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मुख्यमंत्री ने दाई-दीदी क्लीनिक का किया शुभारंभ : दाई-दीदी क्लीनिक की वाहनों को हरी झण्डी दिखाकर किया रवाना
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्रीमती इंदिरा गांधी के जन्म दिवस पर महिलाओं के लिए क्लीनिक दाई-दीदी क्लीनिक का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में रायपुर, दुर्ग-भिलाई और बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र के लिए 03 स्पेशल मोबाइल दाई-दीदी क्लीनिक को अपने निवास से हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। मुख्यमंत्री ने मोबाइल क्लीनिक के भीतर जाकर उपलब्ध सुविधाओं का अवलोकन भी किया और अपने ब्लड प्रेशर की जांच भी करायी। इस दाई-दीदी स्पेशल क्लीनिक में डॉक्टर सहित सभी चिकित्सकीय स्टाफ महिलाएं होंगी और केवल महिलाओं का ही निःशुल्क इलाज किया जाएगा।
इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि दाई-दीदी क्लीनिक देश में अपनी तरह का पहला क्लीनिक है, जो केवल महिलाओं का इलाज करेगा। वर्तमान में इसे रायपुर, दुर्ग-भिलाई और बिलासपुर निगम क्षेत्र में मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया है और आगे इसका विस्तार किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि संकोच के कारण महिलाएं अपनी बीमारी को खुलकर नहीं बता पाती हैं। इस कारण उनकी बीमारी का सही उपचार नहीं हो पाता। अब दाई-दीदी क्लीनिक में महिला चिकित्सक और महिला स्टाफ होने से वे निःसंकोच अपना समुचित इलाज करा सकेंगी। इसमें महिलाओं को निःशुल्क इलाज की सुविधा मिलेगी। उन्हें अस्पतालों में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। मुख्यमंत्री ने महिलाओं से इस क्लीनिक का ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाने की अपील की है।
इस मौके पर नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिव डहरिया, राज्य गृह निर्माण मण्डल के अध्यक्ष कुलदीप जुनेजा, राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती किरणमयी नायक, महापौर एजाज ढेबर, सभापति प्रमोद दुबे, रायपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष सुभाष धुप्पड़, सचिव नगरीय प्रशासन श्रीमती अलरमेल मंगई डी., रायपुर कलेक्टर भारतीदासन, नगर निगम कमिश्नर रायपुर, डॉक्टर, नर्स सहित उपस्थित थे।
गौरतलब है कि दाई-दीदी क्लीनिक में महिलाओं के प्राथमिक उपचार के साथ-साथ महिला चिकित्सक द्वारा स्तन कैंसर की जांच, हितग्राहियों को स्व स्तन जांच का प्रशिक्षण, गर्भवती महिलाओं की नियमित एवं विशेष जांच आदि की अतिरिक्त सुविधा होगी। महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से शहरों में स्थित आंगनबाड़ी के निकट पूर्व निर्धारित दिवसों में यह क्लीनिक स्लम क्षेत्र में लगाया जाएगा। इस क्लीनिक के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं, बच्चों आदि के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग की विभिन्न हितग्राहीमूलक परियोजना का लाभ भी प्रदान किया जाएगा।
जनरल क्लीनिक में महिलाओं के लिए पृथक जांच कक्ष और काउंसलर नहीं होने से महिलाएं परिवार नियोजन के साधन, कॉपर-टी निवेशन, आपातकालीन पिल्स की उपलब्धता, गर्भनिरोधक गोलियां, साप्ताहिक गर्भनिरोधक गोली, गर्भनिरोधक इंजेक्शन, परिवार नियोजन परामर्श, एसटीडी परामर्श में शर्म का अनुभव करती है। इस महिला क्लीनिक में डेडीकेटेड महिला स्टाफ होने से अब इस प्रकार के परामर्श निःसंकोच ले सकेंगी।
खाना खजाना / शौर्यपथ / नाश्ता बनाते समय रोजाना सुबह मन में एक सवाल उठना लाजमी है कि ऐसा क्या बनाएं जो जल्दी बनने के साथ-साथ सेहत के लिए भी पौष्टिक हो। आपकी ऐसी ही समस्या और सवाल का जवाब है आलू-पोहा रोल्स। आलू-पोहा रोल्स स्वादिष्ट होने के साथ-साथ आपको दिनभर के लिए भरपूर एनर्जी देने का भी काम करेंगे। तो देर किस बात की आइए जानते हैं कैसे बनाए जाते हैं आलू-पोहा रोल्स।
आलू-पोहा रोल्स बनाने के लिए सामग्री-
-सरसों
-थोड़ी-सी राई
-एक चुटकी हींग
जीरा
-कटी हुई हरी मिर्च
-एक कटा हुआ प्याज
-थोड़ी-सी अदरक
-मटर
-एक कटा हुआ टमाटर
-हल्दी
-तेल
-अमचूर पाउडर
-4 उबले हुए आलू
-हरा धनिया
-1 कप पोहा
-1 कप सूजी
-आधा कप दही
