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खाना खजाना /शौर्यपथ / सर्दियां शुरू हो चुकी हैं। ऐसे में इस मौसम में खाने-पीने का एक अपना ही मजा है। आप चटपटे के शौकीन हैं, तो आपको गोल गप्पे भी पसंद होंगे। ऐसे में आप इस डिश को घर में ट्राई कर सकते हैं। घर में गोलगप्पे बनाना इतना भी मुश्किल नहीं है-
सामग्री-
एक चौथाई कप मैदा
एक कप सूजी
तलने के लिए तेल
नमक स्वादनुसार
विधि- गोलगप्पे बनाने के लिए आपको सबसे पहले आटा तैयार करना होगा। इसके लिए आप सबसे पहले एक बर्तन में सूजी और मैदा डालकर मिक्स करें। अब इसमें नमक और थोड़ा सा तेल डालें और फिर पानी की सहायता से आटा गूंथ लें। इसके बाद आप आटे को कुछ देर के लिए एकतरफ रख दें ताकि आटा अच्छी तरह सेट हो जाए। इसके बाद आप फिर से आटे को एक बार ओर मसल कर नरम कर लें। अब आप छोटी-छोटी लोइयां लेकर उसे गोल बेल लें और फिर किसी बोतल के ढक्कन की सहायता से गोल काट लें। इस तरह आप सभी तरह के गोलगप्पे तैयार कर लें। गोलगप्पे बनाते समय आप उसे किसी नम कपड़े से ढक दें अन्यथा सारे गोलगप्पे सूख जाएंगे। अब आप एक कड़ाही में तेल डालकर उसे गरम करें। जब तेल गरम हो जाए तो आंच को धीमा करके उसमें गोलगप्पे सेंके। इस तरह गोलगप्पे करारे बनते हैं। अंत में आप इन्हें दो-तीन घंटों के लिए किसी खुले बर्तन में रख दें। इससे गोलगप्पे सख्त और करारे हो जाएंगे। आपके जो गोलगप्पे न फूलें, उन्हें आप बतौर पापड़ी भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
गोलगप्पे बनाने के बाद इसे सर्व करने के लिए आप आलू और छोलों को उबाल लें और फिर इन्हें भरकर साथ में खट्टे-मीठे पानी का इस्तेमाल करके सर्व करें। गोलगप्पे का पानी बनाने के लिए आप मार्केट में रेडीमेड मिलने वाले जलजीरा पैकेट को पानी में डालकर इस्तेमाल कर सकते हैं।
सेहत /शौर्यपथ / दुनियाभर में कोविड-19 नाम की महामारी ने सेहत के प्रति लोगों के दिलों में दहशत भर दी है। हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो यह रोग एक बार ठीक होने के बाद भी दोबारा लोगों को अपना शिकार बना सकता है। खासतौर पर ऐसा उन लोगों के साथ देखा जा रहा है जो बुर्जुग हैं या फिर ठीक होने के बाद उचित सावधानी नहीं बरतने की वजह से इंफेक्शन के जोखिम का खतरा उठा रहे हैं। बता दें, इस बीमारी को मात देने वाले लोगों का शरीर भीतर से इतना कमजोर हो जाता है कि उन्हें मौसमी संक्रमण भी आसानी से घेर सकते हैं। ऐसे में कोरोना को मात दे चुके लोगों के लिए बताते हैं कुछ ऐसे सेहतमंद टिप्स जो रोजाना करने पर ये महामारी आपको दोबारा छू भी नहीं पाएगी।
डायट में पोषक तत्व-
कोरोना से ठीक होने के बाद अपनी डाइट को लेकर लापरवाही बरतने की गलती न करें। डाइट में प्रोटीन की मात्रा अधिक लें। इसके लिए आप अपनी डाइट में दाल, हरी फलियां या अंडों को शामिल कर सकते हैं। इसके अलावा दिनभर में 8-9 गिलास पानी भी पिएं। इसके अलावा एक साथ पेट भरकर खाने की जगह थोड़ी-थोड़ी मात्रा में कुछ न कुछ खाते रहें। ऐसा करने से आपके पाचन तंत्र पर असर भी नहीं पड़ेगा और आपके शरीर की ऊर्जा भी बनी रहेगी।
एक्सरसाइज-
कोरोना से ठीक हुए व्यक्ति को अपनी दिनचर्या में हल्का-फुल्का व्यायाम जरूर शामिल करना चाहिए। इसके लिए रोजाना 30 मिनट की वॉक या कोई आसान योगा किया जा सकता है।
ब्रेन से जुड़ी एक्सरसाइज-
देखा जा रहा है कि कोरोना से ठीक हुए मरीजों की दिमागी सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है। जिसमें चीजें रखकर भुलने की समस्या सबसे ज्यादा है। इस समस्या से बचने के लिए आप अपनी दिनचर्या में लूडो, चेस जैसे कुछ खेल शामिल कर सकते हैं, जिनसे आपकी दिमागी कसरत हो सके।
ऑक्सीजन लेवल का रखें ध्यान-
कोरोना के दौरान मरीज के फेफड़ों की सेहत पर बुरा असर पड़ता है। कोरोना संक्रमण से पूरी तरह ठीक होने के बाद भी आपको अपना ऑक्सीजन लेवल चेक करते रहना है। अगर यह 90 से नीचे जाए तो आपको अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
ये लक्षण दिखने पर डॉक्टर से करें सपंर्क-
कोरोना से ठीक हुए मरीज को अगर कुछ समय बाद खुद में सांस का छोटा होना, सीने में जकड़न का अहसास होना, अचानक से सिर चकराना, अचानक पसीना अधिक होना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं तो उसे बिना देर किए अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
