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June 01, 2026
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जिले में 2 लाख 19 हजार 271 हितग्राहियों को 90 करोड़ 11 लाख 86 हजार की मिली सहायता
राजनांदगांव / शौर्यपथ / शासन द्वारा दिव्यांगजन, वृद्धजन एवं जरूरतमंदों को विभिन्न योजनाओं के तहत मदद की जा रही है। समाज कल्याण विभाग द्वारा वृद्धजन, दिव्यांगजन एवं विधवा तथा जरूरतमंद लोगों के लिए संचालित योजनाओं के तहत जिले में बड़ी संख्या में गरीब एवं जरूरतमंद लाभान्वित हुए हैं। समाज कल्याण विभाग द्वारा विभिन्न योजनाओं के तहत वर्ष 2019-20 में 49 करोड़ 90 लाख 35 हजार रूपए की राशि 1 लाख 8 हजार 149 हितग्राहियों को तथा वर्ष 2020-21 के नवम्बर के अंत तक 40 करोड़ 21 लाख 51 हजार की राशि 1 लाख 11 हजार 122 हितग्राहियों को प्रदान की गई है।
कलेक्टर श्री टोपेश्वर वर्मा के निर्देशन में समाज कल्याण विभाग द्वारा सफलतापूर्वक कार्य किया जा रहा है। उप संचालक समाज कल्याण विभाग श्री बीएल ठाकुर ने बताया कि विगत दो वर्षों में जिले में समाज कल्याण विभाग से विभिन्न योजनाओं के तहत लोगों को सहायता मिली है। ज्ञातव्य है कि वर्ष 2019-20 में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन के अंतर्गत 31 हजार 983 हितग्राहियों को 10 करोड़ 13 लाख 30 हजार रूपए की राशि, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना के तहत 13 हजार 221 हितग्राहियों को 5 करोड़ 7 लाख 56 हजार रूपए की राशि, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन के तहत 2 हजार 5 हितग्राहियों को 86 लाख 65 हजार रूपए की राशि, राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना के तहत 619 हितग्राहियों को 1 करोड़ 23 लाख 80 हजार रूपए की राशि, सामाजिक सुरक्षा पेंशन के तहत 19 हजार 627 हितग्राहियों को 16 करोड़ 87 लाख 76 हजार रूपए, सुखद सहारा पेंशन योजना के तहत 12 हजार 474 हितग्राहियों को 5 करोड़ 29 लाख 32 हजार रूपए की राशि, मुख्यमंत्री पेंशन योजना के तहत 27 हजार 12 हितग्राहियों को 9 करोड़ 86 लाख 70 हजार रूपए की सहायता राशि प्रदान की गई है। वहीं दिव्यांग विवाह प्रोत्साहन योजना के तहत 45 हितग्राहियों को 27 लाख रूपए, दिव्यांग छात्रवृत्ति योजना के तहत 903 हितग्राहियों को 23 लाख रूपए, सिविल सेवा प्रोत्साहन योजना के तहत 1 हितग्राही को 20 हजार रूपए, उच्च शिक्षा प्रोत्साहन योजना के तहत 6 हितग्राहियों को 31 हजार रूपए, कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण प्रदाय योजना के तहत 253 हितग्राहियों को 4 लाख 75 हजार रूपए की राशि की मदद की गई है।
वर्ष 2020-21 में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन के अंतर्गत 32 हजार 544 हितग्राहियों को 9 करोड़ 9 लाख 99 हजार रूपए की राशि, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना के तहत 13 हजार 599 हितग्राहियों को 4 करोड़ 66 लाख 42 हजार रूपए की राशि, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन के तहत 2 हजार 11 हितग्राहियों को 73 लाख 66 हजार रूपए की राशि, राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना के तहत 403 हितग्राहियों को 80 लाख 60 हजार रूपए की राशि, सामाजिक सुरक्षा पेंशन के तहत 20 हजार 93 हितग्राहियों को 10 करोड़ 92 लाख 97 हजार रूपए, सुखद सहारा पेंशन योजना के तहत 12 हजार 864 हितग्राहियों को 4 करोड़ 75 लाख 82 हजार रूपए की राशि, मुख्यमंत्री पेंशन योजना के तहत 29 हजार 357 हितग्राहियों को 8 करोड़ 96 लाख 98 हजार रूपए की सहायता राशि प्रदान की गई है। वहीं दिव्यांग विवाह प्रोत्साहन योजना के तहत 39 हितग्राहियों को 25 लाख रूपए, उच्च शिक्षा प्रोत्साहन योजना के तहत 2 हितग्राहियों को 7 हजार रूपए की राशि की मदद की गई है।