-नमक स्वादानुसार
विधि
आलू-पोहा रोल्स बनाने के लिए सबसे पहले एक पैन में 2 चम्मच तेल गर्म करके उसमें थोड़ी सी सरसों, थोड़ी-सी राई, एक चुटकी हींग और जीरा डाल दें। अब प्याज और अदरक डालने के बाद इसे हल्का-सा रोस्ट कर लें। जब प्याज हल्का सा रोस्ट हो जाएं, तो उसमें टमाटर और नमक डाल दें।
टमाटर गलने के बाद मटर, आलू, हल्दी, हरा धनिया और आमचूर पाउडर डालकर भून लें। रोल्स की स्टफिंग तैयार होने के बाद, पोहे का बैटर बनाएं। बैटर बनाने के लिए एक कप पोहा 10 मिनट के लिए भिगोकर रखने के बाद उसका सारा पानी निकालकर अलग रख दें।
बैटर तैयार करते हुए एक बर्तन में सूजी लेकर उसमें आधा कप दही और थोड़ा सा नमक डालकर अच्छी तरह मिक्स कर लें। अब पोहा बैटर और सूजी बैटर को मिक्सी में पीस लें, आपका बैटर तैयार है।
अब आलू की स्टफिंग बनाने के लिए गोल आकार के रोल्स बनाकर एक प्लेट में रख लें। इसके बाद तवा गर्म करके चीले की तरह पोहा बैटर उस पर डालें और गोलाकार बनाएं। जब बैटर हल्का-सा सिकने लगे तो उसके ऊपर आलू-स्टफिंग व हल्की-सी सॉस डालकर रोल बना दें। इस तरह से आपको पोहा रोल्स अच्छी तरह दोनों तरफ से सेकने हैं। ये हेल्दी और टेस्टी पोहा रोल्स आप गर्मा-गर्म चाय के साथ सर्व कर सकते हैं।
व्रत /त्यौहार /शौर्यपथ / कार्तिक मास की षष्टी को छठ मनाई जाती है। इस बार छठ का महा पर्व 18 नवंबर से 21 नवंबर तक मनाया जाएगा। छठ पूजा में ठेकुआ के प्रसाद का बहुत महत्व माना गया है। इस प्रसाद को विशेष तौर पर छठ पूजा के अवसर पर कुछ नियमों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाता हैं। तो चलिए आपको बताते हैं पूजा के प्रसाद में कैसे बनाया जाता है खस्ता ठेकुआ।
सामग्री :
-250 ग्राम गेहूं का आटा
-1 बड़ा चम्मच घी (मोयन के लिए)
-30 ग्राम सूखे नारियल का बूरा
-125 ग्राम गुड़
-आधा चम्मच इलायची पाउडर
-तलने के लिए तेल
-एक मुट्ठी बारीक कटे मेवे
ठेकुआ बनाने की विधि -
ठेकुआ बनाने के लिए सबसे पहले एक बर्तन में आधा कप पानी उबलकर उसमें गुड़ तोड़कर डाल दें। गुड़ जब तक पूरी तरह पिघल न जाए तब तक उसे लगातार हिलाते रहें। इसके बाद पानी को छलनी से छानकर ठंडा कर लें। एक परात में आटा छानकर उसमें नारियल का बूरा, बरीक कटे मेवे और पिसी इलायची अच्छी तरह मिक्स कर लें।
अब गुड़ के पानी की सहायता से आटे को कड़ा गूंथ लें। इसके बाद आटे की लोइयां बनाकर कड़ाही में तेल गर्म कर लें। आप आटे की लोइयों को मनचाहे आकार में शेप देते हुए बेल लें और गर्म तेल में डालकर कम आंच पर तल लें। आपका गरमा-गर्म ठेकुआ बनकर तैयार है। ठेकुआ को एक एयरटाइट डिब्बे में भरकर भी रखा जा सकता है।
शौर्यपथ / हमने अक्सर लोगों को महिला दिवस की बधाइयां देते हुए देखा है, लेकिन क्या आपको पता है पुरुष दिवस कब मनाया जाता है? इंटरनेशनल मेन्स डे हर साल 19 नवंबर को मनाया जाता है। यह दुनिया के लगभग 60 से अधिक देशों में मनाया जाता है।
भारत में अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस मनाने की शुरुआत 13 साल पहले से ही की गई है। पहली बार यह साल 2007 में मनाया गया था। अगर वैश्विक स्तर की बात करें तो इसकी शुरुआत 1998 में त्रिनिदाद और टोबैगो में हुई थी। डॉ. जीरोम तिलकसिंह ने पुरुषों के योगदान को सराहते हुए पुरुष दिवस मनाने की सोची थी। सबसे पहले उन्होंने ही अपने पिता के जन्मदिन पर विश्व पुरुष दिवस मनाया था। डॉ. जीरोम ने अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस की पहल करते हुए यह शुरुआत की थी और तभी से हर साल इसे मनाया जाने लगा।
हर साल इंटरनेशनल मेन्स डे पर एक थीम रखा जाता है। इस साल का थीम 'बेटर हेल्थ फॉर मैन एंड बॉयज' है। इस खास अवसर पर आप इन शानदार हिंदी मैसेजेस और कोट्स को भेजकर अपने प्रियजनों को हैप्पी इंटरनेशनल मेन्स डे विश कर सकते हैं।
1. पुरुष दिवस की पवन बेला पर
यही है शुभ संदेश
हर दिन आए
आपके जीवन में
लेकर खुशियां विशेष
Happy International Men's Day 2020
2. मर्द को दर्द नहीं होता कहावत को सच मानकर,
जो ता उम्र अपना दर्द छिपाता है,
वो भी पुरुष ही होता है
Happy International Men's Day 2020
3. जिन्दगी को तरस के खुदा ने ये तस्वीर बनाई है
हर दुख बच्चों का खुद पे वो सह लेतें है
उस खुदा की जीवित प्रतिमा को हम पिता कहते है
