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खाना खजाना / शौर्यपथ / सर्दी का मौसम हो या बरसात का, भुट्टा दोनों ही मौसम में सबका पसंदीदा होता है। सर्दियों के मौसम में आग तापते हुए, भुट्टे का आनंद लेना भला कौन नहीं चाहता। लेकिन इस साल सर्दियों में कुछ अलग ट्राई करें, हाथों में भुना हुआ भुट्टा नहीं बल्कि भुट्टे के कबाब को जगह दीजिए। आइए जानते हैं आपकी सर्द शाम को खूबसूरत बनाने के लिए कैसे बनाए जाते हैं भुट्टे के कबाब।
भुट्टे के कबाब बनाने के लिए सामग्री-
-भुट्टे- 2
-उबले हुए आलू- 2
-ब्रेड- 4
-बारीक कटा हुआ प्याज- 1
-बारीक कटे हुए पुदीना पत्ते
-मक्खन- 1 चम्मच
-गरम मसाला- 1 चम्मच
-काली मिर्च पाउडर- 1/2 चम्मच
-हरी मिर्ची- 2 बारीक कटी हुई
-नमक- स्वादानुसार
-तेल- 2 चम्मच
भुट्टे के कबाब बनाने का तरीका-
भुट्टे के कबाब बनाने के लिए सबसे पहले दरदरे पीसे हुए भुट्टे और उबले हुए आलू को छीलकर एक बाउल में डालकर उसे अच्छे से मिला दें। अब ब्रेड को भी बारीक तोड़कर बाउल के मिश्रण में मिला दें। अब इसमें बारीक कटा प्याज, हरी मिर्ची, पुदीना पत्ते, नमक और बताई गई सभी सामग्री डालकर अच्छे से मिला लें। अब ओवन को 180 डिग्री पर preheat कर लें। कबाब के मिश्रण को आप सीख पर अच्छी तरह से लगाने के बाद ब्रश से इस पर मक्खन भी लगाएं।
अब पहले से preheat ओवन में 15-20 मिनट के लिए इन कबाब को रख दें। जब ये गोल्डन रंग में bake होने लगे तो आप इसे पलट दें। कबाब को हर 5-6 मिनट बाद पलटती रहें इससे हर तरफ से कबाब अच्छी तरह से bake होने के साथ क्रिस्पी भी बनेंगें। भुट्टे के कबाब बनकर तैयार हैं, गर्मागर्म सर्व करें।
शिक्षा /शौर्यपथ /आचार्य चाणक्य एक कुशल अर्थशास्त्री और राजनीतिक के साथ एक महान शिक्षाविद भी थे। चाणक्य ने नीति शास्त्र में जीवन से जुड़ी कई समस्याओं का हल बताया है। चाणक्य कहते हैं कि व्यक्ति को दोस्ती के समय भी सावधानी बरतनी चाहिए। बिना सोचे-समझे व्यक्ति से दोस्ती करने वाले व्यक्ति को जीवन में धोखा मिलता है। चाणक्य ने नीति शास्त्र में सच्चे मित्र की पहचान के गुण बताए हैं। जानिए कैसे करते हैं सच्चे मित्र की पहचान-
1.सही मार्ग दिखाएं- चाणक्य कहते हैं कि आज के समय में कई मित्र मिलते हैं। लेकिन सच्चा मित्र बहुत मुश्किल से मिलता है। चाणक्य के अनुसार, सच्चा मित्र वही होता है जो सही मार्ग दिखाता है। हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। चाणक्य का मानना है कि गलत कामों पर नहीं टोकने वाला मित्र दुश्मन के समान होता है।
2. दूसरों की पीड़ा में दुखी होने वाला- चाणक्य कहते हैं कि दूसरों का दुख समझने वाले व्यक्ति को समाज में हमेशा सम्मान मिलता है। नीति शास्त्र के अनुसार, दूसरों के दुख में साथ देने वाला व्यक्ति अपने मुश्किल समय में कभी अकेला नहीं होता है। व्यक्ति को हमेशा विनम्र स्वभाव के साथ दूसरों से मिलना चाहिए।
3. घमंड नहीं करने वाला- चाणक्य कहते हैं कि जो व्यक्ति अपने पद और धन पर घमंड करता है, वह कभी सुखी नहीं हो पाता है। ऐसे व्यक्ति को समाज में कभी सम्मान नहीं मिलता है। पद और पैसा अस्थाई होते हैं। ऐसे में जब व्यक्ति से पद और पैसा छिन जाता है तो, वह अकेला रह जाता है। चाणक्य कहते हैं कि सच्चा मित्र भी कभी किसी बात पर घमंड नहीं करता है।
4. सीखने के लिए तत्पर- चाणक्य कहते हैं कि व्यक्ति को हमेशा कुछ न कुछ नया सीखते रहना चाहिए। नीति शास्त्र के अनुसार, जो व्यक्ति हर किसी से कुछ न कुछ सीखने के लिए तैयार रहते हैं, ऐसे व्यक्ति कुशल होते हैं। इसी तरह सच्चा मित्र भी अपने मित्र से कोई भी नई चीज सीखने में कतराता नहीं है।
धर्म संसार / शौर्यपथ /सूर्य भगवान की उपासना हर दिन की जाती है। लेकिन रविवार के दिन सूर्य उपासना का विशेष महत्व है। मान्यता है कि रविवार के दिन सूर्य को जल चढ़ाने, मंत्र का जाप और सूर्य नमस्कार करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। सूर्यदेव को प्रसन्न करने के लिए कई मंत्र हैं। इन मंत्रों में से 'राष्ट्रवर्द्धन' सूक्त से लिया गया सूर्यदेव का एक दुर्लभ मंत्र है। मान्यता है कि रविवार के दिन इस दुर्लभ मंत्र के जाप से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
सूर्यदेव का दुलर्भ मंत्र-
'उदसौ सूर्यो अगादुदिदं मामकं वच:।
यथाहं शत्रुहोऽसान्यसपत्न: सपत्नहा।।
सपत्नक्षयणो वृषाभिराष्ट्रो विष सहि:।
यथाहभेषां वीराणां विराजानि जनस्य च।।'
श्लोक का अर्थ है कि सूर्य ऊपर चला गया है, मेरा यह मंत्र भी ऊपर गया है। ताकि मैं शत्रुओं का विनाश करने वाला बन सकूं। प्रजाओं की इच्छाओं को पूरा करने वाला, देश को सामर्थ्य प्राप्त कराने वाला और जीतने वाला बन जाऊं। मैं शत्र पक्ष के वीरों और अपने-पराएं लोगों का शासक बन सकूं।
रविवार को इन उपायों से मिलता है शुभ फल-
