September 08, 2026
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    सेहत / शौर्यपथ / वजन कम करने के लिए सबसे पहले चावल छोड़ने की सलाह दी जाती है लेकिन अगर आपको चावल बहुत पसंद है और रोजाना मील का हिस्सा है, तो चावल को छोड़ना बहुत मुश्किल हो जाता है।डाइटीशियन्स की मानें, तो चावल को खाते हुए भी वजन कम किया जा सकता है लेकिन इसके लिए सबसे जरूरी है चावल को सही तरीके से खाया जाए, आइए जानते हैं कुछ टिप्स-
    सिंगल मील में खाएं चावल
    कोशिश करें, कि सिंगल मील में चावल की एक ही सर्विंग लें। इससे आपकी कैलोरी इन्टेक कम हो जाएगी क्योंकि चावल में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा पहले से ही ज्याजदा होती है, इसलिए खाने की थाली में अन्यी कोई भी ऐसी चीज न परोंसे, जिसमें ज्यादा कार्ब हो।
    सब्जियों के साथ पकाएं चावल
    चावल में अपनी मनपसंद सब्जिथयां डाल कर पकाएं। सब्जि यों में ढेर सारा प्रोटीन और फाइबर पाया जाता है, जो आपके पेट को लंबे समय तक फुल रखने में मदद करेगा। राइस को हेल्दी बनाने के लिये इसमें बींस, शिमला मिर्च, ब्रोकोली, टोफू, पनीर और चिकन आदि मिला सकते हैं।
    चावल फ्राई न करें
    चावल को न तो फ्राई करें और न ही इसे क्रीम के साथ मिक्सन करें। इसे हमेशा पानी के साथ उबाल कर ही पकाएं। चावल बनाते समय अतिरिक्त पानी को भी फेंक दें। इससे चावल में मौजूद स्टा र्च निकल जाएगा।
    ब्राउन चावल खाएं
    आप अगर दिन में दो बार चावल खाना चाहते हैं, तो वाइट राइस की जगह ब्राउन राइस खाएं।इसमें फैट और स्टार्च की मात्रा कम होती है जिससे वजन कंट्रोल रहता है।

    सेहत / शौर्यपथ / राजस्थान के झुंझुनू जिले में बाल स्वास्थ्य पोषण के तहत बच्चों को बीमारी और कमजोरी से बचाने के लिए विटामिन 'ए' की खुराक पिलाई जाएगी। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. छोटेलाल गुर्जर ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए माइक्रोप्लान तैयार किया है। इस प्लान में नौ माह से पांच साल तक के दो लाख दो हजार 934 बच्चे कवर किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि विटामिन ए कार्यक्रम 3० अक्टूबर से लॉन्च किया गया है। जिसके तहत 3० नवंबर तक इस कार्यक्रम को व्यापक स्तर पर संचालित किया जाएगा।
    इसमें निर्धारित आयु वर्ग के बच्चों को शत-प्रतिशत विटामिन 'ए' की खुराक पिलाई जाएगी। बच्चों को आंखों सहित विभिन्न बीमारी और कमजोरी से बचाने के लिए यह कदम मील का पत्थर साबित होगा। इस कार्यक्रम को जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों से संचालित किया जाएगा। इस में आशा सहयोगिनी भी सक्रिय रूप से हिस्सा लेंगी।
    उप मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नरोत्तम जांगिड़ ने बताया कि इस कार्य में आंगनबाड़ी में दर्ज कुपोषित बच्चों के अलावा नौ महीने से पांच साल तक के सभी बच्चों को शामिल किया जाएगा। इसके लिए अलग से कोई विशेष कैटेगरी जारी नहीं की गई है।