पुरुष दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं
Happy International Men's Day 2020
4. दिए जलते और जगमगाते रहें
आप हमेशा मुस्कुराते रहे
जब तक जिंदगी है ये दुआ है हमारी
आप ईद के चांद की तरह जगमगाते रहें
आप सभी को पुरुष दिवस की हार्दिक बधाई
Happy International Men's Day 2020
शिक्षा / शौर्यपथ / स्वामी विवेकानंद का बहुत लोकप्रिय कथन है 'उठो, जागो और तब तक मत रुको, जब तक अपने लक्ष्य को न प्राप्त कर लो'। इस बात से प्रेरणा लेने की जगह कई बार लोग एक-दो बार असफल होने पर अपने लक्ष्य को पाने के लिए किए जाने वाले प्रयासों को छोड़कर ही बैठ जाते हैं। इसके विपरीत अगर हम अपनी कोशिशें जारी रखें तो हमें सफल होने से कोई नहीं रोक सकता है। यही बात इस कहानी में भी बताई गई है।
एक प्रयोग में एक रिसर्च बायोलॉजिस्ट ने एक बड़े से टैंक में शार्क मछली को रखा और फिर उसी टैंक में छोटी मछलियों को भी डाल दिया। शार्क ने छोटी मछलियों को खाना शुरू कर दिया और कुछ ही घंटों में सभी छोटी मछलियां शार्क का आहार बन चुकी थीं। हर बार यही होता। बायोलॉजिस्ट ने अब अपने प्रयोग में थोड़ा परिवर्तन किया और एक मजबूत फाइबर स्लाइड को उस टैंक में डाल कर टैंक को दो भागों में बांट दिया। एक भाग में शार्क और दूसरे भाग में छोटी मछलियों को रखा। आदतन शार्क ने छोटी मछलियों पर हमला करना चाहा तो वे उस स्लाइड से टकरा गईं। शार्क ने प्रयास नहीं छोड़ा और हमला करती रही।
यह प्रयोग कुछ हफ्तों तक जारी रहा। शार्क ने हमला करना जारी रखा, लेकिन उसके प्रयास में लगातार कमी आती गई। फिर एक समय ऐसा आया कि शार्क ने यह मान लिया कि वह छोटी मछलियों को नहीं खा सकती। उसने प्रयास करना ही छोड़ दिया। बायोलॉजिस्ट ने अब फाइबर की स्लाइड को वहां से हटा दिया। लेकिन यह क्या, शार्क को तो इससे कोई फर्क हीं नहीं पड़ा। उसने यह मान लिया था कि एक दीवार है, एक अवरोध है, जिसे वह पार नहीं कर सकती। उसने प्रयास करना ही छोड़ दिया अब छोटी मछलियां आराम से उसी टैंक में तैर रहीं थी और उसे शार्क से कोई खतरा भी नहीं था।
इस कहानी से मिलती है सीख-
हममें से कई लोगों के साथ अक्सर ऐसा होता है। हम प्रयास करना ही छोड़ देते हैं। कोई रुकावट नहीं होने के बावजूद हमें ऐसा लगता है कि अवरोध है, जिसे पार नहीं किया जा सकता। यकीन मानिए, अगर किसी चीज को पाने के लिए हम ईमानदारी से लगातार प्रयास जारी रखते हैं, तो वह हमें जरूर मिलती है।
सेहत / शौर्यपथ / वजन कम करने के लिए सबसे ज्यादा यह है कि आप अपनी डाइट में क्या लेते हैं। आपके किचन में कई ऐसे मसालें होते हैं जो आपको घर में रहते हुए वजन कम करने में मदद कर सकते हैं। घरेलू उपचारों से आप बेहद आसानी से अपने वजन को कम कर पाएंगे। अगर अपने भी घर में रहते हुए अच्छा खासा वजन बढ़ा लिया है तो यहां आपके लिए कुछ घरेलू नुस्खें हैं जिनसे आप अपना बढ़ा हुआ वजन आसानी से कम कर सकते हैं।
1. नीबूं और शहद
नींबू और शहद रसोई में पाए जाने वाले दो सबसे आम चीजें हैं। रोज सुबह एक गिलास गुनगुने पानी में नींबू डालें और उसके ऊपर से 2 चम्मच शहद मिक्स करके पिएं।
फायदा- शहद औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है, और नींबू पाचन तंत्र को डिटॉक्स करने में मदद करता है। ये दोनों शरीर की एक्स्ट्रा चर्बी को हटाने में मदद करते हैं और इसका प्रभाव कुछ ही हफ्तों में दिखाई देना शुरू हो जाता है। यह घर पर वजन घटाने के सबसे सरल उपायों में से एक है।
2. मेथी के बीज, अजवाइन और जीरा
मेथी के बीज, अजवाइन और काला जीरा सभी मसालों को एक साथ भूनकर इसका पाउडर बना लें और इस पाउडर को हर दिन एक गिलास पानी में मिलाकर पिएं।
फायदा- भारतीय रसोई में इस्तेमाल किए जाने वाले मेथी के बीज में अक्सर छिपे हुए लाभकारी गुण शामिल होते हैं। मेथी के बीज फैट कम करने और शरीर के मेटाबोलिज्म को तेज करते हैं। वहीं अजवाइन भी वजन घटाने में मदद करती है। काला जीरा पेट के चारों ओर जमा हुए फैट को कम करता है और इसके साथ वजन घटाने में सहायता करता है।
3. दालचीनी और शहद वाली चाय
शहद और दालचीनी की चाय बनाने के लिए, एक गिलास पानी गर्म करें। गुनगुने पानी में दो दालचीनी की लकड़ी डालें और ऊपर से एक चम्मच शहद मिलाएं। इन दोनों को अच्छी तरह से मिलाएं। रोज सुबह खाली पेट दालचीनी और शहद वाली इस चाय को पिएं।
