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आयुर्वेद /शौर्यपथ जामुन के बीज को सेहत के लिए वरदान माना गया है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट, फ्लेवोनोइड, विटामिन सी, जिंक और कैल्शियम जैसे गुण न सिर्फ व्यक्ति को डायबिटीज के खतरे से बचाते हैं बल्कि शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम करके पाचन को दुरुस्त और वजन कंट्रोल करने में भी मदद करते हैं। आइए जानते हैं ऐसे ही कई गजब के फायदे जो जामुन के बीज का सेवन करने से मिलते हैं ।
जामुन के बीज का सेवन करने से मिलते हैं ये गजब के फायदे-
पाचन के लिए फायदेमंद-
जामुन के बीज को पाचन के लिए अच्छा माना जाता है। फाइबर के गुणों से भरपूर जामुन के बीज आंतों में घाव, सूजन और अल्सर जैसी समस्याओं को कम करने में मदद कर सकते हैं।
डायबिटीज-
जामुन ब्लड में शुगर लेवल को कंट्रोल करने के लिए फेमस है। जामुन के बीजों में जाम्बोलिन और जाम्बोसिन नामक यौगिक होते हैं जो ब्लड में शुगर की मात्रा को कम करने मेंमदद कर सकते हैं।
इम्यूनिटी-
कोरोना काल में हर कोई अपनी इम्यूनिटी मजबूत करने के प्रयास में लगा हुआ है। ऐसे में जामुन के बीज आपकी इस तमन्ना को पूरा कर सकते हैं। जामुन के बीज में मौजूद फ्लेवोनोइड जैसे एंटीऑक्सिडेंट शरीर को हानिकारक कणों से दूर रखने में मदद करते हैं।
वजन घटाने-
जो लोग अपना वजन कम करना चाहते हैं, उनके लिए जामुन के बीज का सेवन वरदान साबित हो सकता है। जामुन में फाइबर प्रचूर मात्रा में मौजूद होता है, जो पेट को हेल्दी रखने और वजन घटाने में व्यक्ति की मदद करता है।
पीरियड्स-
महिलाओं को अक्सर पीरियड्स के दौरान दर्द का सामना करना पड़ता है। जामुन बीज के पाउडर में मौजूद जिंक पेट दर्द से छुटकारा दिला सकता है।
नोट-
यह लेख केवल सामान्य जानकारी प्रदान करता है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श लें।
सेहत /शौर्यपथ /भागती-दौड़ती जिंदगी में लोग अक्सर खाने-पीने को लेकर लापरवाही बरतते हैं, जिससे कई बीमारियों की चपेट में आने के साथ लम्बे समय तक अस्त-व्यस्त जीवनशैली रखने के कारण लोग हाइपरटेंशन के भी शिकार हो जाते हैं। अपनी जीवनशैली में सही बदलाव लाते हुए डाइट में पोटेशियम, कैल्शियम और मैग्नीशियम की अच्छी मात्रा लेते हैं, तो आप अपने ब्लड प्रेशर को नियंत्रित कर सकते हैं। आज हम आपको ऐसे सुपरफूड्स के बारे में बता रहे हैं, जिनके नियमित सेवन से आप हाइपरटेंशन की बीमारी से बच सकते हैं।
हाइपरटेंशन क्या है
हाइपरटेंशन को ही उच्च रक्तचाप व हाई बीपी की समस्या कहते है, जिसमें धमनियों में रक्त का दबाव बढ़ जाता है। इस दबाव की वृद्धि से रक्त की धमनियों में रक्त का प्रवाह बनाए रखने के लिए दिल को अधिक काम करने की आवश्यकता पड़ती है। 130/80 mmHg से ज्यादा रक्त का दबाव होने पर व्यक्ति हाइपरटेंशन या हाई ब्लड प्रेशर की श्रेणी में आ जाता है। वैसे तो हाई ब्लड प्रेशर शरीर के किसी अंग को कभी भी प्रभावित कर सकता है, लेकिन इससे सबसे ज्यादा नुकसान हृदय को होता है।
फायदेमंद सुपरफूड्स
नींबू
नींबू में उच्च मात्रा में विटामिन सी होता है और ये एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है।ये बॉडी से फ्री रेडिकल्स को खत्म करता है।इसके अलावा नींबू के सेवन से ब्लड वैसल्स फ्लैक्सिबल और सॉफ्ट होती हैं जिससे ब्लड प्रेशर कम होता है।
दही
दही में प्रोटीन, कैल्शि यम, राइबोफ्लेविन, विटामिन बी 6 और विटामिन बी 12 काफी मात्रा में होते हैं, जो कि उच्च रक्तचाप की समस्यां को कम करते हैं और शरीर को कई प्रकार को लाभकारी अवयव मिलते हैं। दही में कैल्शियम अधिक मात्रा में पाया जाता है।
