July 24, 2026
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    लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / कोरोनावायरस से बचने का एकमात्र उपाय है कि सावधानी के साथ आगे कदम बढ़ाया जाए। घर के बाहर निकलने से लेकर घर आने तक हमें इस बात की जानकारी होनी जरूरी है कि हमें क्या करना है और कैसे इस वायरस निपटना है? अब धीरे-धीरे लोग अपनी सामान्य दिनचर्या की तरह कदम बढ़ा रहे हैं। ऐसे में हमारी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि अत्यधिक सावधानी बरती जाए।
    कोरोना के लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए हमें सावधान व सतर्क रहने की जरूरत है। हम में से कुछ ऐसे लोग हैं, जो अभी भी भीड़भाड़ वाले इलाकों में जाने से बच रहे हैं, वहीं कुछ लोगों ने बाहर आना-जाना शुरू कर दिया है। यदि आप भी मॉल या किसी भीड़भाड़ वाली जगह में जा रहे हैं तो आपको कुछ बातों का ख्याल रखने की जरूरत है। हम इस लेख में आपको बता रहे हैं कि यदि आप मॉल जा रहे हैं, तो आपको किन-किन बातों का विशेष ख्याल रखने की जरूरत है? आइए जानते हैं।
    मॉल जाएं तो क्या सावधानियां रखें?
    मॉल में प्रवेश करने पर हमें सबसे पहले पार्किंग मिलती है। जब आप गाड़ी पार्क करते हैं तो वहां कर्मी मौजूद होते हैं, जो कई लोगों के संपर्क में आते हैं। ऐसे में आपको ख्याल रखना है कि मास्क और ग्लव्स का उन्होंने इस्तेमाल किया हो। रखें कि बिना थर्मल स्कैनिंग के मॉल में प्रवेश नहीं करना है।
    मॉल में फिजिकल टच से बचें। बिना मास्क व ग्लव्स के प्रवेश न करें। मास्क और ग्लव्स का उपयोग आपको करना ही है, इस बात का ख्याल रखें।
    जब आप मॉल में प्रवेश करें और यदि आप कतार में लगे हैं तो आपको इस बात का ख्याल रखना है कि कतार में लगे लोगों से आपको उचित दूरी बनाए रखनी है। इस बात का ख्याल हर पल रखें।
    एस्केलेटर और लिफ्ट का इस्तेमाल भी आपको सावधानीपूर्वक करना है। जब एस्केलेटर का इस्तेमाल करें तो एक स्टेप छोड़कर आपको खड़े रहना है। ख्याल रखें कि आपने ग्लव्स पहनें हों, क्योंकि यदि आप एस्केलेटर की स्ट्रिप को टच करते हैं तो आपको ग्लव्स पहनना बहुत जरूरी हो जाता है इसलिए बिना ग्लव्स के इन्हें टच न करें।
    लिफ्ट का इस्तेमाल करते वक्त हाथों में टिशू रखें। लिफ्ट के बटन को प्रेस करते वक्त टिशू का इस्तेमाल करें फिर इसे डिस्पोज कर दें।
    लिफ्ट में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। जहां डिस्टेंसिग मार्क बने हैं, वहीं खड़े रहें।
    मॉल में टॉयलेट का इस्तेमाल करते हुए किन बातों का ख्याल रखें?
