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सेहत / शौर्यपथ / विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सभी उम्र के लोगों के लिए फिजिकल एक्सरसाइज को लेकर सिफारिशें लागू की हैं। डब्लूएचओ ने कहा है कि कोरोना महामारी के दौर में सभी को व्यायाम और शारीरिक गतिविधियों पर ध्यान देना चाहिए। इसके साथ महिलाओं को कहा है कि प्रेग्नेंसी के दौरान और उससे पहले वह शारीरिक तौर पर एक्टिव रहें और कुछ-न-कुछ गतिविधि करती रहें, इससे वह स्वस्थ रहेंगी।
डब्लूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस ऐडनॉम ने कहा कि शारीरिक रूप से सक्रिय होना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है, हमारे जीवन में कुछ साल और जोड़ देता है। हर कदम मायने रखता है, हमें हर दिन बेहद सुरक्षित और रचनात्मक ढंग से आगे बढ़ना है और कोरोना वायरस से लड़ना है।
डब्लूएचओ ने नए दिशानिर्देश जारी कर सभी को कोरोना वायरस से लड़ने के लिए प्रोत्साहित किया है। इसके साथ उन्होंने कहा कि व्यायाम, शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है और अगर हम ऐसा नहीं करते हैं तो इसके दुष्परिणाम हमें झेलने पड़ सकते हैं।
डब्लूएचओ के अनुसार, अगर लोग शारीरिक तौर पर अधिक सक्रिय होते तो साल में चार से पांच मिलियन लोगों को मरने से बचाया जा सकता था।
WHO की नई गाइडलाइन्स
1. बच्चों के लिए
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार बच्चों को प्रति दिन कम से कम 60 मिनट और सप्ताह में कम से कम तीन दिन जोरदार एरोबिक एक्सरसाइज करनी चाहिए। इन एक्सरसाइज से बच्चों की मांसपेशियां और हड्डियां मजबूत होंगी।
2. 18 से 64 वाले लोग
18 से 64 वर्ष वाले लोगों के लिए डब्लूएचओ ने कहा है कि इन्हे हर हफ्ते कम से कम 130 से 300 मिनट तक मॉडरेट इंटेंसिटी वाली एरोबिक एक्सरसाइज करनी चाहिए। इससे वह स्वस्थ रहेंगे। इसके सेहत ही 75-150 मिनट वाली अधिक-तीव्रता वाली एरोबिक एक्सरसाइज करनी चाहिए। हर हस्ते.2 दिन माशपेशियों वाली एक्सरसाइज करना भी बेहद जरूरी है।
3. 65 वर्ष से अधिक
स्वस्थ लोग जो 65 वर्ष से अधिक होते हैं, उन्हें उतना ही एक्सरसाइज और शारीरिक गतिविधियों में ध्यान देना चाहिए जितना कि 18 से 64 वर्ष तक के लोग देते हैं। उन्हें सप्ताह में कम से कम तीन दिन फिजिकल एक्सरसाइज करनी चाहिए। यह उन्हें स्वस्थ रहने में मदद करेगी।
4. गर्भवती महिलाएं
डब्लूएचओ ने गर्भवती महिलाओं को विशेष सलाह देते हुए कहा है कि प्रेग्नेंसी के दौरान भी महिलाओं को 1 हफ्ते में कम-से-कम 150 मिनट मध्यम-तीव्रता वाली एरोबिक एक्सरसाइज करनी चाहिए।
सेहत /शौर्यपथ /‘शाकाहार खाने में मांसाहार की तरह प्रोटीन नहीं होता इसलिए आपको नॉनवेज खाना शुरू कर देना चाहिए’ आपने अपने दोस्तों या फिर किसी ओर को ऐसा ही कुछ कहते हुए सुना होगा कि प्रोटीन की पूर्ति के लिए नॉनवेज खाना बहुत जरूरी है लेकिन फिर भी आपका दिल नॉनवेज खाने को नहीं करता, अगर आपके या आपके किसी दोस्त के साथ कुछ ऐसा ही है, तो आपको जानकर खुशी होगी कि शाकाहार यानी वेज खाने की कुछ चीजों में भरपूर मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है। आइए, जानते हैं प्रोटीन से भरे शाकाहार स्रोत-
हल्की आंच में भुने आलू
आपको जानकर हैरानी होगी कि मीडियम साइज में कटे और हल्की आंच में भुने हुए आलू में प्रोटीन, पोटेशियम, विटामिन सी और फाइबर भरपूर मात्रा में होता है।
ब्रोकली
अगर अभी तक आप ब्रोकली खाने से परहेज कर रहे थे, तो आपको ब्रोकली खानी शुरू कर देनी चाहिए। आपको ब्रोकली में प्रोटीन की मात्रा और आयरन मिलेगा।
फूलगोभी
ज्यादातर लोगों को फूलगोभी पसंद होती है। इस सब्जी में प्रोटीन, कैलोरीज, पोटेशियम, मैग्नीशियम, फाइबर और आयरन के गुण होते हैं।
