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सेहत / शौर्यपथ / क्या आप टाइप-2 डायबिटीज से जूझ रहे हैं? अगर हां तो मुमकिन है कि आपका अग्नाशय 25 फीसदी तक सिकुड़ गया हो। इससे न सिर्फ आपको ब्लड शुगर नियंत्रित रखने में परेशानी होती है, बल्कि हाजमा भी बिगड़ जाता है। हालांकि, ब्रिटेन स्थित न्यूकैसल यूनिवर्सिटी के हालिया अध्ययन की मानें तो डायबिटीज रोगी वजन घटाकर सिकुड़े अग्नाशय को दोबारा सामान्य आकार में ला सकते हैं। इसके लिए उनका न सिर्फ डाइटिंग और एक्सरसाइज करना, बल्कि नींद पर भी ध्यान देना बेहद जरूरी है।
शोधकर्ताओं के मुताबिक अग्नाशय में सिकुड़न टाइप-2 डायबिटीज की बड़ी वजह है। शरीर में अत्यधिक चर्बी जमने के कारण टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित मरीजों के अग्नाशय के आकार में स्वस्थ लोगों के मुकाबले 25 फीसदी तक की कमी दर्ज की गई है। इससे उनमें इंसुलिन के उत्पादन में तो कमी आती ही है, साथ ही पाचन क्रिया को बढ़ावा देने वाले एनजाइम का स्त्राव भी घट जाता है।
खास बात यह है कि डायबिटीज रोगी अगर वजन में 10 से 15 किलो तक की कटौती करें तो उनका अग्नाशय सामान्य आकार में लौट जाता है। मोटापे पर काबू पाने के लिए उनका स्वस्थ खानपान और व्यायाम अपनाना ही काफी नहीं है। आठ घंटे की मीठी नींद लेना भी बेहद अहम है।
मुख्य शोधकर्ता प्रोफेसर रॉय टेलर कहते हैं, 2018 में हमारी टीम ने पाया था कि जो प्रतिभागी सूप और जूस से लैस डाइट लेकर दिनभर में 850 से ज्यादा कैलोरी का सेवन न करने का लक्ष्य तय करते हैं, उनके वजन में दो से तीन महीने में ही 10 से 15 किलो की कमी आती है। इससे वे धीरे-धीरे डायबिटीज को मात देने की दिशा में भी आगे बढ़ने लगते हैं।
ताजा अध्ययन में हमने देखा कि इन प्रतिभागियों के अग्नाशय में दो साल में 20 से 25 फीसदी तक की वृद्धि होती है। यानी वह सामान्य आकार में लौट आता है। इससे शरीर में इंसुलिन का उत्पादन बढ़ना और ब्लड शुगर नियंत्रित होना लाजिमी है। अध्ययन के नतीजे ‘द लांसेट डायबिटीज एंड एंडोक्राइन जर्नल’ के हालिया अंक में प्रकाशित किए गए हैं।
हफ्ते में चार बार गुनगुने पानी से नहाएं-
रात में बिस्तर पर जाने से पहले गुनगुने पानी से नहाते हैं? अगर हां तो आपकी यह आदत टाइप-2 डायबिटीज और हृदयरोगों से बचाव में खासी मददगार साबित हो सकती है। जापान स्थित कोह्नोदाई यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने 1300 प्रतिभागियों में गुनगुने पानी के स्नान का फायदा आंकने के बाद यह दावा किया है। उन्होंने पाया कि जो लोग हफ्ते में चार बार गुनगुने पानी से नहाते हैं, उनका न सिर्फ बीएमआई (वजन और कद का अनुपात), बल्कि ब्लड शुगर का स्तर और रक्तचाप भी नियंत्रित रहता है। स्ट्रेस हार्मोन के स्तर में कमी आना और फील गुड हार्मोन का स्त्राव बढ़ना इसकी मुख्य वजह है।
सेहत /शौर्यपथ / कोरोना से ठीक होने के तुरंत बाद अगर आप सामान्य दिनचर्या में लौटना चाहते हैं तो व्यायाम जैसे मेहनत वाले काम करने से पहले दिल की जांच करा लें। अमेरिकी वैज्ञानिकों ने एक शोध में पाया कि बीमारी से ठीक होने पर भी मरीजों का हृदय क्षतिग्रस्त हो जाता है, ऐसे लोग अगर जिम जाकर व्यायाम करने लगेंगे तो उनकी जान भी जा सकती है।
अरिजोना राज्य की बैनर यूनिवर्सिटी स्पोर्ट्स मेडिसिन के निदेशक डॉ. स्टीवन एरिकसन के शोधदल ने यह पता लगाया है। उनका कहना है कि बीमारी से ठीक हुए लोगों को वर्कआउट करने या किसी खेल आयोजन में भाग लेने से पहले कार्डियक स्क्रीनिंग जरूर करा लेनी चाहिए। उनका कहना है कि मरीज याद रखें कि कोरोना वायरस महज श्वसन तंत्र से जुड़ा रोग नहीं है बल्कि यह शरीर के हर अहम हिस्से को लंबे वक्त तक क्षति पहुंचाता है। इसके कारण हृदय पर चकत्ते और सूजन आ सकती है।
निगेटिव होने के 14 दिन बाद ही ट्रेनिंग करें-
