July 24, 2026
Hindi Hindi

Login to your account

Username *
Password *
Remember Me

    धर्म संसार / शौर्यपथ / सुख-समृद्धि की कामना के साथ त्योहार मनाए जाते हैं। हर त्योहार से जुड़ी तैयारियां वास्तु के सिद्धांत पर ही आधारित हैं। दीपावली के अवसर पर वास्तु के अनुसार त्योहारों की तैयारियां करें। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    त्योहारों के अवसर पर अपने घर या प्रतिष्ठान की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। घर या प्रतिष्ठान के प्रवेश द्वार पर की जाने वाली सजावट के लिए चावल के आटे, रंगीन पाउडर, फूल, आम के पत्ते का प्रयोग करें। घर में रखे अनुपयोगी सामान को घर से बाहर कर दें। घर की साज सज्जा में विविध रंगों का इस्तेमाल करें। घर के प्रवेश द्वार के दोनों ओर दीया जलाएं। त्योहार के अवसर पर किसी को भी पानी वाली चीजें या शोपीस उपहार में न दें। अपने कार्यक्षेत्र से संबंधित चीजें भी किसी को उपहार में न दें। किसी को भी भगवान श्रीगणेश-माता लक्ष्मी की मूर्ति उपहार में न दें। घर या प्रतिष्ठान के मुख्य द्वार पर मां लक्ष्मी के पैरों के निशान लगाना शुभ माना जाता है। पैरों की दिशा द्वार से अंदर आते हुए हो। दीपावली पर घर या दुकान के मुख्यद्वार के पास किसी बर्तन में पानी भरकर उसमें फूल डाल दें। इस बर्तन को मुख्यद्वार की पूर्व या उत्तर दिशा में रखें। त्योहार पर बर्तनों में पीतल, तांबे या चांदी के बर्तन ख़रीद सकते हैं। सोने या चांदी का सिक्का ख़रीदना भी शुभ होता है। दीपदान के लिए मिट्टी का दीपक ही जलाएं। दीपावली पर मिट्टी के दीए जरूर जलाएं। त्योहारों पर मखाने की खीर बनाने से घर में संपन्नता आती है। पूजाघर में सभी देवी-देवताओं की मूर्तियां बैठी हुई अवस्था में होनी चाहिए। दीपावली के दिन नई झाडू खरीदे। इस नई झाडू की पूजा कर आप पूरे घर की सफाई नई झाडू से करें।

    शौर्यपथ / त्योहार हमारे जीवन में नई खुशियां, नई ऊर्जा और नया उत्साह लेकर आते हैं। दीपावली के साथ कई त्योहार आने वाले हैं। घर और प्रतिष्ठानों में त्योहारों को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। वास्तु में कुछ आसान से उपाय बताए गए हैं जो इन त्योहारों पर आपके परिवार में सुख और समृद्धि में वृद्धि करने में सहायक हो सकते हैं। आइए जानते हैं इन उपायों के बारे में।
    घर या प्रतिष्ठान का मुख्य द्वार वास्तु शास्त्र में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। त्योहारों के स्वागत में घर या प्रतिष्ठान के मुख्य द्वार को तोरण, रंगोली से सजाएं। घर के प्रवेश द्वार की सफाई का विशेष ध्यान रखें और प्रवेश द्वार के दोनों ओर दीपक जलाएं। अगर घर या प्रतिष्ठान में रंग-रोगन की आवश्यकता है तो इसे जरूर कराएं। दीवारों पर दरारें, टूट-फूट, सीलन के निशान सकारात्मक ऊर्जा ग्रहण नहीं कर पाती हैं। घर में जो वस्तुएं अनुपयोगी हैं और नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न कर रही हैं तो उन्हें घर से बाहर कर दें। त्योहारों पर घर या प्रतिष्ठान का वातावरण धूप-अगरबत्ती से सुगंधित करें। घर की सफाई का विशेष ध्यान रखें और फूल, आम के पत्ते, रंगोली, रंगीन बल्ब आदि से घर या प्रतिष्ठान की साज सज्जा करें। रंगोली बनाते समय काले या भूरे रंग का प्रयोग न करें। त्योहार पर घर में बच्चों, बहू-बेटियों को रुपया-पैसा या दूसरी वस्तुओं का दान अवश्य करें। किसी को भी उपहार में चाकू या चमड़े आदि का सामान न भेंट करें। घर के कोने-कोने में नमक मिश्रित जल का छिड़काव करें। त्योहारों पर ध्यान रखें कि घर में कोई कमरा बंद न हो। पूजा में पीले वस्त्रों का प्रयोग करें। पीले आसन पर बैठकर पूजा करें। त्योहारों पर तुलसी के पौधे पर लाल या पीले रंग का वस्त्र चढ़ाएं और घी का दीप जलाकर रखें।