भिलाई / शौर्यपथ / भिलाई इस्पात संयंत्र में आयोजित शिरोमणि पुरस्कार में पॅावर जोन से उत्कृष्ट कार्य प्रदर्षित करने वाले अधिकारियों तथा कर्मचारियों को पाली शिरोमणि एवंं कर्म शिरोमणि पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
इस संदर्भ में आयोजित कार्यक्रम में अतिउत्तम कार्य प्रदर्शन के लिए पाली शिरोमणि पुरस्कार से सम्मनित दिलीप कुमार, वरि. प्रबंधक, पी.ई.एम. एवं तरूण कुमार दत्ता, सहा. महाप्रबंधक, पी.बी.एस. एवं कर्म शिरोमणि पुरस्कार से सम्मानित शेषलाल जुरेशिया, चार्जमेन कम सीनि. तकनीशियन, पी.ई.एम., तिलकदास ठाकुर, सीनि. तकनीशियन;डद्धपी.बी.एस., सुरेश कुमार साहू,चार्जमेन कम सीनि. आपरेटर पी.बी.एस., आर.पी. सिंह,सीनि. तकनीशियन, पी.ई.एम., भूषण लाल गॅंवरे, सीनि. तकनीशियन, पी.बी.एस., हेमन्त कुमार शर्मा, सीनि. तकनीशियन, पी.बी.एस. एवंश्रीविजय कुमारगुप्ता,सीनि. तकनीशियन, पी.ई.एम. विभाग को सम्मानित किया गया।। कोविड-19 महामारी के मद्देनजर समारोह के दौरान पुरस्कारों के संचालन और वितरण में सामाजिक दूरी के मानदंडों का पालन किया गया। कार्यक्रम में एच.के. साहू, महाप्रबंधक प्रभारी, पी.ई.एम. एवं के.सी. त्रिपाठी, महाप्रबंधक, पी.बी.एस. पॅावर जोन ने पुरस्कार विजेताओं को प्रवीणता प्रमाण पत्र, स्मुति चिन्ह और कर्मचारी के जीवनसाथी के लिए प्रशंसा पत्र प्रदान किया। कार्यक्रम में उपस्थित एस.के. सारंगी, महाप्रबंधक, पी.बी.एस.,पी कृष्णमोहन, महाप्रबंधक, पी.बी.एस., विद्यासागर देवंढ्ढगन, महाप्रबंधक, पी.बी.एस. राहुल निगम, महाप्रबंधक, पी.ई.एम., पी.एस. खोबरागड़े, महाप्रबंधक, पी.ई.एम., महिन्द भगत, उप महाप्रबंधक, पी.ई.एम. ने पुरस्कार विजेताओं के कार्यस्थल में योगदान एवं उल्लेखनीय उपलब्धियों को सराहा। इस कार्यक्रम का संचालन कार्मिक कार्यालय शक्ति एवं विद्युत द्वारा किया गया।

सेहत /शौर्यपथ / अनहेल्दी लाइफस्टाइल और जंक फूड के सेवन का सीधा असर आपके पेट यानी की आपकी पाचन शक्ति पर पड़ता है। खराब खानपान और व्यायाम न होने के कारण पाचन से जुड़ी समस्या परेशान करती है। अगर आप भी इन्हीं समस्याओं से परेशान हैं, तो आपको अपनी दिनचर्या में योग को शामिल करना चाहिए। जी हां योगासन की मदद से आप पाचन संबंधी परेशानियों से राहत पा सकते है। आइए जानते है कौन से योगासन है जिनका आपको नियमित अभ्यास करना चाहिए....
कपालभाति प्राणायाम
अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा रखते हुए पद्मासन, सुखासन या वज्रासन में बैठ जाएं। अपने हाथों को घुटनों पर रखें और एक लंबी गहरी सांस अंदर लें। सांस छोड़ते हुए अपने पेट को अंदर की ओर खींचें। पेट की मांसपेशियों के सिकुड़ने को आप अपने पेट पर हाथ रखकर महसूस भी कर सकते हैं। नाभि को अंदर की ओर खींचें। जैसे ही आप पेट की मांसपेशियों को ढीला छोड़ते हैं, सांस अपने आप ही आपके फेफड़ों में पहुंच जाती है। कपालभाती 5 मिनट से शुरू करके 10 और 30 मिनट तक किया जा सकता है। कपालभाती प्राणायाम करते समय जोर से सांस को बाहर छोड़ें।यह पाचन क्रिया को अच्छा करता है और पोषक तत्वों को बढ़ाता है। यह वजन कम करने में मदद करता है।नाड़ियों का शुद्धिकरण करता है। रक्त शुद्ध होता है और चेहरे पर चमक बढ़ाता है।
मत्स्यासन
मत्स्य का अर्थ है- मछली। इस आसन में शरीर का आकार मछली जैसा बनता है, अत: यह मत्स्यासन कहलाता है। यह आसन छाती को चौड़ा कर उसे स्वस्थ बनाए रखने में सक्षम है। सावधानी : छाती व गले में अत्यधिक दर्द या अन्य कोई रोग होने की स्थिति में यह आसन न करें। बड़ी सावधानी से यह आसन करना चाहिए, शीघ्रता से गर्दन में मोच आ जाने का भय रहता है, क्योंकि धड़ को बिल्कुल ऊपर कर देना होता है। यह आसन एक मिनट से दो मिनट तक किया जा सकता है। इससे आंखों की रोशनी बढ़ती है। गला साफ रहता है तथा छाती और पेट के रोग दूर होते हैं। रक्ताभिसरण की गति बढ़ती है, जिससे चर्म रोग नहीं होता। दमे के रोगियों को इससे लाभ मिलता है। पेट की चर्बी घटती है। खांसी दूर होती है।
धनुरासन
मकरासन की अवस्था में पेट के बल लेट जाएँ। फिर दोनों पैरों को आपस में सटाते हुए हाथों को कमर से सटाएँ। ठोड़ी भूम‍ि पर रखें। एड़ी-पंजे और घुटने मिले हुए हों। कोहनियाँ कमर से सटी हुई और हथेलियाँ ऊपर की ओर रखें।अब टाँगों को घुटनों से मोड़ें। फिर दोनों हाथों से पैरों को टखनों के पास से पकड़ें। हाथों और पैरों को खींचते हुए घुटने भी ऊपर उठाएँ। जितना हो सके उतना सिर पीछे की ओर ले जाएँ। प्रयास कीजिए क‍ि पूरे शरीर का बोझ नाभिप्रदेश के ऊपर ही रहे। पैर के तलवे और सिर समान रूप से सीध में रहें। कुम्भक करके इस स्थिति में 30-40 सेकंड तक रहें।वापस आने के लिए पहले ठोड़ी को भूमि पर टिकाएँ, फिर हाथों को बाद में धीरे-धीरे पैरों को भूमि पर लाते हुए पुन: मकरासन की स्थिति में लेट जाएँ और पूरक करें। श्वास-प्रश्वास के सामान्य होने पर दूसरी बार करें। इस प्रकार 3-4 बार करने से इसका अभ्यास बढ़ता है।
धनुरासन से पेट की चरबी कम होती है। इससे सभी आंतरिक अंगों, माँसपेशियों और जोड़ों का व्यायाम हो जाता है। गले के तमाम रोग नष्ट होते हैं। पाचनशक्ति बढ़ती है। श्वास की क्रिया व्यवस्थित चलती है। मेरुदंड को लचीला एवं स्वस्थ बनाता है। सर्वाइकल, स्पोंडोलाइटिस, कमर दर्द एवं उदर रोगों में लाभकारी आसन है। स्त्रियों की मासिक धर्म सम्बधी विकृतियाँ दूर करता है। मूत्र-विकारों को दूर कर गुर्दों को पुष्ट बनाता है।