नारियल पानी
जो लोग हाइपरटेंशन की समस्या से परेशान हैं उन्हें बॉडी को हाइड्रेट रखना चाहिए।कोकोनट वॉटर में पोटैशियम, मैग्निशियम और विटामिन सी होता है जो कि ब्लड प्रेशर को कम करता है।
लहसुन
गार्लिक के यूं तो कई हेल्थ बेनिफिट्स हैं लेकिन कम लोग ही जानते होंगे कि लहसुन के सेवन से आसानी से ब्लड प्रेशर कम किया जा सकता है। बैड कॉलेस्ट्रॉल लेवल को भी कम करता है।
अंडे
अंडे में विटामिन, मिनरल और कई अन्य पौष्टिक तत्व पाए जाते हैं, जो एंडोर्फिन नामक एक रसायन का उत्पाद करते है। यह रसायन हमारे दिमाग में भी पाया जाता है। जो अवसाद व दर्द जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है।
शौर्यपथ / दूध को संपूर्ण आहार कहा जाता है लेकिन यह संपूर्ण आहार उस वक्त खतरनाक हो जाता है जब इसमें मिलावट करके इसकी शुद्धता कम कर दी जाती है। कई बार ऐसा होता है कि दूध में सिर्फ पानी ही नहीं मिलाया जाता बल्कि इसकी मात्रा बढ़ाने के लिए इसमें कई केमिकल्स भी मिला दिए जाते हैं, जो न सिर्फ आपको बीमार बना सकते हैं बल्कि बढ़ते बच्चों के विकास में भी बाधक बन सकते हैं। आइए, जानते हैं कैसे करें दूध में मिलावट की पहचान- इस तरह करें जांच :
पानी
ढलान वाली सतह पर दूध की एक बूंद डालें। शुद्ध दूध की बूंद धीरे-धीरे सफेद लकीर छोड़ते हुए जाएगी, जबकि पानी की मिलवाट वाली बूंद बिना कोई निशान छोड़े बह जाएगी।
स्टार्च
लोडीन का टिंर और लोडीन सॉल्यूशन में कुछ बूंदे डालें, अगर वह नीली हो जाएं, तो समझें कि वह स्टार्च है।
यूरिया
एक चम्मच दूध को टेस्ट ट्यूब में डालें। उसमें आधा चम्मच सोयाबीन या अरहर का पाउडर डालें। अच्छी तरह से मिला लें। पांच मिनट बाद, एक लाल लिटमस पेपर डालें, आधे मिनट बाद अगर रंग लाल से नीला हो जाए, तो दूध में यूरिया है।
डिटर्जेंट
5 से 10 एमएल दूध को उतने ही पानी में मिला के हिलाएं। अगर झाग बनती है, तो डिटर्जेंट है।
सिन्थेटिक दूध
सिन्थेटिक दूध का स्वाद कड़वा होता है, उंगलियों के बीच रगड़ने से साबुन जैसा लगता है और गर्म करने पर पीला हो जाता है।सिन्थेटिक दूध में प्रोटीन की मात्रा है या नहीं, इसकी जांच दवा की दुकान पर मिलने वाली यूरीज स्ट्रिप से की जा सकती है। इसके साथ मिली रंगों की सूची दूध में यूरिया की मात्रा बता देगी।
खाना खजाना / शौर्यपथ / दाल तो आपने कई बार खाई होगी लेकिन आज हम आपको दाल का हैदराबादी जायका बताने जा रहे हैं। आओ अगर कुछ चटपटा खाने का शौक रखते हैं, तो आपको हैदराबादी जायका जरूर चखना चाहिए। आइए, जानते हैं आसान रेसिपी-
सामग्री :
मसूर दाल- 1 कप
बारीक कटा प्याज- 1
बारीक कटा टमाटर- 1
बीच से कटी मिर्च- 2
अदरक-लहसुन पेस्ट- 1/2 चम्मच
हल्दी पाउडर- 1/4 चम्मच
लाल मिर्च पाउडर- 1/2 चम्मच
नमक- स्वादानुसार
तेल- आवश्यकतानुसार
धनिया पत्ती- सजावट के लिए
विधि :
कड़ाही में तेल गर्म करें और उसमें प्याज डालें। प्याज को नरम होने तक पका लें। अब इसमें टमाटर, हरी मिर्च डालें और टमाटर के नरम होने तक पका लें। टमाटर के नरम होने के बाद इसमें अदरक-लहसुन का पेस्ट डालें और 1 मिनट के लिए पका लें। 1 मिनट के बाद इसमें मसूर दाल, लाल मिर्च पाउडर, हल्दी पाउडर डालें और 2 मिनट के लिए पका लें। इसमें ढाई कप पानी डालें और दाल के नरम होने तक धीमी आंच पर पकने दें। नमक डालकर मिलाएं। मध्यम आंच पर दस से पंद्रह मिनट तक पकाएं। धनिया पत्ती से सजाएं और नान या चावल के साथ गर्मागर्म पेश करें।