    रायपुर / शौर्यपथ / राज्य में बढ़ती ठंड और प्रदूषण को देखते हुए कोरोना संक्रमण की संभावनाओं को देखते हुए विशेषज्ञ लगातार सभी को सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।
    राजधानी रायपुर की प्रसिद्ध स़्त्री रोग विशेषज्ञ डाॅ सरिता दुबे इस समय गर्भवती महिलाओं एवं शिशुवती महिलाओं को अधिक सावधानी बरतने की सलाह दे रही हैं। उन्होने कहा कि गर्भवती महिलाएं और उनके परिजन जब भी बाहर जाएं मास्क जरूर लगाएं,भीड़ में न जाएं और दूसरों से 1 मीटर की दूरी बनाकर रखें। ऐसे समय में उन्हे अपने शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता भी बनाए रखनी है। उन्होने कहा कि कोरोना संक्रमित शिशुवती माताएं, शिशुओं को पूरी सावधानी बरतते हुए मास्क लगाकर और हाथ अच्छी तरह से धोकर स्तनपान करा सकती हैं।

    दुर्ग / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज दुर्ग जिले के पाटन ब्लाक के ग्राम पतोरा के गौठान पहुंचे। वहां स्वसहायता समूह की महिलाओं ने दीवाली त्योहार के लिए सुंदर डिजाइनर दीये, सजावटी सामग्री तथा परंपरागत छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के पैकेट की सामग्री उन्हें दिखाई। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने बिहान बाजार के बुकलेट का भी लोेकार्पण किया।
    मुख्यमंत्री ने महिलाओं द्वारा संचालित आयमूलक गतिविधियों और उनके द्वारा उत्पादित सामग्री की गुणवत्ता की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन सामग्रियों को केवल स्थानीय स्तर विक्रय करने के बजाए इसकी मार्केटिंग अन्य बाजारों एवं शहरों में की जानी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को महिला समूहों के उत्पाद की मार्केटिंग एवं ऑनलाईन विक्रय की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने बताया कि आनलाइन प्लेटफार्म के लिए बातचीत चल रही है। इन उत्पादों को अधिकाधिक लोगों तक पहुंचाने दुर्ग में बिहान बाजार जिला पंचायत परिसर में आरंभ किया गया है। केवल दो दिनों में 3 लाख रुपए की बिक्री बिहान बाजार में हो चुकी है।
    मुख्यमंत्री ने महिलाओं से कहा कि जिन वस्तुओं की बाजार में ज्यादा माँग है, उन्हें तैयार करें। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कहा कि इन्हें सिलाई मशीन का प्रशिक्षण भी दें। अगरबत्ती, फिनाइल, साबुन जैसे उत्पादों के निर्माण के लिए भी सभी समूहों को प्रेरित करें। कोशिश यह हो कि स्थानीय मार्केट में अधिकाधिक उत्पाद स्थानीय एसएचजी ही उपलब्ध करा दें। इससे आय का रास्ता खुलेगा।
    मुख्यमंत्री ने गौठान में वर्मी कंपोस्ट उत्पादन को भी देखा। मुख्यमंत्री ने पूछा कि डिकंपोजर डाला या नहीं। महिला समूह से जुड़ी सुमन ने बताया कि डिकंपोजर के उपयोग से खाद बनाने में लगने वाला समय काफी कम हो गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गौठानों को आत्मनिर्भर बनाना है। आप लोग जितना काम गोधन न्याय योजना पर करेंगे, आपकी आय उतनी ही बढ़ेगी। उन्होंने पहाटियों से भी बातचीत की। पहाटियों ने बताया कि इससे हमें आय जरिया मिल गया है।इस मौके पर गुंडरदेही के विधायक श्री कुंवर निषाद, संभागायुक्त श्री टीसी महावर, आईजी विवेकानंद सिन्हा, सीएफ श्रीमती शालिनी रैना, कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे, एसपी प्रशांत ठाकुर, सीईओ सच्चिदानंद आलोक सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