नीट क्वालिफाई बच्चे जो नेटवर्क प्राब्लम के चलते काउंसिलिंग के लिए तय समय पर नही करा सके थे अपना पंजीयन इन होनहार बच्चों का अब सरकार संवारेगी भविष्य
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने एक ओर संवेदनशील पहल करते हुए प्रदेश के सुदुर अंचल जहां नेटवर्क और अन्य तकनीकी कारणों से नीट क्वालिफाई होनहार छात्र-छात्राएं जो काउंसलिंग के लिए निर्धारित समय पर अपना पंजीयन नही करा सके थे उन्हें अब प्रदेश के निजी काॅलेजों में पेमेंट सीट पर प्रवेश दिलाने के निर्देश दिए है। इन होनहार बच्चों का भविष्य अब सरकार संवारेगी। छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के बाद यह पहली बार है कि एमबीबीएस के लिए निजी काॅलेजों के पेमेंट सीट में बच्चों को राज्य सरकार के खर्च पर दाखिला दिलाया जाएगा।
मुख्यमंत्री बघेल ने कहा है कि किसी भी बच्चे के भविष्य के साथ कोई समझौता नही होना चाहिए। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने प्रदेश के दूरस्थ आदिवासी अंचलों के ऐसे सभी होनहार बच्चों के एमबीबीएस मेें दाखिला के लिए जिला प्रशासन को आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के संज्ञान में जैसे ही यह बात आयी कि दंतेवाड़ा जिले के 27 होनहार छात्र-छात्राएं जिन्होंने नीट क्वालिफाई किया है परन्तु नेटवर्क प्राब्लम के चलते प्रथम काउंसलिंग में उनका रजिस्ट्रेशन नहीं हो सका था। इस सम्बन्ध में जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन द्वारा अपने स्तर पर पंजीयन कराने का प्रयास किया गया और राष्ट्रीय स्तर पर द्वितीय काउंसलिंग पूर्व इनका रजिस्ट्रेशन कराया गया परंतु ये छात्र चयन से वंचित रह गए । राज्य में पंजीयन हेतु द्वितीय अवसर नहीं होने से उनका पंजीयन नहीं कराया जा सका । प्रथम काउंसलिंग के पश्चात इसमें दो छात्रा कुमारी पदमा मडे और पीयूषा बेक एमबीबीएस में प्रवेश की पात्रता रखती हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद कलेक्टर दंतेवाड़ा द्वारा इन छात्राओं का प्रदेश के निजी काॅलेजों में दाखिला की कार्यवाही की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आगे भी यदि इनमें से कोई छात्र कटअप के बाद प्रवेश के लिए पात्र पाया जाता है तो उन्हें भी निजी काॅलेजों की पेमेंट सीट पर दाखिला दिलाया जाएगा और इसका खर्च राज्य सरकार वहन करेगी।
राजनांदगांव / शौर्यपथ / कोरोना संक्रमण काल में भी अपने कार्य को पूरा करते हुए नवोदय विद्यालय चयन समिति द्वारा 6वीं प्रवेश हेतु चयन परीक्षा के लिए ऑनलाइन पंजीयन कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। इस हेतु जिले के एकमात्र नवोदय विद्यालय डोंगरगढ़ के शिक्षकों द्वारा जिले के सभी विकासखंड में जाकर ऑनलाइन पंजीयन के लिए दिशा-निर्देश दिया जा रहा है। इस कड़ी में पढ़ई तुंहर दुआर अभियान के तहत बच्चों को घर बैठे सुरक्षित एवं सतत् शिक्षा प्रदान करने में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करने वाले मोहला विकासखंड में प्राचार्य संतोष सिन्हा, संतोष कुमार मंडल व अनिल कुमार पाल द्वारा पंजीयन के नियम, पोर्टल की स्थिति तथा परीक्षा पात्रता सम्बन्धी नियमों से सभी सीएसी को अवगत कराया गया।
शिक्षक मंडल ने बताया कि पूर्व वर्षो में राजनांदगांव जिला पूरे देश मे पंजीयन संख्या में अव्वल रहा है। पिछले साल 25,490 बच्चों का पंजीयन परीक्षा के लिए किया गया था। इस साल भी ऑनलाइन पंजीयन के लिए पोर्टल खोल दिया गया है तथा 15 दिसम्बर अंतिम तिथि है। इस कार्यशाला में मोहला एबीईओ राजेन्द्र देवांगन, बीआरसी खोमलाल वर्मा व सभी सीएसी उपस्थित रहे। मोहला एबीईओ राजेन्द्र देवांगन ने बताया कि इस साल ब्लॉक में 5वीं में 1460 बच्चे पंजीकृत है। ब्लॉक के शिक्षकों द्वारा पंजीयन कार्य प्रारंभ कर दिया गया है तथा 200 से अधिक बच्चों का पंजीयन पूर्ण हो गया है। पंजीयन हेतु 1 मई 2008 से 30 अप्रैल 2012 तक जन्म तिथि वाले 5वीं में अध्ययनरत बच्चे परीक्षा देने के लिए पात्र है। परीक्षा 10 अप्रैल 2021 को आयोजित होगी।