सेहत / शौर्यपथ / आज के समय में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां विश्व भर में मृत्यु की सबसे बड़ी वजह हैं। हमारी दिनचर्या में शायद ही कुछ मिनट ऐसे होंगे जब हम एक्टिव होते हैं। और बची खुची कसर पूरी कर दी है माहामारी ने, जिसके कारण हम घरों तक सीमित हो गए हैं। अगर अपने दिनभर के रूटीन पर नजर दौड़ाएं तो सुबह उठते ही हम अपने लैपटॉप या फोन की स्क्रीन से चिपक जाते हैं। अधिकांश लोग भोजन भी काम करते-करते ही कर लेते हैं। ये अस्वस्थ जीवनशैली मोटापे को बढ़ावा देती है।
मोटापा या ओबेसिटी वह स्थिति है जब आपका बॉडी मास इंडेक्स 30 या उससे अधिक होता है। इसमें भी, सबसे अधिक हानिकारक होती है पेट के आसपास की चर्बी क्योंकि इसी क्षेत्र में हमारे लगभग सभी आवश्यक ऑर्गन्स होते हैं।
पेट पर चर्बी होना, इन बीमारियों की वजह बन सकता है-
1. हृदय रोग और स्ट्रोक
अमेरिकन लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के डेटा के अनुसार अमेरिका में मृत्यु का दूसरा सबसे बड़ा कारण स्ट्रोक होता है। अत्यधिक वजन का अर्थ है उच्च रक्तचाप और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल। इन दोनों ही स्थिति में हृदय रोग और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।
अच्छी खबर ये है कि थोड़ा सा वजन घटाना भी हृदय रोग के जोखिम को कम कर देता है।
2. टाइप 2 डायबिटीज
सेन्टर ऑफ डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन (CDC) के अनुसार अमूमन जिन लोगों को टाइप 2 डायबिटीज होती है वे मोटापे के भी शिकार होते हैं। आप वजन नियंत्रित कर के और बेली फैट कम कर के मधुमेह के जोखिम या गंभीरता को कम कर सकती हैं।
3. कैंसर
जी हां, बेली फैट कई तरह के कैंसर का जोखिम भी बढ़ा सकता है। कोलन कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर, एंडोमेट्रियम कैंसर और एसोफैगल कैंसर का खतरा मोटापे के कारण कई गुना तक बढ़ जाता है। कई अध्ययनों में ये भी पाया गया है कि बेली फैट गॉलब्लेडर, ओवरी और पैंक्रियास के कैंसर का जोखिम बढ़ाता है।
4. गॉलब्लेडर की बीमारियां
गॉलब्लेडर में स्टोन से लेकर कई गंभीर बीमारियां मोटापे के कारण हो सकती हैं। पेट की चर्बी गॉलब्लेडर पर बुरा असर डालती है। गॉलब्लेडर हमारे पाचनतंत्र का ही एक हिस्सा है और ये अंग पेट में स्थित होता है। यही कारण है पेट की चर्बी इसे प्रभावित करती है।
5. ऑस्टियोअर्थराइटिस
ये एक जोड़ों की समस्या है जो मूलतः घुटनों, कूल्हों और पीठ को प्रभावित करती है। जब आप ओबीस या ओवर वेट होती हैं तो जोड़ों पर अधिक दबाव पड़ता है। इससे कार्टिलेज घिसने लगती है और जोड़ो में अत्यधिक दर्द होता है। वजन कम करने से इन लक्षणों से राहत पाई जा सकती है।
लेडीज, पेट पर चर्बी होना सबसे अधिक खतरनाक है। इसलिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं, एक्टिव रहें और खानपान का ध्यान रखें। खुद को इन गम्भीर बीमारियों से बचाना चाहती हैं, तो आज से ही अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता बना लें।
सेहत /शौर्यपथ / हड्डियों को मजबूत बनाए रखने के लिए विटामिन डी बेहद जरूरी होता है। शरीर में मौजूद विटामिन डी इम्यूनिटी मजबूत बनाने रखने के साथ वायरल संक्रमण से भी बचाने का काम करता है। व्यक्ति सूर्य की रोशनी से लगभग 80 प्रतिशत तक विटामिन डी ग्रहण कर सकता है। लेकिन अक्सर यह देखा गया है कि कई कारणों से लोग धूप नहीं सेंक पाते हैं, जिसकी वजह से उनके शरीर में विटामिन डी की कमी होने लगती है। जो हड्डियों के कमजोर होने की सबसे बड़ी वजह है। अगर आपके साथ भी कुछ इस तरह की परेशानी है और आप धूप नहीं सेंक पाते हैं तो विटामिन डी की कमी पूरी करने के लिए अपनाएं ये उपाय।