रविवार को कुछ उपायों को करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि ऐसा करने से भगवान सूर्य प्रसन्न होते हैं और अपनी कृपा बरसाते हैं। सूर्य को ग्रहों का राजा कहा जाता है। सूर्य ऊर्जा और आत्मा का कारक है। कहते हैं कि जिस व्यक्ति की कुंडली में सूर्य मजबूत स्थिति में होते हैं, वह व्यक्ति राजा के समान जिंदगी बिताता है। ऐसे व्यक्ति को जीवन में उच्च पद और मान-सम्मान की प्राप्ति होती है।
1. केसरिया रंग के वस्त्र पहनें।
2. सूर्यदेव की उपासना के साथ संभव हो तो रविवार व्रत करें।
3. सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए रविवार को गुड़, गेहूं, तांबा आदि का दान करें।
4. एक मुखी रूद्राक्ष धारण करें।
5. गाय को रोटी खिलाएं।
वास्तु शास्त्र / शौयापथ / नए साल को आने में अब कुछ ही दिन बाकी है। सभी को 2021 का बेसब्री से इंतजार है। नए साल को खास बनाने के लिए लोगों ने अभी से तैयारी शुरु कर दी है। लोगों ने नए साल का स्वागत करने के लिए अपने घरों का सजाना भी शुरू कर दिया है। अगर आप भी नए साल के स्वागत के लिए घर को डेकोरेट करने की प्लानिंग कर रहे हैं तो वास्तु शास्त्र का खास ख्याल रखें। कहते हैं कि ऐसा करने से नए साल की शुरुआत न केवल अच्छी होती है बल्किआर्थिक रूप से भी लाभकारी होती है। जानिए नए साल के स्वागत में घर को किस तरह से सजाना चाहिए-
1. इन रंगों का करें चुनाव- नए साल के स्वागत के लिए सबसे पहले अपने घर की सफाई करें। घर की सफाई के दौरान कोनों और किनारों को अच्छे से साफ करें। अगर आपने बहुत समय से कलर नहीं करवाया है तो दीवारों को पेंट भी करें। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में ब्राइट कलर का पेंट कराने से सकारात्मक ऊर्जा आती है।
2. मेनगेट को ऐसे सजाएं- नए साल के स्वागत के लिए मेनगेट को अच्छे से सजाना चाहिए। वास्तु शास्त्र के अनुसार, मेनगेट के सामने गड्ढा या गंदगी होना अशुभ माना जाता है। ऐसे में घर के दरवाजे पर कभी भी डस्टबिन भी नहीं करनी चाहिए।
3. रुकी हुई घड़ी- अगर आपके घर में बंद या खराब घड़ी है तो फौरन ठीक करा लेना चाहिए। कहते हैं कि घर में बंद घड़ी रखना अशुभ होता है। इसके साथ ही टूटे हुए इलेक्ट्रॉनिक सामान को भी नए साल के आने से पहले घर से बाहर कर देना चाहिए।
4. पौधों को लगाएं- घर की साज-सज्जा के लिए पौधों को भी शामिल करें। वास्तु शास्त्र के अनुसार, ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है। ध्यान रहे कि घर के आंगन में गुल्लर का पौधा नहीं लगाना चाहिए।
5. टूटे बर्तनों को निकाल दें- नए साल का स्वागत करने से पहले रसोई से टूटे बर्तनों को निकाल देना चाहिए। कहते हैं कि रसोईघर में टूटे बर्तन रखने से घर में बरकत नहीं आती है।
शौर्यपथ / सर्दियों का मौसम सेहत बनाने के लिहाज से सबसे अच्छा माना जाता है क्योंकि तापमान में गिरावट आने से भोजन में संचित उष्मा हमारे शरीर को गर्म रखती है। इसका अर्थ यह है कि ठंड के मौसम में खाना आसानी से पच जाता है। खाने के अलावा अगर कुछ बातों पर ध्यान दिया जाए, तो हम ठंड के मौसम में न सिर्फ सेहतमंद रह सकते हैं बल्कि इस मौसम में हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है।
संतुलित भोजन करें
कार्बोहाइड्रेट शरीर को ऊर्जा देते हैं, पर सेहत के लिए यही काफी नहीं होते। शरीर को वसा, प्रोटीन, फाइबर और तरल पदार्थों की भी उतनी ही जरूरत होती है। आमतौर पर सर्दियों में तला-भुना, डिब्बाबंद व जंक फूडखाने की इच्छा बढ़ती है, इस कारण कार्बोहाइड्रेट का सेवन बढ़ जाता है। दूसरा, शारीरिक सक्रियता घटने से अतिरिक्त कैलोरी की खपत नहीं हो पाती। इससे शरीर में तेजी से वसा जमने लगती है। इस मौसम में मौसमी फल व सब्जियों पर जोर दें। भोजन के साथ हरी सब्जियां, सलाद व सूप लें। इससे शरीर को पर्याप्त पोषक तत्व व फाइबर मिलेगा। शरीर में पानी की कमी न होने दें।
धूप सेंकना न भूलें
क्या पर्याप्त आराम के बावजूद आपको थकान होती है? या हड्डियों व मांसपेशियों में दर्द रहता है? अगर आपका जवाब हां है, तो संभव है कि आपको विटामिन डी की खुराक की जरुरत है। विशेषज्ञों के अनुसार, 100 में से 70 लोग विटामिन डी की कमी से जूझ रहे हैं। सर्दियों का मौसम इस कमी को पूरा करने का अच्छा अवसर है। दोपहर के आसपास त्वचा पर धूप लगना विटामिनडी के लिहाज से सबसे बेहतर माना जाता है। ।दोपहर में सोना एक ओर जहां विटामिन डी से दूर करता है, वहीं रात में नींद का पैटर्न भी डिस्टर्ब हो जाता है। दोपहर में कुछ देर धूप में जरूर बैठना चाहिए।
व्यायाम करें
सर्दियों में हर रोज व्यायाम करने की आदत को न छोड़ें। नियमित व्यायाम करना शरीर में खुशी का एहसास कराने वाले हार्मोन का स्राव करता है। अवसाद में कमी लाता है। यूं भी सर्दियों में शारीरिक सक्रियता घटने से शरीर का वजन बढऩे की आशंका बढ़ जाती है। व्यायाम करना शरीर के लचीलेपल को भी बनाए रखता है।
घर के भीतर न सुखाएं कपड़े
विशेषज्ञों के अनुसार, घर के भीतर गीले कपड़े सुखाने से घर में एसलडीहाइडेट और बेंजीन कण हवा में फैलते हैं, जो त्वचा को नुकसान पहुंचाते हैं। अस्थमा से परेशान लोगों की समस्या भी इससे बढ़ती है। यदि अस्थमा की परेशानी नहीं है, तो भी गीले कपड़ों को भीतर सुखाना सिरदर्द, गले में खराश और आंखों में जलन पैदा कर सकता है। अगर घर के भीतर गीले कपड़े सुखाते हैं, तो खिड़कियां खुली रखें।