फायदा- दालचीनी वजन कम करने में सहायक होती है। इस मसाले में आंतरिक गुण होते हैं जो हमारी शुगर-क्रेविंग को कम करते हैं और खून में इंसुलिन की मात्रा को नियंत्रित करने में भी मदद करता है।
4.कच्चा लहसुन
कच्चे लहसुन को चबाएं। ऐसा करने के बाद अपने दांतों को अच्छी तरह से ब्रश करें। रोज सुबह लहसुन की दो या अधिक फांक चबाना बहुत फायदेमंद होता है।
फायदा- लहसुन एंटीसेप्टिक गुणों के लिए जाना जाता है, वजन कम करने के लिए यही फायदेमंद होता है।
5. दही का सेवन
आप दही घर पर बना सकते हैं या किसी स्टोर से भी खरीद सकते हैं। अपनी डाइट में दही को एड करें और इसका रोज सेवन करें।
फायदा- दही पाचन प्रक्रिया को विनियमित करने के लिए आवश्यक है। दही दूध से प्राप्त होती है और इसलिए इसमें फैट को छोड़कर दूध के सभी लाभकारी गुण शामिल होते हैं।
6. एक समय में कम खाएं, लेकिन अधिक बार खाएं
अपने खाने को नाश्ता, दोपहर और रात के खाने में विभाजित करने के बजाय, हर 3-4 घंटे में हल्का भोजन खाने की कोशिश करें। 3 भारी भोजन करने के बजाय, 6 हल्के भोजन का सेवन करें।
फायदा- भोजन को इस तरह से विभाजित करना आपको ओवरईटिंग से रोकने में मदद करता है। अगर नाश्ते और दोपहर के खाने के बीच एक लंबा गैप होता है, तो आपको ज्यादा भूख लगती है और इस प्रकार, दोपहर के समय आप ज्यादा खाना खा लेते हैं। लेकिन, आप जब नाश्ते और दोपहर के भोजन के बीच में एक छोटा भोजन करते हैं, तो आप दोपहर के खाने के ब्रेक के दौरान कम खाते हैं।
धर्म संसार / शौर्यपथ / कार्तिक मास में तुलसी की पूजा करने का विधान है। वैसे तो साल भर तुलसी की पूजा की जाती है, लकिन कहा जाता है कि कार्तिक मास में तुलसी के सामने दीपक जालने से मंनवांछित फल मिलता है। कार्तिक के महीने में तुलसी की नियमपूर्वक पूजा करने व दीपक जलाने से भगवान विष्णु की कृपा मिलती है। ऐसी मान्यता है कि कार्तिक महीने में भगवान श्री हरि को तुलसी चढ़ाने का फल गोदान के फल से कई गुना अधिक हो जाता है। कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष में एकादशी के दिन यानी देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी विवाह भी किया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु निद्रा से जागते हैं। इसलिए देव के उठने पर तुलसी विवाह को पवित्र मुहूर्त माना जाता है| इस साल तुलसी विवाह गुरुवार 26 नवंबर को किया जाएगा।
ऐसी मान्यता है कि जिस घर में तुलसी जी होती हैं ऐसे घर में यमदूत प्रवेश नहीं करते। तुलसी जी का विवाह शालिग्राम से हुआ था, इसलिए कहा जाता है कि जो तुलसी जी की भक्ति करता है, उसको भगवान की कृपा मिलती है। एक कथा के अनुसार भगवान विष्णु ने तुलसी जी को वरदान दिया था कि मुझे शालिग्राम के नाम से तुलसी जी के साथ ही पूजा जाएगा और जो व्यक्ति बिना तुलसी जी मेरी पूजा करेगा, उसका भोग मैं स्वीकार नहीं करुंगा।
इस प्रकार करें पूजा
शास्त्रों के अनुसार तुलसी के चारों ओर स्तंभ बनाकर उसे तोरण से सजाना चाहिए तथा स्तंभों पर स्वास्तिक का चिन्ह बनाना चाहिए। रंगोली से अष्टदल कमल के साथ ही शंख चक्र व गाय का पैर बनाकर सर्वांग पूजा करना चाहिए। तुलसी का आवाहन करके धूप, दीप, रोली, सिंदूर, चंदन, नैवेद्य व वस्त्र अर्पित करना चाहिए। तुलसी के चारों और दीप दान करके उनकी विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए।
धर्म संसार / शौर्यपथ / गुरुवार को खरना के साथ निर्जला व्रत शुरू हो जाएगा। छठ पूजा का पहला दिन नहाय खाय होता है और व्रत का दूसरा दिन खरना होता है। हिंदु पंचांग के अनुसार यह कार्तिक मास की पंचमी को मनाया जाता है। गोधूली बेला में खीर और फलों का प्रसाद बना कर व्रतियां अघ्र्य देंगी। खरना का प्रसाद ग्रहण करने के साथ 36 घंटे का कठिन निर्जला उपवास शुरू हो जाएगा। इसके बाद शुक्रवार को अस्ताचलगामी सूर्य को अघ्र्य दिया जाएगा।
21 नवंबर की सुबह उदीयमान सूर्य को अघ्र्य देने के बाद व्रतियां व्रत का पारण करेंगी। इसके साथ ही छठ महापर्व संपन्न होगा। चार दिनों तक चलने वाले इस महापर्व सभी छठ मैया की भक्ति में लगे रहते हैं।
खरना: सूर्योदय सुबह 06 बजकर 47 मिनट पर होगा, वहीं सूर्यास्त शाम 05 बजकर 26 मिनट पर होगा।
क्या है खरना