संतरा-
संतरे में विटामिन सी और डी की अच्छी मात्रा पाई जाती है। अगर सर्दियों में आप किसी वजह से धूप नहीं सेंक पा रहे हैं तो विटामिन डी की कमी पूरी करने के लिए अपनी डाइट में ऑरेंज जूस को शामिल कर सकते हैं।
मशरूम-
मशरूम का नियमित सेवन करने से हमारी जरूरत का लगभग 20 प्रतिशत विटामिन डी हमें मिल जाता है, जो विटामिन डी की कमी को पूरा करने के लिए पर्याप्त होता है। इतना ही नहीं मशरूम में मौजूद कई पोषक तत्व इम्यूनिटी बढ़ाने का भी काम करते हैं, जिससे व्यक्ति सर्दी-जुकाम से भी दूर रहता है।
अंडे-
अंडे का सफेद भाग प्रोटीन-पैक के रूप में जाना जाता है जबकि अंडे की जर्दी विटामिन डी का भंडार है। विटामिन डी की कमी दूर करने के लिए सर्दियों में अंडे का सेवन करें।
बादाम-
बादाम में विटामिन डी भरपूर मात्रा में मौजूद होता है। बादाम में मौजूद विटामिन डी आपको कई शारीरिक समस्याओं से बचाने में मददगार है। बादाम के दूध में विटामिन-डी और कैल्शियम की अच्छी मात्रा मौजूद होती है जो हड्डियों को मजबूती प्रदान करने के साथ ही इनके विकास में मदद करती है।
मछली-
मछली में भरपूर मात्रा में विटामिन डी पाया जाता है। खास तौर पर ट्यूना और सैल्मन जैसी मछली खाना आपकी हड्डियों के लिए फ़ायदेमंद माना जाता है, क्योंकि ये आपके शरीर में विटामिन डी की एक तिहाई मात्रा की आपूर्ति कर देती है।
शौर्यपथ / घर में खुशहाली और संपन्नता तभी आती है जब परिवार में मधुरता बनी रहे। अगर रिश्ते तनावमुक्त होते हैं तभी उन्नति के मार्ग बनते हैं। रिश्तों में मनमुटाव होने से पूरे परिवार की शांति भंग हो जाती है और इसका असर पूरे परिवार पर पड़ता है। घर में कलह के कई कारण हो सकते हैं, इनमें वास्तु दोष भी वजह हो सकता है। वास्तु में बताए गए कुछ आसान उपाय परिवार में शांति और प्रेम को बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं। आइए जानते हैं इन उपाय के बारे में।
प्रतिदिन सुबह और शाम घर में कर्पूर जलाएं। रात्रि में सोने से पूर्व कर्पूर जलाकर शयन करने से तनावमुक्त नींद आती है। प्रतिदिन गायत्री मंत्र और आदित्यहृदय स्तोत्र का पाठ करें। नियमित रूप से हनुमान जी की पूजा करें। धार्मिक पुस्तकों का दान करें। अनाज का दान करें। पति-पत्नी के बीच तनाव रहता है तो शुक्रवार के दिन मां कालिका के मंदिर में जाकर उनसे क्षमा मांगें। शुक्रवार के दिन पत्नी को इत्र भेंट करें। यदि पति, पत्नी की मांग में सिंदूर भरे और पत्नी, पति के मस्तक पर पीला तिलक लगाए तो दोनों के बीच विवाद मनमुटाव दूर हो जाते हैं। सूर्योदय से पहले घर में झाडू लगाएं। पहली रोटी गाय और आखिरी रोटी कुत्ते की निकालें और रोजाना उन्हें खिलाएं। यदि घर में भाइयों के बीच क्लेश है तो भगवान श्रीगणेश एवं भगवान कार्तिक का पूजन प्रतिदिन करें। भगवान विष्णु को तुलसी पत्र अर्पित करें। माता-पिता के चरण स्पर्श करें। रामायण का पाठ करें। पूरे घर में शंख की ध्वनि करें। गीता पाठ भी घर में शांति बनाने में सहायक होता है। घर में मिठाई लाएं तो सबसे पहले भगवान को भोग लगाएं, उसके बाद परिवार को खिलाएं। प्रतिदिन दुर्गा चालीसा का पाठ करें।
शौर्यपथ / कार्यक्षेत्र और व्यापार में बढ़ते काम के दबाव से काम में नीरसता आने लगती है। ऐसे में अपने आसपास सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ाना जरूरी हो जाता है। वास्तु में कुछ आसान से वास्तु उपाय बताए गए हैं, जिनसे नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ाया जा सकता है। आइए जानते हैं इन वास्तु उपाय के बारे में।
