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जांजगीर-चांपा / शौर्यपथ / राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत पशुपालकों विभिन्न योजनाओं के तहत आर्थिक रूप से समृद्ध किया जा रहा है। योजनाओं के तहत दुध उत्पादन, बकरी पालन, मुर्गी पालन, मछली पालन करने वाले किसानों को अनुदान उपलब्ध करवाया जाता है।
पशुधन विकास विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार जांजगीर-चांपा जिले के विकासखण्ड बम्हनीडीह के ग्राम करनौद निवासी श्री रामचरण पटेल बकरी पालन व्यवसाय से प्रतिवर्ष 70 हजार रूपये की आमदनी प्राप्त हुआ है। पशुधन विकास विभाग द्वारा राष्ट्रीय कृषि विकास योजना अंतर्गत श्री रामचरण पटेल को जमुनापारी नर बकरा निःशुल्क दिया गया था। उस वक्त उनके पास कुल 20 देशी बकरियां थी। जमुनापरी नस्ल का बकरा मिलने से नस्ल सुधार हुआ। इससे उन्नत नस्ल के कुल 79 बकरियां हो गयी। जिसमे से प्रजनन योग्य - 3 नर बकरे, 40 मादा बकरी है। जिसमे से - 22 बच्चे दे चुकी है तथा 38 मेमने थे। इस व्यवसाय से श्री रामचरण को एक वर्ष में लगभग 70 हजार रूपये की आमदनी हुई। पशुधन विकास विभाग के द्वारा रामचरण का मार्गदर्शन, नियमित टीकाकरण और कार्य कृमिनाशक दवापान कराया जाता है। श्री रामचरण से प्रेरित होकर ग्राम करनौद में 15 पशुपालकों द्वारा बकरी पालन का कार्य किया जा रहा है। पशुधन विकास विभाग की इस योजना से पशुपालको को प्रोत्साहन मिला है।
पारम्परिक व्यवसाय को पुनर्जीवित करने मल्टी युटिलिटी सेंटर में मिल रहा माटीकला शिल्प का उत्कृष्ट प्रशिक्षण
धमतरी / शौर्यपथ / आधुनिकता और वैज्ञानिकता के दौर में पुरातन परम्परा और संस्कृति को बचाकर अक्षुण्ण रखना आज बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है। ऐसे में अपने पुश्तैनी व्यवसाय से जुड़े लोगों को इसे जारी रखने के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ रही है। मिट्टी के काम से जुड़े लोग भी उनमें से एक है जो जीवन निर्वाह के अपने पारम्परिक व्यवसाय को तिलांजलि देने विवश हैं। कुरूद विकासखण्ड के ग्राम नारी में महिलाओं को समूह में गठित कर वहां नवनिर्मित मल्टी युटिलिटी सेंटर में माटीकला का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे मिट्टी के कलात्मक बर्तन, उपकरण बनाने का उत्कृष्ट प्रशिक्षण मिल रहा है, वहीं इस दौरान काम सीखने के एवज में पैसे भी मिल रहे हैं।
प्राचीन काल में कुम्हारों के द्वारा तैयार किए गए मिट्टी के बरतनों का ही उपयोग किया जाता था जो उनके जीविकोपार्जन का सशक्त माध्यम था। पिछले कुछ दशकों से मशीनीकरण के दौर मंे श्रमसाध्य कामों व संस्कृति, कला व शिल्प का अधोपतन हुआ है, जिसके चलते जीवन निर्वाह के लिए उन्हें पूर्वजों का व्यवसाय छोड़कर अन्य तरह का व्यवसाय व काम अपनाना पड़ रहा है। इन्हीं शिल्प कलाओं को पुनर्जीवित करने तथा पारम्परिक हुनर को और अधिक कारगर बनाने छत्तीसगढ़ माटीकला बोर्ड द्वारा समूह की महिलाओं को मृदा शिल्प का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिला पंचायत के प्रयासों से बोर्ड के साथ अनुबंध कर कुरूद विकासखण्ड की ग्राम पंचायत नारी के मल्टी युटिलिटी सेंटर में महिलाओं का समूह तैयार कर उन्हें विभिन्न प्रकार के मृदा हस्तशिल्प का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिसमें मिट्टी के कुल्हड़, कप, गिलास, केतली, दाल-कटोरा, रोटी-कटोरी, पानी बोतल, बिरयानी हण्डी, पेन स्टैण्ड, गमला आदि शामिल हैं। सेंटर के प्रशिक्षक श्री पुरूषोत्तम साहू ने बताया कि गांव में सर्वे कराकर यहां पर 08 स्वसहायता समूह गठित करके इच्छुक 23 महिलाओं को मिट्टी से निर्मित बरतन व उपकरण तैयार करने का प्रशिक्षण पिछले दो माह से दिया जा रहा है।
