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छत्तीसगढ़ सरकार पूरी संजीदगी से कर रही है धान खरीदी का काम, किसानों को नहीं होने देंगे कोई तकलीफ: मुख्यमंत्री बघेल
धान खरीदी की समस्याओं के निराकरण के लिए राज्य सरकार कटिबद्ध
छत्तीसगढ़ विधानसभा में 2387 करोड़ रूपए का द्वितीय अनुपूरक बजट पारित
वित्तीय वर्ष 2020-21 के बजट का आकार बढ़कर हुआ एक लाख 9 हजार 101 करोड़ रूपए
मुख्यमंत्री ने कहा - हमारी प्राथमिकता प्रदेश के गरीब, किसान, मजदूर, महिलाएं और युवाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार लाना
धान खरीदी शुरू हुए एक माह हो रहे, केन्द्र ने अब तक नहीं दी एफसीआई को चावल देने की अनुमति
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज चर्चा के बाद ध्वनिमत से 2 हजार 387 करोड़ रूपए का द्वितीय अनुपूरक बजट पारित कर दिया गया। द्वितीय अनुपूरक के बाद अब प्रदेश के वर्ष 2020-21 के मुख्य बजट का आकार कुल एक लाख 9 हजार 101 करोड़ रूपए हो गया है। वर्ष 2020-21 का मुख्य बजट एक लाख 2 हजार 907 करोड़ रूपए का था। प्रथम अनुपूरक का आकार 3 हजार 807 करोड़ रूपए था।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विधानसभा में हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि राज्य सरकार पूरी संजीदगी के साथ धान खरीदी का काम कर रही है, किसानों को किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होगी। बारदानों की कमी को दूर करने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी प्राथमिकता प्रदेश के गरीब, किसान, मजदूर, महिलाएं और युवा हैं। उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार करना हमारी प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हां हमने कर्ज लिया है, किसानों की कर्ज माफी के लिए, धान खरीदी के लिए और लोगों की सहायता करने के लिए। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार ने स्काई वॉक, एक्सप्रेस-वे, मोबाइल खरीदी और नई राजधानी के लिए ऋण लिया, लेकिन इसका प्रदेश की जनता को क्या फायदा हुआ। मुख्यमंत्री ने नई तहसीलों की जनप्रतिनिधियों की मांग के संबंध में कहा कि राज्य सरकार द्वारा 23 नई तहसीले बनाई गई है। भविष्य में जब भी नई तहसीलें बनाई जाएंगी जनप्रतिनिधियों की मांगों को ध्यान में रखा जाएगा।
मुख्यमंत्री ने बारदानों की व्यवस्था के संबंध में कहा कि राज्य सरकार ने भारत सरकार के जूट कमिश्नर से छत्तीसगढ़ को 4.50 लाख गठान बारदाना उपलब्ध कराने का आग्रह किया था, लेकिन उन्होंने एक लाख 43 हजार गठान बारदाने उपलब्ध कराने की स्वीकृति दी। लेकिन हमें एक लाख 5 हजार गठान बारदानें जूट कमिश्नर से मिले हैं। कोरोना काल में जूट मिलें बंद थी, इसलिए राज्य सरकार ने पीडीएस की दुकानों से 65 हजार गठान पुराने बारदाने, राईस मिलर्स से 80 हजार गठान बारदाने की व्यवस्था की है। हमें अब तक 2 लाख 62 हजार गठान बारदाने मिले हैं, जिनमें से एक लाख 58 हजार गठान बारदानों का उपयोग किया जा चुका है और एक लाख 4 हजार गठान बारदाने शेष हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने आम जनता को सुविधाएं उपलब्ध कराने के कार्य किए, उनकी सराहना भारत सरकार और नीति आयोग ने भी की। कोरोना काल में प्रदेश में 22 हजार से अधिक क्वॉरेंटाइन सेंटर स्थापित किए गए, गरीबों को 35 किलो के मान से 3 माह का अनाज मुफ्त दिया गया, मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम के अंतर्गत बच्चों को घर पहुंचाकर सूखा राशन दिया गया। श्री बघेल ने कहा कि प्रदेश के भ्रमण के दौरान उन्होंने कई धान खरीदी केंद्रों का भी दौरा किया वहां भीड़-भाड़ नहीं थी और व्यवस्थाएं काफी अच्छी थी। नई सरकार बनने के पहले प्रदेश में 1900 धान खरीदी केंद्र थे, जिन्हें पहले चरण में बढ़ाकर 2000 किया गया और अब 2300 केंद्रों पर धान की खरीदी हो रही है। पिछले वर्ष 23 दिसंबर तक 5 लाख किसानों ने 18 लाख मेट्रिक टन धान बेचा था, जबकि इस वर्ष 23 दिसंबर तक 9 लाख 90 हजार किसानों ने 38 लाख मैट्रिक टन धान बेचा है। इस वर्ष धान के विक्रय के लिए 21 लाख 38 हजार किसानों ने पंजीयन कराया है, जो पिछले वर्षों की तुलना में सर्वाधिक है। धान के रकबे में भी 6 लाख एकड़ की वृद्धि हुई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि धान खरीदी में आ रही समस्याओं के निराकरण के लिए राज्य सरकार कटिबद्ध है। इस संबंध में मिल रही शिकायतों का लगातार समाधान किया जा रहा है। डायल 112 में अब तक 1700 शिकायतें मिली जिनमें से 483 का निराकरण किया जा चुका है। रकबे में त्रुटि के संबंध में 413 शिकायतें मिली हैं, जिनके निराकरण के लिए अधिकारियों को कहा गया है। उन्होंने बताया कि कल ही उन्होंने केंद्रीय मंत्री श्री पीयूष गोयल से एफसीआई को चावल देने की अनुमति देने का आग्रह किया था, लेकिन उन्होंने कहा कि मैं किसान आंदोलन में व्यस्त हूं। धान खरीदी को एक माह हो गया है लेकिन यह दुर्भाग्यजनक है कि अभी तक एफसीआई में चावल देने की अनुमति नहीं मिल पाई है। राईस मिलर्स अब तक 7 लाख मेट्रिक टन से अधिक उठाव कर चुके हैं। यदि एफसीआई में चावल जमा करने की अनुमति नहीं मिलती है तो बारदाने की कमी होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को एकमुश्त धान की कीमत 2500 रूपए प्रति क्विंटल इसलिए नहीं दी जा सकी क्योंकि केन्द्र सरकार ने हमारे हाथ-पांव बांध दिए थे। समर्थन मूल्य और 2500 रूपए प्रति क्विंटल के अंतर की राशि किसानों को देने के लिए राज्य सरकार राजीव गांधी किसान न्याय योजना लेकर आई जिसमें किसानों को प्रति एकड़ 10 हजार रूपए की राशि दी जा रही है। इस योजना में किसानों को तीन किश्तों का भुगतान किया जा चुका है। चौथी किश्त भी इसी वित्तीय वर्ष में दे दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना मरीजों का सरकारी अस्पतालों में मुफ्त में इलाज किया जा रहा है। राज्य सरकार कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए भारत सरकार की गाइडलाइन का पालन कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने स्वास्थ्य संबंधी अधोसंरचना विकसित करने के भी पूरे प्रयास किए है। 15 वर्षों में प्रदेश में केवल 46 आईसीयू बेड थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर 400 हो गई है। हजारो बेड, वेंटिलेटर की व्यवस्था की गई। कोरोना पैंडेमिक से निपटने के लिए स्वास्थ्य और पुलिस विभाग सहित पंचायत, महिला एवं बाल विकास, शिक्षा सहित सभी विभागों के लोगों और जनप्रतिनिधियों में सराहनीय कार्य किया। उन्होंने कहा कि अब कोरोना वायरस का नया स्ट्रेन आ गया है। यदि विदेशों से आने वालों को पहले ही बड़े शहरों में रोक लिया गया होता, तो यह छत्तीसगढ़ नहीं आ पाता। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे छत्तीसगढ़ की संस्कृति पर गर्व है और छत्तीसगढ़िया होने का अभिमान है। नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि नरवा प्रोजेक्ट में भारत सरकार ने सूरजपुर और बिलासपुर जिले को पूरे देश में प्रथम पुरस्कार प्रदान किया है। स्वच्छता के मामले में छत्तीसगढ़ पूरे देश में पहला है। गोधन न्याय योजना में अब तक 32 लाख क्विंटल से अधिक गोबर की खरीदी की जा चुकी है और पशुपालकों को 64 करोड़ रूपए का भुगतान किया जा चुका है। अंबिकापुर के वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन करने वाले एक महिला स्व-सहायता समूह ने एक बड़ी कम्पनी के साथ 16 रूपए प्रति किलो की दर पर वर्मी कम्पोस्ट की बिक्री के लिए एमओयू किया है। उन्होंने कहा कि गोबर हमारे लिए पवित्र वस्तु है। आज भी घरों में चूल्हे और पूजा स्थल की लिपाई गोबर से की जाती है। गोबर को हमने अर्थव्यवस्था से जोड़ा है।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष द्वारा कर्ज के आकार बढ़ने के संबंध में की गई शिकायतों का जवाब देते हुए कहा कि भारत सरकार द्वारा वर्ष 2019-20 के केन्द्रीय बजट में राज्य को केन्द्रीय करों में राज्य के हिस्से की राशि 26 हजार 13 करोड़ रूपए निर्धारित की गई थी, किन्तु राज्य को वास्तविक रूप से केवल 20 हजार 205 करोड़ रूपए ही प्राप्त हुए। इस प्रकार राज्य को 5 हजार 808 करोड़ रूपए कम प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार वर्ष 2019-20 में राज्य को जीसएसटी क्षतिपूर्ति अनुदान की राशि 4 हजार 506 करोड़ प्राप्त होनी थी, किन्तु केवल 2 हजार 644 करोड़ ही प्राप्त हुए हैं। इस प्रकार इन दोनों मदो में कुल 7 हजार 670 करोड़ की कमी होने से राज्य के संसाधनों में भारी कमी आई है।
मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि वर्ष 2019-20 में केन्द्रीय करों में राज्य के हिस्से में कमी को देखते हुए भारत सरकार द्वारा विशेष रियायत के रूप में राज्य को एक हजार 813 करोड़ की अतिरिक्त अधार-सीमा का लाभ एफआरबीएम एक्ट में संशोधन करने की शर्त पर प्रदाय किया गया था। 22 मार्च 2020 से देशव्यापी लॉकडाउन के कारण राज्य के स्वयं के राजस्व में भी आंशिक कमी हुई है, किन्तु वैश्विक आपदा के समय में राज्य के लोगों को फौरी तौर पर राहत प्रदान करने तथा स्वास्थ्य सुविधाओं की तत्काल उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु राज्य द्वारा लोकहित में आवश्यक व्यय किए गए है। केन्द्र सरकार द्वारा दी गई अतिरिक्त उधार सीमा के लिए निर्देशानुसार राज्य के एफआरबीएम एक्ट में 2019-20 के लिए वित्तीय घाटे की सीमा में वृद्धि हेतु संशोधन किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वास्तविकता यह है कि सामान्य आर्थिक मंदी एवं कोविड-19 महामारी से उत्पन्न विशेष परिस्थितियों के कारण केन्द्र सरकार के साथ-साथ सभी राज्यों के राजस्व प्राप्तियों में भारी कमी दर्ज की गई है। जिसकी पूर्ति के लिए ऋण लिया गया है।
राज्यों की जीएसडीपी के तिमाही आंकड़े जारी नहीं किए जाते हैं किन्तु केन्द्रीय सांख्यिकी संगठन के हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार देश की जीडीपी में प्रथम तिमाही में 23.9 प्रतिशत तथा द्वितीय तिमाही में 7.5 प्रतिशत की गिरावट आयी है। मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि अंत में मार्च 2020 में केन्द्र सरकार ने राज्य को एक हजार 813 करोड़ अतिरिक्त ऋण लेने का निर्देश दिया। लेकिन हमन अतिरिक्त ऋण न लेकर उपलब्ध राशि में ही राज्य के खर्चों को संचालित किया। वर्ष 2020-21 में तो भारत सरकार द्वारा सभी राज्यों को 2 प्रतिशत अतिरिक्त ऋण लेनेे की अनुमति प्रदान की जा चुकी है, किन्तु छत्तीसगढ़ ने अभी तक इस अतिरिक्त ऋण सीमा का लाभ नहीं लिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व प्राप्तियों में छत्तीसगढ़ ने बेहतर प्रदर्शन किया है।
-637 क्विंटल खरीदने की है योजना, अब तक 250 क्विंटल खाद खरीद कर 2 लाख 11 हजार 888 रुपए का किया भुगतान
-जिले के ग्रामीण गौठानों में अब तक 1 लाख 55 हजार किलो खाद का हुआ निर्माण , 66 हजार 666 किलो खाद का हो चुका उठाव, 49 हजार 241 का उठाव शेष
-गौठानों में निर्मित 4 हजार 161 कम्पोस्ट टैंकों में अगली खेप की तैयारी शुरू
दुर्ग / शौर्यपथ / ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के उददेश्य से राज्य शासन द्वारा शुरू की गई नरवा, गरुवा, घुरूवा, बाड़ी योजना के परिणाम सामने आने लगे है। इस योजना से स्व-सहायता समूह की महिलाओं को रोजगार मिल रहा है खाद बेचकर आमदनी भी होने लगी है।जिससे उन्हें आर्थिक संबल मिल रहा है।कल तक जो महिलाएं घर में खाली बैठी थीं या मजदूरी करती थीं आज खुद के लिए काम कर रही हैं।
साथ ही जैविक खेती का प्रचलन भी बढ़ रहा है। गांव की महिलाएं समूह बनाकर गौठानो में स्थापित वर्मी कम्पोस्ट और नाडेप टंकियो में आर्गेनिक खाद का निर्माण कर रही हैं। महिलाओं को उनकी मेहनत का मूल्य दिलाने के लिए उद्यानिकी विभाग द्वारा प्रयास भी किए जा रहे हैं। उपसंचालक उद्यानिकी श्री सुरेश ठाकुर ने बताया कि अब तक गौठानों से 250 क्विंटल खाद की खरीदी कर 2 लाख 11 हजार 880 रुपए का भुगतान किया गया है। उनकी योजना है कि गौठानों से 637 क्विंटल अगले एक दो माह में खरीदें। इसके बाद आने वाले दिनों में और खरीदी की जाएगी। उन्होंने बताया कि हमें हर साल अपनी नर्सरियों के लिए अच्छी गुणवत्ता के खाद की आवश्यकता होती ही है। स्व-सहायता समूह की हमारी बहनें गौठानों में खाद बना रही हैं। हमने उनको भी आर्थिक संबल देने के लिए उनके द्वारा बनाए गए वर्मी कम्पोस्ट खाद को क्रय करने का निर्णय लिया जिसमें हमें भी अपने नर्सरियों के लिए पौधे उत्पादन व विभिन्न योजनाओं में लगने वाले खाद की पूर्ति आसानी से हो जाएं और महिलाओं को भी प्रोत्साहन मिले की उनकी मेहनत खाली नहीं जाएगी। उद्यानिकी विभाग द्वारा अपने सभी ब्लॉक लेवल आफिसरों को यह कार्य भार दिया है, कि खुद जाकर खाद की उर्वरता व गुणवत्ता की परख कर खाद खरीदें। साथ ही किसानों को भी सब्जी, भाजी व फलों की खेती में वर्मी कम्पोस्ट खाद उपयोग की सलाह भी दें।
गौठानों में बने 1550 क्विंटल केंचुआ खाद की बिक्री से मिलेंगे 10 लाख 72 हजार 214 रुपए , महिला समूहों को होगा सीधा फायदा- जिला पंचायत से मिली जानकारी के मुताबिक अब तक जिले के ग्रामीण अंचलों में स्थित गौठानों में स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा लगभग 1 लाख 55 हजार किलोग्राम यानि 1550 क्विंटल केंचुआ खाद बनाया जा चुका है। जिसका मूल्य 10 लाख 72 हजार 214 रुपए निर्धारित किया गया है। जिसका सीधा फायदा खाद निर्माण में लगी महिलाओं को होगा। जनपद पंचायत दुर्ग में 50 हजार 150 किलोग्राम केंचुआ खाद बनाया गया है जिसका मूल्य है, 3 लाख 20 हजार 680 रुपए , जनपद पंचायत धमधा में 54 हजार 697 किलोग्राम वर्मी कम्पोस्ट खाद का निर्माण किया गया जिसका मूल्य 4 लाख 81 हजार 434 रुपए निर्धारित बकित गया है। इसी प्रकार जनपद पंचातय पाटन में कुल 50 हजार 230 किलोग्राम केंचुआ खाद निर्मित किया गया। जिसका मूल्य मुल्य 2 लाख 71 हजार है। जिले के ग्रामीण गौठानों में अब तक निर्मित 1 लाख 55 हजार किलो खाद में से 66 हजार 666 किलोग्राम खाद का उठाव हो चुका है और 49 हजार 241किलोग्राम का उठाव शेष है।