    सबसे जरूरी कि आप मॉल में टॉयलेट जाना अवॉइड ही न करें तो बेहतर है।
    यदि आप टॉयलेट का इस्तेमाल करते भी हैं तो आपको हाथों में टिशू को रखना है और इन्हीं की मदद से टॉयलेट के गेट को खोलना और बंद करना है।

    खानाखाजना / शौर्यपथ 250 ग्राम करेले, 100 ग्राम प्याज, 100 ग्राम बेसन, 150 ग्राम तेल, चुटकीभर हींग, जीरा, लाल मिर्च, सूखा हरा धनिया, हल्दी, नमक, चीनी, नींबू या सत और हरी मिर्च।
    विधि :करेले को धोकर ऊपर के छिलके साफ बर्तन में निकालें। एक भाग में चाकू से चीरा लगाकर बीज इत्यादि निकाल कर छिलके के साथ रखें तथा प्याज के टुकड़े को पीसकर एक ओर रख लें। करेले के अंदर के भाग में नमक भरकर 15 मिनट तक रखें व उन्हें धो लें।
    अब मसाला तैयार करें। फ्रायपैन में 100 ग्राम तेल डालकर मसाला भून लें। बाद में एक कटोरी में पिसी लाल मिर्च, नमक, पिसा धनिया, चीनी, नींबू, हल्दी को मिला लें तथा भूने हुए मसाले में डाल दें एवं बेसन डाल दें तथा भून लें। करेले के छिलके व बीज इत्यादि इसमें डालकर भूनकर प्लेट में ठंडा कर लें।
    अब करेले में मसाले भरें और सफेद धागा लपेट दें ताकि मसाला बाहर न निकले एवं पेन में तेल रखकर गरम करके उसमें भरे हुए करेले डालें तथा थोड़ी देर बाद उसे ढँक कर पका लें। ठंडा होने पर बँधा धागा अलग कर करेलों को हरे धनिए से सजाएँ व सर्व करें।
    जानिए करेले से होने वाले ये 8 फायदे
    हरी सब्जियों के बीच आकर्षित करने वाला करेला, स्वाद में भले ही कड़वा लगता हो, लेकिन इससे होने वाले फायदे जरूर मीठे हैं। क्या आप जानते हैं, करेले से स्वास्थ्य को होने वाले इन लाभ के बारे में। अगर नहीं जानते, तो पढि़?ए कड़वे करेले के यह फायदे - 1करेले में फास्फोरस पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। यह कफ, कब्ज और पाचन संबंधी समस्याओं को दूर करता है। इसके सेवन से भोजन का पाचन ठीक तरह से होता है, और भूख भी खुलकर लगती है।
    2अस्थमा की शि?कायत होने पर करेला बेहद फायदेमंद होता है। दमा रोग में करेले की बगैर मसाले की सब्जी खाने से लाभ मिलता है।
    3पेट में गैस बनने और अपच होने पर करेले के रस का सेवन करना अच्छा होता है, जिससे लंबे समय के लिए यह बीमारी दूर हो जाती है ।
    4करेले का जूस पीने से लीवर मजबूत होता है, और लीवर की सभी समस्याएं खत्म हो जाती है। प्रतिदिन इसके सेवन से एक सप्ताह में परिणाम प्राप्त होने लगते हैं। इससे पीलिया में भी लाभ मिलता है।
    5 करेले की पत्त?ियों या फल को पानी में उबालकर इसका सेवन करने से, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, और किसी भी प्रकार का संक्रमण हो, ठीक हो जाता है।
    6 उल्टी-दस्त या हैजा हो जाने पर करेले के रस में काला नमक मिलाकर पीने से तुरंत आराम मिलता है। जलोदर की समस्या होने पर भी दो चम्मच करेले का रस पानी में मिलाकर पीने से लाभ होता है।
    7 लकवा या पैरालिसिस में भी करेला बहुत कारगर उपाय है। इसमें कच्चा करेला खाना रोगी के लिए लाभदायक होता है।
    8 खून साफ करने के लिए भी करेला अमृत के समान है।