समूह में ज्यादातर कुम्हार महिलाएं जुड़ी हैं जो पहले परम्परागत रूप से मटका, खपरैल, दीया, हण्डी आदि बनाने का काम करती थीं। चूंकि मिट्टी के पारम्परिक कार्य में वे पूर्व से पारंगत हैं, इसलिए उन्होंने सहजता से कुल्हड़, पानी बोतल, कप, बिरयानी हण्डी, केतली आदि बनाने में सिद्धहस्त हो गईं। प्रशिक्षण के लिए माटीकला बोर्ड से मिले इलेक्ट्राॅनिक चाक से उनका काम और भी आसान हो गया। श्री साहू ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को प्रोत्साहन के तौर पर प्रतिदिन मजदूरी भी दी जाती है जिससे उन्हें जीविकोपार्जन में किसी तरह की दिक्कत ना हो। यहां पर तैयार किए गए उत्पादों को बोर्ड द्वारा परिवहन कर मंगाया जाता है। साथ ही इसे जल्द ही जिला कार्यालयों में उपयोग करने के लिए जिला प्रशासन द्वारा कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इसके लिए बड़े पैमाने पर मिट्टी के बरतन व सामग्री तैयार की जा रही है।
ग्राम पंचायत नारी के सरपंच जगतपाल साहू ने बताया कि मल्टी युटिलिटी सेंटर में गांव की महिलाएं मृदाशिल्प का प्रशिक्षण लेकर बेहतर कार्य कर रही हैं। इससे स्वरोजगार के साथ-साथ अपने काम को बेहतर बनाकर स्वावलम्बन की ओर अग्रसर हो रही हैं। सेंटर में गीली मिट्टी से कुल्हड़ तैयार कर रहीं श्रीमती खेमिन चक्रधारी ने बताया कि पहले वे सिर्फ मिट्टी के कवेलू (खपरैल), दीये तथा मटके तैयार करने में अपने पति के कामों में मदद करती थीं, वह भी कुछ ही सीजन में मांग के आधार पर। अब वह माटीकला बोर्ड से जुड़कर आजीवन जारी रखने की इच्छा रखती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्लास्टिक के डिस्पोजेबल प्लास्टिक कप, कटोरी, गिलास, प्लेट के आ जाने से उनके पुश्तैनी कारोबार पर प्रतिकूल असर पड़ा है। अगर मिट्टी शिल्प का काम आगे भी चला तो उन्हें दूसरे प्रकार का रोजगार अपनाने की जरूरत ही नहीं पडे़गी। श्रीमती ईश्वरी चक्रधारी ने बताया कि मिट्टी में नई डिजाइन उकेरने का काम बेहद पसंद आया। उन्होंने उम्मीद जाहिर करते हुए कहा कि यदि लोगों में इसकी उपयोगिता और महत्व की जानकारी हो तो आगे बेहतर प्रतिसाद मिलेगा, वहीं वे पारम्परिक व्यवसाय से भी जुड़े रहकर इसे आगे बढ़ा सकती हैं। श्रीमती नीरा, पुनिया, बसंती ने कहा कि उन्हें उनके गांव में ही ऐसे हुनर सीखने को मिल रहा है, जिससे पुराने व पारम्परिक धंधे को पुनर्जीवन मिल सके।
उल्लेखनीय है कि जिला प्रशासन की विशेष पहल पर बिहान के तहत गठित महिला समूहों को मृदा शिल्प का प्रशिक्षण छत्तीसगढ़ माटीकला बोर्ड के सहयोग से ग्राम नारी में दिया जा रहा है। यह प्रदेश का तीसरा केन्द्र है जहां पर मिट्टी से बरतन, उपकरण, साज-सज्जा के सामान तथा अन्य उपयोगी सामान तैयार किए जा रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान महिलाएं मिट्टी से बने उत्पादों को ‘टच-फिनिशिंग‘ के साथ तैयार सुगढ़ व मनभावन आकार दे रही हैं। इस तरह मल्टी युटिलिटी सेंटर में इलेक्ट्राॅनिक चाक चलाकर महिलाएं जहां एक ओर लुप्तप्राय हो चुके अपने पारम्परिक पेशे को कायम रखने में कामयाब हो रही हैं, वहीं आने वाले समय में आमदनी का बेहतर और सशक्त माध्यम साबित होगा।
धमतरी / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल रायपुर द्वारा आयोजित हाईस्कूल/हायर सेकेण्डरी/हायर सेकेण्डरी व्यावसायिक परीक्षा सत्र 2020-21 के नियमित परीक्षार्थियों के लिए परीक्षा आवेदन पत्र निर्धारित शुल्क के साथ 15 दिसम्बर तक एवं कक्षा नवमीं के परीक्षार्थियों के पंजीयन की तिथि 30 नवम्बर नियत की गई थी। जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि कोविड 19 के संक्रमण की वजह से कक्षा दसवीं एवं बारहवीं के कई विद्यार्थी निर्धारित तिथि तक आवेदन पत्र नहीं भरे जाने एवं प्राचार्यों से प्राप्त आवेदनों को ध्यान में रख परीक्षा आवेदन पत्र एवं कक्षा नवमीं के परीक्षार्थियों के पंजीयन के लिए पूर्व अंतिम तिथि 15 दिसम्बर में आंशिक संशोधन करते हुए अब अंतिम तिथि 31 दिसम्बर निर्धारित की गई है।