मशरूम
आप अगर बार-बार बीमार पड़ते हैं, तो आपको मशरूम खाना शुरू कर देना चाहिए। इसमें भरपूर मात्रा में प्रोटीन होता है।
पालक
पालक में प्रोटीन के अलावा आयरन, फाइबर और विटामिन बी पाया जाता है।
मक्का
सर्दियों में मक्का खाना सेहत के लिए बहुत अच्छा है। इसमें प्रोटीन और फाइबर काफी मात्रा में पाया जाता है।
मटर
आलू हो या पनीर, मटर किसे अच्छा नहीं लगता। मटर प्रोटीन का एक अच्छा स्रोत है।
वास्तु शास्त्र /शौर्यपथ / देशी फेंगशुई कहें या फिर हमारे शास्त्रों में पहले से ही दर्ज की कई व्यवस्थाओं की, वे आज के फेंगशुई से ज्यादा बेहतर और प्रभावकारी हैं। इनमें से कुछ हैं दर्पण, काले घोड़े की नाल और घंटी। हमारे जीवन में ये कुछ ऐसी अनोखी वस्तुएं हैं जिनका हम नित्य प्रयोग करते हैं। किंतु उनके उपयोगी उपायों को कम लोग ही जानते हैं। ज्योतिषाचार्य पं.शिवकुमार शर्मा से जानिए दर्पण, घंटी और घोड़े की नाल का महत्व।
दर्पण:चेहरा देखने वाला दर्पण वास्तु शास्त्र में बहुत ही उपयोगी माना गया है। दिशाओं को बढ़ाने का भ्रम करने वाला यह दर्पण कई बार तो चौकाने वाले प्रभाव दिखाता है। यदि घर का उत्तर पूर्व का कोना कटा हुआ है तो उस दिशा में एक बड़ा लुकिंग मिरर लगा देने से दिशा भ्रम हो जाता है। वह दिशा बढ़ती हुई प्रतीत होती है। इससे उसका वास्तु दोष समाप्त हो जाता है। यदि घर के सामने कोई खंबा, पेड़, किसी मकान का कोना, कूड़, खंडहर हो तो घर के मुख्य द्वार की चौखट के ऊपर एक गोल शीशा लगा देने से घर में आने वाली नकारात्मक शीशे से टकराकर बाहर चली जाती है। डाइनिंग रूम में उत्तर-पूरब की दीवार पर ओवल शेप का एक बड़ा शीशा लगा देना चाहिए, इससे भोजन करने वालों का और भोजन का प्रतिबिंब उसमें दिखाइए इससे घर में समृद्धि बढ़ती है। ड्रेसिंग रूम में शीशा सदैव उत्तर अथवा पूर्व की दीवार पर ही लगाना शुभ होता है। भूलकर भी शीशे को दक्षिणी दीवार पर न लगाएं। कभी भी शयन कक्ष में शीशा न लगाएं उस कक्ष में सोने वाले व्यक्तियों के संबंधों पर बुरा असर पड़ता है।
घंटी: घंटा अथवा घंटी ऐसी वस्तु है जो प्राय मंदिरों में और अपने घरों के मंदिर में आसानी से मिल जाती है। इसका प्रयोग हम आरती के समय या मंदिर में प्रवेश के समय,भगवान जी को भोग लगाने के समय करते हैं। इसके अलावा भी घंटी के कई उपयोग हैं। घंटी वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा भर देती है। जहां पर घंटी या घंटे की ध्वनि होती है वहां से नकारात्मक शक्तियां दूर चली जाती हैं। इसलिए हमें प्रात:काल उठकर स्नान करने के बाद अपने घर की घंटी को घर के मुख्य द्वार और मंदिर में अवश्य बजाएं। घर के मुख्य द्वार में के सामने दो अथवा तीन द्वार एक सीध में हो तो एक पीतल की छोटी घंटी बीच के द्वार पर टांग दें। यदि आपके छोटे बच्चे पढ़ाई में कमजोर हैं तो एक उपाय करें। जब वह अपनी पढ़ने को बैठें तो कम से कम एक मिनट पीतल की घंटी उसकी स्टडी टेबल के पास बजाएं। वहां का वातावरण हो उर्जित हो जाएगा और बच्चों का मन एकाग्र होकर पढ़ाई में लगेगा।
काले घोड़े की नाल: प्राचीन काल से ही घोड़े की नाल अथवा नाव की कील को बहुत ही मान्यता प्राप्त हुई है। घोड़े की नाल घोड़े के पैर में रहती है और घिस-घिसकर ऊर्जावान हो जाती है। इसी प्रकार नाव की कील लगातार पानी के थपेड़े खाकर के ऊर्जित हो जाती है। यदि काले घोड़े की नाल मिल जाए तो बहुत अच्छी होती है। घर के द्वार के वास्तु दोष को समाप्त करने के लिए घर के द्वार पर टांग देते हैं। U शेप की घोड़े के नाल घरों में नीचे की ओर करके लगाते हैं। फैक्ट्री अथवा कार्यालय में ऊपर की ओर करके लगाते हैं। ऐसा माना जाता है घोड़े की नाल से घर हमारा बुरी ऊर्जाओं से संरक्षित हो जाता है। शनि की महादशा अथवा साढ़ेसाती के समय घोड़े की नाल की अंगूठी या छल्ला बनाकर भी लोग पहनते हैं।