    मधुमेह में यह बेहद असरकारक माना जाता है। मधुमेह में एक चौथाई कप करेले का रस, उतने ही गाजर के रस के साथ पीने पर लाभ मिलता है।

    जशपुरनगर / शौर्यपथ / प्रमुख सचिव डा. आलोक शुक्ला ने बगीचा विकासखंड के पूर्व माध्यमिक शाला रौनी में संचालित मोहल्ला क्लास का अवलोकन किया। उन्होंने बच्चों के बौद्धिक क्षमता का आंकलन करते हुए विद्युत का सुचालक एवं कुचालक विज्ञान प्रयोग के साथ कक्षा अध्यापन एवं बच्चों में समझ विकसित होने के संबंध में जानकारी ली। इसी कड़ी में शासकीय प्राथमिक एवं माध्यमिक शाला दुर्गापारा में बच्चों के पठन कौषल गणितीय प्रयोग कौषल, जोड़कर खेल विधि प्रयोग की भी जानकारी ली और बच्चों के बौद्धिक क्षमता का आंकलन किया।
    इस अवसर पर बगीचा के अनुभागीय अधिकारी रोहित व्यास, शिक्षा अधिकारी एन.कुजूर. राजीव गांधी शिक्षा मिशन के जिला मिषन समन्वयक विनोद कुमार पैंकरा, संबंधित विकासखण्डों के विकास खण्ड षिक्षा अधिकारी, विकासखण्ड स्त्रोत केन्द्र समन्वयक, सकुल शैक्षिक समन्वयक षिक्षक एवं पालक उपस्थित थे।

    राजनांदगांव / शौर्यपथ / पढ़ई तुंहर दुआर योजना के अंतर्गत मोहल्ला क्लास का संचालन मोहला विकासखंड के अधिकतर स्कूलों में सफलतापूर्वक किया जा रहा है। इसी कड़ी में डूमरटोला संकुल के प्राथमिक शाला जिर्राटोला में मोहल्ला क्लास का संचालन शाला प्रमुख कृष्णा कुमार साहू द्वारा नियमित तौर पर किया जा रहा है। इस कार्य में समुदाय के साथ-साथ शिक्षा सारथी के रूप में कुमारी पूजा अमरिया, कुमारी बिन्दु कुंजाम अपनी सेवाएं दे रहे हैं। गोटाटोला जोन के मीडिया प्रभारी शेख अफजल ने बताया कि पढ़ई तुंहर दुआर के माध्यम से वर्चुअल क्लास में कुछ बच्चे मोबाइल की कमी से जुड़ नहीं पा रहे थे। ऐसे ही बच्चों को पढ़ाई से जोड़ने के लिए कृष्णा कुमार साहू और उनके साथियों ने मोहल्ला क्लास गांव के सामुदायिक भवन में आरंभ किया। जिसमें सामाजिक दूरी और कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते हुए बच्चों को नियमित पढ़ाई के साथ-साथ योग और नैतिक शिक्षा से जोड़ा जा रहा है। इसी प्रकार मोहला ब्लाक के दनगढ़ संकुल में शिक्षा सारथी एवं समुदाय के सहयोग से सभी शालाओं में मोहल्ला क्लास सफलतापूर्वक संचालित किया जा रहा है तथा बच्चे नियमित रूप से पढ़ाई कर रहे हैं। यहॉ के राजकुमार यादव और संकुल समन्वयक गजेन्द्र यादव ने बताया कि जिला नोडल अधिकारी सतीश ब्योहरे और एबीईओ राजेन्द्र देवांगन के कुशल मार्गदर्शन से बच्चों को सुचारू रूप से शिक्षा प्रदान करने के लिए ऑनलाईन क्लास के अलावा मोहल्ला क्लास एवं लाउड स्पीकर स्कूल के माध्यम से पढ़ाई की शुरुआत की गई है और वर्तमान में शिक्षा सारथियों के सहयोग से बच्चों की पढ़ाई सतत् चल रही है। संकुल अंतर्गत शिक्षा सारथी विभिन्न मोहल्ला केंद्रों में अपनी सेवा दे रहे हैं जहां पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए पढ़ाई के साथ-साथ चित्र कला, मूर्ति कला व अन्य शैक्षिक गतिविधियां कराई जा रही है। सभी शिक्षक समुदाय से जुड़कर काम कर रहे हैं तथा शाला ग्राम में जाकर बच्चों का मार्गदर्शन और सहयोग करते हैं। दनगढ़ संकुल के प्राथमिक शाला