    राज्य में गोबर विक्रेताओं को अब तक हो चुका 47.38 करोड़ रूपए का भुगतान
    रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज राज्य शासन की महत्वाकांक्षी 'गोधन न्याय योजना' के तहत राज्य के 77 हजार 592 ग्रामीणों एवं गौपालकों से 20 अक्टूबर से 5 नवम्बर के मध्य गौठानों में क्रय किए गए गोबर के एवज में 8 करोड़ 97 लाख रूपए का ऑनलाइन भुगतान किया। गोधन न्याय योजना के तहत अब तक गोबर विक्रेताओं को 47 करोड़ 38 लाख रूपए का भुगतान किया जा चुका है।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी विभागों के समन्वित प्रयास से गौठान और गोधन न्याय योजना का राज्य में सफल क्रियान्वयन हो रहा है और इसका लाभ ग्रामीणों, किसानों, पशुपालकों सहित समाज के गरीब तबके के लोगों को मिलने लगा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गौठानों में वर्मी कम्पोस्ट का उत्पादन और विक्रय भी शुरू हो चुका है। इससे अब महिला समूहों को भी लाभ मिलने लगेगा। उन्होंने वर्मी कम्पोस्ट सहित अन्य सामग्रियों के निर्माण के लिए महिला समूहों को प्रशिक्षित किए जाने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन एवं अप्रारंभ गौठानों को तेजी से पूरा कराने और इसे आजीविका केन्द्र के रूप में विकसित करने की बात कही। उन्होंने महिला समूहों द्वारा उत्पादित सब्जी एवं अन्य सामग्रियों की मार्केटिंग के लिए उन्हें शासकीय संस्थाओं विशेषकर स्कूलों में संचालित मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम तथा आश्रम-छात्रावास में आपूर्ति सुनिश्चित करने की बात कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिकारियों को इस बात पर ध्यान देने की जरूरत है कि महिला समूह मांग आधारित सामग्रियों का उत्पादन करें, ताकि उन्हें लाभ होता रहे। उन्होंने कहा कि सुराजी गांव योजना, गोधन न्याय योजना और राजीव गांधी किसान न्याय योजना की चर्चा पूरे देश में है। उन्होंने राज्य में इन योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के लिए सभी को बधाई और शुभकामनाएं दी।
    इस अवसर पर कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल गोधन न्याय योजना के तहत प्रत्येक पखवाड़े में गोबर खरीदी की राशि का भुगतान कर अपने वादे को निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत अब तक 47.38 करोड़ रूपए का भुगतान गोबर बेचने वाले ग्रामीणों एवं गौपालकों को किया जा चुका है। यह समाज के जरूरतमंद एवं गरीब लोगों को सीधा लाभ पहुंचाने वाली योजना है। उन्होंने कहा कि गौठानों में उत्पादित वर्मी कम्पोस्ट की गुणवत्ता की जांच के लिए राज्य के प्रत्येक जिले में प्रयोगशाला की स्थापना की जा रही है। गौठानों के आजीविका मिशन से जोडऩे की कार्ययोजना है। उन्होंने गौठानों में आजीविका मूलक गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिलों में स्थित कृषि विज्ञान केन्द्र को 10-10 गौठानों से तथा एग्रीकल्चर, डेयरी एवं मत्स्य महाविद्यालयों को भी गौठानों से जोडऩे की बात कहीं।
    कार्यक्रम के प्रारंभ में कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. एम.गीता ने बताया कि राज्य में 5454 गौठान निर्मित है, जिसमें से 3677 गौठानों में गोबर की खरीदी की जा रही है। अब तक 23 लाख 68 हजार 900 क्विंटल गोबर क्रय किया गया है। उन्होंने बताया कि गोबर विक्रेताओं में अन्य पिछड़ा वर्ग के 51.51 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति वर्ग के 37.24 प्रतिशत तथा अनुसूचित जाति वर्ग के 7.40 प्रतिशत हितग्राही शामिल हैं। उन्होंने कहा कि वर्मी खाद के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए गौठानों में वर्मी टांको का निर्माण तेजी से कराया जा रहा है। अब तक 44 हजार से अधिक टांके बनाए जा चुके है, जबकि 16 हजार टांके निर्माणाधीन है। गौठानों में 8 हजार से अधिक क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट खाद का उत्पादन हुआ है। जिसमें से एक हजार क्विंटल खाद की बिक्री हो चुकी है। शेष खाद की मात्रा की पैकेजिंग एवं विक्रय प्रक्रियाधीन है। उन्होंने बताया कि गोधन न्याय योजना शुरू होने से बीते 3 माह में सक्रिय गौठानों की संख्या में लगभग 1 हजार की बढ़ोत्तरी हुई है।
    इस अवसर पर वन मंत्री मोहम्मद अकबर, संसदीय सचिव शिशुपाल शोरी, सचिव कृषि अमृत कुमार खलखो, मुख्यमंत्री के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी, संचालक उद्यानिकी एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