अधिक क्रीम न लगाएं
सर्दियों की ठंडी हवा, त्वचा को शुष्क बना देती है। त्वचा को नमी की ज्यादा जरूरत होती है, पर इसका मतलब यह नहीं कि आप अनावश्यक क्रीम व लोशन लगाएं। अधिक क्रीम लगाने से त्वचा पर धूल-मिट्टी के देर तक जमे रहने की आशंका बढ़ती है। मृत त्वचा चेहरे पर ही रहती है, जिससे मुहांसे व त्वचा की एलर्जीकी आशंका बढ़ जाती है।
सेहत / शौर्यपथ / आयुर्वेद के अनुसार आपके खानपान के साथ इसका समय भी महत्वपूर्ण है।खाने-पीने का सही समय आपकी सही सेहत में एक अहम भूमिका निभाता है। गलत समय पर खाना खाने से आपके शरीर को पौष्टिक तत्व का फायदा होने की जगह नुकसान ही झेलना पड़ सकता है इसलिए सही वक्त पर सही डाइट आपके अच्छे सेहत के लिए बहुत जरूरी है। हमारा शरीर सुबह के समय आसानी से खाना पचा पाता है, सूरज के डूबने के साथ ही हमारी पाचन क्रिया धीमी पड़ जाती है, इसलिए हमें अपना डाइट चार्ट उसी अनुरूप बनाना चाहिए।
नाश्ते का समय
सुबह 7 बजे से 8 बजे तक नाश्ते का सबसे अच्छा समय होता है। सुबह इस बात का भी ध्यान दें कि उठने के आधे घंटे के अंदर कुछ जरूर खा लें। ज्यादा देर तक भूखे रहने से गैस की समस्या हो सकती है। सुबह उठते के साथ पहले एक ग्लास गुनगुना पानी भी जरूर पीये। इससे आपका पेट भी साफ रहता है और चेहरे पर चमक भी बनी रहती है।
दोपहर का खाना
दोपहर का खाना 12 बजे से 2 बजे के बीच खाएं। नाश्ते और दोपहर के खाने के बीच कम-से-कम 4 घंटे का अंतराल होना चाहिए।
रात के खाने का समय
रात में 7 से 9 बजे के बीच खाना जरूर खा लें। इस बात का भी ध्यान रहे कि रात में थोड़ा लाइट ही खाना खाए। रात को हमारा शरीर तेजी से खाना पचा नहीं पाता है। इसके साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि रात का खाना सोने से 3 घंटे पहले ही खा लें।
सेहत / शौर्यपथ / आप वजन घटाने के लिए कितनी ही कोशिश करते हैं लेकिन कभी-कभी ऐसा होता है कि हर तरह की सावधानी और नियम फॉलो करने के बाद भी वजन कम होने की बजाय बढ़ता जाता है। ऐसे में बार-बार या हर दिन वजन मापना सम्भव भी नहीं है इसलिए आपको कुछ ऐसी बातों पर नजर जरूर रखनी चाहिए, जिससे कि आपको पता चले कि आपका वजन वाकई कम हो रहा है क्योंकि कई बार जिम या होम वर्कआउट के बाद हम ज्यादा डाइट ले लेते हैं, जिससे वजन बढऩे लगता है। समय पर पता चलने पर हम यह समझ सकते हैं कि वजन कम करने के प्रयास सही दिशा में जा रहे हैं। आइए, जानते हैं ऐसे संकेत जिनसे पता चलता है कि आपका वजन कम हो रहा है-
बार-बार टॉयलेट आना
आपको अगर बार-बार टॉयलेट आता है और आपको कोई बीमारी नहीं है, तो आपको समझ लेना चाहिए कि आपका वजन पहले की तुलना में धीरे-धीरे कम हो रहा है। हालांकि, इस बात की सावधानी भी रखें कि बिना किसी खास प्रयास के कहीं आपका वजन तेजी से तो कम नहीं हो रहा है।
पसीना आना
आपको अगर वर्कआउट करते समय ज्यादा पसीना आ रहा है, तो समझ लें कि वजन घटाने का आपका प्रयास सही दिशा में जा रहा है। पसीना आने से भी वजन कम होने के संकेत मिलते हैं।
चलने में स्पीड बढऩा
आमतौर पर मोटे लोगों की तुलना में सामान्य वजन वाले लोग ज्यादा तेजी से चलते हैं। ऐसे में इस बात को याद रखें कि चलते हुए अगर आपकी स्पीड पहले के मुकाबले बढ़ गई है, तो आपका वजन कम हो रहा है क्योंकि आपके घुटनों पर कम वजन पड़ रहा है।
प्यास ज्यादा और भूख कम
वजन कम होने पर गला बार-बार सूखने लगता है। ऐसे में आपको बार-बार प्यास लगती है। इसके अलावा हल्कापन होने की वजह से पहले की अपेक्षा आपकी भूख में भी कमी आती है। आपकी डाइट में कुछ कमी आती है।
कपड़ों की फिटिंग में बदलाव
सबसे आसान तरीका जिससे ज्यादातर लोगों को पता लगता है कि उनका वजन बढ़ा है या कम हो रहा है। जाहिर है कि अगर आपका वजन कम हो रहा है, तो आपके कपड़े आपको पहले के मुकाबले कुछ ढीले होंगे।
जिले में 2 लाख 19 हजार 271 हितग्राहियों को 90 करोड़ 11 लाख 86 हजार की मिली सहायता
राजनांदगांव / शौर्यपथ / शासन द्वारा दिव्यांगजन, वृद्धजन एवं जरूरतमंदों को विभिन्न योजनाओं के तहत मदद की जा रही है। समाज कल्याण विभाग द्वारा वृद्धजन, दिव्यांगजन एवं विधवा तथा जरूरतमंद लोगों के लिए संचालित योजनाओं के तहत जिले में बड़ी संख्या में गरीब एवं जरूरतमंद लाभान्वित हुए हैं। समाज कल्याण विभाग द्वारा विभिन्न योजनाओं के तहत वर्ष 2019-20 में 49 करोड़ 90 लाख 35 हजार रूपए की राशि 1 लाख 8 हजार 149 हितग्राहियों को तथा वर्ष 2020-21 के नवम्बर के अंत तक 40 करोड़ 21 लाख 51 हजार की राशि 1 लाख 11 हजार 122 हितग्राहियों को प्रदान की गई है।