उन्होंने सभी शासकीय/अशासकीय/अनुदान प्राप्त हाईस्कूल एवं हायर सेकेण्डरी स्कूल के प्राचार्यों को निर्देशित किया है कि वे हाईस्कूल/हायर सेकेण्डरी/हायर सेकेण्डरी व्यावसायिक परीक्षा सत्र 2020-21 के नियमित परीक्षार्थियों (कक्षा दसवीं/बारहवीं) के लिए परीक्षा आवेदन पत्र तथा कक्षा नवमीं के परीक्षार्थियों के लिए पंजीयन फाॅर्म अंतिम तिथि 31 दिसम्बर तक अनिवार्यतः भरवाना सुनिश्चित करें।
सेहत / शौर्यपथ / चने सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। यदि आप वेजिटेरियन हैं तो आपके लिए चने प्रोटीन का एक बेहतरीन स्रोत हैं। लेकिन इसके फायदे तब और ज्यादा बढ़ जाते हैं, जब हम इन्हें भिगोकर खाएं यानी अंकुरित करके अपनी डाइट में यदि चने को शामिल किया जाए तो यह हमारे स्वास्थ्य के लिए हेल्दी फूड बन जाता है।
चनों को अंकुरित करके खाने से यह सुपर फूड कई पौष्टिक गुणों का भंडार बन जाता है।
अंकुरित चने खाने से आप अपने वजन को भी नियंत्रण में रख सकते हैं। इससे मोटापा बढ़ने जैसी परेशानियों से राहत मिल जाती है। अब आप सोच रहे होंगे वो कैसे, क्योंकि चने के सेवन से पेट भरा-भरा-सा लगता है और जल्दी भूख नहीं लगती है, ऐसे में हम कम ही खाना खाते हैं जिससे कि हमारा वजन कंट्रोल में रहता है।
अंकुरित चने में प्रोटीन अच्छी मात्रा में पाया जाता है, साथ ही इसमें फेट की मात्रा भी कम होती है।
चने के सेवन से आप अपनी हड्डियों और दांतों को मजबूत रख सकते हैं, क्योंकि इसमें कई प्रकार के विटामिन्स और मिनरल्स होते हैं।
इसमें आयरन और सोडियम सहित और भी कई पौष्टिक पदार्थ होते हैं, जो आपके शरीर के लिए कई तरह से फायदेमंद होंगे।
अंकुरित चने के सेवन से यानी जब आप चने को भिगोकर खाते हैं, तब यह आपकी त्वचा और बालों को स्वस्थ रखने में भी बहुत मदद करता है, क्योंकि इसमें एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो बढ़ती उम्र के साथ-साथ त्वचा पर जो प्रभाव पड़ता है उसे कम करते हैं, साथ ही यह बालों के लिए भी बेहतरीन है।
यंग दिखना चाहते हैं तो इसका सेवन नियमित रूप से करें। बालों और आपकी त्वचा को जरूरी नमी मिल जाती है।
अंकुरित चना आपके शरीर के ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद करता है।
सेहत / शौर्यपथ / ध्यान को अंग्रेजी में मेडिटेशन कहते हैं, परंतु धर्म की ही तरह इसका कोई प्रॉपर अंग्रेजी शब्द नहीं है। खैर, जब आंखें बंद करके बैठते हैं तो अक्सर यह शिकायत रहती है कि जमाने भर के विचार उसी वक्त आते हैं। अतीत की बातें या भविष्य की योजनाएं, कल्पनाएं आदि सभी विचार मक्खियों की तरह मस्तिष्क के आसपास भिनभिनाते रहते हैं। इससे कैसे निजात पाएं? माना जाता है कि जब तक विचार है तब तक ध्यान घटित नहीं हो सकता। अब कोई मानने को भी तैयार नहीं होता कि निर्विचार भी हुआ जा सकता है। कोशिश करके देखने में क्या बुराई है। ओशो कहते हैं कि ध्यान विचारों की मृत्यु है। आप तो बस ध्यान करना शुरू कर दें और जानिए इसके 15 लाभ।
यदि ध्यान आपकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया है तो यह आपके दिन का सबसे बढ़िया समय बन जाता है। आपको इससे आनंद की प्राप्ति होती है। फिर आप इसे पांच से दस मिनट तक बढ़ा सकते हैं। पांच से दस मिनट का ध्यान आपके मस्तिष्क में शुरुआत में तो बीज रूप से रहता है, लेकिन 3 से 4 महिने बाद यह वृक्ष का आकार लेने लगता है और फिर उसके परिणाम आने शुरू हो जाते हैं।
1. जहां पहले 24 घंटे में चिंता और चिंतन के 50-60 हजार विचार होते थे वहीं अब उनकी संख्या घटने लगेगी। जब पूरी घट जाए तो बहुत बड़ी घटना घट सकती है। ध्यान से सर्वप्रथम सभी तरह की अनावश्यक मानसिक गतिविधि रूकने लगती है।
2. रोग को शारीरिक बीमारी कहते हैं और शोक को सभी तरह के मानसिक दुख। दोनों की ही उत्पत्ति मन, मस्तिष्क और शरीर के किसी हिस्से में होती है। ध्यान उसी हिस्से को स्वस्थ कर देता है। ध्यान मन और मस्तिष्क को भरपूर ऊर्जा और सकारात्मकता से भर देता है। शरीर भी स्थित होकर रोग से लड़ने की क्षमता प्राप्त करने लगता है। चिंता और चिंतन से उपजे रोगों का खात्मा होगा।