    खाना खजाना / शौर्यपथ / दिवाली आने में कुछ दिन ही बचे हैं, ऐसे में अगर आप कोई स्पेशल रेसिपी की तलाश में हैं, तो आज हम आपको बता रहे हैं आलू-गोभी टिक्की की स्पेशल रेसिपी।
    सामग्री : 1 कप ब्रेड क्रम्ब्स 2 उबले आलू 1 कप फूलगोभी ग्रेटिड 1 कप बेसन 1/2 टीस्पून धनिया पाउडर 1 टीस्पून जीरा 1 टीस्पून नींबू का रस 1 टीस्पून चाट मसाला 1 टीस्पून अदरक-लहसुन का पेस्ट 2 टेबलस्पून हरा धनिया नमक स्वादानुसार तेल जरूरत के अनुसार
    विधि : सबसे पहले एक बर्तन में आलू मैश कर लें। इसमें सभी चीजें डालकर मिला लें और मिश्रण तैयार कर लें। मीडियम आंच पर पैन में तेल डालकर गर्म करने के लिए रख दें। इस बीच हाथों को तेल से चिकना कर मिश्रण का एक चम्मच लें और टिक्की की शेप दें। इसी तरह से सारी टिक्की तैयार कर लें। - गर्म तेल में टिक्की डालकर सुनहरा होने तक फ्राई करें। तैयार हैं आलू-गोभी की टिक्की। गरमागरम सॉस के साथ सर्व करें।