शोध दल की सलाह है कि कोई भी जिम करने वाला व्यक्ति या खिलाड़ी संक्रमित होने के बाद ठीक हो जाता है तो उसे निगेटिव रिपोर्ट आने के 14 दिन बाद ही अपनी ट्रेनिंग शुरू करनी चाहिए। साथ ही वह अपने हृदय की जांच कराए और शरीर में हो रहे बदलावों पर निगाह रखे। शोधकर्ता एरिकसन कहते हैं कि अगर किसी ऐसे खिलाड़ी को जल्द ही किसी खेल आयोजन में भाग लेना है तो वह पहले किसी हृदयरोग विशेषज्ञ से अपनी जांच करा ले।
इसलिए वायरस से खराब होते दूसरे अंग-
शोधकर्ता व अरिजोना कॉलेज ऑफ मेडिसिन के प्रो. क्रिस ग्लेमबोटस्की का कहना है कि शरीर में वायरस के घुसने पर वह कई दूसरे अंगों और ऊतकों में भी प्रवेश करता है, जिससे इंफ्लेमेशन प्रतिक्रिया होने लगती है। यानी उस अंग को काम करने के लिए अपनी क्षमता से अधिक शक्ति लगानी पड़ती है जिससे उस पर बुरा असर पड़ता है।
बिना लक्षण वालों को कम खतरा-
शोधदल ने पाया कि बिना लक्षण वाले कोरोना मरीजों में हृदय क्षति की संभावना कम है। वे मरीज इस बात को लेकर ज्यादा सतर्क रहें जिनके शरीर में कोरोना के लक्षण दिख रहे थे और उन्हें वायरस ने कम से कम तीन दिन तक चपेट में लिया। ऐसे लोगों विशेषकर जिम जाने वालों और खिलाड़ियों को अपनी ट्रेनिंग शुरू करने से पहले दिन की जांच करा लेनी चाहिए।
ये जांच कराएं-
वैज्ञानिकों ने ऐसे लोगों को इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम और खून की जांच कराने की सलाह दी है। पहली जांच के जरिए हृदय में इलेक्ट्रिकल सिग्नल मापते हैं। वहीं, रक्त जांच से ट्रॉपोनिन प्रोटीन की मात्रा पता की जाती है जो कि सामान्यत: हृदय की मांसपेशियों में रहता है पर हृदय में क्षति होने पर इसका रिसाव खून में होने लगता है।
संक्रमित खिलाड़ियों को हुई दिल की बीमारी -
प्रतिष्ठित जामा जर्नल में छपे शोध में दावा किया गया कि संक्रमण से ठीक होकर खेल प्रतिस्पर्धा में भाग लेने वाले 15% एथलीटों में मायकार्डिटिस के लक्षण दिखाई दिए। यह हृदय की मांसपेशियों से जुड़ा रोग है, जिसमें अचानक हार्टफेल के कारण मौत हो सकती है। ओहियो राज्य विश्वविद्यालय ने शोध में पाया कि 26 महिला व पुरुष एथलीटों में से चार के शरीर में इस बीमारी के लक्षण दिखे।
शौर्यपथ / अखरोट का नाम सबसे पसंदीदा ड्राई फ्रूट्स में लिया जाता है। सेहत से जुड़े फायदों के साथ स्किन केयर के लिए भी अखरोट बेहद फायदेमंद है। आप अगर चेहरे पर नेचुरल ग्लो पाने के लिए महंगे प्रॉडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं, तो आप इन्हें छोड़कर अखरोट को स्किन केयर रूटीन में शामिल कर सकते हैं।आइए, जानते हैं अखरोट के फायदे-
फेसपैक बनाकर करें इस्तेमाल
एक चम्मच अखरोट का पाउडर, एक चम्मच ओलिव ऑयल, दो चम्मच गुलाब जल व आधा चम्मच शहद मिलाकर पेस्ट बना लें।
इस पैक को अपने चेहरे पर 15 मिनट के लिए लगाकर छोड़ दें।
फिर सूखने पर पानी से मुंह धो लें।
बेहतर परिणाम के लिए आप यह फेसपैक सप्ताह में दो से तीन बार लगा सकते हैं।
डार्क सर्कल के लिए
अखरोट का तेल आपकी आंखों के नीचे आई सूजन को दूर करता है और डार्क सर्कल कम करने में मदद करता है।
आप थोड़ा-सा अखरोट का तेल लें। तेल को गुनगुना करके इसे आंखों के नीचे काले घेरे वाले भाग पर लगाकर सो जाएं। फिर सुबह सामान्य तरीके से चेहरा धो लें। आप इस प्रक्रिया को रोज रात को तब तक दोहराएं, जब तक असर दिखना न शुरू हो जाए।
आंखों ने नीचे की सिलवटों को दूर करें
आप नींबू का रस, शहद, ओटमील और अखरोट का पाउडर एक साथ मिलाकर पेस्ट बना लें।
इस पेस्ट को आंखों के नीचे लगाएं और 15-20 मिनट के लिए छोड़ दें।
फिर पानी से धो लें।
इस प्रक्रिया को आप सप्ताह में तीन से चार बार दोहरा सकते हैं।