छठ पूजा का व्रत में खरना के दिन पूरे दिन व्रत रखा जाता है। इसमें 36 घंटे के व्रत के दौरान न कुछ खाया जाता है और न ही जल पिया जाता है। शाम को छठवर्ती के घरों में गुड़, अरवा चावल व दूध से मिश्रित रसिया बनाए जाते हैं। रसिया को केले के पत्ते में मिट्टी के ढकनी में रखकर मां षष्ठी को भोग लगाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि मां षष्ठी एकांत व शांत रहने पर ही भोग ग्रहण करती हैं।
इससे पहले नहायखाय के दिन व्रतियों ने घर को गंगा जल से पवित्र करने के बाद कद्दू (लौकी) की सब्जी, अरवा चावल, चने की दाल और अगस्त के फूल का पकौड़ा बनाया जाता है। नहाय खाय के दिन पहले व्रती प्रसाद (कद्दू-भात) ग्रहण करते हैं। इसके बाद घर के अन्य सदस्य और आसपास के लोगों ने प्रसाद ग्रहण करते हैं।
आज मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी से बनेगा खीर
छठ व्रत के दूसरे दिन यानी गुरुवार को खरना में शाम में मिट्टी के चूल्हे में आम की लकड़ी से गन्ने की रस या गुड़ के साथ अरवा चावल मिला कर खीर बनाया जाएगा। खीर के साथ घी चुपड़ी रोटी और कटे हुए फलों का प्रसाद भगवान सूर्य को अर्पित किया जाएगा। दूध और गंगा जल से प्रसाद में अघ्र्य देने के बाद व्रतियां इसे ग्रहण करेंगी। खरना के बाद 21 नवंबर की सुबह अघ्र्य देने के बाद ही व्रत करने वाले जल और अन्न ग्रहण करेंगे।
रायपुर / / शौर्यपथ /मुख्यमंत्री बघेल 19 नवम्बर को पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्रीमती इंदिरा गांधी की जयंती पर महिलाओं के लिए स्पेशल क्लीनिक दाई-दीदी क्लीनिक का शुभारंभ करेंगे। महिलाओं के लिए शुरू की जाने वाली यह स्पेशल महिला मेडिकल मोबाइल क्लीनिक देश में अपनी तरह की पहली अनूठी क्लीनिक होगी। क्लीनिक की गाड़ियों में केवल महिला मरीजों को ही निःशुल्क इलाज की सुविधा मिलेगी। दाई-दीदी क्लीनिक गाड़ियों में केवल महिला स्टाफ तथा महिला डॉक्टर, महिला लैब टेक्नीशियन एवं महिला एएनएम ही कार्यरत रहेंगे। इस क्लीनिक के शुरू होने से महिला श्रमिकों एवं स्लम क्षेत्रों में निवासरत महिलाओं एवं बच्चियों को अपने घर के निकट ही महिला डॉक्टरों के माध्यम से इलाज की सुविधा मिलेगी।
इस क्लीनिक का संचालन मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत किया जाएगा। वर्तमान में प्रदेश के तीन बड़े नगर पालिक निगम रायपुर, भिलाई एवं बिलासपुर में महिलाओं के लिए एक-एक दाई-दीदी क्लीनिक शुरू की जा रही है। इस क्लीनिक में महिलाओं के प्राथमिक उपचार के साथ-साथ महिला चिकित्सक द्वारा स्तन कैंसर की जांच, हितग्राहियों को स्व स्तन जांच का प्रशिक्षण, गर्भवती महिलाओं की नियमित एवं विशेष जांच आदि की अतिरिक्त सुविधा होगी। महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से शहरों में स्थित आंगनबाड़ी के निकट पूर्व निर्धारित दिवसों में यह क्लीनिक स्लम क्षेत्र में लगाया जाएगा। इस क्लीनिक के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं, बच्चों आदि के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग की विभिन्न हितग्राहीमूलक परियोजना का लाभ भी प्रदान किया जाएगा।
गौरतलब है कि जनरल क्लीनिक में महिलाओं के लिए पृथक जांच कक्ष और काउंसलर नहीं होने से महिलाएं परिवार नियोजन के साधन, कॉपर-टी निवेशन, आपातकालीन पिल्स की उपलब्धता, गर्भनिरोधक गोलियां, साप्ताहिक गर्भनिरोधक गोली, गर्भनिरोधक इंजेक्शन, परिवार नियोजन परामर्श, एसटीडी परामर्श में शर्म का अनुभव करती है। इस महिला क्लीनिक में डेडीकेटेड महिला स्टाफ होने से अब इस प्रकार के परामर्श निःसंकोच ले सकेंगी।
व्रत /त्यौहार /शौर्यपथ / छठ महापर्व न सिर्फ एक साधना है बल्कि यह आपको बीमारियों से बचने और स्वस्थ रहने की भी सीख देता है। छठ महापर्व में अर्घ्य देने में प्रयुक्त होनेवाली सामग्रियों में से अधिकांश स्थानीय स्तर पर उपलब्ध रहती हैं और आयुर्वेद में इनका खास महत्व भी है। इनमें प्रयुक्त होनेवाले फल व अन्य खाद्य सामग्री रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ ठंड से लड़ने में शरीर को तैयार करती है। साथ ही इनसे कई बीमारियों से बचाव भी होता है।