    सेहत / शौर्यपथ / प्रदूषण आपके पूरे शरीर पर बुरा प्रभाव डालता है। इसके कुप्रभाव से बचने के लिए सरकारी प्रयास ही काफी नहीं हैं। हम खुद कितने सजग और तैयार हैं, यह भी मायने रखता है। छोटे-छोटे कदम उठाकर घर-परिवार को इसके प्रकोप से बचा सकते हैं। आज से हम विशेषज्ञों के सुझाए ऐसे ही उपाय साझा कर रहे हैं। पहली कड़ी में जानिए दिल के मरीज क्या करें...
    क्यों घातक
    एम्स के ह्रदय रोग विभाग के प्रोफेसर डॉक्टर संदीप मिश्रा के मुताबिक कई शोध में यह देखा गया है कि वायु प्रदूषण वाले इलाकों में प्रदूषण बढ़ने पर हृदयघात की संख्या बढ़ जाती है। प्रदूषित सूक्ष्म कण ,पीएम 2.5 और 2.5 माइक्रोन से भी छोटे प्रदूषित कण दिल तक रक्त पहुंचाने वाली आर्टरी की एंडोथीलियम को नुकसान पहुंचा रही है। ऐसे में हृदय रोगी गुनगुना पानी ज्यादा पीएं। समय पर दवा लें और घर पर ही व्यायाम करें।
    क्या खतरा
    ’ हृदयघात का खतरा बढ़ जाता है।
    ’ दिल की नसें सूखने लगती हैं।
    ’ रक्त का संचार धीमा होने लगता है।
    ’ रक्त संचार के लिए रोगी को जोर लगाना पड़ता है।
    क्या करें
    ’ वायु प्रदूषण से बचने के लिए एन 95 मास्क लगाएं
    ’ दिल के मरीज हैं तो अपने रक्तचाप पर नियंत्रण रखें
    ’ सर्दियों के हिसाब से एक बार डॉक्टर को जरूर दिखा लें
    क्या न करें
    ’ प्रदूषण का स्तर अधिक हो तो सैर पर निकलने से बचना चाहिए।
    ’ प्रदूषित सड़कों पर निकलने से भी बचें, जरूरी न हो तो घर पर ही रहें
    वायु प्रदूषण से दिल के दौरे का खतरा बढ़ जाता है। कई शोध में देखा गया है कि वायु प्रदूषित इलाकों में रहने वाले लोगों में ह्रदयघात के मामले उस समय ज्यादा बढ़ गए जब उनके क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर बढ़ गया।
    -प्रोफेसर संदीप मिश्रा, ह्रदय रोग विभाग ,एम्स
    एनसीआर का हाल
    15 फीसदी मरीज बढ़े
    फरीदाबाद में हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. उमेश कोहली बताते हैं कि जिले में करीब 20 हजार हृदय रोगी हैं। प्रदूषण के कारण जिले में करीब 15 फीसदी हृदयरोगी मरीज बढ़ जाते हैं।
    ठंड में परेशानी अधिक
    नोएडा स्थित मेट्रो अस्पताल के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. समीर गुप्ता बताते हैं कि नवंबर, दिसंबर और जनवरी में हृदय रोगियों की संख्या 30 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। इसमें कड़ाके की ठंड भी एक पहलु है।
    हार्ट अटैक के मामले बढ़े
    गुरुग्राम स्थित कॉलबिंया एशिया अस्तपाल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित गुप्ता ने बताया कि खराब होती आबोहवा के कारण 20 फीसदी तक हार्ट अटैक के मामले बढ़ जाते हैं।
    दोगुने हुए मरीज
    गाजियाबाद स्थित एमएमजी अस्तपाल के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सुनिल कात्याल ने बताया कि पिछले 15 दिनों में दिल के मरीजों की ओपीडी में दोगुनी हो गई है। 30 से अधिक मरीज आ रहे।