मुंजाल में लाउड स्पीकर स्कूल भी संचालित हो रही है। संकुल के दिनेश कुमार आडिल, धर्मेंद्र सिन्हा, रोशन लाल यादव, सागर सलामे, सेवंत भासगोरी, अशोक खरे, गांधी राम धुर्वे, लोकनाथ विश्वकर्मा, श्यामू राम भुआर्य, संजीत नायक, प्रमिला यादव, नंदाकदम दामले, जानकी धुर्वे, माला बंसोड़, शशि साहू, राम कुमारी कोरेटी, मोनिका धुर्वे, ऑनलाईन क्लास के अलावा मोहल्ला क्लास में नियमित रूप से सहयोग कर रहे हैं। जिर्राटोला एवं मुंजाल की प्राथमिक शालाओं में मोहल्ला क्लास की शुरुआत हो जाने से पालकों में भी बहुत प्रसन्नता व्याप्त है। पालकों का कहना है कि कोरोना के कारण बच्चों कि पढाई का बहुत नुकसान हो रहा था। लेकिन अब मोहल्ला क्लास आरंभ हो जाने से उनकी चिंता दूर हो गई है। मोहला वनांचल में सभी 16 संकुलों के अधिकतर स्कूलों के गांव में मोहल्ला और पारा स्कूल खुल जाने से बच्चों को बहुत लाभ हो रहा है और मोहल्ला क्लास को ले कर बच्चों में बहुत उत्साह है। 

    दुर्ग / शौर्यपथ/ कोविड-19 संक्रमण के चलते कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेन्द्र भुरे ने सादे समारोह में जिले के 12 उत्कृष्ट शिक्षकों का सम्मान किया। इसमें राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्राप्त करने वाली शिक्षिका सहित मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण योजना के अंतर्गत ज्ञानदीप पुरस्कार जिला स्तर पर प्राप्त करने वाले 3 व शिक्षादूत पुरस्कार विकासखण्ड स्तर प्राप्त करने वाले 9 शिक्षक शामिल हैं। कलेक्टर ने इनका प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह एवं पुरस्कार राशि इस अवसर पर भेंट की। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जेवरा सिरसा दुर्ग की व्याख्याता श्रीमती सपना सोनी को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इसी प्रकार मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण योजना के अंतर्गत जिला स्तर पर जिले के ग्राम पंचायत पीसेगांव के शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला के शिक्षक श्रीमती श्वेता दुबे, श्रीमती रूक्मणी सोरी व श्रीमती मंजू सिंह को ज्ञानदीप पुरस्कार के साथ राशि 7 हजार रूपये का चेक प्रदान कर सम्मानित किया गया। विकासखण्ड स्तर पर दुर्ग के भिलाई सेक्टर 6 के शासकीय अंग्रेजी माध्यम प्राथमिक शाला की सहायक शिक्षक श्रीमती नीता त्रिपाठी, नवीन प्रथमिक शाला केम्प 2 भिलाई के सहायक शिक्षक त्रिलोक चंद चैधरी, शाासकीय प्राथमिक शाला बोड़ेगांव के शिक्षक अश्वनी कुमार देवांगन, इसी प्रकार विकासखंड धमधा के शासकीय प्राथमिक शाला लिटिया के धनेश कुमार श्याम, शासकीय प्राथमिक शाला खर्रा के राकेश कुमार हरमुख, शासकीय प्राथमिक शाला मलपुरीखुर्द के राजू, विकासखंड पाटन के शासकीय नवीन प्राथमिक शाला केसरा (दानीपारा)के अनकेश्वर प्रसाद महिपाल, शासकीय प्राथमिक शाला खुड़मुड़ी के विरेन्द्र कुमार साहू, शासकीय नवीन प्राथमिक शाला बजरंग पारा अमलेश्वर के भगवती पटेल को शिक्षादूत पुरस्कार के साथ-साथ 5 हजार रूपए का चेक प्रदान कर सम्मानित किया गया।