आयुर्वेद के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने भी छठ में प्रयुक्त होनेवाले आंवला, हल्दी, ईंख, अनानास, पानी फल सिंघाड़ा, नारियल, सुथनी, ठेकुआ आदि को स्वस्थ रहने का माध्यम बताया है। वहीं सूर्योपासना से विटामिन डी मिलता है और कुष्ठ रोग से भी बचाव होता है। सभी सामग्री पित्त संबंधी विकारों को दूर करती है। पटना आयुर्वेदिक कॉलेज के अधीक्षक डॉ. वीएस दूबे, उपाधीक्षक डॉ. धनंजय शर्मा और आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. मधुरेंदु पांडेय ने छठ में प्रयुक्त होनेवाली सामग्रियों को गुणों की खान बताते हुए ठंड में होनेवाली बीमारियों से बचाव का साधन बताया।
आंवला
विटामिन सी, कैल्शियम, ठंड ऋतु के प्रकोप से बचाव, प्रतिरोधक क्षमता में बढ़ोतरी करता है।
हल्दी
एंटी एलर्जिक, एंटी ऑक्सीडेंट, एंटी सेप्टिक, घाव, दर्द और सूजन में राहत। कई आयुर्वेदिक औषधियों में इस्तेमाल।
अदरक
शरीर को गर्म रखता है। कोरोना काल में इसका महत्व काफी बढ़ा है। कई आयुर्वेदिक औषधियों में इस्तेमाल।
गुड़
पाचन शक्ति बढ़ाने में मददगार, शरीर के विकारों को निकालता है, शरीर को गर्म रखता है।
अनानास
पोटैशियम, रिच फाइबर, विटामिन ए, सी, एंटी ऑक्सीडेंट, पाचन शक्ति बढ़ाने में मददगार।
नारियल
हाई फाइबर, कैल्शियम, मिनिरल, विटामिन बी, हाई बीपी, किडनी, पेट की बीमारियों से बचाव।
सेव
विटामिन ए, बी, सी, ई और के, वजन कम व कोलेस्ट्रॉल कम करने में मददगार, शुगर, अस्थमा वाले मरीज के लिए फायदेमंद, सर्वगुण संपन्न फल
गागर नींबू
विटामिन सी, पोटैशियम, रिच फाइबर, वजन कम करने में मददगार, एंटी ऑक्सीडेंट, पाचन शक्ति बेहतर करने में मददगार।
ईंख
इसका रस शक्तिदायक, पाचनशक्ति, ताकत, स्फूर्ति बढ़ाने में मददगार।
पानी फल
लो फैट, विटामिन बी 6, पोटैशियम से भरपूर।
सूर्य को अर्घ्य देने का है खास महत्व
शाम और सुबह को सूर्य को अघ्र्य देते समय सूर्य निकलनेवाली पारा बैंगनी किरणें तिरछी निकलती हैं। शरीर पर इन किरणों के पड़ने से विटामिन डी का निर्माण होता है। विटामिन डी स्वस्थ रहने के लिए काफी महत्वपूर्ण तत्व है। यही कारण है कि हमारे पूर्वजों ने छठ के एक-एक विधानों को स्वस्थ शरीर रखने की आवश्यकतानुसार तैयार किया है। इससे एक ओर सूर्य, गंगा, स्वच्छता के महत्व को बताया गया है तो कठोर व्रत से शरीर के विकारों को दूर कर स्वस्थ रखने की कवायद की जाती है।
सेहत /शौर्यपथ / कोरोना के मद्देनजर चल रहे वर्क फ्रॉम होम में वजन कम करना बेहद मुश्किल हो सकता है। ऐसे में कुछ लोग स्ट्रिक्ट डाइट की सलाह देते हैं तो अन्य भारी वर्कआउट के महत्व पर जोर देते हैं। लेकिन वजन घटाने के इन नियमों का पालन करने के अलावा, आपको इन दोनों और अन्य चीजों के बीच संतुलन बनाना भी सीखना चाहिए। ऐसा करने के लिए, आपको जीवन जीने के स्वस्थ विकल्प बनाने चाहिए जो न केवल आपको सही मात्रा में वजन कम करने में मदद करते हैं, बल्कि आपको हेल्दी भी रखते हैं। फेस्टिव सीजन में पूरी, पकवान और मिठाई खाने बाद इन 6 तरीकों से आप आसानी से अपना वजन कम कर सकते हैं-
1.एक हेल्दी डाइट चार्ट प्लान करें
हेल्दी खाना वजन कम करने की कुंजी है। आपको तृप्त रखने के अलावा, यह दूसरे बाहर के अनहाइजीनिक खाने से आपको दूर रखता है। बाहर का खाना वजन बढ़ने के प्रमुख कारणों में से एक है। इसके अलावा, जरुरी है कि आप एक साप्ताहिक डाइट प्लान बनाए, इससे आपको अपने भोजन को पहले से तय करने में मदद मिलेगी जो आपको दूसरे किसी भी प्रकार के बाहर के खाने से बचाएगा।
2. रोज वर्कआउट या एक्सरसाइज करें
अपने टाइम-टेबल में एक्सरसाइज या वर्कआउट एड करने से आप आसानी से कैलोरी बर्न कर सकते हैं। यह न केवल आपको वजन कम करने और फिट शरीर बनाए रखने में मदद करता बल्कि आपको डाइटिंग नाम पर न खाने और न भूखे रहने की आजादी देता है।
3. जंक फूड की जगह खाएं घर का खाना
कई लोग, विशेष रूप से युवा पीढ़ी, एक टोंड और स्लिम बॉडी प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं। हालांकि, जब खाने की बात आती है, तो वे अपने आसपास उपलब्ध सभी जंक फूड को ‘न’ नहीं कह पाते हैं। इसलिए, यदि आप अपना वजन कम करना चाहते हैं, तो अपने खाने की आदतों में कुछ बदलाव करें। बाहर के खाने के बजाय घर का खाना खाएं।
4. कभी खाना न छोड़ें
