परिवार नियोजन परामर्श, एसटीडी परामर्श में शर्म का अनुभव करती है। इस महिला क्लीनिक में डेडीकेटेड महिला स्टाफ होने से महिलाओं विशेषकर झुग्गी झोपड़ क्षेत्र की गरीब महिलाएं अब इस प्रकार के परामर्श निःसंकोच ले रही हैं।
राजनांदगांव / शौर्यपथ / शिक्षा का अधिकार कानून का कड़ाई से पालन कराने की जिम्मेदारी जिला शिक्षा अधिकारी की है, लेकिन जिले में पांच सौ बच्चे विगत पांच माह से प्रवेश पाने भटक रहे है। आरटीई कानून के अंतर्गत जुलाई माह में प्रथम लॉटरी निकाला गया था, जिसमें चयनित 500 बच्चे आज भी प्रायवेट स्कूलों में प्रवेश पाने भटक रहे है। पालकों ने अनेकों बार जिला शिक्षा अधिकारी को लिखित आवेदन दिया, लेकिन उनके बच्चों को आज तक प्रवेश नहीं दिलाया गया, जिसको लेकर अब पालकों ने संभागीय कमिश्नर, जिला दुर्ग से लिखित शिकायत कर डीईओ के खिलाफ कार्यवाही की मांग की गई है। छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल पॉल ने भी छग राज्य बाल संरक्षण आयोग को लेटर लिखकर डीईओ के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही करने की मांग की है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