घर या प्रतिष्ठान में जितनी रोशनी होगी घर का माहौल उतना सकारात्मक होगा। प्रतिदिन कुछ समय स्वच्छ हवा और सूरज की रोशनी में व्यतीत करें। घर या प्रतिष्ठान में रोजाना सुबह और शाम धूप जलाएं। भगवान की पूजा करते वक्त कुछ देर के लिए घंटी जरूर बजाएं। शंख की ध्वनि नकारात्मक ऊर्जा दूर करती है। माना जाता है कि घर में शंख रखने मात्र से आर्थिक परेशानियां दूर होने लगती हैं। घर के किसी कोने में अंधेरा रहता है तो वहां हर हफ्ते नियमित रूप से गंगाजल छिड़कें। सूर्य के प्रकाश में कटोरी में गंगाजल लेकर रखें और कुछ देर बाद इसका पूरे घर में छिड़काव करें। घर में कर्पूर के टुकड़े रखने से मन शांत होता है। अपने बेड के नीचे कबाड़ की चीजें न रखें। कमरे के अंदर गमले में पौधे न रखें। भोजन करने से पहले देवी-देवताओं को भोग लगाना चाहिए। सूर्यास्त के बाद स्त्रियों का कंघा नहीं करना चाहिए। घर के शौचालय का दरवाजा हमेशा बंद रखें। घर या प्रतिष्ठान में लगे पेड़-पौधे अगर सूख जाएं तो उन्हें तुरंत हटा दें। घर में श्री यंत्र रखना शुभ माना जाता है। घर या ऑफिस में लॉफिंग बुद्धा रखना शुभ माना जाता है। सुबह और शाम घर में सुगंधित अगरबत्ती या धूप जलाएं। घर के बाहर लगी नेमप्लेट हमेशा साफ रखें।
धर्म संसार / शौर्यपथ / सूर्यदेव को अग्नि का स्वरूप एवं प्रत्यक्ष देवता माना गया है। वास्तु शास्त्र में सूर्य का विशेष महत्व है। ऊर्जा के असीम भंडार सूर्यदेव को लेकर वास्तु में कुछ रोचक उपाय बताए गए हैं, जिन्हें अपनाकर हम अपने जीवन को और बेहतर बना सकते हैं। आइए जानते हैं इन उपायों के बारे में।
सूर्योदय से पहले ब्रह्ममुहूर्त का समय अध्ययन के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। विद्यार्थियों को इस समय का सदुपयोग करना चाहिए। ब्रह्ममुहूर्त का समय स्वास्थ्य की दृष्टि से सर्वोत्तम माना जाता है। सूर्योदय के समय घर के सभी दरवाजे और खिड़कियां खोल देनी चाहिए। सूर्योदय के समय की किरणें स्वास्थ्य की दृष्टि से सर्वोत्तम मानी जाती हैं। घर में कृत्रिम रोशनी का प्रयोग कम से कम करना चाहिए। घर का कोई हिस्सा ऐसा है जहां सूर्यदेव का प्रकाश नहीं आ पा रहा तो वहां सूर्यदेव की तांबे की प्रतिमा लगाई जा सकती है। रसोईघर और स्नानघर में भी सूर्य का प्रकाश पहुंचे ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए। घर में सूर्यदेव के साथ सात घोड़ों की तस्वीर पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। घर में जहां कीमती जेवरात रखे हों, वहां तांबे की सूर्य प्रतिमा लगाने से घर में कभी आर्थिक परेशानी नहीं आती है। बच्चों के स्टडी रूम में सूर्यदेव की प्रतिमा लगाने से सकारात्मक परिणाम सामने आने लगते हैं। परिवार में अगर कोई व्यक्ति रोगी है तो उसके कमरे में सूर्यदेव की प्रतिमा अवश्य लगाएं। वास्तु के अनुसार रसोईघर में तांबे की सूर्य प्रतिमा लगाने से कभी अन्न की कमी नहीं होती। कार्यालय या दुकान में सूर्य प्रतिमा लगाने से उन्नति के अवसर मिलते हैं। घर के मंदिर में तांबे की सूर्य प्रतिमा लगाने से घर-परिवार पर सूर्य देव की कृपा बनी रहती है।
खाना खजाना /शौर्यपथ /सामग्री-मैदा 1 प्याला, क्रीम 2 बड़े चम्मच, चीनी (पिसी हुई) 2 प्याले, नमक 1/2 चम्मच, बेकिंग सोड़ा 1 छोटा चम्मच, ऑरेंज एसेंस 1 बड़ा चम्मच, मक्खन 1 बड़ा चम्मच, दही 1 प्याला, कोको पावडर 1 प्याला।
आइसिंग के लिए सामग्री-
मक्खन 3 बड़े चम्मच, कोको पावडर 1/4 प्याला, कंडेंस्ड मिल्क 3 बड़े चम्मच, आइसिंग शक्कर 1 प्याला।