    सेहत / शौर्यपथ / उम्र का तीसरा दशक आपके लिए सबसे ज्‍यादा महत्‍वपूर्ण है। इस समय हर रोज एक टुकड़ा पनीर अपने आहार में शामिल करना आपको उन जोखिमों से बचा सकता है, जो 40 के दशक में आपके सामने आने वाले हैं।
    पनीर हम भारतीयों का पसंदीदा व्यंजन है। अगर आप शाकाहारी है तब तो पनीर हर छोटे बड़े मौके पर खास रूप से बनता है। बात चाहें स्वाद की हो या सेहत की पनीर आपकी प्लेट का आवश्यक हिस्सा है।
    पनीर में सेलेनियम और पोटेशियम होता है, जो मेंटल और फिजिकल दोनों हेल्थ के लिए बहुत लाभदायक है। पोटेशियम हमारे दिमाग के लिए, खासकर याददाश्त के लिये बहुत महत्वपूर्ण है। वहीं सेलेनियम प्रजनन क्षमता को बढ़ाता है। पनीर दूध से बना होने के कारण कैल्शियम का भी उत्कृष्ट स्रोत है। और कैल्शियम दांतों और हड्डियों के लिए फायदेमंद होता ही है।
    एक प्रोटीन के स्रोत के रूप में पनीर आपके लिए बहुत आवश्यक है। शाकाहारी हैं तो पनीर ही आपके लिए प्रोटीन का प्रमुख स्रोत होता है। 100 ग्राम पनीर में 265 कैलोरी होती हैं। इसमें से 20.7 ग्राम फैट, 1.2 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 18.5 ग्राम प्रोटीन और 208 मिलीग्राम कैल्शियम होता है।
    अगर आप वेट ट्रेनिंग करते हैं, तो आपको ज्यादा मात्रा में पनीर खाना चाहिए। पनीर प्रोटीन तो देता ही है, साथ ही लम्बे समय तक आपका पेट भी भरता है, जिससे आपको कम भूख लगती है।
    हम बताते हैं हर दिन पनीर खाने के फायदे-
    1. मजबूत दांत और हड्डियां
    पनीर में ढेर सारा कैल्शियम होता है, जो आपके दांत और हड्डियों को मजबूत करता हैं। पनीर दांतो की सड़न को रोकता है और कैविटी दूर करता है। पनीर में लैक्टोज कम होने के कारण यह दांतो और मसूड़ों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। महिलाओं में मेनोपॉज के बाद कैल्शियम की कमी बहुत आम समस्या है। इससे बचने के लिए अभी से अपनी डाइट में पनीर शामिल कर लें।
    2. मेटाबॉलिज्म बूस्‍ट करता है पनीर
    इसमें कैलोरी ज्यादा होती हैं, यही कारण है कि पनीर तुरन्त ऊर्जा प्रदान करता है। यह मेटाबॉलिज्म भी बढ़ाता है, क्योंकि पनीर खाने से इंसुलिन संतुलन में रहती है। जर्नल न्यूट्रिएंट में प्रकाशित स्टडी के अनुसार पनीर में लिनोलिक एसिड होता है जो फैट बर्न करने में मदद करता है। इसलिये वजन कम करने और लीन बॉडी बनाने के लिए पनीर किसी भी मीट विकल्प से बेहतर है।
    3. अर्थराइटिस और हड्डियों की अन्य समस्याओं को कम करता है
    पनीर में ओमेगा 3 और ओमेगा 6 फैटी एसिड होते हैं, जो अर्थराइटिस कम करने मे कारगर होते हैं। ओमेगा 3 गर्भावस्था में भी बहुत जरूरी होता है, यह प्रसव के दौरान होने वाली जटिलता को कम करने में सहायक है। शाकाहारियों के लिए यह ओमेगा 6 फैटी एसिड्स का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत है।
    4. आपके दिल को रखता है स्वस्थ
    पनीर में मौजूद पोटेशियम ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है, जिसके कारण दौरा पड़ने का जोखिम कम हो जाता हैं। इतना ही नहीं यह मसल क्रेम्प्स भी कम करता है। पनीर में हेल्दी फैट होता है जो बैड कोलेस्ट्रॉल कम करता है। यानी दिल को स्वस्थ रखने में पनीर बहुत फायदेमंद है।
    तो लेडीज, अपनी डाइट में पनीर आज से ही शामिल कर लें ताकि आप भविष्य में भी स्वस्थ और जवान रहें।