ज्ञातव्य है कि मोहला के बच्चों को शिक्षकों की मदद से शिखर कार्यक्रम के तहत नि:शुल्क कोचिंग भी दिया जाता है ताकि बच्चों को परीक्षा के लिए गाइड लाइन मिल सके। संसदीय सचिव श्री इन्द्रशाह मण्डावी, समाज सेवी श्री संजय जैन, एपीसी श्री सतीश ब्यौहरे व स्थानीय अधिकारियों के मार्गदर्शन में प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बच्चों को दिशा-निर्देश दिया जाता है।
शौर्यपथ / पीरियड्स के दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह के हॉर्मोनल बदलाव होते हैं। ऐसे में उन्हें अपने खानपान से लेकर रहन सहन से जुड़ी कई तरह की बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है। अधिकतर महिलाएं इस दौरान बेचैनी और कमजोरी महसूस करती हैं। ऐसे में इस दौरान की गई ये 5 गलतियां उनकी सेहत पर भारी पड़ सकती हैं। आइए जानते हैं आखिर कौन सी हैं वो गलतियां।
ये हैं वो 5 काम जिन्हें पीरियड्स के दौरान करने से बचना चाहिए-
पौष्टिक आहार की कमी-
लड़कियां अक्सर वेट लॉस के चक्कर में डाइटिंग करने लगती हैं। लेकिन पीरियड्स के दौरान आहार ठीक से नहीं लेने पर यह आपकी सेहत पर भारी पड़ सकता है। हमेशा इस बात का ध्यान रखें कि पीरियड्स के दौरान सेहतमंद बने रहने के लिए आपको अपनी डाइट में पौष्टिक आहार शामिल करना है।
लंबे समय तक एक ही पैड-
अक्सर महिलाएं कम ब्लीडिंग होने पर एक ही पैड को लंबे समय तक यूज करती रहती हैं। जो संक्रमण की बड़ी वजह बन सकता है। पैड बदलने में आलस न करें। एक निश्चित अंतराल पर अपना पैड बदलते रहें। ऐसा करने से आप संक्रमण से बची रहेंगी।
जंक फूड की क्रेविंग-
पीरियड्स के दौरान कई महिलाओं को चिड़चिड़ापन महसूस होने के साथ मीठा या जंक फूड खाने की क्रेविंग महसूस होती है। लेकिन ऐसा करने से बचें और अनहेल्दी खाने से दूर रहें।
हैवी एक्सरसाइज रुटीन-
अगर आप अपने डेली रूटीन में हैवी एक्सरसाइज रूटीन फॉलो करती हैं, तो पीरियड्स के दौरान ऐसा करने से बचें। ऐसा करना कमर दर्द या अकड़न की वजह बन सकता है। इसके अलावा इस दौरान बहुत तंग कपड़े भी नहीं पहनने चाहिए वरना चिड़चिड़ापन होने की आशंका बढ़ जाती है।
हार्ड सोप का इस्तेमाल-
पीरियड्स के दौरान हार्ड सोप से अपने जननांगों को साफ करने की गलती न करें। ऐसा करने से त्वचा में ड्राईनेस बढ़ सकती है जो आगे चलकर खुजली या संक्रमण की वजह बनकर आपको असहज कर सकती है। अपने जननांगों को साफ करने के लिए एल्कोहोल वाले वेट टिशू पेपर का इस्तेमाल करें।
सेहत /शौर्यपथ /सर्दियों में शहद का सेवन किसी एनर्जी बूस्टर से कम नहीं है। शहद के स्वाद की तरह इसके गुण भी बहुत मीठे हैं। वजन कम करने के साथ शहद आपके शरीर को डिटॉक्स करता है लेकिन आपको शहद के सेवन से जुड़ी कुछ सावधानियों को भी ध्यान रखना चाहिए, जिससे कि शहद आपको फायदा पहुंचाने की जगह नुकसान न पहुंचा दे।
शहद के पोषक तत्व
शहद जरूरी पोषक तत्वों, खनिजों और विटामिन का भंडार है। शहद (honey in hindi) में मुख्य रुप में फ्रक्टोज पाया जाता है। इसके अलावा इसमें कार्बोहाइड्रेट, राइबोफ्लेविन, नायसिन, विटामिन बी-6, विटामिन सी और एमिनो एसिड भी पाए जाते हैं। एक चम्मच (21 ग्राम) शहद में लगभग 64 कैलोरी और 17 ग्राम शुगर (फ्रक्टोज, ग्लूकोज, सुक्रोज एवं माल्टोज) होता है। शहद में फैट, फाइबर और प्रोटीन बिल्कुल भी नहीं होता है।
शहद के फायदे
शहद के औषधीय गुणों की बात करें तो यह अनगिनत बीमारियों के इलाज में उपयोगी मानी जाती है। यही कारण है कि प्राचीन काल से ही शहद को औषधि माना गया है। आज के समय में मुख्य रुप से लोग त्वचा में निखार लाने, पाचन ठीक रखने, इम्युनिटी पावर बढ़ाने, वजन कम करने आदि के लिए शहद का उपयोग करते हैं।
इन बातों का रखें ध्यान
-शहद में गर्मी होती है। इसे गर्म खाने के साथ खाने से बचना चाहिए, नहीं तो दस्तु की संभावना होती है।
-चाय या कॉफी के साथ शहद के सेवन से शरीर का तापमान बढ़ा देता है। इससे घबराहट बढ़ने की संभावना होती है।
-शहद के साथ मूली खाने से बचना चाहिए, इससे शरीर में टॉक्सिन्स बनने लगते हैं।
-मीट और मछली के साथ शहद खाने से शरीर में टॉक्सिन पैदा होता है। इससे शरीर पर बुरा असर पड़ता है।
-घी व शहद की समान अनुपात में मिलाकर सेवन न करें। यह विषाक्त हो सकता है।
शौर्यपथ / वास्तु शास्त्र एवं पौराणिक मान्यताओं के अनुसार पक्षियों के जोड़े, नारियल, एकाक्षी नारियल और श्रीफल सुख-समृद्धि बहुत ही उपयोगी माने गए हैं। इन वस्तुओं का प्रयोग मानव की समृद्धि और शांति के लिए किया जा सकता है। ज्योतिषाचार्य पं.शिवकुमाार शर्मा से जानिए इनका जीवन में समृद्धि के लिए कैसे और किस तरह से इनका प्रयोग किया जा सकता है।