3. ध्यान से श्वास-प्रश्वास में सुधार होने से किसी भी तरह के दुख के मामले में हम आवश्यकता से अधिक चिंता नहीं करते। हमारी भावनाएं श्वास-प्रश्वास से संचालित होते हैं। श्वास-प्रश्वास के सही होने से भावनाएं भी नियंत्रित हो जाती है।
4. प्रतिदिन तीन माह तक सिर्फ 10 मिनट का ध्यान करें। आपके मस्तिष्क में परिवर्तन होंगे और आप किसी भी समस्या को पहले की अपेक्षा सकारात्मक तरीके से लेंगे। मात्र तीन माह में हर तरह के रोग को रोककर शोक को मिटाने की क्षमता है ध्यान में।
5. हम ध्यान है। सोचो की हम क्या है- आंख? कान? नाक? संपूर्ण शरीर? मन या मस्तिष्क? नहीं हम इनमें से कुछ भी नहीं। ध्यान हमारे तन, मन और आत्मा (हम खुद) के बीच लयात्मक सम्बन्ध बनाता है। स्वयं को पाना है तो ध्यान जरूरी है। वहीं एकमात्र विकल्प है।
6. ध्यान का नियमित अभ्यास करने से आत्मिक शक्ति बढ़ती है। आत्मिक शक्ति से मानसिक शांति की अनुभूति होती है। मानसिक शांति से शरीर स्वस्थ अनुभव करता है। ध्यान के द्वारा हमारी उर्जा केंद्रित होती है। उर्जा केंद्रित होने से मन और शरीर में शक्ति का संचार होता है एवं आत्मिक बल मिलता है।
7. ध्यान से विजन पॉवर बढ़ता है तथा व्यक्ति में निर्णय लेने की क्षमता का विकास होता है। ध्यान से सभी तरह के रोग और शोक मिट जाते हैं। ध्यान से हमारा तन, मन और मस्तिष्क पूर्णत: शांति, स्वास्थ्य और प्रसन्नता का अनुभव करते हैं।
8. ध्यान से हर तरह का भय जाता रहेगा। कार्य और व्यवहार में सुधार होगा। रिश्तों में तनाव की जगह प्रेम होगा। दृष्टिकोण सकारात्मक होगा।
9. मानसिक क्षमता बढ़ने के कारण सफलता के बारे में सोचने मात्र से ही सफलता आपके नजदीक आने लगेगी।
10. ध्यान से वर्तमान को देखने और समझने में मदद मिलती है। शुद्ध रूप से देखने की क्षमता बढ़ने से विवेक जाग्रत होगा। विवेक के जाग्रत होने से होश बढ़ेगा। होश के बढ़ने से मृत्यु काल में देह के छूटने का बोध रहेगा। देह के छूटने के बाद जन्म आपकी मुट्ठी में होगा। यही है ध्यान का महत्व।
11. खुद तक पहुंचने का एक मात्र मार्ग ध्यान ही है। ध्यान को छोड़कर बाकी सारे उपाय प्रपंच मात्र है। यदि आप ध्यान नहीं करते हैं तो आप स्वयं को पाने से चूक रहे हैं। स्वयं को पाने का अर्थ है कि हमारे होश पर भावना और विचारों के जो बादल हैं उन्हें पूरी तरह से हटा देना और निर्मल तथा शुद्ध हो जाना।
ज्ञानीजन कहते हैं कि जिंदगी में सब कुछ पा लेने की लिस्ट में सबमें ऊपर स्वयं को रखो। मत चूको स्वयं को। 70 साल सत्तर सेकंड की तरह बीत जाते हैं। योग का लक्ष्य यह है कि किस तरह वह तुम्हारी तंद्रा को तोड़ दे इसीलिए यम, नियम, आसन, प्राणायम, प्रत्याहार और धारणा को ध्यान तक पहुँचने की सीढ़ी बनाया है।
12. शोर और प्रदूषण के माहौल के चलते व्यक्ति निरर्थक ही तनाव और मानसिक थकान का अनुभव करता रहता है। ध्यान से तनाव के दुष्प्रभाव से बचा जा सकता है। निरंतर ध्यान करते रहने से जहां मस्तिष्क को नई उर्जा प्राप्त होती है वहीं वह विश्राम में रहकर थकानमुक्त अनुभव करता है। गहरी से गहरी नींद से भी अधिक लाभदायक होता है ध्यान।
13. ध्यान से आपकी चेतना को लाभ मिलता है। ध्यान से आपके भीतर सामंजस्यता बढ़ती है। जब भी आप भावनात्मक रूप से अस्थिर और परेशान हो जाते हैं, तो ध्यान आपको भीतर से स्वच्छ, निर्मल और शांत करते हुए हिम्मत और हौसला बढ़ाता है। ध्यान से चिंता और समस्याएं छोटी हो जाती है।
14. ध्यान से जहां शुरुआत में मन और मस्तिष्क को विश्राम और नई उर्जा मिलती है वहीं शरीर इस ऊर्जा से स्वयं को लाभांवित कर लेता है। ध्यान करने से शरीर की प्रत्येक कोशिका के भीतर प्राण शक्ति का संचार होता है। शरीर में प्राण शक्ति बढ़ने से आप स्वस्थ अनुभव महसूस करते हैं।
15. ध्यान से उच्च रक्तचाप नियंत्रित होता है। सिरदर्द दूर होता है। शरीर में प्रतिरक्षण क्षमता का विकास होता है, जोकि किसी भी प्रकार की बीमारी से लड़ने में महत्वपूर्ण है। ध्यान से शरीर में स्थिरता बढ़ती है। यह स्थिरता शरीर को मजबूत करती है।