    धर्म संसार /शौर्यपथ / हिंदू धर्म में गुरुवार का दिन भगवान विष्णु को समर्पित होता है। कहते हैं कि इस दिन भगवान विष्णु की सच्चे मन से पूजा और अराधना करने से मन की मुरादें पूरी हो जाती हैं। मान्यता है कि भगवान विष्णु प्रसन्न होकर अपने भक्तों पर कृपा बरसाते हैं। जिससे भक्तों को धन-धान्य की कमी नहीं रहती है।
    कहते हैं कि गुरुवार के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से जिन जातकों की कुंडली में गुरु ग्रह का दोष होता है, उनके जीवन की भी समस्याएं खत्म हो जाती हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, भगवान विष्णु की पूजा के दौरान उनकी सुननी या पढ़नी चाहिए। कहते हैं कि आरती सुनने या पढ़ने से ही पूजा संपन्न होती है। जानिए गुरुवार के दिन भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए कौन-सी आरती पढ़नी या सुननी चाहिए-
    श्री बृहस्पतिवार की आरती- ॐ जय बृहस्पति देवा-
    ॐ जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा।
    छिन-छिन भोग लगाऊं, कदली फल मेवा।।
    ॐ जय बृहस्पति देवा।।
    तुम पूर्ण परमात्मा, तुम अंतर्यामी।
    जगतपिता जगदीश्वर, तुम सबके स्वामी।।
    ॐ जय बृहस्पति देवा।।
    चरणामृत निज निर्मल, सब पातक हर्ता।
    सकल मनोरथ दायक, कृपा करो भर्ता।।
    ॐ जय बृहस्पति देवा।।
    तन, मन, धन अर्पण कर, जो जन शरण पड़े।
    प्रभु प्रकट तब होकर, आकर द्वार खड़े।।
    ॐ जय बृहस्पति देवा।।
    दीनदयाल दयानिधि, भक्तन हितकारी।
    पाप दोष सब हर्ता, भव बंधन हारी।।
    ॐ जय बृहस्पति देवा।।
    सकल मनोरथ दायक, सब संशय तारो।
    विषय विकार मिटाओ, संतन सुखकारी।।
    ॐ जय बृहस्पति देवा।।
    जो कोई आरती तेरी प्रेम सहित गावे।
    जेष्टानंद बंद सो-सो निश्चय पावे।।
    ॐ जय बृहस्पति देवा।।

    धर्म संसार /शौर्यपथ /दीपावली के 7 दिन पूर्व बन रहा है अद्भुद शुभ संयोग एवं मुहूर्त्त। नक्षत्रो में पुष्य नक्षत्र को शुभ एवं पुण्यदायक नक्षत्र माना जाता है। इस बार दीपावली के एक सप्ताह से पूर्व 7 नवंबर दिन शनिवार को पुष्य नक्षत्र को भोग सम्पूर्ण दिन होगा। पुष्य नक्षत्र का मान 7 नवंबर को सूर्योदय पूर्व से रात में 4:59 बजे तक होगा।
    उत्थान ज्योतिष संस्थान के निदेशक ज्योतिर्विद पं दिवाकर त्रिपाठी पूर्वांचली ने बताया कि पुष्य नक्षत्र के शुभ काल में खरीद-फरोख्‍त ,उद्योगों एवं व्यापार की शुरुआत, बहुत शुभ मानी जाती है। इस नक्षत्र में अशुभ काल में शुभ काल में बदलने की क्षमता होती है।
    शनि देव इस नक्षत्र के स्वामी भी है और यह नक्षत्र शनिवार को पूरा दिन व्याप्त होगा। ऐसे में इसका व्यापारिक महत्त्व बढ़ जाता है। इस बार ग्रहों की स्थिति भी अति उत्तम है जहाँ शनि देव मकर राशि मे स्वगृही है ,गुरु स्वगृही है ,बुध एवं शुक्र राशि परिवर्तन राजयोग में है , बुधादित्य राजयोग के साथ साथ चंद्रमा भी स्वगृही स्थिति में रहेंगे ऐसे में यह समय अत्यंत श्रेष्ठ एवं शुभफलदायी है।
    'तिष्य और अमरेज्य' जैसे अन्य नामों से भी पुकारे जाने वाले इस नक्षत्र की उपस्थिति कर्क राशि के 3-20 अंश से 16-40 अंश तक है। 'अमरेज्य' का श‍ाब्दिक अर्थ है, देवताओं के द्वारा पूजा जाने वाला। शनि इस नक्षत्र के स्वामी ग्रह हैं। इसी कारण विवाह को छोड़कर अन्य सभी मांगलिक कार्यो की शुरूआत शुभफल दायक होती है।
    शनिदेव व्यक्ति के कर्म के फल प्रदायक ग्रह है। ऐसे में शुभ कार्यो की शुरुआत ऐसे समय मे किए जाने से शनिदेव की विशेष कृपा प्राप्त होती है । अतः इस दिन विशेष कर खरीदारी ,निवेश और बड़े उद्योग की शुरुआत या व्यापारिक लेन देन के लिए अति उत्तम होता है।