    समारोह के दौरान कलेक्टर ने प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित कर बधाई देते हुए अध्यापन कार्य के प्रति निरंतरता बनाये रखने के साथ शिक्षा क्षेत्र मे नये आयाम गढऩे की शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर जिला शिक्षा अधिकारी पी.के.एस.बघेल, सहायक संचालक श्रीमती पुष्पा पुरूषोत्तम, अमित घोष, प्रशासक एमआईएस संजय गर्ग के साथ अन्य अधिकारी कर्मचारी गण उपस्थित थे।

    सेहत /शौर्यपथ / ढीला मास्क-मास्क पहनते समय ध्यान रखें कि मास्क व्यक्ति के चेहरे से चिपका हुआ होना चाहिए, ताकि ऊपर, नीचे या किसी भी दिशा से वायरस आपकी नाक और मुंह में प्रवेश न कर सकें। लेकिन कई लोग ढीला मास्क पहन रहे हैं।
    नाक के नीचे मास्क पहनना-व्यक्ति नाक से ही सांस खींचता और छोड़ता है। इसलिए मास्क पहनते समय ध्यान रखें कि आपका नाक और मुंह दोनों ढके होने चाहिए। लेकिन कई लोग सुविधा को देखते हुए मास्क को पहनते समय अपनी नाक बाहर निकाल लेते हैं, जो गलत है।
    बात करने के लिए मास्क उतारना-देखा जा रहा है कि लोग एक दूसरे से बात करते समय मास्क को चेहरे से हटा देते हैं। जो कोरोना के संक्रमण को फैलने में मदद कर सकता है। ऐसा करने से भी बचें।

    मास्क को बार-बार छूना-
    यह गलती 99 प्रतिशत लोगों को करते हुए देखा गया है। लोग मास्क पहनने के बाद थोड़ी-थोड़ी देर में उसे उतारते और पहनते रहते हैं, जो गलत आदतें हैं। ऐसा करने से आप मास्क पहनने का मकसद पूरा नहीं करते।

    मास्क की अदला-बदली
    ये गलती एक परिवार में रहने वाले सदस्यों को करते देखा जा रहा है। एक ही परिवार में रहने वाले सदस्य बाहर जाते समय एक-दूसरे से मास्क भी शेयर कर रहे हैं। जो कि गलत आदत है। याद रखें कोरोना वायरस के 50 प्रतिशत से ज्यादा मामलों में व्यक्ति में कोरोना के लक्षण नहीं दिखाई देते हैं, वो बाहर से स्वस्थ नजर आता है। ऐसे में मास्क की अदला-बदली वायरस के फैलने का कारण बन सकती है।

    सेहत / शौर्यपथ / आजकल समय से पहले लोगों के आखों की रोशनी कमजोर होने लगी है, क्योंकि बदलती लाइफ स्टाइल के साथ ही हम सभी को कुछ घंटे मोबाइल या कम्यूटर स्क्रीन के सामने रहना होता है। लेकिन यदि हम अपने खान-पान में थोड़ी ध्यान दें तो शायद इस समस्या को बढ़ने से रोका जा सकता है। जानें, उन चीजों के बारे में जिनके रोज खाने से आखों की रोशनी दुरुस्त रहती है-
    हरी सब्जियां
    अपनी डाइट में हरी पत्तेदार सब्ज‍ियों को शामिल करें। हरी पत्तेदार सब्ज‍ियों में आयरन की भरपूर मात्रा पायी जाती है, जो आंखों के लिए बहुत ही जरूरी है।
    गाजर
    गाजर का जूस पीना सेहत के लिए तो अच्छा है ही साथ ही आंखों के लिए भी बहुत फायदेमंद है। रोजाना एक गिलास गाजर का जूस पीने से आंखों पर चढ़ा चश्मा तक उतर सकता है।
    बादाम का दूध
    सप्ताह में कम से कम तीन बार बादाम का दूध पिएं। इसमें विटामिन ई होता है जो कि आंखों में किसी भी बीमारी से लड़ने के लिए फायदेमंद है।
    अंडे
    अंडे में अमीनो एसिड, प्रोटीन, सल्‍फर, लैक्‍टिन, ल्‍युटिन, सिस्‍टीन और विटामिन बी2 होता है। विटामिन बी सेल के कार्य करने में महत्‍वपूण होता है।