धर्म संसार / शौर्यपथ वैदिक धर्म ग्रन्थों के अनुसार वासुदेव द्वादशी व्रत पर्व द्वारकाधीश भगवान श्री कृष्?ण के नाम से प्रसिद्ध है। यह वासुदेव द्वादशी व्रत पर्व चतुर मास के शुरुआत आषाढ़ के महीने में देवसयानी एकादशी के एक दिन बाद बड़े ही धूम-धाम से मनाई जाती है। इस दिन श्रीकृष्?ण के साथ भगवान विष्?णु और माता लक्ष्?मी की पूजा की जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार जो भी भक्त इस अदभुत वासुदेव द्वादशी पर्व को अषाढ़, श्रावण, भाद्रपद और अश्विन मास में वासुदेव द्वादशी की विधि विधान से पूजा करता है उसे मोक्ष की प्राप्?ति होती है। यह व्रत आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वादशी पर मनाना विशेष फलदायी माना जाता है। इसमें देवता वासुदेव की पूजा, और वासुदेव के विभिन्न नामों एवं उनके व्यूहों के साथ पाद से सिर तक के सभी अंगों का पूजन होता है।
नारद मुनि द्वारा कथा का वृतांत :- धर्म ग्रन्थों व वैदिक ब्राह्मणों के आधार पर वासुदेव द्वादशी के दिन वासुदेव की पूजन का विधान इस तरह से है की उस दिन किसी जलपात्र वासुदेव भगवान की प्रतिमा रखकर रक्त व पीत वस्त्रों से ढककर वासुदेव की स्वर्णिम प्रतिमा का पूजन किया जाता है तथा साथ ही उस दिन दान करने का विशेष विधान है । इस व्रत का विधान नारद मुनि द्वारा वसुदेव एवं देवकी को बताया गया था कि जो भक्त इस व्रत को विधि विधान से रखता है तो उनके सारे पाप कट जाते हैं। उसे पुत्र की प्राप्ति होती है या नष्ट हुआ राज्य पुन: मिल जाता है।
इस प्रकार से इस व्रत का पालन वसुदेव और देवकी ने रखा और उनको हर प्रकर से मुक्ति व खोया हुआ राज्य प्राप्त हुआ इस व्रत का नियम सुबह सबसे पहले नहाने के बाद साफ कपड़े पहनने चाहिये। और पूरे दिन निराहार व्रत रहना होता। भगवान को आप हाथ के पंखे, लैंप के साथ फल फूल चढ़ाने चाहिये। भगवान विष्?णू की पंचामृत से पूजा करनी चाहिये। उन्?हें भोग लगाना चाहिये। इस दिन विष्?णु सहस्?त्रनाम का जाप करने से आप की हर समस्?या का समाधान होगा। और भक्त सदैव सुख पूर्वक सम्पन्न व अपनी सभी मनोकामनां को सुख पूर्वक जीता है
धर्म संसार / शौर्यपथ / हिंदू पंचांग में हर माह आने वाली आठवीं तिथि को अष्टमी कहा जाता है। यह तिथि मास में दो बार आती है। एक बार पूर्णिमा के बाद और दूसरी बार अमावस्या के बाद यह तिथि आती है। पूर्णिमा के बाद आने वाली अष्टमी को कृष्ण पक्ष की अष्टमी और अमावस्या के बाद आने वाली अष्टमी को शुक्ल पक्ष की अष्टमी कहा जाता है। इस तिथि पर मां दुर्गा की उपासना की जाती है। इस दिन मां दुर्गा का व्रत, पूजन करने से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। सुख, समृद्धि, संपन्नता की प्राप्ति होती है। अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन दुर्गा चालीसा का पाठ अवश्य करें।
हिंदू पंचांग की आठवीं तिथि अष्टमी का विशेष नाम कलावती है। इस तिथि में कई तरह की कलाएं और विधाएं सीखना लाभकारी होता है। मान्यता है कि इस तिथि में अभिनय, नृत्य, गायन आदि कला सीखने के लिए प्रवेश लेना शुभ होता है। यह तिथि चंद्रमा की आठवीं कला है। अष्टमी तिथि के स्वामी भगवान शिव माने गए हैं लेकिन अष्टमी तिथि मां दुर्गा की शक्ति के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। शुक्ल पक्ष की अष्टमी में भगवान शिव का पूजन करना वर्जित है, लेकिन कृष्ण पक्ष की अष्टमी में भगवान शिव का पूजन करना उत्तम माना गया है। किसी भी पक्ष की अष्टमी तिथि में नारियल का सेवन नहीं करना चाहिए। इस पावन तिथि पर लाल फूल, लाल चंदन, दीया, धूप आदि से विधि-विधान से मां की उपासना करें। इस दिन तामसिक भोजन का सेवन न करें। भोग विलासिता से दूर रहें। रात्रि में जमीन पर शयन करें।
सेहत / शौर्यपथ चिपचिपाती गर्मी और उमस भरे मौसम में एक गिलास ठंडी छाछ का मिल जाए तो पूरे शरीर में ठंडक पड़ जाती है। लेकिन कैसा हो, अगर आपको पता चले कि आपकी पसंदीदा छाछ न सिर्फ स्वाद में टेस्टी है बल्कि आपकी इम्युनिटी और आपके मोटापे का भी ध्यान रखेगी। जी हां ऐसी ही एक छाछ का नाम है- खीरे की छाछ। खीरा शरीर में डिटॉक्सिफिकेशन को बढ़ावा देने के साथ कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने, इम्युनिटी बढ़ाने, रक्तचाप को कंट्रोल करने के साथ मोटापा घटाने में भी मदद करता है। तो देर किस बात की आइए जानते हैं कैसे बनाई जाती है ये कूल-कूल कुकुम्बर मसाला छाछ।