    खाना खजाना / शौर्यपथ /लॉकडाउन के बाद अनलॉक होते शहरों में चाय पोहे और जलेबी जैसे नाश्‍ते की दुकानें खोलने के भी निर्णय लि‍ए जा रहे हैं। इंदौर के बेहद पॉपुलर पोहा- जलेबी की दुकानें खुलने के बाद ट्व‍िटर पर जलेबी ट्रेंड कर रही है। सोशल मीडि‍या पर भी जलेबी और पोहा की बातें हो रही हैं।
    ऐसे में आज आपको बताएंगे आखि‍र कैसे बनती है जलेबी। जानते हैं जलेबी बनाने की वि‍धि‍।

    जलेबी दो पारंपरिक और झटपट तरीके से बनती है। पारंपरिक विधि में, मैदा और दही से घोल बनाया जाता है और उसे 24 घंटे के लिए फरमेंट किया जाता है। पारंपरिक विधि द्वारा तैयार की गई जलेबी का स्वाद बेहतर होता है।

    तो जलेबी घर पर बनाने के लिए मुख्य-3 स्टेप हैं; पहले स्टेप में, मैदा और दही से घोल तैयार किया जाता है, दूसरे स्टेप में चाशनी बनायीं जाती है, और अंतिम स्टेप में, घोल में से गर्म तेल में सीधे जलेबी बनाकर कुरकुरी होने तक तली जाती है और फिर गर्म चाशनी में डुबोयी जाती है।

    घोल बनाने की सामग्री:
    1/2 कप मैदा
    1 टेबलस्पून कॉर्न स्टार्च (कॉर्न फ्लोर) या अरारूट पाउडर
    1/4 टीस्पून बेकिंग पाउडर
    एक चुटकी हल्दी पाउडर (पीला रंग पाने के लिए)
    1/4 कप दही
    1/4 कप पानी

    चाशनी बनाने की सामग्री:
    1/2 कप शक्कर
    1/4 कप + 2 टेबलस्पून पानी
    1 टी स्पून नींबू का रस
    एक चुटकी इलायची पाउडर
    5-7 केसर की किस्में, वैकल्पिक
    एक कटोरे में 1/2 कप मैदा छान लें। उसमें 1 टेबलस्पून कॉर्न स्टार्च (कॉर्न फ्लोर), 1/4 टी स्पून बेकिंग पाउडर, एक चुटकी हल्दी पाउडर और 1/4 कप दही डालें।
    जरूरत के अनुसार पानी (लगभग 1/4 कप) डालें और गाढ़ा घोल (इडली के घोल की तुलना में थोड़ा मोटा) बना लें। घोल में कोई गांठ ना रहे।
    घोल को एक प्लेट या एक ढक्कन से ढककर 24 घंटे के लिए कमरे के तापमान पर (किचन के काउंटर टॉप पर ही रखे) फरमेंट होने के लिए (खमीर उठाने के लिये) रखे। 24 घंटे के बाद, ढक्कन हटा दें।
    घोल को एक चम्मच से अच्छी तरह से फैंट लें।
    जलेबी बनाने की बोतल या (एक खाली सोस की बोतल) या एक जिपलॉक बेग (या कोई भी मोटी प्लास्टिक की बेग) में घोल डालें।