सेहत / शौर्यपथ / सर्दियों के आते ही सिंघाड़ा मिलना शुरू हो जाता है। कई लोगों को ये खूब पसंद भी आता है। इसे अंग्रेजी में वाटप चेस्टनट कहा जाता है। सिंघाड़ा खाने में जितना स्वादिष्ट है उतना ही इसके फायदे अनेक है जी हा स्वास्थ्य के लिहाज से ये काफी फायदेमंद होता है। वहीं अगर आप इसका नियमित सेवन करते है तो आपको कई बीमारियों से सुरक्षा मिलती हैं। तो आइए बिना देरी किए जानते हैं सिंघाड़े के फायदो के बारे में.......
ये बुरे कोलेस्ट्रॉल को कम करता है। इसलिए इसे अपनी डाइट में जरूर शामिल करें।
सांस संबंधी परेशानियों से राहत पाने के लिए सिंघाड़ा बहुत फायदेमंद होता है। अस्थमा के मरीजों के लिए सिंघाड़ा बहुत लाभकारी होता है। सिंघाड़े को नियमित रूप से खाने से सांस संबधी समस्याओं से भी राहत मिलती है।
मेटाबॉलिज्म को स्ट्रोंग करने के लिए सिंघाड़ा का सेवन लाभकारी होता है। ये फल वजन को नियंत्रण में रखने में भी सहायक होता है। अगर आप अपने वजन को कम करना चाहते है, तो सिंघाड़े को अपनी डाइट में जरूर शामिल करें।
बवासीर से जो लोग परेशान होते है उनके लिए भी सिंघाड़े का सेवन काफी लाभकारी होता है। ये इस मुश्किल समस्या से निजात दिलाने में कारगर होता है।
सिंघाड़े में कैल्शियम भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसके सेवन से
हड्ड‍ियां और दांत स्ट्रोंग होते है। साथ ही यह आंखों के लिए भी फायदेमंद है।