कलेक्टर श्री टोपेश्वर वर्मा के निर्देशन में समाज कल्याण विभाग द्वारा सफलतापूर्वक कार्य किया जा रहा है। उप संचालक समाज कल्याण विभाग श्री बीएल ठाकुर ने बताया कि विगत दो वर्षों में जिले में समाज कल्याण विभाग से विभिन्न योजनाओं के तहत लोगों को सहायता मिली है। ज्ञातव्य है कि वर्ष 2019-20 में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन के अंतर्गत 31 हजार 983 हितग्राहियों को 10 करोड़ 13 लाख 30 हजार रूपए की राशि, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना के तहत 13 हजार 221 हितग्राहियों को 5 करोड़ 7 लाख 56 हजार रूपए की राशि, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन के तहत 2 हजार 5 हितग्राहियों को 86 लाख 65 हजार रूपए की राशि, राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना के तहत 619 हितग्राहियों को 1 करोड़ 23 लाख 80 हजार रूपए की राशि, सामाजिक सुरक्षा पेंशन के तहत 19 हजार 627 हितग्राहियों को 16 करोड़ 87 लाख 76 हजार रूपए, सुखद सहारा पेंशन योजना के तहत 12 हजार 474 हितग्राहियों को 5 करोड़ 29 लाख 32 हजार रूपए की राशि, मुख्यमंत्री पेंशन योजना के तहत 27 हजार 12 हितग्राहियों को 9 करोड़ 86 लाख 70 हजार रूपए की सहायता राशि प्रदान की गई है। वहीं दिव्यांग विवाह प्रोत्साहन योजना के तहत 45 हितग्राहियों को 27 लाख रूपए, दिव्यांग छात्रवृत्ति योजना के तहत 903 हितग्राहियों को 23 लाख रूपए, सिविल सेवा प्रोत्साहन योजना के तहत 1 हितग्राही को 20 हजार रूपए, उच्च शिक्षा प्रोत्साहन योजना के तहत 6 हितग्राहियों को 31 हजार रूपए, कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण प्रदाय योजना के तहत 253 हितग्राहियों को 4 लाख 75 हजार रूपए की राशि की मदद की गई है।
वर्ष 2020-21 में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन के अंतर्गत 32 हजार 544 हितग्राहियों को 9 करोड़ 9 लाख 99 हजार रूपए की राशि, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना के तहत 13 हजार 599 हितग्राहियों को 4 करोड़ 66 लाख 42 हजार रूपए की राशि, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन के तहत 2 हजार 11 हितग्राहियों को 73 लाख 66 हजार रूपए की राशि, राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना के तहत 403 हितग्राहियों को 80 लाख 60 हजार रूपए की राशि, सामाजिक सुरक्षा पेंशन के तहत 20 हजार 93 हितग्राहियों को 10 करोड़ 92 लाख 97 हजार रूपए, सुखद सहारा पेंशन योजना के तहत 12 हजार 864 हितग्राहियों को 4 करोड़ 75 लाख 82 हजार रूपए की राशि, मुख्यमंत्री पेंशन योजना के तहत 29 हजार 357 हितग्राहियों को 8 करोड़ 96 लाख 98 हजार रूपए की सहायता राशि प्रदान की गई है। वहीं दिव्यांग विवाह प्रोत्साहन योजना के तहत 39 हितग्राहियों को 25 लाख रूपए, उच्च शिक्षा प्रोत्साहन योजना के तहत 2 हितग्राहियों को 7 हजार रूपए की राशि की मदद की गई है।
भिलाई / शौर्यपथ / भिलाई इस्पात संयंत्र में आयोजित शिरोमणि पुरस्कार में पॅावर जोन से उत्कृष्ट कार्य प्रदर्षित करने वाले अधिकारियों तथा कर्मचारियों को पाली शिरोमणि एवंं कर्म शिरोमणि पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
इस संदर्भ में आयोजित कार्यक्रम में अतिउत्तम कार्य प्रदर्शन के लिए पाली शिरोमणि पुरस्कार से सम्मनित दिलीप कुमार, वरि. प्रबंधक, पी.ई.एम. एवं तरूण कुमार दत्ता, सहा. महाप्रबंधक, पी.बी.एस. एवं कर्म शिरोमणि पुरस्कार से सम्मानित शेषलाल जुरेशिया, चार्जमेन कम सीनि. तकनीशियन, पी.ई.एम., तिलकदास ठाकुर, सीनि. तकनीशियन;डद्धपी.बी.एस., सुरेश कुमार साहू,चार्जमेन कम सीनि. आपरेटर पी.बी.एस., आर.पी. सिंह,सीनि. तकनीशियन, पी.ई.एम., भूषण लाल गॅंवरे, सीनि. तकनीशियन, पी.बी.एस., हेमन्त कुमार शर्मा, सीनि. तकनीशियन, पी.बी.एस. एवंश्रीविजय कुमारगुप्ता,सीनि. तकनीशियन, पी.ई.एम. विभाग को सम्मानित किया गया।। कोविड-19 महामारी के मद्देनजर समारोह के दौरान पुरस्कारों के संचालन और वितरण में सामाजिक दूरी के मानदंडों का पालन किया गया। कार्यक्रम में एच.के. साहू, महाप्रबंधक प्रभारी, पी.ई.एम. एवं के.सी. त्रिपाठी, महाप्रबंधक, पी.बी.एस. पॅावर जोन ने पुरस्कार विजेताओं को प्रवीणता प्रमाण पत्र, स्मुति चिन्ह और कर्मचारी के जीवनसाथी के लिए प्रशंसा पत्र प्रदान किया। कार्यक्रम में उपस्थित एस.के. सारंगी, महाप्रबंधक, पी.बी.एस.,पी कृष्णमोहन, महाप्रबंधक, पी.बी.एस., विद्यासागर देवंढ्ढगन, महाप्रबंधक, पी.बी.एस. राहुल निगम, महाप्रबंधक, पी.ई.एम., पी.एस. खोबरागड़े, महाप्रबंधक, पी.ई.एम., महिन्द भगत, उप महाप्रबंधक, पी.ई.एम. ने पुरस्कार विजेताओं के कार्यस्थल में योगदान एवं उल्लेखनीय उपलब्धियों को सराहा। इस कार्यक्रम का संचालन कार्मिक कार्यालय शक्ति एवं विद्युत द्वारा किया गया।
सेहत /शौर्यपथ / अनहेल्दी लाइफस्टाइल और जंक फूड के सेवन का सीधा असर आपके पेट यानी की आपकी पाचन शक्ति पर पड़ता है। खराब खानपान और व्यायाम न होने के कारण पाचन से जुड़ी समस्या परेशान करती है। अगर आप भी इन्हीं समस्याओं से परेशान हैं, तो आपको अपनी दिनचर्या में योग को शामिल करना चाहिए। जी हां योगासन की मदद से आप पाचन संबंधी परेशानियों से राहत पा सकते है। आइए जानते है कौन से योगासन है जिनका आपको नियमित अभ्यास करना चाहिए....