गौठानों में निर्मित 4 हजार 161 कम्पोस्ट टैंकों में अगली खेप की तैयारी शुरू, अगली खेप के लिए गौठानों में 4 हजार से अधिक टंकियां भरी गईं- राज्य शासन द्वारा जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए किए गए प्रयासों से वर्मी कम्पोस्ट खाद की मांग काफी बढ़ने लगी है इस लिहाज से आने वाले समय मे महिलाओं को और अधिक फायदा होगा।
जैविक खेती का महत्त्व समझने लगे हैं इसलिए गांव में स्थित बाड़ियों में भी वर्मी कम्पोस्ट की अच्छी खपत हो रही है। जैविक खाद की मदद से पौष्टिक सब्जियां उगाई जा रही है। जिले के गौठानो में वर्मी कम्पोस्ट की 4161 टंकियां बन चुकी हैं। इन सभी वर्मी कम्पोस्ट से खाद निकालने के बाद दूसरे चरण का उत्पादन लेने की तैयारी शुरू हो गई है। अगली खेप के लिए टंकिया भरी जा चुकी है। डी-कंपोजर का इस्तेमाल कर टंकी भरने के बाद 45 सर 60 दिनों के अंदर खाद बनकर तैयार होगी। ये पूरा काम महिलाओं द्वारा किया जा रहा है । गौठानो में टंकी भरने से लेकर खाद की बिक्री का काम महिलाएं संभाल रही है। कृषि विभाग द्वारा आत्मा योजना के तहत पहले महिलाओ को केंचुआ खाद बनाने का निःशुल्क प्रशिक्षण दिया गया फिर धीरे-धीरे इन महिलाओं का आत्म विश्वास बढ़ा। किसान भाई भी अब गौठानों से खाद खरीद रहे हैं।
सेहत /शौर्यपथ /क्या आप जानते हैं कि सिर्फ पीठ के बल सोने मात्र से ही आपकी कौन सी 5 सेहत समस्याएं दूर हो सकती है? आइए, हम आपको बाताते हैं उन सेहत परेशानियों के बारे में जो सिर्फ पीठ के बल सोने से ठीक हो सकती है -
1 कमर दर्द से बचाव - पीठ के बल सोना कमर को आधार देता है, जिसके कारण कमर दर्द नहीं होता और अगर होता भी है तो उसमें काफी हद तक राहत मिलती है।
2 गर्दन के दर्द से राहत - चूंकि पीठ के बल लेटने पर आपकी गर्दन को भी सही तरीके से तकिये का सपोर्ट मिल पाता है, अत: गर्दन के दर्द में लाभ होता है। जबकि गलत तरीके से सोने पर गर्दन को सही सपोर्ट नहीं मिल पाता।
3 अम्लीय रिसाव में कमी - यह सोने की वह अवस्था है जिसमें आपके पेट की स्थिति सही होती है, जिसके कारण पेट में अम्लीय रिसाव नहीं होता या उसमें कमी आती है।
4 झुर्रिया कम होती हैं - जब आप पीठ के बल सोने के बजाए गलत तरीके से सोते हैं, तो आपका चेहरा भी उसके अनुरूप अवस्था में होता है, और उस पर दबाव एवं झुर्रियां आती हैं। खास तौर से लंबे समय तक ऐसा होने पर झुर्रिया बढ़ सकती है।
5 शरीर सुडौल रहता है -
जब आप लंबे समय तक अपने शरीर को बेढंग और गलत अवस्था में रखते हैं तो शरीर का बेडोल होना स्वभाविक है। इसका एक कारण यह भी है कि जब आप सोते हैं तब आपका शरीर विकास करता है।
शौर्यपथ / कई लोगों को पूरे दिन में अत्यधिक बार डकार आने की शिकायत होती है, जिस वजह से उन्हें अन्य लोगों के सामने शर्मिंदगी भी उठानी पड़ती है। अगर आपको भी अत्यधिक डकार आने की शिकायत रहती हो तो इसे हल्के में न लें। आइए, जानते हैं किन कारणों से बार-बार डकार आ सकती है - 1 कई बार आपके खान-पान का गलत तरीका भी डकार आने का कारण बनता है। तली-भुनी चीजें, कोल्ड्रिंक, फूलगोभी, बीन्स, ब्रोकोली आदि को खाने से पेट में गैस बनती है, जो डकार आने का कारण हो सकता है। इन चीजों को रात में न खाएं।
2 लंबे समय तक कब्ज की समस्या का बना रहना भी अत्यधिक डकार आने का एक प्रमुख कारण है। इस मामले में पहले आपको कब्ज से निपटने की जरूरत होगी।
3 बार-बार डकार आने का एक प्रमुख कारण है अपचन। जी हां, अगर आपके द्वारा ग्रहण किया हुआ भोजन पच नहीं पा रहा है तो यह समस्या होना आम बात है।
4 कई बार छोटे-छोटे कारण पेट में गैस पैदा करके इस तरह की समस्याओं को जन्म देते हैं, जैसे ग्लास से पानी पीने के बजाए ऊपर से पीना, खाना खाते समय बात करना, च्यूइंग गम आदि कारणों से पेट में हवा जाकर गैस पैदा करती है और यह समस्या होती है। इसे ऐरोफेस कहते हैं।
5 जब गैस की वजह से आपका पाचन तंत्र गड़बड़ा जाए तो एच पायलोरी नामक बैक्टीरिया के कारण पेप्टिक असर की समस्या पैदा होती है जो डकार आने के साथ-साथ पेट दर्द का भी कारण हो सकता है।
शौर्यपथ / हिन्दू धर्म के अनुसार हमारा ब्रह्मांड, धरती, जीव, जंतु, प्राणी और मनुष्य सभी का निर्माण आठ तत्वों से हुआ है। इन आठ तत्वों में से पांच तत्व को हम सभी जानते हैं। आओ जानते हैं पांच तत्व क्या है।
हिन्दू धर्म के अनुसार इस ब्रह्मांड की उत्पत्ति क्रम इस प्रकार है- अनंत-महत्-अंधकार-आकाश-वायु-अग्नि-जल-पृथ्वी। अनंत जिसे आत्मा कहते हैं। पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि, आकाश, मन, बुद्धि और अहंकार यह प्रकृति के आठ तत्व हैं। उक्त सभी की उत्पत्ति आत्मा या ब्रह्म की उपस्थिति के कारण है।
आकाश के पश्चात वायु, वायु के पश्चात अग्नि, अग्नि के पश्चात जल, जल के पश्चात पृथ्वी, पृथ्वी से औषधि, औषधियों से अन्न, अन्न से वीर्य, वीर्य से पुरुष अर्थात शरीर उत्पन्न होता है।- तैत्तिरीय उपनिषद
1. पृथ्वी तत्व : इसे जड़ जगत का हिस्सा कहते हैं। हमारी देह जो दिखाई देती है वह भी जड़ जगत का हिस्सा है और पृथ्वी भी। इसी से हमारा भौतिक शरीर बना है, लेकिन उसमें तब तक जान नहीं आ सकती जब तक की अन्य तत्व उसका हिस्सा न बने। जिन तत्वों, धातुओं और अधातुओं से पृथ्वी बनी है उन्हीं से यह हमारा शरीर भी बना है।
2. जल तत्व : जल से ही जड़ जगत की उत्पत्ति हुई है। हमारे शरीर में लगभग 70 प्रतिशत जल विद्यमान है उसी तरह जिस तरह की धरती पर जल विद्यमान है। जितने भी तरल तत्व जो शरीर और इस धरती में बह रहे हैं वो सब जल तत्व ही है। चाहे वो पानी हो, खून हो, वसा हो, शरीर में बनने वाले सभी तरह के रस और एंजाइम।
3. अग्नि अत्व : अग्नि से जल की उत्पत्ति मानी गई है। हमारे शरीर में अग्नि ऊर्जा के रूप में विद्यमान है। इस अग्नि के कारण ही हमारा शरीर चलायमान है। अग्नि तत्व ऊर्जा, ऊष्मा, शक्ति और ताप का प्रतीक है। हमारे शरीर में जितनी भी गर्माहट है वो सब अग्नि तत्व ही है। यही अग्नि तत्व भोजन को पचाकर शरीर को निरोगी रखता है। ये तत्व ही शरीर को बल और शक्ति वरदान करता है।
4. वायु तत्व : वायु के कारण ही अग्नि की उत्पत्ति मानी गई है। हमारे शरीर में वायु प्राणवायु के रूप में विद्यमान है। शरीर से वायु के बाहर निकल जाने से प्राण भी निकल जाते हैं। जितना भी प्राण है वो सब वायु तत्व है। धरती भी श्वांस ले रही है। वायु ही हमारी आयु भी है। जो हम सांस के रूप में हवा (ऑक्सीजन) लेते हैं, जिससे हमारा होना निश्चित है, जिससे हमारा जीवन है। वही वायु तत्व है।