कुकुम्बर मसाला छाछ बनाने के लिए सामग्री-
-1 कप दही
-आधा कप कद्दूकस किया हुआ खीरा
-2 चम्मच पुदीने की पत्तियां
-1 चम्मच मोटा पिसा हुआ भुना जीरा
-आधा चम्मच लाल मिर्च पाउडर
-काला नमक, स्वादानुसार
-ताजी कटी हरी धनिया, गार्निश करने के लिए
कुकुम्बर मसाला छाछ बनाने का आसान तरीका-
कुकुम्बर मसाला छाछ बनाने के लिए सबसे पहले एक ब्लेंडिंग जार में दही और कसा हुआ खीरा और पुदीने की पत्तियां डालकर एकसाथ अच्छे से ब्लेंड कर लें। इस मिश्रण को जूस जैसा बनाने के लिए अगर आवश्यकता हो तो पानी मिला सकते हैं। अब इस मिश्रण को एक ग्लास जग में डालकर इसमें जीरा , लाल मिर्च पाउडर और काला नमक डालकर एक साथ मिला दें। अब इस पेय को धनिया पत्ती से गार्निश करके सर्व करें।
खाना खाजाना / शौर्यपथ / कोकोनट राइस एक साउथ इंडियन लंच या डिनर में बनाई जाने वाली रेसिपी है। इस रेसिपी को आमतौर पर नारियल के तेल में बनाया जाता है। कोकोनट राइस खास पोंगल और ओणम के अवसर बनाए जाते हैं। इस रेसिपी की खासियत यह है कि ये खाने में टेस्टी होने के साथ फैट बर्न के लिए भी अच्छी मानी जाती है। जिन लोगों को कम समय में ज्यादा वजन घटाने की इच्छा है, उनके लिए यह केटो डाइट सबसे अच्छा ऑप्शन हो सकती है। तो देर किस बात की आइए जानते हैं दक्षिण भारतीय स्वाद के पिटारों में से निकाली हुई रेसिपी- कोकोनट फ्राइड राइस कैसे बनाए जाते हैं।
कोकोनट राइस रेसिपी बनाने के लिए सामग्री-
-कद्दूकस की हुई गोभी- 4 कप
-कद्दूकस की हुई नारियल- 2 कप
-नारियल का तेल- 2 बड़ा चम्मच
-करी पत्ते- 6-8
-सरसों और जीरा- 1-1 चम्मच
-उड़द और चना दाल- 1 बड़ा चम्मच
-मूंगफली- 2 बड़े चम्मच
-साबुत लाल मिर्च- 1
-हरी मिर्च- 2
-नमक- स्वादानुसार
-नीबू का रस- स्वादानुसार
कोकोनट राइस रेसिपी बनाने का आसान तरीका-
कोकोनट राइस रेसिपी बनाने के लिए सबसे पहले कद्दूकस की हुई गोभी को तब तक सुखा लें जब तक उसकी नमी पूरी तरह खत्म न हो जाए। अब मूंगफली को भूनकर अलग रख लें। अब एक पैन में तेल गर्म करके उसमें लाल मिर्च, सरसों, जीरा , चना और उड़द दाल डालकर हल्का भूरा- होने तक भूनें।
अब पैन में करी पत्ता,हरी मिर्च डालकर आधा मिनट और भूनें। इसके बाद मूंगफली, भुनी हुई गोभी, नमक, नींबू का रस डालकर सभी चीजें एक साथ भून लें। आखिर में चावल में कसा हुआ नारियल डालकर सभी चीजों को एक साथ मिलाकर चला लें। आपके कोकोनट राइस बनकर तैयार हैं।
धर्म संसार /शौर्यपथ /त्रेता युग में हैहय वंश में कृतवीर्य नाम के राजा महिष्मतिपुरी में राज्य करते थे। इनकी एक हजार पत्नियां थीं किन्तु सन्तान कोई नहीं थी, जो राज्य संभाल सके। देवताओं, पितरों व साधुओं के निर्देशानुसार विभिन्न व्रतों के अनुष्ठान करने से भी उन्हें पुत्र की प्राप्ति नहीं हुई। तब राजा ने तपस्या करने का निश्चय किया। वे अपने मंत्री को सम्पूर्ण राज्य-भार देकर, राजसी वेष त्याग कर तपस्या करने चले गए। महाराज के साथ उनकी बड़ी रानी, जो की इक्ष्वाकुवंश में उत्पन्न महाराज हरिश्चन्द्र की कन्या पद्मिनी थी ने भी उनका अनुसरण किया। उन दोनों ने मन्दराचल पर्वत पर जाकर दस हज़ार वर्ष तक घनघोर तपस्या की।
तपस्या करने से महाराज का शरीर एकदम कमज़ोर हो गया। इधर महारानी पद्मिनी ने महासाध्वी अनुसूयाजी से विनीत होकर पूछा कि हे साध्वी! मेरे पति ने दस हज़ार वर्ष तक तपस्या की परन्तु फिर भी सर्व-दु:ख विनाशकारी भगवान केशवदेव अब तक प्रसन्न नहीं हुए। आप कृपा करके मुझे किसी ऐसे व्रत का उपदेश दीजिए कि जिसके पालन करने से भगवान श्रीहरि प्रसन्न हो जाएं एवं हमें राजचक्रवर्ती की तरह कीर्तिमान श्रेष्ठ पुत्र की प्राप्ति हो सके। पतिपरायणा साध्वी अनुसूया, रानी पद्मिनी की प्रार्थना सुनकर बड़ी प्रसन्न हुईं एवं रानी से बोलीं – 32 महीने बाद एक बार अधिक मास आता है। इस महीने में पद्मिनी एवं परमा नाम की दो एकादशियां आती हैं, इन एकादशियों के व्रत का पालन करने पर पुत्रदाता भगवान बहुत शीघ्र प्रसन्न होते हैं। अनुसूया देवी जी के कथनानुसार रानी पद्मिनी ने विधिपूर्वक एकादशी व्रत का पालन किया। तब भगवान केशवदेव गरुड़ पर स्वार होकर रानी के समीप आए और उन्होंने रानी से वरदान मांगने के लिए कहा। रानी ने बड़ी श्रद्धा से भगवान की स्तुति-वन्दना की तथा पतिदेव की अभिलाषा पूर्ण करने के लिए निवेदन किया। भगवान ने कहा- हे भद्रे! मैं तुम पर अति प्रसन्न हूं।