कपालभाति प्राणायाम
अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा रखते हुए पद्मासन, सुखासन या वज्रासन में बैठ जाएं। अपने हाथों को घुटनों पर रखें और एक लंबी गहरी सांस अंदर लें। सांस छोड़ते हुए अपने पेट को अंदर की ओर खींचें। पेट की मांसपेशियों के सिकुड़ने को आप अपने पेट पर हाथ रखकर महसूस भी कर सकते हैं। नाभि को अंदर की ओर खींचें। जैसे ही आप पेट की मांसपेशियों को ढीला छोड़ते हैं, सांस अपने आप ही आपके फेफड़ों में पहुंच जाती है। कपालभाती 5 मिनट से शुरू करके 10 और 30 मिनट तक किया जा सकता है। कपालभाती प्राणायाम करते समय जोर से सांस को बाहर छोड़ें।यह पाचन क्रिया को अच्छा करता है और पोषक तत्वों को बढ़ाता है। यह वजन कम करने में मदद करता है।नाड़ियों का शुद्धिकरण करता है। रक्त शुद्ध होता है और चेहरे पर चमक बढ़ाता है।
मत्स्यासन
मत्स्य का अर्थ है- मछली। इस आसन में शरीर का आकार मछली जैसा बनता है, अत: यह मत्स्यासन कहलाता है। यह आसन छाती को चौड़ा कर उसे स्वस्थ बनाए रखने में सक्षम है। सावधानी : छाती व गले में अत्यधिक दर्द या अन्य कोई रोग होने की स्थिति में यह आसन न करें। बड़ी सावधानी से यह आसन करना चाहिए, शीघ्रता से गर्दन में मोच आ जाने का भय रहता है, क्योंकि धड़ को बिल्कुल ऊपर कर देना होता है। यह आसन एक मिनट से दो मिनट तक किया जा सकता है। इससे आंखों की रोशनी बढ़ती है। गला साफ रहता है तथा छाती और पेट के रोग दूर होते हैं। रक्ताभिसरण की गति बढ़ती है, जिससे चर्म रोग नहीं होता। दमे के रोगियों को इससे लाभ मिलता है। पेट की चर्बी घटती है। खांसी दूर होती है।
धनुरासन
मकरासन की अवस्था में पेट के बल लेट जाएँ। फिर दोनों पैरों को आपस में सटाते हुए हाथों को कमर से सटाएँ। ठोड़ी भूमि पर रखें। एड़ी-पंजे और घुटने मिले हुए हों। कोहनियाँ कमर से सटी हुई और हथेलियाँ ऊपर की ओर रखें।अब टाँगों को घुटनों से मोड़ें। फिर दोनों हाथों से पैरों को टखनों के पास से पकड़ें। हाथों और पैरों को खींचते हुए घुटने भी ऊपर उठाएँ। जितना हो सके उतना सिर पीछे की ओर ले जाएँ। प्रयास कीजिए कि पूरे शरीर का बोझ नाभिप्रदेश के ऊपर ही रहे। पैर के तलवे और सिर समान रूप से सीध में रहें। कुम्भक करके इस स्थिति में 30-40 सेकंड तक रहें।वापस आने के लिए पहले ठोड़ी को भूमि पर टिकाएँ, फिर हाथों को बाद में धीरे-धीरे पैरों को भूमि पर लाते हुए पुन: मकरासन की स्थिति में लेट जाएँ और पूरक करें। श्वास-प्रश्वास के सामान्य होने पर दूसरी बार करें। इस प्रकार 3-4 बार करने से इसका अभ्यास बढ़ता है।
धनुरासन से पेट की चरबी कम होती है। इससे सभी आंतरिक अंगों, माँसपेशियों और जोड़ों का व्यायाम हो जाता है। गले के तमाम रोग नष्ट होते हैं। पाचनशक्ति बढ़ती है। श्वास की क्रिया व्यवस्थित चलती है। मेरुदंड को लचीला एवं स्वस्थ बनाता है। सर्वाइकल, स्पोंडोलाइटिस, कमर दर्द एवं उदर रोगों में लाभकारी आसन है। स्त्रियों की मासिक धर्म सम्बधी विकृतियाँ दूर करता है। मूत्र-विकारों को दूर कर गुर्दों को पुष्ट बनाता है।
सेहत / शौर्यपथ / सर्दियों के आते ही सिंघाड़ा मिलना शुरू हो जाता है। कई लोगों को ये खूब पसंद भी आता है। इसे अंग्रेजी में वाटप चेस्टनट कहा जाता है। सिंघाड़ा खाने में जितना स्वादिष्ट है उतना ही इसके फायदे अनेक है जी हा स्वास्थ्य के लिहाज से ये काफी फायदेमंद होता है। वहीं अगर आप इसका नियमित सेवन करते है तो आपको कई बीमारियों से सुरक्षा मिलती हैं। तो आइए बिना देरी किए जानते हैं सिंघाड़े के फायदो के बारे में.......