धर्म संसार / शौर्यपथ / फिर अभिमन्यु चक्रव्यूह का भेदन करने लगता है और अंदर घुसता ही जाता है कि परंतु जयद्रथ आकर भीम और अन्य पांडवों को बीच में ही रोककर चक्रव्यूह में घुसने से रोक देता है। अभिमन्यु चक्रव्यूह भेदने रथ पर सवार होकर निकल जाता है। प्रारंभ में यही सोचा गया था कि अभिमन्यु व्यूह को तोड़ेगा और उसके साथ अन्य योद्धा भी उसके पीछे से चक्रव्यूह में अंदर घुस जाएंगे। लेकिन जैसे ही अभिमन्यु घुसा जयद्रथ के कहने पर व्यूह फिर से बदला और पहली कतार पहले से ज्यादा मजबूत हो गई तो पीछे के योद्धा, भीम, सात्यकि, नकुल-सहदेव कोई भी अंदर घुस ही नहीं पाए। सभी को जयद्रथ ने रोक लिया। युद्ध में शामिल योद्धाओं में अभिमन्यु के स्तर के धनुर्धर दो-चार ही थे यानी थोड़े ही समय में अभिमन्यु चक्रव्यूह के और अंदर घुसता तो चला गया, लेकिन अकेला, नितांत अकेला। उसके पीछे कोई नहीं आया।
उधर, अर्जुन सुशर्मा से युद्ध करते हुए बहूत दूर निकल जाते हैं।
जैसे-जैसे अभिमन्यु चक्रव्यूह के सेंटर में पहुंचते गए, वैसे-वैसे वहां खड़े योद्धाओं का घनत्व और योद्धाओं का कौशल उन्हें बढ़ा हुआ मिला, क्योंकि वे सभी योद्धा युद्ध नहीं कर रहे थे बस खड़े थे जबकि अभिमन्यु युद्ध करता हुआ सेंटर में पहुंचता है। द्रोर्णाचार्य अभिमन्यु की तारीफ करते हैं कि यह बहादुर योद्धा है जिसने अकेले ही चक्रव्यूह को भेद दिया और महारथियों की तरह लड़ रहा है।

अभिमन्यु केंद्र में पहुंचकर द्रोणाचार्य, मद्र नरेश शल्य, कुलगुरु कृपाचार्य, अंगराज कर्ण, द्रोणपुत्र अश्वत्‍थामा, मामाश्री शकुनि, दु:शासन, दुर्योधन, कृतवर्मा, जयद्रथ आदि से युद्ध करके सभी को अकेले ही घायल कर देता है। दुर्योधन यह देखकर द्रोण सहित सभी से कहता है कि इस पर एक साथ आक्रमण करो। द्रोण अभिमन्यु को घायल कर देते हैं।

उधर, युधिष्ठिर को इसका पश्चाताप होता है और वह कहता है कि अब मैं अर्जुन को क्या मुंह दिखाऊंगा?
अभिमन्यु की हत्या के संपूर्ण प्रकरण को पढ़ने के लिए आगे क्लिक करें....कौरवों के चक्रव्यूह के पीछे की असली साजिश, लेकिन फंस गया अभिमन्यु

सभी योद्धा मिलकर अभिमन्यु को घायल कर देते हैं। अभिमन्यु रथ से नीचे गिर जाता है और वह अकेला निहत्था होता है। द्रोण को छोड़कर सभी तलवार निकाल लेते हैं। अभिमन्यु रथ के पहिये को ढाल बना कर लड़ते हैं, लेकिन तभी कोई पीछे से अभिमन्यु की पीठ में तलवार घोंप देता है। फिर सभी योद्धा मिलकर उसकी निर्ममता से हत्या कर देते हैं।
उधर, लड़ते लड़ते अर्जुन कहता है कि हे केशव मेरा दिल कर रहा है कि मैं इस वक्त सभी का संहार कर दूं परंतु दूसरे ही क्षण मेरे हृदय की धड़कन बड़ जाती है। यह देखो मेरा गांडिव भी अब मेरा साथ नहीं दे रहा है। हे केशव लगता है कि कुछ अशुभ हुआ है।

फिर बाद में अर्जुन को यह पता चलता है कि चक्रव्यूह की रचना करके अभिमन्यु की निर्ममता पूर्वक हत्या कर दी गई है। यह सुनकर अर्जुन बुरी तरह से टूट जाता है। अब पहले की अपेक्षा उसके भीतर कौरवों से लड़ने के लिए और भी अधिक क्रोध उत्पन्न हो जाता है। जब अर्जुन को यह बता चलता है कि जयद्रथ के कारण अभिमन्यु मारा गया तो अर्जुन यह शपथ लेता है कि मैं कुंति पुत्र अर्जुन यह प्रतिज्ञा करता हूं कि कल सूर्यास्त से पूर्व जयद्रथ मेरी शरण में नहीं आया या रणछोड़कर भाग नहीं गया तो मैं वासुदेव श्रीकृष्ण का सखा अर्जुन कल सूर्यास्त से पहले जयद्रथ का वध करूंगा। अन्यथा अग्नि में प्रवेश करके स्वयं को भस्म कर दूंगा।

यह प्रतिज्ञा सुनकर श्रीकृष्ण कहते हैं कि पार्थ तुमने बिना सोचे समझे, भावनाओं के आवेश में आकर प्रतिज्ञा की है परंतु इस प्रतिज्ञा के क्या परिणाम होंगे ये सोचा है तुमने?
यह सुनकर भीम कहता है कि हे केशव यह मत सोचिये कि यह प्रतिज्ञा अर्जुन ने ही की है। ये प्रतिज्ञा हम सब पांडवों की है। यह सुनकर श्रीकृष्ण कहते हैं कि अर्जुन की प्रतिज्ञा पूरी हो या भंग हो परंतु दोनों ही स्थिति में इसका परिणाम है अर्जुन की मृत्यु। यह सुनकर सभी चौंक जाते हैं तो नकुल कहते हैं ये आप क्या कह रहे हैं? इस पर श्रीकृष्‍ण कहते हैं कि मैं सच कह रहा हूं नकुल। जयद्रथ के पिता ने वरदान प्राप्त किया है कि जो भी जयद्रथ का सिर युद्ध भूमि में गिराएगा उसके सिर के 100 टूकड़े हो जाएंगे।