अधिक मास को मेरे नाम पर ही पुरुषोत्त्म मास कहते हैं। इस पवित्र महीने के समान अन्य कोई महीना मेरा प्रिय नहीं है। इस महीने की एकादशी भी मुझे अत्यन्त प्रिय है। आप लोगों ने इस व्रत का सही विधि-विधान से पालन किया है। अत: आपके पतिदेव को उनका अभिलषित वरदान अवश्य दूंगा। राजा को इच्छानुसार वरदान देकर भगवान अन्तर्हित हो गए। कालान्तर में उसी रानी के गर्भ से महाराज कृतवीर्य का पुत्र कार्तवीर्यार्जुन का जन्म हुआ। तीनों लोकों में कार्तवीर्यार्जुन के समान कोई बलवान नहीं था। इसी कार्तवीर्यार्जुन ने रावण को युद्ध में पराजित कर बन्दी बना लिया था।
कमला एकादशी (पद्मिनी एकादशी) व्रत वाले दिन क्या करे
वरुण मंत्र को जपकर पवित्र तीर्थों के अभाव में उनका स्मरण करते हुए किसी तालाब में स्नान करना चाहिए ।
अधिक मास की शुक्लपक्ष की 'पद्मिनी एकादशीÓ का व्रत निर्जल करना चाहिए ।
यदि मनुष्य में निर्जल रहने की शक्ति न हो तो उसे जल पान या अल्पाहार से व्रत करना चाहिए ।
इस दिन ब्रम्हचर्य का पालन करते हुए भूमि पर सोना चाहिए।
स्नान करने के पश्चात् स्वच्छ और सुन्दर वस्त्र धारण करके संध्या, तर्पण करके मंदिर में जाकर भगवान की धूप, दीप, नैवेघ, पुष्प, केसर आदि से पूजा करनी चाहिए ।
इस व्रत को करने के लिए दशमी के दिन कांसे के बर्तन में भोजन करना चाहिए और नमक नहीं खाना चाहिए।
प्रति पहर मनुष्य को भगवान या महादेवजी की पूजा करनी चाहिए ।
इसके पश्चात सफेद वस्त्र धारण करके भगवान विष्णु का पूजन-अर्चन करें और कथा का पाठ करें।भक्तजनों के साथ भगवान के सामने पुराण की कथा सुने ।
रात्रि में जागरण करके नाच और गान करके भगवान का स्मरण करते रहना चाहिए ।
पहले पहर में भगवान को नारियल, दूसरे में बिल्वफल, तीसरे में सीताफल और चौथे में सुपारी, नारंगी अर्पण करना चाहिए ।
इस तरह से सूर्योदय तक जागरण करना चाहिए और स्नान करके ब्राह्मणों को भोजन करना चाहिए ।
स्नान में तिल, मिट्टी, कुश व आंवले के चुर्ण भी शामिल करें।
धर्म संसार / शौर्यपथ / देश के अलग-अलग भागों में स्थित भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग में से सबसे खास है श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग। यह ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में क्षिप्रा नदी के निकट रुद्र सरोवर के तट पर स्थित है। बारह ज्योतिर्लिंगों में इनकी गणना तीसरे स्थान पर आती है, किंतु प्रभाव की दृष्टि से इसका प्रथम स्थान है, क्योंकि इनकी पूजा-आराधना, अभिषेक आदि का प्रभाव कुछ ही मिनटों में प्रत्यक्ष दिखाई देने लगता है।
सृष्टि में तीन महाकाल ज्योतिर्लिंग हैं-आकाशे तारकं लिंग पाताले हाटकेश्वरम्। मृत्युलोके महाकालं लिंगत्रय नमोस्तुते ।। अर्थात्- श्रीमहाकाल आकाश में स्वयं तारक ज्योतिर्लिंग के रूप में, पाताल लोक में हाटकेश्वर ज्योतिर्लिंग के रूप में तथा पृथ्वी पर श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग विद्यमान हैं। पृथ्वी पर ये दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग के रूप में विद्यमान हैं। इसीलिए तांत्रिक साधक भी इनकी पूजा-अर्चना करते रहते हैं। इन्हें अवंतिका (उज्जैयिनी) का महाराजा कहा जाता है, इसलिए रात्रि में कोई भी राज्य अध्यक्ष अथवा राष्ट्र अध्यक्ष यहां नहीं ठहरता।