    मछली
    मछली में हाई प्रोटीन होता है। मछली आंखों के अलावा बालों के लिए भी बहुत अच्छी होती है।
    सोयाबीन
    आप अगर नॉन वेज नहीं खाते, तो आप सोयाबीन खा सकते हैं, यह आपकी आंखों के लिए बहुत फायदेंमंद है।

    लाइफस्टाइल /शौर्यपथ / विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस 10 सितंबर को मनाया जा रहा है। इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर सुसाइड प्रिवेंशन हर साल विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस का आयोजन करती है। आत्महत्या के बढ़ते मामलों को रोकने के लिए साल 2003 में इसे शुरू किया गया था। विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस को मनाने का उद्देश्य दुनिया भर में तेजी से बढ़ रहे आत्महत्या के मामलों को रोकना है।
    तेजी से बढ़ें हैं आत्महत्या के मामले-
    आजकल लोगों में हताशा और निराशा बढ़ रही है। बढ़ते अवसाद के कारण आत्महत्या की प्रवृत्ति भी बढ़ी है। कोरोना काल में भी डिप्रेशन के मामले तेजी से बढ़े हैं। डिप्रेशन के कारण आत्महत्या के मामलों में भी तेजी से इजाफा हुआ है। बीते कुछ सालों में भारत ही नहीं दुनिया भर में आत्महत्या के मामले तेजी से बढ़े हैं।
    हर 40 सेकेंड में एक शख्स करता है आत्महत्या-
    विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, हर 40 सेकेंड में एक व्यक्ति आत्महत्या करता है। एक साल में करीब 8 लाख लोग आत्महत्या कर लेते हैं। जबकि सुसाइड की कोशिश करने वालों का आंकड़ा इससे भी ज्यादा है।
    जानिए इस बार की थीम-
    विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस हर साल अलग-अलग थीम पर मनाया जाता है। विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस 2020 की थीम 'वॉकिंग टुगेदर टू प्रिवेंट सुसाइड' है। इसका अर्थ है कि आत्महत्या के मामलों को रोकने के लिए मिलकर आगे आना और इसे रोकने के लिए काम करना।

    खेल / शौर्यपथ / टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली और ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान स्टीव स्मिथ के बीच काफी मैदान पर कई बार कहासुनी हो चुकी है। मौजूदा समय में दुनिया के टॉप बल्लेबाजों में दोनों का ही नाम शामिल किया जाता है। 2019 वर्ल्ड कप में हालांकि इन दोनों के बीच मैदान पर ऐसा कुछ हुआ था, जिसने दुनिया में एक नई मिसाल कामय कर दी थी। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच मैच के दौरान जब स्मिथ की हूटिंग हो रही थी, तो विराट ने फैन्स को ऐसा करने से मना किया और स्मिथ के लिए ताली बजाने के लिए कहा था। इस किस्से के बाद से दोनों के बीच कड़वाहट काफी हद तक कम हुई है। स्मिथ ने इंस्टाग्राम पर सवाल-जवाब सेशन में बताया कि उनकी नजर में मौजूदा समय में बेस्ट वनडे बल्लेबाज कौन है।
    स्मिथ को बॉल टेम्परिंग मामले में एक साल का बैन झेलना पड़ा था और इस वजह से 2019 वर्ल्ड कप में उनकी हूटिंग हुई थी। स्मिथ से इंस्टाग्राम पर एक फैन ने पूछा कि दुनिया का बेस्ट वनडे बल्लेबाज कौन है? इस पर उन्होंने जवाब में कहा- 'मौजूदा समय में विराट कोहली।' विराट ऐसे बल्लेबाज हैं, जिन्होंने क्रिकेट के तीनों फॉर्मैट में 50 से ज्यादा की औसत से रन बनाए हैं। विराट 248 वनडे मैचों में 59.34 की औसत से 11867 रन बना चुके हैं, उनके खाते में 43 सेंचुरी दर्ज हैं।