5. आकाश तत्व : आकाश एक ऐसा तत्व है जिसमें पृथ्वी, जल, अग्नि और वायु विद्यमान है। यह आकाश ही हमारे भीतर आत्मा का वाहक है। इस तत्व को महसूस करने के लिए साधना की जरूरत होती है। ये आकाश तत्व अभौतिक रूप में मन है। जैसे आकाश अनन्त है वैसे ही मन की भी कोई सीमा नहीं है। जैसे आकाश में कभी बादल, कभी धूल और कभी बिल्कुल साफ होता है वैसे ही मन में भी कभी सुख, कभी दुख और कभी तो बिल्कुल शांत रहता है। ये मन आकाश तत्व रूप है जो शरीर मे विद्यमान है।
इन पंच तत्व से ऊपर एक तत्व है जो आत्मा (ॐ) है। जिसके होने से ही ये तत्व अपना काम करते हैं।
इन्ही पांच तत्वों को सामूहिक रूप से पंचतत्व कहा जाता है। इनमें से शरीर में एक भी न हो तो बाकी चारों भी नहीं रहते हैं। किसी एक का बाहर निकल जाने ही मृत्यु है। आत्मा को प्रकट जगत में होने के लिए इन्हीं पंच तत्वों की आवश्यकता होती है। जो मनुष्य इन पंच तत्वों के महत्व को समझकर इनका सम्मान और इनको पोषित करता है वह निरोगी रहकर दीर्घजीवी होता है।
धर्म संसार / शौर्यपथ / गीता उपदेश भले ही श्रीकृष्ण ने रणक्षेत्र में दिए हैं, परन्तु हम महिलाओं के जीवन में रोजमर्रा के काम और जिंदगी की गुजर-बसर किसी जंग से कम नहीं। ये उपदेश केवल ज्ञान अर्जित करने व भक्ति मात्र का साधन नहीं है, यह आत्मसात करके जीने की कला है। कथा सुनने-सुनाने, दान-पुण्य, ज्ञान बघारने का शस्त्र नहीं बल्कि जीवन के कठिनतम मार्ग को आसान करने का शस्त्र है। दीवार पर लटके गीता संबंधी श्लोक, उपदेश, फोटो मोक्ष नहीं देते।
नहीं उन्हें पठन-पाठन मात्र से गुन सकते हो। इन्हें आजमाने के आलावा कोई और रास्ता जिंदगी की राह आसान नहीं बनाता।
इसके लिए न तो आपको किसी आडम्बर की जरुरत है, न किसी विशिष्टता की। जरुरत है केवल खुद को जानने और खुद को खुश कैसे रखें ऐसी विधा की, जो सामान्य बुद्धि के साथ भी घरेलू जिंदगी को भी कारगर बनाने की अपार शक्ति रखती है, वो है गीता... ऐसी ही कुछ बातें आज हम जानते हैं जो हम महिलाओं के जीवन को सबल, शांत, आत्मविश्वासी और आनंददायक बनाती है।
उदारता- हमारा मूल स्वभाव है. जन्मजात, पैदाईशी हममें मातृत्व, दया, प्रेम, वात्सल्य होता है। उसे बरक़रार रखें। प्रकृति और पर्यावरण, जीव-जंतु सभी के लिए उदार दृष्टिकोण रखें। सामाजिक जीवन अपने आप मधुरता लिए हो जाएगा।
कला से प्रेम- मोरपंख, व बांसुरी धारण करना, संस्कृति व पर्यावरण के प्रति लगाव श्रीकृष्ण ने सिखाया, हम अपने आसपास हमेशा कलात्मक, शौकीन, सकारात्मक, खुश और हर पल जिन्दादिली से जीने व जीने देने वाले हमेशा कलाप्रेमी होते हैं।
आत्मभाव में रहना- नाम, पद, प्रतिष्ठा, संप्रदाय, धर्म, स्त्री या पुरुष हम नहीं हैं। ये सब समय के साथ बदलने वाली चीजें हैं। ये शरीर अग्नि, जल, वायु, पृथ्वी, आकाश से बना है और इसी में मिल जाएगा। लेकिन आत्मा स्थिर है और हम आत्मा हैं। आत्मा कभी न मरती है, न इसका जन्म है और न मृत्यु! आत्मभाव में रहना ही मुक्ति है। इसलिए अमीर नहीं-अमर होने की दिशा में कार्य करते चलें।
नजरिए को शुद्ध करें- हमें अपने देखने के नजरिए को शुद्ध करना होगा और ज्ञान व कर्म तथा वास्तविकता को एक रूप में देखना होगा, जिससे हमारा नजरिया बदल जाएगा। सुनी सुनाई बातों के बजाय घटनाक्रम के सन्दर्भ की समझने की कोशिश कर बात को सुलझाने की कोशिश करें। कई छोटे-बड़े मसले पारिवारिक जीवन में आते हैं जिन्हें हमें ही निपटना होता है।
क्रोध पर काबू, मन को शांत रखें- अपने क्रोध पर काबू रखें। क्रोध से भ्रम पैदा होता है और भ्रम से बुद्धि विचलित होती है, हम चिड़चिड़ापन लिए घूमते हैं। ऐसे स्वभाव वालों को कोई पसंद नहीं करता। अकेलापन व भय बढ़ने लगता है तब ये हमारे आत्मविश्वास के दुश्मन बन जाते हैं। इसलिए अशांत मन को शांत करने के लिए अभ्यास और विश्वास को पक्का करते जाओ। यही गीता भी सिखाती है।
अपना काम स्वयं करें, पहले विचार करें-
हम जो भी कर्म करते हैं उसका फल हमें ही भोगना पड़ता है। इसलिए कर्म करने से पहले विचार कर लेना चाहिए। कोई और काम पूर्णता से करने से कहीं अच्छा है कि हम अपना ही काम करें। भले वह अपूर्ण क्यों न हो। दखलंदाजी की आदत आपको अपमान के लिए प्रेषित करती हैं।
कोई काम बड़ा-छोटा नहीं- सारथी बनना, युधिष्ठिर की ओर से दूत बन कर जाने से भी श्रीकृष्ण ने कभी गुरेज नहीं किया। नैतिक व सत्य, न्याय के लिए उन्होंने सभी कार्य किए। हमारे जीवन में भी ऐसे ही कई कम हैं जो हम अपनी दृष्टि से छोटा-बड़ा आंकते हैं जो हमें प्रगति मार्ग से भटकाते हैं।
समता का भाव व निर्बल का साथ- कोशिश करें सभी के प्रति समता का भाव हो। कठिन है पर असंभव नहीं। ये भाव हमें आंतरिक सुख देता है। श्रीकृष्ण की तरह हमेशा निर्बल, कमजोर परन्तु सत्यनिष्ठ व न्याय पर अटल का साथ दें। जैसे सुदामा, पांडवों का साथ श्रीकृष्ण ने दिया।
अहंकार रहित अन्याय का प्रतिकार- नारी हमेशा नारायणी है। श्रीकृष्ण नारायण के अवतार हैं। उन्हीं का अंश हम भी हैं। अपनी शक्ति को पहचान अन्याय का विरोध करना ही गीता हमें सिखाती है। श्रीकृष्ण ने जरुरत पड़ने पर अपना सुदर्शन चक्र भी उन्हीं हाथों की उंगली पर धारण किया शत्रु शमन,दमन किया जिनसे वे बांसुरी की मधुर व मृदुल स्वर लहरियां निकलने के लिए उपयोग करते रहे।
परिवर्तन संसार का नियम है- यहां सब बदलता रहता है. इसलिए सुख-दुःख, लाभ-हानि, जय-पराजय, मान-अपमान आदि में एक भाव में स्थित रहकर हम जीवन का आनंद ले सकते हैं। आज जो आपके साथ हैं वे कल अपने स्वार्थ के लिए पाला बदल लेंगें। रामायण में भी उल्लेखित है-‘स्वारथ लागि करहिं सब प्रीति इसलिए बनते-बिगड़ते पारिवारिक, सामाजिक संबंधों का विलाप न ही करें तो बढ़िया है।
वर्तमान का आनंद लो- बीते कल और आने वाले कल की चिंता अनावश्यक रूप से नहीं करनी चाहिए, क्योंकि जो होना है वही होगा। जो होता है, अच्छा ही होता है, इसलिए वर्तमान का आनंद लो। कोरोना जैसी कई महामारियां और प्राकृतिक विपदाएं हमें समय समय पर सबक सिखाने आतीं हैं। अहंकार को तोड़ सर्वशक्तिमान की ताकत का अहसास दिलाती हैं। अपने को भगवान के लिए अर्पित कर दो। फिर वो हमारी रक्षा करेगा और हम दुःख, भय, चिन्ता, शोक और बंधन से मुक्त हो जाएंगे।
गीता केवल हमारी धार्मिक आस्था का ग्रंथ मात्र नहीं है, ये दर्शन है कर्मों का, जीने की कला का। प्रकृति, कला, न्याय, धर्म, नैतिक आचरण, आत्म-सम्मान से जीने का पथ प्रदर्शन करती गीता हमारी सृष्टि का निर्माण करने में अपनी कोख के योगदान की महिमा,शक्ति, सम्मान की गाथा भी कहती है। आओ सीखें, जानें, आसान से इन उपायों को जो हमें ‘हम’ होने का ज्ञान कराती है। हमसे हमीं को मिलवाती है गीता...