यहीं पर इनका सम्पूर्ण परिवार तथा अनेकों शिवगण प्रत्यक्ष रूप में विराजमान रहकर महाकाल की सेवा में तत्पर रहते हैं। कहा जाता है कि यहां पर किए गए रुद्राभिषेक तथा पंचाक्षर मंत्र ‘ॐ नम: शिवाय’ का जप जीवात्माओं को सभी कष्टों से मुक्ति प्रदान करके मोक्ष प्राप्ति कराता है। महाकाल की प्रथम आरती चिताभस्म से होती है, जो भस्म आरती के नाम से प्रसिद्ध है। इस आरती का इतना महत्व है कि इसमें सम्मिलित होने के लिए शिवभक्त मध्यरात्रि से ही पंक्ति में लग जाते हैं। महाकाल ज्योतिर्लिंग के साथ-साथ यहां अन्य और भी कई तीर्थस्थल हैं-
हरिसिद्धी शक्तिपीठ: यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है। मान्यता है कि इस स्थान पर देवी सती की कोहनी गिरी थी। यहां सम्राट विक्रमादित्य के समय से ही अखंड ज्योति जल रही है। रोजाना 1001 दीयों को प्रज्वलित करके मां की आरती होती है।
नागतीर्थ: महाकाल ज्योतिर्लिंग के ठीक ऊपर ही नागतीर्थ मंदिर है, जो सिर्फ नागपंचमी के दिन ही जनदर्शन के लिए खुलता है।
भैरव तीर्थ: यहां ‘काल-भैरव’ का सबसे चमत्कारी मंदिर भी है। चिंताहरण गणेश, भर्तृहरि गुफा, ऋण मुक्तेश्वर व गढ़कालिका आदि साधकों के तांत्रिक स्थान भी हैं।
शौर्यपथ / सूर्य सौरमंडल का आधार है। सभी ग्रह सूर्य की परिक्रमा करते हैं। सूर्य के कारण पृथ्वी पर जीवन है और दिन रात होते हैं। सूर्य अग्नि तत्व और क्रूर स्वभाव का ग्रह पुर्लिंग की श्रेणी में आता है। इसकी राशि सिंह है और मेष राशि में उच्च होते हैं। यह कृतिका, उत्तराफाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा नक्षत्रों का स्वामी है। सूर्य की स्वराशि सिंह है, उच्च राशि मेष है और नीच राशि तुला है। सूर्य की महादशा छह वर्ष की होती है। मेष,वृषभ, सिंह, धनु और कुंभ लग्नों में सूर्य कारक और शुभ होता है। सूर्य की मित्र राशियां कर्क, वृश्चिक और मीन है और शत्रु राशियां वृष,तुला और कुंभ है। सूर्य जिस स्थान पर होता है उस भाव से सप्तम भाव को पूर्ण दृष्टि से देखता है। सूर्य सिंह राशि के 20 अंश तक मूल त्रिकोण में रहता है।
सूर्य की प्रकृति स्वस्थ,वर्ण क्षत्रिय और रस कटु होता है। सूर्य का व्यक्ति के सिर और मुख पर आधिपत्य होता है। काल पुरुष के अनुसार सूर्य आत्म कारक ग्रह होता है। शुक्र,शनि, राहु, सूर्य के शत्रु ग्रह हैं। बुध सम है। चंद्र ,मंगल, गुरु मित्र हैं। सूर्य के देव शिव हैं और उनका गोत्र कश्यप है। सूर्य आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य और अश्लेषा नक्षत्र में बलवान होता है। सूर्य प्रशासनिक सेवाओं का कारक होता है यह व्यक्ति को नेतृत्व क्षमता प्रदान करता है।
जिनकी कुंडली में सूर्य अशुभ होता या नीच का होता है तो वह व्यक्ति अपने पिता से दूरी बना लेता है क्योंकि कुंडली में सूर्य पिता का कारक होता है। पिता को प्रसन्न करने से सूर्य प्रसन्न हो जाते हैं। सूर्य कन्या की कुंडली में पृथक्कारी ग्रह होता है। यदि सूर्य सप्तम भाव में हो या सप्तम दृष्टि हो और सप्तम भाव पर कोई शुभ प्रभाव न हो तो द्विविवाह योग बनाता है। सूर्य यदि अपनी उच्च राशि मेष को सप्तम दृष्टि से देखें तो उससे भाव की हानि करता है। अष्टम में सूर्य या अष्टमेश होने पर सूर्य को दोष नहीं लगता है। अष्टम में सूर्य या अष्टमेश सूर्य होने से व्यक्ति के अंदर रिसर्च की भावना होती है। वह शोध कार्य में रुचि रखता है। पैतृक सम्पत्ति या अचानक धन लाभ के योग बनते हैं। यदि आपकी कुंडली में सूर्य का अशुभ प्रभाव पड़ रहा है तो आप को नियमित रूप से गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए। तांबे के लोटे से सूर्य को प्रात:काल जल प्रदान करना चाहिए। पिता एवं पिता तुल्य व्यक्तियों की सेवा सम्मान करना चाहिए। माणिक्य सूर्य का रत्न है। कमजोर सूर्य को पुष्ट करने के लिए माणिक्य रत्न को भी धारण किया जा सकता है।
जीवनशैली / शौर्यपथ / जीवन में स्थिरता लाने के लिए मानसिक शांति और संतुष्टि आवश्यक है। मन अगर अशांत रहता है तो हर कदम पर परेशानियों से सामना हो सकता है। हमारे घर या कार्यक्षेत्र में मौजूद वास्तु दोष भी मानसिक तनाव को बढ़ाते हैं। वास्तु में कुछ आसान से उपाय बताए गए जो मानसिक शांति प्राप्त करने में सहायक हो सकते हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