पक्षियों का जोड़ा: पक्षियों का जोड़ा प्राचीन काल से ही भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग रहा है। पक्षियों के जोड़े का इतिहास हमें महर्षि वाल्मीकि के युग से प्राप्त होता है जब वे तमसा नदी में स्नान कर रहे थे, तब एक क्रोंच पक्षी का जोड़ा जलविहार कर रहा था। सुंदर पक्षियों का जोड़ा वास्तु के अनुसार भी बहुत शुभ होता है। हंस, तोता, मोर, चकवा-चकवी शुभ पक्षियों के जोड़े की तस्वीर या मूर्ति घर में लगाने से घर के सदस्यों में परस्पर प्रेम का भाव जागृत होता है। नव दंपत्ति के कक्ष में या बेडरूम में ऐसे पक्षियों का जोड़ा रखना शुभ माना गया है। लेकिन यह भी ध्यान रहे कि चित्र में पक्षियों का जोड़ा उस कक्ष में पानी के अंदर दिखाई ना पड़े। पक्षियों का जोड़ा हमेशा उत्तर अथवा पूर्व दीवार पर रखें ताकि सोते समय और जागते समय सामने दिखाई पड़े। इससे पति-पत्नी के बीच में संबंध मधुर होते हैं। घर के ड्राइंग रूम में भी इन पक्षियों के जोड़े रखे जा सकते हैं। ड्राइंग रूम में इन जोड़ों को रखने से हमारे सामाजिक संबंध बहुत अच्छे और मधुर हो जाते हैं। विवाह योग्य कन्या के कक्ष में भी ऐसे जोड़े रखने से शीघ्र ही उनका विवाह संबंध तय हो जाता है।
नारियल: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नारियल कई रूपों में मिलता है। पहला है साधारण नारियल। यह नारियल ऊपर से जटा से युक्त कठोर परत वाला नारियल पूर्णता का प्रतीक है। इसे हम ब्रह्मांड की परिकल्पना भी कर सकते हैं। नारियल प्रत्येक शुभ कार्य में उपयोग किया जाता है। महालक्ष्मी के स्वागत के लिए द्वार पर कलश भरकर आम्रपल्लव डालकर उसके ऊपर नारियल सजाते हैं। ऐसा माना जाता है कि लक्ष्मी जी को पूर्ण कलश बहुत प्रिय है और वे उस घर में निवास के लिए तत्पर रहती हैं। इसीलिए सभी हिंदू परिवारों में शुभ अवसर पर सज्जा के समय नारियल युक्त कलश का चित्र और नारियल का चित्र बनाकर सकारात्मक उर्जा का निर्माण किया जा सकता है।
एकाक्षी लघु नारियल: सामान्य रूप से जब हम नारियल के जटाओं को हटाते हैं उसकी कठोर परत पर तीन काले बिंदु दिखाई देते हैं। जिसमें दो बिंदु आंखों के रूप में और एक बिंदु मुंह के रूप में माना गया है। कभी-कभी हजारों में कोई एक नारियल ऐसा निकलता है जिसमें केवल दो बिंदु होते हैं। इसे एक आंख और एक मुंह माना जाता है। ऐसे नारियल को एकाक्षी नारियल बोलते हैं। यद्यपि यह बहुत दुर्लभ होता है यदि आपको कहीं मिल जाए, इसकी घर में स्थापना करें। दैनिक पूजा करें और मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए किसी विशेष मंत्र के द्वारा इस को अभिमंत्रित करें। तंत्र में यह नारियल बहुत ही उपयोगी माना गया है। इससे घर में धन-धान्य प्रेम और इच्छापूर्ति तक की संभावनाएं होती हैं।
श्रीफल: श्रीफल एक कंचे के आकार का नारियल की तरह एक फल होता है। इसे अति लघु नारियल या श्रीफल कहते हैं। श्री फल लक्ष्मी जी अर्थात लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने का फल माना गया है। दीपावली के पर्व पर 5 या 11 श्रीफल लेकर दीपावली पूजन के समय चौकी पर रखें और लक्ष्मी जी के मंत्रों से ही उन पर अक्षत, पुष्प, नैवेद्य आदि से पूजन करें। अगले दिन अपनी तिजोरी या मंदिर में स्थापित कर दें। घर का उत्तर पूरब कोना यदि दूषित हो या कटा हुआ हो तो 11 श्रीफल 11 पीली कौड़ियां पीले वस्त्र में बांध कर टांगे या किसी पात्र में रख दें। श्रीफल को अपनी जेब या व्यापार स्थान में या तिजोरी में रखने से भी लक्ष्मी जी कृपा बनी रहती है।
सेहत /शौर्यपथ / वैसे तो किशमिश का सेवन हमारे शरीर के लिए बहुत फायदेमंद है लेकिन इसका सेवन अगर ठंड में किया जाए तो ये ज्यादा लाभदायक होती है. ठंड के मौसम में किशमिश का सेवन करने से कब्ज, एनीमिया, दुबलापन और शारीरिक कमजोरी जैसी गंभीर समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है. किशमिश का सेवन करने से आपका वजन भी संतुलित रहता है. साथ ही आंख, दांत और हड्डियां भी मजबूत बनी रहती हैं. आइए हम आपको बताते हैं कि किशमिश का किस तरह से सेवन करने से आप ठंड के दिनों में स्वस्थ रह सकते हैं.