दुर्ग / शौर्यपथ / 37 छ.ग. बटालियन एनसीसी दुर्ग के कमान अधिकारी कर्नल हेमंत दुबे के निर्देशानुसार व प्राचार्य डॉ आरके साहू के सतत प्रेरणा से ले० डॉ ० हरीश कुमार कश्यप के निर्देशन में कल्याण स्नातकोत्तर महाविद्यालय के एनसीसी कैडेटों द्वारा सामाजिक सेवा और सामुदायिक विकास हेतु विभिन्न गतिविधियां की जा रही है साथ ही जन जन के बीच स्वच्छता हेतु जागरूकता अभियान भी समय-समय पर कर रही है । जिससे समाज के सभी व्यक्ति स्वच्छता को अपने जीवन शैली में अपना सके और राष्ट्र निर्माण में अपना बहुमूल्य योगदान दे सकें । दिसंबर महीने में एसएससीडी एक्टीविटी के अंतर्गत आज एनसीसी छात्र सैनिकों ने सर्वप्रथम कोसानाला जाकर वहां पर गौतम बुद्ध की प्रतिमा की साफ सफाई की उसके पश्चात सेक्टर 6 भिलाई में सुभाष चंद्र बोस की व भीमराव अंबेडकर की तथा रेलवे क्रॉसिंग सुपेला के पास स्थित जयप्रकाश नारायण जी की प्रतिमा की साफ सफाई की गई साथ ही आसपास के परिसर की भी सफाई की गई और लोगों के बीच यह संदेश पहुंचाने का प्रयास किया गया कि अपने आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखें व स्वयं भी स्वच्छ व स्वस्थ रहें ।
समस्त कार्यक्रम का संचालन लेफ्टिनेंट डॉ हरीश कुमार कश्यप के द्वारा किया गया एवं प्रत्येक प्रतिमा की सफाई के पूर्व महान व्यक्तित्व के धनी व त्यागमूर्ति धर्मगुरु गौतम बुद्ध जी, आजादी के लिए अपनी जान न्यौछावर करने वाले महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सुभाष चंद्र बोस के बारे में , बहुमुखी प्रतिभा के धनी और भारत के संविधान के निर्माता डॉ० भीमराव आंबेडकर व सामाजिक जागरूकता व समानता फैलाने वाले जयप्रकाश नारायण जी जैसे महापुरुषों के बारे में व्यापक जानकारी दी गई । आज के इस एसएससीडी कार्यक्रम में मुख्य रूप से कैडेट गोविंद ,फणींद्र ,दुर्गेश, के० अजय राव, गगन साहू, कोमल, सोनू, राहुल, विशाल सहित 90 कैडेटों ने अपना अमूल्य योगदान दिया।
दुर्ग / शौर्यपथ / मौजूदा वैश्विक महामारी के बावजूद, इस साल भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भिलाई में कैंपस प्लेसमेंट ने नई ऊँचाइयों को प्राप्त किया है। इस साल कुल 150 छात्रों ने प्लेसमेंट के लिए पंजीकरण किया है। अब तक आईआईटी भिलाई के छात्रों ने अमेजॅन, कॉमवॉल्ट, पेटीएम, एयर एशिया, एबीबी, टीसीएस रिसर्च इनोवेशन, एलएंडटी, रिलायंस जियो और रेडिसिस जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों से 46 ऑफर प्राप्त किए हैं। वैश्विक महामारी कोविड-19 के चलते हुए, खराब अर्थव्यवस्था का इस साल नियुक्तियों पर बहुत ही कम प्रभाव रहा है। हायरिंग प्रक्रिया सुचारु रूप से ऑनलाइन मोड पर की गई, और पिछले वर्ष की अपेक्षा इस साल छात्रों की प्लेसमेंट पैकेज में वृद्धि हुई है। इस साल का उच्चतम पैकेज 31.97 लाख सालाना का है, जो की अमेजॅन ने दिया है ।
वीएमवेयर और नीडलए.आई जैसी बड़ी कंपनियों ने आईआईटी भिलाई के तीन छात्रों को 19.3 लाख के सालाना पैकेज पर प्री-प्लेसमेंट ऑफर भी दिया है। प्लेसमेंट कार्यालय के संकाय प्रभारी डॉ. धीमान साहा ने कहा कि इस साल भी हमने पहले सत्र में सकारात्मक रुझान देखा है। आईआईटी भिलाई के छात्रों ने प्रतिष्ठित कंपनियों से ऑफर हासिल करके अपनी सक्षमता साबित की है और संस्थान ने कठिन परिस्थियों के बावजूद अनुमान से बेहतर प्रदर्शन किया है। पिछले प्लेसमेंट सीजन में 135 कंपनियों ने पंजीकरण करवाया था और इन शीर्ष कंपनियों ने हमारे प्रतिभावान छात्रों को नियुक्त करने में काफी रुचि दिखाई थी। बीते वर्ष अग्रणी कंपनियों में 82 जॉब ऑफरस के साथ आईआईटी भिलाई के प्रथम बैच के छात्रों ने एक नई मिसाल कायम की थी। प्लेसमेंट कार्यालय इस सत्र के अंत तक शेष छात्रों को सफलतापूर्वक प्लेसमेंट दिलाने के लिए तत्पर है।
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए शुरू किये गये महत्वाकांक्षी योजना ’पढ़ई तुंहर दुआर’ के हमारे नायक कालम में गुरुवार 24 दिसम्बर से ब्लॉग लेखन राजभाषा छत्तीसगढ़ी में शुरू हो रहा हैं। छत्तीसगढ़ी भाषा में शिक्षक और विद्यार्थियों के ब्लॉग अपलोड किए गए हैं। ’पढ़ई तुंहर दुआर’ कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों को ऑनलाइन और ऑफलाइन अध्यापन विधियों के माध्यम से पढ़ाई की सुविधा मुहैया कराई जा रही है। यह कार्यक्रम निरन्तर अपनी सफलता की ओर अग्रसर है।
इसके गुरूवार 24 दिसम्बर से हमारे नायक कॉलम में छत्तीसगढ़ी भाषा में शिक्षक और विद्यार्थी दोनों के ब्लॉग अपलोड किए गए हैं, जिसमें शिक्षक संवर्ग से बेमेतरा जिले की शिक्षिका श्रीमती शीतल बैस, जिन्होंने दर्जनभर से अधिक कहानियों का अनुवाद स्टोरी वीवर की वेबसाइट में किया है तथा विद्यार्थी संवर्ग से विशेष आवश्यकता वाली विद्यार्थी रायपुर जिले की कुमारी मुस्कान शर्मा शामिल हैं। यह दोनों ब्लॉग छत्तीसगढ़ की राजभाषा छत्तीसगढ़ी में आज अपलोड हुए हैं, जिसे रायपुर जिले के ब्लॉग लेखक लोकेश कुमार वर्मा है। यह लोकेश कुमार वर्मा का 20 वां ब्लॉग है। हमारे नायक कॉलम के सफल संचालन में सराहनीय योगदान देने के लिए डॉ.एम. सुधीश, सहायक संचालक, समग्र शिक्षा छत्तीसगढ़ ने ब्लॉग लेखक टीम के नेतृत्वकर्ता गौतम शर्मा और उनकी पूरी टीम को शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।
छत्तीसगढ़ शासन स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ला के द्वारा पढ़ई तुंहर दुआर के कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश के शिक्षकों और बच्चों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सीजीस्कूल पोर्टल पर हमारे नायक कॉलम को जोड़ा गया है, जिसमें प्रतिदिन एक शिक्षक और एक विद्यार्थी की कहानी अपडेट किया जाता है। हमारे नायक कॉलम में नायक का चयन प्रदेश के सभी जिलों से कुछ चुनिंदा शिक्षकों, विद्यार्थियों तथा शिक्षा सारथियों को उनके द्वारा किये गये उत्कृष्ट कार्यों की समीक्षा के आधार पर किया जाता है। अभी तक हमारे नायक कॉलम में विगत 8 महीनों में लगभग 400 नायक पोर्टल में स्थान प्राप्त कर चुके हैं।
हमारे नायक कॉलम में प्रत्येक माह नए-नए थीम के साथ कार्य प्रारंभ होता है। हमारे नायक कॉलम में प्रतिदिन चयनित नायकों की कहानी तैयार करने के लिए एक राज्य स्तरीय कुशल ब्लॉग राईटर्स टीम कार्य कर रही है, इस टीम का कुशल नेतृत्व डॉ. एम. सुधीश, सहायक संचालक, समग्र शिक्षा छत्तीसगढ़ के मार्गदर्शन में सूरजपुर जिले के शिक्षक गौतम शर्मा के द्वारा किया जा रहा है ।