16. जो व्यक्ति ध्यान करना शुरू करते हैं, वह शांत होने लगते हैं। यह शांति ही मन और शरीर को मजबूती प्रदान करती है। ध्यान आपके होश पर से भावना और विचारों के बादल को हटाकर शुद्ध रूप से आपको वर्तमान में खड़ा कर देता है। ध्यान से काम, क्रोध, मद, लोभ और आसक्ति आदि सभी विकार समाप्त हो जाते हैं। निरंतर साक्षी भाव में रहने से जहां सिद्धियों का जन्म होता है वहीं सिद्धियों में नहीं उलझने वाला व्यक्ति समाधी को प्राप्त लेता है।
17. ध्यान से भरपूर लाभ प्राप्त करने के लिए नियमित अभ्यास करना आवश्यक है। ध्यान करने में ज्यादा समय की जरूरत नहीं मात्र पांच मिनट का ध्यान आपको भरपूर लाभ दे सकता है बशर्ते की आप नियमित करते हैं।
18. धन्यान से मोमोरी पॉवर बढ़ता है। ध्यान के साथ इस जाति स्मरण का अभ्यास जारी रखने से एक माह बाद जहां मोमोरी पॉवर बढ़ेगा वहीं कुछ माह बाद यह आपमें गजब की स्मरणशक्ति का विकास कर देगा। आप किसी भी उम्र में और किसी भी हालात में भूल नहीं सकते।
19. ध्यान से मुख्य रूप से मस्तिष्क शांत होता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है। इससे जहां रक्त संचार अच्छा रहता है वहीं आंखों की ज्योति भी बढ़ती है।
20. मोक्ष प्राप्त करने का और कोई मार्ग नहीं है सिवाय ध्यान के।
धर्म संसार / शौर्यपथ / भगवान श्रीकृष्ण की आठ पत्नियां और कई प्रेमिकाएं थीं। आठ पत्नियों के नाम इस प्रकार हैं- रुक्मणि, जाम्बवन्ती, सत्यभामा, कालिन्दी, मित्रबिन्दा, सत्या, भद्रा और लक्ष्मणा। रुक्मिणी, जाम्बवन्ती, सत्यभामा, कालिन्दी, मित्रबिन्दा के बारे में तो हम बता चुके हैं भद्रा, सत्या और लक्ष्मणा के बारे में बहुत कम ही लिखा गया है। इन्हीं में से एक जानिए लक्ष्मणा के बारे में 5 खास बातें।
1. मद्र देश की राजकुमारी लक्ष्मणा भी कृष्ण को चाहती थी, लेकिन परिवार कृष्ण से विवाह के लिए राजी नहीं। लक्ष्मणा के पिता का नाम वृहत्सेना था।
2. श्रीमद्भागवत महापुराण के अनुसार श्रीकृष्ण को जब यह पता चला की लक्ष्मणा उनसे प्रेम करती हैं तो वे अकेले ही लक्ष्मणा का हरण करके ले आए थे। जैसे गरुड़ ने स्वर्ग से अमृत का हरण किया था, वैसे ही भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयंवर में अकेले ही उसे हर लिया था।
3. यह भी कहा जाता है कि लक्ष्मणा के पिता ने स्वयंवर प्रतियोगिता का आयोजन किया था जिसमें पानी में मछली की परछाई देखकर मछली पर निशाना लगाएगा था। भगवान कृष्ण ने पानी में मछली की परछाई देखकर निशाना लगाया और स्वयंवर में विजयी हुए तब लक्ष्मणा और कृष्ण का विवाह किया गया।
4. यह भी कहा जाता है कि भगवन कृष्णा ने जरासंध, दुर्योधन और अर्जुन सहित कई सारे योद्धाओं को धनुष प्रतियोगिता में हराकर लक्ष्मण को हासिल किया था। बाद में लक्ष्मणा ने द्रौपदी को बताया था कि मेरे स्वयंवर कितना रोचक हुआ था। क्योंकि द्रौपदी का स्वयंवर भी कुछ इसी तरह से हुआ था।
5. लक्ष्मणा-कृष्ण के पुत्र: प्रघोष, गात्रवान, सिंह, बल, प्रबल, ऊर्ध्वग, महाशक्ति, सह, ओज और अपराजित।
राजनांदगांव / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राजधानी रायपुर में आयोजित समारोह में डोंगरगांव विकासखंड के ग्राम कोनारी की संध्या महिला स्वसहायता समूह की श्रीमती दुलेश्वरी देवांगन को उत्कृष्ट ई-रिक्शा परिचालन कार्य हेतु सम्मानित किया। श्रीमती दुलेश्वरी देवांगन ने मुख्यमंत्री से आईबीसी न्यूज चैनल द्वारा आयोजित कार्यक्रम में ई-रिक्शा परिचालन गतिविधि संबंधी अपने अनुभव साझा किया। श्रीमती दुलेश्वरी देवांगन सितम्बर २०१६ से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) योजना अंतर्गत स्वसहायता समूह से जुड़ी हुई हैं तथा मार्च २०१९ में एनआरएलएम योजना तथा श्रम विभाग के वित्तीय सहयोग से उन्होंने ई-रिक्शा क्रय कर इसे चलाने का कार्य आरंभ किया था। श्रम विभाग से १ लाख की सब्सिडी तथा ५० हजार रूपए का मुद्रा लोन इन्हें प्राप्त हुआ है। श्रीमती दुलेश्वरी देवांगन को प्रतिमाह लगभग १० हजार रूपए की शुध्द आमदनी हो रही है। इनका ड्राईविंग लाईसेंस भी बन चुका है। सम्मान समारोह कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के साथ अन्य केबिनेट मंत्री भी उपस्थित रहे।