बॉडी को करता है डिटॉक्सीफाई
किशमिश के सेवन से उसके अंदर मौजूद फाइबर हमारी आंतों से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है जिससे हमारा पाचन तंत्र सही रहता है. किशमिश के सेवन से हमारे शरीर को भरपूर मात्रा में ऊर्जा मिलती है क्योंकि इसमें ग्लुकोज और फ्रुक्टोज पाया जाता है जो हमारे शरीर को ताकतवर बनाता है.
किशमिश में कई ऐसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो आपकी त्वचा को स्वस्थ और सुंदर बनाए रखने में आपकी मदद करता है. किशमिश त्वचा में मौजूद कोशिकाओं की रक्षा करता है जिससे आपकी त्वचा चमकदार और सुंदर दिखाई देने लगती है.
कैसे करें सेवन
किशमिश के सेवन से पूरा शरीर स्वस्थ रहता है. ऐसे में जरूरी है कि आप किशमिश का सेवन रोजाना करें. प्रतिदिन दूध में 12 से 14 किशमिश को अच्छे से उबाल लें और रोज रात को सोने से पहले इसका सेवन करें, जिससे आप काफी स्वस्थ रहेंगे.
बुखार में होता है लाभकारी
प्रोनोलिक फाइटोन्यूट्रीएंट्स जो कि अपने जीवाणुनाशक, एंटीबायोटिक और एंटीऑक्सीडेंस गुणों के लिए जाना जाता है. यह तत्व किशमिश में काफी अधिक मात्रा में पाया जाता है जो बुखार में काफी लाभकारी होती है.
सेहत /शौर्यपथ / अक्सर छोटे बच्चों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है. कभी उन्हें सर्दी-जुखाम हो जाता है, तो कभी पेट दर्द की समस्या. इसके अलावा भी कुछ अन्य समस्याएं हैं जो बच्चों को परेशान करती हैं. डायपर रैशेज की समस्या भी इनमें से एक है. दरअसल, लंबे समय तक डायपर पहने रहने की वजह से भी कई बार बच्चों को यह समस्या हो जाती है. यह समस्या डायपर में देर तक गीलापन रहने, इसे देर तक न बदला जाना आदि वजह से हो भी हो सकती है. इसमें उनकी स्किन पर हल्के दाने और रैश उभर आते हैं. साथ ही बच्चों को स्किन पर रेडनेस (Skin Redness), जलन और दर्द (Pain) की समस्या हो सकती है. ऐसे में बच्चे की नाजुक स्किन की ज्यादा देखभाल करनी चाहिए. आप कुछ उपाय अपना कर बच्चों को इस समस्या से बचा सकते हैं.
हर समय न पहनाएं डायपर
डायपर इस्तेमाल करने के कई फायदे होते हैं. मगर इसके ज्यादा इस्तेमाल से बचना चाहिए. इसलिए बच्चे को कुछ समय डायपर के बिना ही रखें. इससे बच्चों की स्किन सूखने लगेगी और उन्हें आराम मिलेगा. अगर बच्चा रैशेज की समस्या से गुजर रहा है, तो इस दौरान बच्चे को सूती आरामदेह कपड़े पहनाएं. इससे दाने जल्दी सूखेंगे.
बच्चे के रैशेज जल्दी ठीक हों और उसे जल्दी आराम मिले इसके लिए रैशेज वाली स्किन पर एंटी रैश क्रीम लगाई जा सकती है. या फिर नारियल का तेल भी उस स्थान पर लगा सकते हैं. नारियल तेल में एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण होते हैं. इसे लगाने से रैश ठीक होने लगेंगे.
ऑलिव ऑयल है गुणकारी
ऑलिव ऑयल भी बच्चों को होने वाले डायपर रैशेज में लाभ पहुंचाता है. इसमें मौजूद एंटी इन्फ्लेमेटरी और एंटी माइक्रोबियल गुण रैशेज को ठीक करने में मदद करते हैं. बच्चे को डायपर रैशेज वाली स्किन पर अपने हाथों से ऑलिव ऑयल लेकर हल्के हाथों से लगा दें. इससे स्किन मुलायम बनी रहेगी और इंफेक्शन भी दूर होने लगेगा.