यह सुनकर युधिष्ठिर कहता है कि इसका अर्थ यह है कि जो भी जयद्रथ का वध करेगा तो अपने आप उसका वध भी हो जाएगा? इस पर श्रीकृष्ण कहते हैं कि हां बड़े भैया इसलिए प्रतिज्ञा की पूर्ति पर भी अर्जुन के प्राण संकट में आ जाएंगे और यदि इसने प्रतिज्ञा की पूर्ति ना भी की तब भी इसे अग्निकाष्ठ का भक्षण करके स्वयं मृत्यु को स्वीकार करना होगा।...बहुत दुष्कर काम है ये अर्जुन बहुत दुष्कर काम।
यह सुनकर अर्जुन कहता है कि केशव! तुम्हारे लिए कोई भी काम दुष्कर नहीं है और जो काम हमारे लिए दुष्कर होगा तो हम उसी दुष्कर काम को तुम्हारी सहायता से सहज बना लेंगे, ये मेरा विश्‍वास है। यह सुनकर श्रीकृष्ण कहते हैं कि ठीक है अर्जुन। कल जब तुम युद्ध भूमि में सिंधु नरेश जयद्रथ का वध करने निकलोगे तो एक बात ध्यान रखना। जयद्रथ का पिता महाराज वृद्धक्षत्र, समंत पंचक क्षेत्र में तप करने बैठा है। तुम हमने महान अस्त्र का प्रयोग करके जयद्रथ का मस्तक आसमान से ही वृद्धक्षत्र की गोद में गिराओगे। यदि तुमने जयद्रथ का मस्तक उसके पिता की गोद में गिरा दिया तो स्वयं वृद्धक्षत्र के मस्तक के 100 टूकड़े हो जाएंगे और तुम बच जाओगे।

यह सुनकर अर्जुन कहता है कि ठीक है केशव मैं जयद्रथ का सर ऐसे उड़ा दूंगा कि पहले वह उसके पिता की गोद में ही जा गिरेगा। इस पर श्रीकृष्ण कहते हैं कि परंतु यह मत भूलों की कल युद्ध भूमि में जयद्रथ की सुरक्षा कौरव सेना और स्वयं गुरु द्रोणाचार्य करेंगे। इसलिए हमारा प्रत्येक योद्धा अर्जुन को जयद्रथ तक पहुंचाने के लिए उसकी सहायता करेगा। जयद्रथ से पहुंचने के लिए अर्जुन का रास्ता अनेक बाधाओं से घिरा होगा। यह सुनकर भीम कहता है कि मैं अपनी गदा से अर्जुन के रास्ते की हर दीवार को मैं अपनी गदा से ढेर कर दूंगा। तब श्रीकृष्ण कहते हैं कि कल हम कौरवों के सेनाप‍ति आचार्य द्रोण को युद्ध में उलझाएं रखेंगे। और बड़े भैया आप, नकुल, सहदेव, विराट नरेश, पांचाल नरेश आप सभी कौरव महावीरों को युद्ध में उलझाए रखें। जय श्रीकृष्ण।
रामानंद सागर के श्री कृष्णा में जो कहानी नहीं मिलेगी वह स्पेशल पेज पर जाकर पढ़ें...वेबदुनिया श्री कृष्णा

बस्तर संभाग के सात जिलों के 13 विकासखण्ड होंगे लाभान्वित
गौठानों को केन्द्र में रखकर किया जाएगा परियोजना का क्रियान्वयन

रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तथा कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे की पहल पर राज्य के बस्तर अंचल के आदिवासी किसानों के कृषि विकास तथा उनके पोषण स्तर में सुधार तथा कृषि उपजों के मूल्य संवर्धन द्वारा कृषकों की आय वृद्धि हेतु 1036 करोड़ रूपए की विश्व बैंक सहायतित 6 वर्षीय परियोजना ’चिराग’ को विश्व बैंक वाशिंगटन डी.सी.(यू.एस.) द्वारा स्वीकृति प्रदान की गई है।
चिराग परियोजना बस्तर संभाग के 7 जिलों के 13 विकासखण्डों बस्तर, बकावंड, बड़ेराजपुर, माकड़ी, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, कटेकल्याण, सुकमा, छिंदगढ़, भैरमगढ़, भोपालपट्नम, चारामा एवं नरहरपुर तथा मुंगेली जिले के मुंगेली विकासखण्ड के 1000 गांवों में क्रियान्वित की जाएगी। योजना का मुख्य उद्देश्य जलवायु परिवर्तन के अनुसार उन्नत कृषि, उत्तम स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से पोषण आहार में सुधार, कृषि एवं अन्य उत्पादों का मूल्य संवर्धन कर कृषकों को अधिक से अधिक लाभ दिलाना है। परियोजना अंतर्गत समन्वित कृषि, भू एवं जल संवर्धन, बाड़ी एवं उद्यान विकास, उन्नत मत्स्य एवं पशुपालन, दुग्ध उत्पादन के अतिरिक्त किसान उत्पादक संगठन (एफ.पी.ओ.) द्वारा कृषकों के उपजों का मूल्य संवर्धन कर कृषकों की आय वृद्धि से संबंधित कार्य सम्पादित किए जाएंगे। परियोजना का क्रियान्वयन गौठानों को केन्द्र में रखकर किया जाएगा। कोविड-19 महामारी के कारण कृषि क्षेत्र में आए अवरोधों एवं कठिनाईयों को ध्यान में रखते हुए आय वृद्धि एवं रोजगार सृजन का उद्देश्य भी परियोजना में सम्मिलित है।

हमने हमेशा जन-जन में बसे राम को पूजा
सरकार की दूसरी वर्षगांठ पर चंदखुरी में हुआ समारोह
पर्यटन रथ और बाइक रैली का भी समागम के साथ हुआ समापन
मंत्रिमंडल के सदस्य, आयोगों के अध्यक्ष, विधायक, संसदीय सचिव भी हुए शामिल


रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि कुछ लोग भगवान राम के नाम का उपयोग वैसे ही करते हैं, जैसे कालनेमि ने किया था। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग केवल स्वार्थवश राम का नाम लेते हैं। जबकि हम लोगों ने सदा से जन-जन में बसे राम को पूजा है। छत्तीसगढ़ में नयी सरकार के दो वर्ष पूरे होने पर रायपुर के निकट चंदखुरी में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही। श्री बघेल ने कहा कि जब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को गोली मारी गई थी, तब भी गांधीजी के मुंह से राम का ही नाम निकला था।
माता कौशल्या की जन्मस्थली चंदखुरी में आयोजित इस समारोह में तीन दिनों से जारी राम वन गमन पथ रथ यात्रा और बाइक रैली का समापन भी हुआ। यह रैली उत्तर छत्तीसगढ़ के कोरिया तथा दक्षिण छत्तीसगढ़ के सुकमा से 14 दिसंबर को एक साथ शुरु हुई थी। वनवासकाल में राम ने कोरिया से ही छत्तीसगढ़ में प्रवेश किया था और सुकमा से गुजरते हुए दक्षिण भारत की ओर बढ गए थे। राज्य सरकार ने राम के इस पूरे वन-पथ में पर्यटन विकास के लिए 137 करोड़ रुपए की महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। इस योजना के तहत राम से संबंधित 75 चिन्हित स्थानों में से पहले चरण में 9 स्थानों में पर्यटन सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। माता कौशल्या का मायका कहा जाने वाला चंदखुरी भी इन्हीं में से एक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि माता कौशल्या ने ही राम के चरित्र को गढ़ा था। जो चरित्र माता कौशल्या का था, वही छत्तीसगढ़िया लोगों का है। उन्होंने ही राम को दुख-सुख में सम भाव से रहना सिखाया। राम ने सहनशीलता और कर्तव्यों का पालन करना माता कौशल्या से ही सीखा। उन्होंने कहा कि राम वन गमन पथ को पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित करके राज्य सरकार छत्तीसगढ़ को नयी वैश्विक पहचान दे रही है। कुछ वर्षों पहले तक अन्य राज्यों के लोग छत्तीसगढ़ को या तो भिलाई के नाम से जानते थे, या फिर नक्सल समस्या के कारण, लेकिन अब यह छत्तीसगढ़ अपनी सांस्कृतिक संपन्नता के कारण जाना जाता है। इसकी पहचान इसके समृद्ध किसानों से होती है। उन्होंने कहा कि हमारी पहचान हमारे किसान और आदिवासी है। हम इसी पहचान को आगे बढ़ा रह हैं, इसी उद्देश्य से हम लोगों ने रायपुर में अंतरराष्ट्रीय स्तर के आदिवासी नृत्य महोत्सव का भी आयोजन किया था। उन्होंने कहा कि कल बाबा गुरु घासीदास की जयंती है, यह त्यौहार भी हम शानदार ढंग से मनाएंगे। छत्तीसगढ़ की नयी पहचान के लिए सिरपुर को भी विकसित किया जाएगा, जो नालंदा के बाद सबसे बड़ा बौद्ध परिसर है। हम दुनिया को बताना चाहते हैं कि छत्तीसगढ़ का हर क्षेत्र में विशेष महत्व है।
मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि गौ-सेवा के क्षेत्र में हमारी गोधन न्याय योजना से बढ़िया व्यवस्था और कहीं नहीं है। छत्तीसगढ़ गो-सेवकों का प्रदेश है। यहां के किसानों और मजदूरों ने देश को अपनी ताकत का अहसास करा दिया है। जब पूरे देश में मंदी छाई हुई है, तब यहां मंदी का कोई असर नहीं है। नाराज किसान देश की राजधानी को घेर कर बैठे हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ में खुशहाली है। यदि केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ की नीति पर काम करे तो किसानों का आंदोलन कल वापस हो जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने हर युग में रास्ता दिखाया है। हमारी संस्कृति नफरत फैलाने की नहीं, बल्कि प्रेम बांटने की है। हम सभी को साथ लेकर चलना चाहते हैं, चाहे कोई किसी भी जाति या धर्म का हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में कोई भी भूखा-प्यासा न रहे, सभी को शिक्षा और रोजगार मिले, हम ऐसी व्यवस्था के निर्माण के लिए काम कर रहे हैं।
रथ-यात्रा और बाइक रैली के समापन अवसर पर मुख्यमंत्री बघेल सहित मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों ने चंदखुरी के कौशल्या माता मंदिर में पूजा-अर्चना की और रुद्राक्ष पौधे रोपे। समारोह में मुख्यमंत्री के साथ उनके मंत्रिमंडल के सदस्य पर्यटन मंत्री ताम्रध्वज साहू, पंचायत मंत्री टी.एस.सिंहदेव, कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे, नगरीय प्रशासन और विकास मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिला भेंडिया, स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत, राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल, उद्योग मंत्री कवासी लखमा, उच्च शिक्षा मंत्री उमेश पटेल, निगम मंडलों के अध्यक्ष, क्षेत्रीय विधायक, जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। कार्यक्रम को गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष महंत राजेश्री रामसुंदर दास, पर्यटन मंत्री ताम्रध्वज साहू, नगरीय प्रशासन और विकास मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया, कृषि और जल संसाधन मंत्री रविन्द्र चौबे ने भी संबोधित किया। संस्कृति विभाग के सचिव पी. अंबलगन ने स्वागत भाषण दिया।