टिप्स ट्रिक्स / शौर्यपथ / फेंगशुई के बारे में आपने सुना तो जरूर होगा। कुछ लोग फेंगशुई में विश्वास रखते हैं, कुछ इसका बिलकुल विश्वास नहीं करते जबकि कुछ लोगों को पता ही नहीं है कि फेंगशुई क्या होता है। फेंगशुई डिजाइन और वास्तुशास्त्र का एक अभिन्न हिस्सा है। यह दो शब्दों से मिलकर बना है। फेंग यानि वायु, शुई यानि जल। यह एक ऐसा कान्सेप्ट है जो प्रकृति और वातावरण के महत्व को स्थापित करता है। साथ ही यह आपको अपने आस पास के वातावरण से अवगत कराता है और संवेदनशील भी बनाता है।
फेंगशुई चीजों और आस पास के वातावरण में संतुलन बनाने का प्रयास करता है। चीजों की बनावट, उनका रंग, आकार,रखने की जगह आदि के बारे में फेंगशुई विस्तार से बताता है। फेंगशुई में पौधों का भी बहुत महत्व है। इसके अनुसार बहुत से पेड़-पौधे आपके मूड को बदलने की क्षमता रखते हैं। साथ ही यह आपकी ऊर्जा को भी बढ़ाते हैं और मानसिक रूप से आप ज्यादा बेहतर महसूस करते हैं। आज हम आपको ऐसे ही पांच फेंगशुई पौधों के बारे में बताएंगे जिन्हें लगाकर आप भी अपने आस पास के माहौल को बेहतर बना सकते हैं।
1. बैम्बू प्लांट
हरे रंग के बैम्बू प्लांट को लाल रंग के धागे से बांधकर धर में रखें। घर के सदस्यों की आयु में वृद्धि के साथ ही यह आर्थिक समृद्धि भी लाता है। यह बिजनेस के उद्देश्य से भी शुभ होता है। यह निगेटिविटी को दूर करता है। इसे पानी में लगाएं और पॉट में रंगीन पत्थर डालें।
2. स्नेक प्लांट
इसे बड़ी खिड़की या एंट्रेंस के पास लगाएं। यह एक रक्षक के रूप में काम करता है। घर में काम करने की जगह या ऑफिस में इसे लगाने से आप ज्यादा फोकस होकर काम कर पाएंगे। इसे बेडरूम या बच्चों के कमरे में ना लगाएं।
3. रबर प्लांट
घर के भीतर की निगेटिव ऊर्जा को कम करता है। इसे घर के वेल्थ एरिया में लगाएं। जहां धन आदि रखते हैं। साथ ही यह शांति और समृद्धि भी लाता है।
4. मनी प्लांट
इस पौधे से सकारात्मक ऊर्जा निकलती है जो आपके मूड को अच्छा बनाती है। यह ऊर्जा सौभाग्य और सफलता को अपनी ओर आकर्षित करती है। इसे घर की दक्षिण पूर्व दिशा में लगाएं। इस दिशा को कुबेर दिशा भी कहते हैं।
5. जेड प्लांट
गोल पत्तों वाला ये प्लांट दिखने में जितना खूबसूरत है इसके फायदे उससे भी कहीं ज्यादा हैं। घर और ऑफिस में इस पौधे को लगाएं। आपकी कार्यक्षमता भी बढ़ेगी क्योंकि ये आपको पॉजिटिव एनर्जी देगा। इसे एंट्रेंस के पास लगाएं।
नोट: इस आलेख में दी गई जानकारी का हम दावा नहीं करते कि ये पूर्णत्या सत्य या सटीक हैं और इन्हें अपनाने से अपेक्षित परिणाम मिलेगा। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र विशेषज्ञ की राय जरूर ले लें।
वास्तु शाश्त्र /शौर्यपथ / हिन्दू धर्म में गाय को माता का दर्जा दिया जाता है। गाय की पूजा की जाती है और मान्यता है कि गाय में सभी देवी-देवताओं का वास होता है। वास्तु शास्त्र में बताया गया है कि गाय हर प्रकार के वास्तु दोष को दूर करने में सक्षम है।
वास्तु के अनुसार घर में गाय का होना बहुत शुभ माना जाता है। माना जाता है कि गाय की पूजा करने और सेवा करने से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। हिंदू धर्म में गाय को मां के समान दर्जा दिया जाता है। गोमाता के गोबर से बने उपलों से रोजाना घर या प्रतिष्ठान में धूप करने से वातावरण शुद्ध होता है और सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है। घर के दरवाजे पर अगर कभी गोमाता आए तो भोजन अवश्य कराएं। गाय की सेवा से संतान प्राप्ति में आ रही बाधा दूर हो जाती है। सुबह गोसेवा करने से अत्यंत लाभ होता है। भोजन से पूर्व गाय के लिए रोटी निकालकर खिलाना चाहिए। घर में बंधी गाय का रंभाना शुभ माना जाता है। गाय के घर में होने से गृह क्लेश दूर हो जाते हैं। गाय की पूजा से कुंडली में मौजूद दोष समाप्त हो जाते हैं। गाय को अमावस्या को रोटी, गुड़, चारा खिलाने से पितृदोष समाप्त हो जाते हैं। यदि बुरे स्वप्न दिखाई दें तो गोमाता का नाम लें। यदि यात्रा आरंभ कर रहे हैं और गाय सामने आ जाए अथवा अपने बछड़े को दूध पिलाती हुई सामने दिखाई दे तो आपकी यात्रा सफल होती है।