मानसिक शांति पाने के लिए कभी भी अपना घर किसी एकांत जगह पर न बनवाएं। घर हमेशा आबादी में होना चाहिए। घर को हमेशा स्वच्छ रखें। घर में परिजनों से धीमी आवाज में और प्रेमपूर्वक बात करें। घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर ऊं और स्वास्तिक का चिह्न बनाएं। सुबह और शाम घर या कार्यक्षेत्र में अगरबत्ती जलाएं। प्रतिदिन गायत्री मंत्र का जाप करें। सुबह उठकर घर के बुजुर्गों के पैर छुएं। रचनात्मक कार्यों में रुचि बढ़ाएं। भूख से कम खाना खाएं। परिवारिक समस्याओं को लेकर मन अशांत रहता है तो कच्चे दूध को कुल्लड़ में लें और शहद मिलाकर उसे घर, मुख्य द्वार पर छिड़क दें। घर में कभी भी मकड़ी का जाला न बनने दें। इससे मानसिक तनाव बढ़ता है। रसोईघर को हमेशा स्वच्छ रखें। घर के किसी कोने में अंधेरा न रहने दें। सोने से पहले अपने बिस्तर की सफाई करें और स्वच्छ चादर बिछाएं। शयनकक्ष में कभी भी पैर दरवाजे की ओर कर न सोएं। सोते वक्त बेड के नीचे या इसके सिरहाने जूते-चप्पल नहीं होने चाहिए। शयनकक्ष में झाड़ू, अंगीठी, नशीले पदार्थ नहीं रखना चाहिए।
सेहत / शौर्यपथ / अक्सर हेल्दी फूड का सेवन हम यह सोचकर किसी भी समय कर लेते हैं कि यह तो सेहत के लिए अच्छा ही होगा। लेकिन क्या आप जानते हैं सही खाने का सेवन गलत समय पर करने से आपकी सेहत को फायदा नहीं नुकसान होता है। आइए जानते हैं ऐसे 5 हेल्दी फूड जिनका गलत समय पर सेवन करने से सेहत को होता है भारी नुकसान।
खाली पेट केला-
केला आपकी सेहत और खूबसूरती दोनों का ध्यान रखता है। बावजूद इसके खाली पेट केले का सेवन करना आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। खाली पेट केला खाने से शरीर की ऊर्जा खत्म होने के साथ व्यक्ति इंटेस्टाइनल सिंड्रोम और दस्त जैसी परेशानी का सामना कर सकता है। अगर आप केले का सेवन ब्रेकफास्ट में करना चाहते हैं तो उसका शेक बनाकर पिएं।
रात को चावल खाना -
चावल में कार्बहाइड्रेट की मात्रा अधिक होने की वजह से यह पचने में लंबा समय लेते हैं। इसके अलावा इसमें मौजूद हाई कैलोरी आपके बढ़ाते वजन का कारण भी बन सकती है।
ज्यादा गर्म दूध का सेवन-
दूध में मौजूद लैक्टोज की अधिक मात्रा उम्र बढ़ने के साथ इसके पचान में दिक्कत पैदा करती है। हल्के गर्म दूध का सेवन शाम को करने से रात को नींद अच्छी आती है।
खाने से पहले दही का सेवन-
दही में मौजूद लैक्टिक एसिड खाली पेट आपको नुकसान पहुंचा सकता है। यह आपके पेट की अम्लता को कम कर देता है। दही का सेवन रात के भोजन के बाद और सोने से एक घंटे पहले करने से शरीर में प्रोटीन की मात्रा बढ़ती है और मांसपेशियों का विकास होता है।
रात के भोजन में डबल चीज फूड-
टोस्ट हो या पिज्जा चीज के बिना दोनों का ही स्वाद अधूरा है। पर क्या आप जानते हैं गलत समय पर चीज का सेवन आपके पेट को नुकसान पहुंचा सकता है। चीज में फैट की मात्रा अधिक होने की वजह से इसे पचाना आसन नहीं होता। यही वजह है कि चीज का सेवन रात या शाम को करने से बचना चाहिए।
शौर्यपथ / ऑयली स्किन वाले लोग जानते हैं कि वो हर ब्यूटी प्रॉडक्ट आंख बंद करके इस्तेमाल नहीं कर सकते क्योंकि घरेलू हो या बाजार के ब्यूटी ट्रिक्स उन्हें लगभग सारी ही चीजें फायदे की जगह साइडइफेक्ट्स दे देती हैं। ऐसे में कुछ भी इस्तेमाल करने से पहले वो काफी सोच-विचार करते हैं। आपकी या आपके किसी दोस्त की भी ऑयली यानी तैलीय त्वचा है, तो आप इन घरेलू फैसपैक को उन्हें सजेस्ट कर सकते हैं, जिससे कि उनके चेहरे पर नेचुरल निखार आ सके और वो भी बिना साइड इफेक्ट्स के-
मुल्तानी मिट्टी फैसपैक
मुल्तानी मिट्टी ऐसी चीज है जिसे आप बस पानी या गुलाब जल के साथ भी घोलकर हर दिन चेहरे पर लगाएं, तो फेस पर तेल आने की समस्या दूर होने लग जाएगी। वैसे इस पैक के असर को और बढ़ाना चाहते हैं तो इसमें नींबू का रस और दही मिलाया जा सकता है। आप इस फैसपैक को गर्मियों में इस्तेमाल करेगी, तो इसका असर ज्यादा होगा।