    जलेबी के लिए चाशनी बनाने की विधि
    एक गहरे पतीले या पैन में चीनी, केसर की किस्में, इलायची पाउडर और पानी डालें और मध्यम आंच पर पकने के लिये रखे।
    इसे तब तक पकाइये जब तक कि हल्की 1-तार की चाशनी हो जाये।
    जब 1-तार की चाशनी हो जाये तब नींबू का रस डालें। अच्छी तरह से मिलाएं और गैस बंद कर दें। चाशनी तैयार है। (अगर चाशनी ठंडी हो तो जब आप जलेबी बनाना शुरू करे तब चाशनी को गर्म रखने के लिए कम आंच पर रख दें ताकि अगले स्टेप में जब जलेबी चाशनी में डुबाये तब वे गर्म रहें।)

    जलेबी को तलने के लिए एक कड़ाही में मध्यम आंच पर घी/तेल गर्म करें। इस विधि में तलने के लिए तेल + 2 टेबलस्पून घी का उपयोग किया है। तेल तलने के लिए तैयार है या नहीं उसकी जांच करने के लिये घोल की एक बूंद गर्म तेल में डालें और अगर यह रंग बदले बिना ही तुरंत सतह पर आती है तो तेल तलने के लिए तैयार है। इसके बाद जिपलॉक बैग को दबाते हुए गोल गोल घूमा के जलेबी बनाये।

    उन्हें हल्का सुनहरा और कुरकुरा होने तक तले।
    उन्हें तेल में से निकालें और तुरंत ही गर्म चाशनी में डाल दें। सिरप (चाशनी) गर्म या थोड़ा गर्म होंना चाहिये, यह ठंडा नहीं होना चाहिए। उन्हें लगभग दो मिनट के लिए सिरप में रखें। एक मिनट के बाद पलट दें। अब जलेबी खाने को तैयार है।

    शौर्यपथ / भोजन के साथ कई लोग नियमित दही लेते है, लेकिन जो लोग इसे अब तक खाना पसंद नहीं करते हैं, दही में छुपे सेहत और सुंदरता के राज जानने के बाद वे लोग भी इसे रोजाना खाना शुरू कर देंगे। आइए, जानते हैं दही के गुण -
    1 दही के रोजाना सेवन से शरीर की बीमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है। दही में अजवाइन मिलाकर पीने से कब्ज की शिकायत दूर होती है।
    2 गर्मी के मौसम में दही की छाछ या लस्सी पीने से पेट की गर्मी शांत होती है। इसे पीकर बाहर निकले तो लू से भी बचाव होता है।
    3 दही पाचन क्षमता बढ़ाता है। दही में कैल्शियम प्रचुर मात्रा में होता है। इसे रोजाना खाने से पेट की कई बीमारियां ठीक हो जाती हैं।
    4 दही का रोजाना सेवन सर्दी और सांस की नली में होने वाले इंफेक्शन से बचाता है।
    5 अल्सर जैसी बीमारी में दही के सेवन से विशेष लाभ मिलता है।
    6 मुंह में छाले होने पर दही का कुल्ला करने से छाले ठीक हो जाते हैं।

    सेहत / शौर्यपथ / हममे से अधिकतर लोग खाना खाने के बाद सौंफ खाना पसंद करते है। वैसे भी सौंफ माउथ फ्रेशनर का भी काम करता हैं। सौंफ के सेवन से मुंह की दुर्गंध से भी छुटकारा मिलता है, इसके अलावा भी सौंफ के कई फायदे हैं। दरअसल, सौंफ औषधीय गुणों से भरपूर होती है, खाने के बाद इसके सेवन से भोजन पचाने में आसानी होती है। ऐसे कई अन्य गुणों के लिए सौंफ जानी जाती हैं। आइए जानते हैं सौफ के पानी के फायदों के बारे में
    सौंफ का पानी पेट की कई समस्याओं से निजात दिलाता है। इससे आपको पेट से जुड़ी समस्या से राहत मिलती है। जैसे एसिडिटी और पेट में गैस की समस्या से आप परेशान हैं, तो सौंफ का पानी आपको नियमित रूप से पीना चाहिए। इससे आपको राहत मिलेगी।
    वजन घटाना चाहते है, तो सुबह खाली पेट सौंफ के पानी का सेवन करना आपके लिए बहुत फायदेमंद है। सौंफ के पानी से
    वजन घटाने में मदद मिलती है। इसे आप नियमित सुबह के समय खाली पेट पीएं। यह मेटाबॉलिज्म को बढ़ाता है, जिससे शरीर अधिक फैट को कम करता है। इसके लिए सौंफ को रातभर पानी में भिगोकर रखें फिर इसका सुबह-सुबह सेवन करें।
    यदि मासिक धर्म के दर्द से परेशान है तो सौंफ का पानी आपके बहुत काम आ सकता है। इससे मासिक धर्म के समय ऐंठन और दर्द से राहत मिलती है।
    सौंफ का पानी शरीर को डिटॉक्स करने में भी बहुत मददगार होता है। इसमें फाइबर पाया जाता है जो शरीर के विषैले पदार्थ को बाहर निकालने में मदद करता है। और शरीर को अंदर से साफ करता है।