धर्म संसार / शौर्यपथ / कार्तिक पूर्णिमा 30 नवंबर सोमवार को है। कार्तिक महीने का यह सबसे आखिरी दिन है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान आदि किया जाता है। इस दिन स्ना के साथ दान का भी बहुत महत्व है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इस बार कार्तिक पूर्णिमा पर सर्वार्थसिद्धि योग व वर्धमान योग बन रहे हैं। इस योग के कारण कार्तिक पूर्णिमा का महत्व और भी बढ़ जाता है। ऐसी मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा में या तुलसी के पास दीप जलाने से महालक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।
क्यों मनाई जाती है कार्तिक पूर्णिमा पर देव दीपावली
इस दिन महादेव ने त्रिपुरासूर नामक राक्षस का संहार किया था। यही नहीं यह भी कहा जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु का प्रथम मत्स्यावतार हुआ था। ऐसा माना जाता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन सोनपुर में गंगा गंडकी के संगम पर गज और ग्राह का युद्ध हुआ था। गज की करुणामई पुकार सुनकर भगवान विष्णु ने ग्राह का संहार कर भक्त की रक्षा की थी। इस वजह से देवताओं ने स्वर्ग में दीपक जलाए थे। तभी से इस दिन देव दिवाली मनाई जाती है। इस भगवान सत्यनारायण की पूजा, कथा और व्रत रखा जाता है।
भिलाई / शौर्यपथ / भिलाई इस्पात संयंत्र के शिरोमणि पुरस्कार योजना के तहत उत्कृष्ट एवं अनुकरणीय कार्य निष्पादन करने वाले आरसीएल विभाग में कार्यरत् 08 कार्मिकों को पाली/कर्म शिरोमणि पुरस्कार से स मानित किया गया। विदित हो कि 23 नवंबर, 2020 को कार्मिक-याँत्रिकी द्वारा इस पुरस्कार वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
शिरोमणि पुरस्कार योजना का मुख्य उद्देश्य संयंत्र में कार्मिकों का कार्यस्थल में नवीनता, संसाधनों का बेहतर उपयोग, संगठनात्मक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए उच्चतम स्तर के सुरक्षा मानकों को बनाए रखते हुए तकनीकी/प्रक्रियात्मक अनुशासन का पालन करने मेें असाधारण प्रतिभा का प्रदर्शन करते हैं, ऐसे कर्मठ कार्मिकों को पहचान देते हुए उन्हें स मानित करना है। जिसके तहत कर्म शिरोमणि पुरस्कार प्रत्येक माह में एवं पाली शिरोमणि पुरस्कार प्रत्येक तिमाही में उत्कृष्ट कार्मिकों का चुनाव कर प्रदान किया जाता है। ताकि कार्मिक संयंत्र में सदैव स्व-प्रेरित होकर अपना कार्य सुरक्षित एवं बेहतर तरीके से करते रहें।
मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना के तहत रायपुर शहरी क्षेत्र में दाई-दीदी क्लीनिक का संचालन शुरू
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना के तहत प्रदेश के पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में रायपुर शहरी क्षेत्र में दाई-दीदी क्लीनिक का संचालन शुरू हो गया है। पहले दिन यह मोबाइल क्लिनिक रायपुर के गोंदवारा क्षेत्र और आज हीरापुर सेक्टर के गोगांव आंगनबाड़ी क्षेत्र पहुंची।
दाई-दीदी क्लीनिक की मोबाइल टीम पहुंचने पर महिलाओं ने उसका स्वागत किया। गोंदवारा में कल जहां इस क्लिनिक के माध्यम से लगभग पचास महिलाओं ने अपना इलाज कराया था, वहीं आज सौ से अधिक महिलाओं ने अपना इलाज कराया। कई गर्भवती एवं प्रसूता महिलाओं ने जहां महिला चिकित्सक को अपने बीच पाकर उन्हें अपनी व्यक्तिगत स्वास्थ्य संबंधित समस्यायें बतायी वहीं जांच करवाकर अपना इलाज भी करवाया।