एलोवेरा जेल देगी आराम
एलोवेरा को स्किन संबंधी समस्याओं में रामबाण माना जाता है. बच्चों को होने वाले डायपर रैशेज में भी यह फायदेमंद होता है. इसके लिए एलोवेरा जेल बच्चे की रैशेज वाली जगह पर हल्के हाथों से मलें. उसे आराम मिलेगा.
खाना खजाना / शौर्यपथ / आपने प्याज, आलू, बैंगन और पनीर आदि के पकौड़े तो खाए होंगे मगर कटहल के पकौड़ों के स्वाद से शायद ही वाकिफ हों. इनका जायका बेहद अच्छा होता है. इन्हें शाम की चाय के साथ या फिर जब कुछ अलग खाने की इच्छा हो तब बनाया जा सकता है. अब तक आपने जितनी तरह के भी पकौड़े खाए होंगे, कटहल के पकौड़ों का मजा भी कभी नहीं भूलेंगे आप. इन्हें बनाना भी बेहद आसान है और यह झटपट तैयार हो जाते हैं. तो आइए जानते हैं कटहल के पकौड़े की रेसिपी...
कटहल के पकौड़े बनाने की सामग्री
कच्चा कटहल- 500 ग्राम
नमक- 1.5 छोटी चम्मच
हींग- ½ चुटकी
बेसन- 1 कप
चावल का आटा- ½ कप
हरी मिर्च- 2 बारीक कटी हुई
लाल मिर्च पाउडर- 1.5 छोटी चम्मच
धनिया पाउडर- 1.5 छोटी चम्मच
अमचूर पाउडर- ½ छोटी चम्मच
गरम मसाला- ½ छोटी चम्मच
अजवाइन- ½
तेल- तलने के लिए
कटहल के पकौड़े बनाने की विधि
सबसे पहले कटहल को छोटे छोटे पीस में काट लें और बीज के पीछे का भाग निकाल लें. अब कूकर में ½ कप पानी, ¾ चम्मच नमक और 1 चुटकी हींग डालकर कटा हुआ कटहल डालकर ढक्कन बंद कर आंच पर रख दें और एक सीटी आने दें. थोड़ी देर बाद कूकर का ढक्कन खोलकर इसे निकाल लीजिए और बचा हुआ पानी फेंक दीजिए. अब एक गहरे तले वाले पैन में कच्ची घानी तेल डालकर हल्की आंच पर गर्म करें. एक गहरे बर्तन में बेसन, चावल का आटा, स्वादानुसार नमक और अंदाज से थोड़ा सा पानी डालकर एक घोल बना लें. इस घोल में लाल मिर्च पाउडर, हरी मिर्च, धनिया पाउडर, अमचूर, गरम मसाला और अजवाइन डालकर अच्छे से मिला लीजिए और इसमें 1 स्पून तेल भी डालकर मिलाएं. अब इस घोल में उबले हुए कटहल के टुकड़े डालकर मिला लें और हल्दी डालकर मिलाएं. लीजिए तैयार है क्रिस्पी पकौड़ा बनाने के लिए आपका घोल.
कड़ाही में तेल डालकर अच्छे से गर्म कर लें इसके बाद पकौड़े के घोल को थोड़ा थोड़ा कर इस तेल में टपकाएं. मद्धम आंच पर पकौड़ों को गोल्डन ब्राउन होने तक तल लें. अब इन पकौड़ों को एक कागज़ लगी प्लेट पर निकाल लें ताकि अतिरिक्त तेल सोख लें. इसी तरह सारे पकौड़ों को तल लीजिए. अब इन पकौड़ों को एक सर्विंग प्लेट में निकालकर टोमेटो केचप या धनिये और टमाटर की खट्टी चटनी के साथ सर्व करें. इनका स्वाद लाजवाब कर देगा.
भिलाई / शौर्यपथ / सेल चेयरमैन अनिल कुमार चौधरी ऑनलाइन आयोजित सेल कार्मिकों के बड़े समूह से चर्चा की। सेल चेयरमैन श्री चौधरी डिजिटल माध्यम से आयोजित इस इन्टरैक्शन कार्यक्रम में सेल के पांच एकीकृत इस्पात संयंत्रों के 2000 से अधिक कर्मचारियों से क्रमवार जुड़े। भिलाई इस्पात संयंत्र के 500 से अधिक कर्मचारियों ने इस बड़े समूह इन्टरैक्शन (एलजीआई) में भाग लिया, जो वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित किया गया था। इस चर्चा के माध्यम से कर्मचारियों के प्रोडक्शन से जुड़ाव को बढ़ाने के प्रयासों पर ध्यान केन्द्रित किया गया था, जिससे वर्तमान में बढ़ते स्टील बाजार का लाभ उठाए जा सके तथा उत्पन्न चुनौतियों पर विजय पाया जा सके। श्री अनिल कुमार चौधरी ने कहा कि सेल को बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए सभी प्रयासों पर जोर देना होगा। वर्तमान परिस्थितियांँ बेहद अनुकूल हैं, विशेष रूप से सेल जैसे इस्पात निर्माताओं के लिए यह एक अतिरिक्त लाभ है जो अपने ग्राहकों को बहुत सारे उत्पादों का विकल्प पेश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इन सभी अनुकूल परिस्थितियों का लाभ उठाने के लिए सेल के सभी संयंत्रों और इकाइयों के कर्मचारियों को कमर कसनी होगी। जहाँ बेहतर प्रदर्शन और लाभप्रदता में सुधार से संगठन को अच्छी छवि बनती है, वहीं कर्मचारियों को भी इसका लाभ मिलेगा। भिलाई