भोजन छोड़ना और खुद को भूखा रखना वजन कम करने के लिए एक अच्छे विकल्प की तरह लग सकता है। हालाँकि, यह एक मिथक है जिसे आपको दूर करना चाहिए। भोजन स्किप करने से आपको अधिक भूख लगती है। जिसके बाद आप नॉर्मल से अधिक खाना खाते हैं। इसलिए, आपको कभी भी खाना नहीं छोड़ना चाहिए, बल्कि आपको इसे नियंत्रित करना चाहिए।
5. पानी पीते रहें
पानी एक कुशल मात्रा में वजन कम करने के लिए जरुरी होता है। आप इससे हाइड्रेटेड रहते हैं। इसके साथ ही यह आपको हेल्दी रखता है और आपको लंबे समय तक तृप्त भी रखता है। भोजन से पहले पानी पीना बेहद प्रभावी हो सकता है क्योंकि यह आपकी क्रेविंग्स को कम करता है और आपकी कैलोरी की मात्रा को भी कम करता है।
6. योग और मैडिटेशन आपको तनावमुक्त रखते हैं
तनाव और चिंता वजन बढ़ने के प्रमुख कारणों में से एक है, जो बदले में नींद की कमी का कारण बनता है। कोर्टिसोल नामक स्ट्रेस हार्मोन में आपकी भूख को बढ़ाने की प्रवृत्ति होती है और यह आपको अधिक खाने पर मजबूर करता है, विशेषकर ऐसे खाद्य पदार्थ जिनमें हाई कैलोरी होती हैं। यह कुछ ऐसा है जो न केवल आपके दिन की प्रोडक्टिविटी को प्रभावित करता है, बल्कि आपके वजन को भी बढ़ाता है।
सेहत /शौर्यपथ / दिवाली के बाद मिठाइयों और स्पाइसी पकवान खाने का साइड इफेक्ट्स दिखता है. वहीं, मौजूदा समय में बढ़ता वायु प्रदूषण और बदलते मौसम के कारण अस्थमा, म्यूकस बनना, साइनस, सांस लेने में होने वाली तकलीफ, खांसी-जुकाम और सांस से संबंधित दूसरी बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में एक असरदार मैजिक लंग टी जिसे आप बड़ी आसानी से घर पर ही बना सकते हैं और वह भी किचन में मौजूद बेसिक मसालों और जड़ी बूटियों के इस्तेमाल से। इस चाय की मदद से लंग्स डीटॉक्स होते हैं और कंजेशन से भी छुटकारा मिलता है।
घर में ऐसे बनाएं डीटॉक्स चाय
एक बर्तन में 2 कप पानी लें और उसे उबलने दें। इसके बाद इसमें आधा इंच अदरक, दालचीनी का छोटा टुकड़ा या एक चौथाई चम्मच दालचीनी पाउडर, थोड़ा सा गुड़, आधा चम्मच तुलसी के पत्ते, 1 चम्मच सूखा ओरिगैनो, 3 काली मिर्च, 2 इलायची कुटी हुई, एक चौथाई चम्मच सौंफ, चुटकी भर अजवाइन, एक चौथाई चम्मच जीरा, लहसुन की 1-2 कली- इन सभी साम्रगियों को उबले पानी में डालें और करीब 10 मिनट तक इन सारी चीजों को धीमी आंच पर पानी में अच्छी तरह से मिक्स होने दें। फिर गैस बंद कर दें और चाय को कप में छान लें। इस चाय का फायदा तब ही है जब आप इसे गर्म-गर्म पिएं।
धर्म संसार /शौर्यपथ प्राचीनकाल से चले आ रहे हिन्दू सनातन धर्म को श्रीकृष्ण ने एक नवीनतम रूप देकर भागवत धर्म की स्थापना की थी। इसमें वेदव्यास मुनि का भी बहुत योगदान रहा है। आओ जानते हैं कि श्रीकृष्ण के काल में कहां कहां उनकी मुख्?य रूप से स्थापना हो चली थी।
श्रीकृष्ण के जीवन में 8 अंक का अजब ही संयोग रहा है। भगवान विष्णु ने आठवें मनु वैवस्वत के मन्वंतर के अ_ाईसवें द्वापर में आठवें अवतार श्रीकृष्ण के रूप में देवकी के गर्भ से आठवें पुत्र के रूप में मथुरा के कारागर में जन्म लिया था।
उनका जन्म भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की रात्रि के सात मुहूर्त निकल गए और जब आठवां उपस्थित हुआ तभी आधी रात के समय सबसे शुभ लग्न में हुआ था। उस लग्न पर केवल शुभ ग्रहों की दृष्टि थी। रोहिणी नक्षत्र तथा अष्टमी तिथि के संयोग से जयंती नामक योग में ईसा से 3112 वर्ष पूर्व उनका जन्म हुआ। ज्योतिषियों अनुसार उस समय शून्य काल (रात 12 बजे) था।
भगवान श्रीकृष्ण वसुदेव के आठवें पुत्र थे। उनकी आठ सखियां, आठ पत्नियां, आठ मित्र और आठ शत्रु थे। गुरु संदीपनि ने कृष्ण को वेद शास्त्रों सहित 14 विद्या और 64 कलाओं का ज्ञान दिया था। इस तरह उनके जीवन में आठ अंक का बहुत संयोग है। इसी तरह प्रमुख रूप से आठ नगर में ही उनका अधिकतर जीवन संचालित हुआ है।
1.मथुरा : जहां उनका जन्म हुआ और जहां रहकर जरासंध से कई युद्ध किए।
2.गोकुल-नंदगांव : जहां उनका बचपन गुजरा और कई असुरों का वध किया।
3.वृंदावन-मधुबन : जहां उन्होंने रास रचा और दुनिया को प्रेम का पाठ पढ़ाया।
4.गोवर्धन : जहां उन्होंने पहाड़ को उठाकर नई परंपरा और त्योहार को प्रकट किया।
5.बरसाना : जहां उनकी प्रेमिका राधा रानी रहती थीं।
6.उज्जैन : मध्यप्रदेश के प्रसिद्ध तीर्थ उज्जैन में सांदीपनि आश्रम में भगवान श्रीकृष्ण के पढ़ाई की थी। इसीलिए यह स्थान भी बहुत महत्व रखता है। यहां भी श्रीकृष्ण का प्रसिद्ध मंदिर है।