    सेहत / शौर्यपथ /सुबह उठते ही कुछ ऐसे काम है जिन्हें यदि आपने कर लिया तो आपका दिन अच्छा व्यतित होना सुनिश्चित हो जाता है। आइए,जानते हैं ऐसे ही 5 कामों के बारे में जिन्हें करके आपको अपने दिन की शुरूवात करनी चाहिए -
    आइए जानें,ऐसे ही 5 तरीके जिनके साथ करें दिन की शुरुआत...
    1. सुबह उठते ही सबसे पहले आधा लीटर ठंडा पानी पिएं। खाली पेट ठंडा पानी पीने से मेटाबॉलिज्म यानी कि पाचन दुरूस्त रहने में मदद मिलती है।
    2. खाली पेट छह से दस बादाम और अखरोट खाएं, इससे कुछ इंजाइम्स बनते हैं जो मेटाबॉलिज्म बढ़ाने में सहायक होते हैं।
    3. हमेशा थोड़ा भारी ब्रेकफास्ट करें, इससे आपको दोपहर के खाने तक ऊर्जा की कमी महसूस नहीं होगी। आपका ब्रेकफास्ट ऐसा हो जो कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन से भरपूर हो।
    4. बादाम और अखरोट ऊर्जा के भंडार हैं। यदि आप रोजाना बादाम आरे अखरोट नहीं खा पाते हैं तो दिन भर थोड़ी-थोड़ी मूंगफली भी खा सकते हैं।
    5. सुबह उठ कर चाहे 10 मीनिट ही सही लेकिन मेडिटेशन जरूर करें। इससे आपके विचार संतुलित हो जाएंगे और दिमाग शांत रहेगा।