मुख्यमंत्री ने स्वर्गीय श्रीमती इंदिरा गांधी के जन्म दिवस पर किया था शुभारंभ
उल्लेखनीय हैं कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दो दिन पूर्व 19 नवम्बर को देश की पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्रीमती इंदिरा गांधी के जन्म दिवस पर महिलाओं के लिए क्लीनिक दाई-दीदी क्लीनिक का शुभारंभ किया था। उन्होंने पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में रायपुर, दुर्ग-भिलाई और बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र के लिए 3 स्पेशल मोबाइल दाई-दीदी क्लीनिक को अपने निवास से हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया था। इस क्लीनिक में डॉक्टर सहित सभी चिकित्सकीय स्टाफ महिलाएं होंगी और केवल महिलाओं का ही निःशुल्क इलाज किया जाएगा।
क्लिनिक में आने वाली महिलाओं ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के द्वारा महिलाओं के प्रति दिखाई गई संवेदनशीलता के लिए उन्हें धन्यवाद दिया और उनके प्रति आभार व्यक्त किया। उल्लेखनीय हैं कि दाई-दीदी क्लीनिक देश में अपनी तरह का पहला क्लीनिक है, जो केवल महिलाओं का इलाज करेगा। यह भी उल्लेखनीय हैं कि कई बार संकोच के कारण महिलाएं अपनी बीमारी को खुलकर नहीं बता पाती हैं। इस कारण उनकी बीमारी का सही उपचार नहीं हो पाता। अब दाई-दीदी क्लीनिक में महिला चिकित्सक और महिला स्टाफ होने से वे निःसंकोच अपना समुचित इलाज करा रही है। रायपुर शहर में इस मोबाइल क्लिनिक के माध्यम से महिलाओं को निःशुल्क इलाज की सुविधा उनके घर के पास मिल रही है और महिलाएं भी इसका पूरा लाभ लेते हुए बड़ी संख्या में आकर अपना इलाज करा रही है।
स्तन कैंसर के अलावा गर्भवती महिलाओं की विशेष जांच की सुविधा
दाई-दीदी क्लीनिक में महिलाओं के प्राथमिक उपचार के साथ-साथ महिला चिकित्सक द्वारा स्तन कैंसर की जांच, हितग्राहियों को स्व स्तन जांच का प्रशिक्षण, गर्भवती महिलाओं की नियमित एवं विशेष जांच आदि की अतिरिक्त सुविधा हैं।
महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से शहरों में स्थित आंगनबाड़ी के निकट पूर्व निर्धारित दिवसों में यह क्लीनिक स्लम क्षेत्र में लगाया जा रहा है। इस क्लीनिक के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं, बच्चों आदि के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग की विभिन्न हितग्राहीमूलक परियोजना का लाभ भी प्रदान किया जा रहा है।
यह भी उल्लेखनीय हैं कि जनरल क्लीनिक में महिलाओं के लिए पृथक जांच कक्ष और काउंसलर नहीं होने से महिलाएं परिवार नियोजन के साधन, कॉपर-टी निवेशन, आपातकालीन पिल्स की उपलब्धता, गर्भनिरोधक गोलियां, साप्ताहिक गर्भनिरोधक गोली, गर्भनिरोधक इंजेक्शन, परिवार नियोजन परामर्श, एसटीडी परामर्श में शर्म का अनुभव करती है। इस महिला क्लीनिक में डेडीकेटेड महिला स्टाफ होने से महिलाओं विशेषकर झुग्गी झोपड़ क्षेत्र की गरीब महिलाएं अब इस प्रकार के परामर्श निःसंकोच ले रही हैं।
राजनांदगांव / शौर्यपथ / शिक्षा का अधिकार कानून का कड़ाई से पालन कराने की जिम्मेदारी जिला शिक्षा अधिकारी की है, लेकिन जिले में पांच सौ बच्चे विगत पांच माह से प्रवेश पाने भटक रहे है। आरटीई कानून के अंतर्गत जुलाई माह में प्रथम लॉटरी निकाला गया था, जिसमें चयनित 500 बच्चे आज भी प्रायवेट स्कूलों में प्रवेश पाने भटक रहे है। पालकों ने अनेकों बार जिला शिक्षा अधिकारी को लिखित आवेदन दिया, लेकिन उनके बच्चों को आज तक प्रवेश नहीं दिलाया गया, जिसको लेकर अब पालकों ने संभागीय कमिश्नर, जिला दुर्ग से लिखित शिकायत कर डीईओ के खिलाफ कार्यवाही की मांग की गई है। छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल पॉल ने भी छग राज्य बाल संरक्षण आयोग को लेटर लिखकर डीईओ के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही करने की मांग की है।