विधि-
सर्वप्रथम मैदा, कोको पावडर, नमक व बेकिंग सोड़े को एक साथ छान लें। एक कटोरे में दही, मक्खन, एसेंस लेकर फेंटें। क्रीम में धीरे-धीरे पिसी चीनी मिलाएं।
दही का मिश्रण मिलाकर बुलबुले उठने तक फेंटें। अब मैदे का मिश्रण मिलाकर फेंटें। केक पैन को घी लगाकर चिकना करें, उस पर थोड़ा-सा मैदा बुरकें। घोल को पैन में डालें। पहले से गर्म ओवन में रखकर धीमें तापमान पर करीब 30-40 मिनट तक बेक कर यमी और डिलीशियस चॉकलेटी केक सर्व करें।
सेहत /शौर्यपथ / मल्टी ग्रेन यानि मिला जुला अनाज गेहूं के आटे की बजाए सेहत के लिए कई तरह से फायदेमंद होता है। इसमें गेहूं के अलावा चना, चावल, ज्वार, बाजरा, मक्का, जौ, सोयाबीन, तिल्ली आदि को एक साथ पीसकर आटा तैयार किया जाता है। इसके गुणों को जरूर जानिए ताकि आप भी इसका फायदा उठा पाएं -
1 मल्टीग्रेन आटा या उससे बने व्यंजन आपके शरीर में एक कई तरह के पोषक तत्वों की एक साथ पूर्ति करते हैं, जबकि सामान्य आटे में आपको सीमित पोषण ही मिल पाता है।
2 इसका प्रयोग करने से शरीर को भरपूर मात्रा में फाइबर मिलता है जो आपके पाचन तंत्र को बेहतर कार्य करने में मदद करता है और कब्ज की समस्या नहीं होती।
3 शरीर को फाइबर अधिक मिलने पर यह वजन कम करने और मोटापा घटाने में भी बेहद सहायक होता है और जिससे आप जल्दी दुबले हो सकते हैं।
4 मल्टीग्रेन कई पोषक तत्वों की आपूर्ति करता है जिससे आपकी प्रतिरोधक क्षमता में इजाफा होता है और बीमारियां आपसे दूरी बनाए रखती हैं।
5 इसका एक खास फायदा यह भी है कि यह डायबिटीज के मरीजों और रक्तचाप रोगियों के लिए फायदेमंद होता है और शरीर में वसा का जमाव नहीं होने देता।
सेहत / शौर्यपथ / दिनभर अगर काम करते-करते आप थकान महसूस करते हैं या पैर के पंजों में दर्द बना रहता है तो हम आपको बता रहे हैं कुछ आसान-सी 5 एक्सरसाइज जिन्हें अपनाकर आप दिनभर की थकान से छुटकारा पा सकते हैं। आइए जानते हैं-
टांगें सीधी करके बैठें और बाजू शरीर को सहारा देते हुए पीठ के पीछे रहेंगे। अंगुलियां पीछे की ओर खुली होंगी।
सामान्य श्वास लेते हुए पंजों को ऊपर की ओर करें और बारी-बारी से पंजों को अंदर की ओर मोड़ें व बाहर की ओर फैलाएं।
सामान्य श्वास लेते हुए पंजों को शरीर की तरफ लचीला व ढीला करें और फिर उनको बाहर की ओर फैलाएं, यह क्रिया आहिस्ता और सचेत रहते करें। जहां तक संभव हो, पैरों को दोनों दिशाओं में घुमाएं।
सामान्य श्वास लेते हुए दोनों पैरों के साथ 5 बार दाईं ओर से बाईं ओर तथा 5 बार बाईं ओर से दाईं ओर घुमाने की क्रिया करें।
बायां पैर मोड़ें और बाएं पैर को दाईं जांघ के ऊपर रखें। बाएं हाथ से बाईं टांग को टखने के ऊपर से पकड़ लें और बाएं पैर की अंगुलियों को दाएं हाथ से पकड़ लें। सामान्य श्वास लेते हुए टखने को दोनों दिशाओं में 5 बार घुमाएं। टांग बदल लें और इसी व्यायाम को दोहराएं।
धर्म संसार / शौर्यपथ / क्रिसमस के अवसर पर पढ़ें पवित्र बाइबिल का संदेश
1. भलाई से बुराई को जीतो।
2. बुराई को अपने ऊपर हावी मत होने दो।
3. जो कोई दया करे, वह हंसी-खुशी के साथ दया करें।
4. प्रेम में कोई कष्ट नहीं होना चाहिए।
5. बुराई से घृणा करनी चाहिए।
6. भलाई में लगे रहना चाहिए।
7. एक-दूसरे के साथ भाईचारे का प्रेम करना चाहिए।
8. एक-दूसरे का आदर करने में होड़ करनी चाहिए।
9. प्रयत्न करने में आलस नहीं करना चाहिए।
10. आशा में प्रसन्न रहो। दुःख में स्थिर रहो।
11. सज्जनों की सहायता करो। अतिथियों की सेवा करो।
12. सताने वालों को आशीर्वाद दो।