खीरे का फैसपैक
खीरे को कद्दूकस कर लें और उसमें एक टी-स्पून नींबू का रस मिलाएं। इस मिक्स को फ्रिज में रख दें और ठंडा हो जाने पर स्किन पर लगाएं। चाहे तो आप इसे आइस ट्रे में डालकर जमा सकती हैं और फिर क्यूब्ज से चेहरे की मसाज कर सकती हैं। ये दोनों तरीके आपको ऑयली स्किन से छुटकारा दिलाने के साथ ही पोर्स के साइज को भी छोटा करने में मदद करेंगे।
नीम फैसपैक
आपको नीम की पत्तियां धोकर पीस लेनी है, इसके बाद इसमें नीबू का रस मिला लें। आप इसे रोजाना न लगाएं बल्कि हफ्ते में तीन से चार बार लगा सकते हैं। इससे आपके चेहरे पर जितने भी दाग-धब्बे हैं, वो दूर हो जाएंगे। साथ ही दिनों-दिन आपका चेहरा निखरता जाएगा।
मसूर दाल फैसपैक
दो चम्मच मसूर की दाल का पाउडर लें और उसमें एक चम्मच दही व गुलाब जल मिलाएं। इस पैक को अच्छे से मिक्स करने के बाद चेहरे पर लगाएं। यह न सिर्फ ऑयली स्किन की समस्या को दूर करेगा बल्कि स्किन भी ज्यादा सॉफ्ट बन जाएगी।
सेहत / शौर्यपथ /कोरोनाकाल में घर से लेकर ऑफिस तक के काम का दबाव बढ़ गया है। ऐसे में रात में बच्चों को सुलाने में मशक्कत करनी पड़े तो मन में खीज पैदा होना लाजिमी है। अगर काफी देर तक घुमाने-टहलाने और लोरी सुनाने के बाद भी आपके लाडले की आंखों में नींद नहीं भरती तो परेशान मत होइए। लंदन के मशहूर मसाज विशेषज्ञ फिलिप डेविस ने मालिश की ऐसी विधि सुझाई है, जिससे आपका बच्चा मिनटों में नींद के आगोश में चला जाएगा।
मां-बाप की मशक्कत-
-मां-बाप को बच्चे के जन्म के शुरुआती एक साल में 04 घंटे 44 मिनट की औसत नींद मिलती है
-50 रातों की नींद गंवाने के बराबर है यह आंकड़ा, स्वस्थ वयस्कों को आठ घंटे रोजाना सोना चाहिए
-54 मिनट औसतन रोजाना बच्चे को सुलाने में लगते हैं, तीन बार औसतन रात में उठता है बच्चा
-02 मील रोजाना चलना-फिरना होता है मां-बाप का बच्चे को बहलाने, फुसलाने, सुलाने की प्रक्रिया में
पूरे शरीर में लगाएं तेल-
-सरसों, नारियल या जैतून का तेल लें, सिर से लेकर पांव तक हल्के हाथों से हर एक अंग में लगाएं
-अब ऊपर से नीचे की तरफ धीमी गति से हाथ फिराते हुए 10 से 15 मिनट तक बच्चे की मालिश करें
बातों में उलझाए रखें-
-मसाज करते समय चेहरे पर मुस्कराहट जरूर बनाए रखें
-बच्चे से धीमे स्वर और तुतलाती भाषा में प्यार-भरी बातें करें
-तेज मालिश करने से बचें, बच्चा रोए तो उस पर चिल्लाएं नहीं
खास जगहों पर मसाज जरूरी-
-नाक का ऊपरी हिस्सा : दोनों भौहों के बीच नाक के शुरुआती हिस्से पर अंगूठे और तर्जनी उंगली से हल्की मालिश करें। बच्चे का मन शांत करने में मदद मिलती है।
-हथेली : दोनों हथेलियों पर धीमे-धीमे से हाथ फिराएं। पांचों उंगलियों के बीच के स्थान पर कम से कम 30 सेकेंड तक हल्की मसाज दें। दांत दर्द की समस्या दूर होगी।
-पेट : दर्द, गैस, कब्ज की समस्या से राहत दिलाने और पाचन तंत्र को मजबूत बनाने के लिए पेट पर बाईं से दाईं ओर गोलाई में हल्के हाथ से पांच मिनट तक मसाज करें।
-पंजे : अंत में बच्चे के दोनों पैरों के पंजे अपने हाथों में लें। अब पंजे के बीच के हिस्से को अंगुठे से 10 से 15 सेकेंड के लिए दबाएं। उसका मस्तिष्क पूरी तरह से शांत हो जाएगा।
मन शांत करने में मददगार-
-हल्के हाथों की मालिश लव हार्मोन ‘ऑक्सिटोसिन’ का स्तर बढ़ाने के साथ ही स्ट्रेस हार्मोन ‘कॉर्टिसोल’ का उत्पादन घटाने में कारगर
-इससे बच्चे के मस्तिष्क में मौजूद अतिरिक्त ऊर्जा के शांत पड़ने से तन-मन को सुकून महसूस होता है, शरीर में सुस्ती भी छाती है
गुनगुना दूध पिलाना भी फायदेमंद-
-सोने-जगने का समय तय करें, उसे रोज अमल में भी लाएं
-रात में बिस्तर पर आने के बाद बच्चे को गुनगुना दूध पिलाएं
-कमरा हल्का ठंडा रखें, मुलायम गद्दे पर सुलाएं, लोरी सुनाएं
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