ये बुरे कोलेस्ट्रॉल को कम करता है। इसलिए इसे अपनी डाइट में जरूर शामिल करें।
सांस संबंधी परेशानियों से राहत पाने के लिए सिंघाड़ा बहुत फायदेमंद होता है। अस्थमा के मरीजों के लिए सिंघाड़ा बहुत लाभकारी होता है। सिंघाड़े को नियमित रूप से खाने से सांस संबधी समस्याओं से भी राहत मिलती है।
मेटाबॉलिज्म को स्ट्रोंग करने के लिए सिंघाड़ा का सेवन लाभकारी होता है। ये फल वजन को नियंत्रण में रखने में भी सहायक होता है। अगर आप अपने वजन को कम करना चाहते है, तो सिंघाड़े को अपनी डाइट में जरूर शामिल करें।
बवासीर से जो लोग परेशान होते है उनके लिए भी सिंघाड़े का सेवन काफी लाभकारी होता है। ये इस मुश्किल समस्या से निजात दिलाने में कारगर होता है।
सिंघाड़े में कैल्शियम भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसके सेवन से
हड्डियां और दांत स्ट्रोंग होते है। साथ ही यह आंखों के लिए भी फायदेमंद है।
धर्म संसार / शौर्यपथ / फिर अभिमन्यु चक्रव्यूह का भेदन करने लगता है और अंदर घुसता ही जाता है कि परंतु जयद्रथ आकर भीम और अन्य पांडवों को बीच में ही रोककर चक्रव्यूह में घुसने से रोक देता है। अभिमन्यु चक्रव्यूह भेदने रथ पर सवार होकर निकल जाता है। प्रारंभ में यही सोचा गया था कि अभिमन्यु व्यूह को तोड़ेगा और उसके साथ अन्य योद्धा भी उसके पीछे से चक्रव्यूह में अंदर घुस जाएंगे। लेकिन जैसे ही अभिमन्यु घुसा जयद्रथ के कहने पर व्यूह फिर से बदला और पहली कतार पहले से ज्यादा मजबूत हो गई तो पीछे के योद्धा, भीम, सात्यकि, नकुल-सहदेव कोई भी अंदर घुस ही नहीं पाए। सभी को जयद्रथ ने रोक लिया। युद्ध में शामिल योद्धाओं में अभिमन्यु के स्तर के धनुर्धर दो-चार ही थे यानी थोड़े ही समय में अभिमन्यु चक्रव्यूह के और अंदर घुसता तो चला गया, लेकिन अकेला, नितांत अकेला। उसके पीछे कोई नहीं आया।
उधर, अर्जुन सुशर्मा से युद्ध करते हुए बहूत दूर निकल जाते हैं।
जैसे-जैसे अभिमन्यु चक्रव्यूह के सेंटर में पहुंचते गए, वैसे-वैसे वहां खड़े योद्धाओं का घनत्व और योद्धाओं का कौशल उन्हें बढ़ा हुआ मिला, क्योंकि वे सभी योद्धा युद्ध नहीं कर रहे थे बस खड़े थे जबकि अभिमन्यु युद्ध करता हुआ सेंटर में पहुंचता है। द्रोर्णाचार्य अभिमन्यु की तारीफ करते हैं कि यह बहादुर योद्धा है जिसने अकेले ही चक्रव्यूह को भेद दिया और महारथियों की तरह लड़ रहा है।
अभिमन्यु केंद्र में पहुंचकर द्रोणाचार्य, मद्र नरेश शल्य, कुलगुरु कृपाचार्य, अंगराज कर्ण, द्रोणपुत्र अश्वत्थामा, मामाश्री शकुनि, दु:शासन, दुर्योधन, कृतवर्मा, जयद्रथ आदि से युद्ध करके सभी को अकेले ही घायल कर देता है। दुर्योधन यह देखकर द्रोण सहित सभी से कहता है कि इस पर एक साथ आक्रमण करो। द्रोण अभिमन्यु को घायल कर देते हैं।
उधर, युधिष्ठिर को इसका पश्चाताप होता है और वह कहता है कि अब मैं अर्जुन को क्या मुंह दिखाऊंगा?
अभिमन्यु की हत्या के संपूर्ण प्रकरण को पढ़ने के लिए आगे क्लिक करें....कौरवों के चक्रव्यूह के पीछे की असली साजिश, लेकिन फंस गया अभिमन्यु
सभी योद्धा मिलकर अभिमन्यु को घायल कर देते हैं। अभिमन्यु रथ से नीचे गिर जाता है और वह अकेला निहत्था होता है। द्रोण को छोड़कर सभी तलवार निकाल लेते हैं। अभिमन्यु रथ के पहिये को ढाल बना कर लड़ते हैं, लेकिन तभी कोई पीछे से अभिमन्यु की पीठ में तलवार घोंप देता है। फिर सभी योद्धा मिलकर उसकी निर्ममता से हत्या कर देते हैं।
उधर, लड़ते लड़ते अर्जुन कहता है कि हे केशव मेरा दिल कर रहा है कि मैं इस वक्त सभी का संहार कर दूं परंतु दूसरे ही क्षण मेरे हृदय की धड़कन बड़ जाती है। यह देखो मेरा गांडिव भी अब मेरा साथ नहीं दे रहा है। हे केशव लगता है कि कुछ अशुभ हुआ है।
फिर बाद में अर्जुन को यह पता चलता है कि चक्रव्यूह की रचना करके अभिमन्यु की निर्ममता पूर्वक हत्या कर दी गई है। यह सुनकर अर्जुन बुरी तरह से टूट जाता है। अब पहले की अपेक्षा उसके भीतर कौरवों से लड़ने के लिए और भी अधिक क्रोध उत्पन्न हो जाता है। जब अर्जुन को यह बता चलता है कि जयद्रथ के कारण अभिमन्यु मारा गया तो अर्जुन यह शपथ लेता है कि मैं कुंति पुत्र अर्जुन यह प्रतिज्ञा करता हूं कि कल सूर्यास्त से पूर्व जयद्रथ मेरी शरण में नहीं आया या रणछोड़कर भाग नहीं गया तो मैं वासुदेव श्रीकृष्ण का सखा अर्जुन कल सूर्यास्त से पहले जयद्रथ का वध करूंगा। अन्यथा अग्नि में प्रवेश करके स्वयं को भस्म कर दूंगा।
यह प्रतिज्ञा सुनकर श्रीकृष्ण कहते हैं कि पार्थ तुमने बिना सोचे समझे, भावनाओं के आवेश में आकर प्रतिज्ञा की है परंतु इस प्रतिज्ञा के क्या परिणाम होंगे ये सोचा है तुमने?