आयुर्वेद /शौर्यपथ जामुन के बीज को सेहत के लिए वरदान माना गया है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट, फ्लेवोनोइड, विटामिन सी, जिंक और कैल्शियम जैसे गुण न सिर्फ व्यक्ति को डायबिटीज के खतरे से बचाते हैं बल्कि शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम करके पाचन को दुरुस्त और वजन कंट्रोल करने में भी मदद करते हैं। आइए जानते हैं ऐसे ही कई गजब के फायदे जो जामुन के बीज का सेवन करने से मिलते हैं ।
जामुन के बीज का सेवन करने से मिलते हैं ये गजब के फायदे-
पाचन के लिए फायदेमंद-
जामुन के बीज को पाचन के लिए अच्छा माना जाता है। फाइबर के गुणों से भरपूर जामुन के बीज आंतों में घाव, सूजन और अल्सर जैसी समस्याओं को कम करने में मदद कर सकते हैं।
डायबिटीज-
जामुन ब्लड में शुगर लेवल को कंट्रोल करने के लिए फेमस है। जामुन के बीजों में जाम्बोलिन और जाम्बोसिन नामक यौगिक होते हैं जो ब्लड में शुगर की मात्रा को कम करने मेंमदद कर सकते हैं।
इम्यूनिटी-
कोरोना काल में हर कोई अपनी इम्यूनिटी मजबूत करने के प्रयास में लगा हुआ है। ऐसे में जामुन के बीज आपकी इस तमन्ना को पूरा कर सकते हैं। जामुन के बीज में मौजूद फ्लेवोनोइड जैसे एंटीऑक्सिडेंट शरीर को हानिकारक कणों से दूर रखने में मदद करते हैं।
वजन घटाने-
जो लोग अपना वजन कम करना चाहते हैं, उनके लिए जामुन के बीज का सेवन वरदान साबित हो सकता है। जामुन में फाइबर प्रचूर मात्रा में मौजूद होता है, जो पेट को हेल्दी रखने और वजन घटाने में व्यक्ति की मदद करता है।
पीरियड्स-
महिलाओं को अक्सर पीरियड्स के दौरान दर्द का सामना करना पड़ता है। जामुन बीज के पाउडर में मौजूद जिंक पेट दर्द से छुटकारा दिला सकता है।
नोट-
यह लेख केवल सामान्य जानकारी प्रदान करता है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श लें।

 