13. हंसने वालों के साथ हंसो। रोने वालों के साथ रोओ।
14. बुराई के बदले बुराई न करो।
15. भले काम करो। सबसे मेल रखो।
16. किसी से बदला मत लो।
17. तुम्हारा शत्रु भूखा हो, तो उसे खाना खिलाओ।
18. प्यासा हो, तो पानी पिलाओ।
19. जो कोई दान दे, वह सिधाई के सात दान दें।
20. घर-घर प्रेम और भाईचारे का संदेश फैलाना चाहिए।
प्रभु यीशु के जन्म की कहानी
मरिया, योसेफ की धर्म पत्नी थी, जो बढ़ई का काम करता था। वे नाजरेथ में रहते थे। एक दिन स्वर्गदूत गाब्रिएल ने उसे दर्शन देकर कहा- 'प्रणाम, कृपापूर्ण, प्रभु आपके साथ है, धन्य हैं आप स्त्रियों में।' यह सुनकर मरिया चकित रह गई, परंतु स्वर्गदूत ने उन्हें सांत्वना देते हुए यह कहा कि वे ईश्वर की माता बनने के लिए चुनी गई हैं। तब मरिया ने उत्तर दिया, 'देखिए, मैं प्रभु की दासी हूं, आपका वचन मुझमें पूरा हो।' और उसी क्षण से वह ईश्वर की माता बन गई।
कुछ समय के बाद मरिया और योसेफ अपना नाम लिखवाने बेथलेहेम गए और कहीं भी जगह न मिलने पर वे एक एकांत गुफा में आए, जो शहर से बाहर थी और वह यही स्थान था, जहां येसु का जन्म हुआ। मरिया ने उसे शिशु वस्त्र में लपेटा और चरनी में लिटा दिया। उसी समय उन्हें स्वर्गदूतों का मधुर गीत, ईश्वर की स्तुति करता सुनाई दिया-
'उच्च आकाश में ईश्वर की महिमा, और पृथ्वी पर उसके कृपापात्रों को शांति।'
पास ही पहाड़ियों के गड़ेरिए स्वर्गदूतों के निमंत्रण पर नन्हें येसु की आराधना करने गए और पूछा जा सकता है कि यह नन्हा येसु कौन है? यह येसु ख्रीस्त दुनिया का मुक्तिदाता है, ईश्वर का पुत्र, सच्चा ईश्वर और सच्चा मनुष्य।
संत योहन (1:34) लिखते हैं, 'मैंने देखा और इस बात की साझी देता हूं कि यही ईश्वर का पुत्र है।'
मिस्र में कुछ समय रहने के बाद वे नाजरेथ लौट आए, जहां योसेफ फिर से बढ़ई का धंधा करने लगा। जब येसु करीबन 30 वर्ष के हुए तो उन्होंने घर छोड़ दिया। अपना सुसमाचार सुनाना आरंभ किया, आश्चर्य के काम किए और अपनी कलीसिया की स्थापना की।
संत मत्ती ने लिखा, (4:23) 'येसु, सारे गलीलिया में घूम-घूमकर उनके सभाघरों में उपदेश देते, राज्य के सुसमाचार की घोषणा करते और लोगों के बीच हर तरह की बीमारी और सब प्रकार की दुर्बलताएं दूर करते थे। उनकी प्रसिद्धि सारे सीरिया में फैल गई।'
यह अकसर होता है कि जो लोग दूसरों के लिए कुछ अच्छा काम करते हैं, तो उनके अनेक शत्रु हो जाते हैं। उसी तरह से प्रभु येसु ख्रीस्त के द्वारा किए जाने वाले भले कामों के कारण उनके भी अनेक शत्रु हो गए थे। उनका शिष्य, जिसका नाम यूदस था, उनके शत्रुओं से यहां तक मिल गया कि वह मात्र चांदी के तीस सिक्कों पर विश्वासघात करने पर तैयार हो गया।
अब ऐसा हुआ कि पास्का पर्व के प्रीतिभोज के बाद, येसु जैतून पहाड़ पर प्रार्थना करने गए। जब वे प्रार्थना कर रहे थे, यूदस एक भारी भीड़ के साथ वहां आ पहुंचा, जिन्हें उसने यह संकेत दिया था, 'जिसे मैं चूमूं, वही येसु है, उसे पकड़ लेना और बांध लेना।' और येसु के पास जाकर उसने उसे चूमा।
येसु ने कहा, 'यूदस! चुंबन देकर मेरे साथ विश्वासघात करते हो?' तब सैनिक उसकी ओर लपके और उन्हें पकड़कर प्रधान याजक और पिलातुस के पास ले गए। वहीं पूरी रात और दिनभर, येसु निष्ठुर सिपाहियों की इच्छानुसार रहा। उन्होंने उसका मजाक उड़ाया, उस पर थूका, थप्पड़ मारे, कांटों का मुकुट बनाकर सिर पर रखा।
अंत में पिलातुस ने यहूदियों को खुश करने के लिए जो कि येसु को क्रूस पर चढ़ाना चाह रहे थे, उनकी क्रूस की मौत की घोषणा की। अपने जख्मी कंधों पर भारी क्रूस उठाए येसु ने कलवारी पहाड़ी की यात्रा शुरू की। वह इतना कमजोर हो गया था कि तीन बार क्रूस के नीचे गिरा।