अभी तक शिक्षक संवर्ग से ऑनलाइन कक्षा, लाउडस्पीकर कक्षा, पढ़ई तुंहर पारा तथा ऑगमेंटेड रियलिटी शिक्षण तकनीक तथा विद्यार्थी संवर्ग में सर्वाधिक ऑनलाइन कक्षा में सम्मिलित होने वाले विद्यार्थी, सर्वाधिक शंका पूछने वाले विद्यार्थी, पोर्टल पर सर्वाधिक शैक्षणिक सामग्री देखने वाले विद्यार्थी और मोहल्ला क्लास का सफल संचालन करने वाले शिक्षा सारथियों को हमारे नायक के रूप में चयन किया गया है। वर्तमान आठवें चरण में स्टोरीवीवर की वेबसाइट में सर्वाधिक कहानियां लिखकर अपडेट करना तथा वेबसाइट पर उपलब्ध कहानियों का छत्तीसगढ़ के विभिन्न लोक भाषाओं में अनुवाद करने वाले शिक्षकों तथा विशेष आवश्यकता वाले प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का चयन हमारे नायक के रूप में किया जा रहा है। वर्तमान में स्टोरीवीवर वेबसाइट पर राज्य भर के बहुत सारे शिक्षक बहुत सी स्वरचित कहानियों को लिखकर अथवा वेबसाइट पर उपलब्ध कहानियों को अनुवाद कर अपलोड कर चुके हैं।
हमारे नायक के आठवें चरण में हिन्दी, अंग्रेजी के साथ ही साथ छत्तीसगढ़ की अन्य स्थानीय भाषाओं में भी ब्लॉग लेखन का कार्य किया जा रहा है। जल्द ही संस्कृत भाषा के साथ छत्तीसगढ़ की स्थानीय भाषा गोंडी, सरगुजिया, कुरूख आदि भाषा में ब्लॉग लेखन किए जाने की योजना है, जो हिंदी अनुवाद के साथ हमारे कॉलम में अपलोड किया जायेगा। इस चरण से राज्य भर के विभिन्न भाषाओं में ब्लॉग पढ़ने का अवसर मिल सकेगा।
जांजगीर-चांपा / शौर्यपथ / राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत पशुपालकों विभिन्न योजनाओं के तहत आर्थिक रूप से समृद्ध किया जा रहा है। योजनाओं के तहत दुध उत्पादन, बकरी पालन, मुर्गी पालन, मछली पालन करने वाले किसानों को अनुदान उपलब्ध करवाया जाता है।
पशुधन विकास विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार जांजगीर-चांपा जिले के विकासखण्ड बम्हनीडीह के ग्राम करनौद निवासी श्री रामचरण पटेल बकरी पालन व्यवसाय से प्रतिवर्ष 70 हजार रूपये की आमदनी प्राप्त हुआ है। पशुधन विकास विभाग द्वारा राष्ट्रीय कृषि विकास योजना अंतर्गत श्री रामचरण पटेल को जमुनापारी नर बकरा निःशुल्क दिया गया था। उस वक्त उनके पास कुल 20 देशी बकरियां थी। जमुनापरी नस्ल का बकरा मिलने से नस्ल सुधार हुआ। इससे उन्नत नस्ल के कुल 79 बकरियां हो गयी। जिसमे से प्रजनन योग्य - 3 नर बकरे, 40 मादा बकरी है। जिसमे से - 22 बच्चे दे चुकी है तथा 38 मेमने थे। इस व्यवसाय से श्री रामचरण को एक वर्ष में लगभग 70 हजार रूपये की आमदनी हुई। पशुधन विकास विभाग के द्वारा रामचरण का मार्गदर्शन, नियमित टीकाकरण और कार्य कृमिनाशक दवापान कराया जाता है। श्री रामचरण से प्रेरित होकर ग्राम करनौद में 15 पशुपालकों द्वारा बकरी पालन का कार्य किया जा रहा है। पशुधन विकास विभाग की इस योजना से पशुपालको को प्रोत्साहन मिला है।
पारम्परिक व्यवसाय को पुनर्जीवित करने मल्टी युटिलिटी सेंटर में मिल रहा माटीकला शिल्प का उत्कृष्ट प्रशिक्षण
धमतरी / शौर्यपथ / आधुनिकता और वैज्ञानिकता के दौर में पुरातन परम्परा और संस्कृति को बचाकर अक्षुण्ण रखना आज बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है। ऐसे में अपने पुश्तैनी व्यवसाय से जुड़े लोगों को इसे जारी रखने के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ रही है। मिट्टी के काम से जुड़े लोग भी उनमें से एक है जो जीवन निर्वाह के अपने पारम्परिक व्यवसाय को तिलांजलि देने विवश हैं। कुरूद विकासखण्ड के ग्राम नारी में महिलाओं को समूह में गठित कर वहां नवनिर्मित मल्टी युटिलिटी सेंटर में माटीकला का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे मिट्टी के कलात्मक बर्तन, उपकरण बनाने का उत्कृष्ट प्रशिक्षण मिल रहा है, वहीं इस दौरान काम सीखने के एवज में पैसे भी मिल रहे हैं।
प्राचीन काल में कुम्हारों के द्वारा तैयार किए गए मिट्टी के बरतनों का ही उपयोग किया जाता था जो उनके जीविकोपार्जन का सशक्त माध्यम था। पिछले कुछ दशकों से मशीनीकरण के दौर मंे श्रमसाध्य कामों व संस्कृति, कला व शिल्प का अधोपतन हुआ है, जिसके चलते जीवन निर्वाह के लिए उन्हें पूर्वजों का व्यवसाय छोड़कर अन्य तरह का व्यवसाय व काम अपनाना पड़ रहा है। इन्हीं शिल्प कलाओं को पुनर्जीवित करने तथा पारम्परिक हुनर को और अधिक कारगर बनाने छत्तीसगढ़ माटीकला बोर्ड द्वारा समूह की महिलाओं को मृदा शिल्प का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिला पंचायत के प्रयासों से बोर्ड के साथ अनुबंध कर कुरूद विकासखण्ड की ग्राम पंचायत नारी के मल्टी युटिलिटी सेंटर में महिलाओं का समूह तैयार कर उन्हें विभिन्न प्रकार के मृदा हस्तशिल्प का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिसमें मिट्टी के कुल्हड़, कप, गिलास, केतली, दाल-कटोरा, रोटी-कटोरी, पानी बोतल, बिरयानी हण्डी, पेन स्टैण्ड, गमला आदि शामिल हैं। सेंटर के प्रशिक्षक श्री पुरूषोत्तम साहू ने बताया कि गांव में सर्वे कराकर यहां पर 08 स्वसहायता समूह गठित करके इच्छुक 23 महिलाओं को मिट्टी से निर्मित बरतन व उपकरण तैयार करने का प्रशिक्षण पिछले दो माह से दिया जा रहा है।
समूह में ज्यादातर कुम्हार महिलाएं जुड़ी हैं जो पहले परम्परागत रूप से मटका, खपरैल, दीया, हण्डी आदि बनाने का काम करती थीं। चूंकि मिट्टी के पारम्परिक कार्य में वे पूर्व से पारंगत हैं, इसलिए उन्होंने सहजता से कुल्हड़, पानी बोतल, कप, बिरयानी हण्डी, केतली आदि बनाने में सिद्धहस्त हो गईं। प्रशिक्षण के लिए माटीकला बोर्ड से मिले इलेक्ट्राॅनिक चाक से उनका काम और भी आसान हो गया। श्री साहू ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को प्रोत्साहन के तौर पर प्रतिदिन मजदूरी भी दी जाती है जिससे उन्हें जीविकोपार्जन में किसी तरह की दिक्कत ना हो। यहां पर तैयार किए गए उत्पादों को बोर्ड द्वारा परिवहन कर मंगाया जाता है। साथ ही इसे जल्द ही जिला कार्यालयों में उपयोग करने के लिए जिला प्रशासन द्वारा कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इसके लिए बड़े पैमाने पर मिट्टी के बरतन व सामग्री तैयार की जा रही है।