मुख्यमंत्री ने दाई-दीदी क्लीनिक का किया शुभारंभ : दाई-दीदी क्लीनिक की वाहनों को हरी झण्डी दिखाकर किया रवाना
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्रीमती इंदिरा गांधी के जन्म दिवस पर महिलाओं के लिए क्लीनिक दाई-दीदी क्लीनिक का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में रायपुर, दुर्ग-भिलाई और बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र के लिए 03 स्पेशल मोबाइल दाई-दीदी क्लीनिक को अपने निवास से हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। मुख्यमंत्री ने मोबाइल क्लीनिक के भीतर जाकर उपलब्ध सुविधाओं का अवलोकन भी किया और अपने ब्लड प्रेशर की जांच भी करायी। इस दाई-दीदी स्पेशल क्लीनिक में डॉक्टर सहित सभी चिकित्सकीय स्टाफ महिलाएं होंगी और केवल महिलाओं का ही निःशुल्क इलाज किया जाएगा।
इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि दाई-दीदी क्लीनिक देश में अपनी तरह का पहला क्लीनिक है, जो केवल महिलाओं का इलाज करेगा। वर्तमान में इसे रायपुर, दुर्ग-भिलाई और बिलासपुर निगम क्षेत्र में मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया है और आगे इसका विस्तार किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि संकोच के कारण महिलाएं अपनी बीमारी को खुलकर नहीं बता पाती हैं। इस कारण उनकी बीमारी का सही उपचार नहीं हो पाता। अब दाई-दीदी क्लीनिक में महिला चिकित्सक और महिला स्टाफ होने से वे निःसंकोच अपना समुचित इलाज करा सकेंगी। इसमें महिलाओं को निःशुल्क इलाज की सुविधा मिलेगी। उन्हें अस्पतालों में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। मुख्यमंत्री ने महिलाओं से इस क्लीनिक का ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाने की अपील की है।
इस मौके पर नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिव डहरिया, राज्य गृह निर्माण मण्डल के अध्यक्ष कुलदीप जुनेजा, राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती किरणमयी नायक, महापौर एजाज ढेबर, सभापति प्रमोद दुबे, रायपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष सुभाष धुप्पड़, सचिव नगरीय प्रशासन श्रीमती अलरमेल मंगई डी., रायपुर कलेक्टर भारतीदासन, नगर निगम कमिश्नर रायपुर, डॉक्टर, नर्स सहित उपस्थित थे।
गौरतलब है कि दाई-दीदी क्लीनिक में महिलाओं के प्राथमिक उपचार के साथ-साथ महिला चिकित्सक द्वारा स्तन कैंसर की जांच, हितग्राहियों को स्व स्तन जांच का प्रशिक्षण, गर्भवती महिलाओं की नियमित एवं विशेष जांच आदि की अतिरिक्त सुविधा होगी। महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से शहरों में स्थित आंगनबाड़ी के निकट पूर्व निर्धारित दिवसों में यह क्लीनिक स्लम क्षेत्र में लगाया जाएगा। इस क्लीनिक के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं, बच्चों आदि के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग की विभिन्न हितग्राहीमूलक परियोजना का लाभ भी प्रदान किया जाएगा।
जनरल क्लीनिक में महिलाओं के लिए पृथक जांच कक्ष और काउंसलर नहीं होने से महिलाएं परिवार नियोजन के साधन, कॉपर-टी निवेशन, आपातकालीन पिल्स की उपलब्धता, गर्भनिरोधक गोलियां, साप्ताहिक गर्भनिरोधक गोली, गर्भनिरोधक इंजेक्शन, परिवार नियोजन परामर्श, एसटीडी परामर्श में शर्म का अनुभव करती है। इस महिला क्लीनिक में डेडीकेटेड महिला स्टाफ होने से अब इस प्रकार के परामर्श निःसंकोच ले सकेंगी।