सेहत /शौर्यपथ /भागती-दौड़ती जिंदगी में लोग अक्सर खाने-पीने को लेकर लापरवाही बरतते हैं, जिससे कई बीमारियों की चपेट में आने के साथ लम्बे समय तक अस्त-व्यस्त जीवनशैली रखने के कारण लोग हाइपरटेंशन के भी शिकार हो जाते हैं। अपनी जीवनशैली में सही बदलाव लाते हुए डाइट में पोटेशियम, कैल्शियम और मैग्नीशियम की अच्छी मात्रा लेते हैं, तो आप अपने ब्लड प्रेशर को नियंत्रित कर सकते हैं। आज हम आपको ऐसे सुपरफूड्स के बारे में बता रहे हैं, जिनके नियमित सेवन से आप हाइपरटेंशन की बीमारी से बच सकते हैं।
हाइपरटेंशन क्या है
हाइपरटेंशन को ही उच्च रक्तचाप व हाई बीपी की समस्या कहते है, जिसमें धमनियों में रक्त का दबाव बढ़ जाता है। इस दबाव की वृद्धि से रक्त की धमनियों में रक्त का प्रवाह बनाए रखने के लिए दिल को अधिक काम करने की आवश्यकता पड़ती है। 130/80 mmHg से ज्यादा रक्त का दबाव होने पर व्यक्ति हाइपरटेंशन या हाई ब्लड प्रेशर की श्रेणी में आ जाता है। वैसे तो हाई ब्लड प्रेशर शरीर के किसी अंग को कभी भी प्रभावित कर सकता है, लेकिन इससे सबसे ज्यादा नुकसान हृदय को होता है।
फायदेमंद सुपरफूड्स  
नींबू
नींबू में उच्च मात्रा में विटामिन सी होता है और ये एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है।ये बॉडी से फ्री रेडिकल्स को खत्म करता है।इसके अलावा नींबू के सेवन से ब्लड वैसल्स‍ फ्लैक्सिबल और सॉफ्ट होती हैं जिससे ब्लड प्रेशर कम होता है।
दही
दही में प्रोटीन, कैल्शि यम, राइबोफ्लेविन, विटामिन बी 6 और विटामिन बी 12 काफी मात्रा में होते हैं, जो कि उच्च रक्तचाप की समस्यां को कम करते हैं और शरीर को कई प्रकार को लाभकारी अवयव मिलते हैं। दही में कैल्शियम अधिक मात्रा में पाया जाता है।
नारियल पानी
जो लोग हाइपरटेंशन की समस्या से परेशान हैं उन्हें बॉडी को हाइड्रेट रखना चाहिए।कोकोनट वॉटर में पोटैशियम, मैग्निशियम और विटामिन सी होता है जो कि ब्लड प्रेशर को कम करता है।
लहसुन
गार्लिक के यूं तो कई हेल्थ बेनिफिट्स हैं लेकिन कम लोग ही जानते होंगे कि लहसुन के सेवन से आसानी से ब्लड प्रेशर कम किया जा सकता है। बैड कॉलेस्ट्रॉल लेवल को भी कम करता है।
अंडे
अंडे में विटामिन, मिनरल और कई अन्य पौष्टिक तत्व पाए जाते हैं, जो एंडोर्फिन नामक एक रसायन का उत्‍पाद करते है। यह रसायन हमारे दिमाग में भी पाया जाता है। जो अवसाद व दर्द जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है।

शौर्यपथ / दूध को संपूर्ण आहार कहा जाता है लेकिन यह संपूर्ण आहार उस वक्त खतरनाक हो जाता है जब इसमें मिलावट करके इसकी शुद्धता कम कर दी जाती है। कई बार ऐसा होता है कि दूध में सिर्फ पानी ही नहीं मिलाया जाता बल्कि इसकी मात्रा बढ़ाने के लिए इसमें कई केमिकल्स भी मिला दिए जाते हैं, जो न सिर्फ आपको बीमार बना सकते हैं बल्कि बढ़ते बच्चों के विकास में भी बाधक बन सकते हैं। आइए, जानते हैं कैसे करें दूध में मिलावट की पहचान- इस तरह करें जांच :

पानी
ढलान वाली सतह पर दूध की एक बूंद डालें। शुद्ध दूध की बूंद धीरे-धीरे सफेद लकीर छोड़ते हुए जाएगी, जबकि पानी की मिलवाट वाली बूंद बिना कोई निशान छोड़े बह जाएगी।

 स्टार्च
लोडीन का टिंर और लोडीन सॉल्यूशन में कुछ बूंदे डालें, अगर वह नीली हो जाएं, तो समझें कि वह स्टार्च है।

 यूरिया
एक चम्मच दूध को टेस्ट ट्यूब में डालें। उसमें आधा चम्मच सोयाबीन या अरहर का पाउडर डालें। अच्छी तरह से मिला लें। पांच मिनट बाद, एक लाल लिटमस पेपर डालें, आधे मिनट बाद अगर रंग लाल से नीला हो जाए, तो दूध में यूरिया है।

 डिटर्जेंट
5 से 10 एमएल दूध को उतने ही पानी में मिला के हिलाएं। अगर झाग बनती है, तो डिटर्जेंट है।

 सिन्थेटिक दूध
सिन्थेटिक दूध का स्वाद कड़वा होता है, उंगलियों के बीच रगड़ने से साबुन जैसा लगता है और गर्म करने पर पीला हो जाता है।सिन्थेटिक दूध में प्रोटीन की मात्रा है या नहीं, इसकी जांच दवा की दुकान पर मिलने वाली यूरीज स्ट्रिप से की जा सकती है। इसके साथ मिली रंगों की सूची दूध में यूरिया की मात्रा बता देगी।

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