7.द्वारिका : जहां उन्होंने नया नगर बसाकर अपनी नई जिंदगी की शुरुआत की थी। यहीं पर उनका विवाह हुआ और आगे का जीवन चला।
8.प्राभाष क्षेत्र : सोमनाथ के पास प्रभाष क्षेत्र जहां पर उन्होंने अपनी देह त्याग दी थी।
प्तइसके अलावा अन्य प्रमुख स्थान :
9.जगन्नाथपुरी : यहां पर उन्हें मुख्य रूप से अपने भाई और बहन के साथ पूजा जाता है।
10.श्रीनाथ मंदिर :
राजस्थान के नाथद्वारा में श्रीनाथजी का मंदिर। यहां भगवान श्रीकृष्ण को श्रीनाथ कहते हैं। यह मंदिर वैष्णव संप्रदाय के वल्लभ सम्प्रदाय के प्रमुख तीर्थ स्थानों में सर्वोपरि माना जाता है।
11.श्रीकृष्ण मठ मंदिर, उडुपी : 'उडुपी श्रीकृष्ण मंदिरÓ कर्नाटक में स्थित है। इसका निर्माण संत माधवचार्य ने 13वीं सदी में करवाया था। यह मंदिर लकड़ी और पत्थर से बना हुआ है। इस मंदिर के पास मौजूद तालाब के पानी में मंदिर का प्रतिबिंब दिखाई देता है। भक्ति के लिए ये मंदिर बेहद पवित्र माना जाता है।
12.अरुलमिगु श्री पार्थसारथी स्वामी मंदिर : 8वीं सदी में बना यह मंदिर चेन्नई में स्थित है। यहां पर भगवान श्रीविष्णु की कई आकर्षक मूर्तियां मौजूद हैं। यह मंदिर भी पूरे दक्षिण भारत में बहुत प्रसिद्ध है।
13.पंढरपुर का विठोबा मंदिर : पंढरपुर का विठोबा मंदिर पश्चिमी भारत के दक्षिणी महाराष्ट्र राज्य में भीमा नदी के तट पर शोलापुर नगर के पश्चिम में स्थित है। इस मंदिर में विठोबा के रूप में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है। यहां भक्तराज पुंडलिक का स्मारक बना हुआ है।
धर्म संसार / शौर्यपथ / भाई मनी सिंह ... गुरु गोविंद सिंह के बाल-सखा और श्री दरबार साहिब जी के ग्रंथी थे
उन्होंने शहर के प्रमुख सिक्खों से सलाह लेकर श्रीदरबार साहिब का प्रबंध काफी सुधारा था
यह उस समय की बात है जब श्री अमृतसर साहिब में दीपावली का मेला मुगल सरकार ने काफी सालों से बंद करवा रखा था
भाई साहिब ने सूबा लाहौर से दीपावली मेला लगाने की इजाजत मांगी, सूबेदार ने आज्ञा इस शर्त पर दी गई कि मेले के बाद भाई मनी सिंह पांच हजार स्वर्णमुद्राएँ सरकार को देंगे
यह रकम काफी अधिक थी पर भाई मनी सिंह को विश्वास था कि वह श्रद्धालुओं के बड़ी संख्या में आने से जुटा ली जाएगी
मेला दस दिन लगना था, इसके लिए भाई साहिब जी ने खालसा को संदेश भेजे, पर मुगलों ने कुछ और ही सोच रखा था
जकारिया खान के नेतृत्व में बहुत भारी फौज भेज दी गई
मुगल सैनिक श्रद्धालुओं का कत्ले आम करने के लिए हरमंदिर साहेब के आस-पास छुपे हुए थे
भाई मनी सिंह जी को भी इस योजना का पता लग गया, उन्होंने संदेश भेजे की श्रद्धालु यहां न एकत्र हो और न आएं, तब तक वहाँ पर एकत्र हो चुके श्रद्धालुओं को भी किसी तरह बाहर निकाल कर रवाना कर दिया गया
दीपावली के बाद जब मुगलों ने पैसे मांगे तो भाई मनी सिंह ने स्पष्ट रूप से कह दिया कि खालसा आपकी चालों में नहीं आएगा, एक तरफ आपके फौजी दस्ते श्रद्धालुओं पर घात लगाकर खत्म करने के लिए तैयारी करें और दूसरी तरफ हम आपको पैसे दें
यह सम्भव नहीं है
भाई मनी सिंह को गिरफ्तार कर दरबार ले जाया गया
मौलवियों से भाई मनी सिंह की सजा तय करने को कहा गया, उन्होंने इस्लाम के हिसाब से काफिर मनी सिंह की बोटी बोटी काटना उचित बताया
वहां उनसे कहा गया कि मुसलमान हो जाओ, नहीं तो आपको बंद-बंद (हड्डी के प्रत्येक जोड़ से) काट दिया जाएगा,
मगर भाई साहिब ने मुसलमान बनने से साफ इंकार कर दिया
जल्लाद ने भाई साहिब से पूछा आँखों पर पट्टी बांधना चाहते हो ?
भाई मनी सिंह ने कहा, इसकी आवश्यकता नहीं है तुम अपना काम करो
भाई मनी सिंह का पोर पोर उंगलियों से शुरू कर काटा गया फिर उनके बच्चों का भी कत्ल कर लाहौर की बादशाही मस्जिद के आगे टाँग दिया गया ...
भाई मनी सिंह के कहे अंतिम शब्द थे "यह यज्ञ व्यर्थ नहीं जाएगा, इस मुग़ल सेनाध्यक्ष के बाद हो सकता है और क्रूर सेनाध्यक्ष आए लेकिन इस धरती पर निस्संदेह ऐसी सुबह होगी जब हम अपने त्यौहार बिना डर के पूरे गौरव से मनाएँगे ”
आज हम दीपावली मनाते है तो एक बार उन शहीदों को भी नमन करें जिन्होंने दीपावली की कीमत अपनी और परिवार की बलि देकर चुकाई है
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