ग्राम पंचायत नारी के सरपंच जगतपाल साहू ने बताया कि मल्टी युटिलिटी सेंटर में गांव की महिलाएं मृदाशिल्प का प्रशिक्षण लेकर बेहतर कार्य कर रही हैं। इससे स्वरोजगार के साथ-साथ अपने काम को बेहतर बनाकर स्वावलम्बन की ओर अग्रसर हो रही हैं। सेंटर में गीली मिट्टी से कुल्हड़ तैयार कर रहीं श्रीमती खेमिन चक्रधारी ने बताया कि पहले वे सिर्फ मिट्टी के कवेलू (खपरैल), दीये तथा मटके तैयार करने में अपने पति के कामों में मदद करती थीं, वह भी कुछ ही सीजन में मांग के आधार पर। अब वह माटीकला बोर्ड से जुड़कर आजीवन जारी रखने की इच्छा रखती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्लास्टिक के डिस्पोजेबल प्लास्टिक कप, कटोरी, गिलास, प्लेट के आ जाने से उनके पुश्तैनी कारोबार पर प्रतिकूल असर पड़ा है। अगर मिट्टी शिल्प का काम आगे भी चला तो उन्हें दूसरे प्रकार का रोजगार अपनाने की जरूरत ही नहीं पडे़गी। श्रीमती ईश्वरी चक्रधारी ने बताया कि मिट्टी में नई डिजाइन उकेरने का काम बेहद पसंद आया। उन्होंने उम्मीद जाहिर करते हुए कहा कि यदि लोगों में इसकी उपयोगिता और महत्व की जानकारी हो तो आगे बेहतर प्रतिसाद मिलेगा, वहीं वे पारम्परिक व्यवसाय से भी जुड़े रहकर इसे आगे बढ़ा सकती हैं। श्रीमती नीरा, पुनिया, बसंती ने कहा कि उन्हें उनके गांव में ही ऐसे हुनर सीखने को मिल रहा है, जिससे पुराने व पारम्परिक धंधे को पुनर्जीवन मिल सके।
उल्लेखनीय है कि जिला प्रशासन की विशेष पहल पर बिहान के तहत गठित महिला समूहों को मृदा शिल्प का प्रशिक्षण छत्तीसगढ़ माटीकला बोर्ड के सहयोग से ग्राम नारी में दिया जा रहा है। यह प्रदेश का तीसरा केन्द्र है जहां पर मिट्टी से बरतन, उपकरण, साज-सज्जा के सामान तथा अन्य उपयोगी सामान तैयार किए जा रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान महिलाएं मिट्टी से बने उत्पादों को ‘टच-फिनिशिंग‘ के साथ तैयार सुगढ़ व मनभावन आकार दे रही हैं। इस तरह मल्टी युटिलिटी सेंटर में इलेक्ट्राॅनिक चाक चलाकर महिलाएं जहां एक ओर लुप्तप्राय हो चुके अपने पारम्परिक पेशे को कायम रखने में कामयाब हो रही हैं, वहीं आने वाले समय में आमदनी का बेहतर और सशक्त माध्यम साबित होगा।
धमतरी / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल रायपुर द्वारा आयोजित हाईस्कूल/हायर सेकेण्डरी/हायर सेकेण्डरी व्यावसायिक परीक्षा सत्र 2020-21 के नियमित परीक्षार्थियों के लिए परीक्षा आवेदन पत्र निर्धारित शुल्क के साथ 15 दिसम्बर तक एवं कक्षा नवमीं के परीक्षार्थियों के पंजीयन की तिथि 30 नवम्बर नियत की गई थी। जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि कोविड 19 के संक्रमण की वजह से कक्षा दसवीं एवं बारहवीं के कई विद्यार्थी निर्धारित तिथि तक आवेदन पत्र नहीं भरे जाने एवं प्राचार्यों से प्राप्त आवेदनों को ध्यान में रख परीक्षा आवेदन पत्र एवं कक्षा नवमीं के परीक्षार्थियों के पंजीयन के लिए पूर्व अंतिम तिथि 15 दिसम्बर में आंशिक संशोधन करते हुए अब अंतिम तिथि 31 दिसम्बर निर्धारित की गई है।
उन्होंने सभी शासकीय/अशासकीय/अनुदान प्राप्त हाईस्कूल एवं हायर सेकेण्डरी स्कूल के प्राचार्यों को निर्देशित किया है कि वे हाईस्कूल/हायर सेकेण्डरी/हायर सेकेण्डरी व्यावसायिक परीक्षा सत्र 2020-21 के नियमित परीक्षार्थियों (कक्षा दसवीं/बारहवीं) के लिए परीक्षा आवेदन पत्र तथा कक्षा नवमीं के परीक्षार्थियों के लिए पंजीयन फाॅर्म अंतिम तिथि 31 दिसम्बर तक अनिवार्यतः भरवाना सुनिश्चित करें।
सेहत / शौर्यपथ / चने सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। यदि आप वेजिटेरियन हैं तो आपके लिए चने प्रोटीन का एक बेहतरीन स्रोत हैं। लेकिन इसके फायदे तब और ज्यादा बढ़ जाते हैं, जब हम इन्हें भिगोकर खाएं यानी अंकुरित करके अपनी डाइट में यदि चने को शामिल किया जाए तो यह हमारे स्वास्थ्य के लिए हेल्दी फूड बन जाता है।
चनों को अंकुरित करके खाने से यह सुपर फूड कई पौष्टिक गुणों का भंडार बन जाता है।
अंकुरित चने खाने से आप अपने वजन को भी नियंत्रण में रख सकते हैं। इससे मोटापा बढ़ने जैसी परेशानियों से राहत मिल जाती है। अब आप सोच रहे होंगे वो कैसे, क्योंकि चने के सेवन से पेट भरा-भरा-सा लगता है और जल्दी भूख नहीं लगती है, ऐसे में हम कम ही खाना खाते हैं जिससे कि हमारा वजन कंट्रोल में रहता है।
अंकुरित चने में प्रोटीन अच्छी मात्रा में पाया जाता है, साथ ही इसमें फेट की मात्रा भी कम होती है।
चने के सेवन से आप अपनी हड्डियों और दांतों को मजबूत रख सकते हैं, क्योंकि इसमें कई प्रकार के विटामिन्स और मिनरल्स होते हैं।
इसमें आयरन और सोडियम सहित और भी कई पौष्टिक पदार्थ होते हैं, जो आपके शरीर के लिए कई तरह से फायदेमंद होंगे।
अंकुरित चने के सेवन से यानी जब आप चने को भिगोकर खाते हैं, तब यह आपकी त्वचा और बालों को स्वस्थ रखने में भी बहुत मदद करता है, क्योंकि इसमें एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो बढ़ती उम्र के साथ-साथ त्वचा पर जो प्रभाव पड़ता है उसे कम करते हैं, साथ ही यह बालों के लिए भी बेहतरीन है।
यंग दिखना चाहते हैं तो इसका सेवन नियमित रूप से करें। बालों और आपकी त्वचा को जरूरी नमी मिल जाती है।
अंकुरित चना आपके शरीर के ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद करता है।
सेहत / शौर्यपथ / ध्यान को अंग्रेजी में मेडिटेशन कहते हैं, परंतु धर्म की ही तरह इसका कोई प्रॉपर अंग्रेजी शब्द नहीं है। खैर, जब आंखें बंद करके बैठते हैं तो अक्सर यह शिकायत रहती है कि जमाने भर के विचार उसी वक्त आते हैं। अतीत की बातें या भविष्य की योजनाएं, कल्पनाएं आदि सभी विचार मक्खियों की तरह मस्तिष्क के आसपास भिनभिनाते रहते हैं। इससे कैसे निजात पाएं? माना जाता है कि जब तक विचार है तब तक ध्यान घटित नहीं हो सकता। अब कोई मानने को भी तैयार नहीं होता कि निर्विचार भी हुआ जा सकता है। कोशिश करके देखने में क्या बुराई है। ओशो कहते हैं कि ध्यान विचारों की मृत्यु है। आप तो बस ध्यान करना शुरू कर दें और जानिए इसके 15 लाभ।