खाना खजाना / शौर्यपथ / नाश्ता बनाते समय रोजाना सुबह मन में एक सवाल उठना लाजमी है कि ऐसा क्या बनाएं जो जल्दी बनने के साथ-साथ सेहत के लिए भी पौष्टिक हो। आपकी ऐसी ही समस्या और सवाल का जवाब है आलू-पोहा रोल्स। आलू-पोहा रोल्स स्वादिष्ट होने के साथ-साथ आपको दिनभर के लिए भरपूर एनर्जी देने का भी काम करेंगे। तो देर किस बात की आइए जानते हैं कैसे बनाए जाते हैं आलू-पोहा रोल्स।
आलू-पोहा रोल्स बनाने के लिए सामग्री-
-सरसों
-थोड़ी-सी राई
-एक चुटकी हींग
जीरा
-कटी हुई हरी मिर्च
-एक कटा हुआ प्याज
-थोड़ी-सी अदरक
-मटर
-एक कटा हुआ टमाटर
-हल्दी
-तेल
-अमचूर पाउडर
-4 उबले हुए आलू
-हरा धनिया
-1 कप पोहा
-1 कप सूजी
-आधा कप दही
-नमक स्वादानुसार
विधि
आलू-पोहा रोल्स बनाने के लिए सबसे पहले एक पैन में 2 चम्मच तेल गर्म करके उसमें थोड़ी सी सरसों, थोड़ी-सी राई, एक चुटकी हींग और जीरा डाल दें। अब प्याज और अदरक डालने के बाद इसे हल्का-सा रोस्ट कर लें। जब प्याज हल्का सा रोस्ट हो जाएं, तो उसमें टमाटर और नमक डाल दें।
टमाटर गलने के बाद मटर, आलू, हल्दी, हरा धनिया और आमचूर पाउडर डालकर भून लें। रोल्स की स्टफिंग तैयार होने के बाद, पोहे का बैटर बनाएं। बैटर बनाने के लिए एक कप पोहा 10 मिनट के लिए भिगोकर रखने के बाद उसका सारा पानी निकालकर अलग रख दें।
बैटर तैयार करते हुए एक बर्तन में सूजी लेकर उसमें आधा कप दही और थोड़ा सा नमक डालकर अच्छी तरह मिक्स कर लें। अब पोहा बैटर और सूजी बैटर को मिक्सी में पीस लें, आपका बैटर तैयार है।
अब आलू की स्टफिंग बनाने के लिए गोल आकार के रोल्स बनाकर एक प्लेट में रख लें। इसके बाद तवा गर्म करके चीले की तरह पोहा बैटर उस पर डालें और गोलाकार बनाएं। जब बैटर हल्का-सा सिकने लगे तो उसके ऊपर आलू-स्टफिंग व हल्की-सी सॉस डालकर रोल बना दें। इस तरह से आपको पोहा रोल्स अच्छी तरह दोनों तरफ से सेकने हैं। ये हेल्दी और टेस्टी पोहा रोल्स आप गर्मा-गर्म चाय के साथ सर्व कर सकते हैं।
व्रत /त्यौहार /शौर्यपथ / कार्तिक मास की षष्टी को छठ मनाई जाती है। इस बार छठ का महा पर्व 18 नवंबर से 21 नवंबर तक मनाया जाएगा। छठ पूजा में ठेकुआ के प्रसाद का बहुत महत्व माना गया है। इस प्रसाद को विशेष तौर पर छठ पूजा के अवसर पर कुछ नियमों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाता हैं। तो चलिए आपको बताते हैं पूजा के प्रसाद में कैसे बनाया जाता है खस्ता ठेकुआ।
सामग्री :
-250 ग्राम गेहूं का आटा
-1 बड़ा चम्मच घी (मोयन के लिए)
-30 ग्राम सूखे नारियल का बूरा
-125 ग्राम गुड़
-आधा चम्मच इलायची पाउडर
-तलने के लिए तेल
-एक मुट्ठी बारीक कटे मेवे
ठेकुआ बनाने की विधि -
ठेकुआ बनाने के लिए सबसे पहले एक बर्तन में आधा कप पानी उबलकर उसमें गुड़ तोड़कर डाल दें। गुड़ जब तक पूरी तरह पिघल न जाए तब तक उसे लगातार हिलाते रहें। इसके बाद पानी को छलनी से छानकर ठंडा कर लें। एक परात में आटा छानकर उसमें नारियल का बूरा, बरीक कटे मेवे और पिसी इलायची अच्छी तरह मिक्स कर लें।
अब गुड़ के पानी की सहायता से आटे को कड़ा गूंथ लें। इसके बाद आटे की लोइयां बनाकर कड़ाही में तेल गर्म कर लें। आप आटे की लोइयों को मनचाहे आकार में शेप देते हुए बेल लें और गर्म तेल में डालकर कम आंच पर तल लें। आपका गरमा-गर्म ठेकुआ बनकर तैयार है। ठेकुआ को एक एयरटाइट डिब्बे में भरकर भी रखा जा सकता है।
शौर्यपथ / हमने अक्सर लोगों को महिला दिवस की बधाइयां देते हुए देखा है, लेकिन क्या आपको पता है पुरुष दिवस कब मनाया जाता है? इंटरनेशनल मेन्स डे हर साल 19 नवंबर को मनाया जाता है। यह दुनिया के लगभग 60 से अधिक देशों में मनाया जाता है।