राजनांदगांव / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड, राजनांदगांव क्षेत्र द्वारा जिले के ग्रामीण अंचलों में समुचित वोल्टेज पर निर्बाध व गुणावत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विद्यमान उपकेन्द्रों में स्थापित पॉवर ट्रांसफार्मरों की क्षमता में वृद्धि का कार्य सर्वोच्च प्राथमिकता से किया जा रहा है। इस दिशा में छुरिया उपसंभाग के अंतर्गत ग्राम सड़क चिरचारी में विद्यमान उपकेन्द्र में ३.१५ एमव्हीए का अतिरिक्त पॉवर ट्रांसफार्मर को ऊर्जीकृत किया गया। इस प्रकार सड़क चिरचारी उपकेन्द्र की क्षमता ५ एमव्हीए से बढ़कर ८.१५ एव्हीए हो गया है। इस नये पॉवर ट्रांसफार्मर के लग जाने से लगभग ३९ ग्रामों में विद्युत संबंधी समस्याओं का निराकरण हो गया है। विद्युत विकास के लिए स्वीकृत इस कार्य से सड़क चिरचारी उपकेन्द्र के परिधि में आने वाले अनेक गांवों के किसानों तथा उपभोक्ताओं को इसका लाभ मिलेगा।
इस कार्य को सफलतापूर्वक किये जाने पर मुख्य अभियंता टीके मेश्राम एवं अधीक्षण अभियंता तरूण कुमार ठाकुर ने सहायक अभियंता एमके साहू, केके श्रीवास, और उनकी टीम को शुभकामनाएं प्रेषित की है। छुरिया उपसंभाग के सहायक अभियंता कुंजेश कुमार श्रीवास ने बताया कि सड़क चिरचारी उपकेन्द्र में स्थापित नवीन अतरिक्त पॉवर ट्रांसफार्मर के ऊर्जीकरण से लगभग ६५०० उपभोक्ताओं को उच्चगुणवत्ता की विद्युत सेवा का लाभ मिलेगा।
राजनांदगांव / शौर्यपथ / डोंगरगढ़ स्थित सेंट विसेंट पेलोटी इंटरनेशनल स्कूल वर्चुअल वार्षिक समारोह संपन्न हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर एफआर कोसरिया, को-आर्डिनेटर श्री सहारे, विशेष अतिथि आर.एस. जॉन प्रिंसिपल, विक्टर थॉमस, ब्रांच मैनेजर सहारा ग्रुप सहित स्कूल के प्रिंसिपल फादर मुक्ति प्रकाश एवं फादर हबिल झागा उपस्थित थे। कार्यक्रम की शुरूआत स्कूल के शिक्षक एवं बच्चों के द्वारा वेलकम गीत के किया गया। गत वर्ष २०१९-२० के मेरिटोरियस बच्चों के ई-प्रमाण पत्र देकर सम्मान किया गया। एनुअल डे के अवसर पर बच्चों के द्वारा ऑनलाइन के द्वारा मनमोहक डांस एवं गीत प्रस्तुत किया। मुख्य अतिथि ने कहा कि सर्वसुविधायुक्त पलोटी स्कूल शहर का एकमात्र स्कूल है और यहां के विद्यार्थी व्यवहार एवं मेरिट में स्थान पाने वाले विद्यार्थी के नाम से जाने जाते है। मैनेजर और प्रिंसिपल ने कहा कि बेस्ट एजुकेशन देना ही हमारा लक्ष्य है और स्कूल इस कार्य को गति देने मे कोई कसर नहीं छोड़ेगा।
धमतरी / शौर्यपथ / राज्यपाल एवं इंडियन रेडक्राॅस सोसायटी छत्तीसगढ़ की अध्यक्ष सुश्री अनुसुईया उइके ने राजभवन के दरबार हाॅल में आयोजित इंडियन रेडक्राॅस सोसायटी राज्यपाल सम्मान समारोह में धमतरी जिले को कोविड-19 में उत्कृष्ट कार्य के लिए द्वितीय पुरस्कार से सम्मानित किया। उक्त पुरस्कार कलेक्टर जयप्रकाश मौर्य की ओर से डिप्टी कलेक्टर डीसी बंजारे ने रविवार 20 दिसम्बर को प्राप्त किया। सम्मान के तौर प्रशस्ति पत्र, प्रतीक चिन्ह एवं 37500 रूपये से सम्मानित किया गया। इसके अलावा जिले के छह वालंटियर्स को उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया है। इस अवसर पर राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि रेडक्राॅस सोसायटी ने पूरे विश्व में प्राकृतिक आपदाओं तथा युद्ध जैसी आपातकालीन परिस्थितियों में निस्वार्थ भावना से सेवा कर मानवता का अतुलनीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। स्वास्थ्य सुविधाओं सहित अन्य प्रकार की मानवसेवा से संबंधित कार्यों के लिए रेडक्राॅस सोसायटी हमेशा से प्रतिबद्ध रही है।