यदि ध्यान आपकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया है तो यह आपके दिन का सबसे बढ़िया समय बन जाता है। आपको इससे आनंद की प्राप्ति होती है। फिर आप इसे पांच से दस मिनट तक बढ़ा सकते हैं। पांच से दस मिनट का ध्यान आपके मस्तिष्क में शुरुआत में तो बीज रूप से रहता है, लेकिन 3 से 4 महिने बाद यह वृक्ष का आकार लेने लगता है और फिर उसके परिणाम आने शुरू हो जाते हैं।
1. जहां पहले 24 घंटे में चिंता और चिंतन के 50-60 हजार विचार होते थे वहीं अब उनकी संख्या घटने लगेगी। जब पूरी घट जाए तो बहुत बड़ी घटना घट सकती है। ध्यान से सर्वप्रथम सभी तरह की अनावश्यक मानसिक गतिविधि रूकने लगती है।
2. रोग को शारीरिक बीमारी कहते हैं और शोक को सभी तरह के मानसिक दुख। दोनों की ही उत्पत्ति मन, मस्तिष्क और शरीर के किसी हिस्से में होती है। ध्यान उसी हिस्से को स्वस्थ कर देता है। ध्यान मन और मस्तिष्क को भरपूर ऊर्जा और सकारात्मकता से भर देता है। शरीर भी स्थित होकर रोग से लड़ने की क्षमता प्राप्त करने लगता है। चिंता और चिंतन से उपजे रोगों का खात्मा होगा।
3. ध्यान से श्वास-प्रश्वास में सुधार होने से किसी भी तरह के दुख के मामले में हम आवश्यकता से अधिक चिंता नहीं करते। हमारी भावनाएं श्वास-प्रश्वास से संचालित होते हैं। श्वास-प्रश्वास के सही होने से भावनाएं भी नियंत्रित हो जाती है।
4. प्रतिदिन तीन माह तक सिर्फ 10 मिनट का ध्यान करें। आपके मस्तिष्क में परिवर्तन होंगे और आप किसी भी समस्या को पहले की अपेक्षा सकारात्मक तरीके से लेंगे। मात्र तीन माह में हर तरह के रोग को रोककर शोक को मिटाने की क्षमता है ध्यान में।
5. हम ध्यान है। सोचो की हम क्या है- आंख? कान? नाक? संपूर्ण शरीर? मन या मस्तिष्क? नहीं हम इनमें से कुछ भी नहीं। ध्यान हमारे तन, मन और आत्मा (हम खुद) के बीच लयात्मक सम्बन्ध बनाता है। स्वयं को पाना है तो ध्यान जरूरी है। वहीं एकमात्र विकल्प है।
6. ध्यान का नियमित अभ्यास करने से आत्मिक शक्ति बढ़ती है। आत्मिक शक्ति से मानसिक शांति की अनुभूति होती है। मानसिक शांति से शरीर स्वस्थ अनुभव करता है। ध्यान के द्वारा हमारी उर्जा केंद्रित होती है। उर्जा केंद्रित होने से मन और शरीर में शक्ति का संचार होता है एवं आत्मिक बल मिलता है।
7. ध्यान से विजन पॉवर बढ़ता है तथा व्यक्ति में निर्णय लेने की क्षमता का विकास होता है। ध्यान से सभी तरह के रोग और शोक मिट जाते हैं। ध्यान से हमारा तन, मन और मस्तिष्क पूर्णत: शांति, स्वास्थ्य और प्रसन्नता का अनुभव करते हैं।
8. ध्यान से हर तरह का भय जाता रहेगा। कार्य और व्यवहार में सुधार होगा। रिश्तों में तनाव की जगह प्रेम होगा। दृष्टिकोण सकारात्मक होगा।
9. मानसिक क्षमता बढ़ने के कारण सफलता के बारे में सोचने मात्र से ही सफलता आपके नजदीक आने लगेगी।
10. ध्यान से वर्तमान को देखने और समझने में मदद मिलती है। शुद्ध रूप से देखने की क्षमता बढ़ने से विवेक जाग्रत होगा। विवेक के जाग्रत होने से होश बढ़ेगा। होश के बढ़ने से मृत्यु काल में देह के छूटने का बोध रहेगा। देह के छूटने के बाद जन्म आपकी मुट्ठी में होगा। यही है ध्यान का महत्व।
11. खुद तक पहुंचने का एक मात्र मार्ग ध्यान ही है। ध्यान को छोड़कर बाकी सारे उपाय प्रपंच मात्र है। यदि आप ध्यान नहीं करते हैं तो आप स्वयं को पाने से चूक रहे हैं। स्वयं को पाने का अर्थ है कि हमारे होश पर भावना और विचारों के जो बादल हैं उन्हें पूरी तरह से हटा देना और निर्मल तथा शुद्ध हो जाना।
ज्ञानीजन कहते हैं कि जिंदगी में सब कुछ पा लेने की लिस्ट में सबमें ऊपर स्वयं को रखो। मत चूको स्वयं को। 70 साल सत्तर सेकंड की तरह बीत जाते हैं। योग का लक्ष्य यह है कि किस तरह वह तुम्हारी तंद्रा को तोड़ दे इसीलिए यम, नियम, आसन, प्राणायम, प्रत्याहार और धारणा को ध्यान तक पहुँचने की सीढ़ी बनाया है।
12. शोर और प्रदूषण के माहौल के चलते व्यक्ति निरर्थक ही तनाव और मानसिक थकान का अनुभव करता रहता है। ध्यान से तनाव के दुष्प्रभाव से बचा जा सकता है। निरंतर ध्यान करते रहने से जहां मस्तिष्क को नई उर्जा प्राप्त होती है वहीं वह विश्राम में रहकर थकानमुक्त अनुभव करता है। गहरी से गहरी नींद से भी अधिक लाभदायक होता है ध्यान।
13. ध्यान से आपकी चेतना को लाभ मिलता है। ध्यान से आपके भीतर सामंजस्यता बढ़ती है। जब भी आप भावनात्मक रूप से अस्थिर और परेशान हो जाते हैं, तो ध्यान आपको भीतर से स्वच्छ, निर्मल और शांत करते हुए हिम्मत और हौसला बढ़ाता है। ध्यान से चिंता और समस्याएं छोटी हो जाती है।
14. ध्यान से जहां शुरुआत में मन और मस्तिष्क को विश्राम और नई उर्जा मिलती है वहीं शरीर इस ऊर्जा से स्वयं को लाभांवित कर लेता है। ध्यान करने से शरीर की प्रत्येक कोशिका के भीतर प्राण शक्ति का संचार होता है। शरीर में प्राण शक्ति बढ़ने से आप स्वस्थ अनुभव महसूस करते हैं।
15. ध्यान से उच्च रक्तचाप नियंत्रित होता है। सिरदर्द दूर होता है। शरीर में प्रतिरक्षण क्षमता का विकास होता है, जोकि किसी भी प्रकार की बीमारी से लड़ने में महत्वपूर्ण है। ध्यान से शरीर में स्थिरता बढ़ती है। यह स्थिरता शरीर को मजबूत करती है।
16. जो व्यक्ति ध्यान करना शुरू करते हैं, वह शांत होने लगते हैं। यह शांति ही मन और शरीर को मजबूती प्रदान करती है। ध्यान आपके होश पर से भावना और विचारों के बादल को हटाकर शुद्ध रूप से आपको वर्तमान में खड़ा कर देता है। ध्यान से काम, क्रोध, मद, लोभ और आसक्ति आदि सभी विकार समाप्त हो जाते हैं। निरंतर साक्षी भाव में रहने से जहां सिद्धियों का जन्म होता है वहीं सिद्धियों में नहीं उलझने वाला व्यक्ति समाधी को प्राप्त लेता है।
17. ध्यान से भरपूर लाभ प्राप्त करने के लिए नियमित अभ्यास करना आवश्यक है। ध्यान करने में ज्यादा समय की जरूरत नहीं मात्र पांच मिनट का ध्यान आपको भरपूर लाभ दे सकता है बशर्ते की आप नियमित करते हैं।
18. धन्यान से मोमोरी पॉवर बढ़ता है। ध्यान के साथ इस जाति स्मरण का अभ्यास जारी रखने से एक माह बाद जहां मोमोरी पॉवर बढ़ेगा वहीं कुछ माह बाद यह आपमें गजब की स्मरणशक्ति का विकास कर देगा। आप किसी भी उम्र में और किसी भी हालात में भूल नहीं सकते।
19. ध्यान से मुख्य रूप से मस्तिष्क शांत होता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है। इससे जहां रक्त संचार अच्छा रहता है वहीं आंखों की ज्योति भी बढ़ती है।
20. मोक्ष प्राप्त करने का और कोई मार्ग नहीं है सिवाय ध्यान के।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