    सेहत / शौर्यपथ / गिलोय की लता को चबाना या उसे उबालकर काढ़ा बनाना ताजे गिलोय के सेवन का सबसे आसान तरीका है। लेकिन क्या यह गिलोय के टैबलेट से बेहतर है?
    कोविड-19 के चलते हम कम से कम अपनी इम्युनिटी का ख्याल रखना तो सीख ही गए हैं। इम्युनिटी की जब भी बात हो, गिलोय का नाम सबसे पहले आता ही है। आयुर्वेद में गिलोय का सेवन सदियों से होता आया है और आज साइंस भी गिलोय के फायदों को मानती है।
    क्यों फायदेमंद होता है गिलोय?
    गिलोय एंटीऑक्सिडेंट का भंडार है जो फ्री-रेडिकल्स से लड़ने का काम करता है। फ्री रेडिकल्स शरीर मे ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ने पर पैदा होते हैं, जो शरीर के सभी महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुचाते हैं। गिलोय का सेवन इन फ्री रेडिकल्स को खत्म करता है जिससे शरीर को नुकसान पहुंचने से बच जाता है।
    बुखार का इलाज करने से लेकर पाचन और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने तक गिलोय आपके लिए फायदेमंद है। गिलोय वैश्विक स्तर पर प्रचलित जड़ी-बूटी है जो इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद करती है। यह एंटीऑक्सिडेंट का महत्वपूर्ण स्रोत है जो फ्री-रेडिकल्स से लड़ता है। आपकी कोशिकाओं को स्वस्थ रखता है और बीमारियों से छुटकारा दिलाता है। गिलोय शरीर से टॉक्सिन को हटाने में मदद करता है।
    यही नहीं गिलोय के सेवन से रक्त शुद्ध होता है। यह कई रोगों के लिए जिम्मेदार बैक्टीरिया से लड़ता है और इंफेक्शन के जोखिम को भी कम करता है।
    गिलोय में एंटी-पायरेटिक प्रॉपर्टी होती हैं। इसलिए यह डेंगू, स्वाइन फ्लू और मलेरिया जैसी कई बीमारियों के खतरों को कम कर सकता है।
    नेशनल लाइब्रेरी ऑफ हेल्थ की रिपोर्ट में पाया गया है कि गिलोय एक हाइपोग्लाइसेमिक एजेंट के रूप में कार्य करता है और मधुमेह के इलाज में मदद करता है। गिलोय का रस ब्लड शुगर लेवल को कम करने का काम करता है।
    लेकिन क्या ताजा गिलोय टैबलेट और कैप्सूल से बेहतर है?
    सबसे पहले बात करते हैं उन सभी तरीको की जिनसे आप गिलोय का सेवन कर सकती हैं। गिलोय की लता या डंडी चबायी जाती है। इसे उबालकर काढा भी बनता है। गिलोय का रस भी बनता है जो बाजार में उपलब्ध भी है। इसके अतिरिक्त टैबलेट और कैप्सूल के रूप में भी गिलोय बाजार में मौजूद है। असल मे रस या ताजे गिलोय में एक कड़वा स्वाद होता है, जिससे बचने के लिए लोग टैबलेट या कैप्सूल चुनते हैं।
    अगर आप आयुर्वेद की जानकारी रखते होंगे, तो आपको पता होगा कि पतंजलि से लेकर बहुत सी आयुर्वेदिक ब्रांड गिलोय की टेबलेट और कैप्सूल बनाती हैं। इनमें गुण गिलोय के ही होते हैं। मगर कोई स्वाद नहीं होता।
    गिलोय में एंटीऑक्सीडेंट प्रॉपर्टी होती हैं जिससे यह इम्युनिटी बढ़ाता है। टैबलेट या कैप्सूल के लिए 250mg दिन में दो बार डोज होता है, यानी दिन में 500 मिलीग्राम गिलोय। अब कैप्सूल या टेबलेट में भी वही गुण होते हैं जो ताजे गिलोय में मिलेंगे, लेकिन इसमें एक कमी है।
    गिलोय का रस या काढ़ा शरीर मे जाते ही असर करता है। बुखार उतारने से लेकर खून में शुगर लेवल कम करने तक ताजा गिलोय तुरंत काम शुरू करता है। जबकि कैप्सूल या टैबलेट को घुलने में समय लगता है।
    भोजन से पहले गिलोय की टैबलेट लेने से आपकी शुगर नियंत्रित रहेगी। लेकिन अगर आप भोजन से पहले लेने के बजाय बाद में लें तो यह काम करने से समय लेगी। ऐसा ताजे गिलोय के साथ नहीं होता।
    क्या गिलोय के साइड इफेक्ट्स होते हैं?
    गिलोय के सेवन के कोई गंभीर दुष्प्रभाव नहीं हैं क्योंकि यह एक प्राकृतिक और सुरक्षित औषधि है। हालांकि, कुछ मामलों में गिलोय के उपयोग से कब्ज और ब्लड शुगर लेबल कम हो सकता है। इसलिए यदि आप मधुमेह के रोगी हैं और लंबे समय से गिलोय का सेवन कर रहे हैं, तो अपने बल्ड शुगर लेवल की नियमित रूप से जांच करते रहें। इसके अलावा,यदि आप गर्भवती हैं या स्तनपान करा रही तो गिलोय के उपयोग से बचें।
    गिलोय के सेवन से पहले मात्रा डॉक्टर से सलाह लेकर ही तय करें।