उल्लेखनीय है कि विगत कुछ वर्षांे से जिले में रेडक्राॅस सोसायटी उत्कृष्ट कार्य कर रही है। वर्तमान में जिले में 20 काउंसलर एवं सभी शासकीय एवं अशासकीय स्कूलों, महाविद्यालयों में लगभग 14 हजार रेडक्राॅस वालेंटियर्स पंजीकृत हैं जो सदैव ही जिले के लिए सहयोग के लिए तत्पर रहते हैं। इसी तारतम्य में वर्ष 2020 में वैश्विक आपदा कोविड-19 के संक्रमण के दौरान जिला रेडक्राॅस सोसायटी एवं सभी वालेंटियर्स और कांउसलर द्वारा इस विषम परिस्थितियों में निस्वार्थ भाव से जनहित में अनेक कार्य एवं गतिविधियां संचालित की गईं। उक्त सम्मान के लिए कलेक्टर मौर्य ने जिला रेडक्राॅस सोसायटी एवं सम्मानित हुए सभी वालेटियर्स को बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। रेडक्राॅस के जिला संगठक डाॅ. शैलेन्द्र गुप्ता ने बताया कि जिले में जल्द ही कार्यसमिति एवं सभी काउंसलर्स की कार्यशाला आयोजित कर वर्ष भर की रूपरेखा एवं वार्षिक कार्ययोजना कलेक्टर के निर्देशानुसार तैयार की जाएगी।
शौर्यपथ /सर्दियों में हमें अपने खानपान का खास ख्याल रखना जरूरी है। लेकिन कुछ ऐसे फायदेमंद फूड्स हैं जिनका सर्दियों में सेवन नुकसानदेह हो सकता है। ऐसा ही एक फूड है विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट का भंडार आंवला। आंवले के फायदों को तो हम सभी जानते हैं, लेकिन वैज्ञानिकों ने पाया है कि सर्दियों में आंवले का अधिक सेवन हमारे स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
गुणों का भंडार आंवला सीमित मात्रा में ही फायदा करता है
इम्यूनिटी बनाए रखने के लिए जरूरी विटामिन सी का खजाना है आंवला। इसके अलावा इसमें विटामिन ए, विटामिन बी कॉम्लेक्स, कैल्शियम, पोटेशियम, मैग्नीशियम, आयरन, फाइबर और डाययूरेटिक एसिड भी पाया जाता है। जर्नल 'आयु' के अनुसार इसमें मौजूद एंटी ऑक्सीाडेंट फ्री रेडिकल्स को खत्म करने का काम करते हैं। आपके बाल, त्वचा, आंखें और ब्लड शुगर लेवल सभी के लिए आंवले का सेवन बहुत फायदेमंद होता है।
लेकिन अगर आप सर्दी में इसका अधिक सेवन करती हैं तो इसके फायदों से ज्यादा नुकसान हो सकते हैं।
ये हैं सर्दियों में आंवले के अधिक सेवन के नुकसान
1. सर्दी जुखाम बढ़ा सकता है आंवला
अगर आपको सर्दी जुखाम है या अक्सर रहता है, तो सर्दियों में आंवले के सेवन से बचें। आंवले का खट्टापन गले के लिए नुकसानदेह हो सकता है और खांसी, खराश जैसी समस्याओं को बढ़ा सकता है। इसलिये अगर आपको फ्लू की समस्या है, तो आंवले का सेवन न करें।
2. तासीर में ठंडा होता है आंवला
आंवले की तासीर ठंडी होती है यानी ये शरीर को ठंडक पहुंचाता है। यही कारण है कि सर्दियों में इसके अधिक सेवन के लिए मना किया जाता है। अगर आप नियमित कच्चा आंवला खाती हैं या जूस पीती हैं तो इसके साथ काली मिर्च लें। ये ठंडक को खत्म करेगी और गले मे समस्या भी नहीं होगी।
3. डायरिया भी हो सकता है आंवला का एक साइड इफेक्ट
अगर आप अत्यधिक आंवला खाती हैं, तो डायरिया की समस्या भी हो सकती है। जैसा कि आप जानती ही हैं, आंवले में फाइबर भरपूर मात्रा में होता है। ऐसे में अगर आप ज्यादा फाइबर का सेवन कर लेती हैं तो डायरिया और अन्य पेट सम्बंधी समस्याओं की संभावना बढ़ जाती हैं।
4. एसिडिटी के लिए भी है जिम्मेदार
अधिक आंवला खाना आपके पाचन को प्रभावित कर सकता है। आंवला का अधिक सेवन एसिडिटी का कारण बन सकता है क्योंकि आंवला भी एसिडिक होता है। खट्टेपन के कारण आंवला एसिडिटी को ट्रिगर कर सकता है। इसलिए अत्यधिक आंवला खाने से बचें।
तो लेडीज, भले ही आंवला रोज खाना एक अच्छी आदत है, लेकिन सर्दियों में इसके अधिक सेवन से बचें।
धर्म संसार / शौर्यपथ / गीता केवल एक धर्म ग्रंथ ही नहीं, बल्कि यह एक जीवन ग्रंथ भी है, जो हमें पुरुषार्थ की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा देती है। शायद इसी कारण से हजारों साल बाद आज भी यह हमारे बीच प्रासंगिक है। मान्यता है कि द्वापर युग में त्रियोग के प्रवर्तक श्रीकृष्ण ने मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष एकादशी के दिन कुरुक्षेत्र में अर्जुन को गीता ज्ञान दिया था, जो मोक्षदायक है। इसी कारण इस एकादशी का एक प्रचलित नाम मोक्षदा एकादशी भी है।