इस्पात संयंत्र की कंपनी के समग्र प्रदर्शन में महत्वपूर्ण भूमिका है, सेल अध्यक्ष, श्री चौधरी ने आगे कहा कि बीएसपी में बड़ी क्षमताएँ हैं, जिसका प्रदर्शन वह समय-समय पर करता रहा है। हाल ही में लॉकडाउन अवधि के दौरान भी उन्होंने इसे प्रदर्शित किया है। हम सभी ने वर्तमान वित्तवर्ष की पहली छमाही में इसका अनुभव किया है। ऐसे में कंपनी को स्टील उद्योग के लिए आज बनी इन सकारात्मक और अनुकूल परिस्थितियों में भिलाई बिरादरी से बेहद उम्मीदें हैं। भिलाई इस्पात संयंत्र के लिए प्राथमिकताओं तथा इसे प्राप्त करने की रणनीति का जिक्र करते हुए श्री चौधरी ने कहा कि संयंत्र हाल ही में कई मॉडेक्स सुविधाओं से सुसज्जित हुआ है और बीएसपी को इससे अधिकतम लाभ प्राप्त करना है।
इस भारी निवेश की उपयोगिता को सिद्ध करते हुए बीएसपी बिरादरी को लाँंग रेल के उत्पादन को बढ़ाने हेतु अपनी कमर कसनी होगी। साथ ही इसके अन्य मूल्य वर्धित उत्पादों जैसे वायर रॉड्स और टीएमटी बार्स की बाजार में अच्छी माँग है। जिसका नेट सेल्स रियालाइजेशन (एनएसआर) बेहतर होने से क पनी की लाभार्जन क्षमता बढ़ेगी। सेल चेयरमैन ने जोर देते हुए कहा कि प्लेटों के लिए भी पर्याप्त मांँग है जिसे संयंत्र, उत्पादन करने में सक्षम है। सेल, चेयरमैन ने कहा कि जबकि रेलवे ने अस्थायी रूप से छोटी रेलों की खरीद बंद कर दी है, लेकिन भारतीय रेलवे से लंबी रेल्स के आदेशों में कोई कमी नहीं है। श्री चौधरी ने जोर देते हुए कहा कि स्टील मेल्टिंग शॉप्स के लिए भी जरूरी है कि वे अपने निष्पादन गति को प्रभावी बनाए रखें
खाना खजाना /शौर्यपथ / सर्दियों का मौसम हो और खाने में गाजर का हलवा मिल जाए तो मौसम और स्वाद दोनों का मजा दोगुना हो जाता है। लेकिन गाजर का हलवा बनाते समय अक्सर लोग शिकायत करते हैं कि इसे बनाने में काफी ज्यादा समय लगता है। अगर आपकी भी कुछ इसी तरह की शिकायत है तो आपकी परेशानी दूर करते हुए आपको बताते है हलवाइयों जैसी एक ऐसी ही मजेदार गाजर का हलवा बनाने की रेसिपी जो बेहद कम समय में ही तैयार हो जाती है। तो देर किस बात की आइए जानते हैं कैसे बनाया है ये टेस्टी गाजर का हलवा।
सामग्री :
250 ग्राम मावा
2 कप दूध
5 केसर
1 किलोग्राम कद्दूकस किया गाजर
2 टेबलस्पून घी
25 ग्राम काजू
20 ग्राम किशमिश
विधि :
गाजर का हलवा एक परफेक्ट डेजर्ट रेसिपी है,जिसे आप कुछ मिनटों में आसानी से उपलब्ध सामग्रियों की मदद से बना सकते हैं। इसे बनाने के लिए सबसे पहले एक छोटे बाउल में एक टेबलस्पून दूध और केसर डालकर अलग रख दें।
अब धीमी आंच पर एक कढ़ाही में दूध और गाजर अच्छी तरह से मिलाकर डाल दें और उबालें। अगर आप अपनी रेसिपी को क्रंची बनाना चाहते हैं तो नट्स को सूखा भूनकर रेसिपी में डाल दें।
इसके बाद जब दूध में उबाल आ जाए तब इसमें केसर डालकर दूध के सूखने तक फिर से उबालें।
जब दूध सूख जाए इसमें मावा डालकर चलाएं,जिससे कि मावा भी हलवे में आसानी से मिल जाए। अब इसमें घी डालकर और 10 मिनट के लिए पकाएं। आखिर में काजू और किशमिश से सजाकर हलवे को गर्मागर्म सर्व करें।
सेहत /शौर्यपथ/संडे हो या मंडे रोज खाएं अंडे, ये बात आपने कई बार सेहत से जुड़ी नसीहत देते लोगों के मुंह से सुनी होगी। पर क्या आप जानते हैं अंडे न सिर्फ आपकी सेहत बनाए रखने का काम करते हैं बल्कि इनकी मदद से आप अपना बढ़ा हुआ वजन भी कंट्रोल कर सकते हैं। आइए जानते हैं कैसे।
द अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लिनिकल न्यूट्रीशन के अनुसार वजन कम करने में शरीर में मौजूद प्रोटीन की अहम भूमिका होती है। प्रोटीन का सेवन करने से व्यक्ति को देर तक भूख महसूस नहीं होती और वो अपने भीतर ऊर्जा का स्तर भी बढ़ा हुआ महसूस करता है। अंडे की मदद से भी व्यक्ति अपना वजन कम कर सकता है बस उसका सेवन करते समय कुछ गलतियों को करने से बचने की सलाह दी जाती है। आइए जानते हैं क्या हैं वो सलाह।
अंडे के पीले भाग को न खाना -