    इस सेशन में एक फैन ने स्मिथ से एबी डिविलियर्स के लिए एक शब्द कहने के लिए कहा, तो उन्होंने एबीडी को 'फ्रीक' बताया। केएल राहुल को स्मिथ ने 'गन' बताया तो वहीं संजू सैमसन को 'टैलेंटेड' खिलाड़ी। इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में स्मिथ राजस्थान रॉयल्स टीम के लिए खेलते हैं और सैमसन भी इसी टीम का हिस्सा हैं। इंग्लैंड के विकेटकीपर बल्लेबाज जोस बटलर के लिए स्मिथ ने कहा, 'टैरेफिक खिलाड़ी, उम्मीद करता हूं कि वो इस सप्ताह हमारे खिलाफ वनडे सीरीज में ज्यादा रन नहीं बनाएंगे, फिर आईपीएल में जितनी मर्जी रन बना लें।' बटलर आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स टीम के लिए ही खेलते हैं और फिलहाल शानदार फॉर्म में हैं, ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तीन मैचों की टी20 सीरीज में वो मैन ऑफ द सीरीज चुने गए।

    धर्म संसार / शौर्यपथ / आश्विन मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जीवित्पुत्रिका व्रत रखा जाता है। इस साल यह व्रत 10 सितंबर (गुरुवार) को है। जीवित्पुत्रिका व्रत संतान के स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि की कामना के लिए रखा जाता है। इस दिन माताएं अपनी संतान को कष्टों से बचाने और लंबी आयु की कामना के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। जीवित्पुत्रिका व्रत को कुछ जगहों पर जितिया या जिउतिया व्रत के नाम से भी जानते हैं। इस व्रत को शुरू करने से पहले अलग-अलग जगहों पर खान-पान की अपनी-अपनी परंपरा है। जानिए किन चीजों का सेवन कर जीवित्पुत्रिका व्रत को शुरू करना मानते हैं शुभ-
    1. सनातन धर्म में पूजा-पाठ में मांसाहार का सेवन वर्जित माना गया है। लेकिन इस व्रत की शुरुआत बिहार में कई जगहों पर मछली खाकर की जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस परंपरा के पीछे जीवित्पुत्रिका व्रत की कथा में वर्णित चील और सियार का होना माना जाता है।
    2. जीवित्पुत्रिका व्रत को रखने से पहले कुछ जगहों पर महिलाएं गेहूं के आटे की रोटियां खाने की बजाए मरुआ के आटे की रोटियां खाती हैं। हालांकि इस परंपरा के पीछे का कारण ठीक से स्पष्ट नहीं है। ऐसा सदियों से होता चला आ रहा है।
    3. इस व्रत को रखने से पहले नोनी का साग खाने की भी परंपरा है। कहते हैं कि नोनी के साग में कैल्शियम और आयरन भरपूर मात्रा में होता है। जिसके कारण व्रती के शरीर को पोषक तत्वों की कमी नहीं होती है।
    4. इस व्रत के पारण के बाद महिलाएं जितिया का लाल रंग का धागा गले में पहनती हैं। व्रती महिलाएं जितिया का लॉकेट भी धारण करती हैं।
    5. पूजा के दौरान सरसों का तेल और खल चढ़ाया जाता है। व्रत पारण के बाद यह तेल बच्चों के सिर पर आशीर्वाद के तौर पर लगाते हैं।

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