    धर्म संसार / शौर्यपथ / अहोई अष्टमी पर माताएं अपनी संतान की दीर्घ आयु के लिए व्रत रखती हैं। इस साल रविवार 8 नवंबर को अहोई का व्रत रखा जाएगा। इस व्रत में महिलाएं शाम को तारों को देखकर जल अर्पित करने के बाद व्रत को खोलेंगी। यह व्रत निर्जला रखा जाता है और इसमें अहोई मईया की पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि कार्तिक मास की अष्टमी के दिन निर्जला व्रत रखकर अहोई माता की पूजा करने से संतान की लम्बी आयु होती है। अहोई माता की पूजा के लिए कहीं कहीं चांदी के दानें लाएं जाते हैं और हर अहोई अष्टमी पर दो दानें माला में पिरोए डाले जाते हैं। इस तरह हर साल माला में दो चांदी के दाने पिरोए जाते हैं और उस माला को माताएं पूजा के बाद धारण करती हैं। इसके बाद किसी भी अच्छे दिन इस माला की पूजा करके उतारा जाता है। इसके बाद अगली होई पर फिर चांदी के दो मनके माला में पिरोए जाते हैं। इस माला को भी पूजा में शामिल किया जाता है।
    अहोई अष्टमी शुभ मुहूर्त-
    अष्टमी तिथि प्रारंभ: 08 नवंबर को सुबह 07 बजकर 29 मिनट
    अष्टमी तिथि समाप्त: 09 नवंबर को सुबह 06 बजकर 50 मिनट पर
    पूजा का मुहूर्त: 5 बजकर 37 मिनट से शाम 06 बजकर 56 मिनट के बीच।
    करवा चौथ के ठीक चार दिन बाद अष्टमी तिथि को देवी अहोई व्रत मनाया जाता है । गोबर से या चित्रांकन के द्वारा कपड़े पर आठ कोष्ठक की एक पुतली बनाई जाती है और उसके बच्चों की आकृतियां बना दी जाती हैं। माताएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखने के बाद शाम को या प्रदोष काल उसकी पूजा करती हैं।
    करवाचौथ में इस्तेमाल किए गए करवे में जल भर लिया जाता है। शाम को माता की विधि-विधान से पूजा और कथा के बाद उन्हें फल, फूल और मिठाई भोग लगाते हैं। उसके बाद तारों को करवे से अर्घ्य देने के बाद रात में व्रत का समापन किया जाता है। मान्यता है कि अहोई माता की पूजा करके उन्हें दूध-चावल का भोग लगाना शुभ होता है।

    हमारा शौर्य

    हमारे बारे मे

    whatsapp-image-2020-06-03-at-11.08.16-pm.jpeg
     
    CHIEF EDITOR -  SHARAD PANSARI
    CONTECT NO.  -  8962936808
    EMAIL ID         -  shouryapath12@gmail.com
    Address           -  SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
    LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
    © 2015 Shouryapath. All Rights Reserved. Designed By Global Vision