अक्सर देखा जाता है कि लोग अंडे के पीले भाग को यह सोचकर नहीं खाते कि ऐसा करने से उनका वजन बढ़ जाएगा, जो कि गलत है। यूएसडीओ के अनुसार, अंडे के पीले हिस्से में पाया जाने वाला प्रोटीन कुल एक अंडे का आधा प्रोटीन होता है। ऐसे में अगर वजन कम करने वाले लोग एक पूरे अंडे का सेवन करते हैं तो उन्हें वजन कम करने में भी मदद मिलती है।
अंडे के लिए एक समय तय करना-
अंडा सेहतमंद बने रहने के लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है। जो लोग अंडे का सेवन एक तय समय पर ही करते हैं तो वो गलती करते हैं। उदाहरण के लिए, कई लोग अंडे का सेवन सिर्फ ब्रेकफास्ट में करते हैं उसके बाद वो दिनभर इसका सेवन करने से बचते हैं। जबकि आप अंडे का सेवन दिन के किसी भी समय कर सकते हैं।
अनहेल्दी फैट-
अंडा बनाते समय इस बात का ध्यान जरूर रखें कि उसे किसी अनहेल्दी फैट के साथ न बनाया गया हो वरना ऐसा अंडा खाने से आप हृदय रोग, स्ट्रोक और मधुमेह जैसे गंभीर रोगों के शिकार भी हो सकते हैं। अंडा बनाते समय जैतून, एवोकैडो और कैनोला जैसे तेल का चुनाव किया जा सकता है।
अधिक सेवन-
हार्वर्ड हेल्थ पब्लिशिंग के अनुसार, डायबिटीज से पीड़ित लोगों को हफ्ते में 3 से ज्याद अंडों का सेवन नहीं करना चाहिए। वजन कम करने वाले लोगों को भी अंडों का अधिक सेवन नहीं करना चाहिए। इसके लिए आप औसतन तरीके से अंडों का सेवन करें जो आपको स्वस्थ रखे।
सेहत / शौर्यपथ / सर्दियों के मौसम में कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं को दूर करने के लिए हेल्दी फूड्स का सेवन करना चाहिए. इन स्वास्थ्य समस्याओं में सर्दी-खांसी, वजन बढ़ना, गले में खराश होना और अधिक ठंड की वजह से कोल्ड स्ट्रोक का खतरा होना शामिल है. आप भले ही अपने शरीर को कपड़ों से पूरी तरह ढक कर रखें लेकिन फिर भी सर्दी का असर किसी न किसी रूप में शरीर पर जरूर होता है. इसलिए लोग अपनी डाइट में कई तरह के फूड्स को शामिल करते हैं, जो शरीर को गर्म रख सकें. ऐसी ही खाद्य सामग्रियों में से एक है रागी . आइए जानते हैं रागी के हेल्थ बेनिफिट्स के बारे में.
कैल्शियम से भरपूर
सर्दियों में इस्तेमाल में लाया जाने वाला रागी का आटा किसी भी अन्य अनाज की तुलना में कैल्शियम से भरपूर होता है. एक रिसर्च के अनुसार 100 ग्राम रागी में 344 मिलीग्राम कैल्शियम होता है. कैल्शियम हड्डियों और दांतों के लिए बहुत जरूरी होता है. साथ ही हड्डियों से संबंधित कई बीमारियों जैसे ऑस्टियोपोरोसिस की रोकथाम के लिए भी यह जरूरी है. कैल्शियम से भरपूर होने की वजह से रागी का सेवन गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए बहुत ही अच्छा होता है. सर्दियों में आप
अपने डाइट में रागी से बने फूड्स को जरूर शामिल करें.
रागी फाइबर से भरपूर होता है और ये ग्लाइसेमिक इंडेक्स फूड क्रेविंग को कम करता है. यह पाचन गति को बनाए रखता है जिस कारण रागी ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद करता है. डायबिटीज के रोगियों को सर्दियों के मौसम में रागी के आटे से बनी रोटियां खाने की सलाह दी जाती है. एक स्टडी के अनुसार अपनी डाइट में रागी को सुबह या दोपहर के खाने में जरूर शामिल करें.
एंटी एजिंग की तरह करे काम
रागी स्किन को लम्बे समय तक यंग बनाए रखने के लिए अद्भुत तरीके से काम करता है. इसमें मौजूद मेथिओनिन और लाइसिन जैसे जरूरी अमीनो एसिड तत्व स्किन के ऊतकों को झुर्रियों और एजिंग के लक्षणों से बचाते हैं. इसके अलावा रागी शरीर में विटामिन डी की कमी को भी पूरा करता है.
एनीमिया से बचाए
रागी प्राकृतिक आयरन का एक अच्छा स्रोत है. यह एनीमिया के रोगियों के लिए और कम हीमोग्लोबिन स्तर वाले लोगों के लिए भी एक वरदान की तरह काम करता है. आप रागी का इस्तेमाल शरीर में आयरन की पूर्ति के लिए कर सकते हैं. इसका इस्तेमाल आटे के रूप में, अंकुरित करके या फिर कोई अन्य डिश के रूप में किया जा सकता है.
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