यह सुनकर भीम कहता है कि हे केशव यह मत सोचिये कि यह प्रतिज्ञा अर्जुन ने ही की है। ये प्रतिज्ञा हम सब पांडवों की है। यह सुनकर श्रीकृष्ण कहते हैं कि अर्जुन की प्रतिज्ञा पूरी हो या भंग हो परंतु दोनों ही स्थिति में इसका परिणाम है अर्जुन की मृत्यु। यह सुनकर सभी चौंक जाते हैं तो नकुल कहते हैं ये आप क्या कह रहे हैं? इस पर श्रीकृष्ण कहते हैं कि मैं सच कह रहा हूं नकुल। जयद्रथ के पिता ने वरदान प्राप्त किया है कि जो भी जयद्रथ का सिर युद्ध भूमि में गिराएगा उसके सिर के 100 टूकड़े हो जाएंगे।
यह सुनकर युधिष्ठिर कहता है कि इसका अर्थ यह है कि जो भी जयद्रथ का वध करेगा तो अपने आप उसका वध भी हो जाएगा? इस पर श्रीकृष्ण कहते हैं कि हां बड़े भैया इसलिए प्रतिज्ञा की पूर्ति पर भी अर्जुन के प्राण संकट में आ जाएंगे और यदि इसने प्रतिज्ञा की पूर्ति ना भी की तब भी इसे अग्निकाष्ठ का भक्षण करके स्वयं मृत्यु को स्वीकार करना होगा।...बहुत दुष्कर काम है ये अर्जुन बहुत दुष्कर काम।
यह सुनकर अर्जुन कहता है कि केशव! तुम्हारे लिए कोई भी काम दुष्कर नहीं है और जो काम हमारे लिए दुष्कर होगा तो हम उसी दुष्कर काम को तुम्हारी सहायता से सहज बना लेंगे, ये मेरा विश्वास है। यह सुनकर श्रीकृष्ण कहते हैं कि ठीक है अर्जुन। कल जब तुम युद्ध भूमि में सिंधु नरेश जयद्रथ का वध करने निकलोगे तो एक बात ध्यान रखना। जयद्रथ का पिता महाराज वृद्धक्षत्र, समंत पंचक क्षेत्र में तप करने बैठा है। तुम हमने महान अस्त्र का प्रयोग करके जयद्रथ का मस्तक आसमान से ही वृद्धक्षत्र की गोद में गिराओगे। यदि तुमने जयद्रथ का मस्तक उसके पिता की गोद में गिरा दिया तो स्वयं वृद्धक्षत्र के मस्तक के 100 टूकड़े हो जाएंगे और तुम बच जाओगे।
यह सुनकर अर्जुन कहता है कि ठीक है केशव मैं जयद्रथ का सर ऐसे उड़ा दूंगा कि पहले वह उसके पिता की गोद में ही जा गिरेगा। इस पर श्रीकृष्ण कहते हैं कि परंतु यह मत भूलों की कल युद्ध भूमि में जयद्रथ की सुरक्षा कौरव सेना और स्वयं गुरु द्रोणाचार्य करेंगे। इसलिए हमारा प्रत्येक योद्धा अर्जुन को जयद्रथ तक पहुंचाने के लिए उसकी सहायता करेगा। जयद्रथ से पहुंचने के लिए अर्जुन का रास्ता अनेक बाधाओं से घिरा होगा। यह सुनकर भीम कहता है कि मैं अपनी गदा से अर्जुन के रास्ते की हर दीवार को मैं अपनी गदा से ढेर कर दूंगा। तब श्रीकृष्ण कहते हैं कि कल हम कौरवों के सेनापति आचार्य द्रोण को युद्ध में उलझाएं रखेंगे। और बड़े भैया आप, नकुल, सहदेव, विराट नरेश, पांचाल नरेश आप सभी कौरव महावीरों को युद्ध में उलझाए रखें। जय श्रीकृष्ण।
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बस्तर संभाग के सात जिलों के 13 विकासखण्ड होंगे लाभान्वित
गौठानों को केन्द्र में रखकर किया जाएगा परियोजना का क्रियान्वयन
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तथा कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे की पहल पर राज्य के बस्तर अंचल के आदिवासी किसानों के कृषि विकास तथा उनके पोषण स्तर में सुधार तथा कृषि उपजों के मूल्य संवर्धन द्वारा कृषकों की आय वृद्धि हेतु 1036 करोड़ रूपए की विश्व बैंक सहायतित 6 वर्षीय परियोजना ’चिराग’ को विश्व बैंक वाशिंगटन डी.सी.(यू.एस.) द्वारा स्वीकृति प्रदान की गई है।
चिराग परियोजना बस्तर संभाग के 7 जिलों के 13 विकासखण्डों बस्तर, बकावंड, बड़ेराजपुर, माकड़ी, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, कटेकल्याण, सुकमा, छिंदगढ़, भैरमगढ़, भोपालपट्नम, चारामा एवं नरहरपुर तथा मुंगेली जिले के मुंगेली विकासखण्ड के 1000 गांवों में क्रियान्वित की जाएगी। योजना का मुख्य उद्देश्य जलवायु परिवर्तन के अनुसार उन्नत कृषि, उत्तम स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से पोषण आहार में सुधार, कृषि एवं अन्य उत्पादों का मूल्य संवर्धन कर कृषकों को अधिक से अधिक लाभ दिलाना है। परियोजना अंतर्गत समन्वित कृषि, भू एवं जल संवर्धन, बाड़ी एवं उद्यान विकास, उन्नत मत्स्य एवं पशुपालन, दुग्ध उत्पादन के अतिरिक्त किसान उत्पादक संगठन (एफ.पी.ओ.) द्वारा कृषकों के उपजों का मूल्य संवर्धन कर कृषकों की आय वृद्धि से संबंधित कार्य सम्पादित किए जाएंगे। परियोजना का क्रियान्वयन गौठानों को केन्द्र में रखकर किया जाएगा। कोविड-19 महामारी के कारण कृषि क्षेत्र में आए अवरोधों एवं कठिनाईयों को ध्यान में रखते हुए आय वृद्धि एवं रोजगार सृजन का उद्देश्य भी परियोजना में सम्मिलित है।
हमने हमेशा जन-जन में बसे राम को पूजा
सरकार की दूसरी वर्षगांठ पर चंदखुरी में हुआ समारोह
पर्यटन रथ और बाइक रैली का भी समागम के साथ हुआ समापन
मंत्रिमंडल के सदस्य, आयोगों के अध्यक्ष, विधायक, संसदीय सचिव भी हुए शामिल