यह दिन ‘गीता जयंती’ के रूप में भी प्रचलित है। धर्मज्ञों की राय में धार्मिक व आध्यात्मिक सिद्धांतों का प्रतिपादन ही गीता का मूल उद्देश्य है।
कर्म और धर्म के महाकोष गीता में कुल 18 अध्याय और 700 श्लोक हैं। गीता त्रियोग, रजोगुण संपन्न ब्रह्मा से भक्ति योग, सतोगुण संपन्न विष्णु से कर्म योग और तमोगुण संपन्न शंकर से ज्ञान योग का ऐसा प्रकाश है, जिसकी आभा हर एक जीवात्मा को प्रकाशमान करती है। महाभारत अर्थात् ‘जय संहिता’ के 18 पर्व में भीष्म पर्व का अभिन्न अंग गीता है, जिसमें त्रियोग का सुंदर समन्वय
मिलता है।
गीता की गणना उपनिषदों में की जाती है। इस कारण इसे ‘गीतोपनिषद्’ भी कहा गया है, जो जीने की कला का महान ग्रंथ है। कहा जाता है कि सनातन धर्म की स्थापना और अधर्म के विनाश से संबद्ध गीता का प्रथम ज्ञान जगत के अलौकिक तेज से सूर्य देव को प्राप्त हुआ। उन्होंने पहले वैवस्वत मनु को, और उसके उपरांत मनु ने राजा इक्ष्वाकु को यह ज्ञान प्रदान किया, जिसे श्रीकृष्ण ने अर्जुन को सविस्तार बताया। इसके साथ ही धृतराष्ट्र और उनके प्रिय संजय ने भी इसका प्रत्यक्ष श्रवण किया।
धर्म के विभिन्न मार्गों का समन्वय और निष्काम कर्म- ये गीता की दो प्रमुख विशेषताएं हैं। महाभारत में वेदव्यास जी गीता के बारे में कहते हैं कि गीता सुगीता करने योग्य है, जो स्वयं पद्मनाभ भगवान विष्णु के मुखार्रंवद से निकली हुई है। भारतीय नदियों में गंगा, पशुधन में गऊ, तीर्थों में गया, देवियों में गायत्री और धार्मिक ग्रंथों में गीता का अति विशेष मान है और ये पांचों ‘ग’कार हैं, जो मोक्षदायक और परम पवित्र भी है। कई अर्थों में गीता भारत और भारतीयता का जीवंत प्रकाश स्तम्भ है, जिसमें भूत, भविष्य और वर्तमान तीनों सन्निहित हैं। गीता का पठन-पाठन, मननर्-ंचतन व श्रवण हमें ज्ञानवान बनाता है। इसके हर एक श्लोक में जीवन पथ से संबंधित कोई-न-कोई तार अवश्य जुड़े हैं। जीवनशैली के मर्म का जैसा वर्णन इसमें हुआ है, वैसा कहीं और नहीं मिलता।
धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
सेहत / शौर्यपथ / लोग वजन कम करने के लिए क्या कुछ नहीं करते। कभी जिम जाते हैं तो कभी डाइटिंग फॉलो करने लगते हैं। ऐसा करने से सभी का वजन कम हो जाता हो, यह जरूरी नहीं है लेकिन फिर भी कुछ चीजें ऐसी हैं, जिनके नियमित रूप से सेवन करने से आपका वजन कम हो जाता है। मूंग दाल वजन कम करने के लिए एक ऐसा ही खाद्य पदार्थ माना जाता है। मूंग दाल में काफी मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है। साथ ही इसमें फैट नहीं होता इसलिए यह काफी असरदायक है।
इन तरीको से डाइट में शामिल करें मूंग दाल
दिन की शुरुआत गुनगुने पानी से करें। कम से कम दो गिलास पानी को धीरे धीरे घूंट लेकर पिएं। इससे बॉडी का टॉक्सिन निकलता है और शरीर हाइड्रेटेड बना रहता है। फिर एक घंटे के बाद योग, वॉक या प्राणायाम करें। मूंग दाल का सूप बनाएं। इसे दिन में 6 बार पिएं। इसको बनाने के लिये मूंग दाल में लहसुन, अदरक, नमक, हींग, जीरा, सौंफ, धनिया, हरी र्मिच को उबालें। इस सूप में किसी भी चीज का तड़का न लगाएं। इस डाइट प्रोग्राम को अलगे तीन दिन तक फॉलो करें।
इन चीजों से करें परहेज
मूंग दाल डाइट पर हैं, तो उस दौरान खट्टी चीजें जैसे टमाटर, नींबू, दही आदि का प्रयोग न करें। यहां तक कि तेल या घी भी न मिलाएं, वरना आपको फायदा नहीं पहुंचेगा।
मूंग दाल के साथ सब्जियां लेना न भूलें
मूंग के सूप के साथ सब्जिसयों का भी सेवन करें। सब्जिनयों को उबालकर या फिर भाप में पका कर सलाद के रूप में लिया जा सकता है। सलाद के लिए गाजर, खीरा, चुकंदर, मूली, शलगम, लौकी, तोरई, ककड़ी, गोभी, प्याज, कद्दू ले सकते हैं।
आमतौर पर इन तरीकों से मूंग की दाल खाने से 20 दिनों में 5 किलो तक वजन कम किया जा सकता है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