भारत में अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस मनाने की शुरुआत 13 साल पहले से ही की गई है। पहली बार यह साल 2007 में मनाया गया था। अगर वैश्विक स्तर की बात करें तो इसकी शुरुआत 1998 में त्रिनिदाद और टोबैगो में हुई थी। डॉ. जीरोम तिलकसिंह ने पुरुषों के योगदान को सराहते हुए पुरुष दिवस मनाने की सोची थी। सबसे पहले उन्होंने ही अपने पिता के जन्मदिन पर विश्व पुरुष दिवस मनाया था। डॉ. जीरोम ने अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस की पहल करते हुए यह शुरुआत की थी और तभी से हर साल इसे मनाया जाने लगा।
हर साल इंटरनेशनल मेन्स डे पर एक थीम रखा जाता है। इस साल का थीम 'बेटर हेल्थ फॉर मैन एंड बॉयज' है। इस खास अवसर पर आप इन शानदार हिंदी मैसेजेस और कोट्स को भेजकर अपने प्रियजनों को हैप्पी इंटरनेशनल मेन्स डे विश कर सकते हैं।
1. पुरुष दिवस की पवन बेला पर
यही है शुभ संदेश
हर दिन आए
आपके जीवन में
लेकर खुशियां विशेष
Happy International Men's Day 2020
2. मर्द को दर्द नहीं होता कहावत को सच मानकर,
जो ता उम्र अपना दर्द छिपाता है,
वो भी पुरुष ही होता है
Happy International Men's Day 2020
3. जिन्दगी को तरस के खुदा ने ये तस्वीर बनाई है
हर दुख बच्चों का खुद पे वो सह लेतें है
उस खुदा की जीवित प्रतिमा को हम पिता कहते है
पुरुष दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं
Happy International Men's Day 2020
4. दिए जलते और जगमगाते रहें
आप हमेशा मुस्कुराते रहे
जब तक जिंदगी है ये दुआ है हमारी
आप ईद के चांद की तरह जगमगाते रहें
आप सभी को पुरुष दिवस की हार्दिक बधाई
Happy International Men's Day 2020
शिक्षा / शौर्यपथ / स्वामी विवेकानंद का बहुत लोकप्रिय कथन है 'उठो, जागो और तब तक मत रुको, जब तक अपने लक्ष्य को न प्राप्त कर लो'। इस बात से प्रेरणा लेने की जगह कई बार लोग एक-दो बार असफल होने पर अपने लक्ष्य को पाने के लिए किए जाने वाले प्रयासों को छोड़कर ही बैठ जाते हैं। इसके विपरीत अगर हम अपनी कोशिशें जारी रखें तो हमें सफल होने से कोई नहीं रोक सकता है। यही बात इस कहानी में भी बताई गई है।
एक प्रयोग में एक रिसर्च बायोलॉजिस्ट ने एक बड़े से टैंक में शार्क मछली को रखा और फिर उसी टैंक में छोटी मछलियों को भी डाल दिया। शार्क ने छोटी मछलियों को खाना शुरू कर दिया और कुछ ही घंटों में सभी छोटी मछलियां शार्क का आहार बन चुकी थीं। हर बार यही होता। बायोलॉजिस्ट ने अब अपने प्रयोग में थोड़ा परिवर्तन किया और एक मजबूत फाइबर स्लाइड को उस टैंक में डाल कर टैंक को दो भागों में बांट दिया। एक भाग में शार्क और दूसरे भाग में छोटी मछलियों को रखा। आदतन शार्क ने छोटी मछलियों पर हमला करना चाहा तो वे उस स्लाइड से टकरा गईं। शार्क ने प्रयास नहीं छोड़ा और हमला करती रही।
यह प्रयोग कुछ हफ्तों तक जारी रहा। शार्क ने हमला करना जारी रखा, लेकिन उसके प्रयास में लगातार कमी आती गई। फिर एक समय ऐसा आया कि शार्क ने यह मान लिया कि वह छोटी मछलियों को नहीं खा सकती। उसने प्रयास करना ही छोड़ दिया। बायोलॉजिस्ट ने अब फाइबर की स्लाइड को वहां से हटा दिया। लेकिन यह क्या, शार्क को तो इससे कोई फर्क हीं नहीं पड़ा। उसने यह मान लिया था कि एक दीवार है, एक अवरोध है, जिसे वह पार नहीं कर सकती। उसने प्रयास करना ही छोड़ दिया अब छोटी मछलियां आराम से उसी टैंक में तैर रहीं थी और उसे शार्क से कोई खतरा भी नहीं था।
इस कहानी से मिलती है सीख-
हममें से कई लोगों के साथ अक्सर ऐसा होता है। हम प्रयास करना ही छोड़ देते हैं। कोई रुकावट नहीं होने के बावजूद हमें ऐसा लगता है कि अवरोध है, जिसे पार नहीं किया जा सकता। यकीन मानिए, अगर किसी चीज को पाने के लिए हम ईमानदारी से लगातार प्रयास जारी रखते हैं, तो वह हमें जरूर मिलती है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