कलवारी पहुंचने पर येसु के कपड़ों को बड़ी बेरहमी से खींचा गया और क्रूस पर ठोंक दिया गया। उसकी मां, संत योहन और कुछ धार्मिक स्त्रियां वहां थीं। उसके कुछ अनुयायी दूर खड़े होकर सब देख रहे थे। उन्हें अपने स्वयं की सुरक्षा की पड़ी थी।
पास खड़े यहूदियों ने उनका निरादर कर हंसी-मजाक उड़ाया। पर येसु ने उनके लिए प्रार्थना करते हुए कहा, 'हे पिता, उन्हें क्षमा कर दीजिए, क्योंकि उन्हें ज्ञात नहीं कि वे क्या कर रहे हैं।' और तीन घंटों की घोर प्राण पीड़ा के पश्चात येसु मर गए। मानव जाति को मुक्ति दिलाने के लिए उसने ऐसा किया। येसु की मृत्यु के बाद उसके कुछ शिष्य आए और उन्हें एक कब्र में दफना दिया। तीसरे दिन बड़े तड़के भूकंप हुआ, येसु महिमा और विजय के साथ कब्र से बाहर आए।
जब धार्मिक स्त्रियां आईं तो उन्होंने दो स्वर्गदूतों को देखा, जिसने उनसे कहा, 'क्या आप येसु को खोज रहे हैं? वे यहां नहीं हैं, वे मृतकों में से जी उठे हैं।' उसी दिन संध्या के समय शिष्यगण यहूदियों के डर से द्वार बंद करके जमा हुए थे। वहीं येसु आए और उनके बीच खड़े होकर उनसे कहा, 'तुम्हें शांति मिले।' वे सहम गए और भय के मारे सोचने लगे कि हम कोई प्रेत देख रहे हैं। येसु ने उनसे कहा, 'डरो मत, मैं ही हूं, मेरे हाथ और पैर देखो।' और उनके साथ वे अंतर्ध्यान हो गए।
येसु, यह साबित करने के लिए कि वे सचमुच मृतकों में से जी उठे हैं, प्रेरितों को समझाने का कार्य पूर्ण करने और अपनी कलीसिया की स्थापना करने के लिए, 40 दिनों तक इस दुनिया में रहे।
इसके बाद वे प्रेरितों को जैतून पहाड़ पर ले गए और अपने हाथ उठाकर उन्हें आशीर्वाद देते हुए स्वर्ग की ओर उड़ते चले गए, जब तक कि एक बादल ने उन्हें नहीं ढंक लिया। तब दो स्वर्गदूत दिखाई दिए और उनसे कहा, 'यही येसु, जिसे तुम अपने बीच से स्वर्ग की ओर जाते देख रहे हो फिर आएंगे, जैसे तुमने उस स्वर्ग की ओर जाते देखा है। तब वह समस्त मानवों का न्याय करेगा।'
शौर्यपथ / गाजर खाने के अनेक फायदे है क्योंकि इसमें विटामिन ए, सी, के, बी 8, तांबा, लौह जैसे कई और भी खनिज व विटामिन पाए जाते है। गाजर 12 महीने आपको आसानी से मिल जाता है। आज हम आपको बता रहे हैं गाजर खाने के फायदे-
-रोजाना गाजर का सलाद खाने से या गाज़र का जूस पीने से चेहरे पर चमक आती है। गाजर रक्त की विषाक्ता कम करता है और इसके सेवन से कील-मुहासों से भी छुटकारा मिलता है।
-गाजर में विटामिन ‘ए’ अधिक मात्रा में पाया जाता है। इसलिए अगर गाजर का नियमित रूप से सेवन किया जाए तो आंखों की रोशनी बढ़ सकती है।
-गाजर का जूस पीने से शरीर में हिमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ जाती हैं, और गाजर में अधिक मात्रा में फाइबर पाया जाता हैं जो शरीर की पाचनशक्ति को बढ़ाता हैं।
-गाजर में कैरोटीनायड होता है, जो हृदय रोगियों के लिए अच्छा होता है। यह माना जाता है कि गाजर का प्रतिदिन सेवन कालेस्ट्राल के स्तर को कम करता है।
-गाजर के प्रतिदिन सेवन से रक्त में शर्करा का स्तर ठीक रहता है।
-इसे खाने से मसूड़ों से ब्लड आना बंद हो जाता है और दांतों की चमक बढ़ती है।
-गाजर में बीटा कैरोटीन होती है और यह प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए अच्छा होता है।
-गाजर के रस में मिश्री व काली मिर्च मिलाकर पीने से खाँसी ठीक हो जाती है तथा कफ कि समस्या में भी आराम मिलता है।
-गाजर खाने से, पेट और फेफड़ों के कैंसर का जोखिम कम होता है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