    सेहत / शौर्यपथ /अगर आपकी मम्‍मी या सासू मां मधुमेह से ग्रस्‍त हैं और हर बार की तरह इस बार भी करवा चौथ का व्रत रखने की जिद पर अड़ी हैं, तो आपको रखना होगा उनका खास ख्‍याल।
    डायबिटीज यानी मधुमेह एक जीवनशैली से जुड़ी बीमारी है, जिसमें खून में शुगर का स्तर प्रभावित होता है। इसके पीछे इन्सुलिन कम बनने या इंसुलिन का शरीर द्वारा इस्तेमाल न हो पाना दोषी होता है। डायबिटीज के यूं तो कई कारण हैं, लेकिन खराब और अस्वस्थ जीवनशैली सबसे प्रमुख कारण है। अगर आप व्यायाम नहीं करतीं हैं या मोटापे से ग्रस्त हैं तो आपका डायबिटीज का जोखिम बढ़ जाता है।
    डायबिटीज सिर्फ एक लाइलाज बीमारी ही नहीं है, बल्कि अन्य बीमारियों की गंभीरता को भी बढ़ा देती है। एक डायबिटीज के मरीज को बहुत सावधानी बरतनी होती है। जैसे दिन में हर दो से तीन घण्टे पर छोटी मील लेना, व्यायाम करना, नियमित रूप से ब्लड शुगर लेवल जांचना और चिंता मुक्त रहना। आहार के लिए भी बहुत परहेज किया जाता है। साथ ही ग्लूकोज के सीधे सेवन से बचा जाता है।
    ऐसे में चिंता यह है कि एक डायबिटीज का मरीज दिन भर उपवास कैसे रख सकता है! करवा चौथ का व्रत सोलह से अठारह घण्टे का उपवास होता है जिसमें कई संस्कृतियों में पानी भी नही पिया जाता।
    दिन भर का उपवास यूं तो शरीर को डिटॉक्स करने के लिए अच्छा उपाय है, लेकिन डायबिटीज में ऐसा नहीं है। मधुमेह से ग्रस्‍त व्यक्ति को शुगर लेवल नियंत्रित करने के लिए थोड़ी-थोड़ी देर पर मील्स लेनी जरूरी होती हैं। तो ऐसे में मधुमेह से ग्रस्‍त आपकी मम्‍मी या सासू मां करवा चौथ का व्रत कैसे रखेंगी?
    घबराने की जरूरत नहीं है, आप उनके स्वास्थ्य से समझौता किये बिना ही उनकी आस्‍था में उनका साथ दे सकती हैं। हम आपको बता रहे हैं वे तरीके जिनसे वे व्रत भी रख सकेंगी और उनकी सेहत को भी नुकसान नहीं पहुंचेगा।
    व्रत से पहले खाएं ये कुछ खास चीजें
    सूर्योदय के साथ ही करवा चौथ के व्रत की शुरुआत होती है, और चंद्रमा निकलने के बाद ही व्रत खोला जाता है। व्रत शुरू करने से पहले सभी महिलाएं भोजन करती हैं, जिसे सरगी कहते हैं। पारम्परिक रूप से सास अपनी बहू के लिए सरगी बनाती है, जिसमें मिठाई, सेवईं, मेवे और फल इत्यादि होते हैं।
    लेकिन अगर आप डाय‍िबिटिक हैं तो आपकी सरगी बिल्कुल अलग होगी। अपनी सरगी में प्रोटीन और कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट शामिल करें। प्रोटीन पचने में समय लेता है, जिससे आपके शरीर को लम्बे समय तक ऊर्जा मिलती रहेगी और हाइपोग्लाइसीमिया की स्थिति नहीं आएगी। हाइपोग्लाइसीमिया का अर्थ है खून में ग्लूकोज की कमी।
    आप सुबह सरगी के रूप में दही, दूध, ओट्स, जौं या बाजरे की रोटी और ड्राई फ्रूट्स लें। अगर आपकी शुगर नियंत्रित रहती है तो आप फल भी ले सकती हैं।
    व्रत तोड़ने के लिए
    व्रत तोड़ने के लिए भी पारंपरिक व्यंजनों से दूरी बनाए रखें। तले, भुने और मसालेदार खाने से आपके शरीर मे एकदम से कार्बोहाइड्रेट बढ़ेगा जिससे हाइपरग्लाइसीमिया की समस्या हो जाएगी। व्रत तोड़ने के लिए ताजा फलों का जूस पियें। उसके बाद फाइबर युक्त भोजन थोड़ा-थोड़ा कर के, 15 से 20 मिनट के गैप पर खाएं।
    ट्रान्स फैट और सिंपल कार्बोहाइड्रेट्स से दूर ही रहें।
    इन बातों का रखें ख्याल-
    अगर आपकी डायबिटिक मां या सास जिनकी उम्र 50 वर्ष से अधिक है, वह व्रत रखती हैं, तो उन्हें निर्जला व्रत न रखने दें। दिन में पानी, नारियल पानी, जूस और चाय इत्यादि देती रहें। याद रखें, किसी भी पूजा या व्रत में सबसे महत्वपूर्ण मन की पवित्रता और श्रद्धा होती है।
    अगर आपकी शुगर अक्सर लो हो जाती है तो दिन में दूध, चाय, जूस इत्यादि ले लें।
    व्रत से एक दो दिन पहले से ही डाइट कम कर लें ताकि शरीर कम ग्लूकोज के लिए तैयार हो जाये।
    चक्कर आएं, बहुत कमजोरी महसूस हो तो दूध या नींबू पानी ले लें।
    अपनी सेहत का ख्याल रखें क्योंकि स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन है।