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि कुछ लोग भगवान राम के नाम का उपयोग वैसे ही करते हैं, जैसे कालनेमि ने किया था। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग केवल स्वार्थवश राम का नाम लेते हैं। जबकि हम लोगों ने सदा से जन-जन में बसे राम को पूजा है। छत्तीसगढ़ में नयी सरकार के दो वर्ष पूरे होने पर रायपुर के निकट चंदखुरी में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही। श्री बघेल ने कहा कि जब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को गोली मारी गई थी, तब भी गांधीजी के मुंह से राम का ही नाम निकला था।
माता कौशल्या की जन्मस्थली चंदखुरी में आयोजित इस समारोह में तीन दिनों से जारी राम वन गमन पथ रथ यात्रा और बाइक रैली का समापन भी हुआ। यह रैली उत्तर छत्तीसगढ़ के कोरिया तथा दक्षिण छत्तीसगढ़ के सुकमा से 14 दिसंबर को एक साथ शुरु हुई थी। वनवासकाल में राम ने कोरिया से ही छत्तीसगढ़ में प्रवेश किया था और सुकमा से गुजरते हुए दक्षिण भारत की ओर बढ गए थे। राज्य सरकार ने राम के इस पूरे वन-पथ में पर्यटन विकास के लिए 137 करोड़ रुपए की महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। इस योजना के तहत राम से संबंधित 75 चिन्हित स्थानों में से पहले चरण में 9 स्थानों में पर्यटन सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। माता कौशल्या का मायका कहा जाने वाला चंदखुरी भी इन्हीं में से एक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि माता कौशल्या ने ही राम के चरित्र को गढ़ा था। जो चरित्र माता कौशल्या का था, वही छत्तीसगढ़िया लोगों का है। उन्होंने ही राम को दुख-सुख में सम भाव से रहना सिखाया। राम ने सहनशीलता और कर्तव्यों का पालन करना माता कौशल्या से ही सीखा। उन्होंने कहा कि राम वन गमन पथ को पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित करके राज्य सरकार छत्तीसगढ़ को नयी वैश्विक पहचान दे रही है। कुछ वर्षों पहले तक अन्य राज्यों के लोग छत्तीसगढ़ को या तो भिलाई के नाम से जानते थे, या फिर नक्सल समस्या के कारण, लेकिन अब यह छत्तीसगढ़ अपनी सांस्कृतिक संपन्नता के कारण जाना जाता है। इसकी पहचान इसके समृद्ध किसानों से होती है। उन्होंने कहा कि हमारी पहचान हमारे किसान और आदिवासी है। हम इसी पहचान को आगे बढ़ा रह हैं, इसी उद्देश्य से हम लोगों ने रायपुर में अंतरराष्ट्रीय स्तर के आदिवासी नृत्य महोत्सव का भी आयोजन किया था। उन्होंने कहा कि कल बाबा गुरु घासीदास की जयंती है, यह त्यौहार भी हम शानदार ढंग से मनाएंगे। छत्तीसगढ़ की नयी पहचान के लिए सिरपुर को भी विकसित किया जाएगा, जो नालंदा के बाद सबसे बड़ा बौद्ध परिसर है। हम दुनिया को बताना चाहते हैं कि छत्तीसगढ़ का हर क्षेत्र में विशेष महत्व है।
मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि गौ-सेवा के क्षेत्र में हमारी गोधन न्याय योजना से बढ़िया व्यवस्था और कहीं नहीं है। छत्तीसगढ़ गो-सेवकों का प्रदेश है। यहां के किसानों और मजदूरों ने देश को अपनी ताकत का अहसास करा दिया है। जब पूरे देश में मंदी छाई हुई है, तब यहां मंदी का कोई असर नहीं है। नाराज किसान देश की राजधानी को घेर कर बैठे हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ में खुशहाली है। यदि केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ की नीति पर काम करे तो किसानों का आंदोलन कल वापस हो जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने हर युग में रास्ता दिखाया है। हमारी संस्कृति नफरत फैलाने की नहीं, बल्कि प्रेम बांटने की है। हम सभी को साथ लेकर चलना चाहते हैं, चाहे कोई किसी भी जाति या धर्म का हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में कोई भी भूखा-प्यासा न रहे, सभी को शिक्षा और रोजगार मिले, हम ऐसी व्यवस्था के निर्माण के लिए काम कर रहे हैं।
रथ-यात्रा और बाइक रैली के समापन अवसर पर मुख्यमंत्री बघेल सहित मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों ने चंदखुरी के कौशल्या माता मंदिर में पूजा-अर्चना की और रुद्राक्ष पौधे रोपे। समारोह में मुख्यमंत्री के साथ उनके मंत्रिमंडल के सदस्य पर्यटन मंत्री ताम्रध्वज साहू, पंचायत मंत्री टी.एस.सिंहदेव, कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे, नगरीय प्रशासन और विकास मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिला भेंडिया, स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत, राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल, उद्योग मंत्री कवासी लखमा, उच्च शिक्षा मंत्री उमेश पटेल, निगम मंडलों के अध्यक्ष, क्षेत्रीय विधायक, जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। कार्यक्रम को गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष महंत राजेश्री रामसुंदर दास, पर्यटन मंत्री ताम्रध्वज साहू, नगरीय प्रशासन और विकास मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया, कृषि और जल संसाधन मंत्री रविन्द्र चौबे ने भी संबोधित किया। संस्कृति विभाग के सचिव पी. अंबलगन ने स्वागत भाषण दिया।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