    धर्म संसार /शौर्यपथ / कोरोना काल में करवा चौथ का पावन पर्व आज बुधवार को मनाया जाएगा। अखंड सुहाग के निमित्त महिलाएं निर्जला व्रत रखेंगी। चंद्रोदय के बाद विधिपूर्वक पूजन करके अर्घ्य देंगी। परंपरा के अनुसार पति को चलनी से निहारने के बाद व्रत का पारण करेंगी।
    हर सुहागिन के लिए प्रेम का प्रतीक करवा चौथ खासा मायने रखता है। लेकिन इस बार कोरोना कालखंड ने पर्व के प्रति आस्था, उल्लास को सीमित कर दिया है। इस का प्रभाव पारंपरिक पूजन, श्रृंगार, आभूषमों और कपड़ों पर दिख रहा है। संक्रमण का भय, सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन और कोरोना के प्रसार ने पर्व की रौनक कम कर दी है। लेकिन महिलाएं परंपरा के अनुसार पूजन अर्चन करके कोरोना से अपने सुहाग की रक्षा की कामना करेंगी।
    पैर छूकर आशीर्वाद से परहेज
    व्रत औऱ पूजन में महिलाएं पहले गले मिलकर और पैर छूकर आशीर्वाद प्राप्त करती थी, लेकिन अब सोशल डिस्टेंसिंग के कारण पैर छूने से परहेज करेंगी। पति की ओर से दिए जाने वाले उपहार में इस बार डिजाइनर मास्क औऱ सेनिटाइजर दिए जाएंगे। करवा चौथ में पूजा के प्रसाद भी बाजार से ना मंगाकर घर पर ही शुद्ध प्रसाद बना लें।
    यूट्यूबर पर सुनेंगी कथाएं: इस बार महिलाएं सामूहिक पूजा में शामिल न होकर यूटयूब, लाइव वीडियो कॉल में कथाएं सुनेंगी। कोरोना संक्रमण से बचने के लिए इस तरह की सावधानी रखना बहुत जरूरी है।
    करवा चौथ पूजा मुहूर्त
    पूजा समय शाम - शाम 6:04 से रात 7:19
    उपवास समय सुबह - शाम 6:40 से रात 8:52
    चौथ तिथि - सुबह 3:24 से 5 नवंबर सुबह 5:14 तक
    चंद्रमा का उदय - 4 नवंबर रात 8.16 से 8:52 तक
    इस व्रत में पूरे दिन निर्जला रहा जाता है। व्रत में पूरा श्रृंगार किया जाता है। महिलाएं दोपहर में या शाम को कथा सुनती हैं। कथा के लिए पटरे पर चौकी में जलभरकर रख लें। थाली में रोली, गेंहू, चावल, मिट्टी का करवा, मिठाई, बायना का सामान आदि रखते हैं। प्रथम पूज्य गणेश जी की पूजा से व्रत की शुरुआत की जाती है। गणेश जी विघ्नहर्ता हैं इसलिए हर पूजा में सबसे पहले गणेश जी की पूजा की जाती है। इस बात का ध्यान रखें कि सभी करवों में रौली से सतियां बना लें। अंदर पानी और ऊपर ढ़क्कन में चावल या गेहूं भरें। कथा के लिए पटरे पर चौकी में जलभरकर रख लें। थाली में रोली, गेंहू, चावल, मिट्टी का करवा, मिठाई, बायना का सामान आदि रखते हैं। प्रथम पूज्य गणेश जी की पूजा से व्रत की शुरुआत की जाती है। गणेश जी विघ्नहर्ता हैं इसलिए हर पूजा में सबसे पहले गणेश जी की पूजा की जाती है। इसके बाद शिव परिवार का पूजन कर कथा सुननी चाहिए। करवे बदलकर बायना सास के पैर छूकर दे दें। रात में चंद्रमा के दर्शन करें। चंद्रमा को छलनी से देखना चाहिए। इसके बाद पति को छलनी से देख पैर छूकर व्रत पानी पीना चाहिए।

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